RBSE Solutions Class 11 Sociology Chapter 10 भारतीय समाजशास्त्री

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Class 11 Sociology Chapter 10 भारतीय समाजशास्त्री RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Sociology Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Sociology Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. मुम्बई विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रथम प्रोफेसर कौन थे?
(अ) जी.एस.घुर्ये
(ब) पैट्रिस गिडीज
(स) एम. एन. श्रीनिवास
(द) ए. आर. देसाई।
Answer: (ब) पैट्रिस गिडीज
In simple words: मुम्बई विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के पहले प्रोफेसर पैट्रिस गिडीज थे।

🎯 Exam Tip: इस तरह के तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए नाम और उनकी भूमिका को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. घुर्ये कब मुम्बई विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने?
(अ) 1924 में
(ब) 1934 में
(स) 1959 में
(द) 1922 में
Answer: (The options and answer for this question are not fully provided in the source content. However, based on content later in the document, G.S. Ghurye became a Reader in 1924 and a Professor in 1934 at Mumbai University.)
(ब) 1934 में
In simple words: घुर्ये 1934 में मुम्बई विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने थे।

🎯 Exam Tip: प्रमुख शिक्षाविदों के महत्वपूर्ण पदों और उनकी समय-सीमा को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होता है।

 

Question 3. घुर्ये ने जाति की कितनी विशेषताएँ बतलाईं?
(अ) 4
(ब) 6
(स) 8
(द) 10
Answer: (ब) 6
In simple words: घुर्ये ने जाति की छह मुख्य विशेषताएँ बताई थीं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों द्वारा दिए गए वर्गीकरण या विशेषताओं की संख्या को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. डी.पी. मुकर्जी ने किसे समाज शास्त्र की विषयवस्तु माना है?
(अ) परम्परा
(ब) द्वन्द्व
(स) संस्कृति
(द) आधुनिकीकरण।
Answer: (अ) परम्परा
In simple words: डी.पी. मुकर्जी ने परम्पराओं को समाजशास्त्र की मुख्य चीज़ माना था।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों के मुख्य विचारों और उनके केंद्रीय अध्ययन विषयों को याद रखना चाहिए।

 

Question 5. मुकर्जी ने परम्पराओं को समझने के लिए कौन-सी पद्धति का प्रयोग किया?
(अ) प्रकार्यात्मक
(ब) संरचनात्मक
(स) मार्क्सवादी द्वन्द्वात्मक
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (स) मार्क्सवादी द्वन्द्वात्मक
In simple words: परम्पराओं को समझने के लिए मुकर्जी ने मार्क्सवादी द्वन्द्वात्मक तरीके का इस्तेमाल किया था।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रीय अध्ययन की विभिन्न पद्धतियों और उनके प्रतिपादकों को जानना आवश्यक है।

 

Question 6. परम्परा का तात्पर्य है
(अ) संस्कृति का हस्तान्तरण
(ब) रीति-रिवाजों का पालन
(स) सामाजिक मूल्यों की निरंतरता
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (The options and answer for this question are not fully provided in the source content. Based on typical sociological understanding, all of the above would be relevant. The provided option (अ) संस्कृति का हस्तान्तरण is part of it, but without other options, it's incomplete. Assuming it refers to the primary meaning.)
(अ) संस्कृति का हस्तान्तरण
In simple words: परम्परा का मतलब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संस्कृति का जाना है।

🎯 Exam Tip: परम्परा की व्यापक परिभाषा में संस्कृति, रीति-रिवाज, मूल्य और व्यवहार सभी शामिल होते हैं।

 

Question 7. ए. आर. देसाई ने किस समाजशास्त्री के सानिध्य में डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की?
(अ) गिडिज
(ब) घुर्ये
(स) आर. के. मुकर्जी
(द) डी. पी. मुकर्जी।
Answer: (ब) घुर्ये
In simple words: ए. आर. देसाई ने घुर्ये के मार्गदर्शन में अपनी डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।

🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों के गुरु और शिष्य संबंधों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. देसाई ने राज्य को क्या माना?
(अ) वर्ग
(ब) सरकार
(स) संस्था
(द) राजनीतिक दल।
Answer: (अ) वर्ग
In simple words: देसाई ने राज्य को एक वर्ग के रूप में देखा।

🎯 Exam Tip: विभिन्न समाजशास्त्रियों द्वारा राज्य की अवधारणा को किस रूप में समझा गया है, इसे जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. देसाई के अनुसार राज्य किसका हितैषी है ?
(अ) कृषक वर्ग
(ब) श्रमिक वर्ग
(स) दलित वर्ग
(द) पूँजीपति वर्ग।
Answer: (द) पूँजीपति वर्ग।
In simple words: देसाई का मानना था कि राज्य पूँजीपतियों के हितों का समर्थन करता है।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों के आलोचनात्मक विचारों और उनकी मुख्य दलीलों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. एम. एन. श्रीनिवास ने किस विषय पर डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की?
(अ) रामपुरा गाँव
(ब) दक्षिण भारत के ब्राह्मण
(स) कुर्ग लोग
(द) संस्कृतीकरण
Answer: (स) कुर्ग लोग
In simple words: एम. एन. श्रीनिवास ने दक्षिण भारत के कुर्ग लोगों पर शोध करके डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख शोधकर्ताओं के डॉक्टरेट विषयों को याद रखना उनके अध्ययन क्षेत्रों को समझने में मदद करता है।

 

Question 11. श्रीनिवास ने पुस्तक रिमेम्बर्ड विलेज कैसे लिखी।
(अ) तथ्यों के आधार पर
(ब) पाठीय परिप्रेक्ष्य पर
(स) क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य पर
(द) स्मरण शक्ति के आधार पर।
Answer: (द) स्मरण शक्ति के आधार पर।
In simple words: श्रीनिवास ने 'रिमेम्बर्ड विलेज' अपनी याददाश्त के आधार पर लिखी थी, क्योंकि उनके नोट्स जल गए थे।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट पुस्तकों के निर्माण के पीछे की कहानियों या विधियों को समझना अतिरिक्त जानकारी देता है।

 

Question 12. श्रीनिवास ने अपने गाँव के अध्ययन में किस कारण से जाति व्यवस्था में जातियाँ एक दूसरे पर निर्भर रहती हैं? बताया।
(अ) जजमानी व्यवस्था
(ब) जातीय संघर्ष
(स) आपसी सहयोग
(द) कोई नहीं।
Answer: (अ) जजमानी व्यवस्था
In simple words: श्रीनिवास ने बताया कि गाँव में जजमानी व्यवस्था के कारण जातियाँ एक-दूसरे पर निर्भर करती हैं।

🎯 Exam Tip: जजमानी व्यवस्था ग्रामीण भारत में जातियों के बीच आर्थिक और सामाजिक निर्भरता का एक महत्वपूर्ण पहलू थी।

 

Question 13. लखनऊ विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की स्थापना किसने की थी?
(अ) डी.पी. मुकर्जी
(ब) आर.के. मुकर्जी
(स) एम.एन. श्रीनिवास
(द) ए.आर. देसाई।
Answer: (ब) आर.के. मुकर्जी
In simple words: लखनऊ विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना आर.के. मुकर्जी ने की थी।

🎯 Exam Tip: भारत में समाजशास्त्र के विकास में विभिन्न विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े प्रमुख विद्वानों को याद रखना चाहिए।

 

Question 14. आर. के मुकर्जी ने किसे समाजशास्त्र की विषय वस्तु माना?
(अ) परम्परा
(ब) गाँव
(स) जाति
(द) मूल्य।
Answer: (द) मूल्य।
In simple words: आर.के. मुकर्जी ने समाजशास्त्र के अध्ययन का मुख्य विषय मूल्यों को माना था।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक समाजशास्त्री के मुख्य अध्ययन क्षेत्र या 'विषय वस्तु' को जानना उनके योगदान को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. आर.के. मुकर्जी के अनुसार किस सामाजिक संगठन में सामाजिक मूल्यों का अभाव पाया जाता है?
(अ) भीड़
(ब) संस्था
(स) परिवार
(द) समुदाय
Answer: (अ) भीड़
In simple words: आर.के. मुकर्जी का मानना था कि भीड़ जैसे सामाजिक संगठनों में सामाजिक मूल्यों की कमी होती है।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी ने सामाजिक संगठनों को चार प्रकारों में विभाजित किया और उनमें मूल्यों की उपस्थिति पर प्रकाश डाला।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जाति का अध्ययन जी.एस. घुर्ये ने कौनसी पुस्तक में किया?
Answer: जाति का अध्ययन जी.एस. घुर्ये ने अपनी पुस्तक 'कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया' में किया था। इस किताब में उन्होंने जाति और प्रजाति के बारे में गहराई से बताया है।
In simple words: जी.एस. घुर्ये ने 'कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया' नामक किताब में जाति का अध्ययन किया।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों की प्रमुख पुस्तकों और उनके मुख्य विषयों को याद रखना उनके योगदान को समझने में सहायक होता है।

 

Question 2. जाति एक अन्तर्विवाही समूह है। सही/गलत
Answer: सही। जाति व्यवस्था में सदस्य आमतौर पर अपनी ही जाति के भीतर विवाह करते हैं। यह एक सामाजिक नियम है।
In simple words: यह बात सही है कि जाति एक ऐसा समूह है जिसमें लोग अपनी जाति के अंदर ही शादी करते हैं।

