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RBSE Class 11 Home Science Chapter 7 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. (i) शारीरिक विकास को कौन-सा कारक प्रभावित नहीं करता है?
(अ) कुपोषण
(ब) सुपोषण
(स) बीमारी
(द) भय
Answer: (ब) सुपोषण
In simple words: शारीरिक विकास को सुपोषण प्रभावित नहीं करता है क्योंकि यह शरीर के सही विकास के लिए आवश्यक है। यह विकास में बाधा नहीं डालता।
🎯 Exam Tip: एमसीक्यू में 'कौन-सा कारक प्रभावित नहीं करता है' जैसे नकारात्मक शब्दों पर ध्यान दें ताकि सही विकल्प का चुनाव कर सकें।
Question 1. (ii) निम्नलिखित में से कौन-सी बाल्यावस्था की संज्ञानात्मक योग्यता है?
(अ) परिपक्वता
(ब) ज्ञानेन्द्रियाँ
(स) तर्क योग्यता
Answer: (स) तर्क योग्यता
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे धीरे-धीरे तर्क करने और सोचने की क्षमता विकसित करते हैं, जो उनकी संज्ञानात्मक योग्यता का हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक योग्यताएँ सोचने, समझने और समस्याओं को हल करने से जुड़ी होती हैं; परिपक्वता और ज्ञानेन्द्रियाँ उनके आधारभूत पहलू हैं, लेकिन तर्क योग्यता प्रत्यक्ष क्षमता है।
Question 1. (iv) निम्न में से वाणी विकार है –
(अ) उच्चारण में दोष
(ब) मूक-बधिर
(स) हकलाना
(द) वाक्य रचना में दोष
Answer: (स) हकलाना
In simple words: वाणी विकार का मतलब बोलने में आने वाली समस्याएँ हैं, और हकलाना एक आम वाणी विकार है जहाँ व्यक्ति अटक-अटक कर बोलता है।
🎯 Exam Tip: वाणी विकार से संबंधित प्रश्नों में, बोलने की सामान्य समस्याओं जैसे उच्चारण दोष, हकलाना आदि को पहचानें, जबकि मूक-बधिरता श्रवण और वाणी दोनों से संबंधित है।
Question 1. (v) निम्न में से बाल्यावस्था का सामान्य संवेग नहीं है –
(अ) भय
(ब) मुस्कराना
(स) क्रोध
(द) शर्मिलापन
Answer: (ब) मुस्कराना
In simple words: मुस्कराना एक सकारात्मक अभिव्यक्ति है, जबकि भय, क्रोध और शर्मिलापन जैसे संवेग बाल्यावस्था में सामान्यतः देखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: 'नहीं है' जैसे नकारात्मक शब्दों पर ध्यान दें। संवेगों को पहचानते समय, सकारात्मक और नकारात्मक भावनाओं के बीच अंतर को समझें।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करो
1. भाषा विकास का प्रतिमान........... विकास की तरह ही होता है।
2. सामाजिक समूह के नैतिक संहिता के अनुसार व्यवहार करना....... विकास है।
3. में बालक समूह प्रेमी हो जाता है।
4. जिज्ञासा के बढ़ने से का विकास होता है।
5. शब्दों के अर्थ सम्बन्धित दोष......... विकार है।
Answer:
1. सामाजिक
In simple words: यहाँ दिए गए रिक्त स्थान वाले प्रश्नों में से पहले का उत्तर 'सामाजिक' है, जो यह बताता है कि भाषा का विकास सामाजिक विकास के समान होता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, वाक्य के संदर्भ को समझें और सही शब्द चुनें जो अर्थ को पूरा करता हो।
Question 3. बाल्यावस्था में शारीरिक विकास को समझाइए।
Answer: बाल्यावस्था जीवन के विकास का एक बहुत खास समय है। इस दौरान बच्चों का शरीर तेजी से बढ़ता और बदलता है। बाल्यावस्था के आखिरी समय तक, बच्चे की लंबाई लगभग 57.5 इंच तथा वजन 48 किलोग्राम होता है। उनके चेहरे में छोटे बदलाव आते हैं और वे धीरे-धीरे शिशु जैसी बनावट छोड़ देते हैं। इस आयु को कभी-कभी 'कुरूपता की आयु' भी कहा जाता है क्योंकि बच्चे अनाकर्षक दिख सकते हैं। बच्चे अपनी मांसपेशियों और तंत्रिकाओं पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं, जिससे वे जानबूझकर कौशल सीख पाते हैं। वे अक्षर लिखना, रंग भरना और मिट्टी की आकृतियाँ बनाना सीखते हैं। इसके साथ ही, दौड़ना, कूदना और छलांग लगाना जैसे अन्य शारीरिक कौशल भी विकसित होते हैं। कभी-कभी माता-पिता की बहुत