RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 5 देशभक्त

NCERT Solutions for Class 11 Hindi: Chapter 05 देशभक्त

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Practice Class 11 Hindi Solutions: Chapter 05 देशभक्त

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RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. "देवी इन्हें प्रणाम करो। यह कर्ता की पवित्र कृति है।” लीलाधर विष्णु ने देशभक्त के किस कर्त्तव्य की ओर इन्दिरा का ध्यान आकृष्ट किया -
(क) नृशंसता
(ख) देशद्रोह
(ग) लोक-रक्षा
(घ) शौर्य
Answer: (ग) लोक-रक्षा
In simple words: लीलाधर विष्णु ने इन्दिरा का ध्यान देशभक्त के कर्तव्य लोक-रक्षा की ओर खींचा, क्योंकि देशभक्त लोगों की रक्षा का पवित्र काम कर रहा था।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में अक्सर कहानी के मूल भाव या प्रमुख घटना पर आधारित विकल्प ही सही उत्तर होता है।

 

Question 2. 'देशभक्त पर सम्राट् के प्रति विद्रोह का अपराध लगाकर न्याय का नाटक खेला जा चुका था।” न्यायाधीश ने देशभक्त को क्या आज्ञा
Answer: न्यायाधीश ने देशभक्त को यह आज्ञा दी कि वह या तो सम्राट की जय बोले और अपने किए पर पछतावा करे, या उसे तोप से उड़ा दिया जाए। देशभक्त को अपने देश के लिए यह एक मुश्किल चुनाव करना पड़ा था।
In simple words: न्यायाधीश ने देशभक्त को कहा कि या तो वह सम्राट की जय बोले और माफी माँगे, या उसे तोप से उड़ा दिया जाएगा।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में चरित्र के सामने आई चुनौती और उसके विकल्पों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 3. पंचतत्व का पुतला किसे कहा गया है
(क) पर्वत
(ख) सागर
(ग) मानव
(घ) पक्षी
Answer: (ग) मानव
In simple words: पंचतत्व का पुतला मानव को कहा गया है, क्योंकि मनुष्य का शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु - इन पाँच तत्वों से मिलकर बनता है।

🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है जो भारतीय दर्शन से जुड़ा है। याद रखें कि मानव शरीर को ही पंचतत्व का पुतला कहा जाता है।

 

Question 4. देशभक्त के स्पर्श से कौनसा अभागा स्थल पवित्र हो जाता है
(क) महल
(ख) कारागार
(ग) चरागाह
(घ) झोपड़ा
Answer: (ख) कारागार
In simple words: देशभक्त के चरण स्पर्श से कारागार पवित्र हो जाता है। अक्सर बुरे लोग जेल जाते हैं, लेकिन जब कोई देशभक्त जेल जाता है, तो वह जगह भी खास बन जाती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में 'अभागा स्थल' और 'पवित्र' शब्दों पर ध्यान दें, जो यह संकेत देते हैं कि देशभक्त के बलिदान से नकारात्मक जगह भी सकारात्मक बन जाती है।

 

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'क्या फिर किसी से "नाम चतुरानन पै चूकते चले गये।” लिखवाने का विचार है?' ब्रह्माणी ने विधाता की किस बात पर यह व्यंग्योक्ति की?
Answer: ब्रह्माणी ने विधाता पर यह व्यंग्योक्ति तब की जब उन्होंने एक पुतला बनाया। इस पुतले में विधाता ने तेज, सौंदर्य, दया, करुणा, प्रेम, विद्या, बुद्धि-बल और धैर्य जैसे सारे अच्छे गुण डाल दिए थे। लेकिन, उसकी उम्र सिर्फ बीस साल तय की और उसके भाग्य में भयंकर गरीबी, दुख और चिंता लिख दी। इन सारी उलटी बातों को देखकर ब्रह्माणी ने यह बात कही, जैसे कविगण फिर से यह लिखेंगे कि चार सिर वाले ब्रह्मा से यह कैसी गलती हो गई है। यह उनके बनाने के तरीके पर एक तरह का मज़ाक था।
In simple words: ब्रह्माणी ने विधाता से मज़ाक में कहा कि क्या वह फिर से ऐसा कुछ बनाने जा रहे हैं जहाँ सब कुछ अच्छा होने के बावजूद कुछ बड़ी गलती हो जाएगी। उन्होंने ऐसा तब कहा जब विधाता ने एक बहुत अच्छे पुतले को कम उम्र और बहुत सारी मुसीबतों वाला भाग्य दिया।

🎯 Exam Tip: व्यंग्योक्ति वाले प्रश्नों में, आपको यह स्पष्ट करना चाहिए कि व्यंग्य किस बात पर और क्यों किया गया है, साथ ही उस स्थिति का भी वर्णन करें जिससे व्यंग्य पैदा हुआ।

 

Question 2. विधाता प्रेम-गद्गद होकर ब्रह्माणी से बोले-देखती हो, देशभक्त के चरण-स्पर्श से अभागा कारागार अपने को स्वर्ग समझ रहा है।”
Answer: कारागार को अभागा इसलिए कहा गया था क्योंकि वहाँ आमतौर पर अपराधी, अत्याचारी और गलत काम करने वाले लोग ही जाते हैं। लेकिन, जब एक महान देशभक्त ने उस कारागार में कदम रखा, तो वह जगह भी धन्य हो गई। देशभक्त के पवित्र स्पर्श से उस अभागी जगह को भी स्वर्ग जैसा महसूस होने लगा। यह दिखाता है कि कैसे एक अच्छे इंसान की मौजूदगी किसी भी जगह को बदल सकती है।
In simple words: जेल को अभागा कहा गया क्योंकि वहाँ बुरे लोग रहते थे। लेकिन जब देशभक्त जेल गए, तो उनके पवित्र स्पर्श से वह अभागी जगह भी स्वर्ग जैसी लगने लगी।

🎯 Exam Tip: यहाँ 'अभागा' शब्द के दो अर्थ हैं – मूल रूप से अशुभ, और फिर देशभक्त के कारण सौभाग्यशाली। इस अंतर को अपने उत्तर में स्पष्ट करें।

 

