RBSE Solutions Class 12 Geography Chapter 11 विश्व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

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Detailed Chapter 11 विश्व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार RBSE Solutions for Class 12 Geography

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Class 12 Geography Chapter 11 विश्व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्ष में शामिल है –
(अ) जनसंख्या कारक
(ब) विदेशी निवेश
(स) व्यापार का परिमाण
(द) परिवहन
Answer: (स) व्यापार का परिमाण
In simple words: किसी देश का दूसरे देशों के साथ कितना सामान और सेवाएं खरीदी-बेची जाती हैं, उसकी मात्रा को व्यापार का परिमाण कहते हैं. यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक जरूरी हिस्सा है.

🎯 Exam Tip: जब भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख पहलुओं को पढ़ें, तो व्यापार की मात्रा (परिमाण), संयोजन (संरचना), दिशा और संतुलन जैसे मुख्य बिन्दुओं को याद रखें.

 

Question 2. गैट व्यापारिक समझौता लागू हुआ था –
(अ) 1948
(ब) 1995
Answer: (अ) 1948
In simple words: गैट समझौता साल 1948 में शुरू हुआ था, जिसका लक्ष्य दुनिया भर में व्यापार को आसान बनाना था.

🎯 Exam Tip: गैट (GATT) की स्थापना का वर्ष और उसका मुख्य उद्देश्य हमेशा याद रखें, क्योंकि यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है.

 

Question 4. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना हुई थी –
(अ) 1948
(ब) 1947
(स) 1994
(द) 1996
Answer: (स) 1994
In simple words: विश्व व्यापार संगठन की शुरुआत 1994 में हुई थी ताकि दुनिया भर में व्यापार के नियम बनाए जा सकें.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना का सही वर्ष और उसके काम को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गैट (GATT) का उत्तराधिकारी है.

 

Question 5. अन्तर्राष्ट्रीय तेल उत्पादक राष्ट्रों का समूह है –
(अ) आसियान
(ब) ओपेक
(स) साफ्टा
(द) ई.यू.
Answer: (ब) ओपेक
In simple words: ओपेक तेल बनाने वाले देशों का एक संगठन है, जो दुनिया में तेल की कीमतों को नियंत्रित करता है.

🎯 Exam Tip: ओपेक (OPEC) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नाम और उनके मुख्य कार्य याद रखें.

 

Question 6. आसियान का मुख्यालय है –
(अ) जकार्ता
(ब) सिंगापुर
(स) मलेशिया
(द) वियतनाम
Answer: (अ) जकार्ता
In simple words: आसियान का मुख्य दफ्तर इंडोनेशिया के शहर जकार्ता में है.

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मुख्यालयों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए बहुत उपयोगी होता है.

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की परिभाषा दीजिए।
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जो दो या दो से अधिक देशों के बीच होता है. इसमें अलग-अलग देशों के बीच सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान किया जाता है. देश अक्सर वे चीजें खरीदते हैं जो वे खुद नहीं बना सकते या जो उन्हें दूसरे देश में सस्ती मिलती हैं.
In simple words: जब दो या दो से ज़्यादा देश आपस में चीज़ें और सेवाएं खरीदते-बेचते हैं, तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहते हैं.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार की परिभाषा लिखते समय 'दो या दो से अधिक देश' और 'वस्तुओं व सेवाओं का आदान-प्रदान' जैसे मुख्य बिन्दुओं को शामिल करें.

 

Question 3. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना कब हुई?
Answer: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 15 अप्रैल 1994 को हुई थी.
In simple words: विश्व व्यापार संगठन 15 अप्रैल 1994 को बनाया गया था.

🎯 Exam Tip: WTO की स्थापना की तारीख और वर्ष याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

Question 4. विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ है?
Answer: विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय स्विट्जरलैण्ड देश के जेनेवा नगर में है.
In simple words: विश्व व्यापार संगठन का मुख्य दफ्तर स्विट्जरलैंड के शहर जेनेवा में है.

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मुख्यालयों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान और भूगोल के प्रश्नों में पूछा जाता है.

 

Question 5. आसियान के कोई दो सदस्य देशों के नाम लिखिए।
Answer: आसियान के दो सदस्य देश इंडोनेशिया और मलेशिया हैं.
In simple words: आसियान के दो देश इंडोनेशिया और मलेशिया हैं.

🎯 Exam Tip: प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार समूहों जैसे आसियान के सदस्य देशों के नाम याद रखें, खासकर आस-पास के भौगोलिक क्षेत्रों से.

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के इतिहास पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: पुराने समय में परिवहन के साधन बहुत कम थे, इसलिए व्यापार केवल स्थानीय बाज़ारों तक ही होता था. हालांकि, कुछ अमीर लोग आभूषण और महंगे कपड़े खरीदते थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुरू हुआ. रोम को चीन से जोड़ने वाला लगभग 6 हजार किलोमीटर लंबा प्राचीन रेशम मार्ग चीन, भारत, ईरान और मध्य एशियाई देशों के बीच रेशम, कीमती धातुओं, मसालों और दूसरे महंगे सामान का व्यापार करवाता था. 12वीं और 13वीं शताब्दी में रोमन साम्राज्य के टूटने के बाद, समुद्र में चलने वाले बड़े जहाजों के बनने से यूरोप और एशिया के बीच व्यापार बढ़ गया. 15वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों द्वारा उपनिवेश बनाने की शुरुआत के साथ ही विदेशी वस्तुओं का व्यापार तेज़ी से बढ़ने लगा. 19वीं शताब्दी के आखिर तक दुनिया का ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार औद्योगिक देशों के बीच होने लगा था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, दुनिया भर में व्यापार शुल्क कम करने के लिए 1 जनवरी 1948 को गैट (व्यापार व शुल्क हेतु सामान्य समझौता) नाम का एक समझौता लागू किया गया. गैट ने विभिन्न देशों को अपनी व्यापारिक समस्याओं पर बात करने और हल निकालने के लिए एक मंच दिया. यह समझौता 1 जनवरी 1995 को खत्म हो गया और इसकी जगह विश्व व्यापार संगठन (WTO) बन गया. विश्व व्यापार संगठन उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण के लिए काम करता है, जिसके तहत सभी सदस्य देशों को व्यापार नियमों का पालन करना होता है. दिसम्बर 2015 तक, विश्व व्यापार संगठन के 164 सदस्य देश थे, जिसमें भारत भी शामिल है. इस संगठन में विकसित और विकासशील दोनों तरह के देश हैं, और दुनिया का ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार इन्हीं देशों के बीच होता है.
In simple words: पहले व्यापार स्थानीय था, फिर रेशम मार्ग जैसे रास्ते बने. जहाजों के विकास से यूरोप और एशिया में व्यापार बढ़ा. उपनिवेशवाद ने विदेशी व्यापार को बढ़ाया, और फिर गैट और विश्व व्यापार संगठन जैसे समझौते बने ताकि व्यापार के नियमों को आसान किया जा सके.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इतिहास पर टिप्पणी करते समय प्राचीन व्यापार मार्गों, यूरोपीय उपनिवेशवाद के प्रभाव और गैट तथा विश्व व्यापार संगठन की स्थापना जैसे मुख्य चरणों को शामिल करें.

 

Question 3. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभों पर प्रकाश डालिए।
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से कई आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक फायदे होते हैं, जिनमें ये मुख्य हैं:
1. उत्पादन में वृद्धि: हर देश उन चीज़ों का निर्यात करता है जिन्हें वह दूसरे देशों से कम लागत पर बना सकता है. निर्यात करने वाले देश उन चीज़ों के उत्पादन में खास बन जाते हैं और अपना उत्पादन बढ़ा पाते हैं.
2. राष्ट्रीय आय में वृद्धि: निर्यात से मिलने वाली आय से जुड़े देशों की राष्ट्रीय आय बढ़ जाती है.
3. अतिरिक्त सामान की बिक्री: अगर कोई देश अपनी ज़रूरत से ज़्यादा चीज़ें बनाता है, तो वह उन्हें दूसरे देशों को बेचकर विदेशी पैसा कमाता है.
4. संसाधनों का सही इस्तेमाल: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से देश अपने संसाधनों का सबसे अच्छा इस्तेमाल कर पाते हैं, क्योंकि वे तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत पर काम करते हैं.
5. श्रम विभाजन और विशिष्टीकरण के फायदे: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल देशों को क्षेत्रीय श्रम विभाजन और विशेषीकरण के सभी फायदे मिलते हैं.
6. बाज़ार का विस्तार: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से वस्तुओं और सेवाओं के बाज़ार की सीमाएं फैल जाती हैं.
7. बड़े पैमाने पर उत्पादन: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से वस्तुओं की मांग बढ़ती है, जिससे उन्हें बड़े पैमाने पर बनाया जाने लगता है.
8. वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता: अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ने से वे चीज़ें और सेवाएं भी मिल जाती हैं जो देश में उपलब्ध नहीं होतीं.
9. मूल्यों में समानता: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण दुनिया भर में चीज़ों के दाम एक जैसे होने लगते हैं.
10. सांस्कृतिक लाभ: अंतरराष्ट्रीय व्यापार सभ्यता और संस्कृति को सबसे अच्छे से फैलाता है. इससे अलग-अलग देशों की संस्कृति, भाषा, धर्म, परंपराओं और रीति-रिवाजों को एक-दूसरे से जानने का मौका मिलता है.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से देश ज़्यादा चीज़ें बना पाते हैं, ज़्यादा पैसे कमाते हैं, अपनी ज़रूरत से ज़्यादा सामान बेच पाते हैं और संसाधनों का अच्छा इस्तेमाल कर पाते हैं. यह दुनिया भर में चीज़ों के दाम एक जैसे रखने और संस्कृतियों को मिलाने में भी मदद करता है.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभों को बताते समय आर्थिक (उत्पादन, आय) और सामाजिक-सांस्कृतिक (उपलब्धता, मूल्य, संस्कृति) दोनों पहलुओं को शामिल करें. प्रत्येक बिंदु को संक्षेप में स्पष्ट करें.

 

Question 4. विदेशी व्यापार क्या है? समझाइए।
Answer: विदेशी व्यापार या अंतरराष्ट्रीय व्यापार उस व्यापार को कहते हैं जो दो या दो से अधिक देशों के बीच होता है. इसे अलग-अलग देशों की सीमाओं के पार वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के रूप में भी समझा जा सकता है. किसी देश को व्यापार करने की ज़रूरत मुख्य रूप से उन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए होती है जिन्हें या तो वह देश खुद नहीं बना सकता या फिर वह उन्हें दूसरे देशों से कम दाम पर खरीद सकता है.
In simple words: विदेशी व्यापार तब होता है जब दो या दो से ज़्यादा देश आपस में सामान और सेवाएं खरीदते-बेचते हैं. देश अक्सर ऐसी चीज़ें खरीदते हैं जो वे खुद नहीं बना सकते या जिन्हें वे सस्ते में बाहर से ला सकते हैं.

🎯 Exam Tip: विदेशी व्यापार की परिभाषा में 'दो या दो से अधिक देशों' और 'वस्तुओं व सेवाओं का आदान-प्रदान' जैसे प्रमुख तत्व शामिल करें, साथ ही इसके पीछे के कारणों को भी बताएं.

 

Question 5. प्रादेशिक व्यापार समूह को समझाते हुए किसी एक व्यापार समूह पर प्रकाश डालिए
Answer: **प्रादेशिक व्यापार समूह:** ये ऐसे संगठन होते हैं जो भौगोलिक रूप से पास होते हैं और जिनका मकसद अपने सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और विकासशील देशों पर लगे व्यापार प्रतिबंधों को हटाना होता है. इन समूहों को क्षेत्रीय स्तर पर व्यापार बढ़ाने के लिए बनाया गया है. एक ऐसा ही समूह यूरोपीय संघ (ई.यू.) है. इसकी शुरुआत मार्च 1957 में यूरोप के छह देशों- इटली, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैण्ड और लक्जेमबर्ग ने मिलकर ई.ई.सी. के रूप में की थी. बाद में, 1992 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फिनलैण्ड, आयरलैण्ड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देश भी इसमें शामिल हो गए, और इसका नाम ई.यू. (यूरोपीय संघ) पड़ गया. यूरोपीय संघ का मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स नगर में है. इस समूह की मुख्य व्यापारिक वस्तुएं कृषि उत्पाद, खनिज, रसायन, लकड़ी, कागज, परिवहन के वाहन, ऑप्टिकल उपकरण, घड़ियां, कलाकृतियां और पुरानी वस्तुएं हैं. यूरोपीय संघ के देशों में एक ही मुद्रा (यूरो) और एक ही बाज़ार भी है. **सी.आई.एस. (स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल):** इस समूह में पूर्व सोवियत संघ से अलग हुए 12 देश- आर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मोल्दोवा, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. इसका मुख्यालय बेलारूस के मिन्स्क शहर में है. इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार के साथ-साथ अर्थव्यवस्था, रक्षा और विदेश नीति के मामलों में तालमेल और सहयोग बढ़ाना है. अशोधित तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, कपास, रेशम और एल्यूमीनियम इस समूह की मुख्य व्यापारिक वस्तुएं हैं.
In simple words: प्रादेशिक व्यापार समूह पास के देशों के संगठन होते हैं जो व्यापार बढ़ाने और नियमों को आसान बनाने के लिए बनते हैं. यूरोपीय संघ एक ऐसा ही बड़ा समूह है जिसमें कई यूरोपीय देश मिलकर काम करते हैं और उनका एक बाज़ार और एक मुद्रा भी है. सी.आई.एस. पूर्व सोवियत संघ के देशों का समूह है जो व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग करता है.

