RBSE Solutions Class 11 Political Science Chapter 6 राज्य का कार्यक्षेत्र

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Detailed Chapter 6 राज्य का कार्यक्षेत्र RBSE Solutions for Class 11 Political Science

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Class 11 Political Science Chapter 6 राज्य का कार्यक्षेत्र RBSE Solutions PDF

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पुलिस राज्य में विश्वास करने वाली विचारधारा का नाम लिखिए।
Answer: पुलिस राज्य में विश्वास करने वाली विचारधारा अहस्तक्षेपवादी विचारधारा है, जो राज्य के सीमित हस्तक्षेप का समर्थन करती है।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा मानती है कि राज्य को बस कानून-व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए, ज्यादा कुछ नहीं।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा उन विचारों का समूह है जो व्यक्तियों की स्वतंत्रता पर अधिक जोर देते हैं और राज्य के हस्तक्षेप को कम से कम रखना चाहते हैं।

 

Question 2. अहस्तक्षेपवादी राज्य का एक कार्य लिखिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य का एक मुख्य कार्य समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखना है, ताकि व्यक्ति अपनी इच्छा से काम कर सकें।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी राज्य सिर्फ शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करता है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी राज्य में रक्षा और न्याय जैसे कार्य ही शामिल होते हैं, जबकि सामाजिक कल्याण के कार्य नहीं होते।

 

Question 4. राज्य को साधन मानने वाले दो विचारकों के नाम लिखिए।
Answer: राज्य को साधन मानने वाले दो विचारक हैं:
1. जे. एस. मिल
2. हरबर्ट स्पेंसर
In simple words: जे. एस. मिल और हरबर्ट स्पेंसर मानते थे कि राज्य केवल एक माध्यम है, जिसका उपयोग लोगों के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इन विचारकों का मानना था कि व्यक्ति अपने हित का सबसे अच्छा निर्णायक होता है, इसलिए राज्य को व्यक्ति के मामलों में कम से कम हस्तक्षेप करना चाहिए।

 

Question 5. लोक कल्याणकारी राज्य के दो समर्थक विचारकों के नाम लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के दो समर्थक विचारक हैं:
1. प्रो. हेराल्ड लास्की
2. जे. एस. मिल
In simple words: प्रो. हेराल्ड लास्की और जे. एस. मिल ने लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का समर्थन किया।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ राज्य केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण का भी ध्यान रखता है।

 

Question 6. लोक कल्याणकारी राज्य के मार्ग में आने वाली दो बाधाएँ लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के मार्ग में आने वाली दो बाधाएँ ये हैं:
1. नौकरशाही (राज्य के कर्मचारियों का ज्यादा प्रभाव)
2. प्रेरणा का अभाव (लोगों में कल्याणकारी कार्यों के लिए रुचि की कमी)
In simple words: ज्यादा सरकारी कामकाज और लोगों में रुचि की कमी लोक कल्याणकारी राज्य के रास्ते में रुकावट बन सकती है।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य को सफल बनाने के लिए कुशल प्रशासन और जनता की सक्रिय भागीदारी दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 7. 19वीं सदी में किस विचारधारा का प्राधान्य था?
Answer: 19वीं सदी में अहस्तक्षेपवादी विचारधारा का अधिक प्रभाव था, जो राज्य के सीमित कार्यों का समर्थन करती थी।
In simple words: 1800 के दशक में अहस्तक्षेपवादी विचार बहुत प्रचलित थे, जिसमें राज्य को कम काम करने को कहा जाता था।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा व्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वोच्च मानती है और मानती है कि राज्य को आर्थिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

 

Question 8. भारतीय संविधान के किस अध्याय में लोक कल्याणकारी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान के चतुर्थ अध्याय में लोक कल्याणकारी प्रावधानों का उल्लेख 'नीति-निर्देशक तत्वों' के रूप में किया गया है।
In simple words: भारत के संविधान के चौथे हिस्से में लोगों की भलाई के लिए सरकार को क्या करना चाहिए, यह बताया गया है।

🎯 Exam Tip: नीति-निर्देशक तत्व सरकार के लिए दिशा-निर्देश हैं, जो भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाने में मदद करते हैं।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 10. राज्य के कार्यक्षेत्र सम्बन्धी कौन-कौन सी विचारधाराएँ हैं?
Answer: राज्य के कार्यक्षेत्र से सम्बन्धित मुख्य विचारधाराएँ ये हैं:
1. अहस्तक्षेपवादी विचारधारा
2. लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा
3. राज्य की गाँधीवादी विचारधारा
In simple words: राज्य के कामों के बारे में मुख्य तीन सोच हैं: अहस्तक्षेपवादी, लोक कल्याणकारी और गाँधीवादी।

🎯 Exam Tip: ये तीनों विचारधाराएँ राज्य की भूमिका और कार्यों के दायरे को अलग-अलग तरीके से परिभाषित करती हैं।

 

Question 1. अहस्तक्षेपवादी राज्य के दो मूल सिद्धान्त लिखिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य के दो मूल सिद्धान्त ये हैं:
(i) राज्य एक आवश्यक बुराई है: अहस्तक्षेपवादी मानते हैं कि राज्य सुरक्षा और शांति के लिए ज़रूरी है, लेकिन यह व्यक्ति की स्वतंत्रता में दखल देकर उसके विकास में बाधा डालता है, इसलिए इसे एक ज़रूरी बुराई मानते हैं।
(ii) व्यक्ति को पूर्ण स्वतन्त्रता: इस विचारधारा के समर्थक व्यक्ति को पूरी आज़ादी देने पर ज़ोर देते हैं। वे मानते हैं कि राज्य को व्यक्ति के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और उसे अपने हाल पर छोड़ देना चाहिए।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी कहते हैं कि राज्य ज़रूरी तो है पर बुरा भी है, क्योंकि वह लोगों की आज़ादी में दखल देता है। उनका मानना है कि लोगों को पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: इस विचारधारा का मुख्य विचार यह है कि व्यक्ति अपने हित का सबसे अच्छा निर्णायक होता है, इसलिए राज्य को उसका मार्गदर्शन नहीं करना चाहिए।

 

Question 2. अहस्तक्षेपवादी राज्य के विपक्ष में दो तर्क लिखिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य के विरोध में दो मुख्य तर्क ये हैं:
(i) व्यक्ति सदैव अपने हित का सर्वोत्तम निर्णायक नहीं होता: आलोचक कहते हैं कि हर व्यक्ति अपने हित को सही से नहीं समझ पाता और न ही उसमें अपने हित पूरे करने की पूरी क्षमता होती है। इसलिए राज्य को उसकी मदद करनी चाहिए।
(ii) (The OCR text for point (ii) is incomplete on page 3. The heading "लोक कल्याणकारी राज्य के दो उद्देश्य लिखिए।" follows immediately, which is likely a separate question based on the content. I will only provide the answer for point (i) which is complete.)
In simple words: एक तर्क यह है कि लोग हमेशा खुद का भला नहीं समझ पाते।

🎯 Exam Tip: यह तर्क लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का आधार है, जो मानता है कि राज्य को व्यक्तियों के कल्याण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

 

Question 3. लोक कल्याणकारी राज्य के दो उद्देश्य लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के दो मुख्य उद्देश्य ये हैं:
1. व्यक्ति की स्वतंत्रताओं के उपभोग को संभव बनाना: लोक कल्याणकारी राज्य का लक्ष्य नागरिकों को सही मायने में स्वतंत्रता का अनुभव करने देना और राज्य के कार्यों को बढ़ाकर व्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित करना है।
2. कल्याणकारी योजनाएँ बनाना तथा नागरिकों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना: इसका दूसरा मुख्य उद्देश्य जनता के सभी वर्गों के लिए योजनाएँ तैयार करना और सभी नागरिकों को ज़रूरी सुविधाएँ प्रदान करना है।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य चाहता है कि लोग आज़ादी से रहें और राज्य सभी के लिए अच्छी योजनाएँ और ज़रूरी सुविधाएँ दे।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य व्यक्ति के अधिकारों और सामाजिक न्याय दोनों को प्राथमिकता देता है, जिससे सबका समान विकास हो सके।

 

Question 4. लोक कल्याणकारी राज्य के दो कार्य लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के कार्यों को दो हिस्सों में बाँटा जा सकता है:
1. अनिवार्य कार्य: इसमें राज्य की सुरक्षा से जुड़े कार्य आते हैं, जैसे - अंदरूनी शांति और व्यवस्था बनाए रखना, बाहरी हमलों से रक्षा करना और न्याय देना।
2. ऐच्छिक कार्य: ये वे कार्य हैं जो राज्य नागरिकों की भलाई के लिए करता है, जैसे - समाज सुधार, मजदूरों के नियम बनाना, खेती, उद्योग, व्यापार को नियंत्रित करना, असहाय लोगों की मदद करना, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार नियोजन।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य सुरक्षा और न्याय जैसे ज़रूरी काम करता है। साथ ही, समाज सुधार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे लोगों की भलाई के ऐच्छिक काम भी करता है।

🎯 Exam Tip: अनिवार्य कार्य वे हैं जिनके बिना राज्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है, जबकि ऐच्छिक कार्य कल्याण और प्रगति के लिए ज़रूरी होते हैं।

 

Question 5. गाँधीवादी राज्य के दो लक्ष्य लिखिए।
Answer: गाँधीजी ने आदर्श राज्य के रूप में 'राज्यविहीन समाज' की कल्पना की, लेकिन व्यावहारिक रूप में उन्होंने विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य और अहिंसक लोकतन्त्र को राज्य के दो लक्ष्यों के रूप में बताया है:
(1) विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य: गाँधीजी ने गाँव-आधारित, राजनीतिक व्यवस्था का सुझाव दिया। उनका मानना था कि धीरे-धीरे सुधार करके और लोगों के विचारों में बदलाव लाकर विकेन्द्रित ग्राम स्वराज्य प्राप्त किया जा सकता है।
In simple words: गाँधीजी चाहते थे कि राज्य के बिना समाज बने, लेकिन इसके दो लक्ष्य थे: गाँव-गाँव में अपना राज और बिना हिंसा वाला लोकतंत्र।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी का 'ग्राम स्वराज्य' का विचार आत्म-निर्भरता, सत्ता के विकेंद्रीकरण और अहिंसा पर आधारित था।

 

Question 6. रामराज्य को परिभाषित कीजिए।
Answer: गाँधीजी के 'रामराज्य' का मतलब भगवान राम के समय के शासन से नहीं था, बल्कि एक ऐसे समाज से था जहाँ राज्य की कोई ज़रूरत न हो। यह एक पवित्र व्यवस्था है जहाँ व्यक्ति की अंतरात्मा पर कोई बाहरी नियंत्रण नहीं होता। गाँधीजी मानते थे कि जब व्यक्ति अहिंसा को अपना लेगा और स्वार्थ छोड़ देगा, तो उसे किसी बाहरी नियम की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे समाज को उन्होंने 'प्रबुद्ध अराजकता' कहा था, यही उनका रामराज्य था।
In simple words: गाँधीजी का रामराज्य एक ऐसा समाज था जहाँ किसी राज्य या सरकार की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि लोग खुद ही अच्छे नैतिक नियमों का पालन करते हैं।

🎯 Exam Tip: रामराज्य की अवधारणा अहिंसा, आत्म-नियंत्रण और नैतिक मूल्यों पर आधारित एक आदर्श व्यवस्था की कल्पना करती है।

 

Question 7. राज्य की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: राज्य की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
(1) लोकमत: राज्य को कभी भी जनता की राय के खिलाफ काम नहीं करना चाहिए। राज्य का निर्माण व्यक्तियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए हुआ है, इसलिए उसे जनता की स्वतंत्रता, विचार और अभिव्यक्ति को बिना ज़रूरत के रोकना नहीं चाहिए।
(2) धर्म: राज्य को हर व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता देनी चाहिए। उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी को विशेष धर्म मानने के लिए मजबूर न करे।
(3) नैतिकता: राज्य को ध्यान रखना चाहिए कि वह अपनी कोई भी नैतिक संहिता व्यक्तियों पर जबरदस्ती न थोपे। लोगों को अपनी नैतिकता के अनुसार जीने की आज़ादी मिलनी चाहिए।
(4) व्यक्ति का व्यक्तिगत दैनिक व्यवहार: राज्य को व्यक्ति की रोज़मर्रा की गतिविधियों की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
(5) फैशन: फैशन व्यक्तिगत पसंद से जुड़ा होता है। राज्य को इस क्षेत्र में अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाने चाहिए, बल्कि केवल ज़रूरी और समझदारी वाले प्रतिबंध ही लगाने चाहिए।
In simple words: राज्य की सीमाएँ तय करती हैं कि वह कहाँ तक दखल दे सकता है। इसमें जनता की राय का सम्मान करना, धर्म की आज़ादी देना, अपनी नैतिकता न थोपना, निजी व्यवहार में दखल न देना और फैशन जैसे निजी पसंद के मामलों में कम से कम दखल देना शामिल है।

