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Detailed Chapter 13 अपूर्ण अभिलेखों के खाते RBSE Solutions for Class 11 Accountancy
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Class 11 Accountancy Chapter 13 अपूर्ण अभिलेखों के खाते RBSE Solutions PDF
Question 1. अपूर्ण लेखों से वर्ष के प्रारम्भ की पूँजी ज्ञात करने के लिए बनाया जाता है
(अ) वर्ष के लाभ का विवरण
(ब) वर्ष के लिए रोकड़ सारांश
(स) वर्ष के प्रारम्भ का स्थिति विवरण
(द) सामूहिक देनदारों को खाता
Answer: (स) वर्ष के प्रारम्भ का स्थिति विवरण
In simple words: अपूर्ण खातों में, साल की शुरुआत की पूँजी पता करने के लिए एक स्थिति विवरण (Statement of Affairs) बनाया जाता है, क्योंकि यह हमें सम्पत्तियों और देनदारियों को देखकर पूँजी का अनुमान लगाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: अपूर्ण लेखों में, प्रारम्भिक और अन्तिम पूँजी की गणना के लिए हमेशा स्थिति विवरण ही तैयार करें, क्योंकि यह दोहरी प्रविष्टि प्रणाली की तरह खातों का पूरा रिकॉर्ड नहीं रखता।
Question 2. अपूर्ण लेखों से प्राप्त सूचना से ज्ञात हुआ कि वर्ष के अन्त में एक व्यापारी की कुल सम्पत्तियाँ Rs 1,80,000 तथा लेनदार Rs 20,000, देयबिल Rs 10,000, अल्पकालीन ऋण Rs 10,000 के थे। उसकी अन्तिम पूँजी होगी
Answer: कुल सम्पत्तियाँ = Rs 1,80,000
कुल देनदारियाँ = लेनदार (Rs 20,000) + देयबिल (Rs 10,000) + अल्पकालीन ऋण (Rs 10,000)
\( \implies \) कुल देनदारियाँ = Rs 40,000
अन्तिम पूँजी = कुल सम्पत्तियाँ - कुल देनदारियाँ
\( \implies \) अन्तिम पूँजी = Rs 1,80,000 - Rs 40,000
\( \implies \) अन्तिम पूँजी = Rs 1,40,000
In simple words: वर्ष के आखिर में, व्यापारी की कुल सम्पत्ति से उसकी सारी देनदारियों को घटाने पर जो रकम बचती है, वही उसकी अन्तिम पूँजी होती है।
🎯 Exam Tip: पूँजी की गणना करते समय, सभी सम्पत्तियों को एक साथ जोड़ें और फिर सभी बाहरी देनदारियों को उनमें से घटा दें।
Question 3. अपूर्ण लेखों में लोभ की गणना का सही सूत्र है
(अ) शुद्ध लाभ = अन्तिम पूँजी – आहरण + अतिरिक्त पूँजी – प्रारम्भिक पूँजी
(ब) शुद्ध लाभ = अन्तिम पूँजी + आहरण – अतिरिक्त पूँजी – प्रारम्भिक पूँजी
(स) शुद्ध लाभ = प्रारम्भिक पूँजी + अतिरिक्त पूँजी + आहरण – अन्तिम पूँजी
(द) शुद्ध लाभ = अन्तिम पूँजी + आहरण + अतिरिक्त पूँजी - प्रारम्भिक पूँजी
Answer: (ब) शुद्ध लाभ = अन्तिम पूँजी + आहरण – अतिरिक्त पूँजी – प्रारम्भिक पूँजी
In simple words: शुद्ध लाभ निकालने के लिए, साल के आखिर की पूँजी में आहरण (जो पैसा मालिक ने अपने लिए निकाला) जोड़ते हैं, फिर इसमें से अतिरिक्त पूँजी (जो मालिक ने और लगाई) और साल की शुरुआत की पूँजी घटा देते हैं। यह सूत्र अपूर्ण खातों से लाभ निकालने का सही तरीका है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अपूर्ण लेखों के आधार पर शुद्ध लाभ की गणना करने का मानक तरीका है।
Question 4. एक व्यापारी की पुस्तकों में लेनदारों का प्रारम्भिक शेष Rs 30,000 था एवं अन्तिम शेष Rs 50,000 था। वर्ष के दौरान उन्हें Rs 70,000 का भुगतान किया गया तो उधार क्रय की राशि होगी
(अ)Rs 50,000
(ब) Rs 10,000
(स) Rs 90,000
(द) Rs 1,50,000
Answer: (स) Rs 90,000
In simple words: लेनदारों के खाते से उधार क्रय निकालने के लिए, अन्तिम शेष लेनदारों और भुगतान किए गए नकद को जोड़कर प्रारम्भिक शेष लेनदारों को घटाते हैं।
🎯 Exam Tip: लेनदारों का खाता तैयार करते समय, भुगतान की गई नकद राशि और अन्तिम शेष को लेनदारों के प्रारम्भिक शेष से घटाया जाता है ताकि उधार क्रय का पता चल सके।
Question 5. एक व्यापारी के खातों में देनदारों का प्रारम्भिक शेष Rs 2,00,000 था व अन्तिम शेष Rs 2,50,000 था । वर्ष के दौरान देनदारों से Rs 3,00,000 प्राप्त हुए। उसकी वर्ष की कुल बिक्री Rs 4,00,000 थी तो नकद बिक्री की राशि होगी
(अ)Rs 50,000
(ब) Rs 60,000
(स) Rs 4,00,000
(द) Rs 3,50,000
Answer: (अ)Rs 50,000
उधार बिक्री की गणना:
अन्तिम देनदार = Rs 2,50,000
देनदारों से प्राप्त नकद = Rs 3,00,000
प्रारम्भिक देनदार = Rs 2,00,000
उधार बिक्री = अन्तिम देनदार + देनदारों से प्राप्त नकद - प्रारम्भिक देनदार
\( \implies \) उधार बिक्री = Rs 2,50,000 + Rs 3,00,000 - Rs 2,00,000
\( \implies \) उधार बिक्री = Rs 3,50,000
नकद बिक्री की गणना:
कुल बिक्री = Rs 4,00,000
नकद बिक्री = कुल बिक्री - उधार बिक्री
\( \implies \) नकद बिक्री = Rs 4,00,000 - Rs 3,50,000
\( \implies \) नकद बिक्री = Rs 50,000
In simple words: सबसे पहले, देनदारों के खाते से कुल उधार बिक्री निकालते हैं। फिर, इस उधार बिक्री को कुल बिक्री में से घटाकर नकद बिक्री की राशि का पता चलता है।
🎯 Exam Tip: देनदारों का खाता बनाते समय, प्रारम्भिक शेष में उधार बिक्री जोड़ें और प्राप्त नकद और अन्तिम शेष घटाकर सही उधार बिक्री ज्ञात करें।
Question 7. व्यापार में प्रारम्भिक स्टॉक Rs 10,000, क्रय Rs 85,000, विक्रय Rs 1,00,000 तथा सकल लाभ लागत दर 25% है तो अन्तिम स्टॉक का अनुमानित मूल्य होगा
(अ)Rs 5,000
(ब) Rs 15,000
(स) Rs 10,000
(द) Rs 20,000
Answer: (ब) Rs 15,000
विक्रय = Rs 1,00,000
सकल लाभ लागत पर 25% है। इसका मतलब सकल लाभ विक्रय पर \( \frac{25}{125} \) या 20% है।
सकल लाभ = विक्रय का 20% = Rs 1,00,000 का 20% = Rs 20,000
बेचे गए माल की लागत (COGS) = विक्रय - सकल लाभ
\( \implies \) COGS = Rs 1,00,000 - Rs 20,000 = Rs 80,000
बेचे गए माल की लागत (COGS) = प्रारम्भिक स्टॉक + क्रय - अन्तिम स्टॉक
\( \implies \) Rs 80,000 = Rs 10,000 + Rs 85,000 - अन्तिम स्टॉक
\( \implies \) Rs 80,000 = Rs 95,000 - अन्तिम स्टॉक
\( \implies \) अन्तिम स्टॉक = Rs 95,000 - Rs 80,000
\( \implies \) अन्तिम स्टॉक = Rs 15,000
In simple words: पहले बिक्री पर सकल लाभ की दर निकालें, फिर बेचे गए माल की लागत ज्ञात करें। उसके बाद, प्रारम्भिक स्टॉक और क्रय को जोड़कर, बेचे गए माल की लागत घटाने पर अन्तिम स्टॉक का मूल्य मिल जाता है।
🎯 Exam Tip: सकल लाभ की दर हमेशा बिक्री या लागत में से किसी एक पर दी जाएगी, उसे सही अनुपात में परिवर्तित करना याद रखें।
RBSE Class 11 Accountancy Chapter 13 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. अपूर्ण लेखों की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer:
1. अपूर्ण लेखों के अन्तर्गत केवल व्यक्तिगत खाते ही खोले जाते हैं। इसमें सम्पत्ति और नाममात्र के खाते आमतौर पर नहीं होते हैं।
2. सभी नकद व्यवहारों का लेखा केवल रोकड़ बही में ही किया जाता है। इससे नकद लेनदेन का रिकॉर्ड सरल रहता है।
In simple words: अपूर्ण खाते सिर्फ़ व्यक्ति के लेन-देन दिखाते हैं और सभी नकद लेन-देन एक ही रोकड़ बही में दर्ज होते हैं, जिससे इन्हें समझना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि अपूर्ण लेखे केवल छोटे व्यवसायों के लिए उपयुक्त होते हैं क्योंकि यह केवल कुछ खातों का रिकॉर्ड रखते हैं।
Question 2. अपूर्ण लेखों की अपूर्णता के दो कारण बताइए।
Answer:
1. छोटे व्यापारियों के पास आय के सीमित साधन होते हैं, इसलिए वे पूरी तरह से हिसाब-किताब रखने के लिए महंगे अकाउंटेंट नहीं रख पाते।
2. दोहरा लेखा पद्धति के ज्ञान का अभाव होता है, जिससे व्यापारी पूरी तरह से लेखा-जोखा नहीं रख पाते। दोहरा लेखा प्रणाली को सीखने में समय और प्रयास लगता है।
In simple words: छोटे व्यापारी कम पैसे और कम जानकारी के कारण अपने खातों को पूरी तरह से नहीं रख पाते हैं, जिससे उनके लेखे अपूर्ण रह जाते हैं।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि अपूर्ण लेखा प्रणाली अक्सर वित्तीय बाधाओं और विशेष ज्ञान की कमी के कारण अपनाई जाती है।
Question 3. अपूर्ण लेखा प्रणाली की किन्हीं दो कमियों का उल्लेख कीजिए।
Answer:
1. दोहरा लेखा प्रणाली निश्चित सिद्धान्तों और मान्यताओं पर आधारित होती है, जबकि अपूर्ण लेखा प्रणाली किसी सिद्धान्त पर आधारित नहीं है। यह इसे कम विश्वसनीय बनाती है।
2. दोहरा लेखा प्रणाली का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है, जबकि अपूर्ण लेखा प्रणाली का प्रयोग केवल छोटे व्यापारियों द्वारा ही किया जाता है। बड़े व्यवसायों के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
In simple words: अपूर्ण लेखा प्रणाली बिना किसी तय नियम के चलती है और सिर्फ छोटे व्यापारियों द्वारा इस्तेमाल होती है, जबकि दोहरा लेखा प्रणाली बड़े नियमों पर आधारित होती है और सभी जगह इस्तेमाल की जाती है।
