Get the most accurate RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 11 Accountancy. Our expert-created answers for Class 11 Accountancy are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 10 विनियम बिल RBSE Solutions for Class 11 Accountancy
For Class 11 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 11 Accountancy solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 10 विनियम बिल solutions will improve your exam performance.
Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल RBSE Solutions PDF
Question 1. विनिमय बिल का भुगतान किया जाता है
(अ) स्वीकारकर्ता द्वारा
(ब) बेचान करने वाले द्वारा
(स) लेखक द्वारा
(द) बेचान प्राप्तकर्ता द्वारा
Answer: (अ) स्वीकारकर्ता द्वारा
In simple words: विनिमय बिल का भुगतान उस व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसने इसे स्वीकार किया होता है, यानी स्वीकारकर्ता।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल में मुख्य पक्षकार और उनके दायित्व याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर स्वीकारकर्ता का भुगतान दायित्व।
Question 2. जो बिल एक ही देश में लिखे जाते हैं एवं स्वीकार किये जाते हैं, उसे कहते हैं
(अ) देशी बिल
Answer: (अ) देशी बिल
In simple words: जब कोई बिल एक ही देश के अंदर लिखा और स्वीकार किया जाता है, तो उसे देशी बिल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: देशी और विदेशी बिलों के बीच का अंतर अक्सर पूछा जाता है; ध्यान दें कि देशी बिलों का लेनदेन एक ही देश की सीमाओं के भीतर होता है।
Question 3. विनिमय बिल की देय तिथि की गणना हेतु अनुग्रह दिवस के रूप में जोड़ेंगे
(अ) चार दिन
(ब) दो दिन
(स) तीन दिन
(द) कोई नहीं
Answer: (स) तीन दिन
In simple words: विनिमय बिल की अंतिम भुगतान तिथि निकालने के लिए, उसकी अवधि में तीन अतिरिक्त दिन जोड़े जाते हैं, जिन्हें अनुग्रह दिवस कहते हैं।
🎯 Exam Tip: देय तिथि की गणना करते समय अनुग्रह दिवसों को जोड़ना न भूलें, यह एक सामान्य नियम है।
Question 4. प्रतिज्ञा पत्र एक है
(अ) आदेश पत्र
(ब) भुगतान पत्र
(स) वचन पत्र
(द) स्वीकृति पत्र
Answer: (स) वचन पत्र
In simple words: प्रतिज्ञा पत्र एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को एक निश्चित राशि का भुगतान करने का वादा करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिज्ञा पत्र एक 'वचन पत्र' होता है, जबकि विनिमय बिल एक 'आदेश पत्र' होता है; यह बुनियादी अंतर याद रखें।
Question 5. 12 मई, 2016 को 3 माह के लिये लिखे गये बिल की देय तिथि होगी
(अ) 15 अगस्त, 2016
(ब) 14 अगस्त, 2016
(स) 16 अगस्त, 2016
(द) 12 अगस्त, 2016
Answer: (ब) 14 अगस्त, 2016
In simple words: बिल की तारीख 12 मई, 2016 है और अवधि 3 माह है। तो इसकी अंतिम तिथि 12 अगस्त, 2016 होगी। इसमें तीन अनुग्रह दिवस जोड़ने पर देय तिथि 15 अगस्त, 2016 होती है। लेकिन 15 अगस्त सार्वजनिक अवकाश है, इसलिए नियमानुसार देय तिथि एक दिन पहले, यानी 14 अगस्त, 2016 होगी।
🎯 Exam Tip: देय तिथि की गणना करते समय अनुग्रह दिवस जोड़ना और सार्वजनिक अवकाशों (जैसे 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर) को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे में देय तिथि एक दिन पहले हो जाती है।
Question 6. देय तिथि पर भुगतान करने पर स्वीकारकर्ता जिस खाते को डेबिट करता है, वह है
(अ) Drawer's A/C
(ब) B/P A/C.
Answer: (ब) B/P A/C.
In simple words: जब स्वीकारकर्ता देय तिथि पर बिल का भुगतान करता है, तो वह अपने 'देय बिल खाता' (Bills Payable A/C) को डेबिट करता है।
🎯 Exam Tip: जर्नल प्रविष्टियों में डेबिट और क्रेडिट के नियमों को याद रखें, खासकर स्वीकारकर्ता की पुस्तकों में भुगतान प्रविष्टि के लिए।
Question 7. निकराई व्यय (Noting Charges) होते हैं
(अ) बिल के बेचान पर
(ब) बिल के भुनाने पर
(स) बिल के संग्रहण पर
(द) अनादरण के प्रमाणीकरण पर
Answer: (द) अनादरण के प्रमाणीकरण पर
In simple words: निकराई व्यय तब लगते हैं जब कोई बिल अनादृत हो जाता है और उसे कानूनी रूप से प्रमाणित करवाना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: 'नोटिंग चार्ज' का संबंध बिल के अनादरण और उसके कानूनी प्रमाणन से है, इसे अन्य बिल संबंधी खर्चों से भ्रमित न करें।
Question 8. 4 माह के Rs 3,000 के प्राप्य बिल को 5% वार्षिक बट्टे पर तुरन्त भुनाया गया, बट्टे की राशि होगी ।
(अ) 200 रुपये
(ब) 100 रुपये
(स) 60 रुपये
(द) 50 रुपये
Answer: (द) 50 रुपये
In simple words: 4 माह के लिए 3,000 रुपये के बिल पर 5% वार्षिक दर से बट्टा 50 रुपये होगा, जिसे तुरंत बिल भुनाने पर काटा जाएगा।
🎯 Exam Tip: बट्टे की गणना करते समय ब्याज दर वार्षिक है या मासिक, और बिल की अवधि कितनी है, इन बातों का ध्यान रखें।
Question 9. विनिमय विपत्र खाता कौन-सा खाता है ?
(अ) वास्तविक खाता
(ब) अवास्तविक खाता
(स) व्यक्तिगत खाता
(द) नाममात्र का खाता
Answer: (अ) वास्तविक खाता
In simple words: विनिमय विपत्र खाता एक वास्तविक खाता होता है क्योंकि यह संपत्ति से संबंधित होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के खातों (वास्तविक, व्यक्तिगत, नाममात्र) के नियम और उनके अंतर्गत आने वाले खातों को अच्छी तरह समझें।
Question 10. 31 मार्च, 2016 को 3 माह की अवधि का एक बिल लिखा गया, उसकी भुगतान तिथि होगी
(अ) 3 जुलाई 2016
(ब) 10 जून, 2010
(स) 4 जून, 2016
Answer: (स) 4 जून, 2016
In simple words: 31 मार्च, 2016 को लिखे 3 माह के बिल की देय तिथि 30 जून, 2016 होगी। इसमें 3 अनुग्रह दिवस जोड़ने पर अंतिम भुगतान तिथि 3 जुलाई, 2016 होगी। (दिए गए विकल्पों में 4 जून सबसे करीब है, लेकिन सही उत्तर 3 जुलाई होगा, जैसा कि गणना से पता चलता है। उपलब्ध विकल्पों में कोई भी सटीक रूप से मेल नहीं खाता। हालांकि, अगर संदर्भ में कोई विशेष नियम नहीं है, तो सटीक गणना 3 जुलाई होगी। यदि विकल्पों में से चुनना है, तो कोई भी विकल्प पूरी तरह से सटीक नहीं है)।
🎯 Exam Tip: देय तिथि की गणना में अनुग्रह दिवसों को शामिल करना और महीने के दिनों की संख्या को सही ढंग से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 1. विनिमय विपत्र की दो विशेषताएँ बताइये।
Answer: विनिमय विपत्र की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- यह एक आदेश होता है जिसमें कोई शर्त नहीं होती है।
- विनिमय बिल हमेशा लिखित रूप में होना जरूरी है।
In simple words: विनिमय बिल एक बिना शर्त वाला लिखित आदेश होता है।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल की परिभाषा और उसकी मुख्य विशेषताओं को हमेशा याद रखें।
Question 2. प्रतिज्ञा पत्र के पक्षकार बताइये।
Answer: प्रतिज्ञा पत्र के मुख्य पक्षकार निम्नलिखित होते हैं:
- लेनदार (प्राप्तकर्ता): वह व्यक्ति जिसे भुगतान मिलना है।
- देनदार (लेखक): वह व्यक्ति जो भुगतान करने का वादा करता है।
In simple words: प्रतिज्ञा पत्र में दो लोग होते हैं: एक जो पैसे देगा (देनदार) और दूसरा जिसे पैसे मिलेंगे (लेनदार)।
🎯 Exam Tip: प्रतिज्ञा पत्र में केवल दो पक्षकार होते हैं, जबकि विनिमय बिल में तीन होते हैं - यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।
Question 3. दर्शनी बिल से क्या आशय है ?
Answer: दर्शनी बिल ऐसे बिल होते हैं जिनका भुगतान स्वीकारकर्ता द्वारा मांग किए जाने पर ही किया जाता है। इनमें भुगतान के लिए कोई निश्चित तारीख नहीं होती, बल्कि जब बिल प्रस्तुत किया जाता है तभी भुगतान होता है।
In simple words: दर्शनी बिल का मतलब है कि जब बिल दिखाया जाए, तभी उसका भुगतान कर दिया जाएगा।
🎯 Exam Tip: दर्शनी बिल और मियादी बिल के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें, खासकर भुगतान की अवधि के संदर्भ में।
Question 4. विनिमय बिल के दो लाभ बताइये।
Answer: विनिमय बिल के दो लाभ इस प्रकार हैं:
- इन बिलों को बैंक से भुनाया जा सकता है, जिससे बिल धारक को तुरंत नकदी मिल जाती है।
- इन्हें किसी दूसरे व्यक्ति के नाम बेचान (एंडोर्स) किया जा सकता है, जिससे भुगतान के लिए एक साधन के रूप में इनका उपयोग होता है।
In simple words: बिल को बैंक से पैसा मिल सकता है या इसे किसी और को दिया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल के नकदीकरण (भुनाना) और हस्तांतरणीयता (बेचान) के लाभों को याद रखें।
Question 5. बिनिमय बिल को बैंक से भुनाने की प्रविष्टि दीजिए।
Answer: विनिमय बिल को बैंक से भुनाने पर जर्नल प्रविष्टि इस प्रकार होगी:
Bank A/c Dr.
Discount A/c Dr.
To Bills Receivable A/C
(Being bill discounted)
In simple words: जब बैंक से बिल भुनाते हैं, तो बैंक खाता और बट्टा खाता डेबिट होता है और प्राप्य बिल खाता क्रेडिट होता है।
🎯 Exam Tip: बिल भुनाने की जर्नल प्रविष्टि को ठीक से याद रखें, जिसमें बट्टा राशि भी शामिल होती है।
Question 7. विनिमय बिल के पक्षकार बताइये।
Answer: विनिमय बिल के मुख्य पक्षकार निम्नलिखित होते हैं:
- लेखक (Drawer): वह व्यक्ति जो बिल लिखता है।
- स्वीकारक (Acceptor) / आहर्ती (Drawee): वह व्यक्ति जो बिल स्वीकार करता है और भुगतान करने के लिए सहमत होता है।
- प्राप्तकर्ता (Payee): वह व्यक्ति जिसे बिल की राशि का भुगतान मिलना है।
In simple words: विनिमय बिल में तीन लोग होते हैं: लिखने वाला, स्वीकार करने वाला और पैसे पाने वाला।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल के तीनों पक्षकारों - लेखक, स्वीकारकर्ता और प्राप्तकर्ता - की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 8. विनिमय बिल के बेचान पर क्या प्रविष्टि होगी ?
