RBSE Solutions Class 10 Social Science Chapter 6 केंद्र सरकार

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Detailed Chapter 6 केंद्र सरकार RBSE Solutions for Class 10 Social Science

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Class 10 Social Science Chapter 6 केंद्र सरकार RBSE Solutions PDF

केंद्र सरकार अति लघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

 

Question 1. प्रधानमंत्री को कौन नियुक्त करता है?
Answer: प्रधानमंत्री को भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है. राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद अपने कर्तव्यों का पालन करने में उनकी मदद करते हैं.
In simple words: भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को चुनते और नियुक्त करते हैं.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि भारत का राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है.

 

Question 2. राष्ट्रपति का चुनाव किस पद्धति के आधार पर होता है?
Answer: राष्ट्रपति का चुनाव एकल संक्रमणीय मत पद्धति के आधार पर होता है. इस पद्धति में हर मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवारों को क्रम से चुनता है. यह चुनाव प्रणाली सभी वोटों को महत्व देती है.
In simple words: राष्ट्रपति का चुनाव 'एकल संक्रमणीय मत' तरीके से होता है.

🎯 Exam Tip: एकल संक्रमणीय मत पद्धति एक जटिल मतदान प्रणाली है, जिसे समझना महत्वपूर्ण है कि इसमें वरीयता क्रम में मतदान होता है.

 

Question 3. राज्यसभा का पदेन सभापति कौन होता है?
Answer: राज्यसभा का पदेन सभापति उपराष्ट्रपति होता है. उपराष्ट्रपति को इस पद पर विशेष रूप से चुना नहीं जाता, बल्कि उपराष्ट्रपति बनने के कारण ही वे राज्यसभा के अध्यक्ष बन जाते हैं. यह पद सभा की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है.
In simple words: उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के मुख्य अधिकारी होते हैं.

🎯 Exam Tip: 'पदेन' का अर्थ है कि व्यक्ति को किसी एक पद पर होने के कारण दूसरा पद स्वतः ही मिल जाता है.

 

Question 4. केंद्रीय मंत्रिमण्डल की अध्यक्षता कौन करता है?
Answer: केंद्रीय मंत्रिमंडल की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं. प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल के सभी निर्णयों और नीतियों का नेतृत्व करते हैं, जिससे सरकार का कामकाज व्यवस्थित रहता है.
In simple words: प्रधानमंत्री केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री का पद सरकार के भीतर सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वे नीतियों और निर्णयों का नेतृत्व करते हैं.

 

Question 5. संसद के सत्रावसान में राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में जो आदेश जारी करता है, उसे क्या कहते हैं?
Answer: संसद के सत्र न चलने के दौरान राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में जो आदेश जारी करते हैं, उसे अध्यादेश कहते हैं. अध्यादेश की शक्ति कानून के बराबर होती है, लेकिन यह केवल कुछ समय के लिए लागू होता है और संसद की मंजूरी के बाद ही स्थायी बनता है. यह कानून बनाने का एक आपातकालीन तरीका है.
In simple words: जब संसद नहीं चल रही होती, तब राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में 'अध्यादेश' नामक आदेश जारी करते हैं.

🎯 Exam Tip: अध्यादेश केवल अस्थायी कानून होते हैं जिन्हें संसद के अगले सत्र में पास करवाना अनिवार्य होता है.

 

Question 6. किस बात के संबंध में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों को प्रारंभिक क्षेत्राधिकार प्राप्त हैं?
Answer: मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों को प्रारंभिक क्षेत्राधिकार प्राप्त है. इसका मतलब है कि नागरिक सीधे इन न्यायालयों में अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए जा सकते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन न हो.
In simple words: मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों में, लोग सीधे उच्चतम या उच्च न्यायालय जा सकते हैं.

🎯 Exam Tip: मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) में रिट याचिका दायर कर सकते हैं.

 

Question 8. एक बार नियुक्त हो जाने पर उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश कितने वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकता है?
Answer: उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश एक बार नियुक्त हो जाने पर 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकता है. यह न्यायाधीशों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है. इस आयु सीमा के बाद वे सेवानिवृत्त हो जाते हैं.
In simple words: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 साल की उम्र तक काम कर सकते हैं.

🎯 Exam Tip: विभिन्न अदालतों के न्यायाधीशों के लिए सेवा-निवृत्ति की आयु अलग-अलग होती है, इसे याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 9. 'अभिलेख न्यायालय' का आशय क्या है?
Answer: 'अभिलेख न्यायालय' का अर्थ है कि इस न्यायालय के सभी निर्णय सबूत के रूप में माने जाते हैं और इन्हें किसी भी अदालत में इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही, यदि कोई इस न्यायालय के फैसले का अनादर करता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है. अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा देता है. यह न्यायिक फैसलों की विश्वसनीयता बनाए रखता है.
In simple words: अभिलेख न्यायालय वह होता है जिसके फैसले सबूत माने जाते हैं और जिसके अनादर पर सजा मिल सकती है.

🎯 Exam Tip: अभिलेख न्यायालय के निर्णयों की प्रामाणिकता बहुत महत्वपूर्ण है, और इसका अनादर 'न्यायालय की अवमानना' माना जाता है.

 

केंद्र सरकार लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

 

Question 1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति समझाएँ।
Answer: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में उपराष्ट्रपति के पद का प्रावधान है. उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों की एक संयुक्त बैठक में होता है. यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत से और गुप्त मतदान द्वारा किया जाता है. यह पद्धति सुनिश्चित करती है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हो.
In simple words: उपराष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों के सदस्य मिलकर चुनते हैं, जिसमें एकल संक्रमणीय मत और गुप्त मतदान का तरीका अपनाया जाता है.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के चुनाव में एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का उपयोग होता है, लेकिन उनके निर्वाचक मंडल अलग-अलग होते हैं.

 

Question 2. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार में कौन-सी योग्यताएँ आवश्यक हैं?
Answer: राष्ट्रपति पद पर चुने जाने के लिए व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए:
1. वह भारत का नागरिक हो.
2. उसकी आयु 35 वर्ष पूरी हो चुकी हो.
3. वह लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो.
ये योग्यताएँ सुनिश्चित करती हैं कि राष्ट्रपति के पद पर एक योग्य और जिम्मेदार व्यक्ति नियुक्त हो.
In simple words: राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 साल का होना चाहिए और लोकसभा सदस्य बनने लायक होना चाहिए.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की योग्यताएँ भारतीय नागरिक, न्यूनतम 35 वर्ष की आयु और लोकसभा सदस्य बनने की क्षमता पर केंद्रित होती हैं.