🎯 Exam Tip: जब कमियों के बारे में पूछा जाए, तो अपूर्ण लेखा प्रणाली के दोहरे प्रविष्टि प्रणाली से तुलना करके उत्तर दें।
Question 5. अपूर्ण लेखा प्रणाली में एक छोटे व्यापारी द्वारा बनाये जाने वाले खातों के नाम बताइए।
Answer: अपूर्ण लेखा प्रणाली में छोटे व्यापारी मुख्य रूप से व्यक्तिगत खाते बनाते हैं। व्यक्तिगत खाते व्यक्तियों, कंपनियों या संस्थाओं से संबंधित होते हैं।
In simple words: छोटे व्यापारी अपनी अपूर्ण लेखा प्रणाली में केवल व्यक्तिगत खाते बनाते हैं, जैसे ग्राहक और सप्लायर के खाते।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि अपूर्ण लेखों में सम्पत्ति और नाममात्र के खाते नहीं बनाए जाते, जिससे पूर्ण वित्तीय विश्लेषण कठिन हो जाता है।
Question 6. विठ्ठल अपनी पुस्तकें अपूर्ण लेखा पद्धति पर रखता है। वर्ष के अन्त में 31 मार्च, 2015 को उसकी पूँजी Rs 2,00,000 की थी। उस वर्ष में उसके आहरण Rs 25,000 थे। वर्ष के प्रारम्भ में विठ्ठल की पूँजी ज्ञात कीजिए।
Answer:
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end | 2,00,000 |
| Add: Drawings | 25,000 |
| Capital at the Beginning | 2,25,000 |
In simple words: साल के आखिर की पूँजी और कुल आहरण को जोड़कर हम साल की शुरुआत की पूँजी का पता लगा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: जब प्रारम्भिक पूँजी की गणना करें, तो यह याद रखें कि आहरण (Drawings) पूँजी को घटाते हैं, लेकिन लाभ की गणना के लिए इसे वापस जोड़ा जाता है।
Question 7. 'अ' अपने लेखे अपूर्ण रखता है। 1 अप्रैल, 2016 को उसका रोकड़ शेष Rs 30,000, देनदार Rs 45,000 तथा लेनदार Rs 15,000 थे। 31 मार्च, 2017 को उसका रोकड़ शेष Rs 45,000, देनदार Rs 37,500 तथा लेनदार Rs 30,000 थे। उसका वर्ष 2016-17 का अर्जित लाभ ज्ञात कीजिए।
Answer:
प्रारम्भिक पूँजी (1 अप्रैल, 2016) की गणना:
कुल सम्पत्तियाँ = रोकड़ शेष (Rs 30,000) + देनदार (Rs 45,000) = Rs 75,000
कुल देनदारियाँ = लेनदार (Rs 15,000)
प्रारम्भिक पूँजी = कुल सम्पत्तियाँ - कुल देनदारियाँ = Rs 75,000 - Rs 15,000 = Rs 60,000
अन्तिम पूँजी (31 मार्च, 2017) की गणना:
कुल सम्पत्तियाँ = रोकड़ शेष (Rs 45,000) + देनदार (Rs 37,500) = Rs 82,500
कुल देनदारियाँ = लेनदार (Rs 30,000)
अन्तिम पूँजी = कुल सम्पत्तियाँ - कुल देनदारियाँ = Rs 82,500 - Rs 30,000 = Rs 52,500
लाभ/हानि की गणना:
लाभ/हानि = अन्तिम पूँजी - प्रारम्भिक पूँजी
\( \implies \) लाभ/हानि = Rs 52,500 - Rs 60,000 = Rs -7,500 (हानि)
In simple words: साल की शुरुआत और आखिर में सम्पत्तियों और देनदारियों का हिसाब करके पूँजी निकालते हैं। अगर आखिर में पूँजी शुरुआत से कम हो, तो नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: लाभ या हानि निकालने के लिए, प्रारम्भिक और अन्तिम पूँजी की सही गणना करना बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 9. निम्नलिखित सूचनाओं से कुल क्रय की राशि ज्ञात कीजिए। लेनदारों का प्रारम्भिक शेष Rs 60,000 तथा अन्तिम शेष Rs 1,00,000, वर्ष में लेनदारों को भुगतान की गई राशि के Rs 1,20,000 तथा नकद क्रय की राशि Rs 20,000 ।।
Answer:
उधार क्रय की गणना:
अन्तिम लेनदार = Rs 1,00,000
लेनदारों को भुगतान = Rs 1,20,000
प्रारम्भिक लेनदार = Rs 60,000
उधार क्रय = अन्तिम लेनदार + लेनदारों को भुगतान - प्रारम्भिक लेनदार
\( \implies \) उधार क्रय = Rs 1,00,000 + Rs 1,20,000 - Rs 60,000
\( \implies \) उधार क्रय = Rs 1,60,000
कुल क्रय की गणना:
कुल क्रय = नकद क्रय + उधार क्रय
\( \implies \) कुल क्रय = Rs 20,000 + Rs 1,60,000
\( \implies \) कुल क्रय = Rs 1,80,000
In simple words: कुल क्रय ज्ञात करने के लिए, पहले लेनदारों से उधार क्रय की रकम निकाली जाती है, फिर उसमें नकद क्रय की रकम को जोड़ दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: कुल क्रय में नकद और उधार दोनों तरह के क्रय शामिल होते हैं, इसलिए दोनों की गणना सही ढंग से करनी चाहिए।
Question 10. एक व्यापारी की पुस्तकें निम्नलिखित सूचनाएँ प्रकट करती हैं क्रय-Rs 25,000, विक्रय-Rs 30,000 तथा अन्तिम स्टॉक- Rs 5,000 है। यदि उसका सकल लाभ बिक्री पर 10% हो तो उसके प्रारम्भिक स्टॉक की राशि की गणना कीजिए।
Answer:
सकल लाभ की गणना:
विक्रय = Rs 30,000
सकल लाभ = विक्रय का 10% = Rs 30,000 का 10% = Rs 3,000
ट्रेडिंग अकाउंट:
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Purchase | 25,000 | By Sales | 30,000 |
| To Gross Profit | 3,000 | By Closing Stock | 5,000 |
| To Opening Stock (Balancing Figure) | 7,000 | ||
| Total | 35,000 | Total | 35,000 |
प्रारम्भिक स्टॉक (बैलेंसिंग फिगर) = Rs 35,000 - (Rs 25,000 + Rs 3,000) = Rs 7,000
In simple words: पहले कुल बिक्री पर सकल लाभ की गणना करें। फिर, ट्रेडिंग खाते में सभी जानकारी भरें और प्रारम्भिक स्टॉक की राशि को बैलेंसिंग फिगर के रूप में ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: ट्रेडिंग अकाउंट हमेशा डेबिट और क्रेडिट दोनों तरफ बराबर होना चाहिए। प्रारम्भिक स्टॉक या अन्तिम स्टॉक अक्सर बैलेंसिंग फिगर के रूप में निकाले जाते हैं।
Question 11. निम्नलिखित विवरणों से उधार विक्रय की राशि ज्ञात कीजिए। देनदारों का प्रारम्भिक शेष-Rs 50,000, देनदारों का अन्तिम शेष- Rs 60,000, देनदारों से प्राप्त रोकड़-Rs 1,50,000, देनदारों को
Answer: स्रोत में उत्तर प्रदान नहीं किया गया है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए, देनदारों का खाता (Debtors Account) बनाना सबसे अच्छा तरीका है, जहाँ उधार विक्रय आमतौर पर बैलेंसिंग फिगर होता है।
Question 12. एक व्यापारी की अपूर्ण लेखा पुस्तकों से ज्ञात हुआ कि वर्ष के दौरान उसका नकद क्रय Rs 24,000 तथा उधार क्रय Rs 60,000 था। उसके लेनदारों को प्रारम्भिक शेष Rs 21,000 तथा अन्तिम शेष Rs 30,000 था। वर्ष में लेनदारों को भुगतान की गई राशि ज्ञात कीजिए।
Answer:
लेनदारों को किया गया नकद भुगतान = प्रारम्भिक लेनदार + उधार क्रय - अन्तिम लेनदार
\( \implies \) लेनदारों को किया गया नकद भुगतान = Rs 21,000 + Rs 60,000 - Rs 30,000
\( \implies \) लेनदारों को किया गया नकद भुगतान = Rs 81,000 - Rs 30,000
\( \implies \) लेनदारों को किया गया नकद भुगतान = Rs 51,000
In simple words: लेनदारों को कितना पैसा दिया गया, यह जानने के लिए, साल की शुरुआत में जितने लेनदार थे और जितना उधार खरीदा, उन दोनों को जोड़कर साल के आखिर में बचे लेनदारों को घटा देते हैं।
🎯 Exam Tip: लेनदारों के खाते को बनाकर, आप भुगतान की गई राशि को बैलेंसिंग फिगर के रूप में आसानी से ज्ञात कर सकते हैं।
Question 13. आकाश अपने व्यापार के अपूर्ण लेखे रखता है। वर्ष के प्रारम्भ में उसकी पूँजी Rs 1,00,000 थी। वर्ष के अन्त में सम्पत्तियों का दायित्वों पर आधिक्य Rs 2,00,000 था। वर्ष के दौरान उसने Rs 50,000 की अतिरिक्त पूँजी लगाई तथा Rs 2,500 प्रतिमाह आहरण किए। वर्ष 2016-17 के लाभ की गणना कीजिए।
Answer:
आहरण की गणना: Rs 2,500 प्रति माह × 12 माह = Rs 30,000
लाभ-हानि का विवरण
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end of Year (सम्पत्तियों का दायित्वों पर आधिक्य) | 2,00,000 |
| Add: Drawings During the Year | 30,000 |
| 2,30,000 | |
| Less: Additional Capital | 50,000 |
| Adjusted Capital | 1,80,000 |
| Less: Capital at the Beginning of Year | 1,00,000 |
| Profit for the Year | 80,000 |
In simple words: साल के अंत की पूँजी में आहरण को जोड़कर और फिर इसमें से अतिरिक्त पूँजी और साल की शुरुआत की पूँजी को घटाकर, हम व्यापार का लाभ पता लगा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप सभी आहरणों को जोड़ें और अतिरिक्त पूँजी को घटाएं ताकि लाभ की सटीक गणना हो सके।
Question 14. वर्ष के दौरान देनदारों को प्रारम्भिक शेष-Rs 13,000, देनदारों से प्राप्त नकद राशि-Rs 35,000, स्वीकृत बट्टा-Rs 500, प्राप्य विपत्र-Rs 15,000, डूबत ऋण अपलिखित किए-Rs 2,500 तथा देनदारों का अन्तिम शेष-Rs 25,000 । वर्ष की उधार विक्रय की राशि ज्ञात कीजिए
Answer:
उधार विक्रय की गणना:
उधार विक्रय = देनदारों से प्राप्त नकद राशि + स्वीकृत बट्टा + प्राप्य विपत्र + डूबत ऋण + देनदारों का अन्तिम शेष - देनदारों का प्रारम्भिक शेष
