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Class 11 Home Science Chapter 13 भोजन के पोषक तत्व-वृहत् मात्रिक पोषक त RBSE Solutions PDF
RBSE Solutions for Class 11 Home Science Chapter 13 भोजन के पोषक तत्व-वृहत् मात्रिक पोषक तत्व
RBSE Class 11 Home Science Chapter 13 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(i) मोनोसैकेराइड है –
(अ) सुक्रोज
(ब) माल्टोज
(स) फ्रक्टोज
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (स) फ्रक्टोज
In simple words: मोनोसैकेराइड सबसे सरल प्रकार की चीनी होती है. फ्रक्टोज इसका एक उदाहरण है और यह फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है.
🎯 Exam Tip: मोनोसैकेराइड्स सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट होते हैं और शरीर में पाचन के लिए इन्हें और छोटे टुकड़ों में तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती है.
Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(ii) प्राणिज कार्बोज (जान्तव स्टार्च) किसे कहते हैं?
(ब) पाक्टन
(स) ग्लाइकोजन
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (स) ग्लाइकोजन
In simple words: ग्लाइकोजन जानवरों में पाया जाने वाला स्टार्च है. यह शरीर में ऊर्जा को जमा करके रखने का एक तरीका है, खासकर लिवर और मांसपेशियों में.
🎯 Exam Tip: ग्लाइकोजन को अक्सर 'पशु स्टार्च' कहा जाता है क्योंकि यह पौधों में स्टार्च की तरह ही जानवरों में ग्लूकोज को जमा करने का काम करता है.
Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(iii) आवश्यक अमीनो अम्ल है -
(अ) हिस्टिडीन
(ब) ल्युसिन
(स) लाइसिन
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: हिस्टिडीन, ल्युसिन और लाइसिन सभी ऐसे अमीनो अम्ल हैं जो हमारे शरीर के लिए जरूरी हैं लेकिन हमारा शरीर खुद इन्हें बना नहीं सकता. इसलिए, हमें इन्हें अपने खाने से लेना पड़ता है.
🎯 Exam Tip: आवश्यक अमीनो अम्ल वे होते हैं जो शरीर खुद नहीं बना पाता और जिन्हें भोजन से प्राप्त करना अनिवार्य होता है, जबकि अनावश्यक अमीनो अम्ल शरीर द्वारा बनाए जा सकते हैं.
Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(iv) दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन है –
(अ) फाइब्रिन
(ब) कैसीन
(स) एल्ब्यूमिन
(द) जीन
Answer: (ब) कैसीन
In simple words: दूध में जो मुख्य प्रोटीन होता है, उसे कैसीन कहते हैं. यह दूध को सफेद रंग देता है और इसमें पोषक तत्व होते हैं.
🎯 Exam Tip: कैसीन दूध का प्रमुख प्रोटीन है, जो दूध को गाढ़ापन और पौष्टिकता प्रदान करता है. यह पनीर बनाने में भी महत्वपूर्ण होता है.
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. दूध का प्रोटीन ......... है।
2. वसा ......... में घुलनशील होती है।
3. जल का रासायनिक सूत्र ......... है।
4. जल की कुल मात्रा शरीर में .........तक पायी जाती है।
5. शारीरिक वृद्धि एवं विकास में ......... सहायक है।
6. प्रोटीन की कमी से ......... रोग हो जाता है।
Answer:
1. लेक्टो एल्ब्यूमिन
2. बेंजीन, ईथर
3. \( H_2O \)
4. 60-70 प्रतिशत तक
5. प्रोटीन
6. क्काशियोरकर, सूखा रोग और मैरास्मिक क्काशियोरकर।
In simple words: इन खाली स्थानों में सही शब्द भरने से हमें दूध, वसा, जल, शरीर की जल मात्रा, शारीरिक वृद्धि और प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगों के बारे में सही जानकारी मिलती है. जैसे पानी का सूत्र \( H_2O \) होता है.
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय वैज्ञानिक नामों और सूत्रों को सटीक रूप से लिखें, जैसे पानी का रासायनिक सूत्र \( H_2O \) है.
प्रोटीन का वर्गीकरण (Classification of Protein)
मोनोसैकेराइड्स
- ग्लूकोज
- फ्रक्टोज
- गैलेक्टोज
डाइसैकेराइड्स
- सुक्रोज
- लैक्टोज
- माल्टोज
पॉलीसैकेराइड्स
- स्टार्च
- ग्लाइकोजन
- डेक्सट्रीन
- सेल्यूलोज
- हेमीसैल्यूलोज
- पेक्टिन
Question 4. प्रोटीन का वर्गीकरण संक्षिप्त में समझाइए।
Answer: प्रोटीन को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया गया है: गुणवत्ता के आधार पर और प्राप्ति के साधन के आधार पर. प्रोटीन शरीर के विकास और मरम्मत के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं.
1. गुणवत्ता के आधार पर:
प्रोटीन की गुणवत्ता उसमें मौजूद अमीनो अम्लों की मात्रा और प्रकार पर निर्भर करती है:
(i) उत्तम या पूर्ण प्रोटीन: इनमें सभी जरूरी अमीनो अम्ल सही मात्रा में होते हैं. ये शरीर के निर्माण और विकास का काम करते हैं. दूध, दही, मांस, मछली, अंडे, यकृत, सूखे मेवे, और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थों से उत्तम प्रोटीन मिलता है.
(ii) मध्यम या आंशिक पूर्ण प्रोटीन: इनमें कुछ जरूरी अमीनो अम्ल होते हैं, लेकिन एक या दो अमीनो अम्ल की कमी होती है.
(iii) निकृष्ट या अपूर्ण प्रोटीन: इनमें जरूरी अमीनो अम्लों की पूरी तरह से कमी होती है. इसलिए ये शारीरिक वृद्धि और विकास में ज्यादा मदद नहीं करते. कन्द-मूल, साग-सब्जी, फल, और मक्का में यह प्रोटीन मिलता है.
2. प्राप्ति के साधन के आधार पर:
प्राप्ति के साधन के आधार पर भी प्रोटीन को पूर्ण या निकृष्ट प्रकार में बांटा जा सकता है, जिनके मुख्य स्रोत पौधे होते हैं.
In simple words: प्रोटीन को उसकी गुणवत्ता और जहाँ से वह मिलता है, उसके हिसाब से बांटा जाता है. कुछ प्रोटीन शरीर के लिए बहुत अच्छे होते हैं क्योंकि उनमें सभी जरूरी चीजें होती हैं, जबकि कुछ में थोड़ी कमी होती है.
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के वर्गीकरण को समझाने के लिए उसके दो मुख्य आधारों (गुणवत्ता और प्राप्ति के साधन) को स्पष्ट करें और प्रत्येक श्रेणी के कुछ उदाहरण दें.
Question 5. सामान्य जल और इलैक्ट्रोलाइट सन्तुलन बनाए रखने में हार्मोन की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
Answer: जल और इलैक्ट्रोलाइट्स के संतुलन में ADH (एन्टी डाइयूरेटिक हार्मोन) की खास भूमिका होती है. जब शरीर में पानी की बहुत ज्यादा कमी होती है, तो खून पतला हो जाता है जिससे परासरण दाब बढ़ जाता है. इसके कारण, मस्तिष्क में अधश्चेतक के परासरणग्राही कोष उत्तेजित हो जाते हैं और ADH का स्राव बढ़ जाता है. यह हार्मोन किडनी को पानी को ज्यादा सोखने के लिए कहता है, जिससे शरीर में पानी की कमी पूरी होती है.
ADH के प्रभाव से मूत्रलता (पेशाब ज्यादा आने की क्रिया) रुक जाती है, और किडनी की नलिकाओं में पानी का अवशोषण बढ़ जाता है. जब व्यक्ति पानी पीता है, तो खून फिर से पतला हो जाता है और परासरण दाब कम हो जाता है. इससे अधश्चेतक की कोशिकाएँ सामान्य हो जाती हैं और ADH का स्राव रुक जाता है. इस तरह, यह हार्मोन शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है.
In simple words: ADH हार्मोन शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखने में मदद करता है. जब पानी कम होता है, तो यह हार्मोन ज्यादा निकलता है और किडनी को पानी बचाने के लिए कहता है. जब पानी पर्याप्त हो जाता है, तो यह हार्मोन कम निकलता है.
🎯 Exam Tip: ADH हार्मोन की भूमिका को स्पष्ट करते समय 'परासरण दाब' और 'किडनी की नलिकाओं में अवशोषण' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें.
जल का महत्व (जल के कार्य):
Question 1. घोलक के रूप में:
Answer: जल एक बहुत अच्छा घोलक (विलायक) है. पानी के माध्यम से पोषक तत्व शरीर के सभी कोशिकाओं तक पहुँचते हैं. पानी पाचन, अवशोषण और चपापचय क्रियाओं के लिए बहुत जरूरी है. यह शरीर को पोषक तत्वों के परिवहन में मदद करता है.
In simple words: पानी चीजों को घोलता है और पोषक तत्वों को पूरे शरीर में पहुंचाता है. यह शरीर के अंदर होने वाली सभी जरूरी क्रियाओं के लिए बहुत जरूरी है.
🎯 Exam Tip: जल के 'घोलक' गुण को समझाते समय, यह बताएं कि यह पोषक तत्वों के परिवहन और रासायनिक प्रतिक्रियाओं में कैसे सहायक होता है.
Question 2. शारीरिक तापमान का नियन्त्रण:
Answer: पानी में एक खास तरह की ऊष्मा धारण क्षमता होती है. इसी वजह से पानी शरीर के तापमान को स्थिर रखने में सक्षम होता है. पानी शरीर की अंदरूनी गर्मी को पूरे शरीर में फैलाता है और जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो पसीने के रूप में गर्मी को बाहर निकाल देता है. इस तरह, शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है. यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है.
