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Detailed Chapter 9 पश्चिमी सामाजिक विचारक RBSE Solutions for Class 11 Sociology
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Class 11 Sociology Chapter 9 पश्चिमी सामाजिक विचारक RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र की स्थापना कब की?
(अ) 1830
(ब) 1838
(स) 1842
(द) 1848
Answer: (ब) 1838
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र की स्थापना 1838 में की थी।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र के प्रमुख विचारकों और उनके द्वारा स्थापित की गई मुख्य अवधारणाओं की स्थापना तिथियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. प्रत्यक्षवादी क्या है?
(अ) समाज की धार्मिक स्थिति
(ब) समाज की तात्विक स्थिति
(स) समाज की परम्परागत स्थिति
(द) समाज की वैज्ञानिक स्थिति।
Answer: (द) समाज की वैज्ञानिक स्थिति।
In simple words: प्रत्यक्षवाद का मतलब है समाज को वैज्ञानिक तरीके से समझना और अध्ययन करना।
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्षवाद को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर याद रखें, जो अनुभव और अवलोकन पर आधारित होता है।
Question 4. वेबर के अनुसार निम्र में से कौनसा कारण प्रत्यक्षवाद के अनुकूल है?
(अ) प्रेतवाद
(ब) बहुदेववाद
(स) एकेश्वरवाद
(द) अवलोकन।
Answer: (द) अवलोकन।
In simple words: वेबर के अनुसार, किसी चीज को सीधे देखकर समझना (अवलोकन करना) प्रत्यक्षवाद के लिए अच्छा है।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के विचारों में अवलोकन (Observation) और अनुभवजन्य अध्ययन का महत्व बहुत अधिक है।
Question 5. मार्क्स ने कौन से सन् में डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की?
(अ) 1840
(ब) 1841
(स) 1842
(द) 1848
Answer: (द) 1843
In simple words: मार्क्स को 1843 में डॉक्ट्रेट की डिग्री मिली थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों की महत्वपूर्ण जीवन घटनाओं और अकादमिक उपलब्धियों को याद रखना सहायक होता है।
Question 7. मार्क्स के अनुसार जिन लोगों के पास उत्पादन के साधनों का स्वामित्व नहीं होता है उसे क्या कहेंगे?
(अ) पूँजीपति
(ब) श्रमिक
(स) राजा
(द) जमींदार।
Answer: (ब) श्रमिक
In simple words: जिन लोगों के पास उत्पादन के लिए जमीन या मशीनें नहीं होतीं, मार्क्स उन्हें श्रमिक कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के वर्ग संघर्ष सिद्धांत में 'श्रमिक' और 'पूंजीपति' वर्ग की परिभाषा और भूमिका को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 8. “दास कैपिटल” पुस्तक के रचयिता हैं
(अ) हीगल
(ब) मार्क्स
(स) वेबर
(द) दुर्थीम।
Answer: (ब) मार्क्स
In simple words: "दास कैपिटल" नाम की मशहूर किताब कार्ल मार्क्स ने लिखी थी। यह किताब पूंजीवाद और समाज पर उनके विचारों के बारे में है।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण विचारकों की प्रमुख पुस्तकों के नाम और उनके लेखकों को याद रखना आवश्यक है।
Question 9. दुर्थीम ने किस पुस्तक पर डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की?
(अ) समाज में श्रम विभाजन
(ब) आत्महत्या
(स) नैतिक शिक्षा
(द) समाजवाद।
Answer: (अ) समाज में श्रम विभाजन
In simple words: दुर्थीम को अपनी किताब "समाज में श्रम विभाजन" पर डॉक्ट्रेट की डिग्री मिली थी।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के प्रमुख कार्यों और उनके शोध विषयों को याद रखें, खासकर "श्रम विभाजन" जैसे केंद्रीय अवधारणाओं को।
Question 11. यान्त्रिक एकता है
(अ) समरूपता की एकता
(ब) विभिन्नता की एकता
(स) जटिलता की एकता
(द) आधुनिक एकता।
Answer: (अ) समरूपता की एकता
In simple words: यान्त्रिक एकता वह होती है जहाँ समाज के लोग एक जैसे विचारों और कामों को साझा करते हैं।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम की यान्त्रिक एकता और सावयवी एकता के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। यान्त्रिक एकता सरल समाजों में पाई जाती है।
Question 12. प्रकार्यात्मक स्वतंत्रता एवं विशेषीकरण किसका परिणाम है?
(अ) औद्योगीकरण
(ब) पश्चिमीकरण
(स) श्रम विभाजन
(द) नगरीकरण।
Answer: (स) श्रम विभाजन
In simple words: जब काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाता है, तो हर व्यक्ति अपना काम आज़ादी से कर पाता है और उस काम में माहिर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: श्रम विभाजन का संबंध आधुनिक और जटिल समाजों से है, जहाँ लोग एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
Question 13. मैक्स वेबर किस देश के निवासी थे?
(अ) जर्मनी
(ब) फ्रांस
(स) अमेरिका
(द) इंग्लैण्ड।
Answer: (अ) जर्मनी
In simple words: मैक्स वेबर जर्मनी के रहने वाले थे।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों के राष्ट्रीयता को याद रखना उनके सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ को समझने में मदद करता है।
Question 14. वेबर के अनुसार सामाजिक क्रिया कर्ता के द्वारा किया गया वह व्यवहार है जो है
(अ) अर्थपूर्ण
(ब) उद्देश्यपूर्ण
(स) लक्ष्यपूर्ण
(द) साधनपूर्ण।
Answer: (अ) अर्थपूर्ण
In simple words: वेबर के अनुसार, सामाजिक क्रिया वह व्यवहार है जिसका कोई मतलब या अर्थ होता है।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया सिद्धांत में 'अर्थपूर्ण व्यवहार' एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अगस्त कॉम्ट का जन्म फ्रांस के किस नगर में हुआ था?
Answer: अगस्त कॉम्ट का जन्म फ्रांस के मॉण्टपेलियर नगर में हुआ था।
In simple words: अगस्त कॉम्ट का जन्म फ्रांस के मॉण्टपेलियर शहर में हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों के जन्म स्थान और महत्वपूर्ण शहरों को याद रखें जो उनके काम से जुड़े हैं।
Question 2. समाजशास्त्र के जनक कौन थे?
Answer: समाजशास्त्र के जनक अगस्त कॉम्ट हैं।
In simple words: समाजशास्त्र की शुरुआत अगस्त कॉम्ट ने की थी, इसलिए उन्हें इसका जनक कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: "समाजशास्त्र के जनक" की उपाधि अक्सर अगस्त कॉम्ट से जुड़ी होती है, इसे हमेशा याद रखें।
Question 3. पॉजिटिव फिलोसफी का प्रकाशन कब हुआ?
Answer: 'पॉजिटिव फिलोसफी' का प्रकाशन सन् 1832-42 में हुआ था।
In simple words: 'पॉजिटिव फिलोसफी' नाम की किताब 1832 से 1842 के बीच छपी थी।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट की प्रमुख रचनाओं और उनके प्रकाशन वर्षों को याद रखें।
Question 4. धार्मिक व तात्विक अवस्था में किसका अभाव होता है?
Answer: धार्मिक और तात्विक दोनों अवस्थाओं में निश्चितता का अभाव होता है।
In simple words: इन दोनों पुरानी सोच की अवस्थाओं में कुछ भी पक्का या निश्चित नहीं होता था।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट के तीन चरणों वाले विकास के सिद्धांत में, वैज्ञानिक अवस्था ही एकमात्र ऐसी है जहाँ निश्चितता पाई जाती है।
Question 5. रेमण्ड ऐरा की पुस्तक का नाम क्या है?
Answer: रेमण्ड ऐरा की पुस्तक का नाम 'मेन करेन्ट्स इन सोशियोलॉजिकल थॉट' है।
In simple words: रेमण्ड ऐरा ने 'मेन करेन्ट्स इन सोशियोलॉजिकल थॉट' नाम की किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों की महत्वपूर्ण कृतियों को उनके लेखकों के साथ याद रखें।
Question 6. वर्ग संघर्ष क्या है?
Answer: जब शोषक वर्ग और शोषित वर्ग उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण पाने के लिए आपस में संघर्ष करते हैं, तो इसे वर्ग संघर्ष कहते हैं।
In simple words: वर्ग संघर्ष तब होता है जब अमीर और गरीब लोग संसाधनों पर कब्ज़ा करने के लिए लड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्ग संघर्ष कार्ल मार्क्स के सिद्धांत का केंद्रीय बिंदु है, इसे पूंजीपति और श्रमिक वर्ग के संदर्भ में समझें।
Question 8. मार्क्स ने कितने प्रकार के समाज बताए हैं?
Answer: कार्ल मार्क्स ने चार प्रकार के समाज बताए हैं: आदिम साम्यवादी समाज, दासत्व युग का समाज, सामन्ती समाज और पूँजीवादी समाज।
In simple words: कार्ल मार्क्स ने समाज को चार मुख्य भागों में बांटा है: पुराना साम्यवादी समाज, गुलामी वाला समाज, सामंतों वाला समाज और पूंजीपतियों वाला समाज।
🎯 Exam Tip: मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांत में इन चारों समाजों के क्रम और उनकी विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. दुर्थीम का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
Answer: समाजशास्त्री दुर्थीम का जन्म 14 अप्रैल, सन् 1858 को फ्रांस के एपीनाल नगर में हुआ था।
In simple words: दुर्थीम का जन्म 14 अप्रैल 1858 को फ्रांस के एपीनाल शहर में हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों के जन्म और मृत्यु की तिथियों और स्थानों को याद रखें।
Question 10. दुर्थीम ने किस विषय पर डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की?
Answer: दुर्थीम ने 'श्रम-विभाजन' नामक विषय पर डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की थी।
In simple words: दुर्थीम ने 'श्रम-विभाजन' पर रिसर्च करके डॉक्ट्रेट की डिग्री हासिल की थी।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के डॉक्ट्रेट का विषय 'श्रम-विभाजन' था, जो उनके समाजशास्त्रीय कार्यों का आधार बना।
Question 11. सावयवी एकता क्या है?
Answer: आधुनिक, जटिल, विकसित और औद्योगिक समाजों में पाई जाने वाली एकता सावयवी एकता कहलाती है।
In simple words: सावयवी एकता वह होती है जहाँ आधुनिक समाजों में लोग अलग-अलग काम करते हुए भी एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
🎯 Exam Tip: सावयवी एकता जटिल समाजों की विशेषता है, जहाँ श्रम विभाजन के कारण लोग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
Question 12. दमनकारी कानून कैसे समाजों में पाए जाते हैं?
Answer: दमनकारी कानून यान्त्रिक एकता वाले समाजों में पाए जाते हैं।
In simple words: यान्त्रिक एकता वाले समाजों में बहुत सख्त कानून होते हैं जो गलत करने वालों को तुरंत दंड देते हैं।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के अनुसार, यान्त्रिक एकता वाले समाजों में सामूहिक चेतना बहुत मजबूत होती है, इसलिए कानून दमनकारी होते हैं।
Question 15. मूल्यात्मक क्रिया क्या है?
Answer: जब व्यक्ति समाज के मूल्यों से प्रभावित होकर कोई काम करता है तो ऐसी क्रिया को मूल्यात्मक क्रिया कहते हैं।
In simple words: जब कोई व्यक्ति समाज के सही-गलत विचारों के हिसाब से काम करता है, तो उसे मूल्यात्मक क्रिया कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के अनुसार, मूल्यात्मक क्रियाएँ नैतिकता और परंपराओं से निर्देशित होती हैं, तर्क से नहीं।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अगस्त कॉम्ट के समाजशास्त्र के शाब्दिक अर्थ को समझाइए।
Answer: अगस्त कॉम्ट का समाजशास्त्र, जिसे अंग्रेजी में 'Sociology' कहते हैं, दो अलग-अलग भाषाओं के शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द 'सोशियस' (Socius) लैटिन भाषा का है, जिसका अर्थ 'समाज' होता है। दूसरा शब्द 'लोगिया' (Logia) ग्रीक भाषा का है, जिसका अर्थ 'शास्त्र' या 'विज्ञान' होता है। इस तरह, शाब्दिक रूप से समाजशास्त्र का अर्थ 'समाज का विज्ञान' या 'समाज का शास्त्र' है।
In simple words: समाजशास्त्र शब्द लैटिन के 'सोशियस' (समाज) और ग्रीक के 'लोगिया' (विज्ञान) से बना है। इसका मतलब है 'समाज का विज्ञान'।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र की परिभाषा देते समय इसके शाब्दिक अर्थ और इसकी व्युत्पत्ति को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. प्रेतवाद क्या है?
