Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Economics Chapter 21 बेरोजगारी
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RBSE Class 11 Economics Chapter 21 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. बेरोजगारी से संबधित आँकड़े भारत में एकत्रित करता है
(अ) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया
(ब) स्टेट बैंक आफ इण्डिया
(स) नाबार्ड
(द) राष्ट्रीय सेम्पल सर्वेक्षण संगठन
Answer: (द) राष्ट्रीय सेम्पल सर्वेक्षण संगठन
In simple words: भारत में बेरोजगारी के आंकड़े राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा एकत्र किए जाते हैं। यह संगठन सरकारी योजनाओं और नीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि NSSO भारत में रोजगार, बेरोजगारी, गरीबी और अन्य सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के लिए प्रमुख संस्था है।
Question 2. निम्न में से बेरोजगारी का सबसे व्यापक मापन कौन-सा है?
Answer:
🎯 Exam Tip: यदि किसी प्रश्न के विकल्प या उत्तर स्पष्ट न हों, तो ऐसे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार ही उत्तर लिखें या छोड़ दें।
Question 3. एक मानक रोजगार वर्ष में समाहित है?
(अ) प्रतिदिन 6 घण्टे वर्ष में 275 दिन
(ब) प्रतिदिन 8 घण्टे वर्ष में 273 दिन
(स) प्रतिदिन 8 घण्टे वर्ष में 275 दिन
(द) प्रतिदिन 8 घण्टे वर्ष में 280 दिन
Answer: (ब) प्रतिदिन 8 घण्टे वर्ष में 273 दिन
In simple words: एक मानक रोजगार वर्ष तब माना जाता है जब एक व्यक्ति साल में 273 दिन, हर दिन 8 घंटे काम करता है। यह मानक रोजगार मापने और बेरोजगारी की गणना करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: मानक रोजगार वर्ष का आंकड़ा श्रमिकों की उत्पादकता और रोजगार की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. वर्ष 2011-12 में सी.डी.एस. (चाल दैनिक स्थिति) के अनुसार भारत में कितने व्यक्ति श्रम बल में शामिल थे?
(अ) 483.5 मिलियन
(ब) 440.2 मिलियन
(स) 472.9 मिलियन
(द) 415.7 मिलियन
Answer: (ब) 440.2 मिलियन
In simple words: 2011-12 में, भारत में लगभग 440.2 मिलियन लोग ऐसे थे जो काम करने के लिए तैयार थे और काम की तलाश में थे। चालू दैनिक स्थिति लोगों के हर दिन के काम की स्थिति को देखती है, चाहे उन्हें पूरा दिन काम मिला हो या केवल कुछ घंटे।
🎯 Exam Tip: 'चालू दैनिक स्थिति' (CDS) रोजगार की दैनिक गतिविधियों का अधिक सटीक मूल्यांकन प्रदान करती है।
Question 5. वर्ष 2011-12 में सी.डी.एस. (चालू दैनिक स्थिति) के अनुसार बेरोजगारी का कितने प्रतिशत था?
(अ) 2.2 प्रतिशत
(ब) 5.6 प्रतिशत
(स) 7.2 प्रतिशत
(द) 1.2 प्रतिशत
Answer: (ब) 5.6 प्रतिशत
In simple words: 2011-12 के दौरान, भारत में 'चालू दैनिक स्थिति' के अनुसार 5.6 प्रतिशत लोग बेरोजगार थे। यह आंकड़ा उस समय की आर्थिक स्थिति और रोजगार बाजार को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी दर की गणना करते समय, हमेशा ध्यान दें कि किस मापन विधि (जैसे CDS, USS, CWS) का उपयोग किया गया है, क्योंकि वे भिन्न परिणाम दे सकते हैं।
Question 6. वर्ष 2011-12 में भारत में कुल रोजगार का सर्वाधिक हिस्सा किसका था?
(अ) मजदूरी रोजगार
Answer:
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप प्रश्न को ध्यान से पढ़ें और सभी दिए गए विकल्पों को देखें ताकि सही उत्तर का चुनाव कर सकें।
Question 7. कृषि में आवश्यकता से अधिक श्रम लगा रहता है इसके कारण श्रम की उत्पादकता कम होती है। इस अतिरिक्त श्रम को कृषि से प्रथक कर दिया जाये तो उत्पादन कम नहीं होगा। यह निम्न प्रकार की बेरोजगारी है
(अ) संरचनात्मक बेरोजगारी
(ब) छिपी बेरोजगारी
(स) चक्रीय बेरोजगारी
(द) मौसमी बेरोजगारी
Answer: (ब) छिपी बेरोजगारी
In simple words: छिपी बेरोजगारी तब होती है जब किसी काम में ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हों, और अगर उनमें से कुछ को हटा भी दिया जाए, तो भी काम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे में, हर व्यक्ति की उत्पादकता (काम करने की क्षमता) कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: छिपी बेरोजगारी अक्सर कृषि क्षेत्र में देखी जाती है, जहाँ एक ही खेत पर पूरे परिवार के सदस्य काम करते हैं, भले ही उनकी पूरी क्षमता का उपयोग न हो रहा हो।
Question 8. व्यापार चक्र में मंदी के दौरान उत्पादन कम हो जाता है व श्रमिकों की छंटनी करनी पड़ती है। यह बेरोजगारी का कौन-सा प्रकार है?
(अ) मौसमी बेरोजगारी
(ब) चक्रीय बेरोजगारी
(स) छिपी बेरोजगारी
(द) संरचनात्मक बेरोजगारी
Answer: (ब) चक्रीय बेरोजगारी
In simple words: चक्रीय बेरोजगारी तब आती है जब अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही होती है। मांग कम होने के कारण कंपनियाँ उत्पादन कम कर देती हैं और कर्मचारियों को निकालना पड़ता है। यह बेरोजगारी अस्थायी होती है और अर्थव्यवस्था में सुधार होने पर अक्सर कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: चक्रीय बेरोजगारी सीधे तौर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव (तेजी और मंदी) से जुड़ी होती है।
Question 9. वर्ष 2011-12 में शिक्षित युवा (15 से 29 वर्ष आय व माध्यमिक से ऊपर शिक्षा स्तर) में बेरोजगारी दर सामान्य स्तर (प्रधान + अनुषंगी) निम्न में से किस वर्ग में सर्वाधिक थी?
(अ) ग्रामीण पुरुषों में
(ब) ग्रामीण महिलाओं में
(स) नगरीय पुरुषों में
(द) शहरी महिलाओं में
Answer: (द) शहरी महिलाओं में
In simple words: 2011-12 में, 15 से 29 साल की शहरी शिक्षित महिलाओं में बेरोजगारी सबसे ज्यादा थी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिक्षा के स्तर के बावजूद रोजगार के अवसर सभी वर्गों के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं थे।
🎯 Exam Tip: लिंग और निवास स्थान (शहरी/ग्रामीण) के आधार पर बेरोजगारी दरों में अंतर अक्सर सामाजिक-आर्थिक कारकों और शिक्षा प्रणाली में असमानताओं को दर्शाता है।
Question 10. बेरोजगारी की समस्या के निदान के लिए कौन-सा उपाय प्रयोग में लाया जाना चाहिए?
Answer:
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के समाधान के लिए कौशल विकास, शिक्षा प्रणाली में सुधार और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर विचार करें।
RBSE Class 11 Economics Chapter 21 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मानक व्यक्ति वर्ष क्या है?
Answer: मानक व्यक्ति वर्ष यह बताता है कि एक व्यक्ति ने पूरे साल में कितने दिन और कितने घंटे काम किया है। अगर कोई साल में 273 दिन, हर दिन 8 घंटे काम करता है, तो उसे एक मानक व्यक्ति वर्ष का रोजगार मिला माना जाता है। यह एक पैमाना है जिससे अलग-अलग लोगों के रोजगार की तुलना की जा सकती है।
In simple words: मानक व्यक्ति वर्ष यह मापने का एक तरीका है कि किसी व्यक्ति ने पूरे साल में कितना काम किया। अगर कोई साल में 273 दिन, हर दिन 8 घंटे काम करता है, तो वह एक मानक व्यक्ति वर्ष के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: मानक व्यक्ति वर्ष की परिभाषा में दिन और घंटों की संख्या (273 दिन, 8 घंटे) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. सामान्य स्थिति बेरोजगारी मापन का अर्थ लिखिए।
Answer: सामान्य स्थिति बेरोजगारी उन लोगों को मापती है जिन्हें सर्वे से एक साल पहले तक कोई काम नहीं मिला था। यह उन व्यक्तियों का मापन है जो सर्वेक्षण अवधि के पूर्व के एक वर्ष में किसी भी प्रकार के रोजगार में नहीं होते हैं। यह तरीका किसी व्यक्ति की साल भर की रोजगार स्थिति का आकलन करता है, चाहे उसे थोड़ा-बहुत काम मिला हो या नहीं।
In simple words: सामान्य स्थिति बेरोजगारी उन लोगों को मापती है जिन्हें सर्वे से एक साल पहले तक कोई काम नहीं मिला। यह लंबे समय की बेरोजगारी को दिखाता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य स्थिति बेरोजगारी दीर्घकालिक बेरोजगारी को दर्शाती है और इसे मुख्य रूप से 'सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय' द्वारा जारी किया जाता है।
Question 3. साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी मापन का अर्थ लिखिए।
Answer: साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी यह देखती है कि क्या किसी व्यक्ति को पिछले सात दिनों में कम से कम एक घंटे का काम भी नहीं मिला। अगर उसे एक घंटे का काम भी नहीं मिला, तो उसे उस पूरे हफ्ते के लिए बेरोजगार गिना जाता है। यह माप कम समय की बेरोजगारी को समझने में मदद करता है।
In simple words: साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी यह बताती है कि पिछले एक हफ्ते में कितने लोगों को एक घंटा भी काम नहीं मिला। अगर उन्हें एक घंटा भी काम नहीं मिला, तो वे पूरे हफ्ते के लिए बेरोजगार माने जाते हैं।
🎯 Exam Tip: साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी अल्पकालिक या मध्यमकालिक बेरोजगारी की गतिशीलता को दर्शाने में अधिक उपयोगी है।
Question 4. चालू दैनिक स्थिति बेरोजगारी का अर्थ लिखिए।
Answer: चालू दैनिक स्थिति बेरोजगारी हर दिन के आधार पर रोजगार को मापती है। इसमें व्यक्ति के रोजगार के बारे में देखा जाता है। यदि व्यक्ति किसी भी दिन एक घण्टे तक रोजगार में होता है तो उसे आधे दिन के लिए रोजगार में माना जाता है। चार घण्टों से अधिक रोजगार में होने पर उसे पूरे दिन के लिये रोजगार में माना जाता है। यह तरीका रोजगार की बारीकी को समझने में मदद करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो अनियमित काम करते हैं।
In simple words: चालू दैनिक स्थिति बेरोजगारी हर दिन के रोजगार को देखती है। अगर किसी को एक घंटे भी काम मिला, तो आधा दिन रोजगार माना जाता है। चार घंटे से ज़्यादा काम पर पूरा दिन रोजगार गिना जाता है।
🎯 Exam Tip: यह विधि श्रमिकों के दैनिक रोजगार पैटर्न और श्रम बाजार की सूक्ष्म गतिशीलता को समझने में विशेष रूप से सहायक है।
Question 5. वर्ष 2011-12 में भारत में सामान्य स्थिति तथा चालू दैनिक स्थिति के अनुसार बेरोजगारी की दर कितनी थी?
