RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 5 विष पिया अमृत दिया

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Class 11 Hindi Chapter 5 विष पिया अमृत दिया RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Hindi आलोक Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. डॉ. अंबेडकर ने महाराजा गायकवाड़ की नौकरी क्यों छोड़ी?
(क) अध्ययन हेतु
(ख) माताजी की सेवा हेतु
(ग) पिताजी की सेवा हेतु
(घ) राजनीति में आने हेतु
Answer: (ग) पिताजी की सेवा हेतु
In simple words: डॉ. अंबेडकर ने महाराजा गायकवाड़ की नौकरी इसलिए छोड़ी क्योंकि उन्हें अपने पिता की सेवा करनी थी। यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण पारिवारिक कर्तव्य था।

🎯 Exam Tip: When answering questions about historical figures, always recall the specific reasons for their actions as mentioned in the text.

 

प्रश्न 2. डॉ. अंबेडकर के लिए सबसे पहले क्या था?
(क) जाति
(ख) स्वयं
(ग) देश
Answer: (ग) देश
In simple words: डॉ. अंबेडकर के लिए हमेशा देश सबसे ऊपर था। वे देश के हित को अपनी जाति या व्यक्तिगत हितों से पहले रखते थे।

🎯 Exam Tip: Focus on the core values and priorities of the personality discussed in the chapter for such questions.

 

प्रश्न 3. बालक भीम को अंबेडकर उपनाम किससे मिला?
(क) पिताजी से
(ख) माताजी से
(ग) शिक्षक से
(घ) महाराजा गायकवाड़ से
Answer: (ग) शिक्षक से
In simple words: भीमराव को 'अंबेडकर' नाम उनके शिक्षक ने दिया था। यह नाम उनके गाँव के नाम 'अंबावडे' से लिया गया था और उनके शिक्षक ने इसे अपना उपनाम देकर उन्हें सम्मान दिया।

🎯 Exam Tip: Remember specific details like how names or titles were bestowed upon important historical figures.

 

प्रश्न 4. डॉ. अंबेडकर के पिताजी का नाम था –
(क) रामजी सकपाल
(ख) सकजी रामपाल
(ग) पालजी सकराम
(घ) रावजी भीमपाल
Answer: (क) रामजी सकपाल
In simple words: डॉ. अंबेडकर के पिता का नाम रामजी सकपाल था। वे भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे।

🎯 Exam Tip: Factual questions about names or dates require precise recall from the text.

 

प्रश्न 5. बालक भीम को विद्यालय में प्रवेश किस शर्त पर मिला?
Answer: बालक भीम महार जाति से संबंध रखते थे, जिसके कारण उन्हें विद्यालय में प्रवेश पाने के लिए एक विशेष शर्त माननी पड़ी। उन्हें अन्य विद्यार्थियों के साथ नहीं, बल्कि छात्रों और शिक्षकों के जूतों के पास बैठकर पढ़ना होता था। यह उस समय की सामाजिक असमानता को दर्शाता है और उनके बचपन की कठिनाइयों को उजागर करता है।
In simple words: भीम को स्कूल में पढ़ने की एक शर्त माननी पड़ी। वह शर्त थी कि उसे दूसरे बच्चों से दूर, जूतों के पास बैठकर पढ़ना होगा क्योंकि वह निचली जाति का था।

🎯 Exam Tip: When describing historical discrimination, clearly state the discriminatory practice and its impact.

 

प्रश्न 6. डॉ. अंबेडकर को मजबूती किसने प्रदान की?
Answer: डॉ. अंबेडकर का जीवन आसान नहीं था। उन्हें कई बार अपमान सहना पड़ा, लेकिन उन्हें सम्मान के कुछ पल भी मिले। इन सभी विपरीत अनुभवों को सहते और समझते हुए ही उनका व्यक्तित्व मजबूत होता गया। इस प्रकार, उन्हें ये ताकत उस समय की कठिन परिस्थितियों से मिली थी। ये अनुभव उनके दृढ़ व्यक्तित्व को बनाने में सहायक सिद्ध हुए।
In simple words: डॉ. अंबेडकर को जीवन में मिली कठिनाइयों और अपमान ने मजबूत बनाया। उन्होंने इन मुश्किलों से सीखकर खुद को और दृढ़ किया।

🎯 Exam Tip: For questions about personal growth, link the challenges faced to the development of character and strength.

