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Detailed Chapter 5 मैथिलीशरण गुप्त RBSE Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 5 मैथिलीशरण गुप्त RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. मैथिलीशरण गुप्त को जिस नाम से जाना जाता है, वह है -
(क) महाकवि
(ख) राष्ट्रकवि
(ग) राजकवि
(घ) ओजकवि
Answer: (ख) राष्ट्रकवि
In simple words: मैथिलीशरण गुप्त को 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है, जिसका अर्थ है देश का कवि।
🎯 Exam Tip: कवियों के उपनाम या विशेष उपाधियाँ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Question 2. गुप्तजी की अक्षय कीर्ति का आधार स्तम्भ है -
(क) रेणुका
Answer: (घ) साकेत
In simple words: गुप्तजी की सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण रचना 'साकेत' है, जिससे उन्हें बहुत ख्याति मिली।
🎯 Exam Tip: लेखक की प्रमुख कृतियों और उनके योगदान को जानना साहित्यिक महत्व को समझने में मदद करता है।
Question 3. खड़ी बोली हिन्दी के उन्नायक कवि के रूप में जो प्रतिष्ठित हैं -
(क) सुमित्रानन्दन पंत
(ख) हरिवंश राय बच्चन
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) धर्मवीर भारती
Answer: (ग) मैथिलीशरण गुप्त
In simple words: मैथिलीशरण गुप्त उन कवियों में से एक थे जिन्होंने खड़ी बोली हिन्दी को आगे बढ़ाने में मदद की।
🎯 Exam Tip: खड़ी बोली के विकास में योगदान देने वाले प्रमुख कवियों के नाम याद रखें।
Question 4. गुप्तजी द्वारा रचित महाकाव्य है -
(क) नहुष
(ख) किसान
(ग) जयद्रथ वध
(घ) साकेत
Answer: (घ) साकेत
In simple words: 'साकेत' गुप्तजी का लिखा हुआ एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण काव्य है।
🎯 Exam Tip: महाकाव्य एक लंबी कविता होती है जो किसी महान नायक या ऐतिहासिक घटना पर आधारित होती है।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कवि मानस-भवन में किसकी आरती उतारने की बात कह रहा है?
Answer: कवि मानस-भवन में वाणी की देवी सरस्वती की आरती उतारने की बात कह रहा है। वह अपनी रचना के माध्यम से उनकी पूजा करना चाहता है।
In simple words: कवि अपने मन में वाणी की देवी सरस्वती की आरती उतारने की बात कर रहा है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में कवि द्वारा वर्णित प्रतीकात्मक स्थानों और व्यक्तियों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 2. चाहे लक्ष्मी चली जाए, लेकिन भारत जन को किसका साथ नहीं छोड़ने के लिए कहा गया है?
Answer: चाहे धन-दौलत या सब कुछ चला जाए, लेकिन भारत के लोगों को सच्चाई और अपने वचनों को निभाने का साथ नहीं छोड़ने के लिए कहा गया है।
In simple words: भारत के लोगों को सच्चाई और वचन निभाने का साथ नहीं छोड़ना चाहिए, भले ही लक्ष्मी चली जाए।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर ध्यान दें, जो पाठ में बताए गए हैं।
Question 3. 'आदर्शों के नाम पर केवल गीत रह गये हैं' - पंक्ति में कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
Answer: कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि राजा शिबि ने शरणागत कबूतर की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस काटकर बाज को खाने को दिया था। यह एक आदर्श कार्य था। यह पंक्ति दिखाती है कि अब ऐसे महान आदर्श केवल कहानियों और गीतों में ही बचे हैं।
In simple words: कवि ने कहा कि अब आदर्श काम सिर्फ कहानियों में रह गए हैं, जैसे राजा शिबि ने कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस दिया था।
🎯 Exam Tip: कवि के कथन के पीछे के ऐतिहासिक या पौराणिक संदर्भ को समझें ताकि आप सही उत्तर दे सकें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. 'वाल्मीकि-वेदव्यास-से गुण-गान-गायक थे यहाँ। - पृथु, पुरु, भरत, रघु-से अलौकिक लोकनायक थे यहाँ।।” उपर्युक्त पंक्तियों के कला-सौन्दर्य को लिखिए।
Answer: इन पंक्तियों में कवि ने भारत के पुराने समय के महान पुरुषों की बात कही है। वाल्मीकि और वेदव्यास को ऐसे लोग बताया है जो अच्छे इंसानों की कहानियां बताते थे। राजा पृथु, पुरु, भरत और रघु जैसे राजाओं को जनता का प्यारा नायक बताया गया है। कवि ने इन आदर्श आर्यों के नाम उदाहरण के तौर पर दिए हैं। इन पंक्तियों में शुद्ध हिंदी के शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। इसमें अनुप्रास और उदाहरण अलंकार का प्रयोग है और इसमें ओज गुण है। इसकी भाषा सरल है और यह हरिगीतिका छंद में है, जिसे आसानी से गाया जा सकता है।
In simple words: कवि ने भारत के महान पुरुषों-कवियों और राजाओं की प्रशंसा की है। इसमें अच्छी हिंदी, अलंकार और ओज गुण है, और यह एक गाने वाले छंद में लिखा गया है।
🎯 Exam Tip: काव्य-सौन्दर्य बताते समय, भाव (अर्थ), भाषा (शब्दों का प्रयोग), अलंकार (कविता की सुंदरता बढ़ाने वाले शब्द), और छंद (कविता की लय और ताल) जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 2. अपने पुत्र का मरण किसने स्वीकार किया और क्यों?
Answer: राजा हरिश्चंद्र ने अपने पुत्र रोहित का मरण स्वीकार किया था। एक पुरानी कथा के अनुसार, राजा त्रिशंकु का कोई पुत्र नहीं था। नारद मुनि की सलाह पर, उन्होंने वरुण देव से पुत्र के लिए प्रार्थना की। वरुण देव ने पहले मना किया, लेकिन राजा हरिश्चंद्र ने वादा किया कि अगर उन्हें एक वीर पुत्र हुआ, तो वे उसे यज्ञ में बलि देंगे। वरुण देव की कृपा से उन्हें रोहित नाम का पुत्र मिला। इस तरह, हरिश्चंद्र ने अपने वंश को चलाने के लिए अपने पुत्र की मौत स्वीकार की थी, क्योंकि उन्हें अपना वचन निभाना था।
In simple words: राजा हरिश्चंद्र ने अपना वचन निभाने के लिए अपने पुत्र रोहित का बलिदान स्वीकार किया था, ताकि उनके वंश की परंपरा चलती रहे।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देते समय, पात्र का नाम, उसकी क्रिया और उसके पीछे का कारण स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. हमारे देश में सुकुमारियों को अर्धांगिनी क्यों कहा गया? अर्धांगिनी का तात्पर्य क्या है?
Answer: हमारे देश में महिलाओं को अर्धांगिनी कहा जाता है क्योंकि वे सभी धार्मिक कार्यों में अपने पति के साथ बराबर की भागीदार होती हैं। वे हमेशा पति का साथ देती हैं और उनके कामों में प्यार से सहयोग करती हैं। इसी वजह से पत्नी या नारी को पति की अर्धांगिनी कहा जाता है। 'अर्धांगिनी' का मतलब है पति का आधा शरीर, यानी उसकी पत्नी। सभी धार्मिक कामों में पत्नी अपने पति के आधे हिस्से की तरह सहयोग करती है, तभी वह धार्मिक कार्य पूरा माना जाता है।
In simple words: महिलाओं को अर्धांगिनी कहते हैं क्योंकि वे पति के सभी कामों में, खासकर धार्मिक कार्यों में, उनका पूरा साथ देती हैं। अर्धांगिनी का मतलब है पति का आधा अंग।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण शब्दों जैसे 'अर्धांगिनी' का अर्थ और उसके सामाजिक या सांस्कृतिक महत्व को उदाहरण सहित समझाएं।
Question 4. द्विज पुत्रों की रक्षार्थ अपने पुत्रों को मृत्यु-पथ पर अग्रसर कर दिया? ऐसी कौनसी वीर माता थी तथा प्रसंग क्या था?
