Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Home Science Chapter 14 भोजन के पोषक तत्व-सूक्ष्म मात्रिक
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RBSE Class 11 Home Science Chapter 14 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(i) आयोडीन की कमी से कौन-सा रोग होता है?
(अ) गलगण्ड
(ब) रिकेट्स
(स) रतौंधी
(द) फ्लोरोसिस
Answer: (अ) गलगण्ड
In simple words: आयोडीन की कमी से गला फूल जाता है, जिसे गलगण्ड रोग कहते हैं। यह शरीर के लिए बहुत ज़रूरी पोषक तत्व है।
🎯 Exam Tip: आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों के नाम याद रखें, जैसे कि गलगण्ड, जो गले की थायरॉयड ग्रंथि को प्रभावित करता है।
Question 1. (ii) एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में लोहे की मात्रा होती है –
(अ) 5-6 ग्राम
(ब) 4-5 ग्राम
Answer: प्रश्न अधूरा है।
In simple words: इस प्रश्न के विकल्प (स) और (द) तथा इसका सही उत्तर उपलब्ध नहीं है। आमतौर पर शरीर में लोहे की मात्रा कुछ ग्राम होती है जो हीमोग्लोबिन के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: शरीर में पोषक तत्वों की सही मात्रा और उनके कार्यों को हमेशा याद रखें, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
Question 1. (iv) थायमिन की कमी से होने वाला रोग है –
(अ) बेरी-बेरी
(ब) रतौंधी
(स) रक्ताल्पता
(द) पैलाग्रा
Answer: (अ) बेरी-बेरी
In simple words: थायमिन विटामिन बी1 का दूसरा नाम है। इसकी कमी से बेरी-बेरी नाम का रोग होता है जो शरीर को कमजोर बना देता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन की कमी से होने वाले विभिन्न रोगों और उनके सही विटामिन नामों को हमेशा याद रखें।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. विटामिन 'के' ........ के लिए आवश्यक है।
2. कैरेटोमलेशिया ........ की कमी से होता है।
3. अस्थि मृदुलता को ........ भी कहते हैं।
4. फ्लोरीन की अधिकता से ........ रोग हो जाता है।
Answer:
1. विटामिन 'के' **रक्त का थक्का जमने में** के लिए आवश्यक है।
2. कैरेटोमलेशिया **विटामिन 'ए'** की कमी से होता है।
3. अस्थि मृदुलता को **रिकेट्स** भी कहते हैं।
4. फ्लोरीन की अधिकता से **फ्लोरोसिस** रोग हो जाता है।
In simple words: विटामिन 'के' खून का थक्का जमाने में मदद करता है, कैरेटोमलेशिया विटामिन 'ए' की कमी से होता है, अस्थि मृदुलता को रिकेट्स भी कहते हैं, और ज़्यादा फ्लोरीन से फ्लोरोसिस हो जाता है। ये सभी शरीर के सही कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, सही वैज्ञानिक नामों और उनके प्रभावों को ध्यान से याद रखें।
Question 3. विटामिन कितने प्रकार के होते हैं? समझाइए।
Answer: घुलनशीलता के आधार पर विटामिन को मुख्य रूप से दो बड़े समूहों में बांटा गया है:
**1. जल में घुलनशील विटामिन:** ये विटामिन शरीर से पानी के साथ बाहर निकल जाते हैं, इसलिए इनकी अधिक मात्रा शरीर में जमा नहीं होती। जल में घुलनशील विटामिन में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और विटामिन 'सी' शामिल हैं। इन विटामिनों की लगातार आवश्यकता होती है क्योंकि शरीर इन्हें स्टोर नहीं करता है।
**विटामिन बी कॉम्प्लेक्स:** यह कई विटामिनों का एक समूह है, जैसे थायमिन (विटामिन बी1), राइबोफ्लेविन (विटामिन बी2), नियासिन (विटामिन बी3), पाइरीडॉक्सिन (विटामिन बी6), पैन्टोथेनिक अम्ल, फोलिक अम्ल, कोलीन, बायोटिन, पैरा अमीनो बैंजोइक अम्ल, और सायनोकोबालेमिन (विटामिन बी12)।
**विटामिन 'सी' या एस्कॉर्बिक अम्ल:** यह भी जल में घुलनशील है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है।
**2. वसा में घुलनशील विटामिन:** इनमें से कुछ विटामिन शरीर खुद बना सकता है, लेकिन पूरी मात्रा भोजन से ही मिलती है। ये शरीर में जमा हो सकते हैं। इस समूह में विटामिन 'ए' (कैरोटीन), विटामिन 'डी', विटामिन 'ई' और विटामिन 'के' शामिल हैं। शरीर इन्हें भविष्य के उपयोग के लिए वसा ऊतकों में जमा करता है।
In simple words: विटामिन दो तरह के होते हैं - पानी में घुलने वाले (जैसे बी और सी) और वसा में घुलने वाले (जैसे ए, डी, ई, के)। पानी में घुलने वाले शरीर से निकल जाते हैं, जबकि वसा में घुलने वाले शरीर में जमा रहते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन के प्रकारों को उनकी घुलनशीलता के आधार पर वर्गीकृत करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत मुख्य विटामिनों के नाम याद रखें।
Question 4. भोजन में फोलिक अम्ल का क्या महत्व है?
Answer: भोजन में फोलिक अम्ल का होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है। यह लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) को बनाने और उन्हें परिपक्व करने के लिए विटामिन बी12 के साथ मिलकर काम करता है। यह कोएन्जाइम की तरह भी काम करता है जो विभिन्न शारीरिक क्रियाओं में मदद करता है। यह गर्भावस्था के दौरान शिशु के स्वस्थ विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: फोलिक अम्ल शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है। यह खून बनाने में मदद करता है और शरीर के दूसरे कामों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: फोलिक अम्ल के मुख्य कार्य, जैसे लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण और कोएन्जाइम के रूप में भूमिका, को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 5. विटामिन 'ए' के कार्य लिखिए।
Answer: विटामिन 'ए' शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
* **आँखों की सामान्य दृष्टि:** विटामिन 'ए' आँखों की रोशनी के लिए बहुत ज़रूरी है। यह रेटिना में मौजूद रोडोप्सिन (Visual Purple) और आइडोप्सिन नामक वर्णकों को बनाने में मदद करता है, जिससे हम मंद और तेज रोशनी में देख पाते हैं और रंगों को पहचान पाते हैं। इस चक्र के कारण आँखें प्रकाश के अनुसार देखने की शक्ति बनाए रखती हैं।
* **एपिथेलियल ऊतकों के स्वास्थ्य में:** यह एपिथेलियल ऊतकों को सक्रिय और स्थिर रखने में मदद करता है। ये ऊतक हमारे शरीर के बाहरी और अंदरूनी अंगों को ढकते हैं और बलगम (श्लेष्मा) बनाते हैं। यह अंगों को बाहरी जीवाणुओं, विषाणुओं और कीटाणुओं से बचाता है।
* **शारीरिक वृद्धि और विकास:** विटामिन 'ए' शरीर की वृद्धि और विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोधों से पता चला है कि इसकी कमी से कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया में कमी आ सकती है। यह बच्चों के समुचित विकास के लिए आवश्यक है।
* **प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य में सहायक:** विटामिन 'ए' प्रजनन अंगों के अच्छे स्वास्थ्य और प्रजनन क्रिया को सही ढंग से चलाने में मदद करता है। इसकी कमी से यौन हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे स्त्री और पुरुष दोनों में प्रजनन संबंधी समस्याएँ आ सकती हैं।
* **हड्डियों की वृद्धि में सहायक:** विटामिन 'ए' हड्डियों की सामान्य वृद्धि और विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि हड्डियाँ सही तरीके से विकसित हों।
* **संक्रमण प्रतिरोधक:** यह शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है। यह शरीर में रोग प्रतिरोधक की तरह कार्य करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।
In simple words: विटामिन 'ए' आँखों को देखने में, त्वचा और अंगों को स्वस्थ रखने में, शरीर को बढ़ने में, प्रजनन अंगों को ठीक रखने में, हड्डियों को मजबूत बनाने में और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'ए' के सभी प्रमुख कार्यों को बिन्दुवार याद रखें, विशेषकर आँखों की रोशनी और प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित कार्य।
Question 6. शरीर पर थायमिन की कमी के प्रभाव बताइए।
Answer: थायमिन की कमी से शरीर पर कई प्रभाव पड़ते हैं, खासकर उन लोगों में जो शराब का सेवन करते हैं या जो कार्बोहाइड्रेट ज़्यादा खाते हैं लेकिन दालें और हरी सब्ज़ियां कम खाते हैं। थायमिन की कमी से बेरी-बेरी रोग हो जाता है, जिसके मुख्य तीन प्रकार हैं:
* **शुष्क बेरी-बेरी (वयस्कों में):** इस प्रकार की बेरी-बेरी वयस्कों में होती है, जिसमें मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं और शरीर कंकाल जैसा दिखने लगता है। नसें प्रभावित होती हैं, पैर सुन्न हो जाते हैं, और चलने-फिरने में बहुत दिक्कत होती है। चिड़चिड़ापन और भूलने की समस्या भी हो सकती है।
* **आर्द्र बेरी-बेरी (वयस्कों में):** इसमें शरीर में सूजन आ जाती है, जो पहले पैरों में दिखती है और फिर हाथों, चेहरे और गर्दन तक फैल जाती है। हृदय कमज़ोर हो जाता है, धड़कन अनियमित हो जाती है, और साँस लेने में कठिनाई होती है। अगर समय पर इलाज न हो, तो हृदय गति रुकने से मृत्यु हो सकती है।
* **बाल बेरी-बेरी (बच्चों में):** यह रोग शिशुओं में होता है, खासकर जब माँ के आहार में विटामिन बी1 की कमी हो या वह पॉलिश किए चावल ज़्यादा खाती हो, जिससे माँ के दूध में विटामिन की कमी हो जाती है। शिशुओं में मांसपेशियां नष्ट हो जाती हैं, शरीर में पानी भर जाता है, हृदय और लीवर बड़े हो जाते हैं, भूख कम हो जाती है, पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है, और उल्टी व दस्त भी होते हैं।
