RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 14 मिठाई वाला (कहानी)

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Detailed Chapter 14 मिठाई वाला (कहानी) RBSE Solutions for Class 12 Hindi

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Class 12 Hindi Chapter 14 मिठाई वाला (कहानी) RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. मुरलीवाला एकदम अप्रतिभ हो उठा
(क) अपने पर अविश्वास किए जाने के कारण
(ख) वस्तुओं का अधिक मूल्य लेने के कारण
(ग) विजय बाबू की कुटिल मुस्कान के कारण
(घ) मुरली न बिकने की चिंता के कारण
Answer: (क) अपने पर अविश्वास किए जाने के कारण
In simple words: मुरलीवाला इसलिए हैरान हो गया क्योंकि विजय बाबू ने उसे ऐसा कहा जैसे उस पर भरोसा नहीं किया गया हो।

🎯 Exam Tip: ऐसे वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, कहानी के प्रसंग को ध्यान से पढ़ें ताकि सही कारण या प्रतिक्रिया का चुनाव किया जा सके।

 

Question 2. मिठाईवाला गली-गली मिठाई बेचता फिरता था –
(क) पैसा कमाने के लिए।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों की प्रेरणाओं और उनके कार्यों के पीछे के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'मिठाईवाला' कहानी के कहानीकार कौन हैं?
Answer: 'मिठाईवाला' कहानी के लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं।
In simple words: भगवती प्रसाद वाजपेयी ने 'मिठाईवाला' कहानी लिखी है।

🎯 Exam Tip: लेखक और उनकी रचनाओं को याद रखना साहित्य के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. मिठाईवाला कहानी में किन-किन रूपों में आया था?
Answer: मिठाईवाला कहानी में तीन अलग-अलग रूपों में आया था:
1. खिलौने बेचने वाला
2. मुरली बजाने वाला
3. मिठाई बेचने वाला।
In simple words: वह पहले खिलौनेवाला, फिर मुरलीवाला और अंत में मिठाईवाला बनकर आया था।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्र के विभिन्न रूपों और पहचानों को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 3. मुरलीवाला किस तरह का साफा बाँधता था?
Answer: मुरलीवाला रंगीन बीकानेरी पगड़ी पहनता था।
In simple words: मुरलीवाला रंगीन बीकानेरी साफा बाँधता था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के पहनावे या बाहरी रूप से संबंधित छोटे विवरणों को ध्यान में रखना कहानी को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

 

Question 4. बच्चों से खिलौने की कीमत सुनकर रोहिणी ने क्या सोचा?
Answer: बच्चों को खिलौने इतनी कम कीमत पर मिलने पर रोहिणी ने सोचा कि बेचने वाला इतने सस्ते में खिलौने कैसे दे गया।
In simple words: रोहिणी हैरान थी कि खिलौनेवाला बच्चों को इतने सस्ते खिलौने कैसे दे गया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के विचारों और उनके पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।

 

Question 5. मुरलीवाला कितने पैसे में मुरली बेचता था?
Answer: मुरलीवाला अपनी बांसुरी दो पैसे में बेचता था।
In simple words: मुरलीवाला दो पैसे में बांसुरी बेचता था।

🎯 Exam Tip: कहानी के विशिष्ट विवरण, जैसे कीमतों या समय-सीमा को सटीकता से याद रखें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. "पेट जो न कराये सो थोड़ा है” इस कथन से मिठाई वाले का कौन-सा मनोभाव प्रगट होता है?
Answer: रोहिणी ने मुरलीवाले की बातें सुनकर सोचा कि वह एक अच्छा इंसान है। वह बच्चों से प्यार से बात करता है और उन्हें सस्ती चीजें देता है। रोहिणी को लगा कि जीवन में पेट पालने के लिए उसे बहुत कुछ करना पड़ रहा है, इसलिए वह भटक रहा है। इससे रोहिणी का मुरलीवाले के प्रति दया और हमदर्दी का भाव दिखता है।
In simple words: रोहिणी को मुरलीवाला दयालु और मजबूर लगा, क्योंकि पेट पालने के लिए उसे भटकना पड़ रहा था।

🎯 Exam Tip: कथनों के माध्यम से पात्रों की भावनाओं और विचारों को स्पष्ट करें, साथ ही उनके पीछे का कारण भी बताएं।

 

Question 3. मिठाई वाले ने अपनी मिठाइयों की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं?
Answer: मिठाईवाले ने बताया कि उसकी मिठाइयाँ कई तरह की हैं। वे रंग-बिरंगी, कुछ खट्टी और कुछ मीठी होती हैं, जिनका स्वाद बहुत अच्छा होता है। ये मिठाइयाँ मुंह में जल्दी नहीं घुलतीं और खांसी में भी राहत देती हैं। वे चपटी, गोल और मोटी गोलियों जैसी दिखती हैं, जिन्हें बच्चे बड़े चाव से खाते हैं।
In simple words: मिठाईवाले ने बताया कि उसकी मिठाइयाँ रंग-बिरंगी, खट्टी-मीठी, स्वादिष्ट, देर तक टिकने वाली, खांसी भगाने वाली और चपटी-गोल गोलियाँ थीं।

🎯 Exam Tip: जब विशेषताएँ पूछी जाएँ, तो बिंदुओं में स्पष्ट और संक्षिप्त वर्णन दें।

 

Question 4. मिठाईवाला अपना सामान सस्ते में क्यों बेचता था?
Answer: मिठाईवाला पैसे कमाने के लिए अपना सामान नहीं बेचता था। उसके पास बहुत धन था। वह बच्चों को देखने और उनके साथ समय बिताने के लिए यह काम करता था। इस तरह वह अपने मरे हुए बच्चों को बच्चों में देखता था और खुशी पाता था। उसे धन की नहीं, बल्कि खुशी और संतोष की तलाश थी।
In simple words: मिठाईवाला बच्चों में अपने खोए हुए बच्चों को देखकर खुशी और संतोष पाने के लिए सस्ते में सामान बेचता था, उसे पैसे कमाने की जरूरत नहीं थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के गहरे उद्देश्यों और उनकी भावनाओं को समझें, जो उनके बाहरी कार्यों से अलग हो सकते हैं।

 

Question 5. मुरली वाले ने बच्चों को अपनी माँ से पैसे माँगने का क्या तरीका बताया?
Answer: मुरली वाले ने बच्चों को सिखाया कि अपनी माँ की धोती पकड़कर उनके पैरों में लिपट जाएं और उनसे पैसे मांगें। इस तरह प्यार से जिद करने पर माँ कभी मना नहीं करेगी और उन्हें पैसे मिल जाएंगे।
In simple words: मुरलीवाले ने बच्चों को माँ की धोती पकड़कर और पैरों में लिपटकर पैसे मांगने का तरीका बताया, जिससे माँ मना न कर सकें।

🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए व्यावहारिक सुझावों या बातचीत को सटीक रूप से याद करें और बताएं।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'मिठाईवाला' कहानी बाल मनोविज्ञान के विविध कोणों को स्पष्ट करती है। उक्त कथन की उदाहरण सहित समीक्षा कीजिए।
Answer: इससे बच्चों की मुरली पाने की बेसब्री दिखाई देती है। चुन्नू-मुन्नू अपनी माँ की साड़ी पकड़कर और उनसे चिपककर मिठाई मांगते हैं। बच्चों का जिद करना स्वाभाविक है। बच्चे अपनी मासूमियत, हरकतों और बातों से बड़ों को मोह लेते हैं। फेरीवाला बच्चों की बातें सुनकर और उनका प्यार देखकर खुश हो जाता है। बच्चों को खिलौने और मुरली की मीठी धुन पसंद होती है, और मिठाई तो सभी बच्चों को अच्छी लगती है। फेरीवाला बच्चों को ये चीजें इसलिए बेचता है क्योंकि वह बच्चों के मन को समझता है।
In simple words: बच्चे स्वाभाविक रूप से जिद्दी और आकर्षक होते हैं। फेरीवाला उनकी बातों और खिलौनों के प्रति उनकी पसंद को समझता है, और बच्चों की खुशी देखकर खुद भी खुश होता है।

🎯 Exam Tip: बाल मनोविज्ञान के उदाहरणों को कहानी के प्रसंग से जोड़ते हुए स्पष्टीकरण दें।

 

Question 2. अतिशय गम्भीरता के साथ मिठाई वाले ने रोहिणी को अपनी क्या कहानी सुनाई?
Answer: रोहिणी ने देखा कि फेरीवाला बच्चों से बहुत प्यार से बात करता था। वह कभी खिलौने वाला, कभी मुरली वाला और कभी मिठाई वाला बनकर आता था। वह बच्चों को उनकी पसंद की चीजें सस्ते में देता था। रोहिणी यह जानना चाहती थी कि वह ऐसा क्यों करता है। मिठाईवाला पहले तो अपनी कहानी बताने को तैयार नहीं था, लेकिन रोहिणी के कहने पर वह मान गया। उसने बहुत गंभीरता से बताया कि वह पहले बहुत अमीर और खुशहाल था। उसके पास पैसा, कारोबार, गाड़ियाँ, नौकर-चाकर, एक सुंदर पत्नी और दो प्यारे बच्चे थे। उसका घर बच्चों की चहल-पहल से भरा रहता था। लेकिन बदकिस्मती से उसने सब खो दिया। उसके बच्चे समय से पहले मर गए, जिससे वह बहुत दुखी हो गया। तब उसने फेरी लगाने का काम शुरू किया। वह बच्चों के लिए खिलौने, मुरली और मिठाई जैसी पसंदीदा चीजें लेकर आता था। वह उन्हें सस्ते में बेचकर उनका मन बहलाता था। वह हंसते-खेलते बच्चों में अपने बच्चों को देखता था। इससे उसे बहुत शांति और खुशी मिलती थी और बच्चों के खोने का दर्द कम होता था। उसे पैसों की जरूरत नहीं थी; उसके पास बहुत पैसा था। उसे सिर्फ बच्चों के बीच रहकर खुशी और संतोष चाहिए था।
In simple words: मिठाईवाले ने रोहिणी को बताया कि वह पहले एक अमीर आदमी था जिसके दो बच्चे थे। दुखद रूप से उसने अपना सब कुछ खो दिया। अब वह बच्चों में अपने बच्चों को देखकर खुशी और शांति पाने के लिए सस्ते में सामान बेचता है।

🎯 Exam Tip: लंबी कहानियों को मुख्य बिंदुओं में सारांशित करें, जिसमें महत्वपूर्ण मोड़ और पात्रों की प्रेरणाएँ शामिल हों।

 

Question 3. पाठ में आए निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) “आपको क्या पता बाबू जी....... इस भाव पड़ी है।”
(ख) “उस तरह रहता...........उसी को पा जाता हूँ।”