Answer: ऐसी वीर माता कुंती थीं। महाभारत और भागवत की कथाओं में बताया गया है कि अश्वत्थामा एक ब्राह्मण पुत्र था। महाभारत युद्ध के अंत में उसने द्रौपदी के पाँच पुत्रों को मार डाला था। जब द्रौपदी ने अश्वत्थामा को मारने की मांग की, तो भीम उसे पकड़कर लाए। तब कुंती ने अश्वत्थामा को ब्राह्मण पुत्र होने के नाते क्षमा करने की बात कही, ताकि ब्राह्मण वंश बना रहे। उन्होंने अपने पौत्रों (द्रौपदी के पुत्रों) के बदले अश्वत्थामा को जीवनदान देने की बात कही, जो उनके अपने पुत्रों के समान थे।
In simple words: कुंती ने ब्राह्मण पुत्र अश्वत्थामा को बचाने के लिए अपने पौत्रों (जो उनके पुत्रों जैसे थे) की मृत्यु का दुख सहा, क्योंकि वह ब्राह्मण वंश को बचाना चाहती थीं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में मुख्य पात्र, घटना और उसके पीछे के गहन नैतिक या भावनात्मक कारणों को स्पष्ट करना चाहिए।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मंगलाचरण का भाव अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: भारतीय संस्कृति में, कोई भी काम शुरू करने से पहले मंगलाचरण किया जाता है। इसमें अपने भगवान या देवी की स्तुति करके काम की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है। यह मंगलाचरण भी 'भारत भारती' काव्य की शुरुआत में इसी विचार से किया गया है। काव्य में मंगलाचरण करना एक पवित्र परंपरा है। मंगलाचरण तीन तरह के होते हैं - 1. आशीर्वादात्मक, जिसमें ईश्वर से आशीर्वाद मांगा जाता है। 2. नमस्क्रियात्मक, जिसमें केवल नमस्कार किया जाता है। 3. वस्तुनिर्देशात्मक, जिसमें विषय का सीधा निर्देश किया जाता है। 'भारत भारती' का यह मंगलाचरण आशीर्वादात्मक है। इसमें कवि कामना करता है कि भारत में उनकी वाणी (कविता) ऐसी गूंजे कि सभी उसकी आरती करें और प्रशंसा करें। वह वाणी जन-कल्याण और राष्ट्रहित के भावों को व्यक्त करे और सभी भारतीयों को शुभकामनाएं दे। कवि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से इस कामना के साथ आशीर्वाद मांगना चाहता है। इस तरह, इस मंगलाचरण का मुख्य भाव लोगों की भलाई की भावना पर आधारित है।
In simple words: मंगलाचरण किसी भी काम को शुरू करने से पहले भगवान से आशीर्वाद मांगने की प्रार्थना है। कवि चाहता है कि उसकी कविता देश के लिए अच्छी हो और सभी को खुशियाँ दे, इसलिए वह श्रीराम और श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता है।
🎯 Exam Tip: मंगलाचरण के प्रकारों को याद रखना और यह समझना कि कवि ने किस प्रकार के मंगलाचरण का प्रयोग किया है, आपके उत्तर को मजबूत करेगा।
Question 2. संकलित काव्यांश के भावगत एवं कलात्मक सौन्दर्य का विश्लेषण कीजिए।
Answer: मैथिलीशरण गुप्त की कविताएं भारतीयता से भरी हुई और बहुत प्रतिभाशाली हैं। यह अंश उनके 'भारत भारती' काव्य से लिया गया है। इसका भावगत और कलात्मक सौन्दर्य इस प्रकार है:
भावगत सौन्दर्य - इस हिस्से में भारत के पुराने समय के आदर्श पुरुषों का बहुत अच्छे से वर्णन किया गया है, जिन्होंने महान काम किए और मानवता को संदेश दिया। इसमें पुराने समय के न्याय और स्मृतिशास्त्र बनाने वाले, प्रजा का बेटे की तरह पालन करने वाले, दूसरों की भलाई के लिए खुद को बलिदान करने वाले संतों जैसे महान पुरुषों का उल्लेख बहुत सम्मान के साथ किया गया है। इसी तरह, पतिव्रता, सती और मजबूत महिलाओं का वर्णन भी भावुक तरीके से किया गया है। यह कविता भावगत रूप से बहुत प्रभावशाली है।
कलात्मक सौन्दर्य - गुप्तजी ने अपनी कविताओं में शुद्ध खड़ी बोली हिंदी का उपयोग करना पसंद किया है। उनके इस अंश में संस्कृत के कठिन शब्दों का उपयोग करते हुए सरल भाषा का प्रयोग किया गया है। आदर्श पुरुषों के चरित्र का वर्णन भले ही वर्णनात्मक शैली में हो, फिर भी इसमें पर्याप्त अलंकार हैं। आदर्श स्त्रियों के वर्णन में अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है। हरिगीतिका छंद की गति और शब्दों का सही चुनाव सुंदर है। भावनाओं को अच्छे से व्यक्त करने के लिए यह काव्यांश बहुत मनोरम है।
In simple words: इस कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने भारत के महान पुरुषों और नारियों के आदर्शों को सुंदर तरीके से बताया है। उन्होंने शुद्ध खड़ी बोली, संस्कृत के शब्द, अलंकार और हरिगीतिका छंद का प्रयोग किया है, जिससे यह कविता बहुत प्रभावशाली और सुंदर लगती है।
🎯 Exam Tip: काव्य-सौन्दर्य का विश्लेषण करते समय, हमेशा भाव पक्ष (अर्थ, विषय वस्तु) और कला पक्ष (भाषा, शैली, अलंकार, छंद) दोनों का संतुलन बनाए रखें।
Question 3. भारतीय ऋषि-परम्परा के आलोक पुंज ऋषि-मुनि तथा मनस्वी तपस्वी कौन हुए हैं? उनका आदर्श स्थापना में क्या योगदान रहा?
