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RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. इण्डियन बेस्टिल के नाम से प्रसिद्ध है
(क) रॉस द्वीप
(ख) सेल्यूलर जेल
(ग) पोर्ट ब्लेयर
(घ) वाईपर द्वीप
Answer: (ख) सेल्यूलर जेल
In simple words: सेल्यूलर जेल को भारत का 'इण्डियन बेस्टिल' कहा जाता है, जो एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थान है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'इण्डियन बेस्टिल' सेल्यूलर जेल का उपनाम है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्वता को दर्शाता है।
Question 2. सेल्यूलर जेल में किस स्वतंत्रता सेनानी ने यातनाएँ सहीं?
(क) वीर सावरकर
Answer: (क) वीर सावरकर
In simple words: वीर सावरकर ने सेल्यूलर जेल में अंग्रेजों के बहुत कठोर अत्याचार सहे थे।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और उनके संघर्षों को याद करने के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 11 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अण्डमान निकोबार द्वीप समूह का क्षेत्रफल बताइये।
Answer: अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह का कुल क्षेत्रफल 8249 वर्ग किलोमीटर है।
In simple words: अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह कुल 8249 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक तथ्यों को याद करते समय हमेशा इकाइयों (जैसे वर्ग किलोमीटर) का भी ध्यान रखें।
Question 2. कौन-सा द्वीप खण्डहरों का द्वीप बनकर रह गया है?
Answer: रॉस द्वीप अब खण्डहरों का द्वीप बन चुका है।
In simple words: रॉस द्वीप अब खंडहर में बदल गया है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में सीधा और स्पष्ट उत्तर दें।
Question 3. किस द्वीप का चित्र भारत सरकार के बीस रुपये के नोट पर अंकित किया गया?
Answer: वाईपर द्वीप का चित्र भारत सरकार के बीस रुपये के नोट पर अंकित है।
In simple words: वाईपर द्वीप की तस्वीर बीस रुपये के भारतीय नोट पर छपी है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न सामान्य ज्ञान से भी जुड़ा है, इसलिए इसे याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. सेल्यूलर जेल की कोटड़ियों की बनावट कैसी है?
Answer: सेल्यूलर जेल की कोठरियाँ एकान्त जेल के समान बनाई गई थीं।
In simple words: सेल्यूलर जेल की कोठरियाँ ऐसी थीं, जहाँ कैदी बिल्कुल अकेले रहते थे।
🎯 Exam Tip: 'एकान्त जेल' शब्द का प्रयोग करें क्योंकि यह इसकी मुख्य विशेषता है।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. रॉस द्वीप के विषय में गाइड ने क्या बताया?
Answer: गाइड ने बताया कि ब्रिटिश शासन के समय रॉस द्वीप अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी था। ब्रिटिश सरकार के सभी दफ्तर इसी द्वीप पर थे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह द्वीप जापानियों के कब्जे में भी रहा। महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचन्द्र बोस ने यहीं सबसे पहले जापानी जनरल से मुलाकात की थी। जापानियों ने जब इस द्वीप को छोड़ा, तो इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।
In simple words: गाइड ने बताया कि रॉस द्वीप अंग्रेजों के समय अण्डमान की राजधानी था, जापानियों के कब्जे में भी रहा और सुभाषचन्द्र बोस यहीं जापानी जनरल से मिले थे। जापानियों ने इसे छोड़ते समय तबाह कर दिया था।
🎯 Exam Tip: रॉस द्वीप के ऐतिहासिक महत्व को बताने वाले प्रमुख बिन्दुओं को शामिल करें: राजधानी होना, जापानी कब्जा, और सुभाषचन्द्र बोस का दौरा।
Question 3. पठान शेर अली को फाँसी क्यों दी गई?
Answer: पठान शेर अली ने 8 फरवरी 1872 को वाईसराय लॉर्ड मेयो की होपटाउन जेट्टी पर चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इस जुर्म के लिए पठान शेर अली को 30 मार्च 1982 को फाँसी दी गई।
In simple words: पठान शेर अली ने लॉर्ड मेयो की हत्या कर दी थी, जिसके कारण उन्हें फाँसी की सजा मिली।
🎯 Exam Tip: घटना, तारीख और परिणाम को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 4. सेल्यूलर जेल को लेखक ने पावन मंदिर क्यों कहा है?