🎯 Exam Tip: राज्य की ये सीमाएँ व्यक्तियों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा करती हैं, जिससे राज्य एक निरंकुश संस्था न बन सके।

 

Question 9. “राज्य साधन है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'राज्य साधन है' इस बात को मानने वाले विचारक कहते हैं कि राज्य मानव के हितों को पूरा करने का एक माध्यम है। उनका मानना है कि सभी संस्थाएँ व्यक्तियों के कल्याण और विकास के लिए बनी हैं, न कि व्यक्ति उन संस्थाओं के लिए। राज्य का एकमात्र उद्देश्य व्यक्तियों का भला करना है। व्यक्तिवादी, अराजकतावादी और बहुलवादी विचारक राज्य को एक साधन मानते हैं। व्यक्तिवादी विचारक राज्य के अस्तित्व को तो स्वीकार करते हैं, लेकिन उसे अंतिम लक्ष्य नहीं मानते। जे. एस. मिल और हर्बर्ट स्पेंसर जैसे विचारक राज्य को एक ज़रूरी बुराई मानते हैं, जो केवल पुलिस के काम तक सीमित रहना चाहिए। अराजकतावादी तो इसे अनावश्यक और अस्वाभाविक संस्था मानते हैं। बहुलवादी विचारक इसे अन्य समुदायों के जैसा एक समुदाय मानते हैं।
In simple words: जो लोग कहते हैं कि राज्य एक साधन है, वे मानते हैं कि राज्य सिर्फ लोगों की मदद करने के लिए है, ताकि वे अपना भला कर सकें। वे राज्य को अंतिम लक्ष्य नहीं मानते।

🎯 Exam Tip: 'राज्य साधन है' की अवधारणा बताती है कि राज्य को व्यक्तियों की स्वतंत्रता और कल्याण के लिए काम करना चाहिए, न कि व्यक्ति को राज्य के लक्ष्यों के लिए बलिदान करना चाहिए।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अहस्तक्षेपवादी राज्य की धारणा को स्पष्ट करते हुए उसके लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा व्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहुत ज़ोर देती है और व्यक्ति को अपने हित का सबसे अच्छा संरक्षक मानती है। इसलिए यह विचारधारा राज्य के कार्यक्षेत्र को सीमित करने पर बल देती है। इसका मूलमंत्र है "व्यक्ति राज्य के लिए नहीं है बल्कि राज्य व्यक्ति के लिए है।"
एडम स्मिथ, रिकार्डो, थॉमस, माल्थस जैसे अर्थशास्त्रियों ने कहा कि राज्य को आर्थिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह विचारधारा 19वीं सदी में सामने आई। बेंथम और जेम्स मिल ने इसे शुरू किया, और जॉन स्टुअर्ट मिल व हर्बर्ट स्पेंसर की रचनाओं में यह पूरी तरह से व्यक्त हुई।
जॉन स्टुअर्ट मिल का सिद्धांत है कि यदि राज्य व्यक्तियों के मामलों में कम से कम हस्तक्षेप करे, तो व्यक्ति को सबसे ज़्यादा खुशी मिल सकती है। आधुनिक व्यक्तिवाद औद्योगिक क्रांति का परिणाम है।
अहस्तक्षेपवादी राज्य के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
(1) राज्य एक आवश्यक बुराई है: यह व्यक्तियों के जीवन में सुरक्षा, शांति और व्यवस्था स्थापित करने के लिए राज्य को ज़रूरी मानता है, लेकिन यह भी मानता है कि राज्य का हस्तक्षेप व्यक्ति के चौतरफा विकास में बाधा डालता है। इसलिए अहस्तक्षेपवादी विचारक राज्य को एक ज़रूरी बुराई मानते हैं।
(2) व्यक्ति साध्य है तथा राज्य साधन: इस धारणा के अनुसार, राज्य का काम व्यक्ति की सेवा करना है। राज्य व्यक्ति के लिए है, न कि व्यक्ति राज्य के लिए। राज्य केवल व्यक्तियों का एक समूह है, और व्यक्तियों के विकास में ही राज्य की उन्नति संभव है।
(3) व्यक्ति को पूर्ण स्वतंत्रता: यह सिद्धांत व्यक्ति को अधिकतम स्वतंत्रता देने का समर्थक है। अहस्तक्षेपवादी राज्य 'लैंसेजफेयर' (यानी व्यक्तियों को उनके हाल पर छोड़ दो) के सिद्धांत में विश्वास करता है। यह इस बात पर जोर देता है कि राज्य को व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
(4) वह सरकार श्रेष्ठ है, जो न्यूनतम शासन करती है: अहस्तक्षेपवादियों के अनुसार, राज्य का कार्यक्षेत्र जितना सीमित होगा, उतना ही अच्छा होगा। राज्य को केवल नकारात्मक कार्य करने चाहिए, कल्याणकारी नहीं। उनका मानना है कि शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे जनहित के कार्यों को राज्य को नहीं करना चाहिए। फ्रीमैन के अनुसार, "वही सरकार सबसे अच्छी है जो कम से कम शासन करती है।"
(5) राज्य का कार्यक्षेत्र सीमित: अहस्तक्षेपवादियों के अनुसार राज्य केवल सुरक्षात्मक कार्य करता है। इसलिए उसका कार्यक्षेत्र सीमित है।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी राज्य मानता है कि लोगों को पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए और राज्य को उनके कामों में कम से कम दखल देना चाहिए। इसके मुख्य लक्षण हैं: राज्य एक ज़रूरी बुराई है, व्यक्ति सबसे ऊपर है, और सरकार को सबसे कम काम करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी राज्य का मुख्य फोकस व्यक्ति की स्वतंत्रता और आर्थिक स्वतंत्रता पर होता है, जिसमें राज्य की भूमिका केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित होती है।

 

Question 2. राज्य के लोक कल्याणकारी स्वरूप के लक्षण एवं सफलता हेतु आवश्यक शर्तों का वर्णन कीजिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य नागरिकों को अधिक-से-अधिक सुरक्षा देता है। यह बेरोजगारों को काम, गरीबों और कमजोरों को मदद, और बीमारी तथा बुढ़ापे में ज़रूरी सुरक्षा प्रदान करता है।
(2) सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना: कल्याणकारी राज्य नागरिकों को अधिक से अधिक सुरक्षा देता है। यह बेरोजगारों को रोजगार, निर्बलों और कमजोरों को सहायता, तथा बीमारी और वृद्धावस्था में आवश्यक सुरक्षा देता है।
(3) आर्थिक न्याय प्रदान करना: कल्याणकारी राज्य आर्थिक न्याय के सिद्धांत पर काम करता है। यह धनी वर्ग पर अधिक कर लगाकर समाज में मौजूद सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने की कोशिश करता है।
(4) सामाजिक न्याय की स्थापना करना: लोक कल्याणकारी राज्य समाज में मौजूद सामाजिक बुराइयों, कुरीतियों, अंधविश्वासों को दूर करता है और समाज के पिछड़े व दलित वर्ग को मुख्यधारा में लाने की कोशिश करता है।
(5) व्यक्तिवाद तथा समाजवाद का मध्य मार्ग: लोक कल्याणकारी राज्य व्यक्तिवाद और समाजवाद के बीच संतुलन बनाता है। इस तरह के राज्य में राज्य के कार्यों में वृद्धि होती है, लेकिन व्यक्ति के महत्व को भी स्वीकार किया जाता है और उसकी स्वतंत्रता बनी रहती है।
(6) अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना: कल्याणकारी राज्य का विचार केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय भी है। राष्ट्रीय लोककल्याण के साधनों को स्थायी बनाने के लिए यह ज़रूरी है कि किसी एक राज्य के हितों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय हितों का भी ध्यान रखा जाए।
लोक कल्याणकारी राज्य की सफलता हेतु आवश्यक शर्ते:
लोक कल्याणकारी राज्य की सफलता के लिए इसे कुछ ज़रूरी कार्यों को पूरा करना होता है:
(1) अनिवार्य कार्य: लोक कल्याणकारी राज्य की सफलता के लिए पहली शर्त यह है कि वह निम्नलिखित अनिवार्य कार्यों को पूरा करे:
• अंदरूनी शांति और व्यवस्था बनाए रखना
• देश की सीमाओं की रक्षा करना
• न्याय का सही प्रबंधन और व्यवस्था करना
(2) ऐच्छिक कार्य: लोक कल्याणकारी राज्य की सफलता के लिए यह ज़रूरी है कि वह नागरिकों की भलाई से जुड़े निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करे:
(iii) श्रम का नियमन: कल्याणकारी राज्य को श्रमिकों की हालत सुधारने के लिए कोशिश करनी चाहिए। उसे उचित वेतन, पेंशन, स्वास्थ्य, बीमा, शिक्षा और असहाय स्थिति में मजदूरों की मदद का प्रबंध करना चाहिए।
(iv) शिक्षा की व्यवस्था करना: लोक कल्याणकारी राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों की शिक्षा का प्रबंध करे। इस दृष्टि से उसे प्राथमिक शिक्षा, महिला शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। राज्य को वाचनालयों और पुस्तकालयों की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
(v) असहाय एवं पीड़ितों की सहायता: कल्याणकारी राज्य को असहाय और पीड़ित व्यक्तियों के लिए घर, वृद्धावस्था पेंशन, मुफ्त इलाज और रैनबसेरों आदि की व्यवस्था करनी चाहिए।
(vi) स्वास्थ्य रक्षा: राज्य को स्वच्छता और बीमारियों की रोकथाम के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए। लोगों के स्वास्थ्य के लिए अस्पताल और चिकित्सा अनुसंधान केंद्र खोलने चाहिए। श्रमिकों, स्त्रियों, बच्चों आदि के लिए चिकित्सीय सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए।
(vii) नैतिक उन्नति के साधनों का विकास: राज्य को भौतिक उन्नति के साथ-साथ नैतिक उन्नति के लिए भी व्यवस्थाएँ करनी चाहिए। इसके लिए व्याख्यान, रेडियो, टेलीविजन और पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लिया जा सकता है।
(viii) परिवार नियोजन संबंधी कार्य: राज्य को जनसंख्या सीमित करने के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम को आम जनता तक पहुंचाना सुनिश्चित करना चाहिए।
(ix) आर्थिक सुरक्षा: राज्य को सभी व्यक्तियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए और अगर कोई काम नहीं कर पाता, तो उसे जीवन निर्वाह भत्ता देना चाहिए।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य सभी को सुरक्षा देता है, आर्थिक और सामाजिक न्याय दिलाता है, और व्यक्तिवाद व समाजवाद के बीच संतुलन बनाता है। सफल होने के लिए इसे सुरक्षा, न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सुधार जैसे ज़रूरी और ऐच्छिक काम करने पड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की विशेषताओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें और सफलता की शर्तों को स्पष्ट रूप से समझाएँ ताकि एक समग्र उत्तर बन सके।

 

