RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 12 वर्गीय एवं स्वकीय संतुलन प्रणाली

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Detailed Chapter 12 वर्गीय एवं स्वकीय संतुलन प्रणाली RBSE Solutions for Class 11 Accountancy

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Class 11 Accountancy Chapter 12 वर्गीय एवं स्वकीय संतुलन प्रणाली RBSE Solutions PDF

Rbse Class 11 Accountancy Chapter 12 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

Rbse Class 11 Accountancy Chapter 12 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. खाताबहियों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है ?
Answer: खाताबहियों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है: क्रय खाताबही, विक्रय खाताबही और सामान्य खाताबही। यह विभाजन बड़े व्यवसायों में काम को आसान बनाने के लिए किया जाता है।
In simple words: खाताबहियों को तीन तरह से बांटा जाता है: खरीदने की बही, बेचने की बही और एक सामान्य बही।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि खाताबहियों का यह विभाजन लेखांकन प्रक्रिया को सरल और अधिक कुशल बनाने में मदद करता है, खासकर बड़े संगठनों में।

 

Question 2. देनदार खातावही में कौन-से खाते खोले जाते हैं ?
Answer: देनदार खाताबही में केवल उन व्यक्तियों के खाते खोले जाते हैं जिनको उधार माल बेचा गया है। यह खाता यह दर्शाता है कि किन ग्राहकों से पैसा लेना बाकी है।
In simple words: देनदार खाताबही में उन लोगों के खाते होते हैं जिन्हें कंपनी ने उधार में सामान बेचा है।

🎯 Exam Tip: देनदार खाताबही का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों से प्राप्त होने वाली कुल राशि का ट्रैक रखना है, इसलिए इसमें केवल देनदारों के व्यक्तिगत खाते शामिल होते हैं।

 

Question 3. लेनदार खाताबही में कौन-से खाते खोले जाते हैं ?
Answer: लेनदार खाताबही में उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं के खाते खोले जाते हैं जिनसे व्यापार ने उधार पर माल खरीदा है। सामान्य खाताबही में विक्रय और क्रय खाताबहियों में खोले गए व्यक्तिगत खातों के अलावा अन्य व्यक्तिगत और अव्यक्तिगत खाते भी खोले जाते हैं जो इन देनदार-लेनदार खातों को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: लेनदार खाताबही में उन लोगों के खाते होते हैं जिनसे कंपनी ने उधार पर सामान खरीदा है, यानी जिन्हें कंपनी को पैसे देने हैं।

🎯 Exam Tip: लेनदार खाताबही यह सुनिश्चित करती है कि कंपनी को अपने आपूर्तिकर्ताओं (सप्लायर्स) को कितनी राशि का भुगतान करना है, इसका सटीक रिकॉर्ड रखा जा सके।

 

Question 5. खाताबहियों की सन्तुलन प्रणाली के प्रकार
Answer: खाताबहियों की सन्तुलन प्रणाली के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं: स्वकीय सन्तुलन प्रणाली और वर्गीय सन्तुलन प्रणाली। ये प्रणालियाँ यह सुनिश्चित करने में मदद करती हैं कि सभी खाते सही ढंग से संतुलित रहें और त्रुटियों का पता लगाना आसान हो।
In simple words: खातों को संतुलित करने के दो तरीके हैं: खुद से संतुलित होने वाली प्रणाली और ग्रुप में संतुलित होने वाली प्रणाली।

🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रणालियों को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये बड़े व्यवसायों में लेखांकन की सटीकता और दक्षता को प्रभावित करती हैं।

 

Question 6. कुल देनदार खाते के डेबिट पक्ष के पद बताइये।
Answer: कुल देनदार खाते के डेबिट पक्ष में देनदारों का प्रारम्भिक शेष, उधार बिक्री, देनदारों से वसूला गया ब्याज, गाडी भाड़ा, रोकड़ वापिसी और अनादृत बिल/चेक जैसे मद शामिल होते हैं। यह पक्ष देनदारों से प्राप्त होने वाली कुल राशि को बढ़ाता है।
In simple words: देनदार खाते के डेबिट साइड में देनदारों से जुड़ी हुई शुरुआती रकम, उधार बिक्री, ब्याज और वापस मिले चेक जैसी चीजें आती हैं।

🎯 Exam Tip: डेबिट पक्ष में देनदारों से प्राप्त होने वाली राशि में वृद्धि या बकाया देनदारी को बढ़ाने वाले लेन-देन दर्ज किए जाते हैं।

 

Question 7. कुल लेनदार खाते के डेबिट पक्ष के मद बताइये।
Answer: कुल लेनदार खाते के डेबिट पक्ष में लेनदारों को भुगतान, क्रय वापिसी, देय विपत्र, लेनदारों से प्राप्त बट्टा, और हस्तान्तरण (क्रय खाताबही से विक्रय खाताबही तथा विक्रय खाताबही से क्रय खाताबही में) जैसे मद शामिल होते हैं। यह पक्ष लेनदारों को देय कुल राशि को कम करता है।
In simple words: लेनदार खाते के डेबिट साइड में लेनदारों को दिया गया भुगतान, वापस की गई खरीदी, देय बिल और लेनदारों से मिली छूट जैसी चीजें आती हैं।

🎯 Exam Tip: डेबिट पक्ष लेनदारों को देय राशि में कमी या भुगतान की गई राशि को दर्शाता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि देनदार और लेनदार खातों में डेबिट और क्रेडिट का प्रभाव विपरीत होता है।

 

Question 8. सामान्य खाताबही में कौन-से समायोजन खाते खोलते हैं ?
Answer: सामान्य खाताबही में मुख्यतः दो प्रकार के समायोजन खाते खोले जाते हैं: क्रय खाताबही समायोजन खाता और विक्रय खाताबही समायोजन खाता। ये खाते अलग-अलग खाताबहियों को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
In simple words: सामान्य बही में दो खास खाते खोले जाते हैं – एक खरीदने वाली बही का एडजस्टमेंट खाता और दूसरा बेचने वाली बही का एडजस्टमेंट खाता।

🎯 Exam Tip: ये समायोजन खाते वर्गीय और स्वकीय संतुलन प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे तलपट का मिलान आसान हो जाता है।

 

Question 9. देनदार खाताबही में खोले जाने वाले नियन्त्रण खाते का नाम बताइये।
Answer: देनदार खाताबही में खोले जाने वाले नियन्त्रण खाते का नाम सामान्य खाताबही नियन्त्रण खाता है। यह खाता देनदार खाताबही में दर्ज सभी लेन-देनों का एक सारांश रखता है।
In simple words: देनदार खाताबही में "सामान्य खाताबही नियन्त्रण खाता" नाम का एक खाता होता है।