Answer: सेल्यूलर जेल ब्रिटिश राज के समय वह जगह थी, जहाँ स्वतंत्रता सेनानियों को 'काला पानी' की सजा दी जाती थी। यह उन महान देशभक्तों का घर थी, जिन्होंने देश भक्ति और आजादी की चाह में अंग्रेजों को डराया। वे महान देशभक्त थे, जिन्होंने अंग्रेजों के अत्याचार सहे और देश के लिए शहीद हो गए, पर कभी हार नहीं मानी। इसलिए लेखक ने इसे एक पवित्र मंदिर कहा है।
In simple words: लेखक ने सेल्यूलर जेल को पवित्र मंदिर कहा क्योंकि यह उन स्वतंत्रता सेनानियों का निवास स्थान था जिन्होंने देश के लिए बड़े कष्ट सहे और शहीद हो गए।
🎯 Exam Tip: 'पावन मंदिर' कहने का कारण बताते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और देशभक्ति पर जोर दें।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 11 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. सेल्यूलर जेल में स्वतंत्रता सेनानियों पर किए गए अत्याचारों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिये।
Answer: सेल्यूलर जेल में स्वतंत्रता सेनानियों को जिन कोठरियों में बंद रखते थे, वे बिल्कुल एकान्त जेल जैसी थीं। इन कोठरियों में शौच और पेशाब के लिए अलग जगह नहीं थी। इसलिए रात में शौच या पेट खराब होने पर उन्हें अपनी कोठरी में ही करना पड़ता था, जिससे कोठरी में दुर्गंध भर जाती थी। बीमार होने पर भी उनके साथ बहुत सख्ती की जाती थी। डॉक्टर से जाँच कराने से पहले जेलर मिस्टर बेरी से इजाजत लेनी पड़ती थी। स्वतंत्रता सेनानियों को रोज नारियल या सरसों का तेल निकालना पड़ता था। उन्हें कोल्हू में बैल की जगह बांधकर तेल निकलवाया जाता था। बीमार कैदियों को भी इसमें कोई छूट नहीं मिलती थी।
इसके साथ ही, उन्हें नारियल के छिलकों को भी कूटना पड़ता था। अगर काम पूरा नहीं होता, तो उन्हें एक स्टैंड पर उल्टा लटकाकर कोड़ों से तब तक पीटा जाता था जब तक वे बेहोश न हो जाएँ। उन्हें जो खाना मिलता था, वह बेस्वाद होता था। रोटियाँ कच्ची या जली हुई होती थीं। दाल और सब्जी में घास के तिनके, कीड़े होते थे और नमक भी कम होता था। यह खाना खाकर अक्सर क्रांतिकारी बीमार पड़ जाते थे। उन्हें शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक अपनी कोठरियों में बंद कर दिया जाता था।
In simple words: सेल्यूलर जेल में स्वतंत्रता सेनानियों को एकान्त कोठरियों में रखा जाता था, जहाँ उन्हें शौच के लिए भी बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। उनसे जबरदस्ती कोल्हू पिसवाया जाता था और काम पूरा न होने पर कोड़ों से पीटा जाता था। उन्हें खराब खाना भी मिलता था।
🎯 Exam Tip: अत्याचारों का वर्णन करते समय कोठरियों की स्थिति, काम का बोझ, मिलने वाला भोजन, और दंड के तरीके जैसे मुख्य बिंदुओं को विस्तार से समझाएं।
Question 13. सेल्यूलर जेल को विश्वभर में किस नाम से जाना जाता है? इस जेल के निर्माण के लिए में संक्षेप में लिखिए।
Answer: सेल्यूलर जेल को विश्वभर में 'इण्डियन बेस्टिल' के नाम से जाना जाता है। इस जेल के निर्माण की सलाह सर सी.जे. लायल और सर ए.एस. लैथ ब्रिज ने 1890 में दी थी। पोर्ट ब्लेयर के उस समय के सुपरिन्टेडेन्ट कर्नल एन.एम.टी. हार्सफोर्ड ने इसके निर्माण का आदेश दिया था। यह जेल 1896 से 1906 ई. के बीच 5,17,352 रुपये की लागत से बनी थी।
In simple words: सेल्यूलर जेल को 'इण्डियन बेस्टिल' कहा जाता है। इसका निर्माण 1896 से 1906 के बीच हुआ था और इसमें ₹5,17,352 का खर्च आया था।
🎯 Exam Tip: सेल्यूलर जेल का उपनाम, निर्माण की अवधि और कुल लागत जैसी प्रमुख जानकारी को सटीक रूप से प्रस्तुत करें।
Question 14. सेल्यूलर जेल की बनावट के विषय में लिखिए। अथवा सेल्यूलर जेल की कोटड़ियों की बनावट कैसी है और वर्तमान समय में इस जेल में कितनी भुजाएँ और कोटड़ियाँ शेष हैं?
Answer: सेल्यूलर जेल में सात भुजाएँ हैं, जो सभी जेल परिसर के बीच में स्थित एक टावर से जुड़ी हैं। हर भुजा तीन मंजिला है, जिसमें कुल 696 कोठरियाँ (कमरे) हैं। हर कोठरी 13.5 फीट लंबी और 7 फीट चौड़ी है। कोठरी में बहुत ऊपर 3x1 फीट का एक रोशनदान (वेंटिलेटर) दिया गया है। कोठरियों का दरवाजा लोहे का बना है और तीन फीट की रॉड से बाहर से बंद होता है। इन कोठरियों की बनावट बिल्कुल एकान्त जेल जैसी है। वर्तमान में इस जेल में केवल तीन भुजाएँ और 291 कोठरियाँ बची हैं।
In simple words: सेल्यूलर जेल की सात भुजाएँ थीं, हर भुजा में 696 कोठरियाँ थीं जो 13.5x7 फीट की थीं। इसमें एक रोशनदान और लोहे का दरवाजा होता था। अब इसकी तीन भुजाएँ और 291 कोठरियाँ ही बची हैं।
🎯 Exam Tip: जेल की बनावट के मुख्य बिन्दुओं जैसे भुजाओं की संख्या, कोठरियों की संख्या और उनके आयामों का वर्णन करें। वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख करें।
Question 15. सेल्यूलर जेल की कोटड़ियों में कैदियों के लघु एवं दीर्घशंका (मूत्र एवं शौच) के निवारण विषय में गाइड ने क्या जानकारी दी?
Answer: गाइड ने बताया कि इस जेल की कोठरियों में कैदियों के शौच और पेशाब के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। रात में पेशाब के लिए उन्हें मिट्टी का एक बर्तन दिया जाता था, जिसमें केवल एक बार ही पेशाब कर सकते थे। अगर उन्हें बार-बार पेशाब आता या शौच आता तो उन्हें अपनी कोठरी में ही करना पड़ता था। वार्डन भी बहुत सख्ती से पेश आते थे। पेट खराब होने या दस्त लगने की स्थिति में भी उन्हें अपनी कोठरी में ही शौच करना पड़ता था। इससे कोठरी में बहुत दुर्गंध भर जाती थी।
In simple words: गाइड ने बताया कि कैदियों को शौच-पेशाब के लिए कोठरियों से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। उन्हें अपनी कोठरी में ही यह करना पड़ता था, जिससे बहुत दुर्गंध फैल जाती थी।
🎯 Exam Tip: कैदियों को दी जाने वाली अमानवीय स्थितियों का वर्णन करते समय, स्वच्छता और व्यक्तिगत सम्मान के अभाव पर विशेष ध्यान दें।
Question 16. जेल में स्वाधीनता सेनानियों को क्या कार्य करने पड़ते थे? कार्य पूरा न होने की दशा में उन्हें क्या दण्ड भुगतना पड़ता था?
