RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 17 पाजेब (कहानी)

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Detailed Chapter 17 पाजेब (कहानी) RBSE Solutions for Class 12 Hindi

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Class 12 Hindi Chapter 17 पाजेब (कहानी) RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 पाजेब (कहानी) (निबंध)

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. जैनेन्द्र किस प्रकार के कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं
(क) मनोवैज्ञानिक कथाकार।
(ख) आँचलिक कथाकार
(ग) प्रगतिवादी कथाकार
(ग) ऐतिहासिक कथाकार
Answer: (क) मनोवैज्ञानिक कथाकार।
In simple words: जैनेन्द्र कुमार अपनी कहानियों में लोगों के मन और भावनाओं को गहराई से समझने के लिए जाने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जब भी लेखक के बारे में पूछा जाए, उनकी लेखन शैली और मुख्य विषयों को पहचानें, जैसे मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेन्द्र कुमार के लिए।

 

Question 3. आशुतोष को उसकी बुआ ने जन्मदिन पर क्या देने का वादा किया?
(क) पतंग
(ख) बाईसिकल
(ग) पाजेब
(घ) मिठाई
Answer: (ख) बाईसिकल
In simple words: आशुतोष की बुआ ने उसे जन्मदिन पर एक साइकिल देने का वादा किया था।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य किरदारों और उनसे जुड़े वादों को याद रखना जरूरी है।

 

Question 4. 'पाजेब' कहानी किस शैली में लिखी गई है
(क) डायरी शैली
(ख) आत्मकथात्मक शैली
(ग) व्यास शैली
(घ) व्यंग्य शैली
Answer: (ख) आत्मकथात्मक शैली
In simple words: 'पाजेब' कहानी में लेखक अपनी ही कहानी बता रहा है, जैसे कोई अपनी डायरी लिख रहा हो।

🎯 Exam Tip: कहानी की शैली को पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वह लेखक के अनुभवों पर आधारित हो।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. श्रीमती जी पाजेब चुराने का संदेह किस पर करती हैं ?
Answer: श्रीमती जी को संदेह होता है कि पाजेब नौकर बंसी ने चुराई है।
In simple words: श्रीमती जी को लगता है कि उनके घर के नौकर बंसी ने पाजेब चुराई है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों के उत्तर में मुख्य पात्र और उसके संदेह का कारण स्पष्ट करें।

 

Question 2. छुन्नू की माँ छुन्नू को क्यों पीटती है?
Answer: आशुतोष ने जोर देकर कहा कि उसने पायल छुन्नू को दी थी। यह सुनकर छुन्नू की माँ ने उसे पीटा।
In simple words: आशुतोष ने बताया कि उसने पायल छुन्नू को दी थी, जिससे छुन्नू की माँ को गुस्सा आया और उसने छुन्नू को पीटा।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संवाद और उनके परिणामों को ध्यान से समझें।

 

Question 4. पूछताछ में आशुतोष ने पाजेब किसको बेचने की बात स्वीकार की?
Answer: पूछने पर आशुतोष ने पाजेब पतंग वाले को बेचने की बात स्वीकार की।
In simple words: जब आशुतोष से पूछा गया, तो उसने मान लिया कि उसने पाजेब पतंग बेचने वाले को बेच दी है।

🎯 Exam Tip: कहानी में छोटे बच्चों के जवाब अक्सर दबाव में आकर बदल जाते हैं, इस पर ध्यान दें।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आशुतोष निरपराध होते हुए भी पाजेब चुराने बात को क्यों स्वीकार कर लेता है?
Answer: आशुतोष ने पायल नहीं चुराई थी, फिर भी वह इसे चुराना मान लेता है। वह एक छोटा बच्चा है, जिसकी समझ अभी कम है। वह अपनी बात सही ढंग से नहीं बता पाता। पिता के प्यार, डर और इनाम के लालच के कारण वह वही कह देता है जो उसके पिता उससे कहलवाना चाहते हैं। वह मजबूती से नहीं कह पाता कि उसने चोरी नहीं की है।
In simple words: आशुतोष बच्चा था, इसलिए वह अपने पिता के डर और दबाव में आकर चोरी की बात मान लेता है, भले ही उसने कुछ न किया हो।

🎯 Exam Tip: बच्चों के मनोविज्ञान को समझने वाले प्रश्नों में उनके स्वभाव, डर और मासूमियत पर जोर दें।

 

Question 2. लेखक ने आशुतोष को कोठरी में क्यों बंद कर दिया?
Answer: लेखक चाहता था कि आशुतोष पतंग वाले के पास जाकर उससे पाजेब वापस ले आए। हालांकि आशुतोष ने पतंग वाले को पाजेब देने की बात मान ली थी, पर लेखक जानता था कि पाजेब उसके पास नहीं है। उसे डर था कि आशुतोष अपनी बात नहीं मानेगा, इसलिए उसने उसे कोठरी में बंद कर दिया ताकि डरकर वह उसकी बात मान ले।
In simple words: लेखक ने आशुतोष को कोठरी में बंद कर दिया ताकि वह डरकर पतंग वाले से पाजेब वापस लाने के लिए तैयार हो जाए, भले ही पाजेब उसके पास न हो।

🎯 Exam Tip: पात्रों के व्यवहार के पीछे की भावनाओं और उनकी सोच को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. बातों-बातों में लेखक को क्या पता लगा जिससे वह आशुतोष पर पायल चुराने का संदेह करने लगता है?
Answer: बातों-बातों में लेखक को पता चला कि उस शाम आशुतोष एक नई पतंग और डोर का पिन्ना लेकर आया था। यह जानकर लेखक को संदेह हुआ कि आशुतोष ने ही पायल चुराई होगी और उसे पतंग वाले को दे दिया होगा।
In simple words: लेखक को पता चला कि आशुतोष ने नई पतंग खरीदी है, तो उसे शक हुआ कि उसने पायल चुराकर पतंग वाले को दे दी होगी।

🎯 Exam Tip: कहानी में घटनाओं के क्रम और पात्रों के संदेह के कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 4. पाजेब कैसे मिलती है? पाजेब पर लेखक की प्रतिक्रिया को व्यक्त कीजिए।
Answer: जब बुआ घर आईं, तो उन्होंने अपनी वास्कट की जेब से पायल निकाली और बताया कि पिछले दिन गलती से वह उनके साथ चली गई थी। पाजेब को देखकर लेखक इतने डर गए जैसे वह पायल नहीं बल्कि कोई बिच्छू हो। उनके मुँह से अचानक "यह क्या?" निकला।
In simple words: बुआ को पाजेब मिली क्योंकि वह गलती से उनके साथ चली गई थी। इसे देखकर लेखक बहुत हैरान और डरे हुए थे।

🎯 Exam Tip: कहानी के अंत में रहस्य कैसे सुलझता है और पात्रों की अंतिम प्रतिक्रिया क्या होती है, इसे बताएं।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 निबंधात्मक प्रश्न

 

कहानी में संवाद और कथानक
कहानी को मजेदार बनाने के लिए बातचीत बहुत जरूरी और उपयोगी होती है। जैनेन्द्र कुमार की 'पाजेब' कहानी में संवादों का खास महत्व है। कहानी को आगे बढ़ाने के लिए लेखक ने खुद कम कहा है और पात्रों से ज्यादा बातें कहलवाई हैं। ये बातचीतें ज्यादातर छोटी होती हैं। कुछ लंबी बातचीतें भी हैं, पर वे बहुत ज्यादा लंबी नहीं होतीं और उनकी संख्या भी कम है। ये छोटी-छोटी बातचीतें लेखक (आशुतोष के पिता) और आशुतोष के बीच हुई हैं, जो कहानी की भावना को समझने में भी मदद करती हैं।
"अच्छा तुमने कहाँ से उठाई थी?” 'पड़ी मिली थी ?” “और फिर नीचे जाकर वह तुमने छुन्नू को दिखाई?” “हाँ।" "फिर उसी ने कहा कि इसे बेचेंगे?” हाँ!” “कहाँ बेचने को कहा?” आदि। 'पाजेब' कहानी में पाजेब बहुत खास है। कहानी पाजेब से ही शुरू होती है और पूरी कहानी का ताना-बाना इसी से बुना गया है। अंत भी पाजेब से ही होता है। कहानी की शुरुआत की कुछ बातचीतें इस काम में मदद करती हैं। इनमें बातें छोटी, दिलचस्प और नाटकीय हैं। हमारी मुन्नी ने भी कहा कि बाबू जी, हम पाजेब पहनेंगे। भला चार साल की उम्र में पाजेब पहनेगी। मैंने पूछा कैसी पाजेब ? बोली कि हाँ, वही जैसी रुक्मिन पहनती है, शीला पहनती है। मैंने कहा अच्छा-अच्छा। बोली कि मैं तो आज ही मँगवा लूंगी। पूरी कहानी में जिस पायल को ढूंढा जा रहा है, वह अंत में बुआ की वास्कट की जेब से निकलती है। उसे देखकर डरे हुए लेखक के मुँह से "क्या" शब्द ही निकलते हैं। संवाद मजेदार हैं। लेखक और उसकी पत्नी के बीच हुई बातचीत में उनके प्यार और मजाक का चित्रण हुआ है। श्रीमती जी ने हमसे कहा कि क्यों जी, अच्छी तो लगती है, मैं भी एक बनवा लूँ? मैंने कहा क्यों न बनवाओ ! तुम क्या चार साल की नहीं हो। इस तरह हम देखते हैं कि पाजेब कहानी के संवाद मजेदार, स्वाभाविक, मजबूत, नाटकीय और छोटे हैं।
In simple words: कहानी में बातचीत बहुत महत्वपूर्ण है और छोटी-छोटी है। यह कहानी को आगे बढ़ाती है और किरदारों की भावनाओं को समझने में मदद करती है। पाजेब पूरी कहानी का मुख्य बिंदु है।

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में कहानी की संरचना, पात्रों के संवादों की भूमिका और मुख्य वस्तु के महत्व को विस्तार से समझाएं।

 