🎯 Exam Tip: यह नियन्त्रण खाता यह सुनिश्चित करता है कि देनदार खाताबही और सामान्य खाताबही के बीच कोई विसंगति न हो, जिससे लेखांकन की सटीकता बनी रहे।

 

Question 11. नकद बिक्री का लेखा किस खाताबही में लिखा जायेगा ?
Answer: नकद बिक्री का लेखा सामान्य खाताबही में लिखा जायेगा। नकद लेनदेन सीधे सामान्य बही को प्रभावित करते हैं, जबकि उधार लेनदेन सहायक बहियों को।
In simple words: नकद बिक्री को सामान्य बही में लिखा जाता है।

🎯 Exam Tip: नकद लेनदेन सामान्य खाताबही में दर्ज किए जाते हैं, जबकि उधार लेनदेन संबंधित सहायक खाताबहियों (जैसे विक्रय खाताबही) में दर्ज किए जाते हैं।

 

Question 12. एक ग्राहक से भुगतान प्राप्त हुआ, किस खाताबही में इसे लिखा जायेगा ?
Answer: एक ग्राहक से भुगतान प्राप्त होने पर इसे देनदार खाताबही में लिखा जायेगा, क्योंकि देनदार से राशि प्राप्त हुई है। यह एंट्री देनदार की देनदारी को कम करती है।
In simple words: जब ग्राहक पैसे देता है, तो इसे देनदार की बही में लिखा जाता है।

🎯 Exam Tip: ग्राहक से प्राप्त भुगतान उसके खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्ज किया जाता है, जिससे उसका बकाया शेष कम हो जाता है।

 

Question 13. व्यवसाय में नकद माल खरीदा किस खाताबही में इसे लिखा जायेगा ?
Answer: व्यवसाय में नकद माल खरीदने का लेखा सामान्य खाताबही में लिखा जायेगा। यह सीधा लेनदेन नकदी और माल के स्टॉक को प्रभावित करता है।
In simple words: जब नकद सामान खरीदा जाता है, तो उसे सामान्य बही में लिखा जाता है।

🎯 Exam Tip: सभी नकद लेनदेन, चाहे वे बिक्री हों या खरीद, सीधे सामान्य खाताबही (या नकदी बही जो सामान्य खाताबही का हिस्सा होती है) में रिकॉर्ड किए जाते हैं।

 

Question 14. ग्राहक द्वारा स्वीकृत बिल Rs 8,000 का अनादृत हो गया। देनदार खाताबही में ग्राहक के खाते में किस पक्ष में लिखा जायेगा ?
Answer: यदि ग्राहक द्वारा स्वीकृत बिल Rs 8,000 का अनादृत हो जाता है, तो देनदार खाताबही में ग्राहक के खाते में इसे डेबिट पक्ष में लिखा जायेगा। इससे ग्राहक की देनदारी फिर से बढ़ जाती है।
In simple words: अगर ग्राहक का बिल रद्द हो जाता है, तो उसे देनदार के खाते के डेबिट साइड में लिखते हैं, जिससे ग्राहक का उधार फिर से बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: अनादृत बिल देनदार की देनदारी को बहाल कर देता है, इसलिए उसे फिर से डेबिट करके बकाया राशि को बढ़ाया जाता है।

 

Question 15. वर्गीय सन्तुलन प्रणाली में कौन-सी खाताबही सन्तुलित होती है ?
Answer: वर्गीय सन्तुलन प्रणाली में सामान्य खाताबही सन्तुलित होती है। इस प्रणाली का मुख्य लक्ष्य प्रत्येक सहायक खाताबही के कुल शेष को सामान्य खाताबही में एक नियंत्रण खाते के माध्यम से संतुलित करना है।
In simple words: वर्गीय सन्तुलन प्रणाली में, मुख्य सामान्य बही संतुलित होती है।

🎯 Exam Tip: वर्गीय संतुलन प्रणाली में, देनदार और लेनदार खाताबही के कुल योग को सामान्य खाताबही में नियंत्रण खातों के माध्यम से समायोजित किया जाता है, जिससे सामान्य खाताबही स्वतंत्र रूप से संतुलित हो जाती है।

 

Question 16. स्वकीय सन्तुलन प्रणाली में तलपट किस-किस खाताबही में बनाया जाता है ? नाम लिखिए।
Answer: स्वकीय सन्तुलन प्रणाली में तलपट बनाने के लिए सामान्य खाताबही में कुल लेनदारों और कुल देनदारों की राशि के अंतरण से सामान्य खाताबही में सभी पक्षों के शेष आ जाते हैं, जिससे तलपट बनाना आसान हो जाता है। इस प्रणाली में विक्रय खाताबही, क्रय खाताबही और सामान्य खाताबही तीनों से ही तलपट तैयार किया जा सकता है।
In simple words: स्वकीय संतुलन प्रणाली में सभी खाताबहियों (खरीद, बिक्री और सामान्य बही) से अलग-अलग तलपट बनाए जा सकते हैं, क्योंकि हर बही खुद ही संतुलित होती है।

🎯 Exam Tip: स्वकीय संतुलन प्रणाली का प्रमुख लाभ यह है कि प्रत्येक खाताबही से स्वतंत्र रूप से तलपट तैयार किया जा सकता है, जिससे त्रुटियों का पता लगाना और सुधारना आसान हो जाता है।

Rbse Class 11 Accountancy Chapter 12 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कुल देनदार खाते का प्रारूप बनाइये।
Answer: कुल देनदार खाता एक ऐसा विवरण है जो सभी देनदारों से प्राप्त होने वाली कुल राशि को दर्शाता है। इसका प्रारूप नीचे दी गई तालिका में दिखाया गया है, जो डेबिट और क्रेडिट दोनों पक्षों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है।

DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)

In simple words: कुल देनदार खाता एक चार्ट है जो दिखाता है कि हमें ग्राहकों से कितना पैसा लेना है। इसमें तारीख, विवरण और पैसे की रकम दोनों साइड (डेबिट और क्रेडिट) पर लिखी होती है।

🎯 Exam Tip: देनदार खाते के प्रारूप में डेबिट पक्ष में देनदारों से संबंधित आय या वृद्धि दर्ज की जाती है, जबकि क्रेडिट पक्ष में देनदारों को किए गए भुगतान या उनकी देनदारी में कमी दर्ज की जाती है।

 