ज्यादा सुरक्षा के कारण बच्चे कुछ कौशल ठीक से नहीं सीख पाते और पिछड़ जाते हैं। बाल्यावस्था में बच्चों में बहुत शक्ति और ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग वे नए कौशल सीखने में करते हैं। शारीरिक विकास मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए एक मजबूत नींव तैयार करता है। हालांकि, कौशल सीखने में लड़के और लड़कियों में अंतर होता है; लड़कियाँ छोटे काम (सूक्ष्म पेशीय कौशल) में अच्छी होती हैं, जबकि लड़के बड़े काम (बड़ी पेशीय कौशल) में। लगभग छह साल की उम्र तक, बच्चे एक हाथ का उपयोग करने में ज्यादा माहिर हो जाते हैं। पेशीय विकास एक क्रम में होता है, लेकिन कई चीजें इसे प्रभावित कर सकती हैं।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चों का शरीर तेजी से बढ़ता है और वे कई नए कौशल सीखते हैं, जैसे लिखना और दौड़ना। इस उम्र में मांसपेशियां मजबूत होती हैं और बच्चे अपनी शारीरिक गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण पाते हैं।
🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था में शारीरिक विकास के मुख्य बिंदुओं को याद रखें, जैसे लंबाई-वजन में वृद्धि, पेशीय नियंत्रण, कौशल विकास और लिंग-आधारित अंतर।
Question 4. बाल्यावस्था में शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक समाझाइए।
Answer: बाल्यावस्था में शिशु के शारीरिक विकास को कई कारक प्रभावित करते हैं। सही शारीरिक विकास के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है।
1. कुपोषण: शरीर को सही पोषण मिलना सबसे पहली जरूरत है। यदि किसी बच्चे को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिलता, तो उसका शारीरिक विकास रुक जाता है। बाल्यावस्था में बच्चों को प्रोटीन और ऊर्जा की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए, कुपोषण शारीरिक विकास में बड़ी बाधा बन जाता है।
4. भय: जब बच्चे को किसी भी तरह का डर होता है, तो उसका शारीरिक विकास रुक जाता है। डर से बच्चों का समग्र विकास प्रभावित होता है, जिससे वे नई चीजें सीखने में हिचकिचाते हैं।
5. प्रोत्साहन का अभाव: यदि बच्चों को सही समय पर सही प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनका शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है।
6. शील गुण एवं मन्द बुद्धि: कम बुद्धि वाले बच्चे अलग-अलग शारीरिक काम करने में असहज महसूस करते हैं। इसलिए, उनका शारीरिक विकास पीछे रह जाता है।
7. सीखने के अवसर में कमी: यदि बच्चों को सही समय पर सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, तो उनके विकास में रुकावट आती है। उन्हें नए कौशल आज़माने और महारत हासिल करने के मौके मिलने चाहिए।
In simple words: बच्चों के शारीरिक विकास को कुपोषण, डर, प्रोत्साहन की कमी, कम बुद्धि और सीखने के मौके न मिलना जैसे कई कारण प्रभावित कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारकों को सूचीबद्ध करते समय, जैविक, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 5. बाल्यावस्था की विभिन्न संज्ञानात्मक योग्यताएँ बताइए।
Answer: बाल्यावस्था में बच्चे कई तरह की संज्ञानात्मक योग्यताएँ विकसित करते हैं, जो उनके सोचने और सीखने के तरीके को बदलती हैं। ये योग्यताएँ बच्चों को अपने आसपास की दुनिया को समझने में मदद करती हैं।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे सवाल पूछना, पढ़ना-लिखना सीखना, चीजों को सामान्य बनाना और अपनी इंद्रियों से जानकारी खोजना जैसी कई सोचने की क्षमताएँ विकसित करते हैं।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक योग्यताओं की सूची बनाते समय, बच्चों की सीखने, समस्या-समाधान और दुनिया को समझने की क्षमताओं पर ध्यान दें।
Question 6. बाल्यावस्था के सामाजिक व्यवहार के विशिष्ट प्रतिमान कौन-से हैं?