Answer: जेल में स्वतंत्रता सेनानियों को हर दिन नारियल या सरसों का तेल निकालने का कोटा पूरा करना होता था। उन्हें तेल निकालने वाली घानी में बैल की तरह जुतकर कोल्हू खींचना पड़ता था। बीमार क्रांतिकारियों को भी इसमें कोई छूट नहीं मिलती थी। इसके साथ ही, उन्हें नारियल के छिलके कूट-कूट कर साफ करने पड़ते थे। जो स्वतंत्रता सेनानी अपना काम समय पर पूरा नहीं कर पाते थे, उन्हें एक स्टैंड पर उल्टा बांधकर बेरहमी से पीटा जाता था।
In simple words: स्वतंत्रता सेनानियों को रोज तेल निकालना और नारियल के छिलके साफ करने पड़ते थे। काम पूरा न होने पर उन्हें उल्टा बांधकर बहुत मारा जाता था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न स्वतंत्रता सेनानियों पर होने वाले शारीरिक अत्याचारों को उजागर करता है। कामों का उल्लेख और दंड का वर्णन स्पष्ट रूप से करें।
Question 17. सेल्यूलर जेल स्थित फाँसीघर को देखकर लेखक व अन्य सदस्यों ने क्या अनुभव किया? अपने शब्दों में लिखें।
Answer: फाँसीघर में पहले फाँसी दी जाती थी और फिर नीचे से पटिया खिसका दिया जाता था। पटिया हटते ही शव सीधे जमीन के नीचे बने गड्ढे में गिर जाता था। इस दृश्य को देखकर लेखक और उनके साथियों के सिर क्रांतिकारियों के सम्मान में झुक गए।
In simple words: फाँसीघर को देखकर लेखक और उनके साथियों ने महसूस किया कि कैसे फाँसी दी जाती थी। इस भयावह दृश्य को देखकर उन्होंने क्रांतिकारियों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया।
🎯 Exam Tip: लेखक और साथियों की भावनाएं और फाँसी देने की प्रक्रिया का वर्णन दोनों को उत्तर में शामिल करें।
Question 18. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नेताजी सुभाषचन्द्र बोस अण्डमान एवं निकोबार द्वीप के प्रवास के विषय में पाठ के आधार पर लिखिए।
Answer: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह जापानियों के कब्जे में था, तब नेताजी सुभाषचन्द्र बोस 29, 30 और 31 दिसंबर 1943 को तीन दिन के दौरे पर यहाँ आए थे। इस दौरे के दौरान उन्होंने सेल्यूलर जेल, रॉस द्वीप और पोर्ट ब्लेयर जैसे द्वीपों का दौरा किया था। 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर के जिमखाना मैदान में उन्होंने आज़ाद हिंद सरकार का झंडा फहराया और अपने भाषण में अण्डमान को 'शहीद द्वीप' और निकोबार को 'स्वराज्य द्वीप' का नाम दिया था।
In simple words: द्वितीय विश्व युद्ध के समय, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने 1943 में अण्डमान और निकोबार का दौरा किया था। उन्होंने वहाँ आज़ाद हिंद सरकार का झंडा फहराया और इन द्वीपों को 'शहीद' और 'स्वराज्य' द्वीप नाम दिया।
🎯 Exam Tip: नेताजी के दौरे की तारीखें, उन्होंने किन स्थानों का दौरा किया और द्वीपों को दिए गए नए नामों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 19. वीर सावरकर को अपनी कैद में बनाए रखने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सेल्युलर जेल में क्या प्रबन्ध किए थे? लेखक ने इस कोटड़ी में क्या-क्या किया?
Answer: ब्रिटिश सरकार वीर सावरकर से बहुत डरती थी। उन्हें डर था कि कहीं सावरकर जेल की कोठरी से भाग न जाएँ। इसलिए उनकी कोठरी के बाहर एक और कोठरी बनाई गई और उन्हें दोहरे ताले में बंद करके रखा गया। लेखक ने बहुत देर तक इस कोठरी को देखा। उन्होंने इस कोठरी की दीवारों को चूमा और वीर सावरकर के चित्र के नीचे खड़े होकर अपनी फोटो भी खिंचवाई, ताकि भविष्य में भी वे इस कोठरी को देख सकें।
In simple words: ब्रिटिश सरकार ने सावरकर को भागने से रोकने के लिए उनकी कोठरी के बाहर एक और कोठरी बनवाई और उन्हें डबल लॉक में रखा। लेखक ने उस कोठरी की दीवारों को चूमा और सावरकर के चित्र के साथ फोटो खिंचवाई।
🎯 Exam Tip: वीर सावरकर के लिए की गई विशेष सुरक्षा व्यवस्था और लेखक की भावुक प्रतिक्रिया दोनों को उत्तर में शामिल करें।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 11 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. लेखक डॉ. कोठारी का जीवन-परिचय लिखिए।
Answer: डॉ. कोठारी का जन्म 27 अक्टूबर, 1941 को उदयपुर जिले के गोगुंदा में हुआ था। कोठारी जी ने हिंदी, प्राकृत और इतिहास विषयों में स्नातकोत्तर (एम.ए.) और राजस्थानी में विद्या वाचस्पति की डिग्री प्राप्त की। उन्हें पुराने साहित्य की हस्तलिखित किताबों के अध्ययन में बहुत रुचि थी। उन्होंने कई शोधपरक लेख लिखकर प्राचीन तथ्यों को सबके सामने लाया। नई कहानी की रचना और शिल्प विधान पर उनका लेखन बहुत महत्वपूर्ण है। श्री कोठारी जी उदयपुर में साहित्य संस्थान के निदेशक रहे और बीकानेर की राजस्थानी भाषा साहित्य और संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष भी रहे। डॉ. देव कोठारी को महाराणा फाउंडेशन द्वारा प्रतिष्ठित महाराणा कुंभा पुरस्कार भी मिला है।