Question 2. कुल लेनदार खाते का प्रारूप बताइये।
Answer: कुल लेनदार खाता व्यापार को उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं को देय कुल राशि को दर्शाता है जिनसे उधार पर माल खरीदा गया है। इसका प्रारूप नीचे दी गई तालिका में दिखाया गया है, जिसमें लेनदारों के सभी लेनदेन का रिकॉर्ड होता है।

DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)

In simple words: कुल लेनदार खाता एक चार्ट है जो दिखाता है कि हमें सप्लायरों को कितना पैसा देना है। इसमें तारीख, विवरण और पैसे की रकम दोनों साइड (डेबिट और क्रेडिट) पर लिखी होती है।

🎯 Exam Tip: लेनदार खाते के प्रारूप में क्रेडिट पक्ष में लेनदारों से संबंधित देनदारी या वृद्धि दर्ज की जाती है, जबकि डेबिट पक्ष में लेनदारों को किए गए भुगतान या उनकी देनदारी में कमी दर्ज की जाती है।

 

Question 3. खाताबही के विभाजन से आप क्या समझते हैं ?
Answer: खाताबही के विभाजन का मतलब है कि बड़े व्यवसायों में, एक बड़ी खाताबही रखने की बजाय, उसे तीन अलग-अलग खाताबहियों में बांट देना। ये तीन खाताबहियां क्रय खाताबही, विक्रय खाताबही और सामान्य खाताबही होती हैं। ऐसा करने से काम आसान हो जाता है, क्योंकि बहुत सारे खाते होने पर एक ही खाताबही का आकार बहुत बड़ा हो जाता है। अगर एक ही व्यक्ति सारे खाते संभालेगा, तो अंतिम खाते बनाने में देर होगी और गलतियों का पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए, वर्गीय संतुलन प्रणाली जैसी विभाजन प्रणालियाँ बहुत ज़रूरी हैं।
In simple words: खाताबही का विभाजन का मतलब है कि बड़े व्यापार में एक ही बड़ी बही को तीन छोटी बहियों में बांट देना, ताकि काम आसान हो जाए और गलतियां खोजने में आसानी हो।

🎯 Exam Tip: खाताबही का विभाजन लेखांकन दक्षता बढ़ाने और त्रुटियों को कम करने के लिए किया जाता है, जिससे बड़े व्यवसायों में वित्तीय विवरण तैयार करना सरल हो जाता है।

 

Question 4. देनदार खाताबही के उपविभाजन के आधार बताइये।
Answer: प्रायः बड़े व्यवसायों में देनदारों की संख्या बहुत अधिक होती है। ऐसे में, यदि केवल एक विक्रय खाताबही हो, तो वह सभी देनदारों के लिए पर्याप्त नहीं होती। इसलिए, देनदार खाताबही को और छोटे हिस्सों में बाँटने की ज़रूरत पड़ सकती है ताकि काम और आसान हो सके। खाताबही का उपविभाजन करने से अलग-अलग क्षेत्रों या वर्णों के आधार पर देनदारों के खातों को व्यवस्थित किया जा सकता है। ऐसा करने से काम को आसानी से किया जा सकता है, जिससे खातों का प्रबंधन सरल और प्रभावी बनता है।
In simple words: देनदार खाताबही को और छोटे हिस्सों में इसलिए बांटा जाता है क्योंकि बड़े व्यापार में बहुत सारे देनदार होते हैं, और एक ही बही में सबको संभालना मुश्किल हो जाता है।

🎯 Exam Tip: देनदार खाताबही का उपविभाजन करने से देनदारों के प्रबंधन में सुधार होता है, जिससे व्यक्तिगत खातों की निगरानी आसान हो जाती है और वसूली प्रक्रिया में तेजी आती है।

 

Question 6. एक ग्राहक से Rs 6,000 अग्रिम प्राप्त हुये परन्तु लेखा वर्ष के अन्त तक उसे माल नहीं भेजा गया। ग्राहक के खाते में कौन-सा शेष होगा ?
Answer: यदि एक ग्राहक से Rs 6,000 अग्रिम प्राप्त हुए हैं लेकिन लेखा वर्ष के अंत तक उसे माल नहीं भेजा गया है, तो ग्राहक के खाते में क्रेडिट शेष होगा। इसका मतलब है कि ग्राहक ने कंपनी को ज्यादा पैसे दे दिए हैं, और कंपनी को अभी उसे माल भेजना बाकी है या पैसे वापस करने हैं।
In simple words: ग्राहक से पैसे पहले मिल गए, पर सामान नहीं भेजा, तो ग्राहक के खाते में क्रेडिट बैलेंस रहेगा।

🎯 Exam Tip: अग्रिम प्राप्तियाँ देनदार के खाते को क्रेडिट करती हैं, क्योंकि यह कंपनी के लिए एक देनदारी है जब तक कि माल या सेवा प्रदान नहीं की जाती।

 

Question 7. व्यवसाय में Rs 1,00,000 का नकद माल क्रय किया। उसमें से Rs 8,000 का माल वापस भेजा गया। अभी तक पैसा वापस नहीं मिला, आपूर्तिकर्ता के खाते में कौन-सा शेष होगा ?
Answer: यदि व्यवसाय में Rs 1,00,000 का नकद माल खरीदा गया और उसमें से Rs 8,000 का माल वापस भेज दिया गया, लेकिन अभी तक पैसा वापस नहीं मिला, तो आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) के खाते में डेबिट शेष होगा। इसका मतलब है कि सप्लायर को कंपनी को Rs 8,000 वापस करने हैं।
In simple words: नकद माल खरीदा, कुछ वापस किया, पर पैसे नहीं मिले, तो सप्लायर के खाते में डेबिट बैलेंस होगा।

🎯 Exam Tip: जब कोई माल आपूर्तिकर्ता को वापस किया जाता है और अभी तक भुगतान प्राप्त नहीं होता है, तो आपूर्तिकर्ता का खाता डेबिट हो जाता है क्योंकि अब वह कंपनी का देनदार बन जाता है।

 

Question 8. सामान्य खाताबही में नियन्त्रण खाते खोलने हेतु लेखा प्रविष्टियाँ कीजिये।
Answer: सामान्य खाताबही में नियन्त्रण खाते खोलने के लिए निम्नलिखित लेखा प्रविष्टियाँ की जाती हैं:
(1) विक्रय खाताबही समायोजन खाता-
(A) विक्रय खाताबही समायोजन खाते के Dr. पक्ष में आने वाली मदों के लिए:
Sales Ledger Adjustment A/c Dr.
To General Ledger Adjustment A/c
(B) विक्रय खाताबही समायोजन खाते के Cr. पक्ष में आने वाली मदों के लिए:
General Ledger Adjustment A/c Dr.
To Sales Ledger Adjustment A/C
(2) क्रय खाताबही समायोजन खाता
(A) क्रय खाताबही समायोजन खाते के Dr. पक्ष में आने वाली मदों के लिए:
Purchase Ledger Adjustment A/C Dr.
To General Ledger Adjustment A/c
(B) क्रय खाताबही समायोजन खाते के Cr. पक्ष में आने वाली मदों के लिए:
General Ledger Adjustment A/c Dr.
In simple words: सामान्य बही में एडजस्टमेंट खाते खोलने के लिए बिक्री और खरीद के एडजस्टमेंट खातों में एंट्री करते हैं ताकि सब खाते सही से मिल जाएं।