 

प्रश्न 7. लेखक के अनुसार डॉ. अंबेडकर के बड़े आदमी होने का क्या कारण था?
Answer: लेखक के अनुसार डॉ. अंबेडकर निश्चित रूप से एक महान व्यक्ति थे। उनके महान बनने का कारण उनका संघर्षपूर्ण जीवन था। उन्होंने समाज की गंदगी और अन्याय के खिलाफ जीवन भर लड़ाई लड़ी। वे हमेशा चाहते थे कि समाज से अन्याय खत्म हो और न्याय-व्यवस्था में राष्ट्रीय स्तर पर सबकी एक राय हो। उनका जीवन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
In simple words: लेखक का मानना है कि डॉ. अंबेडकर अपने संघर्ष और समाज के लिए किए गए न्यायपूर्ण कार्यों के कारण बड़े आदमी बने। उन्होंने अन्याय के खिलाफ बहुत लड़ाई लड़ी।

🎯 Exam Tip: Highlight the key struggles and contributions of Dr. Ambedkar when discussing his greatness according to the author.

 

प्रश्न 9. समाज को डॉ. अंबेडकर का पहला उत्तर क्या था? पाठ के आधार पर बताइए।
Answer: बालक भीम को स्कूल में केवल तभी दाखिला मिल सकता था जब वह छात्रों और शिक्षकों के जूतों के पास बैठ कर पढ़े। बालक भीम ने अपनी माँ से कहा कि वह इस शर्त पर भी दाखिला ले लेगा। यह घटना बच्चों में भेद-भाव करने वाले तथाकथित बड़े लोगों के लिए डॉ. अंबेडकर का पहला जवाब था। उन्होंने परिस्थितियों को स्वीकार करके भी अन्याय के खिलाफ एक मौन विरोध किया।
In simple words: डॉ. अंबेडकर का पहला जवाब यह था कि उन्होंने स्कूल में जूतों के पास बैठकर पढ़ने की शर्त मान ली। यह उन लोगों को जवाब था जो बच्चों में जाति के आधार पर भेद करते थे।

🎯 Exam Tip: Focus on how Dr. Ambedkar's actions, even as a child, represented a powerful statement against social injustice.

 

प्रश्न 10. किस घटना ने बालक भीम के मन में उथल-पुथल मचा दी?
Answer: बालक भीम महार जाति के थे, इसलिए उन्हें समाज के दूसरे बच्चों के साथ खेलने नहीं दिया जाता था। इस भयानक सामाजिक व्यवस्था से उनके बाल मन को बहुत ठेस पहुँची। बंधनों में बँधे अपने बचपन में उन्हें यह बेचैनी महसूस हुई और उनके मन में यह सवाल उठा कि क्या बच्चों में भी भेद-भाव होता है? जीवन के इस पहले अनुभव और सवाल ने ही बालक भीम के मन में बहुत उथल-पुथल मचा दी। यह घटना उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
In simple words: बालक भीम को अपनी जाति के कारण दूसरे बच्चों के साथ खेलने नहीं दिया जाता था। इस भेद-भाव ने उनके मन में सवाल उठाए और उन्हें बहुत परेशान किया, कि क्या बच्चों में भी अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: Focus on the emotional impact of discrimination on Dr. Ambedkar's young mind and how it shaped his future resolve.

 

प्रश्न 11. माँ भीमाबाई ने बालक भीम को क्या-क्या शिक्षा दी? विस्तार से समझाइए।
Answer: माँ भीमाबाई बहुत समझदार महिला थीं और समाज की स्थिति को अच्छी तरह जानती थीं। उन्होंने अपने छोटे बेटे भीम में बहुत क्षमता देखी थी। वे उसे पढ़ाते हुए कहती थीं कि समाज में उसे बहुत अपमान और नफरत झेलनी पड़ेगी, लेकिन उसे इनकी परवाह नहीं करनी चाहिए। उन्हें बहुत पढ़ाई करके एक बड़ा आदमी बनना है, क्योंकि बिना पढ़े कोई महान नहीं बन सकता। माँ की इच्छा थी कि जब भीम बड़ा आदमी बन जाए, तो वह समाज से ऊँच-नीच, छुआछूत और अन्याय जैसी बुरी प्रथाओं को बदल दे। यह शिक्षा उनके जीवन का मार्गदर्शक बनी।
In simple words: माँ भीमाबाई ने भीम को सिखाया कि उसे पढ़ाई करके बड़ा आदमी बनना है। उन्होंने कहा कि उसे अपमान सहना पड़ेगा, लेकिन उसे परवाह नहीं करनी चाहिए। उनका सपना था कि भीम समाज की बुराइयों को खत्म करे।

🎯 Exam Tip: When explaining the mother's teachings, emphasize the dual focus on personal achievement (education) and social responsibility (ending discrimination).