\( \implies \) उधार विक्रय = Rs 35,000 + Rs 500 + Rs 15,000 + Rs 2,500 + Rs 25,000 - Rs 13,000
\( \implies \) उधार विक्रय = Rs 81,000 - Rs 13,000
\( \implies \) उधार विक्रय = Rs 68,000
In simple words: उधार बिक्री जानने के लिए, देनदारों से मिली कुल नकदी, बट्टा, प्राप्य विपत्र, डूबे हुए पैसे और आखिर में बचे देनदारों को जोड़कर, शुरुआत के देनदारों को घटा दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: देनदारों का खाता बनाते समय, सभी प्रकार की देनदारियों को देनदारों के डेबिट पक्ष में लिखें और प्राप्तियों को क्रेडिट पक्ष में लिखें।
Question 15. एक व्यापारी की प्रारम्भिक पूँजी Rs 90,000 तथा वर्ष के अन्त की पूँजी Rs 1,12,500 है। यदि उस वर्ष का अनुमानित लाभ Rs 27,000 हो तो वर्ष में उसके आहरण की राशि ज्ञात कीजिए।
Answer:
आहरण की गणना:
प्रारम्भिक पूँजी = Rs 90,000
अनुमानित लाभ = Rs 27,000
वर्ष के अन्त की पूँजी = Rs 1,12,500
सूत्र: अन्तिम पूँजी = प्रारम्भिक पूँजी + लाभ - आहरण (अतिरिक्त पूँजी न होने पर)
\( \implies \) Rs 1,12,500 = Rs 90,000 + Rs 27,000 - आहरण
\( \implies \) Rs 1,12,500 = Rs 1,17,000 - आहरण
\( \implies \) आहरण = Rs 1,17,000 - Rs 1,12,500
\( \implies \) आहरण = Rs 4,500
In simple words: आहरण निकालने के लिए, शुरुआती पूँजी में अनुमानित लाभ को जोड़कर, साल के आखिर की पूँजी को घटा देते हैं।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप लाभ और अतिरिक्त पूँजी को जोड़ें और आहरण को घटाएं ताकि पूँजी में हुए सही बदलाव का पता चल सके।
RBSE Class 11 Accountancy Chapter 13 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. लेखों की अपूर्णता के कोई चार कारण बताइए।
Answer:
अपूर्णता के कारण (Reason for In completion)
1. सीमित साधन: छोटे व्यापारियों के पास संसाधन कम होते हैं। वे लेखा-जोखा करने के लिए विशेषज्ञों को नहीं रख पाते और अपना काम खुद ही करते हैं।
2. अज्ञानता: छोटे व्यापारियों को दोहरा लेखा प्रणाली की पूरी जानकारी नहीं होती, जिस वजह से वे इसे सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाते। उन्हें प्रशिक्षण की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
3. आकस्मिक घटनाएँ: यदि व्यापार में कोई अप्रत्याशित घटना, जैसे- आग, भूकंप या बाढ़ आती है, तो प्रमाण नष्ट हो सकते हैं, जिससे लेखे अपूर्ण रह जाते हैं। इससे रिकॉर्ड को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
4. आर्थिक स्थिति छिपाना: कुछ चालाक व्यापारी अपनी आर्थिक स्थिति को अन्य व्यापारियों, कर अधिकारियों या लेनदारों से छिपाने के लिए अपूर्ण लेखा प्रणाली का उपयोग करते हैं।
In simple words: अपूर्ण खाते रखने के कई कारण हैं जैसे पैसे की कमी, लेखा प्रणाली का ज्ञान न होना, आपदाओं में रिकॉर्ड का नुकसान और कुछ मामलों में अपनी आर्थिक स्थिति को छिपाने की इच्छा।
🎯 Exam Tip: अपूर्णता के कारणों को याद करते समय, 'छोटे व्यवसायों' की सीमाओं पर ध्यान दें - वित्तीय, ज्ञान और बाहरी जोखिम।
Question 2. अपूर्ण लेखा प्रणाली की कोई चार कमियाँ बताइए।
Answer:
1. अवैज्ञानिक: इस प्रणाली में प्रत्येक लेन-देन का नाम और जमा में लेखा नहीं होता, जिससे इसे अवैज्ञानिक माना जाता है। यह खातों की सटीकता को कम करता है।
2. शुद्धता का अभाव: इस पद्धति में तलपट बनाकर खातों की गणितीय शुद्धता की जाँच करना संभव नहीं है, जिससे गलतियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
3. मूल्यांकन असंभव: व्यापार बेचने की स्थिति में व्यापार का सही मूल्य और ख्याति का मूल्यांकन करना कठिन होता है, क्योंकि इसमें पर्याप्त जानकारी नहीं होती।
4. गबन की संभावना: उचित लेखांकन के अभाव में, चालू और स्थायी सम्पत्तियों का कर्मचारियों द्वारा गबन करने पर पता लगाना मुश्किल होता है। इससे चोरी की संभावना बढ़ जाती है।
In simple words: अपूर्ण लेखा प्रणाली पूरी तरह से वैज्ञानिक नहीं है, इसमें हिसाब-किताब की जाँच मुश्किल होती है, व्यापार का सही मूल्य लगाना कठिन है और धोखाधड़ी होने की संभावना ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: कमियों को सूचीबद्ध करते समय, वित्तीय रिपोर्टिंग की सटीकता, विश्वसनीयता और पूर्णता पर इसके नकारात्मक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 4. एक व्यापारी के अपूर्ण लेखों से प्राप्त सूचनाओं से 31 मार्च, 2017 को समाप्त वर्ष के लिए उसके कुल क्रय एवं लाभ ज्ञात कीजिए। सूचनाएँ निम्नलिखित हैं प्रारम्भिक स्टॉक Rs 30,000, अन्तिम स्टॉकर Rs 24,000, नकद बिक्री Rs 18,000, उधार विक्री Rs 1,08,000, क्रय मूल्य पर लाभ का प्रतिशत 20% ।
Answer:
कुल बिक्री = नकद बिक्री + उधार बिक्री = Rs 18,000 + Rs 1,08,000 = Rs 1,26,000
कार्यशील टिप्पणी:
माना क्रय मूल्य (Cost of Goods Sold) = \( x \)
लाभ (Gross Profit) = \( x \) का 20% = \( \frac{x}{5} \)
कुल बिक्री (Sales) = क्रय मूल्य + लाभ
\( \implies \) Rs 1,26,000 = \( x + \frac{x}{5} \)
\( \implies \) Rs 1,26,000 = \( \frac{6x}{5} \)
\( \implies x = \frac{1,26,000 \times 5}{6} \)
\( \implies x \) = Rs 1,05,000 (बेचे गए माल की लागत)
ट्रेडिंग अकाउंट:
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Opening Stock | 30,000 | By Sales | 1,26,000 |
| To Purchase (Balancing Figure) | 1,00,000 | By Closing Stock | 24,000 |
| To Gross Profit | 20,000 | ||
| Total | 1,50,000 | Total | 1,50,000 |
In simple words: कुल बिक्री निकालने के बाद, बेचे गए माल की लागत (COGS) की गणना करें। फिर, ट्रेडिंग अकाउंट बनाकर कुल क्रय और सकल लाभ को बैलेंसिंग फिगर के रूप में ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: जब सकल लाभ प्रतिशत लागत पर दिया हो, तो इसे पहले बिक्री पर प्रतिशत में बदलना अक्सर गणना को आसान बना देता है।
Question 5. आकाश अपने व्यवहारों का अपूर्ण लेखा रखता है। 1 अप्रैल 2016 को उसको रोकड़ शेष था Rs 10,000, देनदार, Rs 40,000, स्टॉक, Rs 60,000, फर्नीचर, Rs 20,000, लेनदार Rs 30,000। 31 मार्च, 2017 को उसका रोकड़ शेष Rs 30,000, देनदार Rs 80,000, स्टॉक Rs 1,00,000, लेनदार Rs 60,000 के थे। वर्ष में उसने Rs 10,000 का फर्नीचर खरीदा। फर्नीचर पर Rs 2,000 मूल्य ह्रास लगाया गया। वर्ष के दौरान उसने Rs 4,000 का आहरण किया। उपर्युक्त सूचनाओं से उसका वर्ष 2016-17 का लाभ का विवरण तैयार कीजिए।
Answer:
Statement of Affairs
(As on 1st April, 2016)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 30,000 | Cash | 10,000 |
| Capital (Balancing Figure) | 1,00,000 | Debtors | 40,000 |
| Stock | 60,000 | ||
| Furniture | 20,000 | ||
| Total | 1,30,000 | Total | 1,30,000 |
Statement of Affairs
(As on 31 March, 2017)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 60,000 | Cash in Hand | 30,000 |
| Capital (Balancing Figure) | 1,78,000 | Debtors | 80,000 |
| Stock | 1,00,000 | ||
| Furniture (20,000 + 10,000 - 2,000) | 28,000 | ||
| Total | 2,38,000 | Total | 2,38,000 |
Statement of Profit and Loss
(for the year ended 31st March, 2017)
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 1,78,000 |
| Add: Drawings | 4,000 |
| Adjusted Capital | 1,82,000 |
| Less: Capital at the Beginning of Year | 1,00,000 |
| Profit for the year | 82,000 |
In simple words: वर्ष की शुरुआत और आखिर की पूँजी को निकालने के लिए स्थिति विवरण तैयार करते हैं। फिर, लाभ-हानि का विवरण बनाकर साल के आखिर की पूँजी में आहरण जोड़कर और शुरुआती पूँजी घटाकर लाभ ज्ञात करते हैं।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप फर्नीचर पर मूल्य ह्रास (depreciation) और नई खरीद को सही ढंग से समायोजित करें। सभी विवरणों में सम्पत्तियों और देनदारियों को सही ढंग से वर्गीकृत करें।
Question 6. निम्नलिखित सूचनाओं से वर्ष 2016-17 के लिए एक व्यापारी के लिए उधार क्रय एवं उधार विक्रय की राशि ज्ञात कीजिए। 1 अप्रैल, 2016 को उसके देनदार Rs 30,000, लेनदार Rs 75,000 थे। वर्ष के दौरान लेन-देन इस प्रकार हुए।
Answer:
कुल देनदार खाता (Total Debtors A/c)
| Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Apr. 1 | To Balance b/d | 30,000 | By Cash | 2,70,000 | |||