In simple words: थायमिन की कमी से बेरी-बेरी रोग होता है, जिसके तीन मुख्य प्रकार हैं - शुष्क बेरी-बेरी (मांसपेशियाँ कमजोर), आर्द्र बेरी-बेरी (सूजन और हृदय समस्या), और बाल बेरी-बेरी (शिशुओं में मांसपेशी और अंग संबंधी समस्याएँ)।
🎯 Exam Tip: थायमिन की कमी से होने वाले बेरी-बेरी रोग के तीनों प्रकारों और उनके विशिष्ट लक्षणों को विस्तार से समझें और याद रखें।
Question 7. लोहे के कार्य व कमी के प्रभाव बताइए।
Answer: लोहा (आयरन) हमारे शरीर के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है और इसकी कमी से गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं:
**लोहे के कार्य:**
* **हीमोग्लोबिन का निर्माण:** लोहा हीमोग्लोबिन का एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणिकाओं में ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाता है। लोहे के बिना हीमोग्लोबिन ठीक से नहीं बन पाता।
* **मायोग्लोबिन में उपस्थिति:** मांसपेशियों में लोहा मायोग्लोबिन के रूप में पाया जाता है, जो मांसपेशियों के संकुचन के लिए आवश्यक है।
* **श्वसन एन्ज़ाइम:** लोहा श्वसन क्रिया में भाग लेने वाले कई एन्ज़ाइमों का निर्माण करता है, जो ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
* **प्रतिरक्षा प्रणाली:** लोहा प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बनाने में भी मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ पाता है।
**लोहे की कमी के प्रभाव:**
* **रक्ताल्पता (एनीमिया):** लोहे की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, जिससे रक्ताल्पता रोग होता है। यह अक्सर गर्भवती महिलाओं और ऐसे शिशुओं में ज़्यादा होता है, जिन्हें 1 वर्ष की उम्र के बाद माँ का दूध छुड़ा दिया जाता है।
* **लक्षण:** बच्चों की त्वचा पीली पड़ जाती है, वृद्धि और विकास धीमा हो जाता है। गर्भावस्था में, भ्रूण के रक्त निर्माण के लिए ज़्यादा लोहे की ज़रूरत होती है, और कमी होने पर साँस लेने में परेशानी, थकान, चक्कर आना और पीली त्वचा जैसे लक्षण दिखते हैं।
In simple words: लोहा हीमोग्लोबिन और मांसपेशियों के लिए ज़रूरी है, और यह बीमारियों से भी बचाता है। इसकी कमी से खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है, जिससे थकान, कमजोरी और पीलापन आता है, खासकर गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों में।
🎯 Exam Tip: लोहे के कार्यों को विशेष रूप से हीमोग्लोबिन के निर्माण और ऑक्सीजन परिवहन से जोड़कर याद रखें, और इसकी कमी से होने वाले एनीमिया के लक्षणों पर ध्यान दें।
Question 8. नियासिन की कमी के प्रभाव बताइए।
Answer: जब भोजन में नियासिन की कमी कई महीनों तक रहती है, तो पैलाग्रा नामक रोग के लक्षण दिखने लगते हैं। पैलाग्रा को '3Ds' रोग भी कहते हैं क्योंकि इसमें तीन प्रमुख लक्षण होते हैं जिनका पहला अक्षर 'D' से शुरू होता है:
* **अतिसार (Diarrhoea):** पाचन तंत्र में गड़बड़ी होने से अतिसार होता है। इसमें पाचन अंगों में समस्याएं आती हैं। होंठों की अंदरूनी परत कमज़ोर होकर नष्ट हो जाती है, जिससे मुँह ठीक से नहीं खुल पाता। जीभ, गला और मुँह प्रभावित होते हैं। जीभ और होंठ गहरे लाल हो जाते हैं, और कुछ भी खाने या निगलने में बहुत दर्द होता है।
* **त्वचा का रोग (Dermatitis):** नियासिन की कमी से त्वचा का रोग हो जाता है। शरीर के वे हिस्से जो सूरज की रोशनी के संपर्क में आते हैं, वे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। त्वचा खुरदरी और लाल हो जाती है, पपड़ी पड़ने लगती है, छोटे-छोटे दाने और घाव भी हो जाते हैं।
* **डेमेंशिया (Dementia):** यह तीसरा लक्षण है, जिसमें मानसिक भ्रम, याददाश्त में कमी और भुलक्कड़पन जैसी मानसिक समस्याएं होती हैं। (हालांकि स्रोत में 'डेमेंशिया' शब्द स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है, '3Ds' में यह तीसरा 'D' है).
In simple words: नियासिन की कमी से पैलाग्रा रोग होता है, जिसे 3Ds रोग भी कहते हैं। इसके मुख्य लक्षण हैं अतिसार (पेट खराब), त्वचा का रोग (त्वचा पर दाने और लालिमा) और मानसिक समस्याएं (याददाश्त और समझने की क्षमता में कमी)।
🎯 Exam Tip: नियासिन की कमी से होने वाले पैलाग्रा रोग के तीनों 'D' लक्षणों - डायरिया (अतिसार), डर्माटाइटिस (त्वचा का रोग), और डेमेंशिया (मानसिक भ्रम) - को याद रखें।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 14 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. विटामिन शब्द दिया गया -
(अ) केशीमियर फंक द्वारा
(ब) आइजेकमेन द्वारा
(स) वर्जीलियस द्वारा
(द) डॉ. डैम द्वारा
Answer: (अ) केशीमियर फंक द्वारा
In simple words: विटामिन शब्द को वैज्ञानिक केशीमियर फंक ने खोजा और इस्तेमाल किया था। यह पोषण विज्ञान में एक महत्वपूर्ण खोज थी।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक खोजों और उनसे जुड़े नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी महत्वपूर्ण अवधारणा से संबंधित हों।
Question 2. रेटीनॉल होता है –
(अ) विटामिन-A
(ब) विटामिन-B
(स) विटामिन-C
(द) विटामिन-D
Answer: (अ) विटामिन-A
In simple words: रेटीनॉल विटामिन-A का एक वैज्ञानिक नाम है। यह आँखों की अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन के सामान्य नामों के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक या रासायनिक नामों को भी याद रखें, क्योंकि प्रश्न दोनों तरह से पूछे जा सकते हैं।
Question 3. रिकेट्स रोग का कारण है, भोजन में –
(अ) विटामिन-C की कमी
(ब) विटामिन-D की कमी
(स) लौह तत्त्व की कमी
(द) नियासिन की कमी
Answer: (ब) विटामिन-D की कमी
In simple words: रिकेट्स रोग बच्चों में विटामिन-D की कमी के कारण होता है। विटामिन-D हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन की कमी से होने वाले प्रमुख रोगों और उनके संबंधित विटामिनों की सूची बना लें और उन्हें याद करें।
Question 5. वर्निक्स कॉरसाकॉफ्स सिंड्रोम का कारण है -
(अ) नियासिन की अधिकता
(ब) एस्कार्बिक अम्ल की अधिकता
(स) आयोडीन की कमी
(द) थायमिन की कमी
Answer: (द) थायमिन की कमी
In simple words: वर्निक्स कॉरसाकॉफ्स सिंड्रोम थायमिन (विटामिन बी1) की बहुत ज़्यादा कमी से होने वाला एक गंभीर दिमागी रोग है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट सिंड्रोम और बीमारियों को उनके संबंधित पोषक तत्वों की कमी या अधिकता से जोड़कर याद रखें।
Question. रिक्त स्थान भरिए –
1. आँखों की सामान्य दृष्टि के लिए भोजन में ........ अत्यंत आवश्यक है।
2. ........ को अस्थि विकृतिनाशक विटामिन भी कहते हैं।
3. विटामिन-सी को.......... भी कहते हैं।
4. थायमिन विटामिन की खोज ........ रोग का उपचार करते हुई।
5. राइबोफ्लेविन में ........ नामक पेन्टोज शर्करा पायी जाती है।
Answer:
1. आँखों की सामान्य दृष्टि के लिए भोजन में **विटामिन-ए** अत्यंत आवश्यक है।
2. **विटामिन-डी** को अस्थि विकृतिनाशक विटामिन भी कहते हैं।
3. विटामिन-सी को **एस्कार्बिक अम्ल** भी कहते हैं।
4. थायमिन विटामिन की खोज **बेरी-बेरी** रोग का उपचार करते हुई।
5. राइबोफ्लेविन में **राइबोज** नामक पेन्टोज शर्करा पायी जाती है।
In simple words: विटामिन-ए आँखों के लिए, विटामिन-डी हड्डियों के लिए, विटामिन-सी को एस्कार्बिक अम्ल कहते हैं, थायमिन की खोज बेरी-बेरी के इलाज के लिए हुई थी, और राइबोफ्लेविन में राइबोज शुगर होती है।
🎯 Exam Tip: विटामिनों के कार्यों, उनके अन्य नामों और उनकी खोजों से संबंधित तथ्यों को सही ढंग से याद रखें।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 14 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जल में घुलनशील दो विटामिनों के नाम लिखिए।
Answer: जल में घुलनशील दो मुख्य विटामिन हैं **विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स** और **विटामिन 'सी'**। ये शरीर में जमा नहीं होते और पानी के साथ बाहर निकल जाते हैं।
In simple words: पानी में घुलने वाले विटामिनों के नाम विटामिन-बी समूह और विटामिन 'सी' हैं।
🎯 Exam Tip: जल में घुलनशील और वसा में घुलनशील विटामिनों के बीच का अंतर और उनके प्रमुख उदाहरणों को हमेशा याद रखें।
Question 2. वसा में घुलनशील दो विटामिनों के नाम लिखिए।
Answer: वसा में घुलनशील दो मुख्य विटामिन हैं **विटामिन 'डी'** और **विटामिन 'के'**। ये शरीर की वसा में घुल जाते हैं और जमा हो सकते हैं।
In simple words: वसा में घुलने वाले विटामिनों के नाम विटामिन 'डी' और विटामिन 'के' हैं।
🎯 Exam Tip: वसा में घुलनशील विटामिनों के नाम (A, D, E, K) और उनके कार्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. हमारे शरीर में रेटिनॉल कहाँ पाया जाता है?
Answer: हमारे शरीर में रेटिनॉल आँखों के **रेटिना के रॉड्स एवं कोन्स** में पाया जाता है। यह दृष्टि के लिए आवश्यक है।
In simple words: रेटिनॉल हमारी आँखों के रेटिना में मिलता है, जो हमें देखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: रेटिनॉल (विटामिन ए) और उसकी आँखों में स्थिति तथा कार्य को याद रखें।
Question 4. ल्यूकोपेनिया रोग किस विटामिन की कमी से होता है?