Question 3. राज्य के गाँधीवादी स्वरूप पर एक लेख लिखिए।
Answer: राज्य के संबंध में गाँधीजी के मुख्य विचार निम्नलिखित हैं:
(1) राज्य संगठित हिंसा का प्रतीक है: गाँधीजी राज्य की आलोचना करते थे। उनके अनुसार, राज्य संगठित हिंसा का प्रतीक है। यह एक दमनकारी शक्ति है जो व्यक्ति के आचरण को नियंत्रित करके उसकी आत्मा को जबरदस्ती नष्ट करती है। गाँधीजी के अनुसार, राज्य एक अनावश्यक बुराई है।
(3) त्रि-स्तरीय व्यवस्था: गाँधीजी ने अंतिम लक्ष्य के रूप में 'राज्यविहीन समाज' की कल्पना की, लेकिन यह भी माना कि राज्यविहीन समाज की स्थापना बहुत मुश्किल है। इसलिए उन्होंने 'विकेन्द्रित ग्राम स्वराज्य' और 'अहिंसक लोकतंत्र' को राजनीतिक व्यवस्था के उप-आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया।
इसकी स्थापना के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम की आवश्यकता थी। अतः तात्कालिक सुधारवादी आदर्श के रूप में एक 'अहिंसक लोकतंत्र' की कल्पना की गई। इस प्रकार गाँधीजी के आदर्श राजनीतिक व्यवस्था के तीन प्रतिमान हैं:
(i) आदर्श राजनीतिक व्यवस्था: राज्यविहीन समाज – गाँधीजी ने इसे 'रामराज्य' भी कहा, लेकिन यह स्पष्ट किया कि 'रामराज्य' 'हिंदू राज्य' का पर्यायवाची नहीं है। यह एक पवित्र व्यवस्था की ओर संकेत करता है जहाँ व्यक्ति की अंतरात्मा पर कोई बाहरी नियंत्रण नहीं होता। गाँधीजी ने इस व्यवस्था को 'प्रबुद्ध अराजकता' का नाम दिया।
(ii) उप-आदर्श: विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य – गाँधीजी ने राजनीतिक शक्ति के केंद्रीकरण को हिंसा कहा। उन्होंने कहा कि एक विकेन्द्रीकृत राजनीतिक प्रणाली ही अहिंसा के आदर्श के अनुरूप हो सकती है। गाँधीजी ने ग्राम को राजनीतिक इकाई बनाने पर ज़ोर दिया।
(iii) अहिंसक लोकतंत्र की धारणा: तात्कालिक सुधारवादी प्रतिमान – गाँधीजी के अहिंसक लोकतंत्र की धारणा ऐसी स्थिति पर जोर देती है जहाँ राज्य के मौजूदा ढांचे को बनाए रखते हुए उसके स्वरूप और उद्देश्यों में क्रांतिकारी बदलाव किए जाएं।
अहिंसक लोकतंत्र में विकेंद्रीकरण, सत्य और अहिंसा शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि गाँधीजी ने रामराज्य और विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य की तत्काल प्राप्ति संभव न होने के कारण तात्कालिक सुधार के रूप में अहिंसक लोकतंत्र का प्रतिमान रखा।
In simple words: गाँधीजी राज्य को हिंसा का प्रतीक मानते थे और उसे अनावश्यक बुराई कहते थे। वे चाहते थे कि समाज में कोई राज्य न हो (रामराज्य), लेकिन अगर ज़रूरी हो तो गाँव-गाँव में खुद का राज (विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य) और बिना हिंसा वाला लोकतंत्र हो।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी के राज्य संबंधी विचारों को रामराज्य, विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य और अहिंसक लोकतंत्र के संदर्भ में समझाएँ।

 

Question 4. राज्य के अनिवार्य और आवश्यक (ऐच्छिक) कार्यों में क्या भेद हैं?
Answer: राज्य के अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों में अंतर एक तालिका में दिया गया है:

अनिवार्य कार्यआवश्यक (ऐच्छिक) कार्य
इन कार्यों को न करने से राज्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।ये कल्याणकारी कार्य होते हैं। सामाजिक कल्याण की भावना से ये कार्य बढ़ते रहते हैं।
2. राज्य के अनिवार्य कार्य हैं:2. राज्य के ऐच्छिक कार्य हैं:
(i) बाहरी हमलों से देश की रक्षा करना।(i) सामान्य जनता की शिक्षा की व्यवस्था करना।
(ii) अंदरूनी शांति और व्यवस्था स्थापित करना।(ii) सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य की व्यवस्था करना।
(iii) राजस्व इकट्ठा करना।(iii) व्यापार और उद्योगों पर उचित नियंत्रण रखना।
(iv) राज्य द्वारा अपराध और दंड संबंधी नियम बनाना।(iv) सार्वजनिक महत्व के उद्योगों का संचालन करना।
(v) न्याय का सही प्रबंधन और व्यवस्था करना।(v) राज्य के नागरिकों के मनोरंजन के लिए पार्क, आकाशवाणी, सिनेमा और वाचनालय जैसी सुविधाएं देना।
(vi) कानून बनाना, क्योंकि कानूनों से ही राज्य अपनी संप्रभुता को सही रूप देता है।(vi) सामाजिक कुरीतियों को खत्म करके लोगों को सर्वांगीण विकास के अवसर देना।
(vii) अन्य राज्यों के साथ संबंध स्थापित करना।(vii) आम जनता के परिवहन के लिए साधन और अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ करना।

In simple words: अनिवार्य कार्य वे होते हैं जो राज्य के जीवित रहने के लिए ज़रूरी हैं, जैसे सुरक्षा। ऐच्छिक कार्य वे होते हैं जो लोगों की भलाई के लिए किए जाते हैं, जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य।

🎯 Exam Tip: अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत कम से कम तीन-चार उदाहरण दें।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. 'राज्य एक आवश्यक बुराई है' यह कथन किस विचारधारा से सम्बन्धित है ?
(अ) व्यक्तिवाद
(ब) पूँजीवाद
Answer: (अ) व्यक्तिवाद
In simple words: यह विचार कि राज्य एक ज़रूरी बुराई है, व्यक्तिवाद की सोच से आता है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी और व्यक्तिवादी विचारधाराएँ राज्य के हस्तक्षेप को कम से कम करने का समर्थन करती हैं, क्योंकि वे व्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वोच्च मानती हैं।

 

Question 2. गाँधी ने आदर्श राज्य व्यवस्था को नाम दिया है
(अ) विकेन्द्रित ग्राम स्वराज्य
(ब) अहिंसक लोकतन्त्र
(स) रामराज्य
(६) लोकतन्त्र
Answer: (स) रामराज्य
In simple words: गाँधीजी ने अपने सपनों के आदर्श राज्य को रामराज्य कहा था।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी का रामराज्य एक राज्यविहीन समाज की कल्पना थी, जहाँ व्यक्ति नैतिक रूप से इतने विकसित हों कि किसी बाहरी नियंत्रण की आवश्यकता न पड़े।

 

Question 3. निम्नांकित में से कौन-सी राज्य की सीमा नहीं है?
(अ) नैतिकता
(ब) परम्परा
(स) रीति-रिवाज
(द) औचित्यपूर्णता
Answer: (द) औचित्यपूर्णता
In simple words: औचित्यपूर्णता राज्य की सीमा नहीं, बल्कि राज्य के अस्तित्व का आधार है।

🎯 Exam Tip: राज्य की सीमाएँ वे कारक हैं जो राज्य की शक्ति को नियंत्रित करते हैं, जैसे लोकमत, धर्म और नैतिकता। औचित्यपूर्णता राज्य की वैधता को दर्शाती है।

 

Question 4. निम्न में से कौन-सा उद्देश्य लोक कल्याणकारी राज्य का नहीं है?
(अ) आर्थिक सुरक्षा
(ब) सामाजिक सुरक्षा
(स) राजनीतिक न्याय
(द) जनमत का उल्लंघन
Answer: (द) जनमत का उल्लंघन
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य कभी भी लोगों की राय के खिलाफ नहीं जाता।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य का उद्देश्य आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और राजनीतिक न्याय प्रदान करना है, न कि जनमत का उल्लंघन करना।

 

Question 5. निम्न में से कौन-सा लक्षण कल्याणकारी राज्य से सम्बन्धित नहीं है?
(अ) लोकतन्त्रीय शासन
(ब) सामाजिक न्याय
(स) सामाजिक सुरक्षा
Answer: (स) सामाजिक सुरक्षा
In simple words: सामाजिक सुरक्षा लोक कल्याणकारी राज्य का एक मुख्य हिस्सा है, इसलिए यह प्रश्न सही नहीं है अगर (स) को 'संबंधित नहीं है' के रूप में उत्तर दिया गया है।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य में लोकतांत्रिक शासन, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा सभी महत्वपूर्ण लक्षण हैं।

 

Question 6. निम्न में से कौन-सा राज्य का अनिवार्य कार्य है?
(अ) विदेशी आक्रमणों से रक्षा।
(ब) स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना
(स) शिक्षा का विस्तार
(द) कृषि की उन्नति
Answer: (अ) विदेशी आक्रमणों से रक्षा।
In simple words: दूसरे देशों के हमलों से देश की रक्षा करना राज्य का एक सबसे ज़रूरी काम है।

🎯 Exam Tip: अनिवार्य कार्य वे होते हैं जिनके बिना राज्य का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है, जैसे बाहरी आक्रमणों से रक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना।

 

Question 7. निम्न में से कौन - सा राज्य का ऐच्छिक कार्य है?
(अ) शान्ति व्यवस्था बनाए रखना
(ब) विदेशी आक्रमणों से रक्षा
(स) न्याय प्रबन्ध करना
(द) बैंकिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराना
Answer: (द) बैंकिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराना
In simple words: बैंकिंग की सुविधाएँ देना राज्य का एक ऐसा काम है जो वह लोगों की भलाई के लिए करता है, यह कोई ज़रूरी काम नहीं है।

🎯 Exam Tip: ऐच्छिक कार्य वे होते हैं जो राज्य अपनी जनता के कल्याण और विकास के लिए करता है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन की सुविधाएँ।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. एडम स्मिथ के अनुसार राज्य का उद्देश्य है
(अ) विदेशी आक्रमणों अथवा आन्तरिक हिंसा से बचाव
(ब) व्यक्ति की अन्याय एवं दूसरे सदस्यों के अत्याचारों से रक्षा
(स) जन संस्थाओं का निर्माण करना
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: एडम स्मिथ के अनुसार, राज्य का उद्देश्य बाहरी हमलों और अंदरूनी हिंसा से बचाव, लोगों को अन्याय से बचाना और संस्थाएँ बनाना - ये सब हैं।

🎯 Exam Tip: एडम स्मिथ अहस्तक्षेपवादी विचारधारा के प्रमुख विचारक थे, जो राज्य के सीमित कार्यों का समर्थन करते थे, मुख्य रूप से सुरक्षा और न्याय तक।

 

Question 2. निम्न में से राज्य को साध्य मानने वाले विचारक हैं
(अ) प्लेटो
(ब) अरस्तू
(स) हीगल
Answer: (अ) प्लेटो
In simple words: प्लेटो उन विचारकों में से थे जो राज्य को अंतिम लक्ष्य मानते थे।

🎯 Exam Tip: 'राज्य को साध्य मानना' का अर्थ है कि राज्य अपने आप में महत्वपूर्ण है और व्यक्तियों का अस्तित्व राज्य के कल्याण के लिए है। प्लेटो, अरस्तू और हीगल इस श्रेणी में आते हैं।

 

Question 4. यह कथन किसका है- "राज्य का उद्भव जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हुआ है तथा वह अच्छे जीवन के लिए विद्यमान है।"
(अ) हर्बर्ट स्पेंसर का
(ब) ब्लंटशाली का
(स) हीगल का
(द) अरस्तू का
Answer: (द) अरस्तू का
In simple words: यह बात अरस्तू ने कही थी कि राज्य इसलिए बना है ताकि लोग अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें और एक अच्छा जीवन जी सकें।

🎯 Exam Tip: अरस्तू का यह कथन राज्य के उद्देश्य को स्पष्ट करता है कि राज्य केवल अस्तित्व के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों के कल्याण और नैतिक विकास के लिए भी है।

 

Question 5. "राज्य व्यक्तियों की यथार्थ इच्छा का प्रतीक है।” इस कथन का सम्बन्ध है
(अ) आदर्शवादियों से
(ब) अराजकतावादियों से
(स) व्यक्तिवादियों से
(द) हस्तक्षेपवादियों से।
Answer: (अ) आदर्शवादियों से
In simple words: यह विचार कि राज्य लोगों की सच्ची इच्छा को दिखाता है, आदर्शवादी सोच से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: आदर्शवादी विचारक मानते हैं कि राज्य व्यक्तियों की नैतिक और वास्तविक इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है, जो समाज के सर्वोच्च भले के लिए कार्य करता है।

 