Answer: भारतीय ऋषि परंपरा में कई ऐसे महान और तपस्वी ऋषि-मुनि हुए हैं, जिनकी कहानियां हमारे पुराने ग्रंथों में भरी पड़ी हैं। उदाहरण के लिए, 'धर्मसूत्र' के जानकार और 'न्यायशास्त्र' के रचयिता महर्षि गौतम, रघुवंशी राजाओं के गुरु वसिष्ठ, 'मनुस्मृति' के रचयिता मनु, 'याज्ञवल्क्य-स्मृति' के रचयिता महर्षि याज्ञवल्क्य, रामकथा को सबसे पहले काव्य रूप देने वाले महर्षि वाल्मीकि और वेदों को इकट्ठा करने वाले वेदव्यास का नाम आज भी भारतीय संस्कृति में अमर है। इसी तरह, देवताओं की भलाई के लिए अपनी हड्डियां दान करने वाले महर्षि दधीचि को आर्य संस्कृति का आदर्श माना जाता है। देवव्रत भीष्म भी एक तपस्वी ऋषि जैसे थे, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को वश में रखकर और धैर्य-वीरता दिखाकर इतिहास में अपना नाम रोशन किया। इस तरह इन सभी ऋषियों ने अलग-अलग आदर्श स्थापित किए। उन्होंने समाज को अच्छे संस्कार देने, धार्मिक नियमों के अनुसार चलाने, अच्छे काम और सच्चाई का श्रेष्ठ आचरण सिखाने और लोगों की भलाई को सबसे ऊपर रखने में बहुत योगदान दिया। भारतीय संस्कृति के इतिहास में इनके पवित्र जीवन के बारे में कई कहानियां मिलती हैं।
In simple words: भारत में कई महान ऋषि-मुनि जैसे गौतम, वसिष्ठ, मनु, वाल्मीकि, वेदव्यास, दधीचि और भीष्म हुए हैं। इन्होंने समाज में अच्छे आदर्श स्थापित किए, धर्म का ज्ञान दिया और लोगों की भलाई के लिए काम किया।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऋषियों के नाम और उनके विशिष्ट योगदानों को याद रखें, खासकर वे जो किसी विशेष शास्त्र या घटना से संबंधित हैं।
Question 4. पठित पाठ में आये पौराणिक प्रसंगों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: इस पाठ में कई पुरानी कहानियां बताई गई हैं। जैसे अत्रि-अनसूया, गौतम, वसिष्ठ, मनु, याज्ञवल्क्य, शिबि, दधीचि, राजा हरिश्चंद्र, भीष्म आदि की कहानियां महाभारत, भागवत और दूसरे पुराणों में मिलती हैं। राजा पृथु, पुरु, भरत, रघु, प्रह्लाद, ध्रुव, कुश, लव, अभिमन्यु जैसे वीरों की कहानियां भी पुराणों में मशहूर हैं। सावित्री, कुंती, सुकन्या, अंशुमती, विदुला, नल-दमयंती, सुमित्रा, गांधारी जैसी नारियों की कहानियां भी पुरानी हैं। पाठ में इन सभी कहानियों को छोटे रूप में दिया गया है।
In simple words: पाठ में पुरानी कथाएँ जैसे अत्रि-अनसूया, राजा शिबि, दधीचि, हरिश्चंद्र, भीष्म और कई वीर राजाओं तथा नारियों की कहानियां शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: जब भी पौराणिक प्रसंगों का वर्णन करें, तो मुख्य पात्रों, उनकी प्रमुख घटनाओं और उन घटनाओं से मिलने वाली सीख को संक्षेप में स्पष्ट करें।
व्याख्यात्मक प्रश्न
Question 1. आदर्श जन संसार हमारे हो रहें।
Answer: कवि चाहता है कि भारत के आर्य लोग अपने मन रूपी मंदिर में जिसकी आरती उतारते हैं, हे भगवान! इसी भारतवर्ष में हमारी वाणी सब जगह गूंजे और हमारी भारतीय संस्कृति हर जगह फैले। हे भगवान श्रीराम! हे भगवान श्रीकृष्ण! हमारी वाणी सुखद और शुभ भावों को व्यक्त करने वाली हो। इसका मतलब है कि हमारी कविता अच्छी भावनाओं को प्रकट करे और वाणी की देवी सरस्वती हमें अच्छे भाव व्यक्त करने की शक्ति दें।
In simple words: कवि चाहता है कि उसकी वाणी भारत में हर जगह फैले और अच्छे विचारों को बढ़ावा दे, और वह इसके लिए श्रीराम व श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता है।
🎯 Exam Tip: काव्यांश की व्याख्या करते समय, कवि की प्रार्थना, उसके पीछे की भावना और उसके केंद्रीय विचार को स्पष्ट करें।
Question 2. लक्ष्मी नहीं सर्वस्व शील की सीमा कहे?
Answer: कवि कहता है कि भारत भूमि पर जो श्रेष्ठ कार्यों से सम्मानित आर्यजन हुए हैं, उतने आदर्श लोग संसार में कहीं और नहीं हुए। भले ही आज भारतीय संस्कृति और उसके गौरवशाली अतीत को दर्शाने वाले गीत कम बचे हों, फिर भी विदेशी यात्री और इतिहासकारों के कथन हमारी श्रेष्ठता के मजबूत प्रमाण हैं। इसका मतलब है कि हमारे पूर्वजों का अच्छा व्यवहार और उनके गुण किसी भी सीमा में नहीं बंधे थे।
In simple words: कवि कहता है कि भारत में पहले बहुत महान लोग थे, जिनके अच्छे काम की मिसाल आज भी इतिहास में मिलती है, भले ही अब ऐसी बातें कम सुनाई देती हों।
🎯 Exam Tip: यह समझने की कोशिश करें कि कवि किस आदर्श को दर्शा रहा है और उसके समर्थन में क्या तर्क दे रहा है, भले ही वह ऐतिहासिक संदर्भ में हो।
Question 3. बँदे रही दोनों नयन दिव्यबल उनको दिया।
Answer: कवि कहता है कि इस भारत भूमि पर गौतम और वसिष्ठ जैसे महान मुनि हुए, जिन्होंने लोगों को ज्ञान दिया। यहीं पर मनु और याज्ञवल्क्य जैसे महर्षि हुए, जिन्होंने धार्मिक और सामाजिक नियमों को बनाया। वाल्मीकि और वेदव्यास जैसे गुण गाने वाले महान मुनि भी यहीं हुए। इसी तरह राजा पृथु, पुरु, भरत, रघु आदि महान और दिव्य आत्माएं भी यहीं हुए, जिन्होंने संसार का नेतृत्व किया। यह सब दर्शाता है कि भारत में ज्ञान, धर्म और नेतृत्व का अद्भुत संगम था।
In simple words: भारत भूमि पर गौतम, वसिष्ठ, मनु जैसे महान ज्ञानी और धर्म-नियम बनाने वाले मुनि हुए हैं, और पृथु, पुरु जैसे महान राजा भी यहीं हुए, जिन्होंने लोगों का मार्गदर्शन किया।
🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक या पौराणिक संदर्भ का उल्लेख करते समय, संबंधित व्यक्तियों और उनके योगदान को सही ढंग से प्रस्तुत करें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
Question 1. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म स्थान है -
(क) चिरगाँव, झाँसी में
(ख) मझगाँव, आगरा में
(ग) नया गाँव, ग्वालियर में
(घ) गुड़गाँव में
Answer: (क) चिरगाँव, झाँसी में
In simple words: मैथिलीशरण गुप्त का जन्म झाँसी जिले के चिरगाँव गाँव में हुआ था।
🎯 Exam Tip: कवियों और लेखकों के जन्म स्थान और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।
Question 2. परमार्थ के लिए अपनी हड्डियों का दान किसने किया था?
(क) महर्षि वसिष्ठ ने
(ख) महर्षि गौतम ने
(ग) महर्षि दधीचि ने
(घ) महर्षि अत्रि ने
Answer: (ग) महर्षि दधीचि ने
In simple words: महर्षि दधीचि ने दूसरों की भलाई के लिए अपनी हड्डियाँ दान कर दी थीं।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं में बलिदान और परोपकार के उदाहरणों को याद रखें, जैसे महर्षि दधीचि का हड्डियों का दान।
Question 3. 'मँदी रही दोनों नयन आमरण'-ऐसी आदर्श नारी थी
(क) गान्धारी
(ख) कुन्ती
(ग) दमयन्ती
(घ) अनसूया
Answer: (क) गान्धारी
In simple words: गांधारी वह आदर्श नारी थीं जिन्होंने अपने पति के अंधे होने के कारण जीवन भर अपनी आँखों पर पट्टी बाँध रखी थी।
🎯 Exam Tip: साहित्य में वर्णित आदर्श नारियों के विशिष्ट गुणों और उनके त्याग को याद रखें।
Question 4. 'साकेत' महाकाव्य में गुप्तजी ने किसे त्यागमयी नारी बताया है?
(क) सुमित्रा को
(ख) उर्मिला को
(ग) कैकेयी को
(घ) सीता को
Answer: (ख) उर्मिला को
In simple words: गुप्तजी ने अपने महाकाव्य 'साकेत' में उर्मिला को बहुत त्याग करने वाली नारी के रूप में दिखाया है।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष रचना में किसी पात्र की भूमिका और उसके गुणों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 5. 'भारत भारती' रचना के लेखक हैं -
(क) सुमित्रानन्दन पंत
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) भारत भारती
Answer: (ग) मैथिलीशरण गुप्त
In simple words: 'भारत भारती' नामक प्रसिद्ध पुस्तक मैथिलीशरण गुप्त ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध रचनाओं के लेखक और उनके योगदान को याद रखना साहित्यिक जानकारी के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मैथिलीशरण गुप्त के दो प्रबन्ध काव्यों के नामोल्लेख कीजिए।
Answer: मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित दो प्रबन्ध काव्यों के नाम 'साकेत' और 'यशोधरा' हैं।
In simple words: गुप्तजी के दो मुख्य काव्य 'साकेत' और 'यशोधरा' हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख कवियों की मुख्य कृतियों, खासकर महाकाव्यों और खंडकाव्यों के नाम याद रखना चाहिए।
Question 2. 'आदर्श-स्त्रियाँ' काव्यांश गुप्तजी की किस रचना से संकलित है?
