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Detailed Chapter 19 भारत में ब्रिटिश शासन के अवसान RBSE Solutions for Class 11 Political Science
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Class 11 Political Science Chapter 19 भारत में ब्रिटिश शासन के अवसान RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Political Science Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Political Science Chapter 19 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. काँग्रेस की स्थापना कब हुई?
उत्तर: काँग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को हुई थी.
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की शुरुआत 28 दिसंबर, 1885 को हुई थी.
🎯 Exam Tip: काँग्रेस की स्थापना की तिथि और वर्ष याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
प्रश्न 2. भारत छोड़ो आन्दोलन कब शुरू हुआ?
उत्तर: भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत 9 अगस्त, 1942 को हुई थी.
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त, 1942 को शुरू हुआ था.
🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की सटीक तारीख याद रखें क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक क्षण था.
RBSE Class 11 Political Science Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. ब्रह्म समाज के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: ब्रह्म समाज के मुख्य कार्य इस प्रकार थे:
1. राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त, 1828 को ब्रह्म समाज की स्थापना की.
2. इसका मुख्य लक्ष्य हिंदू समाज की बुराइयों को दूर करना था, जैसे कि ईसाई धर्म का बढ़ता प्रभाव रोकना और सभी धर्मों में एकता लाना.
3. ब्रह्म समाज ने सती प्रथा, बाल विवाह और बहुविवाह जैसी गलत प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई.
4. सती प्रथा के खिलाफ आंदोलन के कारण 1829 में इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया.
5. राजा राममोहन राय ने महिलाओं की शिक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति जैसे प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन किया.
6. उन्होंने जमींदारी प्रथा का विरोध भी किया.
In simple words: ब्रह्म समाज ने हिंदू समाज में सुधार लाने, कुरीतियों को खत्म करने और सभी धर्मों में एकता को बढ़ावा देने के लिए काम किया.
🎯 Exam Tip: ब्रह्म समाज के प्रमुख कार्यों को याद रखें, विशेष रूप से सामाजिक सुधारों और धार्मिक एकता पर इसके जोर को.
प्रश्न 2. एटलांटिक चार्टर से आप क्या समझते हो?
उत्तर: एटलांटिक चार्टर एक समझौता था जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए बनाया गया था.
1. संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल ने 14 अगस्त, 1941 को इस पर हस्ताक्षर किए.
2. इसका मुख्य प्रस्ताव यह था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सभी उपनिवेशित राष्ट्रों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिलेगा.
3. हालांकि, ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने इसे भारत में लागू करने से मना कर दिया.
4. जब अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने चर्चिल पर भारत के साथ समझौता करने का दबाव डाला, तो ब्रिटेन पर नैतिक दबाव बढ़ा.
5. 1945 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने एटलांटिक चार्टर का सम्मान करते हुए भारत को स्वतंत्रता देने का वादा किया. इससे भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ.
In simple words: एटलांटिक चार्टर एक समझौता था जिसमें विश्व शांति और उपनिवेशित देशों को आजादी देने की बात थी, जिससे भारत की आजादी का रास्ता भी खुला.
🎯 Exam Tip: एटलांटिक चार्टर के मुख्य सिद्धांतों और भारत की स्वतंत्रता पर इसके प्रभाव को याद रखें, खासकर आत्मनिर्णय के अधिकार वाले बिंदु को.
प्रश्न 3. उदारवादी एवं उग्रराष्ट्रीय विचारधारा के नेताओं के नाम लिखो।
उत्तर: उदारवादी विचारधारा के नेताओं के नाम यहां अपेक्षित हैं.
In simple words: इस प्रश्न में उदारवादी और उग्र राष्ट्रवादी विचारों के प्रमुख नेताओं के नाम बताने हैं.
🎯 Exam Tip: उदारवादी और उग्र राष्ट्रवादी नेताओं के बीच अंतर और उनके विचारों के प्रमुख प्रतिनिधियों को समझना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 4. लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियों की जानकारी दीजिए।
उत्तर: लॉर्ड लिटन 1876 से 1880 तक भारत का वायसराय था. उसकी कुछ दमनकारी नीतियां जिन्होंने भारतीयों को परेशान किया, वे निम्नलिखित थीं:
1. उन्होंने भारतीय नागरिक सेवा में भर्ती होने की आयु 19 वर्ष तक घटा दी.
2. अकाल के समय दिल्ली में एक बड़ा दरबार आयोजित करके भारतीय धन को बर्बाद किया.
3. 1876 में भारतीयों के लिए शस्त्र अधिनियम पारित किया, जिससे बिना लाइसेंस के हथियार रखना या व्यापार करना एक अपराध बन गया. यूरोपीय और एंग्लो-इंडियन पर यह कानून लागू नहीं होता था.
4. 1878 में वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट पारित करके प्रेस की स्वतंत्रता खत्म कर दी गई. इस कानून से भारतीय भाषा के समाचार-पत्रों पर सरकार के खिलाफ कुछ भी छापने पर प्रतिबंध लग गया था. सरकार को अखबारों को चेतावनी देने, जब्त करने और उनकी छपाई की मशीनें छीनने का अधिकार मिल गया था. इससे भारतीयों में गुस्सा और राष्ट्रवाद की भावना बढ़ी.
5. साम्राज्य विस्तार के लिए अफगानिस्तान पर हमला करके बहुत धन खर्च किया.
6. भारत विरोधी आर्थिक नीतियां लागू कीं.
7. लिटन ने 'मुक्त व्यापार नीति' का पालन करते हुए 29 वस्तुओं पर आयात कर हटा दिया और सूती वस्त्र पर आयात शुल्क आधा कर दिया, जिससे भारतीय वस्त्र उद्योग को भारी नुकसान हुआ.
In simple words: लॉर्ड लिटन ने कई कठोर नीतियां लागू कीं, जैसे भर्ती की उम्र घटाना, वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट लाना और भारतीयों के खिलाफ आर्थिक फैसले लेना, जिससे भारतीय जनता परेशान हुई.
🎯 Exam Tip: लॉर्ड लिटन की प्रमुख दमनकारी नीतियों को याद रखें, खासकर वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट और शस्त्र अधिनियम, क्योंकि इन्होंने भारतीयों में असंतोष पैदा किया.
प्रश्न 5. महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए किन्हीं तीन 3 प्रमुख आन्दोलनों को बताइये।
उत्तर: महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आंदोलन निम्नलिखित हैं:
1. असहयोग आंदोलन: यह आंदोलन जनवरी 1921 में शुरू हुआ था. इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश भारत की सभी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संस्थाओं का बहिष्कार करना था ताकि सरकारी तंत्र ठप हो जाए. इस आंदोलन ने पूरे भारत में नई ऊर्जा भरी और इसकी एक प्रमुख बात हिंदू-मुस्लिम एकता का विकास था.
2. सविनय अवज्ञा आंदोलन: महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया यह आंदोलन 12 मार्च, 1930 को उनकी दांडी यात्रा से शुरू हुआ. इसका मुख्य उद्देश्य पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करना था. इसके लिए कानूनों का उल्लंघन करने का निश्चय किया गया.
3. भारत छोड़ो आंदोलन: इस आंदोलन में गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया था. यह तब तक के सभी आंदोलनों में सबसे उग्र था. गांधीजी और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी कांग्रेस ने इसका नेतृत्व किया. भले ही यह आंदोलन अपने लक्ष्य में पूरी तरह सफल न हुआ हो, लेकिन इसने भारत में ऐसी अभूतपूर्व जागृति पैदा की कि ब्रिटिश शासन लंबे समय तक असंभव हो गया.
In simple words: गांधीजी के तीन बड़े आंदोलन असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन थे, जिनका उद्देश्य भारत को अंग्रेजों से आजाद कराना था.
🎯 Exam Tip: गांधीजी के तीन प्रमुख आंदोलनों के नाम, उनके शुरुआती वर्ष और मुख्य उद्देश्य याद रखें, क्योंकि ये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं.
प्रश्न 6. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के उदय को समझाइए।
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उदय इस प्रकार हुआ:
1. 28 दिसंबर, 1885 को सेवानिवृत्त अंग्रेज अधिकारी एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने 72 राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में कांग्रेस की नींव रखी.
2. व्योमेश चंद्र बनर्जी ने इसके पहले अधिवेशन की अध्यक्षता की.
3. कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में अंग्रेजों के खिलाफ बढ़ते असंतोष के कारण संभावित विस्फोट को शांत करना था.
4. इसके अन्य मुख्य उद्देश्यों में देशहित में सक्रिय भारतीयों के बीच संपर्क और मित्रता बढ़ाना, देश में धर्म, वंश और प्रांत से संबंधित विवादों को खत्म करके राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना था.
5. शिक्षित वर्ग की पूर्ण सहमति से महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और आने वाले वर्षों में भारतीय जन कल्याण के लिए दिशा तय करना भी इसके लक्ष्य थे.
6. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन के निर्देश और मार्गदर्शन में गठित इस संगठन का उद्देश्य भारतीयों में देशभक्ति की राष्ट्रीय भावनाओं को सही दिशा देना और उनकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार लाना था.
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में एलन ह्यूम ने की थी, जिसका मकसद भारतीयों के असंतोष को नियंत्रित करना और देश में एकता व सामाजिक-आर्थिक सुधारों को बढ़ावा देना था.
🎯 Exam Tip: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की तिथि, संस्थापक, पहले अध्यक्ष और मुख्य उद्देश्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत के राजनीतिक जागरण का प्रतीक था.
प्रश्न 7. श्रीमती एनीबेसेन्ट ने किस प्रकार भारतीय जनमानस को प्रभावित किया?
उत्तर: श्रीमती एनीबेसेंट ने भारतीय जनमानस को कई तरह से प्रभावित किया:
1. श्रीमती एनीबेसेंट एक भारतप्रेमी आयरिश महिला थीं जो 1893 में भारत आईं.
2. उन्होंने भारत में रहते हुए थियोसोफिकल सोसायटी का खूब प्रचार किया और हिंदू धर्म को अपनाकर अपना जीवन समर्पित कर दिया.
3. उन्होंने शिक्षा के प्रसार में सहयोग दिया और थियोसोफिकल आंदोलन के माध्यम से बाल विवाह, कन्या-विवाह, बेचना और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने में मदद की.
4. एनीबेसेंट ने 1898 में काशी में 'बनारस हिंदू संस्कृत कॉलेज' की स्थापना की.
5. सितंबर 1916 में उन्होंने होमरूल आंदोलन चलाया, जिसके लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें नजरबंद भी कर दिया था.
6. उन्हें 1917 में कलकत्ता कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया. 1919 के बाद राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी युग के आने से भारतीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका कम हो गई.
7. उन्होंने सभी धर्मों का अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष निकाला था कि हिंदू धर्म जैसा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक धर्म कोई दूसरा नहीं है.
In simple words: एनीबेसेंट ने थियोसोफिकल सोसायटी और होमरूल आंदोलन के जरिए शिक्षा और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा दिया, जिससे भारतीय लोगों में राष्ट्रीय भावना जागी.
🎯 Exam Tip: एनीबेसेंट के प्रमुख योगदानों को याद रखें, जैसे थियोसोफिकल सोसायटी का प्रचार, शिक्षा में योगदान और होमरूल आंदोलन का नेतृत्व, जो भारतीय राष्ट्रीय चेतना को जगाने में महत्वपूर्ण थे.