Question 6. "सब कुछ राज्य के लिए, राज्य के विरुद्ध कुछ नहीं।” यह मानते हैं
(अ) व्यक्तिवादी
(ब) बहुलवादी
(स) फासीवादी
Answer: (स) फासीवादी
In simple words: फासीवादी लोग मानते हैं कि सब कुछ राज्य के लिए है और कोई भी राज्य के खिलाफ नहीं जा सकता।

🎯 Exam Tip: फासीवाद एक सर्वाधिकारवादी विचारधारा है जो राज्य को सर्वोच्च मानती है और व्यक्ति के हितों को राज्य के हितों के अधीन कर देती है।

 

Question 8. “राज्य एक आवश्यक बुराई है।” इस कथन का सम्बन्ध है
(अ) लोकतन्त्रवादी राज्य की अवधारणा से
(ब) गाँधीवाद से
(स) अहस्तक्षेपवादी सिद्धान्त से
(द) उपर्युक्त सभी से
Answer: (स) अहस्तक्षेपवादी सिद्धान्त से
In simple words: यह कथन उस विचार से जुड़ा है जो कहता है कि राज्य ज़रूरी तो है, पर अपनी गतिविधियों से व्यक्तियों की आज़ादी को कम करता है, इसलिए यह एक बुरी चीज़ है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी सिद्धान्त के मूल विचार को पहचानें, जो राज्य के न्यूनतम हस्तक्षेप और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर देता है।

 

Question 9. 'वह सरकार श्रेष्ठ है, जो न्यूनतम शासन करती है'। राज्य के कार्यक्षेत्र के सम्बन्ध में जिस विचारधारा ने इस मत का प्रतिपादन किया है, वह है
(ब) लोक कल्याणकारी विचारधारा
(स) अहस्तक्षेपवादी विचारधारा
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) अहस्तक्षेपवादी विचारधारा
In simple words: यह विचार अहस्तक्षेपवादी सोच से आता है, जो मानता है कि सरकार जितनी कम दखल देगी, लोगों का जीवन उतना ही बेहतर होगा।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप अहस्तक्षेपवादी विचारधारा के मुख्य सिद्धांतों को समझते हैं, विशेष रूप से सरकार की भूमिका के संबंध में।

 

Question 10. व्यक्ति को अधिकतम स्वतन्त्रता देने का पक्षधर सिद्धान्त है
(अ) गाँधीवाद
(ब) लोक कल्याणकारी सिद्धान्त
(स) अहस्तक्षेपवाद
(द) साम्यवाद
Answer: (स) अहस्तक्षेपवाद
In simple words: अहस्तक्षेपवाद वह सिद्धांत है जो व्यक्ति की आज़ादी को सबसे ऊपर रखता है और चाहता है कि लोग अपनी मर्ज़ी से काम कर सकें, बिना किसी सरकारी रोक-टोक के।

🎯 Exam Tip: विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं और उनके मुख्य मूल्यों, जैसे स्वतंत्रता पर अहस्तक्षेपवाद के जोर, को याद रखें।

 

Question 12. सर्वप्रथम किस राज्य ने मजदूरों के हितों के लिए कानून बनाए-
(अ) जर्मनी
(ब) इंग्लैण्ड
(स) भारत
(द) फ्रांस
Answer: (ब) इंग्लैण्ड
In simple words: इंग्लैंड पहला देश था जिसने मजदूरों के फायदे के लिए नियम बनाए, ताकि उन्हें बेहतर काम की स्थिति मिल सके।

🎯 Exam Tip: औद्योगिक क्रांति के संदर्भ में शुरुआती मजदूर कानूनों और उनके प्रभावों को जानें।

 

Question 13. निम्न में से किस वर्ष कार्ल मार्क्स और ऐंजिल ने साम्यवादी घोषणा पत्र ' प्रकाशित किया
(अ) वर्ष 1856
(ब) वर्ष 1947
(स) वर्ष 1948
(द) वर्ष 1917
Answer: (स) वर्ष 1948
In simple words: कार्ल मार्क्स और ऐंजिल ने अपना प्रसिद्ध 'साम्यवादी घोषणा पत्र' 1948 में जारी किया था।

🎯 Exam Tip: साम्यवादी घोषणा पत्र के प्रकाशन वर्ष और इसके प्रमुख विचारों को याद रखें क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है।

 

Question 14. कल्याणकारी राज्य का लक्षण है-
(अ) लोकतन्त्रीय शासन
(ब) आर्थिक न्याय को सुनिश्चित करना
(स) सामाजिक सुरक्षा
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: कल्याणकारी राज्य में लोगों के लिए लोकतांत्रिक सरकार, आर्थिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा सब कुछ शामिल होता है।

🎯 Exam Tip: कल्याणकारी राज्य की सभी प्रमुख विशेषताओं को समझें, जिनमें लोकतंत्र, आर्थिक समानता और सामाजिक कल्याण शामिल हैं।

 

Question 15. लोककल्याणकारी राज्य के नागरिकों का कर्तव्य नहीं है
(अ) विदेशी आक्रमणों से रक्षा।
(ब) स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना
(स) शिक्षा का विस्तार
(द) कृषि की उन्नति
Answer: (अ) विदेशी आक्रमणों से रक्षा
In simple words: अपने देश को बाहरी हमलों से बचाना राज्य का काम है, नागरिकों का नहीं, जबकि बाकी विकल्प कल्याणकारी राज्य के कार्य हैं।

🎯 Exam Tip: राज्य के अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें ताकि आप नागरिक कर्तव्यों से संबंधित प्रश्नों का सही उत्तर दे सकें।

 

Question 16. आधुनिक राज्य की दमनकारी शक्ति संरचना के घोर विरोधी थे\
(अ) महात्मा गाँधी
(ब) गार्नर
(स) हीगल
(द) हर्बर्ट स्पेंसर
Answer: (अ) महात्मा गाँधी
In simple words: महात्मा गाँधी आधुनिक राज्य की उस शक्ति के खिलाफ थे जो लोगों को दबाती है।

🎯 Exam Tip: महात्मा गाँधी के राज्य संबंधी विचारों और उनके राज्यविहीन समाज की कल्पना को ध्यान में रखें।

 

Question 17. निम्न में से किस राजनीतिक विचारक ने 'अहिंसक लोकतन्त्र' की कल्पना की
(अ) जवाहरलाल नेहरू
(ब) लेनिन
(स) महात्मा गाँधी
(द) कार्ल मार्क्स
Answer: (स) महात्मा गाँधी
In simple words: महात्मा गाँधी ने एक ऐसे लोकतन्त्र की कल्पना की थी जहाँ किसी भी तरह की हिंसा न हो।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी के राजनीतिक दर्शन के प्रमुख तत्वों, जैसे अहिंसा और विकेंद्रीकरण, को याद रखें।

 

Question 18. राज्यहीन समाज को गाँधीजी ने नाम दिया.
(अ) रामराज्य
(ब) उदारवादी राज्य
(स) लोकतन्त्र
(द) मार्क्सवाद।
Answer: (अ) रामराज्य
In simple words: गाँधीजी ने एक ऐसे समाज की कल्पना की जहाँ राज्य की ज़रूरत ही न हो, और उसे उन्होंने 'रामराज्य' कहा।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी की 'रामराज्य' की अवधारणा का अर्थ और उसके मूल सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 19. निम्न में से भारत के किस स्वतन्त्रता सेनानी ने राजनीतिक शक्ति के केन्द्रीकरण को हिंसा की संज्ञा दी
(अ) बाल गंगाधर तिलक
(ब) महात्मा गाँधी
(स) जवाहरलाल नेहरू
(द) सरदार वल्लभभाई पटेल
Answer: (ब) महात्मा गाँधी
In simple words: महात्मा गाँधी ने कहा था कि जब सारी राजनीतिक ताकत एक जगह जमा हो जाती है, तो वह हिंसा बन जाती है।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी के विकेंद्रीकरण के विचारों और उनके तर्क को समझें कि कैसे केंद्रीकरण हिंसा को बढ़ावा देता है।

 

Question 20. राज्य की सीमा है
(अ) लोकमत
(ब) धर्म
(स) नैतिकता
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (ब) धर्म
In simple words: धर्म राज्य की एक सीमा है, जिसका अर्थ है कि राज्य को धार्मिक मामलों में बहुत ज़्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: राज्य की सीमाओं को पहचानें और समझें कि ये कैसे राज्य के कार्यक्षेत्र को नियंत्रित करती हैं।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अरस्तु के अनुसार राज्य को परिभाषित कीजिए।
Answer: अरस्तु के अनुसार, "राज्य परिवारों और गाँवों का एक समुदाय है।" इसका मुख्य लक्ष्य एक पूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन स्थापित करना है, जिसका मतलब सुखी और सम्मानित जीवन जीना है।
In simple words: अरस्तु ने राज्य को परिवारों और गाँवों का मिला-जुला रूप बताया, जिसका मकसद लोगों को खुशहाल और आत्मनिर्भर जीवन देना था।

🎯 Exam Tip: अरस्तु की राज्य की परिभाषा को सटीक रूप से याद करें और इसके मूल अर्थ को समझें।

 

Question 2. एडम स्मिथ के अनुसार राज्य के तीन उद्देश्य कौन से हैं?
Answer: एडम स्मिथ के अनुसार राज्य के तीन मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. बाहरी हमलों या अंदरूनी हिंसा से देश को बचाना।
2. व्यक्ति को अन्याय और दूसरे सदस्यों के अत्याचारों से सुरक्षित रखना।
3. विभिन्न संस्थाओं को बनाना और उन्हें सही तरीके से चलाना।
In simple words: एडम स्मिथ ने कहा कि राज्य के तीन काम हैं: देश को बचाना, लोगों को न्याय दिलाना और संस्थाएँ बनाना।

🎯 Exam Tip: एडम स्मिथ के राज्य के उद्देश्यों को याद रखें, विशेषकर उनके आर्थिक दर्शन के संदर्भ में।

 

Question 3. गिर्डिस के अनुसार राज्य का उद्देश्य बताइए।
Answer: गिर्डिस के अनुसार, राज्य का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है जहाँ सभी नागरिक सर्वोच्च और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
In simple words: गिर्डिस के अनुसार, राज्य का काम ऐसा माहौल बनाना है जहाँ सभी लोग पूरी तरह से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर महसूस करें।

🎯 Exam Tip: गिर्डिस के राज्य संबंधी विचारों को याद रखें, जो नागरिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हैं।

 

Question 4. गार्नर के अनुसार राज्य का उद्देश्य क्या है?
Answer: गार्नर के अनुसार, राज्य का उद्देश्य व्यक्ति के हितों की पूर्ति करना, राष्ट्र के हितों की सेवा करना और मानव सभ्यता को विकसित करना है।
In simple words: गार्नर ने बताया कि राज्य का मकसद लोगों और राष्ट्र दोनों का भला करना है, साथ ही सभ्यता को आगे बढ़ाना भी है।

🎯 Exam Tip: गार्नर की राज्य की परिभाषा और उसके उद्देश्यों को सटीक रूप से याद करें, जो व्यक्ति और राष्ट्र दोनों के विकास पर केंद्रित है।

 

Question 6. राज्य के सन्दर्भ में व्यक्तिवादी विचारकों का क्या मत है?
Answer: व्यक्तिवादी विचारक राज्य के अस्तित्व को तो स्वीकार करते हैं, लेकिन वे राज्य को साधन नहीं मानते। वे मानते हैं कि राज्य का मुख्य काम व्यक्ति के हितों की रक्षा करना है, न कि व्यक्ति का राज्य की सेवा करना।
In simple words: व्यक्तिवादी लोग राज्य को मानते हैं, पर कहते हैं कि राज्य सिर्फ लोगों की मदद का साधन है, खुद में कोई बड़ा लक्ष्य नहीं।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिवादी दर्शन और राज्य की भूमिका के बारे में उनकी समझ को स्पष्ट करें, खासकर 'राज्य एक साधन है' के विचार पर।

 

Question 7. राज्य को आवश्यक बुराई मानने वाले किन्हीं दो विचारकों के नाम लिखिए।
Answer: राज्य को आवश्यक बुराई मानने वाले दो विचारक हैं:
1. जे. एस. मिल
2. हर्बर्ट स्पेंसर
In simple words: जे. एस. मिल और हर्बर्ट स्पेंसर दो ऐसे विचारक हैं जो राज्य को एक ज़रूरी बुराई मानते हैं।