In simple words: पानी शरीर का तापमान सही रखता है. यह गर्मी को फैलाता है और पसीने के जरिए बाहर निकालकर शरीर को ठंडा रखता है.
🎯 Exam Tip: शरीर के तापमान नियंत्रण में जल की भूमिका समझाते समय, 'विशिष्ट ताप' और 'पसीने द्वारा शीतलन' जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 3. स्नेहक के रूप में:
Answer: पानी शरीर के अंदरूनी अंगों, जोड़ों और उनके बीच स्नेहक की तरह काम करता है. यह कोशिकाओं को नम रखता है. मुँह में लार होने के कारण भोजन निगलने में आसानी होती है. श्वसन, पाचन और उत्सर्जन अंगों में मौजूद श्लेष्मा (Mucous) में पानी होता है. जोड़ों के बीच पानी होने से रगड़ नहीं लगती. बुढ़ापे में जोड़ों में पानी की कमी होने से दर्द होता है, जिससे गतिशीलता प्रभावित होती है.
In simple words: पानी शरीर के अंदर चिकनाहट बनाए रखता है, जिससे अंगों और जोड़ों को काम करने में आसानी होती है. यह अंगों को नम रखता है.
🎯 Exam Tip: जल के 'स्नेहक' कार्य को समझाते हुए, शरीर के उन अंगों का उल्लेख करें जहाँ यह भूमिका निभाता है, जैसे जोड़, लार, श्लेष्मा.
Question 4. कोषों के संरचनात्मक घटक के रूप में:
Answer: जल नई कोशिकाओं के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह कोशिकाओं का एक आवश्यक हिस्सा है. शरीर में हर कोशिका और ऊतक में पानी मौजूद होता है. कुछ में पानी की मात्रा ज्यादा होती है और कुछ में कम, लेकिन यह हर जगह मौजूद रहता है. यह कोशिकाओं को आकार और कार्यप्रणाली बनाए रखने में मदद करता है.
In simple words: पानी कोशिकाओं का एक जरूरी हिस्सा है. यह नई कोशिकाओं को बनाने में और शरीर के सभी ऊतकों में मौजूद रहता है.
🎯 Exam Tip: जल के संरचनात्मक घटक के रूप में भूमिका को बताते समय, यह समझाएं कि यह कोशिकाओं और ऊतकों के निर्माण और रखरखाव के लिए कितना आवश्यक है.
Question 5. निर्माणात्मक कार्य:
Answer: शरीर की हर कोशिका, ऊतक और तंतु में पानी मौजूद होता है. यह शरीर के निर्माण में एक अहम भूमिका निभाता है. कुछ हिस्सों में पानी ज्यादा होता है और कुछ में कम, लेकिन यह शरीर की संरचना का मूल आधार है. पानी के बिना कोशिकाएं ठीक से काम नहीं कर सकतीं.
In simple words: पानी शरीर के हर हिस्से में होता है. यह कोशिकाओं और ऊतकों को बनाने में मदद करता है, जो पूरे शरीर की संरचना के लिए जरूरी है.
🎯 Exam Tip: इस बिंदु को समझाते समय, 'कोशिका' और 'ऊतक' के निर्माण में जल की बुनियादी भूमिका पर जोर दें.
Question 6. कोमल अंगों की सुरक्षा:
Answer: जल शरीर के नाजुक अंगों को बाहरी चोटों से बचाता है. यह इन अंगों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है. उदाहरण के लिए, मस्तिष्क के चारों ओर 'प्रमस्तिष्क मेरु द्रव' (Cerebrospinal fluid) होता है, जिसमें मुख्य रूप से पानी होता है. यह द्रव मस्तिष्क को झटकों से बचाता है और उसे सुरक्षित रखता है.
In simple words: पानी शरीर के अंदर के नरम अंगों को चोट से बचाता है. यह उनके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है, जैसे दिमाग के चारों ओर होता है.
🎯 Exam Tip: जल के सुरक्षात्मक कार्य को समझाते समय, मस्तिष्क के चारों ओर के 'प्रमस्तिष्क मेरु द्रव' (Cerebrospinal fluid) का उदाहरण देना बहुत प्रभावी होता है.
Question 7. अनुपयोगी पदार्थों का निष्कासन:
Answer: पानी शरीर की उपापचयी क्रियाओं से बनने वाले बेकार और हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है. जैसे - मल, मूत्र, और पसीना. यह एक प्रकार से शरीर की सफाई का काम करता है. इन पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है.
In simple words: पानी शरीर से बेकार और जहरीली चीजों को पसीना, पेशाब और मल के जरिए बाहर निकालता है. यह शरीर को साफ रखता है.
🎯 Exam Tip: जल के 'उत्सर्जन' कार्य को समझाते समय, मुख्य उत्सर्जी पदार्थों (मूत्र, पसीना) और उनके निष्कासन में जल की भूमिका को स्पष्ट करें.
Question 8. पोषक पदार्थों का परिवहन:
Answer: पानी विभिन्न पदार्थों के लिए एक विलायक (घोलक) का काम करता है. कई उपयोगी पदार्थ पानी में घुल जाते हैं और फिर शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच जाते हैं. यह पोषक तत्वों को शरीर के हर कोने तक ले जाने में मदद करता है, जिससे सभी कोशिकाओं को सही पोषण मिल पाता है.
In simple words: पानी कई पोषक तत्वों को घोलता है और उन्हें शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाता है, जैसे एक गाड़ी सामान ढोती है.
🎯 Exam Tip: जल के 'परिवहन' कार्य को समझाते समय, इस बात पर जोर दें कि यह पोषक तत्वों को कोशिकाओं तक पहुंचाने और अपशिष्ट उत्पादों को हटाने में कैसे मदद करता है.
• भोजन में मौजूद रेशे आँतों की क्रमाकुंचन गति को बढ़ाते हैं और कब्ज की समस्या को दूर करते हैं.
• भोजन में मौजूद रेशे कई पोषक तत्वों को अपने साथ बांध लेते हैं और आँतों में उनके अवशोषण को धीमा करते हैं, जिससे खून में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है.
इस प्रकार, रेशा युक्त भोजन मधुमेह और हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. ये भोजन और पित्त से मिलने वाले कोलेस्ट्रॉल को बांधकर उसके अवशोषण की गति को धीमा कर देते हैं और आँत में विटामिनों को बनाने में मदद करते हैं. इन जीवाणुओं द्वारा रेशे के टूटने से बनने वाले उत्पाद आँत और उसकी अंदरूनी झिल्ली को स्वस्थ रखते हैं और आँतों के कैंसर से बचाते हैं.
RBSE Class 11 Home Science Chapter 13 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 11 Home Science Chapter 13 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. निम्न में से कौन-सा पॉलीसैकेराइड है?
(अ) ग्लूकोज
(ब) गैलेक्टोज
(स) लैक्टोज
(द) सैल्यूलोज
Answer: (द) सैल्यूलोज
In simple words: सैल्यूलोज एक पॉलीसैकेराइड है. यह पौधों की कोशिकाओं की दीवारों में पाया जाता है और हमारे शरीर इसे पचा नहीं सकता.
🎯 Exam Tip: पॉलीसैकेराइड्स बड़े कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो कई मोनोसैकेराइड इकाइयों से मिलकर बने होते हैं. सैल्यूलोज, स्टार्च और ग्लाइकोजन इसके उदाहरण हैं.
Question 2. फलों की शर्करा कहते हैं –
(अ) ग्लूकोज
(ब) फ्रक्टोज को
(स) गेलैक्टोज को
(द) लैक्टोज को
Answer: (ब) फ्रक्टोज को
In simple words: फलों में मिलने वाली चीनी को फ्रक्टोज कहते हैं. यह इसे प्राकृतिक रूप से मीठा बनाती है.
🎯 Exam Tip: फ्रक्टोज एक मोनोसैकेराइड है जो प्राकृतिक रूप से फलों और शहद में पाया जाता है. यह सबसे मीठी प्राकृतिक शर्करा है.
Question 3. संतृप्त वसीय अम्ल है –
(अ) पामिटिक अम्ल
(ब) लिनोलिक अम्ल
(स) एरेकिडोनिक अम्ल
(द) ओलेइक अम्ल
Answer: (अ) पामिटिक अम्ल
In simple words: पामिटिक अम्ल एक संतृप्त वसीय अम्ल है. ये आमतौर पर कमरे के तापमान पर ठोस होते हैं, जैसे मक्खन में.
🎯 Exam Tip: संतृप्त वसीय अम्ल में कार्बन परमाणुओं के बीच एकल बंध होते हैं, जबकि असंतृप्त वसीय अम्ल में कम से कम एक दोहरा बंध होता है.
Question 4. प्रोटीन में अमीनो अम्ल जुड़े होते हैं –
(अ) हाइड्रोजन बन्ध द्वारा
(ब) फास्फोडाइएस्टर बन्ध द्वारा
(स) पेप्टाइड बन्ध द्वारा
(द) वाण्डरवाल बलों द्वारा
Answer: (स) पेप्टाइड बन्ध द्वारा
In simple words: अमीनो अम्ल एक-दूसरे से पेप्टाइड बंध नामक खास बंध से जुड़कर प्रोटीन बनाते हैं. यह बंध प्रोटीन की लंबी श्रृंखला बनाने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: प्रोटीन अमीनो अम्लों की एक लंबी श्रृंखला होते हैं, जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े होते हैं. यह प्रोटीन की प्राथमिक संरचना का निर्माण करता है.
