RBSE Solutions Class 11 Political Science Chapter 20 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

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RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्लासी का युद्ध सन्........में हुआ।
Answer: प्लासी का युद्ध वर्ष 19571 में हुआ था। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी।
In simple words: प्लासी का युद्ध 19571 में हुआ था।

🎯 Exam Tip: इतिहास के प्रश्नों में हमेशा सही वर्ष का उल्लेख करें।

 

Question 2. महात्मा गाँधी ने 1930 में कौन-सा आन्दोलन चलाया?
Answer: महात्मा गाँधी ने 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना था।
In simple words: महात्मा गाँधी ने 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: गाँधी जी के आंदोलनों के नाम और उनके शुरू होने के वर्ष याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. चर्चिल ने 1942 में क्रिप्स मिशन के भारत क्यों भेजा?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों ने ब्रिटिश प्रधानमन्त्री चर्चिल पर दबाव डाला। वे चाहते थे कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों को युद्ध में सहयोग करने के लिए राजी करे। इसी राजनीतिक और वैधानिक गतिरोध को खत्म करने के लिए चर्चिल ने ब्रिटिश समाजवादी नेता सर स्टेफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में एक मिशन 22 मार्च, 1942 को भारत भेजा।
In simple words: चर्चिल ने क्रिप्स मिशन को भारत इसलिए भेजा ताकि भारतीय विश्व युद्ध में उनका साथ दें और भारत के राजनीतिक मुद्दे सुलझें।

🎯 Exam Tip: क्रिप्स मिशन का उद्देश्य और इसकी प्रमुख सिफारिशें हमेशा याद रखें, क्योंकि यह स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

 

Question 5. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम के कुल कितनी धाराएँ थीं?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम में कुल 20 धाराएँ थीं। ये धाराएँ भारत के विभाजन और उसकी नई प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित थीं।
In simple words: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम में कुल 20 धाराएँ (नियम) थीं।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की प्रमुख धाराओं की संख्या और उनका मुख्य विषय याद रखना सहायक होता है।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पूर्वी पाकिस्तान में कौन – कौन – सी रियासतें मिलाई गईं?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार भारत को 15 अगस्त, 1947 को दो स्वतन्त्र राष्ट्रों- भारत और पाकिस्तान में बाँट दिया गया था। इन दोनों देशों की सीमाएँ सीमा आयोग के अध्यक्ष रेडक्लिफ ने तय की थीं। इस विभाजन के तहत पूर्वी पाकिस्तान में पूर्वी बंगाल और सिलहट रियासतें शामिल की गईं।
In simple words: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के बाद पूर्वी पाकिस्तान में पूर्वी बंगाल और सिलहट रियासतें शामिल की गई थीं।

🎯 Exam Tip: भारत विभाजन से जुड़े प्रमुख प्रांतों और रियासतों के नाम याद रखें।

 

Question 2. ब्रिटिश प्रधानमन्त्री की 1 की 1947 की घोषणा लिखिए।
Answer: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री क्लीमेंट एटली ने 20 फरवरी, 1947 को ब्रिटिश संसद के 'हाउस ऑफ कॉमन्स' में एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि अंग्रेज 30 जून, 1948 तक भारत में एक उत्तरदायी सरकार को सत्ता सौंप देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इससे पहले ही भारत के राजनीतिक दल किसी समझौते पर पहुँच जाते हैं, तो सत्ता पहले भी सौंपी जा सकती है।
In simple words: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने 1947 में घोषणा की थी कि अंग्रेज 30 जून, 1948 तक भारत को सत्ता सौंप देंगे।

🎯 Exam Tip: एटली की घोषणा की तिथि और मुख्य बिन्दु, विशेषकर भारत को सत्ता हस्तान्तरण की समय-सीमा, याद रखें।

 

Question 3. क्रिप्स मिशन ने क्या प्रस्ताव रखे?
Answer: क्रिप्स मिशन को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतियों का सहयोग पाने के लिए ब्रिटिश प्रधानमन्त्री चर्चिल ने भारत भेजा था। सर स्टेफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में यह मिशन 22 मार्च, 1942 को भारत पहुँचा। क्रिप्स ने संवैधानिक गतिरोध दूर करने के लिए एक योजना दी जिसे क्रिप्स प्रस्ताव कहते हैं। इस प्रस्ताव के दो मुख्य भाग थे:
• युद्ध के समय: इसमें यह कहा गया कि युद्ध खत्म होने तक देश की रक्षा की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार पर रहेगी।
• युद्ध के बाद: इसमें भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य देने और एक संविधान सभा बनाने का प्रस्ताव था। यह प्रस्ताव राजनीतिक दलों को पसंद नहीं आया, इसलिए इसे 11 अप्रैल, 1942 को वापस ले लिया गया।
In simple words: क्रिप्स मिशन ने युद्ध के बाद भारत को आज़ादी और संविधान सभा बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे अस्वीकार कर दिया।

🎯 Exam Tip: क्रिप्स मिशन के मुख्य प्रस्तावों और उसके अस्वीकार किए जाने के कारणों को समझें।

 

Question 4. 1947 के अधिनियम में देशी रियासतों के लिए क्या विकास रखे गये?
Answer: ब्रिटिश संसद ने 4 जुलाई, 1947 को भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक प्रस्तावित किया था, जिसे 18 जुलाई, 1947 को पास कर दिया गया। इस अधिनियम में 20 धाराएँ थीं। भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में यह बताया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बनने के बाद देशी रियासतों पर ब्रिटिश सम्राट की सर्वोच्चता खत्म हो जाएगी। ब्रिटिश सरकार की देशी रियासतों के साथ सभी संधियाँ और समझौते भी खत्म हो जाएँगे। इन रियासतों को यह छूट दी गई थी कि वे भारत या पाकिस्तान में से किसी भी देश में मिल सकती हैं या स्वतन्त्र रह सकती हैं।
In simple words: 1947 के अधिनियम ने देशी रियासतों पर से ब्रिटिश राज खत्म कर दिया और उन्हें भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या आज़ाद रहने का विकल्प दिया।

🎯 Exam Tip: देशी रियासतों के भविष्य से जुड़े प्रावधानों को याद रखें, क्योंकि यह भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण था।

 

Question 5. द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् भारत की स्थिति में क्या परिवर्तन हुए?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध में जनता की इच्छा के विरुद्ध भारत को इसमें शामिल किया गया था। ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों का सहयोग पाने और पाकिस्तान की माँग से उपजे गतिरोध को दूर करने के लिए कई कोशिशें कीं। 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी, जिसका भारत के प्रति सकारात्मक रुख था।
प्रधानमन्त्री एटली ने भारत की समस्या के हल के लिए अपने मन्त्रिमण्डल के तीन सदस्यों- पैथिक लारेंस, सर स्टेफर्ड क्रिप्स और ए. वी. एलेक्जेण्डर को भारत भेजा। उन्होंने भारत में संघ राज्य बनाने, संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा गठित करने और अन्तरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया।
काँग्रेस ने इन प्रस्तावों को मान लिया, लेकिन पाकिस्तान बनाने की माँग अस्वीकार होने से मुस्लिम लीग ने विरोध किया। मुस्लिम लीग ने 'प्रत्यक्ष कार्यवाही' की नीति अपनाई, जिससे देश में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए। ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारत को सत्ता सौंप देगी।
इस अवधि से पहले ही भारतीयों को सत्ता सौंपी जा सकती थी। गवर्नर जनरल लॉर्ड माउण्टबेटन ने काँग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता कराया। भारत को दो अधिराज्यों में बांटने की माउण्टबेटन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद ब्रिटिश सरकार ने 15 अगस्त, 1947 को भारत और पाकिस्तान को सत्ता सौंप दी।
(3) नए संविधान के अन्तर्गत एक नई सरकार के गठन होने तक अन्तरिम सरकार की स्थापना करना: संविधान बनने और नई सरकार के गठन तक के लिए अंतरिम सरकार बनाई जाएगी। इस सरकार में 14 सदस्य होंगे, जिनमें 6 काँग्रेस के, 5 मुस्लिम लीग के, 1 भारतीय ईसाई, 1 सिख और 1 पारसी होंगे।
(4) पाकिस्तान निर्माण की माँग अस्वीकृतः कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान के गठन की माँग इसलिए अस्वीकार कर दी क्योंकि इससे सांप्रदायिक अल्पसंख्यकों की समस्या हल नहीं हो पाती। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम आबादी रहती और भारत में भी मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती।
• दोनों क्षेत्र 2000 किलोमीटर से ज़्यादा दूर थे।
• सिख भी अपना अलग राज्य चाहते थे।
• सशस्त्र सेनाओं का विभाजन भी खतरनाक हो सकता था।
• कैबिनेट मिशन ने समूह व्यवस्था और प्रांतों का विभाजन मुस्लिम लीग को संतुष्ट करने के लिए किया था, ताकि मुस्लिम बहुल प्रांतों में उन्हें पूरी स्वायत्तता मिल सके।
• मुस्लिम लीग और काँग्रेस ने समूह व्यवस्था की अलग-अलग व्याख्या की थी। काँग्रेस के अनुसार समूह बनाना वैकल्पिक था, जबकि लीग के अनुसार यह अनिवार्य था। बाद में कैबिनेट मिशन ने भी समूह बनाने को अनिवार्य बताया।
In simple words: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतन्त्रता देने के लिए कैबिनेट मिशन और माउंटबेटन योजना जैसे कई प्रयास किए, जिसके परिणामस्वरूप भारत का विभाजन और 1947 में सत्ता का हस्तान्तरण हुआ।