Answer: इन गद्यांशों की व्याख्या पहले ही 'महत्वपूर्ण गद्यांश की प्रसंग सहित व्याख्याएँ' शीर्षक के अंतर्गत दी जा चुकी है।
In simple words: इन हिस्सों को पहले ही समझाया जा चुका है।

🎯 Exam Tip: यदि कोई संदर्भ पहले ही दिया जा चुका हो, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं और दोहराने से बचें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 2. फेरीवाले का स्वर नहीं था
(क) कर्कश
(ख) मधुर
(ग) मादक
(घ) विचित्र
Answer: (क) कर्कश
In simple words: फेरीवाला हमेशा मीठी और सुरीली आवाज में सामान बेचता था, उसकी आवाज कभी भी कठोर नहीं होती थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के गुणों या विशेषताओं से संबंधित प्रश्नों में, सही विपरीत शब्द या वर्णन चुनें जो कहानी में दिए गए हैं।

 

Question 3. खिलौने वाले के आने के कितने महीने बाद मुरलीवाला आया?
(क) दो
(ख) छः
(ग) तीन
(घ) पाँच
Answer: (ख) छः
In simple words: खिलौने वाले के आने के छह महीने बाद मुरलीवाला वापस आया था।

🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण समय-अंतरालों को याद रखें क्योंकि वे अक्सर पात्रों के आगमन या प्रस्थान से जुड़े होते हैं।

 

Question 4. विजय बाबू ने कितनी मुरलियाँ खरीदीं?
(क) एक
(ख) तीन
(ग) दो
(घ) चार
Answer: (ग) दो
In simple words: विजय बाबू ने दो बांसुरी खरीदीं।

🎯 Exam Tip: संख्यात्मक तथ्यों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 'आजानुलंबित' शब्द का अर्थ है
(क) जाँघों तक लम्बे

🎯 Exam Tip: शब्दों के अर्थ से संबंधित प्रश्नों में, दिए गए शब्द का सटीक अर्थ बताएं।

 

Question 6. "दादी, फिर भी काफी सस्ती दे रहा है' यह कहा था
(क) विजय बाबू ने
(ख) रोहिणी ने
(ग) चुन्नू ने।
(घ) मुन्नू ने।
Answer: (ख) रोहिणी ने
In simple words: 'दादी, फिर भी काफी सस्ती दे रहा है' यह बात रोहिणी ने कही थी।

🎯 Exam Tip: संवादों को याद रखें और पहचानें कि कहानी में कौन-सा पात्र क्या कहता है।

 

Question 7. 'भीतर सांसारिक सुख था-' सांसारिक सुख की आशय है
(क) सुख-संपदा
(ख) शानदार मकान
(ग) सुन्दर पत्नी और बच्चे
(घ) नौकर-चाकर।
Answer: (ग) सुन्दर पत्नी और बच्चे
In simple words: 'भीतर सांसारिक सुख था' का मतलब है कि उसके पास सुंदर पत्नी और बच्चे थे।

🎯 Exam Tip: विशेष वाक्यांशों का अर्थ बताते समय, कहानी के संदर्भ को ध्यान में रखें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. खिलौने वाला गली में क्या आवाज लगाता था?
Answer: खिलौने वाला मीठी आवाज में चिल्लाता था- “बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला।”
In simple words: खिलौने वाला गली में “बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला” की आवाज लगाता था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के प्रसिद्ध संवादों को सटीक रूप से याद करें।

 

Question 2. खिलौने वाले की आवाज सुनकर बच्चे क्या करते थे?
Answer: खिलौने वाले की आवाज सुनते ही बच्चे उसे चारों तरफ से घेर लेते थे। वे अपनी टूटी-फूटी भाषा में उससे मोलभाव करते थे।
In simple words: बच्चे खिलौने वाले की आवाज सुनकर दौड़कर उसे घेर लेते थे और खिलौनों के लिए मोलभाव करते थे।

🎯 Exam Tip: किसी घटना के बाद पात्रों की प्रतिक्रियाओं को विस्तृत और स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 3. चुन्नू-मुन्नू के पिता कौन थे?

🎯 Exam Tip: पात्रों के संबंध और पहचान को जानना कहानी की समझ के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. विजय बाबू की बात को मुरली वाले पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: विजय बाबू की बातें सुनकर मुरली वाला थोड़ा दुखी हो गया।
In simple words: विजय बाबू की बातों से मुरलीवाला उदास हो गया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच की बातचीत और उससे उत्पन्न भावनाओं पर ध्यान दें।

 

Question 6. मुरली वाले के लिए मुरलियाँ दो-दो रुपये में बेचना किस तरह संभव हुआ था?
Answer: मुरली वाले ने एक साथ हज़ार बांसुरियाँ बनवाई थीं। इसलिए उसे वे इतनी सस्ती मिलीं और वह उन्हें दो-दो रुपये में बेच पाया।
In simple words: मुरलीवाला एक हजार बांसुरियाँ एक साथ बनवाता था, इसलिए उसे वे सस्ती पड़ती थीं।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक रणनीति या लागत से संबंधित तार्किक स्पष्टीकरणों को संक्षिप्त में बताएं।

 

Question 7. "समय की बात है जो बेचारा इस तरह मारा-मारा फिरता है। पेट जो न कराये, थोड़ा।" रोहिणी की इस सोच में मुरली वाले के प्रति कौन-सा भाव है?
Answer: रोहिणी मुरली वाले को एक गरीब फेरीवाला समझती है। इस सोच से उसके मन में मुरलीवाले के लिए दया और हमदर्दी का भाव आता है।
In simple words: रोहिणी को मुरलीवाले पर दया आती थी, क्योंकि उसे लगता था कि वह गरीब है और पेट पालने के लिए भटक रहा है।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के कथन या विचार से दूसरे पात्र की भावनाओं को पहचानें और उनका विश्लेषण करें।

 

Question 8. फेरीवाला खिलौने, मुरलियाँ तथा मिठाई ही क्यों बेचता है?
Answer: फेरीवाला बच्चों के करीब रहना चाहता है। वह ऐसी चीजें बेचता है जो बच्चों को बहुत पसंद आती हैं।
In simple words: फेरीवाला बच्चों से जुड़ा रहना चाहता था, इसलिए वह उनकी पसंदीदा चीजें बेचता था।

🎯 Exam Tip: पात्रों की पसंद और उनके काम के पीछे के व्यक्तिगत उद्देश्यों को स्पष्ट करें।

 

Question 9. मिठाईवाले की आवाज सुनाई पड़ी, उस समय रोहिणी क्या कर रही थी?
Answer: जब मिठाईवाले की आवाज सुनाई पड़ी, रोहिणी छत पर थी और अपने गीले बालों को सुखा रही थी।
In simple words: मिठाईवाले की आवाज सुनते समय रोहिणी छत पर अपने गीले बाल सुखा रही थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के दृश्य चित्रण से संबंधित विवरणों को ध्यान से याद रखें।

 

Question 10. रोहिणी के बाल कैसे थे? बालों को सुखाने की क्या जरूरत थी?
Answer: रोहिणी के बाल बहुत लंबे थे, जो उसकी जांघों तक पहुँचते थे, और नहाने के कारण गीले थे। सर्दी का मौसम होने के कारण उन्हें धूप में सुखाना जरूरी था।
In simple words: रोहिणी के बाल लंबे और गीले थे, जिन्हें सर्दी के कारण धूप में सुखाना जरूरी था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के विवरण और उनके परिवेश से जुड़ी जानकारी को सटीकता से प्रस्तुत करें।

 

Question 12. मिठाई वाले की आँखें आँसुओं से तर क्यों थीं?
Answer: अपनी दुखभरी कहानी रोहिणी को सुनाते हुए मिठाईवाले की पुरानी यादें ताजा हो गईं, जिससे उसकी आँखों में आंसू भर आए।
In simple words: रोहिणी को अपनी कहानी सुनाते समय उसे अपने दुखद बीते हुए समय की याद आ गई, जिससे उसकी आँखों में आंसू आ गए।

🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं और उनके कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'मिठाईवाला' कैसी कहानी है?
Answer: 'मिठाईवाला' भगवती प्रसाद वाजपेयी द्वारा लिखी गई एक कहानी है जो बच्चों के मन के भावों पर आधारित है। यह कहानी दिखाती है कि बच्चे खिलौनों, मुरलियों और मिठाइयों की ओर कितनी आसानी से आकर्षित होते हैं। इसमें बच्चों के चेहरे के भावों और उनकी तोतली बातों का सुंदर वर्णन किया गया है।
In simple words: यह एक बाल मनोविज्ञान पर आधारित कहानी है जो बच्चों की पसंद और उनकी मासूम हरकतों का सुंदर वर्णन करती है।

🎯 Exam Tip: कहानी के प्रकार और उसकी मुख्य विशेषताओं को संक्षिप्त और सटीक रूप से समझाएं।

 

Question 2. खिलौने वाले का अधूरा वाक्य क्या था? उसको सुनने पर युवतियों तथा बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता था?
Answer: खिलौने वाला मीठी और आकर्षक आवाज में एक खास तरीके से गली में चिल्लाता था- 'बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला!' उसकी आवाज सुनकर औरतें अपने बच्चों को गोद में लेकर पर्दा हटाकर छज्जों से गली में झाँकने लगती थीं। बच्चे उसकी आवाज सुनते ही दौड़कर उसे घेर लेते थे और अपनी तोतली भाषा में खिलौनों के दाम पूछते थे।
In simple words: खिलौने वाला 'बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला!' अधूरा वाक्य बोलता था, जिसे सुनकर बच्चे और औरतें दोनों उसकी ओर आकर्षित होते थे।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के अनोखे संवाद या कार्य के प्रभाव का वर्णन करते समय, बच्चों और बड़ों दोनों की प्रतिक्रियाओं को शामिल करें।

 

Question 3. विजय बहादुर के बच्चों का क्या नाम था? उन्होंने खिलौने वाले से क्या खरीदा था?
Answer: विजय बहादुर के बच्चों का नाम चुन्नू और मुन्नू था। उन्होंने खिलौने वाले से घोड़े खरीदे थे। वे अपने-अपने घोड़ों के बारे में बातें कर रहे थे।
In simple words: विजय बहादुर के बच्चों के नाम चुन्नू और मुन्नू थे, जिन्होंने खिलौने वाले से घोड़े खरीदे थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के नाम और उनकी खरीद से संबंधित विवरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. "फिर कभी उसे इस पर विचार करने की आवश्यकता भी भला क्यों पड़ती?" किसको किस पर विचार करने की आवश्यकता नहीं थी?
Answer: चुन्नू-मुन्नू की माँ रोहिणी को बच्चों से पूछने पर पता चला कि खिलौने वाला बहुत सस्ते खिलौने दे गया था। उसने सोचा कि खिलौने इतने सस्ते क्यों दिए गए, लेकिन बाद में वह अपने घर के कामों में व्यस्त हो गई और इस बात को भूल गई। उसे इस बारे में दोबारा सोचने की कोई जरूरत नहीं पड़ी।
In simple words: रोहिणी को खिलौनों के सस्ते दाम पर सोचने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि वह बाद में घर के कामों में व्यस्त हो गई और बात भूल गई।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों में दिए गए विशिष्ट कथनों के पीछे के संदर्भ और पात्रों की सोच को स्पष्ट करें।