Answer: समाजशास्त्री अगस्त कॉम्ट ने बताया कि मानव का बौद्धिक विकास तीन चरणों में होता है। इनमें से पहला चरण 'धर्मशास्त्रीय अवस्था' है। प्रेतवाद इसी धार्मिक अवस्था का एक हिस्सा है। धर्मशास्त्रीय सोच के हिसाब से, प्रेतवाद सबसे शुरुआती अवस्था मानी जाती है। प्रेतवाद की अवस्था में यह माना जाता है कि हर निर्जीव और सजीव चीज़ में एक आत्मा या जीव होता है। सभी रहस्यमय शक्तियाँ इसी जीव को नियंत्रित करती हैं।
In simple words: प्रेतवाद कॉम्ट की धार्मिक अवस्था का शुरुआती दौर है। इसमें हर चीज़ में एक जीव मानने और उसे रहस्यमय शक्तियों द्वारा नियंत्रित मानने की सोच होती है।
🎯 Exam Tip: प्रेतवाद को कॉम्ट के धार्मिक विकास के सिद्धांत के सबसे प्रारंभिक और सरल रूप के रूप में पहचानें।
Question 3. अवलोकन को परिभाषित कीजिए।
Answer: समाजशास्त्री अगस्त कॉम्ट का मानना था कि समाजशास्त्र को विज्ञान बनाने के लिए वैज्ञानिकों को वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करना होगा। अवलोकन वैज्ञानिक तरीकों का एक ज़रूरी हिस्सा है। अवलोकन का मतलब है मानव इंद्रियों (जैसे आँख, कान, नाक और स्पर्श) से किसी भी घटना का ठीक से और क्रमबद्ध तरीके से अध्ययन करना। जब ऐसा होता है, तो वह विषय विज्ञान की श्रेणी में आता है।
In simple words: अवलोकन का मतलब है किसी भी चीज़ को अपनी इंद्रियों से ध्यान से देखना और समझना। यह वैज्ञानिक अध्ययन का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: अवलोकन समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण शोध पद्धति है; इसे वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से परिभाषित करें।
Question 5. मार्क्स ने वर्ग को कैसे परिभाषित किया?
Answer: कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी समाज की मुख्य विशेषता वर्ग को बताया। उन्होंने वर्ग को इस तरह परिभाषित किया कि जो लोग एक ही तरह का काम करते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति और काम करने के तरीके एक जैसे होते हैं, और जिन पर एक जैसे शोषण के तरीके लागू होते हैं, वे ही वर्ग नहीं होते। बल्कि, वर्ग बनने के लिए वर्ग चेतना और वर्ग संगठन बहुत ज़रूरी हैं।
In simple words: मार्क्स के अनुसार, वर्ग सिर्फ एक जैसे काम करने वाले लोगों का समूह नहीं है, बल्कि वह समूह है जो एक जैसी आर्थिक स्थिति, शोषण के तरीके साझा करता है और जिसमें अपनी पहचान और एकता की भावना होती है।
🎯 Exam Tip: मार्क्स की वर्ग की परिभाषा में आर्थिक स्थिति के साथ-साथ 'वर्ग चेतना' और 'वर्ग संगठन' के महत्व पर जोर दें।
Question 6. वर्ग चेतना क्या है?
Answer: कार्ल मार्क्स ने वर्ग चेतना को इस तरह समझाया है:
1. अपने आप में वर्ग (Class in itself): जब किसी काम को करने वाले लोग एक साथ आते हैं और उन्हें यह महसूस होता है कि वे सभी एक ही तरह का काम या पेशा करते हैं, तो ऐसे समूह को 'अपने आप में वर्ग' कहते हैं।
2. अपने लिए वर्ग (Class for itself): जब किसी काम या पेशे से जुड़े लोग अपने वर्ग के प्रति समर्पित हो जाते हैं और अपने वर्ग के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, तो इसे 'अपने लिए वर्ग' कहा जाता है।
In simple words: वर्ग चेतना का मतलब है कि एक वर्ग के लोगों को अपनी साझा पहचान और हितों का एहसास हो। इसमें 'अपने आप में वर्ग' (सिर्फ पहचान) और 'अपने लिए वर्ग' (पहचान के साथ-साथ एक्शन की तैयारी) शामिल है।
🎯 Exam Tip: 'Class in itself' और 'Class for itself' के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, जो वर्ग चेतना के विकास के दो चरण हैं।
Question 7. पूँजीवादी समाज में कौन-से वर्ग होते हैं?
Answer: समाजशास्त्री कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूँजीवादी समाज में मुख्य रूप से दो वर्ग होते हैं:
• बुर्जुआ (पूँजीपति) वर्ग: इस वर्ग के पास उत्पादन के सारे साधन होते हैं। यह वर्ग ज़्यादा पैसा कमाने के लिए श्रमिकों (सर्वहारा वर्ग) का शोषण करता है। यह शोषक वर्ग कहलाता है।
• सर्वहारा (श्रमिक) वर्ग: इस वर्ग के पास उत्पादन के कोई साधन नहीं होते। असल में, यह वर्ग उत्पादन का एक साधन ही होता है। बुर्जुआ या पूँजीपति वर्ग ज़्यादा लाभ कमाने के लिए इनका शोषण करता है। यह शोषित वर्ग कहलाता है।
In simple words: पूँजीवादी समाज में दो मुख्य वर्ग होते हैं: बुर्जुआ (पूंजीपति, जो मालिक होते हैं) और सर्वहारा (श्रमिक, जो काम करते हैं और शोषण का शिकार होते हैं)।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के वर्ग विश्लेषण में बुर्जुआ और सर्वहारा वर्ग की परिभाषा, उनके बीच के संबंध और संघर्ष को स्पष्ट करें।
Question 8. 'अपने लिए वर्ग' को समझाइए।
Answer: 'अपने लिए वर्ग' कार्ल मार्क्स द्वारा दी गई वर्ग चेतना की एक अवधारणा है। इसका मतलब है कि जब किसी काम या व्यवसाय से जुड़े लोग अपने वर्ग के प्रति समर्पित हो जाते हैं और अपने वर्ग के हितों की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, तो इसे 'अपने लिए वर्ग' कहा जाता है। यह वर्ग चेतना का विकसित रूप है, जहाँ लोग सिर्फ अपनी साझा स्थिति को जानते नहीं, बल्कि उसके आधार पर एकजुट होकर कार्रवाई भी करते हैं।
In simple words: 'अपने लिए वर्ग' का मतलब है जब एक ही तरह के लोग अपनी समस्याओं को समझते हैं और अपनी बेहतरी के लिए एकजुट होकर काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: 'अपने लिए वर्ग' वर्ग संघर्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ वर्ग के सदस्य अपने साझा हितों के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष करते हैं।
Question 9. दुर्खीम ने श्रम विभाजन के क्या कारण बताए हैं?
Answer: समाजशास्त्री इमाईल दुर्खीम ने श्रम विभाजन के निम्नलिखित कारण बताए हैं:
• जनसंख्या के आकार व घनत्व में वृद्धि: दुर्खीम का मानना था कि श्रम विभाजन का मुख्य कारण जनसंख्या का बढ़ना और उसका घना होना है। जैसे-जैसे समाज में लोगों की संख्या और उनका घनत्व बढ़ता है, वैसे-वैसे श्रम विभाजन भी बढ़ता है। पुराने समय में जनसंख्या कम थी, इसलिए श्रम विभाजन भी कम था। लेकिन जनसंख्या बढ़ने के साथ श्रम विभाजन और विशेषीकरण भी बढ़ा।
• पैतृकता का घटता प्रभाव: दुर्खीम के अनुसार, पैतृकता का प्रभाव जितना ज़्यादा होता है, बदलाव के मौके उतने ही कम होते हैं। जब समाज में काम या व्यवसाय का बंटवारा परिवार के आधार पर होता है, तो श्रम विभाजन के विकास में रुकावट आती है। लेकिन जब पैतृकता का प्रभाव कम होता है, तो श्रम विभाजन ज़्यादा होता है।
In simple words: दुर्खीम के अनुसार, श्रम विभाजन मुख्य रूप से बढ़ती जनसंख्या और परिवार के पुराने नियमों (पैतृकता) के कमज़ोर होने के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के श्रम विभाजन के कारणों में जनसंख्या के आकार और घनत्व के साथ-साथ सामाजिक संरचना में होने वाले बदलावों को भी शामिल करें।
Question 10. यान्त्रिक एकता वाले समाज कौन से समाज को इंगित करते हैं?
Answer: यान्त्रिक एकता वाले समाज सरल, आदिम और पुराने समाजों को दर्शाते हैं। इस प्रकार की एकता वाले समाजों में लोगों की परिस्थितियाँ, भूमिकाएँ, विचार, विश्वास और जीवन जीने के तरीके, सोच, सामाजिकता और नैतिकता एक जैसी पाई जाती हैं। इन समाजों का आकार बहुत छोटा होता है, इसलिए लोगों की ज़रूरतें सीमित और समान होती हैं। उन पर परंपरा, आम राय और धर्म का नियंत्रण और दबाव रहता है। इन समाजों में व्यक्ति का व्यक्तित्व समूह में घुलमिल जाता है। वह समूह के साथ यंत्रवत सोचता है, काम करता है और आदेशों का पालन करता है। ऐसे समाजों में श्रम विभाजन और विरोधाभास बहुत कम होता है, इसीलिए ऐसे समाजों को 'यान्त्रिक एकता' वाला समाज कहा गया है।
In simple words: यान्त्रिक एकता सरल, पुराने समाजों में पाई जाती है, जहाँ लोग एक जैसे होते हैं, उनकी ज़रूरतें एक सी होती हैं, और परंपरा व धर्म का उन पर गहरा असर होता है।
🎯 Exam Tip: यान्त्रिक एकता को सरल, पारंपरिक समाजों की विशेषता के रूप में याद रखें, जहाँ समूह के नियम व्यक्ति पर हावी होते हैं।
Question 11. आधुनिक समाजों में कानून का क्या स्वरूप होता है?