🎯 Exam Tip: प्रादेशिक व्यापार समूहों को समझाते समय उनके उद्देश्य और किसी एक समूह (जैसे यूरोपीय संघ) के उदाहरण, उसके सदस्य देशों और मुख्यालय का उल्लेख करें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को समझाते हुए लाभ तथा हानियों का वर्णन कीजिए।
Answer: **अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से आशय:** अंतरराष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जो दो या दो से अधिक देशों के बीच होता है. देश ऐसी चीज़ें खरीदने के लिए व्यापार करते हैं जिन्हें वे खुद नहीं बना सकते या जिन्हें वे दूसरे देश से सस्ते में खरीद सकते हैं. **अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभ:**
1. उत्पादन में वृद्धि: हर देश उन चीज़ों का निर्यात करता है जिन्हें वह दूसरे देशों से कम लागत पर बना सकता है. निर्यात करने वाले देश उन चीज़ों के उत्पादन में खास बन जाते हैं और अपना उत्पादन बढ़ा पाते हैं.
2. राष्ट्रीय आय में वृद्धि: निर्यात से मिलने वाली आय से जुड़े देशों की राष्ट्रीय आय बढ़ जाती है.
3. अतिरिक्त सामान की बिक्री: अगर कोई देश अपनी ज़रूरत से ज़्यादा चीज़ें बनाता है, तो वह उन्हें दूसरे देशों को बेचकर विदेशी पैसा कमाता है. इससे व्यर्थ पड़े संसाधनों जैसे भूमि और श्रम का भी उपयोग होता है.
4. संसाधनों का सही इस्तेमाल: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से देश अपने संसाधनों का सबसे अच्छा इस्तेमाल कर पाते हैं, क्योंकि वे तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत पर काम करते हैं.
5. श्रम विभाजन और विशिष्टीकरण के फायदे: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल देशों को क्षेत्रीय श्रम विभाजन और विशेषीकरण के सभी फायदे मिलते हैं.
6. बाज़ार का विस्तार: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से वस्तुओं और सेवाओं के बाज़ार की सीमाएं फैल जाती हैं.
7. बड़े पैमाने पर उत्पादन: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से वस्तुओं की मांग बढ़ती है, जिससे उन्हें बड़े पैमाने पर बनाया जाने लगता है.
8. वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता: अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ने से वे चीज़ें और सेवाएं भी मिल जाती हैं जो देश में उपलब्ध नहीं होतीं.
9. मूल्यों में समानता: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण दुनिया भर में चीज़ों के दाम एक जैसे होने लगते हैं.
10. सांस्कृतिक लाभ: अंतरराष्ट्रीय व्यापार सभ्यता और संस्कृति को सबसे अच्छे से फैलाता है. इससे अलग-अलग देशों की संस्कृति, भाषा, धर्म, परंपराओं और रीति-रिवाजों को एक-दूसरे से जानने का मौका मिलता है. **अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से होने वाली हानियाँ:**
1. प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग: ज़्यादा विदेशी पैसा कमाने के लिए विकासशील देश अपने प्राकृतिक संसाधनों का बहुत ज़्यादा उपयोग करने लगते हैं, जिससे खनिज संसाधनों के भंडार तेज़ी से खत्म हो जाते हैं.
2. देश का एकतरफा विकास: विदेशी व्यापार के कारण हर देश उन चीज़ों के उत्पादन पर ध्यान देता है जिन्हें वह सबसे कम लागत पर बना सकता है. इससे देश में संतुलित विकास नहीं होता और केवल कुछ ही उद्योग विकसित हो पाते हैं, जिससे कई संसाधनों का उपयोग नहीं हो पाता.
3. विदेशी निर्भरता: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से देश एक-दूसरे पर ज़्यादा निर्भर हो जाते हैं. किसी आपातकाल में आयात-निर्यात रुकने पर देश में बड़ा आर्थिक संकट आ सकता है.
4. विदेशी प्रतिस्पर्धा का बुरा प्रभाव: अगर बाहर से सस्ती चीज़ें आती हैं, तो देश के कई उद्योग बंद होने की कगार पर आ सकते हैं.
5. राजनीतिक समस्याएं: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से अमीर विदेशी व्यापारी और शासक कमज़ोर देशों के प्राकृतिक संसाधनों पर अपना कब्ज़ा करने लगते हैं, जिससे देश की आज़ादी खतरे में पड़ जाती है. आज वैश्वीकरण से नए उपनिवेशवाद का विस्तार देखने को मिल रहा है.
**भारत का विदेशी व्यापार (अप्रैल-दिसम्बर 2015 के आंकड़े):**
विश्व व्यापार संगठन के प्रभाव से भारत के विदेशी व्यापार पर कई असर पड़े हैं. वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी व्यापार गंभीर मंदी का शिकार हुआ है. अप्रैल-दिसम्बर 2015 में वैश्विक मांग में कमी के कारण भारत के निर्यात और आयात दोनों में गिरावट देखी गई. डॉलर मूल्य के साथ-साथ रुपये के मूल्य में भी गिरावट दर्ज की गई. तेल और गैर-तेल दोनों आयातों में कमी आई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में खनिज तेल की कीमतों में गिरावट के कारण 2015-15 की अवधि में तेल आयात बिल में 41.6% की कमी दर्ज की गई. इस अवधि में देश के व्यापार घाटे में भी कमी आई. गैर-तेल आयात 235 अरब डॉलर से घटकर 227 अरब डॉलर रह गया.

अप्रैल-दिसम्बर डालर मूल्य में (अरब डालर में)2014-152015-16
निर्यात239.93196.60 (-18.06)
आयात351.61295.81 (-15.87)
व्यापार शेष111.6899.21
रुपए मूल्य में (करोड़ रुपए में)
निर्यात14,58,09412,73,323 (-12.67)
आयात21,36,85519,15,849 (-10.34)
व्यापार शेष6,78,7616,42,526

नोट: कोष्ठक में दिए गए आंकड़े पूर्व वर्ष की तुलना में प्रतिशत कमी दर्शाते हैं.
**अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्व:** अंतरराष्ट्रीय व्यापार उत्पादन में विशिष्टीकरण का नतीजा है. जब विभिन्न देश वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन में श्रम विभाजन और विशेषीकरण का इस्तेमाल करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाता है. इस तरह का विशेषीकरण व्यापार को जन्म दे सकता है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता और हस्तांतरणीयता के सिद्धांतों पर आधारित होता है. व्यापारिक भागीदारी से सभी को एक जैसा लाभ मिलना चाहिए. आज, व्यापार विश्व के आर्थिक संगठनों का आधार बन गया है और यह देशों की विदेश नीति से जुड़ा है. आधुनिक परिवहन और संचार प्रणालियों के कारण कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार से मिलने वाले लाभों को छोड़ना नहीं चाहता है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के चार मुख्य हिस्से (पक्ष) ये हैं:
1. व्यापार की मात्रा (परिमाण).
2. व्यापार का संयोजन.
3. व्यापार की दिशा.
4. व्यापार संतुलन. **व्यापार की मात्रा:** बेची गई वस्तुओं का असली भार या मात्रा ही व्यापार का परिमाण कहलाता है, लेकिन वस्तुओं की मात्रा कभी उनके मूल्य का सूचक नहीं हो सकती. व्यापारिक सेवाओं को भी वजन में नहीं मापा जा सकता, इसलिए व्यापार की गई वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा को उनके मूल्य के हिसाब से मापा जाता है.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में देश वह चीज़ें खरीदते और बेचते हैं जो वे खुद नहीं बना सकते या जो उन्हें सस्ती मिलती हैं. इससे उत्पादन बढ़ता है, देशों की आय बढ़ती है और संसाधन अच्छे से इस्तेमाल होते हैं. लेकिन इसके नुकसान भी हैं, जैसे प्राकृतिक संसाधनों का ज़्यादा उपयोग, देश का एकतरफा विकास और दूसरे देशों पर निर्भरता. भारत के व्यापारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 में निर्यात और आयात दोनों में गिरावट आई, जिससे व्यापार घाटा कम हुआ. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के चार मुख्य हिस्से मात्रा, संयोजन, दिशा और संतुलन हैं.

🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्न में व्यापार की परिभाषा, लाभ, हानियाँ और प्रमुख पक्षों का विस्तृत वर्णन करें. भारतीय व्यापार के आंकड़ों जैसे प्रासंगिक उदाहरणों को शामिल करना आपके उत्तर को मजबूत करेगा.

 

Question 4. प्रादेशिक व्यापार समूह संगठनों का वर्णन कीजिए।
Answer: विश्व में सात प्रमुख प्रादेशिक व्यापार समूह हैं:
1. **आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन-ASEAN):** अगस्त 1967 में बना, इसमें सात दक्षिण-पूर्व एशियाई देश- ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार शामिल हैं. इसका मुख्यालय इंडोनेशिया के जकार्ता में है. इसका उद्देश्य व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक विकास को तेज करना, सांस्कृतिक विकास और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को बनाए रखना है. व्यापार की मुख्य वस्तुएं कृषि उत्पाद, रबड़, पाम ऑयल, चावल, नारियल, कॉफी और सॉफ्टवेयर हैं. खनिज पदार्थों में तांबा, निकिल और टंगस्टन; ऊर्जा संसाधनों में कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस शामिल हैं.
2. **सी.आई.एस. (स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल-C.I.S.):** इस समूह में पूर्व सोवियत संघ के विघटन के बाद के 12 देश- आर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मोल्दोवा, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. इसका मुख्यालय बेलारूस के मिन्स्क नगर में है. इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार के अलावा अर्थव्यवस्था, रक्षा और विदेश नीति के मामलों में तालमेल और सहयोग बढ़ाना है. अशोधित तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, कपास, रेशम और एल्यूमीनियम इस समूह की मुख्य व्यापारिक वस्तुएं हैं.
3. **यूरोपीय संघ (European Union-E.U.):** यूरोपीय संघ का गठन मूल रूप से मार्च 1957 में यूरोप के छह देशों- इटली, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, हॉलैंड और लक्जेमबर्ग ने किया था. बाद में 1992 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फिनलैंड, आयरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देश भी इसमें शामिल हो गए, और इसका नाम ई.यू. पड़ गया. इसका मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स नगर में है. कृषि उत्पाद, खनिज, रसायन, लकड़ी, कागज, परिवहन के वाहन, ऑप्टिकल उपकरण, घड़ियां, कलाकृतियां और पुरानी वस्तुएं इस समूह की मुख्य व्यापारिक वस्तुएं हैं. यूरोपीय संघ के देशों में एक मुद्रा (यूरो) और एक ही बाजार भी है.
4. **लैटिन अमेरिकन इंटीग्रेशन एसोसिएशन (Latin American Integration Association-LAIA):** 1960 में बने इस व्यापार समूह में 10 लैटिन अमेरिकी देश- अर्जेंटीना, बोलीविया, ब्राजील, कोलंबिया, इक्वाडोर, मैक्सिको, पराग्वे, पेरू, उरुग्वे और वेनेजुएला शामिल हैं. इसका मुख्यालय उरुग्वे देश के मोंटेवीडियो में है. इस व्यापार समूह का विस्तार 1994 में मैक्सिको को सदस्य बनाकर किया गया, और अब इसमें अन्य लैटिन अमेरिकी देश भी शामिल हैं. कृषि उत्पाद, मोटर गाड़ियां, ऑटो पार्ट्स, कंप्यूटर और कपड़े इस समूह की मुख्य व्यापारिक वस्तुएं हैं.
5. **ओपेक (Organisation of Petroleum Exporting Countries-OPEC):** 1949 में स्थापित इस तेल निर्यातक देशों के संगठन में अल्जीरिया, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला जैसे देश सदस्य हैं. इस संगठन का उद्देश्य खनिज तेल नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना है. कच्चा खनिज तेल इस संगठन का एकमात्र निर्यात उत्पाद है.
6. **साफ्टा (South Asian Free Trade Agreement-SAFTA):** दक्षिण एशिया के बांग्लादेश, मालदीव, भूटान, नेपाल, भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों के इस व्यापारिक संगठन की स्थापना जनवरी 2006 में की गई थी. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य अंतर-क्षेत्रीय व्यापार पर करों को कम करना है.
In simple words: प्रादेशिक व्यापार समूह कुछ देशों के संगठन हैं जो व्यापार बढ़ाने के लिए काम करते हैं. इनमें आसियान (दक्षिण-पूर्व एशिया), सी.आई.एस. (पूर्व सोवियत देश), यूरोपीय संघ (यूरोप), लाटिन अमेरिकन इंटीग्रेशन एसोसिएशन (लैटिन अमेरिका), ओपेक (तेल उत्पादक देश) और साफ्टा (दक्षिण एशिया) जैसे संगठन शामिल हैं. हर समूह के अपने सदस्य देश, मुख्यालय और मुख्य व्यापारिक वस्तुएं हैं.