 

Question 3. राष्ट्रपति को किस प्रक्रिया के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है?
Answer: भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 के अनुसार, संविधान का उल्लंघन करने पर राष्ट्रपति को महाभियोग लगाकर पद से हटाया जा सकता है. महाभियोग लगाने का अधिकार संसद के किसी भी सदन को प्राप्त है. अभियोग चलाने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर होना जरूरी है.
जब सदन में प्रस्ताव मिल जाता है, तो 14 दिन बाद उस पर विचार किया जाता है. यदि अभियोग का प्रस्ताव सदन की कुल संख्या के 2/3 सदस्यों द्वारा पास हो जाता है, तो यह प्रस्ताव दूसरे सदन को भेजा जाता है. दूसरा सदन या तो खुद जांच करता है या इसके लिए एक विशेष समिति बनाता है. यदि राष्ट्रपति के खिलाफ आरोप सही साबित होते हैं और दूसरा सदन भी अपने कुल सदस्यों के कम-से-कम दो तिहाई बहुमत से महाभियोग के प्रस्ताव को पास कर लेता है, तो प्रस्ताव स्वीकृत होने की तारीख से राष्ट्रपति को पद से हटा हुआ माना जाता है. यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति को केवल गंभीर उल्लंघनों के लिए ही हटाया जा सके.
In simple words: राष्ट्रपति को 'महाभियोग' प्रक्रिया से हटाया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदन 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पास करते हैं कि उन्होंने संविधान का उल्लंघन किया है.

🎯 Exam Tip: महाभियोग एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है जो संसद में ही शुरू होती है और राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए एक बहुत गंभीर और कठोर प्रक्रिया है.

 

Question 4. राष्ट्रपति संविधान के कौन-कौन से अनुच्छेदों के अंतर्गत आपातकाल की घोषणा कर सकता है?
Answer: राष्ट्रपति संविधान के निम्नलिखित अनुच्छेदों के अंतर्गत आपातकाल की घोषणा कर सकता है:
संविधान के **अनुच्छेद 352** में यह व्यवस्था है कि यदि राष्ट्रपति को लगे कि देश पर युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति का खतरा है, तो वे आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं. 44वें संवैधानिक संशोधन से इसमें बदलाव किया गया है.
संविधान के **अनुच्छेद 356** के अनुसार, यदि राज्यपाल की रिपोर्ट पर या किसी अन्य तरीके से राष्ट्रपति को यकीन हो जाए कि किसी राज्य का शासन संविधान के नियमों के अनुसार नहीं चल पा रहा है, तो वे उस राज्य के लिए आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं. संसद की मंजूरी के बिना यह घोषणा दो महीने से अधिक समय तक लागू नहीं रह सकती. ये अनुच्छेद राष्ट्रपति को देश या राज्यों में असामान्य परिस्थितियों से निपटने की शक्ति देते हैं.
In simple words: राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 (युद्ध/आक्रमण) और अनुच्छेद 356 (राज्य में संवैधानिक विफलता) के तहत आपातकाल लगा सकते हैं.

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 356 राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) से संबंधित है, और अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है.

 

Question 5. राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य और राज्य विधानसभा एवं संघीय क्षेत्र की विधानसभा के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य किस आधार पर निर्धारित किया जाता है?
Answer: राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य और राज्य विधानसभा एवं संघीय क्षेत्र की विधानसभा के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य उस राज्य की जनसंख्या के आधार पर निर्धारित किया जाता है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले. यह चुनाव प्रक्रिया सभी क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व देती है.
In simple words: राष्ट्रपति चुनाव में हर सदस्य के वोट का मूल्य उस राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होता है.

🎯 Exam Tip: मत मूल्य का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर किया जाता है, ताकि जनसंख्या में परिवर्तनों का तत्काल प्रभाव न पड़े.

 

Question 6. उच्चतम न्यायालय के अपीलीय क्षेत्राधिकार का वर्णन कीजिए।
Answer: सर्वोच्च न्यायालय भारत का अंतिम अपीलीय न्यायालय है. इसे सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ अपील सुनने का अधिकार है. सर्वोच्च न्यायालय के अपीलीय क्षेत्राधिकार को निम्न रूपों में बांटा जा सकता है:
(i) **संवैधानिक:** संविधान के अनुच्छेद 132 के अनुसार, यदि उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि विवाद में संविधान की व्याख्या से संबंधित कोई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न शामिल है, तो उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है.
(ii) **दीवानी:** पहले, उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय में केवल 20,000 रुपये से अधिक के विवादों की ही अपील की जा सकती थी. लेकिन 1973 में हुए 30वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 133 को संशोधित करके अब यह निश्चित किया गया है कि दीवानी विवादों की अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकेगी, चाहे राशि कुछ भी हो, बशर्ते उसमें महत्वपूर्ण कानूनी सवाल शामिल हो. यह सुनिश्चित करता है कि न्याय सभी के लिए सुलभ हो.
(iii) **फौजदारी:** फौजदारी के मामलों में, उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है, खासकर उन मामलों में जहाँ:
* उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के किसी फैसले को रद्द करके किसी अभियुक्त को मौत की सजा दी हो, जबकि निचली अदालत ने उसे बेकसूर बताया था, या
* उच्च न्यायालय ने निचली अदालत में चल रहे किसी विवाद को अपने पास लेकर अभियुक्त को मौत की सजा दी हो, या
* उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में अपील के योग्य है. यह गंभीर मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए है.
(iv) **विशिष्ट:** कुछ ऐसे मामले भी हो सकते हैं जो उपरोक्त श्रेणियों में नहीं आते, लेकिन जिनमें सर्वोच्च न्यायालय का दखल जरूरी हो सकता है. इसलिए, अनुच्छेद 135 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय को यह अधिकार दिया गया है कि सैनिक न्यायालयों को छोड़कर भारत के किसी भी अन्य न्यायालय या न्यायमंडल के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की अनुमति दे सकता है. यह न्यायपालिका को व्यापक अधिकार प्रदान करता है.
In simple words: उच्चतम न्यायालय सभी उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ अपील सुनता है. इसमें संविधान से जुड़े, पैसे से जुड़े, अपराध से जुड़े और कुछ खास मामले आते हैं, जहाँ न्यायपालिका को यह अंतिम अधिकार मिलता है.