Answer: विनिमय बिल के बेचान (endorsement) पर जर्नल प्रविष्टि इस प्रकार होगी:
Endorsee's A/c Dr.
To Bills Receivable
(Being bill endorsed)
In simple words: जब बिल किसी और को दिया जाता है (बेचान), तो उस व्यक्ति का खाता डेबिट होता है और प्राप्य बिल खाता क्रेडिट होता है।
🎯 Exam Tip: बेचान की प्रविष्टि में बिल प्राप्त करने वाले व्यक्ति (Endorsee) को डेबिट किया जाता है, क्योंकि उसे अब बिल की राशि प्राप्त होगी।
Question 9. विनिमय विल बहियाँ कितने प्रकार की होती हैं ? नाम बताइये।
Answer: विनिमय बिल बहियाँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
- प्राप्य बिल बही (Bills Receivable Book): इसमें सभी प्राप्य बिलों का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- देय बिल बही (Bills Payable Book): इसमें सभी देय बिलों का रिकॉर्ड रखा जाता है।
In simple words: बिलों के हिसाब के लिए दो किताबें होती हैं: एक उन बिलों के लिए जो हमें मिलेंगे (प्राप्य बिल), और दूसरी उन बिलों के लिए जो हमें देने हैं (देय बिल)।
🎯 Exam Tip: प्राप्य बिल और देय बिल बहियों का उद्देश्य और उनमें दर्ज की जाने वाली प्रविष्टियों को स्पष्ट रखें।
Question 10. 20 अक्टूबर, 2003 को 2 माह के लिये लिखे गये बिल की देय तिथि बताइये।
Answer: 20 अक्टूबर, 2003 को 2 माह के लिए लिखे गए बिल की देय तिथि इस प्रकार निकाली जाएगी:
बिल की तारीख: 20 अक्टूबर, 2003
अवधि: 2 माह
2 माह बाद: 20 दिसंबर, 2003
अनुग्रह दिवस (3 दिन) जोड़ने पर: 20 + 3 = 23 दिसंबर, 2003
अतः, देय तिथि: 23 दिसंबर, 2003
In simple words: 20 अक्टूबर को लिखे 2 माह के बिल की आखिरी तारीख 20 दिसंबर होगी। इसमें 3 दिन और जोड़ दो, तो 23 दिसंबर उसकी देय तिथि होगी।
🎯 Exam Tip: देय तिथि की गणना में अनुग्रह दिवस (3 दिन) जोड़ना कभी न भूलें, यह सामान्य नियम है।
Question 11. बिल का नवीनीकरण क्या है ?
Answer: बिल का नवीनीकरण तब होता है जब स्वीकारकर्ता (जो भुगतान करने वाला है) देय तिथि पर बिल का भुगतान करने में असमर्थ होता है। ऐसी स्थिति में, स्वीकारकर्ता लेखक (जिसने बिल लिखा था) से अनुरोध करता है कि वह पुराने बिल को रद्द करके एक नया बिल लिख दे। नए बिल में अक्सर ब्याज जोड़ा जाता है और भुगतान के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता है।
In simple words: अगर कोई व्यक्ति बिल का पैसा समय पर नहीं दे पाता, तो पुराना बिल रद्द करके एक नया बिल बनाया जाता है, जिसमें थोड़ा ब्याज और समय जोड़ दिया जाता है। इसे ही नवीनीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: नवीनीकरण की स्थिति में पुराने बिल को रद्द करना और नए बिल पर ब्याज जोड़ना हमेशा याद रखें।
Question 13. विनिमय बिल और प्रतिज्ञा पत्र में दो अन्तर बताइये।
Answer: विनिमय बिल और प्रतिज्ञा पत्र में दो मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
- विनिमय बिल में तीन पक्षकार (लेखक, स्वीकारकर्ता और प्राप्तकर्ता) होते हैं, जबकि प्रतिज्ञा पत्र में केवल दो पक्षकार (लेखक और प्राप्तकर्ता) होते हैं।
- विनिमय बिल का लेखक आमतौर पर विक्रेता या ऋणदाता होता है, जो भुगतान का आदेश देता है, जबकि प्रतिज्ञा पत्र का लेखक ऋणी या क्रेता होता है, जो भुगतान का वादा करता है।
In simple words: बिल में तीन लोग होते हैं, लेकिन प्रतिज्ञा पत्र में दो। बिल लिखने वाला पैसे मांगता है, जबकि प्रतिज्ञा पत्र लिखने वाला पैसे देने का वादा करता है।
🎯 Exam Tip: पक्षकारों की संख्या और लेखक की भूमिका विनिमय बिल और प्रतिज्ञा पत्र के बीच के सबसे महत्वपूर्ण अंतर हैं।
Question 14. महेश ने अशोक को अपने Rs 1,000 के देय विपत्र का भुगतान देय तिथि से एक माह पूर्व Rs 20 काटकर कर दिया । अशोक की जर्नल में सम्बन्धित प्रविष्टि दीजिये।
Answer: अशोक की जर्नल में प्रविष्टि (एक माह पूर्व भुगतान पर Rs 20 बट्टा):
Cash A/c Dr. 980
Rebate A/C Dr. 20
To Bills Receivable A/c 1,000
(Being bill paid before maturity with rebate)
In simple words: अशोक को महेश से 1,000 रुपये का बिल एक महीने पहले मिल गया। महेश ने 20 रुपये कम दिए (बट्टा)। तो अशोक के खाते में नकद 980 रुपये आए, 20 रुपये बट्टे के रूप में लिखे गए, और 1,000 रुपये का बिल खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: जब बिल का भुगतान देय तिथि से पहले होता है, तो प्राप्तकर्ता को बट्टा (rebate) देना पड़ सकता है, और इसकी प्रविष्टि जर्नल में करनी होती है।
Question 15. नोटिंग चार्ज कब दिया जाता है ?
Answer: नोटिंग चार्ज तब दिया जाता है जब कोई विनिमय बिल अनादृत (dishonoured) हो जाता है। बिल के अनादरण का कानूनी प्रमाणन करवाने के लिए एक नोटेरी पब्लिक को यह शुल्क देना पड़ता है।
In simple words: बिल अनादृत होने पर (जब कोई बिल स्वीकारकर्ता द्वारा चुकाया नहीं जाता), तो उसकी कानूनी पुष्टि करवाने के लिए जो पैसा लगता है, उसे नोटिंग चार्ज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: नोटिंग चार्ज केवल बिल के अनादरण की स्थिति में ही लगता है, ताकि अनादरण का कानूनी प्रमाण मिल सके।
RBSE Class 11 Accountancy Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. विनिमय बिल की परिभाषा दीजिए।
Answer: भारतीय विनिमय साध्य विपत्र अधिनियम, 1881 की धारा 5 के अनुसार, विनिमय बिल एक लिखित, हस्ताक्षरयुक्त और बिना शर्त का आदेश है। इसमें लेखक किसी निश्चित व्यक्ति को या उसके आदेशानुसार अन्य व्यक्ति को, या बिल के धारक को, मांग करने पर या निश्चित अवधि के बाद एक तय राशि का भुगतान करने का आदेश देता है। यह विक्रेता द्वारा क्रेता से लिखित स्वीकृति के रूप में प्राप्त होता है।
In simple words: विनिमय बिल एक कानूनी कागज है जो कहता है कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को या किसी और को एक तय समय पर एक खास रकम दे। यह बिना किसी शर्त का होता है और इस पर हस्ताक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: परिभाषा में 'लिखित', 'शर्तरहित', 'आदेश' और 'निश्चित व्यक्ति/वाहक को भुगतान' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 3. दर्शनी बिल और मियादी बिल में दो अन्तर बताइये।
Answer: दर्शनी बिल और मियादी बिल में दो मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
- दर्शनी बिल का भुगतान मांग किए जाने पर स्वीकारकर्ता द्वारा किया जाता है, यानी जब बिल प्रस्तुत हो। जबकि मियादी बिल का भुगतान एक निश्चित तिथि के बाद होता है, जो बिल की अवधि पूरी होने पर आती है।
- दर्शनी बिल में देय तिथि निकालते समय अनुग्रह दिवस नहीं जोड़े जाते हैं, क्योंकि भुगतान मांग पर होता है। इसके विपरीत, मियादी बिल की देय तिथि की गणना करते समय 3 दिन के अनुग्रह दिवस जोड़े जाते हैं।
In simple words: दर्शनी बिल का पैसा तुरंत मांगने पर मिल जाता है और उसमें अनुग्रह दिवस नहीं जुड़ते। मियादी बिल का पैसा एक तय तारीख को मिलता है और उसमें 3 दिन के अनुग्रह दिवस जुड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: भुगतान की विधि (मांग पर बनाम निश्चित तिथि) और अनुग्रह दिवसों का प्रावधान इन दोनों प्रकार के बिलों के बीच के मुख्य अंतर हैं।
Question 4. रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
Cash A/C Dr. 480
..... Ac Dr. 20
To B/R A/C .........
(Bill met before maturity)
Answer:
Cash A/C Dr. 480
Rebate A/C Dr. 20
To B/R A/C 500
(Bill met before maturity)
In simple words: इस प्रविष्टि में बिल का भुगतान समय से पहले होने पर नकद 480 रुपये मिले, 20 रुपये की छूट मिली और 500 रुपये का प्राप्य बिल बंद हो गया।
🎯 Exam Tip: समय से पहले भुगतान पर मिलने वाले बट्टे (rebate) को सही ढंग से डेबिट करना याद रखें।
Question 5. प्राप्य बिल बही का प्रारूप दीजिये।
Answer: प्राप्य बिल बही का प्रारूप (Format of Bills Receivable Book) में आमतौर पर ये कॉलम होते हैं: बिल संख्या, स्वीकृति की तिथि, किसकी ओर से प्राप्त हुआ, प्राप्तकर्ता का नाम, भुगतान का स्थान, अवधि, देय तिथि, जर्नल फोलियो, राशि, और टिप्पणी।
In simple words: प्राप्य बिल बही एक रजिस्टर है जिसमें हम उन सभी बिलों की जानकारी लिखते हैं जिनका पैसा हमें बाद में मिलना होता है, जैसे बिल नंबर, तारीख, रकम वगैरह।
🎯 Exam Tip: प्राप्य बिल बही के प्रारूप में सभी आवश्यक विवरण जैसे बिल संख्या, स्वीकारकर्ता का नाम, अवधि, और राशि के कॉलम शामिल करें।
Question 6. विनिमय बिल का प्रारूप दीजिये।
Answer: विनिमय बिल का प्रारूप (Format of Bill of Exchange) एक कानूनी दस्तावेज होता है जिसमें शीर्षक पर 'Bill of Exchange' लिखा होता है। इसमें लेखक का नाम और पता, स्वीकारकर्ता का नाम और पता, बिल की राशि, बिल की तारीख, देय तिथि, भुगतान की अवधि, भुगतान प्राप्तकर्ता का नाम, और लेखक व स्वीकारकर्ता के हस्ताक्षर शामिल होते हैं।
In simple words: विनिमय बिल एक खास तरह का कागज है जिस पर लिखने वाले का नाम, बिल की रकम, किसको देनी है, कब देनी है और सबके दस्तखत लिखे होते हैं।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल के प्रारूप में लेखक, स्वीकारकर्ता, प्राप्तकर्ता, राशि, तिथि और हस्ताक्षर जैसे सभी महत्वपूर्ण तत्व शामिल होने चाहिए।
Question 8. देय बिल बही का प्रारूप दीजिये।
Answer: देय बिल बही का प्रारूप (Format of Bills Payable Book) प्राप्य बिल बही के समान ही होता है, लेकिन यह उन बिलों का रिकॉर्ड रखती है जिनका भुगतान फर्म को करना होता है। इसमें आमतौर पर ये कॉलम होते हैं: बिल संख्या, तिथि (जब स्वीकार किया गया), किसके पक्ष में देय, स्वीकारकर्ता का नाम, भुगतान का स्थान, अवधि, देय तिथि, जर्नल फोलियो, राशि, और टिप्पणी।
In simple words: देय बिल बही एक रजिस्टर है जिसमें उन सभी बिलों की जानकारी लिखी जाती है जिनका पैसा हमें दूसरों को देना होता है।
🎯 Exam Tip: देय बिल बही का प्रारूप याद रखते समय, यह सुनिश्चित करें कि इसमें फर्म द्वारा देय बिलों से संबंधित सभी आवश्यक विवरण शामिल हों।
Question 9. प्राप्य बिल बही के योग की खतौनी किस खाते के किस पक्ष पर की जाती है ?