 

प्रश्न 12. उच्च पद की नौकरी करने के बाद भी डॉ. अंबेडकर को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ा?
Answer: 1917 ई. में कोलंबिया विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करके लौटने के बाद, महाराजा गायकवाड़ ने डॉ. अंबेडकर को सैन्य सचिव का एक महत्वपूर्ण पद दिया। लेकिन उस समय का समाज जातिगत भेद-भाव में जकड़ा हुआ था। ऊँची जाति के विभागीय अधिकारी उन्हें लेने रेलवे स्टेशन तक नहीं गए। यहाँ तक कि ऊँची जाति के चपरासी भी उन्हें फाइलें सीधे हाथ में देने के बजाय दूर से ही फेंक देते थे। पानी माँगने पर भी उन्हें पानी नहीं दिया जाता था, और वे घड़े को छू भी नहीं सकते थे, जिससे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस प्रकार, एक उच्च पद पर होने के बावजूद उन्हें लगातार अपमान झेलना पड़ा।
In simple words: उच्च पद पर होने के बाद भी, डॉ. अंबेडकर को जातिगत भेद-भाव का सामना करना पड़ा। अधिकारी उनसे सीधे बात नहीं करते थे, चपरासी फाइलें फेंकते थे, और उन्हें पानी छूने नहीं दिया जाता था।

🎯 Exam Tip: List the specific instances of discrimination faced by Dr. Ambedkar even after achieving a high position to illustrate the depth of social prejudice.

 

प्रश्न 14. लेखक के अनुसार डॉ. अंबेडकर ने अपने आचरण एवं व्यवहार से समाज को क्या-क्या उत्तर दिए ? समझाइए।
Answer: लेखक के अनुसार, डॉ. अंबेडकर एक महान व्यक्ति थे। उनका व्यक्तित्व बहुत विशाल था, क्योंकि उन्हें लगातार अपमान सहना पड़ा, फिर भी उनके मन में किसी के प्रति नफरत पैदा नहीं हुई। जब उनके पिता की मृत्यु होने वाली थी और उन्हें छुट्टी नहीं मिली, तो भी उन्होंने महाराज से छुट्टी के लिए प्रार्थना नहीं की। उन्होंने अपने मान-अपमान की परवाह न करते हुए, अनुशासन और भारतीय संस्कारों का पालन करते हुए अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। सैन्य सचिव जैसे ऊँचे पद पर होते हुए भी, उनके अधीनस्थों और मकान मालिक के बुरे व्यवहार से उन्हें दुख होता था, लेकिन वे उन्हें माफ कर देते थे। इस तरह, डॉ. अंबेडकर ने अपने व्यवहार से समाज के सबसे कठिन सवालों का सीधा और सही जवाब दिया। यह दिखाता है कि वे कितने उदार हृदय थे।
In simple words: डॉ. अंबेडकर ने अपमान सहने के बाद भी किसी से नफरत नहीं की। उन्होंने नौकरी छोड़ दी जब उन्हें पिता की सेवा के लिए छुट्टी नहीं मिली। उन्होंने हमेशा दूसरों को माफ किया, जिससे समाज को दिखाया कि कैसे मुश्किल सवालों के जवाब देने हैं।

🎯 Exam Tip: Emphasize Dr. Ambedkar's compassion, resilience, and commitment to principles despite facing severe discrimination, as these are the "answers" he gave to society.