🎯 Exam Tip: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भारत की राजनीतिक स्थिति और ब्रिटिश सरकार के प्रयासों का विस्तृत वर्णन करने के लिए मुख्य घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 2. माउण्टबेटन योजना का वर्णन कीजिए।
Answer: माउण्टबेटन योजना को 'मन-बांटन योजना' या '3 जून योजना' या 'डिकी बर्ड प्लान' भी कहते हैं।
ब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारत को सत्ता सौंप देगी। यदि इससे पहले भारतीय राजनीतिक दलों में समझौता हो जाता है तो सत्ता पहले भी सौंपी जा सकती है। 24 मार्च, 1947 को माउण्टबेटन भारत के वायसराय बनकर आए।
पद ग्रहण करते ही उन्होंने काँग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं से बात की। मुस्लिम लीग पाकिस्तान के अलावा कोई और विकल्प मानने को तैयार नहीं थी। माउण्टबेटन ने काँग्रेस से देश के विभाजन की कड़वी सच्चाई को स्वीकार करने का अनुरोध किया।
योजना के मुख्य बिन्दु:
(1) बंगाल व पंजाब में प्रान्तीय विधानमण्डल के दो भाग होंगे: एक में मुस्लिम बहुल जिले और दूसरे में बाकी जिले होंगे। मुस्लिम बहुल जिलों और शेष जिलों के प्रतिनिधि अलग-अलग होंगे।
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को तय करना था कि वे भारत में रहेंगे या पाकिस्तान में शामिल होंगे। विभाजन की स्थिति में दो राज्य और दो संविधान सभाएँ बनेंगी। पंजाब, बंगाल व असम में विभाजन के लिए सीमा आयोग बनेगा।
(2) असम के सिलहट और उत्तर – पश्चिमी सीमान्त प्रान्त जिले में जनमत संग्रह द्वारा यह तय होना था कि वे पाकिस्तान में मिलना चाहते हैं या नहीं।
(3) सिन्ध व बलूचिस्तान में प्रान्तीय विधानमण्डल को यह निर्णय सीधे लेना था।
(4) देशी रियासतों को स्वतन्त्र रहने का अधिकार नहीं दिया गया। उन्हें भारत या पाकिस्तान में से एक राज्य में शामिल होना था, लेकिन हैदराबाद की पाकिस्तान में शामिल होने की माँग अस्वीकार कर दी गई।
(5) 15 अगस्त, 1947 को भारत और पाकिस्तान को 'डोमिनियन स्टेट्स' के आधार पर सत्ता हस्तान्तरित की जाएगी। उन्हें यह स्वतन्त्रता होगी कि वे राष्ट्रमण्डल को छोड़ सकते हैं।
काँग्रेस के नेता पहले भारत के विभाजन के खिलाफ थे। महात्मा गाँधी ने तो यहाँ तक कहा था कि "देश का विभाजन मेरी लाश पर होगा।" जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आजाद सभी नेता भी पहले विभाजन के विरुद्ध थे।
लेकिन मुस्लिम लीग की सीधी कार्यवाही से हो रहे नरसंहार से दुखी होकर और भविष्य में शान्ति बनाए रखने के लिए, उन्होंने माउण्टबेटन की विभाजन योजना को स्वीकार कर लिया। अब्दुल गफ्फार खाँ और पुरुषोत्तम दास टण्डन अंत तक इसका विरोध करते रहे। इतिहास में इसे 'मन बांटन योजना' के नाम से भी जाना जाता है।
काँग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता हो गया। माउण्टबेटन की 3 जून, 1947 को दी गई योजना को स्वीकृति मिलने के बाद ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि 15 अगस्त, 1947 तक भारत और पाकिस्तान को सत्ता हस्तान्तरित कर दी जाएगी और भारत के स्वतन्त्र होने का रास्ता खुल गया।
In simple words: माउण्टबेटन योजना ने भारत को दो देशों- भारत और पाकिस्तान में बाँटने का प्रस्ताव दिया। इस योजना के तहत प्रांतों का विभाजन हुआ और रियासतों को शामिल होने का विकल्प दिया गया।

🎯 Exam Tip: माउण्टबेटन योजना के प्रमुख बिन्दुओं, जैसे प्रांतों का विभाजन, रियासतों का भविष्य, और सत्ता हस्तान्तरण की तिथि को याद रखना चाहिए।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 वस्तुनिष्ठ

 

Question 2. ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक प्रस्तुत किया गया -
(अ) 18 जुलाई, 1947
(ब) 4 जुलाई, 1947
(स) 20 फरवरी, 1947
(द) 15 अगस्त, 1947
Answer: (ब) 4 जुलाई, 1947
In simple words: भारतीय स्वतंत्रता विधेयक को ब्रिटिश संसद में 4 जुलाई, 1947 को पेश किया गया था।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों की तारीखें और उनके पारित होने के वर्ष याद रखें।

 

Question 3. नौ सैनिक विद्रोह हुआ -
(अ) 1943 में
(ब) 1944 में
(स) 1945 में
(द) 1946 में।
Answer: (द) 1946 में
In simple words: नौसैनिकों ने 1946 में विद्रोह किया था, यह एक महत्वपूर्ण घटना थी।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश राज के खिलाफ हुए प्रमुख विद्रोहों के वर्ष और उनके कारणों को याद रखें।

 

Question 4. क्रिप्स मिशन भारत आया -
(अ) 1940 में
(ब) 1941 में
(स) 1942 में
(द) 1943 में।
Answer: (स) 1942 में
In simple words: क्रिप्स मिशन 1942 में भारत आया था।

🎯 Exam Tip: क्रिप्स मिशन के आने का वर्ष और उसका उद्देश्य याद रखें।

 

Question 5. ब्रिटिश सम्राट के पद से भारत का सम्राट पद नाम हटाया गया (अ) 1935 के अधिनियम द्वारा –
(ब) 1919 के अधिनियम द्वारा
Answer: (यह प्रश्न अधूरा है और इसके विकल्प भी। उत्तर उपलब्ध नहीं है।) (The question is incomplete, options also. Answer not available.)

🎯 Exam Tip: अधूरे प्रश्नों को छोड़ दें या संबंधित विषय से जुड़ी पूरी जानकारी याद रखें।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. प्लासी का युद्ध कब हुआ?
(अ) 1757 ई. को
(ब) 1788 ई. को
(स) 1857 ई. को
(द) 1942 ई. को।
Answer: (अ) 1757 ई. को
In simple words: प्लासी का युद्ध 1757 में हुआ था।

🎯 Exam Tip: भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण युद्धों की तारीखें और उनके परिणाम याद रखें।

 

Question 2. काँग्रेस के किस अधिवेशन में 26 जनवरी, 1930 को सम्पूर्ण देश में प्रथम स्वतन्त्रता दिवस मनाए जाने की घोषणा की गयी?
(अ) बम्बई
(ब) कलकत्ता
(स) लाहौर
(द) नागपुर।
Answer: (स) लाहौर
In simple words: लाहौर अधिवेशन में 26 जनवरी, 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया गया था।

🎯 Exam Tip: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशनों और उनमें लिए गए फैसलों को याद रखें।

 

Question 3. निम्न में से किस वर्ष भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ हुआ?
(अ) 1930 ई.
(ब) 1942 ई.
(स) 1946 ई.
(द) 1947 ई.
Answer: (ब) 1942 ई.
In simple words: भारत छोड़ो आन्दोलन 1942 में शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन का वर्ष और उसके मुख्य नारे याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 1945 ई. में ब्रिटेन में किस पार्टी की सरकार बनी?
(अ) लेबर पार्टी
(ब) डेमोक्रेटिक पार्टी
(स) काँग्रेस पार्टी
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) लेबर पार्टी
In simple words: 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी थी।