🎯 Exam Tip: ये प्रविष्टियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि सहायक खाताबहियों (बिक्री और खरीद) का कुल योग सामान्य खाताबही के नियंत्रण खातों से मेल खाता है, जिससे खातों का संतुलन बना रहता है।

 

Question 10. एक खाताबही से दूसरी खाताबही में हस्तान्तरण लेखा कैसे किया जाता है ? उदाहरण दीजिये।
Answer: एक खाताबही से दूसरी खाताबही में हस्तान्तरण लेखा तब किया जाता है जब किसी लेनदार या देनदार का शेष एक खाताबही में कम हो और उसे दूसरी खाताबही में स्थानांतरित करके शुद्ध देनदार या लेनदार राशि की गणना करनी हो। यह प्रक्रिया खातों को सही ढंग से संतुलित रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
उदाहरण – मान लीजिए 'ए' के क्रय खाताबही में Rs 7,000 का क्रेडिट शेष है और विक्रय खाताबही में Rs 9,000 का डेबिट शेष है। इस स्थिति में, क्रय खाताबही के शेष को विक्रय खाताबही में स्थानांतरित किया जाएगा। प्रविष्टि इस प्रकार होगी:
A's A/c (In Purchase Ledger) Dr. 7,000
To A's A/c (in Sales Ledger) 7,000
(Credit balance of A's a/c in purchase ledger transfer to his a/c in sales ledger)
In simple words: जब किसी एक बही में किसी का बैलेंस कम हो और उसे दूसरी बही में भेजना हो, तो ट्रांसफर एंट्री करते हैं। जैसे, अगर 'ए' का उधार खाते में क्रेडिट बैलेंस है और बिक्री खाते में डेबिट बैलेंस है, तो उधार खाते से बिक्री खाते में एंट्री ट्रांसफर करेंगे।

🎯 Exam Tip: हस्तान्तरण प्रविष्टियों का उपयोग तब किया जाता है जब कोई ग्राहक या आपूर्तिकर्ता दोनों देनदार और लेनदार होता है, और उसके खातों को एक बही में समेकित करने की आवश्यकता होती है।

 

Question 11. विपरीत शेष से आप क्या समझते हैं ?
Answer: विपरीत शेष का मतलब है जब किसी व्यक्तिगत खाते में उसका सामान्य या स्वाभाविक शेष नहीं होता, बल्कि उसका उल्टा शेष दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, देनदारों का खाता आमतौर पर डेबिट शेष दिखाता है, क्योंकि उनसे पैसे लेने होते हैं। लेकिन कभी-कभी, देनदारों का खाता क्रेडिट शेष दिखा सकता है, जिसका मतलब है कि उन्होंने ज़्यादा भुगतान कर दिया है। इसी तरह, लेनदारों का खाता आमतौर पर क्रेडिट शेष दिखाता है, क्योंकि उन्हें पैसे देने होते हैं। लेकिन कभी-कभी, लेनदारों का खाता डेबिट शेष दिखा सकता है, जिसका मतलब है कि उन्हें गलती से ज़्यादा भुगतान हो गया है या उन्होंने माल वापस किया है।
In simple words: विपरीत शेष तब होता है जब किसी खाते में उसका उल्टा बैलेंस दिखता है, जैसे देनदार का क्रेडिट बैलेंस या लेनदार का डेबिट बैलेंस।

🎯 Exam Tip: विपरीत शेष अक्सर त्रुटियों, अग्रिम भुगतानों या माल वापसी के कारण होते हैं। इन शेषों को समझना और उनका सही ढंग से समायोजन करना लेखांकन की सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. क्या यह सही है कि स्वकीय सन्तुलन प्रणाली में दोहरा लेखा प्रणाली का पालन नहीं होता। कारण सहित उत्तर दीजिये।।
Answer: नहीं, यह कहना सही नहीं है कि स्वकीय सन्तुलन प्रणाली में दोहरा लेखा प्रणाली का पालन नहीं होता। असल में, स्वकीय संतुलन प्रणाली में कुछ ऐसे लेनदेन होते हैं जिनका लेखा दोनों पक्षों में हो जाता है, जैसे नकद क्रय, नकद विक्रय, वेतन का भुगतान, या खर्चों का भुगतान। लेकिन कुछ लेनदेन ऐसे भी होते हैं जिनका एक पक्ष विक्रय खाताबही या क्रय खाताबही में दर्ज होता है, और दूसरा पक्ष सामान्य खाताबही में लिखा जाता है। इसका मतलब है कि दोहरा लेखा भिन्न-भिन्न बहियों में होता है, लेकिन यह फिर भी दोहरा लेखा प्रणाली का ही एक रूप है।
In simple words: नहीं, स्वकीय संतुलन प्रणाली में दोहरा लेखा प्रणाली का पालन होता है। कुछ लेन-देन दोनों बहियों में लिखे जाते हैं, जबकि कुछ में एक बही में और दूसरा सामान्य बही में लिखा जाता है।

🎯 Exam Tip: स्वकीय संतुलन प्रणाली दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धांतों पर आधारित है, लेकिन यह विभिन्न बहियों के बीच नियंत्रण खातों का उपयोग करके खातों को संतुलित करती है, जिससे प्रत्येक बही स्वतंत्र रूप से तलपट तैयार करने में सक्षम होती है।

 

Question 17. निजी खाताबही में खोले जाने वाले खातों के नाम बताइये।
Answer: निजी खाताबही में मुख्य रूप से पूँजी खाता, आहरण खाता और ऋण खाता जैसे खाते खोले जाते हैं। ये खाते व्यवसाय के मालिक के व्यक्तिगत लेनदेन और निवेश को रिकॉर्ड करते हैं।
In simple words: निजी बही में मालिक की पूँजी, आहरण और ऋण के खाते होते हैं।

🎯 Exam Tip: निजी खाताबही व्यवसाय के मालिक और व्यवसाय के बीच के वित्तीय संबंधों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करना आसान हो जाता है।