Answer: आधुनिक समाजों में कानून का स्वरूप 'प्रतिकारी' होता है, जिसमें व्यक्ति को सुधारने का अवसर दिया जाता है। आधुनिक समाजों के कानून मानवाधिकारों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
In simple words: आधुनिक समाजों में कानून लोगों को सजा देने की बजाय सुधारने पर जोर देते हैं, और यह इंसानी अधिकारों का सम्मान करते हैं।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के अनुसार, आधुनिक समाजों में सावयवी एकता होती है, और यहाँ कानून दमनकारी की बजाय प्रतिकारी होते हैं।
Question 13. सामाजिक क्रिया की कोई तीन विशेषताएँ बतलाइए।
Answer: सामाजिक क्रिया की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सामाजिक क्रिया किसी-न-किसी सामाजिक व्यवहार से प्रभावित होती है, चाहे वह व्यवहार बीते हुए समय में किया गया हो, वर्तमान में या भविष्य में।
2. सामाजिक क्रिया की श्रेणी में वही काम आता है जिसमें एक से ज़्यादा लोग एक-दूसरे के काम से प्रभावित होते हैं।
3. जब कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद उसे प्रभावित करता है, तभी वह सामाजिक क्रिया मानी जाती है। अगर ऐसा नहीं होता, तो किया गया काम सामाजिक क्रिया की श्रेणी में नहीं आएगा।
In simple words: सामाजिक क्रिया में लोग एक-दूसरे के व्यवहार से प्रभावित होते हैं, एक से ज़्यादा लोग शामिल होते हैं, और इसमें आपसी संपर्क और प्रभाव होता है।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया सिद्धांत में इन विशेषताओं पर ध्यान दें, जो इसे केवल व्यक्तिगत क्रिया से अलग करती हैं।
Question 14. तार्किक क्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: 'तार्किक क्रिया' समाजशास्त्री मैक्स वेबर की एक अवधारणा है। इसे वे 'लक्ष्य के प्रति अभिस्थापित' क्रिया भी कहते हैं। वेबर के अनुसार तार्किक क्रिया में तर्क और एक खास मकसद को बहुत ज़रूरी माना जाता है। इस तरह के काम करते समय व्यक्ति अपने मकसद को ध्यान में रखकर तर्क के आधार पर काम करता है। इसीलिए वेबर इस क्रिया को 'लक्ष्य के प्रति अभिस्थापित' कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई इंजीनियर किसी नदी पर पुल बनाता है, तो वह तर्क के आधार पर तय करता है कि पुल कहाँ बनाया जाए ताकि उससे ज़्यादा से ज़्यादा फायदा मिल सके। ऐसी क्रिया तार्किक क्रिया की श्रेणी में आती है।
In simple words: तार्किक क्रिया वह काम है जिसे लोग सोच-समझकर और किसी खास मकसद को पूरा करने के लिए करते हैं, जैसे एक इंजीनियर पुल बनाता है।
🎯 Exam Tip: तार्किक क्रिया को 'लक्ष्य-उन्मुख' और 'तर्क-आधारित' के रूप में परिभाषित करें, और एक स्पष्ट उदाहरण देना न भूलें।
Question 15. पूर्व देशों में वेबर के अनुसार कौन सी क्रियाएँ अधिक होती हैं?
Answer: समाजशास्त्री मैक्स वेबर के अनुसार, पूर्वी देशों में 'परम्परात्मक क्रियाएँ' ज़्यादा होती हैं। ये सामाजिक क्रियाएँ प्रचलित रीति-रिवाजों, परंपराओं आदि के प्रभाव से निर्देशित होती हैं। मृत्युभोज (किसी की मृत्यु पर भोज), जाति में विवाह आदि परम्परात्मक क्रियाओं के ही उदाहरण हैं।
In simple words: वेबर के हिसाब से, पूर्वी देशों में लोग ज़्यादातर रीति-रिवाजों और परंपराओं के हिसाब से काम करते हैं, जैसे शादी-ब्याह और मृत्युभोज।
🎯 Exam Tip: वेबर के सामाजिक क्रिया के प्रकारों में से 'परम्परात्मक क्रिया' को विशेष रूप से पहचानें और इसके उदाहरणों को याद रखें।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. अगस्त कॉम्ट द्वारा दी गई चिन्तन की अवस्थाओं को समझाइए।
Answer: अगस्त कॉम्ट ने मानव समाज को समझने के लिए समाजशास्त्र की शुरुआत की थी, इसीलिए उन्हें 'समाजशास्त्र का जनक' कहा जाता है। कॉम्ट समाजशास्त्र को एक सच्चा विज्ञान बनाना चाहते थे जो मानव जाति के बीते हुए विकास और भविष्य के बारे में बता सके। कॉम्ट ने पहले अपने इस विज्ञान को सामाजिक भौतिकी नाम दिया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर 'समाजशास्त्र' कर दिया। समाजशास्त्र, जिसे अंग्रेजी में 'SOCIOLOGY' कहा जाता है, लैटिन शब्द 'सोशियस' (समाज) और ग्रीक शब्द 'लोगिया' (विज्ञान) से मिलकर बना है। इसका मतलब है 'समाज का विज्ञान' या 'शास्त्र'।
कॉम्ट ने सामाजिक चिंतन और नए सामाजिक विज्ञान की रचना के लिए चिंतन की तीन अवस्थाओं का नियम दिया। कॉम्ट के अनुसार, मानव के बौद्धिक विकास को तीन स्तरों के नियम से समझा जा सकता है:
• धार्मिक अवस्था: इस अवस्था में सभी घटनाओं को धार्मिक कारणों से समझाया जाता है। मनुष्य हर घटना के पीछे किसी अलौकिक शक्ति को कारण मानता है। कॉम्ट ने धार्मिक अवस्था के तीन भेद बताए हैं:
• प्रेतवाद: यह धर्मशास्त्रीय अवस्था का सबसे शुरुआती चरण है। इसमें माना जाता है कि हर निर्जीव और सजीव चीज़ में एक जीव होता है। सभी अलौकिक शक्तियाँ इस जीव को नियंत्रित करती हैं।
• बहुदेववाद: प्रेतवाद के बाद बहुदेववाद की अवस्था आती है। इसमें पुराने मानव ने शक्तियों को कई हिस्सों में बांटा और कई देवताओं की स्थापना की। इन देवताओं के अपने-अपने अलग काम थे। इस अवस्था में चीज़ें पहले से थोड़ी ज़्यादा व्यवस्थित और साफ थीं।
• एकेश्वरवाद: यह मानव के बौद्धिक विकास का नतीजा है। एकेश्वरवाद का विकास पुरानी, अव्यवस्थित और अव्यावहारिक सोच को खत्म करने के लिए हुआ था। इस अवस्था में यह माना जाता है कि पूरे विश्व को चलाने वाला एक ही ईश्वर है, जो सबसे बड़ी सत्ता और शक्ति है।
• तात्विक अवस्था: समाजशास्त्री अगस्त कॉम्ट के अनुसार, चिंतन की दूसरी अवस्था तात्विक अवस्था है। असल में, चिंतन और समझ के विकास के कारण मानव की समस्याएँ बढ़ गईं। धार्मिक सोच उन समस्याओं का हल नहीं कर पाई। दुनिया में विरोधी बातें होने लगीं, और एकेश्वरवाद मानव को संतुष्ट नहीं कर सका। इसीलिए तात्विक चिंतन को अपनाया गया। इस सोच में किसी अदृश्य, अलौकिक सत्ता को स्वीकार किया जाता है। इसके तहत यह माना जाता है कि संसार की सभी घटनाएँ अदृश्य और व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक अमूर्त और अवैयक्तिक सत्ता द्वारा नियंत्रित होती हैं। इस अवस्था में यह नहीं माना जाता कि हर जीव और वस्तु के पीछे एक साक्षात ईश्वर है।
• वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था: धार्मिक और तात्विक अवस्था के बाद वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था आती है। धर्मशास्त्रीय और तात्विक सोच से जो भी ज्ञान मिलता है, वह अनुमान और कल्पना पर आधारित होता है। इन दोनों सोच में निश्चितता की कमी को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक सोच को अपनाया जाता है। वैज्ञानिक सोच तथ्यों और सबूतों पर आधारित होती है। इसमें कल्पना का कोई महत्व नहीं होता है।
ऊपर दिए गए विवरण के आधार पर हम कह सकते हैं कि सामाजिक चिंतन और नए सामाजिक विज्ञान की रचना के क्षेत्र में कॉम्ट द्वारा दिए गए चिंतन की तीन अवस्थाओं के नियम उनकी महत्वपूर्ण देन हैं।
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र की नींव रखी और मानव सोच के विकास के तीन चरण बताए: धार्मिक (जहाँ सब कुछ भगवान से जुड़ा माना जाता है), तात्विक (जहाँ रहस्यमय शक्तियों पर जोर होता है), और वैज्ञानिक (जहाँ सब कुछ तथ्यों और सबूतों पर आधारित होता है)।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट के तीन चरणों वाले नियम को क्रम से याद रखें और प्रत्येक अवस्था की मुख्य विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाएं।
Question 2. वर्ग संघर्ष का विस्तृत विवेचन कीजिए।
Answer: मार्क्स के महत्वपूर्ण विचारों में से एक वर्ग संघर्ष की अवधारणा है। कार्ल मार्क्स ने वर्ग संघर्ष की अवधारणा ऑगस्टिन थोर नामक विचारक से ली थी, लेकिन इसका पूरा विश्लेषण मार्क्स ने खुद किया। मार्क्स का मानना है कि इतिहास के हर युग और हर समाज में हमेशा दो विरोधी वर्ग रहे हैं: शोषक और शोषित वर्ग। ये दोनों वर्ग हमेशा आपस में संघर्ष करते रहे हैं।
इस संघर्ष से ही समाज के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही है, और समाज का एक युग या अवस्था खत्म होकर उसकी जगह दूसरा युग या अवस्था लेता रहा है। इसका मतलब है कि समाज में अलग-अलग वर्ग होते हैं और उनके अपने-अपने हित होते हैं, जिनके कारण उनके बीच विरोध और संघर्ष पाया जाता है। दोनों वर्गों के बीच संघर्ष का मुख्य कारण उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण पाने की इच्छा है। दोनों ही वर्ग उत्पादन के साधनों पर अपना अधिकार जमाने के लिए संघर्ष करते हैं।
कार्ल मार्क्स का मानना है कि वर्ग बनने के साथ ही संघर्ष शुरू नहीं होता, बल्कि इसके कई चरण होते हैं। सबसे पहले, समाज में वर्ग मौजूद होते हैं, फिर वर्ग चेतना आती है। शोषण वर्ग चेतना का मुख्य कारण होता है। जब यह शोषण असहनीय हो जाता है, तो वर्ग चेतना में और तेज़ी आती है, और वर्ग में वर्ग चेतना की भावना के विकास के साथ ही संघर्ष शुरू हो जाता है। यह संघर्ष अपने-अपने हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है। संघर्ष पहले बातचीत और विरोध का रूप लेता है, और अंत में खूनी संघर्ष में बदल जाता है। इस खूनी संघर्ष के बाद समाज में एक नई अवस्था आती है। फिर नए वर्ग बनते हैं और फिर संघर्ष होता है। यह प्रक्रिया मार्क्स के अनुसार लगातार चलती रहती है।
In simple words: कार्ल मार्क्स के अनुसार, वर्ग संघर्ष समाज के इतिहास का हिस्सा है जहाँ शोषक और शोषित वर्ग उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण के लिए लगातार लड़ते हैं। यह संघर्ष समाज को एक चरण से दूसरे चरण में ले जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ग संघर्ष की अवधारणा को कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद और वर्ग चेतना के विकास के चरणों के साथ जोड़कर समझाएं।
Question 3. इमाईल दुर्शीम की श्रम विभाजन की व्याख्या समझाइए।
Answer: समाजशास्त्री इमाईल दुर्खीम पहले विचारक थे जिन्होंने श्रम विभाजन की अवधारणा को आर्थिक आधार की बजाय सामाजिक आधार पर समझाया। दुर्खीम का मानना है कि व्यक्ति और समाज के बीच संबंधों के आधार पर ही समाज में श्रम विभाजन होता है। दुर्खीम द्वारा बताई गई श्रम विभाजन की अवधारणा को हम इस तरह समझ सकते हैं:
(क) दुर्खीम ने सामाजिक एकता के लिए श्रम विभाजन को आधार माना और इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए कानून के स्वरूप, एकता के स्वरूप, मानवीय संबंधों के स्वरूप, अपराध, दंड, सामाजिक विकास आदि कई समस्याओं और अवधारणाओं की व्याख्या की है।
(ख) प्रकार्यवादी समाजशास्त्री के रूप में दुर्खीम का श्रम विभाजन से मतलब है कि सामाजिक कार्यों का बंटवारा होता है। यानी, समाज में अलग-अलग तरह के काम होते हैं, और इन कामों को अलग-अलग लोग करते हैं। भारतीय वर्ण व्यवस्था इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ ब्राह्मण पढ़ाई-लिखाई करते हैं, क्षत्रिय देश की सुरक्षा करते हैं, वैश्य व्यापार करते हैं, और शूद्र तीनों वर्गों की सेवा करते हैं।
(ग) दुर्खीम के अनुसार, सामाजिक एकता श्रम विभाजन में ही छिपी होती है। किसी भी समाज का विकास उसकी एकता पर निर्भर करता है। जब तक समाज के लोगों में एक-दूसरे के प्रति जुड़ाव नहीं होता है, तब तक वे एक-दूसरे के करीब आने की ज़रूरत महसूस नहीं करते हैं।
In simple words: दुर्खीम ने समझाया कि समाज में काम का बंटवारा (श्रम विभाजन) होता है, जिससे सामाजिक एकता बनी रहती है। उन्होंने इसे समाज के विकास और एकता का आधार बताया।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के श्रम विभाजन को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता के संदर्भ में समझाएं, और भारतीय वर्ण व्यवस्था जैसे उदाहरण दें।
Question 4. मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया सिद्धान्त को समझाइए।
Answer: मैक्स वेबर ने 'सामाजिक क्रिया' को समाजशास्त्र का मुख्य विषय माना और इसे अपने अध्ययन का केंद्र बनाया। वेबर ने सामाजिक क्रिया की वैज्ञानिक तरीके से व्याख्या की। समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति को दिखाने के लिए उन्होंने 'सामाजिक क्रिया सिद्धांत' का सहारा लिया। उनका यह सिद्धांत एक आदर्श मॉडल है, जिसे मैक्स वेबर ने अपनी पुस्तक 'सामाजिक और आर्थिक संगठन' में बताया है।
समाजशास्त्री मैक्स वेबर के अनुसार, सामाजिक संबंधों को बनाने के लिए हमें अलग-अलग लोगों से बातचीत करनी पड़ती है। इन्हीं बातचीत से सामाजिक संबंध बनते हैं। सामाजिक संबंधों से समाज की क्रिया के लिए चार ज़रूरी तत्व हैं:
1. कर्त्ता (काम करने वाला)
2. लक्ष्य (मकसद)
3. साधन (तरीका)
4. परिस्थिति (माहौल)
मतलब, किसी भी काम को करने के लिए एक से ज़्यादा कर्त्ता होने चाहिए, उन कर्त्ताओं का कोई मकसद होना चाहिए। मकसद को पाने के लिए कर्त्ता के पास कोई तरीका भी होना चाहिए और यह सब सामाजिक माहौल के हिसाब से होना चाहिए, जहाँ कर्त्ता मकसद को ध्यान में रखकर सही तरीकों का इस्तेमाल करके काम पूरा कर सके। समाजशास्त्र की नज़र में सभी तरह के काम सामाजिक क्रियाएँ नहीं होते। सिर्फ़ वे काम ही सामाजिक क्रियाएँ कहलाते हैं जो 'अर्थपूर्ण' होते हैं और जिनका संबंध व्यक्ति के बीते हुए, वर्तमान या भविष्य के व्यवहार से होता है।
सामाजिक क्रिया को परिभाषित करते हुए मैक्स वेबर लिखते हैं कि "किसी क्रिया को सामाजिक क्रिया तभी कहा जा सकता है, जब इस क्रिया को करने वाला व्यक्ति या व्यक्तियों के कारण यह क्रिया दूसरे व्यक्तियों के व्यवहार से प्रभावित हो और उसी के अनुसार उसकी गतिविधि तय हो।" इस परिभाषा से साफ है कि किसी भी क्रिया को सामाजिक क्रिया कहलाने के लिए ज़रूरी है कि हम उसमें व्यक्तियों के व्यक्तिगत नज़रिए को समझें। मतलब, व्यक्ति या कर्त्ता उस व्यवहार का क्या मतलब निकालता है। वेबर के अनुसार, कोई भी व्यवहार या गतिविधि अपने आप में कुछ भी नहीं है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी व्यवहार या क्रिया को करने में कोई मतलब जोड़ता है, तो वह क्रिया सामाजिक क्रिया बन जाती है।
In simple words: मैक्स वेबर का सामाजिक क्रिया सिद्धांत बताता है कि समाज में लोग जो भी काम करते हैं, वह सिर्फ तभी सामाजिक क्रिया कहलाता है जब उसका कोई मतलब हो, और वह दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करता हो। इसमें कर्त्ता, लक्ष्य, साधन और परिस्थिति जैसे तत्व शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया सिद्धांत के चार तत्वों (कर्त्ता, लक्ष्य, साधन, परिस्थिति) को स्पष्ट रूप से समझाएं और उसकी 'अर्थपूर्णता' पर जोर दें।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. समाजशास्त्री अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सर्वप्रथम जो नाम दिया, वह था
(अ) सामाजिक मनोविज्ञान
(ब) सामाजिक भौतिकी
(स) सामाजिक नीतिशास्त्र
(द) सामाजिक संहिता।
Answer: (ब) सामाजिक भौतिकी
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने पहले समाजशास्त्र को 'सामाजिक भौतिकी' नाम दिया था।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट ने 'समाजशास्त्र' शब्द गढ़ने से पहले इसे 'सामाजिक भौतिकी' कहा था। यह तथ्य अक्सर पूछा जाता है।
Question 2. 'रिलीजन ऑफ ह्यूमिनिटी' कृति है
(अ) अगस्त कॉम्ट की
(ब) लेनिन की
(स) इमाईल दर्खाम की
(द) कार्ल मार्क्स की।
Answer: (अ) अगस्त कॉम्ट की
In simple words: 'रिलीजन ऑफ ह्यूमिनिटी' किताब अगस्त कॉम्ट ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: अगस्त कॉम्ट की प्रमुख कृतियों को याद रखना उनके विचारों को समझने में मदद करता है।
Question 3. अगस्त कॉम्ट के चिन्तन के नियम में अवस्थाएँ हैं
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच।
Answer: (ब) तीन
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने मानव सोच के विकास की तीन मुख्य अवस्थाएँ बताई हैं।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट के तीन चरणों वाले नियम में धार्मिक, तात्विक और वैज्ञानिक अवस्थाओं का उल्लेख होता है।
Question 5. धर्मशास्त्रीय अवस्था का अन्तिम चरण है
(अ) बहुदेववाद
(ब) प्रेतवाद
(स) आदर्शवाद
(द) एकेश्वरवाद।
Answer: (द) एकेश्वरवाद।
In simple words: धार्मिक विकास के आखिरी चरण को एकेश्वरवाद कहते हैं, जहाँ एक ही ईश्वर को सर्वोच्च शक्ति माना जाता है।
🎯 Exam Tip: अगस्त कॉम्ट के चिंतन के विभिन्न चरणों को उनके सही क्रम और विशेषताओं के साथ याद रखें, खासकर प्रत्येक चरण के अंतिम रूप को।
Question 6. वैज्ञानिक चिन्तन आधारित होता है
(अ) कल्पनाओं पर
(ब) ऐतिहासिक कहानियों पर
(स) तथ्यों व प्रमाणों पर
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (स) तथ्यों व प्रमाणों पर
In simple words: वैज्ञानिक सोच हमेशा सच्ची जानकारी और सबूतों पर आधारित होती है।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक चिंतन की मूल प्रकृति को हमेशा ध्यान में रखें: यह अनुभव, अवलोकन और प्रमाण पर आधारित होता है।
Question 7. प्रत्यक्षवाद में निमलिखित में से कितने तरीके समाहित हैं?
(अ) चार
(ब) पाँच
(स) छः
(द) कोई सीमा नहीं होती।
Answer: (अ) चार
In simple words: प्रत्यक्षवाद में चार मुख्य तरीके शामिल होते हैं, जिनका उपयोग चीजों को समझने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्षवाद के चारों तरीकों के नाम और उनके महत्व को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 8. कार्ल मार्क्स की इच्छा उनको बनाने की थी
(अ) चिकित्सक
(ब) अभियन्ता
(स) अध्यापक
(द) Loading [MathJax]/extensions/MathMenu.js
🎯 Exam Tip: जब विकल्पों में से कोई अधूरा या अनुपलब्ध हो, तो दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प को चुनें या प्रश्न को छोड़ दें यदि उत्तर स्पष्ट न हो।
Question 10. 'द पावर्टी ऑफ फिलासॉफी' के लेखक है
(अ) मैक्स वेबर.
(ब) इमाईल दुर्थीम
(स) कार्ल मार्क्स
(द) लेनिन।
Answer: (स) कार्ल मार्क्स
In simple words: 'द पावर्टी ऑफ फिलासॉफी' नाम की किताब कार्ल मार्क्स ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम को याद रखना अक्सर सीधे-सीधे अंक दिलाता है।
Question 11. रेमण्ड ऐरा ने मार्क्स की विचारधारा को कहा है
(अ) वर्ग संघर्ष का समाजशास्त्र
(ब) समन्वय का समाजशास्त्र
(स) सम्प्रभुता का समाजशास्त्र
(द) सहगामी क्रियाओं का समाजशास्त्र।
Answer: (अ) वर्ग संघर्ष का समाजशास्त्र
In simple words: रेमण्ड ऐरा ने कार्ल मार्क्स की सोच को 'वर्ग संघर्ष का समाजशास्त्र' कहा था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विचारकों के दृष्टिकोणों को याद रखें और समझें कि उन्होंने दूसरों के सिद्धांतों को कैसे देखा या वर्णित किया।
Question 12. Classis शब्द है
(अ) अंग्रेजी भाषा का
(ब) लैटिन भाषा का
(स) फ्रांसीसी भाषा का
(द) पस्तो भाषा का।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में प्रयुक्त होने वाले मूल शब्दों की उत्पत्ति और उनकी भाषा को जानना अवधारणाओं को समझने में मदद करता है।
Question 14. 'क्लास फार इट सेल्फ' का अभिप्राय है
(अ) अपने आप में वर्ग
(ब) वर्ग में उपवर्ग
(स) उपवर्ग में सहवर्ग
(द) अपने लिए वर्ग।
Answer: (द) अपने लिए वर्ग।
In simple words: 'क्लास फार इट सेल्फ' का मतलब है कि जब लोग अपने वर्ग को पहचान कर उसके हितों के लिए काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स द्वारा दिए गए वर्ग संबंधी विभिन्न अवधारणाओं को उनके सही अर्थ के साथ याद रखें।
Question 15. वर्ग चेतना का मुख्य कारण होता है
(अ) प्रोत्साहन
(ब) शोषण
(स) सहयोग
(द) सांत्वना।
Answer: (ब) शोषण
In simple words: लोगों में अपने वर्ग के प्रति जागरूकता तब बढ़ती है जब उनका शोषण होता है।
🎯 Exam Tip: मार्क्सवादी सिद्धांतों में 'शोषण' और 'वर्ग चेतना' के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 16. कार्ल मार्क्स के अनुसार पूँजीवादी व्यवस्था के बाद आएगा
(अ) आधुनिक साम्यवादी युग
(ब) नवागन्तुक सामन्ती युग
(स) नवोन्मेषी आधुनिक युग
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) आधुनिक साम्यवादी युग
In simple words: कार्ल मार्क्स का मानना था कि पूंजीवादी व्यवस्था के बाद आधुनिक साम्यवादी समाज आएगा।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद के चरणों को क्रम से याद रखें।
Question 18. 'डिविजन ऑफ लेवर इन सोसायटी' का प्रकाशन हुआ..