🎯 Exam Tip: जाति की परिभाषा में अन्तर्विवाह एक महत्वपूर्ण विशेषता है; इसे अच्छे से समझना चाहिए।

 

Question 3. किस समाजशास्त्री के प्रजाति के विचार से घुर्ये प्रभावित हुए?
Answer: घुर्ये रिजले के प्रजाति की अवधारणा के विचार से प्रभावित हुए थे। रिजले ने प्रजाति के आधार पर भारतीय समाज को समझने का प्रयास किया था।
In simple words: घुर्ये, रिजले के प्रजाति संबंधी विचारों से प्रभावित हुए थे।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों पर अन्य विद्वानों के प्रभाव को समझना उनके विचारों की जड़ों को जानने में मदद करता है।

 

Question 4. डी.पी. मुकर्जी ने भारतीय समाज का विश्लेषण किस परिप्रेक्ष्य से किया?
Answer: डी.पी. मुकर्जी ने भारतीय समाज का विश्लेषण श्रुति (परम्परागत ज्ञान) और अनुभव (व्यक्तिगत अवलोकन) के परिप्रेक्ष्य से किया। उनका मानना था कि समाज में परिवर्तन वाद-विवाद और बुद्धि के विचारों से आता है।
In simple words: डी.पी. मुकर्जी ने भारतीय समाज को समझने के लिए पुराने ज्ञान और अपने अनुभवों का इस्तेमाल किया।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी के अध्ययन में 'श्रुति और अनुभव' को केंद्रीय अवधारणाओं के रूप में याद रखना चाहिए।

 

Question 5. डी.पी. मुकर्जी के अनुसार परम्पराओं में परिवर्तन किस आधार पर होता है?
Answer: डी.पी. मुकर्जी के अनुसार, परम्पराओं में परिवर्तन श्रुति (शास्त्रों के ज्ञान), स्मृति (याद रखे गए नियम) और अनुभव (व्यक्तिगत या सामूहिक अनुभव) के आधार पर होता है। यह परिवर्तन तर्क और वाद-विवाद से भी जुड़ा है।
In simple words: मुकर्जी ने बताया कि परम्पराएँ पुराने ज्ञान, याददाश्त और अनुभवों के कारण बदलती हैं।

🎯 Exam Tip: परम्पराओं में परिवर्तन के मुकर्जी के तीन मुख्य आधारों (श्रुति, स्मृति, अनुभव) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. आई.सी.एस.एस.आर (ICSSR) का पूर्ण रूप लिखिए।
Answer: आई.सी.एस.एस.आर (ICSSR) का पूर्ण रूप 'इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस एण्ड रिसर्च' (Indian Council of Social Science and Research) है। यह भारत में सामाजिक विज्ञान शोध को बढ़ावा देता है।
In simple words: ICSSR का पूरा नाम इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस एण्ड रिसर्च है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संस्थानों के संक्षिप्त रूपों और उनके पूर्ण नामों को याद रखना सामान्य ज्ञान और परीक्षा दोनों के लिए उपयोगी है।

 

Question 7. ए.आर. देसाई की प्रथम पुस्तक का नाम बताइए?
Answer: ए.आर. देसाई की प्रथम पुस्तक का नाम 'सोशल बैकग्राउण्ड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म-1946' है। यह पुस्तक भारतीय राष्ट्रवाद के सामाजिक पहलुओं पर केंद्रित है।
In simple words: ए.आर. देसाई की पहली किताब का नाम 'सोशल बैकग्राउण्ड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म-1946' है।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों की पहली या सबसे महत्वपूर्ण कृतियों को याद रखना उनके शुरुआती विचारों को समझने में मदद करता है।

 

Question 8. देसाई के अनुसार भारत में पूंजीवाद कब विकसित हुआ।
Answer: देसाई के अनुसार, भारत में पूंजीवाद ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दौरान विकसित हुआ। ब्रिटिश शासन ने भारत में ऐसी आर्थिक व्यवस्थाओं को जन्म दिया जिससे पूंजीवाद का विस्तार हुआ।
In simple words: देसाई के हिसाब से भारत में पूंजीवाद अंग्रेजों के राज में शुरू हुआ।

🎯 Exam Tip: उपनिवेशवाद और पूंजीवाद के बीच के संबंध को समझना समाजशास्त्रीय विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. एम. एन. श्रीनिवास को किसने रामपुरा गाँव पर पुस्तक स्मरण के आधार पर लिखने के लिए प्रोत्साहिन किया?
Answer: एम.एन. श्रीनिवास को उनके मित्र सालटोक्स ने रामपुरा गाँव पर पुस्तक स्मरण के आधार पर लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। श्रीनिवास के नोट्स नष्ट हो जाने के बाद उन्होंने याददाश्त से लिखा था।
In simple words: श्रीनिवास को उनके दोस्त सालटोक्स ने रामपुरा गाँव पर याद से किताब लिखने के लिए कहा।

🎯 Exam Tip: अकादमिक कार्यों में सहयोग और व्यक्तिगत प्रेरणा के उदाहरणों पर ध्यान दें।

 

Question 10. रामपुरा गाँव के व्यक्तियों का मुख्य व्यवसाय क्या था?
Answer: रामपुरा गाँव के व्यक्तियों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। अधिकांश लोग खेती-बाड़ी से अपनी जीविका चलाते थे।
In simple words: रामपुरा गाँव के लोगों का मुख्य काम खेती करना था।

🎯 Exam Tip: गाँव के अध्ययन में स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रमुख व्यवसायों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. एम. एन. श्रीनिवास ने किसे भारतीय समाज का केन्द्रीय तत्व माना?
Answer: एम. एन. श्रीनिवास ने गाँव को भारतीय समाज का केन्द्रीय तत्व माना। उनका मानना था कि भारतीय समाज को समझने के लिए गाँव का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
In simple words: श्रीनिवास ने गाँव को भारतीय समाज का सबसे खास हिस्सा माना।

🎯 Exam Tip: श्रीनिवास के अध्ययन 'रिमेम्बर्ड विलेज' में गाँव की केंद्रीय भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया है।

 

Question 12. आर.के. मुकर्जी की सामाजिक मूल्यों पर प्रमुख पुस्तक कौनसी है?
Answer: आर.के. मुकर्जी की सामाजिक मूल्यों पर प्रमुख पुस्तक 'द स्ट्रक्चर ऑफ सोशल वैल्यूज' (The structure of social values) और 'डायमेंशन ऑफ़ ह्यूमन वैल्यूज' (Dimensions of human values) हैं। इन पुस्तकों में उन्होंने मूल्यों के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है।
In simple words: आर.के. मुकर्जी की मुख्य किताबें 'द स्ट्रक्चर ऑफ सोशल वैल्यूज' और 'डायमेंशन ऑफ़ ह्यूमन वैल्यूज' हैं।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों द्वारा लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकों के नाम और उनके मुख्य विषय याद रखें।

 

Question 13. आर.के. मुकर्जी के अनुसार किस सामाजिक संगठन में सामाजिक मूल्यों का अभाव पाया जाता है?
Answer: आर.के. मुकर्जी ने 'भीड़' (crowd) में सामाजिक मूल्यों का अभाव माना है। भीड़ में व्यक्ति बिना किसी सामाजिक नियम या मूल्य के व्यवहार करते हैं।
In simple words: आर.के. मुकर्जी के अनुसार, भीड़ में सामाजिक मूल्य कम होते हैं।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी ने सामाजिक संगठनों के विभिन्न प्रकारों में मूल्यों की उपस्थिति और अनुपस्थिति का विश्लेषण किया है।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. घुर्ये ने जाति को कैसे परिभाषित किया?
Answer: जाति को अंग्रेजी में 'कास्ट' कहते हैं। 'कास्ट' शब्द पुर्तगाली भाषा के 'कास्टा' शब्द से आया है, जिसका मतलब 'जाति' या 'मतभेद' है। घुर्ये ने जाति व्यवस्था को एक 'अन्तर्विवाही समूह' माना है। इसका मतलब है कि जाति के सदस्य सिर्फ अपनी जाति के अंदर ही विवाह करते हैं। यह एक बंद सामाजिक समूह है।
In simple words: घुर्ये ने जाति को एक बंद समूह बताया जिसमें लोग अपनी जाति के अंदर ही शादी करते हैं।

🎯 Exam Tip: जाति की परिभाषा में उसके भाषाई मूल और अन्तर्विवाही प्रकृति पर जोर देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. घुर्ये द्वारा दी गई जाति की विशेषताएँ बताइए?
Answer: घुर्ये ने जाति की छह मुख्य विशेषताएँ बताई हैं:

  • समाज का खण्डात्मक विभाजन: जाति व्यवस्था ने भारतीय समाज को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा है। हर हिस्से के सदस्यों का पद, स्थान और काम पहले से तय होते हैं।
  • संस्तरण: जाति व्यवस्था में ऊंच-नीच का क्रम पाया जाता है। इसका मतलब है कि जातियाँ जन्म से ही तय होती हैं और उनमें कुछ ऊँची और कुछ नीची मानी जाती हैं।
  • भोजन और सामाजिक मेल-जोल पर पाबंदी: जाति व्यवस्था में खाने-पीने और सामाजिक व्यवहार को लेकर कई नियम होते हैं। कुछ जातियों के लोग ही आपस में भोजन कर सकते हैं।
  • नागरिक और धार्मिक अयोग्यताएँ और विशेषाधिकार: जाति व्यवस्था में कुछ जातियों को विशेष अधिकार मिलते हैं, जबकि दूसरों को कुछ धार्मिक या नागरिक कामों से दूर रखा जाता है।
  • निश्चित व्यवसाय: हर जाति का अपना एक तय काम होता है, जो अक्सर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। वे अपना व्यवसाय नहीं बदल सकते थे।
  • विवाह संबंधी पाबंदी: जाति में सिर्फ अपनी जाति के अंदर ही शादी करने का नियम है। गोत्र से बाहर शादी हो सकती है, लेकिन गोत्र के अंदर नहीं।

