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Detailed Chapter 4 शरणदाता RBSE Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 4 शरणदाता RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. देविन्दर लाल और रफीकुद्दीन घर में बैठकर किसकी आलोचना किया करते थे?
(क) मुसलमानों की
(ख) हिन्दुओं की
(ग) देश के भविष्य की
(घ) देश के वर्तमान की
Answer: (ग) देश के भविष्य की
In simple words: देविन्दर लाल और रफीकुद्दीन अपने घर में बैठकर देश के भविष्य पर बातें करते थे. वे सोचते थे कि देश किस दिशा में जा रहा है और क्या बदलाव आ रहे हैं.
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प चुनते समय कहानी के मुख्य घटनाक्रम और पात्रों के विचारों को ध्यान में रखें.
Question 2. मरीज को देखते समय डॉक्टर की पीठ में छुरा भौंक दिया था
(क) दंगाइयों ने
Answer: (क) दंगाइयों ने
In simple words: कहानी के अनुसार, डॉक्टर को दंगाइयों ने हमला करके मार डाला था, जब वह किसी मरीज की देखभाल कर रहे थे. यह घटना उस समय की हिंसा को दिखाती है.
🎯 Exam Tip: कहानी के संदर्भ में घटनाओं को याद रखें, खासकर जब वे किसी बड़ी घटना (जैसे दंगा) से जुड़ी हों.
Question 3. गैराज में रहने के दौरान देविन्दर लाल बाकी बचा खाना देते थे
(क) कुत्ते को
(ख) बिलार को
(ग) गाय को
(घ) किसी को नहीं
Answer: (ख) बिलार को
In simple words: देविन्दर लाल जब गैराज में अकेले रहते थे, तो वे अपने खाने का बचा हुआ हिस्सा एक बिल्ली को देते थे. यह बिल्ली उनके अकेलेपन में उनका साथी बन गई थी.
🎯 Exam Tip: पात्रों के व्यवहार और उनके अकेलेपन या संबंधों को दर्शाने वाले छोटे विवरणों पर ध्यान दें, क्योंकि वे कहानी को गहरा बनाते हैं.
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. “नहीं साहब, हमारी नाक कट जायेगी।” ये शब्द किससे, किसने और कब कहे?
Answer: ये शब्द रफीकुद्दीन ने देविन्दर लाल से तब कहे थे जब वे शहर में अपना घर छोड़कर कहीं और जाने की बात कर रहे थे. रफीकुद्दीन देविन्दर लाल को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा था. दोनों दोस्त गहरे संकट में भी साथ खड़े थे.
In simple words: रफीकुद्दीन ने देविन्दर लाल से कहा था कि अगर वे चले गए तो उनकी इज्जत चली जाएगी. यह तब हुआ जब देविन्दर लाल अपना घर छोड़कर जा रहे थे.
🎯 Exam Tip: सीधे उद्धरण वाले प्रश्नों में, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि किसने, किससे और किस परिस्थिति में ये शब्द कहे.
Question 2. “उन्हें शिकार चाहिए-हल्ला करके न मिलेगा तो आग लगाकर लेंगे।” यहाँ शिकार कौन है और शिकारी कौन?
Answer: यहाँ शिकार पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक हिन्दू परिवार हैं और शिकारी दंगा-फसाद करने वाले मुसलमान हैं. यह विभाजन के समय फैली हिंसा और सांप्रदायिक तनाव को दिखाता है. उस समय बहुत से लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर थे.
In simple words: इस वाक्य में, शिकार अल्पसंख्यक हिन्दू हैं जो पाकिस्तान में रह रहे थे, और शिकारी वो मुसलमान हैं जो दंगा कर रहे थे.
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक भाषा वाले प्रश्नों में, प्रतीकों के पीछे छिपे वास्तविक अर्थ और कहानी के बड़े संदर्भ को समझना आवश्यक है.
Question 3. देविन्दर लाल को मिली हुई लाहौर की मुहर वाली चिट्टी किसकी थी?
Answer: देविन्दर लाल को मिली लाहौर की मुहर लगी चिट्ठी अताउल्लाह की बेटी जैबुन्निसा की थी. यह चिट्ठी देविन्दर लाल के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी थी.
In simple words: देविन्दर लाल को जो चिट्ठी मिली थी, वह अताउल्लाह की बेटी जैबुन्निसा ने भेजी थी.
🎯 Exam Tip: कहानी में महत्वपूर्ण पत्रों या संदेशों के लेखक और उनकी सामग्री को याद रखें, क्योंकि वे अक्सर कहानी के मोड़ का कारण बनते हैं.
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. रोटियों के बीच रखे कागज के पुर्जे पर क्या लिखा था? वह किसने लिखा और क्यों?
Answer: रोटियों के बीच रखे कागज के पुर्जे पर लिखा था, "खाना कुत्ते को खिलाकर खाइयेगा।” यह कागज शेख अताउल्लाह की बेटी जैबुन्निसा ने लिखा था. उसने यह इसलिए लिखा ताकि देविन्दर लाल को खाने में जहर होने की सूचना दी जा सके और उनकी जान बचाई जा सके. जैबुन्निसा एक दयालु इंसान थी जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद की.
In simple words: रोटियों के बीच एक कागज का टुकड़ा मिला था जिस पर लिखा था, "खाना पहले कुत्ते को खिलाना." इसे जैबुन्निसा ने देविन्दर लाल को जहर वाले खाने से बचाने के लिए लिखा था.
🎯 Exam Tip: कहानी में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण विवरणों पर ध्यान दें, जैसे यह पर्ची, क्योंकि वे अक्सर बड़े परिणामों या पात्रों के महत्वपूर्ण कार्यों की ओर ले जाते हैं.
Question 2. अन्य हिन्दू परिवारों के मौजंग, लाहौर से पलायन कर जाने पर भी देविन्दर लाल वहाँ क्यों रुक गये थे?
Answer: देविन्दर लाल अपने मुसलमान पड़ोसी रफीकुद्दीन के आश्वासन पर मौजंग में रुक गए थे. रफीकुद्दीन उनका दोस्त था और उसने वादा किया था कि अगर कोई खतरा होगा तो वह पहले बता देगा और उनकी हिफाजत का इंतजाम करेगा. दोस्ती के नाते देविन्दर लाल ने अपने दोस्त पर भरोसा किया. इस घटना से विभाजन के समय दोस्ती के रिश्ते की परीक्षा होती है.
In simple words: बाकी हिन्दू परिवार चले गए थे, पर देविन्दर लाल अपने दोस्त रफीकुद्दीन के भरोसे पर वहीं रुक गए थे. रफीकुद्दीन ने उन्हें सुरक्षित रखने का वादा किया था.
🎯 Exam Tip: पात्रों के निर्णयों के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं, खासकर जब वे भावनाओं या भरोसे पर आधारित हों.
Question 3. "
धीरे-धीरे गुस्से का स्वर दर्द के स्वर में परिणत हुआ, फिर एक करुण रिरियाहट में, एक दुर्बल चीख में, एक बुझती हुई सी
कराह...... यह बुझती कराह किसकी थी? यह किस समय का वर्णन है?
Answer: यह बुझती हुई कराह उस बिल्ली की थी जिसे देविन्दर लाल रोज बचा हुआ खाना खिलाते थे. यह वर्णन तब का है जब देविन्दर लाल ने रोटियों के बीच रखे कागज के पुर्जे में लिखे वाक्य के अनुसार पहले बिल्ली को खाना खिलाया. खाने में जहर मिला था, जिसे खाने पर बिल्ली की दर्दनाक मौत हो गई थी. यह घटना देविन्दर लाल की परिस्थितियों की गंभीरता को दर्शाती है.
In simple words: यह दर्दनाक कराह उस बिल्ली की थी, जिसे देविन्दर लाल ने जहर वाला खाना खिलाया था. यह उस समय का वर्णन है जब बिल्ली की जहर से मौत हो गई थी.
🎯 Exam Tip: कहानी के भावनात्मक और नाटकीय क्षणों को उनके सही संदर्भ और परिणामों के साथ स्पष्ट रूप से बताएं.