Answer: प्राप्य बिल बही के योग की खतौनी प्राप्य बिल खाते (Bills Receivable A/c) में डेबिट पक्ष की ओर विवरण के खाने में "To Sundries as per B/R Book" लिखकर की जाती है। इसका मतलब है कि प्राप्य बिल की कुल राशि प्राप्य बिल खाते में डेबिट कर दी जाती है।
In simple words: प्राप्य बिल बही का कुल जोड़ 'प्राप्य बिल खाता' में 'डेबिट' तरफ लिखा जाता है, 'To Sundries' के नाम से।
🎯 Exam Tip: सहायक बहियों के योग की खतौनी संबंधित मुख्य खातों में कैसे की जाती है, इस नियम को अच्छी तरह समझें।
Question 10. बेचान किये गये बिल के अनादरण पर बेचानकर्ता की पुस्तक में क्या प्रविष्टि होगी ?
Answer: बेचान किए गए बिल के अनादरण पर बेचानकर्ता (जिसने बिल का बेचान किया था) की पुस्तक में निम्नलिखित प्रविष्टि होगी:
Drawee's A/c Dr.
To Endorsee's A/C
(Being endorsed bill dishonoured)
In simple words: जब बेचान किया हुआ बिल अनादृत हो जाता है, तो बेचानकर्ता अपने देनदार (आहर्ती) का खाता डेबिट करता है और जिसे बिल बेचान किया था (बेचान प्राप्तकर्ता) का खाता क्रेडिट करता है।
🎯 Exam Tip: बेचान किए गए बिल के अनादरण की स्थिति में, बेचानकर्ता की पुस्तकों में देनदार को पुनः देनदार बनाना और बेचान प्राप्तकर्ता को क्रेडिट करना याद रखें।
Question 11. निकराई व्यय क्या है ? यह किसके द्वारा चुकाया जाता है ?
Answer: निकराई व्यय (Noting Charges) वह शुल्क होता है जो नोटेरी पब्लिक को तब दिया जाता है जब कोई बिल अनादृत हो जाता है। बिल का अनादरण होने पर, लेखक बिल को नोटेरी पब्लिक के पास भेजता है ताकि अनादरण का कानूनी प्रमाण मिल सके। यह प्रमाण न्यायालय में साक्ष्य के रूप में उपयोग होता है। यह व्यय शुरू में लेखक या बिल धारक द्वारा चुकाया जाता है, लेकिन अंततः इसे स्वीकारकर्ता (Drawee) द्वारा वहन किया जाता है।
In simple words: नोटिंग चार्ज वह फीस है जो बिल के अनादृत होने पर उसे कानूनी रूप से प्रमाणित करवाने के लिए दी जाती है। इसे पहले लेखक चुकाता है, पर अंत में बिल स्वीकार करने वाले को ही भरना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: निकराई व्यय का मुख्य उद्देश्य अनादरण का कानूनी प्रमाण प्राप्त करना है, और यद्यपि यह पहले लेखक द्वारा चुकाया जाता है, इसकी अंतिम जिम्मेदारी स्वीकारकर्ता की होती है।
Question 12. विदेशी विनिमय बिल किसे कहते हैं ?
Answer: विदेशी विनिमय बिल ऐसे बिल होते हैं जो एक देश में लिखे जाते हैं, लेकिन उनका भुगतान किसी दूसरे देश में होता है। ये बिल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उपयोग किए जाते हैं।
In simple words: जो बिल एक देश में लिखा जाए और उसका पैसा दूसरे देश में दिया जाए, उसे विदेशी विनिमय बिल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विदेशी विनिमय बिल की मुख्य पहचान यह है कि लिखने और भुगतान का स्थान अलग-अलग देश होते हैं।
Question 14. सीताराम ने 23.07.2016 को 6 माह की अवधि का एक बिल महेश पर लिखा। इस बिल की देय तिथि क्या होगी ?
Answer: बिल लिखने की तारीख: 23 जुलाई, 2016
अवधि: 6 माह
6 माह बाद की तारीख: 23 जनवरी, 2017
अनुग्रह दिवस (3 दिन) जोड़ने पर: 23 + 3 = 26 जनवरी, 2017
चूंकि 26 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश (गणतंत्र दिवस) होता है, इसलिए नियमानुसार देय तिथि एक दिन पूर्व, यानी 25 जनवरी, 2017 होगी।
अतः, देय तिथि: 25 जनवरी, 2017
In simple words: 23 जुलाई, 2016 को लिखे 6 माह के बिल की देय तिथि 26 जनवरी, 2017 बनती है (अनुग्रह दिवस जोड़ने के बाद)। लेकिन 26 जनवरी छुट्टी होने के कारण, बिल का भुगतान 25 जनवरी, 2017 को होगा।
🎯 Exam Tip: देय तिथि की गणना करते समय सार्वजनिक अवकाशों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि यह देय तिथि को बदल देता है।
Question 15. अवधि के आधार पर विनिमय बिल के प्रकार बताइये।
Answer: अवधि के आधार पर विनिमय बिल दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
1. दर्शनी बिल (Bill at Sight): इन बिलों का भुगतान मांगने पर तुरंत होता है, इनकी कोई निश्चित अवधि नहीं होती।
2. मियादी बिल (Usance Bill/Time Bill): इन बिलों का भुगतान एक निश्चित अवधि (जैसे 30 दिन, 60 दिन, 3 माह) पूरी होने के बाद होता है।
In simple words: बिल दो तरह के होते हैं: दर्शनी, जो तुरंत पैसे देते हैं; और मियादी, जो कुछ समय बाद पैसे देते हैं।
🎯 Exam Tip: दर्शनी और मियादी बिलों के बीच का अंतर याद रखें, खासकर भुगतान की अवधि के आधार पर।
Question 16. Bills for Collection A/c Dr.
To B/R A/c
यह प्रविष्टि व्यापारी द्वारा कब की जाती है ?
Answer: यह प्रविष्टि व्यापारी द्वारा अपनी बहियों में तब की जाती है जब वह किसी बिल को बैंक में संग्रहण (collection) के लिए जमा कराता है। इसका मतलब है कि व्यापारी ने बिल बैंक को दे दिया है ताकि बैंक देय तिथि पर इसका भुगतान प्राप्त कर सके।
In simple words: यह एंट्री तब की जाती है जब कोई व्यापारी अपना बिल बैंक को जमा कराता है ताकि बैंक बाद में उसका पैसा जमा कर सके।
🎯 Exam Tip: 'संग्रहण के लिए बिल' प्रविष्टि तब की जाती है जब बिल को भुगतान के लिए बैंक भेजा जाता है, न कि भुनाने के लिए।
RBSE Class 11 Accountancy Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. विनिमय बिल किसे कहते हैं तथा इसके लाभ क्या हैं ? बताइये।
Answer: भारतीय विनिमय साध्य विपत्र अधिनियम, 1881 की धारा 5 के अनुसार, विनिमय बिल एक शर्तरहित लिखित आदेश है। इसमें लेखक अपने हस्ताक्षर करके किसी व्यक्ति विशेष को यह आदेश देता है कि वह एक निश्चित धनराशि स्वयं उसे या उसके आदेशानुसार अन्य व्यक्ति को, या बिल के धारक को, मांग करने पर अथवा निश्चित अवधि के बाद भुगतान करे। विक्रेता क्रेता से लिखित वचन पर स्वीकृति लेता है, जिसे विनिमय विपत्र या बिल कहते हैं।
विनिमय बिल के लाभ:
1. तरलता: बिल धारक इसे बैंक से भुनाकर (discount) तुरंत नकदी प्राप्त कर सकता है।
2. हस्तांतरणीयता: बिल को ऋण के भुगतान के लिए आसानी से दूसरे व्यक्ति को बेचान (endorse) किया जा सकता है।
3. निश्चित भुगतान तिथि: बिल से भुगतान की तिथि निश्चित हो जाती है, जिससे लेनदार को बार-बार ग्राहक से भुगतान नहीं मांगना पड़ता।
4. योजना बनाने में सुविधा: बिलों से पता चलता है कि किस तारीख को कितना भुगतान प्राप्त होगा, जिससे भविष्य की योजनाएँ बनाने में मदद मिलती है।
5. विदेशी व्यापार में सहायक: विदेशी व्यापार में भी भुगतान के लिए विदेशी बिलों का उपयोग होता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
6. उधार क्रय की सुविधा: क्रेता को आगे भुगतान का बिल स्वीकार करने पर उधार पर खरीदारी करने में आसानी होती है।
7. कानूनी प्रमाण: बिल ऋण का लिखित प्रमाण होता है, जिससे कोई भी पक्ष भुगतान से मुकर नहीं सकता।
8. व्यापार वृद्धि में सहायक: बिल व्यापार में वृद्धि करता है, क्योंकि इसे आधार मानकर उधार पर बिक्री की जा सकती है।
9. साख का आधार: बिल साख (credit) के विस्तार का महत्वपूर्ण साधन है, जिसके बिना व्यापार की कल्पना मुश्किल है।
10. विस्तृत क्षेत्र: विनिमय बिलों से व्यापार का क्षेत्र बढ़ता है और व्यापार में आसानी आती है।
In simple words: विनिमय बिल एक कानूनी कागज है जो कहता है कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को एक तय समय पर एक खास रकम दे। यह बिना शर्त का होता है और इस पर हस्ताक्षर होते हैं। इसके कई फायदे हैं, जैसे कि आप इसे बैंक से भुनाकर तुरंत पैसे ले सकते हैं, इसे किसी और को देकर अपना कर्ज चुका सकते हैं, या यह सुनिश्चित करता है कि पैसा कब मिलेगा, जिससे व्यापार में योजना बनाना आसान होता है।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल की परिभाषा को उसके कानूनी प्रावधानों के साथ याद रखें और उसके विभिन्न लाभों को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें।
Question 2. विनिमय बिल तथा प्रतिज्ञा पत्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: विनिमय विपत्र (Bills of Exchange) और प्रतिज्ञा पत्र (Promissory Note) में अंतर को नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। सामान्यतया, उधार बिक्री होने पर विक्रेता चाहता है कि क्रेता द्वारा भुगतान करने का लिखित वचन दिया जाए ताकि भविष्य में विवादों से बचा जा सके। इसके लिए विक्रेता एक लिखित प्रलेख तैयार करता है जिसमें भुगतान की जाने वाली राशि, भुगतान-तिथि, भुगतान का स्थान आदि से संबंधित शर्तें लिखी जाती हैं। इस प्रलेख को जब क्रेता स्वीकार करके विक्रेता को लौटा देता है तब यह 'विनिमय विपत्र' कहलाता है।