In simple words: घुर्ये ने बताया कि जाति समाज को छोटे समूहों में बांटती है, ऊंच-नीच का क्रम बनाती है, खान-पान और शादी के नियम तय करती है, कुछ खास काम देती है, और कुछ जातियों को विशेष अधिकार देती है।

🎯 Exam Tip: जाति की छह विशेषताओं को याद रखना उसके सामाजिक संरचना में भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. घुर्ये ने प्रजाति को किस रूप में समझाया है?
Answer: घुर्ये ने अपनी पुस्तक 'कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया' में प्रजाति और जाति के बारे में बताया है। उन्होंने पुराने विद्वानों के अध्ययन और अपने अनुभवों के आधार पर कहा कि इण्डो-आर्यन प्रजाति लगभग 2500 ईसा पूर्व भारत आई थी। इस प्रजाति का धर्म वैदिक धर्म था। वे मुख्य रूप से ब्राह्मण थे और गंगा नदी के मैदानी इलाकों में रहकर अपनी संस्कृति को बढ़ाया। बाद में यही संस्कृति हिन्दू संस्कृति बन गई। घुर्ये रिजले के प्रजाति संबंधी विचारों से पूरी तरह सहमत नहीं थे।
In simple words: घुर्ये ने प्रजाति को एक प्राचीन समूह बताया जो 2500 ईसा पूर्व भारत आया, जिसका धर्म वैदिक था और जो बाद में हिन्दू संस्कृति बनी।

🎯 Exam Tip: घुर्ये के जाति और प्रजाति के सिद्धांतों को रिजले के विचारों के संदर्भ में समझना चाहिए।

 

Question 4. डी. पी. मुकर्जी के परम्पराओं के परिवर्तन के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।
Answer: डी. पी. मुकर्जी ने परम्पराओं में परिवर्तन के तीन मुख्य सिद्धांत बताए हैं: श्रुति, स्मृति और अनुभव। उनके अनुसार, पुरानी परम्पराएँ बुद्धिमान थीं, जो श्रुतियों और स्मृतियों पर आधारित थीं। इनमें तर्क, बहस और विचार के माध्यम से बदलाव आता था। ये परम्पराएँ ज्ञान पर आधारित थीं। व्यक्तिगत अनुभव भी परिवर्तन का एक बड़ा कारण है। मध्यकाल का पूरा इतिहास व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है। विभिन्न धर्मों और धार्मिक किताबों की शुरुआत संतों के अपने व्यक्तिगत अनुभवों से हुई थी।
In simple words: मुकर्जी ने बताया कि परम्पराएँ श्रुति, स्मृति और अनुभवों के कारण बदलती हैं। तर्क और व्यक्तिगत अनुभव इनमें बदलाव लाते हैं।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी के परिवर्तन के सिद्धांतों को तीन प्रमुख आधारों (श्रुति, स्मृति, अनुभव) और उनके तार्किक विकास के साथ जोड़कर याद करें।

 

Question 5. मुकर्जी के अनुसार परम्पराओं में द्वंद्व कैसे होता है?
Answer: डी.पी. मुकर्जी द्वन्द्वात्मक उपागम (संघर्ष का तरीका) के समर्थक थे। उनका मानना था कि किसी भी समाज का विकास संघर्ष के कारण होता है। हर समाज में दो विरोधी शक्तियाँ होती हैं। इन शक्तियों के बीच संघर्ष से एक नया समाज बनता है। मार्क्स ने इसे वाद-विवाद-संवाद का रूप दिया था। वाद से किसी मुद्दे की शुरुआत होती है, जिसमें विरोधी विचार पैदा होते हैं। दूसरी शक्ति इसके विपरीत होती है, जिसे प्रतिवाद कहते हैं, और इन दोनों के संघर्ष से नई स्थिति (संवाद) पैदा होती है। वाद और प्रतिवाद से संघर्ष और फिर मेल-मिलाप होता है। इसी प्रक्रिया से समाज का विकास होता है।
In simple words: मुकर्जी के अनुसार, समाज में दो विरोधी शक्तियों के बीच टकराव से बदलाव आता है, जिसे वे द्वंद्व या संघर्ष कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी के द्वन्द्वात्मक उपागम को मार्क्सवादी विचारों के साथ जोड़कर समझें, जिसमें वाद-प्रतिवाद-संवाद की प्रक्रिया केंद्रीय है।

 

Question 6. क्यों मुकर्जी ने परम्पराओं को भारतीय समाजशास्त्र की विषयवस्तु माना है?
Answer: मुकर्जी ने 1955 में देहरादून में अपने अध्यक्षीय भाषण में भारतीय परम्परा और सामाजिक परिवर्तन पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का कर्तव्य उन सामाजिक परम्पराओं का अध्ययन करना है जहाँ उसने जन्म लिया है और जीवन बिताया है। मुकर्जी मानते थे कि परम्पराएँ जीवित रहती हैं। भारतीय समाजशास्त्रियों के लिए परम्पराओं का अध्ययन बहुत ज़रूरी है क्योंकि ये समाज के विकास को दर्शाती हैं।
In simple words: मुकर्जी ने परम्पराओं को भारतीय समाजशास्त्र का मुख्य विषय माना क्योंकि वे समाज के विकास और व्यक्ति के जीवन से जुड़ी होती हैं।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी के परम्पराओं पर केंद्रित विचार भारतीय संदर्भ में समाजशास्त्र के महत्व को उजागर करते हैं।

 

Question 7. राज्य की प्रमुख विशेषताएँ या अवधारणा क्या है?
Answer: राज्य का एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहाँ लोग रहते हैं। राज्य एक इकाई के रूप में काम करता है और उसके अपने नियम-कानून होते हैं। ए. आर. देसाई ने अपनी पुस्तक 'भारतीय समाज व राज्य' में इस विषय पर लिखा है। उनके अनुसार, राज्य पूँजीवादी ब्रिटिश उपनिवेशवाद के कारण बने हैं। आज के राज्य भी पूँजीवादी हैं जो गरीबों का शोषण करते हैं और पूँजीपतियों के हितों की रक्षा करते हैं।
In simple words: राज्य एक तय जगह पर लोगों का समूह होता है जिसके अपने नियम होते हैं, और देसाई के अनुसार, यह पूँजीपतियों के हित में काम करता है।

🎯 Exam Tip: राज्य की अवधारणा को देसाई के मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य में समझना महत्वपूर्ण है, जहाँ वह एक शोषणकारी उपकरण के रूप में कार्य करता है।

 

Question 8. क्या राज्य एक वर्ग है?
Answer: देसाई मानते हैं कि राज्य एक पूँजीवादी वर्ग की तरह ही है। आजादी के बाद भी राज्य पूँजीपति वर्ग के समान काम कर रहा है। यह पूँजीपतियों का सहयोगी है और एक वर्ग की तरह काम करता है। समाज में सामंत, पूँजीवादी और समाजवादी वर्ग दिखते हैं। यह स्थिति ब्रिटिश उपनिवेशवाद के कारण है। भारत की उत्पादन प्रक्रिया में राज्य का बड़ा हिस्सा होता है, और राज्य पूँजीवाद के लिए अपनी निजी नीतियाँ बनाता है।
In simple words: देसाई के अनुसार, राज्य एक वर्ग की तरह काम करता है जो पूँजीपतियों का साथ देता है और अपनी नीतियाँ बनाता है।

🎯 Exam Tip: देसाई के राज्य संबंधी विचारों को वर्ग संघर्ष और पूंजीवादी व्यवस्था के संदर्भ में देखें।

 

Question 9. रजनी कोठारी ने किन आधारों पर ए. आर. देसाई के राज्य की अवधारणा की आलोचना की है?
Answer: रजनी कोठारी एक उदारवादी विद्वान थे और वे मार्क्सवाद से सहमत नहीं थे। उनका विचार था कि भारतीय राज्य पूरी तरह से पूंजीवादी राज्य नहीं है, बल्कि यह पूंजीवाद के विकास में मदद करता है। कोठारी ने कहा कि राज्य और पूंजीवाद हमेशा विरोधी रहे हैं। देसाई के विपरीत, कोठारी ने बताया कि पहले राज्य पूंजीपतियों के प्रभाव से दूर था और उसका मुख्य लक्ष्य समाज में समानता लाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपातकाल के बाद राज्य की स्थिति बदल गई है। पूंजीपति वर्ग का विस्तार हुआ है और राज्य अब उनके प्रभाव में आ गया है। कोठारी ने कहा कि भारत में राज्य पूंजीवादी प्रकृति के हैं और देसाई के राज्य की अवधारणा की आलोचना की।
In simple words: रजनी कोठारी ने देसाई के राज्य संबंधी विचारों की आलोचना की, यह कहते हुए कि भारतीय राज्य पूरी तरह से पूंजीवादी नहीं था, बल्कि समानता चाहता था, हालांकि बाद में यह पूंजीपतियों के प्रभाव में आया।