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रादेशिक व्यापार समूहों का वर्णन करते समय उनके नाम, संक्षिप्त रूप, सदस्य देश, मुख्यालय और मुख्य उद्देश्य या व्यापारिक वस्तुओं को स्पष्ट रूप से बताएं.

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्राचीन समय में रेशम व्यापारिक मार्ग जोड़ता था।
(अ) रोम को चीन से
(ब) तेहरान को भारत से
(स) बर्लिन को भारत से
(द) काबुल को चीन से
Answer: (अ) रोम को चीन से
In simple words: पुराना रेशम मार्ग रोम और चीन को जोड़ता था, जिससे दोनों जगहों के बीच व्यापार होता था.

🎯 Exam Tip: प्राचीन व्यापार मार्गों, विशेषकर रेशम मार्ग से जुड़े मुख्य स्थानों को याद रखें.

 

Question 2. 17वीं व 18वीं शताब्दी में किन लोगों के द्वारा दास व्यापार किया गया?
(अ) पुर्तगालियों के द्वारा
(ब) डचों तथा स्पेनिशों के द्वारा
(स) अंग्रेजों के द्वारा
(द) उक्त सभी के द्वारा
Answer: (द) उक्त सभी के द्वारा
In simple words: 17वीं और 18वीं सदी में पुर्तगाली, डच, स्पेनिश और अंग्रेज सभी ने दास व्यापार किया था.

🎯 Exam Tip: औपनिवेशिक काल के व्यापारिक पैटर्न और उसमें शामिल प्रमुख देशों को याद रखना ऐतिहासिक संदर्भ को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. गैट (GATT) को किस वर्ष में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में रूपान्तरित किया गया?
(अ) 1995
(ब) 1992
(स) 1948
(द) 1947
Answer: (अ) 1995
In simple words: गैट को 1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में बदल दिया गया था.

🎯 Exam Tip: गैट से विश्व व्यापार संगठन में संक्रमण का वर्ष महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव था.

 

Question 4. आसियानं व्यापार समूह में निम्न में से कौन-सा राष्ट्र सम्मिलित नहीं है?
(अ) इण्डोनेशिया
(ब) रूस
(स) सिंगापुर
(द) मलेशिया
Answer: (ब) रूस
In simple words: आसियान समूह में इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया तो हैं, लेकिन रूस उसका सदस्य नहीं है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार समूहों के सदस्य देशों की सूची याद रखना, खासकर यह पहचानना कि कौन सा देश सदस्य नहीं है, महत्वपूर्ण है.

 

Question 5. सी.आई.एस. का मुख्यालय है –
(अ) मिन्सक में
(ब) वियना में
(स) ब्रुसेल्स में
(द) जकार्ता में
Answer: (अ) मिन्सक में
In simple words: सी.आई.एस. का मुख्य दफ्तर मिन्सक में है.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मुख्यालयों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए बहुत उपयोगी होता है.

 

Question 6. यूरोपियन यूनियन का गठन कब किया गया?
(अ) 1990 में
(ब) 1992 में
(स) 1994 में
(द) 1996 में
Answer: (ब) 1992 में
In simple words: यूरोपियन यूनियन को 1992 में बनाया गया था.

🎯 Exam Tip: यूरोपीय संघ के गठन का वर्ष याद रखें, क्योंकि यह यूरोपीय एकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

 

Question 7. निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
(अ) एशिया
(ब) यूरोप
(स) उत्तरी अमेरिका
(द) अफ्रीका
Answer: (ब) यूरोप
In simple words: दुनिया में सबसे ज़्यादा व्यापार यूरोप से होता है.

🎯 Exam Tip: वैश्विक व्यापार में प्रमुख महाद्वीपों की भूमिका और उनके व्यापार प्रवाह की मात्रा को समझें.

 

Question 8. दक्षिण अमेरिकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है?
(अ) ब्राजील
(ब) वेनेजुएला
Answer: (ब) वेनेजुएला
In simple words: वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का एक देश है जो ओपेक का हिस्सा है.

🎯 Exam Tip: ओपेक जैसे संगठनों के सदस्य देशों को याद रखें, विशेषकर विभिन्न महाद्वीपों से उनके प्रतिनिधित्व को.

 

Question 10. ओपेक नामक संगठन का मुख्यालय है -
(अ) रियाद में
(ब) तेहरान में
(स) वियना में
(द) जकार्ता में
Answer: (स) वियना में
In simple words: ओपेक का मुख्य दफ्तर ऑस्ट्रिया के वियना शहर में है.

🎯 Exam Tip: ओपेक जैसे प्रमुख संगठनों के मुख्यालयों को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है.

 

Question 11. निम्नलिखित में में से पश्चिमी एशिया का कौन-सा एक देश ओपेक का सदस्य नहीं है?
(अ) ईराक
(ब) इरान
(स) सऊदी अरब
(द) ओमान
Answer: (द) ओमान
In simple words: इराक, ईरान और सऊदी अरब ओपेक के सदस्य हैं, लेकिन ओमान इसका सदस्य नहीं है.

🎯 Exam Tip: ओपेक सदस्य देशों की सूची को ध्यान से पढ़ें, विशेष रूप से उन देशों को जो संबंधित क्षेत्र से होने के बावजूद सदस्य नहीं हैं.

 

Question 12. एकल मुद्रा के साथ एकल बाजार निम्नलिखित में से किस प्रादेशिक समूह का एक उद्देश्य है?
(अ) आसियान
(ब) साफ्टा
(स) यूरोपियन यूनियन
(द) नाफ्टा
Answer: (स) यूरोपियन यूनियन
In simple words: यूरोपीय यूनियन का लक्ष्य एक ही मुद्रा (यूरो) और एक ही बाजार बनाना है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रीय व्यापार समूहों के विशिष्ट उद्देश्यों को याद रखें, जैसे कि यूरोपीय संघ की 'एकल मुद्रा' और 'एकल बाजार' की अवधारणा.

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए –

स्तम्भ अस्तम्भ ब
((i) साफ्टा)(स) जेनेवा
(ii) आसियान(द) जकार्ता
(iii) सी. आई. एस.(य) मिन्स्क
(iv) ई. यू. (यूरोपीय संघ)(अ) ब्रुसेल्स
(v) ओपेक(ब) वियना

Question. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए –
Answer:
(i) स
(ii) द
(iii) य
(iv) अ
(v) बे
In simple words: सही मिलान यह है: साफ्टा का मुख्यालय जेनेवा में है, आसियान का जकार्ता में, सी.आई.एस. का मिन्स्क में, यूरोपीय संघ का ब्रुसेल्स में और ओपेक का वियना में.

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक संगठन और उसके मुख्यालय को ध्यान से याद रखें ताकि सही जोड़े बना सकें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. व्यापार कौन-सा आर्थिक क्रियाकलाप है?
Answer: व्यापार तृतीयक आर्थिक क्रियाकलापों में शामिल क्रियाकलाप है. इसमें सेवाओं का आदान-प्रदान होता है.
In simple words: व्यापार एक सेवा का काम है, इसलिए इसे तृतीयक आर्थिक क्रियाकलाप कहते हैं.

🎯 Exam Tip: आर्थिक क्रियाकलापों के विभिन्न क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) और उनमें शामिल गतिविधियों को याद रखें.

 

Question 2. व्यापार के स्तर कौन-कौन से हैं?
Answer: व्यापार के दो मुख्य स्तर हैं:
1. राष्ट्रीय व्यापार.
2. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार.
In simple words: व्यापार के दो तरीके हैं: देश के अंदर व्यापार करना और दूसरे देशों के साथ व्यापार करना.

🎯 Exam Tip: व्यापार के मुख्य स्तरों (राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय) और उनके बीच के अंतर को समझें.

 

Question 3. राष्ट्रीय व्यापार किसे कहते हैं?
Answer: जब वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान एक ही देश की सीमाओं के अंदर होता है, तो उसे राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं. यह व्यापार देश के भीतर ही होता है.
In simple words: जब सामान और सेवाएं एक ही देश के अंदर खरीदी-बेची जाती हैं, तो उसे राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय व्यापार की परिभाषा में 'एक ही राष्ट्र की सीमाओं के भीतर' मुख्य वाक्यांश को शामिल करें.

 

Question 5. एशिया व यूरोप के बीच व्यापार कैसे बढ़ा है?
Answer: समुद्र में चलने वाले बड़े जहाजों (युद्धपोतों) के विकास के साथ ही यूरोप और एशिया के बीच व्यापार बढ़ गया. इन जहाजों ने लंबी दूरी तक सामान ले जाना आसान बना दिया.
In simple words: बड़े समुद्री जहाजों के आने से एशिया और यूरोप के बीच व्यापार बढ़ गया.

🎯 Exam Tip: परिवहन के साधनों के विकास का व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव को याद रखें.

 

Question 6. 15वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक दास व्यापार में कौन-से देश प्रमुख रूप से संलग्न रहे?
Answer: 15वीं से 18वीं शताब्दी तक दास व्यापार में मुख्य रूप से हॉलैंड, स्पेन, डेनमार्क, ग्रेट ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश शामिल थे.
In simple words: 15वीं से 18वीं सदी में हॉलैंड, स्पेन, डेनमार्क, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश दास व्यापार में शामिल थे.

🎯 Exam Tip: दास व्यापार में शामिल प्रमुख यूरोपीय देशों के नामों को याद रखें, क्योंकि यह औपनिवेशिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

Question 7. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार किसका परिणाम है?
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार उत्पादन में विशिष्टीकरण का परिणाम है. यानी, जब देश किसी खास चीज को बनाने में माहिर हो जाते हैं.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार इसलिए होता है क्योंकि हर देश किसी खास चीज़ को बनाने में अच्छा होता है.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मूल कारण के रूप में 'विशिष्टीकरण' (specialization) को याद रखें.

 

Question 8. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार कौन-कौन से हैं?
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पाँच मुख्य आधार ये हैं:
1. **राष्ट्रीय संसाधनों में भिन्नता:**
• भौगोलिक संरचना: ज़मीन की बनावट, खेती के संसाधन और पशुधन में अंतर होता है. नीची ज़मीन पर खेती ज़्यादा होती है, जबकि पहाड़ी इलाके पर्यटकों को खींचते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है.
• खनिज संसाधन: दुनिया में खनिज संसाधनों का वितरण एक जैसा नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है. खनिजों की उपलब्धता औद्योगिक विकास में भी मदद करती है.
• जलवायु: किसी देश की जलवायु वहां उगने वाले उत्पादों की विविधता को तय करती है, जिससे व्यापार को ताकत मिलती है.
2. **जनसंख्या कारक:** दुनिया के विभिन्न देशों में जनसंख्या का आकार, वितरण और विविधता अंतरराष्ट्रीय व्यापार की वस्तुओं के प्रकार और मात्रा को प्रभावित करती है.
• सांस्कृतिक कारक: विभिन्न देशों में अलग-अलग संस्कृतियों में कला और हस्तशिल्प के अलग-अलग रूप मिलते हैं. अच्छी गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों की दुनिया भर में मांग रहती है.
• जनसंख्या का आकार: जिन देशों में जनसंख्या ज़्यादा घनी होती है, वहां घरेलू व्यापार ज़्यादा और विदेशी व्यापार कम होता है. जिन देशों में लोगों का जीवन स्तर अच्छा होता है, वहां आयातित उत्पादों की मांग ज़्यादा होती है, जबकि कम जीवन स्तर वाले देशों में आयातित उत्पादों की मांग कम रहती है.
3. **आर्थिक विकास की अवस्था:** किसी देश के आर्थिक विकास की अवस्था यह तय करती है कि वह किस तरह की वस्तुओं का व्यापार करेगा. कृषि प्रधान देश विनिर्मित वस्तुओं के लिए कृषि उत्पाद बेचते हैं, जबकि औद्योगिक देश मशीनरी और तैयार माल बेचते हैं और कच्चा माल व खाद्यान्न आयात करते हैं.
4. **विदेशी निवेश की सीमा:** खनन, भारी इंजीनियरिंग और बागवानी कृषि जैसे क्षेत्रों के विकास के लिए पूंजी की कमी वाले विकासशील देशों में विदेशी निवेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है. औद्योगिक राष्ट्र विकासशील देशों में पूंजी-प्रधान उद्योग स्थापित करते हैं और बदले में खाद्य पदार्थ व खनिज आयात करते हैं. साथ ही, अपने उद्योगों के लिए देश-विदेश में बाजार भी बनाते हैं.
5. **परिवहन:** रेल, समुद्री और हवाई परिवहन के विकास और विस्तार के साथ-साथ प्रशीतन और परिरक्षण (रेफ्रिजरेशन और संरक्षण) की बेहतर सुविधाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया है.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुख्य आधार हैं देशों के संसाधनों में अंतर (जैसे भूगोल, खनिज, जलवायु), जनसंख्या का असर (जैसे संस्कृति और आबादी का घनत्व), देश के विकास का स्तर, दूसरे देशों से निवेश और परिवहन के बेहतर साधन.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आधारों को बताते समय, प्रत्येक आधार को मुख्य बिंदुओं (संसाधनों में भिन्नता, जनसंख्या कारक, आर्थिक विकास की अवस्था, विदेशी निवेश, परिवहन) के साथ समझाएं.