Answer: बाल्यावस्था में बच्चों के सामाजिक व्यवहार के कुछ खास तरीके होते हैं। ये तरीके उन्हें दूसरों के साथ बातचीत करने और समाज में घुलने-मिलने में मदद करते हैं। ये प्रतिमान इस प्रकार हैं:
- अति संवेदनशीलता
- सामाजिक स्वीकृति (दूसरों द्वारा स्वीकार किया जाना)
- सुझाव ग्रहणशीलता (सुझावों को स्वीकार करना)
- उत्तरदायित्व (जिम्मेदारी लेना)
- प्रतियोगिता (प्रतिस्पर्धा करना)
- एक अच्छे खिलाड़ी के रूप में (खेलों में अच्छा व्यवहार)
- सामाजिक अंतर्दृष्टि सामाजिक विभेदीकरण (सामाजिक भेद समझना)
- पूर्वाग्रह (पहले से बनी राय)
- यौन विरोधी भाव (लिंग के प्रति नकारात्मक भावनाएँ)
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं, दूसरों की स्वीकृति चाहते हैं, सुझाव मानते हैं, जिम्मेदार बनते हैं और प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं।
🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था के सामाजिक प्रतिमानों को सूचीबद्ध करते समय, व्यक्तिगत संवेदनशीलता, समूह में व्यवहार और दूसरों के प्रति दृष्टिकोण जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 7. बालकों के जीवन में नैतिक विकास के महत्त्व को समझाते हुए बाल्यावस्था को प्रभावित करने वाले कारक समझाइए।
Answer: बच्चों के जीवन में नैतिक विकास बहुत जरूरी होता है। यह उन्हें सही-गलत समझने में मदद करता है और उनके व्यवहार को सही दिशा देता है। नैतिक विकास बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है। यह निम्न कामों में महत्वपूर्ण है:
- जागरूकता के विकास में
- सही निर्णय लेने की क्षमता के विकास में
- आचरणों (व्यवहार) के निर्धारण में सहायक
- समाजीकरण (समाज में घुलने-मिलने) में सहायक
- अभिवृत्तियों (सोच और नजरिया) के विकास में
In simple words: नैतिक विकास बच्चों को सही-गलत सिखाता है, उन्हें अच्छे फैसले लेने में मदद करता है, और समाज में सही तरीके से रहने का तरीका बताता है।
🎯 Exam Tip: नैतिक विकास के महत्व को बताते समय, बच्चों के निर्णय लेने की क्षमता, सामाजिक व्यवहार और व्यक्तिगत मूल्यों के निर्माण पर जोर दें।
निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए
Question 1. 'कुरूपता की आयु' कहा जाता है –
(अ) शैशवावस्था को
(ब) बाल्यावस्था को
(स) किशोरावस्था को
(द) नवजात शिशु अवस्था को
Answer: (ब) बाल्यावस्था को
In simple words: बाल्यावस्था को कभी-कभी 'कुरूपता की आयु' कहते हैं क्योंकि इस दौरान बच्चों के चेहरे और शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं, जिससे वे थोड़ी देर के लिए कम आकर्षक दिख सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विकास की विभिन्न अवस्थाओं के लिए दिए गए विशेष नामों को याद रखें, जैसे 'कुरूपता की आयु' बाल्यावस्था से संबंधित है।
Question 2. बौद्धिक विकास को प्रभावित करने वाला कारक है –
(अ) शारीरिक स्वास्थ्य
(ब) मानसिक परिपक्वता
(स) आनुवांशिकता
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक परिपक्वता और आनुवांशिकता - ये तीनों ही बच्चे के सोचने और सीखने की क्षमता पर असर डालते हैं।
🎯 Exam Tip: बौद्धिक विकास एक जटिल प्रक्रिया है जो कई आंतरिक (आनुवंशिक) और बाहरी (स्वास्थ्य, वातावरण) कारकों से प्रभावित होती है।
Question 4. वाणी विकार की श्रेणी में आता है –
(अ) भ्रष्ट उच्चारण
(ब) तुतलाना
(स) हकलाना
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: भ्रष्ट उच्चारण, तुतलाना और हकलाना - ये सभी बोलने की समस्याएं हैं, जिन्हें वाणी विकार कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वाणी विकार में बोलने से जुड़ी कई तरह की कठिनाइयाँ शामिल होती हैं, न कि केवल एक प्रकार की समस्या।
Question 5. भले बुरे का ज्ञान आता है –
(अ) सामाजिक विकास में
(ब) संज्ञानात्मक विकास में
(स) नैतिक विकास में
(द) संवेगात्मक विकास में
Answer: (स) नैतिक विकास में
In simple words: सही और गलत को समझना हमारी नैतिक विकास प्रक्रिया का हिस्सा है, जहाँ हम मूल्यों और सिद्धांतों को सीखते हैं।
🎯 Exam Tip: नैतिक विकास सीधे तौर पर व्यक्ति के मूल्यों, सिद्धांतों और सही-गलत की समझ से संबंधित होता है।
Question. रिक्त स्थान निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए –
1. ..........एक ऐसी योग्यता है जिसकी सहायता से व्यक्ति किसी वस्तु का स्वरूप, महत्त्व तथा विश्लेषण की क्षमता अर्जित करता है।
