RBSE Solutions Class 10 Maths Chapter 5 समान्तर श्रेढ़ी More Ques

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Detailed Chapter 5 समान्तर श्रेढ़ी RBSE Solutions for Class 10 Mathematics

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Class 10 Mathematics Chapter 5 समान्तर श्रेढ़ी RBSE Solutions PDF

विविध प्रश्नमाला 5

 

प्रश्न 1. दो समान्तर श्रेढियों को सार्वअन्तर समान है। उनमें से एक का पहला पद 8 है और दूसरे का 3 है। उनके 30वें पदों के बीच का अन्तर है-
(क) 11
(ख) 3
(ग) 8
(घ) 5
Answer: (घ) 5
In simple words: दोनों समान्तर श्रेढियों के 30वें पदों के बीच का अंतर उनके पहले पदों के अंतर के बराबर होगा, क्योंकि उनका सार्वअन्तर समान है। इसलिए, 8 - 3 = 5 होगा।

🎯 Exam Tip: जब दो समान्तर श्रेढियों का सार्वअन्तर समान होता है, तो उनके किसी भी संगत पद के बीच का अंतर हमेशा समान रहता है।

 

प्रश्न 2. यदि 18, a, b, – 3 समान्तर श्रेढ़ी में है तो a + b =
(क) 19
(ख) 7
(ग) 11
(घ) 15
Answer: (घ) 15
In simple words: एक समान्तर श्रेढ़ी में, बीच का पद अपने पड़ोसी पदों का औसत होता है। यहाँ, a और b बीच के पद हैं, इसलिए \( a = \frac{18+b}{2} \) और \( b = \frac{a+(-3)}{2} \)। इन्हें हल करने पर \( a+b \) का मान 15 आता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी में, यदि तीन पद x, y, z हैं, तो \( 2y = x + z \) होता है। इस गुणधर्म का उपयोग ऐसे प्रश्नों को हल करने में करें।

 

प्रश्न 3. यदि एक समान्तर श्रेढ़ी का 7वाँ तथा 13वाँ पद क्रमशः 34 तथा 64 है, तो इसका 18वाँ पद है-
(क) 89
(ख) 88
(ग) 87
(घ) 90
Answer: (क) 89
In simple words: हमें 7वाँ पद 34 और 13वाँ पद 64 दिया गया है। इन दो जानकारी से हम पहले पद (a) और सार्वअन्तर (d) को निकाल सकते हैं। एक बार हमें a और d मिल जाए, तो हम 18वाँ पद आसानी से ज्ञात कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, समान्तर श्रेढ़ी के nवें पद \( a_n = a + (n-1)d \) के सूत्र का उपयोग करके दो समीकरण बनाएँ और उन्हें हल करें।

 

प्रश्न 4. यदि एक समान्तर श्रेढ़ी को प्रथम पद 2 एवं सार्वअन्तर 8 है तथा n पदों का योग 90 है, तो n का मान होगा
(क) 3
(ख) 15वाँ
(ग) 27वाँ
(घ) 20वाँ
Answer: (क) 3
In simple words: हमें समान्तर श्रेढ़ी का पहला पद, सार्वअन्तर और n पदों का योग दिया गया है। हम योग के सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a + (n-1)d] \) का उपयोग करके n का मान ज्ञात कर सकते हैं। मानों को सूत्र में रखने पर n का मान 3 आता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a + (n-1)d] \) या \( S_n = \frac{n}{2}[a + l] \) दोनों को याद रखें, जहाँ \( l \) अंतिम पद है।

 

प्रश्न 6. यदि एक समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम n पदों का योगफल \( S_n \) है तथा \( S_{2n} = 3S_n \) है, तो \( S_{3n} : S_n \) होगा-
(क) 10
(ख) 11
(ग) 6
(घ) 4
Answer: (ग) 6
In simple words: हमें \( S_{2n} = 3S_n \) दिया गया है। हम योग के सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a + (n-1)d] \) का उपयोग करके इस संबंध में a और d के मानों को निकाल सकते हैं। फिर, \( S_{3n} \) और \( S_n \) का अनुपात ज्ञात किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी के योगफल के गुणधर्मों को ध्यान में रखें, खासकर जब पद \( n, 2n, 3n \) के रूप में दिए गए हों। ऐसे प्रश्नों में अक्सर a और d के बीच एक संबंध स्थापित होता है।

 

प्रश्न 7. एक समान्तर श्रेढ़ी का प्रथम एवं अन्तिम पद क्रमशः 1 तथा 11 है। यदि इसके पदों का योगफल 36 है, तो इसके पदों की संख्या होगी-
(क) 5
(ख) 6
(ग) 9
(घ) 11
Answer: (ख) 6
In simple words: हमें पहला पद \( (a=1) \), अंतिम पद \( (l=11) \) और कुल योग \( (S_n=36) \) दिया गया है। हम समान्तर श्रेढ़ी के योग के सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) का उपयोग करके पदों की संख्या \( n \) ज्ञात कर सकते हैं। यह सूत्र गणना को बहुत सरल बनाता है।

🎯 Exam Tip: जब प्रथम और अंतिम पद दिए हों, तो \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) सूत्र का उपयोग करना \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) से अधिक आसान होता है।

 

प्रश्न 8. समान्तर श्रेढ़ी 3, 5, 7, 9, .... 201 का अन्त से 5वाँ पद लिखिए।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी 3, 5, 7, 9,..., 201 है।
प्रथम पद \( (a) = 3 \)
सार्वअन्तर \( (d) = 5 - 3 = 2 \)
अन्तिम पद \( (l) = 201 \)
अन्त से nवाँ पद ज्ञात करने का सूत्र \( l - (n - 1)d \) है।
इसलिए, अन्त से 5वाँ पद \( = 201 - (5 - 1) \times 2 \)
\( = 201 - 4 \times 2 \)
\( = 201 - 8 \)
\( = 193 \)
In simple words: समान्तर श्रेढ़ी के अंत से कोई पद निकालने के लिए, अंतिम पद से उस पद की दूरी को सार्वअन्तर से गुणा करके घटाते हैं। यहाँ, 201 से शुरू करके, 5वाँ पद 193 है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी के अंत से nवाँ पद ज्ञात करने के लिए सूत्र \( l - (n-1)d \) का उपयोग करें, जहाँ \( l \) अंतिम पद है।

 

प्रश्न 9. संख्याएँ \( \frac{4}{5}, a, 2 \) समान्तर श्रेढ़ी में हैं।
Answer: यदि \( \frac{4}{5}, a, 2 \) समान्तर श्रेढ़ी में हैं, तो बीच का पद अन्य दो पदों का औसत होगा।
इसलिए, \( a - \frac{4}{5} = 2 - a \)
अब, \( a + a = 2 + \frac{4}{5} \)
\( \implies 2a = \frac{10+4}{5} \)
\( \implies 2a = \frac{14}{5} \)
\( \implies a = \frac{14}{5 \times 2} \)
\( \implies a = \frac{7}{5} \)
In simple words: यदि तीन संख्याएँ समान्तर श्रेढ़ी में हों, तो बीच वाली संख्या, पहली और तीसरी संख्या का औसत होती है। इस नियम से a का मान \( \frac{7}{5} \) निकलता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी के क्रमागत पदों का सार्वअन्तर हमेशा समान होता है। इस सिद्धांत का उपयोग करके ऐसे अज्ञात मानों को आसानी से हल किया जा सकता है।

 

प्रश्न 10. प्रथम 1000 धन पूर्णांकों का योग ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें प्रथम 1000 धन पूर्णांकों का योग ज्ञात करना है, जिसका अर्थ है \( S = 1+2+3+...+1000 \)।
यह एक समान्तर श्रेढ़ी है जहाँ प्रथम पद \( (a) = 1 \), अंतिम पद \( (l) = 1000 \) और पदों की संख्या \( (n) = 1000 \) है।
समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग के सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) का प्रयोग करने पर हमें प्राप्त होता है:
\( S_{1000} = \frac{1000}{2}(1+1000) \)
\( = 500 \times 1001 \)
\( = 500500 \)
अतः प्रथम 1000 धन पूर्णांकों का योग 500500 है। यह एक सरल और सीधा परिणाम है।
In simple words: पहले 1000 सीधी संख्याओं को जोड़ने के लिए, हम सबसे पहली और सबसे आखिरी संख्या को जोड़कर, उसे कुल संख्याओं की आधी संख्या से गुणा करते हैं। इससे 500500 आता है।

🎯 Exam Tip: प्रथम n धन पूर्णांकों का योग ज्ञात करने का एक सीधा सूत्र \( S_n = \frac{n(n+1)}{2} \) भी है।

 

प्रश्न 11. क्या संख्याओं को अनुक्रम 5, 11, 17, 23, .... में कोई पद 299 है ?
Answer: हमें दिया गया अनुक्रम 5, 11, 17, 23, .... है।
पहले हम जाँचते हैं कि यह एक समान्तर श्रेढ़ी है या नहीं:
\( a_2 - a_1 = 11 - 5 = 6 \)
\( a_3 - a_2 = 17 - 11 = 6 \)
\( a_4 - a_3 = 23 - 17 = 6 \)
चूँकि क्रमागत पदों के बीच का अंतर समान \( (6) \) है, इसलिए यह एक समान्तर श्रेढ़ी है।
यहाँ, प्रथम पद \( a = 5 \) और सार्वअन्तर \( d = 6 \)।
मान लीजिए, इस समान्तर श्रेढ़ी का nवाँ पद 299 है।
हम जानते हैं कि \( a_n = a + (n-1)d \)
\( 299 = 5 + (n-1)6 \)
\( 299 - 5 = (n-1)6 \)
\( 294 = (n-1)6 \)
\( \frac{294}{6} = n-1 \)
\( 49 = n-1 \)
\( n = 49 + 1 \)
\( n = 50 \)
चूँकि n एक धनात्मक पूर्णांक है, इसलिए 299 इस समान्तर श्रेढ़ी का 50वाँ पद है।
In simple words: पहले हमने देखा कि यह संख्याएँ एक खास पैटर्न में बढ़ रही हैं, जिसे समान्तर श्रेढ़ी कहते हैं। फिर, हमने सूत्र का इस्तेमाल करके यह पता लगाया कि 299 इस पैटर्न में आता है या नहीं, और पता चला कि यह 50वीं संख्या है।

🎯 Exam Tip: किसी पद को समान्तर श्रेढ़ी में जाँचने के लिए, उसे nवें पद के सूत्र में रखकर n का मान ज्ञात करें। यदि n एक धनात्मक पूर्णांक है, तो वह पद श्रेढ़ी में होगा।

 

प्रश्न 12. समान्तर श्रेढ़ी \( 20, 19\frac{1}{4}, 18\frac{1}{2}, 17\frac{3}{4}, \dots \) का कौनसा पद, प्रथम ऋणात्मक पद है?
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 20, 19\frac{1}{4}, 18\frac{1}{2}, 17\frac{3}{4}, \dots \)
प्रथम पद \( a = 20 \)
सार्वअन्तर \( d = 19\frac{1}{4} - 20 = \frac{77}{4} - 20 = \frac{77 - 80}{4} = \frac{-3}{4} \)
हमें वह पद ज्ञात करना है जो पहली बार ऋणात्मक होगा, जिसका अर्थ है \( a_n < 0 \)।
समान्तर श्रेढ़ी के nवें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) है।
इसलिए, \( 20 + (n-1)\left(\frac{-3}{4}\right) < 0 \)
\( 20 < (n-1)\frac{3}{4} \)
\( 80 < (n-1)3 \)
\( \frac{80}{3} < n-1 \)
\( 26.67 < n-1 \)
\( n > 26.67 + 1 \)
\( n > 27.67 \)
चूंकि n एक पूर्णांक है, तो अगला पूर्णांक जो 27.67 से बड़ा है, 28 है।
इसलिए, 28वाँ पद प्रथम ऋणात्मक पद होगा।
In simple words: समान्तर श्रेढ़ी घट रही है। हमें वह पद ढूंढना है जहाँ से संख्याएँ पहली बार शून्य से छोटी हो जाती हैं। हमने nवें पद के सूत्र का इस्तेमाल करके देखा कि n का मान 27.67 से बड़ा होना चाहिए, जिसका मतलब है कि 28वाँ पद पहला ऋणात्मक पद होगा।

🎯 Exam Tip: जब कोई पद ऋणात्मक या धनात्मक होने की शर्त हो, तो \( a_n < 0 \) या \( a_n > 0 \) लेकर असमानता (inequality) को हल करें।

 

प्रश्न 13. चार संख्याएँ समान्तर श्रेढ़ी में हैं। यदि उनका योग 20 तथा उनके वर्गों को योग 120 हो, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
Answer: मान लीजिए चार संख्याएँ समान्तर श्रेढ़ी में \( a - 3d, a - d, a + d, a + 3d \) हैं।
पहली शर्त के अनुसार (उनका योग 20 है):
\( (a - 3d) + (a - d) + (a + d) + (a + 3d) = 20 \)
\( \implies 4a = 20 \)
\( \implies a = \frac{20}{4} = 5 \)
दूसरी शर्त के अनुसार (उनके वर्गों का योग 120 है):
\( (a - 3d)^2 + (a - d)^2 + (a + d)^2 + (a + 3d)^2 = 120 \)
वर्गों को खोलने पर:
\( (a^2 - 6ad + 9d^2) + (a^2 - 2ad + d^2) + (a^2 + 2ad + d^2) + (a^2 + 6ad + 9d^2) = 120 \)
\( \implies 4a^2 + 20d^2 = 120 \)
\( a = 5 \) रखने पर:
\( 4(5)^2 + 20d^2 = 120 \)
\( 4(25) + 20d^2 = 120 \)
\( 100 + 20d^2 = 120 \)
\( 20d^2 = 120 - 100 \)
\( 20d^2 = 20 \)
\( d^2 = 1 \)
\( \implies d = \pm 1 \)
जब \( a = 5 \) और \( d = 1 \) हो, तो संख्याएँ हैं:
\( 5 - 3(1), 5 - 1, 5 + 1, 5 + 3(1) \)
\( = 2, 4, 6, 8 \)
जब \( a = 5 \) और \( d = -1 \) हो, तो संख्याएँ हैं:
\( 5 - 3(-1), 5 - (-1), 5 + (-1), 5 + 3(-1) \)
\( = 5 + 3, 5 + 1, 5 - 1, 5 - 3 \)
\( = 8, 6, 4, 2 \)
अतः संख्याएँ 2, 4, 6, 8 या 8, 6, 4, 2 हैं। ये दोनों क्रम एक ही सेट की संख्याएँ दर्शाते हैं।
In simple words: हमने चार संख्याओं को एक विशेष तरीके से माना ताकि उन्हें जोड़ना आसान हो। उनके योग और वर्गों के योग का इस्तेमाल करके, हमने पहले पद और सार्वअन्तर का पता लगाया। इससे हमें संख्याएँ 2, 4, 6, 8 मिलीं।