🎯 Exam Tip: रजनी कोठारी की आलोचना को देसाई के मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य के विपरीत एक उदारवादी दृष्टिकोण के रूप में समझें।

 

Question 10. गाँव को एम. एन श्रीनिवास ने कैसे परिभाषित किया?
Answer: श्रीनिवास के अध्ययन का मुख्य केंद्र गाँव था। उन्हें भारतीय गाँव के अध्ययन की प्रेरणा ब्राउन से मिली थी। उन्होंने अपनी पुस्तक 'रिमेम्बर्ड विलेज' में कर्नाटक के रामपुरा गाँव का वर्णन किया है। श्रीनिवास ने गाँव का चुनाव भावनात्मक रूप से किया था और किसानों की आर्थिक स्थिति का भी वर्णन किया। उन्होंने गाँव की सामाजिक संरचना और लोगों के मुख्य व्यवसाय (कृषि) के बारे में बताया। गाँव में पुरुष घर के बाहर काम करते हैं और महिलाएँ घर के अंदर काम करती हैं।
गाँव की प्रमुख विशेषताएँ:
1. गाँव में ज्यादातर किसान और मजदूर रहते हैं, जिनकी आर्थिक हालत खराब होती है।
2. गाँव में सभी सुविधाएँ नहीं होती हैं; वहाँ उनकी कमी पाई जाती है।
3. गाँव में कृषि मुख्य व्यवसाय है, साथ ही पशुपालन भी होता है।
4. पुरुष घर के बाहर और स्त्रियाँ घर के अंदर व बच्चों की देखभाल करती हैं।
5. गाँव में जजमानी व्यवस्था मौजूद है।
6. गाँव में गुटबाजी ज़्यादा होती है और जातियों में संघर्ष होता रहता है।
7. अब गाँव में आधुनिकीकरण के कारण खेती में ट्रैक्टर और सिंचाई के साधन उपलब्ध हुए हैं।
8. आज भी गाँव के झगड़े ग्राम पंचायतों द्वारा निपटाए जाते हैं।
9. गाँव में देवी-देवताओं की पूजा, अंधविश्वास और पुरानी मान्यताएँ अब भी हैं।
In simple words: श्रीनिवास ने गाँव को अपने अध्ययन का केंद्र बनाया और 'रिमेम्बर्ड विलेज' किताब में रामपुरा गाँव का वर्णन किया। उन्होंने गाँव के किसानों की हालत, सामाजिक बनावट और खेती जैसे मुख्य कामों के बारे में बताया।

🎯 Exam Tip: श्रीनिवास के ग्राम अध्ययन में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को विस्तार से शामिल करें, जैसे कि उनकी पुस्तक 'रिमेम्बर्ड विलेज' में वर्णित है।

 

Question 11. भारतीय गाँवों में परिवर्तन के कारणों को बताइये।
Answer: भारतीय गाँवों में धीरे-धीरे परिवर्तन हो रहा है, जिसके कई कारण हैं: तकनीकी विकास के कारण गाँवों में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव आ रहे हैं। इन परिवर्तनों से परिवार, व्यवसाय, विवाह और जाति व्यवस्था में काफी बदलाव हुआ है। खेती में मशीनों जैसे ट्रैक्टर और सिंचाई के साधनों का उपयोग बढ़ा है। गाँवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा रहा है, और रोजगार के लिए छोटे उद्योग व प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। शिक्षा के विकास के लिए गाँवों में स्कूल खोले गए हैं।
In simple words: भारतीय गाँवों में बदलाव तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहा है। खेती में मशीनें आई हैं, सड़कें बनी हैं, और शिक्षा का स्तर भी बढ़ा है।

🎯 Exam Tip: गाँवों में परिवर्तन के कारणों को तकनीकी, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक जैसे विभिन्न शीर्षकों के तहत वर्गीकृत करें।

 

Question 12. सामाजिक मूल्य को परिभाषित कीजिये।
Answer: डॉ. राधा कमल मुकर्जी ने अपनी पुस्तक 'द स्ट्रक्चर ऑफ सोशल वैल्यूज' और 'डायमेंशन ऑफ ह्यूमन वैल्यूज' में सामाजिक मूल्यों पर अपने विचार रखे। मुकर्जी ने मूल्यों को समझाने के लिए एक वैज्ञानिक तरीका अपनाया। उन्होंने कहा कि मूल्य मानव समूहों और व्यक्तियों के लिए प्रकृति और समाज से तालमेल बिठाने के साधन हैं। मूल्य ऐसे मानदंड हैं जो लोगों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए दिशा-निर्देश देते हैं। मूल्य एक प्रकार के सामूहिक लक्ष्य होते हैं, जिन पर सदस्यों का विश्वास होता है। मुकर्जी के अनुसार, "मूल्य समाज द्वारा स्वीकार की गई इच्छाएँ और लक्ष्य हैं, जो सीखने या समाजीकरण से हमारे अंदर आते हैं और आदर्श व आकांक्षाएँ बन जाते हैं।"
In simple words: मुकर्जी ने बताया कि सामाजिक मूल्य वे नियम हैं जो लोगों को प्रकृति और समाज के साथ मिलकर रहने में मदद करते हैं, और यह लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दिशा देते हैं।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी की सामाजिक मूल्य की परिभाषा में 'मानदंड', 'सामूहिक लक्ष्य' और 'समाजीकरण' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें।

 

Question 13. सामाजिक मूल्यों की विशेषताएँ और उद्भव बताएँ।
Answer: सामाजिक मूल्यों की विशेषताएँ:
1. सामाजिक मूल्य सामूहिक होते हैं, यानी वे पूरे समूह से जुड़े होते हैं।
2. सामाजिक मूल्यों के पीछे भावनाएँ होती हैं, जो उन्हें प्रेरित करती हैं।
3. सामाजिक मूल्य समाज के लिए मानदंड का काम करते हैं।
4. सामाजिक मूल्यों के बारे में लोगों में आम सहमति पाई जाती है।
5. सामाजिक मूल्य गतिशील होते हैं, यानी वे समय के साथ बदलते रहते हैं।
6. सामाजिक मूल्यों में विविधता पाई जाती है।
7. सामाजिक मूल्य सामाजिक कल्याण और समाज की आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
8. सामाजिक मूल्य सार्वभौमिक होते हैं, जो सभी समाजों में पाए जाते हैं।
9. समाज पर नियंत्रण से सामाजिक मूल्यों में बदलाव आता है।
10. सामाजिक मूल्यों से संतुष्ट होने पर व्यक्ति उनमें उदासीन हो जाता है।
11. मूल्यों की आपसी क्रिया से कई तरह के मेल-मिलाप पैदा होते हैं।
12. मूल्यों में प्रतिस्पर्धा होने पर उनमें ऊंच-नीच का क्रम बनता है।
13. व्यक्ति अच्छे मूल्यों का चुनाव करता है।
14. समाज और संस्कृति मानवीय मूल्यों को मूल स्वरूप देते हैं।
15. मूल्यों में व्यक्तिगतता, भिन्नता और विशिष्टता होती है, जिन्हें व्यक्ति अपनी ज़रूरत, आदत और क्षमता के अनुसार चुनता है।
16. मानवीय मूल्य पर्यावरण, समूह और संस्थाओं की तरह बदलते रहते हैं।
17. मनुष्य के आदर्श मूल्यों की जड़ मानव की अंतर्दृष्टि, सहानुभूति और सहयोग में होती है।

सामाजिक मूल्यों का उद्भव:
मुकर्जी ने मूल्यों के उद्भव के तीन आधार बताए हैं:

  • लक्ष्य: हर व्यक्ति का अपना जीवन जीने का एक लक्ष्य होता है। जीवन जीने के लिए उसे मूल्यों को बनाना पड़ता है।
  • आदर्श: जब व्यक्ति मूल्यों को स्वीकार करता है, तो वे मूल्य उसके लिए आदर्श बन जाते हैं। वह उन्हीं के अनुसार व्यवहार करता है।
  • मान्यताएँ: आदर्शों के स्थापित होने के बाद, मूल्य सामूहिक मान्यताओं का रूप ले लेते हैं।

In simple words: सामाजिक मूल्य समूह में होते हैं, भावना से जुड़े होते हैं, बदलते रहते हैं, और समाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ये लक्ष्य, आदर्श और मान्यताओं से बनते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक मूल्यों की विशेषताओं और उनके उद्भव के तीन आधारों (लक्ष्य, आदर्श, मान्यताएँ) को विस्तार से याद करें।

 