Question 5. साधारण प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट के मिलने से बनता है –
(अ) लाइपो प्रोटीन
(ब) फास्फो प्रोटीन
(स) ग्लाइको प्रोटीन
(द) न्यूक्लिओ प्रोटीन
Answer: (स) ग्लाइको प्रोटीन
In simple words: जब एक साधारण प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट से मिलता है, तो उसे ग्लाइकोप्रोटीन कहते हैं. ये शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: ग्लाइकोप्रोटीन शरीर में कोशिका की पहचान, प्रतिरक्षा प्रणाली और हार्मोन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
रिक्त स्थान भरिए
Question 1. मोनोसैकेराइड के दो अणु जब घनीभूत क्रिया द्वारा मिलते हैं तब............. निर्माण होता है।
Answer: डाइसैकेराइड
In simple words: जब दो मोनोसैकेराइड एक साथ जुड़ते हैं, तो डाइसैकेराइड बनता है.
🎯 Exam Tip: घनीभूत क्रिया (condensation reaction) में पानी का एक अणु निकलता है जब दो छोटे अणु जुड़ते हैं, जिससे डाइसैकेराइड बनता है.
Question 2. ............ऊर्जा का सान्द्र स्रोत है।
Answer: वसा
In simple words: वसा शरीर के लिए ऊर्जा का सबसे ज्यादा गाढ़ा स्रोत है.
🎯 Exam Tip: वसा प्रति ग्राम कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन की तुलना में दोगुनी से अधिक ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे यह ऊर्जा का एक सान्द्र स्रोत बन जाती है.
Question 3. वसा के जल अपघटन से प्राप्त ग्लिसरॉल.........का कार्य करता है।
Answer: ऊर्जा उत्पादन
In simple words: वसा के टूटने पर ग्लिसरॉल बनता है, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है.
🎯 Exam Tip: ग्लिसरॉल वसीय अम्लों के साथ मिलकर वसा बनाता है. जब वसा का जल अपघटन होता है, तो ग्लिसरॉल और वसीय अम्ल अलग हो जाते हैं, और ग्लिसरॉल ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होता है.
Question 4. अब तक कुल...........प्रकार के अमीनो अम्लों का पता चलता है जो हमारे शरीर एवं भोजन में पाए जाते हैं।
Answer: 22
In simple words: अब तक कुल 22 तरह के अमीनो अम्ल खोजे गए हैं, जो हमारे शरीर और भोजन में मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: इनमें से 9 आवश्यक अमीनो अम्ल हैं जो शरीर खुद नहीं बना सकता और उन्हें भोजन से प्राप्त करना होता है.
Question 5. प्राणि जगत से प्राप्त प्रोटीन...........के प्रोटीन होते हैं।
Answer: उत्तम कोटि
In simple words: जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन बहुत अच्छे माने जाते हैं.
🎯 Exam Tip: प्राणिज प्रोटीन (जैसे मांस, अंडे, दूध) में आमतौर पर सभी आवश्यक अमीनो अम्ल पर्याप्त मात्रा में होते हैं, इसलिए इन्हें उत्तम कोटि का प्रोटीन माना जाता है.
RBSE Class 11 Home Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. एक साधारण व्यक्ति के भोजन में कितनी ऊर्जा कार्बोज से मिलती है?
Answer: एक साधारण व्यक्ति के भोजन में 55 से 65 प्रतिशत तक ऊर्जा कार्बोज से मिलती है. यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत है.
In simple words: एक आम आदमी अपनी कुल ऊर्जा का आधे से ज्यादा हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से लेता है, लगभग 55 से 65 प्रतिशत.
🎯 Exam Tip: कार्बोज (कार्बोहाइड्रेट) ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है. अपने उत्तर में प्रतिशत सीमा को ठीक से उल्लेख करें.
Question 2. कार्बोहाइड्रेट का रासायनिक सूत्र लिखिए।
Answer: कार्बोहाइड्रेट का रासायनिक सूत्र \( C_n(H_2O)_n \) है. यह दिखाता है कि इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन होते हैं.
In simple words: कार्बोहाइड्रेट का सूत्र है \( C_n(H_2O)_n \), जिसका मतलब है कि इसमें कार्बन और पानी के अणु होते हैं.
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट के रासायनिक सूत्र में कार्बन और पानी के अणुओं का अनुपात दर्शाया जाता है, जो इसे 'हाइड्रेट ऑफ कार्बन' बनाता है.
Question 3. सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट, जो स्वाद में मीठे होते हैं, कौन-से होते हैं?
Answer: मोनोसैकेराइड स्वाद में मीठे तथा सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट होते हैं. ये शरीर में सीधे ऊर्जा देते हैं.
In simple words: मोनोसैकेराइड सबसे सरल और मीठे कार्बोहाइड्रेट होते हैं.
🎯 Exam Tip: मोनोसैकेराइड जैसे ग्लूकोज और फ्रक्टोज, कार्बोहाइड्रेट के सबसे छोटे रूप होते हैं और पाचन के लिए इन्हें तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती.
Question 4. सबसे अधिक मीठी शर्करा का नाम लिखिए।
Answer: सबसे अधिक मीठी शर्करा फ्रक्टोज शर्करा है. यह प्राकृतिक रूप से फलों में पाई जाती है.
In simple words: फ्रक्टोज सबसे मीठी चीनी है, जो फलों में मिलती है.
🎯 Exam Tip: फ्रक्टोज को 'फलों की चीनी' भी कहते हैं और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ग्लूकोज से कम होता है, लेकिन यह अधिक मीठी होती है.
Question 7. 1 ग्राम कार्बोज से कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है?
Answer: 1 ग्राम कार्बोज से लगभग 4.2 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है. यह ऊर्जा शरीर की गतिविधियों के लिए जरूरी है.
In simple words: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट खाने से लगभग 4.2 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न पोषक तत्वों से प्राप्त ऊर्जा का मान याद रखें: 1 ग्राम कार्बोज या प्रोटीन से लगभग 4 किलो कैलोरी, और 1 ग्राम वसा से लगभग 9 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है.
Question 8. भोजन में रेशा के स्रोत बताइए।
Answer: भोजन में रेशा के मुख्य स्रोत ताजे फल और हरी सब्जियाँ, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, साबुत अनाज और दालें हैं. ये पाचन में मदद करते हैं.
In simple words: रेशेदार भोजन फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज से मिलता है.
🎯 Exam Tip: रेशेदार भोजन कब्ज से बचाव, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखने में मदद करता है.
Question 9. व्युत्पन्न वसा किसे कहते हैं?
Answer: सरल और संयुक्त लिपिड के जल अपघटन से जो नए पदार्थ बनते हैं, उन्हें ही व्युत्पन्न वसा कहते हैं. ये वसा के टूटने से बनते हैं.
In simple words: जब सरल या संयुक्त वसा टूटती है, तो उससे जो नए पदार्थ बनते हैं उन्हें व्युत्पन्न वसा कहते हैं.
🎯 Exam Tip: व्युत्पन्न वसा के उदाहरणों में स्टेरॉयड, कोलेस्ट्रॉल और वसीय अम्ल शामिल हैं, जो शरीर के कई कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं.
Question 10. प्रोटीन की खोज किसने की?
Answer: प्रोटीन की खोज सबसे पहले 1838 में डच रसायनशास्त्री मुल्डर (Mulder) ने की थी. उन्होंने इसका नाम 'प्रोटीन' रखा.
In simple words: प्रोटीन की खोज 1838 में मुल्डर नाम के वैज्ञानिक ने की थी.
🎯 Exam Tip: मुल्डर ने प्रोटीन शब्द ग्रीक भाषा के 'प्रोटियस' से लिया था, जिसका अर्थ है 'प्रथम स्थान ग्रहण करने वाला', क्योंकि यह शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.
Question 11. आवश्यक अमीनो अम्ल क्या होते हैं?
Answer: वे अमीनो अम्ल जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन हमारा शरीर खुद उन्हें बना नहीं सकता और उन्हें भोजन से ही प्राप्त किया जा सकता है, आवश्यक अमीनो अम्ल कहलाते हैं. ये वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक हैं.
In simple words: आवश्यक अमीनो अम्ल वे होते हैं जिन्हें शरीर खुद नहीं बना पाता और हमें उन्हें खाने से लेना पड़ता है.
🎯 Exam Tip: आवश्यक अमीनो अम्ल की कमी से शरीर की वृद्धि रुक सकती है और कई शारीरिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए संतुलित आहार महत्वपूर्ण है.
Question 12. अनावश्यक अमीनो अम्ल क्या होते हैं?
Answer: अमीनो अम्ल जो शरीर के लिए जरूरी तो होते हैं, लेकिन हमारा शरीर इन्हें खुद ही बना लेता है, अनावश्यक अमीनो अम्ल कहलाते हैं. इन्हें भोजन से लेने की खास जरूरत नहीं होती है.
In simple words: अनावश्यक अमीनो अम्ल वे होते हैं जिन्हें शरीर खुद बना लेता है, इसलिए इन्हें खाने से लेने की हमेशा जरूरत नहीं होती.
🎯 Exam Tip: अनावश्यक अमीनो अम्ल का नाम 'अनावश्यक' होने के बावजूद वे शरीर के सामान्य कामकाज के लिए उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितने कि आवश्यक अमीनो अम्ल.
Question 14. दो आवश्यक अमीनो अम्लों के नाम बताइए।
Answer: दो आवश्यक अमीनो अम्ल हिस्टिडीन और आर्जीनिन हैं. ये दोनों शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.