Answer: 'आदर्श-स्त्रियाँ' काव्यांश गुप्तजी की 'भारत भारती' रचना से लिया गया है।
In simple words: 'आदर्श-स्त्रियाँ' कविता गुप्तजी की 'भारत भारती' पुस्तक का हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: किसी भी कविता या अंश का स्रोत जानना उसके संदर्भ और महत्व को समझने में मदद करता है।
Question 3. प्राचीनकाल में भारत में ज्ञान-दायक मुनिवर कौन थे?
Answer: प्राचीनकाल में भारत में कई ज्ञान देने वाले मुनि हुए, जिनमें महर्षि गौतम और वसिष्ठ प्रमुख थे।
In simple words: पुराने समय में भारत में गौतम और वसिष्ठ जैसे कई ज्ञानी मुनि थे।
🎯 Exam Tip: प्राचीन भारत के प्रमुख ऋषियों और उनके ज्ञान के योगदान को याद रखें।
Question 4. मनु एवं याज्ञवल्क्य को किस कारण आदर्श महापुरुष बताया गया है?
Answer: महर्षि मनु और याज्ञवल्क्य ने धार्मिक और सामाजिक नियमों तथा स्मृति-शास्त्रों की रचना की थी, इसी कारण उन्हें आदर्श महापुरुष बताया गया है।
In simple words: मनु और याज्ञवल्क्य को आदर्श पुरुष इसलिए कहते हैं क्योंकि उन्होंने धर्म और समाज के नियम बनाए थे।
🎯 Exam Tip: उन व्यक्तियों को पहचानें जिन्होंने समाज के लिए नियम और आदर्श बनाए।
Question 5. चाण्डाल के हाथों कौन और किस कारण बिक गया था?
Answer: राजा हरिश्चंद्र चाण्डाल के हाथों बिक गए थे, क्योंकि वे अपने सत्यवचन का पालन करना चाहते थे।
In simple words: राजा हरिश्चंद्र चाण्डाल को इसलिए बिक गए क्योंकि उन्हें अपना वचन निभाना था।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं में सत्यनिष्ठा और वचन-पालन के उदाहरणों को याद रखें।
Question 6. सती के तेज के सम्मुख कौन मुनि निष्प्रभ रह गया था?
Answer: दुर्वासा मुनि सती (अनसूया) के तेज के सामने निष्प्रभ रह गए थे। जब दुर्वासा मुनि ने अनसूया से अपनी इच्छा पूरी करने को कहा, तो अनसूया के सतीत्व के कारण मुनि का प्रभाव कम पड़ गया।
In simple words: सती अनसूया के तेज के सामने दुर्वासा मुनि का प्रभाव कम हो गया था।
🎯 Exam Tip: सतीत्व के महत्व और उससे जुड़ी पौराणिक कथाओं को याद रखें।
Question 7. “सत्पुत्र पुरु-से थे जिन्होंने तात-हित सब कुछ सहा?" पुरु ने ऐसा कौन-सा कार्य किया था?
Answer: पुरु ने अपने पिता ययाति को अपना यौवन दिया था। जब शुक्राचार्य के शाप से राजा ययाति समय से पहले बूढ़े हो गए थे, तब उनके पुत्र पुरु ने अपना यौवन उन्हें दे दिया था, ताकि ययाति लंबे समय तक युवा सुख भोग सकें। इस दौरान पुरु खुद वृद्धों की तरह रहे और पुत्र धर्म निभाया।
In simple words: पुरु ने अपने पिता ययाति को अपनी जवानी दे दी थी ताकि उनके पिता युवा रह सकें, और खुद बूढ़े होकर पिता का कर्तव्य निभाया।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं में पुत्र-धर्म और बलिदान के उदाहरणों को याद रखें।
Question 8. "है एक जन के अनुकरण में सबे गुणों की एकता।” कवि ने ऐसा महापुरुष किसे बताया है और क्यों?
Answer: कवि ने ऐसा महापुरुष भीष्म पितामह को बताया है। उन्होंने भीष्म को इसलिए महान कहा है क्योंकि वे अपनी इंद्रियों को वश में रखने वाले, बहुत बहादुर, ज्ञानी और धैर्यवान व्यक्ति थे। उनमें सभी अच्छे गुण एक साथ मौजूद थे।
In simple words: कवि ने भीष्म पितामह को महान कहा है क्योंकि उनमें इंद्रियों पर नियंत्रण, वीरता, ज्ञान और धैर्य जैसे सभी अच्छे गुण एक साथ थे।
🎯 Exam Tip: किसी भी पात्र के गुणों को बताते समय, उन गुणों का महत्व और उनके उदाहरण भी संक्षेप में बताएं।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पठित पाठ की कविताओं का केन्द्रीय भाव क्या है? लिखिए।
Answer: मैथिलीशरण गुप्त द्वारा लिखी गई 'भारत भारती' काव्य में राष्ट्रीय गौरव और जातीय स्वाभिमान की भावना को भारतीय संस्कृति की महानता के साथ व्यक्त किया गया है। यह पाठ 'भारत भारती' से ही लिया गया है। इसका मुख्य भाव यह है कि भारत के निवासी आर्यजन बहुत से आदर्शों से भरे हुए थे। वे ज्ञान, तपस्या, दानशीलता, उदारता, परोपकार, सत्यनिष्ठा, वीरता और धैर्य जैसे कई गुणों और विशेषताओं से संपन्न थे। पुराने समय में भारत की नारियां भी आदर्श चरित्र वाली थीं। वे अर्धांगिनी के रूप में पति धर्म का पालन करती थीं। उनकी सत्यनिष्ठा और आचरण की पवित्रता से कठिन कार्य भी आसान हो जाते थे। भारत ऐसे आदर्श पुरुषों और नारियों से भरा हुआ रहा है।
In simple words: इस पाठ का मुख्य भाव यह है कि पुराने भारत में स्त्री-पुरुष दोनों ही बहुत आदर्शवादी, ज्ञानी, वीर और त्यागी थे, और यह हमारी संस्कृति के लिए गौरव की बात है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय भाव लिखते समय, कविता के मुख्य संदेश, प्रमुख विषयों और कवि के दृष्टिकोण को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 2. “सर्वस्व करके दान जो चालीस दिन भूखे रहे।” इससे सम्बन्धित अन्तर्कथा लिखिए।
Answer: राजा भरत के बाद, चंद्रवंश में रंतिदेव नाम के राजा हुए थे। वे बहुत उदार और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने बड़े-बड़े यज्ञ करके अपनी सारी धन-दौलत दान कर दी थी। वे मेहमानों की सेवा को पुण्य का काम मानते थे। सब कुछ दान करने के बाद, वे परिवार सहित चालीस दिनों तक भूखे रहे। चालीसवें दिन उन्हें थोड़ा भोजन मिला, लेकिन तभी एक भूखा भिखारी आ गया। रंतिदेव ने अपनी भूख और जान की परवाह किए बिना वह भोजन उस भिखारी को दे दिया। इस तरह, मेहमानों की सेवा करके और उदारता दिखाकर राजा रंतिदेव ने बहुत यश कमाया।
In simple words: राजा रंतिदेव बहुत दानी थे। उन्होंने चालीस दिनों तक भूखे रहने के बाद मिला भोजन भी एक भूखे भिखारी को दे दिया, जिससे उन्हें बहुत यश मिला।
🎯 Exam Tip: किसी भी पौराणिक कथा या अन्तर्कथा को संक्षेप में और उसके मुख्य संदेश के साथ प्रस्तुत करें।
Question 3. "दे दीं जिन्होंने अस्थियाँ परमार्थ-हित जानी जहाँ।” किसने और क्यों अपनी अस्थियों का दान किया था?