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. शरणदाता कहानी की मूल संवेदना और उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'शरणदाता' कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय की घटनाओं पर आधारित है. इसकी मूल संवेदना मानवतावादी आचरण करने की प्रेरणा देना और मानव-धर्म का संदेश देना है. कहानी दर्शाती है कि कैसे हैवानियत के बीच भी इंसानियत ज़िंदा रहती है. इसका उद्देश्य है कि लोग विपरीत परिस्थितियों में भी एक-दूसरे की मदद करें और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखें. कहानीकार इस संदेश को देने में पूरी तरह सफल रहा है.
In simple words: शरणदाता कहानी विभाजन के समय इंसानियत और हैवानियत दोनों को दिखाती है. इसका मुख्य संदेश है कि हमें हमेशा मानव-धर्म निभाना चाहिए और लोगों की मदद करनी चाहिए.
🎯 Exam Tip: किसी भी कहानी की मूल संवेदना और उद्देश्य बताते समय, उसके मुख्य विषय, संदेश और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डालें.
Question 2. “देश के बँटवारे के समय लाहौर में हैवानियत और इन्सानियत दोनों के दृश्य एक ही छत के नीचे दृष्टिगत होते हैं।” इस कथन के संबंध में अपने विचार लिखिए।
Answer: देश के बँटवारे के समय लाहौर में मानवता और क्रूरता दोनों एक साथ देखी जा सकती थीं. कहानी में देविन्दर लाल, रफीकुद्दीन, शेख अताउल्लाह और जैबुन्निसा जैसे पात्रों के माध्यम से यह दिखाया गया है. जहां एक तरफ अताउल्लाह जैसे लोग शरणागत की जान लेने पर उतारू थे, वहीं उसकी बेटी जैबुन्निसा जैसी इंसानियत थी जो मुश्किल हालातों में भी अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए खड़ी थी. यह दिखाता है कि कैसे सबसे बुरे समय में भी अच्छाई मौजूद रहती है.
In simple words: विभाजन के समय लाहौर में, कुछ लोग बहुत क्रूर थे और कुछ बहुत दयालु. कहानी दिखाती है कि एक ही जगह पर बुरे और अच्छे दोनों तरह के लोग मौजूद थे, जैसे जैबुन्निसा ने देविन्दर लाल की मदद की.
🎯 Exam Tip: जब किसी कथन पर अपने विचार व्यक्त करें, तो कहानी के पात्रों और घटनाओं का उदाहरण देकर अपने तर्क को मजबूत करें.
Question 3. यदि आप शेख अताउल्लाह के स्थान पर होते तो देविन्दर लाल के साथ कैसा व्यवहार करते? अपनी कल्पना के आधार पर लिखिए।
Answer: यदि मैं शेख अताउल्लाह की जगह होता, तो मैं देविन्दर लाल और ऐसे सभी पीड़ित लोगों की पूरी मदद करता. मैं उन्हें शरणार्थी मानकर किसी भी तरह की असुविधा या डर का शिकार नहीं होने देता. मैं कभी ऐसा धोखा नहीं देता, जैसा अताउल्लाह ने जहर देकर करने की कोशिश की. हमारी संस्कृति में शरणार्थी की रक्षा करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. मैं देविन्दर लाल के साथ एक सम्मानित अतिथि जैसा व्यवहार करता.
In simple words: अगर मैं अताउल्लाह होता, तो मैं देविन्दर लाल की पूरी मदद करता और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचने देता, क्योंकि मेहमानों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, अपनी कल्पना के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और कहानी के संदर्भ को जोड़ते हुए एक सुसंगत और संवेदनशील उत्तर लिखें.
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. "हम पडौसी की हिफाजत न कर सके तो मुल्क की हिफाजत क्या खाक करेंगे।” यह कथन है –
(क) जैबुन्निसा का
(ख) अताउल्लाह का
(ग) रफीकुद्दीन का
(घ) देविन्दर लाल का
Answer: (ग) रफीकुद्दीन का
In simple words: यह बात रफीकुद्दीन ने कही थी. इसका मतलब है कि अगर हम अपने पड़ोसियों की रक्षा नहीं कर सकते, तो देश की रक्षा कैसे करेंगे.
🎯 Exam Tip: कथन वाले प्रश्नों में, वक्ता को सही पहचानना और कथन के पीछे के गहरे अर्थ को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 2. "आप खुशी से न जाने देंगे तो मैं चुपचाप खिसक जाऊँगा।” यह कथन किसका
(क) शेख अताउल्लाह का
(ख) देविन्दर लाल का
Answer: (ख) देविन्दर लाल का
In simple words: यह कथन देविन्दर लाल का है. वह रफीकुद्दीन से यह बात कहते हैं, जब उन्हें लगता है कि उनके रुकने से रफीकुद्दीन को परेशानी हो रही है.
🎯 Exam Tip: पात्रों के संवादों को याद रखें और समझें कि वे किस भावना या स्थिति में ये बातें कह रहे हैं.
Question 3. "उन्होंने फिर दो फुलके उठाये और फिर रख दिये। हठात् वे चौंके"- देविन्दर लाल क्यों चौंके –
(क) अचानक दंगाई आ गये थे।
(ख) उन्हें अचानक कुछ याद आ गया था।
(ग) बढ़िया खाना देखकर।
(घ) फुलकों की तह के बीच में कागज की पुड़िया देखकर।
Answer: (घ) फुलकों की तह के बीच में कागज की पुड़िया देखकर।
In simple words: देविन्दर लाल इसलिए चौंके क्योंकि उन्होंने फुलकों के बीच में एक कागज की छोटी सी पुड़िया देखी थी.
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य मोड़ या रहस्य को उजागर करने वाले छोटे-छोटे एक्शन को याद रखना सहायक होता है.
Question 4. देविन्दर लाल को मन ग्लानि से उमड़ गया।” इसका क्या कारण था
(क) देश की बदतर स्थिति देखकर।
(ख) रफ़ीकुद्दीन की मजबूरी को समझकर।
(ग) अताउल्लाह द्वारा भोजन में विष मिला दिये जाने के कारण।
(घ) अपने परिजनों के बारे में सोचकर।
Answer: (ग) अताउल्लाह द्वारा भोजन में विष मिला दिये जाने के कारण।
In simple words: देविन्दर लाल को बहुत बुरा लगा क्योंकि उन्हें पता चला कि अताउल्लाह ने उनके खाने में जहर मिला दिया था. यह उनके भरोसे को तोड़ने जैसा था.
🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं के पीछे के सटीक कारणों को पहचानें और उन्हें कहानी की घटनाओं से जोड़ें.
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. रफीकुद्दीन का आग्रह स्वीकार करने पर भी देविन्दर लाल ने वहाँ रुकने में लाचारी बताते हुए क्या कहा?
Answer: रफीकुद्दीन का आग्रह मानने के बाद भी देविन्दर लाल ने अपनी लाचारी बताते हुए कहा कि सब लोग चले गए हैं और मैं आपके कहने पर रुका हूँ. मुझे आपसे डर नहीं है, पर माहौल डर, शक और अनिश्चितता से भर गया है. अब स्थिति बदल गई है. हर कोई एक-दूसरे पर शक कर रहा है और भरोसा टूट गया है. लोग अकारण ही दुश्मन बन रहे हैं, इसलिए मेरा यहाँ रुकना ठीक नहीं है. यह उनकी मजबूरी थी कि वे अपने दोस्त के साथ भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे.
In simple words: देविन्दर लाल ने कहा कि सब लोग चले गए हैं और अब माहौल डर और शक से भर गया है. लोगों का एक-दूसरे पर भरोसा टूट गया है, इसलिए उनका वहाँ रुकना सही नहीं है.
🎯 Exam Tip: पात्रों के संवादों को उनके संदर्भ और भावनात्मक स्थिति के साथ विश्लेषण करें, खासकर जब वे उनके आंतरिक संघर्ष को दर्शाते हों.
Question 2. अन्य हिन्दू परिवारों के मौजंग, लाहौर से पलायन कर जाने पर भी देविन्दर लाल वहाँ क्यों रुक गये थे?