Question 3. जिस दिन देशभक्त के जीवन का अन्तिम पृष्ठ लिखा जाने वाला था-उस दिन स्वर्गलोक में आनन्द का अपार पारावार क्यों उमड़ रहा था?
Answer: देशभक्त विधाता की एक अद्भुत रचना थी, जिसे देखकर सभी खुश थे – पूरा संसार, धरती और स्वर्गलोक सभी आनंद में थे। उस दिन वह देशभक्त अपने देश और मातृभूमि के लिए बलिदान होने जा रहा था। उसने गलत सम्राट के सामने झुकने या पछतावा करने के बजाय मौत को गले लगाने का फैसला किया था। स्वर्गलोक में ऐसी खुशी इसलिए थी क्योंकि वहाँ के लोग इस महान त्याग, वीरता और शहादत के उत्सव को देखने के लिए उत्सुक थे। यह एक ऐसा क्षण था जब एक सच्चा हीरो अपने देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर रहा था।
In simple words: जिस दिन देशभक्त अपने देश के लिए मरने वाला था, उस दिन स्वर्ग में बहुत खुशी थी। सभी इस महान त्याग और वीरता को देखने के लिए उत्साहित थे, क्योंकि वह सम्राट के आगे झुका नहीं बल्कि बलिदान को चुना।

🎯 Exam Tip: 'अपार पारावार' जैसे मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करें और स्वर्गलोक की खुशी के पीछे के गहरे कारण, यानी देशभक्त के बलिदान को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 4. "तुम अपना काम करो, मुझसे पश्चात्ताप कराने की आशा व्यर्थ है।” कहते समय देशभक्त के मनःस्थित संकल्प को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जब देशभक्त ने पछतावा करने से मना कर दिया, तो सम्राट के सैनिकों ने उसे जंजीरों में बांधकर तोप के सामने खड़ा कर दिया। सम्राट के प्रतिनिधि ने उससे कहा कि यह न्याय की आखिरी कोशिश है कि वह सम्राट की जय बोले और पछतावा करे। यह सुनकर देशभक्त ने मुस्कुराते हुए बड़े ही दृढ़ता से कहा कि वे अपना काम करें, उनसे माफी या पछतावे की उम्मीद करना बेकार है। इससे यह साफ होता है कि देशभक्त की सोच अटल थी और वह अपने संकल्प पर पूरी तरह कायम था। वह अपने देश के लिए कुछ भी करने को तैयार था, चाहे जान ही क्यों न देनी पड़े।
In simple words: जब देशभक्त ने पछतावा करने से मना किया, तो उसके मन में दृढ़ संकल्प था। वह मौत से नहीं डरा और अपने देश के प्रति वफादारी में अटल रहा।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में देशभक्त के दृढ़ संकल्प, निडरता और आत्म-बलिदान की भावना को उजागर करना आवश्यक है, जो उसके कथन से झलकती है।

 

Question 5. "अच्छी बात है, इस समय चित्त भी प्रसन्न है। किसी से मानव-सृष्टि की आवश्यक सामग्री यहीं मँगवाओ।”विधाता के अनुसार वे आवश्यक सामग्रियाँ कौन सी हैं?
Answer: विधाता के अनुसार, मानव-सृष्टि या मानव का पुतला बनाने के लिए पाँच तत्व ही आवश्यक सामग्री हैं। ये पाँच तत्व हैं: क्षिति (यानी पृथ्वी), जल, अग्नि (यानी तेज), आकाश और पवन। इन्हीं पाँचों तत्वों को मिलाकर मानव शरीर का निर्माण होता है। इन तत्वों के मिलने से ही जीवन का आधार बनता है। बाद में विधाता उसमें प्राण और बोलने की शक्ति जैसे गुण भरते हैं।
In simple words: विधाता के अनुसार, मानव बनाने के लिए पाँच चीजें जरूरी हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और पवन। इन्हीं से शरीर बनता है।

🎯 Exam Tip: पंच तत्वों के नाम सही और स्पष्ट रूप से बताएँ, और यह भी समझाएँ कि ये तत्व मानव शरीर के निर्माण के लिए क्यों आवश्यक हैं।

 

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question. "समझी। देखती हूँ, तुम्हारी आदत भी कलियुगी बूढ़ों-सी हुई जा : रही है।" इस कथन से बूढ़ों के किन लक्षणों की ओर ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है?
Answer: इस कथन से बूढ़ों के कई लक्षणों की ओर ध्यान खींचा जा रहा है। इसमें दिखाया गया है कि बूढ़े लोग अक्सर आलसी हो जाते हैं, हमेशा शिकायत करते रहते हैं, और हर बात में कमी निकालते हैं। इसके अलावा, उनकी रुचि रसीली बातों, सौंदर्य के प्रति लालसा, प्रेम की प्यास और स्त्रियों से मीठी बातें करने की इच्छा में बढ़ जाती है। वे यह नहीं मानते कि वे खुद बूढ़े हो रहे हैं, बल्कि तृष्णा में डूबे रहते हैं। यह कथन बूढ़े लोगों की उन आदतों को दर्शाता है जो समय के साथ बदल जाती हैं और उन्हें आधुनिक समय के बूढ़ों जैसा बना देती हैं।
In simple words: इस बात से बूढ़ों की आलस्य, शिकायत करने की आदत और सुंदर चीजों के प्रति बढ़ती लालसा जैसे लक्षणों पर ध्यान दिया जा रहा है, जो उन्हें कलियुगी बूढ़ों जैसा दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: बूढ़ों के लक्षणों का वर्णन करते समय, कहानी में बताए गए विशेष गुणों और व्यवहारों को सटीक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 2. इस कहानी में जिन राम कृष्णादि महापुरुषों को उद्धृत किया गया है, उनके लोक हितकारी कर्तव्यों पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
Answer: कहानी में राम, कृष्ण, प्रताप, शिवा, गोविन्द और नेपोलियन जैसे महान पुरुषों का जिक्र है। इन सभी ने धर्म की रक्षा के लिए बुरे लोगों को खत्म किया और देश तथा धर्म की सुरक्षा के लिए आक्रमणकारियों से युद्ध लड़ा। उनके मुख्य काम इस प्रकार थे:
1. **राम:** भगवान राम ने रावण जैसे कई राक्षसों को मारकर समाज में मर्यादा स्थापित की। उन्होंने धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए समाज को सही राह दिखाई।
2. **कृष्ण:** श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की। उन्होंने कर्म करने का महत्व सिखाया और लोगों को सही रास्ता दिखाया।
3. **प्रताप:** राणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि की आजादी और अपने धर्म को बचाने के लिए मुगलों से युद्ध किया। उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
4. **शिवा:** वीर शिवाजी ने भी धर्म और अपनी मातृभूमि की रक्षा की। उन्होंने मुगलों के खिलाफ कई युद्ध लड़े और अपना राज्य स्थापित किया।
5. **गोविन्द:** गुरु गोविन्द सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए महान बलिदान दिया। उन्होंने अपने शिष्यों को एकजुट किया।
6. **नेपोलियन:** नेपोलियन ने अपने देश की रक्षा और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए विदेशी सेनाओं से कई युद्ध लड़े। वे 1804 से 1915 तक फ्रांस के सम्राट रहे और 1815 में वाटरलू का युद्ध लड़ा, जो इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है।
In simple words: राम, कृष्ण, प्रताप, शिवा, गोविन्द और नेपोलियन जैसे महापुरुषों ने अपने समय में बुरे लोगों से लड़कर और देश की रक्षा करके लोगों का भला किया। उन्होंने धर्म और देश के लिए बहुत बलिदान दिए।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक महापुरुष के लिए उनके प्रमुख लोक हितकारी कर्तव्य को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं, जिससे उत्तर में सटीकता रहे।