प्रतिज्ञा पत्र (Promissory Note) एक शर्तरहित लिखित विलेख होता है जिसमें लेखक अपने हस्ताक्षर करके किसी निश्चित व्यक्ति को या उसके आदेशित व्यक्ति को या वाहक को एक निश्चित धनराशि एक निश्चित तिथि पर या निश्चित अवधि व्यतीत होने के बाद देने की प्रतिज्ञा करता है।
| विनिमय विपत्र (Bill of Exchange) | प्रतिज्ञा पत्र (Promissory Note) | |
|---|---|---|
| 1. प्रकृति | यह एक आदेश होता है। | यह एक प्रतिज्ञा होती है। |
| 2. स्वीकृति | इसमें स्वीकृति आवश्यक है। | इसमें स्वीकृति आवश्यक नहीं है। |
| 3. पक्ष | इसमें तीन पक्ष होते हैं:
| इसमें दो पक्ष होते हैं:
|
| 4. भुगतान प्राप्तकर्ता | इसमें लेखक भुगतान प्राप्तकर्ता भी बन सकता है। | इसमें लेखक भुगतान प्राप्तकर्ता नहीं हो सकता है। |
| 5. अनादरण की सूचना | इसमें अनादरण की सूचना देना आवश्यक है। | इसमें अनादरण की सूचना देना आवश्यक नहीं है। |
| 6. नोटिंग | इसमें अनादरण की दशा में नोटिंग करायी जा सकती है। | इसमें अनादरण की दशा में नोटिंग की आवश्यकता नहीं है। |
| 7. परिभाषा | इसकी परिभाषा विनिमय साध्य विलेख की धारा 5 में है। | इसकी परिभाषा विनिमय साध्य विलेख की धारा 4 में है। |
| 8. टिकट | दर्शनी विनिमय पत्र पर टिकट नहीं लगाया जाता है। | सभी प्रकार के प्रतिज्ञा पत्रों पर टिकट लगाया जाता है। |
| 9. प्रतियाँ | विदेशी विनिमय पत्र की तीन प्रतियाँ लिखी जाती हैं। | विदेशी प्रतिज्ञा पत्र की एक प्रति लिखी जाती है। |
| 10. आदेश/प्रतिज्ञा | यह एक लिखित आदेश है। | यह एक लिखित प्रतिज्ञा है। |
In simple words: विनिमय बिल एक आदेश है जिसमें तीन लोग शामिल होते हैं और इसे स्वीकार करना ज़रूरी है, जबकि प्रतिज्ञा पत्र एक वादा है जिसमें दो लोग शामिल होते हैं और इसे स्वीकार करना ज़रूरी नहीं है।
🎯 Exam Tip: विनिमय बिल और प्रतिज्ञा पत्र के बीच के सभी अंतरों को याद रखने के लिए एक तुलनात्मक तालिका का उपयोग करें, खासकर पक्षकारों, प्रकृति और स्वीकृति के आधार पर।
Question 4. देय तिथि की गणना करने की प्रक्रिया को उदाहरण सहित समझाइये।
Answer: बिल की परिपक्वता अथवा देय तिथि की गणना (Maturity or Due Date of a Bill) वह तारीख है जिस पर बिल का भुगतान देय होता है। इसकी गणना के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- यदि बिल दर्शनी (at sight) है, तो भुगतान के लिए प्रस्तुत करने की तिथि ही उसकी परिपक्वता तिथि होती है। इसमें कोई अतिरिक्त अवधि या अनुग्रह दिवस नहीं जोड़े जाते।
- यदि बिल मियादी/मुद्दती/सावधि (usance/time) है, तो उसकी निश्चित अवधि में 3 दिन के अनुग्रह दिवस (days of grace) जोड़कर देय तिथि ज्ञात की जाती है।
देय तिथि की गणना के संबंध में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- महीने का आशय कैलेंडर माह से है, जैसे जनवरी, फरवरी आदि।
- यदि देय तिथि के दिन अचानक अवकाश घोषित किया जाता है, तो ऐसे बिलों की देय तिथि आगामी दिन होगी।
- एक वर्ष में 365 दिन होते हैं, और हर चौथे वर्ष फरवरी 29 दिन की होती है जिसे अधिवर्ष (Leap year) कहते हैं।
उदाहरण: निम्न दशाओं में बिल की देय तिथि ज्ञात करें।
| बिल की तिथि (Date of Bill) | अवधि (Period) | देय तिथि (Due Date) |
|---|---|---|
| 13 मई, 2016 (13.05.16) | 3 माह | 16 अगस्त, 2016 |
| 23 नवम्बर, 2016 (23.11.16) | 2 माह | 25 जनवरी, 2017 |
| 14 मई, 2015 (14.05.15) | 90 दिन | 14 अगस्त, 2015 |
गणना:
1. पहले बिल की भुगतान तिथि: 13.05.16 + 3 माह = 13.08.16. इसमें 3 दिन अनुग्रह दिवस जोड़कर = 16.08.16 देय तिथि होगी।
2. दूसरे बिल की भुगतान तिथि: 23.11.16 + 2 माह = 23.01.17. इसमें 3 दिन अनुग्रह दिवस जोड़कर = 26.01.17. परन्तु 26 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण एक दिन पहले 25 जनवरी, 2017 को देय तिथि होगी।
3. तीसरे बिल की भुगतान तिथि: 14.05.15 से 90 दिन (अनुग्रह दिवस सहित) के लिए। मई माह के 17 दिन (14.5.15 को छोड़कर) + जून 30 + जुलाई 31 + अगस्त 12 = 90 दिन। इसमें 3 दिन अनुग्रह दिवस जोड़ने पर 15 अगस्त, 2015। परन्तु देय तिथि 15.8.15 को सार्वजनिक अवकाश के कारण एक दिन पूर्व 14.8.15 को देय तिथि होगी।
In simple words: बिल की देय तिथि निकालने के लिए उसकी अवधि में 3 दिन और जोड़ते हैं, लेकिन अगर उस दिन छुट्टी हो, तो एक दिन पहले का दिन देय तिथि मानी जाती है। दर्शनी बिलों में अनुग्रह दिवस नहीं जुड़ते।
🎯 Exam Tip: देय तिथि की गणना में अवधि की सही पहचान, अनुग्रह दिवसों का जोड़ना, और सार्वजनिक अवकाशों के नियमों को लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. बिल की स्वीकृति से आप क्या समझते हैं ? स्वीकृति के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख कीजिये।
Answer: बिल की स्वीकृति से आशय (Meaning of Acceptance of a Bill) है कि जब आहर्ता बिल का मसौदा तैयार करके आहर्ती (जिस पर बिल लिखा गया है) के पास भेजता है, और आहर्ती उस मसौदे पर 'स्वीकृति' शब्द लिखकर अपने हस्ताक्षर कर देता है, तो इसे बिल की स्वीकृति कहा जाता है। स्वीकृति के बाद ही यह मसौदा विनिमय बिल का रूप लेता है। जब तक आहर्ती बिल के मसौदे पर अपनी स्वीकृति नहीं देता, तब तक उसे विनिमय बिल नहीं कहा जा सकता। हालांकि, दर्शनी बिलों के लिए स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि उनका भुगतान प्रस्तुत करने पर ही करना होता है।
स्वीकृति के प्रकार:
1. सामान्य स्वीकृति (General Acceptance): जब आहर्ती बिल को बिना किसी शर्त के स्वीकार कर लेता है।
2. विशेष या मर्यादित स्वीकृति (Qualified Acceptance): जब आहर्ती बिल पर स्वीकृति देते समय कोई शर्त लगा देता है। इसे विशेष, सीमित या शर्त रहित स्वीकृति कहते हैं। उदाहरण के लिए – माल सुरक्षित प्राप्त होने पर भुगतान के लिए स्वीकृति, या 25,000 रुपये के बजाय 20,000 रुपये के लिए स्वीकृति।
In simple words: बिल की स्वीकृति का मतलब है कि जिस पर बिल लिखा गया है (आहर्ती), वह उस पर दस्तखत करके उसे चुकाने का वादा करता है। स्वीकृति दो तरह की होती है: सामान्य (बिना शर्त) और विशेष (शर्तों के साथ)।
🎯 Exam Tip: बिल की स्वीकृति की अवधारणा को उसके 'बिना शर्त' या 'शर्तों के साथ' होने के आधार पर वर्गीकृत करना याद रखें।
RBSE Class 11 Accountancy Chapter 10 आंकिक प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित दशाओं में बिलों की देय तिथि ज्ञात कीजिये। (Calculate the due dates of bills in the following cases)
| बिल की तिथि (Date of Bill) | अवधि (Period) |
|---|---|
| (i) 23 अक्टूबर, 2016 | 3 माह |
| (ii) 15 नवम्बर, 2016 | 60 दिन |
| (iii) 12 जुलाई, 2016 | 1 माह |
| (iv) 29 मई, 2016 | 2 माह |
| (v) 29 दिसम्बर, 2016 | 2 माह |
| (vi) 30 जून, 2016 | 3 माह |
Answer: बिलों की देय तिथियाँ इस प्रकार होंगी:
(i) 23 अक्टूबर, 2016 + 3 माह = 23 जनवरी, 2017. अनुग्रह दिवस जोड़ने पर = 26 जनवरी, 2017. चूंकि यह सार्वजनिक अवकाश है, देय तिथि होगी: 25 जनवरी, 2017।
(ii) 15 नवम्बर, 2016 + 60 दिन = (नवम्बर के 15 दिन + दिसम्बर के 31 दिन + जनवरी के 14 दिन) = 14 जनवरी, 2017. अनुग्रह दिवस जोड़ने पर = 17 जनवरी, 2017।
(iii) 12 जुलाई, 2016 + 1 माह = 12 अगस्त, 2016. अनुग्रह दिवस जोड़ने पर = 15 अगस्त, 2016. चूंकि यह सार्वजनिक अवकाश है, देय तिथि होगी: 14 अगस्त, 2016।
(iv) 29 मई, 2016 + 2 माह = 29 जुलाई, 2016. अनुग्रह दिवस जोड़ने पर = 1 अगस्त, 2016।
(v) 29 दिसम्बर, 2016 + 2 माह = 29 फरवरी, 2017. (2016 अधिवर्ष नहीं है, इसलिए फरवरी में 28 दिन) = 28 फरवरी, 2017. अनुग्रह दिवस जोड़ने पर = 3 मार्च, 2017।
(vi) 30 जून, 2016 + 3 माह = 30 सितम्बर, 2016. अनुग्रह दिवस जोड़ने पर = 3 अक्टूबर, 2016।
In simple words: बिल की अंतिम भुगतान तारीख जानने के लिए, बिल की अवधि में 3 दिन और जोड़ते हैं। अगर आखिरी दिन छुट्टी हुई तो उससे एक दिन पहले का दिन अंतिम तारीख होती है।
🎯 Exam Tip: महीने के दिनों की संख्या और अधिवर्ष (leap year) के साथ-साथ सार्वजनिक अवकाशों का भी ध्यान रखें, क्योंकि ये सभी देय तिथि को प्रभावित करते हैं।
Question 2. 1 जनवरी, 2017 को राम ने श्याम को Rs 10,000 का माल उधार में बेचा तथा श्याम पर एक दो माह का बिल लिखा, जिसे श्याम ने स्वीकार कर लिया। देय तिथि पर बिल का भुगतान हो गया। दोनों पक्षों की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिये।
(On 1st Jan. 2017 Ram sold goods on credit to Shyam for Rs 10,000 and drew a bill upon Shyam for two months which was accepted by Shyam on due date met the bill. Give Journal Entries in the books of both the parties.)