Answer: देविन्दर लाल अपने मुसलमान पड़ोसी रफीकुद्दीन के भरोसे पर मौजंग में रुक गए थे. रफीकुद्दीन उनका बहुत अच्छा दोस्त था और उसने आश्वासन दिया था कि वह उन्हें किसी भी खतरे की सूचना पहले दे देगा और उनकी सुरक्षा का इंतजाम करेगा. देविन्दर लाल को दोस्ती पर बहुत विश्वास था और उन्होंने सोचा कि उनका दोस्त उनकी मदद जरूर करेगा. यह उस समय दोस्ती के रिश्ते की गहराई को दिखाता है.
In simple words: देविन्दर लाल अपने दोस्त रफीकुद्दीन के भरोसे पर मौजंग में रुके थे, क्योंकि रफीकुद्दीन ने उन्हें सुरक्षित रखने का वादा किया था.
🎯 Exam Tip: पात्रों के महत्वपूर्ण निर्णयों के पीछे की प्रेरणाओं को स्पष्ट करें और उनके चरित्र के पहलुओं को उजागर करें.
Question 3. रफीकुद्दीन का यह कहना बिल्कुल सही है कि अकेले व्यक्ति को तो भीड़ के सामने झुकना ही पड़ता है। वह अकेला उनसे अपनी बात नहीं मनवा सकता। जब समुदाय के बहुत से लोग दबाव बनाते हैं या दंगाई. लोग धमकी देते हैं तो देविन्दर लाल जैसे शरणागत के शरणदाता रफीकुद्दीन जैसे इन्सान लाचार हो जाते हैं और वे अकेले पड़ जाते हैं, ऐसे में उनका झुकना स्वाभाविक ही है। यह उनकी इच्छा नहीं विवशता है।
Answer: रफीकुद्दीन का यह कहना बिलकुल सही है कि अकेले व्यक्ति को भीड़ के सामने झुकना ही पड़ता है. अकेला व्यक्ति अपनी बात नहीं मनवा सकता. जब समुदाय के लोग दबाव डालते हैं या दंगाई धमकी देते हैं, तो रफीकुद्दीन जैसे इंसान भी देविन्दर लाल जैसे शरणागत की मदद करने में लाचार हो जाते हैं. उनका झुकना उनकी इच्छा नहीं बल्कि मजबूरी थी. यह दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति शक्तिशाली भीड़ के सामने बेबस हो जाता है, खासकर सांप्रदायिक हिंसा के दौरान. यह एक मुश्किल स्थिति को दर्शाता है जहां सही करना असंभव हो जाता है.
In simple words: रफीकुद्दीन का कहना सही था कि अकेले इंसान को भीड़ के आगे झुकना पड़ता है. जब दंगाई धमकी देते हैं, तो रफीकुद्दीन जैसे मददगार लोग भी बेबस हो जाते हैं. यह उनकी मजबूरी थी, इच्छा नहीं.
🎯 Exam Tip: सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत लाचारी के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, और कहानी में इसके उदाहरण दें.
Question 4. अपने शरणदाता रफीकुद्दीन को उनके समुदाय के लोगों से मिली धमकी के बाद धर्मसंकट की स्थिति में देखकर देविन्दर लाल की क्या प्रतिक्रिया थी?
Answer: रफीकुद्दीन को धर्मसंकट में देखकर देविन्दर लाल ने स्थिति की गंभीरता को समझा. उन्होंने रफीकुद्दीन से साफ़ कहा कि उनकी वजह से उन्हें अपमान और खतरा उठाना पड़ रहा है, इसलिए उन्हें अब जाना चाहिए. देविन्दर लाल ने कहा कि वे अकेले हैं, लेकिन रफीकुद्दीन के परिवार वाले हैं और लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं. उन्होंने रफीकुद्दीन का आभार व्यक्त किया और उनसे जाने की अनुमति मांगी. यह दिखाता है कि देविन्दर लाल दूसरों की परेशानी को समझते थे और अपने कारण किसी को खतरे में नहीं डालना चाहते थे.
In simple words: देविन्दर लाल ने देखा कि रफीकुद्दीन को अपने ही समुदाय से धमकी मिल रही है. उन्होंने रफीकुद्दीन से कहा कि अब उन्हें जाना चाहिए ताकि रफीकुद्दीन और उनके परिवार पर कोई खतरा न आए.
🎯 Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रियाओं का वर्णन करते समय, उनकी भावनाओं और तर्कों को स्पष्ट रूप से बताएं जो उनके निर्णयों को प्रभावित करते हैं.
Question 5. देविन्दर लाल को घर में रखने की वजह से धमकी मिलने के बाद रफीकुद्दीन ने देविन्दर लाल के प्रति कैसा व्यवहार किया?
Answer: धमकी मिलने के बाद रफीकुद्दीन धर्मसंकट में पड़ गया था और बहुत शर्मिंदा था. वह देविन्दर लाल से आँखें नहीं मिला पा रहा था. जब देविन्दर लाल ने पूछा कि लोगों ने क्या कहा, तो रफीकुद्दीन ने फिर आँखें झुका लीं. वह देविन्दर लाल को अपने घर में रख भी नहीं सकता था और उन्हें जाने के लिए भी नहीं कह सकता था, क्योंकि उसने ही उन्हें जबरदस्ती रोका था. उसे इस बात का बहुत दुःख था कि वह अब उनकी हिफाजत नहीं कर पा रहा है. यह स्थिति दोनों दोस्तों के लिए बहुत दर्दनाक थी.
In simple words: धमकी मिलने के बाद रफीकुद्दीन बहुत शर्मिंदा और दुखी था. वह देविन्दर लाल से सीधे बात भी नहीं कर पा रहा था और उन्हें सुरक्षित रखने में खुद को बेबस महसूस कर रहा था.
🎯 Exam Tip: पात्रों के व्यवहार में आए बदलावों को उनके कारणों और परिणामों के साथ जोड़कर समझाएं, खासकर जब वे बाहरी दबाव के कारण हों.
Question 6. रफीकुद्दीन और देविन्दर लाल ने परस्पर बहस के पश्चात् क्या तय किया था?
Answer: बहस के बाद यह तय हुआ कि देविन्दर लाल कुछ समय के लिए वहाँ से चले जाएंगे. रफीकुद्दीन अपने किसी मुसलमान दोस्त के यहाँ उन्हें छिपाने का इंतजाम करेंगे. वहाँ देविन्दर लाल को कुछ तकलीफ तो होगी, पर वह सुरक्षित रहेंगे. जान बचाने के बाद, वहां से सुरक्षित निकलने का कोई और उपाय सोचा जाएगा. यह एक अस्थायी समाधान था, ताकि देविन्दर लाल की जान बचाई जा सके.
In simple words: रफीकुद्दीन और देविन्दर लाल ने तय किया कि देविन्दर लाल कुछ समय के लिए दूसरी जगह छिप जाएंगे, जिसे रफीकुद्दीन अपने दोस्त के यहाँ इंतजाम करेगा.
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य निर्णयों और उनके पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 7. देविन्दर लाल का नया ठिकाना कौनसा था तथा कैसा था?
Answer: रफीकुद्दीन ने अपने मुसलमान दोस्त शेख अताउल्लाह के गैराज के पास बनी एक कोठरी में देविन्दर लाल के रहने की व्यवस्था करवाई थी. यह कोठरी एक छोटी और अँधेरी जगह थी, जहाँ उन्हें छिपकर रहना था. यह उनकी नई शरण थी, जो पुरानी जगह से ज्यादा सुरक्षित मानी गई थी, पर यह एक तरह की कैद थी. यह एक छोटी सी कोठरी थी जिसमें बस मुश्किल से गुजारा हो सकता था.
In simple words: देविन्दर लाल का नया ठिकाना रफीकुद्दीन के दोस्त अताउल्लाह के गैराज के पास एक छोटी कोठरी थी. यह एक अँधेरी और एकांत जगह थी जहाँ उन्हें छिपकर रहना था.
🎯 Exam Tip: कहानी में स्थानों के वर्णन को याद रखें और बताएं कि वे पात्रों के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं.