 

Question 3. "पंचतत्व के एक पुतले को अत्याचार के उपासकों ने तोप से उड़ा दिया।" देवताओं पर इस बलिदान की क्या प्रतिक्रिया हुई और क्यों?
Answer: जब अत्याचार करने वालों ने देशभक्त युवक को तोप से उड़ा दिया, तो देवताओं ने बहुत देर तक 'देशभक्त' की जय-जयकार की, जिससे पूरा आकाश गूंज उठा। स्वर्ग में उस दिन पहले से ही उत्सव का माहौल था। देवांगनाओं ने देशभक्त के इस महान बलिदान पर फूल बरसाए और देवताओं ने उस पुतले के हर छोटे टुकड़े को अनमोल मोती की तरह उठा लिया। ऐसे गुणों से भरे, देवताओं के लिए भी दुर्लभ त्याग और बलिदान करने वाले देशभक्त युवक के पवित्र शरीर के टुकड़ों को पाकर देवतागण खुद को धन्य महसूस कर रहे थे। उनकी खुशी की कोई सीमा नहीं थी। इस तरह देवताओं ने देशभक्त के बलिदान के महत्व को समझाया और अपने भाग्य की तारीफ की। यह बलिदान उनके लिए बहुत खास था।
In simple words: जब देशभक्त को तोप से उड़ाया गया, तो देवताओं ने उसकी बहुत प्रशंसा की। उन्होंने उसके शरीर के टुकड़ों को अनमोल मानकर उठाया, क्योंकि यह एक बड़ा बलिदान था और उन्हें बहुत खुशी हुई।

🎯 Exam Tip: देवताओं की प्रतिक्रिया को भावनात्मक शब्दों में व्यक्त करें और उनके इस व्यवहार के पीछे के कारणों को गहराई से समझाएँ, जैसे आत्म-बलिदान का महत्व।

 

Question 4. अच्छा सुन लो। इसके भाग्य में लिखी जा रही है भयंकर दरिद्रता, दुःख, चिन्ता और इसकी आयु होगी बीस वर्षों की।" देशभक्ति के इस कष्टसाध्य जीवन-दर्शन पर अपने विचार सौ शब्दों में प्रकट कीजिए।
Answer: देशभक्ति का रास्ता बहुत मुश्किल और कष्टदायक होता है। इस रास्ते पर चलने वाले लोगों के जीवन में बहुत सारी मुसीबतें आती हैं। उन्हें समाज और परिवार दोनों तरफ से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सरकार भी उनका बहुत विरोध करती है और उन पर अत्याचार करती है। देशभक्त अपनी मातृभूमि और उसके बच्चों के लिए कई कठिनाइयाँ झेलता है। इस तरह, यह कहा जा सकता है कि एक सर्वगुणसम्पन्न देशभक्त के भाग्य में विधाता भी भयंकर गरीबी, दुख और चिंता लिख देते हैं, और उसकी उम्र भी बहुत कम होती है। यह सब कुछ देश की सेवा के लिए सहना पड़ता है।
In simple words: देशभक्ति का जीवन बहुत कठिन होता है, इसमें गरीबी, दुख और चिंताएँ आती हैं। देशभक्त को समाज और सरकार दोनों से विरोध झेलना पड़ता है। उसकी उम्र भी कम हो जाती है, लेकिन वह देश के लिए सब सहता है।

🎯 Exam Tip: देशभक्ति के कष्टसाध्य स्वरूप का वर्णन करते समय, सामाजिक, पारिवारिक और शासन के विरोध जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल करें।

 

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. संसाररूपी रंगमंच पर प्रवेश करते समय देशभक्त की अवस्था कितनी थी
(क) उन्नीस वर्ष
(ख) बीस वर्ष
(ग) पन्द्रह वर्ष
(घ) ग्यारह वर्ष
Answer: (क) उन्नीस वर्ष
In simple words: जब देशभक्त ने दुनिया में प्रवेश किया, तब उसकी उम्र उन्नीस साल थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी को ध्यान से याद रखें, जैसे उनकी उम्र या प्रमुख विशेषताएँ।

 

Question 2. भगवान शिव प्रसन्न होकर नाचने लगे।" शिवजी प्रसन्न हो गये थे
(क) पार्वती को देखकर
(ख) मधुर संगीत सुनकर
(ग) विष्णुजी से मिलकर
(घ) देशभक्त के दर्शन करके
Answer: (घ) देशभक्त के दर्शन करके
In simple words: भगवान शिव देशभक्त को देखकर बहुत खुश हुए और नाचने लगे। देशभक्त के पवित्र कार्य ने उन्हें प्रसन्न कर दिया था।

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी भी पात्र की भावनाओं के पीछे के कारणों को पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी महत्वपूर्ण घटना से जुड़े हों।

 