Question 14. सामाजिक मूल्यों के सोपानों का वर्णन कीजिए।
Answer: डॉ. मुकर्जी का मत था कि सभी मूल्य एक ही स्तर पर नहीं होते, बल्कि सामाजिक मूल्यों में एक स्तर-क्रम देखने को मिलता है। मूल्यों का यह स्तर सामाजिक संगठन के स्तरों पर निर्भर करता है। मुकर्जी ने अपने अध्ययन में सामाजिक संगठनों के चार प्रकार के स्तरों का वर्णन किया है; जैसे-भीड़, स्वार्थ समूह, समाज या समुदाय और सामूहिकता आदि। इन सभी स्तरों पर मूल्यों का महत्व अलग-अलग होता है।
In simple words: मुकर्जी के अनुसार, सामाजिक मूल्य अलग-अलग स्तरों पर होते हैं, जो सामाजिक संगठनों पर निर्भर करते हैं, जैसे भीड़ या समुदाय।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी के सामाजिक मूल्यों के सोपानों को समझने के लिए सामाजिक संगठनों के विभिन्न स्तरों को याद रखना चाहिए।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. जी. एस. घुर्ये के जाति सम्बन्धी विचार पर एक लेख लिखिये?
Answer: जी.एस. घुर्ये को सभ्यताओं के तुलनात्मक अध्ययन में रुचि थी और वे सभ्यता के विकास के विशेषज्ञ माने जाते हैं। भारतीय समाज उनके अध्ययन का मुख्य केंद्र था, जिसमें प्रजाति और जाति मुख्य विषय थे। उन्होंने अपनी पुस्तक 'कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया' में इन विषयों पर विस्तार से लिखा। पुराने विद्वानों और संतों के अध्ययन से पता चला कि आर्य 2500 ईसा पूर्व भारत में आए थे। उनका धर्म वैदिक था, और वे गंगा नदी के मैदानों में बसकर अपनी संस्कृति का विकास किए, जो बाद में हिन्दू संस्कृति कहलाई। घुर्ये, रिजले के प्रजाति अवधारणा से प्रभावित थे, लेकिन उन्होंने रिजले के विचारों को अस्वीकार किया और सिद्ध किया कि प्रजाति को जाति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी पुस्तक 'जाति, वर्ग व व्यवर:' में जाति व्यवस्था का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि 'जाति' शब्द 'कास्ट' से आया है, जिसका अर्थ मतभेद वाली जाति है। यह एक अन्तर्विवाही समूह है।

उन्होंने जाति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित तरीके से बताई हैं:

  • समाज का खण्डात्मक विभाजन: घुर्ये के अनुसार जाति व्यवस्था ने भारतीय समाज को कई खंडों में बांटा है। प्रत्येक खंड के सदस्यों का पद, स्थिति और कार्य पहले से तय होते हैं। समाज कई जाति-खंडों में और जातियाँ विभिन्न उपखंडों में बंटी होती हैं, जैसे भारत में वर्णव्यवस्था।
  • संस्तरण: जाति व्यवस्था में ऊंच-नीच का संस्तरण पाया जाता है। जाति जन्म पर आधारित है।
  • भोजन तथा सामाजिक सहवास पर प्रतिबंध: जाति व्यवस्था में भोजन और व्यवहार के संबंध में कई पाबंदियां पाई जाती हैं। जातियों के खान-पान के कुछ नियम होते हैं, जैसे किस जाति के सदस्य किन जातियों के साथ भोजन कर सकते हैं और किनके साथ नहीं।
  • नागरिक एवं धार्मिक निर्योग्यताएँ एवं विशेषाधिकार: जाति व्यवस्था में ऊंच-नीच के संस्तरण के कारण सामाजिक समानता की कमी होती है। इस व्यवस्था के कारण भारत की समाज व्यवस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
  • निश्चित व्यवसाय: घुर्ये ने जाति व्यवस्था की एक विशेष विशेषता बताई है कि प्रत्येक जाति का अपना एक तय व्यवसाय होता है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। ये सभी जातिगत होते हैं और इनमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं होता है। इन व्यवसायों से ही लोग अपना जीवन-यापन करते हैं और उन्हें अपना व्यवसाय बदलने की अनुमति नहीं थी।
  • विवाह सम्बन्धी प्रतिबंध: जाति व्यवस्था के कारण प्रत्येक जाति के व्यक्ति को अपनी ही जाति में विवाह करने का नियम है। समाज अपनी जाति से बाहर विवाह करने की अनुमति नहीं देता है। भारत में जाति एक अन्तर्विवाही समूह के रूप में है। विवाह करते समय यह भी ध्यान रखा जाता है कि जिस स्त्री-पुरुष में विवाह हो रहा है, वह उसके गोत्र का तो नहीं है। व्यक्ति अपने गोत्र से बाहर ही विवाह कर सकता है, गोत्र के अंदर विवाह करने की अनुमति समाज और जाति नहीं देती है।

घुर्ये ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया कि जाति व्यवस्था भारत में बहुत विस्तृत है। जाति का निर्धारण जन्म के आधार पर होता है, इसलिए जाति एक प्रदत्त प्रस्थिति है, न कि अर्जित प्रस्थिति।

जाति व्यवस्था में परिवर्तन-जाति व्यवस्था में अनेक परिवर्तन हुए हैं:
1. संस्तरण में परिवर्तन
2. व्यवसायों में परिवर्तन
3. खान-पान में परिवर्तन
4. विवाह-संबंधों में परिवर्तन आदि।
In simple words: जी.एस. घुर्ये ने 'कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया' में जाति को एक अन्तर्विवाही समूह बताया, जिसके सदस्यों के काम, पद, और विवाह जन्म से तय होते हैं। उन्होंने इसकी छह मुख्य विशेषताएँ बताईं और कहा कि यह एक स्थिर सामाजिक व्यवस्था है जिसमें धीरे-धीरे बदलाव आ रहे हैं।

🎯 Exam Tip: घुर्ये के जाति संबंधी विचारों को उनकी पुस्तक के संदर्भ में, उसकी प्रमुख विशेषताओं और आलोचनाओं के साथ विस्तार से प्रस्तुत करें।

 

Question 2. डी. पी. मुकर्जी की परम्पराओं की अवधारणा पर प्रकाश डालिये?
Answer: डी.पी. मुकर्जी ने पश्चिमी परम्पराओं के आधार पर भारतीय समाजशास्त्र को ढालने का विरोध किया। उन्होंने अपने लेखों और भाषणों में भारतीय सामाजिक परम्पराओं के अध्ययन पर जोर दिया। उनका मानना था कि व्यक्ति को उन परम्पराओं का अध्ययन करना चाहिए जहाँ उसने जन्म लिया है। मुकर्जी ने भारतीय समाजशास्त्री को एक समाजशास्त्री से ज्यादा भारतीय होने को कहा। भारतीय समाज को समझने के लिए जनरीतियों, विचारों, रूढ़ियों, प्रथाओं और व्यवहार आदि का अध्ययन करना और स्थानीय भाषाओं का ज्ञान होना ज़रूरी था।

डी.पी. मुकर्जी ने भारतीय परम्पराओं में परिवर्तन लाने वाले तीन मुख्य सिद्धांत बताए हैं: श्रुति, स्मृति और अनुभव।

मुकर्जी के अनुसार अच्छी परम्पराएँ मुख्य रूप से बौद्धिक थीं जो श्रुति और स्मृतियों पर आधारित थीं। इनमें वाद-विवाद, तर्क और विचार से लगातार परिवर्तन होता रहता था। परम्पराएँ श्रुति और स्मृति से बनी थीं और उनमें बौद्धिकता के कारण परिवर्तन होता था। व्यक्तिगत अनुभव ही परिवर्तन का मुख्य कारण रहा है। भारतीय धार्मिक ग्रंथों, सम्प्रदायों और मठों की उत्पत्ति संतों के व्यक्तिगत विचारों और अनुभवों के कारण हुई, जो बाद में सामूहिक अनुभव बन गए।

मुकर्जी ने स्मृति, श्रुति और अनुभव के ज़रिए भारतीय समाज में परम्पराओं में आने वाले परिवर्तन को समझाने का प्रयास किया। उनके सिद्धांत से पता चलता है कि वर्तमान का अध्ययन अतीत के संदर्भ में भी हो सकता है। आधुनिकीकरण को समझने से पहले अपनी परम्पराओं को समझना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि परम्पराएँ मरती नहीं, बल्कि नई परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाती हैं। तेज़ी से होने वाला परिवर्तन ही परम्पराओं को खत्म नहीं कर सकता।

मुकर्जी ने कहा कि परम्परा एक गतिशील तथ्य है और यह एक ऐतिहासिक प्रक्रिया है। परम्पराओं के बिना आधुनिकीकरण का कोई महत्व नहीं है। परम्परा स्थिर अवधारणा नहीं, बल्कि गतिशील है। परम्परा आधुनिकता के लिए प्रेरणा का काम करती है। उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट है कि परम्पराओं में श्रुति, स्मृति और अनुभव के कारण परिवर्तन होता है। परिवर्तन ही परम्पराओं के बीच होने वाला द्वंद्व है।
In simple words: डी.पी. मुकर्जी ने भारतीय समाजशास्त्र में परम्पराओं के अध्ययन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रुति, स्मृति और अनुभव के कारण परम्पराएँ बदलती रहती हैं, और ये गतिशील होती हैं, जो आधुनिकता के लिए प्रेरणा का काम करती हैं।

🎯 Exam Tip: मुकर्जी की परम्पराओं की अवधारणा को उनके भारतीय दृष्टिकोण, परिवर्तन के सिद्धांतों (श्रुति, स्मृति, अनुभव) और उनके गतिशील स्वरूप के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 3. ए. आर. देसाई की राज्य की अवधारणा का समाज में भूमिका को समझाइये?
Answer: ए. आर. देसाई ने अपनी पुस्तक 'भारतीय समाज में राज्य व समाज' में राज्य की अवधारणा को विस्तार से समझाया है। वे मार्क्स की ऐतिहासिक द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद विचारधारा से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने राज्य की इसी विचारधारा को स्पष्ट करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि भारतीय समाज को पूंजीवादी बनाने में ब्रिटिश उपनिवेशवाद जिम्मेदार था। आजादी के बाद देश को औद्योगिक बनाने में राज्य ने पूंजीपतियों का पूरा सहयोग किया।