प्रश्न 9. 1857 की क्रान्ति के बारे में वीर सावरकर के क्या विचार था?
उत्तर: 1857 की क्रांति के बारे में वीर सावरकर के विचार इस प्रकार थे:
1. वीर विनायक दामोदर सावरकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी नेताओं में से एक थे.
2. उन्होंने आजीवन देश की स्वतंत्रता के लिए तप और त्याग किया, जिसकी प्रशंसा शब्दों में नहीं की जा सकती.
3. जनता ने उन्हें 'वीर' की उपाधि दी, जिससे वे 'वीर सावरकर' के नाम से जाने गए.
4. वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा, सिपाही और सेनापति थे.
5. उन्होंने खुद भी स्वतंत्रता के लिए युद्ध किया और हजारों युवाओं को युद्ध के लिए प्रेरित किया.
6. 10 मई, 1907 को लंदन के 'इंडिया हाउस' में उन्होंने 1857 की क्रांति की अर्धशताब्दी मनाई.
7. उन्होंने 1857 की क्रांति पर मराठी में एक किताब लिखी और इसे 'आजादी की पहली लड़ाई' बताया.
8. सावरकर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1857 के 'गदर' को 'भारत के प्रथम स्वतंत्रता युद्ध' कहा.
9. उनके अनुसार, "1857 की क्रांति स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए पहला युद्ध था, यह केवल सैनिक विद्रोह नहीं बल्कि सामाजिक ज्वालामुखी था जिसमें दबी हुई शक्तियों ने अभिव्यक्ति प्राप्त की थी."
In simple words: वीर सावरकर ने 1857 की क्रांति को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम बताया, जो केवल एक विद्रोह नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई थी, और उन्होंने इसके महत्व को समझाया.
🎯 Exam Tip: वीर सावरकर के 1857 की क्रांति पर दिए गए वक्तव्य और उनके योगदान को याद रखें, क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की विचारधारा को समझने में मदद करता है.
RBSE Class 11 Political Science Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में ब्रिटिश शासन के अवसान के कारणों पर लेख लिखो।
उत्तर: भारत में ब्रिटिश शासन के अंत के कई प्रमुख कारण थे:
1. विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का उदय:
भारत में 19वीं शताब्दी में कई धार्मिक और समाज सुधार आंदोलन शुरू हुए. इन आंदोलनों ने धार्मिक और सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास किया, जिससे भारत में राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई. राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज, स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज, स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन और श्रीमती एनीबेसेंट ने थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना की.
राजा राममोहन राय को 'आधुनिक भारत का पिता' और 'नए युग का अग्रदूत' भी कहा जाता है. स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के माध्यम से धार्मिक और राष्ट्रीय जागरण का काम किया. उन्होंने देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जगाई. श्रीमती एनीबेसेंट ने हिंदू धर्म और संस्कृति की श्रेष्ठता की प्रशंसा की, जिससे भारतवासी स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित हुए. इन धार्मिक और सामाजिक आंदोलनों के परिणामस्वरूप राष्ट्रीयता की भावना जागी और लोग एकजुट होने लगे.
2. पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव:
भले ही लॉर्ड मैकाले का उद्देश्य अंग्रेजी शिक्षा और भाषा को फैलाकर भारतीयों को मानसिक रूप से गुलाम बनाना था, लेकिन अंग्रेजी भाषा भारतीयों के लिए वैश्विक संपर्क भाषा बन गई. भारतीय युवाओं को उच्च शिक्षा में रुचि हुई और इससे राष्ट्रीय जागृति को बढ़ावा मिला.
3. सन् 1857 का स्वतंत्रता संग्राम:
भले ही 1857 का स्वतंत्रता संग्राम असफल रहा हो, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने विद्रोह को कुचलने के बाद जो अमानवीय अत्याचार किए, उससे भारतीयों में असंतोष बहुत बढ़ गया. अंग्रेजों ने गांवों को जला दिया और निर्दोष ग्रामीणों का कत्लेआम किया. इन अत्याचारों से भारतीयों में अंग्रेजों के प्रति गहरी नफरत पैदा हुई और बदले की भावना जागी.
4. भारत का आर्थिक शोषण:
अंग्रेजों द्वारा किए गए आर्थिक शोषण के खिलाफ भारतीयों में भारी असंतोष था. अंग्रेजों ने भारत के कुटीर उद्योगों को नष्ट कर दिया. वे यहां से सस्ते दाम पर कच्चा माल लेते थे और उसे तैयार करके महंगे दामों में बेचते थे. भारत में विदेशी पूंजी निवेश और विदेशी आयात के माध्यम से शोषण किया गया. इंग्लैंड की गृह सरकार का सारा खर्च भारत द्वारा ही वहन किया जाता था. भारत के धन निकासी, उद्योगों का विनाश और किसानों का शोषण आदि का भारतीयों ने विरोध किया.
5. सामाजिक परिवर्तन:
अंग्रेजी शिक्षा के कारण भारतीयों का सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों, आडंबरों से मोह भंग होने लगा. अंग्रेजी शिक्षा के कारण भारत में डॉक्टर, वकील, शिक्षक और नौकरी करने वालों का एक नया वर्ग बना. इन लोगों ने भी भारत में राष्ट्रीय जागृति के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
6. यूरोप के विद्वानों द्वारा भारतीय सभ्यता और संस्कृति का महिमामंडन:
विदेशी विद्वानों द्वारा की गई खोजों से भी भारतीयों की राष्ट्रीय भावनाओं को बल मिला. सर विलियम जोन्स, मैक्स मूलर, जैकोबी, कोल ब्रुक, रौथ, ए. बी. कीथ और बर्नफ जैसे विद्वानों ने भारत के संस्कृत भाषा में लिखे ऐतिहासिक ग्रंथों का अध्ययन किया और उनका अंग्रेजी में अनुवाद किया. पाश्चात्य विद्वानों ने यह भी बताया कि ये भारतीय ग्रंथ संसार की सभ्यता की अनमोल निधियां हैं. उनके अनुसार, भारत की सभ्यता और संस्कृति विश्व की प्राचीन और श्रेष्ठ संस्कृति है. जब भारतीयों को अपनी संस्कृति की श्रेष्ठता का ज्ञान हुआ, तो उनका आत्मविश्वास जगा और वे भारत की स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गए.
7. साहित्यिक और पत्रकारिता का योगदान:
भारतीय साहित्यकारों दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की रचनाओं और बंकिम चंद्र चटर्जी के 'आनंद मठ' व 'वंदे मातरम', टैगोर के 'जन-गण-मन', मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' और भारतेंदु हरिश्चंद्र की रचनाओं ने भारतीय जनमानस में क्रांति फैलाई और नई आशा जगाई.
8. इलबर्ट बिल पर विवाद:
1883 में लॉर्ड रिपन की परिषद के कानूनी सदस्य इलबर्ट ने एक बिल पेश किया, जिससे भारतीय मजिस्ट्रेटों को अंग्रेजों के मुकदमों की सुनवाई करने और उन्हें दंड देने का अधिकार मिलता. अंग्रेजों ने इसका विरोध किया और सरकार को बिल वापस लेना पड़ा. इससे भारतीयों को महसूस हुआ कि संगठित आंदोलन से ब्रिटिश सरकार को झुकाया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय चेतना पैदा हुई.
9. लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियां:
लॉर्ड लिटन ने 1876 से 1880 के बीच कई अन्यायपूर्ण नीतियां अपनाईं, जिससे राष्ट्रीय असंतोष बढ़ा. इसमें नागरिक सेवा में भर्ती की आयु 21 से घटाकर 19 वर्ष करना, दिल्ली में महारानी विक्टोरिया के सम्मान में विशाल दरबार आयोजित करके धन का अपव्यय करना, और भारतीय भाषाओं के समाचार-पत्रों पर कठोर नियंत्रण लगाना शामिल था.
10. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उदय:
28 दिसंबर, 1885 को एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की. इसका उद्देश्य भारतीयों की देशभक्ति की राष्ट्रीय भावनाओं को सही दिशा देना और उनकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार लाना था. कांग्रेस के नेतृत्व ने देश के स्वतंत्रता आंदोलनों को नई दिशा दी.
11. वैश्विक घटना चक्र:
पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बाद विश्व में तेजी से परिवर्तन आया. संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ वैश्विक महाशक्तियों के रूप में उभरे, जिससे ब्रिटेन की स्थिति कमजोर हो गई. कई देशों में उपनिवेशवाद के खिलाफ क्रांतियां हो रही थीं, जिसने भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए नई प्रेरणा दी.
12. क्रांतिकारी आंदोलन:
स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारियों का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण था. क्रांतिकारियों ने गुप्त संगठन बनाए और भारतीय जवानों को गोला-बारूद बनाने व हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया. इसमें महाराष्ट्र में अभिनव भारत और बंगाल में अनुशीलन समिति व युगांतर जैसे संगठन प्रमुख थे.
In simple words: ब्रिटिश शासन के अंत के कई कारण थे, जैसे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन, अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव, 1857 की क्रांति, आर्थिक शोषण, साहित्य और पत्रकारिता का योगदान, इलबर्ट बिल विवाद, लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियां, कांग्रेस का उदय, वैश्विक घटनाएं और क्रांतिकारी आंदोलन.
🎯 Exam Tip: ब्रिटिश शासन के अवसान के कारणों को याद करते समय, प्रत्येक कारण के मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में स्पष्ट करें और यह बताएं कि उसने कैसे स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया.
प्रश्न 3. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़े:
1. भारतीय जनमानस पर प्रभाव: भारतीयों में साहस, आत्म-गौरव और कर्तव्यनिष्ठा विकसित हुई. राष्ट्रीय एकता की भावना बढ़ी और हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत हुई, जिसने बाद में राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान दिया.
2. ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत: 1857 के बाद ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत की सत्ता अपने हाथ में ले ली. 1858 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश सम्राट को दे दिया गया. नियंत्रण मंडल और संचालक मंडल को समाप्त करके भारत के राज्य सचिव का पद बनाया गया.
3. क्षेत्रों के अंधाधुंध विस्तार की नीति का त्याग: महारानी विक्टोरिया के आदेशानुसार, क्षेत्रों के विस्तार की नीति को छोड़ दिया गया. स्थानीय राजाओं के गौरव और अधिकारों को बहाल करने की बात कही गई.
4. देशी रियासतों के प्रति नीति परिवर्तन: महारानी ने अपनी घोषणा में देशी राजाओं के अधिकारों, सम्मान और गौरव की रक्षा का वादा किया. गोद लेने की अनुमति दी गई, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ.
5. सैनिक पुनर्गठन: 1857 की क्रांति ने अंग्रेजों को सैनिकों के संबंध में सबक सिखाया. 1861 में पील कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, सेना में ब्रिटिश सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई और तोपखाने भारतीयों के पास नहीं रखे गए. यह सुनिश्चित किया गया कि एक क्षेत्र या समुदाय के सैनिक एक साथ सैनिक टुकड़ियों में न रहें.
6. 'फूट डालो और राज करो' नीति प्रभावी: 1857 की क्रांति में हिंदू और मुसलमानों की सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल कायम हुई थी. इससे अंग्रेज घबरा गए और उन्होंने हिंदू-मुस्लिम दुश्मनी पैदा की, 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाई.
7. भारतीयों की प्रशासन में आंशिक भागीदारी: 1857 का संकट शासकों और शासितों के बीच संपर्क के अभाव के कारण था. अंग्रेजों को अपनी नीतियों को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा.