| To Sales (Balancing Figure) | 4,35,000 | By Discount Allowed | 12,000 | ||||
| By B/R | 12,000 | ||||||
| By Sales Return | 6,000 | ||||||
| 2017 Mar. 31 | By Balance c/d | 1,65,000 | |||||
| Total | 4,65,000 | Total | 4,65,000 |
कुल लेनदार खाता (Total Creditors A/c)
| Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Cash | 1,35,000 | 2016 April 1 | By Balance b/d | 75,000 | |||
| To Discount Received | 7,500 | By Purchase (Balancing Figure) | 1,62,000 | ||||
| To Purchase Return | 4,500 | ||||||
| 2017 Mar. 31 | To Balance c/d | 90,000 | |||||
| Total | 2,37,000 | Total | 2,37,000 |
उधार विक्रय = Rs 4,35,000
उधार क्रय = Rs 1,62,000
In simple words: देनदारों और लेनदारों का खाता बनाकर, हम उधार बिक्री और उधार क्रय की रकम को आसानी से पता लगा सकते हैं। इन खातों में, ये रकम अक्सर बैलेंसिंग फिगर के रूप में निकलती हैं।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि देनदार और लेनदार खातों में सभी संबंधित लेनदेन जैसे नकदी प्राप्तियाँ/भुगतान, बट्टा, और वापसी को सही ढंग से दर्ज किया गया हो।
Question 7. निम्नलिखित सूचनाओं से एक व्यापारी द्वारा वर्ष के दौरान देनदारों से प्राप्त राशि की गणना कीजिएदेनदारों का प्रारम्भिक शेष 21,600 प्राप्य बिल अनादृत (Dishonoured) 2,400 देनदारों का अन्तिम शेष 29,400 बट्टा दिया 600 उधार विक्रय 46,200 डूबत ऋण : 1,500 विक्रय वापसी 1,200
Answer:
कुल देनदार खाता (Total Debtors A/c)
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 21,600 | By Cash Receipts (Balancing Figure) | 37,500 |
| To Credit Sales | 46,200 | By Discount Allowed | 600 |
| To B/R Dishonoured | 2,400 | By Bad Debts | 1,500 |
| By Sales Return | 1,200 | ||
| By Balance c/d | 29,400 | ||
| Total | 70,200 | Total | 70,200 |
देनदारों से प्राप्त नकद राशि = Rs 37,500
In simple words: देनदारों के खाते को बनाकर, प्रारम्भिक शेष, उधार विक्रय और प्राप्य बिल अनादृत को डेबिट साइड पर लिखते हैं, और फिर विक्रय वापसी, बट्टा, डूबत ऋण और अन्तिम शेष को क्रेडिट साइड पर लिखकर प्राप्त नकद राशि को बैलेंसिंग फिगर के रूप में निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: देनदारों के खाते में, प्राप्य बिल अनादृत होने पर देनदारों की राशि फिर से बढ़ जाती है, इसे डेबिट साइड पर दर्ज करें।
Question 8. डॉ. कपिल एवं डॉ. अचलेश साझेदारी फर्म में अपने व्यवहारों के लिए अपूर्ण लेखे रखते हैं। वर्ष के प्रारम्भ एवं अन्त के स्थिति विवरण में 1 अप्रैल 2016 को उनकी संयुक्त पूँजी Rs 1,50,000 तथा 31 मार्च, 2017 को उनकी संयुक्त पूँजी Rs 2,50,000 दिखाई गई है। वर्ष 2016-17 में डॉ. कपिल द्वारा Rs 12,500 की अतिरिक्त पूँजी लगाई गई तथा डॉ. अचलेश हारा Rs 25,000 आहरण किये गये। उनमें से प्रत्येक को Rs 20,000 वेतन के देय थे। उनका लाभ-हानि अनुपात 2:3 है। उपर्युक्त सूचनाओं से फर्म को वर्ष 2016-17 का लाभ का विवरण तैयार कीजिये।
Answer:
लाभ-हानि का विवरण
(for the year ending 31st March, 2017)
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end of the Year | 2,50,000 |
| Add: Drawings During the Year | 25,000 |
| 2,75,000 | |
| Less: Additional Capital | 12,500 |
| Adjusted Capital | 2,62,500 |
| Less: Capital at Beginning of Year | 1,50,000 |
| Profit for the Year | 1,12,500 |
| Less: Salary to Partners (20,000 + 20,000) | 40,000 |
| Net Profit for the Year | 72,500 |
| Profit to be distributed among partners in ratio of 2:3 | |
| Dr. Kapil - Rs 29,000 | |
| Dr. Achlesh - Rs 43,500 |
In simple words: साझेदारों के लाभ की गणना करने के लिए, साल के आखिर की पूँजी में आहरण जोड़ें, अतिरिक्त पूँजी घटाएँ, और फिर शुरुआती पूँजी को घटाकर साल का लाभ ज्ञात करें। फिर इसमें से साझेदारों का वेतन घटाकर शुद्ध लाभ को उनके लाभ-हानि अनुपात में बांटें।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि सभी साझेदारों के आहरण और अतिरिक्त पूँजी को सही ढंग से समायोजित किया गया है, और वेतन को लाभ में से घटाया गया है, तभी शुद्ध लाभ सही ढंग से बांटा जा सकता है।
Question 9. प्राप्य बिल Rs 20,000, लेनदार Rs 90,000, देय बिल Rs 10,000 । वर्ष में फर्नीचर पर Rs 4,000 ह्रास चार्ज किया गया। उसने वर्ष के दौरान Rs 30,000 आहरण किये तथा Rs 50,000 अतिरिक्त पूँजी लगाई। पूँजी पर Rs 4,500 ब्याज दिया गया तथा आहरण पर Rs 1,500 ब्याज वसूल किया गया।
Answer:
Statement of Affairs
(As on 31st March, 2017)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 90,000 | Cash | 45,000 |
| B/P | 10,000 | Debtors | 1,50,000 |
| Capital (Balancing Figure) | 2,61,000 | Stock | 20,000 |
| B/R | 20,000 | ||
| Furniture (30,000 - 4,000) | 26,000 | ||
| Total | 3,61,000 | Total | 3,61,000 |
Statement of Profit and Loss
(for the year 2016-17)
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 2,61,000 |
| Add: Drawings | 30,000 |
| 2,91,000 | |
| Less: Additional Capital | 50,000 |
| Adjusted Capital | 2,41,000 |
| Less: Capital at the Beginning of Year | 1,60,000 |
| Profit for the Year | 81,000 |
| Less: Interest on Capital | 4,500 |
| Add: Interest on Drawings | 1,500 |
| Net Profit for the Year | 78,000 |
In simple words: पहले साल के आखिर की सम्पत्तियों और देनदारियों से पूँजी निकालें। फिर, लाभ-हानि के विवरण में साल के आखिर की पूँजी, आहरण, अतिरिक्त पूँजी और शुरुआती पूँजी को समायोजित करके लाभ ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि फर्नीचर पर मूल्य ह्रास, पूँजी पर ब्याज और आहरण पर ब्याज को सही ढंग से गणना और समायोजित किया गया है, तभी सही लाभ ज्ञात होगा।
Question 11. एक व्यापारी के अपूर्ण लेखे निम्नलिखित स्थिति प्रकट करते हैं Cash Balance 1 अप्रैल, 2016 (Rs) 3,600 Debtors 26,400 Stock 19,200 Plant 60,000 Creditors 4,200 31 मार्च, 2017 (Rs) 6,000 36,000 24,000 60,000 6,000 वर्ष के दौरान व्यापारी द्वारा Rs 9,000 आहरण किये गये तथा वर्ष 2016-17 के लिए संयन्त्र (Plant) पर 10% ह्रास लगाया क्या । वर्ष के लिए लाभ की राशि ज्ञात कीजिए।
Answer:
Statement of Affairs
(As on 1st April, 2016)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 4,200 | Cash Balance | 3,600 |
| Capital (Balancing Figure) | 1,05,000 | Debtors | 26,400 |
| Stock | 19,200 | ||
| Plant | 60,000 | ||
| Total | 1,09,200 | Total | 1,09,200 |
Question 12. हरि की अपूर्ण लेखा पुस्तकों से निम्नलिखित शेषों की जानकारी उपलब्ध होती है। वर्ष के दौरान उसने Rs 6,000 का आहरण किया गया तथा 1 जनवरी, 2016 को Rs 12,000 की अतिरिक्त पूँजी लगाई । देनदारों पर 5% डूबत ऋण का आयोजन किया गया। फर्नीचर पर 20% ह्रास अपलिखित करना है। पूँजी पर 10% वार्षिक दर से ब्याज दिया गया। वर्ष 2015-16 को लाभ ज्ञात कीजिये।
Answer:
हरि के अपूर्ण लेखों के आधार पर वर्ष 2015-16 के लिए लाभ की गणना निम्न प्रकार की जाएगी:
आरंभिक पूँजी (1 जुलाई, 2015 को) = Rs 30,000
अंतिम पूँजी (30 जून, 2016 को) = Rs 54,600
| Particulars | Amount र |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 54,600 |
| Add: Drawings During the Year | 6,000 |
| Adjusted Capital | 60,600 |
| Less: Additional Capital | 12,000 |
| Adjusted Capital | 48,600 |
| Less: Capital at the Beginning of the Year | 30,000 |
| Profit for the Year | 18,600 |
| Less: Interest on Capital | 3,600 |
| Net Profit for the Year | 15,000 |
In simple words: हमने साल के अंत और शुरुआत की पूँजी को लिया। इसमें आहरण को जोड़ा और अतिरिक्त पूँजी को घटाया। फिर पूंजी पर ब्याज घटाकर शुद्ध लाभ निकाला. यह अपूर्ण लेखों से लाभ निकालने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: अपूर्ण लेखों से लाभ की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी आहरण, अतिरिक्त पूंजी और पूंजी पर ब्याज जैसे समायोजन सही ढंग से शामिल किए गए हैं।
Question 1. लेखांकन की अपूर्ण लेखांकन पद्धति से आप क्या समझते हैं ? यह दोहरा लेखा प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है ?