पाठ के आसपास

 

प्रश्न 1. परस्पर समानता एवं समरसता की आवश्यकता एवं उपादेयता पर अपने शिक्षक के निर्देशन में समूह चर्चा कीजिए।
Answer: एक अच्छे समाज के लिए समानता और एकजुटता बहुत जरूरी है। इनसे समाज मजबूत और खुशहाल बनता है, और सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा होती है। मानवीय मूल्यों और भाईचारे के नजरिए से भी समानता और एकजुटता का महत्व खुद-ब-खुद साफ हो जाता है। छात्रों को इस विषय पर अपने शिक्षक के मार्गदर्शन में और गहराई से चर्चा करनी चाहिए। यह छात्रों को समाज में जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करेगा।
In simple words: एक अच्छे समाज के लिए समानता और मिलकर रहना बहुत जरूरी है। इससे समाज मजबूत होता है और सबके अधिकार सुरक्षित रहते हैं। छात्र इस पर अपने शिक्षक के साथ और बात कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: For discussion-based questions, outline the main points, such as why equality and harmony are essential for a strong society, and mention the role of human rights.

RBSE Class 11 Hindi आलोक Chapter 5 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Hindi आलोक Chapter 5 लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. डॉ. अंबेडकर की दृढ़ता का विलक्षण पक्ष क्या है ?
Answer: डॉ. अंबेडकर की दृढ़ता का एक खास पहलू यह था कि उन्हें समाज की बुराइयों पर बहुत गुस्सा आता था। जब वे समाज की खराब स्थिति को देखते थे, तो मन ही मन बड़बड़ाते थे। लेकिन जब बात देश और समाज की एकता पर आती थी, तो वे एक महान नेता की तरह व्यवहार करते थे। उन्होंने हमेशा अनुभवी बुजुर्गों की तरह काम किया। यह उनकी दृढ़ता का विलक्षण पहलू था, जो उन्हें अद्वितीय बनाता है।
In simple words: डॉ. अंबेडकर समाज की बुराइयों पर गुस्सा करते थे, लेकिन जब देश की एकता की बात आती थी, तो वे एक समझदार नेता की तरह सोचते थे और काम करते थे।

🎯 Exam Tip: When discussing Dr. Ambedkar's resilience, highlight his ability to channel his anger towards constructive societal change and unity.

 

प्रश्न 3. बालक भीम के जीवन की कौन-सी घटना सबके जीवन में नहीं घटती ?
Answer: लेखक के अनुसार, बालक भीम का डॉ. अंबेडकर और फिर बाबासाहब जैसे राष्ट्ररक्षक के रूप में बदलना एक ऐसी घटना है जो हर किसी के जीवन में नहीं होती। लेखक कहते हैं कि अगर ऐसी घटना किसी के साथ घटती भी है, तो उतनी पीड़ा सहना सबके बस की बात नहीं है। यह उनकी असाधारण यात्रा को दर्शाता है।
In simple words: लेखक के हिसाब से, बालक भीम का डॉ. अंबेडकर और फिर बाबासाहब बनना कोई आम बात नहीं है। इतनी तकलीफ सहकर महान बनना हर किसी के लिए संभव नहीं है।

🎯 Exam Tip: Focus on the unique and extraordinary transformation of Dr. Ambedkar from a child to a national leader, emphasizing the immense suffering he endured.

 

प्रश्न 4. बालक भीम के जीवन का पहला झटका या पहला सवाल क्या था?
Answer: बालक भीम को अपनी जाति के कारण समाज के दूसरे बच्चों के साथ खेलने की मनाही थी। इस घटना से उन्हें बहुत हैरानी हुई, क्योंकि बच्चे तो सब एक जैसे होते हैं। उनके मन में यह सवाल उठा कि फिर उनमें अंतर क्यों किया जाता है? यही प्रश्न उनके जीवन का पहला बड़ा झटका था, और छोटी उम्र में ही वह इसका जवाब जानना चाहते थे। यह घटना उनके बाल मन पर गहरा प्रभाव डालती है।
In simple words: जाति के कारण भीम को दूसरे बच्चों के साथ खेलने नहीं दिया जाता था। यह उनके लिए पहला बड़ा झटका था और उनके मन में सवाल उठा कि बच्चों में अंतर क्यों होता है।

🎯 Exam Tip: Emphasize the innocence of a child questioning discrimination and how this early experience shaped Dr. Ambedkar's resolve.