🎯 Exam Tip: जब समान्तर श्रेढ़ी में संख्याओं की विषम संख्या माननी हो तो \( a, a \pm d, a \pm 2d \dots \) और जब सम संख्या माननी हो तो \( a \pm d, a \pm 3d, a \pm 5d \dots \) मानना अधिक सुविधाजनक होता है।

 

प्रश्न 14. यदि एक समान्तर श्रेढ़ी के n पदों का योग \( S_n = \frac{3n^2}{2} + \frac{5n}{2} \) हो, तो उसका 25वाँ पद ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें \( S_n = \frac{3n^2 + 5n}{2} \) दिया गया है।
हम जानते हैं कि nवाँ पद \( a_n = S_n - S_{n-1} \) होता है।
सबसे पहले \( S_{n-1} \) ज्ञात करें:
\( S_{n-1} = \frac{3(n-1)^2 + 5(n-1)}{2} \)
\( = \frac{3(n^2 - 2n + 1) + 5n - 5}{2} \)
\( = \frac{3n^2 - 6n + 3 + 5n - 5}{2} \)
\( = \frac{3n^2 - n - 2}{2} \)
अब, \( a_n = S_n - S_{n-1} \)
\( a_n = \frac{3n^2 + 5n}{2} - \frac{3n^2 - n - 2}{2} \)
\( a_n = \frac{3n^2 + 5n - (3n^2 - n - 2)}{2} \)
\( a_n = \frac{3n^2 + 5n - 3n^2 + n + 2}{2} \)
\( a_n = \frac{6n + 2}{2} \)
\( a_n = 3n + 1 \)
अतः, श्रेढ़ी का 25वाँ पद \( a_{25} \) होगा:
\( a_{25} = 3(25) + 1 \)
\( = 75 + 1 \)
\( = 76 \)
अतः 25वाँ पद 76 होगा। यह गणना nवें पद के सूत्र की सटीकता को दर्शाती है।
In simple words: हमें n पदों का योग दिया गया है। किसी भी पद को निकालने के लिए, हम उस पद तक के कुल योग में से उससे एक पद पहले तक के कुल योग को घटा देते हैं। इस तरीके से हमने 25वें पद का मान 76 निकाला।

🎯 Exam Tip: nवें पद को ज्ञात करने का सूत्र \( a_n = S_n - S_{n-1} \) तब बहुत उपयोगी होता है जब आपको सीधे योगफल का सूत्र दिया गया हो।

 

प्रश्न 15. एक पंक्ति के मकानों को क्रमागत रूप में संख्या 1 से 49 तक अंकित किया गया है। दर्शाइये कि x का एक मान ऐसा है कि x से अंकित मकान से पहले के मकानों की संख्याओं का योग उसके बाद आने वाले मकानों की संख्याओं के योग के बराबर है। x का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: मकानों को 1, 2, 3, ..., 49 तक क्रमांकित किया गया है। यह एक समान्तर श्रेढ़ी है जिसका पहला पद \( a=1 \) और सार्वअन्तर \( d=1 \) है।
मान लीजिए x वह मकान संख्या है जिसकी शर्त को पूरा किया जाना है।
शर्त के अनुसार, x से अंकित मकान से पहले के मकानों की संख्याओं का योग, x के बाद आने वाले मकानों की संख्याओं के योग के बराबर है।
x से पहले के मकानों की संख्याओं का योग \( = S_{x-1} \)
x के बाद आने वाले मकानों की संख्याओं का योग \( = S_{49} - S_x \)
इसलिए, \( S_{x-1} = S_{49} - S_x \)
हम जानते हैं कि समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) है।
यहाँ \( a=1, d=1 \)।
\( S_n = \frac{n}{2}[2(1)+(n-1)(1)] = \frac{n}{2}[2+n-1] = \frac{n(n+1)}{2} \)
अब, समीकरण में मान रखने पर:
\( \frac{(x-1)((x-1)+1)}{2} = \frac{49(49+1)}{2} - \frac{x(x+1)}{2} \)
\( \frac{(x-1)x}{2} = \frac{49 \times 50}{2} - \frac{x(x+1)}{2} \)
\( \frac{x^2-x}{2} = \frac{2450}{2} - \frac{x^2+x}{2} \)
दोनों पक्षों को 2 से गुणा करने पर:
\( x^2 - x = 2450 - (x^2 + x) \)
\( x^2 - x = 2450 - x^2 - x \)
\( x^2 = 2450 - x^2 \)
\( 2x^2 = 2450 \)
\( x^2 = \frac{2450}{2} \)
\( x^2 = 1225 \)
\( x = \sqrt{1225} \)
\( x = 35 \)
चूँकि x एक मकान संख्या है, यह धनात्मक होनी चाहिए। इसलिए, x का मान 35 है। यह दर्शाता है कि मकान संख्या 35 एक विशेष स्थिति पर है।
In simple words: हमें एक ऐसा मकान नंबर x खोजना था कि x से पहले के सभी मकानों के नंबरों का जोड़, x के बाद के सभी मकानों के नंबरों के जोड़ के बराबर हो। हमने समान्तर श्रेढ़ी के जोड़ के सूत्र का उपयोग किया और x का मान 35 निकाला।

🎯 Exam Tip: ऐसे शब्दों वाली समस्याओं में, समान्तर श्रेढ़ी के योग के सूत्र को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है। संख्याओं के योग के लिए \( S_n = \frac{n(n+1)}{2} \) का सीधा उपयोग कर सकते हैं।


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. किसी समान्तर श्रेढ़ी का प्रथम पद 2 तथा सार्व अन्तर 3 हो, तो समान्तर श्रेढ़ी होगी-
(A) 2, 5, 8, 11, ....
(B) 2, 6, 18, 54, ....
(C) 2, 4, – 1, 3, .....
(D) 2, 2, 3, 3, 4, 4, ....
Answer: (A) 2, 5, 8, 11, ....
In simple words: समान्तर श्रेढ़ी में, हर अगला पद पिछले पद में सार्वअन्तर जोड़ने से मिलता है। यदि पहला पद 2 और सार्वअन्तर 3 है, तो श्रेढ़ी 2, (2+3)=5, (5+3)=8, (8+3)=11, इस तरह से आगे बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी (AP) की परिभाषा समझें: क्रमागत पदों के बीच का अंतर हमेशा समान होता है, जिसे सार्वअन्तर (d) कहते हैं।

 

प्रश्न 2. 16 पदों वाली समान्तर श्रेढ़ी 2, 5, 8, 11, ..... का अन्तिम पद होगा
(A) 47
(B) 48
(C) 49
(D) 58
Answer: (A) 47
In simple words: हमें पहला पद \( (a=2) \) और सार्वअन्तर \( (d=3) \) दिया गया है। हमें 16वाँ पद निकालना है। nवें पद के सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) का उपयोग करके, 16वाँ पद 47 मिलता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी समान्तर श्रेढ़ी का nवाँ पद ज्ञात करने के लिए हमेशा \( a_n = a + (n-1)d \) सूत्र का उपयोग करें।

 

प्रश्न 4. 3 के प्रथम पाँच गुणजों का योगफल है
(A) 45
(B) 55
(C) 65
(D) 75
Answer: (A) 45
In simple words: 3 के पहले पाँच गुणज 3, 6, 9, 12, 15 हैं। ये एक समान्तर श्रेढ़ी बनाते हैं। इन सभी संख्याओं को जोड़ने पर 45 आता है।

🎯 Exam Tip: गुणज का अर्थ है किसी संख्या से गुणा करने पर प्राप्त होने वाली संख्याएँ। प्रथम n गुणजों का योग ज्ञात करने के लिए आप योग के सूत्र का उपयोग कर सकते हैं।

 

प्रश्न 5. समान्तर श्रेढ़ी 21, 42, 63, 84, .... का कौनसा पद 210 है?
(A) 9th
(B) 10th
(C) 11th.
(D) 12th
Answer: (B) 10th
In simple words: यह श्रेढ़ी 21 के गुणज हैं। हमें 210 किस नंबर का गुणज है, यह पता लगाना है। 210 को 21 से भाग देने पर 10 आता है, इसलिए यह 10वाँ पद है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जहाँ श्रेढ़ी गुणजों की हो, तो nवें पद \( a_n \) को पहले पद \( a \) और सार्वअन्तर \( d \) से संबंधित करके हल करें, या सीधे भाग करके भी पता लगा सकते हैं।

 

प्रश्न 6. श्रेढ़ी \( a + b, a - b, a - 3b, .... \) के 22 पदों का योग होगा
(A) \( 22(a - 20b) \)
(B) \( 22(20b - a) \)
(C) \( 22(20a - b) \)
(D) \( 22(d - b) \)
Answer: (A) \( 22(a - 20b) \)
In simple words: हमें पहला पद \( a + b \) और सार्वअन्तर \( (a-b) - (a+b) = -2b \) दिया गया है। 22 पदों के योग के लिए \( S_n \) सूत्र का उपयोग करने पर, \( 22(a-20b) \) उत्तर आता है।

🎯 Exam Tip: जब पद बीजगणितीय व्यंजकों में हों, तो सावधानीपूर्वक सार्वअन्तर ज्ञात करें और योग सूत्र में प्रतिस्थापित करें। चिन्हों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 7. श्रेढ़ी \( – 4, – 1, 2, 5, ..... \) का 10वाँ पद है
(A) 23
(B) - 23
(C) 32
(D) - 32
Answer: (A) 23
In simple words: इस समान्तर श्रेढ़ी में पहला पद \( -4 \) है और सार्वअन्तर \( -1 - (-4) = 3 \) है। हमें 10वाँ पद निकालना है। nवें पद के सूत्र में मान रखने पर 10वाँ पद 23 आता है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक संख्याओं के साथ सार्वअन्तर ज्ञात करते समय घटाने के चिन्हों का सही उपयोग करें ताकि गलती न हो।

 

प्रश्न 8. समान्तर श्रेढ़ी \( -7, -12, -17, -22, -27, -32, -37, -42, -47, 43 \) में पदों की संख्या है
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( -7, -12, -17, \dots, -42, -47, 43 \)
हमें अंतिम पद को स्पष्ट रूप से 43 के रूप में दिया गया है, जो एक समान्तर श्रेढ़ी का हिस्सा नहीं है क्योंकि श्रेढ़ी घट रही है। प्रश्न में शायद अंतिम पद -47 होना चाहिए या 43 एक त्रुटि है। हम अंतिम पद को \( -47 \) मानकर आगे बढ़ेंगे।
प्रथम पद \( a = -7 \)
सार्वअन्तर \( d = -12 - (-7) = -12 + 7 = -5 \)
अंतिम पद \( a_n = -47 \)
हम जानते हैं \( a_n = a + (n-1)d \)
\( -47 = -7 + (n-1)(-5) \)
\( -47 + 7 = (n-1)(-5) \)
\( -40 = (n-1)(-5) \)
\( \frac{-40}{-5} = n-1 \)
\( 8 = n-1 \)
\( n = 8 + 1 \)
\( n = 9 \)
अतः इस समान्तर श्रेढ़ी में 9 पद हैं। प्रश्न में 43 की उपस्थिति भ्रमित कर सकती है, लेकिन यदि यह अंतिम पद है तो यह दी गई श्रेढ़ी का हिस्सा नहीं है।
In simple words: हमें समान्तर श्रेढ़ी का पहला पद और सार्वअन्तर पता है। अंतिम पद का इस्तेमाल करके, हमने nवें पद के सूत्र से यह पता लगाया कि इस श्रेढ़ी में कुल कितने पद हैं। कुल मिलाकर 9 पद हैं।

🎯 Exam Tip: अंतिम पद दिया होने पर, \( a_n = a + (n-1)d \) सूत्र का उपयोग करके पदों की संख्या (n) को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

 

प्रश्न 9. यदि किसी समान्तर श्रेढ़ी का प्रथम पद 5, अन्तिम पद 45 तथा पदों का योगफल 400 हो, तो पदों की संख्या होगी-
(A) 8
(B) 10
(C) 16
(D) 20
Answer: (C) 16
In simple words: हमें पहला पद \( (a=5) \), अंतिम पद \( (l=45) \) और कुल योग \( (S_n=400) \) दिया गया है। हम योग के सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) का उपयोग करके पदों की संख्या \( n \) ज्ञात कर सकते हैं। मान रखने पर \( n = 16 \) आता है।

🎯 Exam Tip: जब पहला और अंतिम पद दोनों दिए गए हों, तो \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) सूत्र का उपयोग करके गणना सरल हो जाती है।

 