In simple words: 1857 की क्रांति के बाद भारत में ब्रिटिश शासन बदल गया, ईस्ट इंडिया कंपनी का राज खत्म हुआ, फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई गई, और भारतीयों में राष्ट्रीय भावना बढ़ी.
🎯 Exam Tip: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के परिणामों को याद रखें, विशेष रूप से ब्रिटिश नीतियों में बदलाव और भारतीय राष्ट्रीय चेतना पर इसके दूरगामी प्रभावों को.
प्रश्न 4. अंग्रेजों ने किस तरह भारत का आर्थिक शोषण किया?
उत्तर: अंग्रेजों ने भारत का आर्थिक शोषण कई तरीकों से किया:
1. भारतीय धन की निकासी: भारत से इंग्लैंड भेजे गए धन को 'धन की निकासी' कहा गया, जिसके बदले में भारत को कुछ नहीं मिला. यह धन धात्विक मुद्रा के रूप में कम और वस्तुओं के निर्यात के रूप में अधिक गया. ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से राजस्व एकत्र करती थी और उसी से सामान खरीदकर अपने देश निर्यात कर देती थी. दादाभाई नौरोजी ने कहा, "भारत का धन ही भारत से बाहर जाता है और फिर वही धन भारत को ऋण के रूप में दिया जाता है, जिसके लिए उसे और ब्याज के रूप में जुटाना पड़ता है, यह सब एक दुष्चक्र था जिसे तोड़ना कठिन था." इस धन का ब्याज और यहां से अर्जित पूंजी लाभ के रूप में इंग्लैंड जाने लगा.
2. भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को नष्ट करना: अंग्रेजों ने ऐसी नीतियां बनाईं जिससे भारतीय हस्तशिल्प उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो गया. भारतीय माल पर इंग्लैंड में प्रतिबंध लगा दिया गया और उस पर भारी कर लगा दिया गया, जबकि इंग्लैंड में बने सामान से भारतीय बाजार भर दिए गए. इंग्लैंड की मशीन से बनी वस्तुएं हाथ से बनी वस्तुओं की तुलना में सस्ती थीं. लोग इंग्लैंड से बना सस्ता सामान खरीदने लगे. उद्योगों के बंद होने से करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए और न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की समस्या भी पैदा हो गई. इस तरह देशी उद्योगों ने विदेशी व्यापार के साथ-साथ देशी बाजार भी खो दिया.
3. कृषि का विनाश: अंग्रेजों के आने से पहले भारतीय कृषि आत्मनिर्भर थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका विनाश होने लगा. किसानों पर अत्यधिक कर लगाया गया जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई. किसानों ने खेती छोड़कर अन्य काम अपना लिए. अंग्रेजों ने जबरदस्ती किसानों से अधिक भू-कर वसूला. जो किसान भू-कर नहीं चुका पाता था, उसकी जमीन छीन ली जाती थी. कृषि के व्यवसायीकरण के तहत अंग्रेजों ने भारतीय किसानों को खाद्यान्न फसलों की बजाय व्यावसायिक फसलों को उगाने के लिए मजबूर किया. इसका परिणाम खाद्यान्न फसलों की कमी, भुखमरी और अकाल जैसी स्थितियां थीं. अंग्रेजों की नीतियों के कारण भारतीय कृषि पूरी तरह बर्बाद हो गई.
In simple words: अंग्रेजों ने धन की निकासी, भारतीय उद्योगों को खत्म करके और कृषि पर ज्यादा कर लगाकर भारत का आर्थिक शोषण किया, जिससे यहां के लोग गरीब और बेरोजगार हो गए.
🎯 Exam Tip: अंग्रेजों की आर्थिक शोषण नीतियों के प्रमुख बिंदुओं को याद रखें, विशेष रूप से धन की निकासी, उद्योगों का विनाश और कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों को.
प्रश्न 5. साहित्य एवं समाचार – पत्रों का ब्रिटिश शासन के अवसान में क्या योगदान रहा?
उत्तर: साहित्य और समाचार-पत्रों ने ब्रिटिश शासन के अंत और स्वतंत्रता आंदोलन को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसका वर्णन निम्नलिखित बिंदुओं में किया गया है:
1. छापेखाने का आविष्कार: 1800 में कोलकाता के पास श्रीरामपुर में छापेखाने की शुरुआत हुई. इससे बड़े पैमाने पर किताबें और समाचार-पत्र छपने लगे. छपाई से किताबों की कीमतें कम हुईं, उत्पादन में लगने वाला समय और श्रम भी कम हुआ. बाजार में किताबों की उपलब्धता बढ़ी और पाठक वर्ग भी बढ़ा, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
2. साहित्य का योगदान: भारतीय साहित्यकारों और कवियों ने राष्ट्र प्रेम से भरपूर साहित्य की रचना की. 'आनंद मठ' और 'नील दर्पण' जैसे नाटकों के मंचन से राष्ट्रवाद को प्रोत्साहन मिला. बंकिम चंद्र चटर्जी का आनंद मठ देशभक्ति का प्रतीक बन गया. 'वंदे मातरम' गीत उन्हीं की देन है. तत्कालीन साहित्यकारों ने मातृभूमि के प्रति विशेष आस्था व्यक्त की. बंकिम चंद्र का 'वंदे मातरम' गीत भारत के राष्ट्रीय आंदोलनकारियों की प्रेरणा का मुख्य स्रोत बना.
दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की कृतियों और बंकिम चंद्र चटर्जी के आनंद मठ व वंदे मातरम, रवींद्रनाथ टैगोर के जन-गण-मन, मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' और भारतेंदु हरिश्चंद्र की कृतियों ने भारतीय जनमानस में क्रांति लाई और नई आशा का संचार किया.
सुब्रमण्यम भारती ने 1917 की रूसी क्रांति की प्रशंसा करते हुए कविताएं लिखीं. अन्य साहित्यकारों जैसे हेमचंद्र बनर्जी, नवीनचंद्र सेन, आर.सी. दत्त, बद्रीनारायण चौधरी, प्रतापनारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय भावना को जगाने में विशेष योगदान दिया.
3. समाचार-पत्रों का योगदान: समाचार-पत्र और पत्रिकाएं संचार के सुगम साधन हैं. पहले अधिकतर समाचार-पत्र अंग्रेजी भाषा में निकलते थे, जिन पर अंग्रेजों का अधिकार था, लेकिन बाद में देशी भाषाओं में भी समाचार-पत्र भारत में ब्रिटिश शासन के अंत के कारण निकलने लगे. इन भारतीय भाषा के समाचार-पत्रों ने इस क्षेत्र में बहुत काम किया और अंग्रेज शासकों के गलत कार्यों को उजागर किया. उन्होंने प्रतिनिधि सरकार, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता में लोकप्रिय बनाया. समाचार-पत्रों ने ईस्ट इंडिया कंपनी की साम्राज्यवादी और शोषण नीति का खुलकर विरोध किया.
दैनिक समाचार-पत्रों और साप्ताहिक पत्रों के माध्यम से भारतीय समाज सुधारकों और राजनीतिक विचारकों के विचार जनता तक पहुंचने लगे. ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने 'सोम प्रकाश' और हरिश्चंद्र मुखर्जी ने 'हिंदू पैट्रियट' का प्रकाशन किया. 1868 में 'अमृत बाजार पत्रिका' का प्रकाशन हुआ. बाल गंगाधर तिलक ने मराठी भाषा में 'केसरी' और अंग्रेजी में 'मराठा' प्रकाशित किया. इन समाचार-पत्रों ने भारत में बलिदान और राष्ट्रवाद का वातावरण तैयार किया. इस प्रकार यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय समाचार-पत्र भारतीय राष्ट्रवाद का दर्पण बन गए और जनता को शिक्षित करने का माध्यम बन गए. इस प्रकार साहित्य और समाचार-पत्रों ने ब्रिटिश शासन के अंत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
In simple words: साहित्य और समाचार-पत्रों ने किताबें और राष्ट्रवादी लेख छापकर, लोगों को अंग्रेजी शासन के खिलाफ जागरूक किया और स्वतंत्रता आंदोलन को तेज करने में मदद की.
🎯 Exam Tip: साहित्य और पत्रकारिता के योगदान पर लिखते समय, प्रमुख साहित्यकारों, उनके कार्यों और प्रमुख समाचार-पत्रों के नाम याद रखें, साथ ही बताएं कि उन्होंने राष्ट्रीय चेतना कैसे जगाई.
RBSE Class 11 Political Science Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पिता किसे कहा जाता है?
(अ) राजा राममोहन राय
(ब) स्वामी विवेकानन्द
(स) स्वामी दयानन्द
(द) मैडम ब्लेवेटस्की।
उत्तर: (अ) राजा राममोहन राय
In simple words: राजा राममोहन राय को भारत में सांस्कृतिक बदलाव और नए विचारों की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: राजा राममोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का पिता क्यों कहा जाता है, यह जानने के लिए उनके सामाजिक और धार्मिक सुधारों को याद रखें.
प्रश्न 2. रामकृष्ण मिशन की स्थापना कब हुई?
(अ) 1893
(ब) 1895
(स) 1875
(द) 1897
उत्तर: (द) 1897
In simple words: रामकृष्ण मिशन की शुरुआत 1897 में हुई थी, जिसका उद्देश्य समाज सेवा और आध्यात्मिक ज्ञान फैलाना था.
🎯 Exam Tip: रामकृष्ण मिशन की स्थापना का वर्ष और इसके संस्थापक स्वामी विवेकानंद का नाम याद रखें.
प्रश्न 3. आर्य समाज की स्थापना कब हुई?
(ब) 6 अप्रल 1883
🎯 Exam Tip: आर्य समाज की स्थापना का सही वर्ष और उसके संस्थापक का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 4. काँग्रेस की स्थापना किसने की?
(अ) महात्मा गाँधी
(ब) ए. ओ. ह्यूम
(स) पट्टाभिसीतारमैया
(द) दादा भाई नौरोजी
उत्तर: (ब) ए. ओ. ह्यूम
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ए. ओ. ह्यूम नामक एक अंग्रेज अधिकारी ने की थी.
🎯 Exam Tip: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक का नाम और उनके योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 5. अलीगढ़ आन्दोलन किसने चलाया?
(अ) दादाभाई नौरोजी
(ब) विवेकानन्द
(स) सर सैयद अहमद
(द) मो. अली जिन्ना।
उत्तर: (स) सर सैयद अहमद
In simple words: अलीगढ़ आंदोलन सर सैयद अहमद ने शुरू किया था, जिसका उद्देश्य मुसलमानों में शिक्षा और सुधार को बढ़ावा देना था.
🎯 Exam Tip: अलीगढ़ आंदोलन के नेता और इसके मुख्य उद्देश्य को याद रखें, क्योंकि यह मुस्लिम समुदाय में शैक्षिक और सामाजिक सुधार से जुड़ा था.
प्रश्न 6. एनीबेसेंट किस संस्था से जुड़ी हुई थी?
(अ) ब्रह्म समाज
(ब) थियोसोफिकल सोसायटी
(स) आर्य समाज
(द) रामकृष्ण मिशन।
उत्तर: (ब) थियोसोफिकल सोसायटी
In simple words: एनीबेसेंट थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ी थीं, जिसने भारत में आध्यात्मिक और सामाजिक सुधारों पर काम किया.