Answer:
अपूर्ण लेखांकन पद्धति (Meaning of Incomplete Record System) वह लेखा पद्धति है जो पूरी तरह से दोहरा लेखा प्रणाली पर आधारित नहीं होती। इसमें सभी लेन-देन का दोहरा लेखा नहीं किया जाता है, इसलिए इसे अपूर्ण लेखा विधि या इकहरा लेखा विधि भी कहते हैं। छोटे व्यापारी अक्सर इस पद्धति को अपनाते हैं। इस प्रणाली में लेखा पुस्तकों में केवल व्यक्तिगत खाते ही खोले जाते हैं, जबकि वास्तविक और नाममात्र के खाते नहीं खोले जाते हैं। नकद लेन-देनों का लेखा करने के लिए रोकड़ बही भी रखी जाती है। यह एक अलग प्रणाली नहीं, बल्कि दोहरा लेखा प्रणाली का ही एक अधूरा रूप है, जो व्यवसाय की सही वित्तीय स्थिति जानने में मदद नहीं कर पाता।
दोहरा लेखा पद्धति तथा अपूर्ण लेखा पद्धति में अन्तर
| आधार (Basis) | दोहरा लेखा पद्धति (Double Entry System) | अपूर्ण लेखा पद्धति (Incomplete Record System) |
|---|---|---|
| सिद्धान्त (Principles) | यह दोहरा लेखा सिद्धान्त तथा निश्चित मान्यताओं पर आधारित है। | यह किसी गणना या सिद्धान्त पर आधारित नहीं है। |
| खाते (Accounts) | इसमें व्यक्तिगत, वास्तविक तथा नाममात्र तीनों ही प्रकार के खाते तैयार किए जाते हैं। | इसमें रोकड़ बही तथा व्यक्तिगत खाते ही तैयार किए जाते हैं। |
| प्रयोग (Use) | इस पद्धति का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है। | इसका प्रयोग केवल छोटे व्यापारी ही करते हैं। |
| प्रविष्टियाँ (Entries) | इस पद्धति में सभी लेन-देनों की दो प्रविष्टियाँ की जाती हैं। | इस पद्धति में कुछ लेन-देनों की दो, कुछ की एक प्रविष्टि की जाती है तथा कुछ लेन-देनों का लेखा ही नहीं किया जाता है। |
| व्यवसाय का मूल्यांकन (Valuation of Business) | इस पद्धति में व्यापार बेचने पर मूल्यांकन करना सरल होता है, क्योंकि सभी लेखे पूर्ण रूप से किए जाते हैं। | इसमें अनुमान से ही व्यापार का मूल्यांकन किया जाता है। |
| तलपट (Trial Balance) | इसमें तलपट बनाकर खातों की गणितीय शुद्धता जाँच ली जाती है। | इसमें तलपट नहीं बनाया जाता है। |
| वित्तीय-स्थिति (Financial Position) | यह सही आर्थिक स्थिति बताता है। | यह चिट्ठे के समान विश्वसनीय नहीं होता है। |
| प्रमाणिकता (Authenticity) | यह न्यायालय एवं कर विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है। | यह मान्यता प्राप्त नहीं है। |
| समायोजन (Adjustment) | इसमें समायोजन प्रविष्टि करके अन्तिम खाते बनाते समय समायोजन किए जाते हैं। | इसमें समायोजन प्रविष्टियाँ नहीं की जाती हैं, लेकिन अन्तिम खातों में कुछ समायोजन किए जा सकते हैं। |
In simple words: अपूर्ण लेखांकन विधि एक अधूरा तरीका है जहाँ सारे लेन-देन रिकॉर्ड नहीं होते, खासकर छोटे व्यापारियों के लिए। दोहरा लेखा प्रणाली एक पूरा और वैज्ञानिक तरीका है जहाँ हर लेन-देन को दो बार रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे पूरी और सही वित्तीय जानकारी मिलती है।
🎯 Exam Tip: अपूर्ण लेखा प्रणाली और दोहरा लेखा प्रणाली के बीच मुख्य अंतरों को याद रखें, जैसे सिद्धांतों का पालन, खातों के प्रकार, और मूल्यांकन की विश्वसनीयता।
Question 2. अपूर्ण लेखा विधि को इकहरा लेखा प्रणाली (Single Entry System) कहना क्या उचित है ? अपूर्ण लेखा विधि के दोष बताइए।
Answer:
अपूर्ण लेखा विधि को इकहरा लेखा प्रणाली कहना पूरी तरह से उचित नहीं है। इसका कारण यह है कि अपूर्ण लेखों में कुछ लेन-देनों का दोहरा लेखा होता है, जबकि कुछ का लेखा केवल एक पक्ष में होता है और कुछ का तो बिल्कुल लेखा होता ही नहीं है। वास्तव में, यह लेखा रखने का एक अधूरा, अशुद्ध और अवैज्ञानिक तरीका है।
अपूर्ण लेखा विधि के दोष (Demerits of Incomplete Record System)
अपूर्ण लेखा विधि की प्रमुख कमियाँ इस प्रकार हैं:
- अवैज्ञानिक प्रणाली: इस प्रणाली में लेखांकन का कोई निश्चित सिद्धांत नहीं है, जिससे सभी लेन-देनों का पूरा लेखा नहीं हो पाता। इसलिए, इसे अवैज्ञानिक माना जाता है।
- योजना और नियंत्रण में अनुपयुक्त: इस पद्धति में सभी लेन-देनों का लेखा नहीं किया जाता है, जिससे यह भविष्य की योजना बनाने या व्यवसाय को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त नहीं रहती।
- व्यवसाय के मूल्यांकन में कठिनाई: यदि व्यवसाय को बेचना पड़े, तो इस प्रणाली में खाते रखने पर उसका मूल्य ज्ञात करना कठिन होता है, क्योंकि क्रेता को विश्वास दिलाने के लिए कोई पुख्ता आधार नहीं होता।
- गबन की संभावना: इस पद्धति से लेखा रखने पर गबन की संभावना अधिक बनी रहती है, क्योंकि इसमें संपत्तियों का व्यवस्थित लेखा नहीं रखा जाता।
- तुलनात्मक अध्ययन का अभाव: अपूर्ण लेखों के कारण पिछले वर्षों के लाभों या अन्य फर्मों के लाभों के साथ तुलनात्मक अध्ययन संभव नहीं होता।
- संपत्तियों के प्रतिस्थापन में कठिनाई: इस प्रणाली में ह्रास के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती, जिससे संपत्तियों के प्रतिस्थापन के समय धन की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
In simple words: अपूर्ण लेखा प्रणाली को इकहरा लेखा प्रणाली कहना सही नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह से एक-तरफ़ा रिकॉर्ड नहीं करती। इसके मुख्य नुकसान यह हैं कि यह वैज्ञानिक नहीं है, योजना बनाने में मदद नहीं करती, व्यवसाय का सही मूल्य नहीं बताती, गबन का खतरा होता है, और तुलना करना मुश्किल होता है।
🎯 Exam Tip: अपूर्ण लेखा प्रणाली की कमियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर इसके उपयोग की सीमाओं को स्पष्ट करती हैं। प्रत्येक दोष को संक्षेप में समझाने का अभ्यास करें।
Question 3. अपूर्ण लेखों से अन्तिम खाते तैयार करते समय आप क्या प्रक्रिया अपनायेंगे ? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
व्यापार के लेखे चाहे किसी भी पद्धति से रखे गए हों, वर्ष के अंत में व्यवसाय की वित्तीय स्थिति और लाभ-हानि की जानकारी के लिए अंतिम खाते बनाना आवश्यक होता है। अपूर्ण लेखांकन में, स्थिति विवरण (Statement of Affairs) को स्थिति-पत्रक के स्थान पर बनाया जाता है। स्थिति-पत्रक में भी दो पक्ष होते हैं - संपत्ति और दायित्व। इसमें नकद शेष, बैंक शेष, देनदार, लेनदार, प्राप्य बिल, देय बिल, अंतिम रहतिया, अदत्त व्यय, उपार्जित आय, स्थायी संपत्तियों आदि की गणना रोकड़ बही और पिछले स्थिति-पत्रक से प्राप्त शेषों तथा चालू वर्ष के लेन-देनों को ध्यान में रखकर की जाती है।
संपत्ति और दायित्व पक्ष की मदों को लिखने के बाद, दोनों पक्षों का योग किया जाता है। दोनों पक्षों के योग का अंतर पूंजी की स्थिति को दर्शाता है। अपूर्ण लेखों से लाभ-हानि ज्ञात करने की दो मुख्य विधियाँ हैं:
- प्रारंभिक एवं अंतिम पूंजी की तुलना द्वारा लाभ-हानि ज्ञात करना: इस विधि में, वर्ष के अंत की पूंजी तथा वर्ष के प्रारंभिक या पिछले वर्ष के अंत की पूंजी ज्ञात करने के बाद, लाभ-हानि का विवरण (Statement of Profit and Loss) तैयार किया जाता है।
- अंतिम खाते तैयार करना: इस विधि में, अपूर्ण लेखों को दोहरा लेखा प्रणाली में बदलकर व्यापारिक, लाभ-हानि खाता और चिट्ठा तैयार किया जाता है। इसमें कुछ प्रमुख खाते या विवरण जिनका प्रयोग किया जा सकता है, वे हैं:
- प्राप्य बिल खाता
- कुल देनदार खाता
- कुल लेनदार खाता
- देय बिल खाता
- नकद क्रय-विक्रय ज्ञात करना
- कुल विक्रय ज्ञात करना
- स्कन्ध खाता
- वर्ष के प्रारम्भ का स्थिति विवरण
- स्थायी सम्पत्ति खाता
- प्राप्ति एवं भुगतान खाता
In simple words: अपूर्ण लेखों से अंतिम खाते बनाने के लिए, पहले हम स्थिति-पत्रक बनाते हैं ताकि साल की शुरुआत और अंत में हमारी पूंजी पता चल सके। फिर, इस पूंजी की तुलना करके हम लाभ या हानि निकालते हैं। हम कुछ ज़रूरी खाते भी बनाते हैं जैसे देनदार या लेनदार खाते, ताकि सही जानकारी मिल सके।
🎯 Exam Tip: अपूर्ण लेखों से अंतिम खाते तैयार करते समय, हमेशा स्थिति विवरण से पूंजी की गणना पर ध्यान दें और फिर लाभ-हानि विवरण में सभी समायोजन जैसे आहरण और अतिरिक्त पूंजी को शामिल करें।
Question 4. एक छोटा व्यापारी एकमात्र डायरी रखता है जिसमें सम्पत्तियों, दायित्वों एवं व्यक्तिगत व्ययों के ही विवरण उपलब्ध हैं। किसी वर्ष के लिए आप उसका लाभ अथवा हानि किस प्रकार ज्ञात करेंगे ? काल्पनिक अंकों का प्रयोग करते हुए अपने उत्तर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer:
यदि एक छोटा व्यापारी केवल एक डायरी रखता है जिसमें उसके व्यापार से संबंधित संपत्तियों, दायित्वों और उसके व्यक्तिगत व्ययों का विवरण उपलब्ध है, तो लाभ या हानि ज्ञात करने के लिए सबसे पहले प्रारंभिक और अंतिम स्थिति विवरण (Statement of Affairs) तैयार किया जाता है। इन विवरणों के आधार पर प्रारंभिक और अंतिम पूंजी की तुलना करके व्यापार का लाभ-हानि ज्ञात किया जाता है।
उदाहरण:
(Kishap keeps his books on single entry system. From the following particulars prepare a statement showing Profit or loss made by him for the year ended 31st March 31, 2017.)