• हिस्टिडीन
• आर्जीनिन
In simple words: हिस्टिडीन और आर्जीनिन दो जरूरी अमीनो अम्ल हैं जो हमें खाने से मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: कुल 9 आवश्यक अमीनो अम्ल होते हैं जिन्हें भोजन से प्राप्त करना होता है. कुछ अन्य उदाहरण ल्यूसिन, लाइसिन, और वैलीन हैं.
Question 15. एक किलो कैलोरी किसे कहते हैं?
Answer: एक किलोग्राम पानी के तापमान को 1°C बढ़ाने के लिए जितनी ऊष्मा की जरूरत होती है, उसे एक किलो कैलोरी कहते हैं. यह ऊर्जा मापने की एक इकाई है.
In simple words: एक किलो कैलोरी उतनी गर्मी होती है जिससे 1 किलो पानी का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाए.
🎯 Exam Tip: कैलोरी ऊर्जा की इकाई है, और किलो कैलोरी (जिसे सामान्यतः 'कैलोरी' भी कहा जाता है) 1000 कैलोरी के बराबर होती है.
Question 16. कौन-सा हार्मोन शरीर में जल सन्तुलन बनाए रखता है?
Answer: एन्टी डाइयूरेटिक हार्मोन (ADH) शरीर में जल संतुलन बनाए रखता है. यह हार्मोन किडनी को पानी को ज्यादा सोखने के लिए कहता है.
In simple words: ADH हार्मोन शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है.
🎯 Exam Tip: ADH को वैसोप्रेसिन भी कहते हैं और यह पिट्यूटरी ग्रंथि से स्रावित होता है. यह पानी के पुन:अवशोषण को बढ़ाकर मूत्र उत्पादन को कम करता है.
Question 17. ORS का पूरा नाम क्या है?
Answer: ORS का पूरा नाम ओरल रिहाइड्रेशन सौल्यूसन (Oral Rehydration Solution) है. इसका उपयोग शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है.
In simple words: ORS का मतलब है ओरल रिहाइड्रेशन घोल, जिसे पानी की कमी होने पर दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: ORS दस्त या उल्टी जैसी स्थितियों में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और तरल पदार्थ के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
RBSE Class 11 Home Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वृहत्त मात्रिक पोषक तत्त्व तथा लघु मात्रिक पोषक तत्त्व से आप क्या समझते हैं?
Answer:
वृहत्त मात्रिक पोषक तत्त्व (Macro-nutrients):
ये वे पोषक तत्व होते हैं जिनकी हमारे शरीर को अधिक मात्रा में जरूरत होती है. इन्हें शरीर को बड़ी मात्रा में ऊर्जा और निर्माण सामग्री देने के लिए खाया जाता है. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, रेशा और जल वृहत्त मात्रिक पोषक तत्व हैं. ये शरीर की मुख्य संरचना और कार्यप्रणाली के लिए जरूरी होते हैं.
सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्त्व (Micro-nutrients):
ये वे पोषक तत्व हैं जिनकी हमारे शरीर को कम मात्रा में जरूरत होती है, लेकिन ये शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं. विटामिन और खनिज सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्व हैं. ये शरीर की विभिन्न क्रियाओं को ठीक से चलाने में मदद करते हैं. इनकी कमी से कई बीमारियाँ हो सकती हैं.
In simple words: वृहत्त मात्रिक पोषक तत्व (जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा) शरीर को ज्यादा मात्रा में चाहिए होते हैं, जबकि सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्व (जैसे विटामिन, खनिज) कम मात्रा में चाहिए होते हैं लेकिन दोनों ही बहुत जरूरी होते हैं.
🎯 Exam Tip: वृहत्त और सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्वों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनकी आवश्यक मात्रा और शरीर में उनकी मुख्य भूमिकाओं का उल्लेख करें.
Question 3. कार्बोज का रासायनिक संगठन बताइए।
Answer: कार्बोज का रासायनिक संगठन:
कार्बोज की मूल रचनात्मक इकाई शर्करा है. इसमें कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O) तत्व पाए जाते हैं. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात पानी (\( H_2O \)) के समान 2:1 का होता है. यही कारण है कि इन्हें कार्बोहाइड्रेट्स कहते हैं, जिसका अर्थ है 'कार्बन के हाइड्रेट'. इनका सामान्य रासायनिक सूत्र \( C_n(H_2O)_n \) होता है. यह सूत्र बताता है कि प्रत्येक कार्बन परमाणु के लिए पानी का एक अणु होता है.
In simple words: कार्बोहाइड्रेट कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बनते हैं. इनमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात पानी जैसा होता है, जैसे \( H_2O \).
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट के रासायनिक संगठन को बताते समय, 'कार्बन', 'हाइड्रोजन', 'ऑक्सीजन' के अनुपात (\( H_2O \) के समान 2:1) और सामान्य सूत्र \( C_n(H_2O)_n \) को स्पष्ट करें.
Question 4. कार्बोज के स्रोत बताइए।
Answer: कार्बोज सभी प्रकार के अनाजों, जैसे - गेहूँ, चावल, बाजरा, मक्का, और कुछ दालों से मिलता है. इसके अलावा, शक्कर, गुड़, शहद, जड़ वाली सब्जियाँ जैसे शकरकन्द, आलू, अरबी, चुकन्दर, और सूखे फल जैसे किशमिश, अंजीर, मुनक्का, खजूर, सेब में भी कार्बोज भरपूर मात्रा में होता है. दूध और दूध से बने उत्पादों में भी कार्बोज पाया जाता है. यह ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.
In simple words: कार्बोहाइड्रेट अनाज, दालें, शक्कर, गुड़, शहद, आलू, और सूखे मेवों से मिलते हैं. दूध और दूध से बनी चीजें भी इसके स्रोत हैं.
🎯 Exam Tip: कार्बोज के स्रोतों को सूचीबद्ध करते समय, अनाजों, फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों के कुछ विशिष्ट उदाहरणों का उल्लेख करें.
Question 5. भोजन में कार्बोहाइड्रेट की कमी के शरीर पर प्रभाव बताइए।
Answer: हमें हर दिन अपनी कुल ऊर्जा का 55-66 प्रतिशत हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से लेना चाहिए. जब भोजन में कार्बोहाइड्रेट और वसा की कमी होती है, तो प्रोटीन ऊर्जा देने का काम करने लगता है, जिससे प्रोटीन का मुख्य कार्य (शरीर का निर्माण) अधूरा रह जाता है. इसके परिणामस्वरूप शरीर की वृद्धि और विकास रुक जाते हैं. कार्बोहाइड्रेट की कमी से शरीर पर कई अन्य बुरे प्रभाव पड़ते हैं:
• वजन कम होना,
• थकावट, घबराहट और स्वभाव में चिड़चिड़ापन,
• शारीरिक क्रियाशीलता में कमी,
• पाचन संस्थान सम्बन्धी विकार उत्पन्न होना.
In simple words: कार्बोहाइड्रेट की कमी से वजन घटता है, थकान होती है, चिड़चिड़ापन आता है, शारीरिक काम करने की क्षमता कम होती है, और पाचन में दिक्कत आती है. प्रोटीन भी ऊर्जा देने में लग जाता है, जिससे शरीर का विकास रुक जाता है.
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट की कमी के प्रभावों को समझाते समय, यह बताएं कि प्रोटीन का 'ऊर्जा स्रोत' के रूप में उपयोग होने से उसके 'निर्माण कार्य' पर कैसे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
Question 7. वसा को वर्गीकृत कीजिए।
Answer: वसा का वर्गीकरण:
| वसा | ||
|---|---|---|
| सरल वसा | यौगिक या संयुक्त वसा | व्युत्पन्न वसा |
| - वसा | - सल्फोलिपिड | - संतृप्त एवं असंतृप्त वसीय अम्ल |
| - तेल | - ग्लाइकोलिपिड | - ग्लिसरॉल |
| - मोम | - फास्फोलिपिड | - स्टिरॉल |
| - लाइपोप्रोटीन | - कोलेस्ट्रॉल | |
| - अर्गोस्टेरॉल |
In simple words: वसा को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है: सरल वसा (जैसे तेल), यौगिक वसा (जैसे लाइपोप्रोटीन), और व्युत्पन्न वसा (जैसे कोलेस्ट्रॉल).
🎯 Exam Tip: वसा के वर्गीकरण को दर्शाने के लिए एक स्पष्ट चार्ट या तालिका का उपयोग करें, जिसमें प्रत्येक प्रकार के उदाहरण भी शामिल हों.
Question 8. संतृप्त एवं असंतृप्त वसीय अम्ल क्या होते हैं?
Answer:
संतृप्त वसीय अम्ल:
वसीय अम्ल जिनमें कार्बन के सभी बंध संतृप्त (एकल बंध) होते हैं, उन्हें संतृप्त वसीय अम्ल कहते हैं. ये कमरे के तापमान पर ठोस होते हैं. उदाहरण के लिए, ब्यूटाइरिक अम्ल, पामिटिक अम्ल आदि. इनका अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.
असंतृप्त वसीय अम्ल:
इन वसीय अम्लों में कार्बन और हाइड्रोजन अणुओं की संख्या में असमानता होती है. इसका मतलब है कि कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्विबंध होता है. उदाहरण के लिए, फोलिक अम्ल, लिनोलिक अम्ल आदि. ये कमरे के तापमान पर तरल होते हैं और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.
In simple words: संतृप्त वसीय अम्ल में कार्बन के सभी बंध एकल होते हैं और ये ठोस होते हैं, जबकि असंतृप्त वसीय अम्ल में कम से कम एक डबल बंध होता है और ये तरल होते हैं.