🎯 Exam Tip: उन विचारकों के नाम याद रखें जिन्होंने राज्य को 'आवश्यक बुराई' माना है और उनके तर्कों को संक्षेप में समझें।

 

Question 8. व्यक्ति का कल्याण राज्य की सत्ता की समाप्ति में निहित है। ये किस विचारधारा का प्रतीक है?
Answer: यह अराजकतावादी विचारधारा का प्रतीक है।
In simple words: यह विचार अराजकतावाद से जुड़ा है, जो मानता है कि राज्य के खत्म होने से ही व्यक्ति का असली भला होगा।

🎯 Exam Tip: अराजकतावादी विचारधारा के मूल सिद्धांत को जानें, जो राज्य के अस्तित्व का खंडन करता है।

 

Question 9. “राज्य अनावश्यक, अवांछनीय एवं अस्वाभाविक संस्था है।” यह कथन किस राजनीतिक विचारधारा से सम्बन्ध रखता है?
Answer: यह कथन अराजकतावादी विचारधारा से सम्बन्ध रखता है।
In simple words: यह विचार अराजकतावादी सोच का हिस्सा है, जो राज्य को बेवजह, बुरा और स्वाभाविक नहीं मानता।

🎯 Exam Tip: अराजकतावाद की राज्य संबंधी नकारात्मक धारणा को पहचानें और उसे अन्य विचारधाराओं से अलग करें।

 

Question 10. यह किस विद्वान का कथन है कि "राज्य एक साधन भी है और साध्य भी।”
Answer: यह ब्लंटशली का कथन है।
In simple words: यह बात ब्लंटशली ने कही थी कि राज्य एक तरीका भी है और खुद में एक लक्ष्य भी है।

🎯 Exam Tip: ब्लंटशली के इस विशिष्ट कथन को याद रखें, जो राज्य की दोहरी भूमिका को दर्शाता है।

 

Question 11. आधुनिक राज्य के कोई दो अनिवार्य कार्य बताइए
Answer: आधुनिक राज्य के कोई दो अनिवार्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. शिक्षा की व्यवस्था करना।
2. सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य की व्यवस्था करना।
In simple words: आधुनिक राज्य के दो ज़रूरी काम हैं- सबको शिक्षा देना और साफ-सफाई व स्वास्थ्य का ध्यान रखना।

🎯 Exam Tip: आधुनिक राज्य के अनिवार्य कार्यों की सूची में से दो महत्वपूर्ण कार्यों को याद रखें और उन्हें संक्षेप में वर्णित करें।

 

Question 13. अहस्तक्षेपवादी विचारधारा का क्या उद्देश्य है?
Answer: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा का मुख्य उद्देश्य राज्य के कार्यक्षेत्र को सीमित करना है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता को महत्व देती है।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी विचार चाहता है कि राज्य कम से कम काम करे और व्यक्तियों को ज़्यादा आज़ादी दे।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा के केंद्रीय उद्देश्य को पहचानें, जो राज्य के हस्तक्षेप को कम करना है।

 

Question 14. अहस्तक्षेपवाद का क्या अर्थ है?
Answer: अहस्तक्षेपवाद का अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार काम करने दिया जाए क्योंकि वह अपने व्यक्तिगत हितों का सबसे अच्छा संरक्षक है। यह व्यक्तियों की प्रधानता को स्वीकार करता है और उन्हें अधिकतम स्वतंत्रता देने का समर्थन करता है।
In simple words: अहस्तक्षेपवाद का मतलब है कि लोगों को अपनी मर्ज़ी से काम करने देना चाहिए, क्योंकि वे खुद का भला सबसे अच्छे से समझते हैं।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवाद की परिभाषा और उसके मूल सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझें, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सीमित राज्य की भूमिका शामिल है।

 

Question 15. 'लैसेफेयर' सिद्धान्त का मूलमन्त्र क्या है?
Answer: 'लैसेफेयर' सिद्धान्त का मूलमन्त्र है कि "व्यक्ति राज्य के लिए नहीं है अपितु राज्य व्यक्ति के लिए है।"
In simple words: 'लैसेफेयर' का मुख्य विचार है कि राज्य व्यक्तियों की सेवा के लिए है, न कि व्यक्ति राज्य की सेवा के लिए।

🎯 Exam Tip: 'लैसेफेयर' के मूल मंत्र को याद रखें, जो व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण और राज्य की सेवा भूमिका पर जोर देता है।

 

Question 16. अहस्तक्षेपवाद के प्रवर्तक कौन हैं?
Answer: अहस्तक्षेपवाद के प्रवर्तक हैं:
1. बेन्थम
2. जेम्स मिल
In simple words: बेन्थम और जेम्स मिल ने अहस्तक्षेपवाद के विचार को शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवाद के प्रमुख प्रतिपादकों के नाम याद रखें और उनके योगदान को समझें।

 

Question 17. व्यक्तिवाद का प्रारम्भिक उद्देश्य क्या था?
Answer: व्यक्तिवाद का प्रारम्भिक उद्देश्य राज्य का आर्थिक जीवन में हस्तक्षेप का विरोध करना था।
In simple words: व्यक्तिवाद का पहला मकसद था कि राज्य लोगों के व्यापार और पैसे के मामलों में दखल न दे।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिवाद के शुरुआती उद्देश्यों को जानें, खासकर आर्थिक स्वतंत्रता और राज्य के सीमित हस्तक्षेप के संदर्भ में।

 

Question 18. रा संस्थापक कौन हैं?
Answer: रा
In simple words: यह प्रश्न अधूरा है और जानकारी भी अधूरी है।

🎯 Exam Tip: हमेशा सुनिश्चित करें कि आप प्रश्न को पूरा पढ़ें और तभी उत्तर दें। अधूरे प्रश्नों से बचें।

 

Question 19. व्यक्तिवाद के सन्दर्भ में जेम्स मिल का सिद्धान्त क्या है?
Answer: जेम्स मिल का सिद्धांत है कि यदि राज्य व्यक्तियों के मामलों में कम से कम हस्तक्षेप करे, तो व्यक्ति को अधिकतम सुख मिल सकता है।
In simple words: जेम्स मिल का मानना था कि राज्य जितना कम लोगों के कामों में दखल देगा, लोग उतने ही खुश रहेंगे।

🎯 Exam Tip: जेम्स मिल के व्यक्तिवादी सिद्धांत को समझें और इसे राज्य के हस्तक्षेप के संबंध में कैसे लागू किया जाता है।

 

Question 20. अहस्तक्षेपवादी राज्य के कोई दो मूल सिद्धान्त लिखिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य के दो मूल सिद्धान्त निम्नलिखित हैं:
1. राज्य एक आवश्यक बुराई है।
2. व्यक्ति की पूर्ण स्वतन्त्रता।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी राज्य के दो मुख्य नियम हैं- राज्य को एक बुरी लेकिन ज़रूरी चीज़ मानना और व्यक्तियों को पूरी आज़ादी देना।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी राज्य के मूल सिद्धांतों को याद रखें, जो राज्य के सीमित कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर देते हैं।

 

Question 21. न्यूनतम शासन और अधिकाधिक स्वतन्त्रता किस विचारधारा का प्रतीक है?
Answer: यह अहस्तक्षेपवादी विचारधारा का प्रतीक है।
In simple words: कम सरकार और ज़्यादा आज़ादी का विचार अहस्तक्षेपवादी विचारधारा से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा के केंद्रीय विचारों, जैसे कम शासन और अधिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता, को पहचानें।

 

Question 22. अहस्तक्षेपवादी राज्य को एक आवश्यक बुराई क्यों मानते हैं?
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य को एक आवश्यक बुराई इसलिए मानते हैं क्योंकि राज्य द्वारा व्यक्तियों की स्वतंत्रताओं में हस्तक्षेप करने से उनका चौतरफा विकास रुक जाता है।
In simple words: राज्य को ज़रूरी बुराई इसलिए कहते हैं क्योंकि यह व्यक्ति की आज़ादी में दखल देकर उसके पूरे विकास को रोक देता है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा में राज्य को 'आवश्यक बुराई' मानने के पीछे के तर्क को समझें, विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में।

 

Question 23. "वही सरकार सबसे अच्छी है, जो कम-से-कम शासन करती है।” यह किस राजनीतिक विचारक का कथन है?
Answer: यह फ्रीमैन का कथन है।
In simple words: फ्रीमैन ने कहा था कि सबसे अच्छी सरकार वही है जो बहुत कम शासन करती है।

🎯 Exam Tip: फ्रीमैन के इस प्रसिद्ध कथन को याद रखें, जो अहस्तक्षेपवादी विचारों को दर्शाता है।

 

Question 24. अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थन में आर्थिक तर्क देने वाले किन्हीं दो विद्वानों के नाम बताइए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थन में आर्थिक तर्क देने वाले विद्वान मानते हैं कि:
1. हर व्यक्ति अपने फायदे और नुकसान को अच्छे से समझता है।
2. आर्थिक विकास के लिए राज्य को आर्थिक क्षेत्र में रोक-टोक नहीं करनी चाहिए।
3. राज्य के दखल से लोगों का काम करने का उत्साह और प्रेरणा कम हो जाती है।
In simple words: अर्थशास्त्रियों ने कहा कि लोग अपने फैसले खुद बेहतर लेते हैं, और राज्य के दखल से व्यापार और उत्साह दोनों कम होते हैं।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवाद के आर्थिक तर्कों को समझें, जो व्यक्तिगत निर्णय और सीमित सरकारी हस्तक्षेप पर केंद्रित हैं।

 

Question 26. अहस्तक्षेपवादी व्यक्तिवाद के समर्थन में क्या नैतिक तर्क देते हैं?
Answer: अहस्तक्षेपवादी व्यक्तिवाद के समर्थन में नैतिक तर्क यह है कि हर व्यक्ति का अपना अलग व्यक्तित्व होता है। इसलिए राज्य का कर्तव्य है कि हर व्यक्ति को अपने तरीके से अपने व्यक्तित्व को विकसित करने दिया जाए।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी नैतिक रूप से मानते हैं कि हर व्यक्ति को अपनी आज़ादी मिलनी चाहिए ताकि वह अपने हिसाब से विकसित हो सके।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवाद के नैतिक तर्कों को समझें, जो व्यक्तिगत स्वायत्तता और आत्म-विकास पर केंद्रित हैं।

 

Question 27. अहस्तक्षेपवादी राज्य के विरोध में कोई तर्क दीजिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य के विरोध में एक तर्क यह है कि:
1. व्यक्ति हमेशा अपने हित का सबसे अच्छा फैसला नहीं ले पाता।
2. राज्य कल्याणकारी संस्था है।
In simple words: इसके विरोध में कहा जाता है कि लोग हमेशा अपने लिए सही फैसला नहीं ले पाते और राज्य को उनकी भलाई के लिए काम करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी राज्य की आलोचना के मुख्य बिंदुओं को याद रखें, जैसे व्यक्ति की सीमित निर्णय-क्षमता और राज्य की कल्याणकारी भूमिका।

 

Question 28. वर्तमान युग में कौन – कौन - सी धारणाएँ अहस्तक्षेपवादी राज्य का परिष्कृत स्वरूप हैं?
Answer: वर्तमान युग में अहस्तक्षेपवादी राज्य का परिष्कृत स्वरूप निम्नलिखित धारणाएँ हैं:
1. उदारीकरण
2. निजीकरण
3. वैश्वीकरण
In simple words: आज के समय में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण ही पुराने अहस्तक्षेपवादी राज्य के नए रूप हैं।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवाद के आधुनिक रूपों, जैसे उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण, को जानें और समझें।

 

Question 29. लोक कल्याणकारी राज्य की एक परिभाषा दीजिए।
Answer: डॉ. अब्राहम के अनुसार, "कल्याणकारी राज्य अपनी आर्थिक व्यवस्था का संचालन आय के अधिकाधिक समान वितरण के उद्देश्य से करता है।"
In simple words: डॉ. अब्राहम ने कहा कि कल्याणकारी राज्य वह है जो अपनी अर्थव्यवस्था को इस तरह चलाता है कि सभी को बराबर आय मिले।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की परिभाषा को सटीक रूप से याद करें और इसके मूल सिद्धांतों को समझें।