2. एक ऐसी शक्ति है जो व्यक्ति को नित्य परिवर्तित परिस्थितियों में भी समायोजित होने की क्षमता प्रदान करती है।
3. एवं ........ विकास के कारण बालक तर्क, चिन्तन, विश्लेषण, स्मरण करना सीख जाता है।
4. जीवन कालिक विकास का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण चरण है।
5. प्रत्येक बालक में विकास एक समान होता है।
Answer:
1. संज्ञान
2. वृद्धि
In simple words: दिए गए रिक्त स्थानों में से, पहले का उत्तर 'संज्ञान' है जो किसी चीज को समझने की क्षमता है, और दूसरे का उत्तर 'वृद्धि' है जो बदलती स्थितियों के अनुकूल होने की शक्ति है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के अर्थ और संबंधित अवधारणाओं पर ध्यान दें। पहले उन रिक्त स्थानों को भरें जिनके उत्तर आप निश्चित रूप से जानते हैं।
Question. स्तम्भ A तथा स्तम्भ B के शब्दों को सुमेलित कीजिए –
| स्तम्भ A | स्तम्भ B |
|---|---|
| 1. संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करता है | (a) बबलाना |
| 2. बौद्धिक विकास को प्रभावित करता है | (b) सीखने के अवसर |
| 3. वास्तविक भाषा के पूर्व की अभिव्यक्ति | (c) व्यक्तित्व |
| 4. सांवेगिक विकास | (d) प्रतियोगिता |
| 5. बाल्यावस्था में सामाजिक व्यवहार का प्रतिमान | (e) क्षणिक होना |
Answer:
1. (b) सीखने के अवसर
2. (c) व्यक्तित्व
3. (a) बबलाना
4. (e) क्षणिक होना
5. (d) प्रतियोगिता
In simple words: यहाँ स्तंभ A के विभिन्न विकास पहलुओं को स्तंभ B में दिए गए संबंधित कारकों या विशेषताओं से मिलाया गया है, जैसे संज्ञानात्मक विकास सीखने के अवसरों से प्रभावित होता है।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ियों का मिलान करें जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बचे हुए विकल्पों को मिलाकर सही उत्तर पर पहुँचें।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 7 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. बाल्यावस्था का प्रमुख लक्षण बताइए।
Answer: बाल्यावस्था का एक मुख्य लक्षण यह है कि इस दौरान बच्चों में शारीरिक वृद्धि और मानसिक विकास बहुत तेजी से होते हैं। इस अवस्था में हर बच्चा एक अद्वितीय दर से बढ़ता है।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चों की शारीरिक वृद्धि और दिमाग का विकास बहुत तेजी से होता है।
🎯 Exam Tip: अतिलघु उत्तरीय प्रश्नों में सीधा और संक्षिप्त उत्तर दें, जिसमें मुख्य बिंदु शामिल हो।
Question 2. बाल्यावस्था के अन्तिम पड़ाव में बालक की लम्बाई व वजन बताइए।
Answer: बाल्यावस्था के आखिरी चरण में, एक बच्चे की औसत लंबाई लगभग 57.5 इंच और उसका वजन करीब 48 किलोग्राम होता है। यह मानक बच्चों के शारीरिक विकास को मापने में मदद करता है।
In simple words: बाल्यावस्था के अंत में बच्चे की लंबाई करीब 57.5 इंच और वजन लगभग 48 किलोग्राम होता है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट संख्यात्मक मानों को याद रखने के लिए उन्हें बार-बार दोहराएँ।
Question 3. बालक के सीखने में पिछड़ने का एक महत्त्वपूर्ण कारण बताइए।
Answer: बच्चे के सीखने में पीछे रहने का एक बड़ा कारण माता-पिता का अत्यधिक संरक्षण हो सकता है। जब माता-पिता बच्चों को बहुत ज्यादा बचाते हैं, तो उन्हें खुद से सीखने और अनुभव प्राप्त करने के मौके कम मिलते हैं।
In simple words: माता-पिता की ज्यादा देखभाल बच्चों को खुद से सीखने से रोक सकती है, जिससे वे पीछे रह सकते हैं।
🎯 Exam Tip: बच्चे के विकास में माता-पिता की भूमिका को समझते समय, अत्यधिक संरक्षण के नकारात्मक प्रभावों पर ध्यान दें।
Question 4. बालक अपनी असीम ऊर्जा एवं शक्ति का प्रयोग कहाँ करता है?
Answer: बालक अपनी असीम ऊर्जा और शक्ति का प्रयोग नए कौशल सीखने और विभिन्न शारीरिक गतिविधियों जैसे दौड़ना, कूदना और खेलकूद में करता है। इस ऊर्जा से वे अपनी शारीरिक क्षमताओं को निखारते हैं।
In simple words: बच्चे अपनी बहुत सारी ऊर्जा और ताकत का इस्तेमाल नए कौशल सीखने और खेलकूद जैसी शारीरिक गतिविधियों में करते हैं।
🎯 Exam Tip: यह समझने के लिए कि बच्चे अपनी ऊर्जा का उपयोग कैसे करते हैं, उनकी खेल गतिविधियों और सीखने की प्रक्रियाओं पर ध्यान दें।
Question 5. लड़कियाँ किस प्रकार के कौशल को अपनाती हैं?
