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Detailed Chapter 10 उधार मांगना भी एक कला है RBSE Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 10 उधार मांगना भी एक कला है RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बिना पूँजी व्यापार प्रारम्भ करने के लिए
(क) बैंक से ऋण लेना चाहिए।
(ख) सहकारी समिति से सहयोग लेना चाहिए।
(ग) मित्रों से सहयोग लेना चाहिए।
(घ) उधार माँगने की कला का अभ्यास करना चाहिए।
Answer: (घ) उधार माँगने की कला का अभ्यास करना चाहिए।
In simple words: लेखक के अनुसार, बिना पैसे के व्यापार शुरू करने के लिए उधार माँगने की कला सीखना बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सबसे सटीक विकल्प चुनें जो पाठ के मुख्य विचार से सीधा सम्बन्ध रखता हो।
प्रश्न 3. प्रायः सभी शौकिया उधार लेने वाले इस बहाने को पेंसिलीन के इंजेक्शन की तरह प्रयोग करते हैं
(क) कल दे दूंगा।
(ख) अभी पैसा नहीं है।
(ग) आपका पैसा देना है।
(घ) भाई अभी वेतन नहीं मिला है।
Answer: (घ) भाई अभी वेतन नहीं मिला है।
In simple words: उधार लेने वाले अक्सर 'अभी वेतन नहीं मिला' का बहाना बनाते हैं, जैसे कि यह कोई सामान्य और स्वीकार्य कारण हो।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पाठ में वर्णित विशिष्ट कथनों या मुहावरों पर ध्यान दें जो लेखक द्वारा दिए गए उदाहरणों को दर्शाते हैं।
प्रश्न 4. पाँचों अँगुलियाँ घी में (और सिर कड़ाही में) का तात्पर्य है –
(क) पौष्टिक भोजन करना
(ख) घृत युक्त पकवान में रहना।
(ग) आराम युक्त जीवन जीना
(घ) सब ओर से लाभ।
Answer: (घ) सब ओर से लाभ।
In simple words: इस मुहावरे का मतलब है कि व्यक्ति हर तरफ से फायदे में है और बहुत आरामदायक जीवन जी रहा है।
🎯 Exam Tip: मुहावरों और लोकोक्तियों के अर्थ हमेशा संदर्भ के अनुसार समझें। यह मुहावरा पूर्ण लाभ या अत्यंत सुख की स्थिति को दर्शाता है।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. जिससे उधार लेना होता है, उसके साथ पूर्वराग के रूप में क्या करना चाहिए?
Answer: जिससे उधार लेना होता है, उसे प्रभावित करने के लिए पहले चाय पिलानी चाहिए और खुशामद करनी चाहिए। यह उधार माँगने की कला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: उधार लेने से पहले, व्यक्ति को चाय पिलाकर और तारीफ करके उस इंसान को खुश करना चाहिए जिससे उधार लेना है।
🎯 Exam Tip: अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नों में, सीधे और संक्षिप्त उत्तर दें जो प्रश्न के मुख्य बिंदु को स्पष्ट करें।
प्रश्न 2. 'ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्' सिद्धान्त क्या है?
Answer: 'ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्' चार्वाक दर्शन का एक सिद्धान्त है। इसका अर्थ है कि जब तक जीवन है, सुख से जीना चाहिए, भले ही इसके लिए कर्ज ही क्यों न लेना पड़े। मरने के बाद कुछ भी नहीं मिलता है, इसलिए वर्तमान जीवन का पूरा आनंद उठाना चाहिए।
In simple words: यह चार्वाक दर्शन का नियम है, जिसका मतलब है कि कर्ज लेकर भी मजे से जियो, क्योंकि मरने के बाद सब खत्म हो जाता है।
🎯 Exam Tip: सिद्धान्तों या उद्धरणों से सम्बन्धित प्रश्नों में, उनके मूल अर्थ और जिस दर्शन से वे जुड़े हैं, उसे स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. जो बड़े कलाकार होते हैं वे अपने साथ क्या रखते हैं?
Answer: जो बड़े कलाकार होते हैं, वे अपने साथ एक बहाना हमेशा तैयार रखते हैं। जैसा कि मक्खनलाल ने पत्र में लिखा कि 'मैं यहाँ राजी-खुशी हूँ, तुम्हारी राजी-खुशी जमुनाजी से मनाता हूँ। मौसम बड़ा अच्छा है।” यह बहाना दिखाता है कि वे अपनी स्थिति को कैसे छुपाते हैं।
In simple words: बड़े कलाकार लोग अपने साथ हमेशा कोई न कोई बहाना रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उसे इस्तेमाल कर सकें।
🎯 Exam Tip: पाठ में दिए गए उदाहरणों या पात्रों के माध्यम से उत्तर को पुष्ट करें, जैसे कि मक्खनलाल के पत्र का उल्लेख।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. उधार माँगने वालों के लिए गीता में एक सिद्धान्त कौन-सा है और क्या है?