🎯 Exam Tip: विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में राजनीतिक बदलाव और उसका भारत पर प्रभाव याद रखें।

 

Question 6. क्लीमेंट एटली ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री बने -
(अ) 26 जुलाई, 1945 को
(ब) 15 अगस्त, 1945 को
(स) 8 जुलाई, 1942 को
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) 26 जुलाई, 1945 को
In simple words: क्लीमेंट एटली 26 जुलाई, 1945 को ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री बने।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण प्रधानमंत्रियों और उनके पदभार ग्रहण करने की तारीखें याद रखना सहायक होता है।

 

Question 7. निम्न में से कौन केबिनेट मिशन का सदस्य नहीं था?
(अ) पैथिक लारेंस
(ब) सर स्टेफर्ड क्रिप्स
(स) ए. वी. एलेक्जेण्डर
(द) एटली।
Answer: (द) एटली।
In simple words: एटली केबिनेट मिशन के सदस्य नहीं थे, वे उस समय ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री थे।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के सदस्यों के नाम और उनके पद याद रखें ताकि ऐसे प्रश्नों का उत्तर दे सकें।

 

Question 9. केबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तुत योजना में सम्मिलित प्रस्ताव था
(अ) भारत में संघ राज्य की स्थापना करना।
(ब) संविधान सभा गठित करना।
(स) अन्तरिम सरकार की स्थापना करना
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: कैबिनेट मिशन की योजना में भारत में संघ राज्य, संविधान सभा और एक अंतरिम सरकार बनाने के सभी प्रस्ताव शामिल थे।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के सभी प्रमुख प्रस्तावों को याद रखें क्योंकि ये भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण थे।

 

Question 10. ब्रिटिश सरकार 30 जून, 1948 तक भारत की उत्तरदायी सरकार को सत्ता हस्तान्तरित कर देगी। यह घोषणा किस ब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने की थी?
(अ) चर्चिल'
(ब) एटली
(स) मार्गरेट थैचर
(द) महारानी विक्टोरिया।
Answer: (ब) एटली
In simple words: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने 1948 तक भारत को सत्ता सौंपने की घोषणा की थी।

🎯 Exam Tip: भारत की स्वतंत्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाओं और उन्हें करने वाले नेताओं के नाम याद रखें।

 

Question 11. भारत को दो अधिराज्यों में विभाजित करने की माउण्टबेटन योजना को स्वीकृति प्राप्त हुई थी।
(अ) 3 जून, 1947 को
(ब) 15 अगस्त, 1947 को
(स) 4 जुलाई, 1947 को
(द) 18 जुलाई, 1947 को।
Answer: (अ) 3 जून, 1947 को
In simple words: भारत को दो देशों में बांटने की माउण्टबेटन योजना को 3 जून, 1947 को मंजूरी मिली थी।

🎯 Exam Tip: माउण्टबेटन योजना की घोषणा की तिथि और उसके मुख्य प्रावधानों को याद रखें।

 

Question 13. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 पारित किया गया -
(अ) क्रिप्स योजना को क्रियान्वित करने के लिए
(ब) केबिनेट मिशन योजना को क्रियान्वित करने के लिए
(स) माउण्टबेटन योजना को क्रियान्वित करने के लिए
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (स) माउण्टबेटन योजना को क्रियान्वित करने के लिए
In simple words: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 को माउण्टबेटन योजना को लागू करने के लिए पारित किया गया था।

🎯 Exam Tip: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के पारित होने का मुख्य कारण और किस योजना को लागू करने के लिए यह किया गया था, इसे याद रखें।

 

Question 14. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की प्रमुख विशेषता नहीं थी -
(अ) दो अधिराज्यों की स्थापना
(ब) दोनों अधिराज्यों के क्षेत्रों का वर्णन
(स) भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य प्रदान करना
(द) देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता का अन्त।
Answer: (स) भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य प्रदान करना
In simple words: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का उद्देश्य भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देना था, न कि औपनिवेशिक स्वराज्य।

🎯 Exam Tip: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 की प्रमुख विशेषताओं को ध्यान से पढ़ें और पहचानें कि कौन-सी विशेषता इसमें शामिल नहीं थी।

 

Question 15. निम्न में से यह किसका कथन है, देश का विभाजन मेरी लाश पर होगा।"
(अ) पं. जवाहर लाल नेहरू
(ब) महात्मा गाँधी।
(स) पुरुषोत्तम दास टण्डन
(द) अब्दुल गफ्फार खाँ।
Answer: (ब) महात्मा गाँधी।
In simple words: महात्मा गाँधी ने कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महापुरुषों के महत्वपूर्ण कथनों को याद रखें।

 

Question 18. स्वतन्त्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने –
(अ) लॉर्ड माउण्टबेटन
(ब) क्लीमेंट एटली
(स) चर्चिल
(द) सी. राजगोपालचारी।
Answer: (अ) लॉर्ड माउण्टबेटन
In simple words: लॉर्ड माउण्टबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल थे।

🎯 Exam Tip: भारत के महत्वपूर्ण पदों पर रहे पहले व्यक्तियों के नाम याद रखें।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत में अंग्रेजी राज्य का अल कब हुआ?
Answer: भारत में अंग्रेजी राज्य का अंत 15 अगस्त, 1947 को हुआ। इसी दिन भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली थी।
In simple words: भारत में अंग्रेजी शासन का अंत 15 अगस्त, 1947 को हुआ।

🎯 Exam Tip: भारत की स्वतंत्रता की तिथि और उस दिन की प्रमुख घटनाएँ याद रखें।

 

Question 2. काँग्रेस ने किस अधिवेशन में भारत में 26 जनवरी, 1930 को प्रथम स्वतन्त्रता दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया?
Answer: काँग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में 26 जनवरी, 1930 को पूरे देश में पहला स्वतन्त्रता दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया था।
In simple words: काँग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में 26 जनवरी, 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया।

🎯 Exam Tip: लाहौर अधिवेशन के महत्व और उसमें लिए गए 'पूर्ण स्वराज्य' के प्रस्ताव को याद रखें।

 

Question 3. महात्मा गाँधी ने 1942 में कौन-सा आन्दोलन चलाया?
Answer: महात्मा गाँधी ने 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन चलाया। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़ा जन आन्दोलन था।
In simple words: महात्मा गाँधी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन के मुख्य नारे और उसके परिणामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 के निर्माण के लिए किन राष्ट्रीय गतिविधियों ने ब्रिटिश सरकार को बाध्य किया?
Answer: प्रतिवर्ष 26 जनवरी को मनाया जाने वाला स्वतन्त्रता दिवस, भारत छोड़ो आन्दोलन, आजाद हिन्द फौज के कार्य और नौ सैनिक विद्रोह जैसी राष्ट्रीय गतिविधियों ने ब्रिटिश सरकार को भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 के निर्माण के लिए मजबूर किया।
In simple words: स्वतंत्रता दिवस समारोह, भारत छोड़ो आंदोलन, आजाद हिन्द फौज और नौसैनिक विद्रोह जैसी घटनाओं ने ब्रिटिश सरकार को 1947 का स्वतंत्रता अधिनियम बनाने पर मजबूर किया।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख घटनाओं और उनके प्रभावों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें।

 

Question 7. द्वितीय विश्वयुद्ध में भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने एवं पाकिस्तान की माँग के कारण संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए किन्हीं दो प्रयासों के नाम लिखिए।
Answer: संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए दो प्रमुख प्रयास थे:
• क्रिप्स प्रस्ताव
• केबिनेट मिशन योजना।
In simple words: ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों का सहयोग पाने और गतिरोध दूर करने के लिए क्रिप्स प्रस्ताव और कैबिनेट मिशन योजना का सहारा लिया।

🎯 Exam Tip: संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजे गए प्रमुख मिशनों के नाम और उनके वर्ष याद रखें।

 

Question 8. ब्रिटिश प्रधानमन्त्री चर्चिल ने कब व किसके नेतृत्व में क्रिप्स मिशन भारत भेजा?
Answer: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री चर्चिल ने 22 मार्च, 1942 को सर स्टेफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन भारत भेजा।
In simple words: चर्चिल ने 22 मार्च, 1942 को सर स्टेफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन को भारत भेजा।

🎯 Exam Tip: क्रिप्स मिशन के प्रमुख नेता और उसके भारत आने की तारीख याद रखें।

 