In simple words: डॉ. कोठारी का जन्म 1941 में उदयपुर में हुआ था। उन्होंने हिंदी, प्राकृत, इतिहास और राजस्थानी में उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे साहित्य से जुड़े थे और उन्हें महाराणा कुंभा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
🎯 Exam Tip: किसी भी लेखक के जीवन-परिचय में जन्म-स्थान, शिक्षा, प्रमुख कार्य और सम्मान जैसी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 1. उदयपुर से पोर्ट ब्लेयर तक की लेखक की यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: लेखक ने सुबह 9:30 बजे पोर्ट ब्लेयर के लिए हवाई यात्रा शुरू की। 1330 किलोमीटर की यात्रा करके वे 11:30 बजे पोर्ट ब्लेयर स्थित वीर सावरकर एयरपोर्ट पहुँचे। वहाँ से बसों द्वारा अपने होटल पहुँचे। पोर्ट ब्लेयर पहुँचकर उन्होंने सबसे पहले वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का आनंद लिया।
इसके बाद सभी रॉस द्वीप घूमने गए और गाइड अनुराधा से इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जाना। साथ ही अण्डमान और निकोबार के बारे में भी जानकारी ली। वहाँ से शाम 5:30 बजे सेल्यूलर जेल के ध्वनि और प्रकाश कार्यक्रम को देखा। अगले दिन वे सबसे पहले चाथम सॉ मिल देखने गए और फिर नाव से वाईपर द्वीप पहुँचे। दोपहर का भोजन करने के बाद वे चिड़ियाँ टापू गए। यहाँ से फिर पोर्ट ब्लेयर लौटे, और अगले दिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय पार्क वेन्डूर गए। वहाँ से फिर जोलीब्वाय द्वीप गए और उसकी प्राकृतिक सुंदरता का मजा लिया। वहाँ से फिर मण्डूर द्वीप पहुँचे और खरीदारी की। यात्रा के अंतिम दिन सभी फिर से सेल्यूलर जेल गए और उसके भागों और ऐतिहासिकता की जानकारी प्राप्त की। यहाँ से निकलकर एयरपोर्ट पहुँचे और 11:55 बजे चेन्नई के लिए हवाई यात्रा की और ठीक 2 बजे चेन्नई वापस पहुँच गए।
In simple words: लेखक ने उदयपुर से पोर्ट ब्लेयर तक की हवाई यात्रा की। वहाँ पहुँचकर उन्होंने वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, रॉस द्वीप, सेल्यूलर जेल, चाथम सॉ मिल, वाईपर द्वीप, चिड़ियाँ टापू, महात्मा गांधी राष्ट्रीय पार्क और जोलीब्वाय द्वीप का दौरा किया।
🎯 Exam Tip: यात्रा का वर्णन करते समय मुख्य पड़ावों और महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों का क्रमबद्ध उल्लेख करें।
Question 3. 'यात्रा : एक पावन तीर्थ की' पाठ के आधार पर अण्डमान एवं निकोबार के विषय में विस्तार से लिखिए।
Answer: अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह का कुल क्षेत्रफल 8249 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 572 छोटे-बड़े द्वीप हैं। इनमें से केवल 36 द्वीपों पर आबादी है, बाकी द्वीप खाली हैं। अण्डमान द्वीप की लंबाई 467 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई 52 किलोमीटर है। इसी तरह निकोबार द्वीप समूह की लंबाई 259 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई 58 किलोमीटर है। अण्डमान और निकोबार द्वीपों का पहला सर्वे लेफ्टिनेंट आर्चिबाल्ड ब्लेयर और लेफ्टिनेंट कोल ब्रुक ने 1778-79 में किया था। अण्डमान द्वीप के सबसे बड़े द्वीप का नामकरण इन्हीं लेफ्टिनेंट आर्चिबाल्ड ब्लेयर के नाम पर हुआ है।
पोर्ट ब्लेयर अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी है। पोर्ट ब्लेयर पहुँचने में 12 घंटे लगते हैं। इसके लिए स्थानीय प्रशासन की अनुमति भी लेनी पड़ती है। अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह में अब भी जारवा, सेन्टिनिलीज, शौम्पेन, ओंगी, अण्डमानीज-निकोबारी और केरेन जैसी आदिवासी जातियाँ रहती हैं। इसकी राजधानी पोर्ट ब्लेयर में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध, जैन आदि सभी धर्मों के लोग रहते हैं। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान रॉस द्वीप अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी था। अंग्रेजों के सभी सरकारी कार्यालय रॉस द्वीप पर ही थे। यह द्वीप दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानियों के कब्जे में था। जापानियों ने जब इस द्वीप को छोड़ा, तो इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इसके बाद पोर्ट ब्लेयर इसकी राजधानी बन गया।
In simple words: अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह का क्षेत्रफल 8249 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 572 द्वीप हैं (36 पर आबादी)। अण्डमान द्वीप 467 किमी लंबा है, निकोबार द्वीप 259 किमी लंबा है। पोर्ट ब्लेयर इसकी राजधानी है, जहाँ कई आदिवासी जातियाँ और विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। पहले रॉस द्वीप राजधानी था, जिसे जापानियों ने नष्ट कर दिया था।
🎯 Exam Tip: अण्डमान-निकोबार के भौगोलिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पहलुओं को शामिल करते हुए एक विस्तृत विवरण दें।
Question 4. चाथम सॉ मिल एवं चिड़ियाँ टापू के विषय में विस्तार से लिखिए।