🎯 Exam Tip: अपीलीय क्षेत्राधिकार का मतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय निचली अदालतों के फैसलों की समीक्षा कर सकता है, जो न्याय प्रणाली में सर्वोच्चता को दर्शाता है.

 

Question 7. दीवानी और फौजदारी मुकदमे किस स्थिति में अपील के रूप में उच्चतम न्यायालय में सुने जा सकते हैं?
Answer: दीवानी और फौजदारी मुकदमे कुछ खास स्थितियों में उच्चतम न्यायालय में अपील के रूप में सुने जा सकते हैं:
(i) **दीवानी मामले:** पहले, उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय में केवल 20,000 रुपये से अधिक के दीवानी विवादों की अपील की जा सकती थी. हालांकि, 1973 में हुए 30वें संविधान संशोधन के बाद यह राशि की सीमा हटा दी गई है. अब दीवानी मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में अपील तब सुनी जा सकती है, जब उच्च न्यायालय यह प्रमाणित करे कि मामले में कानून का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है, या सर्वोच्च न्यायालय को लगता है कि उस पर विचार करना आवश्यक है.
(ii) **फौजदारी मामले:** फौजदारी के क्षेत्र में उन विवादों में उच्च न्यायालयों के निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है जिनमें:
* उच्च न्यायालय ने नीचे के न्यायालय के किसी फैसले को रद्द करके अभियुक्त को मौत की सजा दी हो, जबकि नीचे के न्यायालय ने उसे बेकसूर बताया था, या
* उच्च न्यायालय ने नीचे के न्यायालय में चल रहे किसी विवाद को अपने पास लेकर अभियुक्त को मौत की सजा दी हो, या
* उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में अपील के योग्य है.
ये स्थितियाँ सुनिश्चित करती हैं कि गंभीर और महत्वपूर्ण कानूनी सवालों वाले मामलों को उच्चतम न्यायालय में सुना जाए.
In simple words: दीवानी मामले तब सुने जाते हैं जब कानूनी सवाल महत्वपूर्ण हों, और फौजदारी मामले तब सुने जाते हैं जब निचली अदालतों के फैसलों में मृत्युदंड या गंभीर कानूनी प्रश्न शामिल हों.

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि दीवानी और फौजदारी अपीलों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास विशिष्ट मानदंड हैं, जिनमें अक्सर 'कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न' शामिल होते हैं.

 

Question 8. उच्चतम न्यायालय को एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) क्यों कहा जाता है?
Answer: उच्चतम न्यायालय को 'अभिलेख न्यायालय' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस न्यायालय के निर्णय सभी जगह सबूत के तौर पर स्वीकार किए जाते हैं. इन निर्णयों को किसी भी न्यायालय में पेश करने पर उनकी सच्चाई पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. दूसरा, यदि कोई इस न्यायालय के किसी आदेश या निर्णय का अनादर करता है, तो उसे 'न्यायालय की अवमानना' के लिए दंडित किया जा सकता है. यह न्यायालय के फैसलों की गरिमा और कानूनी प्रभाव को बनाए रखता है.
In simple words: उच्चतम न्यायालय के फैसले सबूत माने जाते हैं, और यदि कोई इसके फैसलों का अनादर करता है तो उसे सजा मिल सकती है, इसलिए इसे 'अभिलेख न्यायालय' कहते हैं.

🎯 Exam Tip: अभिलेख न्यायालय के फैसलों का रिकॉर्ड भविष्य के मामलों के लिए एक मिसाल (नजीर) के रूप में काम करता है.

 

Question 9. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश किसके द्वारा और कैसे हटाए जा सकते हैं?
Answer: सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश आमतौर पर 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रहते हैं. उन्हें 'सिद्ध कदाचार' (दुर्व्यवहार) या 'असमर्थता' (अक्षमता) के आधार पर संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया से पद से हटाया जा सकता है. यदि संसद के दोनों सदन अपनी कुल सदस्य संख्या के दो तिहाई बहुमत से न्यायाधीश को अयोग्य या आपत्तिजनक व्यवहार करने वाला प्रमाणित कर देते हैं, तो भारत के राष्ट्रपति के आदेश से उस न्यायाधीश को पद से हटना पड़ता है. यह प्रक्रिया न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखती है, लेकिन गंभीर मामलों में जवाबदेही भी सुनिश्चित करती है.
In simple words: न्यायाधीशों को 'सिद्ध कदाचार' या 'असमर्थता' के कारण संसद के दो तिहाई बहुमत से महाभियोग लगाकर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है.

🎯 Exam Tip: न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया बहुत सख्त होती है, ताकि वे बिना किसी डर के निष्पक्ष होकर काम कर सकें.

 

Question 10. 'न्यायिक पुनर्विलोकन' का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: अनुच्छेद 131 और अनुच्छेद 132 सर्वोच्च न्यायालय को संघीय तथा राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों की समीक्षा करने का अधिकार देते हैं, जिसे 'न्यायिक पुनर्विलोकन' कहते हैं. यदि संघीय संसद या राज्य विधानमंडल संविधान का उल्लंघन करता है, या मौलिक अधिकारों के खिलाफ कोई कानून बनाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय ऐसे कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है. सर्वोच्च न्यायालय की यह शक्ति सुनिश्चित करती है कि कोई भी केंद्र या राज्य सरकार असंवैधानिक कानून न बना सके और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन न हो. यह संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
In simple words: 'न्यायिक पुनर्विलोकन' का मतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय उन कानूनों की जांच कर सकता है जो सरकार बनाती है, ताकि वे संविधान या मौलिक अधिकारों के खिलाफ न हों.

🎯 Exam Tip: न्यायिक पुनर्विलोकन भारतीय संविधान की एक मूल विशेषता है, जो संविधान को सर्वोच्च बनाए रखने में मदद करती है.