Question 3. “देशभक्त आनन्द विभोर होकर चिल्ला उठा – 'माता की जय हो” यहाँ देशभक्त के आनन्द विभोर होने का कारण था
(क) माता के दर्शन होना
(ख) देशद्रोही का वध होना
(ग) त्यौहार का दिन होना
(घ) ईश्वर की कृपा प्राप्त करना
Answer: (ख) देशद्रोही का वध होना
In simple words: देशभक्त बहुत खुश होकर 'माता की जय' चिल्लाया क्योंकि उसने देशद्रोही को मार दिया था।

🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख मोड़ और पात्रों की प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे सवालों के जवाब होते हैं।

 

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. ब्रह्माणी के अनुसार अब संसार में मौलिकता नहीं दिखाई पड़ती। इसका कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: ब्रह्माणी ने विधाता से कहा कि अब दुनिया के मनुष्यों के जीवन में कुछ भी नया या खास नहीं दिखता। उनके चरित्र में कोई अनोखी बात नजर नहीं आती है। उनका जीवन अब उबाऊ और नीरस लगने लगा है। ब्रह्माणी का मानना था कि हर जगह वही पुरानी कहानियाँ दोहराई जा रही हैं – कोई रोता है, कोई हँसता है, कोई प्यार करता है, कोई अत्याचार करता है। यह सब पुरानी बातों की बार-बार की पुनरावृत्ति है, जिससे जीवन में कोई ताजगी नहीं बची है।
In simple words: ब्रह्माणी के अनुसार, दुनिया में अब कुछ भी नया या अनोखा नहीं दिखता। लोगों के जीवन में वही पुरानी बातें बार-बार होती रहती हैं, जिससे सब कुछ बोरिंग और नीरस लगता है।

🎯 Exam Tip: 'मौलिकता' की कमी को समझाते हुए, ब्रह्माणी द्वारा दिए गए उदाहरणों का उपयोग करें ताकि आपका उत्तर स्पष्ट और प्रभावी लगे।

 

Question 2. “संसार के अधिकतर प्राणी तुमको शाप ही देते हैं, एक बार `भी लो।"ब्रह्माणी ने विधाता से ऐसा क्यों कहा?
Answer: ब्रह्माणी ने विधाता से ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दुनिया के लोग, जिन्हें विधाता की सबसे अच्छी रचना माना जाता है, उनका जीवन बहुत सारे दुखों, चिंताओं और निराशाओं से भरा हुआ है। उनके जीवन में अब कोई नयापन, रस या आनंद नहीं बचा है। वे बहुत नीरस और एक ही ढर्रे पर चलने वाला जीवन जी रहे हैं, जिससे वे दुखी हो गए हैं। इसी वजह से वे हमेशा अपने बनाने वाले विधाता को कोसते रहते हैं। इसलिए ब्रह्माणी ने कहा कि विधाता कुछ ऐसा करें जिससे उनकी बनाई हुई संतानें उन्हें धन्यवाद दें या आशीर्वाद दें। एक छोटा सा बदलाव बड़ी खुशी ला सकता है।
In simple words: ब्रह्माणी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दुनिया के लोग दुखी हैं और विधाता को कोसते रहते हैं। वह चाहती थीं कि विधाता कुछ ऐसा करें जिससे लोग उन्हें आशीर्वाद दें।

🎯 Exam Tip: विधाता को शाप देने के पीछे के कारणों (दुख, चिंता) को स्पष्ट करें और ब्रह्माणी की सलाह के पीछे के उद्देश्य (आशीर्वाद पाना) को भी समझाएँ।

 

Question 3. ब्रह्माणी के द्वारा यह कहे जाने पर कि कोई मनोरंजक सृष्टि करो; विधाता ने उसका क्या उत्तर दिया?
Answer: ब्रह्माणी के मनोरंजक सृष्टि बनाने के आग्रह पर विधाता ने मुस्कुराते हुए कहा कि ठीक है, आज मेरा मन भी प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि आज मैं तुम्हारे सामने ही और तुम्हारी मदद से कुछ नया और मनोरंजक बनाऊंगा। विधाता ने ब्रह्माणी से कहा कि तुम मानव सृष्टि के लिए जरूरी चीजें यहीं से मंगवा लो, और मैं अपना काम शुरू करता हूँ। यह एक सहयोगात्मक पहल थी।
In simple words: ब्रह्माणी के मनोरंजक सृष्टि बनाने के आग्रह पर विधाता ने खुशी से कहा कि आज उनका मन भी अच्छा है और वह ब्रह्माणी की मदद से कुछ नया बनाएंगे। उन्होंने सामग्री मँगवाने को कहा।

🎯 Exam Tip: विधाता के उत्तर में उनकी प्रसन्नता और ब्रह्माणी से मांगी गई सहायता को स्पष्ट करें, जो उनके सहयोग को दर्शाती है।

 

Question 4. विधाता ने किन-किन तत्वों के योग से किस प्रकार मानव के पुतले का निर्माण किया?
Answer: विधाता ने मानव का पुतला बनाने के लिए पाँच तत्वों का उपयोग किया: पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और पवन। इन सभी तत्वों को मिलाकर उन्होंने मानव के शरीर का निर्माण किया। सबसे पहले उन्होंने तेज को मानव के अंदर डाला, जो जीवन की ऊर्जा का प्रतीक है। ये पाँच तत्व मिलकर एक पूर्ण मानव शरीर का आधार बनाते हैं।
In simple words: विधाता ने मानव का पुतला पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और पवन - इन पाँच तत्वों को मिलाकर बनाया।

🎯 Exam Tip: पंच तत्वों के नाम सही क्रम में बताएं और यह भी स्पष्ट करें कि ये तत्व मानव शरीर के निर्माण में कैसे योगदान करते हैं।

 

Question 6. संसार के रंगमंच पर देशभक्त के दर्शन करने पर भगवान शिव ने अपनी प्रसन्नता किस प्रकार प्रकट की?
Answer: कहानीकार उग्रजी बताते हैं कि जब भगवान शिव ने पहली बार संसार के मंच पर देशभक्त को देखा, तो वे इतने खुश हुए कि आनंद में नाचने लगे। उन्होंने अपनी पत्नी पार्वती का ध्यान देशभक्त की ओर खींचते हुए कहा कि "देखो, यह सृष्टि की सबसे अनोखी रचना है। कोई भी देवता देशभक्त के रूप में धरती पर आकर खुद को धन्य महसूस कर सकता है।" यह कहते हुए शिवजी ने कहा कि "प्रिये, इसे आशीर्वाद दो।" तब प्रसन्न पार्वती ने "देशभक्त की जय हो!" कहा। देशभक्त के कार्यों ने सचमुच सभी को प्रभावित किया।
In simple words: देशभक्त को देखकर भगवान शिव बहुत खुश हुए और नाचने लगे। उन्होंने पार्वती से कहा कि यह सृष्टि की अद्भुत रचना है और उसे आशीर्वाद देने को कहा। पार्वती ने भी 'देशभक्त की जय' कहा।