Answer: चाथम सॉ मिल- चाथम सॉ मिल समुद्री किनारे पर जंगल से जुड़ी एशिया की सबसे बड़ी लकड़ी काटने वाली मिल है। इस मिल में कीमती लकड़ी से लेकर साधारण लकड़ी तक की कटाई आधुनिक मशीनों से होती है। यहाँ बड़े-बड़े गोदाम बने हैं और मिल में एक छोटा म्यूजियम भी है। चॉथम सॉ मिल से लकड़ी पूरे अण्डमान द्वीप और भारत के कई राज्यों में जाती है।
चिड़ियाँ टापू- चिड़ियाँ टापू पोर्ट ब्लेयर से लगभग 30 किलोमीटर दूर घने जंगल में स्थित है। इस टापू पर चिड़ियाँ नहीं हैं, लेकिन इस द्वीप का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को बहुत पसंद आता है। यहाँ पर सूर्यास्त का अद्भुत नजारा भी देखने को मिलता है।
In simple words: चाथम सॉ मिल एशिया की सबसे बड़ी लकड़ी मिल है जहाँ आधुनिक मशीनों से लकड़ी काटी जाती है। चिड़ियाँ टापू पोर्ट ब्लेयर से 30 किमी दूर है, यहाँ चिड़ियाँ नहीं हैं पर इसका प्राकृतिक सौंदर्य और सूर्यास्त बहुत सुंदर है।
🎯 Exam Tip: दोनों स्थानों का अलग-अलग वर्णन करें, उनकी मुख्य विशेषताओं और महत्व पर प्रकाश डालें।
Question 5. गाइड ने लेखक व उसके साथियों को सेल्यूलर जेल के विषय में क्या-क्या जानकारियाँ दीं? अथवा सेल्यूलर जेल की स्थिति, निर्माण, बनावट आदि के विषय में विस्तार से लिखिए।
Answer: गाइड ने बताया कि सेल्यूलर जेल विश्वभर में 'इण्डियन बेस्टिल' के नाम से मशहूर है। यह जेल पोर्ट ब्लेयर शहर में अटलांटा पॉइंट की ऊँचाई पर शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस जेल के निर्माण की सिफारिश सर सी.जे. लायल और सर ए.एस. लैथ ब्रिज ने 1890 में की थी। पोर्ट ब्लेयर के तत्कालीन सुपरिन्टेडेन्ट कर्नल एन.एम.टी. हार्सफोर्ड ने इसके निर्माण का आदेश दिया था। यह जेल 1896 से 1906 ई. के बीच बनी थी और इसकी लागत कुल 5,17,352 रुपये थी। इस जेल में सात भुजाएँ (कतारें) थीं, जो जेल के बीच में स्थित एक टावर से जुड़ी थीं।
इस केंद्रीय टावर से जेल की इन सातों भुजाओं पर एक साथ नजर रखी जा सकती थी। हर भुजा तीन मंजिला थी, जिसमें कुल 699 कोठरियाँ (कमरे) थीं। इन कोठरियों की बनावट बिल्कुल एकान्त जेल जैसी थी, इसी वजह से इसका नाम सेल्यूलर जेल पड़ा। हर कोठरी 13.5 फीट लंबी और 7 फीट चौड़ी थी। कोठरी में बहुत ऊँचाई पर 3x1 फीट का एक ही रोशनदान था। कोठरी का दरवाजा लोहे का बना था, जो तीन फीट की रॉड से बाहर से बंद होता था। सभी कोठरियाँ लंबी कतार में थीं और कोठरियों के बाहर चार फीट चौड़ा गलियारा था।
In simple words: गाइड ने बताया कि सेल्यूलर जेल 'इण्डियन बेस्टिल' के नाम से जानी जाती है। यह 1896-1906 में बनी थी, जिसमें सात भुजाएँ और 699 एकान्त कोठरियाँ थीं, जिनमें हर कोठरी में एक छोटा रोशनदान और लोहे का दरवाजा था।
🎯 Exam Tip: जेल की पहचान, निर्माण का इतिहास, लागत, और संरचना (भुजाएँ, कोठरियाँ, उनकी बनावट) जैसे प्रमुख तथ्यों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करें।
Question 6. विनायक दामोदर सावरकर के विषय में विस्तार से लिखिए।
Answer: विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को मराठी चित्पावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर और माता का नाम राधाबाई सावरकर था। 1901 में विनायक का विवाह रामचंद्र त्रिंबक चिपलूनकर की बेटी यमुनाबाई से हुआ। श्री रामचंद्र त्रिंबक चिपलूनकर ने ही विनायक की कॉलेज की पढ़ाई में मदद की थी, और बाद में 1902 में उन्होंने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में दाखिला लिया। सावरकर का क्रांतिकारी आंदोलन भारत और इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ। इंग्लैंड में वे इंडिया हाउस से जुड़े थे और उन्होंने अभिनव भारत सोसाइटी और फ्री इंडिया सोसाइटी के साथ मिलकर स्टूडेंट्स सोसाइटी की स्थापना की।
क्रांतिकारी समूह इंडिया हाउस के साथ संबंध होने के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जेल में रहते हुए उन्होंने कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। उनके बार-बार भागने की कोशिश और उसमें सफल होने के डर से उन्हें अण्डमान-निकोबार की सेल्यूलर जेल में कैद किया गया। लेकिन 1921 में उन्हें एक समझौते के तहत रिहा कर दिया गया।
In simple words: विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 1883 में हुआ था। वे एक क्रांतिकारी थे जिन्होंने भारत और इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान आंदोलन शुरू किया। उन्हें गिरफ्तार कर सेल्यूलर जेल में रखा गया, जहाँ से वे कई बार भागने की कोशिश कर चुके थे, पर 1921 में उन्हें रिहा कर दिया गया।
🎯 Exam Tip: सावरकर के जीवन, शिक्षा, क्रांतिकारी गतिविधियों और जेल के अनुभवों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।
Question. लेखक मे सेल्यूलर जेल में कौन-कौन से स्थान व स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित क्या-क्या वस्तुएँ देखीं? उन्हें देखकर उसके मन में क्या भावनाएँ उत्पन्न हुई?