 

केंद्र सरकार निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

 

Question 2. राष्ट्रपति की सामान्य काल में शक्तियों तथा अधिकारों की विवेचना कीजिए।
Answer: राष्ट्रपति को सामान्य समय में निम्नलिखित शक्तियाँ और अधिकार प्राप्त हैं:
(i) **कार्यपालिका अथवा प्रशासनिक शक्तियाँ:** संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार, संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में होती है, और वह इसका उपयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करते हैं. इस प्रकार, शासन के सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम से होते हैं और सरकार के सभी निर्णय उन्हीं के माने जाते हैं. राष्ट्रपति देश के सबसे बड़े कार्यकारी प्रमुख होते हैं.
(क) **महत्वपूर्ण अधिकारियों की नियुक्ति:** राष्ट्रपति भारत संघ के कई महत्वपूर्ण अधिकारियों की नियुक्ति करते हैं, जैसे- प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्री, राज्यों के राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, महालेखा परीक्षक, संघीय लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, तथा विदेशों में राजदूत आदि. ये नियुक्तियाँ सरकार के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक हैं.
(ख) **सैनिक क्षेत्र में शक्ति:** राष्ट्रपति भारत की सभी सेनाओं के प्रधान सेनापति होते हैं, लेकिन इस अधिकार का उपयोग वे कानून के अनुसार ही कर सकते हैं. रक्षा सेवाओं, युद्ध और शांति से संबंधित कानून बनाने की शक्ति केवल संसद को प्राप्त है. इसलिए, भारतीय राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के बिना न तो युद्ध की घोषणा कर सकते हैं और न ही सेनाओं का उपयोग कर सकते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि युद्ध जैसे महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक सहमति से हों.
(ii) **विधायी शक्तियाँ:** राष्ट्रपति को भारतीय संसद का एक अभिन्न अंग माना जाता है, और इस रूप में उन्हें विधायी क्षेत्र की विभिन्न शक्तियाँ प्राप्त हैं:
(क) **विधायी क्षेत्र का प्रशासन:** राष्ट्रपति संसद के अधिवेशन बुलाते हैं और अधिवेशन खत्म होने की घोषणा करते हैं. वे प्रधानमंत्री की सिफारिश पर लोकसभा को उसके निश्चित समय से पहले भी भंग कर सकते हैं. अब तक 9 बार लोकसभा को समय से पहले भंग किया जा चुका है. संसद के अधिवेशन की शुरुआत में राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में भाषण देते हैं. इसके अलावा, वे अन्य अवसरों पर भी संसद को संदेश या उनकी बैठकों में भाषण दे सकते हैं. यह उनके विधायी नेतृत्व का हिस्सा है.
(ख) **सदस्यों को मनोनीत करने की शक्ति:** राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 ऐसे सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार है, जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा या खेल के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो. वे लोकसभा में 2 आंग्ल भारतीय सदस्यों को भी मनोनीत करते हैं, यदि उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व न हो. यह विशेषज्ञों को संसद में लाने का एक तरीका है.
(iv) **न्यायिक शक्तियाँ:** संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांत को अपनाया गया है. राष्ट्रपति उच्चतम तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं. उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों के संबंध में राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है. राष्ट्रपति को क्षमादान की एक और महत्वपूर्ण शक्ति प्राप्त है. राष्ट्रपति को न्यायिक शक्ति के तहत दंडित व्यक्तियों को क्षमा करने या दंड को कुछ समय के लिए स्थगित करने का अधिकार भी प्राप्त है. यह शक्ति न्याय और मानवीयता के बीच संतुलन बनाती है.
In simple words: राष्ट्रपति के पास कई शक्तियाँ हैं. वे सरकार के काम को देखते हैं, बड़े अधिकारियों को चुनते हैं, सेना के मुखिया होते हैं, संसद के काम में भाग लेते हैं, लोगों को मनोनीत करते हैं, और दंड माफ कर सकते हैं.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की शक्तियाँ बहुत विस्तृत हैं, जिनमें कार्यपालिका, विधायी, सैनिक और न्यायिक शक्तियाँ शामिल हैं, जो उन्हें देश का संवैधानिक प्रमुख बनाती हैं.

 

Question 3. राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की विवचना कीजिए।
Answer: संकट की स्थिति से निपटने के लिए संविधान द्वारा राष्ट्रपति को विशेष शक्तियाँ दी गई हैं. आपातकाल के प्रावधान इस प्रकार हैं:
(i) **युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति की स्थिति से संबंधित संकटकालीन व्यवस्था (राष्ट्रीय आपातकाल - अनुच्छेद 352):** मूल संविधान के अनुच्छेद 352 में यह व्यवस्था थी कि यदि राष्ट्रपति को लगे कि युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति के कारण देश या उसके किसी हिस्से की शांति व्यवस्था खतरे में है, तो वे आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं. 44वें संवैधानिक संशोधन के बाद इसमें बदलाव किया गया है:
* **प्रथम:** अब आपातकाल की घोषणा केवल युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की आशंका होने पर ही की जा सकती है. केवल आंतरिक अशांति के आधार पर आपातकाल घोषित नहीं किया जा सकता. यह सुनिश्चित करता है कि आपातकाल का दुरुपयोग न हो.
* **द्वितीय:** राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा तभी की जा सकेगी जब मंत्रिमंडल लिखित रूप में उन्हें ऐसा करने की सलाह दे. यह मनमानी रोकने के लिए है.
* **तृतीय:** घोषणा के एक महीने के भीतर संसद के विशेष बहुमत (दो तिहाई बहुमत) से इसकी मंजूरी लेना आवश्यक है. इसे लागू रखने के लिए हर 6 महीने बाद स्वीकृति लेनी होगी. यह सुनिश्चित करता है कि संसद की मंजूरी हमेशा बनी रहे.
* **चतुर्थ:** लोकसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से आपातकाल की घोषणा समाप्त की जा सकती है. यह आपातकाल को खत्म करने की शक्ति देता है.
(ii) **राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने से उत्पन्न संकटकालीन व्यवस्था (राष्ट्रपति शासन - अनुच्छेद 356):** अनुच्छेद 356 के अनुसार, यदि राज्यपाल की रिपोर्ट पर या किसी अन्य तरीके से राष्ट्रपति को यकीन हो जाए कि किसी राज्य का शासन संविधान के नियमों के अनुसार नहीं चल पा रहा है, तो वे उस राज्य के लिए आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) की घोषणा कर सकते हैं. संसद की मंजूरी के बिना यह घोषणा दो महीने से अधिक समय तक लागू नहीं रह सकती. संसद द्वारा एक प्रस्ताव पास कर राज्य में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है. यह राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए है.
In simple words: राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) लगा सकते हैं जब युद्ध या सशस्त्र विद्रोह हो, और राज्य आपातकाल (अनुच्छेद 356) लगा सकते हैं जब किसी राज्य में सरकार संविधान के अनुसार काम न कर रही हो.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) और राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के बीच के अंतरों और उनकी शर्तों को ठीक से समझें, खासकर 44वें संशोधन के बाद हुए बदलावों को.

