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Detailed Chapter 14 ठेले पर हिमालय RBSE Solutions for Class 12 Hindi
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Class 12 Hindi Chapter 14 ठेले पर हिमालय RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. नैनीताल से कोसी जाने वाली सड़क को लेखक ने कैसी बताया है -
(a) सुन्दर-साफ व आरामदायक
(b) सीधी व सपाट
(c) ऊँची और मजेदार
(d) ऊबड़-खाबड़ और कष्टप्रद
Answer: (d) ऊबड़-खाबड़ और कष्टप्रद
In simple words: लेखक ने नैनीताल से कोसी जाने वाली सड़क को बहुत ही खराब और मुश्किल बताया है, जहाँ चलना आसान नहीं था।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प का चुनाव पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर ही करें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. लेखक का मित्र ठेले पर बर्फ देखकर खोया-खोया क्यों हो गया?
Answer: लेखक का मित्र अल्मोड़ा का रहने वाला था। ठेले पर बर्फ को देखकर उसे हिमालय के ऊँचे शिखरों पर जमी बर्फ की याद आ गई, इसलिए वह खोया-खोया हो गया। हिमालय की यादें उसके मन में ताज़ा हो गईं।
In simple words: लेखक का दोस्त अल्मोड़ा का था। ठेले पर बर्फ देखकर उसे हिमालय की बर्फ की याद आ गई और वह उसमें खो गया।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में पात्र के निवास स्थान और उसकी भावनाओं के बीच संबंध को स्पष्ट करें।
Question 2. लेखक ने किससे मिलने पर यह कहा कि उन जैसा साथी तो सफर में पिछले जन्म के पुण्यों से ही मिलता है?
Answer: लेखक ने शुक्ल जी से मिलने पर यह बात कही कि उनके जैसा साथी सफर में पिछले जन्म के अच्छे कर्मों (पुण्यों) से ही मिलता है। शुक्ल जी की कंपनी से लेखक को बहुत खुशी मिली थी।
In simple words: लेखक ने शुक्ल जी से मिलने पर कहा कि उनके जैसा अच्छा साथी तो पिछले जन्म के अच्छे कामों के कारण ही मिलता है।
🎯 Exam Tip: उद्धरण वाले प्रश्नों में, बात किसने कही और किसके लिए कही, यह याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. लेखक की सारी निराशा व खिन्नता कब दूर हुई?
Answer: जब लेखक ने कौसानी में बर्फ से ढके हुए पहाड़ों को देखा, तब उसके मन की सारी उदासी और निराशा दूर हो गई। हिमालय का अद्भुत दृश्य मन को शांति प्रदान करता है।
In simple words: लेखक की उदासी और निराशा तब दूर हुई जब उसने कौसानी में बर्फ से ढके पहाड़ देखे।
🎯 Exam Tip: वर्णन वाले प्रश्नों में, घटना और उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से जोड़ें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. त्रिताप कौन-कौन से होते हैं? हिमालय की शीतलता से वे कैसे दूर हो गए?
Answer: त्रिताप का अर्थ है तीन प्रकार के कष्ट-दैहिक (शारीरिक), दैविक (ईश्वरीय) और भौतिक (सांसारिक)। पुराने समय में साधक इन कष्टों से छुटकारा पाने के लिए हिमालय पर जाते थे। हिमालय की ठंडक मनुष्य के शारीरिक दर्द को कम करती है। हिमालय का पवित्र और शांत वातावरण मन की बेचैनी को दूर करता है, जिससे आत्मिक शांति मिलती है। यह हमें सांसारिक मोह से भी दूर रखता है। इस प्रकार, हिमालय की शीतलता, पवित्रता और शांति व्यक्ति को इन तीनों कष्टों से मुक्ति दिलाती है।
In simple words: त्रिताप तीन तरह के दर्द होते हैं- शरीर, मन और बाहरी दुनिया के। हिमालय की शांति और ठंडक इन सभी दर्दों को दूर कर देती है।
🎯 Exam Tip: त्रिताप के तीनों प्रकारों का उल्लेख करें और फिर बताएं कि हिमालय कैसे हर एक को शांत करता है।
Question 2. हिमालय के पर्वतीय सौन्दर्य में स्नोफाल किस प्रकार पर्यटकों को अधिक आकर्षित करता है?
Answer: हिमालय बहुत ही सुंदर है। इसकी चोटियों पर जमी बर्फ लोगों को बेहद आकर्षक लगती है। जब हिमालय पर बर्फ गिरती है, तब सूरज ढलने लगता था और दूर की चोटियों पर दर्रे, ग्लेशियर, घाटियाँ थोड़ी धुंधली दिख रही थीं। ग्लेशियरों पर की बर्फ केसर जैसी पीली चमक रही थी। पहाड़ों पर जमी बर्फ लाल कमल जैसी दिखाई दे रही थी। कौसानी की घाटियाँ भी पीली रंगत में रंगी हुई दिख रही थीं, यह दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।
In simple words: हिमालय पर बर्फ गिरने से उसकी चोटियाँ बहुत सुंदर दिखती हैं। सूरज ढलते समय बर्फ पीले और लाल रंग की हो जाती है, जो पर्यटकों को बहुत पसंद आती है।
🎯 Exam Tip: पर्वतीय सौंदर्य का वर्णन करते समय रंगों, प्रकाश और प्राकृतिक तत्वों के प्रभाव को शामिल करें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. पर्वतीय क्षेत्रों के प्राकृतिक सौन्दर्य पर एक लेख लिखिए।
Answer: प्रकृति की सुंदरता अद्भुत होती है। नदियाँ, जंगल, पहाड़, आसमान और समुद्र सभी अपनी अलग-अलग शोभा रखते हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों की सुंदरता सबसे मनमोहक होती है। पहाड़ों पर तरह-तरह के दृश्य देखने को मिलते हैं। यहाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई पहाड़ियाँ और उनके पथरीले रास्ते हमें अपनी ओर खींचते हैं। कहीं मजबूत चट्टानें तो कहीं हल्की चट्टानें मिलकर ऊँचे पहाड़ बनाती हैं। लाल चट्टानें सुंदर दिखती हैं। इन पर सीढ़ीदार खेत होते हैं, जिनमें लगे हरे-भरे पौधे बहुत अच्छे लगते हैं। पहाड़ों पर घने जंगल होते हैं, जहाँ चीड़ और देवदार जैसे कई पेड़ होते हैं। कहीं-कहीं झाड़ियाँ और लंबी हरी घास भी उगती है। ये पेड़-पौधे पहाड़ों की शोभा बढ़ा देते हैं। इनकी ऊँची चोटियाँ आकाश को छूती हुई लगती हैं। इन पहाड़ी जंगलों में हाथी, शेर, चीता और कई छोटे-बड़े जीव-जंतु पाए जाते हैं। ये सभी पशु-पक्षी देखने में बहुत सुंदर होते हैं। लोग इन वनों और पशु संरक्षण उद्यानों में उन्हें देखने आते हैं। पहाड़ों पर बहती नदियाँ अपनी कल-कल आवाज से मन को खुश करती हैं। यहाँ जलाशयों और सरोवरों का पानी इतना साफ होता है कि वे दर्पण जैसे दिखते हैं। इनमें पहाड़ों की सुंदर परछाईं दिखती है। पहाड़ों की ऊँची चोटियाँ हमेशा सफेद बर्फ से ढकी रहती हैं। यह बर्फ बेहद सुंदर दिखती है। सूरज और चाँद की रोशनी में यह रंग-बिरंगी और चमकती हुई लगती है। यहाँ सूरज और चाँद का उगना और ढलना भी बहुत मनमोहक होता है। अँधेरी रात में टिमटिमाते तारे भी अलग ही सुंदर लगते हैं। पहाड़ों पर बर्फ गिरने के सुंदर दृश्यों को देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।
In simple words: पहाड़ों की सुंदरता बहुत खास होती है। यहाँ हरे-भरे जंगल, बर्फ से ढकी चोटियाँ, साफ नदियाँ और सुंदर वन्यजीव मिलते हैं। उगता और ढलता सूरज भी यहाँ बेहद खूबसूरत लगता है, जो पर्यटकों को बहुत पसंद आता है।
🎯 Exam Tip: पर्वतीय सौंदर्य का वर्णन करते समय सभी प्राकृतिक तत्वों-नदियों, वनों, जीवों, बर्फ और खगोलीय दृश्यों का उल्लेख करें।
Question 2. पर्यटन का हमारे जीवन में क्या महत्व है?