Answer: ल्यूकोपेनिया रोग **विटामिन 'ए'** की कमी से होता है। इस रोग में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है।
In simple words: ल्यूकोपेनिया विटामिन 'ए' की कमी से होता है, जिसमें शरीर में सफेद खून की कोशिकाएं कम हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन की कमी से होने वाले विशिष्ट रोगों और उनके संबंधित विटामिनों को याद रखें।
Question 7. विटामिन 'डी' की कमी से होने वाले दो रोगों के नाम लिखिए।
Answer: विटामिन 'डी' की कमी से होने वाले दो मुख्य रोग हैं **रिकेट्स** (बच्चों में) और **ऑस्टोमलेशिया** (वयस्कों में)। ये दोनों रोग हड्डियों को कमजोर करते हैं।
In simple words: विटामिन 'डी' की कमी से बच्चों में रिकेट्स और बड़ों में ऑस्टोमलेशिया होता है, जिससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'डी' की कमी से हड्डियों से संबंधित प्रमुख रोगों को उनके आयु वर्ग के साथ याद रखें।
Question 8. विटामिन 'ई' की खोज किसने की?
Answer: विटामिन 'ई' की खोज **1922 ई. में ईवान्स तथा विशप** ने की थी। उन्होंने इसे प्रजनन क्रिया में महत्वपूर्ण पाया।
In simple words: विटामिन 'ई' को 1922 में ईवान्स और विशप ने खोजा था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विटामिनों की खोज से संबंधित वैज्ञानिकों के नाम और वर्ष को याद रखना अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
Question 9. विटामिन 'ई' के दो मुख्य रूप कौन-कौन से हैं?
Answer: विटामिन 'ई' के दो मुख्य रूप हैं **टोकोफेरोल** और **टोकीट्रीनॉल**। ये दोनों एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं।
In simple words: विटामिन 'ई' के दो मुख्य रूप टोकोफेरोल और टोकीट्रीनॉल हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'ई' के विभिन्न रासायनिक रूपों को याद रखें, क्योंकि यह इसके कार्यों को समझने में मदद करता है।
Question 10. कौन-सा विटामिन रक्त का थक्का बनाने में सहायता करता है?
Answer: **विटामिन 'के'** रक्त का थक्का बनाने में सहायता करता है। यह खून बहने से रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है।
In simple words: विटामिन 'के' खून को जमने में मदद करता है, जिससे चोट लगने पर खून बहना रुक जाता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'के' की रक्त का थक्का बनाने की महत्वपूर्ण भूमिका को हमेशा याद रखें।
Question 11. स्कर्वी रोग किस विटामिन की कमी से होता है?
Answer: स्कर्वी रोग **विटामिन 'सी'** की कमी से होता है। विटामिन 'सी' प्रतिरक्षा और स्वस्थ त्वचा के लिए आवश्यक है।
In simple words: विटामिन 'सी' की कमी से स्कर्वी रोग होता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'सी' और इसकी कमी से होने वाले स्कर्वी रोग के लक्षणों को याद रखें।
Question 13. हाइपर कैल्सिमिया रोग का क्या कारण होता है?
Answer: हाइपर कैल्सिमिया रोग का मुख्य कारण भोजन में **कैल्सियम का अधिक ग्रहण करना** है। इससे शरीर में कैल्सियम का स्तर बहुत बढ़ जाता है।
In simple words: जब कोई बहुत ज़्यादा कैल्सियम खाता है, तो उसे हाइपर कैल्सिमिया हो सकता है।
🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों की कमी और अधिकता दोनों से होने वाले रोगों के नाम और कारण याद रखें।
Question 14. हीमोग्लोबिन का मुख्य संघटक तत्त्व कौन-सा है?
Answer: हीमोग्लोबिन का मुख्य संघटक तत्त्व **लौह (आयरन)** है। यह लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है।
In simple words: हीमोग्लोबिन में मुख्य रूप से लोहा होता है, जो खून में ऑक्सीजन ले जाता है।
🎯 Exam Tip: हीमोग्लोबिन की संरचना और उसके महत्वपूर्ण खनिज घटक (लौह) को याद रखें।
Question 16. क्रेटिनिज्म रोग का क्या कारण है?
Answer: क्रेटिनिज्म रोग का मुख्य कारण भोजन में **आयोडीन की कमी** है। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है।
In simple words: क्रेटिनिज्म रोग आयोडीन की कमी से होता है, जो बच्चों के विकास के लिए अच्छा नहीं है।
🎯 Exam Tip: आयोडीन की कमी से होने वाले विकास संबंधी रोगों, जैसे क्रेटिनिज्म, पर ध्यान दें।
Question 16. भोजन में फ्लोरीन की कमी से होने वाले रोगों के नाम लिखिए।
Answer: भोजन में फ्लोरीन की कमी से होने वाले दो मुख्य रोग हैं **डेंटल फ्लोरोसिस** (दांतों का) और **कंकाल फ्लोरोसिस** (हड्डियों का)। यह दोनों ही हड्डियों और दांतों को प्रभावित करते हैं।
In simple words: फ्लोरीन की कमी से दांतों और हड्डियों से जुड़ी बीमारियाँ होती हैं, जैसे डेंटल और कंकाल फ्लोरोसिस।
🎯 Exam Tip: फ्लोरीन की कमी से होने वाले रोगों को याद रखें और उन्हें दांतों और हड्डियों के स्वास्थ्य से जोड़कर समझें।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वसा में घुलनशील विटामिन एवं जल में घुलनशील विटामिन में अन्तर लिखिए।
Answer: वसा में घुलनशील और जल में घुलनशील विटामिनों के बीच मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
| विशेषता | वसा में घुलनशील विटामिन | जल में घुलनशील विटामिन |
|---|---|---|
| घुलनशीलता | वसा और वसीय घोलकों में घुलनशील होते हैं। | जल और जलीय घोलकों में घुलनशील होते हैं। |
| शरीर में संग्रहण | शरीर के वसा ऊतकों और लीवर में जमा हो सकते हैं। | शरीर में ज़्यादा जमा नहीं होते, अतिरिक्त मात्रा मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है। |
| निष्कासन | धीरे-धीरे शरीर से निकलते हैं। | तेजी से शरीर से बाहर निकल जाते हैं। |
| नियमित सेवन की आवश्यकता | कम होती है क्योंकि शरीर में जमा होते हैं। | अधिक होती है क्योंकि शरीर इन्हें जमा नहीं कर पाता। |
| अधिकता का प्रभाव | अधिक मात्रा विषाक्त हो सकती है (हाइपरविटामिनोसिस)। | अधिक मात्रा आमतौर पर कम हानिकारक होती है, लेकिन कुछ मामलों में समस्याएँ हो सकती हैं। |
| उदाहरण | विटामिन A, D, E, K | विटामिन B कॉम्प्लेक्स (B1, B2, B3, B6, B12, फोलिक अम्ल, बायोटिन, पैन्टोथेनिक अम्ल), विटामिन C |
In simple words: वसा में घुलने वाले विटामिन (A, D, E, K) शरीर में जमा हो जाते हैं और धीरे-धीरे निकलते हैं, जबकि पानी में घुलने वाले विटामिन (B और C) जमा नहीं होते और जल्दी बाहर निकल जाते हैं, इसलिए उनकी रोज़ ज़रूरत होती है।
🎯 Exam Tip: जल में घुलनशील और वसा में घुलनशील विटामिनों के बीच के प्रमुख अंतरों को एक तुलनात्मक तालिका के रूप में याद रखना उत्तर लिखने में सहायक होगा।
Question 2. विटामिन 'ए' की अधिकता के प्रभाव लिखिए।
Answer: विटामिन 'ए' की अधिकता (हाइपरविटामिनोसिस ए) शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है:
* भूख में कमी: व्यक्ति को भूख कम लगने लगती है, जिससे पोषण की समस्या हो सकती है।
* जोड़ों में दर्द: शरीर के जोड़ों में दर्द का अनुभव हो सकता है, जिससे दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।
* आँख की रेटिना में रक्त स्राव: आँखों के रेटिना में खून बह सकता है, जो दृष्टि को प्रभावित कर सकता है।
* यकृत के आकार में वृद्धि होना: लीवर का आकार बढ़ सकता है, जो लीवर के कार्य को बाधित कर सकता है।
* पैर की हड्डियों में सूजन: पैरों की हड्डियों में सूजन आ सकती है, जिससे दर्द और असुविधा होती है।
* सिर दर्द एवं चिड़चिड़ापन: व्यक्ति को लगातार सिर दर्द और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
* साँस लेने में कठिनाई: साँस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।
* बालों का झड़ना: बाल झड़ने की समस्या बढ़ सकती है, जिससे बालों का पतला होना या गंजापन हो सकता है।
* होठों पर फुसियाँ व छाले: होठों पर छोटे दाने या छाले निकल सकते हैं।
In simple words: विटामिन 'ए' की ज़्यादा मात्रा से भूख कम हो सकती है, जोड़ों में दर्द, आँखों में खून आना, लीवर का बढ़ना, सूजन, सिर दर्द, बाल झड़ना और होठों पर छाले हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी विटामिन की अधिकता से होने वाले प्रभावों को याद रखें, क्योंकि अधिकता भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है।
Question 3. विटामिन 'ए' की कमी के उपचार तथा विटामिन 'ए' की प्राप्ति के स्रोत बताइए।
Answer: विटामिन 'ए' की कमी के उपचार और उसकी प्राप्ति के स्रोत निम्नलिखित हैं:
**उपचार:**
* यदि विटामिन 'ए' की सामान्य कमी है, तो 100 मिलीग्राम विटामिन 'ए' 10 दिनों तक देना चाहिए।
* अगर कमी बहुत ज़्यादा है, तो 500 मिलीग्राम विटामिन 'ए' कई हफ्तों तक लगातार दिया जा सकता है, जब तक कि स्थिति में सुधार न हो जाए। यह उपचार किसी विशेषज्ञ की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
**प्राप्ति के स्रोत:**
* **प्राणिज भोज्य पदार्थ:** विटामिन 'ए' मुख्य रूप से मछलियों के लीवर के तेल में पाया जाता है। अन्य जन्तु उत्पादों जैसे यकृत (लीवर), अंडा, मक्खन, दूध और उसके उत्पाद भी विटामिन 'ए' के अच्छे स्रोत हैं।
* **वनस्पति भोज्य पदार्थ:** चौलाई, धनिया पत्ता, गाजर, सहजन के पत्ते, पुदीना, पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों और कुछ फल जैसे पपीता, आम आदि में भी विटामिन 'ए' कैरोटीन के रूप में मौजूद होता है, जिसे शरीर विटामिन 'ए' में बदल देता है।