🎯 Exam Tip: शिव और पार्वती की प्रतिक्रियाओं को विस्तृत रूप से समझाएँ और देशभक्त के प्रति उनके सम्मान को स्पष्ट करें।

 

Question 7. देशभक्त को सम्राट् के लोगों ने किस प्रकार गिरफ्तार किया?
Answer: जब देशभक्त ने देशद्रोही पर बंदूक तान ली और गोली चलाने ही वाला था, तब देशद्रोही ने अपने सिर पर संकट देखकर अपनी जेब से सीटी निकालकर जोर से बजा दी। तुरंत देशद्रोहियों का एक झुंड देशभक्त की ओर लपका। इसी बीच, देशद्रोहियों का सरदार देशभक्त की गोली से मारा गया। तभी उन लोगों ने देशभक्त को पकड़ लिया और गिरफ्तार कर लिया। यह एक संघर्षपूर्ण गिरफ्तारी थी।
In simple words: देशभक्त जब देशद्रोही को गोली मारने वाला था, तभी देशद्रोही ने सीटी बजाई। देशद्रोहियों के साथी आ गए और देशभक्त ने उनके सरदार को मार दिया। तब उन सबने देशभक्त को गिरफ्तार कर लिया।

🎯 Exam Tip: गिरफ्तारी के क्रमबद्ध घटनाओं का वर्णन करें, जिसमें देशद्रोही की प्रतिक्रिया और देशभक्त के प्रतिरोध को शामिल किया गया हो।

 

Question 8. देशभक्त पर क्या आरोप लगाये गये तथा क्या सजा सुनाई गई?
Answer: देशभक्त पर सम्राट के खिलाफ विद्रोह करने का आरोप लगाया गया था। सम्राट की अदालत में न्याय का नाटक रचा गया। न्यायाधीश ने यह आदेश सुनाया कि देशभक्त या तो अपने किए पर पछतावा करे और सम्राट की जय-जयकार करे, या उसे तोप से उड़ा दिया जाए। यह उसके सामने एक कठिन चुनाव था।
In simple words: देशभक्त पर सम्राट के खिलाफ विद्रोह का आरोप लगा। उसे सजा में पछतावा करने और सम्राट की जय बोलने या तोप से उड़ा दिए जाने का विकल्प दिया गया।

🎯 Exam Tip: आरोपों को स्पष्ट रूप से बताएं और दी गई सजा के विकल्पों को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 9. देशभक्त ने सम्राट् की अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के कौन से विकल्प को चुना और क्यों?
Answer: देशभक्त को दो विकल्प दिए गए थे। पहला विकल्प था कि वह अपने किए पर पछतावा करे और सम्राट की जय-जयकार करे। दूसरा विकल्प था कि उसे तोप से उड़ा दिया जाए। देशभक्त ने दूसरा विकल्प चुना, यानी तोप से उड़ जाने का। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अपनी मातृभूमि के प्रति वफादार था और सम्राट के आगे झुकना नहीं चाहता था। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग था और देश के लिए अपना जीवन बलिदान करने को तैयार था।
In simple words: देशभक्त ने तोप से उड़ जाने का विकल्प चुना। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह सम्राट के सामने झुकना नहीं चाहता था और अपने देश के प्रति वफादार रहना चाहता था।

🎯 Exam Tip: देशभक्त द्वारा चुने गए विकल्प और उसके पीछे के गहन कारण (देशभक्ति, स्वाभिमान) को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 1. ब्रह्माणी को विधाता की सृष्टि में क्या कमी नजर आती थी कि उसने कोई सुन्दर सृष्टि करने की बात कही। समझाइये।
Answer: ब्रह्माणी को विधाता की सृष्टि में यह कमी नजर आती थी कि अब उसमें कोई अनोखी या खास बात नहीं बची थी। उन्होंने ब्रह्माजी से कहा कि स्वामी, अब कोई ऐसी सुंदर रचना बनाओ जिस पर हमें गर्व हो सके। उनकी राय में, मृत्युलोक की सृष्टि अब न तो दिलचस्प रही थी और न ही आकर्षक। उसमें देखने लायक कुछ भी नयापन या प्रेरणादायक नहीं था। सब जगह वही पुरानी आदतें और पुरानी जीवनशैली दिखती थी, जो मन को ऊबा देती थी और बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी। इसलिए ब्रह्माणी ने एक ऐसे चरित्र को बनाने की बात कही जो सबसे अलग, चमत्कारी और दूसरों के लिए प्रेरणादायक हो।
In simple words: ब्रह्माणी को लगा कि विधाता की दुनिया में अब कुछ भी नया या खास नहीं है, सब कुछ पुराना और उबाऊ लगता है। इसलिए उन्होंने एक अनोखी और प्रेरणादायक रचना बनाने को कहा।

🎯 Exam Tip: ब्रह्माणी की शिकायत को स्पष्ट करें और उनके 'सुंदर सृष्टि' की इच्छा के पीछे के कारणों (नवीनता, प्रेरणा) पर जोर दें।

 