Answer: अलग-अलग जगहों पर घूमने को पर्यटन कहते हैं। इन यात्राओं का कोई खास मकसद नहीं होता, बस जगहों को देखना ही पर्यटन का मुख्य भाव है। लोग धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से प्रसिद्ध जगहों पर घूमने जाते हैं। ये जगहें अपने देश में या विदेश में कहीं भी हो सकती हैं। पर्यटन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। पर्यटन से व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है। जब कोई घूमने जाता है, तो वह नई चीजें सीखता है और नए अनुभव पाता है। ऐतिहासिक स्थलों, इमारतों और संग्रहालयों को देखना इतिहास की किताबों को पढ़ने से भी ज्यादा जरूरी होता है। वहाँ जाकर हम उस समय और युग से खुद मिल सकते हैं। ताजमहल को देखकर हम सिर्फ उसकी सुंदरता से ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि उसे बनाने वाले बादशाह शाहजहाँ के जीवन और कहानियों को भी जान पाते हैं। इसी तरह, धार्मिक स्थलों की यात्रा से धर्म में हमारी आस्था बढ़ती है। मंदिरों की सुंदर मूर्तियाँ और इमारतें हमारे मन को खुश करती हैं। पहाड़ों, जंगलों और समुद्र तटों जैसी प्राकृतिक जगहों पर घूमना बहुत मजेदार होता है। इन जगहों पर जाकर हमें प्रकृति को करीब से देखने का मौका मिलता है। पहाड़ों की चोटियों पर चमकीली सफेद बर्फ, जंगलों में तरह-तरह के पेड़-पौधे और लताएँ, उनमें रहने वाले जीव-जंतु, समुद्र तट का फैलाव, सूरज और चाँद की रोशनी में चमकता पानी और उठती लहरें पर्यटकों को बार-बार बुलाती हैं। पर्यटन से हमारा जीवन सार्थक बनता है। प्रसिद्ध यात्री राहुल सांकृत्यायन ने दुनिया की कई जगहों की यात्रा की थी। पर्यटन की प्रेरणा देते हुए वह कहते हैं कि "सैर कर दुनियाँ की गाफिल जिन्दगानी फिर कहाँ। जिन्दगानी भी मिली तो नौजवानी फिर कहाँ।।" इसका मतलब है कि घूमकर दुनिया देखने का अवसर फिर कहाँ मिलेगा, और अगर युवावस्था में जीवन मिले, तो फिर उसे घूमने में क्यों न बिताया जाए।
In simple words: पर्यटन का मतलब है नई जगहों को देखना। इससे हमारा ज्ञान बढ़ता है, हम नई चीजें सीखते हैं, और मन खुश होता है। यह हमें इतिहास और प्रकृति को करीब से समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: पर्यटन के महत्व को समझाते हुए ज्ञान वृद्धि, मानसिक शांति और ऐतिहासिक व प्राकृतिक जुड़ाव जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय भाषा की बात
Question. 'कुछ देर बादलों में निगाह भटकती रही कि अकस्मात्, फिर एक हलका-सा विस्मय को धक्का मन को लगा;' -यह एक मिश्र वाक्य है। मिश्र वाक्य किसे कहते हैं। यह कितने प्रकार से बनते हैं?
Answer: जिस वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या उससे अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं, उसे मिश्र उपवाक्य कहते हैं। मिश्र वाक्य में तीन प्रकार के आश्रित उपवाक्य होते हैं। इन आश्रित उपवाक्यों के आधार पर मिश्र वाक्य तीन प्रकार के होते हैं:
(क) संज्ञा उपवाक्य – ये उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की क्रिया के कर्ता, कर्म या पूरक का काम करते हैं; जैसे- मोहन ने राम से कहा कि वह उसको एक पुस्तक देगा।
(ख) विशेषण उपवाक्य – जब कोई उपवाक्य मुख्य उपवाक्य के कर्ता, कर्म आदि की विशेषता बताता है, तो उसे विशेषण उपवाक्य कहते हैं; जैसे-राम, जो दशरथ के पुत्र थे, अत्यन्त आज्ञाकारी थे।
(ग) क्रिया-विशेषण उपवाक्य-मुख्य उपवाक्य की क्रिया के समय, दशा या स्वभाव आदि की जानकारी देने वाले उपवाक्य को क्रिया-विशेषण उपवाक्य कहते हैं; जैसे-जब बिजली चली गई, तो ध्वनि विस्तारक यंत्र ने काम करना बन्द कर दिया। जैसे ही रात हुई, वह बिस्तर पर लौट गया। यह हमें वाक्यों की बनावट को समझने में मदद करता है।
In simple words: मिश्र वाक्य वो होता है जिसमें एक बड़ा वाक्य और उसके साथ एक या ज्यादा छोटे वाक्य जुड़े होते हैं। ये तीन तरह के होते हैं: संज्ञा, विशेषण और क्रिया-विशेषण।
🎯 Exam Tip: मिश्र वाक्य की परिभाषा स्पष्ट करें और तीनों प्रकार के उपवाक्यों को उदाहरण सहित समझाएँ।
Question 1. 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक है -
(a) उबाऊ
(b) दिलचस्प
(c) विचित्र
(d) आकर्षक
Answer: (b) दिलचस्प
In simple words: 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक बहुत मजेदार या दिलचस्प है क्योंकि यह सुनने में अनोखा लगता है।
🎯 Exam Tip: लेखक के किसी विशेषण या भाव को पहचानकर सही विकल्प चुनें।
Question 2. लेखक के गुरुजन उपन्यासकार मित्र का जन्म-स्थान है -
(a) अल्मोड़ा
(b) शिमला
(c) नैनीताल
(d) मसूरी
Answer: (a) अल्मोड़ा
In simple words: लेखक के दोस्त, जो एक उपन्यासकार थे, अल्मोड़ा में पैदा हुए थे।
🎯 Exam Tip: पाठ में वर्णित पात्रों के विवरण और उनके जुड़ावों को ध्यान से याद रखें।
Question 3. कोसी से कौसानी की दूरी है -
(a) 18 मील
(b) 6 मील
(c) 21 मील
(d) 30 मील
Answer: (c) 21 मील
In simple words: कोसी और कौसानी के बीच की दूरी लगभग 21 मील है।
🎯 Exam Tip: पाठ में दिए गए संख्यात्मक तथ्यों को सटीक रूप से याद रखें।
Question 4. स्विटजरलैंड का आभास कौसानी में ही होता है।' यह कथन है -
(a) जवाहरलाल नेहरू का
(b) कमला नेहरू का
(c) सुभाष चन्द्र बोस का
(d) महात्मा गाँधी का
Answer: (d) महात्मा गाँधी का
In simple words: महात्मा गाँधी ने कहा था कि कौसानी की सुंदरता स्विटजरलैंड जैसी है।
🎯 Exam Tip: उद्धरण वाले प्रश्नों में, बात कहने वाले व्यक्ति का नाम सटीक रूप से पता होना चाहिए।
Question 5. हिमालय पर जमी बर्फ को कुछ विदेशियों ने कहा है -
(a) श्वेत हिम
(b) चिरंतन हिम
(c) नवीनतम हिम
(d) शाश्वत हिम
Answer: (b) चिरंतन हिम
In simple words: कुछ विदेशी लोगों ने हिमालय पर जमी बर्फ को 'चिरंतन हिम' कहा है, जिसका मतलब हमेशा रहने वाली बर्फ है।
🎯 Exam Tip: विशेषण या उपमा वाले शब्दों को याद रखना महत्वपूर्ण होता है जो पाठ में विशिष्ट संदर्भों में उपयोग किए गए हैं।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. 'यही बर्फ तो हिमालय की शोभा है'- सुनते ही लेखक के मन में क्या बात आई?
Answer: 'यही बर्फ तो हिमालय की शोभा है,' अपने गुरुजन उपन्यासकार मित्र का यह कथन सुनते ही लेखक के मन में तुरंत 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक का विचार कौंध गया। यह शीर्षक उन्हें अपने निबंध के लिए सही लगा।
In simple words: लेखक के दोस्त ने जब बर्फ को हिमालय की शोभा कहा, तो लेखक को तुरंत अपने लेख के लिए 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक का विचार आया।
🎯 Exam Tip: प्रश्न में दिए गए उद्धरण को ध्यान से पढ़ें और उससे जुड़े मुख्य विचार को स्पष्ट करें।
Question 2. डॉ. भारती और उनके साथी कौसानी क्यों गए थे?
