Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Home Science Chapter 06 शैशवावस्था से बाल्यावस्था तक विकास-I
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प्रश्न 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें – (i) शैशवावस्था को कितने भागों में विभक्त किया जा सकता है?
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
Answer: (ब) दो
In simple words: शैशवावस्था को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है। यह बच्चों के विकास के अलग-अलग चरणों को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था और पूर्व-बाल्यावस्था की आयु सीमाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर परिभाषा-आधारित प्रश्नों में पूछी जाती हैं।
प्रश्न 1. (iv) बबलाने की क्रिया शिशु किस आयु में करता है?
(अ) नवजात शैशवावस्था
(ब) शैशवावस्था
(स) पूर्व बाल्यावस्था
(द) उत्तर बाल्यावस्था
Answer: (ब) शैशवावस्था
In simple words: बच्चे आमतौर पर शैशवावस्था के दौरान बबलाने लगते हैं, जब वे अपनी पहली ध्वनियाँ और शब्द बनाना सीखते हैं। यह भाषा सीखने की शुरुआत होती है।
🎯 Exam Tip: भाषा विकास के चरणों को क्रम से याद रखें, जैसे बबलाना, एक-शब्द वाक्य, और फिर बहु-शब्द वाक्य।
प्रश्न 1. (v) किस अवस्था को टोली-पूर्व अवस्था कहते है?
(अ) नवजात शैशवावस्था
(ब) शैशवावस्था
(स) उत्तर बाल्यावस्था
(द) पूर्व बाल्यावस्था
Answer: (द) पूर्व बाल्यावस्था
In simple words: पूर्व बाल्यावस्था को "टोली-पूर्व अवस्था" भी कहते हैं, क्योंकि इस समय बच्चे समूह में खेलना शुरू करते हैं लेकिन अभी औपचारिक समूह नहीं बनाते हैं। यह सामाजिक विकास की एक महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विकास अवस्थाओं के वैकल्पिक नामों और उनकी विशेषताओं को याद रखना परीक्षाओं में सहायक होता है।
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करो -
1. सामाजिक विकास के साथ.......... विकास उसी क्रम मे होता है।
2. व्यक्तित्व प्रतिमानों का विकास...........तथा का परिणाम है।
3. नवजात शैशवावस्था में शरीर का भार हो जाता है।
4. .वर्ष तक पूर्ण वाक्य क्षमता विकसित हो जाती है।
5. पूर्व बाल्यावस्था में 'स्व' का विकास.......... प्रतिमान के अनुसार होता है।
Answer:
1. सांवेगिक
In simple words: सामाजिक विकास और भावनात्मक (संवेगात्मक) विकास एक साथ चलते हैं। जैसे-जैसे बच्चे दूसरों से जुड़ना सीखते हैं, उनके भावनाएँ भी विकसित होती हैं।
🎯 Exam Tip: विकास के विभिन्न आयामों (सामाजिक, सांवेगिक, शारीरिक, संज्ञानात्मक) के बीच के संबंधों को समझें, क्योंकि वे अक्सर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 3. शैशवावस्था के विकासात्मक कृत्य समझाइए।
Answer: शैशवावस्था के विकासात्मक कृत्यों को निम्न रेखाचित्र में दर्शाया गया है – शैशवावस्था में बच्चे कुछ खास काम सीखते हैं, जैसे शरीर पर नियंत्रण करना और चलना सीखना। ये काम उनके आगे के विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चों के सीखने के कुछ खास काम होते हैं, जैसे अपने शरीर को संभालना, खाना खाना और चलना।
🎯 Exam Tip: विकासात्मक कृत्यों का वर्णन करते समय, प्रत्येक कृत्य का नाम बताएं और संक्षेप में समझाएं कि बच्चा उस चरण में क्या सीखता है।
प्रश्न 4. शैशवावस्था को परिभाषित कीजिए।
Answer: शैशवावस्था (Infancy): शिशु के जन्म के पहले महीने से लेकर 5 वर्ष की आयु तक के समय को शैशवावस्था कहा जाता है। इस अवधि को आगे दो उप-भागों में बांटा गया है: 1 माह से 2 वर्ष तक का समय प्रारंभिक शैशवावस्था कहलाता है, और 2 वर्ष से 5 वर्ष तक का समय पूर्व-बाल्यावस्था कहलाता है।