🎯 Exam Tip: एनीबेसेंट का थियोसोफिकल सोसायटी से संबंध और संस्था के उद्देश्यों को याद रखें.
Question 2. ब्रह्म समाज के संस्थापक थे -
(अ) राजा राममोहन राय
(ब) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(स) स्वामी विवेकानन्द
(द) कर्नल आल्कॉट।
Answer: (अ) राजा राममोहन राय
In simple words: राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: Remember the key figures associated with major social and religious reform movements.
Question 3. ब्रह्म समाज की स्थापना हुई
(अ) 15 अगस्त, 1857 को
(ब) 20 अगस्त, 1828 को
(स) 5 मई, 1897 को
(द) 26 जनवरी, 1950 को।
Answer: (ब) 20 अगस्त, 1828 को
In simple words: ब्रह्म समाज की स्थापना 20 अगस्त, 1828 को हुई थी।
🎯 Exam Tip: It is crucial to remember the exact dates and years of important historical events and the establishment of key organizations.
Question 4. अद्वैतवाद के समर्थक थे
(अ) स्वामी विवेकानन्द
(ब) मैडम ब्लेवेटस्की
(स) लॉर्ड लिटन
(द) राजा राममोहन राय।
Answer: (द) राजा राममोहन राय।
In simple words: राजा राममोहन राय अद्वैतवाद के विचारों का समर्थन करते थे।
🎯 Exam Tip: Identify the philosophical leanings of prominent historical figures to answer such questions accurately.
Question 6. आर्य समाज के संस्थापक थे -
(अ) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(ब) स्वामी विवेकानन्द
(स) सर सैयद अहमद खाँ
(द) राजा राममोहन राय।
Answer: (अ) स्वामी दयानन्द सरस्वती
In simple words: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: Make a list of social reformers and the organizations they founded for quick revision.
Question 7. स्वराज्य, स्वधर्म एवं स्वदेशी की विचारधारा के प्रबल समर्थक थे –
(अ) स्वामी विवेकानन्द
(ब) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(स) राजा राममोहन राय
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ब) स्वामी दयानन्द सरस्वती
In simple words: स्वामी दयानन्द सरस्वती स्वराज्य, स्वधर्म और स्वदेशी के मजबूत समर्थक थे।
🎯 Exam Tip: Connect key philosophies and slogans with the specific leaders who advocated them.
Question 8. निम्न में से किस समाज सुधारक ने 'वेदों की महत्ता' पर बल दिया?
(अ) स्वामी रामकृष्ण परमहंस
(ब) स्वामी विवेकानन्द
(स) राधास्वामी पेरियार
(द) स्वामी दयानन्द सरस्वती।
Answer: (द) स्वामी दयानन्द सरस्वती।
In simple words: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदों के महत्व पर जोर दिया और बताया कि वे ज्ञान का आधार हैं।
🎯 Exam Tip: Understanding the core principles and beliefs of each social reformer helps in identifying their contributions.
Question 9. रामकृष्ण परमहंस निम्न में से किस समाज सुधारक के गुरु थे?
(अ) स्वामी विवेकानन्द
(ब) राजा राममोहन राय
(स) गोविन्द गुरु
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ब) स्वामी विवेकानन्द ने
In simple words: रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानन्द के गुरु थे, जिन्होंने उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा दी।
🎯 Exam Tip: Knowing the relationships between prominent figures (e.g., guru-disciple) is often tested in exams.
Question 11. भारत में थियोसोफिकल सोसायटी के कार्य को किसने गति प्रदान की?
(अ) मैडम ब्लेवेटस्की ने
(ब) कर्नल ऑल्कॉट ने।
(स) श्रीमती एनीबेसेन्ट ने
(द) सर सैयद अहमद खाँ ने।
Answer: (स) श्रीमती एनीबेसेन्ट ने
In simple words: श्रीमती एनीबेसेन्ट ने भारत में थियोसोफिकल सोसायटी के काम को आगे बढ़ाया और उसे लोकप्रिय बनाया।
🎯 Exam Tip: Remember the specific contributions of each leader to different movements or organizations.
Question 12. निम्न में से किस मुस्लिम समाज सुधारक ने मुसलमानों को अंग्रेजों का वफादार बनने का सन्देश दिया?
(अ) सर सैयद अहमद खाँ
(ब) मिर्जा गुलाम अहमद
(स) मुहम्मद कासिम
(द) अब्दुल लतीफ।
Answer: (अ) सर सैयद अहमद खाँ
In simple words: सर सैयद अहमद खाँ ने मुसलमानों को अंग्रेजों के प्रति वफादार रहने की सलाह दी।
🎯 Exam Tip: Differentiate between reformers who supported cooperation with the British and those who advocated for resistance.
Question 13. भारत में ब्रिटिश शासन के अवसान का प्रमुख कारण था
(अ) विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक संगठनों का उदय
(ब) आर्थिक शोषण
(स) पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: ब्रिटिश शासन के खत्म होने के कई कारण थे, जैसे नए सामाजिक और राजनीतिक समूहों का बनना, आर्थिक शोषण और पश्चिमी शिक्षा का प्रभाव।
🎯 Exam Tip: When a question asks for major causes, consider multiple contributing factors and how they collectively led to the outcome.
Question 15. 'Poverty and Un British Rule of India' नामक पुस्तक के लेखक थे
(अ) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(ब) स्वामी विवेकानन्द
(स) दादाभाई नौरोजी
(द) बाल गंगाधर तिलक।
Answer: (स) दादाभाई नौरोजी
In simple words: दादाभाई नौरोजी ने 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: Memorize the authors of important historical and political books, as these are frequently asked questions.
Question 16. प्रसिद्ध राष्ट्रवादी समाचार पत्र था
(अ) हिन्दू पैट्रियट
(ब) अमृत बाजार पत्रिका
(स) केसरी
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: हिन्दू पैट्रियट, अमृत बाजार पत्रिका, और केसरी - ये सभी उस समय के खास राष्ट्रवादी अखबार थे।
🎯 Exam Tip: Be aware of the names of important newspapers and journals that played a role in the nationalist movement.
Question 17. 'आनन्द मठ' नामक उपन्यास के लेखक थे –
(अ) बंकिमचन्द्र चटर्जी
(ब) मैथिलीशरण गुप्त
(स) रबीन्द्र नाथ टैगोर
(द) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।
Answer: (अ) बंकिमचन्द्र चटर्जी
In simple words: 'आनन्द मठ' उपन्यास बंकिमचन्द्र चटर्जी ने लिखा था, जिसमें 'वन्दे मातरम्' गीत है।
🎯 Exam Tip: Key literary works and their authors are important for understanding the cultural aspect of the independence movement.
Question 19. निम्न में से किस वायसराय के समय में इलबर्ट बिल पर विवाद हुआ था?
(अ) लॉर्ड रिपन
(ब) लॉर्ड रीडिंग
(स) लॉर्ड डफरिन
(द) लॉर्ड मिन्टो।
Answer: (अ) लॉर्ड रिपन
In simple words: इलबर्ट बिल को लेकर लॉर्ड रिपन के समय में बहुत बड़ा विवाद हुआ था।
🎯 Exam Tip: Associate important bills and acts with the Viceroy in power during their introduction or controversy.
Question 20. निम्र में से किस भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी ने 1857 की क्रान्ति को 'स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए प्रथम युद्ध' । बताया?
(अ) खुदीराम बोस
(ब) बाल गंगाधर तिलक
(स) विनायक दामोदर सावरकर
(द) महात्मा गाँधी।
Answer: (स) विनायक दामोदर सावरकर
In simple words: विनायक दामोदर सावरकर ने 1857 के विद्रोह को भारत की आजादी के लिए पहली लड़ाई कहा था।
🎯 Exam Tip: Note down famous quotes or descriptions of historical events and their originators.
Question 21. निम्न में से किस वर्ष भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना हुई?
(अ) 1885 ई.
(ब) 1985 ई.
(स) 1950 ई.
(द) 1930 ई.
Answer: (अ) 1885 ई.
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना वर्ष 1885 में हुई थी।
🎯 Exam Tip: This is a very basic but important historical fact that must be memorized.
Question 23. निम्न में से काँग्रेस के उदारवादी नेता थे
(अ) गोपालकृष्ण गोखले.
(ब) दादाभाई नौरोजी जी
(स) महादेव गोविन्द रानाडे
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: गोपालकृष्ण गोखले, दादाभाई नौरोजी और महादेव गोविन्द रानाडे सभी काँग्रेस के उदारवादी नेताओं में शामिल थे।
🎯 Exam Tip: Be able to distinguish between the liberal (नरमपंथी) and extremist (गरमपंथी) factions of the Indian National Congress.
Question 24. निम्न में से काँग्रेस के उग्र राष्ट्रवादी नेता था
(अ) बाल गंगाधर तिलक
(ब) लाला लाजपत राय
(स) विपिन चन्द्र पॉल
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और विपिन चन्द्र पॉल, जिन्हें लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता है, सभी काँग्रेस के उग्र राष्ट्रवादी नेता थे।
🎯 Exam Tip: Remember the 'Lal-Bal-Pal' trio as the most prominent faces of the extremist nationalist movement.
Question 25. निम्न में से किस वर्ष महात्मा गाँधी को भारतीय राजनीति में प्रवेश हुआ?
(अ) 1915 ई.
(ब) 1947 ई.
(स) 1920 ई.
(द) 1885 ई.
Answer: (अ) 1915 ई.
In simple words: महात्मा गाँधी ने 1915 में भारत लौटने के बाद भारतीय राजनीति में अपनी भूमिका शुरू की।
🎯 Exam Tip: The year of Gandhi's return to India and entry into politics marks a significant turning point in the independence movement.
Question 27. निम्न में से किस वर्ष रूसी क्रान्ति हुई?
(अ) 1917 ई.
(ब) 1919 ई.
(स) 1939 ई.
(द) 1945 ई.
Answer: (अ) 1917 ई.
In simple words: रूसी क्रान्ति 1917 में हुई थी, जिसका विश्व राजनीति पर गहरा असर पड़ा।
🎯 Exam Tip: Global events often influenced national movements, so knowing key international dates is important.
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति के कोई दो कारण लिखिए।
Answer: भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
(i) दोषपूर्ण ब्रिटिश शासन प्रणाली: अंग्रेजों की शासन व्यवस्था में कई कमियाँ थीं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा।
(ii) क्रान्तिकारी आन्दोलन: भारतीय क्रांतिकारियों ने आजादी के लिए कई बड़े आन्दोलन चलाए।
In simple words: अंग्रेजों की खराब शासन व्यवस्था और भारत में हुए क्रान्तिकारी आन्दोलन ब्रिटिश राज के खत्म होने के मुख्य कारण थे।
🎯 Exam Tip: When asked for specific numbers of reasons, always provide exactly that number, with clear and concise points.
Question 2. भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पिता कौन थे?
Answer: राजा राममोहन राय।
In simple words: राजा राममोहन राय को भारत में सांस्कृतिक बदलाव लाने वाला पिता कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: This is a direct factual question; ensure you recall the correct historical title.
Question 3. ब्रह्म समाज की स्थापना कब व किसने की?
Answer: ब्रह्म समाज की स्थापना 20 अगस्त, 1828 को राजा राममोहन राय ने की।
In simple words: राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त, 1828 को ब्रह्म समाज बनाया था।
🎯 Exam Tip: Always remember both the founder and the year of establishment for important organizations.
Question 4. राजा राममोहन राय किस प्रकार भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण के जनक थे?