Answer: डॉ. भारती और उनके साथी कौसानी सिर्फ बर्फ को बहुत करीब से देखने के लिए गए थे। उन्हें हिमालय की बर्फ देखने का बहुत शौक था।
In simple words: डॉ. भारती और उनके दोस्त कौसानी बर्फ को पास से देखने गए थे।
🎯 Exam Tip: यात्रा के उद्देश्य को हमेशा स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताएं।
Question 3. लेखक और उनके साथी कौसानी पहुँचे तो उनके चेहरे पीले क्यों पड़ गए थे?
Answer: कौसानी का रास्ता बहुत मुश्किल, भयानक मोड़ों वाला और कष्टप्रद था। साथ ही, उनका ड्राइवर भी नया था और लापरवाही से बस चला रहा था। इन सब कारणों से लेखक और उनके साथियों के चेहरे पीले पड़ गए थे।
In simple words: कौसानी का रास्ता बहुत खराब और मुश्किल था, और ड्राइवर लापरवाही से गाड़ी चला रहा था, इसलिए लेखक और उनके साथियों के चेहरे पीले पड़ गए थे।
🎯 Exam Tip: ऐसी स्थिति का वर्णन करते समय, कारण और परिणाम दोनों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 6. कोसी से कौसानी जाने वाली सड़क को 'अजगर- सी' क्यों कहा गया है?
Answer: कोसी से कौसानी जाने वाली सड़क बहुत टेढ़ी-मेढ़ी थी, ऊपर-नीचे जाती थी और बहुत घुमावदार थी। इसकी बनावट अजगर के रेंगने जैसी थी, इसलिए इसे 'अजगर-सी' कहा गया है। यह सड़क यात्रा को कठिन बनाती थी।
In simple words: कोसी से कौसानी की सड़क बहुत घुमावदार और ऊबड़-खाबड़ थी, इसलिए उसे अजगर जैसा कहा गया है।
🎯 Exam Tip: तुलनात्मक वर्णन वाले प्रश्नों में, तुलना के आधार को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 7. कौसानी जाते समय लेखक के चेहरे पर अधैर्य, असंतोष तथा क्षोभ क्यों झलक उठा था?
Answer: लेखक को बताया गया था कि कौसानी बहुत सुंदर जगह है। लेकिन जब उसने कष्टभरे, टेढ़े-मेढ़े रास्ते देखे और रास्ते में कहीं भी बर्फ का नामोनिशान नहीं मिला, तो उसके मन में बेचैनी, असंतोष और गुस्सा झलक उठा। वह जिस सुंदरता की उम्मीद कर रहा था, वह नहीं मिल रही थी।
In simple words: लेखक के मन में बेचैनी, असंतोष और गुस्सा तब आया जब उसने कौसानी जाते समय खराब रास्ते देखे और कहीं भी बर्फ नहीं दिखी।
🎯 Exam Tip: पात्र की मानसिक स्थिति का वर्णन करते समय, उस स्थिति के कारणों को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
Question 8. कौसानी कहाँ बसा है?
Answer: कौसानी सोमेश्वर घाटी की उत्तर दिशा में स्थित पर्वतमाला के सबसे ऊँचे शिखर पर बसा हुआ है। इसकी स्थिति बहुत ही रमणीय है।
In simple words: कौसानी सोमेश्वर घाटी के उत्तर में, एक पहाड़ की चोटी पर बसा है।
🎯 Exam Tip: स्थान के भौगोलिक विवरण को सटीक और संक्षिप्त रखें।
Question 9. शिखर पर जमी हुई बर्फ को देखकर अकस्मात् लेखक के मन में क्या विचार आया?
Answer: शिखर पर जमी हुई बर्फ को देखकर अचानक लेखक के मन में यह विचार आया कि हिमालय की चोटियों पर यह बर्फ कितने समय से जमी हुई है? और क्या कभी किसी इंसान के पैर वहाँ पड़े हैं? यह सोचकर लेखक आश्चर्यचकित हो गए।
In simple words: लेखक ने सोचा कि हिमालय पर बर्फ कब से जमी है और क्या कभी कोई इंसान वहाँ गया है।
🎯 Exam Tip: पात्र के मन में उठे प्रश्नों को यथावत और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 10. सूरज डूबने लगा तो ग्लेशियरों में क्या बहने लगा?
Answer: जब सूरज डूबने लगा, तो उसकी पीली किरणें ग्लेशियरों पर पड़ रही थीं, जिससे ऐसा लग रहा था जैसे उनमें पिघली हुई केसर बह रही हो। यह एक अद्भुत और सुंदर दृश्य था।
In simple words: सूरज डूबते समय ग्लेशियरों में ऐसा लग रहा था जैसे पिघली केसर बह रही हो।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन करते समय उपमा और रंगों का सही प्रयोग करें।
Question 11. चाँदनी रात में डाकबंगले के बरामदे में विचारमग्न लेखक की तंद्रा कैसे टूटी?
Answer: लेखक डाकबंगले के बरामदे में गहरे विचारों में डूबे हुए थे। तभी चित्रकार सेन रवीन्द्रनाथ टैगोर की कोई कविता गाने लगे। सेन के गीत को सुनकर लेखक की तंद्रा (विचारों की गहराई) टूट गई।
In simple words: लेखक विचारों में डूबे थे, तभी चित्रकार सेन ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता गाई, जिससे उनकी सोच टूट गई।
🎯 Exam Tip: घटना और उसके कारण को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से बताएं।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. “और यकीन कीजिए, इसे बिलकुल ढूँढ़ना नहीं पड़ा। बैठे-बिठाये मिल गया।” लेखक ने यह किसके बारे में कहा है?
Answer: लेखक ने यह बात अपने निबंध के शीर्षक 'ठेले पर हिमालय' के बारे में कही है। लेखक अपने एक उपन्यासकार मित्र के साथ पान की दुकान पर खड़े थे। वहाँ एक बर्फ बेचने वाला ठेले पर बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्लियाँ लेकर आया। बर्फ से भाप निकल रही थी। लेखक के मित्र, जो अल्मोड़ा के निवासी थे, बोले, "यह बर्फ तो हिमालय की शोभा है।" यह सुनते ही लेखक को तुरंत अपने लेख का शीर्षक 'ठेले पर हिमालय' मिल गया। यह शीर्षक उन्हें बिना किसी प्रयास के अनायास ही मिल गया।
In simple words: लेखक ने यह बात अपने निबंध के शीर्षक 'ठेले पर हिमालय' के बारे में कही है, जो उन्हें एक बर्फ वाले को देखकर तुरंत सूझ गया।
🎯 Exam Tip: लेखक के कथन को उसके सही संदर्भ (शीर्षक की उत्पत्ति) से जोड़कर उत्तर दें।
Question 2. कोसी तक लेखक किस प्रकार पहुँचा? उसको कोसी में क्यों उतरना पड़ा?
Answer: लेखक नैनीताल से रानीखेत और मझकाली होते हुए कोसी पहुँचा। रास्ते में बहुत भयानक मोड़ थे और सड़क बहुत मुश्किल, सूखी और बदसूरत थी। पहाड़ सूखे थे और कहीं भी पानी या हरियाली का नामोनिशान नहीं था। पहाड़ों को काटकर बनाई गई सड़क टेढ़ी-मेढ़ी थी। कोसी से एक सड़क अल्मोड़ा और दूसरी कौसानी जाती थी। लेखक की बस अल्मोड़ा जा रही थी, लेकिन उसे कौसानी जाना था। इसलिए उसे कोसी में उतरना पड़ा, ताकि वह कौसानी जाने वाली दूसरी बस ले सके। रास्ते की कठिनाइयों ने लेखक को थका दिया था।
In simple words: लेखक नैनीताल से चलकर रानीखेत और मझकाली होते हुए कोसी पहुँचा। सड़क खराब थी। उसकी बस अल्मोड़ा जा रही थी, पर लेखक को कौसानी जाना था, इसलिए उसे कोसी में उतरना पड़ा।
🎯 Exam Tip: यात्रा के मार्ग, कठिनाइयों और गंतव्य के अनुसार उतरने के कारण को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 3. शुक्ल जी कौन थे? उनके बारे में लेखक ने क्या कहा है?