In simple words: विटामिन 'ए' की कमी को सप्लीमेंट्स और दवाओं से ठीक किया जा सकता है। यह मछली के तेल, अंडे, दूध, गाजर और हरी सब्जियों से मिलता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन की कमी के उपचार के साथ-साथ उसके प्राकृतिक स्रोतों को भी याद रखें, ताकि पोषण संबंधी सलाह देते समय यह जानकारी काम आ सके।
Question 5. विटामिन 'डी' की अधिकता के प्रभाव तथा इसकी प्राप्ति के स्रोत लिखिए।
Answer: विटामिन 'डी' की अधिकता और उसके स्रोत निम्नलिखित हैं:
**विटामिन 'डी' की अधिकता के प्रभाव (हाइपरविटामिनोसिस डी):**
* भूख में कमी, जी मिचलाना और उल्टी होना।
* प्यास बढ़ना और बार-बार पेशाब आना (बहुमूत्रता)।
* बच्चे बहुत सुस्त और कमज़ोर हो जाते हैं, और मांसपेशियों का क्षय होने लगता है।
* अधिक विटामिन 'डी' के कारण कैल्शियम धमनियों, गुर्दों और फेफड़ों में जमा होने लगता है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। यह स्थिति शरीर के अंगों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
**विटामिन 'डी' की प्राप्ति के स्रोत:**
* **विटामिन डी2 (एर्गोस्टीरॉल/प्रोविटामिन 'डी'):** यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों की क्रिया से कैल्सीफेरॉल बनाता है और फफूंदी व खमीर में पाया जाता है।
* **विटामिन डी3 (7-डीहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल):** यह मनुष्य की त्वचा के नीचे मौजूद होता है और सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आने पर विटामिन 'डी' में बदल जाता है।
* प्राकृतिक स्रोतों में सूरज की रोशनी, वसायुक्त मछली (जैसे सैल्मन, मैकेरल), अंडे की जर्दी, और दूध व अनाज जैसे फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ शामिल हैं। सूर्य का प्रकाश विटामिन डी का सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत है।
In simple words: ज़्यादा विटामिन 'डी' से भूख कम हो सकती है, उल्टी आ सकती है, और कैल्शियम अंगों में जमा हो सकता है। यह सूरज की रोशनी, वसायुक्त मछली और कुछ फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों से मिलता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'डी' के विभिन्न रूपों (डी2 और डी3) और उनके रूपांतरण की प्रक्रिया को याद रखें, साथ ही इसकी अधिकता के हानिकारक प्रभावों पर भी ध्यान दें।
Question 6. विटामिन 'ई' की खोज किस प्रकार हुई? इसके प्रकार लिखिए।
Answer: **विटामिन 'ई' की खोज:**
सन् 1922 में ईवान्स और विशप ने चूहों पर प्रयोग करते हुए पाया कि वसा में घुलनशील एक विशेष तत्व प्रजनन क्रिया के लिए आवश्यक है। इस तत्व को विटामिन 'ई' नाम दिया गया। यह सन्तानोत्पत्ति में सहायक होता है, इसलिए इसे 'बांझपन विरोधी विटामिन' भी कहते हैं। रासायनिक संरचना के अनुसार इसका नाम बीटा (\( \beta \)) टोकोफेरॉल रखा गया।
**विटामिन 'ई' के प्रकार:**
विटामिन 'ई' मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
* **टोकोफेरोल:** यह अत्यधिक क्रियाशील होता है और इसके तीन उप-प्रकार होते हैं – अल्फा (\( \alpha \)), बीटा (\( \beta \)), और गामा (\( \gamma \))। अल्फा-टोकोफेरोल मानव शरीर में सबसे सक्रिय रूप है।
* **टोकीट्रीनॉल:** यह भी विटामिन 'ई' का एक रूप है, जिसके अपने उप-प्रकार होते हैं।
दोनों प्रकारों में से टोकोफेरोल ज़्यादा क्रियाशील होता है। विटामिन 'ई' एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है।
In simple words: विटामिन 'ई' की खोज ईवान्स और विशप ने की थी जब उन्होंने पाया कि यह प्रजनन के लिए ज़रूरी है। इसके दो मुख्य प्रकार टोकोफेरोल और टोकीट्रीनॉल हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'ई' की खोज के पीछे के प्रयोग और इसके मुख्य रासायनिक रूपों को याद रखें, क्योंकि यह इसके कार्यों को समझने में मदद करता है।
Question 7. विटामिन 'के' की खोज किसने की? विटामिन 'के' के प्रकार बताइए।
Answer: **विटामिन 'के' की खोज:**
विटामिन 'के' की खोज डेनिश वैज्ञानिक हेनरिक डैम ने की थी। उन्होंने देखा कि मुर्गियों को कुछ विशेष आहार न देने पर उनमें खून बहने की समस्या हो रही थी, और एक नए पोषक तत्व की खोज की जो रक्त के थक्के जमने में मदद करता है।
**विटामिन 'के' के प्रकार:**
यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
* **विटामिन K1 (फाइलोकीनोन):** यह हरी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है।
* **विटामिन K2 (फ्रैन्कीनोन):** यह सड़ी-गली मछलियों और कुछ बैक्टीरिया द्वारा शरीर में भी उत्पन्न होता है। यह हमारी आंतों में भी बनता है।
In simple words: विटामिन 'के' की खोज हेनरिक डैम ने की थी। इसके दो मुख्य प्रकार हैं – विटामिन K1 (हरी सब्जियों में मिलता है) और विटामिन K2 (सड़ी मछलियों और बैक्टीरिया से बनता है)।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'के' की खोज से जुड़े वैज्ञानिक का नाम और इसके विभिन्न प्राकृतिक रूपों को याद रखें, जो रक्त का थक्का बनाने में इसकी भूमिका को स्पष्ट करते हैं।
Question 8. विटामिन 'K' की कमी के प्रभाव तथा अधिकता के परिणाम बताइए।
Answer: विटामिन 'के' की कमी और अधिकता के प्रभाव निम्नलिखित हैं:
**विटामिन 'K' की कमी के प्रभाव:**
* विटामिन 'के' की कमी से रक्त में प्रोथ्रोम्बिन की मात्रा कम हो जाती है। प्रोथ्रोम्बिन रक्त का थक्का बनाने के लिए आवश्यक एक प्रोटीन है।
* रक्त का थक्का बनने में अधिक समय लगता है, जिससे खून बहने की समस्या (रक्त स्राव) काफी बढ़ जाती है।
* बाहरी या अंदरूनी चोट लगने पर रक्त का थक्का नहीं बन पाता है, जिससे अत्यधिक खून बहता रहता है। इस स्थिति को हेमरेज (रक्तस्राव) कहते हैं।
**विटामिन 'K' की अधिकता के परिणाम:**
* विटामिन 'के' की अधिकता से लाल रक्त कणिकाएँ टूटने लगती हैं, जिससे हीमोलाइटिक रक्ताल्पता (एनीमिया) हो जाती है।
* इसके कारण जी मिचलाना, उल्टी होना, चक्कर आना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं।
In simple words: विटामिन 'के' की कमी से खून का थक्का देरी से बनता है और खून ज़्यादा बह सकता है। इसकी ज़्यादा मात्रा से लाल रक्त कोशिकाएं टूट सकती हैं और पीलापन, जी मिचलाना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'के' की कमी से रक्तस्राव संबंधी समस्याओं और इसकी अधिकता से होने वाले एनीमिया पर विशेष ध्यान दें।
Question 9. विटामिन 'K' की प्राप्ति के स्रोत बताइए।
Answer: विटामिन 'के' की प्राप्ति के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं:
* **वनस्पति भोज्य पदार्थ:** यह विभिन्न हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, मेथी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, आदि में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ये विटामिन K1 (फाइलोकीनोन) के अच्छे स्रोत हैं।
* **आंतों के बैक्टीरिया:** हमारी आंतों में कुछ बैक्टीरिया भी विटामिन K2 (मेनाक्विनोन) का निर्माण करते हैं, जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण होता है।
* **अन्य स्रोत:** अनाज, दालें, अंडा, दूध, मांस और मछली भी विटामिन 'के' के अच्छे स्रोत हैं। ये खाद्य पदार्थ विटामिन K2 के विभिन्न रूपों को प्रदान करते हैं।
In simple words: विटामिन 'के' हरी सब्जियों, अनाज, दालों, अंडे, दूध, मांस और मछली से मिलता है। हमारे शरीर के अंदर बैक्टीरिया भी इसे बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'के' के पौधों और पशु स्रोतों को याद रखें, साथ ही यह भी कि आंतों के बैक्टीरिया भी इसे बनाते हैं।
Question 10. विटामिन-C की प्राप्ति के स्रोत बताइए।
Answer: विटामिन-C की प्राप्ति के उत्कृष्ट साधन और स्रोत निम्नलिखित हैं:
* **फल:** आँवला और अमरूद विटामिन 'सी' के बेहतरीन स्रोत हैं। सभी खट्टे और रसीले फल जैसे नींबू, संतरा, अनन्नास और आम में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। पपीता भी इसका अच्छा स्रोत है।
* **सब्जियाँ:** टमाटर, चौलाई, बंदगोभी, धनिया पत्ता, सहजन की पत्तियां, मूली की पत्तियां, और पालक जैसी सब्जियों में भी विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में मिलता है।
* **अंकुरित दालें और अनाज:** अंकुरित दालों और अनाजों में विटामिन-सी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वे पोषण के अच्छे स्रोत बन जाते हैं।
In simple words: विटामिन-सी खट्टे फलों जैसे आँवला, नींबू, संतरा और अमरूद से मिलता है। यह टमाटर, हरी पत्तेदार सब्जियों और अंकुरित दालों में भी पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन-सी के सभी मुख्य फलों और सब्जियों के स्रोतों को याद रखें, क्योंकि यह प्रतिरक्षा और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. राइबोफ्लोविन के कार्य समझाइए।
Answer: राइबोफ्लोविन (विटामिन बी2) शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
* **ऊर्जा उत्पादन:** राइबोफ्लोविन, फास्फेट के साथ मिलकर राइबोफ्लोविन पाइरोफॉस्फेट बनाता है। यह कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के चयापचय (ऊर्जा उत्पादन) में सहायक होता है।