(अ) 1865 ई. में
(ब) 1875 ई. में
(स) 1893 ई. में
(द) 1899 ई. में।
Answer: (स) 1893 ई. में
In simple words: 'डिविजन ऑफ लेवर इन सोसायटी' नाम की किताब साल 1893 में छपी थी।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण ग्रंथों और उनके प्रकाशन वर्ष को याद रखना अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
Question 19. 'आत्महत्या का सिद्धान्त प्रतिपादित किया
(अ) कार्ल मार्क्स ने
(ब) अगस्त कॉम्ट ने
(स) मैक्स
(द) इमाईल दुर्थीम ने।
Answer: (द) इमाईल दुर्थीम ने।
In simple words: आत्महत्या के बारे में सिद्धांत इमाईल दुर्थीम ने दिया था।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में विभिन्न सिद्धांतों और उनके प्रतिपादकों के नामों को सही ढंग से याद रखें।
Question 20. 'यान्त्रिक एकता' विशेषता है
(अ) सरल समाजों की
(ब) जटिल समाजों की
(स) पशु समाजों की
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) सरल समाजों की
In simple words: यान्त्रिक एकता छोटे और साधारण समाजों में पाई जाती है जहाँ लोग एक जैसे होते हैं।
🎯 Exam Tip: यान्त्रिक और सावयवी एकता के बीच के अंतर को समझें और पहचानें कि वे किन प्रकार के समाजों में पाई जाती हैं।
Question 22. मैक्स वेबर वियना विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने
(अ) 1918 ई. में
(ब) 1920 ई. में
(स) 1921 ई. में
(द) 1925 ई. में।
Answer: (अ) 1918 ई. में
In simple words: मैक्स वेबर 1918 में वियना विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने थे।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण समाजशास्त्रियों के जीवन से जुड़े प्रमुख तथ्यों, जैसे कि उनके पदों और समय-सीमाओं को याद रखना उपयोगी है।
Question 23. 'दी सिटी' रचना है
(अ) इमाईल दुर्थीम की
(ब) मैक्स वेबर की
(स) अगस्त कॉम्ट की
(द) कार्ल मार्क्स की।
Answer: (ब) मैक्स वेबर की
In simple words: 'दी सिटी' नाम की किताब मैक्स वेबर ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रीय ग्रंथों और उनके लेखकों के नाम को सटीकता से याद रखें।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. समाजशास्त्र (Sociology) शब्द का निर्माण किस भाषा के किन शब्दों से मिलकर हुआ है?
Answer: समाजशास्त्र (Sociology) शब्द दो भाषाओं के शब्दों से मिलकर बना है: 'सोशियस' (Socius) जो लैटिन भाषा का शब्द है, और 'लोगिया' (Logia) जो ग्रीक भाषा का शब्द है।
In simple words: 'समाजशास्त्र' शब्द लैटिन के 'सोशियस' और ग्रीक के 'लोगिया' शब्दों को मिलाकर बना है।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र की मूल अवधारणाओं और उनके शाब्दिक अर्थों को समझें, क्योंकि यह विषय की नींव है।
Question 2. अLoading [MathJax]/extensions/MathMenu.js
🎯 Exam Tip: जब प्रश्न अधूरा हो, तो उसे स्पष्टता के लिए छोड़ दें या उपलब्ध जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त उत्तर देने का प्रयास करें, यदि संदर्भ स्पष्ट हो।
Question 4. अगस्त कॉम्ट के चिन्तन की तीन अवस्थाओं के नियम में कितने उपादान अथवा अंग हैं? प्रत्येक का नामोल्लेख कीजिए।
Answer: अगस्त कॉम्ट के चिंतन के तीन नियम या अवस्थाएँ हैं: धर्मशास्त्रीय अवस्था, तात्विक अवस्था, और वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था। ये मानव बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण चरण हैं।
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने सोचने के तीन तरीके बताए हैं- धार्मिक, तात्विक और वैज्ञानिक।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट के तीनों नियमों को उनके क्रम और मुख्य विशेषताओं के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. धर्मशास्त्रीय अवस्था में कितने उपस्तर हैं?
Answer: धर्मशास्त्रीय अवस्था में तीन उपस्तर हैं- प्रेतवाद, बहुदेववाद, और एकेश्वरवाद। ये सभी उपस्तर इस बात पर निर्भर करते हैं कि लोग किसी घटना के पीछे कितनी अलौकिक शक्तियों को मानते हैं।
In simple words: धार्मिक अवस्था में तीन छोटे हिस्से हैं- प्रेतवाद, बहुदेववाद और एकेश्वरवाद।
🎯 Exam Tip: धर्मशास्त्रीय अवस्था के इन तीनों उपस्तरों को उनके सही क्रम और अर्थ के साथ याद रखना आवश्यक है।
Question 6. तात्विक अवस्था के अनुसार सभी घटनाएँ किसके द्वारा परिचालित होती हैं?
Answer: तात्विक अवस्था के अनुसार, संसार की सभी घटनाएँ अमूर्त और अवैयक्तिक सत्ता द्वारा संचालित होती हैं। इस अवस्था में लोग किसी अदृश्य शक्ति को घटनाओं का कारण मानते हैं।
In simple words: तात्विक सोच के अनुसार, दुनिया की सभी चीजें किसी अनदेखी और अदृश्य शक्ति के कारण होती हैं।
🎯 Exam Tip: तात्विक अवस्था की मुख्य पहचान को समझें: यह अमूर्त शक्तियों पर आधारित होती है, जो वैज्ञानिक सोच से भिन्न है।
Question 7. अगस्त कॉम्ट को किन तरीकों से समाज की घटनाओं का अध्ययन करने का सुझाव दिया है?
Answer: समाजशास्त्री अगस्त कॉम्ट ने समाज की घटनाओं का अध्ययन करने के लिए चार मुख्य पद्धतियाँ सुझाई हैं: अवलोकन पद्धति, परीक्षण पद्धति, तुलनात्मक पद्धति, और ऐतिहासिक पद्धति। ये वैज्ञानिक अध्ययन के आधार स्तंभ हैं।
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने समाज को समझने के लिए चार तरीके बताए- देखकर, जांचकर, तुलना करके और इतिहास को देखकर।
🎯 Exam Tip: कॉम्ट द्वारा सुझाए गए चारों अध्ययन पद्धतियों के नाम और उनके महत्व को याद रखें।
Question 8. 'अवलोकन' से आप क्या समझते हैं?
Answer: अवलोकन का अर्थ है मानव इंद्रियों (जैसे आँख, कान, नाक और स्पर्श) द्वारा किसी घटना या व्यवहार का क्रमबद्ध और व्यवस्थित अध्ययन करना। यह वैज्ञानिक अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: अवलोकन मतलब अपनी इंद्रियों से किसी चीज को ध्यान से देखना और समझना।
🎯 Exam Tip: 'अवलोकन' की परिभाषा को स्पष्ट और सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 9. किस पद्धति को अगस्त कॉम्ट ने वैज्ञानिक नहीं माना किन्तु समाजशास्त्र के अध्ययन में उसे जरूरी बताया?
Answer: ऐf Loading [MathJax]/extensions/MathMenu.js
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने कुछ पद्धतियों को सीधे वैज्ञानिक नहीं माना, पर समाज को समझने के लिए उन्हें जरूरी बताया।
🎯 Exam Tip: अगस्त कॉम्ट के अध्ययन पद्धतियों के वर्गीकरण को समझें और पहचानें कि कौन सी पद्धतियाँ उनके अनुसार वैज्ञानिक थीं और कौन सी नहीं।
Question 11. कार्ल मार्क्स ने किस विश्वविद्यालय से किस विषय पर डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की?
Answer: कार्ल मार्क्स ने जेना विश्वविद्यालय से 'ऐपीक्यूरस तथा डैमोक्राइटस के भौतिकवाद का आलोचनात्मक विवेचन' विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने इस शोध के माध्यम से अपनी दार्शनिक समझ को प्रदर्शित किया।
In simple words: कार्ल मार्क्स ने जेना विश्वविद्यालय से 'ऐपीक्यूरस और डैमोक्राइटस के भौतिकवाद' पर डॉक्टरेट की उपाधि ली थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विचारकों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और उनके डॉक्टरेट विषयों को याद रखना उनके शुरुआती हितों को समझने में मदद करता है।
Question 12. 'कम्युनिस्ट सिद्धान्त' का प्रतिपादन किनके द्वारा किया गया?
Answer: 'कम्युनिस्ट सिद्धांत' का प्रतिपादन कार्ल मार्क्स और उनके मित्र फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। उन्होंने मिलकर इस विचारधारा को विकसित किया।
In simple words: कम्युनिस्ट सिद्धांत कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने मिलकर बनाया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख सिद्धांतों के सह-संस्थापकों को भी याद रखें, क्योंकि कई विचारधाराएं एक से अधिक व्यक्तियों के योगदान से विकसित हुई हैं।
Question 13. द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धान्त किस समाजशास्त्री ने प्रतिपादित किया?
Answer: द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत कार्ल मार्क्स ने प्रतिपादित किया था। यह उनके पूरे दर्शन का एक केंद्रीय स्तंभ है।
In simple words: द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत कार्ल मार्क्स ने दिया था।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के प्रमुख सिद्धांतों, विशेषकर द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 14. कार्ल मार्क्स का सम्पूर्ण समाजशास्त्रीय कार्य किस पर आधारित था?
Answer: कार्ल मार्क्स का संपूर्ण समाजशास्त्रीय कार्य मुख्य रूप से वर्ग व्यवस्था के विश्लेषण पर आधारित था। उन्होंने समाज को वर्गों में विभाजित और उनके बीच के संघर्षों के आधार पर समझा।
In simple words: कार्ल मार्क्स का सारा समाजशास्त्र वर्ग के बंटवारे और उनके संबंधों को समझने पर टिका था।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के समाजशास्त्रीय चिंतन के केंद्रीय विषय, यानी वर्ग विश्लेषण, को पहचानें।
Question 15. “सामाजिक वर्ग ऐतिहासिक परिवर्तन की इकाइयाँ तथा आर्थिक व्यवस्था द्वारा समाज में निर्मित श्रेणियाँ दोनों ही हैं” यह कथन किसका है?
Answer: यह कथन समाजशास्त्री कार्ल मार्क्स का है। उन्होंने वर्गों को समाज के बदलाव और आर्थिक ढांचे के अभिन्न अंग के रूप में देखा।
In simple words: यह बात कार्ल मार्क्स ने कही थी कि समाज में वर्ग बदलाव लाते हैं और आर्थिक व्यवस्था से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विचारकों के प्रसिद्ध उद्धरणों को उनके मूल अर्थ के साथ याद रखें।
Question 16. कार्ल मार्क्स के अनुसार वर्ग की संरचना कैसे निर्मित होती है?
Answer: कार्ल मार्क्स के अनुसार, वर्ग की संरचना मुख्य रूप से वर्ग चेतना और वर्ग संगठन द्वारा निर्मित होती है। जब लोग अपने समान हितों को पहचानते हैं और संगठित होते हैं, तभी वर्ग बनते हैं।
In simple words: कार्ल मार्क्स के अनुसार, लोग जब अपने वर्ग को पहचानते हैं और एक साथ आते हैं, तब वर्ग बनते हैं।
🎯 Exam Tip: 'वर्ग चेतना' और 'वर्ग संगठन' को कार्ल मार्क्स के वर्ग सिद्धांत के महत्वपूर्ण घटकों के रूप में समझें।
Question 18. कार्ल मार्क्स ने विभिन्न समाजों में वर्ग व्यवस्था का उल्लेख कितने रूपों में किया है?
Answer: कार्ल मार्क्स ने विभिन्न समाजों में वर्ग व्यवस्था का उल्लेख चार रूपों में किया है :
1. आदिम साम्यवादी समाज में वर्ग,
2. दासत्व युग में वर्ग,
3. सामन्ती समाज में वर्ग,
4. पूँजीवादी समाज में वर्ग।
In simple words: कार्ल मार्क्स ने चार तरह के समाजों में वर्ग व्यवस्था बताई है- आदिम, दास, सामंती और पूंजीवादी।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के वर्ग विकास के चरणों को उनके सही क्रम और विशेषताओं के साथ याद रखें।
Question 19. पूँजीवादी समाज में मार्क्स ने किन दो वर्गों का उल्लेख किया है?