 

Question 31. लोक कल्याणकारी राज्य की धारणा किसका मिश्रण है?
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य की धारणा व्यक्तिवाद और समाजवाद का मिश्रण है।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य में व्यक्तियों की आज़ादी और समाज की भलाई, दोनों के विचार मिले-जुले होते हैं।

🎯 Exam Tip: कल्याणकारी राज्य के दो मुख्य वैचारिक आधारों-व्यक्तिवाद और समाजवाद-को याद रखें।

 

Question 32. लोक कल्याणकारी राज्य का एक उद्देश्य बताइए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य का एक उद्देश्य राज्य के कार्यक्षेत्र के विस्तार से व्यक्ति की स्वतंत्रताओं को सुनिश्चित करना है।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य का लक्ष्य है कि राज्य के काम बढ़ने के बावजूद व्यक्ति की आज़ादी बनी रहे।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य के विभिन्न उद्देश्यों में से किसी एक को याद रखें और उसे संक्षेप में समझाएं।

 

Question 33. लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विकास में किस देश का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है?
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विकास में इंग्लैण्ड का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
In simple words: इंग्लैण्ड ने लोक कल्याणकारी राज्य की सोच को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य के विकास में इंग्लैण्ड के योगदान के ऐतिहासिक महत्व को जानें।

 

Question 34. किन – किन विद्वानों के उपयोगितावादी चिन्तन में कल्याणकारी राज्य को दर्शन सम्मिलित है?
Answer: बेन्थम और जे. एस. मिल जैसे विद्वानों के उपयोगितावादी विचारों में कल्याणकारी राज्य का दर्शन शामिल है।
In simple words: बेन्थम और जे.एस. मिल जैसे विचारकों के 'ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला' वाले सिद्धांत में कल्याणकारी राज्य का विचार दिखता है।

🎯 Exam Tip: उपयोगितावादी विचारकों के नाम याद रखें और समझें कि उनके विचार कल्याणकारी राज्य के लिए कैसे आधार बने।

 

Question 35. कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विकास में कहाँ के फेबियन सामाजिक दार्शनिकों ने परोक्ष रूप से योगदान दिया?
Answer: कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विकास में इंग्लैण्ड के फेबियन सामाजिक दार्शनिकों ने परोक्ष रूप से योगदान दिया।
In simple words: इंग्लैण्ड के फेबियन विचारकों ने भी कल्याणकारी राज्य की सोच को आगे बढ़ाने में मदद की।

🎯 Exam Tip: फेबियन समाजवाद और इंग्लैण्ड में इसके उदय को जानें, जिसने कल्याणकारी राज्य के विकास में योगदान दिया।

 

Question 36. लोक कल्याणकारी राज्य के प्रमुख प्रतिपादक कौन हैं?
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के प्रमुख प्रतिपादक हेराल्ड लास्की हैं।
In simple words: हेराल्ड लास्की को लोक कल्याणकारी राज्य का एक मुख्य समर्थक माना जाता है।

🎯 Exam Tip: हेराल्ड लास्की को लोक कल्याणकारी राज्य के प्रमुख प्रतिपादक के रूप में याद रखें।

 

Question 38. गार्नर के अनुसार लोक कल्याणकारी राज्य का क्या उद्देश्य है?
Answer: गार्नर के अनुसार, लोक कल्याणकारी राज्य का उद्देश्य राष्ट्रीय जीवन, राष्ट्रीयता और जीवन के भौतिक व नैतिक तत्वों का विकास करना है।
In simple words: गार्नर ने कहा कि कल्याणकारी राज्य का मकसद देश और लोगों के भौतिक और नैतिक विकास को बढ़ावा देना है।

🎯 Exam Tip: गार्नर की लोक कल्याणकारी राज्य की परिभाषा और उसके व्यापक उद्देश्यों को याद रखें।

 

Question 39. कौन - सा राज्य ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करता है जिनमें प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व को स्वस्थ रूप से सर्वांगीण विकास सम्भव होता है?
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य ऐसी परिस्थितियाँ बनाता है जिनमें हर व्यक्ति का चौतरफा स्वस्थ विकास संभव हो पाता है।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य ऐसा माहौल बनाता है जहाँ हर व्यक्ति अच्छे से विकसित हो सके।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की भूमिका को जानें, जो व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है।

 

Question 40. लोक कल्याणकारी राज्य के कोई दो लक्षण (विशेषताएँ) बताइए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के कोई दो लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था का होना।
2. अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य की दो पहचान हैं- इसमें लोकतांत्रिक सरकार होती है और यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की मुख्य विशेषताओं में से दो को याद रखें और उन्हें संक्षेप में वर्णित करें।

 

Question 41. लोक कल्याणकारी राज्य आर्थिक न्याय को किस प्रकार सुनिश्चित करता है?
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य समाज में मौजूदा सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए धनी वर्ग की आय पर अधिक कर लगाकर आर्थिक न्याय सुनिश्चित करता है।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य अमीरों पर ज़्यादा टैक्स लगाकर और समाज में बराबरी लाकर आर्थिक न्याय देता है।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की आर्थिक नीतियों को जानें, जो आय के पुनर्वितरण और समानता पर केंद्रित हैं।

 

Question 42. व्यक्तिवाद और समाजवाद के मध्य सामंजस्य स्थापित करने का कार्य कौन - सा राज्य करता है?
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य व्यक्तिवाद और समाजवाद के बीच संतुलन बनाने का कार्य करता है।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य व्यक्तियों की आज़ादी और समाज की भलाई, दोनों के बीच तालमेल बिठाता है।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की मध्यमार्गी प्रकृति को समझें, जो व्यक्तिवादी और समाजवादी सिद्धांतों को एकीकृत करती है।

 

Question 44. लोक कल्याणकारी राज्य के कोई दो ऐच्छिक कार्य लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के कोई दो ऐच्छिक कार्य निम्नलिखित हैं:
1. समाज सुधार
2. स्वास्थ्य रक्षा।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य के दो ज़रूरी नहीं, पर अच्छे काम हैं- समाज सुधार करना और लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करना।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य के ऐच्छिक कार्यों की सूची में से दो महत्वपूर्ण कार्यों को याद रखें और उन्हें संक्षेप में वर्णित करें।

 

Question 45. राज्य का क्या कर्तव्य है?
Answer: राज्य का कर्तव्य है कि अपने नागरिकों को वे सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराए जिनके माध्यम से उनकी भलाई और उन्नति संभव हो सके।
In simple words: राज्य का फर्ज़ है कि वह अपने नागरिकों को ऐसी सुविधाएँ दे जिससे उनका भला हो और वे आगे बढ़ सकें।

🎯 Exam Tip: राज्य के प्राथमिक कर्तव्यों को जानें, जो नागरिकों के कल्याण और विकास पर केंद्रित हैं।

 

Question 46. लोक कल्याणकारी राज्य की कोई दो आलोचनाएँ लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य की कोई दो आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. व्यक्ति की स्वतन्त्रता का सीमित होना।
2. राज्य की बाध्यकारी शक्ति का प्रयोग।
In simple words: कल्याणकारी राज्य की दो कमियाँ हैं- यह व्यक्ति की आज़ादी को कम करता है और अपनी ताकत का ज़्यादा इस्तेमाल करता है।

🎯 Exam Tip: लोक कल्याणकारी राज्य की आलोचनाओं के मुख्य बिंदुओं को याद रखें, विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की शक्ति के संदर्भ में।

 

Question 47. किस भारतीय राजनीतिक विचारक ने राज्य की आलोचना की है?
Answer: महात्मा गाँधी ने राज्य की आलोचना की है।
In simple words: महात्मा गाँधी ने राज्य की आलोचना की थी।

🎯 Exam Tip: महात्मा गाँधी के राज्य संबंधी विचारों को याद रखें, जो राज्य को एक आवश्यक बुराई मानते थे।

 

Question 48. गाँधीजी ने राज्य की आलोचना क्यों की?
Answer: गाँधीजी मानते थे कि राज्य किसी नैतिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता, यह संगठित हिंसा का प्रतीक है। यह दमनकारी शक्ति के माध्यम से व्यक्ति के आचरण पर नियंत्रण स्थापित करके मनुष्य की आत्मा का बलपूर्वक हनन करता है।
In simple words: गाँधीजी ने राज्य को हिंसा का प्रतीक और आत्मा को दबाने वाला माना, इसलिए उसकी आलोचना की।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी द्वारा राज्य की आलोचना के मूल कारणों को समझें, विशेष रूप से 'संगठित हिंसा' और 'मानवीय आत्मा का हनन' जैसे विचारों पर ध्यान दें।

 

Question 50. किस विचारधारा ने आत्मनिर्भर गाँवों की कल्पना की है?
Answer: गाँधीवादी विचारधारा ने आत्मनिर्भर गाँवों की कल्पना की है।
In simple words: गाँधीवादी सोच ने ऐसे गाँवों की कल्पना की जहाँ लोग अपने सभी काम खुद कर सकें।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी के 'ग्राम स्वराज्य' के विचार और आत्मनिर्भर गाँवों की अवधारणा को याद रखें।

 

Question 51. तात्कालिक राजनीतिक आदर्श के रूप में गाँधीजी ने किसकी कल्पना की?
Answer: तात्कालिक राजनीतिक आदर्श के रूप में गाँधीजी ने अहिंसक लोकतन्त्र की कल्पना की।
In simple words: गाँधीजी ने तुरंत लागू होने वाले राजनीतिक लक्ष्य के रूप में अहिंसक लोकतन्त्र की बात की थी।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी के राजनीतिक आदर्शों में 'अहिंसक लोकतन्त्र' के महत्व और उसके अर्थ को समझें।

 

Question 52. गाँधीजी के राजनैतिक दर्शन का क्या लक्ष्य है?
Answer: गाँधीजी के राजनैतिक दर्शन का लक्ष्य मानव की परिपूर्णता को सुनिश्चित करना है।
In simple words: गाँधीजी के राजनीतिक विचारों का मुख्य लक्ष्य था कि इंसान पूरी तरह से विकसित हो सके।

🎯 Exam Tip: गाँधीजी के दर्शन के केंद्रीय लक्ष्य को याद रखें, जो मानव के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 6 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. राज्य के अनिवार्य कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राज्य के अनिवार्य कार्य वे हैं जिन्हें हर सरकार के लिए करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इन्हें न करने से राज्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। राज्य के अनिवार्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. बाहरी हमलों से देश की रक्षा करना।
2. देश के अंदर शांति और व्यवस्था बनाए रखना।
3. राज्य द्वारा अपराध और दंड संबंधी नियम बनाना और न्याय का सही प्रबंधन व व्यवस्था करना।
4. कानून बनाना, क्योंकि कानूनों से ही राज्य अपनी प्रभुता दिखाता है।
5. राजस्व (पैसा) इकट्ठा करना।
In simple words: राज्य के ज़रूरी काम हैं- देश को बाहर से बचाना, अंदर शांति रखना, न्याय के नियम बनाना, कानून बनाना और टैक्स इकट्ठा करना।

🎯 Exam Tip: राज्य के अनिवार्य कार्यों को विस्तार से समझें, क्योंकि ये राज्य के अस्तित्व और कार्यप्रणाली के लिए मूलभूत हैं।

 

Question 3. राज्य के कार्यक्षेत्र सम्बन्धी अहस्तक्षेपवादी विचारधारा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा के अनुसार, व्यक्ति को अपनी मर्ज़ी से काम करने देना चाहिए क्योंकि वह अपने हितों का सबसे अच्छा संरक्षक होता है। यह विचारधारा व्यक्ति को सबसे महत्वपूर्ण मानती है और उसे पूरी आज़ादी देने का समर्थन करती है। अहस्तक्षेपवादी विचारधारा का मुख्य उद्देश्य राज्य के कार्यक्षेत्र को सीमित करना है। इस सिद्धांत को 'हस्तक्षेप न करने की नीति' भी कहा जाता है। यह सिद्धांत व्यक्ति को अधिक महत्व देता है और मानता है कि राज्य व्यक्ति के लिए है, न कि व्यक्ति राज्य के लिए। राज्य का लक्ष्य व्यक्तियों का विकास करना है, न कि राज्य की सेवा करना। राज्य को व्यक्तियों को ज़्यादा से ज़्यादा आज़ादी देनी चाहिए और उनके कामों में कम से कम दखल देना चाहिए। यह विचारधारा 19वीं शताब्दी में बेन्थम और जेम्स मिल द्वारा शुरू की गई थी।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी विचार कहता है कि राज्य को लोगों के कामों में कम से कम दखल देना चाहिए, ताकि वे अपनी मर्ज़ी से काम कर सकें और पूरी तरह आज़ाद रहें। इसका मकसद राज्य की ताकत को सीमित करना है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी विचारधारा की मुख्य बातों को समझें-व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सीमित राज्य का कार्यक्षेत्र, और 'राज्य एक आवश्यक बुराई है' का सिद्धांत।