* **पाचन और मांसपेशी कार्य:** यह पाचन तंत्र की मांसपेशियों की गति को सामान्य रखने और पाचन क्रिया को सुचारू बनाने में मदद करता है।
* **तंत्रिका तंत्र का स्वास्थ्य:** राइबोफ्लोविन तंत्रिका तंत्र की सामान्य स्थिति बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे तंत्रिका संबंधी कार्य ठीक से होते हैं।
* **DNA और RNA का निर्माण:** यह DNA और RNA जैसे आनुवंशिक पदार्थों के निर्माण में भी भूमिका निभाता है, जो कोशिका वृद्धि और मरम्मत के लिए ज़रूरी हैं।
* **रोग प्रतिरोधक क्षमता:** यह श्वेत रक्त कणिकाओं की रोगाणु-भक्षण क्षमता को बढ़ाता है, जिससे शरीर बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
* **आंतरिक अंगों का स्वास्थ्य:** यह शरीर के भीतरी अंगों के स्वास्थ्य और उनकी क्रियाशीलता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: राइबोफ्लोविन शरीर को ऊर्जा बनाने, पाचन और मांसपेशियों को ठीक रखने, नसों को स्वस्थ रखने, और DNA बनाने में मदद करता है। यह शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति को भी बढ़ाता है।
🎯 Exam Tip: राइबोफ्लोविन के ऊर्जा चयापचय, प्रतिरक्षा और तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य से संबंधित मुख्य कार्यों को याद रखें।
Question 12. राइबोफ्लेविन की कमी के प्रभाव लिखिए।
Answer: राइबोफ्लेविन की कमी से शरीर पर कई तरह के प्रभाव दिखते हैं, खासकर त्वचा, आँखों और तंत्रिका तंत्र पर:
1. चेहरे की त्वचा, आँखों और तंत्रिका तंत्र प्रभावित होते हैं। त्वचा लाल हो जाती है और घाव भी बन जाते हैं। होठों के कोनों में घाव होते हैं, जिससे खून निकल सकता है। इसे 'एंगुलर स्टोमैटाइटिस' कहा जाता है। होंठ फटने लगते हैं, जिसे 'चिलोसिस' कहते हैं। जीभ का रंग बदलकर हल्का बैंगनी हो जाता है, जिसे 'ग्लोसिटिस' कहते हैं।
2. आँखें भी प्रभावित होती हैं। आँखों की रोशनी सहने की क्षमता कम हो जाती है। आँखों से चिपचिपा पदार्थ निकलने लगता है। समय पर इलाज न होने पर आँखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
3. शारीरिक वृद्धि रुक जाती है। भूख नहीं लगती और पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है।
4. राइबोफ्लेविन की कमी से पुरुषों में अंडकोष पर घाव हो जाते हैं। राइबोफ्लेविन ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी कमी से थकान और कमजोरी महसूस होती है।
In simple words: राइबोफ्लेविन की कमी से त्वचा लाल हो जाती है, होंठ और जीभ में घाव हो जाते हैं, आँखें कमजोर हो जाती हैं और शरीर की वृद्धि रुक जाती है। यह एक ज़रूरी विटामिन है जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: राइबोफ्लेविन की कमी से होने वाले लक्षणों को याद रखें, जैसे कि मुंह के कोने फटना (चिलोसिस) और जीभ का बैंगनी होना (ग्लोसिटिस), क्योंकि ये मुख्य पहचान चिह्न हैं।
Question 13. राइबोफ्लेविन तथा नियासिन की प्राप्ति के स्रोत बताइए।
Answer: राइबोफ्लेविन और नियासिन दोनों ही शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण विटामिन हैं। इनके मुख्य स्रोत इस प्रकार हैं:
राइबोफ्लेविन की प्राप्ति के स्रोत: भोजन में राइबोफ्लेविन की मात्रा कम होती है। इसके प्रमुख स्रोतों में यकृत (लीवर), सूखा खमीर, दूध, अंडा, मांस, मछली, साबुत अनाज, दालें और हरी पत्तेदार सब्जियाँ शामिल हैं। दूध राइबोफ्लेविन का एक बहुत अच्छा स्रोत है, और यह धूप के संपर्क में आने पर खराब हो सकता है।
नियासिन की प्राप्ति के स्रोत: नियासिन मुख्य रूप से उन खाद्य पदार्थों में पाया जाता है जिनमें प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है। इनमें मांस, मछली, साबुत अनाज, दालें, खमीर, दूध और अंडे शामिल हैं। मूंगफली भी नियासिन का एक अच्छा स्रोत है।
In simple words: राइबोफ्लेविन और नियासिन दोनों ही दूध, अंडे, मांस और हरी सब्जियों जैसे कई खाद्य पदार्थों में मिलते हैं। संतुलित आहार लेने से हमें ये जरूरी विटामिन मिल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: इन विटामिनों के स्रोतों को याद रखने के लिए, उन खाद्य पदार्थों पर ध्यान दें जो आमतौर पर प्रोटीन से भरपूर होते हैं, क्योंकि ये अक्सर बी-विटामिन के भी अच्छे स्रोत होते हैं।
Question 15. विटामिन B12 के कार्य लिखिए।
Answer: विटामिन B12 (जिसे साएनोकोबालेमिन भी कहते हैं क्योंकि इसमें कोबाल्ट होता है) बी समूह का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विटामिन है। इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
• यह विटामिन 'ए' को रेटिनॉल में बदलने में मदद करता है।
• यह शरीर की शारीरिक वृद्धि में सहायक होता है।
• यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में भी मदद करता है।
• यह एक को-एन्जाइम की तरह काम करता है, जो शरीर की कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं में मदद करता है।
• यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के सही ढंग से परिपक्व होने के लिए बहुत ज़रूरी है।
• यह कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के पाचन और उपयोग में सक्रिय भूमिका निभाता है।
• यह भूख बढ़ाता है और यकृत में वसा को जमा होने से बचाता है।
• यह तंत्रिका ऊतकों में होने वाले चयापचय (मेटाबॉलिज्म) में भी सहायक होता है, जो तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: विटामिन B12 शरीर को लाल रक्त कोशिकाएं बनाने, भोजन से ऊर्जा निकालने और तंत्रिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: विटामिन B12 के मुख्य कार्यों में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण और तंत्रिका तंत्र का स्वास्थ्य शामिल है, इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 16. विटामिन B12, की कमी के प्रभाव बताइए। पर्निसियस रक्ताल्पता के लक्षण लिखिए।
Answer: विटामिन B12 की कमी से 'पर्निसियस रक्ताल्पता' (Pernicious Anemia) नामक गंभीर रोग हो जाता है। यह तब होता है जब पेट में बनने वाला 'आंतरिक कारक' नामक पदार्थ पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, जिससे विटामिन B12 का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता है। इस वजह से शरीर में इस विटामिन की कमी हो जाती है। विटामिन B12 का अवशोषण पेट में एक विशेष प्रोटीन की मदद से होता है, जिसे इंट्रिंसिक फैक्टर कहते हैं।
पर्निसियस रक्ताल्पता के लक्षण:
• मुँह में छाले हो जाते हैं।
• पेट के एन्जाइम और रस बनाने वाली कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं।
• अस्थि मज्जा (हड्डी के अंदर का भाग) के स्वरूप में बदलाव आता है।
• लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की संख्या कम हो जाती है।
• हीमोग्लोबिन की मात्रा भी कम हो जाती है।
• त्वचा पीली पड़ जाती है और तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं।
In simple words: विटामिन B12 की कमी से एक खास तरह का खून की कमी का रोग (पर्निसियस रक्ताल्पता) होता है, जिसमें मुंह में छाले, कमजोरी और तंत्रिकाओं में समस्याएँ आती हैं। यह विटामिन शरीर को ठीक से काम करने के लिए बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: पर्निसियस रक्ताल्पता को विटामिन B12 की कमी से जोड़ना और इसके मुख्य लक्षणों, खासकर तंत्रिका संबंधी समस्याओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 18. फोलिक अम्ल की कमी के प्रभाव लिखिए।
Answer: फोलिक अम्ल की कमी से शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का बनना कम हो जाता है, जिससे रक्त में उनकी संख्या बहुत कम हो जाती है। इस स्थिति को 'मेगालोब्लास्टिक रक्ताल्पता' (Megaloblastic Anemia) कहते हैं। इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य से बड़ी और अविकसित होती हैं, और ठीक से काम नहीं कर पातीं। इस स्थिति में रक्त में हीमोग्लोबिन का प्रतिशत बहुत कम हो जाता है, और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या भी बहुत घट जाती है। फोलिक अम्ल नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: फोलिक अम्ल की कमी से एक प्रकार की खून की कमी हो जाती है, जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएँ कम बनती हैं और हीमोग्लोबिन का स्तर भी गिर जाता है।
🎯 Exam Tip: फोलिक अम्ल की कमी का सीधा संबंध 'मेगालोब्लास्टिक रक्ताल्पता' से है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएँ बड़ी और अपरिपक्व हो जाती हैं।
Question 19. फोलिक अम्ल की अधिकता के प्रभाव लिखिए। इसकी प्राप्ति के स्रोत भी बताइए।
Answer: फोलिक अम्ल पानी में आंशिक रूप से घुलनशील होता है। जब इसकी अधिक मात्रा ली जाती है, तो यह मूत्र के रास्ते पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाता है। इस कारण यह वृक्क (किडनी) नलिकाओं में छोटे क्रिस्टल के रूप में इकट्ठा हो सकता है, जिससे वृक्क में पथरी बन सकती है। शरीर में किसी भी पोषक तत्व की अधिकता हमेशा हानिकारक हो सकती है।