 

Question 9. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्वपूर्ण पक्ष कौन-कौन से हैं?
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के चार महत्वपूर्ण पक्ष ये हैं:
1. व्यापार का परिमाण.
2. व्यापार संयोजन.
3. व्यापार की दिशा.
4. व्यापार संतुलन.
व्यापार की गई वस्तुओं का वास्तविक भार ही व्यापार का परिमाण या मात्रा कहलाता है, लेकिन वस्तुओं की मात्रा उनके मूल्य का सूचक नहीं हो सकती. व्यापारिक सेवाओं को भी वजन में नहीं मापा जा सकता. इसलिए, व्यापार की गई वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा को उनके मूल्य के हिसाब से मापा जाता है. यह परिमाण ही व्यापार की स्थिति को दर्शाता है, इसलिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक महत्वपूर्ण पक्ष है.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के चार मुख्य हिस्से हैं: कितनी चीजें खरीदी-बेची गईं (परिमाण), कौन सी चीजें खरीदी-बेची गईं (संयोजन), किन देशों के बीच व्यापार हुआ (दिशा) और व्यापार का हिसाब-किताब (संतुलन). व्यापार का परिमाण उसकी असली मात्रा या मूल्य से पता चलता है.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के महत्वपूर्ण पक्षों को सूचीबद्ध करें और 'व्यापार का परिमाण' जैसे प्रमुख पक्ष को संक्षेप में परिभाषित करें.

 

Question 11. व्यापार सन्तुलन क्या है?
Answer: किसी देश के निर्यात (जो बेचा गया) और आयात (जो खरीदा गया) के कुल मूल्यों के बीच का अंतर ही व्यापार संतुलन कहलाता है. यह बताता है कि देश ने कितना सामान और सेवाएं बेचीं और कितनी खरीदीं.
In simple words: व्यापार संतुलन का मतलब है कि कोई देश जितना सामान बेचता है और जितना खरीदता है, उन दोनों के पैसों का कितना अंतर है.

🎯 Exam Tip: व्यापार संतुलन की परिभाषा में 'निर्यात और आयात के कुल मूल्यों के बीच का अंतर' जैसे मुख्य शब्द शामिल करें.

 

Question 12. व्यापार सन्तुलन किसका प्रलेखन करता है?
Answer: व्यापार संतुलन एक देश द्वारा दूसरे देशों से किए गए आयात (खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं) और निर्यात (बेची गई वस्तुओं और सेवाओं) की मात्रा का हिसाब रखता है. यह एक तरह का रिकॉर्ड है.
In simple words: व्यापार संतुलन से पता चलता है कि कोई देश दूसरे देशों से कितना सामान खरीदता और बेचता है.

🎯 Exam Tip: व्यापार संतुलन के 'प्रलेखन' (रिकॉर्ड रखने) की भूमिका को स्पष्ट करें, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात की मात्रा शामिल होती है.

 

Question 13. किसी देश का व्यापार सन्तुलन ऋणात्मक कब होता है? अथवा प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन से क्या आशय है?
Answer: यदि किसी देश के आयात (खरीदी गई वस्तुओं का मूल्य) का मूल्य उसके निर्यात (बेची गई वस्तुओं का मूल्य) से ज़्यादा हो जाता है, तो उसे ऋणात्मक या प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहते हैं. इसका मतलब है कि देश ने जितना बेचा, उससे ज़्यादा खरीदा.
In simple words: जब कोई देश जितना सामान बेचता है, उससे ज़्यादा सामान खरीद लेता है, तो उसका व्यापार संतुलन खराब (ऋणात्मक) हो जाता है.

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक व्यापार संतुलन को परिभाषित करते समय 'आयात मूल्य का निर्यात मूल्य से अधिक होना' पर जोर दें.

 

Question 14. ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
Answer: यदि आयात का मूल्य देश के निर्यात मूल्य की तुलना में ज़्यादा होता है, तो देश का भुगतान संतुलन ऋणात्मक हो जाता है. ऋणात्मक भुगतान संतुलन का मतलब है कि देश को दूसरे देशों को ज़्यादा पैसा देना है, जिससे देश के वित्तीय संचय (बचत) खत्म होने लगते हैं और देश आर्थिक रूप से कमजोर होता है.
In simple words: जब कोई देश ज़्यादा सामान खरीदता है और कम बेचता है, तो उसे दूसरे देशों को ज़्यादा पैसे देने पड़ते हैं, जिससे उसके पास पैसे कम हो जाते हैं और यह देश के लिए बुरा होता है.

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक भुगतान संतुलन के हानिकारक प्रभावों को बताते समय 'वित्तीय संचय की समाप्ति' और 'आर्थिक कमज़ोरी' जैसे परिणामों को उजागर करें.

 

Question 15. धनात्मक व्यापार सन्तुलन से क्या आशय है। अथवा किसी देश का अनुकूल व्यापार सन्तुलन कब होता है?
Answer: जब किसी देश का निर्यात (बेची गई वस्तुओं का मूल्य) उसके आयात (खरीदी गई वस्तुओं का मूल्य) से ज़्यादा होता है, तो उसे धनात्मक या अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं. इसका मतलब है कि देश ने जितना खरीदा, उससे ज़्यादा बेचा है और उसे दूसरे देशों से ज़्यादा पैसा मिला है.
In simple words: जब कोई देश जितना सामान खरीदता है, उससे ज़्यादा बेचता है, तो उसका व्यापार संतुलन अच्छा (धनात्मक या अनुकूल) होता है.

🎯 Exam Tip: धनात्मक व्यापार संतुलन को परिभाषित करते समय 'निर्यात मूल्य का आयात मूल्य से अधिक होना' पर जोर दें.

 

Question 17. द्विपाश्विक व्यापार किसे कहते हैं ?
Answer: जब दो देशों के बीच आपस में व्यापार होता है, तो उसे द्विपाश्विक व्यापार कहते हैं. इसमें केवल दो देश ही सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं.
In simple words: जब सिर्फ दो देश आपस में व्यापार करते हैं, तो उसे द्विपाश्विक व्यापार कहते हैं.

🎯 Exam Tip: द्विपाश्विक व्यापार की परिभाषा में 'दो देशों के द्वारा एक-दूसरे के साथ व्यापार' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें.

 

Question 18. बहुपाश्विक व्यापार किसे कहते हैं ?
Answer: जब अनेक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है, तो उसे बहुपाश्विक व्यापार कहते हैं. इसमें कई देश एक साथ व्यापारिक संबंध बनाते हैं.
In simple words: जब कई देश एक साथ आपस में सामान और सेवाएं खरीदते-बेचते हैं, तो उसे बहुपाश्विक व्यापार कहते हैं.

🎯 Exam Tip: बहुपाश्विक व्यापार की परिभाषा में 'अनेक देशों के मध्य वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें.

 

Question 19. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभों को लिखिए।
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुख्य लाभों में उत्पादन में वृद्धि, राष्ट्रीय आय में वृद्धि, अतिरिक्त सामान की बिक्री, संसाधनों का सही इस्तेमाल, श्रम विभाजन, बड़े पैमाने पर उत्पादन, वस्तुओं व सेवाओं की उपलब्धता, मूल्यों में समानता और सांस्कृतिक लाभ शामिल हैं.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से उत्पादन, आय और संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है, जिससे सामान ज़्यादा उपलब्ध होता है, कीमतें स्थिर रहती हैं और संस्कृतियां मिलती-जुलती हैं.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभों को सूचीबद्ध करते समय आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखें.

 

Question 20. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की हानियाँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार की हानियों में प्राकृतिक संसाधनों का बहुत ज़्यादा उपयोग, देश का एकतरफा विकास, दूसरे देशों पर निर्भरता, विदेशी प्रतिस्पर्धा का बुरा प्रभाव और राजनीतिक गुलामी मुख्य हैं.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से प्राकृतिक संसाधनों का ज़्यादा उपयोग, देश का असंतुलित विकास, बाहरी देशों पर निर्भरता, प्रतिस्पर्धा से नुकसान और राजनीतिक समस्याएं हो सकती हैं.

🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय व्यापार की हानियों को बताते समय आर्थिक, पर्यावरणीय और राजनीतिक नकारात्मक प्रभावों को शामिल करें.

 

Question 21. मुक्त व्यापार क्या है? अथवा व्यापार उदारीकरण से क्या आशय है?
Answer: अर्थव्यवस्थाओं को व्यापार के लिए खोलना ही मुक्त व्यापार या व्यापार उदारीकरण कहलाता है. इसमें व्यापारिक बाधाओं (जैसे सीमा शुल्क) को कम किया जाता है ताकि सामान और सेवाओं का आसानी से आदान-प्रदान हो सके.
In simple words: मुक्त व्यापार या व्यापार उदारीकरण का मतलब है, देशों के बीच व्यापार के नियमों और टैक्स को आसान बनाना ताकि व्यापार बिना रुकावट के हो सके.

🎯 Exam Tip: मुक्त व्यापार या व्यापार उदारीकरण की परिभाषा में 'अर्थव्यवस्थाओं को खोलना' और 'व्यापारिक अवरोधों (जैसे सीमा शुल्क) को कम करना' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें.

 

Question 23. गैट का गठन कब व क्यों किया गया ?
Answer: गैट (GATT) का गठन सन् 1948 में किया गया था. इसे कुछ देशों द्वारा दुनिया को उच्च सीमा शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं से मुक्त करने के लिए बनाया गया था. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान और निष्पक्ष बनाना था.
In simple words: गैट 1948 में बना था ताकि देश कम टैक्स और कम मुश्किलों के साथ आपस में व्यापार कर सकें.

🎯 Exam Tip: गैट के गठन का वर्ष और उसका मुख्य उद्देश्य (व्यापार बाधाओं को कम करना) याद रखें.

 

Question 24. विश्व व्यापार संगठन क्या है?
Answer: विश्व व्यापार संगठन एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो विभिन्न देशों के बीच वैश्विक व्यापार प्रणाली के नियमों को तय करता है. यह व्यापारिक संबंधों को व्यवस्थित करने में मदद करता है.
In simple words: विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा संगठन है जो दुनिया के देशों के लिए व्यापार के नियम बनाता है.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन की परिभाषा में 'विभिन्न देशों के मध्य वैश्विक व्यापार तंत्र के नियमों का निर्धारण' जैसे मुख्य वाक्यांश को शामिल करें.

 

Question 25. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना कब व कहाँ हुई ?
Answer: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना जनवरी 1995 में जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हुई थी.
In simple words: विश्व व्यापार संगठन 1995 में स्विट्जरलैंड के जेनेवा में शुरू हुआ था.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना का वर्ष और स्थान दोनों महत्वपूर्ण हैं, इन्हें याद रखें.

 

Question 26. विश्व व्यापार संगठन के गठन का क्या उद्देश्य है?
Answer: विश्व व्यापार संगठन के गठन का उद्देश्य विभिन्न सदस्य देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बिना किसी रुकावट के विकसित करना है. यह व्यापार को और ज़्यादा खुला और निष्पक्ष बनाने की कोशिश करता है.
In simple words: विश्व व्यापार संगठन का लक्ष्य देशों के बीच व्यापार को बिना किसी रोक-टोक के बढ़ाना है.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन के गठन के मुख्य उद्देश्य के रूप में 'अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को निर्बाध रूप से विकसित करना' पर ध्यान दें.

 

Question 27. विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से हैं ?
Answer: विश्व व्यापार संगठन के मुख्य कार्य ये हैं:
1. यह विश्वव्यापी व्यापार प्रणाली के लिए नियम तय करता है.
2. यह सदस्य देशों के बीच व्यापार से जुड़े विवादों को सुलझाता है.
3. यह दूरसंचार और बैंकिंग जैसी सेवाओं के साथ-साथ बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार को भी अपने कामों में शामिल करता है.
In simple words: विश्व व्यापार संगठन व्यापार के नियम बनाता है, देशों के व्यापार विवाद सुलझाता है और सेवा व बौद्धिक संपदा व्यापार को भी देखता है.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन के तीन आधारभूत कार्यों को बिंदुवार याद रखें, विशेषकर नियमों का निर्धारण और विवादों का निपटारा.

 

Question 28. विश्व व्यापार संगठन के किसी एक संस्थापक देश का नाम बताइए।
Answer: विश्व व्यापार संगठन के संस्थापक देशों में से एक भारत है.
In simple words: भारत विश्व व्यापार संगठन के शुरूआती देशों में से एक है.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन के कुछ प्रमुख संस्थापक देशों के नाम याद रखें.

 

Question 29. किन्हीं चार प्रादेशिक व्यापार समूहों के नाम लिखिए।
Answer: चार प्रादेशिक व्यापार समूह ये हैं:
1. आसियान
2. सी.आई.एस.
3. ओपेक
4. साफ्टा
In simple words: कुछ क्षेत्रीय व्यापार समूह आसियान, सी.आई.एस., ओपेक और साफ्टा हैं.