प्रश्न 10. यदि एक समान्तर श्रेढ़ी का nवाँ पद \( (2n + 1) \) है, तो उसके प्रथम तीन पदों का योगफल है
(A) \( 6n + 3 \)
(B) 15
(C) 12
(D) 21
Answer: (B) 15
In simple words: हमें nवाँ पद \( a_n = 2n + 1 \) दिया गया है। पहले तीन पद ज्ञात करने के लिए, हम n की जगह 1, 2 और 3 रखेंगे। फिर इन तीनों पदों को जोड़ देंगे। \( (3+5+7) = 15 \)।

🎯 Exam Tip: किसी समान्तर श्रेढ़ी का nवाँ पद दिए जाने पर, विभिन्न पदों को ज्ञात करने के लिए n के उपयुक्त मानों को प्रतिस्थापित करें।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. समान्तर श्रेढ़ी \( 1, – 2, – 5, – 8, ..... \) का सार्व अन्तर तथा अगले तीन पद लिखिए।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 1, -2, -5, -8, ..... \)
सार्वअन्तर \( d = a_2 - a_1 = -2 - 1 = -3 \)
या \( d = a_3 - a_2 = -5 - (-2) = -5 + 2 = -3 \)
सार्वअन्तर \( d = -3 \) है।
अगले तीन पद ज्ञात करने के लिए, हम अंतिम ज्ञात पद में सार्वअन्तर जोड़ते जाएँगे:
5वाँ पद \( a_5 = a_4 + d = -8 + (-3) = -11 \)
6वाँ पद \( a_6 = a_5 + d = -11 + (-3) = -14 \)
7वाँ पद \( a_7 = a_6 + d = -14 + (-3) = -17 \)
अतः सार्वअन्तर \( -3 \) है और अगले तीन पद \( -11, -14, -17 \) हैं। यह एक घटती हुई श्रेढ़ी है।
In simple words: समान्तर श्रेढ़ी में, किसी भी पद से पिछला पद घटाने पर सार्वअन्तर मिलता है। यहाँ सार्वअन्तर \( -3 \) है। अगले पदों को पाने के लिए, हम हर बार \( -3 \) जोड़ते जाएंगे।

🎯 Exam Tip: जब समान्तर श्रेढ़ी घट रही हो, तो सार्वअन्तर ऋणात्मक होता है। हमेशा दो क्रमागत पदों का अंतर लेकर सार्वअन्तर की पुष्टि करें।

 

प्रश्न 2. समान्तर श्रेढ़ी \( 8, 6, 4, .... \) का 9 पदों तक योग ज्ञात कीजिए।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 8, 6, 4, .... \)
प्रथम पद \( a = 8 \)
सार्वअन्तर \( d = 6 - 8 = -2 \)
पदों की संख्या \( n = 9 \)
समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) है।
मान रखने पर:
\( S_9 = \frac{9}{2}[2(8)+(9-1)(-2)] \)
\( S_9 = \frac{9}{2}[16+(8)(-2)] \)
\( S_9 = \frac{9}{2}[16-16] \)
\( S_9 = \frac{9}{2}[0] \)
\( S_9 = 0 \)
अतः इस समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम 9 पदों का योगफल 0 है। यह दर्शाता है कि ऋणात्मक पदों का योग धनात्मक पदों के योग को संतुलित कर देता है।
In simple words: हमें पहला पद, सार्वअन्तर और कुल पद दिए गए हैं। हमने समान्तर श्रेढ़ी के योग का सूत्र इस्तेमाल किया और पाया कि 9 पदों तक कुल जोड़ शून्य है।

🎯 Exam Tip: यह जाँच करना हमेशा महत्वपूर्ण है कि क्या श्रेढ़ी के कुछ पद शून्य या ऋणात्मक हो रहे हैं, क्योंकि इससे योग पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

 

प्रश्न 3. यदि \( 10, m, -2 \) A.P में है, तो \( m \) का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: यदि 10, m, -2 एक समान्तर श्रेढ़ी में हैं, तो क्रमागत पदों का सार्वअन्तर समान होगा।
इसलिए, \( m - 10 = -2 - m \)
\( m + m = -2 + 10 \)
\( 2m = 8 \)
\( m = \frac{8}{2} \)
\( m = 4 \)
अतः \( m \) का मान 4 है। यह मान दी गई संख्याओं को एक सही समान्तर श्रेढ़ी बनाता है।
In simple words: जब तीन संख्याएँ समान्तर श्रेढ़ी में होती हैं, तो बीच वाली संख्या पहली और तीसरी संख्या के ठीक बीच में होती है, यानि उनका औसत होती है। इस नियम से \( m \) का मान 4 आता है।

🎯 Exam Tip: तीन पदों x, y, z के A.P में होने का मतलब है \( 2y = x + z \), जिसे \( y = \frac{x+z}{2} \) के रूप में भी लिखा जा सकता है।

 

प्रश्न 4. यदि \( a_n = 9 – 5n \) एक समान्तर श्रेढी (A.P.) का nवाँ पद है, तो सार्व अन्तर लिखिये।
Answer: हमें nवाँ पद \( a_n = 9 - 5n \) दिया गया है।
सार्वअन्तर ज्ञात करने के लिए, हमें कोई दो क्रमागत पद चाहिए। हम पहला और दूसरा पद ज्ञात करेंगे।
\( n = 1 \) रखने पर, पहला पद \( a_1 = 9 - 5(1) = 9 - 5 = 4 \)
\( n = 2 \) रखने पर, दूसरा पद \( a_2 = 9 - 5(2) = 9 - 10 = -1 \)
सार्वअन्तर \( d = a_2 - a_1 \)
\( d = -1 - 4 \)
\( d = -5 \)
अतः समान्तर श्रेढ़ी का सार्वअन्तर \( -5 \) है। यह ऋणात्मक सार्वअन्तर दर्शाता है कि श्रेढ़ी घट रही है।
In simple words: हमें किसी पद को निकालने का एक नियम दिया गया है। पहले दो पदों को निकालकर, हमने दूसरे पद से पहले पद को घटाया, जिससे हमें सार्वअन्तर \( -5 \) मिला।

🎯 Exam Tip: यदि समान्तर श्रेढ़ी का nवाँ पद \( a_n = An + B \) के रूप में दिया गया हो, तो सार्वअन्तर हमेशा n का गुणांक (coefficient) A होता है।

 

प्रश्न 5. समान्तर श्रेढ़ी \( 4, 1, -2, -5, ..... \) के अगले दो पद लिखिए।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 4, 1, -2, -5, ..... \)
पहले हम सार्वअन्तर \( d \) ज्ञात करेंगे:
\( d = a_2 - a_1 = 1 - 4 = -3 \)
या \( d = a_3 - a_2 = -2 - 1 = -3 \)
सार्वअन्तर \( d = -3 \) है।
अगले दो पद ज्ञात करने के लिए, हम अंतिम ज्ञात पद में सार्वअन्तर जोड़ते जाएंगे:
5वाँ पद \( a_5 = a_4 + d = -5 + (-3) = -5 - 3 = -8 \)
6वाँ पद \( a_6 = a_5 + d = -8 + (-3) = -8 - 3 = -11 \)
अतः समान्तर श्रेढ़ी के अगले दो पद \( -8 \) और \( -11 \) हैं।
In simple words: हमें समान्तर श्रेढ़ी दी गई है। हमने हर पद के बीच का अंतर देखा, जो कि \( -3 \) है। फिर, अंतिम दिए गए पद में \( -3 \) जोड़कर अगले दो पद ज्ञात किए।

🎯 Exam Tip: किसी भी समान्तर श्रेढ़ी में, अगले पद को प्राप्त करने के लिए वर्तमान पद में सार्वअन्तर जोड़ें।

 

प्रश्न 6. समान्तर श्रेढ़ी \( 7, 5, 3, 1, -1, -3, ..... \) को सार्व अन्तर ज्ञात कीजिए।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 7, 5, 3, 1, -1, -3, ..... \)
सार्वअन्तर \( d = a_2 - a_1 \)
\( d = 5 - 7 \)
\( d = -2 \)
पुष्टि के लिए, हम अन्य क्रमागत पदों का अंतर भी देख सकते हैं:
\( d = a_3 - a_2 = 3 - 5 = -2 \)
\( d = a_4 - a_3 = 1 - 3 = -2 \)
अतः समान्तर श्रेढ़ी का सार्वअन्तर \( -2 \) है। यह एक घटती हुई श्रेढ़ी है।
In simple words: हमने श्रेढ़ी के दूसरे पद में से पहले पद को घटाया। जो संख्या मिली, वह सार्वअन्तर है, जो कि \( -2 \) है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी का सार्वअन्तर \( (d) \) हमेशा स्थिर रहता है। इसे किसी भी पद से उसके ठीक पिछले पद को घटाकर ज्ञात किया जा सकता है।

 

प्रश्न 8. समान्तर श्रेढी का व्यापक पद ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
Answer: समान्तर श्रेढ़ी का व्यापक पद, जिसे nवें पद के रूप में भी जाना जाता है, का सूत्र है:
\( a_n = a + (n-1)d \)
जहाँ \( a_n \) nवाँ पद है,
\( a \) समान्तर श्रेढ़ी का प्रथम पद है,
\( n \) पदों की संख्या है, और
\( d \) समान्तर श्रेढ़ी का सार्वअन्तर है।
यह सूत्र किसी भी समान्तर श्रेढ़ी के किसी भी पद को ज्ञात करने में मदद करता है।
In simple words: समान्तर श्रेढ़ी में कोई भी पद निकालने का सूत्र है \( a_n = a + (n-1)d \)। इसमें \( a \) पहला पद, \( n \) पद का नंबर और \( d \) पद के बीच का अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र समान्तर श्रेढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण सूत्रों में से एक है। इसे अच्छी तरह से याद रखें और समझें।

 

प्रश्न 9. समान्तर श्रेढ़ी के n पदों को योगफल ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
Answer: समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योगफल \( (S_n) \) को ज्ञात करने के दो मुख्य सूत्र हैं:
1. जब प्रथम पद \( (a) \), पदों की संख्या \( (n) \) और सार्वअन्तर \( (d) \) ज्ञात हो:
\( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \)
2. जब प्रथम पद \( (a) \), अंतिम पद \( (l) \) और पदों की संख्या \( (n) \) ज्ञात हो:
\( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \)
यह सूत्र एक साथ कई पदों को जोड़ने का काम आसान कर देते हैं।
In simple words: समान्तर श्रेढ़ी के सभी पदों को एक साथ जोड़ने के लिए दो सूत्र हैं। एक में पहला पद, सार्वअन्तर और पदों की संख्या चाहिए। दूसरे में पहला पद, अंतिम पद और पदों की संख्या चाहिए।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों में दी गई जानकारी के आधार पर सही सूत्र का चुनाव करें। यदि अंतिम पद दिया गया हो, तो दूसरा सूत्र अधिक सीधा होता है।

 

प्रश्न 10. रिक्त खाने के पद का मान ज्ञात कीजिए यदि ये समान्तर श्रेढी \( 2, \boxed{\quad}, 26 \) हैं।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 2, \boxed{\quad}, 26 \)
मान लीजिए रिक्त स्थान में पद \( a_2 \) है। तो श्रेढ़ी \( a_1, a_2, a_3 \) के रूप में है, जहाँ \( a_1=2 \) और \( a_3=26 \)।
समान्तर श्रेढ़ी में, बीच का पद अपने पड़ोसी पदों का औसत होता है।
इसलिए, \( a_2 = \frac{a_1 + a_3}{2} \)
\( a_2 = \frac{2 + 26}{2} \)
\( a_2 = \frac{28}{2} \)
\( a_2 = 14 \)
अतः रिक्त बॉक्स में पद 14 होगा। इस तरह, श्रेढ़ी \( 2, 14, 26 \) बनती है।
In simple words: तीन संख्याएँ समान्तर श्रेढ़ी में हैं, तो बीच वाली संख्या पहली और तीसरी संख्या का औसत होती है। 2 और 26 का औसत 14 है, इसलिए खाली जगह में 14 आएगा।

🎯 Exam Tip: यह "समान्तर माध्य" का एक उदाहरण है। यदि x, y, z समान्तर श्रेढ़ी में हैं, तो y को x और z का समान्तर माध्य कहते हैं, और \( y = \frac{x+z}{2} \) होता है।

 

प्रश्न 1. (i) समान्तर श्रेढ़ी \( 4, 10, 16, 22, \dots \) है या नहीं, और यदि है तो इसका सार्वअन्तर \( (d) \) क्या है?
Answer: दी गई संख्याओं का अनुक्रम है: \( 4, 10, 16, 22, \dots \)
हम क्रमागत पदों के बीच का अंतर ज्ञात करेंगे:
\( a_2 - a_1 = 10 - 4 = 6 \)
\( a_3 - a_2 = 16 - 10 = 6 \)
\( a_4 - a_3 = 22 - 16 = 6 \)
चूंकि प्रत्येक बार अंतर '6' प्राप्त हो रहा है, जो कि समान है।
अतः दिया गया अनुक्रम एक समान्तर श्रेढ़ी है, और इसका सार्वअन्तर \( d = 6 \) है। यह एक बढ़ती हुई श्रेढ़ी है।
In simple words: हमने हर संख्या और उसके ठीक पहले वाली संख्या के बीच का अंतर देखा। जब यह अंतर हर बार 6 आया, तो इसका मतलब है कि यह एक समान्तर श्रेढ़ी है और 6 ही इसका सार्वअन्तर है।

🎯 Exam Tip: किसी अनुक्रम को समान्तर श्रेढ़ी कहने के लिए, उसके क्रमागत पदों के बीच का अंतर हमेशा स्थिर (constant) होना चाहिए।

 