 

Question 6. विजय बाबू कौन थे? रोहिणी ने उनसे क्या कहा?
Answer: विजय बाबू रोहिणी के पति थे। जब वह अखबार पढ़ रहे थे, रोहिणी ने मुरलीवाले की आवाज सुनी। उसने अपने पति से कहा कि वह मुरलीवाले को बुला लें, क्योंकि वह चुन्नू-मुन्नू के लिए बांसुरियाँ खरीदना चाहती थी। उसे डर था कि मुरलीवाला शायद फिर न आए। चुन्नू-मुन्नू भी घर पर नहीं थे और शायद पार्क गए हुए थे।
In simple words: विजय बाबू रोहिणी के पति थे। रोहिणी ने उन्हें मुरलीवाले को बुलाने के लिए कहा ताकि वह बच्चों के लिए बांसुरियाँ खरीद सके, क्योंकि उसे पता नहीं था कि वह फिर कब आएगा।

🎯 Exam Tip: पात्रों की पहचान, उनके संबंधों और उनके बीच की महत्वपूर्ण बातचीत को सटीकता से बताएं।

 

Question 7. मुरली वाले की आवाज सुनकर बच्चों की जो दशा हुई, उसको अपने शब्दों में लिखिए। क्या बड़ों पर भी उसकी आवाज का ऐसा ही प्रभाव होता है?
Answer: मुरलीवाले की आवाज सुनते ही बच्चे उसकी ओर दौड़ पड़े। भागते हुए किसी बच्चे की टोपी गिर गई, किसी के जूते पार्क में छूट गए, और किसी का पायजामा ढीला होकर नीचे आ गया। मुरलीवाले के पास पहुँचकर बच्चे एक साथ तोतली आवाज में कहने लगे- 'हम भी लेंगे, हम भी लेंगे मुरली!' बड़ों पर भी मुरलीवाले की आवाज का असर होता था, लेकिन उनमें बच्चों जैसी बेचैनी नहीं होती थी।
In simple words: मुरलीवाले की आवाज सुनकर बच्चे खुशी से बेकाबू होकर दौड़ पड़े, उनके कपड़े अस्त-व्यस्त हो गए। बड़ों पर भी प्रभाव था, पर वे बच्चों जितने बेचैन नहीं थे।

🎯 Exam Tip: बच्चों की उत्सुकता और बड़ों के धैर्य के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत वर्णन का उपयोग करें।

 

Question 8. विजय बाबू ने मुरली वाले से क्या पूछा, उसने उनको क्या उत्तर दिया?
Answer: विजय बाबू ने मुरली वाले से पूछा, 'भाई, तुम मुरली कैसे देते हो?' मुरलीवाला बच्चों से घिरा हुआ था। उनसे छुटकारा पाकर उसने विजय बाबू से कहा कि वह बांसुरी तीन-तीन पैसे के हिसाब से देता है, लेकिन उन्हें दो पैसे में ही दे देगा।
In simple words: विजय बाबू ने मुरलीवाले से बांसुरी की कीमत पूछी। मुरलीवाले ने बताया कि वह उन्हें तीन के बजाय दो पैसे में दे देगा।

🎯 Exam Tip: बातचीत के मुख्य बिंदुओं और उनमें शामिल कीमतों जैसे विशिष्ट विवरणों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 9. बच्चों को अपने आसपास पाकर मुरली वाले की क्या दशा हुई तथा क्यों?
Answer: बच्चों को अपने चारों ओर देखकर मुरलीवाला बहुत खुश हो गया। उसने प्यार से बच्चों से कहा कि वह सबको बांसुरी देगा। बच्चों का अपने प्रति स्नेह देखकर वह बहुत भावुक हो गया। उनकी तोतली बातें और बांसुरी लेने की उत्सुकता देखकर उसके मन में ममता का भाव भर आया।
In simple words: बच्चों को देखकर मुरलीवाला बहुत प्रसन्न हुआ। उनका प्यार और तोतली बातें सुनकर उसके मन में ममता और वात्सल्य का भाव उमड़ आया।

🎯 Exam Tip: पात्रों की आंतरिक भावनाओं और उनके बाहरी व्यवहार को जोड़कर स्पष्ट करें, खासकर जब वे बच्चों से संबंधित हों।

 

Question 10. मुरली वाला एकदम अप्रतिभ हो गया, क्यों?

🎯 Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रियाओं के पीछे के भावनात्मक या तार्किक कारणों को स्पष्ट रूप से समझने का प्रयास करें।

 

Question 11. मुरली वाले तथा विजय बाबू की बातों से व्यापारी तथा ग्राहक के किस चरित्र का परिचय मिलता है?
Answer: मुरलीवाले और विजय बाबू की बातें हमें व्यापारी और ग्राहक के स्वभाव के बारे में बताती हैं। व्यापारी अक्सर ज़्यादा मुनाफा कमाने के लिए सामान महँगा बेचता है। ग्राहक को लगता है कि व्यापारी उसे लूट रहा है, भले ही कोई सच्चा व्यापारी नुकसान उठाकर भी सस्ती चीज बेच रहा हो। इसी वजह से दोनों के बीच मोलभाव की आदत बन जाती है।
In simple words: इन बातों से पता चलता है कि व्यापारी अक्सर मुनाफा चाहता है और ग्राहक को लगता है कि उसे लूटा जा रहा है, जिससे मोलभाव की आदत बन जाती है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के संवादों का विश्लेषण करें ताकि उनके व्यवहार के पीछे के सामान्य मानवीय गुणों या प्रवृत्तियों को समझा जा सके।

 

Question 12. यदि अवसर मिलता तो आप मुरली वाले से किस तरह बातें करते? क्या विजय बाबू का ढंग अपनाते या अन्य कोई तरीका?
Answer: यदि मुझे मुरलीवाले के जीवन की दुखद कहानी पता होती, तो मैं उससे बहुत प्यार और हमदर्दी से बात करता, न कि कठोरता से। वैसे भी, मैं किसी व्यापारी या दुकानदार पर बिना वजह अविश्वास नहीं करता। मुझे एक निश्चित कीमत पर सामान खरीदना पसंद है। यदि विजय बाबू को भी पता होता कि मुरलीवाला पैसे कमाने के बजाय दूसरों को खुश करने के लिए यह काम करता है, तो वे भी ऐसी बातें नहीं करते।
In simple words: मैं मुरलीवाले से प्यार और हमदर्दी से बात करता, क्योंकि उसका दुख जानकर मैं विजय बाबू जैसा व्यवहार नहीं करता और ना ही अविश्वास करता।

🎯 Exam Tip: 'आप क्या करते' वाले प्रश्नों में, अपनी प्रतिक्रिया को कहानी के पात्रों की प्रेरणाओं और घटनाओं के संदर्भ में तर्कसंगत बनाएं।

 

Question 13. बच्चों को मुरली देते समय मुरली वाले ने जो बातें की, उनसे उसके चरित्र की किन विशेषताओं का पता चलता है?
Answer: बच्चों को मुरली देते समय मुरलीवाले की बातों से उसके चरित्र की ये विशेषताएँ पता चलती हैं:
1. वह बच्चों से बहुत प्यार करता है और उन्हें खुश और खेलते हुए देखना चाहता है।
2. वह पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि अपने खोए हुए बच्चों को गली के बच्चों में देखकर खुशी पाने के लिए फेरी लगाता है।
3. वह मीठा बोलता है और सभी बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करता है।
4. वह केवल वही सामान बेचता है जो बच्चों को पसंद आता है।
In simple words: मुरलीवाला बच्चों से प्यार करता था, पैसों के लिए नहीं बल्कि खुशी के लिए फेरी लगाता था, मीठा बोलता था और बच्चों की पसंद का सामान बेचता था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र की विशेषताओं को दर्शाने वाले बिंदुओं को स्पष्ट और उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 14. मुरली वाले की बातें सुनकर रोहिणी की उसके प्रति क्या धारणा बनी? उसकी बातें सुनकर क्या आप भी ऐसा ही सोचते हैं?
Answer: मुरलीवाले की बातें सुनकर रोहिणी ने सोचा कि उसने पहले ऐसा कोई फेरीवाला नहीं देखा जो बच्चों से इतने प्यार से बात करता हो। वह सामान भी बहुत सस्ता बेचता था। रोहिणी ने उसे एक अच्छा आदमी समझा और सोचा कि यह तो समय का फेर है कि वह भटक रहा है, क्योंकि पेट पालने के लिए इंसान को कुछ भी करना पड़ता है। रोहिणी को लगा कि मुरलीवाला गरीब है, इसलिए वह बड़ा व्यापार नहीं करता। शायद मैं भी ऐसा ही सोचता, लेकिन बच्चों के प्रति उसका प्यार देखकर मुझे अपनी इस धारणा पर संदेह होता।
In simple words: रोहिणी को मुरलीवाला दयालु, सस्ता सामान बेचने वाला और मजबूर लगा। उसने सोचा कि यह सिर्फ समय का फेर है, पर उसके बच्चों के प्रति प्यार ने रोहिणी को अपनी धारणा पर सोचने पर मजबूर कर दिया।

🎯 Exam Tip: पात्रों की सोच और आपकी अपनी राय को स्पष्ट करते समय, दोनों के पीछे के तर्कों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 16. रोहिणी ने स्वयं बातें न करके दादी से मिठाई वाले से बातें करने को कहा। इसका क्या कारण है? रोहिणी का. ऐसा करना आपकी दृष्टि में क्या उचित है?
Answer: रोहिणी ने दादी को मिठाईवाले से बात करने को कहा क्योंकि वह खुद बाहर जाकर उससे बात नहीं कर सकती थी। उसके परिवार में पर्दा प्रथा थी, और वह किसी अनजान पुरुष के सामने घर से बाहर नहीं आती थी। रोहिणी ने दादी से कहा कि वे कमरे में जाकर मिठाईवाले से बात करें और मोलभाव करें। रोहिणी खुद परदे के पीछे से बात सुनती। मेरी राय में, रोहिणी का ऐसा करना उसकी मज़बूरी के कारण था।
In simple words: रोहिणी ने दादी को मिठाईवाले से बात करने को कहा क्योंकि पर्दा प्रथा के कारण वह खुद बाहर नहीं जा सकती थी। यह उसकी मजबूरी थी।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक या सामाजिक नियमों के कारण पात्रों के व्यवहार को समझाते समय, उचित और अनुचित दोनों पहलुओं पर विचार करें।