🎯 Exam Tip: प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार समूहों के नाम याद रखें, खासकर जिनके बारे में अध्याय में चर्चा की गई है.

 

Question 30. आसियान (ASEAN) के किन्हीं दो सदस्य देशों का नाम बताइए।
Answer: आसियान के दो सदस्य देश थाईलैंड और सिंगापुर हैं.
In simple words: थाईलैंड और सिंगापुर आसियान के सदस्य देश हैं.

🎯 Exam Tip: आसियान जैसे क्षेत्रीय समूहों के कुछ सदस्य देशों के नाम याद रखें.

 

Question 31. ओपेक की स्थापना कब की गई?
Answer: ओपेक की स्थापना सन् 1949 में की गई थी.
In simple words: ओपेक 1949 में बना था.

🎯 Exam Tip: ओपेक की स्थापना का वर्ष याद रखें, क्योंकि यह तेल बाजार को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण संगठन है.

 

Question 32. व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं ?
Answer: व्यापारिक समूह बनाने से राष्ट्रों को भौगोलिक निकटता, समान चीजें और पूरकता के आधार पर व्यापार करने में मदद मिलती है. इनसे विभिन्न देशों के बीच व्यापार बढ़ता है और व्यापार पर लगे प्रतिबंध भी हट जाते हैं, जिससे व्यापार आसान हो जाता है.
In simple words: व्यापारिक समूह बनाने से देश आसानी से व्यापार कर पाते हैं, व्यापार पर लगी रोक हट जाती है और एक-दूसरे के साथ अच्छी चीज़ें बेच पाते हैं.

🎯 Exam Tip: व्यापारिक समूहों के निर्माण के मुख्य लाभों (व्यापार वृद्धि और प्रतिबंधों में कमी) को याद रखें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

 

Question 1. स्पष्ट कीजिए कि किस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती है? अथवा राष्ट्रीय संसाधनों में विषमता से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होता है। कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है. इस संदर्भ में तीन मुख्य राष्ट्रीय संसाधनों की भिन्नता पर ध्यान देना ज़रूरी है:
1. **भौगोलिक संरचना:** अलग-अलग जगहों पर ज़मीन की बनावट, खेती के संसाधन और पशुधन में अंतर होता है. उदाहरण के लिए, मैदानी इलाकों में खेती ज़्यादा अच्छी होती है, जबकि पहाड़ी इलाके पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. यह भौगोलिक भिन्नता अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देती है.
2. **खनिज संसाधन:** दुनिया भर में खनिज संसाधनों का वितरण एक जैसा नहीं है. जहां खनिज ज़्यादा होते हैं, वहां औद्योगिक विकास भी तेज़ होता है. खनिजों की इस असमान उपलब्धता से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है क्योंकि एक देश उन खनिजों का आयात करता है जो उसके पास नहीं हैं और उन खनिजों का निर्यात करता है जो उसके पास बहुतायत में हैं.
3. **जलवायु:** किसी देश की जलवायु वहां पैदा होने वाले उत्पादों की विविधता को तय करती है. अलग-अलग जलवायु में अलग-अलग फसलें और वस्तुएं पैदा होती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बल मिलता है. उदाहरण के लिए, उष्णकटिबंधीय जलवायु वाले देश मसाले और फल निर्यात कर सकते हैं, जबकि ठंडी जलवायु वाले देश अन्य उत्पादों का निर्यात कर सकते हैं.
In simple words: प्राकृतिक संसाधनों में अंतर, जैसे ज़मीन, खनिज और मौसम, देशों को वह चीजें बनाने में मदद करता है जिनमें वे अच्छे हैं. फिर वे इन चीजों को दूसरे देशों को बेचते हैं और अपनी ज़रूरत की चीजें खरीदते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है.

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता (भौगोलिक संरचना, खनिज और जलवायु) को स्पष्ट करें और बताएं कि यह कैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करती है, उदाहरणों के साथ.

 

Question 2. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में जनसंख्या कारक आधार को स्पष्ट कीजिए।
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में जनसंख्या कारक बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. विश्व के विभिन्न देशों में जनसंख्या का आकार, उसका वितरण और उसमें मौजूद विविधता अंतरराष्ट्रीय व्यापार की वस्तुओं के प्रकार और मात्रा पर असर डालती है. इसके दो मुख्य पहलू हैं:
1. **सांस्कृतिक कारक:** दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग संस्कृतियों की वजह से कला और हस्तशिल्प के विभिन्न रूप मिलते हैं. बेहतरीन गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों की दुनिया भर में बहुत मांग होती है. जैसे, चीन के चीनी मिट्टी के बर्तन, ईरान के कालीन, उत्तरी अफ्रीका का चमड़े का काम और इंडोनेशिया के बटिक कपड़े बहुत कीमती माने जाते हैं और इनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है.
2. **जनसंख्या का आकार:** जिन देशों में जनसंख्या का घनत्व ज़्यादा होता है, वहां घरेलू व्यापार ज़्यादा होता है और विदेशी व्यापार कम होता है. इसके विपरीत, जिन देशों में लोगों का जीवन स्तर अच्छा होता है, वहां आयातित उत्पादों की मांग ज़्यादा होती है, जबकि कम जीवन स्तर वाले देशों में आयातित उत्पादों की मांग कम रहती है. इस तरह, जनसंख्या की विशेषताएं सीधे तौर पर किसी देश के आयात-निर्यात पैटर्न को प्रभावित करती हैं.
In simple words: जनसंख्या का आकार और संस्कृति अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करते हैं. सांस्कृतिक चीज़ों की दुनिया भर में मांग होती है. अगर देश में लोग ज़्यादा हैं, तो घरेलू व्यापार ज़्यादा होता है, और अगर लोगों का जीवन स्तर अच्छा है, तो वे ज़्यादा विदेशी सामान खरीदते हैं.

🎯 Exam Tip: जनसंख्या कारकों (सांस्कृतिक कारक और जनसंख्या का आकार) को स्पष्ट करें और बताएं कि वे कैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार और मात्रा को प्रभावित करते हैं, उदाहरणों के साथ.

 

Question 3. सांस्कृतिक का आधार है?
Answer: कला और संस्कृति किसी भी देश की पहचान का आधार होती है. अलग-अलग संस्कृतियों में कला और हस्तशिल्प के कई रूप विकसित होते हैं, जिनकी दुनिया भर में बहुत सराहना की जाती है. इन हस्तशिल्पों और कलात्मक वस्तुओं की विदेशों में हमेशा मांग रहती है. उदाहरण के लिए, चीन के चीनी मिट्टी के बर्तन, ईरान के कालीन, अफ्रीका की चमड़े की सामग्री और इंडोनेशिया के बटिक कपड़े आदि. ये सभी चीजें अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देती हैं क्योंकि ये अद्वितीय और विशिष्ट होती हैं.
In simple words: कला और संस्कृति किसी भी देश की ख़ास पहचान होती है. दुनिया भर में लोग इन खास चीज़ों को पसंद करते हैं, जैसे चीन के बर्तन या ईरान के कालीन, इसलिए इनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है.

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक कारकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आधार के रूप में बताते समय, विशिष्ट कला और हस्तशिल्प के उदाहरण दें और बताएं कि उनकी वैश्विक मांग कैसे व्यापार को बढ़ावा देती है.

 

Question 4. व्यापार का परिमाण अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण पक्ष क्यों है?
Answer: व्यापार की गई वस्तुओं का वास्तविक भार या मात्रा ही व्यापार का परिमाण कहलाता है. हालांकि, वस्तुओं की मात्रा हमेशा उनके मूल्य का सूचक नहीं होती. व्यापारिक सेवाओं को भी वजन में नहीं मापा जा सकता. इसीलिए, व्यापार की गई वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा को उनके मूल्य के हिसाब से मापा जाता है. व्यापार की स्थिति का पता परिमाण की प्रक्रिया से ही चलता है, यानी कितना सामान या सेवा खरीदी-बेची गई. इसी वजह से परिमाण अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक बहुत महत्वपूर्ण पक्ष है, क्योंकि यह व्यापार की वास्तविक तस्वीर दिखाता है.
In simple words: व्यापार का परिमाण (कितनी चीजें खरीदी-बेची गईं) महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि कितना सामान या सेवा का आदान-प्रदान हुआ. भले ही इसे सीधे वजन में न मापा जा सके, इसका मूल्य व्यापार की सही स्थिति बताता है.

🎯 Exam Tip: व्यापार के परिमाण के महत्व को समझाते हुए उसकी परिभाषा और 'व्यापार की स्थिति का पता चलने' के बिंदु पर जोर दें.

 

Question 6. व्यापार संतुलन क्या होता है? इसके प्रकारों को संक्षेप में बताइये।
Answer: **व्यापार संतुलन:** किसी देश के आयात (खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं) और निर्यात (बेची गई वस्तुओं और सेवाओं) के कुल मूल्यों के बीच का अंतर ही व्यापार संतुलन कहलाता है. यह बताता है कि देश ने कितना सामान और सेवाएं बेचीं और कितनी खरीदीं. **व्यापार संतुलन के प्रकार:** व्यापार संतुलन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. **अनुकूल व्यापार संतुलन (धनात्मक):** यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से ज़्यादा होता है, तो उसे उस देश के पक्ष में अनुकूल या धनात्मक व्यापार संतुलन कहा जाता है. इसका मतलब है कि देश ने जितना खरीदा, उससे ज़्यादा बेचा है और उसे दूसरे देशों से ज़्यादा पैसा मिला है.
2. **प्रतिकूल व्यापार संतुलन (ऋणात्मक):** यदि किसी देश का आयात उसके निर्यात से ज़्यादा होता है, तो उसे असंतुलित या प्रतिकूल या ऋणात्मक व्यापार संतुलन कहा जाता है. इसका मतलब है कि देश ने जितना बेचा, उससे ज़्यादा खरीदा है और उसे दूसरे देशों को ज़्यादा पैसा देना है.
In simple words: व्यापार संतुलन बताता है कि कोई देश जितना सामान बेचता और खरीदता है, उन दोनों के पैसों का कितना अंतर है. यह दो तरह का होता है: अनुकूल (जब ज़्यादा बेचते हैं) और प्रतिकूल (जब ज़्यादा खरीदते हैं).

🎯 Exam Tip: व्यापार संतुलन को परिभाषित करें और उसके दोनों प्रकारों (अनुकूल/धनात्मक और प्रतिकूल/ऋणात्मक) को उनके मुख्य विशेषताओं के साथ संक्षेप में बताएं.

 

Question 7. विदेशी निवेश की सीमा एवं परिवहन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार कैसे है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: **विदेशी निवेश की सीमा:** खनन, भारी इंजीनियरिंग और बागवानी कृषि जैसे क्षेत्रों के विकास के लिए पूंजी की कमी वाले विकासशील देशों में विदेशी निवेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है. औद्योगिक राष्ट्र विकासशील देशों में पूंजी-प्रधान उद्योग स्थापित करते हैं. इसके बदले में वे अपने देशों के लिए खाद्य पदार्थ और खनिजों का आयात सुनिश्चित करते हैं. इसके अलावा, वे अपने उद्योगों के लिए देश और विदेश में बाजार भी बनाते हैं. यह पूरा चक्र देशों के बीच व्यापार की मात्रा को बढ़ाता है. **परिवहन:** पुराने समय में परिवहन के साधनों की कमी के कारण व्यापार स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित था. केवल महंगी वस्तुएं, जैसे रत्न, रेशम और मसाले ही लंबी दूरी तक बेचे जाते थे. लेकिन आज रेल, समुद्री और हवाई परिवहन के विकास और विस्तार के साथ-साथ प्रशीतन (रेफ्रिजरेशन) और परिरक्षण (संरक्षण) की बेहतर सुविधाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बहुत बढ़ावा दिया है, जिससे दूर-दूर तक सामान आसानी से भेजा जा सकता है.
In simple words: विदेशी निवेश से विकासशील देशों में उद्योग बढ़ते हैं, जिससे व्यापार बढ़ता है. साथ ही, रेल, समुद्री और हवाई परिवहन जैसे बेहतर साधनों ने सामान को दूर तक ले जाना आसान बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बहुत बढ़ोतरी हुई है.

🎯 Exam Tip: विदेशी निवेश और परिवहन को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आधार के रूप में बताते समय, उनकी भूमिका (पूंजी और सुगम आवागमन) को स्पष्ट करें और बताएं कि वे कैसे व्यापार को बढ़ावा देते हैं.

 

Question 8. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकारों की विवेचना कीजिए। अथवा द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय व्यापार में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मुख्य रूप से दो वर्गों में बांटा गया है:
1. **द्विपक्षीय व्यापार:** जब दो देश आपस में एक-दूसरे के साथ सीधे व्यापार करते हैं, तो उसे द्विपक्षीय व्यापार कहते हैं. इसमें दोनों देश सीधे तौर पर वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं. जैसे, भारत और जापान के बीच सीधा व्यापार.
2. **बहुपक्षीय व्यापार:** जब कई देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है, तो उसे बहुपक्षीय व्यापार कहते हैं. इसमें एक देश कई व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार कर सकता है और किसी भी देश को 'सबसे पसंदीदा राष्ट्र' का दर्जा दे सकता है. यह व्यापारिक संबंध अधिक जटिल और व्यापक होते हैं. जैसे, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत होने वाला व्यापार.
In simple words: अंतरराष्ट्रीय व्यापार दो तरह का होता है: द्विपक्षीय व्यापार, जो सिर्फ दो देशों के बीच होता है; और बहुपक्षीय व्यापार, जो कई देशों के बीच होता है.