Question 9. क्रिप्स प्रस्ताव किसे कहा जाता है?
Answer: 1942 ई. में ब्रिटिश समाजवादी नेता सर स्टेफर्ड क्रिप्स ने भारत में संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए जो योजना दी, उसे क्रिप्स प्रस्ताव कहा जाता है।
In simple words: सर स्टेफर्ड क्रिप्स ने 1942 में भारत में संवैधानिक समस्याएँ सुलझाने के लिए जो योजना दी, उसे क्रिप्स प्रस्ताव कहते हैं।

🎯 Exam Tip: क्रिप्स प्रस्ताव की परिभाषा और उसके मुख्य उद्देश्यों को याद रखें।

 

Question 12. ब्रिटेन की किस राजनीतिक पार्टी को भारतीयों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण था?
Answer: ब्रिटेन की लेबट पार्टी को भारतीयों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण था। इस पार्टी ने भारत की स्वतंत्रता का समर्थन किया था।
In simple words: ब्रिटेन की लेबट पार्टी भारतीयों के प्रति अच्छा रवैया रखती थी।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश राजनीतिक दलों और उनके भारत के प्रति रुख को याद रखें।

 

Question 13. सन् 1945 में ब्रिटेन में किस पार्टी की सरकार बनी?
Answer: सन् 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी थी। यह सरकार भारत के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखती थी।
In simple words: 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी।

🎯 Exam Tip: विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार के बदलाव और उसके भारत नीति पर प्रभाव को समझें।

 

Question 14. केबिनेट मिशन क्या था?
Answer: सन् 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनने के बाद, प्रधानमन्त्री एटली ने अपने मन्त्रिमण्डल के तीन सदस्यों को भारत भेजा। ब्रिटिश मन्त्रिमण्डल के सदस्यों वाले इस आयोग को केबिनेट मिशन कहा गया। इस मिशन का उद्देश्य भारत को सत्ता हस्तान्तरित करने की योजना बनाना था।
In simple words: कैबिनेट मिशन 1945 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत भेजा गया एक आयोग था, जिसका काम सत्ता हस्तान्तरण की योजना बनाना था।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन की परिभाषा और इसके गठन के पीछे के कारणों को याद रखें।

 

Question 15. केबिनेट मिशन के तीन सदस्यों के नाम लिखिए।
Answer: केबिनेट मिशन के तीन सदस्य थे:
• पैथिक लारेंस
• सर स्टेफर्ड क्रिप्स
• ए. वी. एलेक्जेण्डर।
In simple words: कैबिनेट मिशन में पैथिक लारेंस, सर स्टेफर्ड क्रिप्स और ए. वी. एलेक्जेण्डर शामिल थे।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के सभी तीन सदस्यों के नाम याद रखें।

 

Question 16. केबिनेट मिशन द्वारा दिये गये तीन सुझावों को लिखिए।
Answer: केबिनेट मिशन द्वारा दिया गया एक प्रमुख सुझाव था:
• भारत में संघ राज्य की स्थापना करना। (यह एक ऐसा संघ होगा जिसमें देशी राज्य और ब्रिटिश भारत के प्रांत शामिल होंगे।)
(नोट: स्रोत में केवल एक ही सुझाव दिया गया है जबकि प्रश्न में तीन पूछे गए हैं।)
In simple words: कैबिनेट मिशन ने भारत में एक संघ राज्य बनाने का सुझाव दिया था, जिसमें सभी रियासतें और ब्रिटिश प्रांत शामिल होंगे।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के मुख्य सुझावों, जैसे संघ राज्य की स्थापना, संविधान सभा का गठन और अंतरिम सरकार, को याद रखें।

 

प्रश्न 18. किस घोषणा के पश्चात् लॉर्ड माउण्टबेटन को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया?
Answer: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने जून 1948 तक भारत को एक जिम्मेदार सरकार सौंपने की घोषणा की थी। इसी घोषणा के बाद लॉर्ड माउण्टबेटन को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया।
In simple words: ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली की घोषणा के बाद लॉर्ड माउण्टबेटन भारत के गवर्नर जनरल बने।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली की घोषणा ने भारत के लिए सत्ता हस्तांतरण की समय-सीमा तय की थी, जिसके बाद माउण्टबेटन को यह जिम्मेदारी दी गई।

 

प्रश्न 19. माउण्टबेटन की विभाजन योजना का अन्त तक किसने विरोध किया?
Answer: माउण्टबेटन की विभाजन योजना का अन्त तक अब्दुल गफ्फार खाँ और पुरुषोत्तम दास टण्डन ने विरोध किया था।
In simple words: अब्दुल गफ्फार खाँ और पुरुषोत्तम दास टण्डन ने माउण्टबेटन के भारत-विभाजन की योजना का आखिरी तक विरोध किया।

🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि अब्दुल गफ्फार खाँ को 'सीमांत गाँधी' के नाम से भी जाना जाता है और वे विभाजन के प्रबल विरोधी थे।

 

प्रश्न 20. इतिहास में किस योजना को मन-बांटन योजना के नाम से जाना जाता है?
Answer: इतिहास में माउण्टबेटन योजना को मन-बांटन योजना के नाम से जाना जाता है। इस योजना के तहत भारत को दो अलग-अलग देशों में बाँटा गया था।
In simple words: माउण्टबेटन योजना को मन-बांटन योजना कहते हैं क्योंकि इसने भारत को दो हिस्सों में बाँट दिया था।

🎯 Exam Tip: 'मन-बांटन योजना' शब्द विभाजन से जुड़ी भावनाओं और व्यक्तिगत दुखों को दर्शाता है, इसलिए इसे याद रखना आसान होगा।

 

प्रश्न 21. भारत को दो अधिराज्यों में विभाजित करने की योजना किसने प्रस्तुत की?
Answer: भारत को दो अधिराज्यों (भारत और पाकिस्तान) में विभाजित करने की योजना लॉर्ड माउण्टबेटन ने प्रस्तुत की थी।
In simple words: लॉर्ड माउण्टबेटन ने भारत को दो देशों में बाँटने की योजना बनाई।

🎯 Exam Tip: लॉर्ड माउण्टबेटन भारत के आखिरी वायसराय थे जिन्होंने विभाजन की योजना तैयार की।

 

प्रश्न 22. भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक ब्रिटेन की संसद में कब प्रस्तुत किया गया?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक ब्रिटेन की संसद में 4 जुलाई, 1947 को प्रस्तुत किया गया था।
In simple words: भारत को आज़ादी देने वाला कानून ब्रिटेन की संसद में 4 जुलाई 1947 को रखा गया।

🎯 Exam Tip: तारीखों को याद रखें क्योंकि ये ऐतिहासिक घटनाएँ कालानुक्रमिक क्रम में महत्वपूर्ण हैं।

 

प्रश्न 23. ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक को कब पारित किया?
Answer: ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक को 18 जुलाई, 1947 को पारित किया था।
In simple words: ब्रिटेन की संसद ने भारत को आज़ादी देने वाला कानून 18 जुलाई 1947 को पास कर दिया।

🎯 Exam Tip: विधेयक के प्रस्तुत होने और पारित होने की तारीखों के बीच के अंतर पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 25. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की धारा तीन व चार में क्या व्यवस्था उल्लेखित थी?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की धारा तीन और चार में बंगाल और पंजाब के विभाजन की व्यवस्था की गई थी। इन धाराओं ने इन दोनों प्रान्तों को भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित करने का तरीका बताया।
In simple words: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम की धारा 3 और 4 ने बंगाल और पंजाब को भारत और पाकिस्तान के बीच कैसे बाँटा जाएगा, यह बताया था।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की विशिष्ट धाराओं और उनके प्रावधानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर विभाजन से संबंधित।

 

प्रश्न 26. सर रेडक्लिफ कौन थे?
Answer: सर रेडक्लिफ भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा तय करने के लिए बनाए गए आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने ही दोनों देशों के बीच की विभाजन रेखा खींची थी।
In simple words: सर रेडक्लिफ वह व्यक्ति थे जिन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा खींची।

🎯 Exam Tip: रेडक्लिफ रेखा, भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा, इन्हीं के नाम पर है।

 

प्रश्न 27. सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता वाले सीमा आयोग में कितने सदस्य थे?
Answer: सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता वाले सीमा आयोग में कुल 4 सदस्य थे, जिनमें दो हिन्दू और दो मुसलमान सदस्य शामिल थे।
In simple words: सीमा आयोग में सर रेडक्लिफ के साथ 4 सदस्य थे - 2 हिन्दू और 2 मुसलमान।

🎯 Exam Tip: सीमा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी धार्मिक संरचना पर ध्यान दें, जो उस समय की राजनीतिक स्थिति को दर्शाती है।