प्रश्न 1. (ii) समान्तर श्रेढ़ी \( -2, 2, -2, 2, \dots \) है या नहीं, और यदि है तो इसका सार्वअन्तर \( (d) \) क्या है?
Answer: दी गई संख्याओं का अनुक्रम है: \( -2, 2, -2, 2, \dots \)
हम क्रमागत पदों के बीच का अंतर ज्ञात करेंगे:
\( a_2 - a_1 = 2 - (-2) = 2 + 2 = 4 \)
\( a_3 - a_2 = -2 - 2 = -4 \)
\( a_4 - a_3 = 2 - (-2) = 2 + 2 = 4 \)
चूंकि क्रमागत पदों के बीच का अंतर समान नहीं है \( (4, -4, 4) \)।
अतः यह सूची एक समान्तर श्रेढ़ी नहीं है। यह एक वैकल्पिक पैटर्न वाली श्रेढ़ी है।
In simple words: हमने हर संख्या और उससे पहले वाली संख्या के बीच का अंतर निकाला। क्योंकि यह अंतर हर बार अलग-अलग आया \( (4, -4) \), इसका मतलब है कि यह एक समान्तर श्रेढ़ी नहीं है।

🎯 Exam Tip: यदि क्रमागत पदों के बीच का अंतर बदलता रहता है, तो अनुक्रम समान्तर श्रेढ़ी नहीं होता है, भले ही उसमें कोई और पैटर्न क्यों न हो।

 

प्रश्न 2. निम्न समान्तर श्रेढ़ियों के सार्वअन्तर ज्ञात कीजिए तथा उनके अगले चार पद भी लिखिए:
(i) \( 0, – 3, – 6, – 9, .... \)
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 0, -3, -6, -9, .... \)
सार्वअन्तर \( d = a_2 - a_1 = -3 - 0 = -3 \)
या \( d = a_3 - a_2 = -6 - (-3) = -6 + 3 = -3 \)
अतः सार्वअन्तर \( d = -3 \) है।
अगले चार पद ज्ञात करने के लिए, हम अंतिम ज्ञात पद में सार्वअन्तर जोड़ते जाएंगे:
5वाँ पद \( a_5 = a_4 + d = -9 + (-3) = -12 \)
6वाँ पद \( a_6 = a_5 + d = -12 + (-3) = -15 \)
7वाँ पद \( a_7 = a_6 + d = -15 + (-3) = -18 \)
8वाँ पद \( a_8 = a_7 + d = -18 + (-3) = -21 \)
अतः सार्वअन्तर \( -3 \) है और अगले चार पद \( -12, -15, -18, -21 \) हैं। यह एक घटती हुई श्रेढ़ी है।
In simple words: हमने दूसरे पद से पहले पद को घटाकर सार्वअन्तर \( -3 \) निकाला। फिर, हर अगले पद को निकालने के लिए, हमने पिछले पद में \( -3 \) जोड़ा।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक सार्वअन्तर वाली श्रेढ़ी के पद लगातार छोटे होते जाते हैं। जोड़ते समय चिन्हों का खास ध्यान रखें।

 

प्रश्न 2. निम्न समान्तर श्रेढ़ियों के सार्वअन्तर ज्ञात कीजिए तथा उनके अगले चार पद भी लिखिए:
(ii) \( -1, \frac{-5}{6}, \frac{-2}{3}, \dots . \)
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( -1, \frac{-5}{6}, \frac{-2}{3}, \dots \)
हम सार्वअन्तर \( d \) ज्ञात करेंगे:
\( d = a_2 - a_1 = \frac{-5}{6} - (-1) = \frac{-5}{6} + 1 = \frac{-5+6}{6} = \frac{1}{6} \)
पुष्टि के लिए:
\( d = a_3 - a_2 = \frac{-2}{3} - \left(\frac{-5}{6}\right) = \frac{-2}{3} + \frac{5}{6} = \frac{-4+5}{6} = \frac{1}{6} \)
अतः सार्वअन्तर \( d = \frac{1}{6} \) है।
अब, अगले चार पद ज्ञात करेंगे (जहाँ \( a_3 = \frac{-2}{3} \)):
4वाँ पद \( a_4 = a_3 + d = \frac{-2}{3} + \frac{1}{6} = \frac{-4+1}{6} = \frac{-3}{6} = \frac{-1}{2} \)
5वाँ पद \( a_5 = a_4 + d = \frac{-1}{2} + \frac{1}{6} = \frac{-3+1}{6} = \frac{-2}{6} = \frac{-1}{3} \)
6वाँ पद \( a_6 = a_5 + d = \frac{-1}{3} + \frac{1}{6} = \frac{-2+1}{6} = \frac{-1}{6} \)
7वाँ पद \( a_7 = a_6 + d = \frac{-1}{6} + \frac{1}{6} = 0 \)
अतः सार्वअन्तर \( \frac{1}{6} \) है और अगले चार पद \( \frac{-1}{2}, \frac{-1}{3}, \frac{-1}{6}, 0 \) हैं। भिन्नों के साथ भी समान नियम लागू होता है।
In simple words: हमने दूसरे पद में से पहले पद को घटाया, जिससे हमें सार्वअन्तर \( \frac{1}{6} \) मिला। फिर, हर अगले पद को निकालने के लिए, हमने पिछले पद में \( \frac{1}{6} \) जोड़ा।

🎯 Exam Tip: भिन्नों के साथ काम करते समय, योग और घटाव के लिए हमेशा समान हर (denominator) का उपयोग करें।

 

प्रश्न 3. यदि किसी अनुक्रम का nवाँ पद \( a_n = 4n + 5 \) है, तो सिद्ध कीजिए कि वह एक समान्तर श्रेढ़ी है तथा उसका सार्वअन्तर भी ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें nवाँ पद \( a_n = 4n + 5 \) दिया गया है।
समान्तर श्रेढ़ी सिद्ध करने के लिए, हमें यह दिखाना होगा कि क्रमागत पदों का अंतर स्थिर है।
हम \( a_{n+1} \) ज्ञात करेंगे:
\( a_{n+1} = 4(n+1) + 5 = 4n + 4 + 5 = 4n + 9 \)
अब, क्रमागत पदों का अंतर ज्ञात करें:
\( a_{n+1} - a_n = (4n + 9) - (4n + 5) \)
\( = 4n + 9 - 4n - 5 \)
\( = 4 \)
चूंकि \( a_{n+1} - a_n \) का मान \( 4 \) है, जो कि \( n \) पर निर्भर नहीं करता (यह एक स्थिर मान है)।
अतः दिया गया अनुक्रम एक समान्तर श्रेढ़ी है और इसका सार्वअन्तर \( d = 4 \) है। यह परिणाम nवें पद के सीधे सूत्र से मिलता है।
In simple words: हमने एक पद के नियम को लिया और दिखाया कि कोई भी पद उसके पिछले पद से हमेशा 4 ज्यादा होता है। क्योंकि यह अंतर हमेशा समान है, इसलिए यह एक समान्तर श्रेढ़ी है और उसका सार्वअन्तर 4 है।

🎯 Exam Tip: यदि nवाँ पद \( a_n = An + B \) के रूप में है, तो सार्वअन्तर \( A \) होता है और यह हमेशा एक समान्तर श्रेढ़ी होती है।

 

प्रश्न 4. निम्नलिखित स्थितियों में से किन स्थितियों में सम्बन्ध संख्याओं की सूची समान्तर श्रेढ़ी बनाती है और क्यों ?
(i) किसी बेलन (cylinder) में उपस्थित हवा की मात्रा, जबकि निकालने वाला पम्प प्रत्येक बार बेलन की शेष हवा का \( \frac{1}{4} \) भाग बाहर निकाल देता है।
Answer: मान लीजिए बेलन में उपस्थित वायु की प्रारंभिक मात्रा \( x \) है।
पहली बार \( \frac{1}{4} \) भाग निकालने के बाद, शेष हवा \( = x - \frac{x}{4} = \frac{3x}{4} \)
दूसरी बार \( \frac{1}{4} \) भाग निकालने के बाद, शेष हवा \( = \frac{3x}{4} - \frac{1}{4}\left(\frac{3x}{4}\right) = \frac{3x}{4} - \frac{3x}{16} = \frac{12x - 3x}{16} = \frac{9x}{16} \)
तीसरी बार \( \frac{1}{4} \) भाग निकालने के बाद, शेष हवा \( = \frac{9x}{16} - \frac{1}{4}\left(\frac{9x}{16}\right) = \frac{9x}{16} - \frac{9x}{64} = \frac{36x - 9x}{64} = \frac{27x}{64} \)
इस प्रकार, बेलन में उपस्थित वायु की मात्रा की सूची निम्न है: \( x, \frac{3x}{4}, \frac{9x}{16}, \frac{27x}{64}, \dots \)
अब हम क्रमागत पदों के बीच का अंतर ज्ञात करेंगे:
पहला अंतर \( d_1 = \frac{3x}{4} - x = \frac{-x}{4} \)
दूसरा अंतर \( d_2 = \frac{9x}{16} - \frac{3x}{4} = \frac{9x - 12x}{16} = \frac{-3x}{16} \)
चूंकि \( d_1 \neq d_2 \), इसलिए क्रमागत पदों के बीच का अंतर स्थिर नहीं है।
अतः यह संख्याओं की सूची एक समान्तर श्रेढ़ी नहीं बनाती है। यह एक गुणोत्तर श्रेढ़ी का उदाहरण है।
In simple words: अगर हम हर बार बची हुई हवा का एक चौथाई हिस्सा निकालते हैं, तो हर बार जो हवा बचती है, वह समान अंतर से कम नहीं होती, बल्कि गुणा के हिसाब से कम होती है। इसलिए यह समान्तर श्रेढ़ी नहीं है।

🎯 Exam Tip: जब कोई मात्रा एक निश्चित प्रतिशत या भिन्न से बार-बार घटाई या बढ़ाई जाती है, तो परिणाम अक्सर समान्तर श्रेढ़ी के बजाय गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाते हैं।

 

प्रश्न 4. निम्नलिखित स्थितियों में से किन स्थितियों में सम्बन्ध संख्याओं की सूची समान्तर श्रेढ़ी बनाती है और क्यों ?
(ii) खाते के प्रत्येक वर्ष का मिश्रधन, जबकि 10,000 रु. की राशि 8% वार्षिक की दर से चक्रवृद्धि ब्याज पर निवेश की जाती है।
Answer: प्रारंभिक राशि \( P = 10,000 \) रु.
ब्याज दर \( r = 8\% \) वार्षिक।
चक्रवृद्धि ब्याज के तहत, मिश्रधन \( A = P\left(1 + \frac{r}{100}\right)^n \) सूत्र से ज्ञात किया जाता है।
पहले वर्ष के अंत में मिश्रधन \( A_1 = 10000\left(1 + \frac{8}{100}\right)^1 = 10000(1.08) = 10800 \) रु.
दूसरे वर्ष के अंत में मिश्रधन \( A_2 = 10000(1.08)^2 = 10000 \times 1.1664 = 11664 \) रु.
तीसरे वर्ष के अंत में मिश्रधन \( A_3 = 10000(1.08)^3 = 10000 \times 1.259712 = 12597.12 \) रु.
इस प्रकार, मिश्रधन की सूची है: \( 10000, 10800, 11664, 12597.12, \dots \)
अब हम क्रमागत पदों के बीच का अंतर ज्ञात करेंगे:
पहला अंतर \( d_1 = 10800 - 10000 = 800 \)
दूसरा अंतर \( d_2 = 11664 - 10800 = 864 \)
चूंकि \( d_1 \neq d_2 \), इसलिए क्रमागत पदों के बीच का अंतर स्थिर नहीं है।
अतः यह सूची एक समान्तर श्रेढ़ी नहीं बनाती है। चक्रवृद्धि ब्याज के तहत राशि हमेशा गुणोत्तर श्रेढ़ी में बढ़ती है।
In simple words: चक्रवृद्धि ब्याज में, आपकी रकम हर साल एक निश्चित प्रतिशत से बढ़ती है, न कि एक निश्चित रकम से। इसलिए, हर साल जो पैसा बढ़ता है, वह अलग-अलग होता है, जिससे यह समान्तर श्रेढ़ी नहीं बनती।

🎯 Exam Tip: चक्रवृद्धि ब्याज में मूलधन पर ब्याज और पहले के ब्याज पर भी ब्याज लगता है, जिससे वृद्धि एक समान दर पर नहीं होती है। यह एक महत्वपूर्ण वित्तीय अवधारणा है।

 

प्रश्न 5. समान्तर श्रेढ़ी \( 10, 7, 4, .... \) का 30वाँ एवं nवाँ (व्यापक पद) ज्ञात कीजिए।
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 10, 7, 4, .... \)
प्रथम पद \( a = 10 \)
सार्वअन्तर \( d = 7 - 10 = -3 \)
पहले 30वाँ पद ज्ञात करते हैं। nवें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) है।
\( a_{30} = 10 + (30-1)(-3) \)
\( = 10 + (29)(-3) \)
\( = 10 - 87 \)
\( = -77 \)
अब, व्यापक पद \( (a_n) \) ज्ञात करते हैं:
\( a_n = a + (n-1)d \)
\( a_n = 10 + (n-1)(-3) \)
\( a_n = 10 - 3n + 3 \)
\( a_n = 13 - 3n \)
अतः 30वाँ पद \( -77 \) है और व्यापक पद \( a_n = 13 - 3n \) है। यह दिखाता है कि घटती श्रेढ़ी में पद ऋणात्मक भी हो सकते हैं।
In simple words: हमने पहले पद \( (10) \) और सार्वअन्तर \( (-3) \) को निकाला। फिर, 30वें पद और किसी भी nवें पद को निकालने के लिए nवें पद के सूत्र का इस्तेमाल किया।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी का व्यापक पद \( (a_n) \) एक ऐसा सूत्र देता है जिससे श्रेढ़ी के किसी भी पद को, सिर्फ उसकी स्थिति \( (n) \) को जानकर, निकाला जा सकता है।