Answer: शुक्ल जी लेखक को कौसानी जाने के लिए प्रेरित करने वाले एक उपन्यासकार मित्र थे। वे भी लेखक के साथ कौसानी जा रहे थे। जब वे कोसी में बस से उतरे, तो उनका चेहरा बहुत खुश और खिला हुआ था। उनके चेहरे पर कोई थकान या सुस्ती दिखाई नहीं दे रही थी। उन्हें देखकर लेखक की खुद की थकान और सुस्ती दूर हो गई। लेखक ने कहा है कि शुक्ल जी जैसा यात्रा का साथी पिछले जन्म के अच्छे कर्मों (पुण्यों) से ही मिलता है। शुक्ल जी का उत्साही स्वभाव लेखक के लिए प्रेरणादायक था।
In simple words: शुक्ल जी लेखक के उपन्यासकार मित्र थे जिन्होंने कौसानी जाने को कहा था। वे बहुत खुशमिजाज और उत्साही थे, जिन्हें देखकर लेखक की थकान भी दूर हो जाती थी।
🎯 Exam Tip: पात्र का परिचय दें, उसकी मुख्य विशेषताओं का उल्लेख करें और लेखक के उस पर पड़े प्रभाव को बताएं।
Question 4. शुक्ल जी के साथ बस से कोसी में उतरने वाला व्यक्ति कौन था?
Answer: शुक्ल जी के साथ बस से कोसी में उतरने वाला दूसरा व्यक्ति एक दुबला-पतला आदमी था। उसका चेहरा पतला और साँवला था। उसने एमिल जोला जैसी दाढ़ी रखी हुई थी। उसने ढीला-ढाला पतलून पहना था और उसके कंधे पर एक जर्किन पड़ी थी। उसके बगल में थर्मस, कैमरा या बाइनाकुलर लटका हुआ था। वह व्यक्ति मशहूर चित्रकार सेन था। उसका स्वभाव बहुत मधुर था और वह सबसे आसानी से घुलमिल जाता था।
In simple words: शुक्ल जी के साथ कोसी में उतरने वाला व्यक्ति चित्रकार सेन थे। वे दुबले-पतले, साँवले, दाढ़ी वाले और मधुर स्वभाव के थे।
🎯 Exam Tip: व्यक्ति का हुलिया और स्वभाव दोनों का वर्णन करें, साथ ही उसके पेशे का भी उल्लेख करें।
Question 5. "कोसी से बस चली तो रास्ते का सारा दृश्य बदल गया।” उस दृश्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए?
Answer: कोसी से बस चलने के बाद रास्ते का सारा दृश्य बदल गया। अब रास्ते में कल-कल करती हुई कोसी नदी बह रही थी। उसके किनारों पर हरे-भरे खेत और सुंदर गाँव दिखाई दे रहे थे, जो बहुत आकर्षक लग रहे थे। रास्ते में कई बस स्टॉप, डाकघर और चाय की दुकानें भी थीं। कोसी और उसमें मिलने वाली नदियों पर पुल थे, और चीड़ के घने जंगल भी रास्ते में पड़ रहे थे। टेढ़ी-मेढ़ी पथरीली सड़क पर बस धीरे-धीरे चल रही थी। यह नया दृश्य लेखक को प्रकृति के करीब ले आया।
In simple words: कोसी से आगे रास्ते में बदलती हुई सुंदरता दिखी, जहाँ कल-कल करती नदियाँ, हरे खेत, सुंदर गाँव और घने चीड़ के जंगल थे।
🎯 Exam Tip: दृश्य वर्णन में विभिन्न प्राकृतिक तत्वों (नदी, खेत, गाँव, जंगल) और उनकी विशेषताओं को शामिल करें।
Question 6. "हम अपना संशय शुक्ल जी से व्यक्त भी करने लगे।” लेखक को किस विषय में संशय था?
Answer: लेखक को इस बात पर शक था कि कौसानी में बर्फ दिखेगी या नहीं। वे कोसी से अठारह मील आगे निकल आए थे, लेकिन उन्हें कहीं भी बर्फ दिखाई नहीं दी थी, जबकि कौसानी अब केवल छह मील दूर रह गया था। लेखक को यह बताया गया था कि कौसानी बहुत सुंदर जगह है, जहाँ स्विट्जरलैंड जैसा अनुभव होता है और यह कश्मीर से भी ज्यादा मनोहर है। लेखक को संदेह था कि कौसानी इतनी प्रशंसा के योग्य नहीं है, और वहाँ बर्फ शायद नहीं दिखेगी। इसी संदेह को लेखक ने शुक्ल जी से बताया था।
In simple words: लेखक को यह शक था कि कौसानी में बर्फ दिखेगी या नहीं, क्योंकि बहुत दूर तक उन्हें बर्फ नहीं दिखी थी और कौसानी की प्रशंसा उसे अतिशयोक्ति लग रही थी।
🎯 Exam Tip: संशय के कारण को स्पष्ट करें और बताएं कि लेखक को दी गई जानकारी पर क्यों विश्वास नहीं हो रहा था।
Question 7. बिलकुल ठगे गए हम लोग”- लेखक को क्यों लगा कि उसको ठगा गया है?
Answer: जब बस कौसानी के अड्डे पर रुकी, तो लेखक ने देखा कि यह एक छोटा और उजाड़-सा गाँव था। वहाँ बर्फ का कोई नामोनिशान नहीं था। लेखक बर्फ को पास से देखने की उम्मीद से कौसानी गए थे, और उन्होंने कौसानी की बहुत तारीफ सुनी थी। उनके दोस्तों ने तो इसे कश्मीर से भी ज्यादा सुंदर बताया था। इसलिए लेखक को लगा कि उसने लोगों की बातों पर विश्वास करके गलती की और उसे बुरी तरह से ठगा गया है, क्योंकि बर्फ के बिना कौसानी फीका लग रहा था।
In simple words: कौसानी पहुँचकर जब लेखक को बर्फ नहीं दिखी और जगह भी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली, तो उसे लगा कि उसे ठगा गया है।
🎯 Exam Tip: लेखक की उम्मीदों और वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, जिससे 'ठगे जाने' की भावना पैदा हुई।
Question 8. 'अनखाते हुए बस से उतरा कि जहाँ था वहीं पत्थर की मूर्ति-सा स्तब्ध खड़ा रहा गया।” कौन स्तब्ध खड़ा रह गया तथा क्यों?
Answer: लेखक जब कौसानी के बस अड्डे पर बस से उतरे, तो वह बहुत खिन्न (दुखी) थे। लेकिन जैसे ही उनकी निगाह एक तरफ पड़ी, तो वह वहीं पत्थर की मूर्ति की तरह हैरान खड़े रह गए। उन्होंने देखा कि सामने की घाटी अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से भरी हुई थी। यह पचासों मील चौड़ी घाटी थी, जिसमें लाल-लाल रास्ते थे जो गेरू की चट्टानों को काटकर बनाए गए थे। उनके किनारे सफेद थे। उसमें कई नदियाँ बह रही थीं और हरे-भरे खेत भी थे। पूरी घाटी बहुत सुंदर थी। इस अद्भुत दृश्य ने लेखक को मंत्रमुग्ध कर दिया।
In simple words: लेखक दुखी मन से बस से उतरे, लेकिन सामने की सुंदर घाटी देखकर वह हैरान खड़े रह गए।
🎯 Exam Tip: प्रश्न में वर्णित घटना (स्तब्ध खड़े होना) का कारण और उसके पीछे के दृश्य का वर्णन करें।
Question 9. कौसानी पहुँचकर लेखक हर्षातिरेक से क्यों चिल्लाने लगा?