Answer: सेल्यूलर जेल में लेखक ने सबसे पहले जेल और उसकी कोठरियों की बनावट देखी। उन्हें देखकर वहाँ रहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के कष्टों का अनुभव हुआ। उन्होंने जेल में बलिदान वेदी स्तंभ और 9 अगस्त 2004 को स्थापित स्वातंत्र्य ज्योति भी देखी। इसके बाद उन्होंने जेल परिसर में स्थित फाँसीघर, तेल कारखाना, सजा देने का स्टैंड और सजा देने के तरीके, स्वतंत्रता सेनानियों की फोटो गैलरी, नेताजी गैलरी, कलाकृतियों की गैलरी, अण्डमान गैलरी, बीच का टावर और वीर सावरकर की कोठरी आदि को एक-एक करके देखा।
फाँसीघर को देखकर उन्हें अंग्रेजों की क्रूरता का एहसास हुआ। साथ ही, क्रांतिकारियों को फाँसी दिए जाने का दृश्य उनके सामने आ गया और उनका सिर उन क्रांतिकारियों के प्रति सम्मान से झुक गया। लेखक ने फोटो और चित्रों के माध्यम से क्रांतिकारियों को सजा देने के कई तरीके भी जाने। उन्होंने इस जेल में सजा काटने वाले अधिकांश स्वतंत्रता सेनानियों का परिचय भी प्राप्त किया। स्वतंत्रता सेनानियों की इस फोटो गैलरी में उन्हें पहनाई जाने वाली ड्रेस, लगाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की बेड़ियाँ और उनके खाने के बर्तन आदि भी दिखाए गए। उन्होंने सेल्यूलर जेल के क्रूर जेलर डेविड बेरी के कार्यालय में लगी नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की फोटो गैलरी भी देखी।
In simple words: लेखक ने सेल्यूलर जेल में कोठरियाँ, फाँसीघर, तेल कारखाना, सावरकर की कोठरी और स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें देखीं। इन्हें देखकर उन्हें अंग्रेजों की क्रूरता का एहसास हुआ और क्रांतिकारियों के प्रति बहुत सम्मान महसूस हुआ।
🎯 Exam Tip: लेखक द्वारा देखे गए स्थानों और वस्तुओं की सूची बनाएँ और फिर उन दृश्यों से उत्पन्न हुई उनकी भावनाओं का विस्तृत वर्णन करें।
पाठ-सारांश :
लेखक डॉ. देव कोठारी द्वारा लिखी 'यात्रा : एक पावन तीर्थ की' एक यात्रावृत्त है। इसमें लेखक ने अपनी पोर्ट ब्लेयर यात्रा का बहुत सुंदर वर्णन किया है। इस यात्रावृत्त में उन्होंने पोर्ट ब्लेयर के साथ-साथ अण्डमान-निकोबार के अन्य द्वीपों की यात्रा का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है। इस यात्रावृत्त में उन्होंने पोर्ट ब्लेयर स्थित सेल्यूलर जेल के प्रति अपना विशेष लगाव भी दिखाया है।
देश को आजाद कराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के जोश और अंग्रेज सरकार द्वारा दी जाने वाली यातनाओं के बारे में सुनकर बचपन में लेखक का मन बहुत दुखी हो जाता था। इन्हीं सब बातों ने ही लेखक के मन में सेल्यूलर जेल देखने की इच्छा जगाई थी। लेखक को सेल्यूलर जेल देखने का मौका अपनी 80 साल की उम्र में मिला। वे महाराणा प्रताप वरिष्ठ नागरिक संस्थान के 53 सदस्यों के दल के साथ 1 अप्रैल 2011 को अहमदाबाद के लिए बस से निकले। अगले दिन 2 अप्रैल सुबह 3:00 बजे वे सभी अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुँचे, वहाँ से 5:50 पर किंग फिशर के हवाई जहाज से चेन्नई के लिए निकले। सुबह 8:10 पर सभी चेन्नई एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से वातानुकूलित (एयरकंडीशनर) बसों से अपने-अपने होटल पहुँचे। होटल से सुबह का नाश्ता करने के बाद सभी पहले चेन्नई के मरीना बीच घूमने गए और वहाँ से चेन्नई का म्यूजियम देखने गए। वापस आकर सभी ने क्रिकेट के फाइनल मैच का आनंद लिया।
रात को होटल में आराम करने के बाद 3 अप्रैल की सुबह 7 बजे पोर्ट ब्लेयर जाने के लिए फिर चेन्नई एयरपोर्ट पहुँचे। चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर की दूरी 1330 किलोमीटर है। दिन के 11:30 बजे सभी हवाई यात्रा करके पोर्ट ब्लेयर के TSG होटल पहुँचे। होटल से राव की अधेड़ उम्र की एक महिला गाइड से मुलाकात हुई, जिनका नाम अनुराधा था। वह स्वभाव से बहुत जोशीली और फर्राटेदार हिंदी और अंग्रेजी बोलती थीं। उन्होंने सभी का परिचय पोर्ट ब्लेयर और रॉस द्वीप से करवाया। साथ ही यह भी जानकारी दी कि यह दोनों द्वीप अण्डमान और निकोबार द्वीप के हिस्से हैं। अण्डमान और निकोबार द्वीप का कुल क्षेत्रफल 8249 वर्ग किलोमीटर है। यहाँ छोटे-बड़े मिलाकर कुल 572 द्वीप हैं, जिनमें से केवल 36 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं, बाकी द्वीप खाली हैं। अण्डमान द्वीप की लंबाई 467 किमी और चौड़ाई 52 किमी है तो निकोबार द्वीप समूह की लंबाई 259 किमी और चौड़ाई 5.8 किमी है।