Answer: महर्षि दधीचि ने अपनी हड्डियां दान की थीं। एक बार वृत्रासुर जैसे राक्षसों से देवताओं को हार मिली थी। तब ब्रह्मा ने बताया कि यदि महर्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र बनाया जाए, तो राक्षसों का नाश हो सकता है। देवताओं ने महर्षि दधीचि से उनकी हड्डियां मांगीं। दधीचि ने लोगों की भलाई के लिए अपनी देह त्याग दी और अपनी हड्डियां देवताओं को दान कर दीं। इन्हीं हड्डियों से बने वज्र से इंद्र ने वृत्रासुर को मारकर देवताओं को बचाया था।
In simple words: महर्षि दधीचि ने देवताओं की भलाई के लिए अपनी हड्डियां दान कर दी थीं, जिनसे वज्र बनाकर राक्षसों का नाश किया गया था।
🎯 Exam Tip: परोपकार के लिए आत्मबलिदान के ऐसे उदाहरणों को याद रखें और उसके पीछे की प्रेरणा को स्पष्ट करें।
Question 4. “रहिं न जो, अल्पायु वर भी वर लिया सो वर लिया।” इस पंक्ति में किस आदर्श नारी की ओर संकेत किया गया है? बताइए।
Answer: इस पंक्ति में सावित्री नाम की आदर्श नारी की ओर इशारा किया गया है। सावित्री राजा अश्वपति की इकलौती बेटी थीं। उन्होंने अपने पिता की आज्ञा से अपने लिए वर चुना और शाल्वदेश के राजकुमार सत्यवान को पसंद किया। लेकिन नारद मुनि ने बताया कि सत्यवान की उम्र केवल एक साल बची है और उसे पति चुनने पर वह जीवन भर विधवा रहेंगी। फिर भी सावित्री ने नारद की बात सुनकर अपना फैसला नहीं बदला। सत्यवान से सावित्री का विवाह हुआ। इस पतिव्रता नारी ने अपनी तपस्या से यमराज को प्रसन्न किया और सत्यवान के लिए लंबी आयु का वरदान मांगा। इस तरह सावित्री ने पतिव्रत-धर्म का सबसे ऊंचा आदर्श प्रस्तुत किया।
In simple words: यह पंक्ति सावित्री की ओर संकेत करती है, जिन्होंने यह जानने के बावजूद कि उनके पति की आयु कम है, उनसे ही विवाह किया और अपनी तपस्या से उन्हें वापस जीवित करवाया।
🎯 Exam Tip: किसी भी काव्यांश की व्याख्या करते समय, उसमें निहित आदर्श और उससे जुड़े पौराणिक पात्रों के बारे में पूरी जानकारी दें।
Question 5. 'हारे मनोहत पुत्र को फिर बल जिन्होंने था दिया;' ऐसी आदर्श नारी कौन थी? लिखिए।
Answer: ऐसी आदर्श नारी विदुला थीं। उनका पुत्र संजय नाम का राजकुमार सिंधुराज से हार गया था। हारने के बाद वह बहुत निराश और सुस्त हो गया था। तब विदुला ने अपने पुत्र को कई तरह से समझाया और उसे सिंधुराज से युद्ध करने के लिए उत्साहित किया। इसके लिए उन्होंने कई वीर पुरुषों के उदाहरण दिए और उसमें आत्मबल और वीरता भर दी। उनके प्रभाव से संजय युद्ध में गया और अपने दुश्मन को हरा दिया। इस तरह विदुला के प्रोत्साहन से संजय में वीरता भर गई थी।
In simple words: विदुला वह आदर्श नारी थीं जिन्होंने अपने हारे हुए और निराश पुत्र संजय को युद्ध के लिए प्रेरित किया, जिससे उसे जीत मिली।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में नारी के साहस, प्रेरणा और मातृ-प्रेम जैसे गुणों को उजागर करें।
Question 6. संकलित कवितांश का प्रतिपाद्य एवं सन्देश स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह कविता मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' काव्य से ली गई है। इसमें कवि ने बताया है कि प्राचीनकाल से ही भारत संस्कृति और आदर्शों के मामले में गौरवशाली रहा है। यहाँ कई ऋषि-महर्षि और महापुरुष हुए, जिन्होंने अपने ज्ञान, विज्ञान और व्यवहार से आर्य जाति को बहुत आगे बढ़ाया। यहाँ कई ऐसी आदर्श नारियां भी हुईं, जिन्होंने पतिव्रत धर्म का पालन किया और वीरता, साहस तथा त्याग की भावना का परिचय दिया। भारतीय नारियां हमेशा अपनी पवित्रता की रक्षा करती रही हैं। इसलिए इस कविता से स्वतंत्रता पाने के लिए पुराने स्वाभिमान को याद रखने और जीवन के हर क्षेत्र में श्रेष्ठ बने रहने का संदेश मिलता है। साथ ही, मानवता की भलाई के लिए सब कुछ न्यौछावर करने की प्रेरणा भी दी गई है।
In simple words: इस कविता का मुख्य संदेश है कि भारत हमेशा संस्कृति और आदर्शों में महान रहा है। हमें अपने महान पुरुषों और नारियों से सीख लेकर आजादी बनाए रखनी चाहिए और मानवता की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
🎯 Exam Tip: कविता के प्रतिपाद्य (मुख्य विषय) और संदेश को स्पष्ट करते समय, कविता से उदाहरणों का उपयोग करें और उन्हें सरल भाषा में समझाएं।
पाठ-परिचय-
सप्रसंग व्याख्याएँ
Question. (1) मानस-भवन में आर्थ्यजन जिसकी उतारें आरती भगवान! भारतवर्ष में गूंजे हमारी भारती। हो भद्रभावोद्भाविनी वह भारती हे भगवते। सीतापते! सीतापते! गीतापते ! गीतापते॥
Answer: कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'भारत भारती' कृति का यह मंगलाचरण है। इसमें कवि भारतवर्ष में रहने वाले आर्यजनों की भारती (वाणी) के प्रसार की कामना व्यक्त करता है। कवि कहता है कि भारतीय आर्य लोग अपने मन रूपी मंदिर में जिसकी आरती उतारते हैं, हे भगवान! इसी भारतवर्ष में हमारी वाणी सब जगह गूंजे और भारतीय संस्कृति हर जगह फैले। हे भगवान! हे सीतापति श्रीराम! हे गीतापति श्रीकृष्ण! हमारी वाणी सुखद और शुभ भावों को व्यक्त करने वाली हो। इसका मतलब है कि हमारी कविता अच्छी भावनाओं को प्रकट करे और वाणी की देवी सरस्वती हमें अच्छे विचार व्यक्त करने की शक्ति दें।
In simple words: कवि भगवान से प्रार्थना करता है कि भारत में उनकी वाणी (कविता) हर जगह फैले, लोगों में अच्छे विचार लाए और वह श्रीराम व श्रीकृष्ण की तरह पवित्र और कल्याणकारी हो।
🎯 Exam Tip: मंगलाचरण की व्याख्या करते समय, कवि की प्रार्थना के उद्देश्य और जिन देवी-देवताओं का उल्लेख किया गया है, उनका महत्व बताएं।
Question. (2) सत्कार्थ्य-भूषण आर्म्यगण जितने यहाँ पर हैं हुए। है रह गये यद्यपि हमारे गीत आज रहे सहे। पर दूसरों के भी वचन साक्षी हमारे हो रहे।
Answer: यह अंश मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' से संकलित 'आदर्श' शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने सामान्य रूप से भारतीय आदर्श पुरुषों का उल्लेख किया है। कवि कहता है कि भारत भूमि पर जो श्रेष्ठ कार्यों से सम्मानित आर्यजन हुए हैं, उतने आदर्श लोग संसार में कहीं और नहीं हुए। इसका मतलब है कि दूसरे देशों में ऐसे आदर्श लोग नहीं हुए हैं। भले ही आज भारतीय संस्कृति और उसके गौरवशाली अतीत को दर्शाने वाले गीत कम बचे हों और हमारी महान कथाएं कमजोर पड़ गई हों, फिर भी विदेशी यात्रियों और इतिहासकारों के कथन हमारी श्रेष्ठता के मजबूत प्रमाण हैं। यह दिखाता है कि भारतीय श्रेष्ठ पुरुषों की गौरवपूर्ण परंपरा कितनी महान थी।
In simple words: कवि कहता है कि भारत में बहुत महान लोग हुए हैं। भले ही आज उनकी कहानियां कम याद की जाती हैं, फिर भी विदेशी लेखकों के पुराने लेख हमारी महानता का सबूत हैं।
🎯 Exam Tip: किसी काव्यांश की व्याख्या करते समय, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और कवि के द्वारा दिए गए तर्क को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question. (3) गौतम, वसिष्ठ समान मुनिवर ज्ञानदायक थे यहाँ, मनु, याज्ञवल्क्य-समान सप्तम विधि-विधायक थे यहाँ। वाल्मीकि-वेदव्यास-से गुण-गान-गायक थे यहाँ, पृथु, पुरू, भरत, रघु-से अलौकिक लोक-नायक थे यहाँ।
Answer: यह अंश मैथिलीशरण गुप्त के 'भारत भारती' काव्य के 'आदर्श' शीर्षक काव्यांश से लिया गया है। इसमें कवि ने भारत के प्राचीन मनस्वियों का उल्लेख किया है। कवि कहता है कि इस भारत भूमि पर गौतम और वसिष्ठ जैसे महान मुनि हुए, जिन्होंने लोगों को ज्ञान दिया। यहीं पर मनु और याज्ञवल्क्य जैसे महर्षि हुए, जिन्होंने धार्मिक और सामाजिक विधि-विधानों और नियमों को बनाया। वाल्मीकि और वेदव्यास जैसे गुणों के गायक महान मुनि भी यहीं हुए। इसी तरह राजा पृथु, पुरु, भरत, रघु आदि अनुपम और दिव्य चेतना वाले राजा भी यहीं हुए, जिन्होंने संसार का नेतृत्व किया। यह सब दर्शाता है कि भारत में ज्ञान, धर्म और नेतृत्व का अद्भुत संगम था।
In simple words: कवि बताता है कि भारत में गौतम और वसिष्ठ जैसे ज्ञानी मुनि, मनु और याज्ञवल्क्य जैसे नियम बनाने वाले, वाल्मीकि और वेदव्यास जैसे कथाकार, और पृथु, पुरु जैसे महान राजा हुए हैं, जो सबने समाज का मार्गदर्शन किया।
🎯 Exam Tip: जब कई नामों का उल्लेख हो, तो हर नाम के साथ उसके योगदान को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं।
Question. (4) लक्ष्मी नहीं, सर्वस्व जावे, सत्य छोड़ेंगे नहीं, अन्धे बनें पर सत्य से सम्बन्ध तोड़ेंगे नहीं। निज सुत-मरण स्वीकार है पर वचन की रक्षा रहे, है कौन जो उनं पूर्वजों के शील की सीमा कहे?