Answer: 2011-12 में भारत में, 'सामान्य स्थिति' के अनुसार बेरोजगारी 2.2% थी, जबकि 'चालू दैनिक स्थिति' के अनुसार यह 56% बेरोजगारी दर थी। ये आंकड़े अलग-अलग तरीकों से बेरोजगारी को मापने के कारण अलग-अलग दिखते हैं। अलग-अलग मापन विधियाँ बेरोजगारी की विभिन्न गहराइयों और प्रकारों को समझने में सहायक होती हैं।
In simple words: 2011-12 में, भारत में सामान्य स्थिति से बेरोजगारी 2.2% थी, जबकि चालू दैनिक स्थिति से यह 56% थी। ये दरें बेरोजगारी को मापने के अलग-अलग तरीकों से मिली हैं।
🎯 Exam Tip: सामान्य स्थिति (USS) दीर्घकालिक बेरोजगारी को दर्शाती है, जबकि चालू दैनिक स्थिति (CDS) अल्पकालिक और दैनिक रोजगार के उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करती है।
Question 6. वर्ष 2011-12 में भारत में नियुक्त व्यक्ति व व्यक्ति दिवस का आकार सामान्य स्थिति व चालू दैनिक स्थिति के अनुसार लिखिए।
Answer: वर्ष 2011-12 में भारत में, सामान्य स्थिति के अनुसार 472.9 मिलियन व्यक्ति नियुक्त थे। वहीं, चालू दैनिक स्थिति के अनुसार 415.7 मिलियन व्यक्ति दिवस रोजगार में थे। ये दो अलग-अलग तरीके हैं काम की मात्रा मापने के। व्यक्ति दिवस का आंकड़ा बताता है कि कुल कितने दिन का काम हुआ, न कि कितने लोग काम पर थे।
In simple words: 2011-12 में, 'सामान्य स्थिति' के अनुसार 472.9 मिलियन लोग काम पर थे। 'चालू दैनिक स्थिति' के अनुसार कुल 415.7 मिलियन व्यक्ति-दिन का काम हुआ।
🎯 Exam Tip: 'नियुक्त व्यक्ति' लोगों की संख्या को संदर्भित करता है, जबकि 'व्यक्ति दिवस' कुल किए गए काम के दिनों की संख्या को दर्शाता है, जो आंशिक रोजगार को भी शामिल करता है।
Question 8. बेरोजगारी उन्मूलन के लिए अपनाई गई मजदूरी रोजगार कार्यक्रमों में किन्हीं दो कार्यक्रमों के नाम लिखिए।
Answer: बेरोजगारी खत्म करने के लिए सरकार ने दो बड़े कार्यक्रम चलाए थे:
1. ग्रामीण भूमिहीन रोजगार कार्यक्रम।
2. सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना।
ये कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काम देकर उनकी आय बढ़ाने के लिए बनाए गए थे।
In simple words: सरकार ने बेरोजगारी दूर करने के लिए 'ग्रामीण भूमिहीन रोजगार कार्यक्रम' और 'सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना' जैसे दो कार्यक्रम शुरू किए।
🎯 Exam Tip: मजदूरी रोजगार कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को न्यूनतम मजदूरी पर काम के अवसर प्रदान करके उनकी आजीविका को सहारा देते हैं।
Question 9. भारत में बेरोजगारी की समस्या के उत्तरदायी कोई दो कारण दीजिए।
Answer: भारत में बेरोजगारी के दो मुख्य कारण हैं:
1. जनसंख्या व श्रम दर में वृद्धि।
2. अनुपयुक्त शिक्षा प्रणाली।
कौशल की कमी और जनसंख्या का दबाव दोनों ही रोजगार के अवसरों को सीमित करते हैं।
In simple words: भारत में बेरोजगारी के दो बड़े कारण हैं: आबादी का बहुत तेज़ी से बढ़ना और हमारी शिक्षा का नौकरी के हिसाब से ठीक न होना।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि और शिक्षा-कौशल के बीच असंतुलन भारत में बेरोजगारी के प्रमुख संरचनात्मक कारण हैं।
Question 10. ग्रामीण क्षेत्र में पायी जाने वाली बेरोजगारी के कोई दो प्रकार लिखिए।
Answer: गांवों में दो मुख्य तरह की बेरोजगारी होती है:
1. प्रच्छन्न बेरोजगारी।
2. मौसमी बेरोजगारी।
प्रच्छन्न बेरोजगारी अक्सर खेती में और मौसमी बेरोजगारी खेती के साथ-साथ छोटे-मोटे ग्रामीण व्यवसायों में पाई जाती है।
In simple words: ग्रामीण इलाकों में दो तरह की बेरोजगारी होती है: 'छिपी हुई बेरोजगारी' (जहाँ ज़रूरत से ज़्यादा लोग काम करते हैं) और 'मौसमी बेरोजगारी' (जो साल के खास समय में ही काम मिलने से होती है)।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण क्षेत्रों में इन दोनों प्रकार की बेरोजगारी से निपटने के लिए गैर-कृषि रोजगार के अवसर बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Economics Chapter 21 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. बेरोजगारी का अर्थ लिखिए।
Answer: बेरोजगारी उस स्थिति को कहते हैं जब कोई व्यक्ति काम करने के लायक हो और काम करना भी चाहता हो, लेकिन उसे काम न मिले। जो लोग काम करने के लायक नहीं हैं (जैसे बच्चे या बूढ़े) या जो काम करना ही नहीं चाहते, उन्हें बेरोजगार नहीं गिना जाता। कई बार जो लोग अपना खुद का काम कर रहे होते हैं, उनमें भी कम उत्पादन और कम कमाई के रूप में बेरोजगारी दिख सकती है। यह देश के आर्थिक विकास में एक बड़ी बाधा है।
In simple words: बेरोजगारी का मतलब है जब कोई व्यक्ति काम कर सकता है, काम चाहता भी है, पर उसे काम नहीं मिलता। जो बच्चे, बूढ़े या जो काम करना नहीं चाहते, वे बेरोजगार नहीं कहलाते। कभी-कभी अपना काम करने वालों की भी कमाई कम होती है, वह भी एक तरह की छिपी बेरोजगारी है।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी की परिभाषा में 'काम करने की योग्यता' और 'इच्छा' दोनों शब्दों को शामिल करना आवश्यक है।
Question 3. मौसमी बेरोजगारी का अर्थ लिखिए।
Answer: मौसमी बेरोजगारी उन लोगों में दिखती है जो ऐसे उद्योगों या कामों में लगे हैं जो किसी खास मौसम या त्योहार पर ही चलते हैं। जैसे, खेती में काम करने वालों को मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है, तो उन्हें साल के कुछ महीनों में ही काम मिलता है और बाकी समय वे बेरोजगार रहते हैं। यह कम रोजगार की एक स्थिति है। यह समस्या खासकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में अधिक देखी जाती है।
In simple words: मौसमी बेरोजगारी तब होती है जब लोगों को साल के कुछ खास मौसम में ही काम मिलता है, जैसे खेती में। बाकी समय वे काम के बिना रहते हैं, क्योंकि उनका काम मौसम पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: मौसमी बेरोजगारी को कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार के अवसरों का विकास महत्वपूर्ण है।
Question 4. भारत में बेरोजगारी मापन के तीन मानक लिखिए।
Answer: भारत में बेरोजगारी को मापने के लिए तीन मुख्य तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है:
1. सामान्य स्थिति बेरोजगारी
2. साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी
3. दैनिक स्थिति बेरोजगारी
ये तीनों मापदंड देश में बेरोजगारी की पूरी तस्वीर समझने में मदद करते हैं।
In simple words: भारत में बेरोजगारी को तीन तरीकों से मापा जाता है: सालभर में कितने लोग बेरोजगार रहे (सामान्य), एक हफ्ते में कितने (साप्ताहिक), और हर दिन कितने (दैनिक)।
🎯 Exam Tip: इन तीनों मानकों का उपयोग करके बेरोजगारी की प्रकृति और गंभीरता का व्यापक मूल्यांकन किया जा सकता है।
Question 5. भारत में शिक्षित बेरोजगारी का स्तर बताइए।
Answer: शिक्षा मानव विकास का एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है, क्योंकि यह लोगों के काम करने की क्षमता को बढ़ाती है। भारत में शिक्षित बेरोजगारी की स्थिति इस तरह से है: पहला, शहरों और गांवों में, जिन लोगों ने माध्यमिक स्तर से कम पढ़ाई की है, उनकी तुलना में माध्यमिक या उससे ज़्यादा पढ़े-लिखे लोगों में बेरोजगारी ज़्यादा है। दूसरा, शहरी और ग्रामीण इलाकों में, शिक्षित महिलाओं में बेरोजगारी की दर शिक्षित पुरुषों से ज़्यादा है, और यह अंतर उच्च शिक्षा के स्तरों पर और भी बढ़ जाता है। यह दर्शाता है कि केवल शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल और रोजगार के अवसरों का मिलान भी ज़रूरी है।
In simple words: भारत में पढ़े-लिखे लोगों में भी बेरोजगारी है। जिन लोगों ने 10वीं से ज्यादा पढ़ाई की है, उनमें काम मिलना मुश्किल हो रहा है। खासकर, शहरी और ग्रामीण दोनों जगह पढ़ी-लिखी महिलाओं को पुरुषों से ज़्यादा बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: शिक्षित बेरोजगारी से निपटने के लिए शिक्षा प्रणाली को बाजार की मांगों के अनुरूप ढालना और कौशल विकास पर जोर देना आवश्यक है।
Question 6. भारत में शहरी क्षेत्र में प्रमुख रोजगार गतिविधियों के क्षेत्र लिखिए।
Answer: शहरी क्षेत्र में रोजगार की मुख्य गतिविधियों में समय के साथ बदलाव आया है। 2004-05 से 2011-12 के बीच प्राथमिक क्षेत्र (जैसे कृषि) में रोजगार का हिस्सा कम हुआ है। वहीं, द्वितीयक क्षेत्र (जैसे विनिर्माण) और तृतीयक क्षेत्र (जैसे सेवाएँ) में रोजगार का हिस्सा बढ़ा है। हालांकि, प्राथमिक क्षेत्र अभी भी रोजगार प्रदान करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है। यह बदलाव अक्सर आर्थिक विकास और शहरीकरण के साथ आता है।