 

Question 4. मंत्रिमंडल के गठन एवं उसकी शक्तियों की विवेचना कीजिए।
Answer: मूल संविधान के अनुच्छेद 74 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा.

**मंत्रिमंडल का गठन**
(i) **प्रधानमंत्री की नियुक्ति:** भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं. व्यवहार में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह को मानने के लिए बाध्य होते हैं.
(ii) **प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रियों का चयन:** प्रधानमंत्री ही अपनी पसंद के अनुसार मंत्रियों का चयन करते हैं. वे यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी टीम में योग्य और अनुभवी व्यक्ति शामिल हों. अन्य मंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में संवैधानिक स्थिति यह है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की राय से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेगा लेकिन व्यवहार में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के परामर्श को मानने के लिए बाध्य है.

(iii) **मंत्रियों की श्रेणियाँ:** मंत्रियों की तीन मुख्य श्रेणियाँ होती हैं: मंत्रिमंडल या कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और उपमंत्री. मंत्रिमंडल की शक्तियाँ-संविधान के अनुच्छेद 74 में कहा गया है कि मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को उसके कार्यों के संपादन में सहायता और परामर्श देगी. व्यवहार में मंत्रिमंडल भारतीय शासन की सर्वोच्च इकाई है और उसके द्वारा समस्त शासन व्यवस्था का संचालन किया जाता है. यह सरकार के निर्णय लेने का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है.

(iv) **राष्ट्रीय नीति निर्धारित करना:** मंत्रिमंडल का सबसे महत्वपूर्ण काम राष्ट्रीय नीति तय करना है. मंत्रिमंडल यह तय करता है कि देश के अंदर प्रशासन के विभिन्न विभाग और विदेशों के साथ संबंधों के लिए किस तरह की नीति अपनाई जाएगी. यह देश के विकास और सुरक्षा के लिए दिशा तय करता है.

(v) **कानून निर्माण:** संसदात्मक व्यवस्था होने के कारण, मंत्रिमंडल का काम केवल नीति तय करना नहीं, बल्कि कानून बनाने के काम का भी नेतृत्व करना है. मंत्रिमंडल नीति तय करने के बाद कानून बनाने का कार्यक्रम तय करता है, और मंत्रिमंडल के सदस्य ही महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी नीतियाँ कानून का रूप ले सकें.

(vi) **कार्यपालिका पर नियंत्रण:** सैद्धांतिक रूप से संघ सरकार की सारी कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति के पास होती है, लेकिन व्यवहार में इस शक्ति का उपयोग मंत्रिमंडल द्वारा ही किया जाता है. मंत्रिमंडल यह सुनिश्चित करता है कि सरकार के सभी फैसले सही तरीके से लागू हों.

(vii) **वित्तीय कार्य:** मंत्रिमंडल द्वारा तय की गई नीति के आधार पर ही वित्त मंत्री बजट तैयार करते हैं और उसे लोकसभा में पेश करते हैं. यह सरकार की वित्तीय योजनाओं को दर्शाता है और देश की आर्थिक दिशा तय करता है.
In simple words: मंत्रिमंडल का गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह से होता है. यह राष्ट्रीय नीतियाँ बनाता है, कानून बनाने में मदद करता है, सरकार के काम पर नियंत्रण रखता है और देश के वित्तीय मामलों को संभालता है.

🎯 Exam Tip: मंत्रिमंडल, विशेष रूप से कैबिनेट मंत्री, सरकार के सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले समूह होते हैं, और प्रधानमंत्री इसके मुखिया होते हैं.

 

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (More Questions Solved)

केंद्र सरकार अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

 

Question 1. सरकार के प्रमुख अंग कौन-कौन से हैं?
Answer: सरकार के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका. ये तीनों अंग मिलकर सरकार का कामकाज चलाते हैं और देश में संतुलन बनाए रखते हैं. ये एक दूसरे से जुड़े रहकर काम करते हैं.
In simple words: सरकार के तीन मुख्य अंग हैं - कानून बनाने वाली, लागू करने वाली और न्याय करने वाली संस्थाएँ.

🎯 Exam Tip: लोकतंत्र में सरकार के तीन अंग - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर काम करते हैं.

 

Question 2. सरकार किसे कहते हैं?
Answer: राज्य एक भाववाचक अवधारणा है जो अदृश्य होती है, लेकिन सरकार वह संस्था है जो इस राज्य को मूर्त रूप देती है. सरकार ही राज्य की इच्छा को तय करती है, व्यक्त करती है और लागू करती है. हम यह कह सकते हैं कि सरकार के बिना राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती, क्योंकि सरकार ही कानूनों का निर्माण करती है, उन्हें लागू करती है और कानून तोड़ने वालों को दंडित करती है. गार्नर के अनुसार, सरकार वह माध्यम है जिसके द्वारा राज्य की नीतियाँ तय होती हैं और सामान्य हितों को बढ़ावा दिया जाता है. यह देश के लोगों के लिए व्यवस्था बनाए रखने का काम करती है.
In simple words: सरकार वह संस्था है जो देश के लिए कानून बनाती है, उन्हें लागू करती है और न्याय करती है.

🎯 Exam Tip: सरकार एक देश की प्रशासनिक इकाई है, जो कानूनों को लागू करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है.

 

Question 3. भारत का संवैधानिक प्रधान कौन होता है?
Answer: भारत का संवैधानिक प्रधान राष्ट्रपति होता है. राष्ट्रपति देश के प्रमुख होते हैं और सभी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग उनके नाम पर ही होता है. वे भारतीय संविधान और लोकतंत्र के संरक्षक हैं.
In simple words: भारत का राष्ट्रपति संवैधानिक रूप से देश का प्रमुख होता है.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च संवैधानिक पद है, जो देश के सभी संवैधानिक कार्यों का प्रतिनिधित्व करता है.

 

Question 4. भारत का वास्तविक प्रधान कौन होता है?
Answer: भारत का वास्तविक प्रधान प्रधानमंत्री होता है. प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है और सभी प्रमुख नीतियों और निर्णयों का नेतृत्व करता है. वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के पास होती है.
In simple words: भारत का प्रधानमंत्री सरकार का असली मुखिया होता है.

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं.

 

Question 5. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश को कितना वेतन मिलता है?
Answer: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है, और अन्य न्यायाधीशों को 90,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है. ये वेतनमान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए तय किए गए हैं. इसके अलावा, उन्हें अन्य भत्ते और सुविधाएँ भी मिलती हैं.
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक लाख रुपये और अन्य न्यायाधीशों को 90,000 रुपये हर महीने मिलते हैं.