Answer: पूँजीवादी समाज में कार्ल मार्क्स ने दो मुख्य वर्गों का उल्लेख किया है :
1. सर्वहारा वर्ग (श्रमिक वर्ग) – ये वे लोग हैं जिनके पास उत्पादन के साधन नहीं होते और उन्हें अपनी मेहनत बेचनी पड़ती है।
2. बुर्जुआ वर्ग (पूँजीपति वर्ग) – ये वे लोग हैं जिनके पास उत्पादन के साधन होते हैं और वे श्रमिकों का शोषण करते हैं।
In simple words: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में दो वर्ग होते हैं- श्रमिक (सर्वहारा) और पूंजीपति (बुर्जुआ)।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स द्वारा बताए गए पूंजीवादी समाज के दोनों वर्गों-बुर्जुआ और सर्वहारा- की परिभाषा और उनकी विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 20. मार्क्स ने वर्ग संघर्ष की अवधारणा किससे प्राप्त की थी?
Answer: कार्ल मार्क्स ने वर्ग संघर्ष की अवधारणा ऑगस्टिन थोरे से प्राप्त की थी। उन्होंने इस अवधारणा को आगे विकसित किया।
In simple words: कार्ल मार्क्स को वर्ग संघर्ष का विचार ऑगस्टिन थोरे से मिला था।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में अवधारणाओं के मूल स्रोतों और उनके विकास में योगदान देने वाले विचारकों को याद रखें।
Question 21. 'द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड्स' का प्रकाशन कब हुआ? इसके लेखक कौन हैं?
Answer: उपर्युक्त पुस्तक का प्रकाशन सन् 1895 में हुआ। इसके लेखक समाजशास्त्री इमाईल दुर्थीम हैं, जिन्होंने समाजशास्त्रीय अध्ययन के नियमों को इसमें समझाया।
In simple words: 'द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड्स' किताब 1895 में छपी थी और इसे इमाईल दुर्थीम ने लिखा था।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में महत्वपूर्ण पुस्तकों के नाम, उनके प्रकाशन वर्ष और लेखकों को याद रखना आवश्यक है।
Question 22. 'स Loading [MathJax]/extensions/MathMenu.js त्री ने प्रस्तुत की?
Answer: 'स Loading [MathJax]/extensions/MathMenu.js त्री ने प्रस्तुत की?
In simple words: यदि प्रश्न अधूरा है, तो उसे पूरा करने के लिए अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होगी।
🎯 Exam Tip: परीक्षा में अधूरे प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें और यदि आवश्यक हो तो संदर्भ की तलाश करें, या संकेत दें कि जानकारी अधूरी है।
Question 24. दुर्शीम ने सामाजिक एकता के लिए किस वस्तुस्थिति को आधार माना?
Answer: दुर्खीम ने सामाजिक एकता के लिए 'श्रम विभाजन' को आधार माना। उनके अनुसार, समाज में कार्यों का विभाजन ही लोगों को एक साथ जोड़ता है।
In simple words: दुर्खीम ने कहा कि समाज में काम के बंटवारे से लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं और एकता बनती है।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम के सामाजिक एकता और श्रम विभाजन के सिद्धांतों के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 25. श्रम विभाजन से आप क्या समझते हैं?
Answer: श्रम विभाजन का अर्थ है समाज में विभिन्न प्रकार के कार्यों का अलग-अलग व्यक्तियों या समूहों द्वारा किया जाना। यह समाज के विकास और विशेषीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: श्रम विभाजन का मतलब है कि समाज में हर काम को अलग-अलग लोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: श्रम विभाजन की अवधारणा को उसकी परिभाषा और महत्व के साथ स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 26. यान्त्रिक एकता एवं सावयवी एकता की अवधारणा किस समाजशास्त्री ने प्रस्तुत की?
Answer: समाजशास्त्री इमाईल दुर्खीम ने। उन्होंने इन दोनों अवधारणाओं के माध्यम से समाजों के प्रकारों को समझाया।
In simple words: यान्त्रिक और सावयवी एकता का विचार दुर्खीम ने दिया था।
🎯 Exam Tip: इमाईल दुर्खीम के यान्त्रिक और सावयवी एकता के सिद्धांतों को उनके अंतर और संबंधित समाजों के प्रकारों के साथ याद रखें।
Question 27. 'सामाजिक तथ्य' का सम्बन्ध किस समाजशास्त्री से है?
Answer: 'सामाजिक तथ्य' का सम्बन्ध समाजशास्त्री इमाईल दुर्खीम से है। यह उनकी समाजशास्त्र की एक केंद्रीय अवधारणा है।
In simple words: 'सामाजिक तथ्य' दुर्खीम के समाजशास्त्र का एक अहम विचार है।
🎯 Exam Tip: 'सामाजिक तथ्य' की परिभाषा और उसके महत्व को इमाईल दुर्खीम के संदर्भ में समझें।
Question 28. समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने किस विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई प्रारम्भ की।
Answer: समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने हाइडेलबर्ग विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई प्रारम्भ की थी। यह उनकी प्रारंभिक शिक्षा का हिस्सा था।
In simple words: मैक्स वेबर ने हाइडेलबर्ग विश्वविद्यालय में कानून पढ़ना शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों की शैक्षणिक यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों को याद रखना उपयोगी है।
Question 29. समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने किस विषयवस्तु को समाजशास्त्र की केन्द्रीय अध्ययन की वस्तु माना?
Answer: स Loading [MathJax]/extensions/MathMenu.js
In simple words: मैक्स वेबर ने समाजशास्त्र में कुछ खास चीजों को सबसे ज्यादा समझने वाली चीज माना था।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण के केंद्रीय बिंदु को पहचानें, जैसे 'सामाजिक क्रिया'।
Question 31. 'सामाजिक क्रिया सिद्धान्त' का प्रतिपादन किस समाजशास्त्री ने किया?
Answer: 'सामाजिक क्रिया सिद्धांत' का प्रतिपादन समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने किया था। यह उनके समाजशास्त्र का मूल आधार है।
In simple words: 'सामाजिक क्रिया सिद्धांत' मैक्स वेबर ने दिया था।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के 'सामाजिक क्रिया सिद्धांत' की परिभाषा और उसके मुख्य तत्वों को याद रखें।
Question 32. समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के तहत कितनी प्रकार की क्रियाओं का उल्लेख किया है?
Answer: समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के तहत चार प्रकार की क्रियाओं का उल्लेख किया है :
1. तार्किक क्रिया - जो तर्क और लक्ष्य पर आधारित हो।
2. मूल्यात्मक क्रिया - जो मूल्यों और विश्वासों से प्रेरित हो।
3. भावनात्मक क्रिया - जो भावनाओं और आवेगों से संचालित हो।
4. परम्परात्मक क्रिया - जो आदतों और परम्पराओं से निर्देशित हो।
In simple words: मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया को चार तरह से बांटा है- तार्किक, मूल्यात्मक, भावनात्मक और परम्परागत।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर द्वारा वर्णित चारों प्रकार की सामाजिक क्रियाओं को उनके उदाहरणों सहित समझें।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अगस्त कॉम्ट द्वारा समाजशास्त्र का उद्भव कैसे हुआ? संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: अगस्त कॉम्ट ने मानव समाज को समझने के लिए समाजशास्त्र की स्थापना की थी, इसीलिए उन्हें 'समाजशास्त्र का जनक' कहा जाता है। वे समाजशास्त्र को एक वास्तविक विज्ञान बनाना चाहते थे जो मानव जाति के भूतकाल और भविष्य को समझा सके। कॉम्ट ने पहले इस विज्ञान को 'सामाजिक भौतिकी' नाम दिया, लेकिन बाद में इसे बदलकर 'समाजशास्त्र' कर दिया। 'Sociology' शब्द लैटिन के 'Socius' (समाज) और ग्रीक के 'Logia' (शास्त्र या विज्ञान) से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'समाज का विज्ञान' है।
In simple words: अगस्त कॉम्ट ने समाज को वैज्ञानिक तरीके से समझने के लिए 'समाजशास्त्र' बनाया। उन्होंने पहले इसे 'सामाजिक भौतिकी' कहा था, फिर 'समाजशास्त्र' नाम दिया, जिसका मतलब 'समाज का विज्ञान' है।
🎯 Exam Tip: अगस्त कॉम्ट को समाजशास्त्र के जनक के रूप में याद रखें और समाजशास्त्र शब्द की उत्पत्ति व उसके अर्थ को स्पष्ट करें।
Question 2. कॉम्ट की तीन अवस्थाओं के नियम के बारे में आप क्या जानते हैं? संक्षेप में लिखिए।
Answer: सामाजिक चिंतन और नए सामाजिक विज्ञान की रचना के दृष्टिकोण से कॉम्ट ने मानव के बौद्धिक विकास को तीन स्तरों के नियम द्वारा प्रकट किया। ये अवस्थाएँ हैं:
1. धर्मशास्त्रीय अवस्था – इसमें व्यक्ति घटनाओं को अलौकिक शक्तियों से जोड़कर देखता है।
2. तात्विक अवस्था – यहाँ अमूर्त शक्तियों को घटनाओं का कारण माना जाता है।
3. वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था – यह तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित अंतिम अवस्था है, जिसमें कल्पना का महत्व नहीं होता।
In simple words: कॉम्ट ने सोचा कि इंसान की सोचने का तरीका तीन चरणों में विकसित होता है- पहले धार्मिक सोच, फिर तात्विक सोच और आखिर में वैज्ञानिक सोच।
🎯 Exam Tip: अगस्त कॉम्ट के बौद्धिक विकास के तीनों चरणों को उनके क्रम, मुख्य विशेषताओं और प्रत्येक चरण में चिंतन के तरीके के साथ याद रखें।
Question 3. तात्विक अवस्था से आप क्या समझते हैं? समझाइए।
Answer: तात्विक अवस्था अगस्त कॉम्ट द्वारा प्रस्तुत चिंतन की तीन अवस्थाओं में दूसरी अवस्था है। इसमें मानव की चिंतन और बुद्धिमत्ता के विकास के कारण समस्याएँ बढ़ गईं थीं। धार्मिक चिंतन इन समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में, मानव एकेश्वरवाद से संतुष्ट नहीं हो पा रहा था, इसलिए तात्विक चिंतन को अपनाया गया। इस अवस्था में अमूर्त और अदृश्य शक्तियों को घटनाओं का कारण माना जाता है, जहाँ किसी मूर्त ईश्वर की कल्पना नहीं होती।
In simple words: तात्विक अवस्था कॉम्ट की दूसरी सोच है, जिसमें लोग मानते हैं कि अदृश्य और अमूर्त शक्ति ही घटनाओं का कारण है, न कि कोई खास भगवान।
🎯 Exam Tip: तात्विक अवस्था को उसकी अमूर्त प्रकृति और धार्मिक अवस्था से उसके अंतर के संदर्भ में स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 4. वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था को समझाइए।
Answer: वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था कॉम्ट के चिंतन की तीन अवस्थाओं में अंतिम चरण है। यह तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होती है, जिसमें कल्पना का कोई महत्व नहीं होता। यह अवस्था अवलोकन से शुरू होती है, जहाँ तथ्यों का वर्गीकरण, सामान्यीकरण और परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद नियम बनाए जाते हैं। वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था में चार मुख्य अवयव हैं- अवलोकन पद्धति, परीक्षण पद्धति, तुलनात्मक पद्धति, और ऐतिहासिक पद्धति।
In simple words: वैज्ञानिक सोच कॉम्ट की आखिरी सोच है, जो सिर्फ सच और सबूतों पर चलती है। इसमें कल्पना नहीं होती और इसे देखने, जांचने, तुलना करने और इतिहास से सीखने के तरीकों से समझा जाता है।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक या प्रत्यक्षवादी अवस्था की प्रकृति को उसके आधारभूत सिद्धांतों-तथ्यों, प्रमाणों और अध्ययन पद्धतियों- के संदर्भ में स्पष्ट करें।
Question 5. रेमण्ड ऍरा ने कार्ल मार्क्स की वर्ग की अवधारणा के विषय में क्या कहा है?