Question 2. ब्रह्माजी ने लीक से हटकर नवीन बँकरने के कार्य में ब्रह्माणी से किस प्रकार की सहायता माँगी तथा ब्रह्माजी ने क्यों उत्तर दिया?
Answer: ब्रह्माजी ने ब्रह्माणी के नए सुझाव को खुशी से स्वीकार किया और कहा कि ठीक है, हम आज कोई अद्भुत रचना करेंगे। उन्होंने ब्रह्माणी से पूछा कि क्या तुम इसमें मेरी मदद कर सकती हो। इस पर ब्रह्माणी ने पूछा कि वह कैसे मदद कर सकती है। ब्रह्माजी ने हँसते हुए कहा कि तुम बस बीच-बीच में मुझ पर और मेरी रचना पर प्यार भरी नजर डालती रहना। तुम्हारी प्यारी नजर से हमारे काम में चार चाँद लग जाएंगे। यह सुनकर ब्रह्माणी ने भी व्यंग्य करते हुए कहा कि तुम्हारी आदत भी कलियुगी बूढ़ों जैसी हो रही है, जिनकी आँखों में अभी भी जवानी का नशा है। इस तरह ब्रह्माजी ने नई रचना के लिए ब्रह्माणी से एक मजेदार और बातचीत भरी मदद माँगी, जिससे दोनों के बीच हंसी-मजाक चलता रहा।
In simple words: ब्रह्माजी ने ब्रह्माणी से नई रचना बनाने में मदद मांगी। उन्होंने कहा कि ब्रह्माणी बस प्यार से उनकी रचना देखती रहें ताकि उनका काम और अच्छा हो जाए। ब्रह्माणी ने मज़ाक में कहा कि उनकी आदत बूढ़ों जैसी हो गई है।

🎯 Exam Tip: ब्रह्माजी द्वारा मांगी गई सहायता की प्रकृति (विनोदपूर्ण कटाक्ष) और ब्रह्माणी की प्रतिक्रिया में निहित व्यंग्य को स्पष्ट करें।

 

Question 3. “अरे! यह क्या तमाशा कर रहे हैं?”ब्रह्माणी के इस कथन में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: विधाता ने ब्रह्माणी के आग्रह पर एक अद्भुत पुतला बनाया और उसमें सभी अच्छे गुण भर दिए। लेकिन जब विधाता ने बताया कि इस पुतले के भाग्य में घोर गरीबी, दुख और चिंता लिखी है, और उसकी उम्र केवल बीस साल होगी, तो ब्रह्माणी को बहुत हैरानी हुई। उन्होंने आश्चर्य से चौंकते हुए कहा, "अरे! यह क्या तमाशा कर रहे हैं?" एक तरफ तो पुतले को सौंदर्य, दया, करुणा, प्रेम और बुद्धि जैसे गुणों से भरा गया था, और दूसरी तरफ उसे इतना दुर्भाग्य दिया गया था। ब्रह्माणी को लगा कि यह एक अजीब विरोधाभास है और उन्होंने अपने मन की हैरानी को व्यक्त किया। यह किसी गलती जैसा लग रहा था।
In simple words: ब्रह्माणी ने 'यह क्या तमाशा है' तब कहा जब विधाता ने एक बहुत अच्छे पुतले को बहुत गरीबी और कम उम्र दी। उन्हें यह बात हैरान करने वाली लगी कि इतने अच्छे पुतले का भाग्य इतना बुरा क्यों है।

🎯 Exam Tip: ब्रह्माणी के आश्चर्य और कथन के पीछे के विरोधाभास (उत्तम गुणों और दुर्भाग्य का मिश्रण) को स्पष्ट करें।

 

Question 4. देशभक्त के प्रथम दर्शन पाकर कमला की क्या प्रतिक्रिया थी तथा उनके पति भगवान विष्णु ने उन्हें क्या समझाया?
Answer: जब कमला ने पहली बार देशभक्त को देखा, तो वह एक तेजस्वी चेहरे वाला युवक था जिसके हाथ में बंदूक थी और वह किसी देशद्रोही का पीछा कर रहा था। यह दृश्य देखकर कमला घबरा गई और उसने भगवान विष्णु से पूछा, "स्वामी! यह कौन युवक है जिसके चेहरे पर इतना तेज है?" कमला की प्रतिक्रिया में डर और जिज्ञासा दोनों थे। उसके पति भगवान विष्णु ने उसे समझाया कि यह एक वीर देशभक्त है जो अपने देश की रक्षा के लिए लड़ रहा है। यह उसकी वीरता और त्याग का प्रतीक था।
In simple words: देशभक्त को पहली बार देखकर कमला घबरा गई और विष्णु भगवान से पूछा कि यह तेजस्वी युवक कौन है। विष्णु ने उसे समझाया कि यह देशभक्त है।

🎯 Exam Tip: कमला की प्रतिक्रिया (डर और जिज्ञासा) और भगवान विष्णु के स्पष्टीकरण को कहानी के संदर्भ में प्रस्तुत करें।

 

Question 5. देशभक्त और देशद्रोही के बीच हुए संवादको अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: देशभक्त ने अपनी बंदूक देशद्रोही के सिर पर तानकर उससे कहा कि वह मूर्खतापूर्ण देशद्रोह का रास्ता छोड़ दे, पछतावा करे और भारत माता की सेवा करने की शपथ ले, नहीं तो मरने के लिए तैयार रहे। देशद्रोही ने घमंड और तिरस्कार भरी मुस्कान के साथ जवाब दिया कि वे शासकों के खास हैं और उनके लिए माता-पिता, ईश्वर और सब कुछ सम्राट ही है। उसने देशभक्त से कहा कि तुम उनके सम्राट की बड़ाई कर रहे हो। यह सुनकर देशभक्त ने आखिरी बार उससे कहा कि भारत माता की जय बोलो, वरना बंदूक चलने को तैयार है। देशद्रोही ने सीटी बजाकर अपने साथियों को बुला लिया। उन्हें देखते ही देशभक्त ने गोली चला दी, जिससे देशद्रोहियों का सरदार कबूतर की तरह धरती पर गिर गया और देशभक्त आनंद से 'माता की जय' चिल्ला उठा। यह संवाद उनकी देशभक्ति और देशद्रोह के बीच का सीधा टकराव था।
In simple words: देशभक्त ने देशद्रोही से कहा कि भारत माता की सेवा करे या मरने को तैयार रहे। देशद्रोही ने कहा कि सम्राट ही सब कुछ हैं। देशभक्त ने फिर कहा 'भारत माता की जय' बोलो, फिर उसने देशद्रोही के सरदार को गोली मार दी और 'माता की जय' चिल्लाया।

🎯 Exam Tip: संवादों को संक्षिप्त और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करें, जिसमें दोनों पात्रों के विचारों और क्रियाओं को स्पष्ट रूप से दिखाया गया हो।

 