Answer: लड़कियाँ आमतौर पर सूक्ष्मपेशीय कौशल को अपनाने में अधिक निपुण होती हैं। इसमें वे बारीक और सटीक काम करना सीखती हैं, जैसे लिखना, चित्र बनाना या छोटे-छोटे खिलौनों से खेलना।
In simple words: लड़कियाँ छोटे और सटीक काम करने वाले कौशल, जैसे लिखना और चित्रकारी, सीखने में अच्छी होती हैं।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मपेशीय कौशल में छोटे और सटीक हाथ-आँख समन्वय वाले कार्य शामिल होते हैं, जबकि स्थूलपेशीय कौशल में बड़ी मांसपेशियाँ शामिल होती हैं।
Question 6. 'संज्ञान' से आप क्या समझते हैं?
Answer: 'संज्ञान' एक ऐसी क्षमता है जिसकी मदद से कोई व्यक्ति किसी चीज के स्वरूप, महत्व और उसका विश्लेषण करने की क्षमता हासिल करता है। इसके द्वारा व्यक्ति उस वस्तु के बारे में अपने विचार बनाता है। यह सिर्फ सुनकर समझना नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह भी समझना है कि दूसरे लोग क्या कह रहे हैं। संज्ञान हमें दुनिया को तार्किक रूप से संसाधित करने की शक्ति देता है।
In simple words: संज्ञान का मतलब है किसी चीज को समझना, उसका महत्व जानना और उसके बारे में सोचना।
🎯 Exam Tip: संज्ञान की परिभाषा में समझने, विश्लेषण करने और विचार बनाने की क्षमताओं पर जोर दें।
Question 7. संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों के नाम लिखिए।
Answer: संज्ञानात्मक विकास, यानी सोचने और समझने की क्षमता को कई कारक प्रभावित करते हैं। इन कारकों में आनुवांशिकता और बच्चे के पर्यावरण का प्रभाव दोनों शामिल होते हैं।
- आनुवांशिकता (माता-पिता से मिलने वाले गुण)
- ज्ञानेन्द्रियाँ (जैसे देखना, सुनना, स्पर्श करना)
In simple words: संज्ञानात्मक विकास को आनुवांशिकता (जो हमें माता-पिता से मिलती है) और हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ (देखने, सुनने, छूने की शक्ति) प्रभावित करती हैं।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक विकास के कारकों को याद करते समय, बच्चे की जन्मजात विशेषताओं और पर्यावरण से प्राप्त संवेदी जानकारी दोनों पर विचार करें।
Question 8. बुद्धि क्या है?
Answer: बुद्धि एक ऐसी खास शक्ति है जो किसी व्यक्ति को लगातार बदलती हुई परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता देती है। यह हमें नई समस्याओं को हल करने और नए अनुभवों से सीखने में मदद करती है।
In simple words: बुद्धि वह शक्ति है जो हमें हर नई और बदलती स्थिति में खुद को ढालने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: बुद्धि की परिभाषा में 'अनुकूलन' और 'परिवर्तित परिस्थितियों में समायोजन' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें।
Question 9. बौद्धिक विकास को प्रभावित करने वाले दो कारक लिखिए।
Answer: बौद्धिक विकास को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक परिपक्वता हैं। ये दोनों बच्चों की सीखने और सोचने की क्षमताओं को निर्धारित करते हैं।
- शारीरिक स्वास्थ्य
- मानसिक परिपक्वता (मन का पूरी तरह विकसित होना)
In simple words: शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक परिपक्वता बच्चे के बौद्धिक विकास पर असर डालते हैं।
🎯 Exam Tip: बौद्धिक विकास के कारकों में शारीरिक और मानसिक दोनों पहलुओं को शामिल करें, क्योंकि ये एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
Question 10. भाषा विकास की अवस्थाएँ कौन-कौन सी होती हैं?
Answer: भाषा विकास की मुख्य रूप से दो अवस्थाएँ या अभिव्यक्तियाँ होती हैं, जो बच्चों के बोलने और समझने की प्रक्रिया को दर्शाती हैं। ये अवस्थाएँ इस प्रकार हैं:
- उच्चारण में दोष (शब्दों को सही ढंग से न बोल पाना)
- भ्रष्ट उच्चारण (गलत या अस्पष्ट तरीके से बोलना)
In simple words: भाषा के विकास में बोलने में गलती करना या शब्दों का गलत उच्चारण करना मुख्य अवस्थाएँ हैं।
🎯 Exam Tip: भाषा विकास की अवस्थाओं को याद करते समय, बच्चों के बोलने और शब्दों के उच्चारण से संबंधित समस्याओं पर ध्यान दें।
Question 12. बाल्यावस्था के दो सामान्य संवेग बताइए।
Answer: बाल्यावस्था में बच्चों में आमतौर पर दो सामान्य संवेग देखे जाते हैं: भय (डर) और क्रोध (गुस्सा)। ये संवेग बच्चों के व्यवहार और उनकी प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
- भय (डर)
- क्रोध (गुस्सा)
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे अक्सर डर और गुस्सा महसूस करते हैं।
🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था में संवेगों की पहचान करते समय, बच्चों में उत्पन्न होने वाली प्राथमिक और तीव्र भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 13. नैतिक विकास से आप क्या समझते हैं?