Question 8. देविन्दर लाल शेख अताउल्लाह के गैराज के पास बनी कोठरी में सामान रखकर उसके आँगन में हतबुद्धि क्यों खड़े हो गये?
Answer: देश की आज़ादी के साथ ही विभाजन की भयानक स्थिति ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया था. देविन्दर लाल जैसे लोग अपने ही इलाकों में छिपकर रहने या कैद होने को मजबूर हो गए थे. अताउल्लाह की कोठरी में ऊंची दीवारें, बंद ताले और चुपचाप रहने की मजबूरी देखकर देविन्दर लाल हतबुद्धि खड़े रह गए. वे सोचने लगे कि क्या यही आज़ादी है. पहले विदेशी अंग्रेज़ सरकार आज़ादी के लिए लड़ने वालों को कैद करती थी, और अब अपने ही लोग उन्हें बंदी बना रहे हैं. यह उनके मन में गहरे सवाल पैदा कर रहा था कि क्या यह वास्तव में स्वतंत्रता है. उन्हें ऐसा लग रहा था कि वे आज़ाद होने के बावजूद आज़ाद नहीं हैं.
In simple words: देविन्दर लाल अताउल्लाह के गैराज की कोठरी में सामान रखकर इसलिए चौंक गए क्योंकि उन्हें लगा कि आजादी मिलने के बाद भी वे अपने ही देश में एक कैदी की तरह रह रहे थे.
🎯 Exam Tip: पात्रों की आंतरिक भावनाओं और उनके विचारों को कहानी के बड़े संदर्भ (जैसे आजादी और विभाजन) से जोड़कर स्पष्ट करें.
Question 9. यह जानकर कि खाने में जहर मिला हो सकता है, देविन्दर लाल की मनःस्थिति कैसी थी?
Answer: जब देविन्दर लाल ने रोटियों के बीच रखी पर्ची पढ़कर जाना कि खाने में जहर मिला हो सकता है, तो उनका मन और दिमाग सुन्न पड़ गया. वे बेचैन होकर आंगन में टहलने लगे. उन्हें यह समझ आ गया कि जहर मिलाने का काम पिता (अताउल्लाह) ने किया है, और उनकी बेटी (जैबुन्निसा) ने उन्हें सावधान किया है. उनके मन में बार-बार जैबू का नाम घूमता रहा. जैबुन्निसा के प्रति उनका लगाव पहले से ही था, और अब उन्होंने देविन्दर लाल पर एक बड़ा एहसान कर दिया था. इस जानकारी से उनके मन में निराशा और कृतज्ञता दोनों एक साथ उमड़ पड़े थे.
In simple words: जहर मिले होने की बात जानकर देविन्दर लाल बहुत परेशान हो गए. उनका मन सुन्न पड़ गया और वे जैबुन्निसा के प्रति कृतज्ञ महसूस करने लगे, जिसने उन्हें बचाया था.
🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं का वर्णन करते समय, उनके आंतरिक विचारों और बाहरी प्रतिक्रियाओं दोनों को शामिल करें, और उनके कारणों को स्पष्ट करें.
Question 10. बिलार को जहरीला खाना खिलाने से पूर्व देविन्दर लाल ने उसके प्रति कैसा व्यवहार किया? अपने शब्दों में समझाइये।
Answer: जहरीला खाना खिलाने से पहले देविन्दर लाल ने बहुत प्यार से बिल्ली को गोद में लिया, उसे पुचकारा और उसकी पीठ सहलाई. उन्होंने मन ही मन बिल्ली से माफी मांगी और धीरे-धीरे कहा कि "देख बेटा, तुम मेरे मेहमान हो और मैं शेख साहब का मेहमान हूँ. वे जो मेरे साथ करने जा रहे हैं, वही मैं न चाहते हुए भी तुम्हारे साथ करने जा रहा हूँ." देविन्दर लाल का मन बहुत व्यथित था, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह सब करना पड़ा. वह उस मूक प्राणी से क्षमा मांगते रहे. यह दृश्य देविन्दर लाल की मानवीयता और उनकी मजबूरी को दर्शाता है.
In simple words: जहरीला खाना देने से पहले, देविन्दर लाल ने बिल्ली को बहुत प्यार किया और उसे समझाया कि वे यह सब मजबूरी में कर रहे हैं. उन्होंने मन ही मन बिल्ली से माफ़ी मांगी.
🎯 Exam Tip: ऐसे संवेदनशील दृश्यों का वर्णन करते समय, पात्रों की भावनाओं, उनके कार्यों और उनके पीछे की मजबूरी को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें.
Question 11. बिलार की साँसें थम जाने के पश्चात् देविन्दर लाल के मन में उठे विचारों को व्यक्त कीजिए।
Answer: बिल्ली की साँसें रुकने के बाद देविन्दर लाल स्तब्ध रह गए. वे हिल भी नहीं पाए और खाने को घूरते रहे. उनके मन में कई भावनाएं उमड़-घुमड़ रही थीं. उन्हें आज़ादी, भाईचारा, देश-प्रेम जैसे शब्द बेमानी लगने लगे, जैसे ये सब केवल धोखा थे. उन्हें हकीकत का सामना करना पड़ा कि एक दोस्त ने जबरदस्ती रोका और फिर घर से निकाल दिया, दूसरे ने शरण दी लेकिन जहर दे दिया. वे सोचने लगे कि क्या दोस्ती और वादों का यही मतलब था. यह घटना उनके मन में गहरी निराशा भर गई थी.
In simple words: बिल्ली की मौत देखकर देविन्दर लाल को बहुत गहरा सदमा लगा. उन्हें लगा कि दोस्ती और आज़ादी के सारे वादे झूठे थे और उन्हें केवल धोखा मिला.
🎯 Exam Tip: पात्रों के मन में उठने वाले विचारों और भावनाओं को कहानी के मुख्य विषयों, जैसे धोखा, विश्वासघात और मानव-संबंधों से जोड़कर बताएं.
Question 12. देविन्दर लाल ने जाना कि दुनिया में खतरा बुरे की ताकत के कारण नहीं, अच्छे की दुर्बलता के कारण है।” स्पष्ट कीजिए।
Answer: देविन्दर लाल ने समझा कि दुनिया में खतरा बुराई की शक्ति के कारण नहीं, बल्कि अच्छाई की कमजोरी के कारण है. इसका मतलब यह है कि जब अच्छे लोग बुरे लोगों का विरोध नहीं करते या कमजोर पड़ जाते हैं, तो बुराई हावी हो जाती है. कहानी में अताउल्लाह जैसे बुरे लोग तब तक मजबूत रहते हैं जब तक रफीकुद्दीन जैसे अच्छे लोग भीड़ के सामने लाचार हो जाते हैं. अगर अच्छे लोग मजबूत होते और एकजुट होकर बुराई का सामना करते, तो बुराई कभी इतनी ताकतवर नहीं बन पाती. यह एक गहरा विचार है कि निष्क्रिय अच्छाई भी बुराई को बढ़ावा देती है.
In simple words: देविन्दर लाल ने महसूस किया कि दुनिया में बुराई इसलिए फैलती है क्योंकि अच्छे लोग कमजोर पड़ जाते हैं या उसका विरोध नहीं करते. अगर अच्छे लोग मजबूत होते, तो बुराई इतनी हावी नहीं होती.
🎯 Exam Tip: दार्शनिक या विचारात्मक कथनों की व्याख्या करते समय, कहानी के पात्रों और घटनाओं का उदाहरण देकर अपने तर्क को समर्थन दें.
Question 13. देविन्दर लाल अताउल्लाह द्वारा रची गई साजिश से कैसे बच निकले?
Answer: देविन्दर लाल अताउल्लाह द्वारा रची गई साजिश से बच निकले क्योंकि अताउल्लाह की बेटी जैबुन्निसा ने इसकी काट कर दी थी. जैबुन्निसा ने खाने में जहर होने की चेतावनी एक कागज के टुकड़े पर लिखकर रोटियों के बीच रख दी थी. जैबुन्निसा की सलाह मानकर देविन्दर लाल ने पहले खाना बिल्ली को खिलाया. जहर के असर से बिल्ली की तुरंत मौत हो गई, जिससे देविन्दर लाल को पता चल गया कि खाना जहरीला है और उनकी जान बच गई. जैबुन्निसा की मानवता ने देविन्दर लाल की जान बचाई.