वर्ष के दौरान किशन व्यवसाय में Rs 6,000 की अतिरिक्त पूँजी लाया तथा उसने वर्ष में व्यवसाय से Rs 2,000 निकाले ।।
(During the year Kishan introduced Rs 6,000 a further capital in the business and withdrawn Rs 2,000 in the year.)
Statement of Affairs of Kishan
(As on 1st April, 2016)
| Liabilities | Amount र | Assets | Amount र |
|---|---|---|---|
| Sundry Creditors | 1,700 | Sundry Debtors | 20,000 |
| Bank Overdraft | 500 | Stock | 12,000 |
| Opening Capital (Balancing Figure) | 33,300 | Furniture | 2,000 |
| Cash in Hand | 1,500 | ||
| 35,500 | 35,500 |
Statement of Profit and Loss
(for the year ended 31st March, 2017)
| Particulars | Amount र |
|---|---|
| Closing Capital | 40,200 |
| Add: Drawings | 2,000 |
| Adjusted Capital | 42,200 |
| Less: Further Capital Introduced | 6,000 |
| Adjusted Capital | 36,200 |
| Less: Opening Capital | 33,300 |
| Profit for the Year | 2,900 |
In simple words: First, we find the opening capital from the starting assets and liabilities. Then, we find the closing capital. After adding drawings and subtracting any new capital, we compare the adjusted opening and closing capital to find the profit or loss. For Kishap, his profit for the year was Rs 2,900.
🎯 Exam Tip: जब कोई काल्पनिक उदाहरण दिया जाए, तो सुनिश्चित करें कि आप प्रारंभिक और अंतिम पूंजी की गणना करने के लिए सभी संपत्तियों और देनदारियों का ठीक से उपयोग करते हैं।
Question 1. 31 मार्च, 2017 को सोहन की पूँजी Rs 37,400 है, जबकि 1 अप्रैल, 2016 को उसकी पूँजी Rs 38,400 थी। उसने बताया कि इस वर्ष में उसने Rs 7,000 का ऋण उसके भाई को निजी खाते में दिया तथा Rs 600 प्रतिमाह घरेलू व्यय हेतु व्यापार से निकाले । वह एक मकान स्वयं के रहने हेतु प्रयोग में लेता है जिसका किराया Rs 200 प्रतिमाह तथा बिजली व्यय की औसत राशिर 20 प्रतिमाह व्यवसाय खाते में से देता है। उसने एक बार अपना Rs 4,000 की लागत का स्कूटर Rs 400 प्रीमियम पर बेचकर इस राशि को व्यवसाय में ही विनियोजित कर दिया। इसके अतिरिक्त अन्य कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं है। आपको लाभ प्रदर्शित करते हुए एक विवरण तैयार करना है।
Answer:
| Particulars | Amount र |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 37,400 |
| Add: Drawings During the Year (7,000 + 7,200 + 2,400 + 240) | 16,840 |
| Adjusted Capital | 54,240 |
| Less: Additional Capital Introducing During the Year (4,000 + 400) | 4,400 |
| Adjusted Capital | 49,840 |
| Less: Capital at the beginning of Year | 38,400 |
| Profit for the Year | 11,440 |
कार्यशील टिप्पणी-
1. वर्ष के दौरान कुल आहरण की राशि-
निजी खाते पर भाई को ऋण: Rs 7,000
घरेलू व्यय (600 \( \times \) 12): Rs 7,200
मकान किराया (200 \( \times \) 12): Rs 2,400
बिजली व्यय (20 \( \times \) 12): Rs 240
कुल आहरण: Rs 16,840
2. वर्ष के दौरान लगाई गई अतिरिक्त पूँजी
स्कूटर की बिक्री से प्राप्त राशि (4,000 + 400) = Rs 4,400
In simple words: हमने सोहन की अंतिम पूँजी ली और उसमें सभी आहरण (निजी ऋण, घरेलू खर्च, किराया, बिजली) जोड़े। फिर, बेचे गए स्कूटर से मिली अतिरिक्त पूंजी को घटाया। इस तरह समायोजित पूंजी से शुरुआती पूंजी घटाने पर हमें Rs 11,440 का लाभ मिला।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि सभी व्यक्तिगत खर्चों और ऋणों को आहरण के रूप में ठीक से जोड़ा गया है, और अतिरिक्त पूंजी को अलग से समायोजित किया गया है।
Question 2. राजेश ने एक जुलाई, 2015 को Rs 30,000 की पूँजी से व्यापार प्रारम्भ किया जिसे इस कार्य के लिए खोले गये बैंक खाते में जमा करा दिया गया। इसी दिन उसने Rs 19,500 का स्टॉक और Rs 6,000 का फर्नीचर खरीदा। अपूर्ण लेखों के आधार पर रखी उसकी पुस्तकों में एक रोकड़ बही और एक खाता बही थी और उसके व्यापार तथा निजी, दोनों मामलों से सम्बन्धित समस्त प्राप्तियाँ एवं भुगतान रोकड़ बही में लिखे जाते थे। 30 जून, 2016 को स्टॉक का मूल्यांकन Rs 24,300 पर किया गया। खाताबही के अनुसार Rs 10,350 के देनदार थे, जिनमें से Rs 2,250 के अप्राप्य (डूबत) थे। खाता बही के अनुसार लेनदार Rs 14,520 के थे और रोकड़ बही Rs 5,040 का शेष बताती थी लेकिन पास बुक के अनुसार राजेश के केवल Rs 2,040 जमा थे। उसने Rs 3,000 अपने पुत्र को उधार दिये थे, लेकिन रोकड़ बही में उसे लिखना भूल गया था। राजेश के निजी चे वर्ष में Rs 4,500 थे और इसके अतिरिक्त उसने अपनी दुकान से Rs 1,500 का माल काम में लिया। 30 जून 2016 को फर्नीचर का Rs 7,500 पर मूल्यांकन किया गया। उसने वर्ष
Answer:
Statement of Affairs
(As on 1st July, 2015)
| Liabilities | Amount र | Assets | Amount र |
|---|---|---|---|
| Capital (Balancing Figure) | 27,000 | Bank | 30,000 |
| Stock | 19,500 | ||
| Furniture | 6,000 | ||
| 27,000 | 27,000 |
Statement of Affairs
(As on 30 June, 2016)
| Capital | Amount र | Assets | Amount र |
|---|---|---|---|
| (Balancing Figure) | 27,420 | Debtors | 10,350 |
| Less: Bad Debts | 2,250 | ||
| 8,100 | |||
| Stock | 24,300 | ||
| Furniture | 7,500 | ||
| Cash at Bank | 2,040 | ||
| 41,940 | 41,940 |
Statement of Profit
(for the year ending 30 June, 2016)
| Particulars | Amount र |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 27,420 |
| Add: Drawings (3,000 + 4,500 + 1,500) | 9,000 |
| Adjusted Capital | 36,420 |
| Less: Capital at the Beginning of Year | 30,000 |
| Profit for the Year | 6,420 |
कार्यशील टिप्पणी :
वर्ष के दौरान कुल आहरण की राशि-
पुत्र को उधार राशि: Rs 3,000
निजी खर्च: Rs 4,500
निजी उपयोग के लिए माल: Rs 1,500
कुल आहरण: Rs 9,000
In simple words: राजेश की शुरुआती पूंजी Rs 30,000 थी। साल के अंत में, सभी समायोजनों (जैसे आहरण और पूंजी निवेश) के बाद, उसकी पूंजी Rs 27,420 थी। इन आंकड़ों के आधार पर, राजेश ने वर्ष के लिए Rs 6,420 का लाभ कमाया।
🎯 Exam Tip: जब प्रारंभिक और अंतिम पूंजी ज्ञात न हो, तो उनकी गणना के लिए शुरुआती और अंतिम तारीखों पर स्टेटमेंट ऑफ अफेयर्स तैयार करना आवश्यक है। सभी समायोजन, जैसे आहरण और अतिरिक्त पूंजी, को सही ढंग से शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 3. अजय अपनी पुस्तकें दोहरा प्रविष्टि के अनुसार नहीं रखता है। 1 अप्रैल, 2016 को उसकी स्थिति निम्न प्रकार थी (Ajay does not keep his books according to double entry system. On 1st April, 2016 his position was as follows). वर्ष के दौरान अजय ने Rs 7,500 की अतिरिक्त पूँजी लगाई तथा Rs 1,125 प्रतिमाह आहरण किये। उपर्युक्त सूचना से 30 जून 2016 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए लाभ ज्ञात कीजिये।
Answer:
Statement of Affairs
(As on 1st April, 2016)
| Liabilities | Amount र | Assets | Amount र |
|---|---|---|---|
| Creditors | 43,500 | Cash at Bank | 3,750 |
| Capital (Balancing Figure) | 52,500 | Stock in Trade | 28,500 |
| Debtors | 21,000 | ||
| Plant and Machinery | 40,500 | ||
| Furniture | 2,250 | ||
| 96,000 | 96,000 |
Statement of Affairs
(for the year ending 30 June, 2016)
| Liabilities | Amount र | Assets | Amount र |
|---|---|---|---|
| Creditors | 43,500 | Cash at Bank | 3,750 |
| Capital (Balancing Figure) | 52,500 | Stock in Trade | 28,500 |
| Debtors | 21,000 | ||
| Plant and Machinery | 40,500 | ||
| Furniture | 2,250 | ||
| 96,000 | 96,000 |
Statement of Profit
(for the year ending 30th June, 2016)
| Particulars | Amount र |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 52,500 |
| Add: Drawings during the Year (1,125 \( \times \) 12) | 13,500 |
| Adjusted Capital | 66,000 |
| Less: Additional Capital | 7,500 |
| Adjusted Capital | 58,500 |
| Less: Capital at the Beginning of Year | 39,750 |
| Profit for the Year | 18,750 |
In simple words: हमने अजय की शुरुआती और अंतिम पूंजी की गणना स्टेटमेंट ऑफ अफेयर्स से की। फिर, कुल आहरण को अंतिम पूंजी में जोड़ा और अतिरिक्त पूंजी को घटाया। इस समायोजित पूंजी से शुरुआती पूंजी घटाने पर हमें Rs 18,750 का लाभ मिला।