Answer: नैतिक विकास का मतलब है कि किसी सामाजिक समूह द्वारा बनाए गए नैतिक नियमों और सही व्यवहार के तरीकों को सीखना और उनका पालन करना। यह हमें सही-गलत का फर्क सिखाता है।
In simple words: नैतिक विकास वह प्रक्रिया है जिसमें हम समाज के बनाए हुए अच्छे व्यवहार के नियम सीखते और उनका पालन करते हैं।
🎯 Exam Tip: नैतिक विकास की परिभाषा में 'सामाजिक नियमों' और 'सही व्यवहार' जैसे शब्दों पर जोर दें।
Question 14. बालकों के जीवन में नैतिक विकास का एक महत्त्व बताइए।
Answer: बच्चों के जीवन में नैतिक विकास का एक बड़ा महत्व यह है कि यह उन्हें समाज में घुलने-मिलने (सामाजीकरण) में मदद करता है। नैतिक मूल्य उन्हें सामाजिक रूप से स्वीकार्य व्यवहार सिखाते हैं।
In simple words: नैतिक विकास बच्चों को समाज के नियमों को सीखने और दूसरों के साथ अच्छे से रहने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: नैतिक विकास के महत्व को बताते समय, इसे समाजीकरण और सामाजिक समायोजन से जोड़ना एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
Answer: संज्ञानात्मक विकास, यानी सोचने और समझने की क्षमता को कई कारक प्रभावित करते हैं। इन कारकों में आनुवांशिकता और बच्चे के पर्यावरण का प्रभाव दोनों शामिल होते हैं।
- आनुवांशिकता (माता-पिता से मिलने वाले गुण)
- ज्ञानेन्द्रियाँ (जैसे देखना, सुनना, स्पर्श करना)
- परिपक्वता (उम्र के साथ होने वाला मानसिक विकास)
- मानसिक योग्यता (दिमागी क्षमता)
- समायोजन क्षमता (बदलती परिस्थितियों में ढलने की शक्ति)
- शिक्षण प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था (सही शिक्षा और ट्रेनिंग)
- आयु विभेद (उम्र का अंतर)
In simple words: संज्ञानात्मक विकास को आनुवांशिकता, ज्ञानेन्द्रियाँ, मानसिक परिपक्वता, मानसिक योग्यता, समायोजन क्षमता, अच्छी शिक्षा और उम्र का अंतर जैसे कारक प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक विकास के कारकों को सूचीबद्ध करते समय, जैविक (आनुवंशिकता, परिपक्वता) और पर्यावरणीय (ज्ञानेन्द्रियाँ, शिक्षा, समायोजन) दोनों पहलुओं को शामिल करें।
Question 2. बालकों की भाषा सामग्री की विशेषताएँ बताइए।
Answer: बच्चों की भाषा में कई खास बातें होती हैं जो उनके विकास के साथ बदलती रहती हैं। ये विशेषताएँ दर्शाती हैं कि बच्चे कैसे सोचते और दूसरों से जुड़ते हैं।
In simple words: बच्चों की भाषा में कुछ खास बातें होती हैं जैसे खुद पर केंद्रित बात करना, दूसरों से जुड़ने वाली बातें, बहुत सवाल पूछना, बातों को दोहराना और अपनी भावनाओं को व्यक्त करना।
🎯 Exam Tip: बच्चों की भाषा की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उनके अहं-केंद्रित भाषण, सामाजिक संपर्क, प्रश्नाकुलता और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर ध्यान दें।
Question 3. बालकों में वाणी विकास के संकट लिखिए।
Answer: बच्चों में वाणी विकास के कई संकट या समस्याएँ हो सकती हैं, जो उनके बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। इन समस्याओं को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
| वाणी दोष | वाणी विकार |
|---|---|
| 1. उच्चारण में दोष | 1. भ्रष्ट उच्चारण |
| 2. शब्दों के अर्थ सम्बन्धित दोष | 2. अस्पष्ट उच्चारण |
| 3. वाक्य रचना में दोष | 3. तुतलाना |
| 4. हकलाना | |
| 5. तीव्र अस्पष्ट वाणी |
In simple words: बच्चों में बोलने से जुड़ी समस्याओं में उच्चारण की गलतियाँ, शब्दों के अर्थ समझने में परेशानी, वाक्य बनाने में दिक्कत, और हकलाना जैसी चीजें शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: वाणी विकास के संकटों को सूचीबद्ध करते समय, 'वाणी दोष' और 'वाणी विकार' के बीच अंतर करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत विशिष्ट उदाहरण दें।
Question 5. बाल्यावस्था के सामान्य संवेग बताइए।
Answer: बाल्यावस्था में बच्चे कई तरह के सामान्य संवेगों का अनुभव करते हैं। ये संवेग उनके भावनात्मक विकास का हिस्सा होते हैं और उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं। इन संवेगों में शामिल हैं:
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे डर, गुस्सा, ईर्ष्या, दुख, चिंता, जिज्ञासा और शर्म जैसी भावनाओं का अनुभव करते हैं।
🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था के सामान्य संवेगों को सूचीबद्ध करते समय, सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की भावनाओं को शामिल करें।
Question 6. नैतिक विकास के अधिगम बताइए।
Answer: नैतिक विकास का अधिगम कई पहलुओं से होता है, जो बच्चों को सही-गलत, अच्छे-बुरे और सामाजिक नियमों को समझने में मदद करते हैं। यह अधिगम उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
In simple words: नैतिक विकास को सीखने में सामाजिक चेतना, सही-गलत का ज्ञान, मानवीय चेतना और शर्म व दोष की भावनाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
🎯 Exam Tip: नैतिक विकास के अधिगम को बताते समय, सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक पहलुओं के अंतर्संबंध पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 7. बालकों के संवेग की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: बच्चों के संवेगों (भावनाओं) में कई खास बातें होती हैं, जो उन्हें बड़ों से अलग बनाती हैं। ये विशेषताएँ बच्चों के भावनात्मक जीवन को समझने में मदद करती हैं। बच्चों के संवेगों की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- संवेगों का तीव्र एवं उग्र होना (भावनाएँ बहुत तेज और उग्र होती हैं)
- संवेगों का बार-बार होना (भावनाएँ जल्दी-जल्दी बदलती हैं)
- संवेगात्मक व्यवहार में वैयक्तिक भिन्नता दिखना (हर बच्चे की भावनाएँ अलग तरह से व्यक्त होती हैं)
- आसानी से पहचाना जाना और प्रत्यक्ष रूप से दिखना (भावनाएँ चेहरे पर साफ दिख जाती हैं)
- क्षणिक होना (भावनाएँ थोड़ी देर के लिए रहती हैं)
- शारीरिक क्रियाओं से सम्बन्धित होना (जैसे डरने पर कांपना)
- संवेगों की शक्ति में परिवर्तन होना (समय के साथ भावनाओं की तीव्रता बदलती है)
- मूर्त वस्तुओं तथा परिस्थिति से सम्बन्धित होना (किसी खास चीज या स्थिति से जुड़ी होती हैं)
In simple words: बच्चों की भावनाएँ तेज, बार-बार बदलने वाली, आसानी से दिखने वाली, थोड़ी देर के लिए रहने वाली होती हैं, और वे चीजों व स्थितियों से जुड़ी होती हैं।
🎯 Exam Tip: बच्चों के संवेगों की विशेषताओं को सूचीबद्ध करते समय, उनकी तीव्रता, अस्थिरता, दृश्यता और बाहरी कारकों से जुड़ाव पर जोर दें।
Question 8. बालकों के सामाजिक विकास का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer: प्रत्येक बच्चे में अपने हमउम्र बच्चों के साथ रहने, खाने-पीने, घूमने और बातें करने की तीव्र इच्छा होती है। वे यही चाहते हैं कि उनके दोस्त उनके साथ हों और वे एक-दूसरे से सीखें। सामाजिक विकास बच्चों को दोस्ती बनाने और समूह में काम करने में मदद करता है।
In simple words: बच्चे अपने दोस्तों के साथ रहना, खेलना और बातें करना पसंद करते हैं, जिससे वे समाज में घुलना-मिलना सीखते हैं।
🎯 Exam Tip: बच्चों के सामाजिक विकास को समझाते समय, सहकर्मी संबंधों, समूह गतिविधियों और सामाजिक कौशल के विकास पर ध्यान दें।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. बाल्यावस्था में संज्ञानात्मक विकास का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: संज्ञानात्मक विकास का मतलब है, वह क्षमता जिससे व्यक्ति किसी चीज के स्वरूप, उसके महत्व को समझ पाता है और उसका विश्लेषण कर पाता है, फिर उसके बारे में साफ विचार बना पाता है। यह हमें नई जानकारी को संसाधित करने में मदद करता है। बच्चे का संज्ञानात्मक विकास उसकी सोच, किसी स्थिति में खुद को ढालने की क्षमता और आसपास के बदलावों से होने वाले डर व चिंता से खुद को बचाने की क्षमता को तय करता है। इस उम्र में बच्चे अपनी इंद्रियों का उपयोग करके विभिन्न चीजों, घटनाओं और जानकारियों को समझना शुरू करते हैं। दिमाग और मानसिक विकास के कारण बच्चे तर्क करना, सोचना, चीजों को याद रखना सीख जाते हैं तथा कई बातों को गहराई से जानना चाहते हैं। इस अवस्था में बच्चा खोज करने वाला और जिज्ञासु स्वभाव का होता है। इसी कारण वह अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए अपने माता-पिता, दोस्तों और शिक्षकों से सवाल पूछता है। इस अवस्था में बच्चा समूह में रहना पसंद करता है (ग्रेगेरियस) और अपने दोस्तों के साथ अधिक समय बिताना चाहता है। बच्चा अपने सामान और खिलौने भी दूसरों के साथ साझा करता है। अब उसे अच्छे से पता होता है कि दूध अलग-अलग रूपों में बदल सकता है, लेकिन उसकी मात्रा और आयतन (आयतन) वही रहता है। इसी तरह, वह वजन, लंबाई, क्षेत्रफल, त्रिज्या, व्यास, गहराई, ऊँचाई जैसे छोटे-छोटे विचारों को समझना शुरू कर देता है।