🎯 Exam Tip: संतृप्त वसा (जैसे मक्खन) आमतौर पर हानिकारक मानी जाती है, जबकि असंतृप्त वसा (जैसे जैतून का तेल) हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती है. अपने उत्तर में इन दोनों के उदाहरण भी शामिल करें.
Question 9. वसा के विभिन्न स्रोत बताइए।
Answer: वसा के स्रोत:
वसा और तेल प्राकृतिक रूप से हमें जानवरों (प्राणिज स्रोत) और पौधों (वनस्पतिज स्रोत) दोनों से मिलते हैं.
वनस्पतिज स्रोत:
इनमें मूंगफली, तिल, नारियल, सरसों, सोयाबीन जैसे अनाज और दालें शामिल हैं. इनके वनस्पति घी और सूखे मेवे जैसे काजू, बादाम आदि भी वसा के अच्छे स्रोत हैं. यह पौधों से मिलने वाली स्वस्थ वसा होती है.
प्राणिज स्रोत:
दूध, पनीर, मक्खन, घी, मांस, मछली और अंडे भी वसा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. इन स्रोतों से मिलने वाली वसा में अक्सर संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है, जो सीमित मात्रा में लेनी चाहिए.
In simple words: वसा हमें पौधों से (जैसे तेल, मेवे) और जानवरों से (जैसे दूध, मांस) मिलती है. दोनों तरह के स्रोत हमारे शरीर के लिए जरूरी हैं, लेकिन उन्हें सही मात्रा में खाना चाहिए.
🎯 Exam Tip: वसा के स्रोतों को 'प्राणिज' और 'वनस्पतिज' श्रेणियों में बांटकर समझाएं, और प्रत्येक श्रेणी के कुछ उदाहरण दें.
Question 11. प्रोटीन को वर्गीकृत कीजिए।
Answer: प्रोटीन्स का वर्गीकरण:
| प्रोटीन | ||
|---|---|---|
| गुणवत्ता के आधार पर | प्राप्ति साधन के आधार पर | रासायनिक संरचना के आधार पर |
| (i) पूर्ण प्रोटीन | (i) वनस्पतिज प्रोटीन | (i) साधारण प्रोटीन |
| (ii) आंशिक पूर्ण प्रोटीन | (ii) प्राणिज प्रोटीन | (ii) संयुग्मी प्रोटीन |
| (iii) अपूर्ण प्रोटीन | (iii) व्युत्पन्न प्रोटीन |
In simple words: प्रोटीन को उसकी गुणवत्ता (कितने अच्छे अमीनो अम्ल हैं), वह कहाँ से मिलता है (पौधे या जानवर), और उसकी बनावट (सरल, मिला-जुला, या टूटा हुआ) के हिसाब से बांटा जाता है.
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के वर्गीकरण में 'गुणवत्ता', 'प्राप्ति के साधन' और 'रासायनिक संरचना' के आधार पर मुख्य श्रेणियों और उनके उप-प्रकारों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं.
Question 12. मध्यम या आंशिक पूर्ण प्रोटीन क्या होते हैं? समझाइए।
Answer: मध्यम या आंशिक पूर्ण प्रोटीन:
ये ऐसे प्रोटीन होते हैं जिनमें कुछ आवश्यक अमीनो अम्ल तो मौजूद होते हैं, लेकिन एक या दो आवश्यक अमीनो अम्ल की कमी होती है. ये प्रोटीन जीवन को बनाए रखने में तो मदद करते हैं, लेकिन शारीरिक वृद्धि और विकास में ये उतने उपयोगी नहीं होते हैं. ये प्रोटीन नए ऊतकों और कोशिकाओं का निर्माण करने में भी कम प्रभावी होते हैं. वनस्पति जगत से मिलने वाले प्रोटीन, जैसे दालें, अनाज और सोयाबीन आदि, अक्सर मध्यम श्रेणी के या आंशिक पूर्ण प्रोटीन के अंतर्गत आते हैं. उदाहरण के लिए, अनाजों में लाइसिन और दालों में मिथियोनीन अमीनो अम्ल की कमी रहती है. इसलिए इन दोनों को मिलाकर खाने से पूर्ण प्रोटीन की प्राप्ति होती है.
In simple words: मध्यम प्रोटीन ऐसे होते हैं जिनमें सारे जरूरी अमीनो अम्ल नहीं होते, एक या दो की कमी होती है. ये जीवन के लिए तो ठीक हैं, पर शरीर की अच्छी बढ़त के लिए पूरे नहीं होते. जैसे दालें और अनाज में पाए जाने वाले प्रोटीन.
🎯 Exam Tip: मध्यम या आंशिक पूर्ण प्रोटीन की पहचान उसकी आंशिक अमीनो अम्ल कमी से होती है. अपने उत्तर में यह भी बताएं कि इसे पूर्ण प्रोटीन बनाने के लिए कैसे पूरक आहार का उपयोग किया जा सकता है (जैसे दाल-चावल का सेवन).
• ग्लाइको प्रोटीन = साधारण प्रोटीन + कार्बोहाइड्रेट
• लाइपो प्रोटीन = साधारण प्रोटीन + लिपिड
• न्यूक्लियो प्रोटीन = साधारण प्रोटीन + न्यूक्लिक अम्ल
• हीमोग्लोबिन = साधारण प्रोटीन (ग्लोबिन) + हीम (लौह तत्व)
• फास्फो प्रोटीन = साधारण प्रोटीन + फास्फोरस
Question 14. मैरास्मिक क्काशियोरकर क्या है? मैरास्मस एवं काशियोरकर में उपचार सम्बन्धी भेद बताइए।
Answer:
मैरास्मिक क्काशियोरकर (Marasmic kwashiorkor):
कम विकसित और विकासशील देशों में जहाँ प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की कमी से कुपोषण होता है, वहाँ बच्चों में मैरास्मस और क्वाशियोरकर दोनों के लक्षण एक साथ दिखते हैं. इसे मैरास्मिक क्वाशियोरकर कहा जाता है. एक बच्चा प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण की एक स्थिति से दूसरी स्थिति में जा सकता है. सही इलाज और पौष्टिक भोजन से क्वाशियोरकर से पीड़ित बच्चों का स्वास्थ्य जल्दी सुधर जाता है, लेकिन मैरास्मस से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार धीरे-धीरे होता है और इसमें ज्यादा समय लग सकता है. इसका इलाज लम्बे समय तक चलता है.
In simple words: मैरास्मिक क्वाशियोरकर तब होता है जब बच्चों को प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की कमी होती है, जिसमें मैरास्मस और क्वाशियोरकर दोनों के लक्षण दिखते हैं. क्वाशियोरकर का इलाज जल्दी संभव है, पर मैरास्मस के इलाज में अधिक समय लगता है.
🎯 Exam Tip: मैरास्मिक क्वाशियोरकर, मैरास्मस और क्वाशियोरकर के संयुक्त लक्षणों को दर्शाता है. उपचार संबंधी भेद को स्पष्ट करते हुए बताएं कि मैरास्मस अधिक गंभीर और दीर्घकालिक होता है.
Question 15. शरीर में जल वितरण को तालिकाबद्ध कीजिए।
Answer: शरीर में जल वितरण का विवरण नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है. जल शरीर के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग मात्रा में मौजूद होता है और यह शरीर के कुल भार का एक बड़ा हिस्सा बनाता है. यह शरीर के हर कार्य के लिए आवश्यक है.
| शरीर भार का प्रतिशत (% of Body weight) | कुल जल की मात्रा (Total water present) | |
|---|---|---|
| कुल शरीर भार | 70 किग्रा | - |
| कुल जल की मात्रा | 70% | 49 किग्रा |
| 1. अंतः कोषीय जल | 50% | 35 किग्रा |
| 2. बाह्यकोषीय जल | 20% | 14 किग्रा |
| (अ) ऊतक तरल | 90% | 6 ली |
| (ब) लसिका व लसिका वाहिनी | 7% | 5 ली |
| (स) रक्तवाहिनी | 4% | 3 ली |
In simple words: शरीर में पानी अलग-अलग हिस्सों में होता है. कुल शरीर के वजन का लगभग 70% पानी होता है, जिसमें से अधिकांश पानी कोशिकाओं के अंदर होता है (अंतः कोषीय जल) और बाकी कोशिकाओं के बाहर (बाह्यकोषीय जल) होता है.
🎯 Exam Tip: जल वितरण की तालिका बनाते समय, कुल शरीर भार, कुल जल की मात्रा और उसके अंतः तथा बाह्यकोषीय विभाजन को प्रतिशत और लीटर/किग्रा में स्पष्ट रूप से दर्शाएं.