Answer:
**In the Books of Ram (लेखक)**
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| 2017 Jan. 1 | Shyam A/c Dr. To Sales A/c (Being goods sold to Shyam on credit) | 10,000 | 10,000 | |
| Jan. 1 | Bills Receivable A/c Dr. To Shyam A/c (Being acceptance received from Shyam for 2 months) | 10,000 | 10,000 | |
| March 4 | Cash A/c Dr. To Bills Receivable A/c (Being received payment of bill on due date) | 10,000 | 10,000 | |
| Grand Total | 30,000 | 30,000 |
**In the Books of Shyam (स्वीकारक)**
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| 2017 Jan. 1 | Purchase A/c Dr. To Ram's A/c (Being goods purchased from Ram on credit) | 10,000 | 10,000 | |
| Jan. 1 | Ram's A/c Dr. To Bills Payable A/c (Being acceptance given to Ram for 2 months) | 10,000 | 10,000 | |
| March 4 | Bills Payable A/c Dr. To Cash A/c (Being bill met on due date) | 10,000 | 10,000 | |
| Grand Total | 30,000 | 30,000 |
In simple words: राम ने श्याम को उधार में माल बेचा और श्याम ने दो महीने का बिल स्वीकार किया। दोनों ने अपनी किताबों में इसे दर्ज किया। बिल की देय तिथि 1 जनवरी + 2 माह = 1 मार्च। 3 अनुग्रह दिवस जोड़ने पर 4 मार्च होगी। इस दिन भुगतान हो गया। राम ने नकद पैसा मिलने पर बिल बंद कर दिया, और श्याम ने पैसा चुकाने पर अपना बिल बंद कर दिया।
🎯 Exam Tip: जर्नल प्रविष्टियों में प्रत्येक लेन-देन के लिए डेबिट और क्रेडिट दोनों पक्षों को सही ढंग से पहचानना और विवरण लिखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 1 अप्रैल, 2016 को रवि ने Rs 8000 का तीन माह का विपत्र मंगल पर लिखा जो उसने स्वीकार कर लिया। रवि ने विपत्र को अपने बैंक से 4 अप्रैल, 2016 की 5% वार्षिक बट्टे की दर से भुना लिया। भुगतान तिथि को बिल चुका दिया गया। दोनों । पक्षों की जर्नल में प्रविष्टियाँ कीजिए।
Answer:
In the Books of Ravi
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Apr. 1 | Bills Receivable A/c Dr. To Mangal's A/c (Being acceptance received) | 8,000 | ||
| 8,000 | ||||
| Apr. 4 | Bank A/c Dr. Discount A/c Dr. To B/R A/c (Being bill discounted from bank) | 7,900 100 | ||
| 8,000 | ||||
| Grand Total | 16,000 | 16,000 |
In the Books of Mangal
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2017 Jan. 1 | Purchase A/c Dr. To Ram's A/c (Being goods purchased from Ram) | 10,000 | ||
| 10,000 | ||||
| Jan. 1 | Ram's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 10,000 | ||
| 10,000 | ||||
| Mar. 4 | B/P A/c Dr. To Cash A/c (Being bill met on due date) | 10,000 | ||
| 10,000 | ||||
| Grand Total | 30,000 | 30,000 |
In simple words: रवि ने मंगल को बिल लिखा और बैंक से भुना लिया। ये प्रविष्टियाँ रवि और मंगल दोनों की किताबों में बिल के स्वीकार होने, भुनाने और भुगतान होने पर की गई हैं।
🎯 Exam Tip: जर्नल प्रविष्टियाँ करते समय, हर लेनदेन को सही खाते में डेबिट और क्रेडिट करना महत्वपूर्ण है, साथ ही स्पष्ट विवरण भी देना चाहिए।
Question 4. पारस 15 मई, 2016 को अशोक पर उसके द्वारा देय Rs 60,000 के लिये एक 4 माह का बिल लिखता है। इसे अशोक स्वीकार करके लौटा देता है। 20 जून, 2016 को पारस इस बिल को अपने ऋण के भुगतान में इन्द्र को बेचान कर देता है। देय तिथि पर बिल का भुगतान हो जाता है। पारस, अशोक तथा इन्द्र की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिए।
Answer:
In the Books of Paras
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 May 15 | Bills Receivable A/c Dr. To Ashok's A/c (Being acceptance received) | 60,000 | ||
| 60,000 | ||||
| June 20 | Indra's A/c Dr. To B/R A/c (Being bill endorsed to Indra) | 60,000 | ||
| 60,000 | ||||
| Grand Total | 1,20,000 | 1,20,000 |
Journal of Ashok
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 May 15 | Paras's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 60,000 | ||
| 60,000 | ||||
| Sep. 18 | B/P A/c Dr. To Cash A/c (Being bill met on due date) | 60,000 | ||
| 60,000 | ||||
| Grand Total | 1,20,000 | 1,20,000 |
In the Books of Indra
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 June 20 | B/R A/c Dr. To Paras's A/c (Being bill received from Paras) | 60,000 | ||
| 60,000 | ||||
| Sep. 18 | Cash A/c Dr. To B/R A/c (Being payment received of bill) | 60,000 | ||
| 60,000 | ||||
| Grand Total | 1,20,000 | 1,20,000 |
In simple words: पारस ने अशोक पर बिल लिखा, जिसे अशोक ने स्वीकार किया। पारस ने बाद में यह बिल इन्द्र को बेचान कर दिया। नियत तारीख पर बिल का भुगतान हो गया। ये प्रविष्टियाँ तीनों पक्षों की किताबों में की गई हैं।
🎯 Exam Tip: जब कोई बिल बेचान किया जाता है, तो मूल लेखक की पुस्तकों में बेचान की प्रविष्टि करना और प्राप्तकर्ता की पुस्तकों में बिल की प्राप्ति और भुगतान की प्रविष्टियाँ करना न भूलें।
Question 5. 20 जनवरी, 2016 को अ Rs 3,000 से बे का ऋणी है। वह इस रकम के लिये बे द्वारा लिखे गये 3 माह की अवधि के बिल को स्वीकार कर लेता है, वे उस बिल को संग्रह के लिये अपने बैंक में जमा करा देता है। निश्चित तिथि पर बिल का भुगतान हो जाता है। अ तथा ब की बहियों में जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिए।
Answer:
In the Books of A
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Jan. 20 | B/R A/c Dr. To A's A/c (Being acceptance received) | 3,000 | ||
| 3,000 | ||||
| Jan. 20 | Bill for Collection A/c Dr. To B/R A/c (Being bill sent to bank for collection) | 3,000 | ||
| 3,000 | ||||
| Grand Total | 6,000 | 6,000 |
In the Books of B
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Jan. 20 | B's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 3,000 | ||
| 3,000 | ||||
| Apr. 23 | B/P A/c Dr. To Bank A/c (Being bill met on due date to bank) | 3,000 | ||
| 3,000 | ||||
| Grand Total | 6,000 | 6,000 |
In simple words: 'अ' को 'ब' से बिल मिला, जिसे 'अ' ने बैंक में संग्रह के लिए भेज दिया। नियत तिथि पर बिल का भुगतान हो गया। ये प्रविष्टियाँ दोनों पक्षों की किताबों में बिल स्वीकार करने और भुगतान के लिए की गई हैं।
🎯 Exam Tip: बैंक फॉर कलेक्शन के मामलों में, बिल को बैंक में भेजने की प्रविष्टि और भुगतान प्राप्त होने पर की जाने वाली प्रविष्टियों को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 6. एक्स ने Rs 8,000 का एक बिल वाई पर लिखा जिसे वाई ने स्वीकार करके एक्स को लौटा दिया। एक्स की पुस्तकों में की जाने वाली प्रविष्टियाँ दीजिये यदि एक्स
(i) बिल को अपने पास रखता है तथा देय तिथि पर भुगतान प्राप्त करता है अथवा
(ii) वह इसे अपने बैंक से Rs 7,500 में भुना लेता है अथवा
(iii) अपने किसी लेनदार जेड को बेचान कर देता है।
Answer:
एक्स की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टि
(i) बिल को अपने पास रखता है तथा देय तिथि पर भुगतान प्राप्त करता है
(1) बिल स्वीकार करने की (प्राप्ति)
B/R A/c Dr. 8,000
To Y's A/c 8,000
(Being acceptance received)
(2) भुगतान देय तिथि पर प्राप्त होने पर
Cash A/c Dr. 8,000
To B/R A/c 8,000
(Being payment received)
(ii) वह इसे अपने बैंक से भुना लेता है-
(1) बिल स्वीकार करने की (प्राप्ति)
B/R A/c Dr. 8,000
To Y's A/c 8,000
(Being acceptance received)
(2) भुनाने पर
Bank A/C Dr. 7,500
Discount A/C Dr. 500
To B/R A/c 8,000
(Being bills discounted from Bank)
(iii) बेचान करने पर
(1) स्वीकृति पर
B/R A/c Dr. 8,000
To Y's A/c 8,000
(Being acceptance received)
(2) बेचान करने पर
Z's A/c Dr. 8,000
To B/R A/c 8,000
(Being bill of Y endorsed to Z)
अनादरण की स्थिति में एक्स (लेखक) की पुस्तकों में प्रविष्टि
(i) जब बिल लेखक अपने पास रखता है
Y's A/C Dr. 8,000
To B/R A/C 8,000
(Being bill dishonoured)
(ii) जब बिल बैंक से बट्टे पर भुना लिया जाता है।
Y's A/C Dr. 8,000
To Bank A/C 8,000
(Being discounted bill dishonoured)
(iii) जब बिल का बेचान Z को कर दिया हो।
Y's A/C Dr. 8,000
To Z's A/C 8,000
(Being bill Endorsed to Z dishonoured)
स्वीकारकर्ता अर्थात् Y की पुस्तकों में प्रविष्टि (सभी परिस्थितियों में)
(i) बिल स्वीकार करने पर
X's A/C Dr. 8,000
To B/P A/c 8,000
(Being acceptance given)
(ii) बिल अनादृत होने पर
B/P A/C Dr. 8,000
To X's A/C 8,000
(Being bill dishonoured)
In simple words: एक्स ने वाई पर बिल लिखा। अगर एक्स इसे अपने पास रखता है, बैंक से भुनाता है, या किसी और को बेचान करता है, तो हर स्थिति के लिए अलग जर्नल प्रविष्टियाँ की जाती हैं। अनादरण के मामले में भी अलग प्रविष्टियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: बिल के अनादरण की स्थिति में, संबंधित पक्षों के खातों को ठीक से डेबिट और क्रेडिट करना सीखें, खासकर जब बिल को डिस्काउंट किया गया हो या बेचान किया गया हो।
Question 8. प्रिया ने 20 अक्टूबर, 2016 को रितु को Rs 2,000 का माल बेचा तथा इसके लिये रितु पर एक चार माह का बिल लिखा, जिसे रितु ने
rebate at 12% per annum. Pass the Journal Entries in the books of Priya and Ritu.