In simple words: शैशवावस्था बच्चे के जन्म से 5 साल तक का समय है, जिसमें 1 से 2 साल की शुरुआती शैशवावस्था और 2 से 5 साल की पूर्व-बाल्यावस्था शामिल है।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था की सही आयु सीमा और उसके उप-भागों को उनकी संबंधित आयु के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 5. पूर्व-बाल्यावस्था में सामाजिक विकास को समझाइए।
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में सामाजिक विकास: इस अवस्था में माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार बच्चों के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैसे-जैसे बच्चे बाहरी लोगों के साथ बातचीत करना शुरू करते हैं, उनकी सामाजिक दुनिया बढ़ती जाती है। इस दौरान बच्चे माता-पिता पर कम निर्भर होते हैं। इस अवस्था को टोली-पूर्व अवस्था भी कहा जाता है, जहाँ बच्चे समूहों में रुचि लेने लगते हैं और साथ में संगठित खेल खेलना शुरू करते हैं।
In simple words: पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चे परिवार से बाहर निकलकर दूसरों के साथ सामाजिक होना सीखते हैं, कम निर्भर बनते हैं, और दोस्तों के साथ खेलना शुरू करते हैं।
🎯 Exam Tip: सामाजिक विकास में परिवार और बाहरी दुनिया की भूमिका, बच्चों की निर्भरता में कमी, और टोली-पूर्व व्यवहार जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें।
प्रश्न 7. शैशवावस्था को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: शैशवावस्था को प्रभावित करने वाले कारक (संकट)
| शारीरिक कारक | मनोवैज्ञानिक कारक / पारम्परिक विश्वास |
|---|---|
| 1. नकारात्मक अभिभावकीय वातावरण | 1. जन्म के बारे में पारम्परिक विश्वास |
| 2. मुश्किल और उलझा हुआ जन्म | 2. असाध्यता |
| 3. बहु जन्म | 3. शिशु की विशिष्टता |
| 4. पश्च-परिपक्वता | 4. विकासात्मक विलम्ब |
| 5. पूर्व-परिपक्वता | 5. विकास के पठार |
| 6. शिशु | 6. प्रेरणा का अभाव |
| 7. नवीन माता-पिता अवसाद |
शैशवावस्था में बच्चे का विकास कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे उनका शारीरिक स्वास्थ्य और उनके आसपास का माहौल। बच्चे को सही देखभाल और प्रेम मिलना बहुत जरूरी होता है ताकि उनका विकास अच्छे से हो सके।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चे के विकास पर शरीर, दिमाग और आसपास के माहौल का असर पड़ता है। मुश्किल जन्म या खराब माहौल बच्चे के विकास को रोक सकता है।
🎯 Exam Tip: कारकों को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक श्रेणियों में विभाजित करके याद करें, और प्रत्येक श्रेणी के तहत कम से कम तीन बिंदुओं का वर्णन करने का अभ्यास करें।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से विकासात्मक कृत्य है –
(अ) ठोस आहार लेना सीखना
(ब) पढ़ने के लिए तैयार होना
(स) चलना सीखना
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: विकास के दौरान, बच्चे कई नए काम सीखते हैं, जैसे ठोस खाना खाना, पढ़ना और चलना। ये सभी उनके बढ़ने और सीखने का हिस्सा होते हैं।
🎯 Exam Tip: विकासात्मक कृत्यों में बच्चे के विभिन्न क्षेत्रों (शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक) में होने वाले सभी महत्वपूर्ण सीख शामिल होते हैं।
प्रश्न 3. किस अवस्था में बालक अपने लिए शब्द भण्डार निर्मित करता है?