देसाई स्वीकारते हैं कि भारत के राज्य कई तरीकों से पूंजीवादी राज्य ही हैं। राज्य खुद गरीबों का शोषण करता है। राज्य और पूंजीपतियों की नीति हमेशा गरीबों की स्थिति को कमजोर करने की रहती है। आजादी के बाद राज्य एक पूंजीपति वर्ग के सहयोगी की तरह काम कर रहा है। उसकी प्रकृति एक वर्ग की तरह है, जिसमें सामंत और पूंजीपति शामिल हैं। देसाई ने अपनी किताबों में इन तथ्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि ब्रिटिश उपनिवेश में राज्य पूंजीवादी थे और आजादी के बाद भी भारत में पूंजीवाद बना रहा है। आज भी राज्य पूंजीपतियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करता है। भारत की उत्पादन प्रक्रिया में राज्य का हिस्सा अधिक है।

देसाई के कथन से मार्क्सवादी और गैर-मार्क्सवादी दोनों सहमत नहीं हैं। मार्क्सवादियों के अनुसार, उत्पादन के विवाद में राज्य तटस्थ रहता है। पूंजीवाद को लेकर राज्यों की अपनी नीति होती है। विद्वान लोग राज्य को आधुनिक या परंपरागत मानकर छोड़ देते हैं। गैर-मार्क्सवादी राज्य को एक वर्ग की तरह मानते हैं।

राज्य की अवधारणा और समाज में उसकी भूमिका के विषय में देसाई के साथ कोठारी ने कहा है कि भारतीय राज्य पूंजीवादी नहीं है, लेकिन पूंजीवाद के विकास में पूरा सहयोग करता है। भले ही राज्य और पूंजीवाद का आपस में विरोध रहा हो। कोठारी ने स्पष्ट किया कि भारतीय राज्य पहले पूंजीपतियों के प्रभाव से दूर था। राज्य का मुख्य उद्देश्य समाज में समानता लाना था।

देसाई मानते हैं कि राज्य पिछड़े वर्गों का शोषण करता है। भारतीय संविधान में लोगों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए हैं, लेकिन लोग उनका सही उपयोग नहीं कर पाते हैं। राज्य हिंसा के ज़रिए लोगों पर नियंत्रण रखता है और दबाव डालता है। देसाई ने माना है कि भारत में पूंजीवादी सोच के कारण ही गंदी बस्तियों, आर्थिक असमानता और किसान संघर्ष को बढ़ावा मिला है। इन सभी कारणों से भारत का विकास नहीं हो पाया है।
In simple words: ए. आर. देसाई के अनुसार, राज्य ब्रिटिश शासन से पूंजीवादी बना और अब भी पूंजीपतियों का साथ देता है, गरीबों का शोषण करता है। उन्होंने बताया कि राज्य के पूंजीवादी स्वरूप के कारण भारत में समस्याएं बढ़ी हैं। रजनी कोठारी ने उनके विचारों पर बहस की, यह कहते हुए कि राज्य हमेशा पूंजीवादी नहीं था, लेकिन पूंजीवाद को बढ़ावा देता है।

🎯 Exam Tip: ए. आर. देसाई की राज्य की अवधारणा को मार्क्सवादी और पूंजीवादी परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करें, साथ ही रजनी कोठारी की आलोचना को भी शामिल करें।

 

Question 4. ‘स्मरण रखा गया गाँव' नामक पुस्तक की विवेचना कीजिए।
Answer: 'स्मरण रखा गया गाँव' (The Remembered Village) नामक पुस्तक श्रीनिवास के अध्ययन का मुख्य केंद्र भारतीय गाँव था। गाँव के अध्ययन की प्रेरणा उन्हें 1945-46 में रेडक्लिफ ब्राउन से मिली थी। उनकी पुस्तक 'रिमेम्बर्ड विलेज' में कर्नाटक के रामपुरा गाँव के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। रामपुरा गाँव के सभी तथ्यों के दस्तावेज पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में जमा कराए गए थे, लेकिन एक घटना में वे सभी दस्तावेज नष्ट हो गए। अपने मित्र सालटोक्स की सलाह पर उन्होंने अपनी याददाश्त के आधार पर गाँव के बारे में लिखा। 'रिमेम्बर्ड विलेज' पुस्तक का प्रकाशन 1976 में हुआ था। समाजशास्त्र में इस पुस्तक को एक शास्त्रीय ग्रंथ माना जाता है। यह पुस्तक क्षेत्रीय कार्य के आधार पर लिखी गई थी और इसमें कुल ग्यारह अध्याय हैं।

प्रथम अध्याय: इस अध्याय में श्रीनिवास ने बताया कि इस पुस्तक को लिखने का विचार उनके मन में कैसे आया। उन्होंने गाँव का चयन तर्क के आधार पर नहीं किया, बल्कि वे भावनात्मक रूप से रामपुरा गाँव से जुड़े थे।
In simple words: 'स्मरण रखा गया गाँव' एम.एन. श्रीनिवास की किताब है, जिसमें उन्होंने याददाश्त के आधार पर कर्नाटक के रामपुरा गाँव का वर्णन किया। यह पुस्तक गाँव के सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक पहलुओं को बताती है और इसे समाजशास्त्र का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।

🎯 Exam Tip: 'रिमेम्बर्ड विलेज' के महत्व को, उसके लेखन की विशिष्ट परिस्थितियों और उसके मुख्य विषयों के साथ याद रखें।

 

Question 4. 'स्मरण रखा गया गाँव' नामक पुस्तक की विवेचना कीजिए।
Answer: 'स्मरण रखा गया गाँव' पुस्तक श्रीनिवास के अध्ययन का मुख्य केंद्र भारतीय गाँव था। उन्हें गाँव के अध्ययन की प्रेरणा 1945-46 में रेडक्लिफ ब्राउन से मिली थी। उनकी पुस्तक 'रिमेम्बर्ड विलेज' में कर्नाटक के रामपुरा गाँव के बारे में विस्तार से बताया गया है। रामपुरा गाँव से जुड़े सभी दस्तावेज पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में जमा थे, लेकिन एक घटना में वे सभी दस्तावेज नष्ट हो गए। श्रीनिवास के मित्र सोलटोक्स ने उन्हें अपनी याददाश्त के आधार पर गाँव का विवरण फिर से लिखने के लिए प्रेरित किया। इस प्रेरणा से श्रीनिवास ने 'रिमेम्बर्ड विलेज' (स्मरण रखा गया गाँव) नामक पुस्तक को 1976 में प्रकाशित किया। 'रिमेम्बर्ड विलेज' को समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। यह पुस्तक पूरी तरह से क्षेत्रीय काम के आधार पर लिखी गई थी और इसमें ग्यारह अध्याय हैं।

🎯 Exam Tip: जब किसी पुस्तक के बारे में पूछा जाए, तो उसके लेखक, प्रकाशन वर्ष, मुख्य विषयवस्तु और महत्व को संक्षेप में बताएं।

 

Question 5. सामाजिक मूल्य कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: सामाजिक मूल्य चार प्रकार के होते हैं:

  • **तात्कालिक मूल्य:** ये वे मूल्य होते हैं जिनसे समाज की तुरंत की ज़रूरतें पूरी होती हैं।
  • **विशिष्ट सामाजिक मूल्य:** मनुष्य समाज की खास ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जिन मूल्यों को तय करता है, वे विशिष्ट सामाजिक मूल्य कहलाते हैं।
  • **सार्वलौकिक मूल्य:** ये वे मूल्य हैं जो किसी भी व्यक्ति या समाज के जीवन को प्रभावित करते हैं।
  • **अंतर्निहित मूल्य:** ये मूल्य व्यक्ति और समाज के अंदरूनी जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।
  • **आदर्शात्मक मूल्य:** जिन सामाजिक मूल्यों का विकास अच्छे लक्ष्य हासिल करने के लिए होता है, उन्हें आदर्शात्मक मूल्य कहते हैं।

In simple words: सामाजिक मूल्य कई तरह के होते हैं, जैसे तुरंत काम आने वाले मूल्य, खास ज़रूरतों के मूल्य, सभी पर लागू होने वाले मूल्य, मन में बसे मूल्य और अच्छे आदर्शों वाले मूल्य।

🎯 Exam Tip: सामाजिक मूल्यों के प्रकार बताते समय, हर प्रकार का नाम लिखें और एक-दो वाक्यों में उसका सरल अर्थ समझाएं।

 

Question 6. जी. एस. घुर्ये ने कौन-कौन सी कृतियाँ लिखी हैं?
Answer: जी. एस. घुर्ये ने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:

  • कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया
  • कल्चर एण्ड सोसाइटी
  • आफ्टर ए सेन्चुरी एण्ड ए क्वार्टर
  • कास्ट क्लास एण्ड ओक्युपेशन
  • सिटीज एण्ड सिविलाइजेशन
  • दि शिड्युल्ड ट्राइब्ज
  • एनोटोमो ऑफ ए रूरल कम्युनिटी
  • वैदिक इण्डिया
  • इण्डिया रिक्रियेटस डेमोक्रेसी
  • वैदिक इण्डिया

In simple words: जी.एस. घुर्ये एक बड़े लेखक थे और उन्होंने जाति, संस्कृति, शहरों और गाँवों के जीवन पर कई किताबें लिखीं, जैसे 'कास्ट एण्ड रेस इन इण्डिया' और 'वैदिक इण्डिया'।