In simple words: शहरों में ज़्यादा लोग अब फैक्ट्रियों और सर्विस सेक्टर (जैसे दुकानें, ऑफिस) में काम कर रहे हैं। खेती में काम करने वाले लोग अब कम हो गए हैं। पर फिर भी, खेती का सेक्टर अभी भी सबसे ज़्यादा लोगों को काम देता है।
🎯 Exam Tip: शहरीकरण और औद्योगिक विकास के साथ-साथ तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ते हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 21 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. बेरोजगारी के विभिन्न प्रकार लिखिए व बताइये कि विकासशील देशों में बेरोजगारी की समस्या विकसित देशों में बेरोजगारी की समस्या से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: बेरोजगारी के मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:
1. **संरचनात्मक बेरोजगारी:** यह लंबे समय तक रहती है और अर्थव्यवस्था की बनावट में कमी के कारण होती है। यह तब होती है जब पूँजी निर्माण की गति श्रम से धीमी होती है, जिससे काम के अवसर कम हो जाते हैं।
2. **प्रच्छन्न बेरोजगारी:** इसमें व्यक्ति काम पर लगे दिखते हैं, लेकिन उनकी वास्तविक ज़रूरत नहीं होती, जैसे खेती में। अगर उन्हें हटा भी दिया जाए तो उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यह विकासशील देशों में ज़्यादा दिखती है।
3. **मौसमी बेरोजगारी:** यह तब होती है जब लोगों को साल के कुछ खास मौसमों में ही काम मिलता है, जैसे कृषि में। बाकी समय वे बेरोजगार रहते हैं।
4. **चक्रीय बेरोजगारी:** यह अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण होती है, जब उत्पादन घटता है और श्रमिकों की छंटनी होती है। यह विकसित देशों में आम है।
5. **घर्षणात्मक बेरोजगारी:** यह तब होती है जब श्रमिक एक नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी की तलाश में होते हैं और इस बीच कुछ समय के लिए बेरोजगार रहते हैं।
**विकासशील और विकसित देशों में अंतर:**
विकासशील देशों में बेरोजगारी मुख्य रूप से कृषि पर ज़्यादा निर्भरता और औद्योगिक विकास की कमी के कारण होती है, जहाँ ज़रूरतों से ज़्यादा लोग खेती में लगे होते हैं। वहीं, विकसित देशों में बेरोजगारी ज़्यादातर व्यापार चक्र (मंदी-तेज़ी) और संरचनात्मक बदलावों के कारण होती है। बेरोजगारी का प्रकार उस देश की अर्थव्यवस्था की प्रकृति और विकास के स्तर को दर्शाता है।
In simple words: बेरोजगारी कई तरह की होती है: संरचनात्मक (अर्थव्यवस्था की बनावट की कमी से), प्रच्छन्न (जरूरत से ज्यादा लोग काम पर), मौसमी (खास मौसम में काम), चक्रीय (मंदी के कारण) और घर्षणात्मक (एक नौकरी से दूसरी में जाने के बीच)। विकासशील देशों में यह खेती पर ज्यादा निर्भरता से होती है, जबकि विकसित देशों में यह व्यापार के उतार-चढ़ाव या नई तकनीक आने से होती है।
🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्नों में विभिन्न प्रकार की बेरोजगारी को उनके कारणों और विकसित व विकासशील देशों में उनके प्रभावों के साथ समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. भारत में रोजगार व बेरोजगारी की स्थिति पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारत में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति को समझने के लिए विभिन्न स्रोतों से आंकड़े इकट्ठा किए जाते हैं, जैसे जनगणना रिपोर्ट, NSSO की रिपोर्ट, रोजगार कार्यालय के आंकड़े और श्रम ब्यूरो के सर्वेक्षण। इन सभी स्रोतों के आंकड़ों में उनके अलग-अलग उद्देश्यों और तरीकों के कारण अंतर होता है।
शहरी क्षेत्रों में मुख्य रूप से औद्योगिक और शिक्षित बेरोजगारी पाई जाती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी बेरोजगारी, मौसमी बेरोजगारी और खुली बेरोजगारी अधिक होती है। इसका मतलब यह नहीं कि गांवों में शिक्षित बेरोजगार नहीं हैं, लेकिन शहरों में शारीरिक श्रम करने वाले लोग ज़्यादातर बेरोजगार माने जाते हैं।
NSSO के चालू दैनिक स्थिति (CDS) के अनुसार, 1999-2000 में 336.9 मिलियन व्यक्ति दिवस रोजगार में थे, जो 2004-05 में बढ़कर 382.8 मिलियन और 2011-12 में 415.7 मिलियन हो गए।
भारत में दीर्घकालिक सामान्य बेरोजगारी 2011-12 में 5.2% थी, जो 1999-2000 में 7.3% से कम हो गई थी। वहीं, CDS (दीर्घकालिक व अदृश्य) बेरोजगारी 1999-2000 में 7.3% से बढ़कर 2004-05 में 8.2% हो गई थी, जो 2011-12 में घटकर 5.6% रह गई। 2004-05 से 2011-12 के बीच रोजगार में कम वृद्धि के बावजूद बेरोजगारी में कमी देखी गई थी। ये आंकड़े सरकार को आर्थिक नीतियाँ बनाने में मदद करते हैं।
In simple words: भारत में रोजगार और बेरोजगारी की जानकारी कई जगहों से मिलती है, जैसे जनगणना और सरकारी सर्वेक्षण। शहरों में पढ़े-लिखे और उद्योगों में काम करने वाले लोग बेरोजगार होते हैं, जबकि गांवों में छिपी और मौसमी बेरोजगारी ज़्यादा होती है। सालों से रोजगार की संख्या बढ़ी है, पर रोजगार की वृद्धि दर श्रम शक्ति की वृद्धि के मुकाबले धीमी रही है।
🎯 Exam Tip: भारत में बेरोजगारी की स्थिति का वर्णन करते समय, विभिन्न मापन मानकों (सामान्य, साप्ताहिक, दैनिक) और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में उनके अंतर का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. भारत में श्रम बल व रोजगार की दशा के संबंध में राष्ट्रीय क्षेत्र सर्वेक्षण संगठन के प्रमुख निष्कर्षों को रेखांकित कीजिए।
Answer: भारत में श्रम बल और रोजगार की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
**श्रम बल में वृद्धि:**
सामान्य स्थिति (U.S.) के अनुसार, 1999-2000 में श्रम बल 407 मिलियन व्यक्ति था, जो 2004-05 में बढ़कर 409 मिलियन और 2011-12 में 483.7 मिलियन हो गया।
चालू दैनिक स्थिति के अनुसार, 1999-2000 में श्रम बल 363.3 मिलियन व्यक्ति था, जो 2004-05 में 417 मिलियन और 2011-12 में 440.2 मिलियन हो गया। इसका मतलब है कि दोनों पैमानों पर 1999-2000 से 2011-12 के बीच श्रम बल लगातार बढ़ा है।
**व्यक्ति दिवस रोजगार:**
राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन के अनुसार, सामान्य स्थिति (U.S.) में 1999-2000 में 368 मिलियन व्यक्ति और व्यक्ति दिवस रोजगार में थे, जो 2004-05 में बढ़कर 457.9 मिलियन और 2011-12 में 472.9 मिलियन हो गए।
चालू दैनिक स्थिति (CDS) के अनुसार, 1999-2000 में 336.9 मिलियन व्यक्ति और व्यक्ति दिवस रोजगार की स्थिति में थे, जो 2004-05 में बढ़कर 382.8 मिलियन और 2011-12 में 415.7 मिलियन हो गए।
**रोजगार वृद्धि में गिरावट:**
रोजगार की वार्षिक वृद्धि दर में कमी आई है। 1999-2000 से 2004-05 के दौरान यह 28% थी, जो 2004-05 से 2011-12 के दौरान घटकर केवल 0.5% रह गई। वहीं, श्रम शक्ति की वार्षिक वृद्धि दर इन्हीं अवधियों में क्रमशः 29% और 0.4% रही। यह दिखाता है कि रोजगार की वृद्धि दर बढ़ती हुई श्रम शक्ति के मुकाबले पर्याप्त नहीं थी। ये आंकड़े सरकार को रोजगार पैदा करने की नीतियों को बनाने में मदद करते हैं।
In simple words: भारत में श्रम बल (काम करने वाले लोग) और रोजगार की संख्या साल 1999 से 2012 के बीच लगातार बढ़ी है। हालांकि, काम पर लगे लोगों की संख्या में वृद्धि उतनी तेजी से नहीं हुई जितनी तेजी से काम करने के इच्छुक लोगों की संख्या बढ़ी है, जिससे रोजगार की कमी बनी हुई है।
🎯 Exam Tip: NSSO के आंकड़ों में 'सामान्य स्थिति' और 'चालू दैनिक स्थिति' के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे रोजगार के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं।
Question 4. भारत में बेरोजगारी की समस्या के लिए उत्तरदायी कारणों को रेखांकित कीजिए।
Answer: भारत में बेरोजगारी की समस्या के कई मुख्य कारण हैं:
1. **कम विकास और असंतुलित विकास मॉडल:** देश में पर्याप्त विकास न होने और विकास के तरीके सही न होने से कृषि से लोग तो हटे, पर उन्हें दूसरे कामों में पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाया। इससे गांवों में छिपी बेरोजगारी बढ़ी और लोग काम की तलाश में शहरों की ओर चले गए, जहाँ उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
2. **जनसंख्या और श्रम बल में भारी वृद्धि:** आज़ादी के बाद मृत्यु दर कम हुई और जन्म दर ज़्यादा रही, जिससे जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ी (1951 में 36 करोड़ से 2011 में 121 करोड़)। शिक्षा का प्रसार और महिलाओं में काम करने की इच्छा बढ़ने से काम करने वाले लोगों की संख्या भी बहुत बढ़ गई। लेकिन इतनी तेज़ी से रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पाए कि इस बढ़ती आबादी को काम मिल सके।