Answer: कौसानी के बस-अड्डे से लेखक ने कल्यूर की सुंदर घाटी देखी। दूर क्षितिज के पास उसे कुछ धुंधले छोटे पहाड़ों का आभास हुआ। उसके बाद बादल थे। अचानक बादलों के बीच उसे कुछ दिखाई दिया-बादल के टुकड़ों जैसी कोई अटल चीज। उसका रंग न नीला था, न चमकीला, न सफेद। वह तीनों का मिलाजुला रंग था। लेखक ने सोचा-यह क्या है? बर्फ तो नहीं है? अचानक उसे ध्यान आया कि इसी घाटी के पार हिमालय पर्वत है, जो बादलों से ढका है। वह समझ गया कि उसने बर्फ से ढके एक छोटे शिखर को देखा है। यह समझकर वह खुशी से चिल्ला उठा, "बर्फ, वह देखो!" इस अद्भुत खोज ने उसे उत्साहित कर दिया।
In simple words: कौसानी पहुँचकर लेखक को बादलों के पार हिमालय का एक छोटा बर्फ से ढका शिखर दिखा, जिसे देखकर वह खुशी से चिल्ला उठा।
🎯 Exam Tip: लेखक की खुशी के कारण को क्रमबद्ध रूप से समझाएँ, जिसमें दृश्य, उसकी पहचान और अंत में प्रतिक्रिया शामिल हो।
Question 11. छोटे हिम-शिखर को बादलों ने ढंक लिया तो लेखक तथा उसके साथियों ने क्या किया?
Answer: हिम से ढका शिखर थोड़ी देर के लिए अपनी झलक दिखाकर बादलों में छिप गया था। लेखक और उसके साथी बर्फ देखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने डाकबंगले में अपना सामान रखा और बिना चाय पिए ही सामने के बरामदे में बैठ गए। वे एकटक सामने देख रहे थे। धीरे-धीरे बादल छंटते जा रहे थे और एक-एक करके नए-नए शिखरों पर जमी बर्फ दिखाई दे रही थी। फिर बादल पूरी तरह हट गए और हिम-शिखरों की पूरी श्रृंखला स्पष्ट रूप से दिखने लगी। यह धैर्य और प्रतीक्षा का परिणाम था।
In simple words: जब हिम-शिखर बादलों में छिप गया, तो लेखक और उसके साथी डाकबंगले में बैठकर बादलों के हटने और बर्फ के पूरे दृश्य को देखने का इंतजार करने लगे।
🎯 Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रिया (क्या किया) और उसके पीछे के उद्देश्य (क्यों किया) दोनों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 12. कौसानी के डाकबंगले से हिमाच्छादित पर्वत शिखरों को देखने के बाद लेखक को किस बात की अनुभूति हो रही थी?
Answer: कौसानी के डाकबंगले से बर्फ से ढके हिमालय के शिखरों को देखने के बाद लेखक को अपने माथे पर ठंडक महसूस हो रही थी। उसे समझ आ रहा था कि पुराने ऋषि-मुनि हिमालय पर क्यों आते थे और यहाँ आने पर शारीरिक, मानसिक और सांसारिक कष्ट (दैहिक, दैविक और भौतिक ताप) कैसे दूर हो जाते थे। लेखक के मन के सारे आंतरिक संघर्ष, परेशानियाँ और ताप इन शिखरों को देखकर शांत हो गए थे। हिमालय ने उसे मानसिक शांति प्रदान की थी।
In simple words: हिमालय के बर्फ से ढके शिखरों को देखकर लेखक को ठंडक और शांति महसूस हुई। उसे समझ आया कि ऋषि-मुनि यहाँ आकर अपने शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति क्यों पाते थे।
🎯 Exam Tip: लेखक की शारीरिक और मानसिक अनुभूतियों का वर्णन करते हुए, उसके आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों को भी स्पष्ट करें।
Question 13. "अकस्मात एक दूसरा तथ्य मन के क्षितिज पर उदित हुआ”? कौन-सा दूसरा प्रश्न लेखक के मन में उत्पन्न हुआ? इस प्रश्न का उत्तर क्या आप दे सकते हैं?
Answer: अचानक लेखक के मन में यह विचार आया कि हिमालय पर जमी यह बर्फ कितनी पुरानी है? कुछ विदेशियों ने इसे 'चिरंतन हिम' कहा है, जिसका अर्थ है यह बहुत पुराने समय से हिमालय पर जमी है। लेखक सोच रहा था कि क्या कभी मनुष्यों ने इन शिखरों पर पैर रखे हैं या यह अनादि काल से बर्फीले तूफानों से घिरा रहा है? इस प्रश्न का उत्तर मैं नहीं दे सकता। मैं जानता हूँ कि दुनिया के सभी पर्वतों में हिमालय पर्वत श्रृंखला नई है और अभी भी उसके बनने की प्रक्रिया चल रही है। फिर भी, यह मनुष्य जाति के धरती पर आने से भी ज्यादा पुराना है। हिमालय की प्राचीनता और नवीनता का यह विरोधाभास लेखक को अचंभित कर रहा था।
In simple words: लेखक ने सोचा कि हिमालय पर जमी बर्फ कितनी पुरानी है और क्या कभी इंसान वहाँ पहुँचे हैं। इस सवाल का जवाब लेखक नहीं दे पाए, लेकिन उन्होंने माना कि हिमालय मनुष्य से भी पुराना है।
🎯 Exam Tip: प्रश्न को स्पष्ट रूप से पहचानें और अपने उत्तर में उसके दार्शनिक या वैज्ञानिक पहलू को भी संक्षिप्त रूप से शामिल करें।
Question 14. सूर्यास्त के समय हिम शिखरों पर कैसा दृश्य दिखाई दिया?
Answer: जब सूरज डूबने लगा, तो उसकी पीली किरणें हिमालय पर पड़ रही थीं। धीरे-धीरे ग्लेशियरों की सफेद बर्फ का रंग बदलने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे उनमें पिघली हुई केसर बह रही हो। बर्फ का रंग सफेद से लाल हो गया था, और वह लाल कमल जैसी खिली हुई दिख रही थी। पूरी घाटी गहरे पीले रंग में रंग गई थी। यह दृश्य अत्यंत मनमोहक था और हर पल बदल रहा था।
In simple words: सूरज डूबते समय, हिमालय के बर्फ से ढके शिखर पीले से लाल हो गए, जैसे केसर बह रही हो और कमल खिले हों, जिससे पूरी घाटी सुनहरी दिख रही थी।
🎯 Exam Tip: सूर्यास्त के समय के रंगों और उनके परिवर्तन का विस्तार से वर्णन करें, जिससे दृश्य जीवंत लगे।
Question 16. हिमालय को देखकर सबसे ज्यादा खुश कौन था? उसकी खुशी के बारे में बताइए।
Answer: हिमालय को देखकर चित्रकार सेन सबसे ज्यादा खुश थे। वे बच्चों की तरह चंचल और चिड़ियों की तरह चहकते हुए दिख रहे थे। वे कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की कोई कविता गा रहे थे। अचानक वे शीर्षासन करने लगे और कहने लगे, "सभी महान लोग सिर के बल खड़े होकर दुनिया को देखते हैं।" इससे वे यह कहना चाहते थे कि वे भी हिमालय को सिर के बल देखेंगे। सेन की खुशी उस अद्भुत दृश्य से भर गई थी।
In simple words: चित्रकार सेन हिमालय को देखकर सबसे ज्यादा खुश थे। वे बच्चों की तरह उत्साहित होकर कविता गा रहे थे और शीर्षासन करके कह रहे थे कि वे भी हिमालय को सिर के बल देखेंगे।
🎯 Exam Tip: पात्र की पहचान करें, उसकी खुशी के भावों को शब्दों में व्यक्त करें और उसके कथन का अर्थ समझाएँ।
Question 17. दूसरे दिन लेखक ने किस स्थान की यात्रा की?
Answer: दूसरे दिन लेखक सभी साथियों के साथ घाटी में उतरकर बारह मील दूर बैजनाथ पहुँचे। वहाँ गोमती नदी बह रही थी। गोमती नदी का पानी बहुत साफ था। उसमें हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी चोटियों की परछाईं दिख रही थी। लेखक ने पानी में बनी हिमालय की चोटियों को जी भरकर देखा। वह उस दृश्य में इतना खो गए कि सोचने लगे कि क्या वे कभी इन चोटियों पर पहुँच पाएँगे या नहीं। इस अनुभव ने उन्हें गहरे चिंतन में डाल दिया।
In simple words: दूसरे दिन लेखक ने बैजनाथ की यात्रा की, जहाँ उन्होंने गोमती नदी में हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों की परछाईं देखी और उसमें खो गए।
🎯 Exam Tip: अगले दिन की यात्रा के गंतव्य और वहाँ के मुख्य आकर्षण का वर्णन करें।
Question 18. लेखक के मन में आज भी क्या पीर उठती है? वह उसको भुलाने के लिए क्या करता है?