Answer: यह अंश मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' के 'आदर्श' काव्यांश से लिया गया है। इसमें कवि ने भारत के सत्यवादी और सदाचारी पूर्वजों का उल्लेख किया है। कवि वर्णन करता है कि हम भारतीयों के पूर्वज ऐसे सत्यवादी और सदाचारी थे कि वे प्रतिज्ञापूर्वक कहते थे - चाहे धन-दौलत और सब कुछ चला जाए, लेकिन हम सच्चाई को नहीं छोड़ेंगे। चाहे हम अंधे हो जाएं, फिर भी सच्चाई का साथ नहीं छोड़ेंगे। हमें अपने वचन का पालन करने में अगर अपने पुत्र की मृत्यु भी स्वीकार करनी पड़े, तो भी हमें वह मंजूर है। इस तरह हमारे पूर्वजों के सदाचरण की कोई सीमा नहीं थी। उनके अच्छे व्यवहार की सीमा का पूरा बखान कौन कर सकता है? यानी कोई नहीं कर सकता। यह राजा हरिश्चंद्र की सत्यवादिता की ओर भी इशारा करता है, जिन्होंने सत्य वचन निभाने के लिए अपना राज्य त्याग दिया और अपने पुत्र की मृत्यु पर भी सत्य वचन का पालन किया।
In simple words: कवि कहता है कि हमारे पूर्वज इतने सत्यवादी थे कि वे लक्ष्मी या पुत्र की मृत्यु का भी सामना कर सकते थे, पर सत्य नहीं छोड़ते थे। उनकी सच्चाई की कोई सीमा नहीं थी।
🎯 Exam Tip: कवि के विचारों को स्पष्ट करते समय, सत्यनिष्ठा, वचन-पालन और त्याग जैसे मुख्य नैतिक मूल्यों पर जोर दें।
Question. (5) सर्वस्व करके दानं जो चालीस दिन भूखे रहे, अपने अतिथि-सत्कार में फिर भी न जो रूखे रहे। पर-तृप्ति कर निज तृप्ति मानी रन्तिदेव नरेश ने, ऐसे अतिथि-सन्तोष कर पैदा किये किस देश ने?
Answer: यह अंश राष्ट्रकवि गुप्तजी की 'भारत भारती' से लिया गया है। इसमें राजा रंतिदेव की दानशीलता का वर्णन किया गया है। कवि वर्णन करता है कि राजा रंतिदेव ऐसे थे जिन्होंने सब कुछ दान करके चालीस दिनों तक भूखे रहे, लेकिन अपने मेहमानों की सेवा करने में कभी पीछे नहीं हटे। राजा रंतिदेव ने दूसरों को तृप्त करके ही अपनी संतुष्टि मानी। ऐसे मेहमान नवाजी और संतोष किस देश ने पैदा किए हैं? यानी भारत के अलावा किसी और देश में ऐसे उदार लोग नहीं हुए।
In simple words: राजा रंतिदेव ने सब कुछ दान कर दिया और चालीस दिन भूखे रहे, फिर भी मेहमानों की सेवा की। उन्हें दूसरों को खुश करने में ही खुशी मिलती थी, ऐसा उदार राजा और कोई नहीं था।
🎯 Exam Tip: उदारता और अतिथि-सत्कार जैसे गुणों को स्पष्ट करते समय, राजा रंतिदेव जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों का उपयोग करें।
Question. (6) आमिष दिया अपना जिन्होंने श्येन-भक्षण के लिए, जो बिक गए चाण्डाल के घर सत्य-रक्षण के लिए। दे दीं जिन्होंने अस्थियाँ परमार्थ-हित जानी जहाँ, शिबि, हरिश्चन्द्र, दधीचि-से होते रहे दानी यहाँ॥
Answer: यह अंश मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' के 'आदर्श' शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें भारत के परोपकारी, सत्यवादी और दानी महापुरुषों का उल्लेख किया गया है। कवि वर्णन करता है कि भारत भूमि पर राजा शिबि जैसे दानी हुए, जिन्होंने एक कबूतर की रक्षा के लिए भूखे बाज को अपने शरीर का मांस खाने के लिए दे दिया था। राजा हरिश्चंद्र जैसे सत्यवादी हुए, जिन्होंने अपने वचन की रक्षा के लिए खुद को चाण्डाल के हाथों बेच दिया था, यानी चाण्डाल के सेवक बन गए थे। इसी तरह महर्षि दधीचि ने दूसरों की भलाई के लिए अपनी हड्डियां दान कर दी थीं, यानी असुरों को मारने के लिए वज्र बनाने हेतु अपनी हड्डियां देवराज इंद्र को दान कर दी थीं। इस तरह के दानी इस भारत भूमि पर समय-समय पर होते रहे हैं। इसलिए यह भूमि आर्यजनों की जन्मभूमि होने से धन्य है।
In simple words: कवि कहता है कि भारत में राजा शिबि जैसे दानी (जो कबूतर के लिए मांस दिया), हरिश्चंद्र जैसे सत्यवादी (जो वचन निभाने के लिए बिक गए), और दधीचि जैसे परोपकारी (जो हड्डियां दान कीं) महापुरुष हुए हैं।
🎯 Exam Tip: कई उदाहरणों को एक साथ प्रस्तुत करते समय, हर उदाहरण के साथ उसके मुख्य संदेश (जैसे दानशीलता, सत्यवादिता) को स्पष्ट करें।
Question. (7) सत्पुत्र पुरू-से थे जिन्होंने तात-हित सब कुछ सहा, भाई भरत से थे जिन्होंने राज्य भी त्यागा अहा। जो धीरता के, वीरता के प्रौढ़ तम पालक हुए, प्रह्लाद, ध्रुव, कुश, लव तथा अभिमन्यु-सम बालक हुए।
Answer: यह अंश मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत भारती' के 'आदर्श' शीर्षक काव्यांश से लिया गया है। इसमें कवि ने पुरु, भरत आदि का उल्लेख कर भारतीय महापुरुषों के त्याग, वीरता और धीरता को अनुपम बताया है। कवि वर्णन करता है कि भारत भूमि पर पुरु जैसे अच्छे पुत्र हुए, जिन्होंने अपने पिता की भलाई के लिए सब कुछ सहा। भरत जैसे भाई हुए, जिन्होंने अपने बड़े भाई श्रीराम के लिए राज्य भी छोड़ दिया। यहीं ऐसे धीर और वीर लोग हुए जिन्होंने धैर्य और वीरता की सबसे अच्छी मिसाल कायम की। प्रह्लाद, ध्रुव, कुश, लव और अभिमन्यु जैसे वीर और धैर्यवान बच्चे भी यहीं हुए हैं।
In simple words: कवि कहता है कि भारत में पुरु जैसे पिता-हितकारी पुत्र, भरत जैसे त्यागी भाई, और प्रह्लाद, ध्रुव जैसे धीर-वीर बच्चे हुए हैं, जो वीरता और धैर्य की मिसाल हैं।
🎯 Exam Tip: त्याग, धैर्य, वीरता और पुत्र-धर्म जैसे गुणों को दर्शाने वाले पात्रों और उनके कार्यों को स्पष्ट करें।
Question 8. वह भीष्म का इन्द्रिय-दमन, उनकी धरा-सी धीरता, वह शील उनका और उनकी वीरता, गम्भीरता। उनकी सरलता और वह विशाल विवेकता, है एक जन के अनुकरण में सब गुणों की एकता ॥