 

प्रश्न 6. समान्तर श्रेढ़ी \( 3, 15, 27, 39, ... \) का कौनसा पद 639 है ?
Answer: दी गई समान्तर श्रेढ़ी है: \( 3, 15, 27, 39, ... \)
प्रथम पद \( a = 3 \)
सार्वअन्तर \( d = 15 - 3 = 12 \)
मान लीजिए nवाँ पद 639 है, यानी \( a_n = 639 \)।
हम जानते हैं कि nवें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) है।
मान रखने पर:
\( 639 = 3 + (n-1)12 \)
\( 639 - 3 = (n-1)12 \)
\( 636 = (n-1)12 \)
\( \frac{636}{12} = n-1 \)
\( 53 = n-1 \)
\( n = 53 + 1 \)
\( n = 54 \)
अतः इस समान्तर श्रेढ़ी का 54वाँ पद 639 है। यह गणना दिखाती है कि 639 इस बढ़ती हुई श्रेढ़ी का एक वैध पद है।
In simple words: हमें समान्तर श्रेढ़ी दी गई है और हमें यह पता लगाना है कि 639 इस श्रेढ़ी का कौन सा नंबर वाला पद है। हमने nवें पद के सूत्र का इस्तेमाल किया और पाया कि 639 इस श्रेढ़ी का 54वाँ पद है।

🎯 Exam Tip: जब nवें पद का मान दिया हो और n ज्ञात करना हो, तो सूत्र को सावधानी से पुनर्व्यवस्थित करके n का मान ज्ञात करें।

 

Question 8. क्या समान्तर श्रेढ़ी 3, 7, 11, .... का एक पद 184 है ?
Answer: हमें समान्तर श्रेढ़ी 3, 7, 11, ... दी गई है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 3 है और सार्वअन्तर (d) \( 7 - 3 = 4 \) है। हमें यह पता लगाना है कि क्या 184 इस श्रेढ़ी का कोई पद है। हम मानते हैं कि 184 इस श्रेढ़ी का n-वाँ पद (\( a_n \)) है। समान्तर श्रेढ़ी के n-वें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर, हमें \( 184 = 3 + (n-1)4 \) मिलता है। इसे हल करने पर, \( 184 = 3 + 4n - 4 \implies 184 = 4n - 1 \implies 185 = 4n \implies n = \frac{185}{4} \) प्राप्त होता है। चूँकि n का मान एक पूरी संख्या (प्राकृत संख्या) नहीं है, बल्कि एक भिन्न है, इसलिए 184 इस समान्तर श्रेढ़ी का कोई पद नहीं हो सकता है। इस तरह के प्रश्नों में, यदि 'n' एक धनात्मक पूर्णांक नहीं आता है, तो दी गई संख्या उस श्रेढ़ी का पद नहीं होती।
In simple words: हम देखते हैं कि 184 को इस श्रेढ़ी का एक पद मानकर हल करने पर 'n' एक पूरी संख्या नहीं आती। इसका मतलब है कि 184 इस श्रेढ़ी का कोई पद नहीं है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, 'n' का मान हमेशा एक धनात्मक पूर्णांक (पूरी संख्या) आना चाहिए; यदि नहीं आता है, तो वह संख्या श्रेढ़ी का पद नहीं होती।

 

Question 9. दो अंकों वाली कितनी संख्याएँ 7 से भाज्य हैं ?
Answer: दो अंकों की सबसे छोटी संख्या जो 7 से पूरी तरह भाग होती है, वह 14 है। दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या जो 7 से पूरी तरह भाग होती है, वह 98 है। इस तरह, हमें 7 से भाग होने वाली दो अंकों की संख्याओं की एक समान्तर श्रेढ़ी मिलती है: 14, 21, 28, ..., 98। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 14 है और सार्वअन्तर (d) 7 है। हमें कुल पदों की संख्या 'n' ज्ञात करनी है। हम जानते हैं कि n-वाँ पद (\( a_n \)) 98 है। समान्तर श्रेढ़ी के n-वें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) होता है। मान रखने पर, \( 98 = 14 + (n-1)7 \) मिलता है। इसे हल करने पर, \( 98 - 14 = (n-1)7 \implies 84 = 7(n-1) \implies 12 = n-1 \implies n = 13 \) प्राप्त होता है। इसलिए, दो अंकों वाली कुल 13 संख्याएँ हैं जो 7 से भाज्य हैं। ऐसी समस्याओं में, सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या खोजना महत्वपूर्ण है जो दी गई शर्त को पूरा करती हैं, क्योंकि वे श्रेढ़ी की सीमाएँ तय करती हैं।
In simple words: 7 से भाग होने वाली दो अंकों की सबसे छोटी संख्या 14 है और सबसे बड़ी 98 है। यह एक समान्तर श्रेढ़ी बनती है। सूत्र से, हमें कुल 13 संख्याएँ मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: दो अंकों वाली संख्याओं का मतलब 10 से 99 तक है। सबसे पहले, इस सीमा में 7 से भाज्य पहली और आखिरी संख्या ढूंढें।

 

Question 10. समान्तर श्रेढ़ी 3, 8, 13, ...., 253 के अन्तिम पद से 20वाँ पद ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें समान्तर श्रेढ़ी 3, 8, 13, ..., 253 दी गई है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 3 है, सार्वअन्तर (d) \( 8 - 3 = 5 \) है, और अन्तिम पद (l) 253 है। हमें अन्तिम पद से 20वाँ पद ज्ञात करना है। अन्तिम पद से n-वाँ पद ज्ञात करने का सूत्र \( l - (n-1)d \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर, हमें \( 253 - (20-1) \times 5 \) मिलता है। यह \( 253 - 19 \times 5 \) के बराबर है, जो \( 253 - 95 \) होता है। इसे हल करने पर, हमें 158 मिलता है। इस प्रकार, समान्तर श्रेढ़ी का अन्तिम पद से 20वाँ पद 158 है। अन्तिम पद से पद ज्ञात करते समय, हम प्रभावी रूप से श्रेढ़ी को उलट देते हैं और सामान्य सूत्र का उपयोग करते हैं।
In simple words: दी गई श्रेढ़ी में, पहला पद 3, सार्वअन्तर 5 और आखिरी पद 253 है। पीछे से 20वाँ पद निकालने के लिए, हम आखिरी पद में से \( (20-1) \times \) सार्वअन्तर को घटाते हैं। गणना करने पर, यह 158 आता है।

🎯 Exam Tip: अन्तिम पद से n-वाँ पद निकालने के लिए सूत्र \( l - (n-1)d \) याद रखें, जहाँ \( l \) अन्तिम पद है।

 

Question 11. 10 और 250 के बीच में 4 के कितने गुणज हैं?
Answer: हमें 10 और 250 के बीच 4 के गुणज खोजने हैं। 10 से बड़ी और 4 से भाज्य पहली संख्या 12 है। 250 से छोटी और 4 से भाज्य सबसे बड़ी संख्या ज्ञात करने के लिए, हम 250 को 4 से भाग देते हैं, तो शेष 2 बचता है। इसलिए, \( 250 - 2 = 248 \) वह सबसे बड़ी संख्या है जो 4 से भाज्य है। इस प्रकार, हमें समान्तर श्रेढ़ी मिलती है: 12, 16, 20, ..., 248। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 12 है, सार्वअन्तर (d) 4 है, और n-वाँ पद (\( a_n \)) 248 है। हमें पदों की संख्या 'n' ज्ञात करनी है। सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) का उपयोग करके, हम \( 248 = 12 + (n-1)4 \) लिखते हैं। इसे हल करने पर, \( 248 - 12 = 4n - 4 \implies 236 = 4n - 4 \implies 240 = 4n \implies n = 60 \) प्राप्त होता है। अतः, 10 और 250 के बीच 4 के कुल 60 गुणज हैं। इस तरह की श्रेढ़ियों में, 'a' और 'd' ज्ञात करने के बाद, 'n' का मान निकालने के लिए \( a_n \) का सूत्र सबसे प्रभावी होता है।
In simple words: 10 और 250 के बीच, 4 से भाग होने वाली पहली संख्या 12 है और आखिरी 248 है। यह एक समान्तर श्रेढ़ी बनती है जिसका पहला पद 12 और सार्वअन्तर 4 है। पदों की संख्या निकालने पर, हमें 60 गुणज मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: "के बीच" का मतलब है कि दी गई सीमा संख्याएँ (जैसे 10 और 250) शामिल नहीं हैं।

 

Question 13. समान्तर श्रेढ़ी 3, 15, 27, 39... का कौनसा पद उसके 54वें पद से 132 अधिक होगा?
Answer: हमें समान्तर श्रेढ़ी 3, 15, 27, 39... दी गई है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 3 है और सार्वअन्तर (d) \( 15 - 3 = 12 \) है। हमें वह पद ज्ञात करना है जो इसके 54वें पद से 132 अधिक होगा। सबसे पहले, हम 54वाँ पद (\( a_{54} \)) ज्ञात करते हैं। सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) का उपयोग करके, \( a_{54} = 3 + (54-1) \times 12 = 3 + 53 \times 12 = 3 + 636 = 639 \) मिलता है। अब, हमें वह पद (\( a_n \)) चाहिए जो 54वें पद से 132 अधिक हो, तो \( a_n = 639 + 132 = 771 \)। फिर से \( a_n = a + (n-1)d \) सूत्र का उपयोग करते हुए, हम \( 771 = 3 + (n-1)12 \) लिखते हैं। इसे हल करने पर, \( 771 - 3 = 12(n-1) \implies 768 = 12(n-1) \implies n-1 = \frac{768}{12} \implies n-1 = 64 \implies n = 65 \) प्राप्त होता है। अतः, इस समान्तर श्रेढ़ी का 65वाँ पद उसके 54वें पद से 132 अधिक होगा। यह प्रश्न समान्तर श्रेढ़ी के दो मूल सूत्रों – n-वें पद और दो पदों के बीच संबंध – को जोड़ने में मदद करता है।
In simple words: पहले, हम श्रेढ़ी का 54वाँ पद निकालते हैं, जो 639 आता है। फिर, हम उसमें 132 जोड़ते हैं, जिससे 771 मिलता है। अब, हम यह पता लगाते हैं कि 771 कौन सा पद है। गणना करने पर, यह 65वाँ पद निकलता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों को दो चरणों में हल करें - पहले आवश्यक पद (जैसे 54वाँ पद) ज्ञात करें, फिर दिए गए संबंध का उपयोग करके नए पद की संख्या ज्ञात करें।

 

Question 14. दो समान्तर श्रेढ़ियों का सार्वअन्तर समान है। यदि इनके 100वें पदों का अन्तर 100 है, तो इनके 1000वें पदों का अन्तर क्या होगा?
Answer: माना कि पहली समान्तर श्रेढ़ी का प्रथम पद \( a \) और दूसरी समान्तर श्रेढ़ी का प्रथम पद \( A \) है। दोनों का सार्वअन्तर \( d \) समान है। पहली श्रेढ़ी का 100वाँ पद \( a_{100} = a + (100-1)d = a + 99d \) है। दूसरी श्रेढ़ी का 100वाँ पद \( A_{100} = A + (100-1)d = A + 99d \) है। प्रश्न के अनुसार, उनके 100वें पदों का अन्तर 100 है: \( A_{100} - a_{100} = 100 \implies (A + 99d) - (a + 99d) = 100 \implies A - a = 100 \)। अब, हमें उनके 1000वें पदों का अन्तर ज्ञात करना है। पहली श्रेढ़ी का 1000वाँ पद \( a_{1000} = a + (1000-1)d = a + 999d \) है। दूसरी श्रेढ़ी का 1000वाँ पद \( A_{1000} = A + (1000-1)d = A + 999d \) है। उनके 1000वें पदों का अन्तर: \( A_{1000} - a_{1000} = (A + 999d) - (a + 999d) = A - a \)। क्योंकि हमने पहले ही पता लगा लिया है कि \( A - a = 100 \), तो उनके 1000वें पदों का अन्तर भी 100 ही होगा। यदि दो समान्तर श्रेढ़ियों का सार्वअन्तर समान है, तो उनके किसी भी संगत पद का अन्तर हमेशा उनके प्रथम पदों के अन्तर के बराबर होता है।
In simple words: दो अलग-अलग समान्तर श्रेढ़ियों का सार्वअन्तर एक जैसा है। उनके 100वें पदों का अन्तर 100 है। इसका मतलब है कि उनके पहले पदों का अन्तर भी 100 है। इसलिए, उनके 1000वें पदों का अन्तर भी 100 ही होगा।

🎯 Exam Tip: यदि दो AP का सार्वअन्तर समान है, तो उनके किसी भी nवें पद का अन्तर उनके प्रथम पदों के अन्तर के बराबर रहता है।

 