In simple words: देविन्दर लाल अताउल्लाह की साजिश से इसलिए बच गए क्योंकि जैबुन्निसा ने उन्हें एक पर्ची के जरिए खाने में जहर होने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद उन्होंने खाना बिल्ली को खिलाकर सच्चाई जान ली.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, घटनाक्रमों को तार्किक क्रम में बताएं और बताएं कि कैसे एक घटना दूसरी घटना का कारण बनी.
Question 14. देविन्दर लाल लाहौर छोड़ते समय अपने साथ क्या लेकर गया?
Answer: देविन्दर लाल लाहौर छोड़ते समय अपने सामान में से केवल एक कागज, दो फोटो, एक सेविंग बैंक की पासबुक और एक बड़ा सा लिफाफा निकालकर एक शेरवानीनुमा कोट पहनकर गया. लेकिन वह अपने दिल में गहरे ज़ख्म लेकर गया था, जो उन्हें शरणदाता कहलाने वाले लोगों ने दिए थे. जिन पर उन्होंने विश्वास किया था, उन्हीं ने उन्हें धोखा दिया. इस प्रकार वह अपने हृदय में कभी न मिटने वाले घाव लेकर लाहौर से गए, क्योंकि इंसानों का भरोसा तोड़ दिया गया था.
In simple words: देविन्दर लाल लाहौर छोड़ते समय कुछ कागज़ात, फोटो और एक कोट लेकर गए थे. लेकिन सबसे बड़ी चीज़ जो वे ले गए, वह अपने दिल के गहरे घाव थे जो धोखे और विश्वासघात से मिले थे.
🎯 Exam Tip: पात्रों द्वारा ले जाई गई भौतिक वस्तुओं के साथ-साथ उनकी भावनात्मक स्थिति और अनुभवों का भी वर्णन करें, क्योंकि वे कहानी में गहरे अर्थ रखते हैं.
Question 15. "....... घटनाएँ सब अधूरी होती हैं, पूरी तो कहानी होती है।" अज्ञेय के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: अज्ञेय का यह कथन दर्शाता है कि असल जीवन की घटनाएँ अक्सर अधूरी रहती हैं और उनका परिणाम हमेशा हमारी सोच के हिसाब से नहीं होता. वे अचानक घटती हैं और किसी विशेष तर्क या उद्देश्य से नहीं जुड़ी होतीं. वहीं, एक कहानी पूरी होती है, उसमें तर्क, विवेक और सौंदर्य होता है. कहानीकार अपनी और पाठकों की भावनाओं के अनुसार कहानी को एक निश्चित अंत तक पहुंचाता है. देविन्दर लाल के जीवन की लाहौर छोड़ने के बाद की घटना को लेखक ने इसी आधार पर बताना ज़रूरी नहीं समझा है, क्योंकि वह कहानी को एक पूर्णता देना चाहता था.
In simple words: अज्ञेय का मतलब है कि असल जीवन में घटनाएं कभी पूरी नहीं होतीं, पर एक कहानी को हमेशा एक पूरा और तार्किक अंत दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: लेखक के दार्शनिक विचारों की व्याख्या करते समय, इसे कहानी के कथानक और पात्रों से जोड़कर उदाहरण दें.
RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. "यह कभी हो ही नहीं सकता, देविन्दर लाल जी।” यह कथन किसका है? इसमें निहित भावों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह कथन देविन्दर लाल के पड़ोसी और मित्र रफीकुद्दीन का है. इसमें पूर्ण आत्मविश्वास और आग्रह का भाव छिपा है. रफीकुद्दीन यह कहना चाहता है कि जब तक वह मौजूद है, देविन्दर लाल को अपना घर-बार छोड़कर कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं है. वह अपने दोस्त की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेना चाहता है. यह कथन उनकी गहरी दोस्ती और वफादारी को दिखाता है. रफीकुद्दीन देविन्दर लाल को अकेला नहीं छोड़ना चाहता था.
In simple words: यह बात रफीकुद्दीन ने देविन्दर लाल से कही थी. इसमें उसकी गहरी दोस्ती और भरोसा दिखता है, वह नहीं चाहता था कि देविन्दर लाल अपना घर छोड़कर जाएं.
🎯 Exam Tip: किसी भी कथन में निहित भावनाओं को स्पष्ट करने के लिए, पात्र के व्यक्तित्व, उसके संबंधों और कहानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखें.
Question 2. बँटवारे के समय देविन्दर लाल के पड़ौस के हिन्दू परिवारों की मानसिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।
Answer: बँटवारे के समय देविन्दर लाल के पड़ोस के हिन्दू परिवारों में अविश्वास, अनिश्चितता और असमंजस का माहौल था. भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ अल्पसंख्यकों की हालत एक जैसी थी. लाहौर में देविन्दर लाल के पड़ोसी हिन्दू परिवार पूछते थे, "लालाजी, आपने क्या सलाह बनाई है?" और जवाब मिलता था, "देखी जाएगी." शाम या अगली सुबह देविन्दर लाल देखते कि वे चुपचाप अपना सामान लेकर कहीं चले गए हैं. कुछ लाहौर से बाहर, तो कुछ हिन्दू मोहल्लों में. इस प्रकार अल्पसंख्यक हिन्दू लोग बहुत असुरक्षा, आशंका और अविश्वास से भरे थे और आत्मरक्षा के लिए सतर्क थे. यह एक बहुत ही तनावपूर्ण मानसिक स्थिति थी.
In simple words: बँटवारे के समय देविन्दर लाल के पड़ोसी हिन्दू परिवार बहुत डरे हुए और भ्रमित थे. उन्हें नहीं पता था कि क्या करना चाहिए, इसलिए वे चुपचाप अपने घरों से चले गए थे.
🎯 Exam Tip: सामाजिक-ऐतिहासिक संदर्भों वाले प्रश्नों में, उस समय के माहौल और लोगों की भावनाओं का सटीक वर्णन करें.
Question 3. “मैं तो इसे मेजारिटी का फर्ज मानता हूँ कि वह माइनारिटी की हिफाजत करे। 'रफीकुद्दीन के इस कथन के संदर्भ में वस्तुस्थिति को स्पष्ट कीजिए कि क्या बहुसंख्यकों ने अल्पसंख्यकों की हिफाजत की थी?
Answer: रफीकुद्दीन का यह कथन कि बहुमत का कर्तव्य है कि वह अल्पसंख्यकों की रक्षा करे, विभाजन के समय की सच्चाई को दर्शाता है. दोनों तरफ ऐसी कई घटनाएँ हुईं जहाँ बहुसंख्यक समुदाय ने अल्पसंख्यकों की हिफाजत की. उन्होंने जान पर खेलकर उन्हें सुरक्षित रखा, खाने-पीने और रहने का इंतजाम किया, और सुरक्षित जगह पहुँचाया. कई लोगों ने तो अपनी जान भी गंवा दी. दूसरी तरफ, कई दंगाई भी थे जिन्होंने लूटपाट, मारकाट और आगजनी की घटनाएँ कीं. असामाजिक तत्वों ने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया. लेकिन लाखों अल्पसंख्यकों का सुरक्षित एक जगह से दूसरी जगह जाना बहुसंख्यकों की कर्तव्यपरायणता का ही परिणाम था. यह दिखाता है कि इंसानियत हर जगह मौजूद थी.
In simple words: रफीकुद्दीन ने कहा कि बहुसंख्यकों का कर्तव्य है कि वे अल्पसंख्यकों की रक्षा करें. विभाजन के समय, कुछ बहुसंख्यकों ने जान पर खेलकर अल्पसंख्यकों की मदद की, जबकि कुछ ने उन पर अत्याचार भी किए.
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के कथन का विश्लेषण करते समय, कहानी की घटनाओं और व्यापक सामाजिक-ऐतिहासिक संदर्भों के साथ उसकी पुष्टि या खंडन करें.