 

Question 17. मिठाई वाले द्वारा बताई गई मिठाइयों की तीन विशेषताएँ लिखिए।
Answer: मिठाईवाले द्वारा बताई गई मिठाइयों की तीन विशेषताएँ ये थीं:
1. उसकी मिठाइयाँ रंग-बिरंगी थीं, उनका स्वाद खट्टा-मीठा और स्वादिष्ट था।
2. वे चपटी, गोल और मोटी गोलियों जैसी थीं, जो मुँह में देर तक टिकती थीं।
3. वे खाँसी ठीक करने में भी मदद करती थीं।
In simple words: मिठाई रंग-बिरंगी, खट्टी-मीठी, स्वादिष्ट, चपटी, गोल, मोटी और खांसी दूर करने वाली थी।

🎯 Exam Tip: जब विशेष गुणों को सूचीबद्ध करने के लिए कहा जाए, तो उन्हें स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में प्रस्तुत करें।

 

Question 18. मिठाईवाले और दादी की वार्ता को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: रोहिणी के कहने पर दादी ने मिठाईवाले को बुलाया। मिठाईवाले ने बताया कि वह एक पैसे में सोलह मिठाइयाँ देता है। दादी ने कहा कि सोलह कम हैं, उन्हें पच्चीस चाहिए। मिठाईवाले ने मना कर दिया कि वह पच्चीस नहीं दे पाएगा। तब दादी ने कहा, 'ठीक है, चार पैसे की ही दे दो। अगर पच्चीस नहीं, तो बीस ही दे दो। मैं बूढ़ी हूँ, मुझे मोलभाव करना नहीं आता।' इसके बाद रोहिणी परदे के पीछे से बोल रही थी, और दादी कभी-कभी उसकी बात को मिठाईवाले तक दोहरा देती थी।
In simple words: दादी ने मिठाईवाले से मिठाइयों की कीमत पूछी और मोलभाव करने की कोशिश की, जिसमें रोहिणी परदे के पीछे से मदद कर रही थी।

🎯 Exam Tip: संवादों को सीधे दोहराने के बजाय उन्हें अपने शब्दों में संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।

 

Question 19. यदि आप मिठाईवाले के स्थान पर होते तो दादी से क्या कहते? कल्पना करके उत्तर लिखिए।
Answer: यदि मैं मिठाई वाले के स्थान पर होता तो दादी से कहता कि मैं मिठाइयों का व्यापार नहीं करता। मैं तो बच्चों को खुश करने के लिए

🎯 Exam Tip: ऐसे काल्पनिक प्रश्नों में, अपने उत्तर को पात्र के मूल चरित्र और कहानी के मुख्य संदेश के अनुरूप रखें।

 

Question 21. रोहिणी मिठाई वाले से क्या जानना चाहती थी?
Answer: रोहिणी मिठाईवाले के बच्चों के प्रति प्यार भरे व्यवहार से प्रभावित थी। वह जानना चाहती थी कि वह इतना सस्ता सामान बच्चों को कैसे दे देता है और क्या उसे इससे कोई फायदा होता है? जब मिठाईवाले ने कहा कि वह फायदे के लिए नहीं, बल्कि मन की खुशी के लिए यह काम करता है, तो रोहिणी को उसके जीवन के बारे में और जानने की इच्छा हुई।
In simple words: रोहिणी मिठाईवाले के बच्चों से प्यार और सस्ते सामान बेचने के कारण से प्रभावित थी, इसलिए उसके जीवन के बारे में जानना चाहती थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों की जिज्ञासा के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 22. 'अब व्यर्थ उन बातों की चर्चा क्यों करूं?' मिठाई वाले के ऐसा कहने का क्या कारण है?
Answer: रोहिणी को मिठाईवाले ने बताया कि वह फायदे के लिए नहीं, बल्कि मन की खुशी और संतोष के लिए मिठाई और खिलौने बेचता है। रोहिणी ने उसके बारे में और जानना चाहा। इस पर मिठाईवाले ने कहा कि वह इन बेकार की बातों की चर्चा नहीं करना चाहता था, क्योंकि वह अपनी दुखद कहानी बताकर खुद भी दुखी नहीं होना चाहता था और न ही दूसरों को दुखी करना चाहता था।
In simple words: मिठाईवाला अपनी दुखद कहानी दोहराकर खुद को या दूसरों को दुखी नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने कहा 'अब व्यर्थ उन बातों की चर्चा क्यों करूं?'।

🎯 Exam Tip: पात्रों के कथनों के पीछे की भावनाओं और प्रेरणाओं को स्पष्ट करें, खासकर जब वे दुख या अतीत से संबंधित हों।

 

Question 23. "मेरा वह सोने का संसार था”- मिठाई वाले के इस कथन का आशय प्रकट कीजिए।
Answer: मिठाईवाला पहले एक सुखी और अमीर व्यक्ति था। उसके पास अच्छा कारोबार, बहुत पैसा, नौकर-चाकर, घर, गाड़ी-घोड़े सब कुछ था। उसकी पत्नी बहुत सुंदर थी और वह उसे बहुत प्यार करता था। उसके प्यारे बच्चे थे, जिनके शोर से घर गूंजता रहता था। 'मेरा वह सोने का संसार था' कहने का मतलब है कि उसका पारिवारिक जीवन बहुत सुंदर, सुखमय और आनंद से भरा हुआ था।
In simple words: 'सोने का संसार' का अर्थ है मिठाईवाले का पहले का सुखी और समृद्ध पारिवारिक जीवन, जिसमें पत्नी, बच्चे और हर खुशी थी।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक कथनों का अर्थ बताते समय, उन्हें कहानी के पात्र की पृष्ठभूमि और अनुभवों से जोड़ें।

 

Question 24. 'दादी प्राण निकाले नहीं निकले'- मिठाईवाले ने दादी से ऐसा क्या कहा?
Answer: मिठाईवाले ने दादी से कहा कि दुर्भाग्य से उसका खुशहाल संसार उजड़ गया था। उसकी सुंदर गृहस्थी खत्म हो गई और उसके बच्चे मर गए। अपना सब कुछ खोकर वह मर जाना चाहता था, लेकिन मरना उसके बस में नहीं था। उसके प्राण नहीं निकले और उसे इन सभी दुखों को सहने के लिए जीवित रहना पड़ा।
In simple words: मिठाईवाले ने कहा कि सब कुछ खोने के बाद भी वह मर नहीं पाया और उसे दुख झेलने के लिए जीवित रहना पड़ा।

🎯 Exam Tip: पात्रों के भावनात्मक और मार्मिक कथनों की गहराई को स्पष्ट करें, खासकर जब वे उनके व्यक्तिगत दुख को दर्शाते हों।

 

Question 25. "आखिर, कहीं न कहीं जन्मे ही होंगे- मिठाई वाले के इस कथन में उसका क्या विश्वास प्रकट हुआ है?

🎯 Exam Tip: पात्रों के विश्वासों और उम्मीदों को कहानी के संदर्भ में समझाएं, भले ही वे सीधे तौर पर न बताए गए हों।

 

Question 26. "जो नहीं है, इस तरह उसी को पा जाता हूँ" कथन के आधार पर बताइए कि मिठाई वाले के पास क्या नहीं है। तथा वह किस तरह क्या पा लेता है?
Answer: मिठाईवाले के बच्चे अब जीवित नहीं हैं, और उनके साथ ही उसका सुख और संतोष भी चला गया है। उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं है, बल्कि बहुत पैसा है। बच्चों को मिठाई आदि बेचकर और उन्हें खुश करके उसे सुख और संतोष मिलता है। उसे असली में सुख-संतोष की तलाश है, और बच्चों के बीच रहकर उसे अपना खोया हुआ सुख फिर से मिल जाता है।
In simple words: मिठाईवाले के बच्चे और असली खुशी उसके पास नहीं है। वह बच्चों को खुश करके और उनके बीच रहकर अपना खोया हुआ सुख और संतोष पा लेता है।

🎯 Exam Tip: पात्र के वर्तमान अभावों और उन्हें पूरा करने के लिए उसके प्रयासों को कहानी के केंद्रीय संदेश से जोड़ें।

 

Question 27. कहानीकार ने फेरी वाले को खिलौने, मुरलियाँ तथा मिठाइयाँ बेचते हुए दिखाया है। आपकी दृष्टि में इसका क्या कारण हो सकता है?
Answer: कहानी में फेरीवाला पहले खिलौनेवाला, फिर मुरलीवाला और अंत में मिठाईवाला बनकर आता है। ये तीनों चीजें बच्चों को बहुत पसंद आती हैं। फेरीवाला बच्चों को खुश करके और उन्हें हंसते-खेलते देखकर खुद भी खुश होता है और संतुष्ट रहता है। वह बच्चों में अपने बच्चों की छवि देखता है। उसका मकसद मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि आत्मसुख की तलाश करना है।
In simple words: फेरीवाला बच्चों की पसंदीदा चीजें बेचता है ताकि वह उन्हें खुश देख सके और उनमें अपने खोए हुए बच्चों को महसूस करके आत्मिक खुशी पा सके।

🎯 Exam Tip: कहानीकार के चयन के पीछे के कारणों का विश्लेषण करें, खासकर जब वे पात्र के उद्देश्यों और कहानी के संदेश से जुड़े हों।

 

Question 28. यदि आपके जीवन में मिठाई वाले के समान कोई दुःखद घटना घटती तो आप क्या करते? कल्पना पर आधारित उत्तर दीजिए।
Answer: मिठाईवाले के जीवन की घटना बहुत दुखद और भावुक कर देने वाली है। यदि मेरे जीवन में ऐसी ही कोई घटना घटती, तो मैं भगवान से उसे सहने की शक्ति मांगता। मैं एक ऐसा भवन बनवाता जहाँ बच्चों के लिए किताबें और खेल का सामान होता, और उनका प्रवेश मुफ्त होता। वहाँ बच्चे आकर खेलते और सीखते, इस तरह मैं और वे सभी खुश रहते।
In simple words: ऐसी दुखद घटना होने पर मैं भगवान से शक्ति मांगता और बच्चों के लिए एक ऐसी जगह बनाता जहाँ वे खेल और सीख सकें, जिससे सबको खुशी मिले।

🎯 Exam Tip: काल्पनिक उत्तरों में, अपनी प्रतिक्रिया को कहानी के मानवीय संदेश और सहानुभूति की भावना से जोड़ें।

 