3. **योजनाओं में कमी:** हमारी योजनाएँ मानव संसाधनों को विकसित करने पर उतना ध्यान नहीं दे पाईं। शिक्षा प्रणाली केवल क्लर्क और निचले स्तर के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करती रही, जबकि उद्योगों की ज़रूरतों के हिसाब से कौशल विकास नहीं हो पाया। ये सभी कारक मिलकर देश में बेरोजगारी को एक बड़ी चुनौती बनाते हैं।
In simple words: भारत में बेरोजगारी के मुख्य कारण हैं: देश का विकास बहुत धीमा रहा और रोजगार पैदा नहीं हुए; जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ी जिससे काम खोजने वाले लोग ज्यादा हो गए; और शिक्षा ऐसी नहीं है जो लोगों को नौकरी के लिए सही कौशल सिखाए।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के कारणों का विश्लेषण करते समय, अल्पविकास, जनसंख्या दबाव और शिक्षा प्रणाली की कमियों जैसे प्रमुख संरचनात्मक कारकों पर जोर दें।
Question 5. बेरोजगारी निवारण के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: बेरोजगारी कम करने के लिए सरकार ने कई नीतियाँ और योजनाएँ अपनाई हैं:
**शुरुआती योजनाएँ:** शुरू में सोचा गया था कि विकास होने से खुद-ब-खुद रोजगार बढ़ेंगे, लेकिन बाद में सरकार ने समझा कि सिर्फ विकास दर से काम नहीं चलेगा।
**पाँचवीं योजना:** इसमें रोजगार बढ़ाने के लिए अलग से कार्यक्रम चलाने की ज़रूरत महसूस हुई।
**छठी योजना:** अल्प रोजगार और बेरोजगारी की समस्या को कम करने का लक्ष्य रखा गया। कृषि, छोटे उद्योगों और अन्य सहायक कामों में स्वरोजगार (खुद का काम) बढ़ाने पर जोर दिया गया।
**सातवीं योजना:** उत्पादक रोजगार पैदा करने को सबसे ज़्यादा महत्व दिया गया।
**आठवीं योजना:** रोजगार वृद्धि का लक्ष्य 2.6 से 2.8 प्रतिशत रखा गया, ताकि अगले दस सालों में बेरोजगारी खत्म हो सके।
**नवीं योजना:** उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया जहाँ ज़्यादा लोगों की ज़रूरत होती है और जहाँ बेरोजगारी अधिक थी, साथ ही सरकारी मदद पर भी जोर दिया गया।
**दसवीं योजना:** कृषि, छोटे और मध्यम उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्माण और पर्यटन जैसे रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया।
**ग्यारहवीं योजना:** रोजगार को तेज़ी से बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए रणनीतियाँ अपनाई गईं, जिसमें 5.8 लाख नए रोजगार के अवसरों की बात की गई।
**बारहवीं योजना:** विनिर्माण (फैक्ट्री) सेक्टर को रोजगार का एक बड़ा ज़रिया बनाने पर बल दिया गया। इन नीतियों का उद्देश्य केवल रोजगार पैदा करना ही नहीं, बल्कि स्थायी और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना भी था।
In simple words: बेरोजगारी कम करने के लिए सरकार ने कई योजनाएँ बनाईं। शुरुआत में, सरकार ने सोचा कि विकास से अपने आप काम मिलेगा, पर बाद में अलग से रोजगार कार्यक्रम चलाए। खेती, छोटे उद्योगों और सर्विस सेक्टर में काम बढ़ाने पर जोर दिया गया, और यह तय किया गया कि रोजगार की गुणवत्ता भी सुधरे।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक पंचवर्षीय योजना के दौरान अपनाई गई प्रमुख रोजगार नीतियों और उनके विशिष्ट लक्ष्यों का उल्लेख करें।
Question 6. भारत में बेरोजगारी की समस्या के समाधान के लिए सुझाव दीजिए।
Answer: भारत में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए कई सुझाव दिए जा सकते हैं, खासकर अल्प रोजगार, खुली बेरोजगारी, ग्रामीण और शिक्षित वर्ग की बेरोजगारी के लिए:
1. **निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाना:** अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए ताकि उत्पादन क्षमता ऊँची रहे और ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हों।
2. **छोटे और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा:** हस्तशिल्प, दस्तकारी और छोटे ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। इनमें कम पैसे लगते हैं और ज़्यादा लोगों को काम मिलता है। इससे गांवों से शहरों की ओर पलायन रुकेगा और गांवों में भी रोजगार बढ़ेंगे।
3. **मानव शक्ति का सही नियोजन:** देश में उपलब्ध कामगारों और काम की ज़रूरतों के बीच सही तालमेल बिठाना चाहिए। जो लोग बेरोजगार हैं उन्हें ज़रूरी कौशल सिखाकर दक्ष बनाना चाहिए ताकि बेरोजगारी और कौशल की कमी दोनों समस्याओं का हल हो सके।
4. **शिक्षा प्रणाली में बदलाव:** शिक्षा व्यवस्था को स्थानीय रोजगार की ज़रूरतों के हिसाब से बदलना चाहिए। सरकार को लोगों को ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण देना चाहिए जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी वे बेरोजगार न रहें।
5. **जनसंख्या नियंत्रण:** दीर्घकालीन योजना बनाकर जनसंख्या को नियंत्रित करना ज़रूरी है, क्योंकि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो पा रहे हैं। अगर आर्थिक सेवाओं का विस्तार नहीं होता, तो बढ़ती जनसंख्या भविष्य में बेरोजगारी की समस्या को और बढ़ाएगी। ये सुझाव देश के सतत विकास और सभी के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: बेरोजगारी खत्म करने के लिए हमें ज्यादा काम पैदा करने होंगे, छोटे उद्योगों को बढ़ाना होगा, लोगों को सही कौशल सिखाना होगा, शिक्षा को नौकरी के लायक बनाना होगा और जनसंख्या को नियंत्रित करना होगा। ये सब मिलकर लोगों को काम दिलाने में मदद करेंगे।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के समाधान के लिए सुझावों में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक पहलुओं को शामिल करना चाहिए।
RBSE Class 11 Economics Chapter 21 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. राष्ट्रीय सेम्पल सर्वेक्षण ने बेरोजगारी मापन की कितनी विधि दी हैं?
(अ) दो
(ब) चार
(स) तीन
(द) पाँच
Answer: (स) तीन
In simple words: राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) बेरोजगारी मापने के तीन तरीके बताता है: सामान्य स्थिति, साप्ताहिक स्थिति और दैनिक स्थिति। ये विधियाँ बेरोजगारी के अलग-अलग पहलुओं को समझने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों के नाम (सामान्य स्थिति, साप्ताहिक स्थिति, दैनिक स्थिति) याद रखें, क्योंकि ये अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 2.
Answer:
🎯 Exam Tip: अधूरे प्रश्नों के मामले में, उपलब्ध जानकारी को संक्षेप में प्रस्तुत करें और स्पष्ट करें कि शेष विवरण अनुपलब्ध है।
Question 3. 2011-12 में चालू दैनिक स्थिति के आधार पर श्रम बल में शामिल व्यक्ति (मिलियन में) थे.
(अ) 363.3
(ब) 417.2
(स) 440.2
(द) 483.7
Answer: (स) 440.2
In simple words: 2011-12 में, 'चालू दैनिक स्थिति' के हिसाब से 440.2 मिलियन लोग काम करने के लिए तैयार थे और काम की तलाश में थे। चालू दैनिक स्थिति एक दिन में व्यक्ति के रोजगार की स्थिति का मूल्यांकन करती है।
🎯 Exam Tip: चालू दैनिक स्थिति (CDS) के आंकड़े श्रम बल में दैनिक भागीदारी और रोजगार के स्तर को दर्शाते हैं।
Question 4. 2011-12 में यू.एस. के आधार पर नियुक्त व्यक्ति तथा व्यक्ति दिवस (मिलियन में) थे
(अ) 398.0
(ब) 457.9
(स) 472.9
(द) 415.7
Answer: (स) 472.9
In simple words: 2011-12 में, 'सामान्य स्थिति' (U.S.) के अनुसार 472.9 मिलियन लोग नियुक्त थे, यानी उन्हें काम मिला हुआ था। सामान्य स्थिति दीर्घकालिक रोजगार और बेरोजगारी को समझने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: सामान्य स्थिति (USS) की गणना एक बड़े संदर्भ अवधि (जैसे एक वर्ष) के आधार पर की जाती है, जो दीर्घकालिक रोजगार पैटर्न को उजागर करती है।
Question 5. प्राथमिक क्षेत्र में 2004-05 में रोजगार वितरण कितने प्रतिशत था?
(अ) 58.4
(ब) 18.2
(स) 23.4
(द) 24.3
Answer: (अ) 58.4
In simple words: 2004-05 में, भारत के प्राथमिक क्षेत्र (जैसे कृषि) में कुल रोजगार का 58.4% हिस्सा था। प्राथमिक क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में हमेशा से एक बड़ा रोजगार प्रदाता रहा है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) में रोजगार वितरण के रुझानों को याद रखें, क्योंकि यह आर्थिक विकास का संकेतक है।
Question 6. कुल रोजगार में स्वरोजगार का हिस्सा कितना प्रतिशत है?
Answer:
🎯 Exam Tip: स्वरोजगार अक्सर अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और यह ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रचलित है।
Question 7. सामान्य स्थिति के अनुसार वर्ष 2011-12 में गुजरात में कितने प्रतिशत बेरोजगारी थी?