Question 2. 'पाजेब' कहानी कलात्मक दृष्टि से सफल है। अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: जैनेन्द्र कुमार की 'पाजेब' कहानी कलात्मक रूप से बहुत सफल है। लेखक ने इस कहानी में बाल-मनोविज्ञान को बहुत अच्छे से दिखाया है। मुन्नी की पाजेब खो जाती है, और उसका दोषी आशुतोष को माना जाता है। पिता के बार-बार पूछने और दबाव डालने पर वह बेकसूर होते हुए भी पायल चुराने का आरोप मान लेता है। बच्चे मासूम होते हैं, वे बहस करना नहीं जानते। प्यार, डर और लालच के कारण आशुतोष भी अपनी बात ठीक से नहीं बता पाता। अंत में जब बुआ आती हैं, तो पता चलता है कि पायल गलती से उनके साथ चली गई थी। तब आशुतोष निर्दोष साबित होता है। जैनेन्द्र जी की कहानी का कथानक बहुत व्यवस्थित है और उसका विकास नियमों के अनुसार हुआ है। इसमें पायल वह चीज है जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। कहानी की शुरुआत और अंत पाजेब से ही होता है। शुरुआत से धीरे-धीरे कहानी आगे बढ़ती है और अपने सबसे ऊंचे बिंदु पर पहुँचकर खत्म हो जाती है।
'पाजेब' में मुख्य किरदार आशुतोष है। उसका चरित्र-चित्रण मनोविज्ञान के हिसाब से सही है। अन्य किरदारों में उसके पिता, माता, छुन्नू की माँ, बंसी और प्रकाश आदि हैं। सभी किरदारों का चित्रण अच्छे से हुआ है। कहानी की बातचीत छोटी, जीवंत और नाटकीय है। वे पात्रों के स्वभाव और कहानी के कथानक के अनुसार हैं। 'पाजेब' एक मकसद वाली कहानी है। कहानीकार यह बताना चाहते हैं कि बच्चे कोमल बुद्धि के होते हैं। वे बहस करना नहीं जानते। वे झूठ बोलना और गलतियाँ छिपाना भी नहीं जानते। अगर वे कोई गलती करते हैं, तो उसके लिए घर-परिवार के लोग और कुछ पारिवारिक हालात जिम्मेदार होते हैं।
In simple words: 'पाजेब' कहानी बाल-मनोविज्ञान को अच्छे से दिखाती है। आशुतोष को बेकसूर होते हुए भी पाजेब चोरी का आरोप मानना पड़ता है। कहानी का कथानक व्यवस्थित है और अंत में पाजेब मिलने पर आशुतोष निर्दोष साबित होता है।

🎯 Exam Tip: कहानी की कलात्मकता को समझाते समय, कथानक, चरित्र-चित्रण, शैली और मुख्य संदेश का उल्लेख करें।

 

Question 3. 'पाजेब' कहानी के पात्रों का परिचय दीजिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी का मुख्य पात्र आशुतोष है। वह आठ साल का बच्चा है और उस पर पाजेब चुराने का शक होता है। उसकी छोटी बहन मुन्नी चार साल की है। वह पायल देखकर बहुत खुश होती है। पाजेब गुम होने पर उसके बारे में पूछ-ताछ करने वाले आशुतोष के पिता हैं। पाजेब की चोरी के लिए नौकर बंसी पर शक करने वाली और पाजेब के गायब होने की खबर अपने पति (लेखक) को देने वाली आशुतोष की माँ हैं।
In simple words: आशुतोष, मुन्नी, पिता, और माँ 'पाजेब' कहानी के मुख्य किरदार हैं। आशुतोष पर चोरी का शक होता है, मुन्नी पायल पसंद करती है, पिता पूछताछ करते हैं और माँ बंसी पर शक करती हैं।

🎯 Exam Tip: पात्रों का परिचय देते समय, उनके नाम, उम्र, और कहानी में उनकी मुख्य भूमिका को संक्षेप में बताएं।

 

बाल-मनोविज्ञान का चित्रण
कहानीकार जैनेन्द्र कुमार ने बाल-मनोविज्ञान को आधार बनाकर 'पाजेब' शीर्षक कहानी लिखी है। इस कहानी का मुख्य पात्र आशुतोष है। वह आठ साल का बच्चा है। उस पर पाजेब चोरी का बिना कारण संदेह किया जाता है। उसने चोरी नहीं की है, फिर भी उसे यह बात मानवाने के लिए तीखे सवाल पूछे जाते हैं। उसे डराया-धमकाया जाता है, लालच दिया जाता है और प्यार से फुसलाया जाता है। आखिर में वह मान लेता है कि उसने पाजेब ली थी।
कहानीकार यह बताना चाहते हैं कि बच्चे कोमल दिमाग के होते हैं। वे मुश्किल सवालों का सामना नहीं कर पाते। वे डरकर, लालच में पड़कर और प्यार से प्रभावित होकर दूसरों की बातें मान लेते हैं। आशुतोष ने न पाजेब ली, न छुन्नू को दी और न पतंग वाले को बेची, लेकिन पिता के सवालों में उलझकर वह अपनी बात साफ नहीं बता पाता और उसे अपराधी मान लिया जाता है। बुआ के आने और उनके पास पाजेब मिलने पर ही वह निर्दोष साबित होता है। लेखक कहना चाहता है कि बच्चों के साथ मदद और प्यार से पेश आना चाहिए। उनका मन बहुत नाजुक होता है। कहानी में आशुतोष और मुन्नी के चरित्रों से बच्चों के मनोविज्ञान का सफल परिचय मिलता है। यही 'पाजेब' कहानी का उद्देश्य है।
In simple words: यह कहानी बच्चों के मनोविज्ञान को दिखाती है कि कैसे मासूम बच्चे दबाव में गलत बात भी मान लेते हैं। हमें बच्चों के साथ प्यार और समझदारी से पेश आना चाहिए।

🎯 Exam Tip: बच्चों के मनोविज्ञान पर आधारित कहानियों में उनके स्वभाव, डर और मासूमियत के साथ वयस्कों के व्यवहार के प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

Question 4. 'पाजेब' कहानी की मूल संवेदना पर अपने विचार प्रगट कीजिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी में कहानीकार यह सच्चाई बताते हैं कि बच्चों का कोमल दिमाग मुश्किल और उलझे हुए सवालों का सामना नहीं कर पाता। बच्चे स्वभाव से मासूम होते हैं। वे सच नहीं छुपाते और उनमें अपना अपराध छिपाने की समझदारी भी नहीं होती। उनकी भावनाओं और सोचने के तरीके को जाल में फंसाकर सच्चाई का पता लगाना सही तरीका नहीं है। इससे वे झूठ को भी सच मान लेते हैं और सब कुछ गलत हो जाता है। आशुतोष अपराधी नहीं है, फिर भी उसे अपराधी मान लिया जाता है। 'पाजेब' कहानी का मुख्य पात्र आशुतोष आठ साल का बच्चा है। मुन्नी की पायल गुम होने पर उस पर पायल चोरी का संदेह किया जाता है, फिर उससे इस तरह बात की जाती है कि उसे चोरी माननी पड़ती है, जबकि उसने कुछ नहीं किया। 'पाजेब' कहानी में कहानीकार यह बताना चाहते हैं कि बच्चों को केवल शक के आधार पर दोषी नहीं मानना चाहिए। इसके लिए पुख्ता सबूत ढूंढने चाहिए। यह बच्चों के साथ अन्याय है और ऐसा व्यवहार उन्हें गलत राह पर धकेल सकता है। इस कहानी का मुख्य संदेश यही है कि हमें बच्चों के साथ प्यार और नरमी से पेश आना चाहिए।
In simple words: कहानी का मुख्य संदेश यह है कि बच्चों कोमल होते हैं और दबाव में आकर वे अनजाने में गलतियाँ मान लेते हैं। हमें बच्चों के साथ हमेशा प्यार और नरमी से पेश आना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कहानी की मूल संवेदना या संदेश बताते समय, कहानी के मुख्य पात्रों और घटनाओं के माध्यम से लेखक के विचारों को विस्तार से समझाएं।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. आशुतोष की बहन का नाम है -
(क) मुन्नी
(ख) शीला
(ग) रुक्मिन
(घ) चुन्नी
Answer: (क) मुन्नी
In simple words: आशुतोष की बहन का नाम मुन्नी है।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों और उनके रिश्तों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. रुक्मिन को पाजेब किसने कब दी?
(क) चाचा ने सोमवार को
(ख) पिता ने बुधवार को
(ग) बुआ ने इतवार को
(घ) माता ने गुरुवार को
Answer: (ग) बुआ ने इतवार को
In simple words: रुक्मिन को पाजेब उसकी बुआ ने इतवार को दी थी।

🎯 Exam Tip: कहानी में घटनाओं के समय और किसने क्या दिया, यह याद रखें।

 

Question 3. आशुतोष बाबू ने कहा- हम तो अभी लेंगे'- से प्रगट होने वाला भाव है
(क) निवेदन
(ख) हठ
(ग) धमकी
(घ) आग्रह
Answer: (ख) हठ
In simple words: आशुतोष का यह कहना कि 'हम तो अभी लेंगे' यह दिखाता है कि वह किसी बात पर अड़ा हुआ है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के संवादों से उनके स्वभाव और भावनाओं का पता चलता है, इसे समझें।

 

Question 4. मैंने कहा कि क्यों न बनवाओ! तुम कौन चार बरस की नहीं हो।” उपर्युक्त संवाद में निहित है
(क) लेखक की पत्नी की पाजेब पहनने की इच्छा
(ख) लेखक से पाजेब बनवाने की अनुमति माँगना
(ग) लेखक का मना करना
(घ) दाम्पत्य जीवन का मधुर हास्य-विनोद
Answer: (घ) दाम्पत्य जीवन का मधुर हास्य-विनोद
In simple words: यह बात पति-पत्नी के बीच प्यार और हल्की-फुल्की हंसी-मजाक को दिखाती है।

🎯 Exam Tip: संवादों के गहरे अर्थ और पात्रों के रिश्तों की भावनाओं को समझने का प्रयास करें।

 

Question 5. "मैंने कसकर उसे दो चाँटे दिए।” लेखक ने चाँटे किसको मारे?
(क) नौकर बंसी को
(ख) पुत्र आशुतोष को
(ग) पतंग वाले को
(घ) छुन्नू को।
Answer: (ख) पुत्र आशुतोष को
In simple words: लेखक ने चाँटे अपने बेटे आशुतोष को मारे।

🎯 Exam Tip: कहानी में हुई मुख्य घटनाओं और उनमें शामिल पात्रों को याद रखें।

 

Question 6. “चलकर वह इस कमरे में कैसे आ जाएगी”- में 'वह' सर्वनाम किस संज्ञा के लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) बुआ
(ख) शीला
(ग) मुन्नी
(घ) पाजेब
Answer: (घ) पाजेब
In simple words: यहाँ 'वह' शब्द पाजेब के लिए इस्तेमाल किया गया है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम किसके लिए उपयोग किया गया है, यह पहचानने के लिए वाक्य के संदर्भ को ध्यान से देखें।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'पाजेब' कहानी की रचना का क्या उद्देश्य है?
Answer: 'पाजेब' कहानी की रचना का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मनोविज्ञान को समझाना और दिखाना है।
In simple words: इस कहानी का मकसद यह बताना है कि बच्चे कैसे सोचते और महसूस करते हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी के उद्देश्य को बताते समय, मुख्य विषय और लेखक के संदेश पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 3. आशुतोष ने चोरी न करने पर भी चोरी करना क्यों स्वीकार किया?
Answer: आशुतोष ने चोरी न करने पर भी अपने पिता के मुश्किल और तीखे सवालों से घबराकर चोरी करना स्वीकार कर लिया। हालांकि, वह चोर नहीं था।
In simple words: आशुतोष अपने पिता के सवालों से डर गया और चोरी मान ली, जबकि उसने चोरी नहीं की थी।