(अ) नवजात शैशवावस्था में
(ब) शैशवावस्था में
(स) पूर्व-बाल्यावस्था में
(द) उत्तर-बाल्यावस्था में
Answer: (स) पूर्व-बाल्यावस्था में
In simple words: बच्चे पूर्व-बाल्यावस्था में नए शब्द सीखते हैं और अपना शब्दकोष बढ़ाते हैं। इस उम्र में वे बोलना और समझना तेजी से सीखते हैं।
🎯 Exam Tip: शब्द भण्डार का विकास भाषा विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास से जुड़ा होता है।
प्रश्न 4. शारीरिक विकास नहीं है –
(अ) दौड़ना
(ब) मुस्कराना
(स) साइकिल चलाना
(द) चलना
Answer: (ब) मुस्कराना
In simple words: दौड़ना, साइकिल चलाना और चलना शारीरिक क्रियाएँ हैं, जबकि मुस्कराना एक भावना को व्यक्त करने का तरीका है, जो शारीरिक विकास का हिस्सा नहीं है।
🎯 Exam Tip: शारीरिक विकास में बड़े और छोटे मांसपेशीय कौशल का विकास शामिल होता है, जबकि सामाजिक और भावनात्मक विकास में भावनाएँ और संबंध शामिल होते हैं।
1. शैशवावस्था में विभिन्न प्रकार के __________ के मानक बनाए गए हैं।
2. शैशवावस्था में बालक __________ के आधार पर क्रियाओं का निष्पादन करता है।
3. पाँच वर्ष पूरे होने पर पूर्व __________ का विकास हो जाता है।
4. नवजात शैशवावस्था में प्रारम्भ में केवल __________ व __________ सम्बन्धी संवेग पाये जाते हैं।
5. व्यक्तित्व विकास के लिए __________ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण नाजुक आयु होती है।
Answer:
1. विकासात्मक परिवर्तन
2. अनुभवों
3. वाक्य क्षमता
4. प्रिय, अप्रिय
5. शैशवावस्था।
In simple words: बच्चों के बढ़ने के साथ-साथ, वे अलग-अलग चीजें सीखते हैं, जैसे भाषा का उपयोग करना या अपनी भावनाओं को समझना। ये उनके जीवन के शुरुआती सालों में बहुत जरूरी होता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, संदर्भ को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि भरा गया शब्द वाक्य के अर्थ को पूरा करता है और सही है।
सुमेलन
स्तम्भ A तथा स्तम्भ B को सुमेलित कीजिए।
स्तम्भ A
1. पश्च परिपक्वता
2. विकासात्मक विलम्ब
3. लैंगिक विभेद
4. 'स्व' तथा 'शील गुण
5. भय, प्रेम, क्रोध
स्तम्भ B
(a) शारीरिक कारक
(b) मनोवैज्ञानिक कारक
(c) नवजात शैशवावस्था
(d) विकासात्मक शैशवावस्था
(e) व्यक्तित्व विकास
Answer:
1. (b) मनोवैज्ञानिक कारक
2. (a) शारीरिक कारक
3. (d) विकासात्मक शैशवावस्था
4. (e) व्यक्तित्व विकास
5. (c) नवजात शैशवावस्था
In simple words: यह मिलान विभिन्न विकासात्मक अवधारणाओं को उनके सही श्रेणियों या अवस्थाओं से जोड़ता है। यह दर्शाता है कि हर पहलू विकास के किसी खास हिस्से से जुड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ों को पहचानें जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी विकल्पों को खत्म करने की विधि का उपयोग करें।
प्रश्न 1. शैशवावस्था के दो भाग कौन-कौन से हैं?
Answer: शैशवावस्था को दो मुख्य भागों में बांटा गया है: पहला भाग 1 माह से 2 वर्ष की आयु तक की शैशवावस्था, और दूसरा भाग 2 वर्ष से 5 वर्ष की आयु तक की पूर्व-बाल्यावस्था कहलाती है। इन दोनों अवधियों में बच्चे का विकास बहुत तेजी से होता है।
In simple words: शैशवावस्था के दो भाग हैं: पहला, 1 महीने से 2 साल तक की उम्र; और दूसरा, 2 से 5 साल तक की उम्र, जिसे पूर्व-बाल्यावस्था कहते हैं।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था के उप-भागों को उनकी सही आयु सीमा के साथ स्पष्ट रूप से उल्लेख करें, क्योंकि यह एक सीधा परिभाषा-आधारित प्रश्न है।
प्रश्न 3. नवजात शिश में संज्ञानात्मक योग्यताएँ किस प्रकार की होती हैं?