 

प्रश्न 5. बालक भीम की माँ का सपना था ?
Answer: बालक भीम की माँ का सपना था कि उनका बेटा खूब पढ़े-लिखे। वह मानती थीं कि बिना शिक्षा के कोई भी महान व्यक्ति नहीं बन सकता। उनकी दिली इच्छा थी कि जब उनका बेटा पढ़-लिखकर एक बड़ा आदमी बन जाए, तो वह समाज में फैली ऊँच-नीच, जाति-भेद और छुआछूत जैसी खराब परम्पराओं को खत्म कर दे। यह उनके बेटे के प्रति उनकी गहरी उम्मीद थी।
In simple words: भीम की माँ चाहती थीं कि वह खूब पढ़े और एक बड़ा आदमी बने। उनका सपना था कि भीम पढ़कर समाज में फैली जातिगत भेद-भाव और छुआछूत को खत्म करे।

🎯 Exam Tip: When discussing a character's dreams, clearly state the dream itself and the motivation or desired outcome associated with it.

 

प्रश्न 6. बालक भीम के लिए सबसे पहले शिक्षा मंदिर के द्वार किसने खोले और किस प्रकार ?
Answer: उस समय के भारतीय समाज में जातिगत भेद-भाव बहुत था। इसलिए, निचली जाति के बच्चे ऊँची जाति के बच्चों के साथ स्कूल में नहीं पढ़ पाते थे। लेकिन, एक प्राथमिक विद्यालय के ब्राह्मण मुख्य अध्यापक ने बालक भीम की खास प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने अपना उपनाम 'अंबेडकर' भीम को देकर सबसे पहले उसके लिए शिक्षा के दरवाजे खोले। इस तरह, उन्होंने जातिगत बाधाओं को तोड़कर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।
In simple words: एक ब्राह्मण मुख्य अध्यापक ने बालक भीम की प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने अपना उपनाम 'अंबेडकर' देकर भीम के लिए सबसे पहले स्कूल के दरवाजे खोले, क्योंकि उस समय जातिगत भेद-भाव बहुत था।

🎯 Exam Tip: Identify the specific individual who helped Dr. Ambedkar and explain how their actions challenged the prevailing social norms to highlight a positive aspect amid discrimination.

 

प्रश्न 8. लेखक के अनुसार डॉ. अंबेडकर के जीवन का ध्येय क्या था ?
Answer: लेखक के अनुसार, डॉ. अंबेडकर का मुख्य लक्ष्य था कि न्याय व्यवस्था में पूरे देश में एक राय हो। भले ही उन्होंने अपने जीवन में बहुत कष्ट सहे, फिर भी वे समाज से अन्याय को खत्म करने के लिए सबकी सहमति से लगातार कोशिश करते रहे। इसके लिए लगातार संघर्ष करते रहना ही उनके जीवन का उद्देश्य था। वे समाज में एकता और न्याय स्थापित करना चाहते थे।
In simple words: लेखक के मुताबिक, डॉ. अंबेडकर का मकसद था कि न्याय व्यवस्था में सबकी एक राय हो। वे अन्याय खत्म करने के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे और सबकी सहमति चाहते थे।

🎯 Exam Tip: Clearly state Dr. Ambedkar's primary life goal (ध्येय) as described by the author, emphasizing his dedication to justice and national consensus.

 

प्रश्न 9. कुछ लोग डॉ. अंबेडकर को किस रूप में प्रस्तुत करते हैं ?
Answer: कुछ लोग डॉ. अंबेडकर के जीवन को ऐसे दर्शाते हैं जैसे उन्होंने केवल सीमित लोगों के लिए या कुछ खास वर्गों के हितों के लिए ही काम किया हो। लेखक के अनुसार, ऐसे प्रयास बहुत ही गलत हैं, क्योंकि यह एक महान व्यक्ति को छोटा साबित करने की कोशिश है। डॉ. अंबेडकर ने हमेशा पूरे समाज के लिए काम किया, न कि केवल एक हिस्से के लिए।
In simple words: कुछ लोग डॉ. अंबेडकर को सिर्फ एक छोटे समूह का नेता बताते हैं। लेखक इसे गलत मानते हैं क्योंकि यह एक महान इंसान को कम आंकने जैसा है।

🎯 Exam Tip: When addressing interpretations, clearly state the differing viewpoints and the author's stance on them, explaining why one view is considered incorrect.