🎯 Exam Tip: बच्चे अक्सर दबाव में आकर गलती मान लेते हैं, भले ही उन्होंने वह न की हो, इस बात पर जोर दें।

 

Question 4. आशुतोष निरपराध कब सिद्ध हुआ?
Answer: आशुतोष की बुआ ने जब बताया कि पाजेब पिछले दिन गलती से उनके साथ चली गई थी, तब आशुतोष निर्दोष साबित हुआ।
In simple words: जब बुआ ने बताया कि पाजेब उनके पास थी, तब आशुतोष को बेकसूर माना गया।

🎯 Exam Tip: कहानी के निर्णायक मोड़ को स्पष्ट करें जहां सच्चाई सामने आती है।

 

Question 5. बालकों की बुद्धि कैसी होती है?
Answer: बच्चों की बुद्धि कोमल होती है और वे तर्क-वितर्क नहीं कर पाते।
In simple words: बच्चों का दिमाग सरल होता है और वे ज्यादा तर्क नहीं कर पाते।

🎯 Exam Tip: बच्चों के मनोविज्ञान पर आधारित प्रश्नों में उनकी मानसिक क्षमताओं का सही वर्णन करें।

 

Question 6. वह कौन-सी वस्तु है जिसका उल्लेख में आरम्भ से अंत तक मिलता है?
Answer: 'पाजेब' कहानी में शुरुआत से अंत तक पाजेब का ही जिक्र मिलता है।
In simple words: पूरी कहानी में पाजेब ही वह चीज है जिसके बारे में बार-बार बात की जाती है।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य विषय वस्तु को पहचानना और उसका महत्व बताना जरूरी है।

 

Question 7. पाजेब चुराने का संदेह श्रीमती जी को नौकर बंसी पर क्यों था?
Answer: श्रीमती जी को नौकर बंसी पर पाजेब चुराने का संदेह इसलिए था, क्योंकि जब उन्होंने पाजेब संभालकर बक्से में रखी थी, तब नौकर बंसी वहीं मौजूद था।
In simple words: श्रीमती जी को लगा बंसी ने पाजेब चुराई, क्योंकि वह पाजेब रखते समय वहीं था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के संदेह के पीछे के ठोस कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 8. 'पड़ोस की स्त्रियों में पवन पड़ने वाली”- का क्या तात्पर्य है?
Answer: इसका मतलब यह है कि पायल चोरी की बात पड़ोस की सभी स्त्रियों को भी पता चल गई।
In simple words: 'पवन पड़ने वाली' का मतलब है कि खबर सब जगह फैल गई।

🎯 Exam Tip: मुहावरे और वाक्यांशों के अर्थ को कहानी के संदर्भ में समझाएं।

 

Question 9. लेखक ने प्रकाश से क्यों कहा कि तुमसे कोई काम नहीं हो सकता?
Answer: प्रकाश ने बताया कि पतंग वालों के पास पायल नहीं है, तो लेखक को लगा कि उसने ठीक से पता नहीं किया।
In simple words: लेखक को लगा कि प्रकाश ने ठीक से खोज नहीं की, इसलिए उसने कहा कि प्रकाश से कोई काम नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संवादों और उनके पीछे की भावना को व्यक्त करें।

 

Question 11. मुहल्ले की राजनीति का भार किन पर होता है?
Answer: मुहल्ले की राजनीति का भार स्त्रियों पर होता है।
In simple words: मुहल्ले की बातें और झगड़े आमतौर पर औरतें संभालती हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक संदर्भों से जुड़े प्रश्नों में समाज के विभिन्न पहलुओं को पहचानें।

 

Question 12. मैं भयभीत भाव से कह उठा कि यह क्या?' से लेखक की मन:स्थिति के बारे में क्या पता चलता है?
Answer: इससे पता चलता है कि अचानक पायल को सामने देखकर लेखक बहुत डर गया। पायल उसे किसी बिच्छू की तरह भयानक लगी।
In simple words: लेखक पाजेब को देखकर बहुत डर गया, जैसे उसने कोई खतरनाक चीज देख ली हो।

🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं को उनके शब्दों और व्यवहार से जोड़कर समझाएं।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'पाजेब' को आप बाल मनोविज्ञान पर आधारित कहानी कैसे कह सकते हैं? समझाकर लिखिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी को हम बाल-मनोविज्ञान पर आधारित कह सकते हैं। इसमें मुन्नी और उसका भाई आशुतोष मुख्य पात्र हैं। दोनों बच्चे हैं। मुन्नी चार साल की और आशुतोष आठ साल का है। कहानी में बच्चों के स्वभाव का अच्छा चित्रण हुआ है। लेखक ने बताया है कि बच्चों की बुद्धि कोमल होती है और वे तर्क नहीं कर पाते। आशुतोष अपने पिता के प्यार, लालच और डर के कारण प्रभावित होकर उनकी बातों में हाँ में हाँ मिला देता है और निर्दोष होते हुए भी पायल की चोरी मान लेता है।
In simple words: यह कहानी बच्चों के मन को समझाती है, कैसे आशुतोष जैसा बच्चा दबाव में आकर गलती मान लेता है, भले ही उसने कुछ न किया हो।

🎯 Exam Tip: बाल मनोविज्ञान पर आधारित कहानी के विश्लेषण में बच्चों के व्यवहार, मासूमियत और वयस्कों के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 2. 'पाजेब' कहानी का शीर्षक कैसा है? उसकी विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी का शीर्षक पूरी तरह से सही है। इस कहानी में पाजेब ही वह मुख्य वस्तु है जिसका जिक्र शुरुआत से अंत तक मिलता है। कहानी की पूरी कहानी पाजेब के इर्द-गिर्द बुनी गई है। मुन्नी की पाजेब की चाहत से कहानी शुरू होती है। आशुतोष पर पाजेब चोरी का आरोप लगता है। अंत में बुआ के पास पाजेब मिलने पर ही वह इस आरोप से मुक्त हो पाता है। कहानी का शीर्षक 'पाजेब' आकर्षक, जिज्ञासा पैदा करने वाला, कहानी की मुख्य वस्तु और पात्रों के स्वभाव को बताने वाला है।
In simple words: 'पाजेब' शीर्षक सही है क्योंकि यह पूरी कहानी का केंद्र है, जो इसे दिलचस्प और पात्रों के स्वभाव से जोड़ता है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक की सार्थकता बताते समय, कहानी की मुख्य वस्तु, कथानक और पात्रों के साथ उसके संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 3. 'पाजेब' कहानी के पात्रों का परिचय दीजिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी का मुख्य पात्र आशुतोष है। वह आठ साल का बच्चा है और उस पर पाजेब चुराने का शक किया जाता है। उसकी छोटी बहन मुन्नी चार साल की है। वह पायल देखकर बहुत आकर्षित होती है। पाजेब गुम होने पर उसके बारे में पूछ-ताछ करने वाले आशुतोष के पिता हैं। पाजेब की चोरी का संदेह नौकर बंसी पर करने वाली और पाजेब गायब होने की खबर अपने पति (लेखक) को देने वाली आशुतोष की माँ हैं।
In simple words: आशुतोष कहानी का मुख्य पात्र है, मुन्नी उसकी बहन है, और माता-पिता भी कहानी के महत्वपूर्ण किरदार हैं।

🎯 Exam Tip: पात्र परिचय में प्रत्येक पात्र की कहानी में भूमिका और उनके मुख्य स्वभाव को संक्षेप में बताएं।

 

Question 5. 'पाजेब' कहानी के संवादों की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी में संवादों का बड़ा महत्व है। इसके संवादों की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. 'पाजेब' कहानी के संवाद छोटे, प्रभावशाली और दिल को छूने वाले हैं। संवाद नाटकीय और आकर्षक हैं।
2. कहानीकार ने संवादों की मदद से कहानी को बहुत अच्छे से आगे बढ़ाया है।
In simple words: 'पाजेब' कहानी में संवाद छोटे और प्रभावशाली हैं, जो कहानी को दिलचस्प बनाते हैं और उसे आगे बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी के संवादों की विशेषताओं को बताते समय, उनकी संक्षिप्तता, प्रभाव और नाटकीयता पर जोर दें।

 

Question 6. 'पाजेब' कहानी की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. 'पाजेब' कहानी बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि बच्चों की बुद्धि कोमल होती है और उनके साथ प्यार भरा व्यवहार होना चाहिए।
2. 'पाजेब' की कहानी की वस्तु बहुत स्पष्ट है और उसके पात्रों का चरित्र-चित्रण कहानी के अनुसार है। 'पाजेब' एक मकसद वाली कहानी है।
In simple words: यह कहानी बच्चों के मन को समझाती है और दिखाती है कि कैसे उन्हें प्यार से समझना चाहिए। इसकी कहानी व्यवस्थित है और सभी किरदार कहानी से जुड़े हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उसके मुख्य विषय, मनोविज्ञान, कथानक और पात्रों के चित्रण पर ध्यान दें।

 

Question 7. पाजेब' कहानी के मुख्य पात्र आशुतोष के चरित्र की दो विशेषताएँ लिखिए?
Answer: आशुतोष आठ साल का एक बच्चा है। वह 'पाजेब' कहानी का मुख्य पात्र है। उसके चरित्र की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. आशुतोष कोमल बुद्धि वाला और सरल मन का बच्चा है। कम उम्र के कारण उसमें तर्क-शक्ति का विकास नहीं हुआ है।
2. आशुतोष ने पायल नहीं चुराई है, फिर भी अपने पिता के तीखे सवालों से खुद का बचाव करने में वह असमर्थ है। चोर न होते हुए भी वह चोरी करना मान लेता है।
In simple words: आशुतोष एक मासूम बच्चा है जिसमें तर्क शक्ति कम है। वह अपनी बेकसूरी साबित नहीं कर पाता और चोरी मान लेता है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र की विशेषताएँ बताते समय, उनके स्वभाव, उम्र और कहानी में उनके व्यवहार पर केंद्रित रहें।

 