🎯 Exam Tip: न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते संसद द्वारा तय किए जाते हैं और उनकी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए कार्यकाल के दौरान कम नहीं किए जा सकते.

 

Question 6. संविधान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर किस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है?
Answer: संविधान में यह तय किया गया है कि जो व्यक्ति भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश रह चुके हैं, वे पद से रिटायर होने के बाद भारत में किसी भी न्यायालय या किसी भी अधिकारी के सामने वकालत नहीं कर सकते. यह प्रतिबंध न्यायाधीशों की निष्पक्षता और उनके पद की गरिमा बनाए रखने के लिए लगाया गया है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि वे अपने पद का दुरुपयोग न करें.
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय के रिटायर हुए न्यायाधीश भारत में कहीं भी वकालत नहीं कर सकते.

🎯 Exam Tip: यह प्रतिबंध न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है.

 

Question 7. भारत का सर्वोच्च न्यायालय कहाँ स्थित है?
Answer: भारत का सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में स्थित है. दिल्ली भारत की राजधानी है और यहीं पर देश के सभी प्रमुख सरकारी संस्थान स्थित हैं. यह भारत की न्यायिक प्रणाली का सर्वोच्च केंद्र है.
In simple words: भारत का सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में है.

🎯 Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय का स्थान निर्धारित होने से न्यायिक कार्यप्रणाली में स्पष्टता और केंद्रीयता बनी रहती है.

 

Question 10. राष्ट्रपति राज्यसभा में कितने सदस्यों को मनोनीत करता है और वे किस तरह के व्यक्ति होते हैं?
Answer: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं. ये ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा या खेल जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त हो. यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी संसद में अपना योगदान दे सकें.
In simple words: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को चुनते हैं, जो कला, विज्ञान, साहित्य या समाज सेवा में खास होते हैं.

🎯 Exam Tip: मनोनीत सदस्यों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को संसद में लाना है, जो चुनाव से संभव नहीं हो पाता.

 

Question 11. राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए सदन के कितने सदस्यों की हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है?
Answer: राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए सदन की समस्त संख्या के 1/4 (एक चौथाई) सदस्यों के हस्ताक्षर होना आवश्यक है. इन हस्ताक्षरों के बाद ही महाभियोग का प्रस्ताव सदन में पेश किया जा सकता है. यह सुनिश्चित करता है कि महाभियोग एक गंभीर और विचारशील प्रक्रिया हो.
In simple words: राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए सदन के कुल सदस्यों के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए होते हैं.

🎯 Exam Tip: महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या और उसे पारित करने के लिए आवश्यक बहुमत दोनों अलग-अलग होते हैं, इन पर ध्यान दें.

 

Question 12. संविधान में संशोधन के लिए सदन में कितने बहुमत की आवश्यकता होती है?
Answer: संविधान में संशोधन के लिए दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. कुछ विशेष प्रावधानों के लिए राज्यों की विधानसभाओं की भी आधी से अधिक की मंजूरी जरूरी होती है. यह सुनिश्चित करता है कि संविधान में कोई भी बदलाव व्यापक सहमति से हो और आसानी से न हो पाए.
In simple words: संविधान बदलने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी चाहिए होती है.

🎯 Exam Tip: संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत (दो तिहाई) की आवश्यकता यह दर्शाती है कि संविधान एक मजबूत और स्थायी दस्तावेज है.

 

Question 13. वर्तमान में लोकसभा और राज्यसभा में कितने सदस्य हैं?
Answer: वर्तमान में लोकसभा में 545 सदस्य हैं और राज्यसभा में 245 सदस्य हैं. ये संख्याएँ भारतीय संसद के दोनों सदनों की संरचना को दर्शाती हैं, जो देश की विधायी प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
In simple words: अभी लोकसभा में 545 और राज्यसभा में 245 सदस्य हैं.

🎯 Exam Tip: इन संख्याओं में समय-समय पर छोटे बदलाव हो सकते हैं (जैसे मनोनीत सदस्यों के लिए), लेकिन मूल संरचना यही रहती है.

 

Question 14. लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को हटाने के लिए कितने दिन पहले सूचना दी जाती है?
Answer: लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने से कम-से-कम 14 दिन पहले सूचना दी जाती है. यह नियम उन्हें अपनी बात रखने और तैयारी करने का मौका देता है. यह निष्पक्षता सुनिश्चित करता है.
In simple words: लोकसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को हटाने से 14 दिन पहले इसकी सूचना देनी पड़ती है.

🎯 Exam Tip: यह 14 दिन की अग्रिम सूचना कई संवैधानिक पदों के लिए हटाने की प्रक्रिया में एक मानक प्रावधान है.

 

Question 15. राज्यसभा का प्रमुख पदाधिकारी कौन होता है?
Answer: राज्यसभा का प्रमुख पदाधिकारी सभापति होता है. भारत का उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का पदेन सभापति होता है. सभापति सदन की कार्यवाही को नियंत्रित करता है.
In simple words: राज्यसभा का मुख्य अधिकारी उसका सभापति होता है.

🎯 Exam Tip: उपराष्ट्रपति का पद संवैधानिक रूप से राज्यसभा के सभापति का पद भी होता है, जो सदन की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं.

लोकसभा के लिए योग्यताएँ

 

Question 2. लोकसभा के अध्यक्ष के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन करें।
Answer: लोकसभा के अध्यक्ष के निम्नलिखित कार्य और शक्तियाँ होती हैं:
1. अध्यक्ष लोकसभा की सभी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। वे अपनी इस भूमिका में सदन में शांति व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने का काम करते हैं।
2. लोकसभा का पूरा कार्यक्रम और कार्यवाही अध्यक्ष ही तय करते हैं। वे सदन के नेता की सलाह से विभिन्न विषयों पर वाद-विवाद का समय निश्चित कर सकते हैं।
3. अध्यक्ष सदन की कुछ समितियों के पदेन सभापति भी होते हैं। वे प्रमुख समितियों के अध्यक्षों को नियुक्त करते हैं और उनके मार्गदर्शन में ही समितियाँ काम करती हैं।
4. अध्यक्ष ही यह फैसला करते हैं कि कोई विधेयक 'धन विधेयक' है या नहीं, उनका निर्णय अंतिम होता है।
5. संसद और राष्ट्रपति के बीच सभी तरह के पत्र व्यवहार का काम अध्यक्ष के माध्यम से ही होता है। अध्यक्ष का पद निष्पक्ष होता है और वे सदन के सभी सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
In simple words: लोकसभा अध्यक्ष बैठकों की देखरेख करते हैं, नियमों का पालन करवाते हैं, कामकाज तय करते हैं और यह तय करते हैं कि कौन सा बिल पैसों से जुड़ा है। वे संसद और राष्ट्रपति के बीच संपर्क भी बनाए रखते हैं।