Answer: नवजात शिशुओं में संज्ञानात्मक योग्यताएँ सीमित होती हैं। वे मुख्य रूप से अपनी इंद्रियों और सहज प्रतिक्रियाओं के माध्यम से दुनिया को समझते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उनकी समझने की क्षमता विकसित होती जाती है।
In simple words: नवजात बच्चे चीजों को समझने में ज्यादा सक्षम नहीं होते हैं। वे अपनी इंद्रियों और सहज प्रतिक्रियाओं से ही दुनिया को थोड़ा-बहुत समझते हैं।
🎯 Exam Tip: नवजात शिशु की संज्ञानात्मक क्षमताओं को 'सीमित' बताएं और यह भी स्पष्ट करें कि वे अपनी इंद्रियों पर निर्भर करते हैं।
प्रश्न 4. किन्हीं दो विकासात्मक कृत्यों को लिखिए।
Answer: शैशवावस्था के दो विकासात्मक कृत्य निम्नलिखित हैं:
• शारीरिक व्यर्थ निष्कासन
• सही गलत का अन्तर पहचानना।
शिशु के विकास के लिए ये दोनों ही क्रियाएँ बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये शारीरिक और नैतिक समझ की नींव रखती हैं।
In simple words: बच्चे के विकास के दो जरूरी काम हैं: अपने शरीर के कचरे को बाहर निकालना और यह समझना कि क्या सही है और क्या गलत।
🎯 Exam Tip: विकासात्मक कृत्यों का उल्लेख करते समय, स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों का प्रयोग करें। सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा बताए गए कृत्य उस विशेष विकासात्मक चरण के लिए प्रासंगिक हों।
प्रश्न 5. नवजात शैशवावस्था में शारीरिक विकास समझाइए।
Answer: नवजात शैशवावस्था में बच्चे के शरीर में तेजी से बदलाव आते हैं। इस अवस्था में शिशु का जन्म का भार लगभग दोगुना हो जाता है (लगभग 12-15 पौंड)। सिर की लम्बाई पूरे शरीर की तुलना में 1/4 होती है। त्वचा का रंग भी बदलता है और सिर पर नए बाल उगने लगते हैं।
In simple words: नवजात शिशुओं का वजन तेजी से बढ़ता है, उनके सिर का आकार शरीर के अनुपात में बड़ा होता है, और उनकी त्वचा व बालों में बदलाव आते हैं।
🎯 Exam Tip: शारीरिक विकास के प्रमुख बिंदुओं को मात्रात्मक जानकारी (जैसे भार और लम्बाई) के साथ बताएं, जो आपकी व्याख्या को अधिक सटीक बनाते हैं।
प्रश्न 6. शैशवावस्था में शारीरिक विकास समझाइए।
Answer: शैशवावस्था के दौरान शिशु की लम्बाई में लगभग 2 इंच और भार में 2-3 पौंड की वृद्धि होती है। इस आयु में बच्चे चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना जैसी विभिन्न शारीरिक क्रियाएँ सीखना शुरू करते हैं। इस अवस्था में मांसपेशीय नियंत्रण विकसित होता है, जिससे वे अधिक सक्रिय हो पाते हैं।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चे थोड़े लंबे और भारी होते हैं, और वे चलना, दौड़ना और साइकिल चलाना जैसी नई शारीरिक चीजें सीखना शुरू करते हैं।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था में हुए शारीरिक परिवर्तनों को माप (जैसे इंच और पौंड) के साथ जोड़कर बताएं, और उन प्रमुख गतिविधियों का उल्लेख करें जो बच्चे इस अवधि में सीखते हैं।