सन् 1778-79 में अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे पहले सर्वे लेफ्टिनेंट आर्चिबाल्ड ब्लेयर और लेफ्टिनेंट कोल ब्रुक ने किया था। अण्डमान के सबसे बड़े द्वीप का नाम लेफ्टिनेंट आर्चिबाल्ड ब्लेयर के नाम पर ही पोर्ट ब्लेयर पड़ा। यह अण्डमान निकोबार द्वीप की राजधानी भी है। इस द्वीप पर जारवा, सेन्टिनिलीज, शोम्पेन, ओंगी, अण्डमानीज निकोबारी और केरेन नाम की आदिवासी जातियाँ रहती हैं। पोर्ट ब्लेयर पर सभी धर्मों के लोग रहते हैं।
रॉस द्वीप के बारे में जानकारी देते हुए अनुराधा राव ने बताया कि यह द्वीप ब्रिटिश शासन के समय अण्डमान और निकोबार द्वीप की राजधानी था। उनके सभी सरकारी कार्यालय यहीं थे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब यह द्वीप जापानियों के कब्जे में था, तब सुभाष चन्द्र बोस ने यहीं पर सबसे पहले जापानी जनरल से मुलाकात की थी। अब तो यह द्वीप खंडहर बन चुका है। यहाँ से सभी प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम देखने सेल्युलर जेल पहुँचे। इस कार्यक्रम ने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए। स्वतंत्रता सेनानियों में देशभक्ति और आजादी की तीव्र लालसा और उनके प्रति अंग्रेजों के क्रूर व्यवहार को देख-सुनकर सभी का गला भर आया। अगले दिन नए कार्यक्रम के अनुसार सभी सबसे पहले चाथम सॉ मिल देखने गए, वहाँ से वाईपर द्वीप पहुँचे।
इस द्वीप का चित्र भारत सरकार के 20 रुपये के नोट पर भी छपा हुआ है। सन् 1789 में यहाँ चेनग्यांग नाम की जेल थी, जिसे सेल्युलर जेल बनने के बाद हटा दिया गया। फाँसीघर यहाँ की ऐतिहासिक महत्व की इमारत है, जो वर्तमान समय में खंडहर में बदल चुकी है। इसी फाँसीघर में 30 मार्च 1872 को पठान शेरअली को फाँसी पर लटकाया गया था, क्योंकि उसने 8 फरवरी 1872 को वाइसराय लॉर्ड मेयो को चाकू से गोदकर मार डाला था। पोर्ट ब्लेयर वापस पहुँचकर सभी ने पहले दोपहर का खाना खाया और फिर थॉमस कुक की सलाह पर सभी चिड़ियाँ के टापू देखने गए जो 30 किमी दूर घने जंगल में स्थित है। अगले दिन लेखक का पूरा दल महात्मा गांधी राष्ट्रीय पार्क देखने के लिए वन्दूर पहुँचे। यह पार्क जीव-जंतुओं से भरपूर 181.5 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ विशाल समुद्री पार्क है।
यहाँ से सभी जोलीब्वाय द्वीप पहुँचे। वहाँ से वापस मण्डूर पहुँचकर सभी ने पहले भोजन किया और फिर खरीदारी की। यात्रा के अंतिम दिन सभी जल्दी ही अपने रोज के कामों से फ्री होकर सेल्यूलर जेल पहुँचे। सेल्यूलर जेल पहुँचकर गाइड महोदय ने उन सभी को विस्तार से सेल्यूलर जेल के निर्माण, उसके निर्माण में आए खर्च, जेल की कोठरियों की लंबाई-चौड़ाई के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जेल में कैदियों के साथ होने वाले बुरे व्यवहार की जानकारी देते हुए बताया कि इस जेल कोठरियों में एक ही रोशनदान होता था। इनमें कैदियों के शौच के लिए कोई अलग से स्थान नहीं होता। इसलिए रात में शौच आने की दशा में उन्हें अपनी कोठरी में ही शौच करनी पड़ती थी, जिसके कारण उनकी कोठरियाँ दुर्गन्ध से भर जाती थीं।
के समय जब सुभाष चन्द्र बोस अण्डमान-निकोबार द्वीप के दौरे पर आए थे तब उन्होंने 30 दिसम्बर 1945 ई. को पोर्ट-ब्लेयर के जिमखाना मैदान में आजाद हिन्द सरकार का झण्डा फहराया और भाषण दिया। उनके इस प्रवास का भी पूरा विवरण जेल में उपलब्ध है।