Question 29. 'मिठाईवाला' कहानी की रचना का क्या उद्देश्य है?
Answer: 'मिठाईवाला' एक उद्देश्यपूर्ण कहानी है। कहानीकार हमें बताना चाहता है कि किसी दुखद घटना के बाद निराशा में जीने के बजाय, जीवन का एक नया रास्ता खोजना चाहिए। इंसान को दूसरों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए और दूसरों को खुशी देकर खुद भी संतोष पाना चाहिए। यही इस कहानी का मुख्य संदेश है।
In simple words: कहानी का उद्देश्य यह बताना है कि दुख के बाद भी जीवन में नया रास्ता खोजना चाहिए, दूसरों की सेवा से खुशी मिलती है और जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य संदेश या शिक्षा को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताएं।

 

Question 30. कहानीकार ने कहानी का शीर्षक मिठाई वाला ही क्यों रखा है? खिलौने वाला या मुरली वाला क्यों नहीं?
Answer: फेरीवाला तीन रूपों खिलौने वाला, मुरली वाला तथा मिठाई वाला में आता है। वह ऐसा क्यों करता है, यह तब प्रकट होता है जब

🎯 Exam Tip: शीर्षक की सार्थकता पर चर्चा करते समय, कहानी के मुख्य पात्र के विभिन्न रूपों और उसके पीछे के गहन अर्थ को उजागर करें।

 

Question 1. 'मिठाई वाला' कहानी की कथानक के आधार पर समीक्षा कीजिए। अथवा 'मिठाई वाला में कथानक की अपेक्षा मनोवैज्ञानिक चरित्र-चित्रण पर विशेष ध्यान दिया गया है'- अपना मत प्रकट कीजिए। अथवा 'मिठाई वाला' चरित्रे प्रधान कहानी के आधार पर मिठाई वाला' कहानी की विशेषताएँ बताइए।
Answer: 'मिठाईवाला' भगवती प्रसाद वाजपेयी की एक चरित्र-प्रधान कहानी है। कहानीकार ने इसमें कहानी के नियमों के अनुसार कथानक को नहीं रखा है। उनका ध्यान कहानी की शुरुआत, विकास, मोड़ और अंत पर नहीं है। चरित्र-प्रधान कहानियों में लेखक पात्रों के स्वभाव पर ध्यान देता है और उनकी खास परिस्थितियों में उनके मन के भावों को गहराई से दिखाता है। 'मिठाईवाला' कहानी में कहानी का हिस्सा बहुत छोटा है। इसमें कहानीकार का पूरा ध्यान मुख्य पात्र के जीवन में हुई दुखद घटना के बाद उसके चरित्र के मानसिक चित्रण पर है।
In simple words: 'मिठाईवाला' एक चरित्र-प्रधान कहानी है, जहाँ लेखक का मुख्य ध्यान कहानी के पात्रों के स्वभाव और उनके मनोवैज्ञानिक चित्रण पर है, न कि पारंपरिक कहानी के ढाँचे पर।

🎯 Exam Tip: कहानी की विधा (जैसे चरित्र-प्रधान) को स्पष्ट करते हुए, कथानक की तुलना में चरित्र चित्रण पर लेखक के जोर को समझाएं।

 

Question 2. मिठाई वाला' का चरित्र चित्रण कीजिए। अथवा मिठाई वाले की चरित्रगत विशेषताओं पर विचार कीजिए।
Answer: मिठाईवाला कहानी का मुख्य पात्र है। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
• स्नेही एवं वत्सल – मिठाईवाला बच्चों से बहुत प्यार करता है। वह उनसे धीरज और अपनापन से बात करता है, और उन्हें उनकी पसंद की हर चीज देता है।
• मन की खुशी का तलाश – मिठाईवाला अपने बच्चों की असमय मृत्यु से बहुत दुखी है। वह बच्चों में अपने बच्चों का चेहरा देखता है। उन्हें खुश करके वह खुद भी खुश और संतुष्ट होता है। वह अपने मन की खुशी और शांति ढूंढ रहा है।
• व्यापार सिर्फ एक बहाना – फेरी लगाकर पैसा कमाना उसका मकसद नहीं है। उसके पास बहुत पैसा है। व्यापार तो सिर्फ एक बहाना है। वह बच्चों को खुश देखकर खुश होता है। इसलिए वह बच्चों की पसंदीदा चीजें सस्ते में देता है।
• अच्छा व्यवहार – मिठाईवाला सभी से बहुत अच्छा व्यवहार करता है। वह विजय बाबू की कठोर बातों का जवाब भी सख्ती से नहीं देता। रोहिणी के कहने पर वह अपनी कहानी सुनाता है। वह दादी का सम्मान करता है तथा बच्चों से प्रेमपूर्ण व्यवहार करता है। वह कहानी का मुख्य पात्र तथा आधार है।
In simple words: मिठाईवाला बच्चों से बहुत प्यार करने वाला, अपने मन की खुशी खोजने वाला, व्यापार को सिर्फ एक बहाना मानने वाला और सभी से अच्छा व्यवहार करने वाला पात्र है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र चित्रण के लिए, उनकी प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें और प्रत्येक बिंदु को कहानी के उदाहरणों से पुष्ट करें।

 

Question 4. भगवती प्रसाद वाजपेयी की कहानी 'मिठाईवाला' पर कहानी के तत्वों के आधार पर विचार कीजिए।
Answer: भगवती प्रसाद वाजपेयी हिंदी के प्रेमचंद के बाद के कहानीकार हैं। उनकी कहानियों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • कथानक: वाजपेयी जी कहानियों की मुख्य कहानी पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहानी को क्रम से नहीं रचा है। उनकी कहानियाँ छोटी-छोटी घटनाओं से बनी हैं।
  • पात्र और चरित्र-चित्रण: उनकी कहानियों में पात्रों और उनके स्वभाव का वर्णन बहुत ज़रूरी है। पात्रों के जीवन में जब कोई मुश्किल स्थिति आती है, तो उनके बदले हुए स्वभाव को मनोविज्ञान के हिसाब से वाजपेयी जी ने अपनी कहानियों में दिखाया है।
  • संवाद: वाजपेयी जी की कहानियों में छोटे और बड़े दोनों तरह के संवाद मिलते हैं। संवादों का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ाने और पात्रों के स्वभाव को दिखाने के लिए किया गया है।
  • देश-काल: वाजपेयी जी ने अपनी कहानियों में पात्रों, भाषा, संवाद और रचना में अपने समय का ध्यान रखा है। जैसे 'जल्दी से दो ठो निकाल दो' - विजय बाबू के इस वाक्य में 'दो ठो' शब्द कानपुर के आस-पास की भाषा का है।
  • भाषा-शैली, उद्देश्य आदि: कहानीकार ने पात्रों और कहानी के हिसाब से भाषा का इस्तेमाल किया है। लिखने का मुख्य तरीका वर्णन करना है। उन्होंने खुद की बात कहने का तरीका (आत्मकथन शैली) भी इस्तेमाल किया है। वाजपेयी जी की कहानियों का कोई न कोई खास मकसद और संदेश होता है।

In simple words: भगवती प्रसाद वाजपेयी की कहानियाँ पात्रों के स्वभाव, छोटे संवाद और अपने समय की बातों पर ज़्यादा ध्यान देती हैं, बजाय कि एक लंबी, क्रमबद्ध कहानी कहने के। वे दिखाते हैं कि कैसे मुश्किल हालात इंसान के स्वभाव को बदल देते हैं।

🎯 Exam Tip: जब कहानी के तत्वों पर चर्चा करनी हो, तो हर तत्व (जैसे कथानक, पात्र, संवाद) को अलग-अलग शीर्षक देकर समझाएँ और उदाहरण भी दें।

 

Question 5. मिठाईवाला कहानी के आधार पर समझाइए कि मनुष्य अपने जीवन के अभावों की पूर्ति स्वयं को विश्व से जोड़कर कर सकता है तथा सुख-संतोषपूर्ण जीवन जी सकता है।
Answer: 'मिठाईवाला' भगवती प्रसाद वाजपेयी की एक बहुत ही खास कहानी है। कहानीकार ने इस कहानी में बताया है कि इंसान के जीवन में दुख और मुश्किलें आना आम बात है। कुछ लोग अपनी मुश्किलों में ही डूबे रहते हैं, उनके बारे में सोचते रहते हैं और हमेशा पछताते रहते हैं। लेकिन कुछ समझदार लोग दूसरों के दुख, दर्द और बीमारी को दूर करके अपनी मुश्किलों को भूल जाते हैं। इस तरह वे अपने जीवन में खुशी और शांति पाते हैं। यह कहानी दिखाती है कि अपने दुख को भूलने और दूसरों को खुशी देने से खुद को संतोष मिलता है।
In simple words: यह कहानी सिखाती है कि जब जीवन में दुख आए, तो हमें दूसरों की मदद करके और उन्हें खुशी देकर अपने दुख को भूलना चाहिए। इससे हमें खुद भी खुशी और संतोष मिलता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में कहानी के मुख्य संदेश को अपनी भाषा में सरल तरीके से समझाएँ, जिसमें मानव जीवन से जुड़ा पाठ शामिल हो।

 

Question 6. 'मिठाई वाला' कहानी की संवाद-योजना की समीक्षा कीजिए।
Answer: 'मिठाई वाला' कहानी के संवाद बहुत असरदार हैं। यह कहानी छोटी है लेकिन इसमें इस्तेमाल किए गए संवाद कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। फेरीवाले के तीनों रूप - खिलौने वाला, मुरली वाला, और मिठाई वाला - जिनके संवाद "बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला", "बच्चों को बहलाने वाला मुरलिया वाला" और "बच्चों को बहलाने वाला मिठाई वाला" थे, ये कहानी को और बढ़ाते हैं। कहानी में छोटे संवाद बहुत तीखे और नाटकीय हैं, वहीं बड़े संवाद भी हैं। उदाहरण के लिए, मुरलीवाले से जुड़े ये संवाद पढ़ने लायक हैं:
"वही तो नहीं, जो पहले खिलौने बेचा करता था।"
"क्या वह पहले खिलौने भी बेचा करता था।"
"हाँ जो आकार-प्रकार तुमने बतलाया, उसी प्रकार का वह भी था।"
संवाद पात्रों के स्वभाव को दिखाने में भी मदद करते हैं। मुरलीवाले का एक लंबा संवाद उसके बच्चों के प्रति उसके गहरे प्यार और लगाव को अच्छे से दिखाता है।
"यह बड़ी मुरली है। तुम यही ले लो बाबू, राजाबाबू तुम्हारे लायक तो बस यह है। हाँ, भैये, तुमको वही देंगे। ये लो। तुमको वैसी न चाहिए, यह नारंगी रंग की, अच्छा वही लो" इत्यादि।
मिठाईवाले के संवाद पात्रों के हिसाब से बिल्कुल सही हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों के संवाद तोतली बोली में रखे गए हैं:
चुन्नू - "मेरा घोला कैछा छुन्दल ऐ।"
मुन्नू - 'औल देखो, मेला कैछा छुन्दल ऐ।"
In simple words: कहानी के संवाद छोटे और असरदार हैं। वे कहानी को आगे बढ़ाते हैं और किरदारों के स्वभाव को दिखाते हैं। बच्चों के संवाद उनकी तोतली बोली में हैं, जो उन्हें असली बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: संवाद-योजना की समीक्षा करते समय, संवादों के प्रकार (छोटे, बड़े, नाटकीय), उनकी भाषा, और वे कैसे कहानी और पात्रों को विकसित करते हैं, इन बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 7. 'मिठाईवाला' कहानी के शीर्षक की उपयुक्तता पर विचार कीजिए।
अथवा
'मिठाईवाला' कैसा शीर्षक है? क्या आप इस कहानी का अन्य शीर्षक रखना चाहेंगे? सकारण उत्तर दीजिए।