Answer: हिमालय की उन बर्फीली चोटियों की याद आज भी जब लेखक को आती है, तो उनके मन में एक अनजाना दर्द उठने लगता है। वे इस दर्द से मुक्ति पाना चाहते हैं, इसलिए ठेले पर लदी बर्फ की सिल्लियों को देखकर अपना मन बहला लेते हैं। उन सिल्लियों को देखकर उन्हें हिमालय की बर्फ की याद ताज़ा हो जाती है। वे ठेले पर हिमालय' कहकर हँसते हैं। उनकी यह हँसी उस दर्द को भुलाने का एक बहाना है। यह यादें उन्हें कभी सुकून तो कभी पीड़ा देती हैं।
In simple words: लेखक को हिमालय की बर्फ की चोटियों की याद आने पर आज भी दर्द होता है। इस दर्द को भुलाने के लिए वह ठेले पर लदी बर्फ देखकर अपना मन बहलाते हैं और 'ठेले पर हिमालय' कहकर हँसते हैं।
🎯 Exam Tip: लेखक की मानसिक पीड़ा के स्रोत और उसे कम करने के उसके तरीकों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 19. लेखक ने तुलसी की पंक्ति 'कबहुँक हों यहि रहनि रहौंगो' का उल्लेख क्या भाव व्यक्त करने के लिए किया है?
Answer: लेखक ने तुलसीदास की विनयपत्रिका के एक पद की पंक्ति 'कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो' का उल्लेख किया है। तुलसीदास इस पंक्ति के माध्यम से सांसारिक माया-मोह की छोटीपन से ऊपर उठकर हिमालय के समान ऊँचे संत स्वभाव को धारण करना चाहते हैं। लेखक ने इस पंक्ति का उल्लेख करके हिमालय को उच्च मानवीय भावों की ओर बढ़ने का प्रेरणास्रोत बताया है। यह पंक्ति हमें भौतिक सुखों से परे आध्यात्मिक ऊँचाइयों की ओर देखने के लिए प्रेरित करती है।
In simple words: लेखक ने तुलसीदास की पंक्ति 'कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो' का उल्लेख इसलिए किया है ताकि हिमालय के समान ऊँचे मानवीय और संत स्वभाव को अपनाने की प्रेरणा दी जा सके।
🎯 Exam Tip: उद्धृत पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करें और बताएं कि लेखक ने इसका उपयोग किस संदेश को देने के लिए किया है।
Question 20. वहीं मन रमता है-लेखक का मन कहाँ रमता है और क्यों? क्या आप भी लेखक के समान सोचते हैं?
Answer: लेखक का मन हिमालय की ऊँची, सफेद, पवित्र और बर्फ से ढकी चोटियों में ही रमता है। ये चोटियाँ उच्च मानवीय गुणों तथा जीवन के सर्वश्रेष्ठ आदर्शों की प्रतीक हैं। ये मानव जीवन में स्वच्छता और पवित्रता को प्रेरित करती हैं। मैं भी लेखक के समान ही सोचता हूँ, क्योंकि हिमालय की शांति, भव्यता और प्रेरणादायक स्वरूप सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। वहाँ जाकर व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है और ज्ञान में वृद्धि होती है। यह हमें छोटे-मोटे सांसारिक बंधनों से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है।
In simple words: लेखक का मन हिमालय की ऊँची, पवित्र और बर्फ से ढकी चोटियों में बसता है क्योंकि वे अच्छे मानवीय गुणों की प्रतीक हैं। मैं भी ऐसा ही सोचता हूँ क्योंकि हिमालय शांति और प्रेरणा देता है।
🎯 Exam Tip: लेखक के मन के आकर्षण के कारण को बताएं और अपनी राय देते समय तार्किक कारण प्रस्तुत करें।
Question. ठेले पर लदी बर्फ की सिल्लियाँ तथा हिमालय पर जमी बर्फ किनके प्रतीक हैं? आपको इनमें से क्या पसंद?
Answer: ठेले पर लदी बर्फ की सिल्लियाँ भौतिक जीवन और सांसारिक उलझनों का प्रतीक हैं। इसके विपरीत, हिमालय की ऊँची पर्वत-श्रेणियों पर जमी बर्फ जीवन के श्रेष्ठ और उच्चतम आदर्शों की सूचक है। वह सर्वोत्तम मानवीय गुणों और चेतना की द्योतक हैं। एक इंसान होने के नाते, मुझे इनमें से हिमालय पर जमी बर्फ (अर्थात् उसके प्रतीकात्मक अर्थ) ही पसंद है। मैं उच्च मानवीय गुणों को अपनाकर ही जीवन जीना अच्छा समझता हूँ। यह हमें भौतिकवादी दुनिया से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित करता है।
In simple words: ठेले पर रखी बर्फ सांसारिक जीवन को दिखाती है, जबकि हिमालय की बर्फ ऊँचे आदर्शों और अच्छे गुणों को दिखाती है। मुझे हिमालय की बर्फ पसंद है, जो महान विचारों की निशानी है।
🎯 Exam Tip: दोनों प्रतीकों का स्पष्ट अर्थ बताएं और अपनी पसंद के पीछे का तर्क दें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 14 ठेले पर हिमालय निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. लेखक और उसके मित्रों की कौसानी तक की यात्रा का वर्णन संक्षेप में कीजिए?
Answer: लेखक और उसके मित्र बर्फ देखने के लिए कौसानी गए थे। वे नैनीताल, रानीखेत और मझकाली के भयानक मोड़ों को पार करते हुए बस से कोसी पहुँचे। रास्ता बहुत मुश्किल, भयानक और सूखा था, कहीं हरियाली नहीं थी। ऊबड़-खाबड़ सड़क पर एक नए ड्राइवर ने लापरवाही से बस चलाई। कोसी पहुँचने तक सभी के चेहरे पीले पड़ गए थे। बस अल्मोड़ा जा रही थी, लेकिन कौसानी के लिए कोसी से दूसरी बस मिलती थी। लेखक अपने एक साथी के साथ कोसी में ही बस से उतर गए। दो घंटे बाद दूसरी बस आई, जिसमें शुक्ल जी और चित्रकार सेन भी उतरे। शुक्ल जी का चेहरा बहुत खिला हुआ था। उन्हें देखकर लेखक की भी सारी थकान दूर हो गई। सेन का स्वभाव बहुत मधुर था और वे जल्द ही सबके साथ घुलमिल गए। कोसी से चारों लोग कौसानी के लिए बस में सवार हुए। अब रास्ते का दृश्य बदल गया था। कल-कल करती कोसी नदी, उसके किनारे हरे-भरे खेत और सुंदर गाँव आकर्षक लग रहे थे। रास्ते में कई बस स्टॉप, डाकघर और चाय की दुकानें थीं। कोसी और उसमें मिलने वाले नदी-नालों पर पुल थे, और चीड़ के घने जंगल भी थे। टेढ़ी-मेढ़ी पथरीली सड़क पर बस धीरे-धीरे चल रही थी। वहाँ तक बर्फ के दर्शन नहीं हुए थे, जिससे लेखक थोड़ा निराश और उदास था। सोमेश्वर घाटी के उत्तर में ऊँची पर्वतमाला के शिखर पर कौसानी बसा था। यह एक छोटा-सा गाँव था। बस अड्डे पर उतरते ही अचानक लेखक की निगाह कल्यूर की रंग-बिरंगी घाटी पर पड़ी। पचास मील चौड़ी यह घाटी हरे-भरे खेतों, लाल रास्तों, नदियों आदि से बहुत खूबसूरत लग रही थी। दूर घाटी के पार बादलों में हिमालय की बर्फीली चोटियाँ छिपी थीं। अचानक बादल छंटने पर लेखक ने एक छोटा बर्फीला शिखर देखा। वे खुशी से चिल्लाए, "वह देखो बर्फ!" फिर सभी डाकबंगले में अपना सामान रखकर बिना चाय पिए ही बैठ गए और बादलों के हटने का इंतजार करने लगे। धीरे-धीरे बादल हटे तो उन्हें बर्फ से ढके हिमालय के दर्शन हुए। इस यात्रा ने उन्हें कई अविस्मरणीय अनुभव दिए।