आराधना राव ने उन्हें वह कोठरी भी दिखाई जहाँ पर विनायक दामोदर सावरकर, गणेश दामोदर सावरकर और वीर सावरकर कैद रहे। वीर सावरकर कहीं जेल तोड़कर भाग न जाएँ इस डर से ब्रिटिश सरकार ने इस कोठरी के बाहर एक और कोठरी बनवाई। लेखक ने इस कोठरी में खड़े होकर तथा सावरकरजी के चित्र के नीचे खड़े होकर फोटो भी खिंचवाया, यहाँ से निकलकर सभी जेल के मध्य स्थित टावर में पहुँचे और गाइड महोदय ने बताया कि किस प्रकार वहाँ से पूरी जेल पर नियन्त्रण रखा जाता है। यहाँ लगे शिलापट्ट पर उन क्रान्तिकारियों के नाम लिखे हुए हैं जिन्होंने यहाँ रहकर कष्ट सहे। 11 फरवरी 1979 ई. को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करके भारत को समर्पित कर दिया। जेल के बाहर स्थित सावरकर पार्क में सावरकर जी के साथ शहीद इन्दू भूषण रे, बाबा भानसिंह, मोहित मोइत्रा, रामरक्श, महावीरसिंह और मोहनकिशोर नामदास की मूर्तियाँ लगी हुई हैं। वहाँ से वापस लौटने के लिए सभी निकल पड़े। लगभग 11.55 पर सभी हवाई जहाज से चेन्नई के लिए निकले और – ठीक दो बजे चेन्नई पहुँच गए। इस प्रकार अपने मन में अनेक सवाल लिए हुए लेखक पोर्ट ब्लेयर की अद्भुत यात्रा के विषय में और . स्वतंत्रता सेनानियों के इस मंदिर के विषय में विचार करता है।
कठिन शब्दार्थ :
(पा.पु.पृ.88) बाल्यकाल: बचपन
गुलामी: परतंत्रता
जकड़े हुए: बंधे हुए
मुक्त: आजाद
स्वर्णिम: स्वर्ण (सोने) के समान
प्रभात: सुबह
किस्से: घटनाएँ, बातें
यातनाओं: कष्टों
लोमहर्षक: रोमांचक
दिल दहल उठना: घबरा जाना
स्वतः: अपने आप
स्फूर्त: तेज
जिज्ञासा: जानने की इच्छा
पावन: पवित्र
माटी: मिट्टी
वन्दन: नमन
भावभीनी: भावनाओं में डूबी हुई
दशक: दस साल का समय
पुनीत: पवित्र
एकाकी: अकेले
वरिष्ठ: बुजुर्ग
दल: समूह
(पा. पु.पृ. 89) सायं: शाम
रवाना होना: निकलना (किसी स्थान के लिए)
मार्ग: रास्ता
अनुभूति: एहसास
वातानुकूलित: एयरकंडीशनर
तत्पश्चात्: बाद में
पुरातात्विक: प्राचीनकाल से सम्बंधित
भव्यता: ऐश्वर्य
विश्राम: आराम
पुनः: दोबारा
उमंग: जोश
सराबोर: डूबे हुए, मस्त
भ्रमण करना: घूमना
प्रबल: तेज, उग्र
उत्कण्ठा: जिज्ञासा
वाटर: पानी, जल
दृष्टि: नज़र
अद्वितीय: अद्भुत
छरहरे: पतले
अनाम: जिनके नाम ज्ञात न हों
समीप: पास, नजदीक
हिस्से: भाग
निर्जन: आबादीरहित
(पा. पु.पृ 90) स्वीकृति: आज्ञा
निवास करना: रहना
कार्यालय: दफ्तर
अधीन होना: अधिकार में होना, कब्जे में होना
भेंट: मुलाकात
तहस-नहस: नष्ट करना
भव्यता: ऐश्वर्य
जिक्र करना: वर्णन करना
दृश्य: नजारा
ध्वनि: आवाज
प्रकाश: रोशनी
प्रतिनिधि: प्रतिनिधित्व करने वाला, आगे चलने वाला
शहादत: बलिदान
तीव्र: तेज
लालसा: इच्छा
दृढ़ता: मजबूत (इरादे)
लगन: निष्ठा
गला भर आना: रुआँसू होना
कोटड़ी: कोठरी, कैदियों के रहने का कमरा
स्थल: स्थान
प्रत्यक्ष: सामने
कपाट: किवाड़
म्यूजियम: संग्रहालय
(पा.पु.पृ. 92) सदृश: समान
नीलिमा: नीलापन
किनारा: तट
मनमोहक: मन को मोहने वाली
गगनचुम्बी: आकाश को छूने वाले
कलरव: पक्षियों के चहचहाने की आवाज
साहस कर: हिम्मत करके
आनन्द: मजा
सतर्क: सावधान
अवशेष: बचे हुए अंग
पाषाण: पत्थर
आकर्षक: अपनी ओर खींचने वाले
पाबन्दी: रोक
लुफ्त: आनंद
अवलोकन करना: निरीक्षण करना
तृप्त होना: इच्छा पूरी होना
प्रयास: कोशिश
दिवस: दिन
निवृत्त: फ्री होना, करके चुकना
(पा. पु.पृ. 93) प्रतीत होना: महसूस होना
नसीब होना: प्राप्त होना
क्षण: पल
गौण: अन्य
परम: सबसे अधिक
पावन: पवित्र
वन्दन करना: प्रणाम करना
ख्याति: प्रसिद्धि
व्यय: खर्च
भुजाएँ: कतारें
कोटड़ियाँ: कोठरी, कमरा
एकान्त: अकेला
सदृश: समान
लघुशंका: मूत्र त्याग
दीर्घशंका: शौच
निवारण: निवृत्त होना
रात्रि: रात
समा सकना: आ पाना
शयनकक्ष: सोने का कमरा
दुर्गन्ध: बदबू
स्वीकृति: अनुमति
(पा. पु.पृ. 94) अनिवार्य: निश्चित
स्वाधीनता: स्वतंत्रता
सेनानी: योद्धा, सैनिक
बेरहमी: बुरी तरह
छूट: मुक्ति
स्वादहीन: बेस्वाद
नीरस: बेस्वाद
सख्त: कठोर
मनाही: रोक
मुकाबला: सामना
जुल्म: अन्याय
कड़ा: कठोर, 'सख्त
चप्पे-चप्पे: प्रत्येक स्थान
मध्य: बीच
परिसर: आँगन
बलिदान वेदी स्तंभ: फाँसी का तख्ता
दीर्घा: पंक्ति
ग्राउण्ड फ्लोर: भूमिगत कमरा
क्रूरता: निर्दयता, अमानवीय
साक्षी: प्रमाण
उद्घोष करना: नारे लगाना
(पा.पु.पृ.95) उपलब्ध होना: प्राप्त होना
क्रूर: निर्दयी
खूखार: खतरनाक
नामकरण करना: नाम रखना
प्रवास: रहने का समय
प्रभावी: प्रभावशाली
बन्दी: कैदी
भयभीत: डरी हुई
डबल लोक: दोहरे ताले में
लालसा: इच्छा
निहारना: देखना
विवश: मजबूर
स्पष्ट: साफ
उत्कीर्ण: छपे हुए
यातना: कष्ट
भू: भूमि
समर्पित करना: सौंपना
चिर: लम्बी
स्मृति: याद
परिसर: आँगन
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