Answer: राजा राममोहन राय ने ज्ञान, अंधविश्वास और सामाजिक सांस्कृतिक गिरावट के खिलाफ संघर्ष किया। इसीलिए उन्हें भारतीय पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है।
In simple words: राजा राममोहन राय ने पुराने गलत विचारों और सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए काम किया, इसलिए उन्हें भारतीय सांस्कृतिक जागरण का पिता कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Focus on the specific actions and philosophical contributions of figures like Raja Rammohan Roy.
Question 6. भारत का कौन-सा समाज सुधारक स्वतन्त्रता का समर्थक एवं प्रशासन में स्वेच्छाचारिता का समर्थक था?
Answer: राजा राममोहन राय।
In simple words: राजा राममोहन राय ऐसे सुधारक थे जो आजादी और प्रशासन में मनमानी के खिलाफ थे।
🎯 Exam Tip: Identify reformers based on their specific ideologies and stances on key issues.
Question 7. आर्य समाज की स्थापना कब व किसने की?
Answer: आर्य समाज की स्थापना 1 अप्रैल, 1875 को स्वामी दयानन्द सरस्वती ने की।
In simple words: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 1 अप्रैल, 1875 को आर्य समाज की शुरुआत की थी।
🎯 Exam Tip: Keep a timeline of major reform movements and their founders for better recall.
Question 8. स्वामी दयानन्द सरस्वती ने किस बात पर बल दिया?
Answer: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदों की महत्ता को स्वीकार किया तथा एक ही ईश्वर की सन्तान होने के नाते, सभी को भाई-भाई बताकर जाति भेद मिटाकर सभी को अपनाने पर बल दिया।
In simple words: स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदों को सबसे महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सभी लोग एक ही ईश्वर की संतान हैं, इसलिए उन्हें भाईचारे से रहना चाहिए और जाति भेद मिटाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: Highlight the core teachings and social reforms advocated by Swami Dayanand Saraswati.
Question 9. स्वामी विवेकानन्द के गुरु कौन थे?
Answer: स्वामी रामकृष्ण परमहंसे।
In simple words: स्वामी विवेकानन्द के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस थे।
🎯 Exam Tip: It is helpful to know the mentor-disciple relationships among spiritual leaders.
Question 10. स्वामी रामकृष्ण परमहंस का भारतीय संस्कृति के सम्बन्ध में क्या:मत था?
Answer: स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने भारतीय संस्कृति को आध्यात्मिक मानते हुए श्रेष्ठ सनातन संस्कृति माना।
In simple words: स्वामी रामकृष्ण परमहंस का मानना था कि भारतीय संस्कृति बहुत पवित्र और महान है।
🎯 Exam Tip: Note the views of different leaders on Indian culture and tradition.
Question 11. रामकृष्ण मिशन के संस्थापक कौन थे?
Answer: स्वामी विवेकानन्द।
In simple words: स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: Understand the difference between the founder of an organization and its spiritual inspiration.
Question 13. थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना कब व किसने की?
Answer: सन् 1875 में मैडम ब्लेवेटस्की एवं अमेरिकी कर्नल ऑल्कॉट ने।
In simple words: मैडम ब्लेवेटस्की और कर्नल ऑल्कॉट ने 1875 में थियोसोफिकल सोसायटी बनाई थी।
🎯 Exam Tip: Remember the international founders of the Theosophical Society and its later spread to India.
Question 14. एनीबेसेंट ने भारत में किस सामाजिक संस्था का प्रचार किया?
Answer: थियोसोफिकल सोसायटी का।
In simple words: एनीबेसेंट ने भारत में थियोसोफिकल सोसायटी को बहुत फैलाया।
🎯 Exam Tip: Link prominent figures like Annie Besant to the specific movements or organizations they championed.
Question 15. भारत में अंग्रेजी शिक्षा के जनक कौन थे?
Answer: लॉर्ड मैकाले।
In simple words: लॉर्ड मैकाले को भारत में अंग्रेजी शिक्षा का जनक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: This is a direct factual question; ensure you recall the correct name associated with English education in India.
Question 16. दादाभाई नौरोजी ने अपनी किस पुस्तक में अंग्रेजों के आर्थिक षड्यन्त्र का खुलासा किया था?
Answer: Poverty and Un British Rule in India नामक पुस्तक में।
In simple words: दादाभाई नौरोजी ने अपनी किताब 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में अंग्रेजों के आर्थिक शोषण को दिखाया था।
🎯 Exam Tip: Knowing specific book titles and their authors is vital for historical context.
Question 17. अंग्रेजों की किस नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया?
Answer: स्वतन्त्र व्यापार नीति ने।
In simple words: अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुँचाया।
🎯 Exam Tip: Understand the impact of specific British economic policies on India's indigenous industries and economy.
Question 18. किन्हीं दो यूरोपीय विद्वानों के नाम लिखिए जिन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृति का महिमामन्डन। किया?
Answer: सर विलियम जोन्स और मैक्स मूलर।
In simple words: सर विलियम जोन्स और मैक्स मूलर दो ऐसे यूरोपीय विद्वान थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति और सभ्यता की प्रशंसा की थी।
🎯 Exam Tip: Remember European scholars who contributed to the study and appreciation of Indian heritage.
Question 20. भारत में वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट कब लागू हुआ?
Answer: 1879 ई. में।
In simple words: वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1879 में लागू किया गया था।
🎯 Exam Tip: Note the year and purpose of significant British legislative acts that affected Indians.
Question 21. वन्दे मातरम् किसके द्वारा लिखा गया था?
Answer: बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा।
In simple words: 'वन्दे मातरम्' गीत बंकिम चन्द्र चटर्जी ने लिखा था।
🎯 Exam Tip: This is a fundamental fact about India's national song; ensure you know the author.
Question 22. भारत के राष्ट्रगान 'जन - गण - मन' के रचयिता कौन हैं?
Answer: रबीन्द्रनाथ टैगोर।
In simple words: भारत का राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' रबीन्द्रनाथ टैगोर ने लिखा था।
🎯 Exam Tip: Distinguish between the national anthem and national song and their respective composers.
Question 23. किन्हीं चार साहित्यकारों के नाम लिखिए जिनकी कृतियों ने भारतीय जनमानस में क्रान्ति फैला दी?
Answer:
1. लोकमान्य गंगाधर तिलक
2. बंकिमचन्द्र चटर्जी
3. दादाभाई नौरोजी
4. रबीन्द्र नाथ टैगोर।
In simple words: लोकमान्य तिलक, बंकिमचन्द्र चटर्जी, दादाभाई नौरोजी और रबीन्द्र नाथ टैगोर ऐसे लेखक थे जिनकी रचनाओं से लोगों में आजादी की भावना जगी।
🎯 Exam Tip: Be ready to name influential figures from different fields (politics, literature) who contributed to the national movement.
Question 25. लॉर्ड रिपन की कानूनी परिषद के एक सदस्य का नाम लिखिए।
Answer: इलबर्ट।
In simple words: लॉर्ड रिपन की कानूनी परिषद में इलबर्ट नाम के एक सदस्य थे।
🎯 Exam Tip: Connect specific individuals with the key events or positions they held, like the Ilbert Bill controversy.
Question 26. 1857 की क्रान्ति स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए प्रथम युद्ध था।' यह कथन किसका है?
Answer: वीर विनायक दामोदर सावरकर का।
In simple words: वीर सावरकर ने 1857 के विद्रोह को 'आजादी की पहली लड़ाई' कहा था।
🎯 Exam Tip: Always remember specific quotes and the personalities associated with them, especially for defining historical events.
Question 27. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के संस्थापक कौन थे?
अथवा
काँग्रेस की स्थापना में सबसे प्रमुख भूमिका किसने निभायी?
Answer: एलन ऑक्टोवियन ह्यूम।
In simple words: एलन ऑक्टोवियन ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: Know the founder of major political parties and their alternate names or key roles.
Question 28. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का प्रारम्भिक उद्देश्य क्या था?
Answer: भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध पनप रहे असन्तोष के कारण हो सकने वाले विस्फोट की स्थिति को शान्त करना।
In simple words: काँग्रेस का शुरुआती लक्ष्य अंग्रेजों के खिलाफ बढ़ रहे गुस्से को शांत करना था, ताकि कोई बड़ा विद्रोह न हो।
🎯 Exam Tip: Understand the initial aims of organizations, as these often evolve over time.
Question 29. दादाभाई नौरोजी ने 1906 में काँग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में काँग्रेस का क्या उद्देश्य बताया?
Answer: संयुक्त राज्य अमेरिका एवं अन्य उपनिवेशों की भाँति स्वशासन प्राप्त करना।
In simple words: दादाभाई नौरोजी ने 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कहा कि काँग्रेस का लक्ष्य अमेरिका जैसे अन्य उपनिवेशों की तरह खुद का शासन (स्वशासन) प्राप्त करना था।
🎯 Exam Tip: Pay attention to how the objectives of political parties changed or were articulated at different historical milestones.
Question 30. उदारवादी राष्ट्रीयता के काल में ब्रिटिश शासन के समक्ष काँग्रेस द्वारा किस प्रकार की माँगे उठायी जाती थीं?
Answer: उदारवादी राष्ट्रीयता के काल में काँग्रेस द्वारा ब्रिटिश शासन के समक्ष अपनी माँगे माँग-पत्र, स्मृति-पत्र, प्रतिनिधि मण्डल आदि के द्वारा उठायी जाती थीं।
In simple words: उदारवादी नेताओं ने अपनी माँगें ब्रिटिश सरकार तक पहुँचाने के लिए आवेदन पत्र, ज्ञापन और प्रतिनिधि मंडल का इस्तेमाल किया।
🎯 Exam Tip: Understand the methods of protest and advocacy used by different factions of the nationalist movement.
Question 32. काँग्रेस के किन्हीं चार उग्र राष्ट्रवादी विचारकों के नाम लिखिए।
Answer:
1. बाल गंगाधर तिलक
2. लाला लाजपतराय
3. विपिनचन्द्र पाल
4. अरविन्द घोष।
In simple words: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, विपिन चन्द्रपाल और अरविन्द घोष काँग्रेस के चार प्रमुख उग्र राष्ट्रवादी नेता थे।
🎯 Exam Tip: Ensure you can differentiate and list leaders from both the liberal and extremist factions of the Congress.
Question 33. महात्मा गाँधी के नेतृत्व में संचालित किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम लिखिए।
Answer:
1. सविनय अवज्ञा आन्दोलन
2. भारत छोड़ो आन्दोलन।
In simple words: महात्मा गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन और भारत छोड़ो आन्दोलन जैसे दो बड़े आन्दोलन चलाए थे।
🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with the key movements led by Mahatma Gandhi and their significance.
Question 34. भारतीय क्रान्तिकारियों के किन्हीं दो गुप्त संगठनों का नाम लिखिए जो भारतीय जवानों को गोली बारूद बनाने एवं शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण देते थे?
Answer:
1. अभिनव भारत
2. अनुशीलन समिति।
In simple words: 'अभिनव भारत' और 'अनुशीलन समिति' दो गुप्त संगठन थे जो भारतीय क्रांतिकारियों को हथियार चलाने और गोला बारूद बनाने की ट्रेनिंग देते थे।
🎯 Exam Tip: Remember the names and purposes of secret revolutionary organizations.