🎯 Exam Tip: द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, 'दो देश' और 'अनेक देश' जैसे मुख्य शब्दों पर जोर दें.

 

Question 11. व्यापार सन्तुलन क्या है?
Answer: किसी देश के निर्यात और आयात के कुल मूल्यों के बीच के अंतर को व्यापार सन्तुलन कहते हैं।
In simple words: ट्रेड बैलेंस किसी देश के कुल निर्यात मूल्य और कुल आयात मूल्य के बीच का अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि व्यापार संतुलन एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है जो किसी देश की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

 

Question 12. व्यापार सन्तुलन किसका प्रलेखन करता है?
Answer: व्यापार सन्तुलन एक देश के द्वारा अन्य देशों को किये गये आयात एवं इसी प्रकार निर्यात की गई वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा का प्रलेखन करता है।
In simple words: यह रिकॉर्ड करता है कि एक देश कितना सामान और सेवाएँ खरीदता है और कितना बेचता है।

🎯 Exam Tip: प्रलेखन का अर्थ है किसी जानकारी को लिखित रूप में दर्ज करना ताकि वह भविष्य के लिए सुरक्षित रहे।

 

Question 13. किसी देश का व्यापार सन्तुलन ऋणात्मक कब होता है?
अथवा
प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन से क्या आशय है?

Answer: यदि किसी देश के आयात का मूल्य, उस देश के निर्यात मूल्य से अधिक हो जाता है तो उसे ऋणात्मक अथवा प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन कहते हैं।
In simple words: जब कोई देश जितना सामान बेचता है उससे ज़्यादा खरीदता है, तो उसका व्यापार संतुलन ऋणात्मक होता है।

🎯 Exam Tip: प्रतिकूल व्यापार संतुलन का अर्थ है कि देश को भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता अधिक होती है।

 

Question 14. ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
Answer: यदि आयात का मूल्य देश के निर्यात मूल्य की अपेक्षा अधिक होता है तो देश ऋणात्मक भुगतान संतुलन की स्थिति रखता है। किसी देश का ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन उस देश में अन्तिम रूप में वित्तीय संचय की समाप्ति को अभिप्रेरित करता है।
In simple words: जब कोई देश ज्यादा आयात करता है और कम निर्यात, तो उसे पैसे की कमी हो सकती है और उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक भुगतान संतुलन से देश की विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ सकती है, जो आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।

 

Question 15. धनात्मक व्यापार सन्तुलन से क्या आशय है?
अथवा
किसी देश का अनुकूल व्यापार सन्तुलन कब होता है?

Answer: धनात्मक व्यापार संतुलन का अर्थ है कि जब किसी देश का निर्यात मूल्य उसके आयात मूल्य से अधिक होता है। इस स्थिति को अनुकूल व्यापार संतुलन भी कहते हैं।
In simple words: जब कोई देश ज़्यादा बेचता है और कम खरीदता है, तो उसका व्यापार संतुलन अच्छा माना जाता है, जिससे देश को फायदा होता है।

🎯 Exam Tip: धनात्मक व्यापार संतुलन देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ता है।

 

Question 16. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को दो भागों में बाँटा गया है-द्विपाश्विक व्यापार एवं बहुपाश्विक व्यापार।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड दो तरह का होता है: जब दो देशों के बीच हो (द्विपाश्विक) या बहुत सारे देशों के बीच हो (बहुपाश्विक)।

🎯 Exam Tip: हमेशा दोनों प्रकारों के नाम सही लिखें और याद रखें कि ये व्यापार की पार्टियों की संख्या पर आधारित हैं।

 

Question 17. द्विपाश्विक व्यापार किसे कहते हैं ?
Answer: जब दो देशों के द्वारा एक-दूसरे के साथ व्यापार किया जाता है तो उसे द्विपार्श्विक व्यापार कहा जाता है।
In simple words: जब सिर्फ दो देश आपस में व्यापार करते हैं, तो उसे द्विपार्श्विक व्यापार कहते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के व्यापार में अक्सर दोनों देशों के बीच विशेष समझौते होते हैं।

 

Question 18. बहुपाश्विक व्यापार किसे कहते हैं ?
Answer: जब अनेक देशों के मध्य वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार किया जाता है तो उसे बहुपार्श्विक व्यापार कहा जाता है।
In simple words: जब कई देश एक साथ आपस में सामान और सेवाओं का लेन-देन करते हैं, तो उसे बहुपाश्विक व्यापार कहते हैं।

🎯 Exam Tip: बहुपाश्विक व्यापार में विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे अंतर्राष्ट्रीय नियम अक्सर लागू होते हैं।

 

Question 19. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभों को लिखिए।
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख लाभों में उत्पादन में वृद्धि, राष्ट्रीय आय में वृद्धि, अतिरेक का निर्गम, संसाधनों का कुशल प्रयोग, श्रम विभाजन, बाजार विस्तार, बड़े पैमाने पर उत्पादन, वस्तुओं व सेवाओं की उपलब्धता, मूल्यों की समता व सांस्कृतिक लाभ शामिल हैं।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड से देश ज्यादा चीजें बना पाते हैं, ज्यादा कमाते हैं, बेकार सामान बेच पाते हैं, संसाधनों का अच्छे से इस्तेमाल करते हैं और दुनिया भर के बाजारों तक पहुँच पाते हैं।

🎯 Exam Tip: लाभों को संक्षेप में स्पष्ट करें और मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।

 

Question 20. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की हानियाँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की हानियों में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक विदोहन, देश का एकांगी विकास, विदेशी निर्भरता, विदेशी प्रतियोगिता का प्रतिकूल प्रभाव व राजनीतिक दासता प्रमुख हैं।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड से देश के प्राकृतिक संसाधन जल्दी खत्म हो सकते हैं, देश का विकास सिर्फ कुछ ही चीजों पर निर्भर हो सकता है, दूसरे देशों पर निर्भरता बढ़ जाती है, और स्थानीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है।

🎯 Exam Tip: हानियों को स्पष्ट करते समय उदाहरणों का उपयोग कर सकते हैं ताकि वे समझने में आसान हों।

 

Question 21. मुक्त व्यापार क्या है?
अथवा
व्यापार उदारीकरण से क्या आशय है?

Answer: व्यापार हेतु अर्थव्यवस्थाओं को खोलने का कार्य मुक्त व्यापार या व्यापार उदारीकरण कहा जाता है। यह कार्य व्यापारिक अवरोधों (जैसे सीमा शुल्क) को कम करके किया जाता है।
In simple words: मुक्त व्यापार का मतलब है कि जब देश बिना किसी खास रोक-टोक या टैक्स के आपस में सामान बेचते और खरीदते हैं।

🎯 Exam Tip: मुक्त व्यापार का मुख्य उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को आसान बनाना है।

प्रशुल्क एवं व्यापार का सामान्य समझौता (General Agreement on Trade and Tariff, GATT)

 

Question 23. गैट का गठन कब व क्यों किया गया ?
Answer: सन् 1948 में विश्व को उच्च सीमा शुल्क एवं विभिन्न प्रकार की अन्य बाधाओं से मुक्त कराने हेतु कुछ देशों के द्वारा गैट का गठन किया गया।
In simple words: गैट को 1948 में बनाया गया था ताकि दुनिया भर के देशों के बीच व्यापार करना आसान हो जाए और ज्यादा टैक्स या रुकावटें न रहें।

🎯 Exam Tip: गैट ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के गठन के लिए आधार तैयार किया।

 

Question 24. विश्व व्यापार संगठन क्या है?
Answer: विभिन्न देशों के मध्य वैश्विक व्यापार तंत्र के नियमों का निर्धारण करने वाले अन्तर्राष्ट्रीय संगठन को विश्व व्यापार संगठन कहा जाता है।
In simple words: WTO एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो दुनिया के देशों के बीच व्यापार के नियम बनाती है।

🎯 Exam Tip: WTO यह सुनिश्चित करता है कि व्यापार निष्पक्ष और सुचारू रूप से चले।

 

Question 25. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना कब व कहाँ हुई ?
Answer: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना जनवरी 1995 में जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हुई।
In simple words: WTO को 1995 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में स्थापित किया गया था।

🎯 Exam Tip: यह गैट समझौते का स्थान लेने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक संगठन है।

 

Question 26. विश्व व्यापार संगठन के गठन का क्या उद्देश्य है?
Answer: विश्व व्यापार संगठन के गठन का उद्देश्य विभिन्न सदस्य देशों के मध्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को निर्बाध रूप से विकसित करना है।
In simple words: WTO इसलिए बनाया गया था ताकि सभी सदस्य देशों के बीच इंटरनेशनल ट्रेड बिना किसी रुकावट के आसानी से बढ़ सके।

🎯 Exam Tip: "निर्बाध" शब्द का अर्थ है बिना किसी बाधा या रुकावट के।

 

Question 27. विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से हैं ?
Answer:
1. विश्व व्यापार संगठन विश्वव्यापी व्यापार तन्त्र के लिए नियमों का निर्धारण करता है।
2. यह सदस्य देशों के मध्य व्यापार सम्बन्धी विवादों का निपटारा करता है।
3. यह संगठन दूरसंचार तथा बैंकिंग जैसी सेवाओं तथा बौद्धिक सम्पदा अधिकार के व्यापार को भी अपने कार्यों में सम्मिलित करता है।
In simple words: WTO दुनिया भर में व्यापार के नियम बनाता है, देशों के व्यापार झगड़ों को सुलझाता है, और टेलीकॉम, बैंकिंग जैसी सेवाओं के साथ-साथ बौद्धिक संपत्ति के व्यापार को भी देखता है।

🎯 Exam Tip: WTO के कार्यों को समझने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्व को समझना आसान हो जाता है।

 

Question 28. विश्व व्यापार संगठन के किसी एक संस्थापक देश का नाम बताइए।
Answer: विश्व व्यापार संगठन के संस्थापक देशों में भारत भी शामिल है। अन्य संस्थापक देश संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ के सदस्य देश आदि थे।
In simple words: भारत WTO को बनाने वाले शुरुआती देशों में से एक था।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि भारत जैसे विकासशील देश भी वैश्विक व्यापार नीतियों को आकार देने में भागीदार रहे हैं।

 

Question 29. किन्हीं चार प्रादेशिक व्यापार समूहों के नाम लिखिए।
Answer:
1. आसियान (ASEAN)
2. सी.आई.एस. (CIS)
3. ओपेक (OPEC)
4. साफ्टा (SAFTA)
In simple words: कुछ बड़े व्यापार समूह आसियान, सी.आई.एस., ओपेक और साफ्टा हैं, जो अपने सदस्यों के बीच व्यापार को आसान बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रादेशिक व्यापार समूह क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देते हैं।

 

Question 30. आसियान (ASEAN) के किन्हीं दो सदस्य देशों का नाम बताइए।
Answer:
1. थाईलैण्ड
2. सिंगापुर
In simple words: आसियान समूह के दो देश थाईलैंड और सिंगापुर हैं।

🎯 Exam Tip: आसियान दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक संगठन है।

 

Question 31. ओपेक की स्थापना कब की गई?
Answer: ओपेक की स्थापना सन् 1949 में की गई।
In simple words: ओपेक संगठन 1949 में बनाया गया था।

🎯 Exam Tip: ओपेक तेल निर्यातक देशों का एक समूह है जो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करता है।

 

Question 32. व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं ?
Answer: व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा व्यापार की मदों में भौगोलिक सामीप्य, समरूपता तथा पूरकता प्राप्त होती है। इनके द्वारा विभिन्न देशों के मध्य व्यापार बढ़ाने तथा व्यापार पर प्रतिबन्ध हटाने में सहायता मिलती है।
In simple words: व्यापार समूह बनाने से देश एक-दूसरे के करीब आते हैं, एक जैसी चीजें बेचते हैं, एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हैं, और व्यापार करना आसान हो जाता है क्योंकि रुकावटें कम होती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रादेशिक व्यापार समूह सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करते हैं।

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

 

Question 1. स्पष्ट कीजिए कि किस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती है?
अथवा
राष्ट्रीय संसाधनों में विषमता से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होता है। कथन को स्पष्ट कीजिए।