🎯 Exam Tip: अध्यक्ष के कार्यों को बताते समय, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि उनका पद निष्पक्ष होता है और वे सदन के भीतर व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

 

Question 3. राज्यसभा के अधिकार या शक्ति का वर्णन करें जो लोकसभा को प्राप्त नहीं है?
Answer: राज्यसभा को दो ऐसे अधिकार प्राप्त हैं जो लोकसभा को प्राप्त नहीं हैं और जिनका प्रयोग अकेले राज्यसभा ही करती है। ये शक्तियाँ देश के संघीय ढाँचे से जुड़ी हैं और राज्यसभा को राज्यों के एकमात्र प्रतिनिधि होने के नाते मिलती हैं:
(i) अनुच्छेद 249 के अनुसार, राज्यसभा अपने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित कर सकती है। इसके बाद संसद उस विषय पर कानून बना सकती है।
(ii) संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, राज्यसभा ही अपने दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को नई अखिल भारतीय सेवाएँ (जैसे IAS, IPS) स्थापित करने का अधिकार दे सकती है। ये शक्तियाँ राज्यसभा को राज्यों के हितों की रक्षा करने और संघीय व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करती हैं।
In simple words: राज्यसभा के पास दो खास ताकतें हैं जो लोकसभा के पास नहीं हैं। पहली, यह राज्यों के किसी भी विषय को राष्ट्रीय महत्व का बताकर उस पर कानून बनाने की इजाजत दे सकती है। दूसरी, यह नई अखिल भारतीय सेवाएँ (जैसे IAS) बनाने की शुरुआत कर सकती है।

🎯 Exam Tip: इन विशेष शक्तियों को बताते समय, उनके संबंधित अनुच्छेद (249 और 312) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तर को और अधिक सटीक बनाता है।

 

Question 5. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए क्या योग्यताएँ होनी चाहिए?
Answer: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए:
1. उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
2. उसे किसी एक या दो से अधिक उच्च न्यायालयों में लगातार कम से कम 10 वर्ष तक वकील (अधिवक्ता) के रूप में काम करने का अनुभव हो।
3. या फिर, राष्ट्रपति की राय में, वह कानून का एक बहुत बड़ा जानकार होना चाहिए। ये योग्यताएँ सुनिश्चित करती हैं कि न्यायाधीश उच्च न्यायपालिका में सेवा के लिए पर्याप्त अनुभव और कानूनी समझ रखते हों।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए। उसे 10 साल तक हाईकोर्ट में वकील रहा हो या राष्ट्रपति की नजर में कानून का बड़ा जानकार हो।

🎯 Exam Tip: योग्यताओं को सूचीबद्ध करते समय 'या' विकल्प को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ, खासकर वकील के अनुभव और राष्ट्रपति की राय के बीच के अंतर को।

 

Question 6. व्याख्या करें कि सरकार के अभाव में राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती।
Answer: राज्य एक विचार है, जो हमें सीधे तौर पर नहीं दिखता। सरकार ही इस विचार को असली रूप देती है। सरकार लोगों की सामूहिक इच्छा को तय करती है, उसे दिखाती है और उसे लागू करती है। हम यह कह सकते हैं कि सरकार के बिना राज्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती। सरकार ही तय भू-भाग में रहने वाले लोगों के लिए कानून बनाती है, उन्हें लागू करती है, और जो लोग नियमों का पालन नहीं करते, उन्हें सही रास्ते पर लाती है। सरकार अपने नागरिकों के जीवन को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गार्नर के अनुसार, सरकार एक ऐसी मशीन है जिसके द्वारा राज्य के नियम बनाए जाते हैं। यह आम बातों को व्यवस्थित करती है और सभी के फायदे के लिए काम करती है।
In simple words: राज्य एक अदृश्य विचार है, जिसे सरकार ही वास्तविक रूप देती है। सरकार लोगों की इच्छाओं को तय करती और लागू करती है। सरकार के बिना कोई राज्य काम नहीं कर सकता, क्योंकि सरकार ही कानून बनाती और व्यवस्था बनाए रखती है।

🎯 Exam Tip: सरकार और राज्य के बीच के संबंध को समझाते हुए यह स्पष्ट करें कि राज्य एक अमूर्त अवधारणा है जबकि सरकार उसे मूर्त रूप देती है।

 

केंद्र सरकार निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

 

Question 3. संसद के कार्य तथा शक्तियों के बारे में व्याख्या करें।
Answer: संविधान के द्वारा संसद को कई शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जो इस प्रकार हैं:
(i) कानून बनाने की शक्तियाँ- संसद का सबसे मुख्य काम देश के हित में कानून बनाना है। संसद को केंद्र सूची और साझा सूची में दिए गए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है। अगर केंद्र और राज्य दोनों के कानूनों में टकराव हो, तो संसद द्वारा बनाया गया कानून ही लागू होगा। संसद उन विषयों पर भी कानून बना सकती है जो किसी भी सूची में नहीं दिए गए हैं।
(ii) संविधान बदलने की शक्ति- संविधान को बदलने (संशोधन) की महत्वपूर्ण शक्ति संसद के पास है। संविधान में बदलाव का प्रस्ताव केवल संसद में ही पेश किया जा सकता है, किसी राज्य की विधानसभा में नहीं। संसद के दोनों सदन सामान्य बहुमत या दो-तिहाई बहुमत से संविधान के ज्यादातर हिस्सों को बदल सकते हैं। संविधान की कुछ ही व्यवस्थाएँ ऐसी हैं जिनमें बदलाव के लिए भारत के आधे राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी भी जरूरी होती है।
(iii) वित्तीय शक्तियाँ- जनता का प्रतिनिधित्व करने के नाते, भारतीय संसद को देश के पैसों पर पूरा अधिकार है। हर साल वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट जब तक संसद से मंजूर नहीं होता, तब तक सरकार आय-व्यय से संबंधित कोई काम नहीं कर सकती।
(iv) प्रशासनिक शक्तियाँ- भारतीय संविधान ने संसदीय व्यवस्था की स्थापना की है। इसलिए केंद्र सरकार का मंत्रिमंडल संसद के प्रति जवाबदेह होता है। मंत्रिमंडल तभी तक अपने पद पर रहता है जब तक उसे लोकसभा का भरोसा हासिल हो। संसद कई तरीकों से सरकार पर नज़र रख सकती है।
(v) चुनाव संबंधी शक्तियाँ- अनुच्छेद 54 के अनुसार, संसद को कुछ चुनाव संबंधी शक्तियाँ भी मिली हैं। संसद के दोनों सदनों के चुने हुए सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव के लिए बने निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं। अनुच्छेद 66 के अनुसार, संसद के दोनों सदनों के सदस्य उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। संसद भारतीय लोकतंत्र का आधार है, जो कानून बनाने, सरकार पर नियंत्रण रखने और जनता के हितों की रक्षा करने का काम करती है।
In simple words: संसद का मुख्य काम कानून बनाना, संविधान में बदलाव करना, देश के पैसों पर नियंत्रण रखना और सरकार के कामकाज पर नज़र रखना है। यह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी भूमिका निभाती है।