प्रश्न 7. पूर्व-बाल्यावस्था में बालक अपने अनुभवों को किन माध्यमों से प्रस्तुत करता है।
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में बालक अपने अनुभवों को प्रतीकों, कौशलों और प्रतिभाओं जैसे विभिन्न माध्यमों से प्रस्तुत करता है। वे अपने विचारों को व्यक्त करने और दुनिया के साथ बातचीत करने के लिए कल्पना, खेल और भाषा का उपयोग करते हैं।
In simple words: पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चे अपने अनुभवों को दिखाने के लिए चित्र बनाते हैं, खेलते हैं, और बातें करते हैं।
🎯 Exam Tip: उन रचनात्मक और प्रतीकात्मक तरीकों पर जोर दें जिनसे बच्चे इस अवस्था में अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करते हैं।
प्रश्न 9. नवजात शैशवावस्था में भाषा विकास को समझाइए।
Answer: नवजात शिशु भाषा विकास की प्रक्रिया में सबसे पहले क्रन्दन करता है, जिसके लिए श्वसन तन्त्र का उपयोग किया जाता है। रोना ही बच्चे के संचार का पहला माध्यम होता है, जिसके द्वारा वह अपनी जरूरतों और भावनाओं को व्यक्त करता है।
In simple words: नवजात शिशु सबसे पहले रोना सीखता है, जो उसकी पहली भाषा होती है। इससे वह अपनी जरूरतें और भावनाएँ बताता है।
🎯 Exam Tip: भाषा विकास में क्रन्दन के महत्व को समझाएं और बताएं कि यह संचार का प्राथमिक साधन कैसे बनता है।
प्रश्न 10. शैशवावस्था में बालक किस प्रकार की ध्वनियाँ निकालता है?
Answer: शैशवावस्था में शिशु बलबलाते हुए कुछ विशिष्ट ध्वनियों का उच्चारण करता है, जिसके साथ वह हाव-भाव का उपयोग भी करता है। यह ध्वनियाँ अक्सर निरर्थक लगती हैं, लेकिन ये बच्चे के भाषा सीखने की शुरुआत होती हैं।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चे बबलाने वाली आवाजें निकालते हैं और अपनी बातें समझाने के लिए हाथ-पैर भी हिलाते हैं।
🎯 Exam Tip: 'बलबलाना' शब्द का प्रयोग करें और बताएं कि यह भाषा विकास के लिए कैसे महत्वपूर्ण है, भले ही यह शुरू में बेतरतीब लगे।
प्रश्न 11. नवजात शैशवावस्था के शिशु को अपनी माँ का स्पर्श अच्छा लगता है, यह किस प्रकार के विकास को प्रदर्शित करता है?
Answer: यह सामाजिक विकास को प्रदर्शित करता है। माँ के स्पर्श से शिशु सुरक्षा और जुड़ाव महसूस करता है, जो उसके सामाजिक संबंधों की नींव रखता है। यह बच्चे के भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव की शुरुआत है।
In simple words: माँ का स्पर्श पसंद आना सामाजिक विकास को दर्शाता है। इससे बच्चा सुरक्षित महसूस करता है और दूसरों से जुड़ना सीखता है।
🎯 Exam Tip: माँ के स्पर्श के माध्यम से सामाजिक-भावनात्मक जुड़ाव के महत्व को स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 12. व्यक्तित्व विकास में मूल का कार्य किसके द्वारा किया जाता है?