Answer: प्राकृतिक संसाधनों (राष्ट्रीय संसाधनों) में भिन्नता-इस संदर्भ में निम्नलिखित तीन राष्ट्रीय संसाधनों की भिन्नता उल्लेखनीय है -
• भौगोलिक संरचना: विभिन्न देशों की भौगोलिक बनावट अलग-अलग होती है, जिससे कृषि और पशुधन जैसे संसाधनों में अंतर आता है। उपजाऊ मैदानों में खेती ज्यादा होती है, जबकि पहाड़ी इलाके पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इस अंतर के कारण इंटरनेशनल ट्रेड बढ़ता है।
• खनिज संसाधन: दुनिया में खनिज संसाधनों का वितरण एक समान नहीं है। जहाँ खनिज ज्यादा होते हैं, वहाँ से उनका निर्यात होता है, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
• जलवायु: हर देश की जलवायु अलग होती है, जिससे अलग-अलग तरह की फसलें और उत्पाद पैदा होते हैं। ये विभिन्नताएँ इंटरनेशनल ट्रेड को बढ़ावा देती हैं।
In simple words: जब अलग-अलग देशों में ज़मीन, खनिज या मौसम अलग होते हैं, तो हर देश कुछ खास चीजें ही बना पाता है। इस अंतर के कारण देश उन चीजों का व्यापार करते हैं जो उनके पास नहीं होतीं, जिससे इंटरनेशनल ट्रेड बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सबसे बुनियादी कारणों में से एक है।

 

Question 2. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में जनसंख्या कारक आधार को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनसंख्या कारक-विश्व के विभिन्न देशों में जनसंख्या का आकार, वितरण तथा उसकी विविधता अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की वस्तुओं के प्रकार तथा मात्रा को प्रभावित करती है -
1. सांस्कृतिक कारक: अलग-अलग देशों में अलग-अलग कला और हस्तशिल्प पाए जाते हैं। चीन के चीनी मिट्टी के बर्तन, ईरान के कालीन, अफ्रीका के चमड़े का काम और इंडोनेशिया के बटिक वस्त्र जैसे बेहतरीन हस्तशिल्पों की दुनिया भर में बहुत मांग होती है, जिससे व्यापार बढ़ता है।
2. जनसंख्या का आकार: जिन देशों में ज्यादा लोग रहते हैं, वहाँ अंदरूनी व्यापार अधिक होता है और बाहरी व्यापार कम। जिन देशों में लोगों का जीवन-स्तर अच्छा होता है, वे बाहर से ज्यादा सामान मँगवाते हैं, जबकि कम जीवन-स्तर वाले देश बाहर से कम सामान मँगवाते हैं।
In simple words: जनसंख्या, उसकी संस्कृति और जीवन-स्तर इंटरनेशनल ट्रेड को प्रभावित करते हैं। जैसे, अच्छी कारीगरी वाले सामान की दुनिया भर में मांग होती है, और अमीर देश ज्यादा सामान खरीदते हैं, जबकि गरीब देश कम खरीदते हैं।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या कारक केवल संख्या ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पसंद और आर्थिक क्षमता को भी दर्शाते हैं।

 

Question 3. सांस्कृतिक कारक किस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार है?
Answer: कला व संस्कृति किसी भी देश की पहचान का आधार होती है। विशिष्ट संस्कृतियों में कला तथा हस्तशिल्प के विभिन्न रूप विकसित होते हैं। इनको विश्व भर में सराहा जाता है। इन हस्तशिल्पों। कलात्मक वस्तुओं की विदेशों में माँग बनी रहती है। यथा-चीन के चीनी मिट्टी के बर्तन, ईरान की कालीन, अफ्रीका की चमड़े की सामग्री, इण्डोनेशिया के बटिक वस्त्र आदि। ये सभी व्यापार को बढ़ावा देते हैं।
In simple words: हर देश की अपनी खास कला और संस्कृति होती है, जिससे अनोखे हस्तशिल्प बनते हैं। जब ये चीजें दुनिया भर में पसंद की जाती हैं, तो उन्हें दूसरे देशों में बेचा जाता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रेड बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक उत्पाद देश की पहचान और उसकी कारीगरी का प्रदर्शन करते हैं, जिससे उन्हें वैश्विक बाजार में एक खास जगह मिलती है।

 

Question 4. व्यापार का परिमाण अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण पक्ष क्यों है?
Answer: व्यापार की गई वस्तुओं का वास्तविक भार व्यापार का परिमाण या मात्रा कहलाता है। किन्तु वस्तुओं की मात्रा कभी वस्तुओं का मूल्य या सूचक नहीं हो सकती। यही नहीं, व्यापारिक सेवाओं को तौल में नहीं मापा जा सकता। यही कारण है कि व्यापार की गयी वस्तुओं तथा सेवाओं की मात्रा को उनके मूल्य के रूप में मापा जाता है। इसे परिमाण की प्रक्रिया से ही व्यापार की स्थिति का पता चलता है। इसी कारण परिमाण अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्त्वपूर्ण पक्ष है।
In simple words: व्यापार का परिमाण बताता है कि कितनी चीज़ें बेची और खरीदी गईं। इसे वजन में नहीं माप सकते, इसलिए पैसे में मापते हैं। इससे पता चलता है कि व्यापार कितना बड़ा है, इसलिए यह बहुत ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: व्यापार का परिमाण किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार और उसकी वैश्विक भागीदारी का संकेत देता है।

 

Question 6. व्यापार संतुलन क्या होता है? इसके प्रकारों को संक्षेप में बताइये।
Answer: व्यापार संतुलन-किसी देश के आयात व निर्यात के मध्य मूल्यों में सम स्वरूप को उस देश का व्यापार संतुलन कहा जाता है। व्यापार संतुलन के प्रकार-व्यापार संतुलन के निम्न दो प्रकार हैं -
1. अनुकूल व्यापार संतुलन-यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक है तो इसे उस देश के पक्ष में अनुकूल या धनात्मक व्यापार संतुलन कहा जाता है।
2. प्रतिकूल व्यापार संतुलन-यदि किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक है तो उसे असंतुलित या प्रतिकूल या ऋणात्मक व्यापार संतुलन कहा जाता है।
In simple words: व्यापार संतुलन बताता है कि कोई देश जितना सामान बेचता है और खरीदता है, उन दोनों के पैसों में कितना अंतर है। यह दो तरह का होता है: अनुकूल (जब ज्यादा बेचते हैं) और प्रतिकूल (जब ज्यादा खरीदते हैं)।

🎯 Exam Tip: व्यापार संतुलन देश की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।

 

Question 7. विदेशी निवेश की सीमा एवं परिवहन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार कैसे है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: विदेशी निवेश की सीमा-ऐसे विकासशील देश जिनके पास खनन, भारी अभियांत्रिकी तथा बागवानी कृषि के विकास के लिए आवश्यक पूँजी का अभाव होता है, विदेशी निवेश इन देशों में व्यापार को बढ़ावा दे सकता है। विकासशील देशों में ऐसे पूँजी प्रधान उद्योगों के विकास द्वारा औद्योगिक राष्ट्र खाद्य पदार्थों तथा खनिजों का आयात सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा अपने उद्योगों में निर्मित उत्पादों के लिए देश व विदेश में बाजार निर्मित करते हैं।
परिवहन-प्राचीनकाल में परिवहन के पर्याप्त एवं समुचित साधनों का अभाव स्थानीय क्षेत्रों में व्यापार को प्रतिबंधित करता था। केवल ऊँची कीमतों वाली वस्तुएँ; जैसे-रत्न, रेशम एवं मसालों आदि का लम्बी दूरियों तक व्यापार किया जाता था। वर्तमान में रेल, समुद्री व वायु परिवहन के विकास के विस्तार तथा प्रशीतन व परिरक्षण की बेहतर सुविधाओं ने अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा प्रदान किया है।
In simple words: अगर किसी गरीब देश के पास अपनी चीजें बनाने के लिए पैसे नहीं हैं, तो बाहर से मिला पैसा व्यापार को बढ़ा सकता है। पहले, दूर की चीजें बेचना मुश्किल था, लेकिन अब ट्रेन, जहाज और हवाई जहाज से सामान भेजना आसान हो गया है, जिससे इंटरनेशनल ट्रेड और बढ़ गया है।

🎯 Exam Tip: विदेशी निवेश पूंजी की कमी वाले देशों को औद्योगिक विकास में मदद करता है, और बेहतर परिवहन व्यापार की भौगोलिक बाधाओं को दूर करता है।

 

Question 8. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकारों की विवेचना कीजिए।
अथवा
द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय व्यापार में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के निम्नलिखित दो वर्ग हैं -
1. द्विपाश्विक व्यापार: यह वह व्यापार है जो दो देशों के बीच होता है, जहाँ वे एक-दूसरे के साथ समझौता करते हैं।
2. बहुपाश्विक व्यापार: यह व्यापार बहुत से व्यापारिक देशों के साथ किया जाता है। एक देश कुछ व्यापारिक साझेदारों को सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र' की स्थिति प्रदान कर सकता है।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड दो तरह का होता है: 'द्विपक्षीय' जब सिर्फ दो देश आपस में व्यापार करते हैं और 'बहुपक्षीय' जब कई देश एक साथ मिलकर व्यापार करते हैं।

🎯 Exam Tip: "सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र" का अर्थ है कि एक देश दूसरे देश को व्यापार में विशेष रियायतें देता है।

 

Question 9. “सामान्यतः अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सम्बन्धित देशों के लिए लाभकारी होता है? लेकिन यह बहुत ही हानिकारक भी हो सकता है।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सामान्यतः अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सम्बन्धित देशों के लिए लाभकारी होता है क्योंकि इससे उन्हें विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है और जीवन-स्तर में सुधार आता है। परन्तु यदि यह अन्य देशों पर निर्भरता, विकास के असमान स्तर, शोषण एवं युद्ध का कारण बनने वाली प्रतिद्वंद्विता की ओर उन्मुख होता है तो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार बहुत ही हानिकारक सिद्ध हो सकता है। विश्व कल्याणकारी व्यापार जीवन के अनेक पक्षों को प्रभावित करता है।
यह समस्त विश्व में पर्यावरण से लेकर लोगों के स्वास्थ्य एवं कल्याण आदि सभी को प्रभावित कर सकता है। जैसे-जैसे विभिन्न देशों का व्यापार बढ़ता है, व्यापार बढ़ने से उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे वन, खनिज, जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का अतिशोषण होता है तथा पर्यावरण का प्रदूषण होता है। ऐसी स्थिति में सतत पोषणीय विकास में बाधा आती है तथा भविष्य के लिए कई समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड से देशों को पैसा मिलता है और जीवन बेहतर होता है, जो अच्छा है। लेकिन यह दूसरों पर निर्भरता बढ़ा सकता है, लड़ाई का कारण बन सकता है, और पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकता है, जैसे कि ज्यादा संसाधन इस्तेमाल करना और प्रदूषण बढ़ाना।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में आपको अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के फायदे और नुकसान दोनों को संतुलित तरीके से बताना है।

 

Question 10. प्रादेशिक व्यापार समूहों का क्या उद्देश्य है?
Answer: प्रादेशिक व्यापार समूह सदस्य राष्ट्रों में व्यापार शुल्क को हटा देते हैं तथा मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। यह समूह व्यापार की मदों में भौगोलिक निकटता, समरूपता तथा पूरकता के साथ सदस्य देशों के मध्य व्यापार बढ़ाने एवं विकासशील देशों के व्यापार पर लगे प्रतिबन्ध को हटाने के उद्देश्य से अस्तित्व में आए हैं।
In simple words: क्षेत्रीय व्यापार समूह अपने सदस्य देशों के बीच व्यापार को आसान बनाते हैं, टैक्स हटाते हैं और व्यापार को बढ़ाते हैं। वे खासकर उन देशों के लिए होते हैं जो एक-दूसरे के करीब होते हैं या एक जैसी चीजें बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रादेशिक व्यापार समूह अक्सर व्यापारिक बाधाओं को कम करके क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करते हैं।

 

Question 11. आसियान के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: आसियान (Association of South-East Asian Nations-ASEAN):
इस संगठन को संक्षेप में आसियान कहते हैं। अगस्त 1967 में अस्तित्व में आये आसियान व्यापार समूह में सात दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देश-ब्रूनई, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैण्ड, वियतनाम तथा म्यांमार सम्मिलित हैं। इसका मुख्यालय इण्डोनेशिया के जकार्ता नगर में है। परस्पर व्यापार के अलावा आर्थिक वृद्धि को त्वरित करना, सांस्कृतिक विकास, शान्ति तथा प्रादेशिक स्थायित्व इस समूह के प्रमुख उद्देश्य हैं।
In simple words: आसियान दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का एक समूह है, जो 1967 में बना था। इसमें ब्रूनई, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार जैसे देश हैं। इसका हेडक्वार्टर जकार्ता में है और यह व्यापार, आर्थिक विकास, संस्कृति और शांति को बढ़ावा देता है।

🎯 Exam Tip: आसियान एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है जो अपने सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

 