Question 9. यदि आप लेखक के स्थान पर होते तो खोई हुए पाजेब का पता किस तरह लगाते?
Answer: यदि मैं लेखक की जगह होता तो खोई हुई पाजेब का पता लगाने के लिए सबसे पहले बिना किसी ठोस सबूत के आशुतोष को चोर नहीं मानता। मैं यह देखता कि उसके पास पाजेब बेचने से मिले पैसे हैं या नहीं? मैं उसकी गतिविधियों पर नजर रखता और पतंग वाले से खुद पूछता। मैं उससे वकील की तरह बहस न करके उसके कामों पर ध्यान देकर पायल का पता लगाता।
In simple words: अगर मैं लेखक होता, तो पहले आशुतोष को चोर नहीं मानता, बल्कि सबूत ढूंढता, उसकी हरकतों पर नजर रखता और पतंग वाले से पूछता।

🎯 Exam Tip: ऐसे कल्पना आधारित प्रश्नों में अपनी सोच को तर्कसंगत और कहानी के मुख्य संदेश के अनुरूप प्रस्तुत करें।

 

Question 10. 'पाजेब' कहानी के अंत में यदि बुआ आकर पाजेब के बारे में न बताती तो आशुतोष का क्या होता? कल्पना पर आधारित उत्तर दीजिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी का अंत बुआ के आने और यह बताने पर होता है कि पिछले दिन पाजेब गलती से उनके साथ चली गई थी। यदि बुआ न आती और यह बात न बताती तो आशुतोष को चोरी के आरोप से छुटकारा न मिलता। हो सकता है, उसे और ज्यादा सजा मिलती। आशुतोष को यह घटना अपराध की दुनिया में धकेल सकती थी और वह छोटी-मोटी चोरियाँ कर सकता था। ज्यादा सख्ती से पूछने पर वह पड़ोसियों और बाकी लोगों से भी दूर हो सकता था।
In simple words: अगर बुआ नहीं बताती तो आशुतोष को चोर माना जाता, उसे और सजा मिलती और शायद वह गलत रास्ते पर चला जाता।

🎯 Exam Tip: कहानी के मोड़ को समझें और बताएं कि एक छोटी सी घटना का पात्र के जीवन पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है।

 

Question 11. पाजेब पाकर मुन्नी की को कैसा लगा? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: इतवार को बुआ आईं और मुन्नी को पाजेब दी! पाजेब पाकर मुन्नी बहुत खुश हुई। पहनकर वह खुशी के मारे इधर-उधर उछलने लगी। वह रुक्मिन के पास गई और उसे अपनी पाजेब दिखाई, फिर शीला के पास जाकर उसको भी पाजेब दिखाई। सबने उसे पाजेब पहने देखकर उसकी तारीफ की और प्यार किया। अपने पैरों में चाँदी की पाजेब देखकर मुन्नी की खुशी का ठिकाना न था।
In simple words: पाजेब पाकर मुन्नी बहुत खुश हुई। उसने सब को अपनी पाजेब दिखाई और उसे खूब तारीफ मिली।

🎯 Exam Tip: बच्चों की भावनाओं को उनके स्वाभाविक रूप में व्यक्त करें, खासकर जब उन्हें कोई मनपसंद चीज मिलती है।

 

Question 12. बाइसिकल के बारे में बुआ और आशुतोष के बीच हुई बातचीत को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: जब मुन्नी को पाजेब मिलीं तो आशुतोष भी बाइसिकल लेने पर अड़ गया। तब बुआ ने उसको समझाया कि उसके जन्मदिन पर उसे बाइसिकल मिलेगी। उसने कहा हम तो अभी लेंगे। बुआ ने कहा तुम कोई लड़की हो? लड़कियाँ रोती हैं और जिद करती हैं। लड़के ऐसा नहीं करते। तब आशुतोष ने कहा कि वह अपने जन्मदिन पर बाइसिकल जरूर लेगा। बुआ ने उसको आश्वासन दिया तब वह शांत हुआ।
In simple words: मुन्नी को पाजेब मिलने पर आशुतोष ने बुआ से बाइसिकल की जिद की। बुआ ने उसे समझाया और आश्वस्त किया कि उसे जन्मदिन पर मिलेगी, तब वह शांत हुआ।

🎯 Exam Tip: बच्चों की जिद और बड़ों द्वारा उन्हें समझाने के तरीके को कहानी के संवादों के माध्यम से व्यक्त करें।

 

Question 14. लेखक के अनुसार अपराध प्रवृति को किस प्रकार जीता जा सकता है?
Answer: लेखक का मानना है कि अपराध की प्रवृत्ति को सजा से नहीं बदला जा सकता। अपराध के प्रति दया होनी चाहिए, गुस्सा नहीं होना चाहिए। अपराध की प्रवृत्ति को अपराधी के साथ प्यार का व्यवहार करने से ही दूर किया जा सकता है। उसे डराकर दबाना ठीक बात नहीं है। बच्चे का स्वभाव कोमल होता है, उसके साथ प्यार का व्यवहार होना चाहिए।
In simple words: लेखक का मानना है कि अपराध को सजा से नहीं, बल्कि प्यार और दया से दूर किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: लेखक के विचारों और कहानी के नैतिक संदेश को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 15. लेखक का मानना है- "अगर आशुतोष ने चोरी की है तो उसका इतना दोष नहीं है"- तो किसका दोष है तथा क्यों?
Answer: लेखक मानता है कि यदि आशुतोष ने चोरी की है तो वह इतना दोषी नहीं है। इसका दोषी वह स्वयं और परिवार वाले हैं। चोरी के लिए आशुतोष को उकसाने वाली परिस्थितियाँ उसके (लेखक के कारण ही) बनीं। परिवार में बच्चे के पालन-पोषण में कुछ कमी रही, जिससे वह चोरी की ओर झुक गया। परिवार में उसकी ओर ध्यान नहीं दिया गया, उसकी जरूरतों और इच्छाओं का ख्याल नहीं रखा गया। इन कारणों से उसने चोरी की।
In simple words: लेखक के अनुसार, अगर आशुतोष ने चोरी की है, तो उसका दोष कम है; असली दोषी परिवार है क्योंकि उन्होंने उसकी जरूरतों का ध्यान नहीं रखा।

🎯 Exam Tip: बच्चे के अपराध के पीछे के सामाजिक और पारिवारिक कारणों पर जोर दें, जैसा कि लेखक ने बताया है।

 

Question 16. “देखो, हमारे बेटे ने सच कबूल किया है,” आशुतोष ने क्या सच कबूल किया? क्या आप भी उसको सच मानते हैं?
Answer: लेखक ने अपनी पत्नी से कहा- “देखो, हमारे बेटे ने सच कबूल किया है। लेखक के बार-बार पूछने पर आशुतोष ने कह दिया था कि उसको पाजेब पड़ी मिली थी। यह सच नहीं है। आशुतोष ने अपने पिता के प्रश्नों से घबराकर उनसे बचने के लिए कह दिया कि पाजेब उसे पड़ी मिली थी। उसे पाजेब पड़ी हुई नहीं मिली थी और न उसने पतंग वाले को बेची ही थी।
In simple words: आशुतोष ने दबाव में आकर कहा कि उसे पाजेब पड़ी मिली थी, लेकिन यह सच नहीं था; उसने न तो पाजेब बेची थी और न ही उसे मिली थी।

🎯 Exam Tip: बच्चों के झूठ बोलने या सच छिपाने के पीछे के कारणों को स्पष्ट करें, खासकर जब वे दबाव में हों।

 

Question 17. 'यह कुलच्छिनी औलाद जाने कब मिटेगी?' यह कथन किसका है तथा किस कारण कहा गया है?
Answer: 'यह कुलच्छिनी औलाद न जाने कब मिटेगी?' यह कथन छुन्नू की माँ का है। आशुतोष ने कहा कि उसने पाजेब छुन्नू को दी थी। इसकी माँ ने कहा कि तुम्हारा छुन्नू झूठ बोलता है। इससे छुन्नू की माँ को बहुत दुख हुआ। उसको बुरा लगा कि उसके बेटे को चोर समझा गया। उसने उसको पकड़कर खूब पीटा और खुद भी रोने लगी।
In simple words: यह बात छुन्नू की माँ ने कही क्योंकि उसे दुख हुआ कि उसके बेटे को आशुतोष के कहने पर चोर समझा गया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के क्रोध या दुख के कारणों को उनके शब्दों और कहानी की घटनाओं से जोड़कर समझाएं।

 

Question 18. “पाजेब से बढ़कर शांति है” यह किसने कहा है तथा किस अवसर पर कहा है?
Answer: छुन्नू पर पाजेब चोरी का आरोप लगने पर उसकी माँ ने उसको पीटना शुरू कर दिया। वह रोया बिल्कुल नहीं। जिस प्रकार कोई शहीद सजा का विरोध नहीं करता, उसे साहस के साथ सहन करता है उसी तरह उसको अपनी पिटाई का विरोध नहीं किया। आशुतोष एक कोने में खड़ा था। छुन्नू वह उसकी ओर न जाने किस भाव से देखती रहा।
In simple words: छुन्नू को उसकी माँ ने पाजेब चोरी के आरोप में पीटा, पर उसने बिना रोए यह सहन किया, जैसे कोई शहीद करता है।

🎯 Exam Tip: पात्रों की गहरी भावनाओं और उनके असामान्य व्यवहार के पीछे के कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 20. दफ्तर जाते समय लेखक श्रीमती जी से क्या करने को कह गया तथा क्यों?
Answer: दफ्तर जाते समय लेखक ने श्रीमती जी से कहा कि वह आशुतोष को डराए-धमकाए नहीं। उससे प्यार से पाजेब के बारे में पूछताछ करे। धमकाने से बच्चे बिगड़ जाते हैं। उससे कोई लाभ नहीं होता। प्यार से पूछने पर ही आशुतोष सही-सही बता सकता है कि उसने पाजेब का क्या किया।
In simple words: लेखक ने श्रीमती जी से कहा कि आशुतोष से प्यार से बात करें ताकि वह सच बताए, क्योंकि डराने से बच्चे बिगड़ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों के साथ व्यवहार के सही तरीके पर लेखक के दृष्टिकोण को समझाएं।

 

Question 21. 'पाजेब उसके पास नहीं हुई तो कहाँ से देगा।' आशुतोष का बार-बार यह कहना क्या प्रगट करता है?
Answer: जब आशुतोष से उसके पिता ने कहा कि वह पतंग वाले से पाजेब वापस ले आए तो बार-बार वह एक ही बात कहता था कि पाजेब उसके पास नहीं हुई तो कहाँ से देगा। उसका बार-बार यह कहना दिखाता है कि वह जानता था कि उसने पाजेब पतंग वाले को दी ही नहीं थी। उसने तो पिता की हाँ में हाँ मिलाई थी। उसने पाजेब न तो छुन्नू को दी थी और न ही पतंग वाले को दी थी।
In simple words: आशुतोष बार-बार कहता था कि अगर पाजेब उसके पास नहीं तो वह कहाँ से देगा, यह दिखाता है कि उसने वाकई में पाजेब न तो पतंग वाले को दी थी और न ही छुन्नू को।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बार-बार दोहराए गए शब्दों से उनकी वास्तविक भावनाओं और सच्चाई का पता चलता है।