🎯 Exam Tip: संसद की शक्तियों का वर्णन करते समय, प्रत्येक शक्ति को अलग-अलग शीर्षकों के तहत स्पष्ट रूप से समझाएँ, जैसे विधायी, वित्तीय, और प्रशासनिक शक्तियाँ।

 

Question 4. लोकसभा की शक्तियाँ अथवा अधिकार और कार्य के बारे में वर्णन करें।
Answer: लोकसभा की प्रमुख शक्तियाँ और कार्य निम्नलिखित हैं:
(ii) वित्तीय शक्ति- भारतीय संविधान के अनुसार, पैसों से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा ताकत लोकसभा के पास है। राज्यसभा की इसमें भूमिका बहुत कम होती है। अनुच्छेद 109 कहता है कि पैसों से जुड़े बिल (धन विधेयक) केवल लोकसभा में ही लाए जा सकते हैं, राज्यसभा में नहीं। लोकसभा से पास होने के बाद, धन विधेयक राज्यसभा को भेजा जाता है। राज्यसभा को इसे 14 दिनों के अंदर लोकसभा को लौटाना होता है। राज्यसभा इसमें बदलाव के सुझाव दे सकती है, पर उन सुझावों को मानना या न मानना लोकसभा पर निर्भर करता है।
(iii) कार्यपालिका पर नियंत्रण की शक्ति- भारतीय संविधान ने संसदीय प्रणाली की व्यवस्था की है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार का मंत्रिमंडल संसद के प्रति जिम्मेदार होता है। मंत्रिमंडल तभी तक अपने पद पर रहता है जब तक उसे लोकसभा का विश्वास हो।
(iv) संविधान संशोधन संबंधी शक्ति- लोकसभा, राज्यसभा के साथ मिलकर संविधान में बदलाव करने का अधिकार रखती है। संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, संविधान के ज्यादातर हिस्सों में बदलाव का काम अकेली संसद ही करती है।
(v) निर्वाचक मंडल के रूप में कार्य- लोकसभा चुनाव मंडल के रूप में भी काम करती है। अनुच्छेद 54 के तहत, लोकसभा के सदस्य, राज्यसभा के सदस्यों और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। लोकसभा जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है और देश के शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
In simple words: लोकसभा पैसों के बिलों पर अंतिम फैसला लेती है, सरकार के काम पर नज़र रखती है, संविधान बदलने में मदद करती है और राष्ट्रपति के चुनाव में भी वोट देती है।

🎯 Exam Tip: लोकसभा की वित्तीय शक्तियों पर विशेष जोर दें, क्योंकि धन विधेयकों के संबंध में इसकी स्थिति बहुत मजबूत है।

 

Question 5. राज्यसभा के कार्य करें।
Answer: राज्यसभा के निम्नलिखित कार्य और शक्तियाँ प्राप्त हैं:
(i) कानून बनाने की शक्तियाँ- राज्यसभा, लोकसभा के साथ मिलकर कानून बनाने का काम करती है। संविधान के अनुसार, गैर-वित्तीय बिलों (अवित्तीय विधेयकों) के मामले में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के पास बराबर शक्तियाँ हैं।
(ii) संविधान संशोधन की शक्ति- संविधान में बदलाव (संशोधन) करने के मामले में राज्यसभा को लोकसभा के बराबर शक्ति मिली है। अगर संविधान संशोधन के प्रस्ताव पर संसद के दोनों सदनों में सहमति नहीं बन पाती, तो वह प्रस्ताव रद्द हो जाता है।
(iii) वित्तीय शक्ति- राज्यसभा के पास कुछ वित्तीय शक्तियाँ हैं, लेकिन इस मामले में संविधान ने उसे लोकसभा से कमज़ोर स्थिति में रखा है। संविधान के अनुसार, धन विधेयक सबसे पहले लोकसभा में ही पेश किए जाते हैं।
(iv) धन विधेयक पर विचार- लोकसभा से पास होने के बाद, धन विधेयक राज्यसभा में भेजे जाते हैं। राज्यसभा इन विधेयकों पर ज्यादा से ज्यादा 14 दिनों तक विचार कर सकती है। राज्यसभा धन विधेयक पर अपने सुझाव दे सकती है, लेकिन उन सुझावों को मानना या न मानना लोकसभा की मर्जी पर निर्भर करता है।
(vi) अन्य शक्तियाँ- राज्यसभा के पास कई और शक्तियाँ भी हैं। यह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेती है। यह कई बड़े अधिकारियों, जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, अन्य न्यायाधीशों, महालेखापरीक्षक, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, और चुनाव आयोग के आयुक्त पर महाभियोग भी चला सकती है। राज्यसभा, भारतीय संघीय प्रणाली में राज्यों के प्रतिनिधित्व और संतुलन बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण सदन है।
In simple words: राज्यसभा कानून बनाने, संविधान बदलने, धन विधेयकों पर सुझाव देने और बड़े अधिकारियों पर महाभियोग चलाने जैसे कई काम करती है। यह राज्यों का प्रतिनिधित्व भी करती है।

🎯 Exam Tip: राज्यसभा की शक्तियों को समझाते समय, यह स्पष्ट करें कि धन विधेयकों के संबंध में इसकी शक्तियाँ लोकसभा से कम हैं, जबकि अन्य मामलों में यह समान रूप से शक्तिशाली है।

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