Question 35. विदेशों में रहकर भारतीय स्वतन्त्रता हेतु क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन करने वाले किन्हीं चार क्रान्तिकारियों के नाम लिखिए।
Answer:
1. श्याम जी कृष्ण वर्मा
2. मैडम भीकाजी कामा
3. रासबिहारी बोस
4. लाला हरदयाल।
In simple words: श्याम जी कृष्ण वर्मा, मैडम भीकाजी कामा, रासबिहारी बोस और लाला हरदयाल जैसे कई क्रांतिकारियों ने विदेश में रहते हुए भारत की आजादी के लिए काम किया।
🎯 Exam Tip: Learn about the contributions of Indian revolutionaries who operated from outside India.
Question 37. 1941 ई. के एटलांटिक चार्टर में क्या प्रस्ताव था?
Answer: 1941 ई. के एटलांटिक चार्टर में प्रस्ताव था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् प्रत्येक उपनिवेशित राष्ट्र को आत्मनिर्णय का अधिकार होगा।
In simple words: 1941 के एटलांटिक चार्टर में यह कहा गया था कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद सभी उपनिवेशित देशों को अपनी सरकार खुद चुनने का अधिकार मिलेगा।
🎯 Exam Tip: Understand the key provisions of international declarations like the Atlantic Charter and their relevance to colonial nations.
Question 38. किस ब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने एटलांटिक चार्टर को भारत में लागू करने से इंकार कर दिया था।
Answer: चर्चिल ने।
In simple words: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री चर्चिल ने भारत में एटलांटिक चार्टर लागू करने से मना कर दिया था।
🎯 Exam Tip: Be aware of the positions taken by key world leaders on issues concerning India's independence.
Question 39. किन्हीं दो देशों का नाम लिखिए जिन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलनों का समर्थन किया था?
Answer:
1. जर्मनी
2. जापान
In simple words: जर्मनी और जापान ने भारत के आजादी के आन्दोलनों को सहारा दिया था।
🎯 Exam Tip: Identify international allies or supporters of the Indian independence movement.
Question 40. सन् 1945 में ब्रिटेन में किस पार्टी की सरकार बनी?
Answer: लेबर पार्टी की।
In simple words: 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी थी।
🎯 Exam Tip: The change in British government in 1945 had a significant impact on India's independence; remember the party that came to power.
Question 41. ब्रिटेन में सन् 1945 में हुए चुनावों में लेबर पार्टी का कौन-सा नेता प्रधानमन्त्री बना?
Answer: क्लीमेंट एटली।
In simple words: 1945 के चुनावों के बाद लेबर पार्टी के क्लीमेंट एटली ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री बने।
🎯 Exam Tip: Connect the specific leader with the political party and the timing of their assumption of office.
Question 42. राष्ट्रवाद का अग्रदूत किसे कहा जाता है?
Answer: राजा राममोहन राय को।
In simple words: राजा राममोहन राय को राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने वाला पहला व्यक्ति कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: Remember important titles and honorifics given to historical figures.
आर्य समाज के कार्यः
Question 2. रामकृष्ण मिशन के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: स्वामी रामकृष्ण परमहंस भारतीय संस्कृति को आध्यात्मिक मानते हुए श्रेष्ठ सनातन संस्कृति मानते थे। उनके निधन के पश्चात् उनके योग्यतम शिष्य स्वामी विवेकानन्द ने इस संस्था की स्थापना 5 मई, 1897 को की। रामकृष्ण मिशन भारत के विभिन्न प्रान्तों तथा अमेरिका, फिजी, मॉरीशस आदि देशों में शाखाएँ हैं। रामकृष्ण मिशन ऐसे आदर्शों एवं सिद्धान्तों का प्रचार करता है जिसे सभी धर्मों व संस्कृतियों के लोग अपना सके। मिशन के माध्यम से उपदेश, शिक्षा, चिकित्सा, अकाल, बाढ़, भूकम्प व संक्रामक रोगों से पीड़ितों की सहायता का कार्य भी किया जाता है। स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से रूढ़िवाद तथा अन्धविश्वास, निर्धनता, अशिक्षा, छुआछूत एवं वर्गभेद को दूर करने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने जनकल्याण की भावना को भी प्रोत्साहित किया।
In simple words: रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानन्द ने 1897 में अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम पर की थी। यह संस्था धर्म, शिक्षा और समाज सेवा के कामों में लगी है, जैसे-लोगों को पढ़ाना, बीमारों की मदद करना और अंधविश्वासों को दूर करना। इसका मकसद सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोगों को एक साथ लाना है।
🎯 Exam Tip: When describing an organization, include its founder, founding year, main objectives, and key activities.
Question 3. इस्लामिक धार्मिक सुधार आन्दोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: मुगल साम्राज्य के पतन के पश्चात् मुसलमानों की स्थिति में गिरावट आ गयी। मुसलमानों ने अंग्रेजी शिक्षा का भी विरोध किया। मुस्लिम समाज में कुरीतियों का बोलबाला था जिससे उनकी सामाजिक एवं राजनैतिक भागीदारी कम हो गयी। इसी दौरान सर सैयद अहमद खाँ जैसे समाज सुधारक ने मुसलमानों में फैली हुई कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने 1875 ई. में अलीगढ़ स्कूल की स्थापना की। 1875 ई. में ही इसे कॉलेज बनाकर इसका नाम मुहम्मद एंग्लो ओरिएन्टल कॉलेज रखा गया जो आगे चलकर 1920 ई. में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। सर सैयद अहमद खाँ ने मुसलमानों को अंग्रेजों का वफादार बनने का सन्देश दिया।
In simple words: मुगल राज खत्म होने के बाद मुस्लिम समाज की हालत बिगड़ गई। मुसलमानों ने अंग्रेजी शिक्षा को पसंद नहीं किया। सर सैयद अहमद खाँ जैसे नेताओं ने समाज की बुराइयों को दूर करने और मुसलमानों को शिक्षित करने के लिए काम किया। उन्होंने 1875 में अलीगढ़ में एक स्कूल खोला, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। उन्होंने मुसलमानों को अंग्रेजों का साथ देने की सलाह भी दी थी।
🎯 Exam Tip: For reform movements, focus on the reasons for their emergence, the key figures involved, and their main contributions.
Question 5. दोषपूर्ण ब्रिटिश शासन प्रणाली किस प्रकार भारत से अपने अवसान में सहायक बनी? बताइए।
Answer: ब्रिटिश शासन की गलत नीतियां भारत में उनके शासन के अंत का एक बड़ा कारण बनीं। अंग्रेजों के आने से पहले, भारत में अलग तरह की शासन व्यवस्थाएं थीं। देशी राजा कवियों, कलाकारों, साधु-संतों और धार्मिक-शैक्षणिक संस्थाओं को बिना कर वाली जमीन देते थे। देश की न्याय व्यवस्था भी सस्ती और निष्पक्ष थी। लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद, अलग-अलग वर्गों को मिलने वाली कर-मुक्त जमीन की व्यवस्था खत्म कर दी गई। किसानों को भी नई कर व्यवस्था से परेशानी हुई। अंग्रेजों की न्याय व्यवस्था महंगी, लंबी और निष्पक्ष नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक तौर पर भी इसमें कई कमियां थीं। जब सरकारी कामकाज की भाषा अंग्रेजी हो गई, तो लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। भारतीयों को अंग्रेजों से हीन समझा जाता था, जिससे उनके खिलाफ गुस्सा बढ़ा।
In simple words: ब्रिटिश शासन की खराब नीतियों ने उनके भारत छोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। पहले की व्यवस्थाएं अच्छी थीं, लेकिन अंग्रेजों ने कर-मुक्त जमीन खत्म कर दी और न्याय व्यवस्था महंगी व पक्षपातपूर्ण बना दी। इससे लोगों में गुस्सा बढ़ा और वे स्वतंत्रता के लिए प्रेरित हुए।
🎯 Exam Tip: जब शासन प्रणाली के दोषों पर प्रश्न हो, तो पुरानी अच्छी व्यवस्था और अंग्रेजों द्वारा लाए गए बदलावों का तुलनात्मक वर्णन करें, साथ ही इसके जनता पर पड़े प्रभावों को भी स्पष्ट करें।
Question 6. पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव ने किस प्रकार ब्रिटिश शासन के अवसान में सहायता की? बताइए।
अथवा
पाश्चात्य शिक्षा परोक्ष रूप से भारत में राष्ट्रीय आन्दोलन के लिए वरदान सिद्ध हुई है। कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: लॉर्ड विलियम बेंटिंक के शासनकाल में, 1835 में लॉर्ड मैकाले के सुझाव पर भारत में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा शुरू की गई। अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय भावना को पूरी तरह खत्म करके एक ऐसा वर्ग बनाना था, जो सोच, विचार और बुद्धि से अंग्रेजों जैसा बन जाए। हालांकि, इस शिक्षा से भारतीयों को स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में पता चला। उनमें ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपनी मांगे मनवाने के लिए अपनी भाषा में लड़ने की इच्छा पैदा हुई। इस तरह, भले ही अंग्रेजों ने भारत में पाश्चात्य शिक्षा इसलिए शुरू की थी ताकि वे राष्ट्रीय भावनाओं को रोक सकें, पर अप्रत्यक्ष रूप से यह भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक वरदान साबित हुई।
In simple words: अंग्रेजों ने भारतीयों को अपने जैसा बनाने के लिए अंग्रेजी शिक्षा शुरू की। लेकिन इससे भारतीयों को स्वतंत्रता और लोकतंत्र के बारे में पता चला। उन्होंने अपनी मांगों के लिए लड़ना सीखा, जिससे यह शिक्षा स्वतंत्रता आंदोलन के लिए फायदेमंद साबित हुई।
🎯 Exam Tip: पाश्चात्य शिक्षा के प्रभावों का वर्णन करते समय उसके दोहरे स्वरूप को उजागर करें - अंग्रेजों का उद्देश्य और भारतीयों पर उसका सकारात्मक प्रभाव।
Question 7. भारत का आर्थिक शोषण किस प्रकार ब्रिटिश शासन के अवसान में सहायक बना? बताइए।
Answer: अंग्रेजों द्वारा भारत के आर्थिक शोषण से भारतीयों में बहुत गुस्सा था, जिसने ब्रिटिश शासन के अंत में योगदान दिया।
1. **मुक्त व्यापार नीति:** अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया।
2. **कुटीर उद्योगों का विनाश:** इंग्लैंड के औद्योगिक विकास के कारण भारत के पुराने हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों को नष्ट कर दिया गया।
3. **कच्चे माल का निर्यात और तैयार माल का आयात:** अंग्रेज यहां से सस्ता कच्चा माल ले जाकर इंग्लैंड भेजते थे। वहां कारखानों में माल तैयार करके उसे भारतीय बाजारों में बेचते थे।
4. **बेरोजगारी और भुखमरी:** इससे भारत में लाखों लोग बेरोजगार हो गए, और उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में भी दिक्कतें आने लगीं।
5. **उद्योगों का विनाश:** भारत के सूती, ऊनी, रेशमी, लोहा, चमड़ा और चीनी उद्योगों को खत्म किया जा रहा था। भारतीय सामान पर आयात शुल्क लगाया जाता था, जिससे वे महंगे हो जाते थे।
6. **कृषि और भू-राजस्व नीति:** उद्योगों के बंद होने और कारीगरों के कृषि की ओर जाने के बाद, उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य की कठोर भू-राजस्व नीतियों का सामना करना पड़ा।
7. **दादाभाई नौरोजी का खुलासा:** प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी दादाभाई नौरोजी ने अपने लेखों में अंग्रेजों की आर्थिक चालों का खुलासा किया।
8. **बढ़ता आक्रोश:** इन सब कारणों से भारतीयों में ब्रिटिश सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता गया, जिससे उनके शासन का अंत हुआ।
In simple words: अंग्रेजों ने भारत से खूब पैसा लूटा। उन्होंने भारत के छोटे उद्योगों को खत्म कर दिया, यहां से कच्चा माल सस्ता खरीदा और अपने देश का महंगा सामान यहां बेचा। इससे भारतीय गरीब और बेरोजगार हो गए, और यह सब अंग्रेजों के खिलाफ बड़े गुस्से का कारण बना, जिससे उनका शासन खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: आर्थिक शोषण से जुड़े प्रश्नों में अंग्रेजों की नीतियों (जैसे मुक्त व्यापार, कच्चे माल का निर्यात, कर नीति) और उनके भारत पर पड़े प्रभावों (जैसे बेरोजगारी, गरीबी, उद्योगों का विनाश) को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 8. यूरोप के विद्वानों ने भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का किस प्रकार महिमामण्डन किया?