🎯 Exam Tip: किसी भी समाजशास्त्री की कृतियों को याद करते समय, कम से कम तीन से पांच प्रमुख पुस्तकों के नाम याद रखें।

 

Question 7. मुकर्जी का प्रमुख योगदान क्या है?
Answer: डी. पी. मुकर्जी का समाजशास्त्र के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान है। उन्हें भारतीय समाजशास्त्र का पितामह माना जाता है। उनके मुख्य कार्यों को हम इस तरह समझ सकते हैं:
1. व्यक्तित्व
2. आधुनिक भारतीय संस्कृति
3. परम्पराएँ

In simple words: डी. पी. मुकर्जी ने भारतीय समाजशास्त्र को बहुत कुछ दिया है। उन्होंने लोगों के व्यक्तित्व, भारत की आधुनिक संस्कृति और पुरानी परम्पराओं को समझने में मदद की।

🎯 Exam Tip: किसी विद्वान के योगदान को बताते समय, उनके मुख्य क्षेत्रों या विचारों को संक्षिप्त रूप में सूचीबद्ध करें।

 

Question 8. देसाई की प्रमुख कृतियाँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: समाजशास्त्री ए. आर. देसाई ने ये किताबें लिखी हैं:
1. सोशयल बैकग्राउण्ड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म
2. रूरल सोश्लोजी इन इण्डियन
3. पीजेन्ट स्ट्रगल इन इण्डिया
4. स्ल्म्स एण्ड अरबेनाइजेशन (डी. पिल्लई के साथ)
5. स्टेट एण्ड सोसायटी इन इण्डिया

In simple words: ए.आर. देसाई ने भारत के गाँवों, शहरों, किसानों के आंदोलनों और राष्ट्रवाद पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिखीं, जैसे 'सोशयल बैकग्राउण्ड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म'।

🎯 Exam Tip: किसी भी लेखक की महत्वपूर्ण कृतियों को याद करते समय, उनके पूरे शीर्षक को सही ढंग से याद रखने का प्रयास करें।

 

Question 9. मूल्यों के उद्भव के क्या आधार हैं?
Answer: मुकर्जी मानते थे कि सामाजिक परिस्थितियाँ ही मूल्यों के बनने का मुख्य कारण हैं, जिनसे व्यक्ति के मन में भावनाएँ और विकास होता है। मुकर्जी ने मूल्यों के बनने के तीन आधार बताए हैं:
1. **लक्ष्य:** हर व्यक्ति का जीवन में कोई न कोई लक्ष्य होता है। उस लक्ष्य को पाने के लिए उसे कुछ मूल्य बनाने पड़ते हैं।
2. **आदर्श:** जब कोई व्यक्ति मूल्यों को अपना लेता है, तो वे मूल्य उसके लिए आदर्श बन जाते हैं। फिर वह उन्हीं के हिसाब से व्यवहार करता है।
3. **मान्यताएँ:** जब आदर्श पक्के हो जाते हैं, तो वे पूरे समाज की सामूहिक मान्यताओं का रूप ले लेते हैं।

In simple words: मुकर्जी के अनुसार, मूल्य तब बनते हैं जब लोग अपने जीवन के लक्ष्य तय करते हैं, उन लक्ष्यों को पाने के लिए कुछ आदर्श मानते हैं, और फिर ये आदर्श पूरे समाज की मान्यताओं का हिस्सा बन जाते हैं।

🎯 Exam Tip: मूल्यों के उद्भव के आधारों को बताते समय, प्रत्येक आधार का नाम स्पष्ट रूप से लिखें और उसके पीछे की मुख्य अवधारणा को समझाएं।

 

Question 10. सामाजिक मूल्यों की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: सामाजिक मूल्यों की मुख्य विशेषताएँ ये हैं:
1. सामाजिक मूल्य समाज को मापने का काम करते हैं।
2. सामाजिक मूल्य सभी के लिए होते हैं।
3. ये मूल्य पूरे समाज में एक जैसे पाए जाते हैं।

In simple words: सामाजिक मूल्य समाज के नियम होते हैं, जो सभी के लिए होते हैं और समाज में एक जैसे पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जब सामाजिक मूल्यों की विशेषताओं के बारे में पूछा जाए, तो प्रमुख बिन्दुओं को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से प्रस्तुत करें।

 

RBSE Class 11 Sociology Chapter 10 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. जी. एस. घुर्ये के जीवन-परिचय तथा कृतियों पर एक लेख लिखिए?
Answer: जी. एस. घुर्ये एक प्रसिद्ध समाजशास्त्री थे, जिनका जीवन-परिचय और कृतियाँ इस प्रकार हैं:

**जन्म:**
जी. एस. घुर्ये का जन्म 21 दिसंबर 1893 को महाराष्ट्र के मालवा क्षेत्र में हुआ था। वह बचपन से ही बहुत समझदार थे।

**शिक्षा-दीक्षा:**
उन्होंने 1918 में एम.ए. की परीक्षा एलिफस्टन महाविद्यालय, मुंबई से प्रथम श्रेणी में पास की। उन्हें हैडन के मार्गदर्शन में 'रेस एण्ड कास्ट इन इण्डिया' विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि मिली।

**प्रशिक्षण एवं शोध कार्य:**
1924 में घुर्ये को मुंबई विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग में रीडर और विभागाध्यक्ष बनाया गया। 1934 में वह उसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने। 1959 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मुंबई विश्वविद्यालय ने 'प्रोफेसर एमेरिटस' का पद दिया।

**जी. एस. घुर्ये की प्रमुख कृतियाँ:**
घुर्ये ने अपने जीवन में 25 से अधिक किताबें लिखीं। उनकी कुछ मुख्य कृतियाँ ये हैं:

  • **दि शिड्यूल्ड ट्राइब्ज (1963):** इस किताब में घुर्ये ने भारत की जनजातियों की समस्याओं और उनके समाधान पर बात की है।
  • **जाति वर्ग व्यवसाय (1961):** इस किताब में जाति प्रथा की खूबियों, रूपों, तत्वों, उत्पत्ति, व्यवसाय और उसके भविष्य पर चर्चा की गई है।
  • **भारत में सामाजिक तनाव (1968):** इस प्रकाशित किताब में भारत के सामाजिक तनावों का विश्लेषण किया गया है।
  • **संस्कृति तथा समाज:** इस किताब में घुर्ये ने संस्कृति और समाज के रिश्तों पर बात की है।

**अन्य महत्त्वपूर्ण कृतियाँ:**
  • विदर इण्डिया
  • इण्डिया रिक्रियेट्स डेमोक्रेसी
  • वैदिक इण्डिया

**घुर्ये का अन्य क्षेत्रों में योगदान:**
घुर्ये ने पढ़ाई और शोध के अलावा धर्म, प्रजाति, रिश्तेदारी व्यवस्था, ग्रामीण-शहरीकरण, भारतीय वेशभूषा, संघर्ष और समन्वय जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण काम किया।

In simple words: जी. एस. घुर्ये महाराष्ट्र में जन्मे एक प्रसिद्ध समाजशास्त्री थे, जिन्होंने मुंबई से डॉक्टरेट की उपाधि ली थी। उन्होंने जाति, जनजातियों, संस्कृति और समाज पर कई किताबें लिखीं और समाजशास्त्र के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया।

🎯 Exam Tip: जीवन परिचय के प्रश्नों में, जन्मस्थान, शिक्षा, प्रमुख पदों और कृतियों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 2. डी. पी. मुकर्जी का जीवन परिचय प्रमुख कृतियाँ एवं उनके प्रमुख योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: डी. पी. मुकर्जी एक महत्वपूर्ण भारतीय समाजशास्त्री थे। उनका जीवन-परिचय, प्रमुख कृतियाँ और योगदान इस प्रकार हैं:

**जन्म:**
मुकर्जी का जन्म 5 अक्टूबर 1894 को बंगाल के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम धुर्जति प्रसाद मुकर्जी था।

**शिक्षा-दीक्षा:**
उनकी पढ़ाई कोलकाता में हुई। इतिहास उनका पसंदीदा विषय था। उन्होंने अर्थशास्त्र, इतिहास और राजनीतिशास्त्र में स्नातक की डिग्री ली। 1920 में उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री इंग्लैंड से हासिल की। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान वे भारत लौट आए थे।

**शिक्षण एवं शोध कार्य:**
1922 से वह लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र के व्याख्याता के रूप में काम करते रहे। 1954 में वे इसी विश्वविद्यालय से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वह हेग के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे। 5 दिसंबर 1961 को उनका निधन हो गया।

**प्रमुख कृतियाँ:**
1. आधुनिक भारतीय संस्कृति
2. व्यक्तित्व और सामाजिक विज्ञान
3. समाजशास्त्र की मूल अवधारणाएँ
4. भारतीय युवकों की समस्याएँ
5. भारतीय संगीत का परिचय
6. टैगोर एक अध्ययन
7. विचार एवं प्रतिविचार
8. भारतीय इतिहास पर एक अध्ययन

**योगदान:**
डी. पी. मुकर्जी ने भारतीय समाजशास्त्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने परम्पराओं को समझने और आधुनिकता से जोड़ने पर जोर दिया।

In simple words: डी. पी. मुकर्जी बंगाल में जन्मे एक विद्वान थे, जिन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाया। उन्होंने आधुनिक भारतीय संस्कृति और परम्पराओं जैसे विषयों पर कई किताबें लिखीं, और भारतीय समाजशास्त्र में उनका बहुत बड़ा योगदान है।