 

Question 22. 'पाजेब' कहानी के अंत पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी का अंत बुआ के यह बताने से होता है कि पिछले दिन पाजेब गलती से उनके साथ चली गई थी। वह जेब से निकालकर पाजेब देती हैं तो लेखक इस तरह डर जाता है, जैसे पाजेब कोई बिच्छू हो। इसके साथ ही आशुतोष पाजेब की चोरी के आरोप से मुक्त हो जाता है। कहानी का अंत नाटकीय और भावनात्मक है। कहानी अपने सबसे ऊंचे बिंदु पर पहुँचने के बाद खत्म हो जाती है।
In simple words: कहानी का अंत नाटकीय है, जिसमें बुआ के पास पाजेब मिलती है, जिससे लेखक हैरान होता है और आशुतोष निर्दोष साबित होता है।

🎯 Exam Tip: कहानी के अंत का वर्णन करते समय, मुख्य घटनाओं, पात्रों की भावनाओं और कहानी के समग्र प्रभाव पर ध्यान दें।

 

Question 23. मैंने बड़े प्यार से पूछ-पूछकर यह सब उसके पेट से निकाला है। दो-तीन घंटे मैं मगज मारती रही।” आशुतोष की माँ ने यह किससे तथा क्यों कहा?
Answer: दफ्तर जाने से पहले लेखक ने अपनी पत्नी से कहा था कि वह शांति के साथ आशुतोष से पाजेब के बारे में पूछे, उसे धमकाए नहीं। दफ्तर से लौटने पर उनकी पत्नी ने उनको बताया कि उसने आशुतोष से प्यार से ही पूछताछ की है और आशुतोष ने स्वीकार किया है
In simple words: आशुतोष की माँ ने लेखक को यह इसलिए कहा क्योंकि उसने बहुत देर तक प्यार से पूछकर आशुतोष से सच उगलवाया था।

🎯 Exam Tip: संवादों को कहानी के संदर्भ में प्रस्तुत करें और पात्रों के रिश्तों को स्पष्ट करें।

 

Question 25. यदि मुन्नी की पाजेब बुआ के साथ भूल से नहीं चली जाती तो इसका 'पाजेब' कहानी पर क्या प्रभाव पड़ता? सोचकर उत्तर दीजिए।
Answer: यदि मुन्नी की पाजेब बुआ के साथ गलती से नहीं जाती तो 'पाजेब' कहानी पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ता। कहानी के कथानक में कोई विकास नहीं दिखाई देता। वह अधूरी ही रह जाती या लेखक इसे कोई और मोड़ दे देता, तब इसमें आशुतोष, लेखक, लेखक की पत्नी, मुन्नी, छुन्नू की माँ आदि पात्र नहीं होते। यदि होते भी तो उनकी क्या भूमिका होती, यह कहा नहीं जा सकता।
In simple words: अगर पाजेब बुआ के साथ न जाती, तो कहानी अधूरी रह जाती और उसके मुख्य किरदार और घटनाएं मौजूद न होते।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य घटनाक्रम के महत्व को बताते समय, काल्पनिक स्थितियों से उसके संभावित प्रभावों को समझाएं।

Rbse Class 12 Hindi सरयू Chapter 17 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'पाजेब' कहानी के मुख्य पात्र आशुतोष का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी का मुख्य पात्र बालक आशुतोष है। उसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
कोमल बुद्धि - आशुतोष आठ साल का बच्चा है। उसकी बुद्धि कोमल और अपरिपक्व है। वह दूसरों की बातों और भावनाओं से जल्दी प्रभावित हो जाता है। वह अपने पिता के प्यार, लालच और मजाक से प्रभावित होकर वह काम करना मान लेता है जो उसने किया ही नहीं।
तर्क-कुतर्क से दूर - आशुतोष तर्क-वितर्क नहीं करता। वह अपनी बात कहने के लिए बहस का सहारा नहीं लेता। वह मुश्किल सवालों को समझता भी नहीं है। अपने पिता के तर्कपूर्ण सवालों का सामना वह नहीं कर पाता। वह निर्दोष होते हुए भी पाजेब की चोरी करना मान लेता है।
बाल-हठ - आशुतोष बच्चा होने के कारण जिद भी करता है। अपनी छोटी बहन को पाजेब पहने देखकर वह बाइसिकल लेना चाहता है। वह बुआ से जिद करके कहता है- हम तो अभी लेंगे। वह समझदार भी है। प्यार से समझाने पर वह अपने जन्मदिन पर बाइसिकल लेने की बात मान लेता है। अकारण संदेह का पात्र- आशुतोष ने पाजेब नहीं ली है। उस पर पाजेब की चोरी का बिना कारण संदेह किया जाता है। उसे अपना अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जाता है और उसे परेशान भी किया जाता है। बुआ के आने पर वह निर्दोष साबित होता है।
In simple words: आशुतोष एक आठ साल का मासूम और सरल बच्चा है, जिसमें तर्कशक्ति कम है। वह दबाव में आकर बिना गलती के भी चोरी मान लेता है और अपनी बहन के लिए बाइसिकल की जिद भी करता है।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण करते समय, पात्र के स्वभाव, कमजोरियों और विकास के विभिन्न पहलुओं को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 3. 'पाजेब' कहानी की कथावस्तु की समीक्षा कीजिए।
Answer: 'पाजेब' कहानी की कथावस्तु में पाजेब ही मुख्य चीज़ है। कहानी पाजेब के बारे में बात करने से शुरू होती है। मुन्नी पाजेब पहनना चाहती है और अपने पिता से इसके लिए बहुत ज़िद करती है। यह देखकर आशुतोष भी साइकिल लेने की ज़िद करता है। यह कहानी बच्चों की ज़िद (बालहठ) से शुरू होती है और बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है। कहानी की घटनाएँ तब आगे बढ़ती हैं जब पाजेब खो जाती है। मुन्नी की माँ अपने पति को बताती है कि एक पाजेब नहीं मिल रही है। वह नौकर बंसी पर शक करती है, लेकिन पिता को अपने आठ साल के बेटे आशुतोष पर शक होता है।
आशुतोष अपना पतंग का शौक पूरा करने के लिए पाजेब चुरा सकता है। इसके बाद पाजेब की तलाश शुरू होती है। पिता अपने मुश्किल सवालों से आशुतोष को वह चोरी कबूल करने के लिए मजबूर करते हैं, जो उसने की ही नहीं थी। इसके बाद आशुतोष को ज़बरदस्ती पतंग वाले के पास भेजने का इंतज़ाम होता है। तभी बुआ आकर बताती है कि पाजेब पिछली बार गलती से उनके साथ चली गई थी। इस तरह कहानी मध्य से चरम सीमा तक पहुँचती है। कहानी का अंत चरम सीमा पर ही हो जाता है। पाजेब के मिल जाने पर आशुतोष बेगुनाह साबित हो जाता है। 'पाजेब' कहानी की कथावस्तु बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है। छोटे बच्चे मुश्किल सवालों का सही जवाब नहीं दे पाते और अपनी गलती मान लेते हैं। इस तरह वे बिना वजह अपराधी बन जाते हैं। इसी सोच के आधार पर 'पाजेब' कहानी की कथावस्तु बनाई गई है।
In simple words: 'पाजेब' कहानी में पाजेब ही मुख्य चीज़ है। कहानी मुन्नी के पाजेब की ज़िद से शुरू होती है, फिर उसके खोने और आशुतोष पर शक होने की घटनाएँ होती हैं। अंत में बुआ के पास पाजेब मिलने पर आशुतोष निर्दोष साबित होता है। यह कहानी बाल-मनोविज्ञान और बच्चों पर बेवजह लगाए गए आरोपों पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: कथावस्तु की समीक्षा में कहानी की शुरुआत, विकास, मुख्य घटनाएँ और अंत को क्रमबद्ध तरीके से बताना महत्वपूर्ण है, साथ ही यह भी कि मुख्य वस्तु या पात्र का क्या महत्व है।

 

Question 4. कहानी कला की दृष्टि से 'पाजेब' कहानी आपको कैसी लगती है? विचारपूर्ण उत्तर दीजिए।
Answer: कहानी कला के नज़रिए से 'पाजेब' एक बहुत अच्छी कहानी है। कहानीकार ने बाल-मनोविज्ञान को आधार बनाकर मुन्नी की ज़िद से कहानी की शुरुआत की है। इस कहानी में मुन्नी और उसका भाई आशुतोष मुख्य पात्र हैं, दोनों बच्चे हैं। कहानीकार ने बच्चों के स्वभाव को बहुत अच्छे से दिखाया है। लेखक बताता है कि बच्चों की बुद्धि कच्ची होती है और वे तर्क-वितर्क नहीं कर पाते। आशुतोष अपने पिता के प्यार, लालच और डर से प्रभावित होकर वह काम भी मान लेता है जो उसने नहीं किया।
कहानी का कथानक व्यवस्थित है और घटनाओं का विकास एक नियम के अनुसार होता है। पाजेब वह चीज़ है जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। कहानी पाजेब के खोने से शुरू होती है और पाजेब के मिलने पर ही खत्म होती है। कहानी के संवाद छोटे, जीवंत और नाटकीय हैं। वे पात्रों के स्वभाव और कहानी के कथानक के अनुसार हैं। कहानी की भाषा सरल है और पात्रों के हिसाब से सही है। लेखक ने समय और जगह का भी पूरा ध्यान रखा है। कहानी की शैली मनोविश्लेषणात्मक है। कहानी का शीर्षक 'पाजेब' बिल्कुल सही है। यह कहानी एक खास मकसद से लिखी गई है। कहानीकार ने बताया है कि बच्चों की बुद्धि कोमल होती है और वे तर्क-वितर्क नहीं समझते। उनके साथ हमेशा प्यार, स्नेह और सहानुभूति से पेश आना चाहिए।
In simple words: 'पाजेब' एक कलात्मक और सफल कहानी है जो बच्चों के मनोविज्ञान को दिखाती है। इसकी कहानी, पात्र और भाषा सभी बहुत अच्छे हैं। यह कहानी बताती है कि बच्चों को प्यार और समझदारी से संभालना चाहिए, क्योंकि वे डर या लालच में गलत बातें मान लेते हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी की कलात्मकता पर विचार करते समय, कथानक, पात्रों का चित्रण, संवाद, भाषा शैली और कहानी के उद्देश्य जैसे बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 5. बाल-मनोविज्ञान किसको कहते हैं? 'पाजेब' कहानी को प्रभावशाली रचना बनाने में उसका क्या योगदान है?
Answer: बच्चों के मन और स्वभाव को समझने वाले विज्ञान को बाल-मनोविज्ञान कहते हैं। बच्चे मन के सीधे-साधे और सरल होते हैं। उनकी बुद्धि पूरी तरह से विकसित नहीं होती और वे नादान होते हैं। वे टेढ़े-मेढ़े तर्कों को नहीं समझ पाते और उनकी सोच भी तर्क पर आधारित नहीं होती। अगर उनसे घुमा-फिराकर मुश्किल सवाल पूछे जाएँ, तो वे उलझ जाते हैं और सही बात नहीं बता पाते। इस तरह, निर्दोष होने पर भी उन्हें अपराधी मान लिया जाता है, जो उनके लिए बहुत दुखद बात होती है।
'पाजेब' कहानी की कथावस्तु और पात्रों का चित्रण बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है। कहानी की शुरुआत में हम मुन्नी और उसके भाई आशुतोष को पाजेब और साइकिल लेने के लिए ज़िद करते हुए देखते हैं। बाद में कहानी का विकास पाजेब के खोने और उसके बारे में आशुतोष से पूछताछ करने से होता है। आशुतोष एक बच्चा है। उसकी बुद्धि कोमल है। वह अपने पिता के मुश्किल और घुमा-फिराकर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दे पाता। उसने पाजेब नहीं चुराई थी, लेकिन सवालों के दबाव में आकर वह चोरी करना कबूल कर लेता है। कहानी के पात्रों का चित्रण भी बाल-मनोविज्ञान के अनुसार ही हुआ है। आशुतोष का चरित्र बच्चों के मनोविज्ञान का एक जीता-जागता उदाहरण है। बाल-मनोविज्ञान ने इस कहानी को बहुत प्रभावशाली बनाया है।
In simple words: बाल-मनोविज्ञान बच्चों के मन को समझने का विज्ञान है। 'पाजेब' कहानी में बच्चे के भोलेपन और उनकी सोच की कमियों को दिखाकर इस विज्ञान का इस्तेमाल किया गया है। कहानी के पात्रों की हरकतें बच्चों की सच्ची मानसिकता को दिखाती हैं, जिससे यह कहानी बहुत असरदार बन गई है।