Answer: यूरोपीय विद्वानों की खोजों ने भी भारतीयों की राष्ट्रीय भावनाओं को जगाया। सर विलियम जोंस, मैक्स मूलर, जैकोबी, कोल ब्रुक, रौथ, ए.बी. कीथ और बुर्नफ जैसे विद्वानों ने भारत की संस्कृत भाषा में लिखे गए ऐतिहासिक ग्रंथों का अध्ययन किया और उनका अंग्रेजी में अनुवाद किया। इन पश्चिमी विद्वानों ने यह भी बताया कि ये भारतीय ग्रंथ, दुनिया की सभ्यता के अनमोल खजाने हैं। उनके अनुसार, भारत की सभ्यता और संस्कृति विश्व की सबसे पुरानी और महान संस्कृति है। कनिंघम जैसे पुरातत्वविदों की खुदाई ने भारत के महानता और गौरव का ऐसा चित्र प्रस्तुत किया जो रोम और यूनान की प्राचीन सभ्यताओं से किसी भी तरह कम नहीं था। इन यूरोपीय विद्वानों ने वेदों और उपनिषदों की साहित्यिक श्रेष्ठता और मानव मन के सुंदर विश्लेषण की बहुत प्रशंसा की। कई यूरोपीय विद्वानों ने यह सिद्धांत भी दिया कि भारतीय आर्य उसी मानव जाति से संबंधित हैं जिससे यूरोपीय जातियां निकली हैं।
In simple words: यूरोपीय विद्वानों ने भारतीय ग्रंथों और संस्कृति का अध्ययन करके बताया कि भारत की सभ्यता बहुत पुरानी और महान है। उन्होंने वेदों और उपनिषदों की खूब तारीफ की, जिससे भारतीयों को अपनी संस्कृति पर गर्व हुआ और उनमें राष्ट्रवाद की भावना बढ़ी।
🎯 Exam Tip: यूरोपीय विद्वानों के योगदान का वर्णन करते समय प्रमुख विद्वानों के नाम और उनके द्वारा किए गए कार्यों (जैसे ग्रंथों का अनुवाद, सभ्यताओं की तुलना) को बताएं।
Question 10. 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम भारत में ब्रिटिश शासन के अवसान का एक प्रमुख कारण था। यह कहिए।
Answer: 1857 का स्वतंत्रता संग्राम भारत की आजादी के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कदम था। यह भारत में राष्ट्रीय आंदोलन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी। इस स्वतंत्रता की लड़ाई में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अलग-अलग शासक, सैनिक और नेता एक-दूसरे के साथ आए। हालांकि, यह आंदोलन संसाधनों की कमी, क्रांतिकारियों के बीच तालमेल की कमी और सही योजना के अभाव के कारण अपना मुख्य लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया।
अंग्रेजों ने गांवों को जला दिया और निर्दोष ग्रामीणों को मार डाला। इस तरह के अत्याचारों से भारतीयों में अंग्रेजों के प्रति बहुत नफरत पैदा हुई। अंग्रेजों से बदला लेने की भावना जागृत हुई। इसने आम जनता के मन में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के बीज बो दिए और भारत में राष्ट्रवाद व पुनर्जागरण की भावना पैदा हुई। इससे आम भारतीयों में भी साहस, आत्म-गौरव, कर्तव्यपरायणता और जीवन शक्ति का विकास हुआ। वीर सावरकर के अनुसार, "यह स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए पहला युद्ध था। यह सिर्फ एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि एक सामाजिक ज्वालामुखी था जिसमें दबी हुई शक्तियों ने अपनी अभिव्यक्ति पाई।"
In simple words: 1857 का संग्राम भारत की आजादी के लिए एक बड़ा कदम था। अंग्रेजों के अत्याचारों से लोगों में गुस्सा भरा, और वे स्वतंत्रता के लिए लड़ने लगे। यह लड़ाई भले ही पूरी तरह सफल न हुई हो, पर इसने भारत में राष्ट्रवाद की भावना को बहुत मजबूत किया।
🎯 Exam Tip: 1857 के संग्राम के महत्व को बताते हुए उसके तात्कालिक प्रभावों (जैसे राष्ट्रीय भावना का उदय, अंग्रेजों के प्रति नफरत) और उसकी सीमाओं (जैसे समन्वय की कमी) दोनों को शामिल करें।
Question 11. भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के प्रमुख क्रान्तिकारी नेताओं के नाम लिखिए।
Answer: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों का बड़ा योगदान रहा है। इनके सहयोग के बिना स्वतंत्रता की बात सोचना भी बेकार है। इन स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी नेताओं के नाम निम्नलिखित हैं:
1. श्याम जी कृष्ण वर्मा
2. मैडम भीकाजी कामा
3. रासबिहारी बोस
4. लाला हरदयाल
5. सोहन सिंह भकना
6. विनायक दामोदर सावरकर
7. उबैदुल्ला सिंधी
8. मानवेन्द्रनाथ राय
9. एम. बरकतुल्ला
10. अजीत सिंह
11. वी. एस अय्यर
In simple words: श्याम जी कृष्ण वर्मा, मैडम भीकाजी कामा, रासबिहारी बोस, लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, विनायक दामोदर सावरकर, उबैदुल्ला सिंधी, मानवेन्द्रनाथ राय, एम. बरकतुल्ला, अजीत सिंह, और वी. एस अय्यर कुछ प्रमुख क्रांतिकारी नेता थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी।
🎯 Exam Tip: जब नेताओं के नाम पूछे जाएं, तो कम से कम 4-5 प्रमुख नाम सही ढंग से याद रखें।
Question 12. राष्ट्रीय आन्दोलन का युग (1920-1947) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: 1920 से 1947 तक के समय को राष्ट्रीय आंदोलन का युग कहा जाता है। इस दौरान, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में देश में स्वतंत्रता आंदोलनों को एक नई दिशा मिली। दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद महात्मा गांधी ने भारतीय राजनीति में सक्रिय रूप से प्रवेश किया। उन्होंने अपने अहिंसक आंदोलनों से देश की आम जनता को स्वतंत्रता आंदोलनों से जोड़ा।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1919 में असहयोग आंदोलन, 1929 में सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन चलाए गए। ये आंदोलन बहुत सफल रहे। इन आंदोलनों ने भारत से ब्रिटिश शासन के अंत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत के समय, 8 अगस्त, 1942 को गांधीजी द्वारा दिया गया भारत छोड़ो प्रस्ताव का भाषण बहुत प्रभावी और मार्मिक था, जिसे पूरे देश का समर्थन मिला।
In simple words: 1920 से 1947 का समय राष्ट्रीय आंदोलन का मुख्य दौर था, जब गांधीजी ने असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे बड़े आंदोलन चलाए। इन आंदोलनों ने जनता को एकजुट किया और ब्रिटिश शासन के खत्म होने में बड़ी भूमिका निभाई।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आंदोलन के युग का वर्णन करते समय महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए प्रमुख आंदोलनों (असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो) और उनके योगदान को स्पष्ट करें।
Question 13. भारत को स्वतन्त्रता प्रदान करने के लिए ब्रिटिश शासन पर किन-किन महाशक्तियों का प्रभाव पड़ा? बताइए।
Answer: पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ दो बड़ी विश्व शक्तियां बन कर उभरे। इससे ब्रिटेन की स्थिति कमजोर हो गई। इन दोनों शक्तियों ने उपनिवेशवाद का विरोध किया। दुनिया के कई अन्य देशों में भी उपनिवेशवाद और राजतंत्र के खिलाफ क्रांतियां हो रही थीं। जर्मनी, रूस, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन जैसे देशों ने भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया।
1945 में इंग्लैंड में हुए आम चुनावों में सत्ताधारी पार्टी हार गई, और चर्चिल की जगह लेबर पार्टी के क्लीमेंट एटली ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। उनकी भारत के प्रति सहानुभूति थी। उनके चुनावी घोषणापत्र में भी भारत को स्वतंत्र करने का उल्लेख था। इससे स्वतंत्रता का मार्ग और प्रशस्त हुआ।
In simple words: विश्व युद्धों के बाद अमेरिका और सोवियत संघ जैसी नई शक्तियों के उदय से ब्रिटेन कमजोर हुआ। इन देशों ने उपनिवेशवाद का विरोध किया और भारत की आजादी का समर्थन किया। 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनने और क्लीमेंट एटली के प्रधानमंत्री बनने से भारत की आजादी का रास्ता और आसान हो गया।
🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता आंदोलन पर बाहरी प्रभावों का उल्लेख करते समय विश्व युद्धों, महाशक्तियों के उदय और ब्रिटिश राजनीतिक बदलावों को जोड़कर समझाएं।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. 19वीं सदी के किन-किन सामाजिक एवं राजनैतिक संगठनों ने भारतवासियों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित करने का कार्य किया ? विस्तार से बताइए।
Answer: 19वीं सदी के प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने धार्मिक पुनरुत्थान और भारत के ऐतिहासिक गौरव के प्रति श्रद्धा के कारण भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित की। ये संगठन इस प्रकार हैं:
(1) **ब्रह्म समाज:** राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त, 1828 को ब्रह्म समाज की स्थापना की। यह वेद और उपनिषदों पर आधारित था और सभी धर्मों के प्रति सहनशील था। ब्रह्म समाज के माध्यम से राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का विरोध किया। उन्होंने 1829 में अंग्रेजी गवर्नर जनरल विलियम बेंटिंक से सती प्रथा विरोधी कानून बनवाकर इसे गैर-कानूनी घोषित कराया। इसके अलावा, उन्होंने बाल विवाह, बहु-विवाह, छुआछूत और नशा जैसी कुप्रथाओं का भी विरोध किया। वे पश्चिमी ज्ञान और शिक्षा को भारत के विकास और प्रगति के लिए जरूरी मानते थे। वे स्वतंत्रता और प्रशासन में स्वेच्छाचारिता के विरोधी थे। उन्होंने न्यायपालिका में सुधार, भूमिकर कम करने और सेना के भारतीयकरण की मांग की, जिससे भारतीय जनता में राष्ट्रवाद की भावना पैदा हुई। ब्रह्म समाज के प्रमुख सिद्धांत थे:
1. ईश्वर एक है, वही सृष्टि का निर्माता, पालक, अनादि, अनंत, निराकार है।
2. ईश्वर की उपासना किसी जाति या संप्रदाय के आध्यात्मिक तरीके से होनी चाहिए।
3. पाप कर्म के प्रायश्चित और बुरी आदतों के त्याग से ही मुक्ति मिलती है।
4. आत्मा अजर और अमर है, वह ईश्वर के प्रति जवाबदेह है।
5. आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना जरूरी है।
6. ब्रह्म समाज कर्मफल के सिद्धांत में विश्वास करता है।
(2) **आर्य समाज:** स्वामी दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल, 1875 को आर्य समाज की स्थापना की। स्वामी जी स्वराज्य, स्वधर्म और स्वदेशी के प्रबल समर्थक थे। आर्य समाज के माध्यम से उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों की आलोचना की और उन्हें दूर करने के लिए जनसमर्थन जुटाया। उन्होंने छुआछूत, बाल विवाह, कन्या वध, पर्दा प्रथा, मूर्ति पूजा, श्राद्ध, धार्मिक अंधविश्वासों और रूढ़ियों का विरोध किया। उन्होंने स्त्री शिक्षा और स्त्री अधिकारों का समर्थन किया और कहा कि वेदों के अध्ययन का अधिकार स्त्रियों को भी पुरुषों के बराबर है। आर्य समाज 'शुद्धि आंदोलन' में विश्वास रखता था, जिसमें विशेष परिस्थितियों में अन्य धर्म अपना चुके हिंदुओं को वैदिक रीति से शुद्ध करके दोबारा हिंदू धर्म में लाने पर जोर दिया जाता था। उनके सिद्धांत थे:
1. वेदों की सत्यता पर बल।
2. वैदिक रीति से हवन और मंत्र पाठ करना।
3. सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने पर बल दिया।
4. अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए।
5. पौराणिक विश्वासों, मूर्ति पूजा और अवतारवाद का विरोध करना।
6. स्त्री शिक्षा तथा विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहन देना।
7. ईश्वर सर्वशक्तिमान, निराकार और नित्य है।
8. सभी से धर्मानुसार प्रेमपूर्वक यथा योग्य व्यवहार करने पर बल दिया।
9. हिन्दी और संस्कृत भाषा के महत्व और प्रसार में वृद्धि करना।
10. सबकी उन्नति में अपनी उन्नति और सबकी भलाई में अपनी भलाई समझना।
(3) **इस्लामिक धार्मिक सुधार आंदोलन:** मुगल साम्राज्य के पतन के बाद मुसलमानों की स्थिति बिगड़ गई। मुसलमानों ने अंग्रेजी शिक्षा का भी विरोध किया। मुस्लिम समाज में कुरीतियों का बोलबाला था, जिससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी कम हो गई। इसी दौरान सर सैयद अहमद खां जैसे समाज सुधारकों ने मुसलमानों में फैली कुरीतियों को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने अलीगढ़ में मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने मुसलमानों को अंग्रेजों का वफादार बनने का संदेश दिया। बहावी आंदोलन ने मुस्लिम समाज से रूढ़ियों को दूर कर शिक्षा का प्रसार किया, जिससे मुसलमानों में सामाजिक और राजनीतिक विचार पैदा हुए और वे स्वतंत्रता के प्रति जागरूक हुए।
(4) **रामकृष्ण मिशन:** स्वामी रामकृष्ण परमहंस भारतीय संस्कृति को आध्यात्मिक मानते हुए उसे श्रेष्ठ सनातन संस्कृति मानते थे। उनके निधन के बाद उनके सबसे योग्य शिष्य स्वामी विवेकानंद ने 5 मई, 1897 को इस संस्था की स्थापना की। रामकृष्ण मिशन भारत के विभिन्न प्रांतों और अमेरिका, फिजी, मॉरीशस जैसे देशों में शाखाएं रखता है। रामकृष्ण मिशन ऐसे आदर्शों और सिद्धांतों का प्रचार करता है जिसे सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोग अपना सकें। इस मिशन के माध्यम से उपदेश, शिक्षा, चिकित्सा, अकाल, बाढ़, भूकंप और संक्रामक रोगों से पीड़ितों की सहायता का कार्य भी किया जाता है। स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से रूढ़िवादिता, अंधविश्वास, निर्धनता, अशिक्षा, छुआछूत और वर्गभेद को दूर करने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने जनकल्याण की भावना को भी प्रोत्साहित किया।
(5) **थियोसोफिकल सोसायटी:** थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना रूसी महिला मैडम ब्लेवेटस्की और अमेरिकी कर्नल ऑल्कॉट ने सितंबर 1875 में न्यूयॉर्क में की। ये दोनों 1879 में भारत आए। 1886 में, थियोसोफिकल सोसायटी का अंतरराष्ट्रीय कार्यालय अड्यार (मद्रास, अब चेन्नई) में खोला गया। इस संगठन का उद्देश्य पूर्वी धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन करना था। इस सोसायटी ने हिंदू, बौद्ध और पारसी धर्मों के उत्थान के लिए प्रयास किए। यह सोसायटी हिंदू धर्म के आध्यात्मिक दर्शन, कर्म सिद्धांत और आत्मा के पुनर्जन्म सिद्धांत का समर्थन करती है। इस सोसायटी ने भारतीयों में राष्ट्रीय गीत की भावना को भी विकसित किया। भारत में इस संस्था का आगमन स्वामी दयानंद सरस्वती के निमंत्रण पर हुआ था। 1893 में आयरलैंड की एनी बेसेंट ने इस सोसायटी के कार्य को गति दी और भारत में वैचारिक क्रांति की सूत्रधार बनीं। वह 1907 से 1933 तक थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्ष रहीं। उन्होंने भारत में थियोसोफिकल सोसायटी का खूब प्रचार-प्रसार किया।
In simple words: 19वीं सदी में ब्रह्म समाज, आर्य समाज, इस्लामिक सुधार आंदोलन, रामकृष्ण मिशन और थियोसोफिकल सोसायटी जैसे संगठनों ने समाज सुधार और शिक्षा के माध्यम से भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना जगाई। उन्होंने कुरीतियों का विरोध किया और लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने को प्रेरित किया, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन मजबूत हुआ।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, हर संगठन के मुख्य उद्देश्य, स्थापना की तारीख/संस्थापक और उनके प्रमुख योगदानों को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
Question 2. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का उदय एवं उनके कार्यकाल का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: **भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उदय:**
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने की। ह्यूम ने 72 राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में कांग्रेस की नींव रखी। कांग्रेस के 72 कार्यकर्ताओं में दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, दिनशॉ एदलजी वाचा, काशीनाथ तेलंग, वी. राघवाचार्य, एन.जी. चंद्रावरकर और एम. सुब्रमण्यम जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।
कांग्रेस के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता बंगाल के जाने-माने वकील व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की। इसके महासचिव स्वयं ए. ओ. ह्यूम बने। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन के मार्गदर्शन में गठित इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारत में ब्रिटिश शासन के प्रति बढ़ते असंतोष को शांत करना था, ताकि कोई बड़ा विद्रोह न हो। हम कह सकते हैं कि ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना एक 'सुरक्षा वाल्व' के रूप में की थी।
उनका मानना था कि भारतीय जनता में देशभक्ति की राष्ट्रीय भावनाओं को सही दिशा दी जाए और भारतीयों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार लाया जाए। दिसंबर 1906 में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कलकत्ता में हुए अधिवेशन में उन्होंने बताया कि कांग्रेस का उद्देश्य संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य उपनिवेशों की तरह 'स्वशासन' प्राप्त करना था।
**कांग्रेस का कार्यकाल:**
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकाल को तीन मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
1. **उदारवादी राष्ट्रीयता का काल (1885-1905):** 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के साथ ही इस पर उदारवादी नेताओं का वर्चस्व स्थापित हो गया। तत्कालीन उदारवादी राष्ट्रीय नेताओं में दादाभाई नौरोजी, महादेव गोविंद रानाडे, फिरोजशाह मेहता, सुरेंद्र नाथ बनर्जी, दिनशॉ एदलजी वाचा, व्योमेश चंद्र बनर्जी, गोपालकृष्ण गोखले और पंडित मदनमोहन मालवीय आदि प्रमुख थे। उदारवादी नेता अंग्रेजों की न्यायप्रियता में विश्वास रखते थे और अंग्रेजों को अपना दुश्मन नहीं, बल्कि दोस्त मानते थे। ये नेता प्रार्थना-पत्रों, आवेदनों, स्मरण-पत्रों और प्रतिनिधिमंडलों के जरिए सरकार के सामने अपनी मांगें रखते थे। उनके इस लचीले और संयमित व्यवहार के कारण ही उग्रपंथी नेताओं ने इसे 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' कहा।
2. **उग्रराष्ट्रीयता का काल (1906-1919):** इस काल में एक ओर उग्र राष्ट्रवादी आंदोलन और दूसरी ओर क्रांतिकारी आंदोलन चलाए गए। दोनों ही ब्रिटिश शासन से मुक्ति और पूर्ण स्वराज्य की प्राप्ति के लिए लड़ रहे थे। उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा के लोग बहिष्कार आंदोलन को आधार बनाकर लड़ रहे थे, जबकि क्रांतिकारी विचारधारा के लोग बम और बंदूकों का उपयोग करके स्वतंत्रता पाना चाहते थे। जहां एक ओर उग्र राष्ट्रवादी शांतिपूर्ण सक्रिय राजनीतिक आंदोलनों में विश्वास रखते थे, वहीं क्रांतिकारी अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए शक्ति और हिंसा के उपयोग में विश्वास करते थे। उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रमुख नेताओं में बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, विपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष आदि थे। उनके द्वारा चलाए गए आंदोलनों में आम जनता में राष्ट्रीय भावना तेज हुई और ब्रिटिश सरकार में डर का माहौल बना। स्वदेशी आंदोलन को देश की मुक्ति का साधन माना गया, जिससे लोगों में आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा हुई।
3. **राष्ट्रीय आंदोलन का युग (1920-1947):** गांधीजी ने 1915 में भारतीय राजनीति में प्रवेश किया। गांधीजी भारत के उन चमकते सितारों में से एक थे जिन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और राष्ट्रीय एकता के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। उन्होंने अपने अहिंसक आंदोलनों से देश के आम लोगों को स्वतंत्रता आंदोलनों से जोड़ा। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920-22), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1929) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। कांग्रेस के नेतृत्व में देश में स्वतंत्रता आंदोलनों को एक नई दिशा मिली। हालांकि स्वतंत्रता मिलने के बाद महात्मा गांधी ने कहा था कि कांग्रेस का भविष्य में राजनीतिक दुरुपयोग न हो, इसलिए इसे भंग कर देना चाहिए।
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ए. ओ. ह्यूम ने 1885 में की, जिसका उद्देश्य अंग्रेजों के खिलाफ बढ़ते असंतोष को रोकना था। इसके कार्यकाल को उदारवादी, उग्रवादी और गांधीवादी युग में बांटा गया, जहां नेताओं ने अलग-अलग तरीकों से स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, जिसमें प्रार्थना, बहिष्कार, हिंसा और अहिंसक आंदोलन शामिल थे।
🎯 Exam Tip: कांग्रेस के उदय और कार्यकाल पर टिप्पणी करते समय, स्थापना, उद्देश्य और तीनों चरणों (उदारवादी, उग्रवादी, गांधीवादी) के प्रमुख नेताओं और आंदोलनों का उल्लेख करें।
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