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे चीजों को समझने, विश्लेषण करने और उनके बारे में सोचने की क्षमता विकसित करते हैं। वे जिज्ञासु होते हैं, सवाल पूछते हैं, और अपने दोस्तों के साथ समूह में रहना पसंद करते हैं।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक विकास के विस्तृत वर्णन में 'संज्ञान' की परिभाषा, इसे प्रभावित करने वाले कारक, और बाल्यावस्था में बच्चों की सीखने व समझने की विशेष क्षमताओं को शामिल करें।
Question 2. बौद्धिक विकास क्या है? बाल्यावस्था में बौद्धिक विकास को समझाते हुए बौद्धिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
Answer:
बौद्धिक विकास: बुद्धि वह शक्ति है जो व्यक्ति को हमेशा बदलती परिस्थितियों में भी खुद को ढालने की क्षमता देती है। बुद्धि के आधार पर ही किसी व्यक्ति की क्षमताओं का पता चलता है और उसे तेज बुद्धि वाला, सामान्य बुद्धि वाला या कम बुद्धि वाला कहा जाता है। बुद्धि के इसी विकास को बौद्धिक विकास कहते हैं। यह हमें समस्याओं को हल करने और नई जानकारी को संसाधित करने में मदद करता है।
बाल्यावस्था में बौद्धिक विकास:
- रुचि (पसंद) का विकास होता है।
- चिन्तन, स्मरण (याद रखने की शक्ति), कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का विकास होता है।
- समस्या समाधान की क्षमता बहुत तेजी से बढ़ जाती है।
बौद्धिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक –
- शारीरिक स्वास्थ्य
- वातावरण
- लिंग-विभेद (लड़का या लड़की होने का अंतर)
- आयु-विभेद (उम्र का अंतर)
- बालक का जन्मक्रम (जन्म का क्रम, जैसे पहला बच्चा या दूसरा)
- विद्यालय (स्कूल का माहौल)
- मानसिक परिपक्वता (मन का पूरी तरह विकसित होना)
- आनुवांशिकता (वंशानुगत गुण)
- ज्ञानेन्द्रिय दोष (इंद्रियों में कोई कमी)
- मस्तिष्क में दोष (दिमाग में कोई कमी)
- शिक्षा (मिलने वाली पढ़ाई)
- व्यक्तित्व (पर्सनालिटी)
- आस-पड़ोस का वातावरण
In simple words: बौद्धिक विकास हमारी सोचने, समझने और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता को दर्शाता है। इसे शारीरिक स्वास्थ्य, शिक्षा, आसपास के माहौल और आनुवांशिकता जैसे कई कारक प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, बौद्धिक विकास की परिभाषा के बाद बाल्यावस्था में इसके प्रमुख पहलुओं और इसे प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों को विस्तार से समझाएँ।
Question 3. भाषा विकास को समझाते हुए भाषा विकास की अवस्थाएँ तथा प्रतिमान बताइए।
Answer:
भाषा विकास:
भाषा बातचीत करने का एक खास तरीका है, जिसकी मदद से हम अपनी बातें दूसरों तक पहुँचा पाते हैं और अपने मन के विचार साफ-साफ बता पाते हैं। यह बच्चों के सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक और व्यक्तित्व के विकास में बहुत मदद करती है। इसलिए, हर बच्चे के लिए अपनी बात कहना सीखना बहुत जरूरी है। भाषा हमें न केवल दूसरों से जुड़ने में मदद करती है, बल्कि हमारे सोचने और समझने की शक्ति को भी बढ़ाती है।
भाषा विकास का प्रतिमान:
भाषा का विकास ठीक उसी तरह होता है जैसे शारीरिक क्रियाओं का विकास होता है, और ये दोनों साथ-साथ चलते रहते हैं। हर बच्चे में भाषा का विकास एक जैसा होता है। हालांकि, जिन बच्चों को सही समय पर अभ्यास, हौसला और सीखने के अवसर मिलते हैं, वे जल्दी सीखते हैं, जबकि जिन्हें ये चीजें नहीं मिलतीं, वे थोड़ी देरी से सीखते हैं।
In simple words: भाषा बोलने और समझने का एक तरीका है। यह बच्चों के बढ़ने और सीखने में बहुत मदद करती है, खासकर जब उन्हें अभ्यास और प्रोत्साहन मिलता है।
🎯 Exam Tip: भाषा विकास को समझाते समय, संप्रेषण (communication) के महत्व और इसके सामाजिक, मानसिक, संवेगात्मक प्रभावों को अवश्य शामिल करें।
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