Answer: 'मिठाईवाला' कहानी का शीर्षक बहुत सही है। यह कहानी के मुख्य किरदार मिठाईवाले पर आधारित है। यह शीर्षक छोटा है और पढ़ने वालों के मन में उत्सुकता जगाता है। यह पूरी कहानी का सबसे खास हिस्सा है और कहानी उसी के इर्द-गिर्द घूमती है। मिठाईवाला बच्चों को बहुत पसंद है और उसका जीवन उन्हीं के लिए समर्पित है। मिठाईवाला मिठाई बेचता है। यह जानने के बाद यह शीर्षक सही और संदेश देने वाला भी बन जाता है। 'मिठाईवाला' हर तरह से एक अच्छा शीर्षक है। इसे बदलकर इस कहानी का कोई और शीर्षक देने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह सबसे उपयुक्त है। भगवती प्रसाद वाजपेयी का प्रेमचंद के बाद के कहानीकारों में एक महत्वपूर्ण स्थान है। वाजपेयी जी ने ऐसी कहानियाँ लिखी हैं जिनमें मुख्य रूप से पात्रों के स्वभाव को दिखाया जाता है। इन कहानियों में कहानी की बनावट पर ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया गया है। उनकी कहानियाँ समाज से जुड़ी हैं और उनमें मध्यम वर्ग की उलझनें खास तौर पर दिखाई गई हैं। इन कहानियों में बदलते समाज, बदलते माहौल और नए सवाल-जवाब को बहुत सावधानी से दिखाया गया है। वाजपेयी जी की कहानियाँ समाज में फैली पुरानी सोच, बुराइयों और गलत रीति-रिवाजों पर भी आधारित हैं। उनमें अलग-अलग वर्गों के बीच की असमानता, अविश्वास, नफरत आदि को अच्छे से दिखाया गया है। वाजपेयी जी की कहानियों पर प्रेमचंद का प्रभाव दिखता है। उनमें आदर्शवादी यथार्थवाद (जैसा होना चाहिए, वैसा दिखाना) देखने को मिलता है। वाजपेयी जी की कहानियों में शरतचंद्र की भावुकता और गहराई भी है। उनकी कहानियाँ आकार में छोटी हैं लेकिन उनमें बहुत कुछ छुपा होता है। कहानी छोटी होती है लेकिन घटनाओं का तेज़ी से बदलना उन्हें उबाऊ नहीं बनाता। वाजपेयी जी की कहानियों की भाषा सीधी और स्वाभाविक है। उनकी कहानी कहने का तरीका दिलचस्प है और पढ़ने वालों को जोड़े रखता है। वाजपेयी जी एक सफल कहानीकार हैं।
In simple words: 'मिठाईवाला' एक अच्छा शीर्षक है क्योंकि यह कहानी के मुख्य किरदार और उसके मकसद को दिखाता है। कहानीकार वाजपेयी जी की कहानियाँ समाज और इंसान के स्वभाव पर केंद्रित होती हैं, जिनमें यथार्थ और भावनाओं का मिश्रण होता है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक की उपयुक्तता पर टिप्पणी करते समय, शीर्षक की प्रासंगिकता, कहानी के मुख्य पात्र से संबंध, और कहानी के संदेश को ध्यान में रखें।

 

Question. भगवती प्रसाद वाजपेयी के जीवन तथा साहित्यिक उपलब्धियों का परिचय दीजिए।
Answer:
जीवन परिचय - भगवती प्रसाद वाजपेयी का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में सन् 1899 में हुआ था। साहित्य के साथ उनका संबंध एक कवि के रूप में जुड़ा। उनकी पहली कहानी 'यमुना' सन् 1923 ई. में 'श्री शारदा' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। साहित्यकार भगवती प्रसाद वाजपेयी ने कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार आदि के रूप में अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया है।
साहित्यिक परिचय - वाजपेयी जी एक संवेदनशील कवि और जागरूक कथाकार हैं। उनके उपन्यासों तथा कहानियों की मुख्य कहानी समाज के मध्यम वर्ग से जुड़ी हुई है। वह गद्य की उपन्यास तथा कहानी विधाओं के सफल लेखक हैं। प्रेमचंद के बाद के कहानीकारों में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।
रचनाएँ -
उपन्यास- 'त्यागमयी', 'पतवार', 'भूदान'
नाटक- 'छलना', 'रायपिथौरा'।
कवि-संग्रह - 'ओस की बूंदें'।
कहानी-संग्रह- 'मधुपर्क', 'हिलोर', 'पुष्करिणी', 'दीपमालिका' 'उपहार', 'खाली बोतल', 'अंगारे', 'स्नेह' इत्यादि।
In simple words: भगवती प्रसाद वाजपेयी का जन्म 1899 में कानपुर में हुआ था। वह कवि, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार थे। उनकी कहानियाँ समाज के मध्यम वर्ग पर आधारित होती थीं। उन्होंने 'त्यागमयी', 'छलना', 'ओस की बूंदें' और 'मधुपर्क' जैसी कई रचनाएँ कीं।

🎯 Exam Tip: लेखक परिचय देते समय, जन्म-स्थान, जन्म-तिथि, मुख्य रचनाएँ और साहित्यिक योगदान को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।

 

पाठ-सार

 

Question. 'मिठाईवाला' कहानी का सारांश लिखिए।
Answer:
परिचय - 'मिठाईवाला' कहानी भगवती प्रसाद वाजपेयी द्वारा लिखी गई है। इसमें बच्चों की सोच और बड़ों के प्यार भरे स्वभाव का बहुत सुंदर वर्णन है।

 

**मुरली वाला –** छह महीने बाद शहर में मुरली वाले के आने की खबर फैली। वह एक गोरा, दुबला-पतला जवान आदमी था जो बीकानेरी रंगीन साफा बाँधता था। पता चला कि पहले वह खिलौने बेचता था। एक दिन रोहिणी ने सुना- "बच्चों को बहलाने वाला, मुरलिया वाला।" उसने अपने पति विजय बाबू से बच्चों के लिए मुरली खरीदने को कहा। तभी गली में दौड़कर आए बच्चों ने उसे घेर लिया। "हम भी लेंगे मुरली, हम भी लेंगे मुरली" सुनकर मुरली वाला खुश होकर बोला- "सबको देंगे भैया! .......एक-एक को लेने दो।" विजय बाबू ने दो मुरलियाँ खरीदीं। फिर उसने बच्चों को उनकी पसंद की मुरलियाँ दीं। सबको खुश करके वह आगे बढ़ गया। रोहिणी सोचने लगी कि मुरली वाला कितना अच्छा आदमी है। बच्चों को प्यार से सस्ती मुरली देता है, पता नहीं क्यों? पेट भरने के लिए वह बेचारा भटकने को मजबूर है।

 

**मिठाई वाला –** आठ महीने बाद रोहिणी स्नान करके छत पर अपने गीले बाल सुखा रही थी तभी गली में एक आवाज सुनाई पड़ी- "बच्चों को बहलाने वाला, मिठाई वाला।" मिठाई वाले की जानी-पहचानी आवाज सुनकर वह नीचे आई और अपनी दादी से उसे बुलवाया। पास आकर मिठाई वाले ने पूछा- कितनी मिठाई चाहिए माँ? खट्टी-मीठी, स्वादिष्ट, रंग-बिरंगी मिठाई की गोलियाँ हैं। ये खाँसी भी दूर करती हैं। एक पैसे की सोलह देता हूँ।" अंदर से रोहिणी ने दादी से कहा- "चार पैसे की ले लो। यह रहे पैसे।" अब रोहिणी उससे सीधे बात करने लगी। उसने उससे पूछा - "इन कामों से उसको कितना लाभ होता होगा?" मिठाई वाले ने कहा- "लाभ तो नहीं होता। पर हाँ, संतोष, धीरज और कभी-कभी असीम सुख मिल जाता है।" ज्यादा पूछने पर मिठाई वाले ने बताया कि वह अपने शहर का एक इज्जतदार व्यापारी था। उसके पास मकान, दुकान, गाड़ी, घोड़े, नौकर-चाकर सब थे, सुंदर पत्नी थी और सोने जैसे प्यारे बच्चे थे। उनके खेलने-कूदने की आवाज से घर गूँजा करता था। दुर्भाग्य से अब कोई नहीं है। तब उसने यह काम शुरू किया। उसे अपने सामने मौजूद बच्चों में अपने बच्चों की झलक मिल जाती है। उसे पैसों की कमी नहीं है बल्कि बच्चों के बीच रहकर उसे खुशी मिलती है। रोहिणी ने देखा- मिठाई वाले की आँखों में आँसू थे। तभी चुन्नू-मुन्नू ने आकर अपनी माँ से मिठाई माँगी। मिठाई वाले ने उनको दो पुड़ियाँ मिठाई दी और पैसे लिए बिना आगे बढ़ गया। उसकी मधुर आवाज फिर सुनाई पड़ रही थी- "बच्चों को बहलाने वाला, मिठाई वाला।"

 

कठिन शब्दों के अर्थ :

मादक = नशीला । अस्थिर = बेचैन । स्नेहाभिषिक्त = प्यार में डूबा।
चिक = जालीदार पर्दा । अन्तर्व्यापी = अंदर फैला हुआ। इठलाते = खुशी से भरे हुए। पेटी = संदूक। पुलकित = खुश।
मोल-भाव करना = कीमत पूछना। दाम = कीमत । हिलोर = लहर। छन्दल = सुंदर दिखना = देखना। जरा-सी = थोड़ी । मुरली = बाँसुरी । उस्ताद = माहिर ।
मृदुल = कोमल। सोथनी = पाजामा। मुल्ली = मुरली। अप्रतिभ = उदास । लागत = बनाने में लगा पैसा । दस्तूर = रिवाज, आदत । ठो = कानपुरी भाषा में गिनती के साथ जुड़ने वाला शब्द । लायक = योग्य। दुअन्नी = दो आने का सिक्का। तरकीब = उपाय।।

 

महत्वपूर्ण गद्यांशों की सन्दर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

 