Question 4. विभाजन के समय लाहौर के वातावरण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: विभाजन के समय लाहौर का वातावरण द्वेष, घृणा और हिंसा से भर गया था. सांप्रदायिक संगठनों ने माहौल को भयानक बना दिया था. शहर लगभग वीरान हो गया था, लाशें सड़ रही थीं, अल्पसंख्यकों के घर और दुकानें लूटकर जला दी गई थीं. हर जगह डर, आशंका और अनिश्चितता थी. गुंडे, बदमाश और असामाजिक तत्व हावी थे, और शरीफ लोग लाचार थे. पुलिस और नौकरशाही भी अक्सर नकारात्मक भूमिका में थी. धोखे और विश्वासघात की घटनाएँ बढ़ गई थीं. हालाँकि, कहीं-कहीं सद्भावना और सहयोग का माहौल भी दिखता था, पर वह भी डरा हुआ और आशंकित ही प्रतीत होता था. यह एक बहुत ही भयावह समय था.
In simple words: विभाजन के समय लाहौर में नफरत, हिंसा और डर का माहौल था. शहर वीरान हो गया था, लोग असुरक्षित थे और हर तरफ लूटपाट थी. कुछ सद्भावना भी थी, पर वह भी डरी हुई थी.
🎯 Exam Tip: किसी स्थान के वातावरण का वर्णन करते समय, भौतिक स्थिति, सामाजिक माहौल और लोगों की भावनाओं को शामिल करें.
Question 5. लेकिन खुदा जिसे घर से निकालता है, उसे फिर गली में भी पनाह नहीं देता।”देविन्दर लाल पर यह कथन किस प्रकार घटित होता है?
Answer: यह कथन देविन्दर लाल के जीवन पर पूरी तरह से लागू होता है. उन्हें पहले अपने घर से निकलना पड़ा क्योंकि रफीकुद्दीन उन्हें अपने घर में नहीं रख पा रहा था. फिर जब वे रफीकुद्दीन के दोस्त अताउल्लाह के यहाँ शरण लेने गए, तो वहाँ भी अताउल्लाह ने उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश की. इस प्रकार देविन्दर लाल को किसी भी जगह शांति और सुरक्षा नहीं मिल पाई. उन्हें अपनी जान बचाकर वहां से भी भागना पड़ा. यह दिखाता है कि कैसे बुरी किस्मत उनका पीछा कर रही थी, और उन्हें कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं मिल पा रहा था.
In simple words: देविन्दर लाल को पहले अपना घर छोड़ना पड़ा, फिर जिस दोस्त के यहाँ शरण ली, उसी ने उन्हें जहर देने की कोशिश की. इस तरह उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिली, जैसे खुदा ने उन्हें हर जगह से निकाल दिया हो.
🎯 Exam Tip: पात्रों के जीवन पर किसी कथन के प्रभाव को स्पष्ट करते समय, कहानी की घटनाओं से सीधा संबंध स्थापित करें और परिणामों को स्पष्ट करें.
Question 6. “द्वेष, घृणा और साम्प्रदायिकता की आग ने जहाँ लोगों के तन ही नहीं आत्मा को भी झुलसा दिया था, ऐसे में कुछ मन को सुकून देने वाले दृश्य भी देखने को मिले जिन्होंने मरहम लगाने का काम किया।” ऐसे किसी उदाहरण का उल्लेख कीजिए।
Answer: विभाजन के समय, जहां हर तरफ नफरत और हिंसा थी, वहीं कुछ ऐसे दृश्य भी थे जिन्होंने लोगों के दिलों को सुकून दिया. एक उदाहरण यह है कि हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की सीमा के पास एक गांव में कई सौ मुसलमानों ने सिखों के गांव में शरण ली थी. जब आसपास के गांवों और अमृतसर के लोगों ने दबाव डाला, तो गांव के लोगों ने अपने मेहमानों को अमृतसर पहुंचाने का फैसला किया. लगभग ढाई सौ लोगों ने कृपाण निकालकर उन्हें स्टेशन पहुंचाया और किसी को नुकसान नहीं पहुंचने दिया. यह इंसानियत और सद्भाव का एक बेहतरीन उदाहरण था, जिसने सांप्रदायिक उन्माद से झुलसे लोगों पर मरहम लगाने का काम किया. यह घटना इंसानियत का एक श्रेष्ठ उदाहरण पेश करती है.
In simple words: विभाजन के समय, जब नफरत हर तरफ थी, तब भी इंसानियत के कुछ पल देखने को मिले. जैसे, एक गांव में सिखों ने मुसलमानों को शरण दी और फिर सुरक्षित जगह पहुंचाया, यह एक सुखद दृश्य था.
🎯 Exam Tip: किसी भावनात्मक कथन के समर्थन में कहानी से विशिष्ट उदाहरणों का प्रयोग करें, जो उस कथन की सत्यता को सिद्ध करते हों.
Question 7. रफीकुद्दीन और उसके घर पर मिलने आये छः-सात लोगों के बीच क्या बातचीत हई होगी? कल्पना के आधार पर लिखिए।
Answer: रफीकुद्दीन और उन लोगों के बीच करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई होगी. देविन्दर लाल ने कुछ शब्द सुने जैसे 'बेवकूफी', 'गद्दारी', 'इस्लाम' आदि. इसके आधार पर कल्पना की जा सकती है कि उन लोगों ने रफीकुद्दीन से कहा होगा कि "तुमने एक काफ़िर को अपने घर में पनाह देकर बड़ी बेवकूफी की है. यह हरकत पूरी मुसलमान कौम और अपने मुल्क के साथ गद्दारी है. तुम्हारा यह गैर-जिम्मेदाराना कदम इस्लाम के खिलाफ है.” रफीकुद्दीन ने भी अपने फर्ज, दोस्ती, इंसानियत, और शरणार्थी की हिफाजत आदि बातें कहकर अपना पक्ष मजबूती से रखा होगा. यह बातचीत बहुत तनावपूर्ण रही होगी.
In simple words: रफीकुद्दीन और उन छह-सात लोगों के बीच लंबी बहस हुई होगी. उन लोगों ने रफीकुद्दीन को एक काफ़िर को शरण देने के लिए कोसा होगा, और रफीकुद्दीन ने अपनी दोस्ती और इंसानियत का बचाव किया होगा.
🎯 Exam Tip: कल्पना-आधारित प्रश्नों में, कहानी के पात्रों की प्रकृति और परिस्थितियों के अनुरूप तर्कपूर्ण संवाद प्रस्तुत करें.
Question 8. देविन्दर लाल शेख अताउल्लाह के गैराज के पास बनी कोठरी में सामान रखकर उसके आँगन में हतबुद्धि क्यों खड़े हो गये?
Answer: देश की आज़ादी और विभाजन ने करोड़ों लोगों को बेघर कर दिया था, और देविन्दर लाल भी उन्हीं में से एक थे. उन्हें अताउल्लाह की कोठरी में छिपकर रहना पड़ा. कोठरी की ऊंची दीवारें, बंद ताले और चुपचाप रहने की मजबूरी देखकर देविन्दर लाल हतबुद्धि खड़े रह गए. वे सोचने लगे कि क्या यही आज़ादी है? पहले विदेशी सरकार आजादी के लिए लड़ने वालों को कैद करती थी, और अब अपने ही लोग उन्हें बंदी बना रहे हैं. यह उनके मन में गहरी निराशा और सवाल पैदा कर रहा था कि क्या यह वास्तव में स्वतंत्रता है या सिर्फ एक नई तरह की कैद.
In simple words: देविन्दर लाल अताउल्लाह के गैराज की कोठरी में सामान रखकर इसलिए चौंक गए क्योंकि उन्हें लगा कि आजादी मिलने के बाद भी वे अपने ही देश में एक कैदी की तरह रह रहे थे. यह देखकर वे बहुत दुखी हुए.
🎯 Exam Tip: पात्रों के आंतरिक संघर्ष और भावनाओं को कहानी के मुख्य विषय (जैसे आज़ादी और विभाजन) से जोड़कर बताएं.
Question 9. अताउल्लाह की कोठरी में देविन्दर लाल किस प्रकार समय व्यतीत करते थे?