Answer: उधार माँगने वालों के लिए गीता में 'स्थितप्रज्ञ' बनने का सिद्धान्त है। स्थितप्रज्ञ उसे कहते हैं जो किसी भी तरह के भ्रमों, इच्छाओं और भावनाओं से प्रभावित नहीं होता। ऐसा व्यक्ति अपनी आत्मा में ही संतुष्ट और समझदार रहता है, और मान-अपमान या लाभ-हानि जैसी विरोधी स्थितियों में भी अपनी बुद्धि को स्थिर रखता है। उधार माँगने वाले लोग इस सिद्धान्त का उपयोग बेशर्मी दिखाने और मान-अपमान की चिंता न करने के लिए करते हैं। यह उन्हें बिना किसी संकोच के उधार माँगने में मदद करता है।
In simple words: गीता का 'स्थितप्रज्ञ' सिद्धान्त कहता है कि व्यक्ति को शांत और स्थिर रहना चाहिए, मान-अपमान की चिंता नहीं करनी चाहिए। उधार माँगने वाले लोग इसी बात का फायदा उठाकर बेशर्म बनते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी दार्शनिक सिद्धान्त का वर्णन करते समय, उसके मूल अर्थ को स्पष्ट करें और फिर बताएं कि पाठ के संदर्भ में उसे कैसे लागू किया गया है।
प्रश्न 2. "एक सज्जन से पूछा कि संसार का सारा धन यदि आपको मिले जाए तो आप क्या करियेगा?" इस पर लेखक को उक्त सज्जन ने क्या उत्तर दिया?
Answer: जब लेखक ने एक सज्जन से पूछा कि यदि उन्हें संसार का सारा धन मिल जाए तो वे क्या करेंगे, तो उन्होंने उत्तर दिया कि वे उस धन से अपना सारा कर्ज चुका देंगे, जितना वे चुका सकते हैं। इस कथन का अर्थ है कि उस सज्जन ने कई लोगों से बहुत सारा उधार और कर्ज ले रखा है। वे असल में अपना कर्ज चुकाने में लापरवाह हैं और उसे चुकाना नहीं चाहते हैं। वे मानते हैं कि न तो उन्हें संसार का सारा धन मिलेगा और न ही उन्हें कर्ज चुकाने की आवश्यकता है। यह कर्ज न चुकाने की एक चालबाजी भरी बात है, जो केवल मक्कार और धूर्त लोग ही करते हैं।
In simple words: सज्जन ने कहा कि वे सारे पैसे से अपना कर्ज चुकाएँगे। लेखक का मानना है कि यह केवल एक बहाना था, क्योंकि वह सज्जन असल में कर्ज चुकाना ही नहीं चाहते थे।
🎯 Exam Tip: जब कोई उद्धरण दिया जाए, तो उसे विस्तार से समझाएं कि उसका क्या मतलब है और लेखक ने उसे किस संदर्भ में प्रयोग किया है।
प्रश्न 3. बिना गुरु के किसकी प्राप्ति नहीं हो सकती है और क्यों?
Answer: बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती है। किसी भी विषय या कला का पूरा ज्ञान उस विषय के जानकार व्यक्ति से ही मिलता है। इसलिए, एक विशेषज्ञ गुरु की आवश्यकता होती है। गुरु ही शिक्षा, प्रशिक्षण और उपदेश के माध्यम से ज्ञान को अच्छी तरह समझाते हैं और जरूरत पड़ने पर व्यावहारिक ज्ञान भी देते हैं। लेखक ने उधार माँगने को भी एक कला बताया है। इस कला को सीखने के लिए ऐसे गुरु की जरूरत होती है जो इस क्षेत्र में बहुत अनुभवी हों। ऐसा गुरु ही अपने शिष्य को इस कला में सफल बना सकता है, क्योंकि हर कला में मार्गदर्शन ज़रूरी है।
In simple words: बिना गुरु के कोई भी ज्ञान नहीं मिल सकता, क्योंकि गुरु ही सही शिक्षा और अनुभव देते हैं। उधार माँगना भी एक कला है, और इसे सीखने के लिए भी एक अनुभवी गुरु चाहिए।
🎯 Exam Tip: किसी भी कला या ज्ञान के महत्त्व पर सवाल उठने पर, गुरु की भूमिका और उनकी आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
प्रश्न 4. उधार सम्प्रदाय के मानने वाले कहाँ मिलेंगे?