Answer: व्यक्तित्व विकास में मूल (Core) का कार्य अहं प्रत्यय द्वारा किया जाता है। अहं प्रत्यय व्यक्ति की अपनी पहचान और आत्म-धारणा को संदर्भित करता है, जो उसके व्यक्तित्व की नींव बनाता है।
In simple words: हमारे व्यक्तित्व का मुख्य हिस्सा 'अहं प्रत्यय' होता है। यह हमें बताता है कि हम कौन हैं और हम अपने बारे में क्या सोचते हैं।
🎯 Exam Tip: 'अहं प्रत्यय' (Ego concept) को व्यक्तित्व विकास के मूल के रूप में पहचानें और इसकी संक्षिप्त परिभाषा दें।
प्रश्न 1. पूर्व-बाल्यावस्था में शारीरिक विकास को समझाइए।
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में शारीरिक विकास: शैशवावस्था की तुलना में पूर्व-बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि थोड़ी धीमी गति से होती है। इस आयु में बच्चे की लम्बाई में औसतन 3 इंच की वृद्धि होती है। यह अवस्था विभिन्न कौशल सीखने के लिए बहुत उपयोगी होती है, जैसे बच्चे स्वयं खाना खाना, कपड़े पहनना, बटन लगाना, बॉल फेंकना, और मोती पिरोना जैसे बारीक काम सीखते हैं।
In simple words: पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चे की शारीरिक वृद्धि थोड़ी धीमी हो जाती है, लेकिन वे खुद से खाना, कपड़े पहनना और खेलना जैसे कई नए कौशल सीखते हैं।
🎯 Exam Tip: पूर्व-बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि की दर को शैशवावस्था से तुलना करके बताएं और उन विशिष्ट कौशल का उल्लेख करें जो बच्चे इस अवधि में सीखते हैं।
प्रश्न 4. शैशवावस्था में बालक के सामाजिक व्यवहार पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: शैशवावस्था में सामाजिक व्यवहार- शैशवावस्था में बालक जिन लोगों को पहचानता है, उन्हें देखकर मुस्कुराता है। बच्चे ध्यान आकर्षित करने के लिए हाथ-पैर चलाना या किलकारी भरना जैसी हरकतें करते हैं। वे अजनबी लोगों से डरकर शांत हो जाते हैं, जबकि परिचित लोगों को देखकर मुस्कुराते हैं, जिससे वे परिचित और अजनबी में फर्क कर पाते हैं।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चे परिचितों को देखकर मुस्कुराते हैं, ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं और अजनबियों से डरते हैं।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था में बच्चों के सामाजिक संकेतों (मुस्कुराना, डरना) और ध्यान आकर्षित करने के व्यवहारों का वर्णन करें।
प्रश्न 5. पूर्व-बाल्यावस्था में बालक के व्यक्तित्व विकास को समझाइए।
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में बालक के व्यक्तित्व विकास: व्यक्तित्व का विकास आनुवांशिक कारकों और पर्यावरण के बीच की बातचीत का परिणाम होता है। शुरुआत में 'स्व' (self) के विकास में परिवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। जैसे ही बालक विद्यालय जाना शुरू करता है, उसका सामाजिक दायरा बढ़ता है, और 'स्व' का विकास सामाजिक मानदंडों के अनुसार होता है। बच्चे दूसरों के अच्छे गुणों का अनुकरण करके सीखते हैं। 'स्व' और 'शील गुण' दोनों मिलकर व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
In simple words: पूर्व-बाल्यावस्था में व्यक्तित्व परिवार और माहौल के मेल से बनता है। स्कूल जाने पर बच्चा दूसरों के गुण सीखता है और अपना खुद का 'स्व' बनाता है।
🎯 Exam Tip: व्यक्तित्व विकास में आनुवांशिकता, पर्यावरण, परिवार और सामाजिक मानदंडों की भूमिका पर जोर दें, और 'स्व' तथा 'शील गुण' के महत्व को बताएं।
प्रश्न 1. शिशु के जन्म से एक वर्ष के विकास को समझाइए।
अथवा
प्रारम्भिक शैशवावस्था को माह-वार विकास के रूप में प्रदर्शित कीजिए।
Answer: शिशु के जन्म से एक वर्ष तक का समय उसके विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमें वह कई शारीरिक और संज्ञानात्मक मील के पत्थर हासिल करता है। प्रत्येक माह के साथ बच्चे की क्षमताएं बढ़ती जाती हैं।