 

प्रश्न 28. पश्चिमी-पाकिस्तान में कौन-कौन-सी रियासतें मिलायी गयीं?
Answer: पश्चिमी-पाकिस्तान में पश्चिमी पंजाब, सिंध, उत्तर बलूचिस्तान और बलूचिस्तान की छोटी-छोटी रियासतें मिलाई गईं।
In simple words: पश्चिमी-पाकिस्तान में पश्चिमी पंजाब, सिंध, उत्तर बलूचिस्तान और बलूचिस्तान की कुछ छोटी रियासतें शामिल थीं।

🎯 Exam Tip: विभाजन के समय दोनों देशों में शामिल किए गए प्रमुख क्षेत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 29. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में दोनों अधिराज्यों के संविधान निर्माण के सम्बन्ध में क्या प्रावधान था?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में यह प्रावधान था कि दोनों अधिराज्यों (भारत और पाकिस्तान) की विधान सभाएँ अपने-अपने राज्यों के लिए संविधान खुद बनाएँगी।
In simple words: अधिनियम के अनुसार, भारत और पाकिस्तान अपनी खुद की सरकार बनाने के लिए अपना संविधान खुद बनाएँगे।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि इस अधिनियम ने दोनों देशों को पूर्ण संवैधानिक स्वतंत्रता दी थी।

 

प्रश्न 30. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में संविधान सभाओं के सम्बन्ध में क्या कहा गया था?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में कहा गया था कि संविधान सभाएँ पूरी तरह से स्वतंत्र और शक्तिशाली होंगी। वे संविधान बनने तक विधान सभा के रूप में भी काम करती रहेंगी।
In simple words: संविधान सभाएँ स्वतंत्र होंगी और संविधान बनने तक विधान सभा की तरह काम करती रहेंगी।

🎯 Exam Tip: संविधान सभा की दोहरी भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है - संविधान बनाना और अंतरिम विधायिका के रूप में कार्य करना।

 

प्रश्न 32. 1947 के भारत स्वतन्त्रता अधिनियम से भारत सचिव का पद समाप्त करके उसके अधिकार किसे दिए गए?
Answer: 1947 के भारत स्वतन्त्रता अधिनियम से भारत सचिव का पद समाप्त कर दिया गया था। इस पद के सभी अधिकार राष्ट्रमण्डल सचिव को सौंप दिए गए।
In simple words: भारत सचिव का पद हटाकर उसके अधिकार राष्ट्रमण्डल सचिव को दिए गए।

🎯 Exam Tip: भारत सचिव का पद भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान एक महत्वपूर्ण कड़ी था, जिसका समाप्त होना ब्रिटिश नियंत्रण की समाप्ति का प्रतीक था।

 

प्रश्न 33. 1947 के अधिनियम में नागरिक सेवाओं के सम्बन्ध में क्या प्रावधान किए गए?
Answer: 1947 के अधिनियम में यह प्रावधान किया गया कि 15 अगस्त, 1947 से पहले ब्रिटिश शासन के अधीन काम कर रहे भारतीय नागरिक सेवा के सदस्य आज़ादी के बाद भी अपनी नौकरी में बने रहेंगे। उन्हें वे सभी विशेष अधिकार, पेंशन, वेतन और छुट्टियों से संबंधित सुविधाएँ मिलती रहेंगी जो उन्हें आज़ादी से पहले मिलती थीं।
In simple words: अधिनियम ने तय किया कि पुराने भारतीय नागरिक सेवक आज़ादी के बाद भी अपनी सभी सुविधाओं के साथ काम करते रहेंगे।

🎯 Exam Tip: यह प्रावधान सुनिश्चित करता था कि नागरिक प्रशासन में कोई अचानक व्यवधान न आए और अधिकारियों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

 

प्रश्न 34. स्वतन्त्र भारत के गवर्नर जनरल कौन थे?
Answer: स्वतन्त्र भारत के पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड माउण्टबेटन थे।
In simple words: लॉर्ड माउण्टबेटन भारत के पहले गवर्नर जनरल बने।

🎯 Exam Tip: इस तथ्य को अक्सर भारतीय इतिहास के संदर्भ में पूछा जाता है।

 

प्रश्न 35. लॉर्ड माउण्टबेटन ने किसे स्वतन्त्रत भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पद की शपथ दिलाई?
Answer: लॉर्ड माउण्टबेटन ने पण्डित जवाहर लाल नेहरू को स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधानमन्त्री पद की शपथ दिलाई थी।
In simple words: पण्डित जवाहर लाल नेहरू को लॉर्ड माउण्टबेटन ने भारत के पहले प्रधानमन्त्री की शपथ दिलाई।

🎯 Exam Tip: भारत के पहले प्रधानमन्त्री और पहले गवर्नर जनरल के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. कौन-कौन से घटनाक्रम के कारण ब्रिटिश सरकार के द्वारा भारतीयों की स्वतन्त्रता की माँग को टालना सम्भव नहीं रहा? बताइए।
Answer: कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के कारण ब्रिटिश सरकार के लिए भारतीयों की स्वतंत्रता की माँग को टालना मुश्किल हो गया था:
1. **पूर्ण स्वराज की घोषणा:** 1929 के लाहौर अधिवेशन में काँग्रेस ने पूर्ण स्वराज का लक्ष्य रखा और 26 जनवरी, 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया। इससे भारतीयों में आज़ादी की भावना बहुत तेज़ी से फैली।
2. **जन आंदोलन:** महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) और भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) जैसे बड़े जन आंदोलनों ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था।
3. **सैन्य विद्रोह:** 1946 का नौ-सैनिक विद्रोह, जिसने ब्रिटिश सेना की वफादारी पर सवाल उठाया, और सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित आज़ाद हिन्द फौज की गतिविधियाँ भी ब्रिटिश शासन के लिए बड़ी चुनौती थीं।
4. **मुस्लिम लीग की सीधी कार्यवाही:** मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की माँग को लेकर की गई सीधी कार्यवाही (Direct Action) ने देश में साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा को बहुत बढ़ा दिया, जिससे भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया था।
ये सभी घटनाएँ ब्रिटिश सरकार के लिए भारत पर शासन करना लगातार मुश्किल बना रही थीं, इसलिए स्वतंत्रता देना अनिवार्य हो गया।
In simple words: पूर्ण स्वराज की माँग, गाँधी जी के आंदोलन, सैनिक विद्रोह और मुस्लिम लीग की हिंसा जैसी घटनाओं के कारण ब्रिटिश सरकार को भारत को आज़ादी देनी पड़ी।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख चरणों और उनमें शामिल नेताओं व संगठनों को क्रमबद्ध तरीके से याद करें।

 

प्रश्न 2. केबिनेट मिशन योजना को स्पष्ट कीजिए।
Answer: केबिनेट मिशन योजना 26 जुलाई, 1945 को क्लीमेंट एटली के ब्रिटिश प्रधानमन्त्री बनने के बाद आई। लेबर पार्टी के नेता होने के नाते एटली का भारत के प्रति सकारात्मक रुख था। फरवरी 1946 में ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने भारत में तीन सदस्यों का एक संसदीय दल भेजने का फैसला किया। इस दल में ब्रिटिश कैबिनेट के तीन सदस्य थे: लॉर्ड पैथिक लॉरेंस (भारत सचिव), सर स्टेफर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष), और ए. बी. एलेक्जेंडर (एडमिरैलिटी के प्रथम लॉर्ड या नौसेना मन्त्री)।
इस आयोग को कैबिनेट मिशन कहा गया। इस मिशन का मुख्य काम भारत को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता सौंपने के तरीके खोजना और संविधान बनाने की प्रक्रिया तय करना था। कैबिनेट मिशन 23 मार्च, 1946 को भारत आया और 16 मई, 1946 को अपनी रिपोर्ट दी। इस आयोग ने तीन मुख्य सुझाव दिए:
1. **भारत में संघ राज्य की स्थापना:** एक भारतीय संघ बनाया जाए जिसमें देशी रियासतें और ब्रिटिश भारत के प्रांत शामिल हों। यह संघ विदेश नीति, रक्षा और यातायात जैसे विभागों को संभालेगा। प्रांतों को शेष सभी विषयों पर अधिकार होगा।
2. **संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा:** भारत के संविधान को बनाने के लिए एक संविधान सभा का गठन किया जाए।
3. **अंतरिम सरकार की स्थापना:** जब तक नया संविधान बनकर नई सरकार नहीं बन जाती, तब तक के लिए एक अंतरिम सरकार बनाई जाए।
In simple words: कैबिनेट मिशन 1946 में भारत आया था। इसमें तीन ब्रिटिश मन्त्री थे। इसका उद्देश्य भारत को शांति से सत्ता सौंपना और संविधान बनाना था। उन्होंने भारत को एक संघ बनाने, संविधान सभा बनाने और अंतरिम सरकार बनाने का सुझाव दिया।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के सदस्यों के नाम और उसके तीन मुख्य सुझावों को याद रखना इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 3. केबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तुत योजना पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने क्या प्रतिक्रिया दिखाई?
Answer: कैबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तुत योजना पर अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दीं:
1. **कॉंग्रेस की प्रतिक्रिया:** प्रारम्भ में काँग्रेस ने अंतरिम सरकार बनाने की माँग को अस्वीकार कर दिया, लेकिन बाद में योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार कर लिया।
2. **मुस्लिम लीग की प्रतिक्रिया:** मुस्लिम लीग ने पहले अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन जब वायसराय ने इसे अस्वीकार कर दिया, तो लीग ने इस योजना का विरोध किया। मुस्लिम लीग का मानना था कि कैबिनेट मिशन में पाकिस्तान की माँग को स्वीकार नहीं किया गया था।
3. **परिणाम:** मुस्लिम लीग ने इसके विरोध में 'सीधी कार्यवाही' (Direct Action) की नीति अपनाई, जिसके कारण देश भर में बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए।
In simple words: कैबिनेट मिशन की योजना पर काँग्रेस और मुस्लिम लीग की अलग-अलग राय थी। काँग्रेस ने कुछ शर्तों के साथ स्वीकार किया, लेकिन मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की माँग पूरी न होने पर विरोध किया और हिंसा शुरू कर दी।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और उनके कारणों पर ध्यान केंद्रित करें, खासकर मुस्लिम लीग की 'सीधी कार्यवाही' की नीति पर।