🎯 Exam Tip: बाल-मनोविज्ञान के योगदान को बताते समय, कहानी के प्रमुख पात्रों (आशुतोष, मुन्नी) के व्यवहार और उनकी प्रतिक्रियाओं पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 6. 'पाजेब' क्या है? कहानी में इसका क्या महत्व है?
Answer: पाजेब एक गहना है जो पैरों में पहना जाता है। यह अक्सर चाँदी का बना होता है। इसमें कई छोटी लड़ियाँ होती हैं जो पहनने वाले के पैरों के हिसाब से अपना आकार ले लेती हैं। पाजेब का 'पाजेब' कहानी में बहुत महत्व है। कहानी की पूरी कहानी और उसका केंद्र पाजेब ही है। कहानी की शुरुआत पाजेब के ज़िक्र से होती है। मुन्नी अपने पिता से पाजेब लेने की ज़िद करती हुई दिखती है। कहानी का विकास भी पाजेब पर ही निर्भर करता है। पाजेब खो जाती है और उसकी तलाश शुरू होती है। इसी से कहानी आगे बढ़ती है।
पाजेब चुराने का शक बच्चे आशुतोष पर होता है। कोमल बुद्धि और सरल मन के बच्चे को अपने पिता के मुश्किल, तर्क भरे सवालों का सामना करना पड़ता है। वह चोर नहीं होता, लेकिन सवालों के दबाव में आकर चोरी करने की बात मान लेता है। कहानी पाजेब के मिलने पर ही खत्म होती है और तभी आशुतोष को पाजेब चुराने के आरोप से मुक्ति मिलती है। बुआ आकर बताती है कि पिछली बार पाजेब गलती से उनके साथ चली गई थी।
In simple words: पाजेब पैरों में पहनने वाला एक चाँदी का गहना है। यह कहानी का केंद्र बिंदु है। कहानी पाजेब के खोने और मिलने के इर्द-गिर्द घूमती है, जिससे आशुतोष पर गलत आरोप लगते हैं और फिर वह निर्दोष साबित होता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कहानी में किसी वस्तु के महत्व को समझाने के लिए यह बताएं कि वह कहानी के कथानक को कैसे आगे बढ़ाती है और पात्रों पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है।

 

Question 1. जैनेन्द्र कुमार को जीवन-परिचय देकर उनकी साहित्य-सेवा का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
Answer:
जीवन-परिचय – जैनेन्द्र कुमार का जन्म 1905 में अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) के कौड़ियागंज गाँव में हुआ था। उनके पिता प्यारेलाल और माता श्रीमती रामदेवी थीं। उनका असली नाम आनन्दीलाल था। पिता की मृत्यु के कारण उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाई। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा हस्तिनापुर के जैन गुरुकुल ऋषि ब्रह्मचर्याश्रम में प्राप्त की। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने काशी विश्वविद्यालय में आगे की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन महात्मा गाँधी के स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और आंदोलन में काम करने लगे। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। वे खुद भी पढ़ते और लिखते रहते थे। 1988 में उनका देहांत हो गया।
साहित्यिक परिचय – जैनेन्द्र कुमार एक उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार और एक मशहूर विचारक थे। उनकी यह पहचान उनके निबंधों में भी दिखाई देती है। उनके निबंधों में साहित्य, दर्शन, संस्कृति, राजनीति और समाज-धर्म जैसे विषयों पर गहरी सोच मिलती है। उन्होंने 'खेल' कहानी और 'परख' उपन्यास लिखकर हिंदी साहित्य में अपना नाम बनाया। जैनेन्द्र की भाषा रोजमर्रा की हिंदी है जिसमें संस्कृत के शब्द और जरूरत के हिसाब से मुहावरे भी इस्तेमाल हुए हैं। एक विचारक होने के कारण कहीं-कहीं उनके वाक्य थोड़े गहरे होते हैं। उनकी शैली विचारपूर्ण, मनोविश्लेषणात्मक और व्यंग्यात्मक है। उन्होंने नाटकीय और संवाद शैली का भी इस्तेमाल किया है। साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें हिन्दुस्तान अकादमी ने सम्मानित किया है। उन्हें 'भारत भारती सम्मान' और 'पद्म भूषण' भी मिल चुका है।
कृतियाँ – जैनेन्द्र जी की मुख्य रचनाएँ इस प्रकार हैं:

  • उपन्यास – परख, सुनीता, सुखदा, त्यागपत्रे, कल्याणी, बिवर्त, जयवर्धन, मुक्तिबोध आदि।
  • कहानी-संग्रह – फाँसी, जयसन्धि, नीलम देश की राजकन्या, वातायन, एक रात, दो चिड़ियाँ, पाजेब आदि। आपकी कहानियाँ 'जैनेन्द्र की श्रेष्ठ कहानियाँ' नाम से आठ राज्यों में प्रकाशित हो चुकी हैं।
  • निबन्ध-संग्रह – प्रस्तुत प्रश्न, पूर्वोदय, जड़ की बात, साहित्य का श्रेय और प्रेय, मन्थन, राष्ट्र और राज्य, सोच-विचार, प्रश्न और प्रश्न, 'काम, प्रेम और परिवार', अकाल पुरुष गाँधी आदि।
  • संस्मरण – ये और वे।
  • अनुवाद – मन्दाकिनी, पाप और प्रकाश, प्रेम में भगवान आदि।

In simple words: जैनेन्द्र कुमार एक प्रसिद्ध हिंदी लेखक थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने कई उपन्यास, कहानियाँ और निबंध लिखे हैं। वे बाल-मनोविज्ञान और दार्शनिक विचारों के लिए जाने जाते हैं। उनकी भाषा सरल और शैली विचारपूर्ण थी, और उन्हें कई पुरस्कार मिले।

🎯 Exam Tip: जीवनी संबंधी प्रश्नों में जन्म-मृत्यु, शिक्षा, प्रमुख कार्य और प्रमुख साहित्यिक योगदान को क्रमबद्ध तरीके से और स्पष्ट रूप में लिखें। प्रमुख कृतियों को उनकी विधा के साथ सूचीबद्ध करना न भूलें।

पाठ - सार :

 