(अ) 0.10
(ब) 1.10
(स) 0.7
(द) शून्य
Answer: (स) 0.7
In simple words: 2011-12 में, गुजरात राज्य में 'सामान्य स्थिति' के अनुसार बेरोजगारी दर 0.7 प्रतिशत थी। राज्यों के बीच बेरोजगारी दर में अंतर उनकी आर्थिक संरचना और विकास नीतियों को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय बेरोजगारी दरों का अध्ययन करने से यह समझने में मदद मिलती है कि विभिन्न राज्यों में रोजगार के अवसर कैसे भिन्न हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 21 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कीन्स के अनुसार बेरोजगारी क्या होती है?
Answer: कीन्स के अनुसार, बेरोजगारी तब होती है जब अर्थव्यवस्था में कुल मांग कम हो जाती है। अगर लोग सामान और सेवाओं की खरीदारी कम करते हैं, तो कंपनियाँ उत्पादन भी कम कर देती हैं, जिससे लोगों को काम नहीं मिलता। यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक सिद्धांत है जो सरकार को मंदी से निपटने के लिए नीतियों पर विचार करने में मदद करता है।
In simple words: कीन्स मानते थे कि जब लोग बाज़ार में चीज़ें कम खरीदते हैं (मांग कम होती है), तो कंपनियाँ उत्पादन घटा देती हैं, जिससे लोगों की नौकरी चली जाती है।
🎯 Exam Tip: कीन्स के सिद्धांत में, समग्र मांग में कमी बेरोजगारी का प्राथमिक कारण है, और इसे दूर करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।
Question 2. दीर्घकालीन बेरोजगारी कौन-सी होती है?
Answer: लंबे समय तक चलने वाली बेरोजगारी को संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं। यह तब होती है जब अर्थव्यवस्था की बुनियादी बनावट में बदलाव आता है और लोगों के कौशल बाजार की ज़रूरतों से मेल नहीं खाते। यह बेरोजगारी अक्सर तकनीकी बदलाव या उद्योगों के बंद होने के कारण उत्पन्न होती है।
In simple words: संरचनात्मक बेरोजगारी वह है जो लंबे समय तक रहती है, जब लोगों के कौशल और बाज़ार की ज़रूरतों में तालमेल नहीं होता।
🎯 Exam Tip: संरचनात्मक बेरोजगारी से निपटने के लिए श्रमिकों को नए कौशल में प्रशिक्षित करना और शिक्षा प्रणाली को अद्यतन करना आवश्यक है।
Question 3. अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक असाम्य के कारण कौन-सी बेरोजगारी होती है?
Answer: जब अर्थव्यवस्था की बनावट में असंतुलन होता है, यानी जब काम के प्रकार और उपलब्ध कौशल आपस में मेल नहीं खाते, तो उसे संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं। यह समस्या अक्सर नई तकनीकों या बाजार की बदलती ज़रूरतों के कारण पैदा होती है।
In simple words: जब अर्थव्यवस्था की बनावट बदलती है और लोगों के पास सही कौशल नहीं होते, तो 'संरचनात्मक बेरोजगारी' होती है।
🎯 Exam Tip: संरचनात्मक असाम्य का अर्थ है, श्रम की मांग और आपूर्ति के बीच गुणात्मक बेमेल, न कि केवल मात्रात्मक।
Question 4. वह बेरोजगारी जिसमें व्यक्ति स्पष्ट रूप से बेरोजगार दिखाई नहीं देता, कौन-सी है?
Answer: प्रच्छन्न बेरोजगारी वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति काम पर लगा तो दिखता है, लेकिन वास्तव में उसकी ज़रूरत नहीं होती और उसके हटने से काम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यह छिपी हुई बेरोजगारी होती है। यह अक्सर कृषि क्षेत्र में होती है जहाँ परिवार के सभी सदस्य खेत में काम करते दिखते हैं, जबकि कुछ ही लोग पर्याप्त होते हैं।
In simple words: 'प्रच्छन्न बेरोजगारी' वह है जिसमें लोग काम पर तो दिखते हैं, पर उनकी असल में ज़रूरत नहीं होती।
🎯 Exam Tip: प्रच्छन्न बेरोजगारी को 'छिपी हुई बेरोजगारी' के नाम से भी जाना जाता है और यह अक्सर विकासशील देशों के कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।
Question 7. भारत में रोजगार व बेरोजगारी के आँकड़े संचय कौन करता है?
Answer: भारत में रोजगार और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) इकट्ठा करता है। यह एक सरकारी संस्था है जो इस तरह की जानकारी जुटाती है। NSSO के आंकड़े सरकार को आर्थिक नीतियाँ बनाने में मदद करते हैं।
In simple words: भारत में रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े 'राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन' (NSSO) इकट्ठा करता है।
🎯 Exam Tip: NSSO भारत सरकार के 'सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय' के अधीन कार्य करता है।
Question 8. 2011-12 में प्राथमिक क्षेत्र में रोजगार प्रतिशत कितना था?
Answer: 2011-12 में, भारत में प्राथमिक क्षेत्र (जैसे खेती) में कुल रोजगार का 48.9 प्रतिशत हिस्सा था। इसका मतलब है कि लगभग आधे लोग खेती या उससे जुड़े कामों में लगे हुए थे। यह दर्शाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी कृषि पर काफी हद तक निर्भर है।
In simple words: 2011-12 में, प्राथमिक क्षेत्र (खेती) में कुल रोजगार का 48.9% था।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, वानिकी, मछली पकड़ना और खनन जैसे कार्य शामिल हैं।
Question 9. 2004-05 में द्वितीयक क्षेत्र में रोजगार प्रतिशत कितना था?
Answer: 2004-05 में, द्वितीयक क्षेत्र (जैसे उद्योग और विनिर्माण) में कुल रोजगार का 18.2 प्रतिशत हिस्सा था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि उद्योगों में भी बड़ी संख्या में लोग काम कर रहे थे। द्वितीयक क्षेत्र अर्थव्यवस्था में मूल्यवर्धन और रोजगार के नए अवसर प्रदान करता है।
In simple words: 2004-05 में, उद्योग और विनिर्माण जैसे द्वितीयक क्षेत्र में रोजगार का हिस्सा 18.2% था।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्षेत्र में विनिर्माण, निर्माण और बिजली, गैस तथा जल आपूर्ति जैसे उद्योग शामिल हैं।
Question 10. 2011-12 में द्वितीयक क्षेत्र में रोजगार का कितना प्रतिशत था?
Answer: 2011-12 में, द्वितीयक क्षेत्र में रोजगार का हिस्सा 24.3 प्रतिशत तक बढ़ गया था। यह पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की वृद्धि को दिखाता है। विनिर्माण और निर्माण जैसे द्वितीयक क्षेत्र रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: 2011-12 में, द्वितीयक क्षेत्र में रोजगार 24.3% था।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्षेत्र में वृद्धि अक्सर आर्थिक विकास और औद्योगिकरण का सूचक होती है।
Question 11. 2011-12 में तृतीयक क्षेत्र में रोजगार वितरण कितना प्रतिशत था?
Answer: 2011-12 में, तृतीयक क्षेत्र (जैसे सेवाएँ) में कुल रोजगार का 26.8 प्रतिशत हिस्सा था। यह आंकड़ा दिखाता है कि सेवा क्षेत्र भी भारत में रोजगार का एक बड़ा ज़रिया बन गया था। सेवा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी और पर्यटन जैसे विभिन्न उद्योग शामिल हैं।
In simple words: 2011-12 में, सेवा क्षेत्र (तृतीयक क्षेत्र) में रोजगार का हिस्सा 26.8% था।
🎯 Exam Tip: तृतीयक क्षेत्र, जिसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है, में वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, व्यापार और परिवहन शामिल हैं।
Question 12. रोजगार की दृष्टि से सबसे बड़ा क्षेत्र है?
Answer: रोजगार देने के मामले में प्राथमिक क्षेत्र (खेती और उससे जुड़े काम) भारत में सबसे बड़ा क्षेत्र है। यह सबसे ज़्यादा लोगों को काम देता है। हालांकि, इस क्षेत्र की उत्पादकता अक्सर कम होती है, जो प्रच्छन्न बेरोजगारी का कारण बनती है।
In simple words: रोजगार के लिए प्राथमिक क्षेत्र (खेती-बाड़ी) भारत में सबसे बड़ा क्षेत्र है।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इसमें छिपी हुई बेरोजगारी की समस्या भी अधिक होती है।
Question 13. रोजगार दृष्टि दूसरा महत्त्वपूर्ण क्षेत्र कौन-सा है?
Answer: रोजगार देने के मामले में प्राथमिक क्षेत्र के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र तृतीयक क्षेत्र है। सेवा क्षेत्र में लगातार वृद्धि आधुनिक अर्थव्यवस्था की एक पहचान है।
In simple words: खेती के बाद, सेवा क्षेत्र (तृतीयक क्षेत्र) रोजगार देने वाला दूसरा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
🎯 Exam Tip: सेवा क्षेत्र के तेजी से विकास को अक्सर एक विकसित होती अर्थव्यवस्था का संकेत माना जाता है।
Question 15. वर्तमान में कितने प्रतिशत श्रम बेरोजगार में कार्यरत है?
Answer: 52%
In simple words: अभी के समय में, 52 प्रतिशत मजदूर ऐसे हैं जो बेरोजगार हैं और काम नहीं कर रहे हैं. यह दिखाता है कि आधी से ज़्यादा आबादी बिना काम के है.
🎯 Exam Tip: जब भी प्रतिशत में कोई आंकड़ा पूछा जाए, तो संख्या के साथ-साथ 'प्रतिशत' शब्द का उपयोग करना न भूलें ताकि आपका जवाब सटीक लगे.
Question 16. वेतन रोजगार में कितने प्रतिशत कार्यरत है?
Answer: 18%
In simple words: कुल रोजगार में से केवल 18 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जिन्हें निश्चित वेतन मिलता है. यह दर्शाता है कि ज्यादातर लोग या तो स्वरोजगार में हैं या दिहाड़ी मजदूरी करते हैं.
🎯 Exam Tip: 'वेतन रोजगार' का मतलब होता है ऐसा काम जहाँ कर्मचारी को नियमित रूप से वेतन मिलता है, न कि दिहाड़ी या काम के हिसाब से. इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 17. CWS का क्या अर्थ है?
Answer: CWS का अर्थ है Current Weekly Status (चालू साप्ताहिक स्थिति). यह बेरोजगारी मापने का एक तरीका है.
In simple words: CWS का मतलब है कि एक हफ्ते में कोई व्यक्ति कितने दिन काम कर रहा था. इससे यह पता चलता है कि एक हफ्ते में कोई बेरोजगार है या नहीं.