1. इस अधूरे वाक्य को वह ऐसे विचित्र, किंतु मादक-मधुर ढंग से गाकर कहता कि सुनने वाले एक बार अस्थिर हो उठते। उसके स्नेहाभिषिक्त कंठ से फूटा हुआ उपयुक्त गान सुनकर निकट के मकानों में हलचल मच जाती। छोटे-छोटे बच्चों को अपनी गोद में लिए युवतियाँ चिकों को उठाकर छज्जों पर नीचे झाँकने लगतीं। गलियों और उनके अन्तर्व्यापी छोटे-छोटे उद्यानों में खेलते और इठलाते हुए बच्चों का झुंड उसे घेर लेता और तब वह खिलौने वाला वहीं बैठकर खिलौने की पेटी खोल देता। (पृष्ठ 67-68)
Answer:
सन्दर्भ - यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'मिठाईवाला' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं।
प्रसंग - वह एक फेरीवाला था और गली-गली घूमकर बच्चों की पसंदीदा चीजें जैसे खिलौने, बाँसुरी, मिठाई आदि बेचता था। वह बहुत ही मीठी आवाज में बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला' कहकर आवाज लगाता था।
व्याख्या - लेखक बताते हैं कि फेरीवाले की आवाज बहुत ही मधुर थी। वह 'बच्चों को बहलाने वाला खिलौने वाला' कहकर आवाज लगाता था। उसका यह वाक्य अधूरा था लेकिन वह इसे गाकर बोलता था। उसकी आवाज लगाने का तरीका अनोखा था जो लोगों को अपनी ओर खींच लेता था। सुनने वाले उसे सुनकर रुक जाते थे। प्यार से भरी उसकी आवाज में गाने जैसी पुकार सुनकर आस-पास के घरों में हलचल मच जाती थी। महिलाएँ अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर, पर्दा उठाकर छज्जों से गली में नीचे झाँकने लगती थीं। गलियों में और उनमें लगे छोटे-छोटे बगीचों में जो बच्चे खेल रहे होते थे, वे उसे घेर लेते थे। खिलौने वाला वहीं बैठ जाता था और अपनी पेटी खोलकर बच्चों को खिलौने दिखाता था।
विशेष -

  • खिलौने वाला आकर्षक, मधुर आवाज में आवाज लगाता था। उससे छोटे-बड़े सभी लोग प्रभावित होते थे।
  • बच्चे उसे घेर लेते थे और वह भी बहुत प्यार से उनको खिलौने दिखाता था।
  • भाषा में संस्कृत के शब्द हैं और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली वर्णन करने वाली है।

In simple words: खिलौने वाले की मधुर आवाज सुनकर बच्चे और महिलाएँ उसकी ओर खिंचे चले आते थे। वह बच्चों को घेर लेने पर वहीं बैठकर खिलौने दिखाता था। उसकी आवाज लोगों को मोहित कर देती थी।

🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय, पहले सन्दर्भ, फिर प्रसंग, और अंत में व्याख्या लिखें। विशेष बिंदुओं को अलग से उजागर करें।

 

2. बच्चे खिलौने देख पुलकित हो उठते। वे पैसे लाकर खिलौने का मोल-भाव करने लगे। पूछते-“इछका दाम क्या है, औल इछका। औल इछका? खिलौनेवाला बच्चों को देखता और उनकी नन्हीं-नन्हीं उँगलियों से पैसे ले लेता, और बच्चों की इच्छानुसार उन्हें खिलौने दे देता। खिलौने लेकर बच्चे फिर उछलने-कूदने लगते और तब फिर खिलौने वाला उसी प्रकार गाकर कहता- “बच्चों को बहलाने वाला, खिलौनेवाला।” सागर की हिलोर की भाँति उसका यह मादक गान गली भर के मकानों में इस ओर से उस ओर तक, लहराता हुआ पहुँचा और खिलौने वाला आगे बढ़ जाता। (पृष्ठ 68)
Answer:
व्याख्या - खिलौने वाला गली में बैठकर अपनी पेटी खोल देता था। बच्चे खिलौनों को देखकर बहुत खुश हो जाते थे। वे अपने घरों से पैसे लाकर आते थे और खिलौनों की कीमत पूछते थे। वे अपनी तोतली बोली में एक-एक खिलौने की कीमत जानना चाहते थे। खिलौने वाला बच्चों को देखता था। वह उनके छोटे-छोटे हाथों से पैसे लेता था और उन्हें खिलौने देता था। खिलौने पाकर बच्चे खुशी से खेलने लगते थे। तब खिलौने वाला पहले की तरह मीठी और आकर्षक आवाज में कहता था- 'बच्चों को बहलाने वाला-खिलौने वाला'। उसका यह मीठा और आकर्षक गीत गली के घरों में वैसे ही पहुँचता था जैसे समुद्र की लहरें पानी में उठकर चारों ओर फैल जाती हैं। इसके बाद खिलौने वाला अपनी पेटी उठाकर आगे बढ़ जाता था।
विशेष -

  • लेखक ने खिलौने वाले के बच्चों के प्रति प्यार भरे व्यवहार का वर्णन किया है।
  • खिलौने वाले की आवाज लगाने का तरीका बहुत आकर्षक और मधुर था।
  • भाषा विषय के अनुसार है और उसमें प्रवाह है।
  • शैली वर्णन करने वाली है।

In simple words: बच्चे खिलौने देखकर खुश होते थे और मोल-भाव करते थे। खिलौने वाला उन्हें प्यार से खिलौने देता था। फिर वह 'बच्चों को बहलाने वाला' कहकर आगे बढ़ जाता था, उसकी आवाज पूरे मोहल्ले में फैल जाती थी।

🎯 Exam Tip: व्याख्या में, मूल पाठ के हर छोटे विवरण को सरल भाषा में समझाएँ, खासकर जब बच्चों की बातचीत या भावनाओं का वर्णन हो।

 

3. किसी की टोपी गली में गिर पड़ी। किसी का जूता पार्क में छूट गया और किसी की सोथनी (पाजामा) ही ढीली होकर लटक आई है। इस तरह दौड़ते-हाँफते हुए बच्चों का झुण्ड आ पहुँचा। एक स्वर से सब बोल उठे- "अम बी लेंदे मुल्ली, और अम बी लेदे मुल्ली।” मुरलीवाला हर्ष-गद्गद हो उठा। बोला- “ सबको देंगे भैया! लेकिन जरा रुको, ठहरो, एक-एक को देने दो। अभी इतनी जल्दी हम कहीं लौट थोड़े ही जाएँगे। बेचने तो आए ही हैं, और हैं भी इस समय मेरे पास एक-दो नहीं, पूरी सत्तावन। हाँ बाबूजी, क्या पूछा था आपने, कितने में दीं..... दी तो वैसे तीन-तीन पैसे के हिसाब से है, पर आपको दो-दो पैसे में ही दे दूंगा।” (पृष्ठ 69)
Answer:
सन्दर्भ - यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'मिठाईवाला' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं।
प्रसंग - दूसरी बार फेरीवाला बाँसुरी बेचने आया। उसकी आवाज लगाने का तरीका पहले की तरह आकर्षक था। उसकी मधुर आवाज सुनकर बच्चों ने उसे घेर लिया। बच्चे जल्दी से उसकी ओर दौड़ रहे थे कि उनको अपने शरीर की भी सुध नहीं थी।
व्याख्या - फेरीवाले की ओर दौड़ते हुए बच्चों का वर्णन करते हुए लेखक कहते हैं कि बच्चों को उसके पास पहुँचने की जल्दी थी और वे अपनी सुध-बुध भूल गए थे। किसी बच्चे की टोपी गिर गई थी, लेकिन उसे इसका होश नहीं था। किसी का जूता पार्क में ही छूट गया था। वह नंगे पैर ही आ पहुँचा था। किसी बच्चे का पाजामा दौड़ने के कारण नीचे लटक गया था। इस तरह दौड़ते-हाँफते बच्चों के झुंड ने फेरीवाले को घेर लिया। वे सब एक साथ तोतली बोली में कह रहे थे - हम भी मुरली लेंगे, हम भी मुरली लेंगे। बच्चों की आवाज मुरली वाले को बहुत खुश कर रही थी। उसने कहा - भैया सबको मुरली मिलेगी। लेकिन थोड़ा रुको। ठहरकर एक-एक करके लेने दो। अभी मैं यहीं देर तक रुकूँगा, लौटकर नहीं जाऊँगा। मैं तो मुरली बेचने के लिए ही यहाँ आया हूँ। मुरलियाँ भी मेरे पास बहुत हैं।
विशेष -

  • दूसरी बार फेरीवाला बाँसुरी बेचने आया।
  • बच्चों ने उसे घेर लिया। बच्चों की मुरली लेने की उत्सुकता को लेखक ने बहुत सुंदर तरीके से दिखाया है।
  • भाषा प्रवाहपूर्ण, सरल और विषय के अनुसार है।
  • चित्रों और बातचीत की शैली का इस्तेमाल किया गया है।

In simple words: मुरलीवाले की मधुर आवाज सुनकर बच्चे खुशी से दौड़ पड़े, कुछ की टोपी गिरी, कुछ के जूते छूटे, लेकिन उन्हें परवाह नहीं थी। वे सब तोतली बोली में मुरली माँग रहे थे, जिससे मुरलीवाला बहुत खुश हुआ और उन्हें धीरे-धीरे देने को कहा।

🎯 Exam Tip: बच्चों की उत्सुकता और उनकी तोतली भाषा का वर्णन करते समय, कहानी के मूल भाव को बनाए रखें और सरल शब्दों का प्रयोग करें।

 

4. मुरलीवाला एकदम अप्रतिभ हो उठा। बोला- “आपको क्या पता बाबूजी कि इनकी असली लागत क्या है। यह तो ग्राहकों का दस्तूर होता है कि दुकानदार चाहे हानि उठाकर चीज क्यों न बेचे, पर ग्राहक यही समझते हैं- दुकानदार मुझे लूट रहा है। आप भला काहे को विश्वास करेंगे? लेकिन सच पूछिए तो बाबूजी, असली दाम दो ही पैसा है। आप कहीं से दो पैसे में ये मुरलियाँ नहीं पा सकते। मैंने तो पूरी एक हजार बनवाई थीं, तब मुझे इस भाव पड़ी हैं।” (पृष्ठ 69)
Answer:
सन्दर्भ - यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'मिठाईवाला' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं।
प्रसंग - मुरलीवाले से विजय बाबू ने मुरली की कीमत पूछी तो उसने बताया कि वैसे तो वह तीन रुपये की एक मुरली बेचता है। लेकिन उनको दो रुपये में दे देगा। विजय बाबू ने इस पर कहा कि वह दो रुपये में ही मुरली बेचती होगा परन्तु उन पर उलटा अहसान लाद रहा है।
व्याख्या - विजय बाबू की बात सुनकर मुरली वाला उदास हो गया। वह कुछ दुखी और निराश होकर विजय बाबू से बोला कि उनको मुरलियों को बनाने में जितना पैसा लगा है, उसका पता नहीं है। ग्राहकों की तो आदत होती है कि दुकानदार से कहते हैं कि वह उनको लूट रहा है और महंगा सामान बेच रहा है। चाहे दुकानदार को लागत भी न मिल रही हो और उसको नुकसान हो रहा हो। अगर वह मुरली की सही लागत बताएगा भी तो वे विश्वास नहीं करेंगे। यदि वह उसकी बात को सच माने तो वह कहेगा कि उन मुरलियों का असली दाम दो पैसे है। मगर वह किसी भी जगह चले जाएँ, उनको ये मुरली दो रुपये में नहीं मिलेगी। उसने पूरी एक हजार मुरलियाँ बनवाई थीं। तब उसको वे इस भाव में मिल सकी हैं।
विशेष -