Question 15. तीन संख्याएँ समान्तर श्रेढ़ी में हैं। यदि उनका योग -3 तथा गुणनफल 8 हो, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
Answer: मान लीजिए तीन संख्याएँ जो समान्तर श्रेढ़ी में हैं, वे \( (a-d), a, (a+d) \) हैं। प्रश्न के अनुसार, इन संख्याओं का योग -3 है। तो, \( (a-d) + a + (a+d) = -3 \)। इसे हल करने पर, \( 3a = -3 \implies a = -1 \) मिलता है। प्रश्न के अनुसार, इन संख्याओं का गुणनफल 8 है। तो, \( (a-d) \times a \times (a+d) = 8 \)। यह \( a(a^2 - d^2) = 8 \) बन जाता है। अब, \( a = -1 \) का मान रखने पर, \( -1((-1)^2 - d^2) = 8 \implies -1(1 - d^2) = 8 \implies -1 + d^2 = 8 \implies d^2 = 9 \implies d = \pm 3 \) मिलता है। दो स्थितियाँ संभव हैं: 1. जब \( a = -1 \) और \( d = 3 \): संख्याएँ होंगी \( -1-3, -1, -1+3 \), जो कि \( -4, -1, 2 \) हैं। 2. जब \( a = -1 \) और \( d = -3 \): संख्याएँ होंगी \( -1-(-3), -1, -1+(-3) \), जो कि \( 2, -1, -4 \) हैं। दोनों ही स्थितियों में, संख्याओं का समूह समान रहता है, बस क्रम बदल जाता है। इस प्रकार के प्रश्नों में, समान्तर श्रेढ़ी की संख्याओं को \( (a-d), a, (a+d) \) मानना गणना को बहुत सरल बनाता है।
In simple words: हम तीन संख्याओं को \( (a-d), a, (a+d) \) मानते हैं। उनका योग -3 है, जिससे \( a = -1 \) मिलता है। उनका गुणनफल 8 है, जिससे \( d = \pm 3 \) मिलता है। इन मानों से, संख्याएँ \( -4, -1, 2 \) या \( 2, -1, -4 \) आती हैं।

🎯 Exam Tip: जब समान्तर श्रेढ़ी में विषम संख्या में पद लेने हों, तो उन्हें \( a, a \pm d, a \pm 2d, ... \) के रूप में लेना हमेशा आसान होता है।

 

Question 16. 32 को चार भागों में विभाजित कीजिए कि चारों भाग समान्तर श्रेढ़ी में हों तथा प्रथम व अन्तिम संख्याओं का गुणनफल और मध्य की दो संख्याओं के गुणनफल का अनुपात 7:15 हो।
Answer: माना कि 32 को चार भागों में विभाजित किया गया है जो समान्तर श्रेढ़ी में हैं। ये भाग \( (a-3d), (a-d), (a+d), (a+3d) \) हैं। इनका योग 32 है: \( (a-3d) + (a-d) + (a+d) + (a+3d) = 32 \implies 4a = 32 \implies a = 8 \)। प्रश्न के अनुसार, प्रथम व अन्तिम संख्याओं का गुणनफल और मध्य की दो संख्याओं के गुणनफल का अनुपात 7:15 है: \( \frac{(a-3d)(a+3d)}{(a-d)(a+d)} = \frac{7}{15} \implies \frac{a^2 - 9d^2}{a^2 - d^2} = \frac{7}{15} \)। अब \( a = 8 \) का मान रखने पर: \( \frac{8^2 - 9d^2}{8^2 - d^2} = \frac{7}{15} \implies \frac{64 - 9d^2}{64 - d^2} = \frac{7}{15} \)। तिरछा गुणा करने पर: \( 15(64 - 9d^2) = 7(64 - d^2) \implies 960 - 135d^2 = 448 - 7d^2 \implies 512 = 128d^2 \implies d^2 = 4 \implies d = \pm 2 \)। जब \( a = 8 \) और \( d = 2 \), तो संख्याएँ \( 2, 6, 10, 14 \) हैं। जब \( a = 8 \) और \( d = -2 \), तो संख्याएँ \( 14, 10, 6, 2 \) हैं। दोनों ही स्थितियों में संख्याएँ \( 2, 6, 10, 14 \) ही आती हैं, बस क्रम अलग हो सकता है। जब समान्तर श्रेढ़ी में सम संख्या में पद लेने हों, तो उन्हें \( (a-3d), (a-d), (a+d), (a+3d) \) के रूप में मानना गणना को सरल बनाता है।
In simple words: हमने 32 को चार भागों में बांटा जो एक समान्तर श्रेढ़ी में हैं। उनका योग 32 है, जिससे हमें पहला भाग 'a' के रूप में 8 मिलता है। दिए गए अनुपात (7:15) की शर्त का उपयोग करके, हमने सार्वअन्तर 'd' को \( \pm 2 \) पाया। इससे हमें संख्याएँ \( 2, 6, 10, 14 \) मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: चार पदों वाली AP को \( (a-3d), (a-d), (a+d), (a+3d) \) के रूप में मानने से योग में \( d \) वाले पद कट जाते हैं, जिससे \( a \) का मान आसानी से मिल जाता है।

 

Question 17. योगफल ज्ञात कीजिए-
(i) समान्तर श्रेढी 1, 4, 7, 10, .... के 20 पदों का
(ii) समान्तर श्रेढी 2, 7, 12, .... के 10 पदों का
Answer:
(i) हमें समान्तर श्रेढ़ी 1, 4, 7, 10, ... के 20 पदों का योग ज्ञात करना है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 1 है और सार्वअन्तर (d) \( 4-1=3 \) है। पदों की संख्या (n) 20 है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर, हमें \( S_{20} = \frac{20}{2}[2(1) + (20-1)3] \) मिलता है। इसे हल करने पर, \( S_{20} = 10[2 + 19 \times 3] = 10[2 + 57] = 10[59] = 590 \) प्राप्त होता है।
(ii) हमें समान्तर श्रेढ़ी 2, 7, 12, ... के 10 पदों का योग ज्ञात करना है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 2 है और सार्वअन्तर (d) \( 7-2=5 \) है। पदों की संख्या (n) 10 है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर, हमें \( S_{10} = \frac{10}{2}[2(2) + (10-1)5] \) मिलता है। इसे हल करने पर, \( S_{10} = 5[4 + 9 \times 5] = 5[4 + 45] = 5[49] = 245 \) प्राप्त होता है। समान्तर श्रेढ़ी के योग का सूत्र किसी भी क्रम के कई पदों का योग एक साथ निकालने में मदद करता है।
In simple words:
(i) पहला पद 1, सार्वअन्तर 3 है। 20 पदों का योग निकालने के लिए, सूत्र \( S_n \) में मान डालते हैं। हल करने पर 590 आता है।
(ii) पहला पद 2, सार्वअन्तर 5 है। 10 पदों का योग निकालने के लिए, सूत्र \( S_n \) में मान डालते हैं। हल करने पर 245 आता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर श्रेढ़ी के योगफल के दो सूत्र होते हैं - \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) और \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \)। सही सूत्र का उपयोग करें, जो दी गई जानकारी के लिए उपयुक्त हो।

 

Question 18. निम्नलिखित का योगफल ज्ञात कीजिए-
(i) 34 + 32 + 30 + ..... + 10
(ii) (-5) + (-8) + (- 11) + ..... + (- 230)
Answer:
(i) हमें समान्तर श्रेढ़ी 34 + 32 + 30 + ... + 10 का योग ज्ञात करना है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 34 है, सार्वअन्तर (d) \( 32-34 = -2 \) है, और अन्तिम पद (l) 10 है। सबसे पहले, हम पदों की संख्या (n) ज्ञात करेंगे। n-वें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) होता है। मान रखने पर, \( 10 = 34 + (n-1)(-2) \) मिलता है। इसे हल करने पर \( -24 = -2(n-1) \implies 12 = n-1 \implies n = 13 \) आता है। अब, योगफल का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) का उपयोग करते हैं। \( S_{13} = \frac{13}{2}(34+10) = \frac{13}{2}(44) = 13 \times 22 = 286 \)।
(ii) हमें समान्तर श्रेढ़ी (-5) + (-8) + (-11) + ... + (-230) का योग ज्ञात करना है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) -5 है, सार्वअन्तर (d) \( -8-(-5) = -3 \) है, और अन्तिम पद (l) -230 है। पहले पदों की संख्या (n) ज्ञात करेंगे। \( a_n = a + (n-1)d \) सूत्र में मान रखने पर, \( -230 = -5 + (n-1)(-3) \) मिलता है। इसे हल करने पर \( -225 = -3(n-1) \implies 75 = n-1 \implies n = 76 \) आता है। अब, योगफल का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) का उपयोग करते हैं। \( S_{76} = \frac{76}{2}(-5 + (-230)) = 38(-235) = -8930 \)। इस तरह की समस्याओं को हल करने के लिए, पहले 'n' ज्ञात करना महत्वपूर्ण है, खासकर जब पहला और आखिरी पद दिया गया हो।
In simple words:
(i) इस श्रेढ़ी में, पहला पद 34, आखिरी पद 10 और सार्वअन्तर -2 है। पहले पदों की संख्या निकालते हैं, जो 13 आती है। फिर, योग के सूत्र से योग 286 आता है।
(ii) इस श्रेढ़ी में, पहला पद -5, आखिरी पद -230 और सार्वअन्तर -3 है। पहले पदों की संख्या निकालते हैं, जो 76 आती है। फिर, योग के सूत्र से योग -8930 आता है।

🎯 Exam Tip: यदि आपको समान्तर श्रेढ़ी का पहला पद, सार्वअन्तर और अन्तिम पद ज्ञात हो, तो पहले n ज्ञात करें, फिर योगफल के सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) का उपयोग करें।

 

Question 19. समान्तरे श्रेढ़ी के प्रथम 15 पदों का योगफल ज्ञात कीजिए। जिसका nवाँ पद an = 9 – 5n है।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी के पहले 15 पदों का योग निकालना है, जिसका n-वाँ पद \( a_n = 9 - 5n \) दिया गया है। पहले हम श्रेढ़ी का पहला पद (a) ज्ञात करते हैं। \( n = 1 \) रखने पर, \( a_1 = 9 - 5(1) = 4 \) मिलता है। अब, हम दूसरा पद \( a_2 \) ज्ञात करते हैं। \( n = 2 \) रखने पर, \( a_2 = 9 - 5(2) = -1 \) मिलता है। सार्वअन्तर (d) ज्ञात करने के लिए, हम \( a_2 - a_1 \) करते हैं। \( d = -1 - 4 = -5 \) है। हमें प्रथम 15 पदों (n=15) का योग ज्ञात करना है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में \( a = 4, d = -5, \) और \( n = 15 \) के मान रखने पर: \( S_{15} = \frac{15}{2}[2(4) + (15-1)(-5)] = \frac{15}{2}[8 + 14(-5)] = \frac{15}{2}[8 - 70] = \frac{15}{2}[-62] = 15 \times (-31) = -465 \)। इसलिए, इस समान्तर श्रेढ़ी के पहले 15 पदों का योगफल -465 है। n-वें पद का सूत्र दिए जाने पर, पहले कुछ पद निकालकर 'a' और 'd' ज्ञात करना एक उपयोगी पहला कदम होता है।
In simple words: n-वाँ पद \( 9 - 5n \) है। इससे पहला पद 4 और सार्वअन्तर -5 मिलता है। अब, 15 पदों का योगफल निकालने के लिए सूत्र में मान रखते हैं। योगफल -465 आता है।

🎯 Exam Tip: जब n-वाँ पद दिया गया हो, तो पहले कुछ पद ज्ञात करके पहला पद (a) और सार्वअन्तर (d) निकालें, फिर योग का सूत्र लागू करें।

 

Question 20. उस समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम 51 पदों का योगफल ज्ञात कीजिए जिसके दूसरे तथा तीसरे पद क्रमशः 14 और 18 हैं।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी के पहले 51 पदों का योग ज्ञात करना है, जिसके दूसरे पद 14 और तीसरे पद 18 हैं। मान लीजिए श्रेढ़ी का पहला पद \( a \) और सार्वअन्तर \( d \) है। हम जानते हैं कि \( a_2 = a+d \) और \( a_3 = a+2d \)। तो, हमारे पास दो समीकरण हैं: 1. \( a+d = 14 \) और 2. \( a+2d = 18 \)। समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर, हमें \( (a+2d) - (a+d) = 18-14 \implies d = 4 \) मिलता है। अब, \( d = 4 \) का मान समीकरण (1) में रखने पर, \( a+4 = 14 \implies a = 10 \) मिलता है। अब हमें \( n=51 \) पदों का योग ज्ञात करना है, जहाँ \( a=10 \) और \( d=4 \) है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर: \( S_{51} = \frac{51}{2}[2(10) + (51-1)4] = \frac{51}{2}[20 + 50 \times 4] = \frac{51}{2}[20 + 200] = \frac{51}{2}[220] = 51 \times 110 = 5610 \)। इस प्रकार, श्रेढ़ी के पहले 51 पदों का योगफल 5610 है। इस तरह के प्रश्नों में, दिए गए पदों का उपयोग करके 'a' और 'd' का मान ज्ञात करना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है।
In simple words: दूसरा पद 14 और तीसरा पद 18 है। इससे पता चलता है कि सार्वअन्तर \( d = 4 \) है, और पहला पद \( a = 10 \) है। अब, पहले 51 पदों का योगफल निकालने के लिए सूत्र में मान रखते हैं, जो 5610 आता है।

🎯 Exam Tip: क्रमागत पदों का अन्तर हमेशा सार्वअन्तर \( d \) होता है। जैसे \( a_3 - a_2 = d \)।

 