फोलिक अम्ल की प्राप्ति के स्रोत: फोलिक अम्ल मुख्य रूप से सूखे खमीर, यकृत (लीवर), गेहूँ का भ्रूण, चावल की ऊपरी परत, साबुत अनाज, दालें और हरी पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह दूध में भी मिलता है।
In simple words: बहुत ज्यादा फोलिक अम्ल लेने से किडनी में पथरी हो सकती है। यह खमीर, लीवर, अनाज और हरी सब्जियों में मिलता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि किसी भी पोषक तत्व की अधिकता भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है, इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन महत्वपूर्ण है।
Question 20. कैल्सियम की कमी के प्रभाव लिखिए।
Answer: कैल्सियम की कमी से शरीर में कई तरह के गंभीर प्रभाव पड़ते हैं, खासकर हड्डियों और वृद्धि पर:
• कैल्सियम की कमी से बच्चों की वृद्धि रुक जाती है। हड्डियों में कैल्सीफिकेशन (कैल्सियम जमा होने) की प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती है। हड्डियाँ कमजोर और मुलायम हो जाती हैं, और उनमें विकृति आ जाती है। इसे 'रिकेट्स' (Rickets) कहते हैं।
• वयस्कों में कैल्सियम की कमी से 'ऑस्टियोमलेशिया' (Osteomalacia) रोग हो जाता है, जिसमें शरीर की हड्डियों से कैल्सियम का उत्सर्जन अधिक होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप थोड़ी सी चोट लगने पर भी हड्डी टूट सकती है।
• गर्भावस्था में कैल्सियम की कमी होने से गर्भस्थ शिशु माँ के शरीर से ही कैल्सियम लेने लगता है, जिससे गर्भवती महिला की पेल्विक (श्रोणिमेखला) संकुचित हो जाती है।
• वृद्धावस्था में कैल्सियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर होकर टूटने लगती हैं, जिसे 'ऑस्टियोपोरोसिस' (Osteoporosis) कहते हैं। हड्डियों का स्वस्थ रहना जीवन भर महत्वपूर्ण है।
In simple words: कैल्सियम की कमी से बच्चों में रिकेट्स और बड़ों में ऑस्टियोमलेशिया व ऑस्टियोपोरोसिस जैसे हड्डी के रोग हो जाते हैं, जिससे हड्डियाँ कमजोर और नाजुक हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: कैल्सियम की कमी से होने वाले विभिन्न रोगों को उनकी आयु-विशेषता (बच्चों में रिकेट्स, वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया, वृद्धावस्था में ऑस्टियोपोरोसिस) के साथ याद रखें।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 14 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. विटामिन का ऐतिहासिक विवरण दीजिए।
Answer: 19वीं सदी से पहले वैज्ञानिकों को केवल कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और खनिज लवणों के बारे में जानकारी थी। 20वीं सदी की शुरुआत में कुछ वैज्ञानिकों ने कृत्रिम मिश्रण बनाकर चूहों पर प्रयोग किए। उन्होंने देखा कि इस भोजन से चूहों की वृद्धि रुक गई। इससे यह निष्कर्ष निकला कि प्राकृतिक भोजन में इन चार तत्वों के अलावा कुछ और तत्व भी हैं जो शरीर की वृद्धि के लिए ज़रूरी हैं। यह खोज विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।
विटामिन शब्द का आविष्कार कैशिमिर फंक (Casimir Funk) ने 1912 में किया था। उन्होंने चावल के ऊपरी खोल से प्राप्त एक तत्व को खोजा जिससे बेरी-बेरी ठीक हो जाता था। इस खोज के दौरान, आइजेक मैन (Eijkman) ने सोचा कि यह बीमारी किसी खाद्य तत्व की कमी से होती है। यह तत्व शरीर के लिए ज़रूरी समझा गया और इसमें नाइट्रोजन भी पाया गया। इसलिए इसे 'विटामिन' नाम दिया गया। बाद में जब पता चला कि कुछ विटामिनों में नाइट्रोजन नहीं होता, तो इसके नाम से आखिरी 'e' हटाकर इसे 'विटामिन' कहा जाने लगा।
In simple words: पहले वैज्ञानिक सिर्फ कुछ ही पोषक तत्वों को जानते थे। 1912 में फंक ने 'विटामिन' शब्द दिया, जब उन्होंने देखा कि कुछ खास तत्व शरीर के लिए बहुत ज़रूरी हैं और इनकी कमी से बीमारियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन की खोज के ऐतिहासिक पहलुओं में कैशिमिर फंक का नाम और 'विटामिन' शब्द की उत्पत्ति को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. विटामिन 'ए' का संक्षिप्त विवरण देते हुए इसके प्रकार बताइए।
Answer: विटामिन 'ए' वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसकी खोज सबसे पहले हुई थी। यह केवल जानवरों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। हरी-भरी सब्जियों जैसे पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में कैरोटीनॉइड्स होते हैं। शरीर में जाकर कैरोटीनॉइड्स विटामिन 'ए' में बदल जाते हैं, इसलिए इन्हें 'प्रोविटामिन 'ए' भी कहते हैं। विटामिन 'ए' कई फलों और सब्जियों में पाया जाता है।
विटामिन A के प्रकार: विटामिन 'ए' मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं। कई खाद्य पदार्थों में एक से ज्यादा प्रकार के विटामिन 'ए' मिलते हैं।
• **विटामिन A रेटिनॉल –** यह केवल जानवरों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
• **विटामिन A एल्डिहाइड –** यह आँखों के रेटिना के रॉड्स (rods) और शंकु (cones) में मौजूद रोडोप्सिन (rhodopsin) तथा आइडोप्सिन (iodopsin) पिगमेंट में पाया जाता है और आँखों की अच्छी रोशनी के लिए बहुत ज़रूरी है। यह विटामिन आंखों की स्वस्थ दृष्टि बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: विटामिन ए एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो जानवरों के उत्पादों में मिलता है, और पौधों में कैरोटीनॉइड्स के रूप में होता है जो शरीर में विटामिन ए में बदल जाते हैं। इसके मुख्य प्रकार रेटिनॉल और एल्डिहाइड हैं जो आँखों की रोशनी के लिए ज़रूरी हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन A को 'प्रोविटामिन A' (कैरोटीनॉइड्स) से अलग करना महत्वपूर्ण है, और इसके दो मुख्य सक्रिय रूपों (रेटिनॉल, एल्डिहाइड) को याद रखें।
Question 3. विटामिन A की कमी के प्रभाव लिखिए।
Answer: विटामिन A की कमी से शरीर में कई तरह की बीमारियाँ और समस्याएँ पैदा हो जाती हैं। विटामिन A आंखों के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
1. **रतौंधी (Night Blindness):** यह आँखों का एक रोग है। इसके लक्षण विटामिन A की कमी की शुरुआत में ही दिखने लगते हैं। इस रोग में कम रोशनी में ठीक से देखने की क्षमता नहीं होती, खासकर जब कोई व्यक्ति उजाले से अंधेरे में जाता है या तेज धूप वाले कमरे से आता है।
2. **ज़ेरोफ्थाल्मिया (Xerophthalmia):** जब विटामिन A की कमी लंबे समय तक और बहुत अधिक होती है, तो यह रोग हो जाता है। इसमें आँख की कॉर्निया झिल्ली सूख जाती है और उसमें सूजन आ जाती है। यह कॉर्निया में कैरोटिनाइजेशन (केराटिन का जमाव) के कारण होता है। इससे कॉर्निया का भीतरी भाग धुएँ जैसे बादल की तरह दिखने लगता है। धीरे-धीरे आँख की रोशनी पूरी तरह खत्म हो जाती है।
3. **बिटाँट का धब्बा (Bitot's Spot):** इसमें कंजंक्टाइवा (आँख की सफ़ेद झिल्ली) पर स्लेटी-सफेद रंग के तिकोने धब्बे आ जाते हैं।
4. **ज़ेरोसिस कंजंक्टाइवा (Xerosis Conjunctiva):** कंजंक्टाइवा सूख जाती है। इस पर झुर्रियाँ पड़ जाती हैं। कभी-कभी इन पर घाव भी हो जाते हैं।
5. **ज़ेरोसिस कॉर्निया (Xerosis Cornea):** इसमें आँसू बनाने वाली ग्रंथियाँ सूख जाती हैं, जिससे आँसू निकलना बंद हो जाता है।
6. **केरेटोमलेशिया (Keratomalacia):** यह आँखों से संबंधित विभिन्न रोगों की अंतिम और सबसे गंभीर अवस्था है। इसमें कॉर्निया बहुत मुलायम हो जाता है, उस पर घाव हो जाते हैं और बैक्टीरिया हमला कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि आँख की दृष्टि पूरी तरह खत्म हो जाती है, यानी व्यक्ति अंधा हो जाता है।
7. **फ्राइनोडर्मा (Phrynoderma):** विटामिन A की कमी के कारण त्वचा की पसीना बनाने वाली ग्रंथियाँ ठीक से काम नहीं करतीं, जिससे पसीना नहीं निकलता और त्वचा सूखी, खुरदुरी, कठोर हो जाती है।
8. **शारीरिक वृद्धि में रुकावट:** लंबे समय तक विटामिन A की कमी से हड्डियों की वृद्धि और विकास ठीक से नहीं हो पाता है।
In simple words: विटामिन A की कमी से रतौंधी (रात में कम दिखना), आँखों का सूखना, धब्बे पड़ना, और त्वचा का रूखा होना जैसी कई समस्याएँ होती हैं। यह कमी बच्चों की वृद्धि को भी रोक सकती है।
🎯 Exam Tip: विटामिन A की कमी से होने वाले आँखों के सभी रोगों के नाम और उनके प्रमुख लक्षणों को विस्तार से याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 5. विटामिन-D की कमी से होने वाले रोगों का उल्लेख कीजिए।
Answer: विटामिन D की कमी से रक्त में एल्केलाइन फॉस्फेटेस एन्जाइम की मात्रा बढ़ जाती है। इसकी कमी से कैल्सियम और फास्फोरस का ठीक से अवशोषण नहीं हो पाता है, जिससे हड्डियाँ और दाँत कमजोर हो जाते हैं। विटामिन D की कमी से निम्नलिखित बीमारियाँ होती हैं:
1. **रिकेट्स (Rickets):** यह रोग ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करता है। इसमें विटामिन D, कैल्सियम और फास्फोरस की बहुत कमी हो जाती है। यह उन जगहों पर अधिक होता है जहाँ भीड़-भाड़, अधिक धुआँ और औद्योगिक प्रदूषण होता है और सूर्य का प्रकाश कम मिलता है।