RBSE Class 11 Home Science Chapter 13 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. मोनोसैकेराइड्स एवं डाइसैकेराइड्स के प्रमुख सदस्य कार्बोहाइड्रेटस को समझाइए। अथवा निम्नलिखित के स्रोत बताइए –
(i) ग्लूकोज
(ii) फ्रक्टोज
(iii) गेलैक्टोज
(iv) सुक्रोज
(v) माल्टोज
(vi) लैक्टोज
Answer:
मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides): मोनोसैकेराइड्स कार्बोहाइड्रेट्स के सबसे आसान रूप होते हैं। जब हम खाना पचाते हैं, तो सभी कार्बोहाइड्रेट्स इसी सरल रूप में बदल जाते हैं। इनमें 6 कार्बन परमाणु होते हैं, इसलिए इन्हें हेक्सोज भी कहते हैं। मुख्य तीन प्रकार हैं:
(i) ग्लूकोज: इसे डेक्सट्रोज, रक्त शर्करा या अंगूर शर्करा भी कहते हैं। ज़्यादातर कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में ग्लूकोज बनकर ऊर्जा देते हैं। ग्लूकोज हमारे शरीर के लिए तुरंत ऊर्जा का स्रोत है।
(ii) फ्रक्टोज: फ्रक्टोज सबसे मीठी चीनी होती है। शरीर इसे बहुत जल्दी सोख लेता है। फ्रक्टोज फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
डाइसैकेराइड्स: जब दो मोनोसैकेराइड अणु आपस में घनीभूत क्रिया (यानी जुड़ते हैं) करते हैं, तो डाइसैकेराइड बनते हैं। ये शर्कराएं दो सरल शर्करा इकाइयों के संयोजन से बनती हैं, जो इनके विशिष्ट गुणों को निर्धारित करता है। मुख्य डाइसैकेराइड्स इस प्रकार हैं:
(i) सुक्रोज: यह गन्ने के रस और चुकंदर में खूब पाया जाता है। \( \text{ग्लूकोज} + \text{फ्रक्टोज} \implies \text{सुक्रोज} \)
(ii) माल्टोज: माल्टोज अनाजों के अंकुरण के समय बनता है, इसे माल्ट शुगर भी कहते हैं। \( \text{ग्लूकोज} + \text{ग्लूकोज} \implies \text{माल्टोज} \)
(iii) लैक्टोज: लैक्टोज को दूध की चीनी भी कहते हैं। यह कम मीठी होती है और पानी में दूसरी चीनी से कम घुलती है। \( \text{ग्लूकोज} + \text{गैलेक्टोज} \implies \text{लैक्टोज} \)
In simple words: मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट का सबसे सरल रूप है, जबकि डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड के जुड़ने से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: मोनोसैकेराइड्स की पहचान उनके एकल-इकाई संरचना से करें, जबकि डाइसैकेराइड्स दो इकाइयों के जोड़ से बनते हैं और ये पाचन में सरल होते हैं।
प्रश्न 2. विभिन्न प्रकार के पौलीसैकराइडस का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer:
पौलीसैकेराइड्स (Polysaccharides): पॉलीसैकेराइड्स बहुत जटिल कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। ये पानी में बहुत कम घुलते हैं, इसलिए पेड़-पौधे इन्हें जमा करके रखते हैं। पॉलीसैकेराइड्स शरीर को फाइबर प्रदान करते हैं, जो पाचन तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्य पॉलीसैकेराइड्स इस प्रकार हैं:
(i) स्टार्च: स्टार्च मुख्य रूप से एमाइलोज और एमाइलोपेक्टिन से मिलकर बनता है। यह गेहूँ, चावल, बाजरा जैसे अनाजों, जड़ वाली सब्जियों, सूखे मेवों जैसे मटर और सेब में पाया जाता है। कच्चे फलों में भी स्टार्च होता है, लेकिन पकने पर यह सरल मोनोसैकेराइड्स में बदल जाता है।
(ii) ग्लाइकोजन: ग्लाइकोजन को पशुओं का कार्बोहाइड्रेट या एनिमल स्टार्च भी कहते हैं। यह इंसान और जानवरों के लिवर और मसल्स में मिलता है। ज़रूरत पड़ने पर यह ग्लूकोज में बदलकर शरीर को ऊर्जा देता है।
(iii) डेक्सट्रिन: डेक्सट्रिन स्टार्च के हल्के टूटने (आंशिक जल-अपघटन) से बनता है। यह स्टार्च से कम जटिल होता है।
(v) हेमीसैल्यूलोज: हेमीसैल्यूलोज भी मनुष्यों द्वारा नहीं पचता, लेकिन यह आंतों को ठीक से काम करने में मदद करता है। यह दालों और अनाजों के छिलकों में बहुत होता है।
(vi) पेक्टिन: पेक्टिन पके हुए फलों के छिलकों और कुछ जड़ वाली सब्जियों में पाया जाता है। इंसान इसे भी पचा नहीं पाते। यह जैम और जेली बनाने में काम आता है।
In simple words: पॉलीसैकेराइड्स कई सरल चीनी इकाइयों से बने जटिल कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो पौधों और जानवरों में ऊर्जा का भंडारण और संरचनात्मक कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: पॉलीसैकेराइड्स को उनके जटिल संरचना और ऊर्जा भंडारण या संरचनात्मक भूमिका के आधार पर पहचानें, जैसे स्टार्च पौधों में और ग्लाइकोजन जानवरों में ऊर्जा भंडार है।
प्रश्न 3. कार्बोहाइड्रेट्स के कार्य समझाइए।
Answer:
कार्बोहाइड्रेट्स के कार्य:
1. ऊर्जा देना: कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा देते हैं। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट से 4.2 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है। ज़रूरत से ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट्स लिवर और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन के रूप में जमा हो जाते हैं। जब ज़रूरत होती है, तो यह फिर से ग्लूकोज में बदलकर ऊर्जा देता है। कार्बोहाइड्रेट्स हमारे शरीर के लिए तुरंत ऊर्जा का स्रोत है।
2. प्रोटीन को बचाना: यह प्रोटीन को बचाते हैं। प्रोटीन का मुख्य काम शरीर को बढ़ाना और उसका विकास करना है। जब कार्बोहाइड्रेट्स नहीं होते, तो प्रोटीन ऊर्जा देने लगता है, जिससे शरीर बनाने का उसका मुख्य काम रुक जाता है।
3. विटामिन 'बी' समूह के संश्लेषण में मदद: लैक्टोज विटामिन 'बी' समूह के बनने के लिए ज़रूरी होता है। छोटी आंत में मौजूद बैक्टीरिया विटामिन 'बी' बनाने में मदद करते हैं।
4. पाचन में मदद: सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज और पेक्टिन जैसे कार्बोहाइड्रेट्स कब्ज को दूर करते हैं और आंतों को ठीक से चलाने में मदद करते हैं।
5. कैल्शियम अवशोषण में मदद: दूध में मौजूद लैक्टोज अन्य शर्कराओं से कम घुलता है। बैक्टीरिया इसे लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं, जिससे आंत में थोड़ा खट्टा माहौल बनता है जो कैल्शियम को शरीर में सोखने में मदद करता है।
6. वसा के ऑक्सीकरण में मदद: ग्लूकोज वसा को तोड़ने में मदद करता है और वसा के सही इस्तेमाल को बढ़ाता है। कार्बोहाइड्रेट्स हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं और शरीर के कई कार्यों में सहायक होते हैं।
In simple words: कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को ऊर्जा देते हैं, प्रोटीन को बचाते हैं, विटामिन 'बी' बनाने में मदद करते हैं, पाचन और कैल्शियम के अवशोषण में सहायक होते हैं।
🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट्स के कार्यों में ऊर्जा प्रदान करना, प्रोटीन को बचाना और पाचन क्रिया को सुचारु रखना प्रमुख बिंदु हैं जिन्हें स्पष्ट रूप से लिखें।
प्रश्न 4. वसा क्या है? वसाओं के विभिन्न प्रकारों को समझाइए।
Answer:
वसा (Fats): वसा ऊर्जा का एक बहुत बड़ा स्रोत है। वसा कार्बनिक यौगिक होते हैं जो पानी में नहीं घुलते, लेकिन क्लोरोफॉर्म, बेंजीन और ईथर जैसे घोलकों में आसानी से घुल जाते हैं। छूने पर ये चिकने महसूस होते हैं। वसा शरीर में विटामिनों को सोखने और अंगों की सुरक्षा में भी मदद करती है।
वसा में मुख्य रूप से कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन जैसे तत्व होते हैं। इसमें कार्बन और हाइड्रोजन की तुलना में ऑक्सीजन बहुत कम होता है। वसा को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा गया है:
1. साधारण वसा: ये ग्लिसरॉल और फैटी एसिड (वसीय अम्ल) से बनते हैं। \( \text{ग्लिसरॉल} + \text{वसीय अम्ल} = \text{साधारण वसा} \)
(i) उदासीन वसा: इसमें वसा और तेल शामिल हैं। जो 20°C पर ठोस हो जाते हैं, वे वसा कहलाते हैं, और जो इस तापमान पर तरल रहते हैं, वे तेल कहलाते हैं।
(ii) मोम: ये फैटी एसिड और ग्लिसरॉल से बने उच्च अल्कोहल से मिलकर बनते हैं।
2. यौगिक वसा: जब फैटी एसिड और ग्लिसरॉल के साथ कुछ और कार्बनिक यौगिक मिलते हैं, तो उन्हें यौगिक लिपिड कहते हैं। \( \text{वसा} + \text{अवसीय पदार्थ} = \text{यौगिक लिपिड} \)
\( \text{ग्लिसरॉल} + \text{कार्बनिक या} \)
\( \text{(वसीय अम्ल)} \)
\( \text{(अकार्बनिक पदार्थ)} \)
• वसा, कार्बोहाइड्रेट और सल्फ्यूरिक अम्ल मिलकर सल्फोलिपिड बनाते हैं।
• फैटी एसिड, ग्लिसरॉल और कार्बोहाइड्रेट मिलकर ग्लाइकोलिपिड बनाते हैं।
• फैटी एसिड, ग्लिसरॉल, फास्फोरिक अम्ल और नाइट्रोजन बेस मिलकर फास्फोलिपिड बनाते हैं।
• वसा और प्रोटीन मिलकर लाइपोप्रोटीन बनाते हैं।