Answer: इस अवतरण में, कवि ने भीष्म पितामह के अद्भुत गुणों का वर्णन एक आदर्श रूप में किया है। 'इन्द्रिय-दमन' का अर्थ है इन्द्रियों को वश में रखना, 'धरा' का अर्थ है धरती, और 'विवेकमता' का अर्थ है अच्छे-बुरे का पूरा ज्ञान। भीष्म देवव्रत ऐसे धीर-वीर थे, जिन्होंने इन्द्रियों को वश में रखकर आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया। वे धरती के समान अटल और धैर्यवान थे। उनकी सदाचरणशीलता, मर्यादापालन और वीरता-गंभीरता अद्वितीय थी। वे बहुत सरल थे और कर्तव्य-अकर्तव्य का पूरा ज्ञान रखते थे। उनके व्यक्तित्व में सभी श्रेष्ठ गुण एक साथ मौजूद थे, जो उन्हें सभी आदर्शों का प्रतीक बनाते थे। भारतीय पुराणेतिहास में भीष्म को विश्व-ज्ञान, धर्म और कर्तव्य-अकर्तव्य का भंडार बताया गया है। कवि ने इन सभी गुणों को उनके व्यक्तित्व में समाविष्ट दिखाया है।
In simple words: भीष्म पितामह एक महान व्यक्ति थे, जिनमें आत्म-नियंत्रण, धैर्य, वीरता और ज्ञान जैसे सभी अच्छे गुण एक साथ मौजूद थे। वह सभी आदर्शों का प्रतीक थे।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी महान व्यक्तित्व का वर्णन हो, उनके मुख्य गुणों को संक्षेप में और प्रभावी ढंग से लिखें।
आर्य-स्त्रियाँ
Question 9. केवल पुरुष ही थे न वे जिनका जगतं को गर्व था, गृह-देवियाँ भी थीं हमारी देवियाँ ही सर्वथा। था अत्रि-अनसूया-सदृश गार्हस्थ्य दुर्लभ स्वर्ग में, दाम्पत्य में वह सौख्य था जो सौख्य था अपवर्ग में ॥
Answer: यह अवतरण मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'भारत भारती' से संकलित 'आर्य-स्त्रियाँ' शीर्षक कवितांश से लिया गया है। इसमें कवि ने भारतीय नारियों की महानता को बताया है। कवि कहते हैं कि भारतभूमि पर केवल ऐसे आदर्श पुरुष ही नहीं हुए जिन पर संसार को गर्व हो, बल्कि यहाँ ऐसी गृहणियां भी थीं जो देवियों की तरह पूज्य और सम्मानित थीं। उदाहरण के लिए, महर्षि अत्रि और अनसूया जैसे पति-पत्नी हुए, जिनका गृहस्थ जीवन स्वर्ग के सुख के समान दुर्लभ था। उनके दाम्पत्य जीवन में ऐसा सुख था जो मोक्ष या परमगति के सुख जैसा था। इसका अर्थ है कि भारत में गृहस्थ जीवन लौकिक सुख के साथ-साथ पारलौकिक या मोक्ष का भी साधन था। अत्रि कई वेद-सूक्तों के ज्ञाता महर्षि थे और उनकी पत्नी अनसूया को भारतीय पुराणेतिहास में पति-भक्ति और सतीत्व का श्रेष्ठतम उदाहरण माना जाता है। कवि ने भारतीय आर्य-नारियों की महिमा का उल्लेख किया है।
In simple words: भारत में सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि अत्रि और अनसूया जैसी महिलाएं भी थीं, जिनका गृहस्थ जीवन इतना पवित्र और सुखमय था कि वह स्वर्ग जैसा लगता था।
🎯 Exam Tip: महिलाओं के योगदान और आदर्शों का वर्णन करते समय उनके प्रमुख गुणों और उदाहरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 10. निज स्वामियों के कार्य्य में समभाग जो लेतीं न वे, अनुरागपूर्वक योग जो उसमें सदा देतीं न वे॥ तो फिर कहातीं किस तरह 'अद्भगिनी' सुकुमारियाँ? तात्पर्य्य यह-अनुरूप ही थी नरवरों के नारियाँ॥
Answer: इस अवतरण में, कवि ने आर्य-नारियों की श्रेष्ठता का उल्लेख किया है। 'समभाग' का अर्थ है बराबरी का हिस्सा, 'योग' का अर्थ है सहयोग, और 'अर्धांगिनी' का तात्पर्य है पति का आधा अंग या पत्नी। कवि कहते हैं कि यदि भारतीय आदर्श नारियां अपने पतियों के कामों में बराबर का सहयोग न दें, और प्रेम से हमेशा साथ न दें, तो उनके पतियों के काम आसानी से पूरे कैसे होंगे? और वे सुंदर नारियां 'अर्धांगिनी' कैसे कहला पातीं? इसका मतलब है कि यहां की आदर्श नारियों का व्यवहार हमेशा पति के अनुकूल रहा। वे पतियों की श्रेष्ठ नारियां थीं। पति के हर काम में पूरा सहयोग करना और प्रेमपूर्वक व्यवहार करना ही आदर्श पत्नी का धर्म माना गया है। 'अर्धांगिनी' शब्द का अर्थ है नारी को पुरुष का आधा शरीर मानना, जिससे वह पति के कामों में सही सहयोग करती है। यह भारतीय दाम्पत्य-जीवन में नारियों की गरिमा को दर्शाता है।
In simple words: भारतीय आदर्श पत्नियां अपने पतियों के हर काम में बराबर का सहयोग देती थीं और उनसे प्रेमपूर्वक जुड़ती थीं। इसी वजह से उन्हें 'अर्धांगिनी' कहा जाता था, जिसका अर्थ है पति का आधा शरीर।
🎯 Exam Tip: 'अर्धांगिनी' शब्द का अर्थ बताते हुए, भारतीय नारियों के कर्तव्यपरायणता और प्रेमपूर्ण सहयोग के महत्व को रेखांकित करें।
Question 11. हारे मनोहत पुत्र को फिर बल जिन्होंने था दिया, मुनि को सताकर भूल से, जिसने प्रतिफल दिया। सेवार्थ जिसने रोगियों के था विराम लिया नहीं, थीं धन्य सावित्री, सुकन्या और अंशुमती यहीं॥
Answer: इस अवतरण में राष्ट्रकवि गुप्तजी ने पतिव्रता आर्य नारियों का उदाहरण सहित वर्णन किया है। 'अल्पायु' का अर्थ है कम उम्र, 'वर' का अर्थ है पति, 'प्रतिफल' का अर्थ है परिणाम, 'सेवार्थ' का अर्थ है सेवा के लिए, और 'विराम' का अर्थ है विश्राम। कवि कहते हैं कि सावित्री ने सत्यवान को अपना पति चुना, भले ही उसे पता था कि उसकी उम्र कम है। उसने अपने निश्चय को नहीं बदला और अंत तक उसे स्वीकार किया। राजा शर्याति की बेटी सुकन्या ने तपस्यारत ऋषि च्यवन को परेशान किया था, लेकिन बाद में उसने अपने किए का परिणाम स्वीकार करके मुनि च्यवन की पत्नी के रूप में उनकी आजीवन सेवा की। इसी तरह, सुव्रत नामक मुनीश्वर की पत्नी अंशुमती ने कभी रोगियों और दीन-दुखियों की सेवा से आराम नहीं लिया। ऐसी सावित्री, सुकन्या और अंशुमती जैसी नारियाँ इसी भारतभूमि पर हुईं, जिन्होंने आर्य-नारियों का गौरव बढ़ाया। महाभारत में 'विदुलोपाख्यान' के अनुसार, राजकुमार संजय को उसकी माता विदुला ने अपने शत्रु सिन्धुराज से युद्ध करने और जीतने के लिए प्रेरित किया था। अश्वत्थामा की कथा भी महाभारत से ली गई है, जिसमें कवि ने आदर्श माताओं का उल्लेख किया है।