Answer: रेमण्ड ऐरा ने कार्ल मार्क्स की वर्ग की अवधारणा के विषय में निम्नलिखित बातें कही हैं :
1. वर्गों का अस्तित्व उत्पादन के तरीकों के विकास और इतिहास की अलग-अलग स्थितियों से जुड़ा है, यानी वर्ग उत्पादन के विकास के साथ बनते हैं।
2. वर्ग संघर्ष अनिवार्य रूप से सर्वहारा (मजदूर वर्ग) को अधिनायकवाद (एक व्यक्ति का शासन) की ओर ले जाता है।
3. यह अधिनायकवाद केवल बदलाव का दौर होता है, जो वर्गों को खत्म करता है और एक ऐसे समाज की स्थापना की ओर ले जाता है जहाँ कोई वर्ग नहीं होता।
पूंजीपति वर्ग को बुर्जुआ वर्ग कहते हैं। सर्वहारा वर्ग के पास उत्पादन के साधन नहीं होते, बल्कि वे उत्पादन के साधन के रूप में काम करते हैं, जबकि पूंजीपतियों के पास उत्पादन के साधन होते हैं और वे अधिक लाभ कमाने के लिए सर्वहारा वर्ग का शोषण करते हैं।
In simple words: रेमण्ड ऐरा ने कहा कि मार्क्स के अनुसार वर्ग उत्पादन के तरीकों से बनते हैं, वर्ग संघर्ष से मजदूर वर्ग का शासन आता है, जो अंत में वर्गहीन समाज बनाता है। पूंजीपति (बुर्जुआ) साधन के मालिक होते हैं और श्रमिक (सर्वहारा) का शोषण करते हैं।
🎯 Exam Tip: रेमण्ड ऐरा के माध्यम से कार्ल मार्क्स की वर्ग अवधारणा के मुख्य बिंदुओं को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें।
Question 7. वर्ग संघर्ष के उद्भव एवं विशेषता पर प्रकाश डालिए।
Answer: वर्ग संघर्ष की अवधारणा कार्ल मार्क्स के महत्वपूर्ण विचारों में से एक है। मार्क्स ने इस अवधारणा को ऑगस्टिन थोर से लिया, लेकिन इसकी पूरी व्याख्या स्वयं की थी। मार्क्स का मानना था कि इतिहास के हर युग और समाज में दो विरोधी वर्ग हमेशा से रहे हैं- शोषक और शोषित वर्ग। ये दोनों वर्ग हमेशा संघर्षरत रहे हैं। इस संघर्ष से ही समाज का विकास होता है, और एक युग या अवस्था समाप्त होकर उसकी जगह दूसरा युग लेता है। इसका मतलब है कि समाज में विभिन्न वर्ग होते हैं जिनके अपने-अपने हित होते हैं, और इन्हीं हितों को लेकर उनमें विरोध और संघर्ष होता है। इस संघर्ष का मुख्य कारण उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण करने की इच्छा होती है। दोनों ही वर्ग उत्पादन के साधनों पर अपना अधिकार जमाने के लिए संघर्ष करते हैं।
In simple words: मार्क्स के अनुसार, समाज में हमेशा दो विरोधी वर्ग (शोषक और शोषित) होते हैं जो आपस में लड़ते रहते हैं। यह लड़ाई उत्पादन के साधनों पर राज करने के लिए होती है और इससे समाज में बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के वर्ग संघर्ष सिद्धांत की परिभाषा, उसके कारणों और परिणामों को स्पष्ट करें।
Question 8. 'सावयवी एकता' से आप क्या समझते हैं?
Answer: 'सावयवी एकता' समाजशास्त्री इमाईल दुर्खीम द्वारा बताई गई एक अवधारणा है। इस प्रकार की एकता आधुनिक, जटिल, विकसित और औद्योगिक समाजों में पाई जाती है। इसमें समूह के सदस्यों में पाई जाने वाली विभिन्नताएँ ही एकता का आधार होती हैं, इसलिए ऐसे समाजों को 'विभिन्नता की एकता' वाला समाज भी कहा जाता है। इन समाजों में श्रम विभाजन और विशेषीकरण की प्रधानता के कारण भिन्नताएँ अधिक होती हैं। ये भिन्नताएँ समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बढ़ावा देती हैं और सामूहिक चेतना को कमजोर करती हैं। ऐसे समाजों में लोगों की आवश्यकताएँ अधिक होती हैं, इसलिए वे अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर अधिक निर्भर रहते हैं, जैसे शरीर के विभिन्न अंग एक-दूसरे से भिन्न होते हुए भी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। ऐसे समाजों में प्रतिकारी कानून पाए जाते हैं जो व्यक्ति को सुधरने का मौका देते हैं।
In simple words: सावयवी एकता आधुनिक समाज में पाई जाती है, जहाँ लोग अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं, जैसे शरीर के अंग। यह एकता श्रम विभाजन से बनती है और इसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: दुर्खीम की 'सावयवी एकता' की परिभाषा, उसकी विशेषताओं और आधुनिक समाजों में उसके महत्व को स्पष्ट करें।
Question 9. दुर्शीम की 'सामाजिक एकता की अवधारणा' का संक्षेप में विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: दुर्खीम की 'सामाजिक एकता की अवधारणा' समाजशास्त्र को उनकी अनुपम देन है। दुर्खीम के अनुसार किसी भी समाज का विकास उसकी एकता में निहित है। जब तक समाज के लोगों में एक-दूसरे के प्रति लगाव नहीं होता है तब तक वे एक-दूसरे के प्रति निकट आने की अLoading [MathJax]/extensions/MathMenu.js
In simple words: दुर्खीम ने समझाया कि समाज की तरक्की उसकी एकता पर निर्भर करती है और जब लोग एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस नहीं करते, तब उन्हें एक-दूसरे के पास आने की जरूरत महसूस होती है।
🎯 Exam Tip: इमाईल दुर्खीम की सामाजिक एकता की अवधारणा को उसके मुख्य सिद्धांतों और समाज के विकास में उसके योगदान के संदर्भ में समझाएँ।
Question 10. सामाजिक क्रिया के सम्बन्ध में मैक्स वेबर के दृष्टिकोण को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए।
Answer: समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने 'सामाजिक क्रिया' को समाजशास्त्र की केंद्रीय अध्ययन वस्तु माना है। उन्होंने सामाजिक क्रिया की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की और समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति को दर्शाने के लिए 'सामाजिक क्रिया सिद्धांत' का सहारा लिया। यह सिद्धांत आदर्श प्रारूप का एक प्रकार है और इसे वेबर ने अपनी पुस्तक 'सामाजिक और आर्थिक संगठन' में प्रतिपादित किया। मैक्स वेबर के अनुसार, सामाजिक संबंधों के निर्माण के लिए हमें विभिन्न लोगों से बातचीत या अंतःक्रिया करनी पड़ती है, और इन्हीं अंतःक्रियाओं से सामाजिक संबंध बनते हैं।
In simple words: मैक्स वेबर ने कहा कि समाजशास्त्र में सामाजिक क्रिया को समझना सबसे जरूरी है। उनके हिसाब से, लोग एक-दूसरे से बातचीत करते हैं, तभी सामाजिक संबंध बनते हैं।
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया सिद्धांत की परिभाषा, उसके महत्व और सामाजिक संबंधों के निर्माण में उसकी भूमिका को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Sociology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. प्रत्यक्षवाद क्या है? विस्तृत विवेचना कीजिए।
Answer: अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन करने के लिए प्रत्यक्षवाद को जन्म दिया, जिसे 'विज्ञानवाद' के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्यक्षवाद के अनुसार, ज्ञान का विकास निश्चित अवस्थाओं में होता है। कॉम्ट समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्थापित करना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने समाजशास्त्र में वैज्ञानिक विधि के प्रयोग पर बल दिया। उनके अनुसार, समाजशास्त्र को विज्ञान की श्रेणी में लाने के लिए समाजशास्त्रियों को निम्नलिखित चार पद्धतियों से समाज की घटनाओं का अध्ययन करना होगा :
• अवलोकन पद्धति: कॉम्ट के अनुसार, समाजशास्त्र को विज्ञान बनाने के लिए अवलोकन पद्धति पर जोर दिया जाना चाहिए। अवलोकन मानव इंद्रियों द्वारा किया गया क्रमबद्ध और व्यवस्थित अध्ययन है, यानी किसी भी घटना का मानव इंद्रियों (आँख, कान, नाक और स्पर्श) द्वारा व्यवस्थित अध्ययन करने से वह शास्त्र विज्ञान की श्रेणी में आता है।
• परीक्षण पद्धति: कॉम्ट के अनुसार, समाजशास्त्र में घटनाओं का बार-बार परीक्षण होना चाहिए, हालांकि उनका यह भी मानना था कि सामाजिक विज्ञानों में पूरी तरह से परीक्षण संभव नहीं है, लेकिन समाजशास्त्र को विज्ञान की श्रेणी में लाने के लिए घटनाओं का आंशिक परीक्षण आवश्यक है।
• तुलनात्मक पद्धति: Loading [MathJax]/extensions/MathMenu.jsमाजिक प्रघटनाओं का तुलनात्मक अध्ययन होना आवश्यक है। क्योंकि हर तरह की घटना क काय-कारण अलग-अलग हात ह। इसलिए उन घटनाओं का तुलनात्मक विवेचन आवश्यक है।
• ऐतिहासिक पद्धति: इस पद्धति में समाज और उसकी घटनाओं का अध्ययन ऐतिहासिक विकास के क्रम में किया जाता है, ताकि बदलावों को समझा जा सके।
इन पद्धतियों के माध्यम से कॉम्ट ने समाजशास्त्र को एक ठोस वैज्ञानिक आधार प्रदान करने का प्रयास किया।
In simple words: प्रत्यक्षवाद एक वैज्ञानिक तरीका है जिसमें समाज को देखने, जांचने, तुलना करने और उसके इतिहास को समझने से पढ़ा जाता है। अगस्त कॉम्ट ने इसे समाज को विज्ञान बनाने के लिए दिया था।
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्षवाद की परिभाषा, उसकी विशेषताओं और अगस्त कॉम्ट द्वारा सुझाई गई चारों अध्ययन पद्धतियों को विस्तार से समझाएँ।
Question 2. वर्ग के सम्बन्ध में लेनिन के दृष्टिकोण की समीक्षा कीजिए।
Answer: वर्ग के संबंध में लेनिन का दृष्टिकोण वर्ग को परिभाषित करते हुए यह बताता है कि वर्ग लोगों के ऐसे बड़े समूह को कहते हैं जो सामाजिक उत्पादन के इतिहास द्वारा तय की गई किसी पद्धति में अपने स्थान, उत्पादन के साधनों से अपने संबंध, श्रम के सामाजिक संगठन में अपनी भूमिका और सामाजिक संपत्ति के जिस हिस्से के वे मालिक होते हैं, उसके परिणाम और प्राप्त करने के तरीकों के कारण एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। इस परिभाषा में लेनिन ने वर्ग की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है :
1. वर्ग लोगों के बहुत बड़े समूह को कहते हैं।
2. प्रत्येक वर्ग का सामाजिक उत्पादन के इतिहास द्वारा निर्धारित पद्धति में एक स्थान होता है।
3. सामाजिक समूह का उत्पादन के साधनों से सम्बन्ध होता है।
4. धर्म के सामाजिक संगठन में उनकी भूमिका होती है।
5. प्रत्येक वर्ग का सामाजिक सम्पदा प्राप्त करने का अपना तौर-तरीका होता है।
6. मार्क्स कहते हैं कि इतिहास में अब तक जितनी भी सामाजिक व्यवस्थाएँ रही हैं, उनमें सम्पत्ति का वितरण और समाज का वर्ग एवं श्रेणियों में विभाजन इस बात पर निर्भर रहा है कि समाज में क्या और कैसे उत्पादन हुआ तथा उपज का विनिमय कैसे हुआ।