Question 21. किसी समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम 15 पदों का योग ज्ञात कीजिए, जिसका nवाँ पद an = 25 – 2n है।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी के पहले 15 पदों का योग ज्ञात करना है, जिसका n-वाँ पद \( a_n = 25 - 2n \) दिया गया है। पहले हम श्रेढ़ी का पहला पद (a) ज्ञात करते हैं। \( n = 1 \) रखने पर, \( a_1 = 25 - 2(1) = 23 \) मिलता है। अब, हम दूसरा पद \( a_2 \) ज्ञात करते हैं। \( n = 2 \) रखने पर, \( a_2 = 25 - 2(2) = 21 \) मिलता है। सार्वअन्तर (d) ज्ञात करने के लिए, हम \( a_2 - a_1 \) करते हैं। \( d = 21 - 23 = -2 \) है। हमें प्रथम 15 पदों (n=15) का योग ज्ञात करना है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में \( a = 23, d = -2, \) और \( n = 15 \) के मान रखने पर: \( S_{15} = \frac{15}{2}[2(23) + (15-1)(-2)] = \frac{15}{2}[46 + 14(-2)] = \frac{15}{2}[46 - 28] = \frac{15}{2}[18] = 15 \times 9 = 135 \)। इस प्रकार, इस समान्तर श्रेढ़ी के पहले 15 पदों का योगफल 135 है। n-वें पद से 'a' और 'd' प्राप्त करने के बाद, योग के सूत्र का सीधा अनुप्रयोग समस्या को सरल बनाता है।
In simple words: n-वाँ पद \( 25 - 2n \) है। इससे पहला पद 23 और सार्वअन्तर -2 मिलता है। अब, 15 पदों का योगफल निकालने के लिए सूत्र में मान रखते हैं। योगफल 135 आता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, 'n' के विभिन्न मानों के लिए \( a_n \) की गणना करके 'a' और 'd' को ध्यान से निकालें।

 

Question 22. यदि किसी समान्तर श्रेढ़ी का दूसरा व तीसरा पद क्रमशः 3 और 5 हैं, तो इसके प्रथम 20 पदों का योग ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी के पहले 20 पदों का योग ज्ञात करना है, जिसके दूसरे पद 3 और तीसरे पद 5 हैं। मान लीजिए श्रेढ़ी का पहला पद \( a \) और सार्वअन्तर \( d \) है। हम जानते हैं कि \( a_2 = a+d \) और \( a_3 = a+2d \)। तो, हमारे पास दो समीकरण हैं: 1. \( a+d = 3 \) और 2. \( a+2d = 5 \)। समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर, हमें \( (a+2d) - (a+d) = 5-3 \implies d = 2 \) मिलता है। अब, \( d = 2 \) का मान समीकरण (1) में रखने पर, \( a+2 = 3 \implies a = 1 \) मिलता है। अब हमें \( n=20 \) पदों का योग ज्ञात करना है, जहाँ \( a=1 \) और \( d=2 \) है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर: \( S_{20} = \frac{20}{2}[2(1) + (20-1)2] = 10[2 + 19 \times 2] = 10[2 + 38] = 10[40] = 400 \)। इस प्रकार, श्रेढ़ी के पहले 20 पदों का योगफल 400 है। किसी भी समान्तर श्रेढ़ी में, क्रमागत पदों के बीच का अन्तर हमेशा सार्वअन्तर के बराबर होता है।
In simple words: दूसरा पद 3 और तीसरा पद 5 है। इससे सार्वअन्तर \( d = 2 \) और पहला पद \( a = 1 \) मिलता है। अब, पहले 20 पदों का योगफल निकालने के लिए सूत्र में मान रखते हैं, जो 400 आता है।

🎯 Exam Tip: दो लगातार पदों से आप सार्वअन्तर \( d \) सीधे \( a_k - a_{k-1} \) करके प्राप्त कर सकते हैं।

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. एक समान्तर श्रेढ़ी का तीसरा पद 12 है और 50वाँ पद 106 है। इसका 29वाँ पद ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी का तीसरा पद 12 और 50वाँ पद 106 दिया गया है। हमें इसका 29वाँ पद ज्ञात करना है। मान लीजिए श्रेढ़ी का पहला पद \( a \) और सार्वअन्तर \( d \) है। समान्तर श्रेढ़ी के n-वें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) होता है। इस सूत्र के अनुसार, तीसरा पद \( a+2d = 12 \) (समीकरण 1) है। और 50वाँ पद \( a+49d = 106 \) (समीकरण 2) है। समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर, \( (a+49d) - (a+2d) = 106 - 12 \implies 47d = 94 \implies d = 2 \) मिलता है। अब, \( d = 2 \) का मान समीकरण (1) में रखने पर, \( a+2(2) = 12 \implies a+4 = 12 \implies a = 8 \) मिलता है। अब हम 29वाँ पद ज्ञात करते हैं। \( a_{29} = a + (29-1)d \) सूत्र का उपयोग करके: \( a_{29} = 8 + 28(2) = 8 + 56 = 64 \)। इस प्रकार, समान्तर श्रेढ़ी का 29वाँ पद 64 है। दो अलग-अलग पदों से पहला पद और सार्वअन्तर निकालने के लिए, उन्हें दो रेखीय समीकरणों के रूप में हल किया जाता है।
In simple words: तीसरा पद 12 और 50वाँ पद 106 है। इन दोनों से हम पहला पद \( a=8 \) और सार्वअन्तर \( d=2 \) निकालते हैं। अब, 29वाँ पद निकालने के लिए सूत्र में मान रखते हैं, जो 64 आता है।

🎯 Exam Tip: दो अज्ञात (a और d) को हल करने के लिए हमेशा दो समीकरणों की आवश्यकता होती है।

 

Question 2. यदि एक समान्तर श्रेढ़ी का mवाँ पद \( \frac {1}{n} \) तथा nवाँ पद \( \frac{1}{m} \) हो तो सिद्ध कीजिए कि श्रेढ़ी का mnवाँ पद 1 के बराबर होगा।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी दी गई है जिसका mवाँ पद \( \frac{1}{n} \) है और nवाँ पद \( \frac{1}{m} \) है। हमें यह सिद्ध करना है कि इसका mnवाँ पद 1 के बराबर होगा। मान लीजिए श्रेढ़ी का पहला पद \( a \) और सार्वअन्तर \( d \) है। समान्तर श्रेढ़ी के k-वें पद का सूत्र \( a_k = a + (k-1)d \) होता है। इसके अनुसार, \( a + (m-1)d = \frac{1}{n} \) (समीकरण 1) और \( a + (n-1)d = \frac{1}{m} \) (समीकरण 2) है। समीकरण (1) में से समीकरण (2) घटाने पर: \( (m-1)d - (n-1)d = \frac{1}{n} - \frac{1}{m} \implies (m-1-n+1)d = \frac{m-n}{mn} \implies (m-n)d = \frac{m-n}{mn} \)। यहाँ से, \( d = \frac{1}{mn} \) मिलता है। अब, \( d \) का मान समीकरण (1) में रखने पर: \( a + (m-1)\frac{1}{mn} = \frac{1}{n} \implies a + \frac{m}{mn} - \frac{1}{mn} = \frac{1}{n} \implies a + \frac{1}{n} - \frac{1}{mn} = \frac{1}{n} \implies a = \frac{1}{mn} \)। अब हमें mnवाँ पद (\( a_{mn} \)) ज्ञात करना है: \( a_{mn} = a + (mn-1)d = \frac{1}{mn} + (mn-1)\frac{1}{mn} = \frac{1}{mn} + \frac{mn}{mn} - \frac{1}{mn} = 1 \)। इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि श्रेढ़ी का mnवाँ पद 1 के बराबर है। इस प्रश्न में, 'a' और 'd' दोनों का मान \( \frac{1}{mn} \) आता है, जो अंततः mnवें पद को सरल बनाता है।
In simple words: mवाँ पद \( \frac{1}{n} \) और nवाँ पद \( \frac{1}{m} \) है। इन शर्तों से हमने पहला पद 'a' और सार्वअन्तर 'd' को \( \frac{1}{mn} \) के बराबर पाया। अब, जब हम mnवें पद का सूत्र लगाते हैं, तो वह 1 के बराबर आता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे सिद्ध करने वाले प्रश्नों में, 'a' और 'd' के मानों को सही ढंग से प्राप्त करना और फिर उन्हें सिद्ध किए जाने वाले पद के सूत्र में डालना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. समान्तर श्रेढ़ी 54, 51, 48, .... के कितने पदों का योगफल 513 होगा?
Answer: हमें समान्तर श्रेढ़ी 54, 51, 48, ... के उन पदों की संख्या (n) ज्ञात करनी है जिनका योगफल 513 है। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 54 है और सार्वअन्तर (d) \( 51-54 = -3 \) है। हमें \( S_n = 513 \) दिया गया है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। इस सूत्र में मान रखने पर: \( 513 = \frac{n}{2}[2(54) + (n-1)(-3)] = \frac{n}{2}[108 - 3n + 3] = \frac{n}{2}[111 - 3n] \)। इस समीकरण को हल करने पर: \( 1026 = n(111 - 3n) = 111n - 3n^2 \)। समीकरण को फिर से लिखने पर, \( 3n^2 - 111n + 1026 = 0 \)। पूरे समीकरण को 3 से भाग देने पर, \( n^2 - 37n + 342 = 0 \) मिलता है। यह एक द्विघात समीकरण है, जिसके गुणनखंड करने पर \( (n-18)(n-19) = 0 \) मिलता है। इससे हमें \( n = 18 \) या \( n = 19 \) मिलता है। यह दर्शाता है कि 18 पदों का योग भी 513 है और 19 पदों का योग भी 513 है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 19वाँ पद \( (a_{19}) \) शून्य है, \( a_{19} = 54 + (19-1)(-3) = 54 + 18(-3) = 54 - 54 = 0 \)। जब शून्य को जोड़ा जाता है, तो योग नहीं बदलता। जब योगफल के लिए 'n' के दो धनात्मक मान आते हैं, तो इसका मतलब है कि एक पद शून्य हो सकता है, जिससे योगफल वही रहता है।
In simple words: पहला पद 54 और सार्वअन्तर -3 है। 513 योगफल के लिए 'n' का मान निकालने पर, हमें 'n' के दो मान 18 और 19 मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि 19वाँ पद शून्य है।

🎯 Exam Tip: यदि \( S_n \) के लिए n के दो धनात्मक मान प्राप्त होते हैं, तो इसका मतलब है कि उनमें से एक पद शून्य है, जो योगफल को नहीं बदलता है।

 

Question 4. यदि किसी समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम 7 पदों का योग 49 है और प्रथम 17 पदों का योग 289 है, तो उसके प्रथम n पदों का योग ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी के पहले 7 पदों का योग 49 और पहले 17 पदों का योग 289 दिया गया है। हमें इसके पहले n पदों का योग ज्ञात करना है। मान लीजिए श्रेढ़ी का पहला पद \( a \) और सार्वअन्तर \( d \) है। समान्तर श्रेढ़ी के n पदों के योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}[2a+(n-1)d] \) होता है। पहले 7 पदों के लिए: \( S_7 = \frac{7}{2}[2a+(7-1)d] = 49 \)। इसे हल करने पर, \( \frac{7}{2}[2a+6d] = 49 \implies 7(a+3d) = 49 \implies a+3d = 7 \) (समीकरण 1) मिलता है। पहले 17 पदों के लिए: \( S_{17} = \frac{17}{2}[2a+(17-1)d] = 289 \)। इसे हल करने पर, \( \frac{17}{2}[2a+16d] = 289 \implies 17(a+8d) = 289 \implies a+8d = 17 \) (समीकरण 2) मिलता है। समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर: \( (a+8d) - (a+3d) = 17-7 \implies 5d = 10 \implies d = 2 \) मिलता है। \( d=2 \) का मान समीकरण (1) में रखने पर: \( a+3(2) = 7 \implies a+6 = 7 \implies a = 1 \) मिलता है। अब हमें प्रथम n पदों का योग \( S_n \) ज्ञात करना है, जहाँ \( a=1 \) और \( d=2 \) है। \( S_n = \frac{n}{2}[2(1)+(n-1)2] = \frac{n}{2}[2+2n-2] = \frac{n}{2}[2n] = n^2 \)। इस प्रकार, समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम n पदों का योग \( n^2 \) है। इस प्रश्न में, हमें \( a \) और \( d \) का मान निकालने के लिए दो समीकरणों को हल करना पड़ा, जो योग के सूत्रों से प्राप्त हुए थे।
In simple words: 7 पदों का योग 49 और 17 पदों का योग 289 है। इन शर्तों से पहला पद \( a=1 \) और सार्वअन्तर \( d=2 \) मिलता है। अब, पहले n पदों का योग निकालने के लिए सूत्र में मान रखते हैं, जो \( n^2 \) आता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि \( S_n = n^2 \) तभी होता है जब \( a=1 \) और \( d=2 \) हो।

 

Question 5. यदि किसी समान्तर श्रेढ़ी के n पदों का योग \( 4n – n^2 \) है, तो पहला पद क्या है? पहले दो पदों का योग क्या है? दूसरा पद क्या है? इस प्रकार तीसरे, 10वें और nवें पद ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें एक समान्तर श्रेढ़ी के n पदों का योग \( S_n = 4n - n^2 \) दिया गया है। हमें पहला पद, पहले दो पदों का योग, दूसरा पद, तीसरा पद, 10वाँ पद और nवाँ पद ज्ञात करना है।
1. **पहला पद (\( a_1 \))**: यह पहले पद के योग \( S_1 \) के बराबर होता है। \( S_1 = 4(1) - (1)^2 = 4 - 1 = 3 \)। तो, पहला पद 3 है।
2. **पहले दो पदों का योग (\( S_2 \))**: \( S_2 = 4(2) - (2)^2 = 8 - 4 = 4 \)। तो, पहले दो पदों का योग 4 है।
3. **दूसरा पद (\( a_2 \))**: यह \( S_2 - S_1 \) के बराबर होता है। \( a_2 = S_2 - S_1 = 4 - 3 = 1 \)। तो, दूसरा पद 1 है। अब, हमारे पास \( a_1 = 3 \) और \( a_2 = 1 \) है। इससे सार्वअन्तर \( d = a_2 - a_1 = 1 - 3 = -2 \) मिलता है।
4. **तीसरा पद (\( a_3 \))**: \( a_3 = a_1 + 2d = 3 + 2(-2) = 3 - 4 = -1 \)। तो, तीसरा पद -1 है।
5. **10वाँ पद (\( a_{10} \))**: \( a_{10} = a_1 + 9d = 3 + 9(-2) = 3 - 18 = -15 \)। तो, 10वाँ पद -15 है।
6. **nवाँ पद (\( a_n \))**: यह \( S_n - S_{n-1} \) के बराबर होता है। पहले \( S_{n-1} \) ज्ञात करें: \( S_{n-1} = 4(n-1) - (n-1)^2 = 4n - 4 - (n^2 - 2n + 1) = 4n - 4 - n^2 + 2n - 1 = -n^2 + 6n - 5 \)। अब, \( a_n = S_n - S_{n-1} = (4n - n^2) - (-n^2 + 6n - 5) = 4n - n^2 + n^2 - 6n + 5 = -2n + 5 \)। तो, nवाँ पद \( 5 - 2n \) है। n-वें पद का सूत्र सीधे \( S_n - S_{n-1} \) करके भी प्राप्त किया जा सकता है, जो अक्सर 'a' और 'd' ज्ञात करने की तुलना में तेज़ होता है।
In simple words: n पदों का योग \( 4n - n^2 \) है। इससे पहला पद 3, पहले दो पदों का योग 4, दूसरा पद 1, तीसरा पद -1, 10वाँ पद -15 और nवाँ पद \( 5 - 2n \) आता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी समान्तर श्रेढ़ी के nवें पद को उसके n पदों के योग और \( (n-1) \) पदों के योग के अन्तर से ज्ञात किया जा सकता है: \( a_n = S_n - S_{n-1} \)।