🎯 Exam Tip: CWS और CDS जैसे शब्दों का पूरा नाम और उनका महत्व याद रखना चाहिए, क्योंकि ये अर्थशास्त्र में बेरोजगारी के आंकड़े समझने के लिए ज़रूरी हैं.
Question 18. CDS से क्या आशय है?
Answer: CDS का आशय Current Daily Status (चालू दैनिक स्थिति) से है. यह भी बेरोजगारी मापने का एक तरीका है.
In simple words: CDS हमें बताता है कि एक दिन में कोई व्यक्ति कितने समय के लिए काम कर रहा था. यह हर दिन की स्थिति को देखता है, जिससे बेरोजगारी की सही तस्वीर मिल पाती है.
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के मापन के विभिन्न तरीकों (जैसे CWS, CDS) को याद रखें और प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण भी दें, ताकि आप अंतर स्पष्ट कर सकें.
Question 19. वर्ष 2011-12 में सामान्य स्थिति के अनुसार केरल में बेरोजगारी कितने प्रतिशत थी?
Answer: वर्ष 2011-12 में सामान्य स्थिति के अनुसार केरल में बेरोजगारी 91% थी. यह उस समय एक बहुत ही उच्च आंकड़ा था.
In simple words: 2011-12 में केरल में 91 प्रतिशत लोग काम ढूंढ रहे थे लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा था.
🎯 Exam Tip: ऐसे आंकड़ों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये किसी विशेष क्षेत्र में आर्थिक स्थिति और चुनौतियों को दर्शाते हैं. इन्हें अन्य राज्यों से तुलना करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
Question 20. वर्ष 2011-12 में सामान्य स्थिति के अनुसार प. बंगाल में बेरोजगारी कितने प्रतिशत था?
Answer: वर्ष 2011-12 में सामान्य स्थिति के अनुसार पश्चिमी बंगाल में बेरोजगारी 4.4% थी. यह केरल की तुलना में काफी कम दर थी.
In simple words: 2011-12 में पश्चिम बंगाल में 4.4 प्रतिशत लोग बेरोजगार थे.
🎯 Exam Tip: विभिन्न राज्यों के बेरोजगारी आंकड़ों की तुलना करते समय, सामान्य स्थिति (Usual Status) जैसे मापदंडों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि तुलना सही हो.
Question 22. 2011 में भारत की जनसंख्या कितनी थी?
Answer: 2011 में भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थी. यह एक विशाल जनसंख्या थी जो रोजगार के अवसरों पर दबाव डालती है.
In simple words: 2011 में भारत में कुल 121 करोड़ लोग रहते थे.
🎯 Exam Tip: जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण होते हैं और उन्हें सही इकाइयों (जैसे करोड़) के साथ याद रखना चाहिए. ये आर्थिक नियोजन के आधार बनते हैं.
Question 23. बेरोजगारी के प्रकारों के नाम लिखिए।
Answer: बेरोजगारी के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
1. संरचनात्मक बेरोजगारी
2. प्रच्छन्न बेरोजगारी (छिपी हुई बेरोजगारी)
3. मौसमी बेरोजगारी
4. खुली बेरोजगारी
5. चक्रीय बेरोजगारी
6. घर्षणात्मक बेरोजगारी
In simple words: बेरोजगारी के कई रूप होते हैं, जैसे कुछ काम हमेशा नहीं रहता (मौसमी), कुछ में लोग दिखते हैं कि काम कर रहे हैं पर उनका योगदान कम होता है (छिपी हुई), या कुछ में काम ही नहीं मिलता (खुली).
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के विभिन्न प्रकारों को उनके मुख्य लक्षणों के साथ याद रखें. यह आपको प्रत्येक प्रकार के कारणों और समाधानों को समझने में मदद करेगा.
Question 24. बेरोजगारी मापन की तीन अवधारणाएँ लिखो।
Answer: बेरोजगारी मापन की तीन मुख्य अवधारणाएँ हैं:
1. सामान्य स्थिति बेरोजगारी (Usual Status Unemployment)
2. साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी (Current Weekly Status Unemployment)
3. दैनिक स्थिति बेरोजगारी (Current Daily Status Unemployment)
In simple words: बेरोजगारी को मापने के लिए तीन अलग-अलग तरीके होते हैं. इनमें देखा जाता है कि लोग कितने समय (साल भर, हफ़्ते भर या हर दिन) तक बेरोजगार रहे.
🎯 Exam Tip: इन तीनों अवधारणाओं (सामान्य, साप्ताहिक, दैनिक) का मतलब और उनके बीच का अंतर जानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 25. शिक्षित बेरोजगारी कब उत्पन्न होती है?
Answer: शिक्षित बेरोजगारी तब उत्पन्न होती है जब शिक्षा प्रणाली दोषपूर्ण हो और रोजगार के हिसाब से शिक्षा न दी जाए. साथ ही, रोजगार के अवसर भी कम हों.
In simple words: जब पढ़े-लिखे लोगों को उनकी पढ़ाई के हिसाब से या किसी भी तरह का काम नहीं मिलता, तो इसे शिक्षित बेरोजगारी कहते हैं. ऐसा तब होता है जब शिक्षा नौकरी के लायक नहीं होती.
🎯 Exam Tip: शिक्षित बेरोजगारी एक गंभीर सामाजिक समस्या है. इसके कारणों और प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे शिक्षा और रोजगार के बीच तालमेल की कमी.
Question 26. किस योजना में अल्प रोजगार को कम करने तथा बेरोजगारी की समस्या को हल करने उद्देश्य से स्वीकार किया?
Answer: छठी पंचवर्षीय योजना में अल्प रोजगार को कम करने और बेरोजगारी की समस्या को हल करने का उद्देश्य स्वीकार किया गया था. इस योजना में रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया.
In simple words: छठी पंचवर्षीय योजना ने कम रोजगार और बेरोजगारी की परेशानी को खत्म करने का लक्ष्य रखा.
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं के मुख्य उद्देश्यों और उनमें किए गए प्रमुख प्रयासों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर बेरोजगारी उन्मूलन से संबंधित योजनाओं को.
Question 28. आठवीं पंचवर्षीय योजना में प्रतिवर्ष रोजगार वृद्धि का लक्ष्य कितना रखा गया?
Answer: आठवीं पंचवर्षीय योजना में प्रतिवर्ष रोजगार वृद्धि का लक्ष्य 2.6 से 2.8 प्रतिशत रखा गया था. यह लक्ष्य रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए निर्धारित किया गया था.
In simple words: आठवीं योजना ने हर साल 2.6 से 2.8 प्रतिशत ज़्यादा लोगों को नौकरी देने का लक्ष्य रखा था.
🎯 Exam Tip: योजना अवधि और उनसे जुड़े लक्ष्यों को ठीक से याद रखना चाहिए, क्योंकि ये आंकड़े योजना के प्रभाव का आकलन करने में मदद करते हैं.
Question 29. किस योजना में रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों के विकास पर बल देने का लक्ष्य रखा?
Answer: दसवीं योजना में रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों के विकास पर बल देने का लक्ष्य रखा गया था. इसमें कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई.
In simple words: दसवीं योजना में उन जगहों पर काम बढ़ाने पर ध्यान दिया गया, जहाँ ज़्यादा नौकरियां बन सकती थीं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के प्रमुख फोकस क्षेत्रों को समझना आवश्यक है. यह आपको भारत के आर्थिक विकास की यात्रा को समझने में मदद करेगा.
Question 30. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का क्या लक्ष्य रखा गया?
Answer: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में रोजगार में तेजी से विस्तार करने और रोजगार की गुणवत्ता में सुधार लाने वाली युक्तियों को अपनाने पर बल दिया गया. इसका उद्देश्य न केवल अधिक नौकरियां पैदा करना था, बल्कि उन्हें बेहतर बनाना भी था.
In simple words: ग्यारहवीं योजना ने ज़्यादा और अच्छी नौकरियां बनाने पर ध्यान दिया.
🎯 Exam Tip: केवल रोजगार की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है. इस बात को ध्यान में रखते हुए योजनाओं के लक्ष्यों को समझना चाहिए.
Question 31. 1999-2000 की तुलना में 2011-12 में शिक्षित बेरोजगारी पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: 1999-2000 की तुलना में 2011-12 में शिक्षित बेरोजगारी दर कम हुई थी. यह कमी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी गई, जो दर्शाता है कि महिलाओं को शिक्षित रोजगार के अधिक अवसर मिले.
In simple words: 1999-2000 से 2011-12 तक, पढ़े-लिखे लोगों की बेरोजगारी कम हुई, और यह कमी खासकर महिलाओं में ज़्यादा थी.
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के आंकड़ों का विश्लेषण करते समय, विभिन्न समूहों (जैसे पुरुष, महिला) पर पड़ने वाले प्रभावों को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है.
Question 32. बेरोजगारी के कोई दो कारण लिखिए।
Answer: बेरोजगारी के दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. अल्पविकास और विकास प्रारूप का रोजगार वृद्धि से असंगत होना: देश का विकास रोजगार के उतने अवसर पैदा नहीं कर रहा जितनी जरूरत है.
2. जनसंख्या और श्रम पूर्ति में वृद्धि: आबादी तेजी से बढ़ रही है और काम करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन सबके लिए पर्याप्त नौकरियां नहीं हैं.
In simple words: बेरोजगारी का कारण है कि विकास से उतनी नौकरियां नहीं मिल रही हैं जितनी चाहिए, और जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है.
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के कारणों को हमेशा व्यापक आर्थिक और सामाजिक कारकों से जोड़कर समझाना चाहिए, जैसे जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक विकास की दर.
Question 33. खेतिहर मजदूर रोजगार गारन्टी कार्यक्रम कब शुरू किया गया?
Answer: खेतिहर मजदूर रोजगार गारन्टी कार्यक्रम 1979 में प्रारम्भ किया गया था. यह कार्यक्रम ग्रामीण मजदूरों को रोजगार सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था.
In simple words: खेतिहर मजदूरों के लिए काम की गारंटी वाला कार्यक्रम 1979 में शुरू किया गया था.
🎯 Exam Tip: सरकारी योजनाओं के नाम और उनके प्रारंभ होने की तारीखें याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधे सवाल के रूप में पूछे जाते हैं.
Question 35. TRYSEM में 1991 से 1999 के मध्य कितने लोगों को प्रशिक्षण दिया?