🎯 Exam Tip: मासिक आहरणों को वार्षिक आहरणों में बदलने के लिए 12 से गुणा करना न भूलें। अतिरिक्त पूंजी और आहरणों को लाभ-हानि गणना में सही जगह पर समायोजित करें।
Question 1. एक व्यापारी ने Rs 1,500 का एक टाइपराइटर भी खरीदा । वर्ष 2016-17 के लिए (i) प्रारम्भ का स्थिति विवरण, (ii) अन्त का स्थिति विवरण; तथा (iii) आयगत लाभ या हानि दिखाते हुए एक विवरण तैयार कीजिए। (Ramnath keeps incomplete records of his transactions. His position at 1st April, 2016 was as follows) Cash in hand Rs 15,000, Investment Rs 30,000, Office premises Rs 30,000, Plant and machinery Rs 40,000, Furniture Rs 7,000, Stock Rs 24,000 Debtors Rs 1,20,000, Bills Payable Rs 28,000, Creditors Rs 50,000. (During the year Ramnath had withdrawn Rs 20,000 in cash and Rs 9,000 in goods and introduced Rs 20,000 as additional capital. His position as on 31st March, 2016 was as follows) Cash in hand Rs 12,000, Investment Rs 26,000, Office premises Rs 27,000, Plant and Machinery Rs 48,000, Furniture Rs 6,600, Stock Rs 18,000, Creditors Rs 1,01,000, Debtors Rs 1,00,000, Bills Payable Rs 32,000. (During the year investment of the book value of Rs 4,000 were sold for Rs 4,800 and a new machine was purchased for Rs 15,000. A typewriter was also purchased during the year Rs 1,500. You are required to prepare for the year 2016-17. (i) Statement of Affairs at the beginning; (ii) Statement of Affairs at the end, and (iii) A Statement showing the revenue Profit or Loss.)
Answer:
(i) Statement of Affairs (As on 1st April, 2016)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 50,000 | Office Premises | 30,000 |
| Bills Payable | 28,000 | Plant and Machinery | 40,000 |
| Capital (Balancing Figure) | 1,88,000 | Furniture | 7,000 |
| Stock | 24,000 | ||
| Debtors | 1,20,000 | ||
| Cash in hand | 15,000 | ||
| Investment | 30,000 | ||
| Total | 2,66,000 | Total | 2,66,000 |
(ii) Statement of Affairs (As on 31st March, 2017)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 1,01,000 | Cash in hand | 12,000 |
| Bills Payable | 32,000 | Investment | 26,000 |
| Capital (Balancing Figure) | 1,06,100 | Office Premises | 27,000 |
| Plant and Machinery | 48,000 | ||
| Furniture | 6,600 | ||
| Stock | 18,000 | ||
| Debtors | 1,00,000 | ||
| Typewriter | 1,500 | ||
| Total | 2,39,100 | Total | 2,39,100 |
(iii) Statement of Profit or Loss
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 1,06,100 |
| Add : Drawings During the Year (\( 20,000 + 9,000 = 29,000 \)) | 29,000 |
| 1,35,100 | |
| Less : Additional Capital | 20,000 |
| Adjusted Capital | 1,15,100 |
| Less : Capital at the Beginning of Year | 1,88,000 |
| Loss for the Year (Total Loss) | (72,900) |
| Less : Capital Profit (Profit on Sale of Investment) | (800) |
| Revenue Loss for the Year | (73,700) |
🎯 Exam Tip: When dealing with incomplete records, always start by preparing the opening and closing Statements of Affairs to find the capital amounts. Remember to adjust for drawings and additional capital before calculating profit or loss.
Question 5. 1 अप्रैल, 2016 को X की स्थिति इस प्रकार थी (The position of X on 1st April, 2016 as follows) Capital Rs 12,000, Goodwill Rs 3,090, Profit Undrawn Rs 5,805, Furniture Rs 2,335, Sundry Creditors Rs 1,535, Stock in Trade Rs 4,000, Sundry Debtors Rs 7,805, Cash at Bank Rs 2,110. 31 मार्च, 2017 को समाप्त वर्ष में व्यापार के खाते अपूर्ण ढंग से लिखे गये थे, लेकिन उसके बैंक व्यवहारों का विश्लेषण निम्न तथ्य प्रकट करता था (During the year ending 31st March, 2017 the accounts of the business had been recorded imperfectly but an analysis of his bank transactions disclosed the following) Balance Rs 2,110, Receipts from Customers Rs 35,400, Payment to Creditors Rs 15,060, Payment for Rent Rs 1,575, Sundry Expenses Rs 640, Drawings Rs 13,600, Payment for Salaries Rs 3,050, Balance Rs 3,585. अन्तिम स्टॉक का मूल्यांकन Rs 6,000 पर किया गया। 31 मार्च, 2017 को देनदारों की सूची का योग Rs 9,450 और लेनदारों की सूची का योग Rs 2,675 था। 31 मार्च, 2017 को समाप्त हुए वर्ष के लिए व्यापार तथा लाभ-हानि खाता तथा उसी तारीख का चिट्ठा प्रकट कीजिए।
Answer:
Trading and Profit and Loss (for the year ending 31st March, 2017)
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Opening Stock | 4,000 | By Sales | 37,045 |
| To Purchase | 16,200 | By Closing Stock | 6,000 |
| To Gross Profit c/d | 22,845 | ||
| 43,045 | 43,045 | ||
| To Salarie | 3,050 | By Gross Profit b/d | 22,845 |
| To Rent | 1,575 | ||
| To Sundry Expenses | 640 | ||
| To Net Profit (Transferred to Capital A/c) | 17,580 | ||
| 22,845 | 22,845 |
Balance Sheet (As on 31st March, 2017)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Capital | 12,000 | Goodwill | 3,090 |
| Add : Net Profit | 17,580 | Furniture | 2,335 |
| 29,580 | Stock in Trade | 6,000 | |
| Less : Drawings | 13,600 | Sundry Debtors | 9,450 |
| Profit undrawn | 5,805 | Cash at Bank | 3,585 |
| Creditors | 2,675 | ||
| Total | 24,460 | Total | 24,460 |
कार्यशील टिप्पणी-1. उधार विक्रय की राशि की गणना
Total Debtors A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 7,805 | By Cash Received | 35,400 |
| To Credit Sales (Balancing Figure) | 37,045 | By Balance c/d | 9,450 |
| 44,850 | 44,850 |
2. उधार क्रय की राशि की गणना
Total Creditors A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Cash Paid | 15,060 | By Balance b/d | 1,535 |
| To Balance c/d | 2,675 | By Credit Purchase (Balancing Figure) | 16,200 |
| 17,735 | 17,735 |
🎯 Exam Tip: When preparing accounts from incomplete records, ensure all cash and bank transactions are carefully allocated. Always reconcile opening and closing balances with total transactions for debtors and creditors to find missing figures like credit sales or purchases.
Question 6. राम एवं श्याम आपस में 2:1 के अनुपात में लाभ-हानि का विभाजन करते हैं। 1 अप्रैल 2016 को उनका स्थिति विवरण इस प्रकार था- (The following is the Statement of Affairs as on 1st April, 2016 of Ram and Shyam who are partnership sharing profit and losses in the proportion of 2:1) Creditors Rs 36,000, Bills Payable Rs 3,000, Capital: Ram Rs 60,000, Shyam Rs 24,000. Cash in hand Rs 30, Cash at Bank Rs 2,970, Debtors Rs 39,000, Stock Rs 21,000, Bills Receivable Rs 9,000, Plant and Machinery Rs 12,000, Building Rs 36,000, Furniture Rs 3,000. 31 मार्च, 2017 को उनकी पुस्तकों में स्थिति इस प्रकार थी (The position on at 31st March, 2017 was as follows) Liabilities: Creditors Rs 57,000, Bills Payable Rs 3,600. Assets: Cash in hand Rs 300, Cash at Bank Rs 4,500, Debtors Rs 15,000, Bills Receivable Rs 11,400, Stock Rs 25,200, Plant and Machinery Rs 12,000 (Less Depreciation Rs 600), Furniture Rs 3,000 (Less Depreciation Rs 300), Building Rs 36,000. उपर्युक्त सूचनाओं से लाभ-हानि का विवरण एवं स्थिति विवरण तैयार कीजिए। During the year Ram drew Rs 9,000 and Shyam drew Rs 3,600 from the business for their personal use. Ram withdrawn the sum of Rs 12,000 on 31st December, 2016 from his capital. Depreciate plant and Machinery by 5%, Furniture by 10% and allow interest on partner's capital at the rate 5% p.a. Ignore interest on drawings. From the particulars given above prepare a Statement of Profit and Loss and Statement of Affairs.