In simple words: लेखक और उनके दोस्त नैनीताल से चलकर मुश्किल रास्तों से कोसी पहुँचे, फिर कौसानी गए। रास्ते में पहले निराशा हुई, पर कौसानी में सुंदर घाटी और फिर बर्फ से ढके हिमालय को देखकर वे बहुत खुश हुए।
🎯 Exam Tip: यात्रा के हर चरण का क्रमवार वर्णन करें, जिसमें रास्ते की स्थिति, पात्रों की प्रतिक्रियाएँ और मुख्य प्राकृतिक दृश्यों का उल्लेख हो।
Question 2. यात्रा के दौरान लेखक की मनःस्थिति का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: लेखक अपने एक साथी के साथ नैनीताल से कौसानी के लिए बस से चले। उन्हें कोसी में उतरना था। उन्हें कौसानी की बहुत तारीफ मिली थी। उनके मित्र ने कहा था कि कौसानी कश्मीर से भी ज्यादा सुंदर है। गाँधी जी ने तो इसे स्विटजरलैंड जैसा कहा था। लेकिन लेखक को कौसानी में कोई प्राकृतिक सुंदरता नहीं दिख रही थी, जिससे वह उदास हो गए थे। कौसानी के बस स्टॉप पर वह अन्यमनस्क (उलझे हुए) मन से उतरे। अचानक, उन्हें कल्यूर की सुंदर घाटी दिखी और वे जड़वत् (स्तब्ध) रह गए। यह घाटी बहुत सुंदर थी, जिसमें हरे-भरे खेत, लाल-लाल रास्ते और बहती नदियाँ थीं। घाटी में दूर तक बादल छाए थे, जिनके पीछे हिमालय छिपा था। अचानक उन्हें हिमालय की एक बर्फ से ढकी चोटी दिखी। बर्फ देखकर वे बहुत खुश हुए। उनकी सारी थकान, असंतोष, खिन्नता और निराशा गायब हो गई। फिर बादल छंटने पर उन्हें बर्फ से ढकी पूरी पर्वत श्रृंखला के दर्शन हुए। हिमालय के दर्शन से उनकी इच्छा पूरी हो गई थी। लेखक ने इस यात्रा के दौरान निराशा, अविश्वास, अचंभा और अंत में परम आनंद का अनुभव किया, जिससे उसकी मनःस्थिति में कई उतार-चढ़ाव आए।
In simple words: यात्रा में लेखक पहले रास्ते की खराब हालत और बर्फ न दिखने से निराश हुए। फिर कौसानी की सुंदर घाटी देखकर वे हैरान हो गए। अंत में, बर्फ से ढके हिमालय को देखकर उन्हें बहुत खुशी मिली और सारी थकान दूर हो गई।
🎯 Exam Tip: लेखक की मनःस्थिति के विभिन्न चरणों (निराशा, संशय, विस्मय, आनंद) का वर्णन करें और प्रत्येक चरण के पीछे के कारणों को स्पष्ट करें।
Question 3. कौसानी की पर्वतमाला के अंचल में कौन-सी घाटी छिपी थी? उसके प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन कीजिए।
Answer: कौसानी की पर्वतमाला के अंचल में कल्यूर की रंग-बिरंगी घाटी छिपी थी। यह घाटी पचास मील चौड़ी थी। इसमें हरे-भरे खेत, एक-दूसरे से मिलती कई नदियाँ, गेरू की चट्टानों से बने सफेद किनारों वाले रास्ते थे, जो इसकी सुंदरता बढ़ा रहे थे। यह घाटी इतनी सुंदर, पवित्र और निष्कलंक थी कि लेखक का मन किया कि वह जूते उतारकर और अपने पैर पोंछकर उस पर कदम रखे। दूर क्षितिज के पास घाटी का पूरा दृश्य नीले कोहरे में डूबा था। वहाँ लेखक को छोटे पहाड़ों का आभास हुआ, उसके बाद बादल थे और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेखक बादलों पर अपनी नज़रें गड़ाए हुए थे कि अचानक बादल हटने पर उन्हें कुछ ऐसा दिखा जो वहाँ अटल था। वह एक छोटे-से बादल के टुकड़े जैसा था। उसका रंग सफेद, चमकीला और हल्का नीला-हरा मिला हुआ था। लेखक ने सोचा, यह क्या है? फिर उसे ध्यान आया कि बादलों के पीछे हिमालय छिपा है। यह उसका एक छोटा बर्फ से ढका शिखर था। यह देखकर वह खुशी से चिल्ला उठा, "वह देखो बर्फ!" बादल छंटने पर उसे हिमालय की पूरी पर्वतमाला बर्फ से ढकी और सुंदर दिखी। यह घाटी अपने शांत और पवित्र वातावरण से मन को मोह लेती थी।
In simple words: कौसानी की पर्वतमाला में कल्यूर की रंग-बिरंगी घाटी छिपी थी। यह घाटी हरे-भरे खेतों, नदियों और लाल रास्तों से सुंदर दिखती थी। बादलों के हटने पर लेखक को बर्फ से ढका हिमालय दिखा, जिससे वह बहुत खुश हुआ।
🎯 Exam Tip: घाटी के नाम और उसकी प्रमुख प्राकृतिक विशेषताओं (खेत, नदियाँ, रास्ते, बर्फ) का विस्तार से वर्णन करें।
Question 4. कौसानी में हिमाच्छादित पर्वत-शिखरों को देखने के बाद लेखक, शुक्ल जी तथा चित्रकार सेन की क्या दशा हुई? प्रत्येक का वर्णन संक्षेप में कीजिए। यह भी बताइए कि यदि आप उनको देखते तो आपको कैसा लगता?
Answer: लेखक हिम से ढके पर्वत-शिखरों को देखने कौसानी गए थे। उनके साथ उनके उपन्यासकार मित्र शुक्ल जी और चित्रकार सेन भी थे। कौसानी पहुँचने के बाद उन्होंने विशाल सुंदर कल्यूर की घाटी में क्षितिज के पास एक छोटी बर्फ से ढकी पर्वत-श्रेणी देखी। बादलों के एक पल हटने पर वे अनायास ही बहुत कम समय के लिए उसे देख सके। इस हिम दर्शन का लेखक, शुक्ल जी और सेन पर अलग-अलग तरह का प्रभाव पड़ा। उपन्यासकार मित्र पर क्या प्रभाव हुआ, इसका उल्लेख इस लेख में नहीं है। लेखक को हिम शिखरों को देखकर थोड़ा विस्मय हुआ। फिर जब यह पक्का हो गया कि वह बर्फ ही थी, तो वे खुशी से चिल्ला उठे। उनकी निराशा और थकावट सब गायब हो गई। वे व्याकुल हो उठे और उनका दिल धड़कने लगा। शुक्ल जी शांत थे, केवल लेखक की ओर देखकर कभी-कभी मुस्कुराते थे, जिसका मतलब था, 'इतने अधीर क्यों हो रहे थे, कौसानी अभी आया भी नहीं था और मुँह लटकाए हुए थे।' यदि मैं उनको देखता, तो मुझे भी लेखक जैसी ही खुशी और हैरानी महसूस होती, क्योंकि हिमालय का सौंदर्य मनमोहक होता है।
In simple words: हिमालय के शिखरों को देखकर लेखक उत्साहित हुए, उनकी निराशा दूर हो गई। शुक्ल जी शांत और मुस्कुरा रहे थे, जैसे वे लेखक की अधीरता को समझ रहे हों। मुझे भी ऐसा ही लगता, क्योंकि हिमालय अद्भुत है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक पात्र की प्रतिक्रिया को अलग-अलग समझाएँ और अपनी काल्पनिक प्रतिक्रिया भी स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 5. हिमालय की शीतलता लेखक को कैसी प्रतीत हो रही थी? वह किन-किन तापों को नष्ट करने वाली थी? अथवा क्यों पुराने साधकों ने दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों को तापे कहा था और उसे शमित करने के लिए वे क्यों हिमालय जाते थे, यह पहली बार मेरी समझ में आ रहा था।” कौन-सी बात कब लेखक की समझ में आई?