Answer: TRYSEM योजना के तहत 1991 से 1999 के मध्य 23.3 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया था. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना था.
In simple words: TRYSEM ने 1991 से 1999 तक 23.3 लाख लोगों को काम सीखने में मदद की.
🎯 Exam Tip: 'TRYSEM' जैसे कार्यक्रमों का पूरा नाम और उनके उद्देश्य के साथ-साथ उनके लाभार्थियों की संख्या को याद रखना उपयोगी है.
Question 36. TRYSEM को 1999 में किस योजना में मिला दिया गया?
Answer: TRYSEM को 1999 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में विलय कर दिया गया था. यह ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों को एकीकृत करने का एक प्रयास था.
In simple words: 1999 में TRYSEM को 'स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना' नाम की एक बड़ी योजना में शामिल कर दिया गया.
🎯 Exam Tip: पुरानी योजनाओं को नई योजनाओं में विलय करने के कारणों और नई योजना के व्यापक उद्देश्यों को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 37. जवाहर रोजगार योजना कब प्रारंभ की गई?
Answer: जवाहर रोजगार योजना 1989-90 में आरंभ की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना था.
In simple words: 'जवाहर रोजगार योजना' 1989-90 में शुरू की गई थी.
🎯 Exam Tip: विभिन्न रोजगार योजनाओं की शुरुआत की तारीखों और उनके प्रमुख लक्ष्यों को याद रखना चाहिए.
Question 38. जवाहर रोजगार योजना को 1999 में किसमें मिला दिया गया?
Answer: जवाहर रोजगार योजना को 1999 में जवाहर ग्राम समृद्धि योजना में मिला दिया गया था. यह भी ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के कार्यक्रमों को मजबूत करने का एक कदम था.
In simple words: 1999 में 'जवाहर रोजगार योजना' को 'जवाहर ग्राम समृद्धि योजना' में मिला दिया गया.
🎯 Exam Tip: योजनाओं के विलय और पुनर्गठन के पीछे के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे कि कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना.
Question 39. NREGA कार्यक्रम की शुरुआत कब की गई?
Answer: NREGA कार्यक्रम की शुरुआत 2006 में की गई थी. बाद में इसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के नाम से जाना जाने लगा, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों का गारंटीड रोजगार प्रदान करना है.
In simple words: NREGA योजना 2006 में शुरू हुई थी, जिससे गांव के लोगों को काम की गारंटी मिली.
🎯 Exam Tip: NREGA (अब MGNREGA) भारत की सबसे महत्वपूर्ण रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक है. इसका उद्देश्य, प्रारंभ वर्ष और मुख्य विशेषताएं याद रखें.
Question 40. बेरोजगारी समस्या के समाधान हेतु दो सुझाव बताइये।
Answer: [No answer provided in the source material.]
In simple words: [No simple explanation provided in the source material.]
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के समाधान के लिए सरकार की नीतियों और व्यक्तिगत स्तर पर कौशल विकास के महत्व को समझना चाहिए.
Question 1. संरचनात्मक बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: संरचनात्मक बेरोजगारी वह स्थिति है जो लंबे समय तक रहती है और पिछड़े आर्थिक ढांचे के कारण पैदा होती है. यह तब होती है जब देश की विकास प्रक्रिया धीमी होती है और पूंजी निर्माण की दर श्रम की तुलना में कम होती है. इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था में पूंजी और अन्य सहायक साधनों की कमी के कारण असंतुलन पैदा होता है.
In simple words: संरचनात्मक बेरोजगारी तब होती है जब देश के उद्योग और काम करने के तरीकों में बदलाव आता है, लेकिन लोग उन नए कामों के लिए तैयार नहीं होते या नई नौकरियां नहीं होतीं.
🎯 Exam Tip: संरचनात्मक बेरोजगारी को दीर्घकालिक और अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याओं से संबंधित माना जाता है, जैसे कि तकनीकी परिवर्तन या कौशल का अभाव. इसे पहचानने के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान दें.
Question 2. खुली बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: खुली बेरोजगारी वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति काम करने के योग्य और इच्छुक होने के बावजूद काम नहीं प्राप्त कर पाता. ऐसे व्यक्ति पूरी तरह से बेरोजगार रहते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों से मजदूर अक्सर शहरों में काम की तलाश में आते हैं, लेकिन उन्हें वहाँ भी कोई रोजगार नहीं मिलता, तो इसे खुली बेरोजगारी कहते हैं.
In simple words: खुली बेरोजगारी का मतलब है कि जब किसी व्यक्ति को काम चाहिए और वह काम कर भी सकता है, लेकिन उसे बिल्कुल भी काम नहीं मिलता.
🎯 Exam Tip: खुली बेरोजगारी सबसे आसानी से पहचानी जाने वाली बेरोजगारी है. इसे सीधे तौर पर श्रमबल में शामिल उन व्यक्तियों के रूप में परिभाषित किया जाता है जिनके पास कोई काम नहीं होता.
Question 3. चक्रीय बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: चक्रीय बेरोजगारी वह समस्या है जो पूंजीवादी या बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार चक्र (तेजी और मंदी) के कारण उत्पन्न होती है. मंदी के दौरान, कुल मांग में कमी के कारण उत्पादन कम हो जाता है और बेरोजगारी बढ़ जाती है. कीन्स के अनुसार, कुल मांग बढ़ाकर इस प्रकार की बेरोजगारी को समाप्त किया जा सकता है. विकसित देशों में यह बेरोजगारी मुख्य रूप से कुल मांग की कमी के कारण पैदा होती है.
In simple words: चक्रीय बेरोजगारी तब होती है जब बाजार में मंदी आती है. लोग कम चीजें खरीदते हैं, कंपनियां कम चीजें बनाती हैं, और फिर लोगों को नौकरी से निकाल देती हैं.
🎯 Exam Tip: चक्रीय बेरोजगारी सीधे तौर पर आर्थिक चक्रों से जुड़ी होती है. मंदी के चरणों में इसकी वृद्धि होती है और तेजी के चरणों में इसमें कमी आती है. इस संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 4. घर्षणात्मक बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: घर्षणात्मक बेरोजगारी वह स्थिति है जो अर्थव्यवस्था की आंतरिक संरचना में लगातार होने वाले परिवर्तनों के कारण होती है. जब कुछ उद्योग बंद होते हैं और कुछ नए खुलते हैं, तो बंद हुए उद्योगों से बेरोजगार हुए श्रमिकों को नया काम ढूंढने और उसके लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करने में समय लगता है. इस बीच की अवधि में व्यक्ति बेरोजगार रहता है. नए काम को शुरू करने तक की यह बेरोजगारी घर्षणात्मक कहलाती है.
In simple words: घर्षणात्मक बेरोजगारी तब होती है जब कोई एक नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी ढूंढ रहा होता है, या पढ़ाई खत्म करने के बाद पहली नौकरी ढूंढ रहा होता है. यह थोड़े समय के लिए होती है.
🎯 Exam Tip: घर्षणात्मक बेरोजगारी को आमतौर पर एक अल्पकालिक और स्वैच्छिक बेरोजगारी के रूप में देखा जाता है, क्योंकि व्यक्ति अक्सर बेहतर अवसरों की तलाश में होता है. यह अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को भी दर्शाती है.
Question 5. सामान्य स्थिति बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: सामान्य स्थिति बेरोजगारी उस मापन को संदर्भित करती है जहाँ सर्वेक्षण अवधि से ठीक पहले के एक वर्ष में व्यक्ति किसी भी प्रकार के रोजगार में नहीं होते. यह बेरोजगारी का एक दीर्घकालीन दृष्टिकोण है, जो उन व्यक्तियों को दर्शाता है जो पूरे वर्ष में अधिकांश समय बेरोजगार रहे.
In simple words: सामान्य स्थिति बेरोजगारी का मतलब है कि पिछले एक साल में कोई व्यक्ति ज़्यादातर समय बेरोजगार रहा हो. यह बताता है कि लोग लंबे समय से काम के बिना हैं.
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के मापन की इस विधि में व्यक्ति के मुख्य कार्यकलाप की स्थिति को देखा जाता है, न कि उसकी तात्कालिक स्थिति को. यह दीर्घकालिक बेरोजगारी का सूचक है.
Question 7. दैनिक स्थिति बेरोजगारी से क्या आशय है?
Answer: दैनिक स्थिति बेरोजगारी में व्यक्ति के पिछले सात दिनों के दौरान प्रतिदिन के रोजगार की स्थिति देखी जाती है. यदि कोई व्यक्ति किसी भी दिन चार घंटे तक रोजगार में रहता है, तो उसे आधे दिन के लिए रोजगार में माना जाता है. चार घंटे से अधिक रोजगार में होने पर उसे पूरे दिन के लिए रोजगार में माना जाता है. यह दैनिक स्थिति प्रति सप्ताह बेरोजगारी के श्रम-दिवसों का प्रति सप्ताह कुल श्रम-दिवसों से अनुपात है, जिसे बेरोजगारी की समय दर (Time Rate) में मापा जाता है.
In simple words: दैनिक स्थिति बेरोजगारी यह बताती है कि किसी व्यक्ति को एक हफ्ते में कितने दिन और कितने घंटों के लिए काम मिला. अगर एक दिन में चार घंटे काम मिला, तो उसे आधे दिन का काम माना जाता है.
🎯 Exam Tip: दैनिक स्थिति बेरोजगारी सबसे विस्तृत माप है, क्योंकि यह एक दिन के भीतर भी रोजगार की स्थिति को ट्रैक करती है. इससे अल्प-रोजगार (Underemployment) की सटीक तस्वीर मिलती है.
Question 8. भारत में बेरोजगार के स्रोत लिखो।
Answer: भारत में बेरोजगारी के आँकड़ों के चार मुख्य स्रोत हैं:
1. भारत की जनगणना रिपोर्ट.
2. राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) की रोजगार व बेरोजगारी की अवस्था संबंधी रिपोर्ट.
3. रोजगार और प्रशिक्षण महानिदेशालय के रोजगार कार्यालय में पंजीकृत आँकड़े.
4. श्रम ब्यूरो द्वारा वार्षिक आधार पर पारिवारिक रोजगार-बेरोजगारी संबंधी सर्वेक्षण.