Question 1. 'पाजेब' शीर्षक कहानी का सारांश लिखिए।
Answer:
परिचय – 'पाजेब' जैनेन्द्र कुमार की एक दिलचस्प और मार्मिक कहानी है। यह उनकी 'पाजेब' शीर्षक कहानी-संग्रह से ली गई है।
मुन्नी को पाजेब मिलने पर खुशी – बुआ के रविवार को आने पर मुन्नी को पाजेब मिली। पाजेब पाकर मुन्नी बहुत खुश हुई और खुशी से इधर-उधर उछलने लगी। वह दौड़कर अपनी सहेली रुक्मिन और शीला के पास गई और उन्हें अपनी पाजेब दिखाई। सभी ने उसकी तारीफ की और प्यार किया। अपने पैरों में चाँदी की पाजेब देखकर मुन्नी की खुशी का ठिकाना न रहा। आशुतोष ने मुन्नी को पाजेब पहने देखा तो वह भी खुश हुआ। फिर उसने कहा कि मुन्नी को पाजेब मिली है तो उसे भी साइकिल दिलाओ। बुआ ने आशुतोष को समझाया कि उसके जन्मदिन पर उसे साइकिल मिल जाएगी।
पाजेब का खो जाना – एक रात लेखक अपनी मेज़ पर बैठे थे तभी उनकी पत्नी ने पूछा कि उन्होंने पाजेब देखी है क्या? एक पाजेब कहीं मिल नहीं रही थी। उनकी पत्नी ने किताबें और कॉपियाँ पलटकर देखीं, लेकिन लेखक ने उन्हें रोका। पूछने पर उन्होंने बताया कि दोपहर को नीचे वाले बक्से में संभालकर रखी थी। अब देखा तो वहाँ एक ही थी, दूसरी नहीं। उन्हें लगा शायद नौकर बंसी ने ले ली होगी। रखते समय वह वहीं खड़ा था, इसलिए डाँटकर उससे पूछने को कहा। लेखक ने कहा कि यह नौकर का काम नहीं है, वह ऐसा नहीं कर सकता। उन्होंने आशुतोष से पूछने को कहा। शायद उसने पाजेब ली हो, उसे पतंग का शौक है। पत्नी ने बताया कि आशुतोष तो पाजेब खोजने में उसकी मदद कर रहा था। वह उसे नहीं ले सकता।
आशुतोष से पूछ-ताछ – बातों-बातों में पता चला कि आशुतोष उस समय एक नई पतंग और एक डोर का पिन्ना लाया था। सुबह उससे पूछा तो उसने सिर हिलाकर मना कर दिया, कुछ नहीं बोला। लेखक ने फिर पूछा कि अगर उसने पाजेब ली है तो कोई बात नहीं, सच बता दे। पर वह चुप रहा। लेखक ने सोचा कि अपराध के प्रति दया दिखानी चाहिए, गुस्सा नहीं। प्रेम से ही अपराध को दूर किया जा सकता है। बच्चा कोमल होता है, उसके साथ प्यार से व्यवहार करना चाहिए। लेखक ने आशुतोष से कहा, "डरो नहीं, सच बोल दो। सच बोलने पर सज़ा नहीं इनाम मिलेगा।" वह चुप ही रहा। लेखक ने पूछा, "क्यों बेटे, तुमने ली तो नहीं?" इस बार आशुतोष ने सिर हिलाकर तीन बार जोर से कहा, "मैंने नहीं ली।" लेखक को उसकी यह ज़िद गुस्से का लक्षण लगी। फिर लेखक ने कहा, "जाओ, पाजेब को ढूँढ़ो। ढूँढ़कर लाने पर इनाम मिलेगा।" वह चला गया। लेखक ने सोचा कि अगर आशुतोष ने चोरी की है तो इसके लिए वह उतना दोषी नहीं है जितना वह खुद। इस चोरी से वे भी निर्दोष नहीं हो सकते। उन्होंने उसे फिर बुलाकर पूछा, "तुमने पाजेब छुन्नू को दी है न?" बहुत मुश्किल से उसने अपना सिर हिलाया और कहा, "हाँ हाँ।"
आशुतोष की स्वीकृति – लेखक ने उससे कहा कि वह छुन्नू से पाजेब ले आए। आशुतोष ने कहा, "छुन्नू के पास नहीं होगी तो कहाँ से देगा?" उसने कहा कि उसे पाजेब पड़ी मिली थी। लेखक ने कहा कि उसने छुन्नू को दी। उसने कहा कि इसको बेचेगा। बेचकर पतंग लाएगा। लेखक ये सब कह रहा था और आशुतोष मान रहा था, लेकिन छुन्नू के पास जाने को तैयार नहीं था। लेखक ने उसे डाँटा-डपटा और उसके कान खींचे। लेखक ने आशुतोष की माँ को बताया। उसने छुन्नू की माँ को, उसने छुन्नू से पूछा। छुन्नू ने कहा उसने पाजेब नहीं ली। इस पर दोनों में कुछ झगड़ा भी हुआ। बाद में छुन्नू की माँ शांत हो गई। उसने लेखक से कहा कि छुन्नू मना करता है, पर वह पाजेब का दाम भर सकती है। लेखक ने छुन्नू से पूछा तो उसने बताया कि उसने पाजेब आशुतोष के हाथ में देखी थी। छुन्नू की माँ उसे बहुत पीटती है। लेखक ने समझाकर उसे किसी तरह उसके घर भेजा। दफ्तर जाने से पहले लेखक ने अपनी पत्नी से कहा कि वह आशुतोष से प्यार से पूछे। शाम को पत्नी ने बताया कि आशुतोष ने सब कुछ बता दिया है। उसने पाजेब पतंग वाले को ग्यारह आने में बेची है। पाँच आने दे दिए हैं, बाकी धीरे-धीरे देने को कहा है। लेखक ने कहा, "ठीक है, पाँच आने देकर पतंग वाले से पाजेब ले लेंगे।" फिर उसने आशुतोष को बुलाया, उसे गोद में लेकर प्यार किया, लेकिन वह खुश नहीं था। पूछने पर कभी वह हाँ तो कभी ना कहता। वह छुन्नू को साथ लेकर पतंग वाले को पाँच आने देकर पायल वापस लाने को भी तैयार नहीं था।
बुआ का आगमन – तभी बुआ आईं। उन्होंने आशुतोष से कहा कि वह उसके लिए केले और मिठाई लाई हैं। उन्होंने पूछा, "इसे इस तरह कहाँ ले जा रहे हो? क्यों परेशान कर रहे हो?" लेखक ने जवाब नहीं दिया। बुआ इधर-उधर की बातें करती रहीं। बुआ ने एक छोटा-सा बक्सा खिसकाकर कहा कि इसमें वे कागज़ हैं जो लेखक ने माँगे थे। फिर उन्होंने अपनी जैकेट की जेब में हाथ डाला और पाजेब निकालकर दी। उसे देखकर लेखक डर गया। बुआ ने बताया कि उस दिन गलती से यह पाजेब उनके साथ चली गई थी।
In simple words: 'पाजेब' कहानी में मुन्नी को पाजेब मिलने की खुशी, फिर उसके खोने की घटना, आशुतोष पर चोरी का शक और उस पर दबाव बनाना दिखाया गया है। अंत में बुआ के पास पाजेब मिलने पर आशुतोष निर्दोष साबित होता है। यह कहानी बच्चों के मनोविज्ञान और उन पर गलत आरोप लगने की समस्या को उजागर करती है।

🎯 Exam Tip: सारांश लिखते समय कहानी के मुख्य पात्रों, प्रमुख घटनाओं और उनके क्रम को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें। अनावश्यक विवरणों से बचें और कहानी के केंद्रीय संदेश को बनाए रखें।

कठिन शब्दों के अर्थ

(पृष्ठ 88) पाजेब - पायल, तोड़िया। सहज - आसानी से। सुघड़ - सुन्दर। ठिकाना - सीमा। ठुमकना - ज़िद करना।

(पृष्ठ 89) रोज - दिन। घड़ी-भर - थोड़ा समय। बारीक - पतला। सुबुक - सुन्दर। दाम - कीमत। मनसूबा - इरादा। मौजूद - हाजिर। इन्कार - मना।

(पृष्ठ 90) फिकर - चिन्ता। झल्ला कर - गुस्सा होकर। शहजोर - बलवान। हम पन्द्रह आने - छैटे - चालाक। फरिश्ते - देवदूत। ट्रंक - बड़ा सन्दूक। बरजना - रोकना। शह - प्रोत्साहन। पिन्ना - चरखी। इजाज़त - अनुमति। सबक - पाठ। गुम - चुप। करुणा - दया।

(पृष्ठ 91) रोष - क्रोध। आतंक - डर, भय। स्नेह - प्रेम। इनाम - पुरस्कार। सूजा हुआ - फूला हुआ। अस्थिर - काँपती। उग्रता - प्रबलता, तीव्रता। वंचित - अलग। इलज़ाम - दोष। लाचारी - मज़बूरी। बरी - मुक्त। छाया - परछाई, मनोभाव। ताड़ना - चुपचाप पता करना।

(पृष्ठ 92) उल्लास - प्रसन्नता। कबूल - स्वीकार। बलैया लेना - किसी का संकट अपने ऊपर लेने की कामना करना। अगरचे - किन्तु।

(पृष्ठ 93) ज़िद - किसी बात पर अड़े रहना। गाड़ देना - ज़मीन में दबा देना। क्षोभ - क्रोध। कुलच्छिनी - बुरे लक्षणों वाली। औलाद - संतान। पवन पड़ना - हवा फैलना, बात पता चल जाना। तेजा-तेजी - तेज आवाज में बोलना। बुदबुदाना - मुँह ही मुँह में बोलना। गरमी - तेजी, गुस्सा।

(पृष्ठ 94) सहूलियत - सुविधा। आकार - बनावट। चमड़ी उधेड़ना - बहुत पीटना। बीच-बचाव - मध्यस्थता। कसूरबार - अपराधी। बे बात - निरर्थक। फायदा - लाभ। दिलासा - सान्त्वना। प्रण - प्रतिज्ञा। बखेड़ा - झगड़ा-झंझट। टला - दूर हुआ। धमकाना - डाँटना, पाटना। रती-रती - छोटी से छोटी।

(पृष्ठ 95) पेट में से निकलना - स्वीकार कराना। मगज मारना - तरह-तरह से पूछना, दिमाग लड़ाना। जी - मन। उचक्का - ठग। टिकना - रुकना। हजरत - एक व्यंग्यपूर्ण सम्बोधन।

(पृष्ठ 98) सब्र - धैर्य। शंरित - शैतानी। बाज आना - छोड़ना। उम्मीद - आशा। सफाई देना - अपना पक्ष स्पष्ट करना। लिहाज़ - आदर।

(पृष्ठ 99) सिलसिला - घटनाक्रम। उद्यत - तैयार। आनाकानी - ना-नुकर। मचलना - ज़िद करना, मना करना। वास्कट - एक वस्त्र, जाकिट।

महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सन्दर्भ एवं प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. बाजार में एक नई तरह की पाजेब चली है। पैरों में पड़कर वे बड़ी अच्छी मालूम होती हैं। उनकी कड़ियाँ आपस में लचक के साथ जुड़ी रहती हैं कि पाजेब का मानो निज का आकार कुछ नहीं है, जिस पाँव में पड़े उसी से अनुकूल ही रहती है। पास-पड़ोस में तो सब नन्हीं-बड़ी के पैरों में आप वही पाजेब देख लीजिए। ए। एक ने पहनी तो दूसरी ने भी पहनी। देखा-देखी में इस तरह उनका न पहनना मुश्किल हो गया। (पृष्ठ 88)

सन्दर्भ – यह अंश हमारी पाठ्य-पुस्तक में 'पाजेब' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं।

प्रसंग – यह 'पाजेब' बाल-मनोविज्ञान पर आधारित एक जीवंत और दिलचस्प कहानी है। 'पाजेब' चाँदी का बना एक सुंदर आभूषण है जिसे महिलाएँ अपने पैरों में पहनती हैं।

व्याख्या – लेखक बताते हैं कि उन दिनों बाजार में एक नए तरह की पाजेब खूब बिक रही थी। पैरों में पहनने पर वे बहुत सुंदर लगती थीं। उनमें कई लड़ियाँ थीं जो एक-दूसरे से लचक के साथ जुड़ी हुई थीं। पाजेब का अपना कोई खास आकार नहीं था। वे जिस भी पैर में पहनी जाती थीं, उसी के हिसाब से ढल जाती थीं। उस समय यह बहुत प्रचलित था। बच्चियों से लेकर युवा महिलाएँ तक उन्हें पहनती थीं। पहनने वालों में बहुत होड़ लगी रहती थी। पहले एक महिला पाजेब पहनती तो दूसरी भी वैसी ही पाजेब पहनती थी। इतनी जबरदस्त होड़ थी कि एक पाजेब पहने और दूसरी न पहने-ऐसा हो ही नहीं सकता था।

विशेष -

  • गहनों के प्रति महिलाओं का गहरा आकर्षण दिखाया गया है।
  • पायल एक ऐसा गहना है जिसे आमतौर पर सभी महिलाएँ पहनती हैं।
  • लेखक की भाषा विषय के अनुसार और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली वर्णनात्मक है।