 

प्रश्न 10. लेखक के अनुसार डॉ. अंबेडकर के जीवन में समझने वाली बात क्या है ?
Answer: लेखक के अनुसार, डॉ. अंबेडकर के जीवन में कई सामाजिक संघर्ष और उलझनें थीं, लेकिन उन्होंने कभी कुछ छिपाया नहीं। यदि उन्हें उस समय के भारतीय समाज की बुराइयों को खत्म करने वाली एक तेज तलवार कहा जाए, तो उन्हें समाज की सामूहिक शक्ति की रक्षा करने वाली ढाल भी कहा जा सकता है। यह उनकी दोहरी भूमिका को दर्शाता है: बुराई को मिटाना और समाज की रक्षा करना।
In simple words: लेखक कहते हैं कि डॉ. अंबेडकर के जीवन में बहुत संघर्ष थे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं छिपाया। वे समाज की बुराइयों को खत्म करने वाली तलवार और समाज की शक्ति बचाने वाली ढाल दोनों थे।

🎯 Exam Tip: Use metaphors from the text, like "sharp sword" and "shield," to describe Dr. Ambedkar's multifaceted role in addressing societal issues.

RBSE Class 11 Hindi आलोक Chapter 5 निबंधात्मक प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. डॉ. अंबेडकर एक तपस्वी थे, सिद्ध कीजिए।
Answer: डॉ. अंबेडकर को सही मायने में एक तपस्वी कहा जा सकता है। भारतीय संस्कृति में तपस्या का बहुत महत्व है, जिससे व्यक्ति को शक्ति मिलती है। डॉ. अंबेडकर के जीवन का रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने अपनी कठिन यात्रा में बहुत सारी मुश्किलों और अपमान को झेलते हुए उन्हें पार किया। उन्होंने समाज की भौगोलिक और सामाजिक एकता को बहुत जरूरी माना और समाज के भले के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। यह सब किसी तपस्या से कम नहीं था। उनके त्याग और समर्पण से ही समाज को नई दिशा मिली।
In simple words: डॉ. अंबेडकर को तपस्वी कह सकते हैं क्योंकि उनका जीवन बहुत मुश्किलों भरा था। उन्होंने अपमान सहे, फिर भी समाज की भलाई और एकता के लिए खुद को समर्पित कर दिया, जो एक बड़ी तपस्या थी।

🎯 Exam Tip: To prove Dr. Ambedkar was a 'tapasvi', highlight his immense personal sacrifices, his unwavering dedication to social good, and his endurance through hardship, linking these to the concept of penance.

 

प्रश्न 3. सामाजिक निष्ठुरता के प्रति डॉ. अंबेडकर का तीसरा उत्तर क्या था ?
Answer: बालक भीम की माँ ने अपने बेटे को पढ़ा-लिखाकर एक महान व्यक्ति बनाने का सपना देखा था, लेकिन वह अपना सपना पूरा नहीं देख पाईं। जब वह बीमार हुईं, तो कोई ऊँची जाति का वैद्य उनके घर इलाज करने नहीं आया और उनकी मृत्यु हो गई। इस सामाजिक क्रूरता को देखकर बालक भीम बहुत दुखी हुए, उनकी आँखें सूख गईं और उन्हें भूख लगनी बंद हो गई। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और यह फैसला लिया कि वे निचली और ऊँची जाति के अन्यायपूर्ण भेद-भाव में उलझे समाज को जरूर जवाब देंगे। उन्होंने यह माना कि यह सामाजिक बीमारी उनकी माँ की बीमारी से भी बड़ी है और वे इसका इलाज करेंगे। डॉ. अंबेडकर का यह मौन संकल्प ही सामाजिक क्रूरता के प्रति उनका तीसरा जवाब था। यह उनके दृढ़ निश्चय को दर्शाता है।
In simple words: भीम की माँ की मृत्यु हो गई क्योंकि कोई ऊँची जाति का वैद्य उनका इलाज करने नहीं आया। यह सामाजिक क्रूरता देखकर भीम ने निश्चय किया कि वे समाज की इस बीमारी का इलाज करेंगे। यह उनका तीसरा जवाब था।

🎯 Exam Tip: Focus on Dr. Ambedkar's personal tragedy and how it fueled his resolve to fight against social injustice, highlighting his silent vow as a powerful response.