Rbse Class 11 Accountancy Chapter 12 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. वर्गीय सन्तुलन प्रणाली एवं स्वकीय सन्तुलन प्रणाली का अर्थ बताइये। ये प्रणालियाँ किन परिस्थितियों में उपयोगी होती है ? समझाइये।
Answer: वर्गीय संतुलन प्रणाली और स्वकीय संतुलन प्रणाली दोनों लेखांकन की महत्वपूर्ण प्रणालियाँ हैं जो खातों को संतुलित रखने और त्रुटियों का पता लगाने में मदद करती हैं।
(i) वर्गीय सन्तुलन प्रणाली – यह वह प्रणाली है जिसमें खातों को विशेष श्रेणियों में बांटा और वर्गीकृत किया जाता है ताकि उन्हें नियंत्रित करना आसान हो। इसका मतलब है कि एक बड़ी खाताबही को कई छोटे वर्गों या उपविभागों में बांट दिया जाता है, और प्रत्येक खाताबही में अलग-अलग प्रकार के खाते खोले जाते हैं। इस प्रणाली के तहत एक खाताबही को मुख्य रूप से तीन खाताबहियों में बांटा जाता है: 1. विक्रय खाताबही, 2. क्रय खाताबही, 3. सामान्य खाताबही। यह प्रणाली लेखांकन की दोहरा लेखा पद्धति पर आधारित है। खातों को संतुलित करने की दो मुख्य प्रणालियाँ हैं: वर्गीय सन्तुलन प्रणाली और स्वकीय सन्तुलन प्रणाली।
वर्गीय संतुलन प्रणाली में, खाताबहियों को संतुलित करने के लिए कुल देनदार खाता (जिन्हें उधार माल बेचा गया है) और कुल लेनदार खाता (जिनसे उधार माल खरीदा गया है) खोले जाते हैं। इन खातों को सामान्य खाताबही में भी खोला जाता है। जब इन सभी खातों को सामान्य खाताबही में खोल दिया जाता है, तभी सामान्य खाताबही संतुलित होती है। यह प्रक्रिया पूरी होती है क्योंकि उधार क्रय और उधार विक्रय के लेखे सीधे सामान्य खाताबही में दर्ज नहीं होते। कुल देनदार और कुल लेनदार खाते सामान्य खाताबही में खोलने से सामान्य खाताबही पूर्ण होती है और संतुलित हो जाती है, जिससे तलपट और अंतिम खाते आसानी से बनाए जा सकते हैं।
(ii) स्वकीय सन्तुलन प्रणाली – इस प्रणाली में कुछ लेनदेन ऐसे होते हैं जिनकी दोहरी प्रविष्टि सामान्य खाताबही में पूरी होती है। लेकिन कुछ लेनदेन ऐसे भी होते हैं जिनकी एक प्रविष्टि क्रय खाताबही या विक्रय खाताबही में होती है, और दूसरी प्रविष्टि सामान्य खाताबही में होती है, जैसे उधार क्रय, उधार विक्रय, विक्रय वापसी, और क्रय वापसी। इन लेनदेन की दोहरी प्रविष्टि को पूरा करने के लिए सामान्य खाताबही में क्रय खाताबही समायोजन खाता और विक्रय खाताबही समायोजन खाता बनाया जाता है, जिससे सामान्य खाताबही स्वतः ही समायोजित या संतुलित हो जाती है। इसका अर्थ है कि सामान्य खाताबही में दो समायोजन खाते खोलकर दोहरी प्रविष्टि को पूरा करना ही स्वकीय सन्तुलन प्रणाली कहलाता है।
इसमें निम्न प्रविष्टियों द्वारा स्वकीय संतुलन किया जाता है:
(1) विक्रय खाताबही के स्वकीय सन्तुलन हेतु
General Ledger Adjustment A/C Dr.
To Sales Ledger Adjustment A/C
(Balance of sales ledger transferred to general ledger)
(3) सामान्य खाताबही को स्वकीय सन्तुलन के लिये
(i) विक्रय खाताबही समायोजन के Dr. में आने वाली मदों के योग से
Sales Ledger Adjustment A/c
To General Ledger Adjustment A/c
(ii) विक्रय खाताबही समायोजन के Cr. में आने वाली मदों के लिये
General Ledger Adjustment A/c
To Sales Ledger Adjustment A/C
(iii) क्रय खाता बही समायोजन खाते के Dr. में, आने वाली मदों के लिये
Purchase Ledger Adjustment A/C Dr.
To General Ledger Adjustment A/c
(iv) क्रय खाताबही समायोजन खाते के Cr. में आने वाली मदों के लिये
General Ledger Adjustment A/c Dr.
To Purchase Ledger Adjustment A/C
इस प्रकार सभी खाताबहियों को सन्तुलित किया जाकर तलपट व अन्तिम खाते बनाये जाते हैं।
2. विक्रय खाताबही में सामान्य खाताबही समायोजन खाता खोला जाता है अर्थात् विक्रय खाताबही समायोजन खाते के शेष को सामान्य खाताबही समायोजन खाते में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। जर्नल प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी:
General Ledger Adjustment A/C Dr.
To Sales Ledger Adjustment A/C
(Balance of sales ledger transferred to G.L. Dr. vice-versa)
3. क्रय खाताबही में भी सामान्य समायोजन खाता खोला जाता है अर्थात् क्रय खाताबही समायोजन खाते के शेष को सामान्य खाताबही समायोजन खाते में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। जर्नल प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी:
Purchase Ledger Adjustment A/c Dr.
To General Ledger Adjustment A/c
(Balance of purchase ledger transferred to G.L. or vice-versa)
इस प्रकार तीनों बहियों में उपरोक्त नियन्त्रण/समायोजन खाते खोले जाते हैं।
उपयोगी परिस्थितियाँ – ये प्रणालियाँ उन बड़े-बड़े व्यवसायों में बहुत उपयोगी होती हैं जहाँ लेनदेन बहुत अधिक संख्या में होते हैं, और देनदार व लेनदारों की संख्या भी बहुत ज़्यादा होती है। ऐसी जगहों पर वर्गीय संतुलन प्रणाली अपनाई जाती है। इसी तरह, स्वकीय संतुलन प्रणाली भी बड़े व्यवसायों के लिए उपयोगी है क्योंकि इसमें प्रत्येक खाताबही से तलपट तैयार किया जा सकता है। ये प्रणालियाँ छोटे व्यवसायों के लिए उपयुक्त नहीं हैं जहाँ लेनदेन कम होते हैं।
In simple words: वर्गीय संतुलन प्रणाली में खाते अलग-अलग छोटे हिस्सों में बांटे जाते हैं ताकि उन्हें नियंत्रित किया जा सके, जैसे बिक्री, खरीद और सामान्य बही। स्वकीय संतुलन प्रणाली में कुछ लेनदेन सामान्य बही में होते हैं, और बाकी सहायक बहियों में। दोनों प्रणालियाँ बड़े व्यवसायों के लिए अच्छी हैं जहाँ बहुत सारे लेनदेन होते हैं और अलग-अलग बहियों को संतुलित करना होता है।

🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रणालियों के बीच मुख्य अंतर यह है कि वर्गीय संतुलन प्रणाली में नियंत्रण खाते मुख्य रूप से सामान्य बही में होते हैं, जबकि स्वकीय संतुलन प्रणाली में प्रत्येक सहायक बही खुद को संतुलित करती है, जिससे प्रत्येक बही से अलग-अलग तलपट बनाया जा सकता है।

 

Question 3. नियन्त्रण अथवा समायोजन खातों से क्या अभिप्राय है ? सामान्य खाताबही, देनदार खाताबही वे लेनदार खाताबही में खोले जाने वाले नियन्त्रण/समायोजन खातों का विस्तार से वर्णन करो।
Answer: नियन्त्रण या समायोजन खाते वे खाते होते हैं जो प्रत्येक खाताबही में प्रत्येक लेनदेन का दोहरा लेखा रखने के लिए एक अलग से बनाए जाते हैं। इन खातों को खोलने से खाताबही संतुलित रहती है, और तलपट व अंतिम खाते बनाकर व्यापार की वित्तीय स्थिति की सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ये खाते त्रुटियों का पता लगाने और लेखांकन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
1. सामान्य खाताबही में दो समायोजन/नियन्त्रण खाते खोले जाते हैं:
(i) विक्रय खाताबही समायोजन खाता।
(ii) क्रय खाताबही समायोजन खाता।।
(i) विक्रय खाताबही समायोजन खाता – इस खाते के डेबिट (Dr.) और क्रेडिट (Cr.) पक्ष में आने वाली मदों के जोड़ को एक जर्नल प्रविष्टि के द्वारा सामान्य खाताबही में स्थानान्तरित करके खाताबहियों को नियंत्रित किया जाता है। प्रविष्टियाँ निम्न प्रकार होती हैं:
(a) विक्रय खाताबही समायोजन खाते के Dr./मदों के योग से
(b) विक्रय खाताबही समायोजन खाते के Cr. की मदों के योग से
General Ledger Adjustment A/c Dr.
To Sales Ledger Adjustment A/C
(ii) क्रय खाताबही समायोजन खाता – उपरोक्तानुसार ही इस खाते के Dr. व Cr. पक्ष में आने वाली मदों के जोड़ को एक जर्नल प्रविष्टि के द्वारा सामान्य खाताबही में स्थानान्तरित करके खाताबहियों को नियंत्रित किया जाता है। प्रविष्टियाँ निम्न प्रकार होंगी:
(a) क्रय खाताबही समायोजन खाते के Dr. पक्ष की मदों के योग से।
Purchase Ledger Adjustment A/c Dr.
To General Ledger Adjustment A/c
(b) क्रय खाताबही समायोजन खाते के Cr. पक्ष की मदों के योग से
General Ledger Adjustment A/c
To Purchase Ledger Adjustment A/c
2. विक्रय खाताबही में सामान्य खाताबही समायोजन खाता खोला जाता है अर्थात् विक्रय खाताबही समायोजन खाते के शेष को सामान्य खाताबही समायोजन खाते में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। जर्नल प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी:
General Ledger Adjustment A/C Dr.
To Sales Ledger Adjustment A/C
(Balance of sales ledger transferred to G.L. Dr. vice-versa)
3. क्रय खाताबही में-क्रय खाता में भी सामान्य समायोजन खाता खोला जाता है अर्थात् क्रय खाताबही समायोजन खाते के शेष को सामान्य खाताबही समायोजन खाते में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। जर्नल प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी:
Purchase Ledger Adjustment A/c Dr.
To General Ledger Adjustment A/c
(Balance of purchase ledger transferred to G.L. or vice-versa)
इस प्रकार तीनों बहियों में उपरोक्त नियन्त्रण/समायोजन खाते खोले जाते हैं।
In simple words: नियंत्रण खाते हमें यह बताते हैं कि हमारी बहियाँ सही हैं या नहीं। सामान्य बही में दो तरह के नियंत्रण खाते होते हैं, जो खरीदने और बेचने वाली बहियों से जुड़े होते हैं। ये खाते सब बहियों को एक साथ संतुलित रखने में मदद करते हैं ताकि व्यापार की सही हालत पता चल सके।

🎯 Exam Tip: नियंत्रण खाते सहायक बहियों के कुल योग को सामान्य बही में दर्शाते हैं, जिससे तलपट का मिलान आसान हो जाता है और त्रुटियों को तुरंत खोजा जा सकता है।

 

Question 4. बहु खाताबही (Multiple Ledger) प्रणाली की अवधारणा का वर्णन कीजिये। इसके लाभों का भी वर्णन कीजिये।
Answer: बहु खाताबही (Multiple Ledger) प्रणाली का अर्थ है कि एक ही बड़ी खाताबही को कई छोटी खाताबहियों में बांट देना। यह प्रणाली बड़े व्यवसायों के लिए बहुत उपयोगी होती है, जहाँ लेनदेन की संख्या और खातों की संख्या बहुत अधिक होती है। एक बड़ी खाताबही को संभालना मुश्किल हो जाता है, जिससे त्रुटियों का पता लगाना और उन्हें सुधारना कठिन होता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए खाताबही को विभाजित किया जाता है। यदि विक्रय खाताबही और क्रय खाताबही में भी खातों की संख्या अधिक हो, तो उन्हें क्षेत्रानुसार या वर्णानुसार भी विभाजित किया जा सकता है, जिससे काम और आसान हो जाता है।
इस प्रणाली के लाभ निम्न प्रकार हैं:

  • लेखा पुस्तकों की जाँच में शुद्धता: खाताबही को विभाजित करने से उनकी शुद्धता की जाँच करना संभव हो जाता है।
  • भार में कमी: खाताबही को कई भागों में बांटने से उसका कुल भार कम हो जाता है, जिससे खातों का प्रबंधन आसान होता है।
  • तलपट के मिलान में सरलता: यदि कहीं कोई चूक हो जाती है, तो उसे बहुत जल्दी सुधारा जा सकता है और तलपट का मिलान आसानी से हो जाता है।
  • उत्तरदायित्व का निर्धारण: अलग-अलग लेखांकन कर्मियों को दायित्व बांटते हुए, अशुद्धि के लिए या चोरी और गबन के लिए जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
  • कार्यकुशलता में वृद्धि: काम को बांटकर करने से कर्मचारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।
  • अन्तिम लेखे बनाने में सहायक: यदि वर्ष के मध्य में अंतिम लेखे तैयार करने हों, तो यह विभाजन शीघ्रता से मदद करता है।
  • खाताबही के प्रयोग में सुविधा: व्यवहारों की प्रकृति के अनुसार शीघ्र ही कार्य को पूरा कर खाताबहियों को पूर्ण करना व प्रयोग करना सरल रहता है।
  • कपट व जालसाजी पर रोक: पारदर्शिता होने और उत्तरदायित्व निर्धारण के कारण कपट, जालसाजी, चोरी जैसे कार्यों पर रोक लगती है।

In simple words: बहु खाताबही प्रणाली में एक बड़ी बही को कई छोटी बहियों में बांट देते हैं। इसके बहुत फायदे हैं जैसे गलतियाँ जल्दी पकड़ में आती हैं, काम का बोझ कम होता है, और यह बड़े व्यापारों में बहुत काम आती है।

🎯 Exam Tip: बहु खाताबही प्रणाली बड़े व्यवसायों में लेखांकन की दक्षता, पारदर्शिता और सटीकता को बढ़ाती है, जिससे वित्तीय प्रबंधन और निर्णय लेना आसान हो जाता है।

Rbse Class 11 Accountancy Chapter 12 आंकिक प्रश्न

 

Question 1. कृष्णा ट्रेडिंग कम्पनी की पुस्तकों में 1 अप्रैल, 2016 को कुल देनदार खाते का शेष Rs 2,70,000 एवं कुल लेनदार खाते का शेष Rs 3,20,000 था। आगामी छः महीनों में 30.09.2016 तक निम्न लेनदेन हुए (Books of Krishna Trading Company shows on 1st April, 2016 Total Debtors Rs 2,70,000 and Total Creditors A/C Rs 3,20,000. The following are the transactions upto 30.09.2016.)

विवरण (Particulars)\( Rs \)विवरण (Particulars)\( Rs \)
बट्टा दिया गया (Discount Allowed)20,000बट्टा प्राप्त हुआ (Discount Received)15,000
प्राप्य बिल अनादृत (Bills Receivable Dishonoured)45,000लेनदारों को रोकड़ (Cash Payment to Creditors)1,80,000
देनदारों से रोकड़ (Cash from Debtors)2,20,000लेनदारों से ब्याज (Interest Charged on Creditors)1,000
डूबत ऋण (Bad Debts)25,000लेनदार का डेबिट शेष (Debit Balance Creditors (Dr.))3,000
माहकों पर ब्याज (Interest Charged to Customers)5,000

आप कुल देनदार खाता एवं कुल लेनदार खाता सामान्य खाताबही में बनाइये। (Prepare Total Debtors A/c and Total Creditors A/c in General Ledger.)
Answer: कृष्णा ट्रेडिंग कम्पनी के लिए 1 अप्रैल, 2016 से 30 सितंबर, 2016 तक की लेनदेन के आधार पर, कुल देनदार खाते और कुल लेनदार खाते सामान्य खाताबही में निम्नानुसार तैयार किए गए हैं। इन खातों में देनदारों और लेनदारों से संबंधित सभी वित्तीय गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है ताकि उनके अंतिम शेष को निर्धारित किया जा सके।
In General Ledger Total Debtors Account
DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)
To Balance b/d2,70,000By Bills Receivable3,00,000
To Sales (Credit)5,50,000By Discount20,000
To Bills Receivable Dishonoured45,000By Cash2,20,000
By Bad Debts25,000
To Interest Charged5,000By Balance c/d3,05,000
8,70,0008,70,000

Total Creditors Account
DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticulasJ.F.Amount \( Rs \)
To Bills Payable2,70,000By Balance b/d3,20,000
To Discount15,000By Purchase3,30,000
To Cash1,80,000By Interest Charged1,000
To Balance c/d1,89,000By Balance c/d3,000
6,54,0006,54,000

In simple words: हमने कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी के सभी देनदारों और लेनदारों के खाते बनाए हैं। देनदार खाते में कुल देनदारों से मिलने वाले पैसे और लेनदार खाते में हमें दूसरों को देने वाले पैसे का हिसाब रखा गया है, जिसमें सभी खरीदी-बिक्री और भुगतानों को शामिल किया गया है।

🎯 Exam Tip: कुल देनदार और कुल लेनदार खाते बनाते समय, शुरुआती शेष, क्रेडिट बिक्री/खरीद, नकद प्राप्तियां/भुगतान, बट्टा, और अनादृत बिल जैसी सभी संबंधित प्रविष्टियों को सही पक्ष में दर्ज करना सुनिश्चित करें।

 

Question 2. (Krishna and Priyanka are partners in a firms. On 01.01.2017 their accounts books reveal the Dr. – Balance Rs 80,000 and credit balance Rs 1,400 in Debtors Ledger. Their creditors ledger shows credit balance Rs 62,500 and debit balance Rs 800. The details for the last quarter ended on 31.03.2017 of creditors are as follows)

विवरण (Particulars)\( Rs \)विवरण (Particulars)\( Rs \)
उधार बिक्री (Credit Sales)3,20,000उधार क्रय (Credit Purchases)2,60,000
देनदारों से प्राप्त रोकड़ (Cash Received from Debtors)2,29,000लेनदारों को भुगतान (Payment to Creditors)1,80,000
बट्टा दिया गया (Discount Allowed)3,500बट्टा प्राप्त हुआ (Discount Received)4,900
प्राप्य बिल (Bills Receivable)45,000बाह्य माल वापसी (Return Outward)2,000
प्राप्य बिल अनादृत (Bills Receivable dishonoured)4,000स्वीकृत किये बिल (B/P Bills Payable)3,400
आन्तरिक माल वापसी (Return Inward)3,000डूबत ऋण की वसूली (Bad Debts Recovered)3,000
बिलों को बट्टे पर भुनाया (Bills Discounted)20,000