🎯 Exam Tip: किसी भी विद्वान के परिचय में उनके नाम, जन्मस्थान, शिक्षा, महत्वपूर्ण कार्यस्थलों और उनकी मुख्य किताबों को शामिल करें।

 

Question 3. डॉ. देसाई का जीवन परिचय, कृतियाँ एवं प्रमुख योगदान पर एक लेख लिखिए।
Answer: डॉ. अक्षय कुमार रमनलाल देसाई एक जाने-माने समाजशास्त्री थे। उनका जीवन-परिचय, कृतियाँ और प्रमुख योगदान इस प्रकार है:

**जीवन-परिचय:**
डॉ. अक्षय कुमार रमनलाल देसाई का जन्म 16 अप्रैल 1915 को गुजरात के नाडियाद शहर में हुआ था। उनके पिता एक उच्चकोटि के साहित्यकार थे।

**शिक्षा-दीक्षा:**
देसाई ने बड़ोदरा विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा पास की और बाद में कानून की डिग्री ली। 1946 में उन्होंने घुर्ये के मार्गदर्शन में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।

**अध्यापन कार्य:**
उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू किया। 1951 में वे मुंबई विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए और वहाँ 1976 तक काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद, इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस एंड रिसर्च ने देसाई को नेशनल फेलो बनाया। 12 नवंबर 1994 को उनका निधन हो गया।

**प्रमुख कृतियाँ:**
1946 में उन्हें 'द सोशल बैकग्राउण्ड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म' नामक पुस्तक पर डॉक्टरेट की उपाधि मिली थी। उनकी कुछ प्रमुख कृतियाँ ये हैं:
1. रिसेन्ट ट्रेन्डस इन इण्डियन नेशनलिज्म
2. स्ल्म्स एण्ड अरबेनाइजेशन
3. रूरल सोशियोलॉजी इन इंडियन
4. पीजेन्ट स्ट्रगल इन इंडिया
5. स्टेट एण्ड सोसाइटी इन इंडिया
6. इंडियाज पाथ ऑफ डेवलपमेंट
7. भारतीय समाज का रूपान्तरण
8. किसान संघर्ष
9. राज्य और समाज
10. भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि
11. गंदी बस्तियाँ और नगरीकरण
12. राष्ट्रीय आन्दोलन

**योगदान:**
उन्होंने इन सभी विषयों और क्षेत्रों में अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर कई समाजशास्त्रीय कार्य शुरू हुए। देसाई मार्क्सवादी विचारों से प्रभावित थे और उन्होंने भारत में राज्य, पूंजीवाद और सामाजिक परिवर्तन पर गहराई से लिखा।

In simple words: डॉ. ए.आर. देसाई गुजरात में जन्मे एक समाजशास्त्री थे, जिन्होंने मुंबई में पढ़ाया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद, किसान आंदोलनों और शहरीकरण जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिखीं और समाजशास्त्र में बड़ा योगदान दिया।

🎯 Exam Tip: डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्वानों के मामले में, उनके डॉक्टरेट के विषय या संबंधित पुस्तक का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. एम. एन. श्रीनिवास का जीवन-परिचय, कृतियाँ एवं उनके योगदान पर एक लेख लिखिए।
Answer: एम. एन. श्रीनिवास एक बहुत ही प्रभावशाली भारतीय समाजशास्त्री थे। उनका जीवन-परिचय, कृतियाँ और योगदान इस प्रकार है:

**जीवन-परिचय:**
मैसूर नरसिम्हाचार श्रीनिवास का जन्म 16 नवंबर 1916 को मैसूर में हुआ था। उनके पिता मैसूर के ऊर्जा और बिजली विभाग में काम करते थे।

**शिक्षा-दीक्षा:**
उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा ली। मुंबई विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। दक्षिण भारत के कुर्ग लोगों पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिली, जिसके बाद वे ब्रिटेन गए और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल की उपाधि प्राप्त की।

**अध्यापन कार्य:**
श्रीनिवास ने बैंगलोर के इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज में काम किया। 1951 में वे बड़ौदा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने और वहाँ समाजशास्त्र विभाग की स्थापना की। उनके प्रयासों से दिल्ली विश्वविद्यालय में भी समाजशास्त्र विभाग की स्थापना हुई। 1959 में उनकी नियुक्ति दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर के पद पर हुई। 30 नवंबर 1999 को उनका निधन हो गया।

**प्रमुख कृतियाँ:**
श्रीनिवास ने कई किताबें और लेख लिखे हैं। उनकी कुछ प्रमुख कृतियाँ ये हैं:
1. भारतः सामाजिक संरचना
2. प्रभु जाति और अन्य लेख
3. दि कोहिजिवे रोल ऑफ संस्कृताईजेशन
4. विलेज, कास्ट, जेन्डर एण्ड मेथड
5. इण्डियन सोसाइटी श्रू पर्सनल राइटिंग्ज

**प्रमुख योगदान:**
श्रीनिवास की पुस्तक 'रिमेम्बर्ड विलेज' एक गाँव का विस्तृत अध्ययन है, जिसमें उन्होंने वहाँ की जाति, व्यवसाय और जजमानी प्रथा का वर्णन किया है। गाँव उनके अध्ययन का मुख्य केंद्र था। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन, धर्म और समाज, गाँव, जाति, प्रभु जाति, विवाह और परिवार, और आधुनिक भारत जैसे अन्य क्षेत्रों में भी काम किया। श्रीनिवास ने गाँव को भारतीय समाज की एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में देखा और जाति, आधुनिकीकरण और सामाजिक परिवर्तन पर अपने विचार रखे।

In simple words: एम.एन. श्रीनिवास मैसूर में जन्मे एक समाजशास्त्री थे, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई की और दिल्ली में प्रोफेसर बने। उन्होंने 'रिमेम्बर्ड विलेज' जैसी कई किताबें लिखीं और भारतीय गाँवों, जाति और सामाजिक बदलाव को समझने में बहुत मदद की।

🎯 Exam Tip: श्रीनिवास के योगदान में 'संस्कृताईजेशन' और 'प्रभु जाति' की अवधारणाओं का उल्लेख करना उनके उत्तर को और प्रभावी बनाता है।

 

Question 5. राधाकमल मुकर्जी के जीवन, कृतियाँ एवं उनके योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: राधाकमल मुकर्जी एक प्रमुख भारतीय समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री थे। उनका जीवन, कृतियाँ और योगदान इस प्रकार है:

**जीवन-परिचय:**
राधाकमल मुकर्जी का जन्म 7 सितंबर 1889 को बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बरहामपुर में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक वकील थे और उनकी रुचि इतिहास में थी।

**शिक्षा-दीक्षा:**
डॉ. मुकर्जी ने बरहामपुर के कृष्णनाथ महाविद्यालय से बी.ए. की परीक्षा पास की। उन्होंने कोलकाता के प्रेसीडेंसी महाविद्यालय से इतिहास और अंग्रेजी में ऑनर्स किया। उन्होंने अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र विभाग में कई शोध कार्य भी करवाए।

**अध्यापन कार्य:**
सन् 1955 से 1957 तक आप लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। 1958 में आप लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी एंड ह्यूमन रिलेशन के निदेशक भी रहे। 1968 में उनका निधन हो गया।

**प्रमुख कृतियाँ:**
राधाकमल मुकर्जी ने ये किताबें लिखी हैं:
1. दी फाउण्डेशन ऑफ इण्डियन इकॉनोमिक्स
2. दी रूरल इकॉनोमी ऑफ इण्डिया
3. रिजनल सोशियोलॉजी
4. दी लेण्ड प्रॉब्लम ऑफ इण्डिया
5. इन्ट्रोडेक्शन ऑफ सोशयल साइकोलॉजी
6. फील्ड एण्ड फारमर ऑफ ओउध
7. सोशियोलॉजी ऑफ मैसटीसीजल
8. रिजनल बैलेन्स ऑफ मेन
9. मेन एण्ड हीस हेबिटेशन
10. इण्टर कास्ट टेंशन
11. ए जनरल थ्योरी ऑफ सोसायटी
12. दी डाइमेन्शंस ऑफ ह्यूमन वेल्यूस
13. दी बेस ऑफ ह्यूमेनीजम : ईस्ट एण्ड वेस्ट

**प्रमुख योगदान:**
**मूल्यों की अवधारणा:**
डॉ. मुकर्जी ने मूल्यों की एक नई अवधारणा दी, जिससे वे देश-विदेश में प्रसिद्ध हुए। उनके योगदान से भारत में मूल्यों के अध्ययन के लिए समाजशास्त्र में एक अलग शाखा, "मूल्यों का समाजशास्त्र", विकसित हुई।

**अन्य योगदान:**
1. भारतीय संस्कृति
2. समाज का सिद्धांत
3. सार्वभौमिक सभ्यता का सिद्धांत
4. आर्थिक क्रियाकलाप और सामाजिक व्यवहार

In simple words: राधाकमल मुकर्जी बंगाल में जन्मे एक विद्वान थे जिन्होंने अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र पढ़ाया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, समाज के नियमों और मूल्यों पर कई किताबें लिखीं, और 'मूल्यों का समाजशास्त्र' नाम से एक नया विचार दिया।

🎯 Exam Tip: राधाकमल मुकर्जी के योगदान में 'मूल्यों का समाजशास्त्र' की अवधारणा का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनका सबसे विशिष्ट योगदान था।

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