Answer: कौसानी पहुँचकर लेखक ने बर्फ से ढकी हिमालय की पर्वत श्रृंखला को देखा। उस समय उनके मन में क्या भावनाएँ उठ रही थीं, यह तो वे बता नहीं सकते थे, लेकिन उनके माथे पर हिमालय की ठंडक महसूस हो रही थी। उनके मन के सभी संघर्ष और आंतरिक द्वंद्व (आपसी विरोधी विचार) दूर हो रहे थे। लेखक को यह बात पहली बार समझ में आ रही थी कि पुराने ऋषि और मुनियों ने दैहिक (शारीरिक), दैविक (ईश्वरीय) और भौतिक (सांसारिक) कष्टों को 'ताप' क्यों कहा था। वे इन कष्टों को शांत करने के लिए हिमालय क्यों जाते थे। प्राचीन ऋषियों ने तीन प्रकार के तापों का उल्लेख किया है और उन्हें मनुष्य के लिए दुखदायी बताया है। दैहिक ताप वे शारीरिक बुराइयाँ हैं जो मनुष्य के शरीर से संबंधित हैं, जैसे ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, काम और दूसरों को कष्ट पहुँचाना। हिमालय का शांत वातावरण इन्हें कम करने में मदद करता है। दैविक ताप पारलौकिक कष्ट हैं। तपस्वी इनके बारे में जानने और इनसे मुक्ति पाने के लिए हिमालय की पवित्र भूमि पर ध्यान लगाते थे। भौतिक ताप सांसारिक कष्ट या शारीरिक बीमारियाँ हैं। हिमालय का प्रदूषण मुक्त निर्मल वातावरण और वहाँ की जड़ी-बूटियाँ रोग मुक्ति में सहायक थीं। इस तरह लेखक को हिमालय की शीतलता से इन सभी तापों के शमन का अनुभव हुआ।
In simple words: लेखक को हिमालय की ठंडक बहुत सुकून देने वाली लगी। उन्हें समझ आया कि हिमालय शारीरिक, दैविक और भौतिक कष्टों को दूर करता है, जैसे ऋषि-मुनि पहले करते थे, क्योंकि इसका शांत वातावरण सभी दुखों को मिटा देता है।
🎯 Exam Tip: त्रिताप के प्रकारों और उनके हिमालय से कैसे शांत होने का संबंध स्पष्ट करें, साथ ही लेखक की अनुभूति को भी व्यक्त करें।
ठेले पर हिमालय लेखक-परिचय
Question. धर्मवीर भारती का जीवन-परिचय देकर उनकी साहित्य-सेवा पर प्रकाश डालिए।
Answer: डॉ. धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसंबर, 1926 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई भी इलाहाबाद से की, जहाँ से उन्होंने एम.ए. और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने कुछ समय 'संगम' पत्रिका के संपादक के रूप में काम किया। बाद में, वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफेसर बन गए। साल 1959 में, वे 'धर्मयुग' के मुख्य संपादक बने। भारत सरकार ने उन्हें 1972 में 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया। उनका निधन 1997 में हुआ।
डॉ. भारती ने अपनी छात्र जीवन से ही लिखना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, समीक्षा और निबंध जैसी कई तरह की गद्य विधाओं में निपुणता से लिखा। उन्होंने एक संपादक के रूप में भी अपनी प्रतिभा दिखाई, जिसका सबूत 'धर्मयुग' की बढ़ती लोकप्रियता है। उनकी भाषा बहुत साफ और समझने में आसान थी। उनकी लेखन शैली में तत्सम, तद्भव, उर्दू, अंग्रेजी और फारसी जैसे कई शब्दों और मुहावरों का प्रयोग होता था, जिससे उनकी भाषा और भी समृद्ध बनती थी। उन्होंने अपनी रचनाओं में वर्णनात्मक, भावात्मक, समीक्षात्मक और हास्य-व्यंग्यात्मक शैलियों का इस्तेमाल किया। उनकी रचनाओं में समाज के विभिन्न पहलुओं और मानव भावनाओं की गहरी समझ देखने को मिलती है।
उनकी मुख्य रचनाएँ ये हैं:
उपन्यास: गुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश।
कहानी संग्रह: चाँद और टूटे हुए लोग, बन्द गली का आखिरी मकान, गाँव, स्वर्ग और पृथ्वी।
नाटक/एकांकी: नदी प्यासी थी, नीली झील।
निबंध: कहनी-अनकहनी, ठेले पर हिमालय।
In simple words: डॉ. धर्मवीर भारती का जन्म 1926 में इलाहाबाद में हुआ था। वे एक जाने-माने लेखक और संपादक थे, जिन्होंने कई उपन्यास, कहानियाँ और निबंध लिखे। उन्हें 1972 में पद्मश्री मिला और 1997 में उनका निधन हो गया।
🎯 Exam Tip: लेखक के जीवन परिचय में जन्म-तिथि, जन्म-स्थान, शिक्षा, प्रमुख पदों और सम्मानों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है। उनकी साहित्यिक विधाओं और प्रमुख कृतियों को सूचीबद्ध करना भी जरूरी है।
Question. 'ठेले पर हिमालय' निबन्ध का सारांश लिखिए।
Answer: यह निबंध डॉ. धर्मवीर भारती के 'ठेले पर हिमालय' नामक संग्रह से लिया गया है। यह एक यात्रा का वृत्तांत है, जिसमें कौसानी की यात्रा और वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन है। इसका शीर्षक 'ठेले पर हिमालय' काफी दिलचस्प है। लेखक को यह शीर्षक तब मिला जब उन्होंने एक बर्फ बेचने वाले को ठेले पर बर्फ लाते देखा। उनके मित्र, जो अल्मोड़ा के निवासी थे, ने बर्फ देखकर कहा कि यही तो हिमालय की शोभा है। इस बात से लेखक के मन में कई विचार आए। यह सच है कि बर्फ से ढका हिमालय दूर से बहुत सुंदर और मनमोहक लगता है।
लेखक कौसानी बर्फ को करीब से देखने के लिए गए थे। वे नैनीताल, रानीखेत और मझकाली होते हुए बस से कोसी पहुँचे। रास्ता सूखा, खराब और उबड़-खाबड़ था, और बस का ड्राइवर लापरवाह था, जिससे यात्रियों के चेहरे पीले पड़ गए थे। कोसी से लेखक और उनके साथी कौसानी के लिए दूसरी बस से चले। रास्ते में कोसी नदी के किनारे छोटे गाँव, हरे-भरे खेत और सुंदर सोमेश्वर घाटी का दृश्य मनमोहक था, लेकिन लेखक निराश थे क्योंकि कौसानी अभी दूर था और सुंदरता वैसी नहीं दिखी जैसी बताई गई थी।
कौसानी के बस अड्डे पर उतरने के बाद लेखक घाटी की सुंदरता देखकर हैरान रह गए। पचास मील चौड़ी कल्यूर घाटी में मखमली खेत, लाल रंग के रास्ते, सफेद किनारे और नदियाँ बहुत आकर्षक थीं। लेखक को लगा कि यह जगह इतनी पवित्र है कि यहाँ जूते उतारकर ही चलना चाहिए। बादलों के हटने पर उन्हें बर्फ से ढका एक छोटा शिखर दिखाई दिया। यह बर्फ देखकर लेखक खुशी से चिल्ला उठे 'बर्फ, वह देखो!' हिमदर्शन से उनकी सारी निराशा, थकान और बेचैनी दूर हो गई। सभी साथी हिमालय के पूरे सौंदर्य को देखने के लिए उत्साहित थे।
In simple words: यह निबंध डॉ. धर्मवीर भारती की कौसानी यात्रा के बारे में है। लेखक ने ठेले पर बर्फ देखकर 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक चुना। उनकी कौसानी की यात्रा मुश्किल थी, पर वहाँ पहुँचकर उन्होंने कल्यूर घाटी और हिमालय की बर्फ से ढके शिखरों की अद्भुत सुंदरता देखी। इससे उनकी सारी थकान और निराशा दूर हो गई और वे बहुत खुश हुए।
🎯 Exam Tip: सारांश लिखते समय मुख्य घटनाओं और विचारों को क्रम से प्रस्तुत करें। लेखक की यात्रा, उसके अनुभव और प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन संक्षेप में जरूर शामिल करें।
ठेले पर हिमालय महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सन्दर्भ सहित व्याख्याएँ
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