Answer:
In the Books of Priya
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| Oct. 20 | Ritu's A/c Dr. To Sales A/c (Being goods sold to Ritu) | 2,000 | ||
| 2,000 | ||||
| Oct. 20 | B/R A/c Dr. To Ritu's A/c (Being acceptance received) | 2,000 | ||
| 2,000 | ||||
| Dec. 23 | Cash A/c Dr. Rebate A/c Dr. To B/R A/c (Being payment received on pre-maturity) | 1,960 40 | ||
| 2,000 | ||||
| Grand Total | 6,000 | 6,000 |
In the Books of Ritu
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 20 | Purchase A/c Dr. To Priya's A/c (Being goods purchased from Priya) | 2,000 | ||
| 2,000 | ||||
| Oct. 20 | Priya's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 2,000 | ||
| 2,000 | ||||
| Dec. 23 | B/P A/c Dr. To Cash A/c To Rebate A/c (Being bill not on pre-maturity and rebate received) | 2,000 | ||
| 1,960 40 | ||||
| Grand Total | 6,000 | 6,000 |
In simple words: प्रिया ने रितु को माल बेचा और उस पर बिल लिखा। रितु ने बिल स्वीकार किया और नियत तारीख से पहले भुगतान कर दिया, जिस पर उसे छूट मिली। ये प्रविष्टियाँ दोनों पक्षों की किताबों में बिक्री, बिल की स्वीकृति और समय से पहले भुगतान के लिए की गई हैं।
🎯 Exam Tip: समय से पहले भुगतान पर मिलने वाली छूट (Rebate) को सही खाते में दर्ज करना न भूलें, यह एक व्यय या आय हो सकती है।
Question 9. 15 दिसम्बर, 2016 को राजू नमन पर Rs 50,000 का तीन माह के लिए एक बिल लिखता है तथा नमन उसे स्वीकृत करके वापस लौटा देता है । देय तिथि पर नमन बिल का अनादरण कर देता है। इन व्यवहारों को राजू तथा नमन की पुस्तकों में दर्ज कीजिए।
Answer:
In the Books of Raju
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Dec. 15 | B/R A/c Dr. To Naman's A/c (Being acceptance received) | 50,000 | ||
| 50,000 | ||||
| 2017 Mar. 18 | Naman's A/c Dr. To B/R A/c (Being bill dishonoured) | 50,000 | ||
| 50,000 | ||||
| Total | 1,00,000 | 1,00,000 |
In the Books of Naman
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Dec. 15 | Raju's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 50,000 | ||
| 50,000 | ||||
| 2017 Mar. 18 | B/P A/c Dr. To Raju's A/c (Being bill dishonoured on due date) | 50,000 | ||
| 50,000 | ||||
| Total | 1,00,000 | 1,00,000 |
In simple words: राजू ने नमन पर बिल लिखा, जिसे नमन ने स्वीकार किया लेकिन देय तिथि पर भुगतान नहीं किया। ये प्रविष्टियाँ राजू और नमन दोनों की किताबों में बिल स्वीकार करने और उसके अनादरण के लिए की गई हैं।
🎯 Exam Tip: बिल के अनादरण की स्थिति में, स्वीकारकर्ता (नमन) के खाते को फिर से डेबिट किया जाता है और प्राप्य बिल या देय बिल खाते को क्रेडिट किया जाता है।
Question 10. 20 अगस्त, 2016 को अंकित ने प्रकाश को Rs 9,000 का माल बेचा तथा उससे एक 4 माह का बिल स्वीकृत कराया। 28 अगस्त, 2016 को अंकित ने बिल शिव को बेचान कर दिया। देय तिथि पर बिल अप्रतिष्ठित हो गया तथा शिव ने निकराई व्यय के Rs 100 चुकाये। अंकित, प्रकाश तथा शिव की जर्नल में व्यवहारों को दर्ज कीजिए।
Answer:
In the Books of Ankit
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| Aug. 20 | Prakash's A/c Dr. To Sales A/c (Being goods sold to Prakash) | 9,000 | ||
| 9,000 | ||||
| Aug. 20 | B/R A/c Dr. To Prakash's A/c (Being acceptance received) | 9,000 | ||
| 9,000 | ||||
| Aug. 28 | Shiv's A/c Dr. To B/R A/c (Being bill endorsed to Shiv) | 9,000 | ||
| 9,000 | ||||
| Dec. 23 | Prakash's A/c Dr. To Shiv's A/c (Being bill dishonoured & noting charges paid by Shiv) | 9,100 | ||
| 9,100 | ||||
| Grand Total | 36,100 | 36,100 |
Journal of Shiv
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Aug. 28 | B/R A/c Dr. To Ankit's A/c (Being bill received from Ankit) | 9,000 | ||
| 9,000 | ||||
| Dec. 23 | Ankit's A/c Dr. Noting Charges A/c Dr. To B/R A/c To Cash A/c (Being bills dishonoured and noting charges paid) | 9,000 100 | ||
| 9,000 100 | ||||
| Grand Total | 18,100 | 18,100 |
In the Books of Prakash
Journal Entries
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Aug. 20 | Purchase A/c Dr. To Ankit's A/c (Being goods purchased from Ankit) | 9,000 | ||
| 9,000 | ||||
| Aug. 20 | Ankit's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 9,000 | ||
| 9,000 | ||||
| Dec. 23 | B/P A/c Dr. Noting Charges A/c Dr. To Ankit's A/c (Being bills dishonoured and noting charges due) | 9,000 100 | ||
| 9,100 | ||||
| Grand Total | 27,100 | 27,100 |
In simple words: अंकित ने प्रकाश को माल बेचा और उस पर बिल लिखा। अंकित ने बिल शिव को बेचान कर दिया। नियत तारीख पर बिल का अनादरण हो गया और शिव ने नोटिंग चार्ज का भुगतान किया। ये प्रविष्टियाँ अंकित, प्रकाश और शिव तीनों की किताबों में की गई हैं।
🎯 Exam Tip: बिल के बेचान के बाद अनादरण होने पर, नोटिंग चार्ज सहित पूरी राशि के लिए मूल देनदार के खाते को फिर से डेबिट किया जाता है।
Question 11. 1 जनवरी, 2016 को रमेश ने गणेश को Rs 70,000 का माल बेची तथा गणेश ने इसके लिए एक 3 माह का बिल स्वीकृत किया। रमेश ने 4 जनवरी, 2016 को इस बिल को 12% वार्षिक बट्टे पर बैंक से भुना लिया। देय तिथि पर बिल का आदर नहीं हुआ तथा बैंक ने Rs 800 प्रमाणन प्रभार के चुकाये । इन व्यवहारों को रमेश तथा गणेश की जर्नल में दर्ज कीजिए।
Answer:
Journal of Ramesh
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Jan. 1 | Ganesh's A/c Dr. To Sales A/c (Being goods sold to Ganesh) | 70,000 | ||
| 70,000 | ||||
| Jan. 1 | B/R A/c Dr. To Ganesh's A/c (Being acceptance received) | 70,000 | ||
| 70,000 | ||||
| Jan. 4 | Bank A/c Dr. Discount A/c Dr. To B/R A/c (Being bill discounted) | 68,150 1,850 | ||
| 70,000 | ||||
| Apr. 4 | Ganesh's A/c Dr. To Bank A/c (Being bill dishonoured & noting charges) | 70,800 | ||
| 70,800 | ||||
| Grand Total | 2,79,000 | 2,79,000 |
In simple words: रमेश ने गणेश को माल बेचा, बिल लिखा और उसे बैंक से भुना लिया। नियत तारीख पर गणेश ने बिल का भुगतान नहीं किया, जिससे बिल अनादृत हो गया और बैंक ने नोटिंग चार्ज लिया। ये प्रविष्टियाँ रमेश और गणेश दोनों की किताबों में दर्ज की जाती हैं।
🎯 Exam Tip: जब कोई बिल बैंक से डिस्काउंट कराया जाता है और फिर अनादृत हो जाता है, तो बैंक नोटिंग चार्ज सहित पूरी राशि के लिए मूल लेखक (रमेश) को डेबिट करता है।
Question 12. 1 जून, 2016 को सावन ने जगने को Rs 15,000 का माल बेचा तथा उस पर 4 माह एक बिल लिखा। जगन ने इसे स्वीकार करके सावन को लौटा दिया। 1 अक्टूबर, 2016 को जगन ने देय तिथि पर बिल के भुगतान की असमर्थता प्रकट की तथा Rs 500 ब्याज के शामिल करते हुए एक तीन माह का नया बिल लिखने का आग्रह किया, जिसे सावन ने सहमति दे दी तथा जगन से Rs 15,500 की नई स्वीकृति ले ली। देय तिथि तक बिल का भुगतान हो गया। सावन व जगन की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिए।
Answer:
Journal of Sawan
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 June 1 | Jagan's A/c Dr. To Sales A/c (Being goods sold to Jagan) | 15,000 | ||
| 15,000 | ||||
| June 1 | B/R A/c Dr. To Jagan's A/c (Being acceptance received) | 15,000 | ||
| 15,000 | ||||
| Oct. 1 | Jagan's A/c Dr. To B/R A/c (Being bill dishonoured) | 15,000 | ||
| 15,000 | ||||
| Oct. 1 | Jagan's A/c Dr. To Interest A/c (interest due of bill) | 500 | ||
| 500 | ||||
| Oct. 1 | B/R A/c Dr. To Jagan's A/c (Being new acceptance received with interest) | 15,500 | ||
| 15,500 | ||||
| 2017 Jan. 4 | Cash A/c Dr. To B/R A/c (Payment received of new bill) | 15,500 | ||
| 15,500 | ||||
| Total | 76,500 | 76,500 |
Journal of Jagan
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| 2016 June 1 | Purchase A/c Dr. To Sawan's A/c (Being goods purchased from Sawan) | 15,000 | ||
| 15,000 | ||||
| June 1 | Sawan's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given) | 15,000 | ||
| 15,000 | ||||
| Oct. 1 | B/P A/c Dr. To Sawan's A/c (Being old bill cancelled) | 15,000 | ||
| 15,000 | ||||
| Oct. 1 | Interest A/c Dr. To Sawan's A/c (Being interest on renewal due) | 500 | ||
| 500 | ||||
| Oct. 1 | Sawan's A/c Dr. To B/P A/c (Being new acceptance given with Interest) | 15,500 | ||
| 15,500 | ||||
| 2017 Jan. 4 | B/P A/c Dr. To Cash A/c (Payment met of new bill on due date) | 15,500 | ||
| 15,500 | ||||
| Total | 76,500 | 76,500 |
In simple words: सावन ने जगन को माल बेचा और बिल लिखा। जब जगन भुगतान नहीं कर पाया, तो बिल अनादृत हो गया। बाद में, ब्याज सहित एक नया बिल स्वीकार किया गया और उसका भुगतान हो गया। ये प्रविष्टियाँ सावन और जगन दोनों की किताबों में दर्ज की गई हैं।
🎯 Exam Tip: बिल के अनादरण और नवीनीकरण के मामलों में, पुराने बिल को रद्द करने और नए बिल (ब्याज सहित) को स्वीकार करने की प्रविष्टियों को सही ढंग से रिकॉर्ड करना महत्वपूर्ण है।
Question 13. (Vikas sold goods to Akash for Rs 16,000 13th June 2014 for which he later accepted 4 bills of Rs 4,000 each payable after 2 month, 3 months, 6 months and 8 months respectively. Vikas retained the first bill till maturity. The second bill was sent to bank for collection. The third bill was endorsed in favour of Mahesh. The fourth bill was discounted with his banker at 12% per annum. The first bill was met on the due date. As regard the second bill the drawee approached Vikas on 23th September, 2014, paid him Rs 3,000 and requested him to draw a fresh bill for the balance together with interest at 12% per annum. The term of this bill was 3 months and the bill was duly paid on maturity as had been the third bill before it. Akash was declared insolvent on 31st December, 2016 and Vikas's bankers accordingly debited Vikas on that day in respect of the fourth bill. Only 50 paise in one rupee could be recovered from Akash's estate on 15th January, 2015. Make necessary Journal entries in the books of Vikas and Akash.)