इन सभी स्रोतों के आंकड़ों में अंतर हो सकता है, क्योंकि इनके उद्देश्य और कार्यपद्धति अलग-अलग हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अल्प बेरोजगारी (छिपी हुई और मौसमी) और खुली बेरोजगारी होती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में मुख्य रूप से औद्योगिक और शिक्षित बेरोजगारी होती है. इसका यह मतलब नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारी बिल्कुल नहीं होती, लेकिन शहरी क्षेत्रों में शारीरिक श्रम करने वाले लोग मुख्य रूप से बेरोजगार कहे जाते हैं.
In simple words: भारत में बेरोजगारी के आंकड़े चार मुख्य जगहों से मिलते हैं: जनगणना, NSSO की रिपोर्ट, रोजगार कार्यालय और श्रम ब्यूरो के सर्वेक्षण.
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के आंकड़ों के विभिन्न स्रोतों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सरकार को नीतियां बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति को समझने में मदद करते हैं.
Question 9. कुल रोजगार में स्वरोजगार के हिस्सा को समझाइए।
Answer: कुल रोजगार में स्वरोजगार का हिस्सा 52.2% है, लेकिन इसमें कामगारों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कम आय सृजन वाली गतिविधियों से जुड़ा है. रोजगार की संरचना के अनुसार, इसे दो प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है: स्वरोजगार और नियमित वेतन रोजगार व आकस्मिक रोजगार. भारत में नियमित वेतन रोजगार और उसमें लगे श्रम की कार्यदशाएँ बेहतर होती हैं, क्योंकि इसमें रोजगार की सुरक्षा अधिक होती है और वेतन भी अधिक मिलता है. स्वरोजगार वह है जहाँ व्यक्ति अपना खुद का काम करता है.
In simple words: भारत में आधे से ज़्यादा लोग अपना खुद का काम करते हैं (स्वरोजगार). इनमें से कई लोग बहुत कम पैसे कमा पाते हैं.
🎯 Exam Tip: स्वरोजगार के महत्व को समझें, खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में. हालांकि यह रोजगार प्रदान करता है, अक्सर यह कम आय और असुरक्षा से जुड़ा होता है. नियमित वेतन रोजगार से इसकी तुलना करें.
Question 10. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम को समझाइये।
Answer: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP) मूलतः एक मजदूरी रोजगार कार्यक्रम था. इसे ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने और सामाजिक संपत्तियों का निर्माण करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था. यह कार्यक्रम 1980 में उन लोगों के लिए शुरू किया गया था जो ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरी रोजगार पर निर्भर थे. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब को अतिरिक्त आय प्रदान करना और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे सड़कें, स्कूल, नहरें आदि का विकास करना था.
In simple words: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम 1980 में शुरू किया गया था. इसका मकसद गांवों में लोगों को मजदूरी पर काम देकर पैसे कमाने का मौका देना और गांव में सड़क, स्कूल जैसी चीजें बनाना था.
🎯 Exam Tip: ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के दोहरे उद्देश्यों को याद रखें: एक तरफ आय सृजन, दूसरी तरफ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण. यह योजना के समग्र प्रभाव को दर्शाता है.
Question 12. रोजगार आश्वासन योजना (EAS) को समझाइये।
Answer: रोजगार आश्वासन योजना (EAS) 1993 में देश के पिछड़े विकास खंडों में आरंभ की गई थी. यह मूलतः ग्रामीण युवकों के लिए एक रोजगार कार्यक्रम था. यह मुख्य रूप से आदिवासी, रेगिस्तानी और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में लागू किया गया था. वर्ष 2001 में इसे जवाहर ग्राम समृद्धि योजना और बाद में संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में विलय कर दिया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को एकीकृत किया जा सके.
In simple words: रोजगार आश्वासन योजना 1993 में शुरू हुई थी, जिससे पिछड़े ग्रामीण इलाकों में युवाओं को काम की गारंटी मिले. बाद में इसे दूसरी बड़ी योजनाओं में मिला दिया गया.
🎯 Exam Tip: रोजगार आश्वासन योजना (EAS) जैसे कार्यक्रमों के लक्ष्य और भौगोलिक कवरेज (जैसे पिछड़े क्षेत्र) को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये लक्षित विकास प्रयासों को दर्शाते हैं.
Question 13. एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) को समझाइये।
Answer: एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) 1978-79 में आरंभ किया गया था. यह मूलतः गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम था और स्वरोजगार पर आधारित था. इसके तहत उत्पादक संपत्ति प्रदान की जाती थी, ताकि लाभार्थी उससे आय अर्जित कर गरीबी से बाहर आ सकें. इसके अंतर्गत पशुपालन, रेशम कीट पालन, बुनाई, हथकरघा, हस्तशिल्प आदि गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया गया था. यह योजना छोटे किसानों, सीमांत किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण कारीगरों को वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखती थी.
In simple words: एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम 1978-79 में शुरू हुआ था. इसका मकसद गरीब लोगों को अपना काम शुरू करने में मदद करना था, जैसे पशुपालन या बुनाई, ताकि वे पैसे कमा सकें.
🎯 Exam Tip: IRDP एक महत्वपूर्ण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम था जिसने स्वरोजगार पर ध्यान केंद्रित किया. इसकी विशेषताओं (संपत्ति प्रदान करना, विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देना) को याद रखना चाहिए.
Question 14. बेरोजगारी की समस्या समाधान हेतु तीन सुझाव लिखिए।
Answer: बेरोजगारी की समस्या के समाधान हेतु तीन मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं:
1. अर्थव्यवस्था में निवेश या पूंजी निर्माण का स्तर ऊंचा रहना आवश्यक है ताकि उत्पादन क्षमता ऊंची बनी रहे और रोजगार के अवसर भी उसी हिसाब से बढ़ते रहें.
2. शिक्षा प्रणाली को स्थानीय रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए. सरकार और श्रम बल को इस तरह की शिक्षा और प्रशिक्षण का सामूहिक प्रयास करना चाहिए.
3. छोटे और ग्रामीण उद्योगों की स्थापना और विस्तार किया जाना चाहिए. इनमें कम पूंजी की आवश्यकता होती है और ये अधिक रोजगार पैदा करते हैं.
In simple words: बेरोजगारी खत्म करने के लिए तीन उपाय हैं: ज़्यादा पैसे लगाकर नए उद्योग शुरू करें, शिक्षा को नौकरी के हिसाब से बनाएं, और छोटे-छोटे ग्रामीण उद्योग लगाएं.
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी के समाधान के लिए दिए गए सुझावों को व्यावहारिक और नीति-उन्मुख होना चाहिए. इन्हें आर्थिक विकास, शिक्षा सुधार और औद्योगिक नीतियों से जोड़कर देखें.
Question 2. बेरोजगारी के आर्थिक एवं सामाजिक दुष्परिणाम बताते हुए रोजगार/बेरोजगारी की सामान्य साप्ताहिक तथा दैनिक स्थिति को समझाइए एवं स्पष्ट कीजिये कि सरकार रोजगार सृजन हेतु क्या कदम उठा रही है?
Answer: बेरोजगारी के आर्थिक दुष्परिणाम हैं कि उत्पादन को नुकसान होता है, उत्पादकता बहुत कम हो जाती है, पूंजी निर्माण की दर धीमी रहती है जिससे औद्योगिक निवेश नहीं होता, और मानव संसाधन बेकार हो जाते हैं, जो एक तरह से बर्बादी है. बेरोजगारी के सामाजिक दुष्परिणामों में लोगों के जीवन-स्तर और सामाजिक स्तर में गिरावट आती है, और समुदाय के लोगों के बीच आपसी मतभेद उत्पन्न हो जाते हैं.
बेरोजगारी के सामान्य, साप्ताहिक और दैनिक स्तर:
• सामान्य स्तर: इसमें व्यक्ति के मुख्य कार्यकलाप की स्थिति देखी जाती है, यानी पिछले एक वर्ष में वह व्यक्ति किसी प्रकार के रोजगार में नहीं था. यह दीर्घकालीन बेरोजगारी को दर्शाता है.
• साप्ताहिक स्थिति: इसमें सर्वेक्षण के पिछले एक सप्ताह में व्यक्ति के रोजगार की स्थिति देखी जाती है. यदि इन सात दिनों में किसी भी एक दिन एक घंटे भी रोजगार प्राप्त नहीं होता, तो उसे उस सप्ताह के लिए बेरोजगार माना जाता है.
• दैनिक स्तर: इस स्तर पर व्यक्ति के श्रमबल को दिनों के आधार पर अनुमानित किया जाता है. यदि व्यक्ति किसी भी दिन चार घंटे तक रोजगार में है तो उसे आधे दिन के लिए रोजगार माना जाता है. यह अल्पकालिक बेरोजगारी और छुपी बेरोजगारी की ओर अधिक संकेत करता है.
सरकार द्वारा रोजगार सृजन हेतु प्रयास: केन्द्रीय और राज्य सरकारें बेरोजगारों के लिए अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराती हैं. इन प्रयासों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दो वर्गों में बांटा जा सकता है:
• प्रत्यक्ष प्रयास: सरकार अपने विभिन्न विभागों में नई नियुक्तियाँ करती है, और उद्योगों, होटलों तथा परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाती है. सरकारी उद्योगों में उत्पादन क्षमता की वृद्धि से अन्य उद्योगों को स्थापित होने की संभावना बढ़ती है, जिससे रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होते हैं.
• अप्रत्यक्ष प्रयास: सरकार द्वारा निर्धनता निवारण हेतु चलाए जा रहे कार्यक्रमों से अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए साधन उपलब्ध होते हैं. इन कार्यक्रमों से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, प्राथमिक शिक्षा, जलापूर्ति, गृह निर्माण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण आदि कार्य पूर्ण किए जाते हैं, जिससे रोजगार के साथ-साथ गाँव का संपूर्ण विकास भी होता है.
In simple words: बेरोजगारी से देश को आर्थिक नुकसान होता है और लोगों का जीवन खराब होता है. सरकार बेरोजगारी को मापने के लिए सामान्य, साप्ताहिक और दैनिक जैसे तरीके अपनाती है. सरकार नौकरी देने के लिए कई योजनाएं चलाती है, कुछ सीधी नौकरियां देती है और कुछ परोक्ष रूप से विकास के काम करती है.
🎯 Exam Tip: इस व्यापक प्रश्न के उत्तर में बेरोजगारी के बहुआयामी पहलुओं को शामिल करें: आर्थिक और सामाजिक प्रभाव, मापन के तरीके, और सरकार के ठोस कदम. प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें.
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