 

प्रश्न 4. लेखक की दृष्टि में डॉ. अंबेडकर को केवल तत्कालीन तथाकथित वर्ग का क्रांतिकारी नेता सिद्ध करना उनके साथ सरासर अन्याय है। कैसे ?
Answer: लेखक के अनुसार, डॉ. अंबेडकर को केवल एक खास वर्ग का क्रांतिकारी नेता बताना बिल्कुल गलत और अन्यायपूर्ण है। डॉ. अंबेडकर को सामाजिक असमानताओं का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने समाज की एकजुट शक्ति को पहचाना और देश के हित में सबको एक होने का आह्वान किया। उनके लिए देश सबसे पहले था। वे चाहते थे कि भारत में जाति, धर्म, वर्ग या पंथ के बजाय एकता की भावना हो। देश की आजादी के लिए सभी छोटी-बड़ी जातियों को मिलकर काम करना चाहिए था। उन्होंने 1949 के अपने भाषण में कहा था-"देश को समुदाय से ऊपर रखना चाहिए। सामाजिक कड़वाहट पूरे देश और समाज को नुकसान पहुँचाती है।" यह उनके राष्ट्र प्रेम को दर्शाता है।
In simple words: लेखक कहते हैं कि डॉ. अंबेडकर को सिर्फ एक वर्ग का नेता कहना गलत है। उन्होंने देश को सबसे ऊपर रखा और समाज को एकजुट होने के लिए कहा, क्योंकि सामाजिक भेद-भाव देश को कमजोर करता है।

🎯 Exam Tip: When analyzing the author's perspective, use direct quotes or paraphrased statements from Dr. Ambedkar's speeches to support the argument that he was a national leader, not just a sectarian one.

विष पिया, अमृत दिया

पाठ-सारांश

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन आम लोगों जैसा आसान और सीधा नहीं था। उनके महान व्यक्तित्व की दृढ़ता लगातार अपमानों और कठिन अनुभवों को सहते-समझते हुए बढ़ी। यह मजबूती उन्हें उस समय की परिस्थितियों के कारण मिली थी। उन्हें समाज में फैली बुराइयाँ और गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं थी। वे देश और समाज को एक मजबूत और अखंड रूप में देखना चाहते थे। वे एक समान समाज और मजबूत राष्ट्र के समर्थक थे।

बालक भीम की माँ का सपना था कि उनका बेटा पढ़कर एक महान व्यक्ति बने। लेकिन एक बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई, क्योंकि निचली जाति के होने के कारण कोई अच्छा वैद्य उनके घर इलाज के लिए तैयार नहीं हुआ। बालक भीम ने तब अपने मन में ठान लिया कि वह समाज में फैली निचली और ऊँची जाति के अन्यायपूर्ण विचारों को जरूर खत्म करेगा।

डॉ. अंबेडकर एक महामानव थे। वे विभिन्न मुश्किलों को पार करके महान बने। उन्हें हर कदम पर अपमान सहना पड़ा, फिर भी उनके मन में किसी के प्रति नफरत पैदा नहीं हुई। वे हमेशा अच्छे विचारों वाले थे।

प्राथमिक विद्यालय के ब्राह्मण मुख्य अध्यापक ने अंबेडकर की प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने ही सबसे पहले भीम के लिए शिक्षा के दरवाजे खोले और प्यार से अपना ब्राह्मण उपनाम 'अंबेडकर' दिया। बड़ौदा नरेश महाराज गायकवाड़ ने अंबेडकर को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी और बाद में उन्हें लेफ्टिनेंट का पद मिला। उन्होंने मान-अपमान में उलझने के बजाय अनुशासन और भारतीय संस्कारों को अपनाया। उनकी सोच थी कि देश को जाति, वर्ग और पंथों में बँटे बिना एकजुट रहना चाहिए। डॉ. अंबेडकर ने 1949 ई. के अंत में एक भाषण में कहा था-"देश को समुदाय से ऊपर रखना चाहिए। सामाजिक कड़वाहट पूरे देश और समाज को नुकसान पहुँचाती है।"

1917 में, डॉ. अंबेडकर कोलंबिया विश्वविद्यालय से पढ़कर लौटे। महाराज गायकवाड़ ने उन्हें सैन्य सचिव का ऊँचा पद दिया। जातिगत श्रेष्ठता के झूठे बंधनों के कारण, ऊँची जाति के उनके अधीनस्थ चपरासी फाइलें सीधे हाथ में देने के बजाय दूर से फेंक देते थे। नवंबर 1918 में, अंबेडकर बंबई (अब मुंबई) के सिडनहम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में राजनीति और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बनकर आए, तो वहाँ भी उन्हें अपमान सहना पड़ा। उन्हें हर जगह अपमान का घूंट पीना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने मन में किसी के लिए नफरत नहीं पाली।