 

Question 4. अहस्तक्षेपवादी व्यक्तिवाद के विकास को संक्षेप में समझाइए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी व्यक्तिवाद का विकास इस प्रकार हुआ है:
1. **राजनीतिक दर्शन:** आधुनिक काल में व्यक्तिवाद 19वीं शताब्दी में आया। बेन्थम और जेम्स मिल ने इसे शुरू किया, और 19वीं सदी के मध्य में जॉन स्टुअर्ट मिल और हर्बर्ट स्पेंसर की किताबों में यह विचार पूरी तरह से सामने आया।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी व्यक्तिवाद 19वीं सदी में बेन्थम और जेम्स मिल जैसे लोगों ने शुरू किया, और बाद में जॉन स्टुअर्ट मिल और हर्बर्ट स्पेंसर ने इसे और फैलाया।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी व्यक्तिवाद के विकास में प्रमुख विचारकों और उनकी रचनाओं को याद रखें।

 

Question 5. अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थन में कोई दो तर्क दीजिए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थन में दो मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
(1) **वैज्ञानिक तर्क:** हर्बर्ट स्पेंसर ने 'प्राणी विज्ञान' के नए विचारों का उपयोग करके अहस्तक्षेपवाद का समर्थन किया। उनके अनुसार, जीवन के संघर्ष में केवल योग्य व्यक्ति ही आगे बढ़ते हैं, जबकि कमजोर व्यक्ति नष्ट हो जाते हैं। यह प्राकृतिक नियम समाज पर भी लागू होना चाहिए, जब व्यक्तियों को स्वतंत्र छोड़ दिया जाए। इस सिद्धांत के अनुसार, राज्य को हर व्यक्ति को अपने विकास का अवसर देना चाहिए।
(2) **आर्थिक तर्क:** एडम स्मिथ, थॉमस माल्थस, रिकार्डो और मिल जैसे अर्थशास्त्रियों के अनुसार, हर व्यक्ति अपने फायदे-नुकसान को अच्छी तरह समझता है। आर्थिक विकास के लिए राज्य को आर्थिक क्षेत्र में नियंत्रण नहीं करना चाहिए। राज्य के हस्तक्षेप से व्यक्तियों का काम करने का उत्साह कम हो जाता है। इसलिए, सरकार को व्यापार में अहस्तक्षेप की नीति अपनानी चाहिए।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी राज्य को वैज्ञानिक मानते हैं क्योंकि योग्य ही आगे बढ़ता है, और आर्थिक रूप से मानते हैं क्योंकि लोग अपने फैसले खुद बेहतर लेते हैं और सरकारी दखल से उत्साह कम होता है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवाद के समर्थन में दिए गए वैज्ञानिक और आर्थिक तर्कों को स्पष्ट रूप से समझें और उनके प्रमुख प्रतिपादकों को याद रखें।

 

Question 6. अहस्तक्षेपवादी राज्य का महत्त्व बताइए।
Answer: अहस्तक्षेपवादी राज्य का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में प्रस्तुत है:
1. राज्य के अनावश्यक हस्तक्षेप को कम करने में अहस्तक्षेपवादी विचारधारा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
2. आधुनिक युग में विकसित उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की धारणाएँ राज्य के अहस्तक्षेपवादी स्वरूप को ही और निखारती हैं।
3. 'व्यक्ति साध्य है और राज्य साधन' की विचारधारा सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए एक मार्गदर्शक बनी रहेगी।
4. राज्य की अहस्तक्षेपवादी धारणा के जवाब में समाजवादी और साम्यवादी विचारधाराओं का उदय हुआ, और आज व्यक्तिवाद एक ऐतिहासिक विषय बन गया है।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी राज्य ने राज्य के दखल को कम करने, उदारीकरण को बढ़ावा देने, व्यक्ति को महत्व देने, और समाजवाद के उदय को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

🎯 Exam Tip: अहस्तक्षेपवादी राज्य के महत्व को समझें, विशेष रूप से राज्य के सीमित कार्यक्षेत्र, आधुनिक आर्थिक नीतियों और अन्य विचारधाराओं के विकास पर इसके प्रभाव के संदर्भ में।

 

Question 8. लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के उदय के कोई दो कारण लिखिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के उदय के दो मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
(i) **व्यक्तिवाद के विरुद्ध प्रतिक्रिया:** पहले, व्यक्तिवादी सिद्धांत के अनुसार राज्य को व्यक्तियों के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए था। इससे औद्योगिक क्रांति के समय मजदूरों की स्थिति बहुत खराब हो गई और उनका शोषण होने लगा। इस बुरी हालत के जवाब में, लोक-कल्याणकारी विचारधारा सामने आई।
(ii) **मार्क्सवादी साम्यवाद का डर:** 1848 में साम्यवादी घोषणा पत्र के आने और 1917 में सोवियत रूस में साम्यवादी क्रांति के बाद कार्ल मार्क्स के विचारों का प्रभाव बढ़ गया। साम्यवाद को फैलने से रोकने के लिए, पश्चिमी देशों ने अपनी पूंजीवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए, जिससे लोक कल्याणकारी राज्य का विचार मजबूत हुआ।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य के उदय के दो मुख्य कारण थे: पहला, व्यक्तिवाद के कारण मजदूरों की खराब हालत के खिलाफ विरोध; और दूसरा, मार्क्सवादी साम्यवाद के बढ़ते प्रभाव को रोकने का डर।

🎯 Exam Tip: जब भी किन्हीं दो कारणों के बारे में पूछा जाए, तो हर कारण को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. लोक कल्याणकारी राज्य के कोई दो लक्षण बताइए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
(i) **सामाजिक न्याय:** लोक कल्याणकारी राज्य समाज में फैली विभिन्न असमानताओं, गलत रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों को खत्म करने की कोशिश करता है। यह समाज के पिछड़े और दलित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करता है। यह राज्य लोगों की भलाई के लिए सड़क, पानी, घर, अस्पताल और पुस्तकालय जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है।
(ii) **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना:** कल्याणकारी राज्य केवल अपने देश के कल्याण के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना भी रखता है। राष्ट्रीय लोक कल्याण को स्थायी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि किसी एक राज्य के हित के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय हित का भी ध्यान रखा जाए।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। यह समाज की बुराइयों को दूर करने और सभी को बुनियादी सुविधाएँ देने का काम करता है, साथ ही वैश्विक भलाई का भी ध्यान रखता है।

🎯 Exam Tip: लक्षणों को बताते समय, उन्हें परिभाषित करने के साथ-साथ उनके महत्व को भी उजागर करें।

 

Question 11. लोक कल्याणकारी राज्य के कोई चार ऐच्छिक कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य के ऐच्छिक कार्य वे होते हैं जिन्हें राज्य अपनी जनता की भलाई के लिए करता है। लोक कल्याणकारी राज्य के चार प्रमुख ऐच्छिक कार्य इस प्रकार हैं:
1. **शिक्षा की व्यवस्था करना:** लोक कल्याणकारी राज्य का कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के लिए शिक्षा का प्रबंध करे। इसमें प्राथमिक शिक्षा, महिला शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा शामिल है। उसे वाचनालय और पुस्तकालय भी बनाने चाहिए।
2. **समाज सुधार:** यह राज्य शराबबंदी, बाल विवाह रोकना, छुआछूत और जाति-प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का प्रयास करता है।
3. **श्रम का नियमन:** लोक कल्याणकारी राज्य श्रमिकों की दशा सुधारने के लिए प्रयत्नशील रहता है। वह उन्हें उचित मजदूरी, पेंशन, स्वास्थ्य, बीमा, शिक्षा और असहाय अवस्था में मदद प्रदान करता है।
4. **परिवार नियोजन संबंधी कार्य:** कल्याणकारी राज्य जनसंख्या को सीमित करने का प्रयास करता है, जिससे लोगों को सुविधाएँ मिल सकें। परिवार नियोजन कार्यक्रमों का विस्तार करना चाहिए।
In simple words: कल्याणकारी राज्य अपनी जनता की भलाई के लिए शिक्षा, समाज सुधार, मजदूरों के लिए नियम और परिवार नियोजन जैसे ऐच्छिक कार्य करता है।

🎯 Exam Tip: ऐच्छिक कार्यों को समझाते समय, उनके उद्देश्य और जनता पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख करें।

लोक कल्याणकारी राज्य की आलोचना के आधार

 

Question 13. राज्य सम्बन्धी गाँधीवादी धारणा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: महात्मा गाँधी भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिक विचारक थे। उनके राज्य संबंधी विचारों को गाँधीवाद कहा जाता है। गाँधीजी के अनुसार, राज्य का कोई भौतिक उद्देश्य नहीं होता, बल्कि यह संगठित हिंसा का प्रतीक है। यह दमनकारी शक्ति द्वारा मनुष्य की आत्मा को जबरन दबाता है। इसलिए, राज्य केवल एक बुराई ही नहीं, बल्कि अनावश्यक भी है। गाँधीजी मानते थे कि राज्य व्यक्ति पर जबरन नियंत्रण लगाकर उसकी स्वतंत्रता को सीमित कर देता है। राज्य की ताकत को वे हिंसा का ही दूसरा रूप मानते थे और सभी प्रकार की हिंसा का विरोध करते थे। हालाँकि, गाँधीजी यह भी स्वीकार करते थे कि राज्य को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने 'विकेंद्रित ग्राम स्वराज्य' और 'अहिंसक लोकतंत्र' जैसे सुधारवादी आदर्शों की कल्पना की थी।
In simple words: गाँधीजी राज्य को संगठित हिंसा और अनावश्यक बुराई मानते थे, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाती है। वे हिंसा के खिलाफ थे, लेकिन तत्काल राज्य-विहीन समाज संभव न होने पर विकेंद्रित ग्राम स्वराज्य और अहिंसक लोकतंत्र का समर्थन करते थे।

🎯 Exam Tip: गाँधीवादी धारणा को समझाते समय, गाँधीजी के अहिंसा, स्वराज्य और राज्य की आलोचना जैसे मुख्य बिन्दुओं को शामिल करें।

 

Question 14. आदर्श राजनीतिक व्यवस्था के सम्बन्ध में गाँधी जी के आदर्श व्यवस्था प्रतिमान को स्पष्ट कीजिए।
Answer: गाँधीजी की आदर्श राजनीतिक व्यवस्था एक राज्यहीन समाज है, जिसे वे 'रामराज्य' कहते थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'रामराज्य' का मतलब 'हिंदू राज्य' नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र व्यवस्था है जहाँ व्यक्ति की आत्मा पर किसी बाहरी चीज़ का नियंत्रण नहीं होता। गाँधीजी ने इस व्यवस्था को 'प्रबुद्ध अराजकता' नाम दिया। लेकिन वे मानते थे कि ऐसा समाज बनाना लगभग असंभव है क्योंकि व्यक्ति अपने जीवन में पूरी तरह से अहिंसा के आदर्श का पालन नहीं कर सकता।
In simple words: गाँधीजी का आदर्श राजनीतिक मॉडल 'रामराज्य' था, जहाँ कोई राज्य नहीं होता और व्यक्ति अपनी आत्मा के अनुसार स्वतंत्र होता है। लेकिन उन्हें यह भी लगा कि इसे पूरी तरह लागू करना मुश्किल है।

🎯 Exam Tip: आदर्श व्यवस्था को परिभाषित करते समय, 'रामराज्य' और 'प्रबुद्ध अराजकता' जैसे गाँधीजी के महत्वपूर्ण शब्दों को सही ढंग से प्रयोग करें।

 