अन्तिम तिमाही के अन्त में देनदार खाताबही का क्रेडिट शेष वही है जो 1.1.2017 को था, जबकि लेनदार खाताबही में अब कोई डेबिट शेष नहीं है। आप सामान्य खाताबही में कुल देनदार खाता एवं कुल लेनदार खाता बनाइये ।
Answer: कृष्णा और प्रियंका की फर्म के लिए 1 जनवरी, 2017 से 31 मार्च, 2017 तक की अंतिम तिमाही के लेन-देन के आधार पर, कुल देनदार खाते और कुल लेनदार खाते सामान्य खाताबही में निम्नानुसार तैयार किए गए हैं। इन खातों में देनदारों और लेनदारों से संबंधित सभी वित्तीय गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया है, ताकि उनके अंतिम शेष को निर्धारित किया जा सके।
Total Debtors Account
DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)
To Balance b/d80,000By Balance b/d1,400
To Sales3,20,000By Discount3,500
To B/R Dishonoured4,000By Bills Receivable45,000
To Balance c/d1,400By S/R3,000
By Balance c/d1,23,500
4,05,4004,05,400

Total Creditors Account
DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)
To Balance b/d800By Balance b/d62,500
To Cash1,80,000By Purchase2,60,000
To Discount4,900
To P/R2,000
To Bills Payable3,400
To Balance c/d1,31,400
3,22,5003,22,500

In simple words: कृष्णा और प्रियंका की फर्म के लिए, हमने 1 जनवरी, 2017 से 31 मार्च, 2017 तक के सभी देनदारों और लेनदारों के लेनदेन को रिकॉर्ड किया है। इसमें ग्राहकों से पैसे लेना और सप्लायरों को पैसे देना दोनों शामिल हैं, ताकि अंत में हर खाते का सही बैलेंस पता चल सके।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि शुरुआती देनदार/लेनदार शेषों (डेबिट और क्रेडिट दोनों), उधार बिक्री/खरीद, नकद प्राप्तियां/भुगतान, और अनादृत बिल जैसी सभी प्रविष्टियों को उनके संबंधित खातों में सही ढंग से दर्ज किया गया हो।

 

Question 3. महेश कुमार एण्ड सन्स की निम्न सूचनाओं से कुल देनदार खाता बनाइये Prepare Total Debtors Account from the following information of Mahesh Kumar & Sons.

विवरण\( Rs \)विवरण\( Rs \)
01.07.2016 डेबिट शेष (Debit Balance)1,60,700नकद प्राप्तियाँ (Cash Received)11,30,000
क्रेडिट शेष (Credit Balance)14,800विक्रय वापसी (Sales Return)8,400
30.09.2016 उधार बिक्री (Credit Sales)15,75,600क्रेडिट शेष (Credit Balance)6,300
बट्टा स्वीकृत किया (Discount Allowed)10,600
प्राप्य बिल (Bills Receivable)68,700

Answer: महेश कुमार एण्ड सन्स के लिए, दी गई सूचनाओं के आधार पर कुल देनदार खाता निम्नानुसार बनाया गया है। यह खाता सभी देनदारों से प्राप्त होने वाली कुल राशि को दर्शाता है, जिसमें शुरुआती और अंतिम शेष के साथ-साथ सभी संबंधित लेनदेन शामिल हैं।
Total Debtors Account
DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)DateParticularsJ.F.Amount \( Rs \)
To Balance b/d1,60,700By Bills Receivable68,700
To Sales Credit8,64,000By B/R1,47,000
To B/R dishonored8,400By SR/68,500
To Cash to debtors3,600By Cash discount3,200
To Balance c/d1,600By Cash4,05,000
By Bad debts4,100
By Balance b/d6,89,000
13,21,60013,21,600

In simple words: हमने महेश कुमार एण्ड सन्स के लिए देनदार खाता बनाया है, जिसमें 1 जुलाई 2016 के शुरुआती डेबिट और क्रेडिट बैलेंस, उधार बिक्री, नकद प्राप्तियां, बिक्री वापसी, और अन्य सभी देनदार से संबंधित लेनदेन को दिखाया गया है।

🎯 Exam Tip: कुल देनदार खाता बनाते समय, देनदारों से संबंधित सभी डेबिट और क्रेडिट लेनदेन को सही ढंग से दर्ज करना आवश्यक है, जिसमें शुरुआती और अंतिम शेष भी शामिल हैं, ताकि बकाया राशि का सटीक चित्र मिल सके।

 

Question 4. निम्न सूचनाएँ कमल प्रोसेसर्स लिमिटेड की लेखा पुस्तकों से प्रकट हो रही हैं: दि. 01.07.2016 को देनदारों के खातों का शेष-Rs 4,44,000 और इसी दिनांक को देनदारों के खातों का विपरीत शेष-Rs 4,800. दि. 01.07.2016 से 01.01.2017 तक हुए व्यवहार एवं उनका कुल योग निम्नानुसार है: (Book of Kamal Processors Ltd. reveals the following information: On 01.07.2016, the Debtors Account had a debit balance of Rs 4,44,000 and an opposite (credit) balance of Rs 4,800. The total transactions from 01.07.2016 to 01.01.2017 are as follows:)
उधार बिक्री (Credit Sales) Rs 8,64,000
देनदारों से वसुलियाँ (Collection from debtors) Rs 4,05,000
देनदारों को नकद लौटाये (Cash to debtors) Rs 3,600
प्राप्य बिल (B/R) Bills receivable) Rs 1,47,000
देनदारों के खातों में हस्तान्तरण (Transfer in debtors account) Rs 4,300
ग्राहकों द्वारा माल वापस (Goods returned by customers) Rs 68,500
प्राप्य बिल अनादृतं (Bills Receivable dishonored) Rs 8,400
ग्राहकों को नकद बट्टा दिया (Allowed cash discount to customers) Rs 3,200
डूबत ऋण अपलिखित (Bad debts written off) Rs 4,100
देनदारों के खातों से हस्तान्तरण (Transfer from debtors account) Rs 1,600
आप कुल देनदार खाता बनाइये। (Prepare the Total Debtors Account.)
Answer:

ParticularsJ.F.Amount (Rs)ParticularsJ.F.Amount (Rs)
To Balance b/d4,44,000By Balance b/d4,800
To Sales Credit8,64,000By B/R1,47,000
To B/R dishonored8,400By SR/68,500
To Cash to debtors3,600By Cash discount3,200
To Balance c/d1,600By Cash4,05,000
By Bad debts4,100
By Balance c/d6,89,000
Total13,21,600Total13,21,600

In simple words: This account tracks all money owed to the business by its customers (debtors) and any credit balances they might have. It records the starting balances, new sales on credit, payments received, and other events that change the amount customers owe. Finally, it shows the remaining balance at the end of the period.

🎯 Exam Tip: When preparing a ledger account, carefully identify all transactions that affect the balance. Ensure that opening balances, increases (debits), and decreases (credits) are correctly placed to accurately reflect the account's final position. Always check that the total debits equal the total credits.

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