Answer:
Statement of Affairs (As on 1st April, 2016)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 36,000 | Cash in hand | 30 |
| Bills Payable | 3,000 | Cash at Bank | 2,970 |
| Capital : Ram | 60,000 | Debtors | 39,000 |
| Shyam | 24,000 | Stock | 21,000 |
| 84,000 | Bills Receivable | 9,000 | |
| Plant and Machinery | 12,000 | ||
| Building | 36,000 | ||
| Furniture | 3,000 | ||
| Total | 1,23,000 | Total | 1,23,000 |
Statement of Affairs (As on 31st March, 2017)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 57,000 | Cash in hand | 300 |
| Bills Payable | 3,600 | Cash at Bank | 4,500 |
| Capital (Balancing Figure) | 45,900 | Debtors | 15,000 |
| Bills Receivable | 11,400 | ||
| Stock | 25,200 | ||
| Plant and Machinery (\( 12,000 - 600 \)) | 11,400 | ||
| Building | 36,000 | ||
| Furniture (\( 3,000 - 300 \)) | 2,700 | ||
| Total | 1,06,500 | Total | 1,06,500 |
Statement of Profit or Loss (for the year ending 31st March, 2017)
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| Capital at the end of Year | 45,900 |
| Add : Drawings During the year (\( 9,000 + 3,600 \)) | 12,600 |
| Add : Capital Withdraw | 12,000 |
| Adjusted Capital | 70,500 |
| Less : Capital at the Beginning of Year | 84,000 |
| Loss for the Year | (13,500) |
| Less : Interest on Capital | (4,050) |
| Net Loss for the year | (17,550) |
| Loss to be distributed among partners in ratio \( 2:1 \) Ram - Rs 11,700; Shyam - Rs 5,850 |
🎯 Exam Tip: For partnership accounts from incomplete records, ensure all partner-related adjustments like drawings, additional capital, and interest on capital are correctly calculated and applied to the capital accounts before determining the final profit or loss.
Question 7. 1 अप्रैल 2016 को महेश की पुस्तकें निम्नलिखित स्थिति प्रकट करती हैं (The closing stock was valued at Rs 48,000. Debtors totaled Rs 75,600 and that of creditors Rs 21,400 on 31st March, 2017. Prepare Trading and Profit & Loss account for the year ending 31st March, 2017 and a Balance Sheet as on that date.) Cash Balance Rs 16,880, Receipts from Debtors Rs 2,83,200. Payment to Creditors Rs 1,20,480, Rent Paid Rs 12,600, Sundry Expenses Rs 5,120, Drawings Rs 1,08,800, Salaries Paid Rs 24,400. Stock (Opening) Rs 32,000, Purchases Rs 1,29,600. Goodwill Rs 24,720, Machinery Rs 18,680, Stock (Closing) Rs 48,000, Sundry Debtors Rs 75,600, Cash Balance Rs 28,680. Sundry Creditors (Opening) Rs 12,280, Capital (Opening) Rs 1,42,440.
Answer:
Trading and Profit & Loss A/C (for the year ending 31st March, 2017)
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Opening Stock | 32,000 | By Sales | 2,96,360 |
| To Purchases | 1,29,600 | By Closing Stock | 48,000 |
| To Net Profit (Transferred to Capital A/c) | 1,40,640 | ||
| 3,02,240 | 3,44,360 |
Balance Sheet (As on 31st March, 2017)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Capital | 1,42,440 | Goodwill | 24,720 |
| Add : Net Profit | 1,40,640 | Machinery | 18,680 |
| 2,83,080 | Stock | 48,000 | |
| Less : Drawings | 1,08,800 | Sundry Debtors | 75,600 |
| Creditors | 21,400 | Cash Balance | 28,680 |
| Total | 1,95,680 | Total | 1,95,680 |
कार्यशील टिप्पणी-1. उधार विक्रय की राशि की गणना
Total Debtors A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 62,440 | By Cash Received | 2,83,200 |
| To Credit Sales (Balancing Figure) | 2,96,360 | By Balance c/d | 75,600 |
| 3,58,800 | 3,58,800 |
2. उधार क्रय की राशि की गणना
Total Creditors A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Cash Paid | 1,20,480 | By Balance b/d | 12,280 |
| To Balance c/d | 21,400 | By Credit Purchase (Balancing Figure) | 1,29,600 |
| 1,41,880 | 1,41,880 |
🎯 Exam Tip: When given incomplete records, always start by completing the necessary ledger accounts like Debtors Account and Creditors Account to find missing figures such as credit sales and purchases. These completed figures are crucial for preparing accurate final accounts.
Question 8. व्यक्तिगत खातों के निरीक्षण से ज्ञात हुआ कि व्यापारी ने देनदारों को Rs 3,500 बट्टे के दिए तथा लेनदारों से Rs 2,000 बट्टे के प्राप्त किये। मोहन से (जो कि एक देनदार था) केवल Rs 300 प्राप्त हुए जबकि उस पर Rs 600 बकाया थे, शेष राशि डूबत ऋण समझ ली गई। 30 जून, 2016 को उसके पास Rs 40,000 का स्टॉक, Rs 66,100 के देनदार, Rs 3,000 के प्राप्य बिल, Rs 19,000 के लेनदार, Rs 4,000 के देय बिल थे। भवन पर मूल्य ह्रास 10%, पूँजी पर ब्याज 5% तथा Rs 2,400 का संदिग्ध ऋण आयोजन करना है। (From the analysis of personal accounts it was found that the trader allowed discount to debtors amounted to Rs 3,500 and received discount from creditors amounted to Rs 2,000. Mohan (a debtor) from whom Rs 600 were due, paid Rs 300 only balance being treated as bad debts. On 30th June, 2016 he had stock valued at Rs 40,000, Debtors Rs 66,100, Bills receivable Rs 3,000, Creditors Rs 19,000, Bills Payable Rs 4,000, Building (depreciated 10%), Furniture (depreciated 10%), Opening Capital (Balancing figure). He had Stock Rs 25,000; Building Rs 40,000; Furniture Rs 10,000; Debtors Rs 55,000 and Creditors Rs 19,000 on 1st July, 2015. Cash Book analysis revealed: To Receipts from Debtors Rs 70,000, To Cash Sales Rs 25,000. By Bank Overdraft (1.7.15) Rs 11,000, By Interest on Bank Overdraft Rs 750, By Creditors (Payment) Rs 40,000, By Cash Purchase Rs 16,500, By Salary Rs 3,000, By Sundry Expenses Rs 6,500, By Rent and Rates Rs 1,200, By Drawings Rs 3,000, By Balance at Bank (30.6.16) Rs 13,050. Prepare Trading and Profit & Loss A/C, and Balance Sheet for the year ending 30th June, 2016, along with necessary working notes.)
Answer:
Cash Book
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Receipts from Debtors | 70,000 | By Bank Overdraft (1.7.15) | 11,000 |
| To Cash Sales | 25,000 | By Interest on Bank Overdraft | 750 |
| By Creditors (Payment) | 40,000 | ||
| By Cash Purchase | 16,500 | ||
| By Salary | 3,000 | ||
| By Sundry Expenses | 6,500 | ||
| By Rent and Rates | 1,200 | ||
| By Drawings | 3,000 | ||
| By Balance at Bank (30.6.16) | 13,050 | ||
| Total | 95,000 | Total | 95,000 |
Trading Account (for the year ending 30th June, 2016)
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Opening Stock | 25,000 | By Sales | 1,12,900 |
| To Purchase | 62,500 | By Closing Stock | 40,000 |
| To Gross Profit c/d | 65,400 | ||
| 1,52,900 | 1,52,900 |
Profit and Loss Account (for the year ending 30th June, 2016)
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Discount Allowed | 3,500 | By Gross Profit b/d | 65,400 |
| To Bad debts | 300 | By Discount Received | 2,000 |
| To Provision for doubtful debts | 2,400 | ||
| To Depreciation on Building | 4,000 | ||
| To Depreciation on Furniture | 1,000 | ||
| To Interest on Capital | 5,000 | ||
| To Net Profit (Transferred to Capital A/c) | 40,750 | ||
| 56,950 | 67,400 |
Balance Sheet (As on 30th June, 2016)
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Capital | 1,00,000 | Building (\( 40,000 - 4,000 \)) | 36,000 |
| Add : Interest on Capital | 5,000 | Furniture (\( 10,000 - 1,000 \)) | 9,000 |
| Add : Net Profit | 40,750 | Stock | 40,000 |
| 1,45,750 | Debtors | 66,100 | |
| Less : Drawings | 3,000 | Less : Provision for Doubtful Debts | 2,400 |
| Creditors | 19,000 | 63,700 | |
| Bills Payable | 4,000 | Bills Receivable | 3,000 |
| Bank Balance | 13,050 | ||
| Total | 1,65,750 | Total | 1,65,750 |
1. उधार विक्रय की राशि की गणना
Total Debtors A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 55,000 | By Cash Received | 70,000 |
| To Credit Sales (Balancing Figure) | 87,900 | By Discount Allowed | 3,500 |
| By Bad Debts | 300 | ||
| By Bills Receivable | 3,000 | ||
| By Balance c/d | 66,100 | ||
| 1,42,900 | 1,42,900 |
2. उधार क्रय की राशि की गणना
Total Creditors A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Cash Paid | 40,000 | By Balance b/d | 19,000 |
| To Discount Received | 2,000 | By Credit Purchase (Balancing Figure) | 46,000 |
| To Bills Payable | 4,000 | ||
| To Balance c/d | 19,000 | ||
| 65,000 | 65,000 |
🎯 Exam Tip: When dealing with extensive incomplete records, carefully reconstruct the Cash Book first, as it often contains many missing transaction details. Ensure all adjustments like depreciation and provisions are correctly applied to relevant assets and liabilities before preparing final accounts.
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