स्टेरॉल: स्टेरॉल रासायनिक रूप से वसा से सीधे संबंधित नहीं होते, लेकिन इनमें फैटी एसिड और अल्कोहल होते हैं। ये ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जिनकी संरचना चक्र जैसी होती है। कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह हार्मोन बनाने और कोशिका झिल्ली को मजबूत रखने में मदद करता है। मिलने के स्रोत के आधार पर स्टेरॉल को इन वर्गों में बांटा गया है:
(a) कोलेस्ट्रॉल: यह जानवरों में पाया जाता है। यह इंसानों और पशुओं के खून, लिवर, एड्रिनल ग्रंथियों, पिट्यूटरी ग्रंथि, दिमाग और नसों में मिलता है। कोलेस्ट्रॉल अंडे के पीले हिस्से, मक्खन, घी, पनीर और मांस में होता है।
(b) एर्गोस्टेरॉल: यह यीस्ट में सबसे ज़्यादा पाया जाता है। यह हमारी त्वचा के नीचे भी होता है और सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से विटामिन 'डी' में बदल जाता है।
In simple words: वसा ऊर्जा का सघन स्रोत है और इसके मुख्य प्रकार साधारण वसा (ग्लिसरॉल और वसीय अम्लों से बनी) तथा यौगिक वसा (अन्य यौगिकों से जुड़ी) होते हैं।
🎯 Exam Tip: वसा के वर्गीकरण में साधारण वसा, यौगिक वसा और व्युत्पन्न वसा (जैसे स्टेरॉल) के बीच अंतर स्पष्ट करें, प्रत्येक के उदाहरणों पर ध्यान दें।
प्रश्न 5. वसा के कार्य समझाइए।
Answer:
वसा के कार्य:
1. ऊर्जा देना: वसा ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। एक ग्राम वसा से 9 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है। यह घनी होती है और कम घुलती है, इसलिए शरीर के वसा ऊतकों में जमा रहती है। जरूरत पड़ने पर यह टूटकर ऊर्जा देती है। वसा शरीर के लिए ऊर्जा का सबसे संकेंद्रित रूप है, जो ठंड से बचाने और कुछ विटामिनों को शरीर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
2. शरीर के नरम अंगों को बचाना: वसा त्वचा के नीचे वसा ऊतकों में जमा होकर एक मोटी परत बनाती है। यह हृदय, लिवर, फेफड़े, गुर्दे और अग्न्याशय जैसे सभी नरम अंगों के ऊपर एक दोहरी परत बनाती है। यह परत एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।
3. शरीर का तापमान बनाए रखना: त्वचा के नीचे की वसा की परत शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है, यह गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है।
4. वसा में घुलनशील विटामिनों का स्रोत: वसा, विटामिन ए, डी, ई और के जैसे वसा में घुलनशील विटामिनों को पाने का एक अच्छा तरीका है। ये विटामिन वसा की मौजूदगी में आसानी से शरीर में सोख लिए जाते हैं।
In simple words: वसा शरीर को ऊर्जा देती है, नाजुक अंगों की रक्षा करती है, शरीर का तापमान बनाए रखती है और वसा में घुलनशील विटामिनों को सोखने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: वसा के कार्यों को सूचीबद्ध करते समय, ऊर्जा प्रदान करने, अंगों की सुरक्षा और ताप नियंत्रण पर विशेष बल दें, क्योंकि ये इसके प्राथमिक कार्य हैं।
प्रश्न 6. भोजन में वसा की अधिकता के क्या प्रभाव होते हैं? समझाइए।
Answer:
भोजन में वसा की अधिकता के प्रभाव:
1. मोटापा बढ़ना: जब हम ज़रूरत से ज़्यादा वसा खाते हैं, तो यह हमारी त्वचा के नीचे जमा हो जाती है, जिससे शरीर का वजन बढ़ जाता है। इसे मोटापा कहते हैं।
2. मधुमेह (डायबिटीज) का खतरा: ज़्यादा वसा और कार्बोहाइड्रेट्स खाने से शरीर में बहुत ज़्यादा ग्लूकोज बनता है। खून में ग्लूकोज एक सीमित मात्रा तक ही रह सकता है। ज़्यादा ग्लूकोज पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है। इसी स्थिति को मधुमेह (डायबिटीज) कहते हैं।
3. दिल से जुड़ी बीमारियाँ: ज़्यादा वसा खाने से खून में कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल खून की नसों की अंदरूनी दीवारों पर जमने लगता है। इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और इसका सीधा असर दिल पर पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। स्वस्थ रहने के लिए वसा का संतुलित सेवन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इसकी अधिकता गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है।
In simple words: ज़्यादा वसा खाने से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि यह शरीर में अतिरिक्त वसा जमा करती है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है।
🎯 Exam Tip: वसा की अधिकता से होने वाले प्रभावों में मोटापा, हृदय रोग और मधुमेह के जोखिम को शामिल करें, क्योंकि ये प्रमुख स्वास्थ्य चिंताएं हैं।
प्रश्न 7. प्रोटीन क्या हैं? इसका रासायनिक संगठन बताइए। आवश्यक एवं अनावश्यक अमीनो अम्लों का विवरण दीजिए।
Answer:
प्रोटीन (Protein): प्रोटीन शब्द ग्रीक भाषा के 'प्रोटियस' से आया है, जिसका मतलब है 'सबसे पहले' या 'सबसे महत्वपूर्ण'। प्रोटीन की खोज 1838 में डच वैज्ञानिक मुल्डर ने की थी। इंसान के शरीर का लगभग 20% वजन प्रोटीन का होता है। प्रोटीन को 'शरीर की आधारशिला' कहा जाता है क्योंकि यह एक बड़ा कार्बनिक अणु है। प्रोटीन हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है, जैसे मांसपेशियों का निर्माण, एंजाइम बनाना और हार्मोन को नियंत्रित करना।
रासायनिक बनावट: प्रोटीन एक कार्बनिक यौगिक है जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे तत्व होते हैं। प्रोटीन का मुख्य हिस्सा नाइट्रोजन होता है, जिसकी मात्रा औसतन 16% होती है। प्रोटीन की सबसे छोटी इकाई अमीनो अम्ल हैं। कई अमीनो अम्ल मिलकर प्रोटीन बनाते हैं। हर अमीनो अम्ल में दो मुख्य समूह होते हैं। अमीनो समूह \((-\text{NH}_2)\) क्षारीय होता है और प्रोटीन को क्षारीय गुण देता है। कार्बोक्सिल समूह \((-\text{COOH})\) अम्लीय होता है। इन दोनों समूहों के कारण अमीनो अम्ल उदासीन होते हैं, यानी न ज़्यादा अम्लीय और न ज़्यादा क्षारीय।
आवश्यक अमीनो अम्ल: ये वे अमीनो अम्ल हैं जो शरीर खुद नहीं बना सकता और जिन्हें भोजन से ही लेना ज़रूरी होता है। इनके बिना शरीर का विकास और वृद्धि रुक जाती है। आवश्यक अमीनो अम्ल शरीर के "बिल्डिंग ब्लॉक्स" होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्य ठीक से चलें। इनकी संख्या 10 है, जो इस प्रकार हैं:
• हिस्टींडीन
• ल्यूसिन
• आइसोल्यूसिन
• लाइसिन
• आर्जीनिन
• मिथियोनीन
• थ्रियोनिन
• फिनाइल-एलानिन
• वैलीन
• ट्रिप्टोफैन
अनावश्यक अमीनो अम्ल: ये वे अमीनो अम्ल हैं जिन्हें शरीर नाइट्रोजन का उपयोग करके खुद ही बना लेता है। इन्हें भोजन से लेने की ज़रूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए एलानिन, हाइड्रोक्सीप्रोलीन, प्रोलीन, एस्पार्टिक अम्ल आदि।
In simple words: प्रोटीन शरीर के निर्माण खंड हैं, जो अमीनो अम्लों से बने होते हैं; आवश्यक अमीनो अम्ल भोजन से मिलते हैं, जबकि अनावश्यक अमीनो अम्ल शरीर खुद बनाता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के रासायनिक संगठन में नाइट्रोजन की उपस्थिति और आवश्यक/अनावश्यक अमीनो अम्लों के अंतर को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 8. प्रोटीन के कार्य का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer:
प्रोटीन के कार्य:
1. शरीर की वृद्धि और विकास में मदद: प्रोटीन शरीर की वृद्धि और विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। नई कोशिकाएं प्रोटीन से ही बनती हैं। कोशिकाओं के काम करने और उनके टूटने-फूटने पर मरम्मत का काम भी प्रोटीन ही करता है। बचपन और किशोरावस्था में प्रोटीन की ज़्यादा ज़रूरत होती है, क्योंकि इन उम्र में शरीर तेज़ी से बढ़ता है।
2. ऊतकों को बनाना और उनकी मरम्मत करना: लगातार काम करने और शारीरिक गतिविधियों के कारण शरीर के ऊतक (टिश्यू) टूटते-फूटते रहते हैं। प्रोटीन ही इनकी मरम्मत और उन्हें फिर से बनाने का काम करता है। आंतों की परत बनाने, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और खून का थक्का जमाने में प्रोटीन एक बड़ी भूमिका निभाता है।
4. हार्मोन और एंजाइम बनाना: हार्मोन शरीर के कई कामों को नियंत्रित करते हैं। कुछ हार्मोन प्रोटीन से बने होते हैं। इसी तरह, कई जैविक क्रियाएं एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होती हैं, और ज़्यादातर एंजाइम भी प्रोटीन से बने होते हैं।
5. मांसपेशियों के संकुचन में मदद: मांसपेशियों को सिकुड़ने और फैलने के लिए मायोसिन और एक्टिन नामक प्रोटीन बहुत ज़रूरी होते हैं।
6. विटामिन बनाने में: कुछ अमीनो अम्ल शरीर में विटामिनों को बनाने वाले शुरुआती पदार्थ (प्रिकर्सर) के रूप में काम करते हैं। जैसे, विटामिन बी समूह के कोलीन के लिए मिथियोनीन और नियासिन के लिए ट्रिप्टोफैन।
7. सामान्य दृष्टि में सहायक: आंखों के रेटिना में शंकु (कोन) और शलाका (रॉड) कोशिकाएं होती हैं। ये प्रोटीन की मदद से खास पदार्थ बनाती हैं जो हमें रंग देखने और कम रोशनी में देखने में मदद करते हैं।