In simple words: जन्म से एक साल तक बच्चा तेजी से बढ़ता है और कई नए काम सीखता है, जैसे खड़ा होना, रेंगना और चलना।
🎯 Exam Tip: इस तरह के विकासात्मक मील के पत्थरों को याद करते समय, प्रत्येक आयु (माह) के साथ जुड़ी मुख्य शारीरिक या संज्ञानात्मक उपलब्धि को जोड़ें।
प्रश्न 2. बालक की विभिन्न अवस्थाओं में संज्ञानात्मक विकास का तुलनात्मक विवरण दीजिए।
अथवा
नवजात शैशवावस्था, शैशवावस्था तथा पूर्व – बाल्यावस्था के संज्ञानात्मक विकास को समझाइए
Answer: नवजात शैशवावस्था, शैशवावस्था तथा पूर्व – बाल्यावस्था में संज्ञानात्मक विकास –
नवजात शैशवावस्थाः इस अवस्था में शिशु विभिन्न संवेदनाओं के प्रति प्रतिक्रिया करना सीखता है। शिशु गतिमान चीजों को देखने का प्रयास करता है। वे रंगों की चमक में अंतर पहचानते हैं और हर तरफ देखते हैं, पलक झपकाते हैं, तथा आवाज की दिशा में मुड़ते हैं।
शैशवावस्थाः शैशवावस्था में शिशु रोना और चीजें फेंकना जैसी सहज क्रियाएँ करता है। वह अनुभवों से सीखता है और स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेता है। बच्चे बड़ों की नकल करते हैं, जैसे बाल बनाना या ब्रश करना सीखते हैं।
पूर्व-बाल्यावस्थाः पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चा अपने अनुभवों को प्रतीकों, कौशलों और प्रतिभाओं के माध्यम से दिखाता है। वे खुद में और दूसरों में अंतर कर सकते हैं, उल्टे क्रम में सोच सकते हैं और तार्किक काम कर सकते हैं।
In simple words: नवजात शिशु अपनी इंद्रियों से सीखते हैं, शैशवावस्था में नकल करना और अनुभव से सीखना शुरू करते हैं, और पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चे सोचने और तर्क करने लगते हैं।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक विकास के चरणों को उनकी मुख्य विशेषताओं (जैसे संवेदी प्रतिक्रिया, अनुकरण, प्रतीकात्मक सोच) के साथ याद रखें, और प्रत्येक अवस्था के लिए एक-दो उदाहरण दें।
प्रश्न 3. नवजात शैशवावस्था, शैशवावस्था तथा पूर्व-बाल्यावस्था में शिशु के सांवेगिक विकास को समझाइए।
Answer: जन्म के समय तीन प्रकार के संवेग ही पाए जाते हैं (भय, प्रेम, क्रोध)। जन्म के समय दिखाई देने वाली उत्तेजना के बाद आयु बढ़ने के साथ संवेगों का विकास होता है।
शैशवावस्थाः इस आयु के सम्बन्ध में ब्रिजेज ने बताया है कि पहले शिशु में क्लेश और प्रसन्नता जैसी भावनाएँ पैदा होती हैं। पाँचवें महीने में क्लेश, क्रोध, घृणा और भय जैसे संवेग उत्पन्न होते हैं। चौदहवें महीने में ईर्ष्या आती है, और बीसवें महीने में खुशी की भावना उत्पन्न होती है। दो वर्ष बाद परिपक्वता और सीखने के आधार पर इन संवेगों को व्यक्त करने के तरीके धीरे-धीरे बदलते और सुधरते हैं।
पूर्व-बाल्यावस्थाः पूर्व-बाल्यावस्था में भावनात्मक अनुभवों का विस्तार होता है। मुख्य रूप से गुस्सा, बहुत ज्यादा डर और ईर्ष्या जैसी भावनाएँ अधिक व्यक्त होती हैं। खेलने, कूदने और दौड़ने जैसी शारीरिक गतिविधियों से बच्चों में तेज भावनात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न होती हैं।
In simple words: जन्म के समय सिर्फ तीन भावनाएँ होती हैं (डर, प्यार, गुस्सा)। शैशवावस्था में बच्चे रोते और मुस्कुराते हैं, फिर डर और खुशी जैसी भावनाएँ सीखते हैं। पूर्व-बाल्यावस्था में उनकी भावनाएँ और मजबूत हो जाती हैं और वे अधिक गुस्सा या डर महसूस करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक विकासात्मक अवस्था के लिए प्रमुख संवेगों का उल्लेख करें और बताएं कि वे कैसे विकसित होते हैं। बृजेज के वर्गीकरण का उल्लेख करना एक अच्छा बिंदु है।
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