25 नवंबर, 1949 को दिया गया डॉ. अंबेडकर का एक भाषण सांस्कृतिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उस भाषण में उन्होंने देश के सांस्कृतिक इतिहास और उस पर हुए हमलों का पूरा विवरण देश के सामने रखा था। डॉ. अंबेडकर बहुत जुझारू थे, वे किसी से दबते नहीं थे। उन्होंने 'अखिल भारतीय शेड्यूल कास्ट फेडरेशन' की स्थापना की थी। उनका मानना था कि छुआछूत और अन्याय के खिलाफ लड़ाई देश के अंदर की लड़ाई है, और इसे बाकी हिंदू समाज से अलग करके नहीं लड़ा जा सकता। दलितों को हाशिए पर रखकर इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। कामगार मैदान सभा में उन्होंने साफ कहा था कि दलित वर्ग, चाहे इच्छा से हो या अनिच्छा से, हिंदू समाज का ही हिस्सा है। उनकी इच्छा थी कि न्याय व्यवस्था में राष्ट्रीय स्तर पर सबकी एक राय बने।

डॉ. अंबेडकर के जीवन में कई सामाजिक संघर्ष और उलझनें थीं, लेकिन उनमें कोई छिपाव नहीं था। यदि उन्हें उस समय के भारतीय समाज की बुराइयों को खत्म करने वाली एक तेज तलवार कहा जाए, तो वे इस समाज की सामूहिक शक्ति को बचाने वाली ढाल भी थे। डॉ. अंबेडकर का जीवन आसान नहीं था, बल्कि यह विपरीत परिस्थितियों के काँटों और अपमान की आग पर चलकर तय की गई एक बहुत ही कठिन यात्रा थी।

कठिन शब्दार्थ

रिवाज। संकल्प = दृढ़ निश्चय, विचार, प्रतिज्ञा। दहलीज = देहली, दरवाजे के चौखट के नीचे की लकड़ी। दिल बैठने लगना (मुहा.) = बेहोश होना, व्याकुल होना। निष्प्राण = प्राणरहित। जिजीविषा = जीने की चाह (इच्छा)। कुलीन = उच्च कुल का, अभिजात। मूक = गूँगा, चुप। निष्ठुरता = कठोरता, निर्दयता। सदाशयता = सज्जनता, उच्च विचारों वाला।

पृष्ठ-34. मेधा = बुद्धि। मेधावी = बुद्धिमान। ओहदा = पद। गुहार लगाना (मुहा.) = रक्षा के लिए पुकारना, दुहाई देना। जूझना = उठा-पटक और हाथापाई करना, तकरार करना। हितैषी = शुभ चिन्तक, भला चाहने वाला। सवर्ण = समान जाति का। सर्व = सब, समस्त, सारा। समावेशी = समावेश (साथ रहने) संबंधी। संकीर्ण = सँकरा, तंग, तुच्छ, नीच। दायरा = सीमा, कार्यक्षेत्र। अमलदार = अधिकारी, सेवाकर्मी। मातहत = अधीन, अधीन रहने वाला कर्मचारी। तुच्छ = नीच, हीन, छुद्र। हलाहल = जहर, विष।

पृष्ठ-35. दस्तावेज = विधिक (कानून संबंधी) लेख्य। आहत = घायल, जख्मी, दुखी। कुंठित = कुंद, भोथरा, जड़, गतिहीन। कटुतम = सबसे अधिक कड्आ या अप्रिय, सबसे अधिक कष्टादायक। सटीक = सही। अस्पृश्यता = छुआछूत, अछूतापन। हाशिया = किनारा। मतैक्य = विभिन्न मतों में एकता। ध्येय = उद्देश्य, लक्ष्य। यकीनन = नि-संदेह, निश्चित रूप से। चिंदियों = कागज के छोटे-छोटे टुकड़े। स्पंदन = कंपन, गति, धड़कन। दुराव = छिपाव।

पृष्ठ-36. सुगम = आसान। दुर्गम = कठिन। सर्वोपरि = सबसे ऊपर या बढ़कर। जीवन होम करना (मुहा.) = जीवन को न्योछावर करना।

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RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 5 विष पिया अमृत दिया

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