Answer:
In the Books of Vikas
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| June 13 | Akash's A/c Dr. To Sales A/c (Being goods sold to Akash) | 16,000 | 16,000 | |
| June 13 | B/R A/c Dr. To Akash's A/c (Being four bills for Rs 4,000 each received from Akash payable 2, 3, 6 and 8 months after date) | 16,000 | 16,000 | |
| June 13 | Bills for Collection A/c Dr. To B/R A/c (Being second bill payable 3 months after date sent to bank for collection) | 4,000 | 4,000 | |
| June 13 | Mahesh's A/c Dr. To B/R A/c (Third IIIrd bill endorsed to Mahesh) | 4,000 | 4,000 | |
| Aug. 16 | Cash A/c Dr. To B/R A/c (Being amount received for first bill) | 4,000 | 4,000 | |
| Sep. 23 | Akash's A/c Dr. To Bills for Collection A/c (Being second bill withdrew before due date on Sep. 16) | 4,000 | 4,000 | |
| Sep. 23 | Akash's A/c Dr. To Interest A/c (Being interest due on Rs 1000 @ 12% for 3 months for the new bill to be accepted) | 30 | 30 | |
| Sep. 23 | Cash A/c Dr. B/R A/c Dr. To Shyam's A/c (Being receipt from Shyam of Rs 3,000 in cash and a bill for Rs 1,030) | 3,000 1,030 | 4,030 | |
| 2017 Jan. 15 | Cash A/c Dr. Bad Debts A/c Dr. To Akash's A/c (Being 50% of the amount from Akash written off as bad debts and the balance received) | 2,000 2,000 | 4,000 | |
| Grand Total | 65,090 | 65,090 |
In the Books of Akash
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| June 13 | Purchase A/c Dr. To Vikas's A/c (Being goods purchased from Vikas) | 16,000 | 16,000 | |
| June 13 | Vikas's A/c Dr. To B/P A/c (Being four bills payable of Rs 4,000 each issued to Ram payable 2, 3, 6, 8 month after date) | 16,000 | 16,000 | |
| Aug. 16 | B/P A/c Dr. To Cash A/c (Being first bill payable met on the due date) | 4,000 | 4,000 | |
| Sep. 23 | B/P A/c Dr. To Vikas's A/c (Being second bill withdrew for cancellation) | 4,000 | 4,000 | |
| Sep. 23 | Vikas's A/c Dr. Interest A/c Dr. To Cash A/c To B/P A/c (Being amount paid and fresh bill issued with interest to Ram in lieu of Second bill) | 4,000 30 | 3,000 1,030 | |
| Dec. 16 | B/P A/c Dr. To Cash A/c (Being Third Bill paid) | 4,000 | 4,000 | |
| Dec. 26 | B/P A/c Dr. To Cash A/c (Being Fifth Bill paid) | 1,030 | 1,030 | |
| Dec. 31 | B/P A/c Dr. To Vikas'a A/c (Being fourth bill treated cancelled due to insolvency) | 4,000 | 4,000 | |
| 2017 Jan. 15 | Ram's A/c Dr. To Cash A/c To Deficiency a/c (Being paid 50 paisa in a rupee in full settlement) | 4,000 | 2,000 2,000 | |
| Total | 56,030 | 56,030 |
In simple words: This problem involves a series of transactions related to bills of exchange, including sales, bill acceptance, discounting, collection, endorsement, dishonour, renewal with interest, and eventual insolvency and partial recovery. Each step requires a separate journal entry in the books of both the drawer (Vikas) and the drawee (Akash).
🎯 Exam Tip: When dealing with multiple bills and complex scenarios like insolvency, it's crucial to track each bill individually and record every event (sale, acceptance, discounting, collection, endorsement, dishonour, renewal, part payment, bad debts) with accurate journal entries for all involved parties.
Question 14. (A sold goods to the value of Rs 2,000 to B taking a bill at three months for the amount. A discounted the bill at 5% p.a. with his bank. On maturity the bill was returned by the bank dishonoured with Rs 5 as noting charges. B paid Rs 500 and the noting charges and gave another bill at three months for Rs 1,500 together with 5% p.a. interest. Before maturity he became bankrupt and ultimately paid to bis creditors 75 paise in one rupee. Pass Entries in the books of A and B and prepare B's Account in the books of A.)
Answer:
Journal of A
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| B/R A/c Dr. To B's A/c (Being acceptance received) | 2,000 | 2,000 | ||
| Bank A/c Dr. Discount A/c Dr. To B/R A/c (Being bills discounted @ 5% per annum) | 1,975 25 | 2,000 | ||
| B's A/c Dr. To Bank A/c (Being On due date bill dishonoured and noting charges paid by bank) | 2,005 | 2,005 | ||
| Cash A/c Dr. To B's A/c (Being cash received from B with noting charges) | 505 | 505 | ||
| B's A/c Dr. To Interest A/c (Being interest charges on new bill @ 5% per annum) | 19 | 19 | ||
| B/R A/c Dr. To B's A/c (Being new acceptance with interest received) | 1,519 | 1,519 | ||
| B's A/c Dr. To B/R A/c (Being new bill accepted By B dishonoured on his becoming insolvent) | 1,519 | 1,519 | ||
| Cash A/c Dr. Bad Debts A/c Dr. To B's A/c (Being 75 paise paid in a rupee in full settlement) | 1,139.25 379.75 | 1,519 | ||
| Grand Total |
Journal of B
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| Purchase A/c Dr. To A's A/c (Being goods purchased from A) | 2,000 | 2,000 | ||
| A's A/c Dr. To B/P A/c (Being acceptance given to A) | 2,000 | 2,000 | ||
| B/P A/c Dr. Noting Charges A/c Dr. To A's A/c (Being on due date bill dishonoured and Rs 5 noting charges due) | 2,000 5 | 2,005 | ||
| A's A/c Dr. To Cash A/c (Being cash paid to A) | 505 | 505 | ||
| Interest A/c Dr. To A's A/c (Being interest payable on new bill) | 19 | 19 | ||
| A's A/c Dr. To B/P A/c (Being new bill accepted in favour of A) | 1,519 | 1,519 | ||
| B/P A/c Dr. To A's A/c (Being new bill dishonoured on B's insolvency) | 1,519 | 1,519 | ||
| A's A/c Dr. To Cash A/c To Deficiency A/c (Being final payment of 75 paise in a rupee to A) | 1,519 | 1,139.25 379.75 | ||
| Grand Total |
In the Books of A
B's Account
| Dr. | Particulars | J.F. | Amount Rs | Date | Particulars | J.F. | Amount Rs | Cr. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Sales A/c | 2,000 | By B/R A/c | 2,000 | |||||
| To Bank A/c | 2,005 | By Cash A/c | 505 | |||||
| To Interest A/c | 19 | By B/R A/c | 1,519 | |||||
| To B/R A/c | 1,519 | By Cash A/c | 1,139.25 | |||||
| By Bad Debts A/c | 379.75 | |||||||
| Total | 5,543 | Total | 5,543 |
In simple words: This problem involves a seller (A) and a buyer (B) with a bill of exchange. It covers discounting the bill, its dishonour, part payment, renewal with interest, and finally, the buyer's insolvency leading to a partial recovery of the amount owed. Each step requires specific journal entries in both parties' books.
🎯 Exam Tip: When reconstructing a sequence of transactions, always account for each event chronologically. Pay close attention to interest, discount, and noting charges, and correctly apply insolvency rules for partial recovery.
Question 15. Journalise the following transactions relating to bill in the books of Dalbeer,
(a) Dalveer's acceptance to Kumar for Rs 8000 was discharged by an immediate cash payment Rs 3000 and an acceptance of a fresh bill for the balance plus Rs 50 interest.
(b) Kamlesh's acceptance to Basu for Rs 6000 was discharged by an immediate cash payment at a discount of Rs 200.
(c) Dalveer's acceptance to Sem for Rs 5,000 was discharged by Basu acceptance to Dalbeer for a similar amount.
(d) An acceptance received by Dalveer for Rs 9,000 which was sent to the bank for collection was returned by the bank as being dishonoured,
(e) Suresh's acceptance to Dalveer for Rs 10,000 which was endorsed to Naresh was dishonoured by non-payment.
Answer:
Journal of Dalveer
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. Rs | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|
| Kumar's A/c Dr. To Cash A/c Interest A/c Dr. To B/P A/c (Being bill discharged) | 3,000 5,000 50 | 3,000 5,050 | ||
| B/P A/c Dr. To Bills Receivable A/c To Discount A/c (Being acceptance in favour of Sem met by endorsing Basu) | 6,000 | 5,800 200 | ||
| Bills Payable A/c Dr. To Bills Receivable A/c (Being acceptance in favour of Sem met by endorsing Basu) | 5,000 | 5,000 | ||
| Debtors A/c Dr. To Bill for Collection A/c (Being bill dishonoured) | 9,000 | 9,000 | ||
| Suresh's A/c Dr. To Naresh's A/c (Being bill dishonoured) | 10,000 | 10,000 | ||
| Grand Total | 40,050 | 40,050 |
In simple words: This question asks us to record various bill transactions in Dalbeer's books. It covers situations like a bill being renewed with part cash and interest, a bill paid early with a discount, bills swapped between parties, bills sent for collection that get dishonoured, and endorsed bills that are dishonoured. Each event requires a specific journal entry.