Question 15. गाँधीजी के विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य प्रतिमान को स्पष्ट कीजिए।
Answer: गाँधीजी ने 'विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य' (गाँवों का अपना राज) के बारे में बताया। उनका मानना था कि राजनीतिक शक्ति का एक जगह जमा होना हिंसा जैसा है। वे कहते थे कि एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था, जहाँ शक्ति गाँवों में बंटी हो, अहिंसा के आदर्श के करीब होती है। गाँधीजी ने गाँवों को राजनीतिक इकाई बनाने पर जोर दिया। इसका मतलब यह नहीं था कि गाँवों का आपस में कोई संबंध नहीं होगा। ये गाँव आत्मनिर्भर और अपना शासन चलाने वाले होंगे। अपनी जरूरतों के लिए जो चीजें वे खुद नहीं बना पाएंगे, उन्हें दूसरे गाँवों के सहयोग से पूरा करेंगे। देश स्वतंत्र राज्यों का एक संघ होगा। हर गाँव अपनी मर्जी से चलेगा और जिला प्रशासन के लिए प्रतिनिधियों को चुनेगा, जिसमें हर गाँव का एक वोट होगा। फिर जिलों के प्रतिनिधि प्रांतीय सरकार को चुनेंगे, और प्रांतीय प्रतिनिधि मिलकर देश के मुखिया (राष्ट्रपति) को चुनेंगे। गाँधीजी को लगा कि विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य को तुरंत लागू करना मुश्किल है, इसलिए उन्होंने 'अहिंसक लोकतंत्र' को एक शुरुआती आदर्श के रूप में देखा।
In simple words: गाँधीजी ने 'विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य' की बात की, जहाँ राजनीतिक शक्ति गाँवों में बंटी होती है। उनका मानना था कि गाँव आत्मनिर्भर हों और आपसी सहयोग से काम करें, और यह व्यवस्था अहिंसा के करीब होगी।

🎯 Exam Tip: विकेन्द्रीकरण का अर्थ और गाँधीजी के विकेन्द्रीकृत ग्राम स्वराज्य के महत्व को स्पष्ट करें, साथ ही इसके व्यावहारिक पहलुओं पर भी प्रकाश डालें।

 

Question 16. गाँधीजी की अहिंसक लोकतन्त्र की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: गाँधीजी अहिंसा में विश्वास करते थे और देश में अहिंसा पर आधारित लोकतंत्र की स्थापना करना चाहते थे। उनके अनुसार, अहिंसक लोकतंत्र में शक्ति का विकेन्द्रीकरण, सच्चाई और अहिंसात्मक शासन ही मुख्य नियम होंगे। अहिंसक लोकतंत्र अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि बड़े राजनीतिक लक्ष्य की ओर पहला कदम है। गाँधीजी मानते थे कि राज्य का पूरी तरह से अहिंसक होना संभव नहीं है। इस व्यवस्था में राज्य अहिंसा को बढ़ावा देगा और लोगों के जीवन में इसे स्थापित करने की कोशिश करेगा। बल प्रयोग को कम से कम किया जाएगा। इस दौर में राज्य को सेना और पुलिस की जरूरत होगी, लेकिन वे लोगों के सेवक के रूप में काम करेंगे। उन्हें अहिंसक व्यवहार के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी और शांति के समय वे समाज के लिए रचनात्मक कार्य करेंगे।
In simple words: गाँधीजी का अहिंसक लोकतंत्र अहिंसा, सच्चाई और विकेन्द्रीकरण पर आधारित था। यह राज्य में कम से कम बल प्रयोग के साथ जनता के सेवकों के रूप में सेना और पुलिस की भूमिका पर जोर देता था।

🎯 Exam Tip: अहिंसक लोकतंत्र की अवधारणा में विकेन्द्रीकरण, सत्य, अहिंसा और राज्य की भूमिका के बारे में गाँधीजी के विचारों को संक्षेप में बताएं।

राज्य के कार्यक्षेत्र सम्बन्धी विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोण

 

Question 2. आधुनिक राज्य के कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: आधुनिक राज्य के कार्य निश्चित नहीं होते, वे समय, परिस्थिति, विचारधारा और जरूरतों के हिसाब से बदलते रहते हैं। राज्य के मुख्य रूप से दो तरह के कार्य होते हैं:
1. **अनिवार्य कार्य:** ये वे काम हैं जो हर सरकार के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इन्हें न करने पर राज्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसमें शामिल हैं:
- देश को बाहरी हमलों से बचाना।
- देश के अंदर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना।
- अपराधों के लिए कानून बनाना और न्याय दिलाना।
- कानून बनाना, जिससे राज्य को अपनी शक्ति मिलती है।
- टैक्स (राजस्व) इकट्ठा करना।
2. **ऐच्छिक कार्य:** ये वे काम हैं जो राज्य के अस्तित्व या व्यक्ति की सुरक्षा के लिए उतने जरूरी नहीं होते, लेकिन वे लोक कल्याण के लिए किए जाते हैं। ये काम समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। इसमें शामिल हैं:
- **शिक्षा की व्यवस्था:** लोगों को शिक्षित करना, जैसे प्राथमिक शिक्षा, महिलाओं और वयस्कों की शिक्षा, और पुस्तकालय बनाना।
- **सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य:** बीमारियों को रोकना और अस्पताल बनाना, खाने-पीने की चीजों को साफ रखना।
- **व्यापार और उद्योग पर नियंत्रण:** व्यापार और उद्योगों को ठीक से चलाना ताकि सबका भला हो, और मजदूरों के साथ कोई अन्याय न हो।
- **सार्वजनिक महत्व के उद्योगों का संचालन:** बड़े उद्योगों और व्यापार को समाज के हित में चलाना।
- **समाज सुधार:** सामाजिक बुराइयों को खत्म करना और अपाहिजों, अंधों, बीमारों आदि की देखभाल करना।
- **परिवहन के साधनों का प्रबंध:** सड़क, रेल, बस, जल परिवहन आदि की व्यवस्था करना, जिससे सभ्यता और संस्कृति का विकास हो।
In simple words: आधुनिक राज्य के दो मुख्य कार्य होते हैं: अनिवार्य कार्य (जैसे सुरक्षा और न्याय) और ऐच्छिक कार्य (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और समाज सुधार) जो लोगों की भलाई के लिए किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: आधुनिक राज्य के कार्यों का वर्णन करते समय अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों को अलग-अलग वर्गीकृत करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत कम से कम तीन-चार उदाहरण दें।

 

Question 3. अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थन एवं विरोध में तर्क प्रस्तुत कीजिए।
Answer: **अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थन में तर्क:**
1. **वैज्ञानिक तर्क:** हर्बर्ट स्पेन्सर जैसे वैज्ञानिकों का मानना था कि जीवन के संघर्ष में सिर्फ योग्य लोग ही आगे बढ़ते हैं, और कमजोर लोग खत्म हो जाते हैं। यह प्रकृति का नियम है और समाज पर भी लागू होता है। इसलिए, व्यक्ति को पूरी आजादी मिलनी चाहिए ताकि वह अपना विकास खुद कर सके।
2. **आर्थिक तर्क:** एडम स्मिथ जैसे अर्थशास्त्रियों का कहना था कि हर इंसान अपने फायदे-नुकसान को अच्छी तरह समझता है। आर्थिक तरक्की के लिए सरकार को आर्थिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। अगर सरकार दखल देती है, तो लोगों का काम करने का उत्साह कम हो जाता है। इसलिए, सरकार को उद्योग और व्यापार में कम हस्तक्षेप करना चाहिए।
3. **नैतिक तर्क:** व्यक्तिवादी मानते हैं कि हर व्यक्ति का अपना अलग स्वभाव और खासियत होती है। इसलिए राज्य को हर व्यक्ति को अपने तरीके से अपना विकास करने देना चाहिए।
4. **व्यावहारिक तर्क:** राज्य की काम करने की क्षमता व्यक्ति की अपनी क्षमता से बेहतर नहीं होती। इसलिए, अगर व्यक्ति को अपनी क्षमता से काम करने दिया जाए, तो उसे ज्यादा फायदा होता है।

**अहस्तक्षेपवादी राज्य के विरोध में तर्क:**
1. **राज्य कल्याणकारी संस्था है:** आजकल, सभी देशों में विकास राज्य के माध्यम से ही हुआ है। राज्य लोगों की भलाई के लिए कई काम करता है। इसलिए, राज्य को बुराई नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी संस्था माना जाता है।
2. **राज्य और स्वतंत्रता विरोधी नहीं:** अहस्तक्षेपवादी मानते हैं कि राज्य और स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोधी हैं। लेकिन अब यह माना जाता है कि राज्य का मकसद अलग-अलग लोगों के हितों को जोड़ना है जिससे समाज आगे बढ़ता है।
3. **व्यक्ति हमेशा अपने हित का सबसे अच्छा फैसला नहीं ले पाता:** लोग हमेशा अपने लिए सबसे अच्छा फैसला नहीं ले पाते और उनमें पूरी क्षमता भी नहीं होती। इसलिए, राज्य को उनकी भलाई का ध्यान रखना पड़ता है। राज्य को गरीब और असहाय लोगों की मदद करनी चाहिए।
In simple words: अहस्तक्षेपवादी राज्य के समर्थक मानते हैं कि व्यक्ति को आजादी मिलनी चाहिए और सरकार को कम दखल देना चाहिए। वहीं, विरोधी कहते हैं कि राज्य एक कल्याणकारी संस्था है और उसे लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए, क्योंकि व्यक्ति हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ निर्णय नहीं ले पाता।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में दोनों पक्षों के तर्क स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें। हर तर्क को संक्षिप्त लेकिन प्रभावी ढंग से समझाएं।

 

Question 4. लोक कल्याणकारी राज्य क्या है? लोक कल्याणकारी राज्य की धारणा के उदय के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: लोक कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जो अपने सामान्य कामों के साथ-साथ लोगों की भलाई के लिए भी काम करता है, जैसे बेरोजगारी दूर करना, बीमा योजनाएँ, बुढ़ापा पेंशन और अन्य सुरक्षा देना। गार्नर के अनुसार, इसका उद्देश्य राष्ट्रीय जीवन और लोगों के भौतिक, अभौतिक और नैतिक विकास को बढ़ावा देना है। जवाहरलाल नेहरू के मुताबिक, कल्याणकारी राज्य का मुख्य आधार सबको समान अवसर देना और गरीब-अमीर का फर्क मिटाकर जीवन स्तर सुधारना है।

**लोक कल्याणकारी राज्य के उदय के मुख्य कारण:**
1. **व्यक्तिवाद के खिलाफ प्रतिक्रिया:** पहले, राज्य ज्यादा दखल नहीं देता था। लेकिन औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों की हालत बहुत खराब हो गई, उनका शोषण होने लगा। सरकार के हस्तक्षेप न करने से स्थिति और बिगड़ी, जिससे व्यक्तिवाद के खिलाफ आवाज उठी और लोक कल्याणकारी राज्य का विचार सामने आया। इंग्लैण्ड ने सबसे पहले मजदूरों के हितों के लिए कानून बनाए।
2. **मार्क्सवादी साम्यवाद का डर:** 1848 में साम्यवादी घोषणा पत्र आया, और 1917 में सोवियत रूस में साम्यवादी क्रांति हुई। कार्ल मार्क्स के विचार फैलने लगे। इसे रोकने के लिए पश्चिमी देशों ने अपनी पूंजीवादी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव किए, जिससे लोक कल्याणकारी राज्य का विकास हुआ।
3. **लोकतांत्रिक समाजवाद का उदय:** मार्क्सवादी साम्यवाद हिंसा और क्रांति से समाज बदलना चाहता था, लेकिन लोकतांत्रिक समाजवाद शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से बदलाव लाना चाहता था। इस विचार के समर्थकों ने राज्य के सहयोग से समाजवाद स्थापित करने की कोशिश की।
In simple words: लोक कल्याणकारी राज्य लोगों की भलाई के लिए काम करता है, जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य। यह व्यक्तिवाद के शोषण, साम्यवाद के डर और लोकतांत्रिक समाजवाद के उदय के कारण विकसित हुआ।

🎯 Exam Tip: "क्या है" भाग में एक स्पष्ट परिभाषा दें और "कारण" वाले भाग में प्रत्येक कारण को एक अलग बिंदु के रूप में समझाएं।

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