Question 12. सी.आई.एस. (Commonwealth of Independent States-C.I.S.) का वर्णन कीजिए।
Answer: सी.आई.एस. (Commonwealth of Independent States-C.I.S.):
इस संगठन को संक्षेप में सी. आई. एस. कहा जाता है। इस व्यापारिक समूह में पूर्व सोवियत संघ के विघटित 12 राष्ट्र-आर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस, जॉर्जिया, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, मोल्दोवा, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन तथा उज्बेकिस्तान सम्मिलित हैं। इस व्यापारिक समूह का मुख्यालय बेलारूस देश के मिन्स्क नगर में है। परस्पर व्यापार के अलावा अर्थव्यवस्था, प्रतिरक्षा तथा विदेश नीति के मामलों में समन्वय तथा सहयोग इस व्यापारिक समूह का प्रमुख उद्देश्य है। अशोधित तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, कपास, रेशे तथा एल्यूमिनियम इस व्यापारिक समूह की प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ हैं।
In simple words: सी.आई.एस. सोवियत संघ के टूटने के बाद बने 12 देशों का एक समूह है। इसका हेडक्वार्टर बेलारूस के मिन्स्क शहर में है। इसका मकसद व्यापार, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और विदेश नीति में सहयोग बढ़ाना है। कच्चे तेल, गैस, सोना, कपास जैसी चीजें यहाँ की मुख्य व्यापारिक वस्तुएँ हैं।

🎯 Exam Tip: सी.आई.एस. पूर्व सोवियत गणराज्यों के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक मंच है।

 

Question 13. यूरोपियन संघ नामक प्रादेशिक व्यापार समूह का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: यूरोपियन संघ का गठन मूल रूप से फरवरी 1957 में यूरोप में छः देशों इटली, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैण्ड तथा लक्जेमबर्ग को मिलाकर ई.ई.सी. के रूप में किया गया। बाद में इस व्यापारिक समूह में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैण्ड, आयरलैण्ड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन तथा ब्रिटेन नामक यूरोपियन राष्ट्र भी 1992 में सम्मिलित हो गये तथा इसका नाम ई.यू.पड़ा। इस व्यापारिक समूह का मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स नगर में है। कृषि उत्पाद, खनिज, रसायन, लकड़ी, कागज, परिवहन की गाड़ियाँ, आप्टिकल उपकरण, घड़ियाँ, कलाकृतियाँ तथा पुरावस्तु इस व्यापारिक समूह की प्रमुख व्यापारिक वस्तुयें हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ के देशों में एकल मुद्रा के साथ एकल बाजार भी मिलता है।
In simple words: यूरोपियन संघ 1957 में छह देशों (इटली, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड, लक्जमबर्ग) ने शुरू किया था, जिसे पहले ई.ई.सी. कहते थे। बाद में इसमें कई और देश जुड़े और इसका नाम ई.यू. हो गया। इसका हेडक्वार्टर बेल्जियम के ब्रुसेल्स में है। यह कृषि उत्पादों, खनिजों, मशीनों आदि का व्यापार करता है और इसमें एक ही मुद्रा (यूरो) और एक बाजार भी है।

🎯 Exam Tip: यूरोपीय संघ एक मजबूत आर्थिक और राजनीतिक ब्लॉक है जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव है।

RBSE Class 12 Geography Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)

 

Question 1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार अस्तित्व में क्यों है ? संक्षेप में बताइए।
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार उत्पादन में विशिष्टीकरण का परिणाम है। यदि विभिन्न देश वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं की उपलब्धता में श्रम विभाजन तथा विशेषीकरण को प्रयोग में लाते हैं तो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को लाभ प्रदान करता है। इस प्रकार का विशिष्टीकरण व्यापार को जन्म दे सकता है। इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता व हस्तांतरणीयता के सिद्धांतों पर आधारित होता है।
सिद्धांततः यह व्यापारिक भागीदारी समान रूप से लाभदायक होनी चाहिए। वर्तमान समय में व्यापार विश्व के आर्थिक संगठनों का आधार बन गया है तथा यह राष्ट्रों की विदेश नीति से सम्बन्धित हो गया है। आज सुविकसित परिवहन एवं संचार प्रणाली से युक्त कोई भी देश अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में हिस्सेदारी से मिलने वाले लाभों को छोड़ने का इच्छुक नहीं है।
18वीं शताब्दी तक विनिर्मित व मूल्यवान वस्तुओं को विश्व के वर्तमान विकासशील राष्ट्र यूरोपियन देशों को निर्यात करते थे। 19वीं शताब्दी में यूरोपियन देशों ने अपने उपनिवेशों से खाद्य पदार्थों तथा कच्चे माल का आयात किया तथा बदले में यूरोपियन देशों ने विनिर्माण वस्तुओं को अपने उपनिवेशों में निर्यात किया। यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान विश्व के महत्त्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार के रूप में सामने आये। बीसवीं शताब्दी में यूरोप के उपनिवेश समाप्त हो गये तथा भारत, चीन और अन्य विकासशील राष्ट्रों की अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में साझेदारी बढ़ी तथा इन राष्ट्रों की विश्व के विकसित राष्ट्रों से प्रतिस्पर्धा होने लगी।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड इसलिए होता है क्योंकि हर देश कुछ खास चीजें बनाने में माहिर होता है। जब देश अपने हुनर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुँचाता है। यह तुलनात्मक फायदे और एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने पर आधारित है। अब, कोई भी देश इंटरनेशनल ट्रेड से मिलने वाले फायदों को छोड़ना नहीं चाहता है। पुराने समय में यूरोपियन देश कच्चे माल के बदले में तैयार माल बेचते थे, लेकिन अब विकासशील देश भी दुनिया के व्यापार में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अस्तित्व के कारणों में विशिष्टीकरण, तुलनात्मक लाभ और ऐतिहासिक व्यापारिक पैटर्न को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. आयात-निर्यात में क्या अन्तर है? इसका व्यापार सन्तुलन से क्या सम्बन्ध है?
Answer: आयात-एक देश में किसी अन्य देश से लाई गई वस्तुएँ आयात कहलाती हैं। निर्यात-एक देश से दूसरे देश को प्रेषित वस्तुएँ निर्यात कहलाती हैं। आयात-निर्यात का व्यापार संतुलन से सम्बन्ध- किसी देश के आयात व निर्यात के मध्य मूल्यों के सम स्वरूप को उस देश का व्यापार संतुलन कहा जाता है। व्यापार संतुलन के प्रकार-व्यापार संतुलन के निम्न दो प्रकार हैं -
1. अनुकूल व्यापार संतुलन: यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक है तो इसे उस देश के पक्ष में अनुकूल या धनात्मक व्यापार संतुलन कहा जाता है।
2. प्रतिकूल व्यापार संतुलन: यदि किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक है तो उसे असंतुलित या प्रतिकूल या ऋणात्मक व्यापार संतुलन कहा जाता है।
In simple words: आयात का मतलब है दूसरे देशों से सामान खरीदना और निर्यात का मतलब है दूसरे देशों को सामान बेचना। इन दोनों के बीच के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। अगर हम ज्यादा बेचते हैं तो संतुलन अनुकूल होता है, और अगर ज्यादा खरीदते हैं तो यह प्रतिकूल होता है।

🎯 Exam Tip: आयात और निर्यात किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनका संतुलन देश की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।

 

Question 4. भारत में बदलते विदेशी व्यापार के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत के वाणिज्यिक मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार अप्रैल-दिसम्बर 2015 में देश के वस्तुगत निर्यात (डालर मूल्य 196.60) अरब डॉलर व आयात 295.81 अरब डॉलर के रहे हैं। जबकि पूर्व वर्ष की समान अवधि (अप्रैल-दिसम्बर 2014) में यह क्रमश: 239.93 अरब डॉलर व 351.61 अरब डॉलर के रहे थे। इस प्रकार डॉलर मूल्यों में निर्यातों में 18.06 प्रतिशत तथा आयातों में 15.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही व्यापार घाटा भी अप्रैल-दिसम्बर 2015 के दौरान 99.21 अरब डॉलर का रहा है।
पिछले वर्ष समान अवधि (अप्रैल-दिसम्बर 2014) में व्यापार घाटा 111.68 अरब डॉलर था। इन आँकड़ों के अनुसार 2015-16 के पहले नौ महीनों में भारत के निर्यात के 12,73,323 करोड़ व आयात Rs 19,15,849 करोड़ के रहे हैं। पूर्व वित्तीय वर्ष के समान अवधि में रुपए मूल्य में भारत के निर्यात व आयात क्रमश: 14,58,094 करोड़ व 21,36,855 करोड़ के थे। इस प्रकार रुपए मूल्य में निर्यातों में 12.67 प्रतिशत व आयातों में 10.34 प्रतिशत की गिरावट अप्रैल-दिसम्बर 2015 के दौरान दर्ज की गई है।
अप्रैल-दिसम्बर 2015 की अवधि में देश के कुल आयातों में डॉलर मूल्य में जहाँ 15.87 प्रतिशत की गिरावट अन्तिम आँकड़ों में दर्ज की गई है। तेल आयातों का कुल मूल्य में 41.60 प्रतिशत घटा है, जबकि गैर-तेल आयातों में गिरावट 3.11 प्रतिशत रही है। अप्रैल-दिसम्बर 2014 में देश के तेल आयात जहाँ 116.56 अरब डॉलर थे, वहीं अप्रैल-दिसम्बर 2015 में यह आयात 68.07 अरब डॉलर के रहे हैं। इसी अवधि के गैर तेल आयात 235.05 अरब डॉलर से घटकर 227.24 अरब डॉलर के रहे हैं।
In simple words: 2015 में भारत के आयात और निर्यात दोनों में कमी आई थी। डॉलर में निर्यात 18.06% और आयात 15.87% कम हुआ। रुपए में भी निर्यात 12.67% और आयात 10.34% घटा। तेल के आयात में बड़ी कमी आई, जिससे व्यापार घाटा भी कम हुआ।

🎯 Exam Tip: जब भी आंकड़े दिए गए हों, तो उन्हें सटीकता से प्रस्तुत करें और मुख्य रुझानों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 5. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख आधारों का वर्णन कीजिए।
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के पाँच प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं -
1. राष्ट्रीय संसाधनों में भिन्नता-इस संदर्भ में निम्नलिखित तीन राष्ट्रीय संसाधनों की भिन्नता उल्लेखनीय है –
• भौगोलिक संरचना: भौगोलिक बनावट, कृषि और पशुधन जैसे संसाधनों में अंतर लाती है। उपजाऊ मैदानों में अधिक कृषि उत्पादन होता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है।
• खनिज संसाधन: दुनिया में खनिजों का असमान वितरण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है। खनिज उपलब्धता औद्योगिक विकास का भी आधार बनती है।
• जलवायु: किसी देश की जलवायु उस देश में उत्पादित वस्तुओं की विविधता को सुनिश्चित करती है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बल मिलता है।
2. जनसंख्या कारक: विश्व के विभिन्न देशों में जनसंख्या का आकार, वितरण तथा उसकी विविधता अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की वस्तुओं के प्रकार तथा मात्रा को प्रभावित करते हैं –
• सांस्कृतिक कारक: विभिन्न देशों में मिलने वाली अलग-अलग संस्कृतियों में कला तथा हस्तशिल्प के विभिन्न रूप मिलते हैं। उत्तम कोटि के हस्तशिल्पों की विश्व में पर्याप्त माँग रहती है।
• जनसंख्या का आकार: सघन जनसंख्या वाले देशों में अंदरूनी व्यापार अधिक और बाहरी व्यापार कम होता है। उत्तम जीवन स्तर वाले देशों में आयातित उत्पादों की माँग अधिक होती है, जबकि निम्न जीवन-स्तर वाले देशों में कम रहती है।
3. आर्थिक विकास की प्रावस्था: किसी देश की आर्थिक विकास की अवस्था उस देश के व्यापार की वस्तुओं का प्रकार निर्धारित करती है। कृषि प्रधान देश विनिर्माण वस्तुओं के लिए कृषि उत्पादों का विनिमय करते हैं, जबकि औद्योगिक देश मशीनरी और निर्मित माल का निर्यात करते हैं तथा कच्चे माल और खाद्यान्नों का आयात करते हैं।
4. विदेशी निवेश की सीमा: ऐसे विकासशील देश जिनके पास खनन, भारी अभियांत्रिकी और बागवानी कृषि आदि के विकास के लिए पूंजी का अभाव है, उन देशों में विदेशी निवेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है। औद्योगिक राष्ट्र विकासशील राष्ट्रों में पूंजी-प्रधान उद्योगों की स्थापना करते हैं और इसके बदले में अपने देश के लिए खाद्य पदार्थों और खनिजों का आयात सुनिश्चित करते हैं। वे अपने निर्मित उत्पादों के लिए देश और विदेश में बाजार भी बनाते हैं।
5. परिवहन: वर्तमान में रेल, समुद्री और वायु परिवहन के विकास और विस्तार तथा प्रशीतन और परिरक्षण की बेहतर सुविधाओं ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा प्रदान किया है।
In simple words: इंटरनेशनल ट्रेड के पांच मुख्य कारण हैं: देशों के प्राकृतिक संसाधनों में अंतर (जैसे जमीन, खनिज, मौसम), जनसंख्या की बनावट (उनकी संस्कृति और खरीदने की क्षमता), देश का आर्थिक विकास स्तर (क्या वह खेती करता है या उद्योग), विदेशी निवेश (गरीब देशों में पैसा लगाना), और अच्छे परिवहन साधन (रेल, जहाज, हवाई जहाज)।

🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आधारों को विस्तृत रूप से समझाते हुए, प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करें।

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