2. **मांसपेशीय मरोड़ (Muscular Cramps):** विटामिन D की कमी से कैल्सियम तथा फास्फोरस के मेटाबॉलिज्म में असंतुलन आ जाता है, जिससे मांसपेशियों में मरोड़ उठने लगते हैं।
3. **दाँतों का सड़ना:** विटामिन D की कमी से बच्चों में समय पर दाँत नहीं उगते। दाँतों के डेन्टिन (dentine) और इनेमल (enamel) भाग में कैल्सियम और फास्फोरस का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता है, जिससे दाँत कमजोर हो जाते हैं। विटामिन D हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है।
In simple words: विटामिन D की कमी से बच्चों को रिकेट्स, मांसपेशियों में मरोड़ और दाँतों के सड़ने जैसी समस्याएँ होती हैं, क्योंकि यह कैल्सियम और फास्फोरस के सही उपयोग के लिए ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: विटामिन D की कमी से होने वाले रोगों में रिकेट्स सबसे महत्वपूर्ण है; इसके कारणों (जैसे सूर्य के प्रकाश की कमी) को भी याद रखें।
Question 6. विटामिन D की कमी के प्रभावों की रूपरेखा दीजिए।
Answer: विटामिन D की कमी के प्रभाव अलग-अलग आयु वर्ग में विभिन्न रूपों में सामने आते हैं, जो मुख्य रूप से हड्डियों और मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं।
| रिकेट्स (6 माह से 2 1/2 वर्ष) | टिटेनी (लक्षण) | दाँतों का सड़ना (विशेषकर बालकों में) | ऑस्टियोमलेशिया (वयस्कों में) |
|---|---|---|---|
| लक्षण | लक्षण | लक्षण | लक्षण |
| (i) खोपड़ी का अगला भाग देर से भरता है | (i) हाथों-पैरों में तेज दर्द | (i) दाँतों का सड़ना | (i) हड्डियाँ कमजोर होना |
| (ii) खोपड़ी की हड्डियाँ मुलायम होना | (ii) पीड़ा और ऐंठन | (ii) दाँत अस्वस्थ होना | (ii) कमर और जाँघों में दर्द |
| (iii) लंबी हड्डी का सिरा बढ़ना | (iii) दाँतों में खोदर (cavity) | (iii) रीढ़ की हड्डी का झुकना | |
| (iv) पसली की हड्डी में मोती जैसा उभार | (iv) दाँतों का देर से निकलना | (iv) मांसपेशियाँ कमजोर होना | |
| (v) जोड़ों में दर्द | (v) पेल्विक (श्रोणि) गुहा का ठीक से विकास न होना | ||
| (vi) पाचन क्रिया में गड़बड़ी | |||
| (vii) थकान | |||
| (viii) चिड़चिड़ापन |
In simple words: विटामिन D की कमी से बच्चों में रिकेट्स, वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया, और हर उम्र में दाँतों का सड़ना व मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएँ होती हैं। यह हमारी हड्डियों और शरीर के सही विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के लिए एक सारणी (table) बनाकर विभिन्न प्रभावों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होगा।
Question 7. विटामिन E के कार्य समझाइए।
Answer: विटामिन E एक बहुत ही महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो शरीर में कई अहम कार्य करता है:
• विटामिन E में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, यानी यह कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने वाले मुक्त कणों से बचाता है। यह आँतों में कैरोटीन और विटामिन A के ऑक्सीकरण को भी रोकता है, जिससे उन्हें नष्ट होने से बचाता है।
• विटामिन E लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ऑक्सीकारक पदार्थों द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने-फूटने से बचाता है, जिससे उनकी जीवन अवधि बढ़ जाती है।
• यह कोशिकाओं के बाहरी आवरणों (membrane) की रचनात्मक एकता बनाए रखने में मदद करता है।
• विटामिन E सामान्य प्रजनन (reproduction) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसीलिए इसे 'बाँझपन विरोधी विटामिन' भी कहते हैं।
• विटामिन E न्यूक्लिक अम्ल (nucleic acid) और प्रोटीन के चयापचय (metabolism) में महत्वपूर्ण होता है, और यह हीम प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक है।
• विटामिन E यकृत (लीवर) को विभिन्न विषैले पदार्थों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह शरीर को आंतरिक क्षति से बचाता है।
In simple words: विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिकाओं को बचाता है, लाल रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और प्रजनन के लिए ज़रूरी है। यह लीवर को भी सुरक्षा देता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन E के एंटीऑक्सीडेंट गुण और प्रजनन स्वास्थ्य में इसकी भूमिका पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये इसके सबसे प्रमुख कार्य हैं।
Question 9. विटामिन-K के कार्य बताइए। अथवा रुधिर का थक्का बनाने में विटामिन K की भूमिका बताइए।
Answer: विटामिन K का मुख्य काम शरीर में चोट लगने पर खून बहने वाली जगह पर खून का थक्का जमाकर खून को रोकना है। यह रक्त के एक तत्व 'प्रोथ्रोम्बिन' के निर्माण में मदद करता है। प्रोथ्रोम्बिन, 'थ्रोम्बिन' में बदल जाता है जो बाद में 'फाइब्रिन' बनाता है, और फाइब्रिन ही खून का थक्का बनाता है। थक्का जमने की प्रक्रिया एक जटिल रासायनिक क्रिया है।
रक्त में मौजूद 'बिम्बाणु' (Platelets) और कुछ रक्त कारक क्षतिग्रस्त ऊतकों से मिलकर 'थ्रोम्बोप्लास्टिन' बनाते हैं। ये रक्त कारक कैल्सियम आयन और रक्त प्लाज्मा के साथ मिलकर काम करते हैं और प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय करते हैं।
सक्रिय प्रोथ्रोम्बिन अन्य रक्त कारकों के साथ मिलकर एक नया पदार्थ बनाता है जिसे 'थ्रोम्बिन' कहते हैं। रक्त प्लाज्मा में 'फाइब्रिनोजन' नामक एक घुलनशील प्रोटीन होता है, जो थ्रोम्बिन से मिलकर रासायनिक क्रिया करता है और फाइब्रिनोजन को एक अघुलनशील प्रोटीन 'फाइब्रिन' में बदल देता है। इसी फाइब्रिन में रक्त कोशिकाएँ फँस जाती हैं और रक्त जम जाता है। विटामिन K के बिना प्रोथ्रोम्बिन नहीं बन पाता है। इसलिए, रक्त का थक्का बनने की क्रिया पूरी नहीं हो पाती है, जिससे अधिक रक्तस्राव हो सकता है।
In simple words: विटामिन K खून का थक्का बनाने में बहुत मदद करता है। यह शरीर में एक खास प्रोटीन 'प्रोथ्रोम्बिन' को बनाने में मदद करता है, जो चोट लगने पर खून को जमने से रोकता है और ज्यादा खून बहने से बचाता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन K का संबंध 'प्रोथ्रोम्बिन' और 'फाइब्रिन' जैसे शब्दों के साथ याद रखें, क्योंकि ये रक्त का थक्का बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं।
Question 11. विटामिन-C की कमी के प्रभाव लिखिए। अथवा स्कर्वी रोग क्या होता है? इसके कारण व रोग के लक्षण लिखिए।
Answer: शरीर में लंबे समय तक विटामिन C की कमी रहने से 'स्कर्वी' रोग हो जाता है। स्कर्वी रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. **वयस्कों में स्कर्वी:** वयस्कों में यह रोग लंबे समय तक विटामिन C रहित आहार लेने से होता है।
**लक्षण:**
• वजन कम होना और शारीरिक कमजोरी महसूस होना।
• लोहे का अवशोषण ठीक से न होने के कारण खून की कमी (रक्ताल्पता) हो जाती है।
• त्वचा सूखी, खुरदुरी, पीली और चमकहीन हो जाती है।
• मसूड़े सूख जाते हैं और दाँत कमजोर होकर गिरने लगते हैं।
• शरीर की मांसपेशियाँ निष्क्रिय (inactive) हो जाती हैं।
• पैरों में सूजन आ जाती है और दर्द रहता है।
• रक्त नलिकाओं की दीवारें कमजोर होकर फट जाती हैं।
• घाव जल्दी नहीं भरते हैं।
• मसूड़े सूज जाते हैं, और मुँह से बदबू आती है।
• छाती के सामने की हड्डी अंदर की ओर धँस जाती है।
• साँस लेने में कठिनाई होती है, शरीर नीला पड़ जाता है, और शरीर में ऐंठन होती है। बच्चों में इससे मृत्यु भी हो सकती है।
In simple words: विटामिन C की कमी से स्कर्वी रोग होता है, जिसमें शरीर कमजोर होता है, मसूड़ों से खून आता है, त्वचा सूख जाती है और घाव ठीक से नहीं भरते। खट्टे फल न खाने से यह रोग हो सकता है।
🎯 Exam Tip: स्कर्वी के प्रमुख लक्षणों, जैसे मसूड़ों से खून आना और घावों का धीरे भरना, पर ध्यान दें और याद रखें कि खट्टे फल विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं।
Question 12. विटामिन B1 अर्थात् थायमिन का विवरण देते हुए इसके कार्य लिखिए।
Answer: विटामिन B1, जिसे 'थायमिन' भी कहते हैं, की खोज बेरी-बेरी रोग के इलाज के दौरान हुई थी। यह रोग उन क्षेत्रों में ज्यादा होता है जहाँ पॉलिश किए हुए चावल का सेवन मुख्य रूप से किया जाता है। थायमिन पानी में आसानी से घुल जाता है। यह अम्लीय माध्यम में स्थिर रहता है, लेकिन क्षारीय माध्यम और कमरे के तापमान पर यह नष्ट हो जाता है। भोजन में खाने का सोडा डालने से थायमिन खराब हो जाता है। थायमिन शरीर को ऊर्जा देने और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
थायमिन के कार्य:
• शरीर में थायमिन, फास्फेट के साथ मिलकर 'थायमिन पाइरोफॉस्फेट' बनाता है, जो कार्बोहाइड्रेट के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) में मदद करता है।
• थायमिन पाचन तंत्र की मांसपेशियों की गति को सामान्य रखकर पाचन क्रिया में सहायता करता है।
• विटामिन तंत्रिकाओं की सामान्य स्थिति बनाए रखने में सहायक होता है।
• थायमिन डी.एन.ए. (DNA) और आर.एन.ए. (RNA) के निर्माण में भी मदद करता है।
• यह श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) की रोगाणु-भक्षण क्षमता (germ-eating ability) को बढ़ाता है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