अथवा
शेख अताउल्लाह की शरण में रह रहे देविन्दर लाल की दिनचर्या का वर्णन कीजिए।
Answer: देविन्दर लाल शाम को खाना मिलने पर उसे एक ही बार में खा लेते और बचा हुआ खाना बिल्ली को खिला देते थे. बिल्ली उनसे बहुत घुल-मिल गई थी और इधर-उधर खेलती रहती थी. रात को वे कोठरी की खाट पर सो जाते थे. सुबह उठकर आंगन में थोड़ी कसरत करते थे ताकि शरीर ठीक रहे. बाकी दिन कोठरी में बैठे कंकड़ों से खेलते, आंगन की दीवार पर बैठी गौरैया को देखते, कबूतरों की गुटरगूं सुनते या शेख साहब के घर के लोगों की बातचीत सुनते हुए बिताते थे. वे सबकी आवाज़ें पहचानने लगे थे. इस प्रकार वे अपना पूरा समय अकेले और शांत रहकर बिताते थे. उन्होंने हर छोटी सी चीज़ में खुशी ढूंढ ली थी.
In simple words: देविन्दर लाल कोठरी में अकेले रहते थे. वे खाना खाते, बिल्ली से खेलते, सुबह कसरत करते और बाकी समय गौरैया या कबूतरों को देखते हुए बिताते थे.
🎯 Exam Tip: किसी पात्र की दिनचर्या का वर्णन करते समय, छोटे-छोटे विवरणों को शामिल करें जो उसके जीवन की परिस्थितियों और आंतरिक स्थिति को दर्शाते हों.
Question 10. शेख अताउल्लाह के यहाँ शरणार्थी रहते हुए देविन्दर लाल को किस चीज से और क्यों लगाव हो गया था?
Answer: शेख अताउल्लाह के यहाँ शरणार्थी रहते हुए देविन्दर लाल को उनकी बेटी जैबुन्निसा की आवाज से लगाव हो गया था. वह घर की जवान लड़की थी और उसकी आवाज बहुत मधुर और नम्र थी. उसकी आवाज से देविन्दर लाल को लगा कि वह बहुत विनम्र और कोमल स्वभाव की है. इसलिए वे अपने मन में उठने वाली रोमांटिक भावनाओं को खुद ही रोकते थे. वे खाना खाते समय यह भी सोचते थे कि खाना किसने बनाया और किसने परोसा होगा, और उन्हें लगता था कि यह काम जैबुन्निसा का है. इन सब बातों से देविन्दर लाल को जैबुन्निसा की आवाज से लगाव हो गया था. जैबुन्निसा केवल विनम्र ही नहीं, बल्कि इंसानियत के कई गुणों से भी भरी हुई थी, जैसा कि कहानी के घटनाक्रमों से स्पष्ट होता है. एक मुश्किल समय में उन्हें यह आवाज़ एक उम्मीद की किरण लगी.
In simple words: देविन्दर लाल को जैबुन्निसा की मधुर आवाज से लगाव हो गया था. वे सोचते थे कि वह विनम्र और कोमल स्वभाव की होगी, और यह आवाज़ उनके अकेलेपन में एक सुखद अहसास दिलाती थी.
🎯 Exam Tip: पात्रों के भावनात्मक लगाव के कारणों का वर्णन करते समय, उनके आंतरिक अनुभवों और बाहरी प्रभावों को स्पष्ट रूप से जोड़ें.
Question 11. “घने बादल से रात नहीं होती, सूरज के निस्तेज हो जाने से होती है।”? इस पंक्ति में निहित भाव को समझाइये।
Answer: इस पंक्ति का मतलब है कि असल संकट बाहरी परिस्थितियों (जैसे घने बादल) से नहीं आता, बल्कि आंतरिक शक्ति (जैसे सूरज) के कमजोर पड़ने से आता है. यह दिखाता है कि बुराई की ताकत तब बढ़ती है जब अच्छाई कमजोर पड़ जाती है या अपना प्रभाव खो देती है. कहानी में देविन्दर लाल और रफीकुद्दीन जैसे अच्छे लोग जब सांप्रदायिक उन्माद के सामने कमजोर पड़ जाते हैं, तो बुराई हावी हो जाती है. यह पंक्ति सिखाती है कि बाहरी समस्याएं उतनी खतरनाक नहीं होतीं जितनी हमारी अपनी हिम्मत और शक्ति का कम होना. यह एक गहरा विचार है कि हमें अपनी आंतरिक शक्ति को बनाए रखना चाहिए.
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि रात घने बादलों से नहीं होती, बल्कि सूरज के कमजोर पड़ने से होती है. यानी, समस्या बाहरी वजहों से नहीं आती, बल्कि हमारी अपनी अंदरूनी ताकत के कम होने से आती है.
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक या गहन अर्थ वाली पंक्तियों की व्याख्या करते समय, उसके शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उसके गहरे, दार्शनिक या नैतिक संदेश को भी स्पष्ट करें.
Question 12. व्यक्ति होते हुए भी बुरी ताकतों से मुकाबला करने में अक्षम साबित होते हैं। इसी प्रकार जैबुन्निसा अच्छाई की पक्षधर है, परन्तु बुराई के प्रतीक अपने पिता अताउल्लाह के षड्यन्त्र का खुलेआम विरोध करने का उसमें साहस नहीं है।
Answer: यह कथन सच है कि व्यक्ति अपनी इच्छा से अच्छाई के पक्षधर होते हुए भी, कई बार बुरी ताकतों के सामने मुकाबला करने में अक्षम हो जाते हैं. जैबुन्निसा अच्छाई का प्रतीक है, लेकिन उसमें इतनी हिम्मत नहीं कि वह अपने पिता अताउल्लाह की बुरी साजिश का खुलेआम विरोध कर सके. उसने चुपचाप देविन्दर लाल को चेतावनी दी, लेकिन अपने पिता से सीधी टक्कर नहीं ली. यह दिखाता है कि कैसे सबसे अच्छे लोग भी कई बार डर या सामाजिक दबाव के कारण बुराई का खुलकर सामना नहीं कर पाते. यह मानव स्वभाव की एक कमजोरी को उजागर करता है. वह एक संवेदनशील इंसान थी, जिसने सही काम करने का साहस दिखाया, भले ही वह चुपचाप ही क्यों न हो.
In simple words: जैबुन्निसा अच्छी थी, लेकिन अपने पिता की बुरी साजिश का खुलकर विरोध नहीं कर पाई. उसने चुपचाप देविन्दर लाल की मदद की, जिससे पता चलता है कि अच्छे लोग भी कभी-कभी बुरी ताकतों के सामने लाचार हो जाते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के चरित्र की सीमाओं का वर्णन करते समय, उसकी अच्छाई के साथ-साथ उसकी कमजोरियों या मजबूरी को भी स्पष्ट करें.
Question 13. "तब उन्हें एक दिन लाहौर की मुहर वाली एक छोटी सी चिट्ठी मिली थी।” यह चिट्टी किसकी थी तथा इसमें क्या लिखा था?
Answer: यह चिट्ठी जैबुन्निसा ने देविन्दर लाल को लिखी थी. इसमें लिखा था कि आप सुरक्षित बच गए, इसके लिए खुदा का लाख-लाख शुक्र है. जैबुन्निसा ने यह भी कहा कि रेडियो पर जिनके नाम की अपील की है, वे सब सलामती से आपके पास पहुँच जाएं. उसने अपने पिता की करतूत के लिए क्षमा मांगी और याद दिलाया कि उसने ही रोटियों के बीच कागज में संदेश भेजकर उन्हें बचाया था. वह कहती है कि वह कोई एहसान नहीं जताना चाहती, बस एक प्रार्थना करती है कि आपके मुल्क में कोई भी अल्पसंख्यक हो, तो आप इंसानियत के नाते उसकी हिफाजत करें. यह चिट्ठी जैबुन्निसा की महानता और मानवतावादी संदेश को दिखाती है.
In simple words: यह चिट्ठी जैबुन्निसा ने देविन्दर लाल को लिखी थी. इसमें उसने बताया कि वह सुरक्षित हैं और उनसे आग्रह किया कि वे भी अपने देश में किसी अल्पसंख्यक की इंसानियत के नाते रक्षा करें.