In simple words: कवि ने सावित्री, सुकन्या और अंशुमती जैसी भारतीय नारियों के बलिदान और सेवा-भाव का वर्णन किया है। इन आदर्श नारियों ने अपने पतिव्रत धर्म और सेवा भावना से समाज का गौरव बढ़ाया।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं के पात्रों का वर्णन करते समय, उनके मुख्य गुणों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 12. बदली न जो, अल्पायु वर भी वर लिया सो वर लिया, मुनि को सताकर भूल से, जिसने प्रतिफल दिया। सेवार्थ जिसने रोगियों के था विराम लिया नहीं, थीं धन्य सावित्री, सुकन्या और अंशुमती यहीं॥
Answer: इस अवतरण में राष्ट्रकवि गुप्तजी ने पतिव्रता आर्य नारियों का उदाहरण सहित वर्णन किया है। 'अल्पायु' का अर्थ है कम उम्र, 'वर' का अर्थ है पति, 'प्रतिफल' का अर्थ है परिणाम, 'सेवार्थ' का अर्थ है सेवा के लिए, और 'विराम' का अर्थ है विश्राम। कवि कहते हैं कि सावित्री ने सत्यवान को अपना पति चुना, भले ही उसे पता था कि उसकी उम्र कम है। उसने अपने निश्चय को नहीं बदला और अंत तक उसे स्वीकार किया। राजा शर्याति की बेटी सुकन्या ने तपस्यारत ऋषि च्यवन को परेशान किया था, लेकिन बाद में उसने अपने किए का परिणाम स्वीकार करके मुनि च्यवन की पत्नी के रूप में उनकी आजीवन सेवा की। इसी तरह, सुव्रत नामक मुनीश्वर की पत्नी अंशुमती ने कभी रोगियों और दीन-दुखियों की सेवा से आराम नहीं लिया। ऐसी सावित्री, सुकन्या और अंशुमती जैसी नारियाँ इसी भारतभूमि पर हुईं, जिन्होंने आर्य-नारियों का गौरव बढ़ाया। महाभारत में 'विदुलोपाख्यान' के अनुसार, राजकुमार संजय को उसकी माता विदुला ने अपने शत्रु सिन्धुराज से युद्ध करने और जीतने के लिए प्रेरित किया था। अश्वत्थामा की कथा भी महाभारत से ली गई है, जिसमें कवि ने आदर्श माताओं का उल्लेख किया है।
In simple words: कवि ने सावित्री, सुकन्या और अंशुमती जैसी भारतीय नारियों के बलिदान और सेवा-भाव का वर्णन किया है। इन आदर्श नारियों ने अपने पतिव्रत धर्म और सेवा भावना से समाज का गौरव बढ़ाया।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं के पात्रों का वर्णन करते समय, उनके मुख्य गुणों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 13. दे रही दोनों नयन आमरण 'गान्धारी' जहाँ, पति-संग दमयन्ती, स्वयं वन-वन फिर मारी जहाँ। यों ही जहाँ की नारियों ने धर्म का पालन किया, आश्चर्य क्या फिर ईश ने जो दिव्य-बल उनको दिया॥
Answer: यह अवतरण मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'भारत भारती' से लिया गया है। इसमें भारत की आर्य नारियों की गरिमा का उल्लेख किया गया है। 'आमरण' का अर्थ है मृत्युपर्यन्त, और 'ईश' का अर्थ है ईश्वर। कवि वर्णन करते हैं कि अंधे धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी ने जीवन भर अपनी दोनों आँखें बंद रखीं, यानी पति की खातिर आँखों पर पट्टी बाँधकर अपना प्रण निभाया। दमयंती अपने पति नल के साथ जंगल-जंगल भटकती रहीं, यानी पति का अनुसरण किया। इस प्रकार, इस भारतभूमि की नारियों ने अपने पतिव्रत धर्म का दृढ़ता से पालन किया। यदि ईश्वर ने उन्हें पतिधर्म के पालन के लिए दिव्य-शक्ति दी हो, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, क्योंकि ईश्वर भी ऐसी नारियों का सहायक रहा है। गांधारी और दमयंती का उदाहरण भारतीय नारियों द्वारा पति-धर्म का पालन करने की परंपरा को दर्शाता है। इसमें सहज आस्था का स्वर व्यक्त हुआ है।
In simple words: भारत में गांधारी और दमयंती जैसी नारियां हुईं, जिन्होंने पति की भक्ति में अपनी आँखें बंद रखीं या जंगल-जंगल भटकीं। इन नारियों ने पतिधर्म का पालन इतनी दृढ़ता से किया कि ईश्वर ने भी उन्हें दिव्य शक्ति प्रदान की।
🎯 Exam Tip: गांधारी और दमयंती जैसे पौराणिक पात्रों के त्याग और समर्पण को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
Question 14. अबला जनों का आत्मबल संसार में था वह नया, चाहा उन्होंने तो अधिक क्या, रवि-उदय भी रुक गया? जिस क्षुब्ध मुनि की दृष्टि से जलकर विहग भू पर गिरा, वह भी सती के तेज-सम्मुख रह गया निष्प्रभ निरा॥
Answer: इस अवतरण में कवि ने भारतीय नारियों के आत्मबल के महत्व को बताया है। 'क्षुब्ध' का अर्थ है दुःखी, 'विहग' का अर्थ है पक्षी, 'सती' का अर्थ है पतिव्रता, 'निष्प्रभ' का अर्थ है कान्ति या तेज से रहित, और 'निरा' का अर्थ है बिल्कुल। कवि वर्णन करते हैं कि भारतीय नारियों में जो आत्मबल था, वह संसार में अद्वितीय था। उस आत्मबल के सहारे, यहाँ की कमजोर नारियों ने यदि सूर्योदय को रोकना चाहा, तो वह भी रुक गया। इसका सबसे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है? जिस तपोनिष्ठ मुनि की क्रोध से भरी दृष्टि से एक पक्षी जलकर धरती पर गिर गया था, वही मुनि एक पतिव्रता नारी के सामने असहाय और तेजहीन रह गया। उस मुनि ने अहंकार से भरकर पतिव्रता नारी से भिक्षा माँगी। जब नारी ने भिक्षा लाने में थोड़ी देर की, तो मुनि क्रोधित हो गया, लेकिन उस पतिव्रता नारी पर मुनि के क्रोध का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि वह उस समय अपने पति की सेवा कर रही थी। भारतीय नारियों के आत्मबल और सांस्कृतिक गरिमा को दर्शाने वाली तत्सम-प्रधान शब्दावली और सुगेय छंद योजना यहाँ उचित है।
In simple words: भारतीय नारियां इतनी शक्तिशाली थीं कि उनका आत्मबल पूरे संसार में अनोखा था। वे इतनी दृढ़ थीं कि अपनी इच्छाशक्ति से सूर्योदय भी रोक सकती थीं। एक सती नारी के सामने क्रोधित मुनि भी अपनी शक्ति खो बैठे, यह उनके आत्मबल का सबसे बड़ा प्रमाण है।
🎯 Exam Tip: भारतीय नारी के आत्मबल और पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उनके असाधारण धैर्य और शक्ति को उजागर करें।
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