 

प्रश्न 4. काँग्रेस के नेताओं ने माउण्टबेटन योजना को क्यों स्वीकार कर लिया? बताइए।
Answer: काँग्रेस के नेताओं ने माउण्टबेटन योजना को कई कारणों से स्वीकार कर लिया, हालाँकि वे भारत के विभाजन के खिलाफ थे। लॉर्ड माउण्टबेटन ने काँग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं से योजना पर चर्चा की, जिसमें भारत को दो अधिराज्यों (भारत और पाकिस्तान) में विभाजित करने का उल्लेख था। महात्मा गाँधी सहित कई काँग्रेस नेता, जैसे जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल, शुरुआत में विभाजन के विरुद्ध थे। गाँधी जी ने तो यहाँ तक कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
लेकिन, मुस्लिम लीग द्वारा 'सीधी कार्यवाही' के कारण हुए बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिक दंगों और जनसंहार से व्यथित होकर, काँग्रेस नेताओं को लगा कि देश में शांति बनाए रखने के लिए विभाजन ही एकमात्र रास्ता बचा है। इसलिए, उन्होंने भारी मन से माउण्टबेटन की विभाजन योजना को स्वीकार कर लिया। हालांकि, अब्दुल गफ्फार खाँ और पुरुषोत्तम दास टण्डन जैसे कुछ नेताओं ने अंत तक इसका विरोध जारी रखा।
In simple words: काँग्रेस के नेताओं ने माउण्टबेटन योजना को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मुस्लिम लीग की हिंसा के कारण देश में बहुत दंगे हो रहे थे। वे शांति चाहते थे, भले ही उन्हें भारत को दो हिस्सों में बाँटना पड़ा।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में उन परिस्थितियों को समझना महत्वपूर्ण है जिन्होंने काँग्रेस को विभाजन स्वीकार करने के लिए मजबूर किया, भले ही उनकी मूल विचारधारा इसके खिलाफ थी।

 

प्रश्न 5. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
1. **दो अधिराज्यों की स्थापना:** इस अधिनियम के अनुसार, 15 अगस्त, 1947 को भारत का विभाजन करके भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र और प्रभुत्व-सम्पन्न राष्ट्र बनाए जाएँगे।
2. **देशी रियासतों पर सर्वोच्चता का अंत:** अधिराज्य बनने के साथ ही देशी रियासतों पर ब्रिटिश सम्राट की सर्वोच्चता (paramountcy) समाप्त हो जाएगी। ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए सभी समझौते और संधियाँ भी खत्म हो जाएँगी। इन रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने की पूरी आजादी होगी।
In simple words: इस कानून ने भारत को दो देशों (भारत और पाकिस्तान) में बाँटा और देशी रियासतों को अपनी मर्ज़ी से किसी भी देश में शामिल होने या आज़ाद रहने का अधिकार दिया।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की इन दो मुख्य विशेषताओं को याद रखें, क्योंकि ये भारतीय इतिहास में बड़े बदलाव लाती हैं।

 

प्रश्न 6. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार दोनों अधिराज्यों के परिक्षेत्र (सीमांकन) को बताइए। अथवा 1947 के भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम के अनुसार दोनों अधिराज्यों भारत और पाकिस्तान के क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 के तहत भारत और पाकिस्तान दोनों अधिराज्यों के क्षेत्रों का वर्णन किया गया था।
1. **विभाजन का आधार:** मुस्लिम-बहुल क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा होंगे और हिन्दू-बहुल क्षेत्र भारत का हिस्सा होंगे।
2. **बंगाल और पंजाब का विभाजन:** अधिनियम की धारा तीन और चार में बंगाल और पंजाब के विभाजन की व्यवस्था की गई थी।
3. **सिलहट जनमत संग्रह:** असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह कराया जाएगा। यदि यहाँ के लोग पाकिस्तान के पक्ष में वोट देंगे, तो सिलहट को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किया जाएगा।
4. **सीमा आयोग:** दोनों देशों की सीमाएँ, सीमा आयोग की रिपोर्ट के बाद ही तय होंगी। इस आयोग के अध्यक्ष सर रेडक्लिफ थे और इसमें दो हिन्दू तथा दो मुसलमान सदस्य थे। पूर्वी पाकिस्तान में पूर्वी बंगाल और सिलहट शामिल थे, जबकि पश्चिमी पाकिस्तान में पश्चिमी पंजाब, सिंध, उत्तरी बलूचिस्तान और बलूचिस्तान की छोटी-छोटी रियासतें शामिल थीं।
5. **रियासतों की स्वतंत्रता:** देशी रियासतों को यह स्वतंत्रता दी गई थी कि वे भारत या पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल हो सकती हैं, या स्वतंत्र रह सकती हैं।
In simple words: इस अधिनियम ने बताया कि मुस्लिम आबादी वाले इलाके पाकिस्तान में जाएँगे और बाकी भारत में रहेंगे। बंगाल, पंजाब और सिलहट का बँटवारा होगा। रेडक्लिफ आयोग ने सीमाएँ तय कीं और रियासतों को अपनी मर्ज़ी से किसी भी देश में शामिल होने की आज़ादी दी।

🎯 Exam Tip: सीमा निर्धारण की प्रक्रिया, प्रमुख विभाजित क्षेत्र और सीमा आयोग की भूमिका पर विशेष ध्यान दें।

 

प्रश्न 7. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में गवर्नर जनरल के सम्बन्ध में क्या प्रावधान किया गया था?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में गवर्नर जनरल के सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रावधान किए गए थे:
1. **सम्पत्ति का बँटवारा:** अधिराज्यों में सम्पत्तियों के बँटवारे की शक्ति गवर्नर जनरल को दी गई थी।
2. **कानूनों को स्वीकार करने का अधिकार:** अधिराज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों को ब्रिटिश सम्राट की अनुमति के लिए आरक्षित करने के अधिकार स्वतः ही समाप्त हो जाएँगे। हालाँकि, गवर्नर जनरल को ब्रिटिश सम्राट के नाम पर किसी भी विधेयक को स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था।
3. **स्वविवेक और व्यक्तिगत निर्णय की शक्तियों का अंत:** इस अधिनियम से गवर्नर जनरल की स्वविवेक और व्यक्तिगत निर्णय की शक्तियाँ दोनों अधिराज्यों की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समाप्त हो जाएँगी।
In simple words: अधिनियम ने गवर्नर जनरल को संपत्तियों के बँटवारे की शक्ति दी, कानूनों को मंजूरी देने का अधिकार दिया (राजा के नाम पर), और उनकी निजी निर्णय लेने की शक्तियाँ ख़त्म कर दीं।

🎯 Exam Tip: गवर्नर जनरल की भूमिका में आए बदलावों पर ध्यान दें, खासकर ब्रिटिश सम्राट से उनकी शक्तियों के अलगाव पर।

 