Question 6. अपनी अदभुत रचना का अनुपम कृत्य देखकर विधाता ने किस प्रकार अपनी भावना व्यक्त की?
Answer: जैसे ही देशभक्त ने देशद्रोहियों के सरदार को मार गिराया, वैसे ही इंद्रलोक में, नंदनवन में, गंगा नदी में और भगवान शिव ने तांडव नृत्य करते हुए 'देशभक्त की जय' का उद्घोष किया। यह सब देखकर विधाता प्रेम से भर गए और विधात्री से कहा, "देखो, देशभक्त के चरणों के स्पर्श से कारागार भी खुद को स्वर्ग समझ रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि देशभक्त के शरीर पर बंधी लोहे की बेड़ियाँ और हथकड़ियाँ भी इतनी खुश हैं मानो उन्हें पारस पत्थर छू लिया हो। पूरे संसार के हृदय में खुशी का सागर उमड़ रहा था। विधाता ने कहा कि यह धरती भी फूली नहीं समा रही है। अपनी खुशी को व्यक्त करते हुए विधाता ने कहा कि यह मेरी बनाई हुई कृति है, यह मेरी शक्ति है। हे प्रिये! तुम मंगल गीत गाओ, आज मेरी लेखनी सफल हो गई है। यह उनके सृजनात्मक आनंद को दर्शाता है।
In simple words: देशभक्त के अद्भुत काम को देखकर विधाता बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा कि कारागार भी देशभक्त के स्पर्श से स्वर्ग जैसा लग रहा है, और यह उनकी सबसे अच्छी रचना है। उन्होंने विधात्री से मंगल गीत गाने को कहा।

🎯 Exam Tip: विधाता की भावनाओं को व्यक्त करने वाले वाक्यों और मुहावरों को शामिल करें, जैसे 'प्रेम-गद्गद', 'लेखनी धन्य हो गई', ताकि उत्तर में भावनात्मक गहराई आए।

 

Question 7. 'देशभक्त' कहानी का प्रतिपाद्य क्या है? संक्षेप में बताइये। अथवा “देशभक्त' कहानी का उद्देश्य क्या है? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
Answer: पाण्डेय बेचन शर्मा 'उग्र' द्वारा लिखी गई 'देशभक्त' कहानी का मुख्य संदेश यह है कि यह देशवासियों, खासकर युवाओं को, मुश्किल से मुश्किल हालात में भी देश सेवा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है। लेखक ने देवताओं के रूपक के माध्यम से देशभक्त युवक के चरित्र को दिखाया है, जिसमें त्याग और बलिदान से भरा एक संघर्षशील व्यक्तित्व है। कहानी यह भी साफ करती है कि देश सेवा के रास्ते पर बहुत सारे दुख, गरीबी और चिंता जैसी मुश्किलें आती हैं। सच्चे देशभक्त इन मुश्किलों का सामना दृढ़ संकल्प और पक्के इरादे के साथ करते रहते हैं। यदि जरूरत पड़े, तो ऐसे युवक दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत से भी टकराने का साहस रखते हैं और बड़े से बड़ा बलिदान देने के लिए तैयार रहते हैं। यह कहानी देशप्रेम का सच्चा उदाहरण प्रस्तुत करती है।
In simple words: 'देशभक्त' कहानी का उद्देश्य देशवासियों को, खासकर युवाओं को, देश सेवा के लिए प्रेरित करना है। यह बताती है कि देश सेवा में कई मुश्किलें आती हैं, लेकिन सच्चे देशभक्त उनसे लड़कर बलिदान देने को तैयार रहते हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी के प्रतिपाद्य या उद्देश्य को बताते समय, उसके मुख्य संदेश, पात्र के चरित्र और देशभक्ति के रास्ते पर आने वाली चुनौतियों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 8. "देशभक्त' कहानी में संवाद छोटे, व्यंग्यपूर्ण एवं साभिप्राय हैं।” इस कथन को उदाहरण सहित समझाइये।
Answer: कहानी में संवाद बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। 'देशभक्त' कहानी के संवाद छोटे, व्यंग्यपूर्ण और मतलब वाले हैं। ये संवाद देशभक्त के चरित्र को उजागर करने और कहानी को तेजी से आगे बढ़ाने में पूरी तरह सफल रहे हैं। कहानी के सभी संवाद संक्षिप्त और दिलचस्प हैं। 'देशभक्त' कहानी के संवादों की मुख्य विशेषता उनकी व्यंग्यात्मकता है। उदाहरण के लिए, विधाता और ब्रह्माणी के बीच का संवाद देखिए, जहाँ ब्रह्माणी कहती है: "समझी। देखती हूँ, तुम्हारी आदत भी कलियुगी बूढ़ों-सी हुई जा रही है। अभी तक आँखों में जवानी का नशा छाया हुआ है।" यहाँ इन संवादों में मज़ाक और हंसी-मजाक भरा हुआ है, जो कहानी को रोचक बनाता है। यह संवाद केवल कहने के लिए नहीं बल्कि गहरे अर्थों को भी प्रकट करते हैं।
In simple words: 'देशभक्त' कहानी के संवाद छोटे, व्यंग्यात्मक और गहरे अर्थ वाले हैं। ये संवाद पात्रों को दिखाते हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जैसे ब्रह्माणी का विधाता से मज़ाक करना, जिसमें व्यंग्य छिपा है।

🎯 Exam Tip: संवादों की विशेषताओं (संक्षिप्तता, व्यंग्यात्मकता) को स्पष्ट करें और कहानी से एक या दो उदाहरण देकर उन्हें सिद्ध करें।

 

Question 9. 'देशभक्त' कहानी के प्रमुख पात्र देशभक्त का चरित्र चित्रण कीजिए।
Answer: देशभक्त विधाता की एक बहुत ही अनोखी और अद्भुत रचना था, जिसे ब्रह्माणी के विशेष आग्रह पर बनाया गया था। स्वयं विधाता ने उसे 'मेरी कृति, मेरी विभूति' कहकर सराहा। भगवान शिव ने उसे अद्भुत रचना कहा और भगवान विष्णु ने उसे पवित्र रचना माना। देशभक्त की कुछ खास विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **विधाता की श्रेष्ठ कृति:** देशभक्त में सभी अच्छे गुण थे और वह विधाता की सबसे अच्छी रचना था।
2. **बलिदानी देशभक्त:** वह एक महान बलिदानी था जो अपने देश के लिए अपनी जान खुशी-खुशी न्योछावर कर देता है।
3. **दृढ़-निश्चयी:** देशभक्त अपने फैसले पर अटल रहने वाला था और अपनी बात पर कायम रहता था।
4. **विशिष्ट व्यक्तित्व:** वह एक संघर्षशील व्यक्ति था जो दुख, गरीबी और चिंता जैसी मुश्किलों से लड़ता रहता था।
5. **सर्वगुण सम्पन्न:** वह बहुत तेजस्वी, साहसी और शक्तिशाली था। सम्राट के देशद्रोही कहे जाने वाले लोगों से देशभक्त अकेला ही लड़ता है।
इस तरह कहा जा सकता है कि देशभक्त एक ऐसा चरित्र है जिसकी स्वर्गलोक में भी जय-जयकार होती है।
In simple words: देशभक्त विधाता की एक अद्भुत और श्रेष्ठ रचना था। वह एक बलिदानी, दृढ़-निश्चयी, संघर्षशील और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति था, जिसकी हर जगह प्रशंसा होती थी।