2. मेरे मन में उस समय तरह-तरह के सिद्धान्त आए। मैंने स्थिर किया कि अपराध के प्रति करुणा ही होनी चाहिए, रोष का अधिकार नहीं है। प्रेम से ही अपराध-वृत्ति को जीता जा सकता है। आतंक से उसे दबाना ठीक नहीं है। बालक का स्वभाव कोमल होता है और

प्रसंग – मुन्नी के पाजेबों में से एक पाजेब खो गई थी। आशुतोष के पिता को शक था कि पाजेब उसने ली है। उसकी माँ का कहना था कि वह पाजेब नहीं ले सकता। आशुतोष को पतंग उड़ाने का शौक था। इसलिए उसके पिता सोचते थे कि पाजेब आशुतोष ने ली होगी। उन्होंने उससे इस बारे में धैर्यपूर्वक पूछताछ की, लेकिन आशुतोष चुप रहा, कुछ नहीं बोला।

व्याख्या – लेखक के मन में कई विचार आ रहे थे। उस समय वह तरह-तरह के सिद्धांतों के बारे में सोच रहा था। अंत में वह इस नतीजे पर पहुँचा कि अपराध के प्रति गुस्सा नहीं बल्कि दया की भावना होनी चाहिए। अपराधी कुछ खास परिस्थितियों के कारण अपराध करते हैं, इसलिए वे दया के पात्र हैं। उन पर गुस्सा करना ठीक नहीं है। अपराध की आदत को प्यार भरे व्यवहार से ही दूर किया जा सकता है। अपराधी को डरा-धमकाकर दबाना अच्छी बात नहीं है। बच्चे का स्वभाव वैसे भी कोमल होता है। उसके साथ हमेशा प्यार से व्यवहार करना चाहिए। उसे धमकाना ठीक नहीं होता। यह सोचकर लेखक ने आशुतोष को समझाया कि उसे डरना नहीं चाहिए। सच बोलने में क्या डरना? अगर उसने पाजेब ली है तो साफ-साफ बता दे। उसे सच बोलने की सज़ा नहीं बल्कि इनाम दिया जाएगा।

विशेष -

  • अपराधी के साथ प्यार और स्नेह के व्यवहार से ही उसे अपराध करने से रोका जा सकता है।
  • अपराध और अपराधी के प्रति इन विचारों को अच्छी तरह दिखाया गया है।
  • भाषा सरल, विषय के अनुसार और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली विचारपूर्ण और संवादपरक है।

3. मैं कुछ बोला नहीं। मेरा मन जाने कैसा गंभीर प्रेम के भाव से आशुतोष के प्रति उमड़ रहा था। मुझे मालूम होता था कि ठीक इस समय आशुतोष को हमें अपनी सहानुभूति से वंचित नहीं करना चाहिए, बल्कि कुछ अतिरिक्त स्नेह इस समय बालक को मिलना चाहिए। मुझे यह एक भारी दुर्घटना मालूम होती थी। मालूम होता था कि अगर आशुतोष ने चोरी की है। तो उसका इतना दोष नहीं है, बल्कि यह हमारे ऊपर बड़ा भारी इलजाम है। बच्चे में चोरी की आदत भयावह हो सकती है। लेकिन बच्चे के लिए वैसी लाचारी उपस्थित हो आई, यह और भी कहीं भयावह है। यह हमारी आलोचना है। हम उस चोरी से बरी नहीं हो सकते। (पृष्ठ91)

सन्दर्भ – यह अंश हमारी पाठ्य-पुस्तक में 'पाजेब' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं।

प्रसंग – मुन्नी की एक पाजेब खो गई थी। लेखक को आशुतोष पर शक था। उसकी पत्नी नौकर बंसी पर शक कर रही थी। लेखक की पत्नी ने पूछा कि आशुतोष पाजेब क्यों लेगा?

व्याख्या – पत्नी के कहने पर लेखक ने कोई जवाब नहीं दिया। वह चुप रहा। उसके मन में अपने बेटे आशुतोष के प्रति गहरा प्यार उमड़ रहा था। वह सोच रहा था कि सिर्फ शक के आधार पर आशुतोष के प्रति सहानुभूति नहीं छोड़नी चाहिए। इसके बजाय बच्चे को और ज़्यादा प्यार देना चाहिए। लेखक को लगा कि पाजेब की चोरी एक बुरी घटना थी। अगर आशुतोष ने पाजेब चुराई थी तो इसका दोषी वह उतना नहीं था जितना उसके परिवार के लोग थे। यह उसके परिवार वालों पर एक बड़ा आरोप था। बच्चे में चोरी की आदत होना बहुत भयानक बात है। इससे भी ज़्यादा भयानक बात यह है कि

विशेष -

  • लेखक के मन में बच्चे आशुतोष के प्रति गहरा स्नेह था। वह बच्चे को चोरी का दोषी नहीं मान रहा था। चोरी का असली दोषी वह खुद और उसका परिवार था।
  • आशुतोष पर चोरी का शक तो लेखक को था, लेकिन वह उसे दोषी नहीं मान रहा था।
  • भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है। इसमें संस्कृत के शब्दों के साथ उर्दू के शब्द भी इस्तेमाल हुए हैं।
  • शैली मनोविश्लेषणात्मक है।

4. पर उसका मुँह फूला हुआ था। जैसे-तैसे बहुत समझाने पर वह प्रकाश के साथ चला। ऐसे चला मानों पैर उठाना उसे भारी हो रहा हो। आठ बरस का लड़का होने आया फिर भी देखो न किसी भी बात की उसमें समझ नहीं है। मुझे जो गुस्सा आया तो क्या बतलाऊँ। लेकिन यह याद करके कि गुस्से से बच्चे संभलने की जगह बिगड़ते हैं, मैं अपने को दबाता चला गया। खैर, वह गया तो मैंने चैम की साँस ली।

सन्दर्भ – यह अंश हमारी पाठ्य-पुस्तक में 'पाजेब' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं।

प्रसंग – बार-बार पूछने पर आशुतोष ने मान लिया था कि उसे पाजेब पड़ी मिली थी, उसने छुन्नू को दी थी और उससे पतंगें खरीदी थीं। दरअसल ये बातें आशुतोष से मनवाई गई थीं। जो-जो लेखक ने कहा, उन पर आशुतोष ने कभी हाँ तो कभी ना कहा। अब लेखक चाहता था कि वह पतंग वाले को पाँच आने देकर अपनी पायल उससे वापस ले आए। लेकिन आशुतोष तैयार नहीं था।

व्याख्या – लेखक कहता है कि आशुतोष पतंग वाले के पास जाने को तैयार नहीं था। लेखक ने उसे बार-बार समझाया तो वह किसी तरह लेखक के भाई प्रकाश के साथ चला, लेकिन उसके पैर ऐसे भारी लग रहे थे जैसे वे बहुत मुश्किल से उठ रहे हों। लेखक ने सोचा कि आशुतोष की उम्र आठ साल हो चुकी थी, फिर भी उसमें किसी बात की समझ नहीं थी। आशुतोष के ऐसे व्यवहार पर लेखक को बहुत गुस्सा आया। वह अपने गुस्से को पी गया क्योंकि उसने सोचा कि गुस्सा करने से बच्चों पर अच्छा असर नहीं होता, वे बिगड़ जाते हैं। किसी तरह जब वह प्रकाश के साथ पतंग वाले के पास चला गया तो लेखक ने आराम की साँस ली।

विशेष -

  • आशुतोष पतंग वाले के पास जाना नहीं चाहता था, क्योंकि उसने पायल उसको दी ही नहीं थी।
  • बार-बार ज़ोर देने पर आशुतोष ने पायल लेना स्वीकार कर लिया था।
  • भाषा सरल तथा प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली आत्मकथात्मक है।

6. मैंने पुकारा "बंसी-तू भी साथ जा। बीच से लौटने न पावे।” सो मेरे आदेश पर दोनों आशुतोष को जबरदस्ती उठाकर सामने से ले गए।

बूआ ने कहा, “क्यों उसे सता रहे हो?'

मैंने कहा कि कुछ नहीं, जरा यों ही....

फिर मैं उनके साथ इधर-उधर की बातें ले बैठा। राजनीति राष्ट्र की ही नहीं होती, मुहल्ले में भी राजनीति होती है। यह भार स्त्रियों पर टिकता है। कहाँ क्या हुआ, क्या होना चाहिए, इत्यादि चर्चा स्त्रियों को लेकर रंग फैलाती है। इसी प्रकार की कुछ बातें हुईं, फिर छोटा-सा बक्सा सरकाकर बोलीं, इसमें वे कागज हैं जो तुमने माँगे थे और यहाँ..”

यह कहकर उन्होंने अपनी बास्कट की जेब से हाथ डालकर पाजेब निकालकर सामने की, जैसे सामने बिच्छु हो। मैं भयभीत भाव से कह उठा कि यह क्या?

बोली कि उस रोज भूल से यह पाजेब मेरे साथ चली गई थी। (पृष्ठ 99)

सन्दर्भ – यह अंश हमारी पाठ्य-पुस्तक में 'पाजेब' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं।

प्रसंग – लेखक के आदेश पर बंसी तथा प्रकाश आशुतोष को ज़बरदस्ती पकड़कर पतंग वाले के पास ले जाने लगे। तभी बुआ वहाँ आईं। उन्होंने रोकना चाहा, मगर लेखक ने मना किया।

व्याख्या – लेखक का भाई प्रकाश उसका बहुत आदर करता था। वह कुछ नहीं बोला और मुँह नीचा करके चुपचाप वहाँ से चला गया। लेखक ने कोठरी खुलवाकर देखा तो आशुतोष फर्श पर सो रहा था। उसके चेहरे पर आँसू नहीं थे। यह देखकर लेखक को उस पर बहुत दया आई। आदमी के मन में एक साथ कई विचार उठते हैं जो एक-दूसरे के विरोधी होते हैं। आशुतोष को देखकर लेखक के मन में दया के साथ शक जैसे कई भाव उठ रहे थे। उसने आशुतोष को जगाया। वह हड़बड़ाकर उठा तो लेखक ने उससे पूछा कि उसका हाल कैसा है। कुछ देर तक वह कुछ भी समझ नहीं सका फिर उसको पिछली घटना याद आ गई। तुरंत उसके चेहरे पर ज़िद, अकड़ और विरोध के पहले जैसे भाव दिखाई देने लगे।

विशेष -

  • प्रस्तुत गद्यांश में कहानी का रोमांचक अंत दिखाया गया है।
  • लेखक जिस पायल की चोरी का बेतुका आरोप आशुतोष पर लगा रहा था, वह तो गलती से बुआ अपने साथ ले गई थीं।
  • भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली आत्मकथात्मक, संवादपरक तथा नाटकीय है।

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