🎯 Exam Tip: For journal entries, always remember the Golden Rules of Accounting. Debit what comes in or the receiver, credit what goes out or the giver. Be precise with accounts like B/R, B/P, Cash, Bank, Interest, and Discount.
Question 16. निम्नलिखित व्यवहारों को अशोक कुमार की पुस्तकों में प्राप्य बिल व देय बिल बही में लिखिये। (Enter the following transactions in the bills Receivable and Bills Payable Books of Ashok Kumar)
Jan. 10 राम से 3 माह का विपत्र प्राप्त हुआ (Received a bill from Ram for 3 months) - Rs 4,000
Jan. 16 कमलेश को 2 माह की स्वीकृति प्रदान की (Acceptance given to Kamlesh at 2 months) - Rs 2,000
Jan. 18 महेश से 5 माह का एक बिल प्राप्त हुआ (Received a bill from Mahesh for 5 months) - Rs 2,500
Jan. 21 सतीश से 3 माह का प्रतिज्ञा पत्र प्राप्त हुआ (Received a Promissory Note from Satish for 3 months) - Rs 2,050
Jan. 22 सतीश के प्रतिज्ञा पत्र को बैंक से Rs 2000 में भुनाया (Satish's Promissory Note discounted with bank for Rs 2,000)
Jan. 30 विजय के 4 माह बाद देय होने वाले Rs 7,600 के ड्राफ्ट को स्वीकार किया (Accepted Vijay's draft for Rs 7,600 payable after 4 months)
Answer:
Bills Receivable Book
| S. No. | Date of Receipt | From Whom Received | Drawer | Drawee | Date of Bill | Term | Due Date | L.F. | Amount Rs | Remark |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2017 | 2017 | |||||||||
| 1. | Jan. 1 | Ravi | Self | Ravi | Jan. 1 | 2 Month | March 4 | — | 1,400 | — |
| 2. | Jan. 10 | Ram | Mohan | Ram | Jan-10 | 3 Month | April 13 | — | 4,000 | — |
| 3. | Jan-18 | Mahesh | — | Mohan | Jan. 18 | 5 Month | June 21 | — | 2,500 | — |
| 4. | Jan. 21 | Satish | — | Satish | Jan. 21 | 3 Month | April 24 | — | 2,050 | — |
| 9,950 |
Bills Payable Book
| S. No. | Date of Given | To Whom Given | Payee | Where Payable | Date of Bill | Term | Due date | L.F. | Amount Rs | Remark |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2017 | 2017 | |||||||||
| 1. | Jan. 5 | Shyam | Shyam | — | Jan. 5 | 3 Month | Apr. 8 | — | 2,500 | |
| 2. | Jan. 16 | Kamlesh | Kamlesh | — | Jan. 16 | 2 Month | Mar. 19 | — | 2,000 | |
| 3. | Jan. 30 | Vijay | Vijay | — | Jan. 30 | 4 Month | June 3 | — | 7,600 | |
| 12,100 |
In simple words: This question asks us to record different transactions involving bills in Ashok Kumar's Bills Receivable and Bills Payable books. We need to list bills received (receivable) and bills accepted (payable) with all their details, like who the bill is from/to, the date, period, due date, and amount. A promissory note that was discounted is a special case: it is recorded as a Bill Receivable when received, but not as a Bill Payable when discounted, as it is no longer an obligation for Ashok Kumar.
🎯 Exam Tip: Remember to clearly differentiate between Bills Receivable (assets) and Bills Payable (liabilities). Bills Receivable Book records documents where money is owed to you, while Bills Payable Book records documents where you owe money to others.
Question 17. Prepare Swati's Bills Receivable book from the following transactions and posting them into ledger:
Oct 2 Acceptance Received from Ashok at three months Rs 1500
Oct. 10 Received a bill duly accepted by Monu at 2 months for Rs 2500
Oct. 20 Drew a bill upon Suresh at four months for Rs 3000, which accepted by him
Oct 25 Received a bill duly accepted by Mamta Payable after 90 days for Rs 1800
Oct. 30 Received a 2 months promissory note of Rs 1300 from Ajay.
Answer:
Swati's Bills Receivable Book
| S. No. | Date of Receipt | From Whom Received | Drawer | Drawee | Date of Bill | Term | Due Date | L.F. | Amount Rs |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. | Oct. 2 | Ashok | Self | Ashok | Oct. 2 | 3 Month | Jan. 5 | — | 1,500 |
| 2. | Oct. 10 | Monu | Self | Monu | Oct. 10 | 2 Month | Dec. 13 | — | 2,500 |
| 3. | Oct. 20 | Suresh | Self | Suresh | Oct. 20 | 4 Month | Feb. 23 | — | 3,000 |
| 4. | Oct. 25 | Mamta | Self | Mamta | Oct. 25 | 90 days | Jan. 25 | — | 1,800 |
| 5. | Oct. 30 | Ajay | Self | Ajay | Oct. 30 | 2 Month | Jan. 2 | — | 1,300 |
| 10,100 |
Ledger of Bills Receivable A/c
| Dr. | Particulars | J.F. | Amount Rs | Date | Particulars | J.F. | Amount Rs | Cr. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 30 | To Sundries as per B/R Book | 10,100 |
Ashok's A/c
| Dr. | Cr. | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 2 | By B/R A/c | 1,500 |
Monu's A/c
| Dr. | Cr. | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 10 | By B/R A/c | 2,500 |
Suresh's A/c
| Dr. | Cr. | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 20 | By B/R A/c | 3,000 |
Mamta's A/c
| Dr. | Cr. | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 25 | By B/R A/c | 1,800 |
Ajay's A/c
| Dr. | Cr. | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Oct. 30 | By B/R A/c | 1,300 |
In simple words: This task requires creating a Bills Receivable Book for Swati, listing all bills she receives. For each bill, we record the date she got it, who it's from, who is the drawer and drawee, the bill's date, its term (how long until it's due), the exact due date (adding grace days if needed), and the amount. After listing all bills, a summary is posted to the Bills Receivable Ledger. Individual ledger accounts are also shown for each party from whom a bill was received.
🎯 Exam Tip: When preparing a Bills Receivable Book, always include the date of bill, drawer, drawee, term, due date, and amount. Remember to calculate the exact due date by adding three days of grace to the stated term.
Question 18. निम्नलिखित व्यवहारों को अंकित की देय बिल बही में दर्ज कीजिए तथा खाताबही में खतौनी कीजिए। (Enter the following transactions in Ankit's Bills Payable Book and post them to the ledger): Nov. 5 Accepted a bill of Manisha for Rs 800 payable after two months; Nov. 15 An acceptance given to Ankita at three months for Rs 2,500; Nov. 22 Accepted a 60 days bill of Rekha for Rs 4,000.
Answer:
Bills Payable Book
| S. No. | Date of Given | To Whom Given | Payee | Where Payable | Date of Bill | Term | Due date | L.F. | Amount Rs | Remark |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 | 2016 | |||||||||
| 1. | Nov. 5 | Manisha | Manisha | — | Nov. 5 | 2 Month | Jan. 8 | 800 | ||
| 2. | Nov. 15 | Ankita | Ankita | — | Nov. 15 | 3 Month | Feb. 18 | 2,500 | ||
| 3. | Nov. 22 | Rekha | Rekha | — | Nov. 22 | 60 days | Jan. 24 | 4,000 | ||
| 7,300 |
Ledger of Ankit
Bills Payable A/c
| Dr. | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Cr. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Nov. 22 | By Sundries as per B/P Book | 7,300 |
Manisha A/c
| Dr. | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Cr. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Nov. 5 | To B/P A/c | 800 |
Ankita A/c
| Dr. | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Cr. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Nov. 15 | To B/P A/c | 2,500 |
Rekha A/c
| Dr. | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Cr. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 Nov. 22 | To B/P A/c | 4,000 |
In simple words: This question asks us to prepare Ankit's Bills Payable Book, which records all bills Ankit has accepted (promises to pay). For each bill, we need to list who the bill is for, its date, the term (duration), the exact due date (adding three grace days), and the amount. After recording the bills in the book, the total amount is posted to Ankit's Bills Payable Ledger, and individual amounts are posted to the personal ledger accounts of the payees (Manisha, Ankita, Rekha).
🎯 Exam Tip: When preparing the Bills Payable Book, ensure all bills accepted by the firm are recorded. Correctly calculate the due date by adding three grace days, and then transfer the total to the Bills Payable Account in the ledger.
Question 18. निम्नलिखित व्यवहारों को अंकित की देय बिल बही में दर्ज कीजिए तथा खाताबही में खतौनी कीजिए।
(i) Nov. 5 Accepted a bill of Manisha for Rs 800 payable after two months.
(ii) Nov. 15 An acceptance given to Ankita at three months for Rs 2,500.
(iii) Nov. 22 Accepted a 60 days bill of Rekha for Rs 4,000.
Answer:
Bills Payable Book
| S. No. | Date of Given | To Whom Given | Payee | Where Payable | Date of Bill | Term | Due date | L.F. | Amount Rs | Remark |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2016 | ||||||||||
| 1. | Nov. 5 | Manisha | Manisha | — | Nov. 5 | 2 Month | Jan. 8 | 800 | ||
| 2. | Nov. 15 | Ankita | Ankita | — | Nov. 15 | 3 Month | Feb. 18 | 2,500 | ||
| 3. | Nov. 22 | Rekha | Rekha | — | Nov. 22 | 60 days | Jan. 24 | 4,000 | ||
| 7,300 | ||||||||||
Ledger of Ankit
| Bills Payable A/c (Dr.) | Bills Payable A/c (Cr.) | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) |
| 2016 | By Sundries as per B/P Book | 7,300 | |||||
| Manisha A/c (Dr.) | Manisha A/c (Cr.) | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) |
| 2016 | To B/P A/c | 800 | |||||
| Ankita A/c (Dr.) | Ankita A/c (Cr.) | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) |
| 2016 | To B/P A/c | 2,500 | |||||
| Rekha A/c (Dr.) | Rekha A/c (Cr.) | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) | Date | Particulars | J.F. | Amount (Rs) |
| 2016 | To B/P A/c | 4,000 | |||||
In simple words: This problem shows how to record the details of accepted bills in the Bills Payable Book. After recording them, the total from the book is posted to the Bills Payable Account in the ledger, and individual accounts of the creditors are debited.
🎯 Exam Tip: When preparing the Bills Payable Book and ledger, ensure all dates, terms, and amounts are correctly transferred. Remember that acceptance of a bill increases the Bills Payable liability for the acceptor.
Free study material for Accountancy
RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 10 विनियम बिल prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Accountancy textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 10 विनियम बिल
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Accountancy chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Accountancy Class 11 Solved Papers
Using our Accountancy solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 10 विनियम बिल to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Accountancy are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Accountancy concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Accountancy. You can access RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Accountancy Chapter 10 विनियम बिल in printable PDF format for offline study on any device.