प्रश्न 8. भारत सचिव पद की समाप्ति एवं नागरिक सेवाओं के अधिकार के सम्बन्ध में भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में क्या प्रावधान थे?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में भारत सचिव के पद और नागरिक सेवाओं के सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रावधान किए गए थे:
1. **भारत सचिव पद की समाप्ति:** इस अधिनियम ने भारत सचिव के पद को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। इसके सभी अधिकार राष्ट्रमण्डल सचिव को दे दिए गए।
2. **नागरिक सेवाओं के अधिकार:** नागरिक सेवाओं के सदस्यों के बारे में इस अधिनियम में कहा गया कि भारतीय नागरिक सेवा के सदस्य स्वतंत्रता के बाद भी पहले की तरह सेवा में बने रहेंगे। उन्हें वे सभी विशेष अधिकार, पेंशन, वेतन और छुट्टियों से जुड़ी सुविधाएँ मिलती रहेंगी जो उन्हें स्वतंत्रता से पहले मिलती थीं।
In simple words: अधिनियम ने भारत सचिव का पद खत्म कर दिया और उनके अधिकार राष्ट्रमण्डल सचिव को दिए। भारतीय नागरिक सेवा के सदस्यों को आज़ादी के बाद भी वही अधिकार और सुविधाएँ मिलती रहेंगी।

🎯 Exam Tip: इस अधिनियम के तहत हुए प्रशासनिक बदलावों पर ध्यान दें, विशेषकर भारत सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद की समाप्ति पर।

 

प्रश्न 9. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में ब्रिटिश सम्राट तथा सरकार व उनके अधिकारों के सम्बन्ध में क्या उल्लेखित था?
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 में ब्रिटिश सम्राट तथा सरकार व उनके अधिकारों के सम्बन्ध में निम्नलिखित उल्लेख था:
1. **नियंत्रण की समाप्ति:** यह अधिनियम स्पष्ट करता था कि 15 अगस्त, 1947 के बाद ब्रिटिश सरकार का भारत और पाकिस्तान सहित उनके किसी भी प्रांत पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा।
2. **सम्राट का पदनाम:** ब्रिटिश सम्राट के 'भारत के सम्राट' नामक पद को समाप्त कर दिया जाएगा।
3. **कानूनों पर शक्ति का अंत:** अधिराज्यों द्वारा निर्मित कानूनों को ब्रिटिश सम्राट द्वारा स्वीकार करने या अस्वीकार करने का अधिकार स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। प्रांतीय विधेयकों पर भी ब्रिटिश सम्राट की अनुमति के लिए आरक्षण का अधिकार खत्म हो गया। हालाँकि, गवर्नर जनरल को ब्रिटिश सम्राट के नाम पर किसी भी विधेयक को स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था।
In simple words: 1947 के अधिनियम के बाद ब्रिटिश सरकार का भारत पर कोई राज नहीं रहा। ब्रिटिश राजा का 'भारत के सम्राट' का पद खत्म हो गया। राजा को भारत के कानूनों को मंजूर या नामंजूर करने का अधिकार नहीं रहा, पर गवर्नर जनरल राजा के नाम पर कानून मंजूर कर सकते थे।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश सम्राट की औपचारिक शक्तियों और भूमिका में आए बड़े बदलावों को समझना इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 10. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 का महत्व बताइए।
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत प्रस्तुत है:
1. **भारत से ब्रिटिश सत्ता की समाप्ति:** इस अधिनियम के द्वारा भारत से ब्रिटिश सत्ता पूरी तरह समाप्त हो गई। सभी शक्तियाँ दो नए स्वतंत्र अधिराज्यों, भारत और पाकिस्तान को सौंप दी गईं।
2. **गवर्नर जनरल एक संवैधानिक प्रमुख के रूप में:** इस अधिनियम के द्वारा संक्रमण काल के लिए गवर्नर जनरल का पद बना रहा, लेकिन यह पद केवल एक संवैधानिक प्रमुख के रूप में ही रहा।
3. **ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण की समाप्ति:** 15 अगस्त, 1947 के बाद ब्रिटिश सरकार का किसी भी अधिराज्य या उसके किसी भी प्रांत पर कोई नियंत्रण नहीं रहा।
4. **देशी रियासतों पर सर्वोच्चता का अंत:** अधिराज्यों के निर्माण के बाद देशी रियासतों पर ब्रिटिश सम्राट की सर्वोच्चता समाप्त हो गई। सभी संधियाँ और समझौते भी खत्म हो गए। रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया।
5. **भारत सचिव पद की समाप्ति:** भारत सचिव (भारत-मन्त्री) का पद समाप्त कर दिया गया, और इसके अधिकार राष्ट्रमण्डल सचिव को दे दिए गए।
6. **भारतीय नागरिक सेवाओं के अधिकारों की निरंतरता:** भारतीय नागरिक सेवा के सदस्यों को स्वतंत्रता के बाद भी उनके सभी विशेष अधिकार, पेंशन और सुविधाएँ मिलती रहीं, जो उन्हें पहले मिलती थीं।
In simple words: इस कानून से भारत में ब्रिटिश राज खत्म हो गया। गवर्नर जनरल सिर्फ नाममात्र का मुखिया रहा। ब्रिटिश सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहा और देशी रियासतों को आज़ादी मिली। भारत सचिव का पद खत्म हो गया, और सरकारी कर्मचारियों को पुराने अधिकार मिलते रहे।

🎯 Exam Tip: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के दूरगामी परिणामों और इसके द्वारा लाए गए प्रमुख संस्थागत परिवर्तनों को याद रखें।

RBSE Class 11 Political Science Chapter 20 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की पृष्ठभूमि को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 ब्रिटिश सरकार की दया का नहीं, बल्कि उसकी विवशता का परिणाम था। 1935 के बाद की राष्ट्रीय गतिविधियाँ और द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण बनी परिस्थितियों ने ब्रिटिश सरकार को यह अधिनियम बनाने के लिए मजबूर किया। इसकी पृष्ठभूमि को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
**(1) राष्ट्रीय घटनाक्रम:**
* **पूर्ण स्वतंत्रता की माँग:** 31 दिसंबर, 1929 को काँग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित हुआ और 26 जनवरी, 1930 को प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इससे भारतीयों में स्वतंत्रता की प्रबल इच्छा जागी।
* **गाँधीवादी आंदोलन:** द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन पर बहुत दबाव डाला।
* **मुस्लिम लीग की पाकिस्तान माँग:** मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान बनाने की माँग को लेकर की गई सीधी कार्यवाही ने साम्प्रदायिक हिंसा बढ़ा दी।
* **सशस्त्र विद्रोह:** सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित आज़ाद हिन्द फौज की गतिविधियाँ और 1946 का नौ-सैनिक विद्रोह जैसी घटनाओं ने स्वतंत्रता की भावना को इतना तीव्र कर दिया कि ब्रिटिश सरकार के लिए इसे अनदेखा करना असंभव हो गया।
**(2) द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण बदली हुई परिस्थितियाँ:**
1939 में शुरू हुए द्वितीय विश्वयुद्ध में भारतीयों की इच्छा के विरुद्ध उन्हें शामिल किया गया। काँग्रेस के नेताओं ने ब्रिटिश सरकार को युद्ध में सहयोग देने से मना कर दिया। पाकिस्तान की माँग और संवैधानिक संकट को दूर करने के लिए कुछ प्रयास किए गए:
*(i) क्रिप्स प्रस्ताव:* 1942 में ब्रिटिश सरकार ने सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत भेजा। क्रिप्स ने एक योजना दी, जिसमें युद्ध के बाद औपनिवेशिक स्वराज्य और एक संविधान सभा बनाने का प्रस्ताव था। हालाँकि, यह प्रस्ताव अत्यधिक असंतोषजनक होने के कारण राजनीतिक दलों ने इसे अस्वीकार कर दिया और 11 अप्रैल, 1942 को इसे वापस ले लिया गया।
*(ii) कैबिनेट मिशन योजना:* ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने फरवरी 1946 में भारत में तीन सदस्यीय संसदीय दल भेजा, जिसमें लॉर्ड पैथिक लॉरेंस, सर स्टेफर्ड क्रिप्स और ए. बी. एलेक्जेंडर शामिल थे। इस मिशन का उद्देश्य भारत में शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण और संविधान बनाने की प्रक्रिया तय करना था। कैबिनेट मिशन ने भारत में एक संघ राज्य की स्थापना, संविधान सभा का गठन और एक अंतरिम सरकार की स्थापना का सुझाव दिया। हालाँकि, मुस्लिम लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही की नीति अपनाई, जिससे साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए।
*(iii) ब्रिटिश प्रधानमन्त्री की घोषणा:* ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारत की एक जिम्मेदार सरकार को सत्ता सौंप देगी। यदि इससे पहले भी भारतीय राजनीतिक दलों में समझौता हो जाता है, तो सत्ता पहले भी सौंपी जा सकती है।
*(iv) माउण्टबेटन योजना:* प्रधानमन्त्री एटली की घोषणा के बाद लॉर्ड माउण्टबेटन को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया। उनके प्रयासों से काँग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ। भारत को दो अधिराज्यों में विभाजित करने की माउण्टबेटन योजना को ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार किया और 15 अगस्त, 1947 को भारत व पाकिस्तान को सत्ता हस्तांतरित कर दी।
In simple words: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 कई घटनाओं का नतीजा था, जैसे भारत छोड़ो आंदोलन, पाकिस्तान की माँग, सैनिक विद्रोह और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन की कमजोर स्थिति। क्रिप्स मिशन और कैबिनेट मिशन जैसी योजनाएँ सफल नहीं हुईं, आखिर में माउण्टबेटन योजना के तहत भारत को आज़ादी और विभाजन मिला।