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पत्रों की सामग्री और उनके पीछे के संदेशों को स्पष्ट रूप से बताएं, क्योंकि वे पात्रों के चरित्र और कहानी के उद्देश्य को उजागर करते हैं.
Question 14. कहानी के तत्त्वों के आधार पर 'शरणदाता' कहानी की समीक्षा कीजिए।
Answer: 'शरणदाता' कहानी भारत की आजादी और विभाजन की त्रासदी पर आधारित है. इसमें कहानी के सभी तत्व अच्छी तरह से शामिल हैं:
1. **कथानक:** कहानी का कथानक विभाजन की घटना पर आधारित, सुसंगठित और दिलचस्प है.
2. **पात्र या चरित्र:** देविन्दर लाल, रफीकुद्दीन, जैबुन्निसा, अताउल्लाह जैसे प्रमुख पात्र कहानी के अनुसार चित्रित किए गए हैं.
3. **संवाद या कथोपकथन:** कहानी में संवाद परिस्थिति और घटना के अनुकूल और बहुत प्रभावशाली हैं.
4. **भाषा-शैली:** 'शरणदाता' की भाषा पात्रों के अनुसार उर्दू शब्दावली से युक्त है, जो रोचक, सजीव और प्रतीकात्मक है.
5. **वातावरण:** कहानी विभाजन के समय के हालातों को बहुत बारीकी से दर्शाती है, जिससे कहानी पूरी तरह सफल लगती है.
6. **उद्देश्य:** कहानी अपनी मूल संवेदना विभाजन के भयावह दृश्यों को प्रस्तुत करते हुए शरणार्थी की रक्षा, सांप्रदायिक सद्भाव और मानवता की सेवा का संदेश देने में पूरी तरह सफल रही है.
इस कहानी में सभी तत्व आपस में मिलकर एक मजबूत और प्रभावशाली संदेश देते हैं.
In simple words: 'शरणदाता' कहानी विभाजन के समय की है, जिसमें कथानक, पात्र, संवाद, भाषा और वातावरण सभी बहुत अच्छे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य इंसानियत और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश देना है.
🎯 Exam Tip: कहानी की समीक्षा करते समय, प्रत्येक तत्व (कथानक, पात्र, संवाद आदि) पर अलग-अलग बिंदु बनाकर उसे कहानी के संदर्भ से जोड़कर स्पष्ट करें.
Question 15. देविन्दर लाल के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं को संक्षेप में बताइये।
Answer: देविन्दर लाल के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. **धार्मिक सहिष्णुता:** वे हर धर्म का सम्मान करते हैं और सभी के प्रति समान व्यवहार रखते हैं.
2. **मानवीय आचरण:** वे मुश्किल समय में भी इंसानियत दिखाते हैं.
3. **मातृभूमि से प्रेम:** उन्हें अपनी जन्मभूमि लाहौर से बहुत प्यार था, इसलिए वे सब के जाने पर भी वहीं रहना चाहते थे.
4. **शिष्ट और समझदार:** वे विनम्र और समझदार व्यक्ति थे.
5. **संवेदनशील और कोमल हृदय:** उनके मन में दूसरों के प्रति दया और संवेदना थी.
6. **निडरता:** उनके चरित्र में निडरता का गुण भी दिखता है, क्योंकि वे खतरे के बावजूद सही का साथ देते हैं.
7. **सांप्रदायिक सद्भाव का पक्षधर:** वे सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में विश्वास रखते थे.
देविन्दर लाल एक आदर्श व्यक्ति थे, जिनका चरित्र कई अच्छे गुणों का भंडार था. वे इंसानियत के सच्चे प्रतीक थे.
In simple words: देविन्दर लाल एक दयालु, समझदार और निडर व्यक्ति थे जिन्हें अपनी मातृभूमि से बहुत प्यार था. वे सभी धर्मों का सम्मान करते थे और सांप्रदायिक सद्भाव में विश्वास रखते थे.
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के चरित्र का वर्णन करते समय, उसकी मुख्य विशेषताओं को बिंदुओं में लिखें और प्रत्येक बिंदु को कहानी के उदाहरणों से जोड़ें.
Question 16. रफीकुद्दीन एक वफादार मित्र और जिम्मेदार नागरिक हैं।” इस कथन की समीक्षा करते हुए रफीकुद्दीन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
अथवा
रफीकुद्दीन के चरित्र के महत्त्वपूर्ण गुणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: रफीकुद्दीन अज्ञेय जी की कहानी 'शरणदाता' के एक महत्वपूर्ण पात्र हैं, जो पेशे से वकील हैं और देविन्दर लाल के मित्र हैं. उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. **वफादार मित्र:** वे देविन्दर लाल के घनिष्ठ और वफादार मित्र हैं. अपनी आत्मीयता के कारण ही वे देविन्दर लाल को जाने से रोकते हैं और उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करते हैं.
2. **जिम्मेदार नागरिक:** वे लाहौर के एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदार नागरिक हैं, जिनका समाज में मान-सम्मान है.
3. **सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक:** रफीकुद्दीन अपने हिन्दू मित्र को अपने घर में शरण देकर सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करते हैं.
4. **संघर्षशील और दृढ़निश्चयी:** वे विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हैं और अपने दृढ़ निश्चय पर कायम रहते हैं.
5. **आत्मविश्वास से परिपूर्ण:** रफीकुद्दीन का व्यक्तित्व आत्मविश्वास से भरा हुआ है.
6. **संवेदनशील हृदय:** वे संवेदनशील हैं और वक्त की नजाकत को समझते हैं.
संक्षेप में कहा जा सकता है कि रफीकुद्दीन एक प्रभावशाली और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी हैं, जिन्होंने इंसानियत का संदेश दिया.
In simple words: रफीकुद्दीन एक वफादार और जिम्मेदार व्यक्ति थे. वे अपने हिन्दू दोस्त देविन्दर लाल को शरण देकर सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहरण देते हैं और मुश्किल समय में भी संघर्ष करते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के व्यक्तित्व का विश्लेषण करते समय, उसके मुख्य गुणों को बिंदुओं में सूचीबद्ध करें और कहानी के उदाहरणों से उन्हें प्रमाणित करें.
Question 17. “जैबुन्निसा का चरित्र 'शरणदाता' कहानी के कथ्य या उद्देश्य को साकार करने वाला है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जैबुन्निसा एक विनम्र और कोमल हृदय वाली युवती है. वह देविन्दर लाल के मित्र रफीकुद्दीन के दोस्त अताउल्लाह की बेटी है. जैबुन्निसा का चरित्र 'शरणदाता' कहानी के मुख्य संदेश और उद्देश्य को पूरी तरह साकार करता है. कहानी का मुख्य संदेश मानवता और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना है, जो जैबुन्निसा के कार्यों से स्पष्ट होता है. जब उसके पिता अताउल्लाह देविन्दर लाल को जहर देने की साजिश रचते हैं, तो जैबुन्निसा अपनी जान जोखिम में डालकर देविन्दर लाल को चेतावनी देती है और उनकी जान बचाती है. वह बाद में देविन्दर लाल को एक पत्र भी लिखती है, जिसमें वह अपने पिता की करतूत के लिए माफी मांगती है और उनसे अपने मुल्क में किसी भी अल्पसंख्यक की इंसानियत के नाते हिफाजत करने का अनुरोध करती है. इस प्रकार, जैबुन्निसा मानवीय मूल्यों, कोमलता, संवेदनशीलता, पवित्रता और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है. वह कहानी में एक आदर्श पात्र के रूप में चित्रित की गई है, जो नफरत और हिंसा के माहौल में उम्मीद की किरण जगाती है.
In simple words: जैबुन्निसा का चरित्र 'शरणदाता' कहानी के मुख्य संदेश को दिखाता है. उसने अपने पिता के खिलाफ जाकर देविन्दर लाल की जान बचाई और मानवता का पाठ पढ़ाया, जिससे कहानी का उद्देश्य पूरा होता है.
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के योगदान को स्पष्ट करते समय, उसके कार्यों को कहानी के मुख्य संदेश और उद्देश्य से सीधा जोड़कर बताएं.
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