In simple words: लेनिन ने समझाया कि वर्ग लोगों के बड़े समूह होते हैं जो समाज में अपनी जगह, काम के साधनों से जुड़ाव, काम की भूमिका और संपत्ति पाने के तरीके के कारण एक-दूसरे से अलग होते हैं।
🎯 Exam Tip: लेनिन द्वारा दी गई वर्ग की परिभाषा और उसकी छह विशेषताओं को विस्तार से याद रखें, क्योंकि यह वर्ग सिद्धांत को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
Question 3. प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक समाज में वर्गों का निर्माण किस प्रकार हुआ? कार्ल मार्क्स के दृष्टिकोण से समझाइए।
Answer: कार्ल मार्क्स के दृष्टिकोण के अनुसार, प्राचीन काल से लेकर आज तक समाज में वर्गों का निर्माण निम्नलिखित तरह से हुआ :
• आदिम साम्यवादी समाज में वर्ग: यह इतिहास का पहला युग था, जिसमें उत्पादन के साधनों पर सबका समान स्वामित्व था। सभी लोग मिलकर उत्पादन कार्य करते थे और उसका वितरण भी समान होता था। इस समाज में श्रम विभाजन केवल लिंग भेद के आधार पर था, इसलिए इस युग में वर्ग व्यवस्था नहीं थी।
• दासत्व युग में वर्ग: तो उस समय वर्ग का निर्माण होने लगा। उस समय मनुष्य कृषि कार्य करता था। इसमें मालिक और दास दो वर्ग थे, जहाँ मालिक उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण रखते थे और दासों का शोषण करते थे।
• सामंती युग में वर्ग: इस युग में सामंतों और किसानों के वर्ग थे। सामंतों के पास भूमि का स्वामित्व था और वे किसानों से खेती करवाते थे।
• पूँजीवादी समाज में वर्ग: इस समाज में उत्पादन के साधनों पर पूंजीपतियों का अधिकार होता है, जो श्रमिकों (सर्वहारा) से काम करवाते हैं और उनका शोषण करते हैं।
In simple words: कार्ल मार्क्स ने बताया कि इतिहास में समाज चार तरह से बदला है- पहले सब बराबर थे, फिर मालिक-दास बने, फिर सामंत-किसान और अब पूंजीपति-श्रमिक, हर बदलाव में नए वर्ग बनते गए।
🎯 Exam Tip: कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद के विभिन्न चरणों और उनमें उत्पन्न हुए वर्ग संरचनाओं को उनके मुख्य लक्षणों के साथ याद रखें।
प्रश्न 4. सामाजिक एकता की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए यान्त्रिक एवं सावयवी एकता को समझाइए।
उत्तर: समाजशास्त्री इमाईल दुर्खीम ने सामाजिक एकता की अवधारणा प्रस्तुत की है। इस अवधारणा के अनुसार, किसी भी समाज की तरक्की उसकी एकता पर निर्भर करती है। दुर्खीम ने सामाजिक एकता को दो मुख्य प्रकारों में बांटा है: यान्त्रिक एकता और सावयवी एकता।
सामाजिक एकता की अवधारणा:
दुर्खीम मानते हैं कि किसी भी समाज का विकास तभी होता है जब समाज के लोग आपस में जुड़े हों। यह जुड़ाव सिर्फ समानता से नहीं आता, बल्कि विभिन्नताओं के बावजूद भी लोग एक-दूसरे से जुड़े रह सकते हैं। जैसे भारत में अलग-अलग जाति, भाषा, क्षेत्र और धर्म के लोग होने के बावजूद सभी भारतीय होने के नाते एक हैं। यह विभिन्नता हमें एक साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करती है। दुर्खीम के अनुसार, सामाजिक एकता श्रम विभाजन में ही छिपी है।
यान्त्रिक एकता:
यह एकता सरल, पुराने और छोटे समाजों में पाई जाती है। ऐसे समाजों में लोगों की सोच, विश्वास, और जीवन जीने का तरीका बहुत समान होता है। उनकी मानसिकता, सामाजिकता और नैतिकता भी एक जैसी होती है। इन समाजों का आकार छोटा होता है, इसलिए लोगों की ज़रूरतें सीमित और समान होती हैं। उन पर परम्पराएँ, जनमत और धर्म का बहुत प्रभाव होता है। ऐसे समाजों में व्यक्ति का अपना अलग व्यक्तित्व नहीं होता, बल्कि वह समूह के साथ मिलकर सोचता और काम करता है। इन समाजों में श्रम विभाजन और आपसी मतभेद बहुत कम होते हैं। इसी कारण ऐसी एकता को 'यान्त्रिक एकता' कहा जाता है।
सावयवी एकता:
यह एकता यान्त्रिक एकता के बिल्कुल उलट है। सावयवी एकता आधुनिक, जटिल, विकसित और औद्योगिक समाजों में पाई जाती है। इस एकता का आधार समूह के सदस्यों के बीच पाई जाने वाली विभिन्नताएँ होती हैं। इसे 'विभिन्नता की एकता' वाला समाज भी कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: सामाजिक एकता के प्रकारों को उदाहरणों के साथ समझाना महत्वपूर्ण है, खासकर दुर्खीम के विचारों को स्पष्ट करते समय।
प्रश्न 5. श्रम विभाजन के परिणामों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर: श्रम विभाजन के मुख्य परिणाम नीचे दिए गए हैं:
• कार्यों में स्वतंत्रता और खास योग्यता का बढ़ना:
श्रम विभाजन का एक बड़ा परिणाम यह है कि कामों को बांटने से काम करने की आज़ादी और गति बढ़ती है। इससे लोगों को अपने काम बदलने के ज़्यादा अवसर मिलते हैं।
• सभ्यता का विकास:
दुर्खीम का मानना है कि श्रम विभाजन के कारण समाज में सभ्यता का विकास भी होता है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे समाज में काम का बँटवारा बढ़ता है, वैसे-वैसे सभ्यता भी विकसित होती जाती है। इसलिए, श्रम विभाजन से सभ्यता का विकास होता है। सामाजिक प्रगति भी बढ़ती है, क्योंकि बदलाव एक हमेशा चलने वाला नियम है, और श्रम विभाजन इसमें मदद करता है।
• नए समूहों का बनना और आपसी निर्भरता:
दुर्खीम के अनुसार, श्रम विभाजन का एक और अहम नतीजा यह है कि समाज में सिर्फ नए समूह ही नहीं बनते, बल्कि ये समूह एक-दूसरे पर ज़्यादा निर्भर भी होते जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नए समूह खास तरह के काम करते हैं, और अपनी बाकी ज़रूरतों के लिए दूसरे समूहों पर निर्भर रहते हैं।
• पुराने समाजों में श्रम विभाजन का स्तर:
पुराने समाजों में काम का बँटवारा कम था, लेकिन सामूहिक चेतना ज़्यादा थी। जैसे-जैसे समाज में श्रम विभाजन बढ़ता गया, सामूहिक चेतना कम होती गई और व्यक्तिगत सोच ज़्यादा बढ़ने लगी।
• दमनकारी कानून और नैतिक दबाव:
श्रम विभाजन समाज की कानून व्यवस्था को भी बदल देता है। यान्त्रिक एकता वाले समाजों में, जहाँ समानता होती है, वहाँ दमनकारी कानून होते हैं। वहीं, सावयवी एकता वाले समाजों में, जहाँ विभिन्नता के कारण श्रम विभाजन ज़्यादा होता है, वहाँ विशेषीकरण के कारण समाज जटिल हो जाता है। ऐसे समाजों में व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिकारी कानून बनाए जाते हैं। श्रम विभाजन एक तरफ व्यक्तिवाद को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी तरफ सामूहिक नैतिकता को भी विकसित करता है।
• सावयवी सामाजिक एकता:
श्रम विभाजन से सावयवी एकता बनती है, जहाँ अलग-अलग हिस्से एक-दूसरे पर निर्भर होकर काम करते हैं और सहयोग करते हैं। भले ही ये हिस्से अलग-अलग काम करते हों, पर वे एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
In simple words: श्रम विभाजन से समाज में लोगों को अपने काम में ज़्यादा आज़ादी और खास योग्यता मिलती है, सभ्यता बढ़ती है, नए समूह बनते हैं जो एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं, और कानूनी व नैतिक व्यवस्थाएँ भी बदल जाती हैं।
🎯 Exam Tip: श्रम विभाजन के परिणामों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक परिणाम को स्पष्ट रूप से बिंदुवार समझाएं और दुर्खीम के विचारों को शामिल करें।
प्रश्न 7. सामाजिक क्रिया के प्रकारों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर: मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया को चार मुख्य प्रकारों में बांटा है, जो इस प्रकार हैं:
(i) तार्किक क्रिया:
मैक्स वेबर के अनुसार, इस प्रकार की क्रिया में व्यक्ति तर्क और खास मकसद को बहुत ज़रूरी मानता है। इन क्रियाओं को करते समय व्यक्ति अपने लक्ष्य पर ध्यान देता है और तर्क के आधार पर काम करता है। इसीलिए वेबर इसे 'लक्ष्य के प्रति अभिस्थापित' क्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई इंजीनियर नदी पर पुल बनाता है, तो वह तर्क के आधार पर तय करता है कि पुल कहाँ बनाया जाए ताकि उससे ज़्यादा से ज़्यादा फायदा हो। ऐसी क्रिया तार्किक क्रिया कहलाती है।
(ii) मूल्यात्मक क्रिया:
जब व्यक्ति समाज के मूल्यों से प्रभावित होकर कोई काम करता है, तो उसे मूल्यात्मक क्रिया कहते हैं। वेबर इसे 'मूल्य के प्रति अभिस्थापित' क्रिया कहते हैं। इस तरह की क्रिया के पीछे तर्क का होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि यह नैतिकता और धर्म के नियमों से चलती है। उदाहरण के लिए, जब कोई समुद्री जहाज़ डूब रहा हो, तो कप्तान की नैतिकता होती है कि वह पहले यात्रियों और अपने नीचे के कर्मचारियों को बचाए, फिर खुद को। ऐसा करते समय वह खुद के मरने को अच्छा मानता है, न कि खुद को बचाने को। वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि वह समाज के मूल्यों से बंधा हुआ है।
(iii) भावनात्मक क्रिया:
भावनात्मक क्रिया वह होती है जो किसी व्यक्ति की भावनाओं, जैसे प्यार, गुस्सा, डर या खुशी से प्रेरित होकर की जाती है। इस प्रकार की क्रिया में व्यक्ति अपने भावनात्मक आवेगों के कारण काम करता है, न कि तर्क या मूल्यों के आधार पर। उदाहरण के लिए, किसी दोस्त को खुश देखकर गले लगाना या गुस्से में किसी को डांटना भावनात्मक क्रियाएं हैं।
(iv) परम्परात्मक क्रिया:
इस प्रकार की क्रिया का संबंध पुरानी प्रथाओं और परम्पराओं से होता है। इसका मतलब है कि जो सामाजिक क्रियाएँ पुरानी रीति-रिवाजों और परम्पराओं के प्रभाव में की जाती हैं, उन्हें परम्परात्मक क्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए, मृत्युभोज या जाति में विवाह जैसी क्रियाएँ परम्परात्मक क्रियाएँ हैं।
इस वर्गीकरण से साफ है कि वेबर ने यह समझाने की कोशिश की कि व्यक्ति कोई भी काम तर्क, मूल्य, भावनाओं और परम्पराओं के प्रभाव में आकर ही करता है। वेबर के अनुसार, पश्चिमी देशों में ज़्यादातर तार्किक क्रियाएँ होती हैं, जबकि पूर्वी देशों में मूल्यात्मक, भावनात्मक और परम्परात्मक क्रियाएँ ज़्यादा होती हैं।
In simple words: सामाजिक क्रिया चार तरह की होती है: तर्क के आधार पर (तार्किक), मूल्यों के आधार पर (मूल्यात्मक), भावनाओं के आधार पर (भावनात्मक), और पुरानी प्रथाओं के आधार पर (परम्परात्मक).
🎯 Exam Tip: मैक्स वेबर के सामाजिक क्रिया के प्रकारों को याद रखने के लिए, प्रत्येक प्रकार की परिभाषा के साथ एक स्पष्ट उदाहरण भी दें।
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