🎯 Exam Tip: चरित्र चित्रण में पात्र के प्रमुख गुणों और विशेषताओं को बिन्दुवार समझाएँ, साथ ही कहानी में उनके व्यवहार के उदाहरण भी दें।

 

Question 10. कहानी के तत्वों के आधार पर 'देशभक्त' की समीक्षा कीजिए।
Answer: पाण्डेय शर्मा 'उग्र' द्वारा लिखी गई 'देशभक्त' एक श्रेष्ठ कहानी है। कहानी के तत्वों के आधार पर इसकी समीक्षा इस प्रकार है:
1. **कथानक:** देशभक्त कहानी छोटी है और तेजी से अपने उद्देश्य तक पहुँचती है। इसमें देशभक्त के जन्म से लेकर उसके बलिदान तक की मुख्य घटनाओं को दिखाया गया है।
2. **उद्देश्य:** इस कहानी का उद्देश्य देश सेवा, त्याग और बलिदान की प्रेरणा देना है, जिसमें देशभक्त का चरित्र पूरी तरह सफल रहा है। यह युवाओं को देशभक्ति के लिए प्रेरित करती है।
In simple words: 'देशभक्त' कहानी एक अच्छी कहानी है जिसका कथानक छोटा और तेज है। इसका मुख्य उद्देश्य देश सेवा और बलिदान के लिए प्रेरित करना है।

🎯 Exam Tip: कहानी के तत्वों (जैसे कथानक, उद्देश्य) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और फिर कहानी के संदर्भ में उनके महत्व को समझाएँ।

देशभक्त लेखक परिचय

पाण्डेय शर्मा बेचन 'उग्र' का जन्म सन् 1900 ई. में मिर्जापुर जिले के चुनार में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा काशी में हुई। आजादी के आंदोलन के समय उन्हें क्रांतिकारी विचारों के कारण स्कूल से निकाल दिया गया। 1921 में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की, लेकिन राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल चले गए। सन् 1921 से ही 'अष्टावक्र' नाम से कहानियाँ लिखीं। उन्होंने गोरखपुर से 'स्वदेश' पत्रिका निकाली। इसका पहला अंक ही छपा था कि अंग्रेज सरकार ने उनके नाम वारंट जारी कर दिया।

इसके बाद वे कलकत्ता जाकर 'मतवाला' पत्रिका का संपादन करने लगे। कलकत्ता से बम्बई जाकर उन्होंने फिल्मों के लिए लिखना शुरू किया, लेकिन फिर 'स्वदेश पत्रिका' के मामले में उन्हें पकड़कर गोरखपुर लाया गया और जेल में डाल दिया गया। फिर 'बुढ़ापा' और 'रुपया' कहानियों के कारण उन्हें दोबारा कैद कर लिया गया। उनकी रचनाओं में स्पष्ट बात कहने का तरीका, पुरुषार्थ और देशभक्ति का स्वर बहुत जोरदार तरीके से व्यक्त हुआ है।

उनकी रचनाओं में उनकी जीवनी 'अपनी खबर' के नाम से छपी, जो हिंदी साहित्य के लिए एक अनोखी देन है। 'दोजख की आग' और 'इंद्रधनुष' उनके कहानी संग्रह हैं। उनका नाटक 'महात्मा ईसा' और उपन्यास 'चाकलेट' बहुत प्रसिद्ध हुए।

पाठ-सार

'देशभक्त' कहानी उग्रजी की एक प्रेरणा देने वाली कहानी है। इसमें लेखक ने देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाले नवयुवक को विधाता की सबसे अच्छी रचना माना है। कहानी स्वर्गलोक में ब्रह्माजी और ब्रह्माणी के संवाद से शुरू होती है। ब्रह्माणी कहती हैं कि स्वामी, आज कोई ऐसी सुंदर रचना बनाइए जो अद्भुत और अनोखी हो। आपकी सबसे अच्छी रचना मृत्युलोक में अब कोई चमत्कारी या आकर्षक चरित्र नहीं दिख रहा है। इसलिए आप कुछ नया, मनोरंजक और चमत्कारी चरित्र बनाइए।

विधाता ने कहा कि ठीक है, आज मेरा मन भी प्रसन्न है। आप किसी से सृष्टि बनाने का सामान मंगवा लीजिए और आप भी मेरी और मेरी रचना पर प्यार भरी नजर डालते रहिए, जिससे मेरी रचना में जान आ जाएगी।

विधाता ने पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और पवन से मानव का पुतला बनाया। सबसे पहले उसमें तेज डाला और दया, प्रेम, सौंदर्य, बल, बुद्धि, संतोष, धैर्य, गंभीरता जैसे देवताओं को भी दुर्लभ गुण उसके हृदय में डाले। फिर विधाता ने उसके भाग्य में दुख, चिंता, गरीबी जैसे बहुत दर्दनाक शब्द लिखे और उसकी उम्र केवल 20 साल दी। विधात्री ने शिकायत करते हुए कहा कि इतने सारे गुणों वाले युवक के लिए आप यह शाप जैसा जीवन जीने की रेखाएँ क्यों खींच रहे हैं।

तब देशभक्त को जंजीरों से बांधकर तोप से उड़ा दिया गया। उसके पुतले के एक-एक कण को देवताओं ने अनमोल मोती की तरह उठा लिया। बहुत देर तक स्वर्गलोक में देशभक्त का जय-जयकार होता रहा।

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