• यह शरीर के आंतरिक अंगों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: विटामिन B1 (थायमिन) शरीर को कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा बनाने, पाचन क्रिया और तंत्रिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करता है। इसकी कमी से बेरी-बेरी रोग होता है।
🎯 Exam Tip: थायमिन के मुख्य कार्य, जैसे कार्बोहाइड्रेट चयापचय और तंत्रिका स्वास्थ्य, को याद रखें, साथ ही यह भी कि पॉलिश किए चावल में इसकी कमी होती है।
Question 13. शरीर में कैल्सियम की उपस्थिति तथा इसके कार्य लिखिए।
Answer: शरीर में अन्य खनिज लवणों की तुलना में कैल्सियम की मात्रा सबसे अधिक होती है। शरीर के कुल भार का 2 प्रतिशत कैल्सियम होता है। कुल कैल्सियम का 99 प्रतिशत भाग हड्डियों और दाँतों में होता है, जबकि बचा हुआ 1 प्रतिशत कैल्सियम नरम ऊतकों, रक्त के सीरम और अन्य तरल पदार्थों में पाया जाता है। कैल्सियम हड्डियों और दाँतों का मुख्य घटक है, जिससे उन्हें ताकत मिलती है।
कैल्सियम के कार्य:
1. शारीरिक वृद्धि और विकास में: कैल्सियम की कमी का असर प्रोटीन पर भी पड़ता है। प्रोटीन शरीर की वृद्धि और विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।
2. रक्त का थक्का बनाने में: कैल्सियम रक्त को जमने की क्रिया में मदद करता है। रक्त बिम्बाणु (प्लेटलेट्स) और कैल्सियम मिलकर थ्रोम्बोप्लास्टिन बनाते हैं, जो खून जमाने में पहला कदम है।
3. मांसपेशियों के संकुचन पर नियंत्रण: कैल्सियम मांसपेशियों के फैलने और सिकुड़ने की क्रिया को नियंत्रित करता है, जिससे वे सक्रिय रहती हैं।
4. हृदय का संतुलन: हृदय की मांसपेशियों के लिए उन्हें घेरने वाले तरल पदार्थों में पर्याप्त मात्रा में कैल्सियम का होना ज़रूरी है, जो हृदय की धड़कन को सामान्य रखता है।
5. कई एन्जाइम को क्रियाशील बनाए रखने में कैल्सियम मदद करता है।
6. कैल्सियम कोशिका की दीवारों (cell walls) से पदार्थों के आने-जाने को नियंत्रित करता है।
In simple words: कैल्सियम शरीर में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला खनिज है, जो हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाता है। यह रक्त का थक्का जमाने, मांसपेशियों और हृदय को ठीक से काम करने में भी मदद करता है।
🎯 Exam Tip: कैल्सियम के मुख्य कार्यों को याद रखें, खासकर हड्डियों के निर्माण, रक्त के थक्के जमने और मांसपेशियों के संकुचन में इसकी भूमिका।
Question 14. शरीर में फास्फोरस की उपस्थित, इसके कार्य, कमी के प्रभाव तथा प्राप्ति का स्रोत बताइए।
Answer: फास्फोरस शरीर में कैल्सियम के बाद दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला खनिज तत्व है। शरीर के कुल भार का 1 प्रतिशत फास्फोरस होता है। कुल फास्फोरस का 80 प्रतिशत भाग कैल्सियम के साथ मिलकर 'कैल्सियम फास्फेट' बनाता है, जिससे हड्डियाँ और दाँतों का निर्माण होता है। फास्फोरस ऊर्जा उत्पादन और आनुवंशिक सामग्री (DNA/RNA) के लिए भी ज़रूरी है।
फास्फोरस के कार्य:
• फास्फोरस ऊर्जा उत्पादन की क्रिया में सहायक होता है।
• यह कोशिकाओं के निर्माण और उनके विकास में मदद करता है।
• यह शरीर में कैल्सियम के अवशोषण को बढ़ाता है।
• यह DNA और RNA का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो आनुवंशिक जानकारी को ले जाते हैं।
फास्फोरस की कमी का प्रभाव: फास्फोरस ज्यादातर खाद्य पदार्थों में आसानी से मिल जाता है, इसलिए इसकी कमी के प्रभाव आमतौर पर नहीं दिखते। लेकिन जो व्यक्ति ज्यादा अम्ल का उपयोग करते हैं, उनके शरीर में इसकी कमी हो सकती है। इसकी कमी से थकान, भूख न लगना और हड्डियों का खनिज लवण कम होना (डीमिनरलाइजेशन) जैसे लक्षण हो सकते हैं।
फास्फोरस की प्राप्ति के स्रोत: वे आहार जिनमें अच्छी मात्रा में कैल्सियम और प्रोटीन होता है, उनमें फास्फोरस भी होता है। दूध, अंडा, मांस, मछली, मुर्गी, आटा, तिल, जई का आटा आदि इसके उत्कृष्ट स्रोत हैं। अनाज, दालें, सूखे मेवे, मटर, चना, चुकंदर, बादाम आदि भी इसके अच्छे स्रोत हैं।
In simple words: फास्फोरस हड्डियों और दाँतों के लिए, ऊर्जा बनाने और कोशिकाओं के निर्माण के लिए ज़रूरी है। यह कई प्रोटीन और कैल्सियम से भरपूर खाद्य पदार्थों में मिलता है, और इसकी कमी बहुत कम होती है।
🎯 Exam Tip: फास्फोरस की हड्डियों और ऊर्जा चयापचय में भूमिका को याद रखें, और ध्यान दें कि इसकी कमी दुर्लभ होती है क्योंकि यह कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है।
Question 15. निम्नलिखित खनिजों के कार्य, कमी के प्रभाव तथा प्राप्ति के स्रोत लिखिए पोटेशियम, सोडियम, सल्फर, मैग्नीशियम तथा आयोडीन।
Answer: शरीर के लिए पोटेशियम, सोडियम, सल्फर, मैग्नीशियम और आयोडीन जैसे खनिज बहुत ज़रूरी हैं। ये शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
| खनिज | कार्य | कमी के प्रभाव | स्रोत |
|---|---|---|---|
| **पोटेशियम** | • मांसपेशियों के संकुचन में सहायक • ग्लाइकोजन के संश्लेषण में • शरीर की वृद्धि एवं विकास में सहायक | • आलस्य • हृदय के धड़कने की गति में असंतुलन • मांसपेशियाँ कमजोर होना | सभी भोज्य पदार्थ, फल और सब्जियाँ। |
| **सोडियम** | • हृदय के धड़कने की गति को नियमित रखना • जल संतुलन में सहायक • नाड़ियों के उद्दीपन में सहायक • अमीनो अम्ल एवं कार्बोज के अवशोषण में सहायक • मांसपेशियों के संकुचन में सहायक | • जी मिचलाना • कमजोरी, थकावट • मांसपेशियों में तीव्र पीड़ादायक संकुचन • ऐंठन होना | दूध, मांस, मछली, अंडा, दही, दाल, सूखे मेवे, हरी सब्जियाँ। |
| **सल्फर** | • नाखून एवं बालों की वृद्धि में सहायक • त्वचा को स्वस्थ एवं कांतिमय बनाना • पाचक रसों, एन्जाइम्स, हार्मोन्स, विटामिन आदि के निर्माण में सहायक • प्रोटीन के पाचन, शोषण एवं उपापचय में सहायक | • बालकों की शारीरिक वृद्धि रुक जाती है • त्वचा रूखी एवं कांतिहीन दिखती है • नाखूनों एवं बालों की बढ़वार रुक जाती है | मुर्गी, मछली, अंडा, दूध एवं दूध से बने व्यंजन, पनीर, मूंगफली, मसूर की दाल। |
| **मैग्नीशियम** | • कैल्सियम तथा फास्फोरस के चयापचय में सहायक • एन्जाइम्स को सक्रिय बनाने में सहायक • नाड़ी संस्थान की संवेदना शक्ति को संतुलित बनाने में | • मांसपेशीय थकान • संज्ञाहीनता • हाथ-पैरों की पेशियों में पीड़ादायक संकुचन • निराशा अनुभव करना | सभी भोज्य पदार्थ, अनाज, दाल, तेलबीज, सूखे मेवे आदि में प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहता है। |
| **आयोडीन** | • शारीरिक वृद्धि एवं विकास • शिशु के मानसिक विकास में • कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में • धात्री माता के दुग्ध निर्माण में • आधारीय चयापचय को नियमित व नियंत्रित करना | • घेघा या गलगण्ड रोग • क्रेटिनिज्म रोग • मिक्सीडीमा | समुद्री नमक, समुद्री मछलियाँ, समुद्री-घास, मुर्गी का अंडा। |
| **फ्लोरीन** | • हड्डियों के सामान्य खनिजीकरण के लिए आवश्यक है • हड्डियों के तंतुओं के उत्तर स्वास्थ्य के लिए • दाँतों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए | • डेंटल फ्लोरोसिस • कंकाल फ्लोरोसिस | दूध, पनीर, अंडा, आलू, समुद्री मछली, मांस। |
| **ताँबा** | • लोहे के अवशोषण एवं चयापचय में • लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में सहायक | • शारीरिक विकास में कमी • रक्ताल्पता रोग | यकृत, मांस, वृक्क, दालें, अनाज, अंडा। |
| **जस्ता** | • घाव भरने में • हड्डियों के विकास में • मस्तिष्क के विकास में • सामान्य वृद्धि में सहायक • प्रजनन अंगों के विकास में • शारीरिक वृद्धि एवं विकास में | • घाव देरी से भरता है • सामान्य वृद्धि एवं विकास बाधित होता है • बाल झड़ने लगते हैं • त्वचा में घाव हो जाता है | हेरिंग्स तथा ऑयस्टर मछली, मांस, अंडा, गेहूँ की भूसी, जई का आटा, दाल, सूखे मेवे। |
| **मैंगनीज** | • प्रजनन कार्यों में • हार्मोन के स्रावण में • चयापचय में सहायक • यकृत के उत्तम स्वास्थ्य के लिए सहायक | • जानवरों के प्रजनन अंगों का विकास नहीं हो पाता • यकृत में वसा का जमाव हो जाता है • जानवरों का विकास नहीं हो पाता | गेहूँ की भूसी, मक्का की चोकर, मूंगफली के छिलके, सूखे मटर, जामुन, चाय, कॉफी, सूखे मेवे। |
In simple words: ये खनिज हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी हैं। पोटेशियम मांसपेशियों और दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है, सोडियम शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखता है, सल्फर बालों और त्वचा को स्वस्थ रखता है, मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाता है, और आयोडीन थायराइड हार्मोन के लिए ज़रूरी है। ये सभी अलग-अलग खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के व्यापक प्रश्न के लिए एक व्यवस्थित सारणी बनाना जानकारी को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से प्रस्तुत करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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