  • मुरली वाले तथा विजय बाबू की बातचीत है।
  • ग्राहक तथा बेचने वाले के बीच संदेह और अविश्वास की भावना रहती है- इसका वर्णन है।
  • इसमें ग्राहकों के स्वभाव तथा मनोविज्ञान को दिखाया गया है।
  • भाषा समझने में आसान और विषय के अनुसार है।
  • शैली वर्णन करने वाली और बातचीत वाली है।

In simple words: मुरलीवाला विजय बाबू से कहता है कि ग्राहकों को लगता है दुकानदार लूट रहा है, भले ही वह सस्ता दे रहा हो। उसने बताया कि उसने एक हजार मुरलियाँ बनवाई थीं, इसलिए उसे सिर्फ दो पैसे में मिली हैं और इतनी सस्ती मुरलियाँ कहीं और नहीं मिलेंगी।

🎯 Exam Tip: संवादों की व्याख्या करते समय, पात्रों के भावों और उनके शब्दों के पीछे छुपे अर्थ को स्पष्ट करें। खासकर जब ग्राहकों और विक्रेताओं के बीच के संबंध की बात हो।

 

5. सन्दर्भ – उपर्युक्त गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित भगवती प्रसाद वाजपेयी लिखित 'मिठाईवाला' शीर्षक कहानी से उद्धृ त है।
Answer:
प्रसंग – दूसरी बार फेरीवाला मुरलियाँ लेकर आया तो उसकी आवाज सुनकर बच्चों ने उसको घेर लिया। वह अपने सन्दूक से बच्चों की पसंद की मुरली निकालकर उनको दे रहा था।
व्याख्या - मुरली वाले ने बच्चों की इच्छा के अनुसार उनको मुरली दी। वह बच्चों से बातें करता जा रहा था। वह किसी बच्चे से कह रहा था कि उसको बड़ी मुरली चाहिए। यह वही बड़ी मुरली है। वह उसको ले ले। प्यार से पुचकार कर उसने बच्चे को राजाबाबू कहा और समझाया कि बस यह मुरली ही उसके लायक है। उसने एक दूसरे बच्चे से कहा कि उसको वैसी नारंगी रंग की मुरली चाहिए तो वह उसको नारंगी रंग की मुरली देगा। इसके बाद उसने एक और बच्चे की ओर मुड़कर उससे पूछा कि वह क्या घर से पैसे ले आया। उसने उसके लिए पहले से ही बाँसुरी निकाल कर रख ली थी। एक और बच्चे को बाँसुरी खरीदने के लिए पैसे नहीं मिले। उसने उसको माँ से पैसे लेने का सही तरीका समझाया और कहा कि अब की बार अपनी माँ की धोती पकड़कर और उसके पैरों में लिपटकर पैसे माँगना। अब वह दोबारा अपनी माँ के पास जाये और इसी तरह पैसे माँगे तो उसको पैसे मिल जायेंगे।
विशेष -

  • बच्चों के प्रति फेरीवाले के प्यार भरे व्यवहार का वर्णन बहुत अच्छे से हुआ है।
  • फेरीवाले और बच्चों के बीच हुई बातचीत को फेरीवाले के कथन के माध्यम से दिखाया गया है।
  • भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली बातचीत वाली और प्रश्नोत्तर की है।

In simple words: मुरलीवाला बच्चों को उनकी पसंद की मुरलियाँ प्यार से दे रहा था, उन्हें राजाबाबू कहकर समझा रहा था और पैसे लाने का तरीका भी बता रहा था। उसके व्यवहार में बच्चों के प्रति गहरा स्नेह दिख रहा था।

🎯 Exam Tip: बच्चों से जुड़े संवादों की व्याख्या करते समय, उनकी मासूमियत और फेरीवाले के धैर्यपूर्ण व्यवहार को उजागर करें।

 

6. अतिशय गंभीरता के साथ मिठाईवाले ने कहा- "मैं भी अपने नगर का एक प्रतिष्ठित आदी था। मकान, व्यवसाय, गाड़ी-घोड़े, नौकर-चाकर सभी कुछ था। स्त्री थी, छोटे-छोटे दो बच्चे भी थे। मेरा वह सोने का संसार था। बाहर संपत्ति का वैभव था, भीतर सांसारिक सुख था। स्त्री सुन्दरी थी, मेरी प्राण थीं। बच्चे ऐसे सुन्दर थे, जैसे सोने के सजीव खिलौने। उनकी अठखेलियों के मारे घर में कोलाहल मचा रहता था। समय की गति! विधाता की लीला। अब कोई नहीं है। (पृष्ठ71)
Answer:
सन्दर्भ - यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'मिठाईवाला' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं।
प्रसंग - रोहिणी मिठाईवाले के बारे में जानना चाहती थी। उसने पूछा कि इस प्रकार फेरी लगाकर सस्ती चीजें बेचने से उसको क्या लाभ होता है। पूछने पर बहुत आग्रह के बाद मिठाईवाले ने अपनी कहानी बताई।
व्याख्या - मिठाईवाले ने बहुत गंभीरता से रोहिणी को बताया कि वह अपने शहर का एक अमीर और सम्मानित व्यक्ति था। उसके पास मकान, दुकान, नौकर-चाकर, गाड़ी-घोड़े सब कुछ था। उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे थे। उसकी गृहस्थी भरी-पूरी और खुशी से भरी थी।
विशेष -

  • रोहिणी के कहने पर मिठाईवाले ने अपनी खुशहाल ज़िंदगी की कहानी बताई। उसने बताया कि दुर्भाग्य से उसके पत्नी-बच्चे अब नहीं हैं।
  • वह अपने बच्चों की तलाश में निकला है। बच्चों के बीच रहकर उनमें अपने बच्चों की छवि देखता है।
  • भाषा में संस्कृत के शब्द हैं। वाक्य छोटे-छोटे हैं।
  • शैली वर्णन करने वाली है।

In simple words: मिठाईवाले ने रोहिणी को बताया कि वह पहले एक अमीर आदमी था जिसके पास सब कुछ था - पत्नी, दो प्यारे बच्चे। उसका घर बच्चों की आवाज़ से गूंजता था, लेकिन किस्मत ने सब छीन लिया और अब उसके पास कोई नहीं है।

🎯 Exam Tip: जब कोई पात्र अपने अतीत के बारे में बताए, तो उसकी भावनाओं और दुख को सरल शब्दों में व्यक्त करें, ताकि पढ़ने वाला कहानी से जुड़ सके।

 

7. दादी, प्राण निकाले नहीं निकले। इसलिए अपने उन बच्चों की खोज में निकला हूँ। वे सब अन्त में होंगे, तो यहीं कहीं। आखिर, कहीं न कहीं जन्में ही होंगे। उस तरह रहता, घुलघुल कर मरता। इस तरह सुख-संतोष के साथ मरूंगा। इस तरह के जीवन में कभी-कभी अपने उन बच्चों की एक झलक-सी मिल जाती है। ऐसा जान पड़ता है, जैसे वे इन्हीं में उछल-उछलकर हँस-खेल रहे हैं। पैसों की कमी थोड़े ही है, आपकी दया से पैसे तो काफी हैं। जो नहीं है, इस तरह उसी को पा जाता हूँ। (पृष्ठ 71)
Answer:
सन्दर्भ - यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'मिठाईवाला' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं।
प्रसंग - मिठाईवाले ने पूछने पर अपनी कहानी बताई। उसने बताया कि अपने मन की बेचैनी और पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए ही उसने यह काम अपनाया था। इस तरह वह बच्चों के बीच रहता था और उनमें अपने बच्चों को देखता था।
व्याख्या - मिठाईवाले ने दादी को संबोधित करते हुए उनको बताया कि यदि वह यह काम नहीं अपनाता और बच्चों के बीच नहीं रहता तो अपने बच्चों को खोने का दर्द उसका पीछा नहीं छोड़ता। बच्चों की मौत से हुआ दर्द बहुत भयानक था। बस उसके प्राण ही नहीं निकले। इस काम के कारण वह बच्चों के बीच रहता है। इनमें उसे अपने बच्चों की छवि दिखाई देती है। यदि वह ऐसा नहीं करता तो वह घुट-घुट कर मर गया होता। उसने सोचा था कि मरने के बाद उसके बच्चों ने कहीं तो फिर जन्म लिया ही होगा। यह सोचकर वह अपने बच्चों की तलाश में निकला है। इन बच्चों को देखकर उसे लगता है कि उसके बच्चे इन्हीं के बीच खेल रहे हैं। इस तरह उसको खुशी और संतोष मिलता है। धन की उसके पास कमी नहीं है, धन तो बहुत है। उसके मन का सुख और संतोष छिन गया है। वही इन बच्चों के बीच में रहकर वह पाना चाहता है।
विशेष -

  • मिठाईवाला ने बताया है कि वह कभी खिलौने, कभी मुरली तो कभी मिठाई बेचने बच्चों के बीच क्यों आता है।
  • बच्चों के बीच रहना तथा उनकी बच्चों जैसी बातें सुनना उसको खुशी और संतोष देता है।
  • भाषा सरल, मुहावरेदार तथा प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली वर्णन करने वाली है।

In simple words: मिठाईवाला कहता है कि उसके बच्चे मर गए, लेकिन उसके प्राण नहीं निकले, इसलिए वह उन्हें खोजने निकला है। उसे लगता है कि वे इन बच्चों में कहीं न कहीं फिर से जन्मे हैं। बच्चों के बीच रहकर उसे अपने बच्चों की झलक मिलती है, जिससे उसे खुशी और संतोष मिलता है, क्योंकि उसे पैसों की नहीं बल्कि अपने खोए हुए सुख की तलाश है।

🎯 Exam Tip: पात्र के आंतरिक संघर्ष और प्रेरणा को उजागर करते हुए, उसके शब्दों के गहरे अर्थ को सरल भाषा में समझाएँ।

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