8. ऊर्जा देना: जब कार्बोहाइड्रेट और वसा कम होते हैं, तो प्रोटीन भी ऊर्जा देता है। एक ग्राम प्रोटीन से 4 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है।
9. जल संतुलन: खून के प्लाज्मा में मौजूद प्रोटीन शरीर में पानी के दबाव को बनाए रखते हैं, जिससे शरीर का जल संतुलन ठीक रहता है। प्रोटीन शरीर में एक बहुमुखी पोषक तत्व है, जो न केवल शारीरिक संरचना का आधार है, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
In simple words: प्रोटीन शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण, मांसपेशियों के काम, विटामिन बनाने, आंखों की रोशनी और जल संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के विभिन्न कार्यों को बिंदुवार लिखें, जिसमें शारीरिक विकास, मरम्मत, हार्मोन-एंजाइम निर्माण और जल संतुलन जैसे प्रमुख पहलुओं को शामिल करें।
प्रश्न 9. क्काशियोरकर रोग का कारण तथा इस रोग के लक्षण लिखिए।
Answer:
क्वाशियोरकर (Kwashiorkar): क्वाशियोरकर आमतौर पर 1 से 4 साल के बच्चों में प्रोटीन की कमी से होने वाली बीमारी है। यह उन बच्चों को होता है जिनके खाने में कार्बोहाइड्रेट तो काफी होता है, लेकिन प्रोटीन कम होता है। इस बीमारी का पता 1935 में सिसली विलियम ने लगाया था। क्वाशियोरकर एक अफ्रीकी शब्द है, जिसका मतलब है "वह रोग जो पहले बच्चे को दूसरे बच्चे के जन्म के बाद होता है"। इसका मुख्य कारण है कि माँ का दूध छुड़ाने के बाद बच्चों को सही पूरक आहार नहीं मिल पाता। यह रोग शरीर की वृद्धि और विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है, जिससे बच्चे का स्वास्थ्य कमज़ोर हो जाता है।
रोग के लक्षण:
• प्रोटीन की कमी से हीमोग्लोबिन ठीक से नहीं बन पाता, जिससे शरीर में खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है।
• बच्चों का दिमाग ठीक से विकसित नहीं हो पाता।
• शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है, जिससे बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं। इस रोग से पीड़ित बच्चे अक्सर कमज़ोर और सुस्त दिखते हैं, और उनका पेट भी फूल सकता है।
In simple words: क्वाशियोरकर प्रोटीन की कमी से होने वाला रोग है, जिसमें बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है, और उनमें एनीमिया व कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे लक्षण दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: क्वाशियोरकर के कारण में प्रोटीन की कमी और लक्षणों में शारीरिक व मानसिक विकास का रुकना, एनीमिया व रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी को हाइलाइट करें।
प्रश्न 10. सूखा रोग या मैरेस्मस का कारण एवं रोग के लक्षण लिखिए।
Answer:
सूखा रोग या मैरास्मस (Marasmus): मैरास्मस प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण का एक गंभीर रूप है, जिसमें शरीर ऊर्जा के लिए अपनी ही मांसपेशियों को तोड़ने लगता है। यह रोग आमतौर पर 6 से 12 महीने के शिशुओं में होता है। यह उन बच्चों को होता है जिन्हें जल्दी स्तनपान छुड़ा दिया जाता है और उन्हें सही पोषण नहीं मिलता। यह रोग प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की भारी कमी से होता है। मैरास्मस एक ग्रीक शब्द है जिसका मतलब है 'व्यर्थ होना'।
रोग के लक्षण:
• शरीर की वृद्धि और विकास रुक जाता है, बच्चा छोटा और कमज़ोर रह जाता है, और उसका वजन बहुत कम हो जाता है।
• त्वचा के नीचे वसा जमा नहीं हो पाती, और सूजन भी आ सकती है।
• आंतों में संक्रमण के कारण बार-बार शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है।
• त्वचा रूखी-सूखी, बेजान और चमकहीन दिखती है।
• मांसपेशियां बहुत कमज़ोर हो जाती हैं। हाथ-पैर बहुत पतले और कमज़ोर दिखते हैं।
In simple words: मैरास्मस प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की कमी से होता है, जिससे बच्चे का वजन बहुत कम हो जाता है, शारीरिक विकास रुक जाता है, और त्वचा रूखी व मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: मैरास्मस के कारण में प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की कमी तथा लक्षणों में अत्यधिक शारीरिक क्षय और त्वचा की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रश्न 11. जल सन्तुलन से आप क्या समझते हैं? धनात्मक एवं ऋणात्मक जल सन्तुलन की व्याख्या कीजिए।
Answer:
जल संतुलन (Water balance) का मतलब है कि हमारे शरीर में पानी की एक तय मात्रा बनी रहे। जितना पानी हम पीते हैं, लगभग उतना ही शरीर से बाहर निकलता है। यह एक आदर्श स्थिति है और इसे ही जल संतुलन कहते हैं। जल संतुलन शरीर के हर कोशिका के सामान्य कामकाज और महत्वपूर्ण शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है।
\( \text{जल सन्तुलन} = \text{जल ग्रहण की मात्रा} = \text{जल उत्सर्जन की मात्रा} \)
शरीर में पानी का कम या ज़्यादा होना, दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।
जल संतुलन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. धनात्मक जल संतुलन (Positive water balance): धनात्मक जल संतुलन तब होता है जब शरीर में पानी बाहर निकलने से ज़्यादा इकट्ठा हो जाता है। इससे शरीर में सोडियम बढ़ सकता है, प्रोटीन की कमी हो सकती है, सूजन (ओएडेमा) आ सकती है, और लिवर से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं।
2. ऋणात्मक जल संतुलन (Negative water balance): ऋणात्मक जल संतुलन तब होता है जब शरीर जितना पानी लेता है, उससे ज़्यादा पानी बाहर निकाल देता है। अगर शरीर में 10 प्रतिशत तक पानी ज़्यादा निकल जाए, तो भोजन ठीक से पच नहीं पाता। इस हालत में शरीर का तापमान बढ़ जाता है। खून के प्लाज्मा और कोशिकाओं के बाहर मौजूद तरल पदार्थ की मात्रा कम हो जाती है। अगर शरीर में 15-20 प्रतिशत तक पानी की कमी हो जाए, तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है, क्योंकि इस स्थिति में कोशिकाओं के बाहर का तरल पदार्थ गाढ़ा हो जाता है। इसके कारण कोशिकाओं के अंदर का तरल पदार्थ बाहर की ओर खिंचने लगता है, जिससे कोशिकाओं के अंदर तरल पदार्थ बहुत कम हो जाता है। इस स्थिति को निर्जलीकरण (Dehydration) कहते हैं। उचित जल संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर की ज़रूरतों को समझना ज़रूरी है।
In simple words: जल संतुलन का अर्थ है शरीर में पानी की कुल मात्रा को बनाए रखना। धनात्मक संतुलन में पानी ज़्यादा होता है, जबकि ऋणात्मक संतुलन में पानी की कमी होती है, दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
🎯 Exam Tip: जल संतुलन को परिभाषित करें और धनात्मक व ऋणात्मक संतुलन के बीच अंतर को उनके कारणों और स्वास्थ्य प्रभावों के साथ स्पष्ट करें।
प्रश्न 12. शरीर में जल की कमी के प्रभाव लिखिए।
Answer:
शरीर से लगातार पानी निकलता रहता है, जैसे पेशाब, पसीना और साँस के ज़रिए। इसलिए, यह बहुत ज़रूरी है कि हम रोज़ सही मात्रा में पानी पिएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। पानी जीवन का अमृत है, और इसकी कमी शरीर के हर सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। शरीर में पानी की कमी से ये परेशानियाँ हो सकती हैं:
• पाचन के रस असंतुलित हो जाते हैं, जिससे पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं।
• शरीर से यूरिक एसिड, यूरिया और ज़हरीले पदार्थ ठीक से बाहर नहीं निकल पाते, जिससे शरीर में कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं।
• व्यक्ति बेचैन और चिड़चिड़ा महसूस करने लगता है।
• भूख कम हो जाती है।
• शरीर का वजन कम होने लगता है।
• शारीरिक विकास पर बुरा असर पड़ता है।
• शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
• गुर्दे (किडनी) ठीक से काम नहीं कर पाते।
• खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे खून के बहाव में दिक्कत आती है।
• कभी-कभी शरीर में पानी की बहुत ज़्यादा कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है।
In simple words: शरीर में पानी की कमी से पाचन संबंधी समस्याएं, विषाक्त पदार्थों का जमाव, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, वजन में कमी, विकास में बाधा, शरीर का तापमान बढ़ना, किडनी की समस्या, खून का गाढ़ा होना और निर्जलीकरण हो सकता है।
🎯 Exam Tip: जल की कमी के प्रभावों को सूचीबद्ध करते समय, पाचन, उत्सर्जन, मानसिक स्थिति और शारीरिक कार्यों पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझाएं।
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