🎯 Exam Tip: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम की पृष्ठभूमि को समझने के लिए सभी प्रमुख घटनाओं, आंदोलनों और ब्रिटिश प्रस्तावों को कालानुक्रमिक क्रम में जानना आवश्यक है।

 

प्रश्न 2. भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। अथवा भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 का मूल्याकंन कीजिए।
Answer: भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. **दो अधिराज्यों की स्थापना:** इस अधिनियम ने 15 अगस्त, 1947 को भारत का विभाजन करके दो स्वतंत्र अधिराज्यों - भारत और पाकिस्तान - की स्थापना की। ब्रिटिश सरकार ने इन दोनों राज्यों को सत्ता हस्तांतरित कर दी। यह भी तय किया गया कि दोनों राज्य स्वतंत्र सत्ताधारी होंगे और ब्रिटिश सरकार उनकी संविधान सभाओं को अपने-अपने देश का संविधान बनाने की पूरी स्वतंत्रता देगी।
2. **नया संविधान बनाने का अधिकार:** माउण्टबेटन योजना के अनुसार, भारत और पाकिस्तान की संविधान सभाओं को अपनी इच्छा के अनुसार अपना संविधान बनाने की पूरी स्वतंत्रता थी।
3. **दोनों अधिराज्यों के क्षेत्रों का वर्णन:** माउण्टबेटन योजना ने भारत और पाकिस्तान के क्षेत्रों का भी वर्णन किया। इसके तहत, मुस्लिम बहुल क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा बने, जबकि हिन्दू बहुल क्षेत्र भारत का हिस्सा बने। बंगाल और पंजाब के विभाजन की व्यवस्था भी की गई थी, और असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह कराने का प्रावधान था।
4. **संविधान सभाओं का दोहरा स्वरूप:** भारत और पाकिस्तान की संविधान सभाएँ पूरी तरह से प्रभुत्व-सम्पन्न होंगी। संविधान बनने तक वे विधान सभा के रूप में भी काम करती रहेंगी। उन्हें कानून बनाने का पूरा अधिकार होगा, और उनकी कानून बनाने की शक्ति पर कोई बाहरी नियंत्रण नहीं होगा।
5. **1935 के अधिनियम के आधार पर शासन संचालन और संशोधन का अधिकार:** दोनों अधिराज्यों के संविधान बनने तक, 1935 के भारत शासन अधिनियम के आधार पर ही शासन चलाया जाएगा। प्रत्येक अधिराज्य को इसमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने का अधिकार भी था।
6. **ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल में शामिल होने या अलग होने का विषय:** इस अधिनियम के द्वारा दोनों अधिराज्यों को अपनी इच्छा से ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल में शामिल होने या उससे अलग हो जाने का अधिकार दिया गया।
7. **गवर्नर जनरल की स्वविवेक और व्यक्तिगत निर्णय की शक्तियों का अंत:** इस अधिनियम के बाद गवर्नर जनरल की स्वविवेक और व्यक्तिगत निर्णय की शक्तियाँ दोनों अधिराज्यों की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समाप्त हो गईं।
8. **पूर्व में बने ब्रिटिश कानूनों से संबंधित विषय:** इस अधिनियम ने दोनों अधिराज्यों को यह अधिकार दिया कि वे पूर्व में बने ब्रिटिश कानूनों को मान सकते हैं, संशोधित कर सकते हैं या निरस्त करने का स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं।
9. **दोनों राज्यों के लिए अलग-अलग गवर्नर जनरल की नियुक्ति:** भारत और पाकिस्तान दोनों अधिराज्यों के लिए ब्रिटिश सम्राट द्वारा अलग-अलग गवर्नर जनरल नियुक्त किए जाएँगे। वे अपने-अपने अधिराज्य के प्रमुख होंगे। गवर्नर जनरल और प्रांतों के गवर्नर भविष्य में केवल संवैधानिक शासक होंगे, और उन्हें अपने अधिकारों के संबंध में अपने मंत्रिमंडल की सलाह पर कार्य करना होगा।
10. **गवर्नर जनरल को विशेष शक्ति:** इस अधिनियम के माध्यम से गवर्नर जनरल को मार्च 1948 तक भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को लागू करने और दोनों अधिराज्यों, भारत और पाकिस्तान में संपत्तियों का बँटवारा करने की शक्ति दी गई।
11. **ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण की समाप्ति:** 15 अगस्त, 1947 के बाद ब्रिटिश सरकार का किसी भी अधिराज्य या उसके किसी भी प्रांत पर कोई नियंत्रण नहीं रहा।
12. **देशी रियासतों पर से ब्रिटिश सर्वोच्चता का अंत:** अधिराज्यों के निर्माण के बाद देशी रियासतों पर ब्रिटिश सम्राट की सर्वोच्चता समाप्त हो गई। ब्रिटिश सरकार के देशी रियासतों के साथ सभी संधियाँ और समझौते भी खत्म हो गए। रियासतें भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने के लिए मुक्त थीं।
13. **भारत सचिव (मंत्री) के पद की समाप्ति:** स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार, भारत सचिव (भारत-मंत्री) का पद समाप्त कर दिया गया, और इसके अधिकार राष्ट्रमण्डल सचिव को दे दिए गए।
14. **भारतीय नागरिक सेवाओं के अधिकारों को कायम रखना:** भारतीय नागरिक सेवक स्वतंत्रता के बाद भी अपनी सेवा में बने रहे। उन्हें वे सभी लाभ मिलते रहे जो उन्हें स्वतंत्रता से पहले मिलते थे। हालाँकि, इस अधिनियम ने भारतीय नागरिक सेवाओं पर भारत मंत्री के संरक्षण, नियंत्रण और नियुक्ति के अधिकार को समाप्त कर दिया।
**मूल्यांकन:** भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के द्वारा भारत में लगभग दो सौ साल पुरानी ब्रिटिश सत्ता समाप्त हो गई, और सभी शक्तियाँ दो नए स्वतंत्र अधिराज्यों, भारत और पाकिस्तान को हस्तांतरित कर दी गईं। भारत की प्रभुसत्ता अब भारत की संविधान सभाओं को मिल गई। लॉर्ड माउण्टबेटन भारत के पहले गवर्नर जनरल बने, और उन्होंने पं. जवाहरलाल नेहरू को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमन्त्री के रूप में शपथ दिलाई।
इस अधिनियम के माध्यम से सत्ता का शांतिपूर्ण तरीके से हस्तांतरण हो गया। यह अधिनियम अंग्रेजों की भारत से एक गौरवपूर्ण विदाई थी। इस प्रकार, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने भारतीय उपमहाद्वीप से ब्रिटिश साम्राज्यवादी शासन का अंत कर दिया, और इसके दो उत्तराधिकारी, दो संप्रभुता-सम्पन्न राज्य - भारत और पाकिस्तान - बन गए।
In simple words: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने भारत को दो आज़ाद देशों में बाँटा और उन्हें अपना संविधान बनाने का अधिकार दिया। इसने ब्रिटिश राजा का शासन खत्म कर दिया, देशी रियासतों को आज़ाद किया, और भारत सचिव का पद हटा दिया। सरकारी कर्मचारियों के अधिकार पहले जैसे रहे। यह अंग्रेजों की भारत से एक शांतिपूर्ण और गौरवपूर्ण विदाई थी।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की सभी विशेषताओं को विस्तार से समझें, क्योंकि यह भारतीय संवैधानिक इतिहास का आधार है। मूल्यांकन में अधिनियम के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों को शामिल करें।

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