 

Question 6. 250 से 1000 तक 3 से भाज्य प्राकृत संख्याओं का योगफल ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें 250 से 1000 तक उन सभी प्राकृत संख्याओं का योगफल ज्ञात करना है जो 3 से पूरी तरह भाज्य हैं। सबसे पहले, हम 250 के बाद 3 से भाज्य पहली संख्या ढूँढते हैं, जो 252 है। फिर, हम 1000 से पहले 3 से भाज्य सबसे बड़ी संख्या ढूँढते हैं, जो 999 है। इस तरह, हमें एक समान्तर श्रेढ़ी मिलती है: 252, 255, 258, ..., 999। इस श्रेढ़ी का पहला पद (a) 252 है, सार्वअन्तर (d) 3 है, और अन्तिम पद (l) 999 है। अब, हम पदों की कुल संख्या (n) ज्ञात करते हैं। n-वें पद का सूत्र \( a_n = a + (n-1)d \) होता है। मान रखने पर, \( 999 = 252 + (n-1)3 \) मिलता है। इसे हल करने पर, \( 747 = 3(n-1) \implies 249 = n-1 \implies n = 250 \) आता है। अंत में, हम इन 250 पदों का योगफल ज्ञात करते हैं। योग का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) होता है। मान रखने पर, \( S_{250} = \frac{250}{2}(252+999) = 125(1251) = 156375 \) आता है। "से तक" का अर्थ है कि दी गई सीमा संख्याएँ (250 और 1000) भी शामिल हैं, यदि वे भाज्य हों।
In simple words: 250 से 1000 के बीच 3 से भाग होने वाली पहली संख्या 252 और आखिरी 999 है। यह एक समान्तर श्रेढ़ी है। पदों की संख्या 250 है। इन सभी का योगफल 156375 आता है।

🎯 Exam Tip: "से तक" (inclusive) या "के बीच" (exclusive) जैसी शब्दावली पर ध्यान दें, क्योंकि यह श्रेणी की पहली और आखिरी संख्या को प्रभावित करता है।

 

Question 7. एक सीढ़ी के क्रमागत डंडे परस्पर 25 सेमी. की दूरी पर हैं। डंडों की लम्बाई एक समान रूप से घटती जाती है। तथा सबसे निचले डंडे की लम्बाई 45 सेमी. है और सबसे ऊपर वाले डंडे की लम्बाई 25 सेमी. है। यदि ऊपरी और निचले डंडे के बीच की दूरी 2.5 मी. है, तो डंडों को बनाने के लिए कितनी लम्बाई की लकड़ी लेना आवश्यक होगा?
Answer: एक सीढ़ी के क्रमागत डंडों के बीच की दूरी 25 सेमी. है। सबसे निचले डंडे की लम्बाई 45 सेमी. है और सबसे ऊपरी डंडे की लम्बाई 25 सेमी. है। ऊपरी और निचले डंडे के बीच की कुल ऊर्ध्वाधर दूरी 2.5 मीटर है, जिसे हम 250 सेमी. में बदलते हैं। हमें डंडों को बनाने के लिए आवश्यक लकड़ी की कुल लम्बाई ज्ञात करनी है। सबसे पहले, हम सीढ़ी में कुल डंडों की संख्या (n) ज्ञात करते हैं। डंडों की संख्या का सूत्र \( n = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{क्रमागत डंडों के बीच की दूरी}} + 1 \) होता है। तो, \( n = \frac{250 \text{ सेमी.}}{25 \text{ सेमी.}} + 1 = 10 + 1 = 11 \) डंडे हैं। अब, हम इन 11 डंडों की कुल लम्बाई का योग ज्ञात करेंगे। यह एक समान्तर श्रेढ़ी है जहाँ पहला पद (सबसे ऊपरी डंडा) \( a = 25 \) सेमी. है और अन्तिम पद (सबसे निचला डंडा) \( l = 45 \) सेमी. है। योगफल का सूत्र \( S_n = \frac{n}{2}(a+l) \) होता है। मान रखने पर, \( S_{11} = \frac{11}{2}(25+45) = \frac{11}{2}(70) = 11 \times 35 = 385 \) सेमी.। यदि इसे मीटर में बदला जाए, तो यह 3.85 मीटर होता है। इसलिए, डंडों को बनाने के लिए कुल 3.85 मीटर लम्बी लकड़ी की आवश्यकता होगी। वास्तविक जीवन की समस्याओं में समान्तर श्रेढ़ी के अनुप्रयोगों से चीजों को समझना और योजना बनाना आसान हो जाता है।
In simple words: डंडों के बीच की दूरी 25 सेमी. और कुल ऊँचाई 2.5 मीटर (250 सेमी.) है। इससे कुल 11 डंडे मिलते हैं। सबसे ऊपरी डंडे की लम्बाई 25 सेमी. और सबसे निचले की 45 सेमी. है। इन सभी डंडों की कुल लम्बाई 385 सेमी. या 3.85 मीटर है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में इकाइयों (सेमी. और मीटर) का ध्यान रखें और गणना शुरू करने से पहले उन्हें एक समान इकाई में बदल लें।

 

प्रश्न 8. 200 लट्ठों (logs) को ढेरी के रूप में इस प्रकार रखा जाता है-सबसे नीचे वाली पंक्ति में 20 लट्ठे, उससे अगली पंक्ति में 19 लट्ठे, उससे अगली पंक्ति में 18 लट्ठे, इत्यादि (देखिए आकृति)। ये 200 लट्ठे कितनी पंक्तियों में रखे गए हैं तथा सबसे ऊपरी पंक्ति में कितने लट्ठे हैं?
Answer: सबसे नीचे वाली पंक्ति में लट्ठों की संख्या \( = 20 \)
दूसरी पंक्ति में लट्ठों की संख्या \( = 19 \)
तीसरी पंक्ति में लट्ठों की संख्या \( = 18 \)
इस प्रकार, लट्ठों की संख्या एक समान्तर श्रेढ़ी (A.P.) बनाती है, जहाँ:
प्रथम पद \( a = 20 \)
सार्व अन्तर \( d = 19 - 20 = -1 \)
कुल लट्ठों की संख्या \( S_n = 200 \)
हम समान्तर श्रेढ़ी के \( n \) पदों के योग के सूत्र का प्रयोग करेंगे:
\( S_n = \frac{n}{2}[2a + (n - 1)d] \)
मान रखने पर:
\( 200 = \frac{n}{2}[2(20) + (n - 1)(-1)] \)
\( 400 = n[40 - n + 1] \)
\( 400 = n[41 - n] \)
\( 400 = 41n - n^2 \)
\( n^2 - 41n + 400 = 0 \)
इस द्विघाती समीकरण को हल करने के लिए मध्य पद को विभाजित करेंगे:
\( n^2 - 16n - 25n + 400 = 0 \)
\( n(n - 16) - 25(n - 16) = 0 \)
\( (n - 16)(n - 25) = 0 \)
इससे \( n \) के दो मान मिलते हैं: \( n = 16 \) या \( n = 25 \)
अब, इन दोनों मानों के लिए सबसे ऊपरी पंक्ति में लट्ठों की संख्या ज्ञात करते हैं। लट्ठों की संख्या ऋणात्मक नहीं हो सकती।
यदि \( n = 25 \):
\( a_{25} = a + (25 - 1)d \)
\( a_{25} = 20 + (24)(-1) \)
\( a_{25} = 20 - 24 = -4 \)
चूंकि लट्ठों की संख्या ऋणात्मक नहीं हो सकती, इसलिए \( n = 25 \) संभव नहीं है।
यदि \( n = 16 \):
\( a_{16} = a + (16 - 1)d \)
\( a_{16} = 20 + (15)(-1) \)
\( a_{16} = 20 - 15 = 5 \)
इसलिए, 200 लट्ठों को 16 पंक्तियों में रखा गया है, और सबसे ऊपरी पंक्ति में 5 लट्ठे हैं। इस तरह की व्यवस्था व्यावहारिक होती है जहाँ हर अगली पंक्ति में लट्ठे कम होते जाते हैं।
In simple words: कुल 200 लट्ठे हैं। नीचे से ऊपर जाने पर लट्ठों की संख्या 20, 19, 18 ऐसे घट रही है। हमने हिसाब लगाया तो पता चला कि कुल 16 पंक्तियाँ बनेंगी, और सबसे ऊपर वाली पंक्ति में 5 लट्ठे होंगे।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, यदि \( n \) के दो मान आते हैं, तो दोनों को जाँचें। यदि कोई मान अवास्तविक परिणाम (जैसे नकारात्मक लट्ठे) देता है, तो उसे अस्वीकार कर दें।

 

प्रश्न 9. एक आलू दौड़ (potato race) में, प्रारम्भिक स्थान पर एक बाल्टी रखी हुई है, जो पहले आलू से 5m की दूरी पर है, तथा अन्य आलुओं को एक सीधी रेखा में परस्पर 3m की दूरियों पर रखा गया है। इस रेखा पर 10 आलू रखे गए हैं (देखिए आकृति)। प्रत्येक प्रतियोगी बाल्टी से चलना प्रारम्भ करती है, निकटतम आलू को उठाती है, उसे लेकर वापस दौड़कर बाल्टी में डालती है, दूसरा आलू उठाने के लिए वापस दौड़ती है, उसे उठाकर वापस बाल्टी में डालती है, और वह ऐसा तब तक करती रहती है, जब तक सभी आलू बाल्टी में न आ जाएँ। इसमें प्रतियोगी को कुल कितनी दूरी दौड़नी पड़ेगी?
संकेत : पहले और दूसरे आलुओं को उठाकर बाल्टी में डालने तक दौड़ी गई दूरी \( = 2 \times 5 + 2 \times (5 + 3) \) है
Answer: प्रतियोगी द्वारा आलू उठाने और बाल्टी में डालने के लिए तय की गई दूरी इस प्रकार है:
पहले आलू के लिए तय की गई दूरी \( = 2 \times 5 \text{ m} = 10 \text{ m} \)
दूसरे आलू के लिए तय की गई दूरी \( = 2 \times (5 + 3) \text{ m} = 2 \times 8 \text{ m} = 16 \text{ m} \)
तीसरे आलू के लिए तय की गई दूरी \( = 2 \times (5 + 3 + 3) \text{ m} = 2 \times 11 \text{ m} = 22 \text{ m} \)
यह प्रक्रिया 10 आलू तक चलती रहती है, इसलिए तय की गई दूरियाँ एक समान्तर श्रेढ़ी (A.P.) बनाती हैं:
10, 16, 22, 28, ...
यहाँ:
प्रथम पद \( a = 10 \)
सार्व अन्तर \( d = 16 - 10 = 6 \)
आलुओं की कुल संख्या \( n = 10 \)
प्रतियोगी द्वारा कुल तय की गई दूरी समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम \( n \) पदों का योग होगी, जिसके लिए सूत्र है:
\( S_n = \frac{n}{2}[2a + (n - 1)d] \)
मान रखने पर:
\( S_{10} = \frac{10}{2}[2(10) + (10 - 1)6] \)
\( S_{10} = 5[20 + (9)6] \)
\( S_{10} = 5[20 + 54] \)
\( S_{10} = 5[74] \)
\( S_{10} = 370 \text{ m} \)
अतः प्रतियोगी को कुल 370 मीटर की दूरी दौड़नी पड़ेगी। यह एक अच्छा उदाहरण है जहाँ गणितीय सूत्र वास्तविक जीवन की समस्या को हल करने में मदद करते हैं।
In simple words: हर आलू को उठाकर बाल्टी में डालने के लिए लड़की को दूरी तय करनी पड़ती है। पहले आलू के लिए 10 मीटर, दूसरे के लिए 16 मीटर, तीसरे के लिए 22 मीटर, और इसी तरह। कुल 10 आलू थे। हमने सारी दूरियों को जोड़ा तो पता चला कि लड़की ने कुल 370 मीटर की दूरी तय की।

🎯 Exam Tip: आलू दौड़ जैसे प्रश्नों में, हर आलू के लिए तय की गई कुल दूरी को ध्यान से परिकलित करें (जाने और वापस आने दोनों की दूरी)। फिर जाँचें कि क्या ये दूरियाँ एक समान्तर श्रेढ़ी बनाती हैं और सही सूत्र का उपयोग करके योगफल निकालें।

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