Answer: डॉ. बरसानेलाल चतुर्वेदी ने गहरे अध्ययन के बाद बताया है कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें उधार लेने का शौक होता है, या कभी-कभी यह उनकी मजबूरी भी होती है। ऐसे लोग जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जैसे दफ्तरों, विद्यालयों, मिल-कारखानों और अन्य जगहों पर। ये वे लोग होते हैं जो अपनी आवश्यकतानुसार दूसरों से उधार लेते रहते हैं।
In simple words: उधार लेने वाले लोग हर जगह मिलते हैं, जैसे दफ्तरों, स्कूलों और कारखानों में। कुछ लोग शौक से उधार लेते हैं जबकि कुछ मजबूरी में।
🎯 Exam Tip: जब किसी समूह या सम्प्रदाय के बारे में पूछा जाए, तो उनके मिलने के स्थान और उनके सामान्य व्यवहार का वर्णन करें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. "उधार माँगना भी एक कला है।” पाठ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: 'उधार माँगना भी एक कला है' शीर्षक हास्य-व्यंग्य डॉ. बरसानेलाल चतुर्वेदी द्वारा लिखा गया है। इसमें लेखक ने बताया है कि बिना पैसे के कोई व्यापार शुरू करना हो, तो उधार माँगने की कला सीखनी चाहिए, पर यह काम आसान नहीं है। इस कला में महारत हासिल करने के लिए गुरु से प्रशिक्षण और लगातार अभ्यास ज़रूरी है। शिकार फँसाने में सावधानी बरतनी होती है; जैसे देवी पर बलि चढ़ाने से पहले बकरे को पौष्टिक भोजन दिया जाता है, वैसे ही उधार माँगने से पहले भी 'शिकार' (उधार देने वाले) को चाय-पानी पिलाकर अनुकूल बनाया जाता है, और जब वह तैयार हो जाए, तो उसे तुरंत फँस लिया जाता है। इस कला में प्रवीण होने के लिए मान-अपमान की चिंता छोड़ देनी चाहिए, उधार लेकर भूल जाना चाहिए, और बहाने बनाने में माहिर होना चाहिए। जैसे उधार चुकाना भूल जाना, उस रास्ते से न जाना जहाँ उधार देने वाला मिल जाए, और मुलाकात होने पर भी उधार की बात न छेड़ना। उधार माँगने वालों का एक अलग ही वर्ग होता है जो दफ्तरों, विद्यालयों, कारखानों और जीवन के अन्य क्षेत्रों में मिलते हैं। कुछ लोग इसे शौक के तौर पर करते हैं, ऋण लेकर मौज-मस्ती से जीना चाहते हैं। वे उधार चुकाने के लिए कई बहाने बनाते हैं, जैसे बीमारी, पैसों का दूसरे के पास फँस जाना, या मालिक का बाहर होना। वे तो यहाँ तक कहते हैं कि 'क्या मैं आपका रुपया लेकर भाग जाऊँगा?', 'क्या मेरी इतनी भी इज्जत नहीं है?' इस तरह वे अपने शिकार को चुप करा देते हैं। उधार माँगने वाले स्वार्थ-सिद्धि में इतने डूबे होते हैं कि उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं होती कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं।
In simple words: 'उधार माँगना भी एक कला है' व्यंग्य में लेखक बताते हैं कि उधार माँगना एक हुनर है जिसके लिए हिम्मत और बहानेबाजी चाहिए। उधार लेने वाले मान-अपमान की परवाह नहीं करते, बहाने बनाते हैं और चुकाने से बचते हैं, वे हमेशा अपने फायदे के बारे में सोचते हैं।
🎯 Exam Tip: पाठ का सार लिखते समय, मुख्य बिन्दुओं को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें। लेखक के परिचय और मुख्य विचारों को भी शामिल करें।
प्रश्न 2. पठित पाठ के आधार पर उधार सम्प्रदाय के लोगों का चरित्रचित्रण कीजिए।
Answer: 'उधार माँगना भी एक कला है' नामक हास्य-व्यंग्य में लेखक ने उधार माँगने वाले लोगों के चरित्र को स्पष्ट रूप से दर्शाया है। उनकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **मोटी चमड़ी वाले:** उधार माँगने वाले लोग मोटी चमड़ी के होते हैं। उन पर किसी सामान्य डाँट-फटकार या मान-अपमान का कोई असर नहीं होता। इसी कारण वे बेशर्म और निर्लज्ज स्वभाव के होते हैं।
2. **बहाने बनाने में चतुर:** ये लोग बहाने बनाने में बहुत माहिर होते हैं। कभी वेतन न मिलने का बहाना बनाते हैं, तो कभी रास्ता बदल कर चले जाते हैं या भूल जाने का दिखावा करते हैं। बीमारी या घर के बजट बिगड़ने का बहाना भी खूब बनाते हैं।
3. **स्वार्थी प्रवृत्ति:** उधार माँगने वाले पहले मीठी-मीठी बातें करते हैं। वे पूर्व परिचित की तरह चाय-पानी पिलाकर लोगों को अपने अनुकूल बनाते हैं, और मौका मिलते ही उधार माँगने में सफल हो जाते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य केवल अपना काम निकालना होता है।
4. **धूर्तता का आचरण:** कुछ उधार माँगने वाले बहुत धूर्त होते हैं। वे उधार देना भूल जाते हैं, उसकी बात भी नहीं करते। यदि कोई कठोरता से पैसे माँगता है, तो वे अपनी इज्जत का हवाला देते हैं। वे कहते हैं, "क्या मैं आपका रुपया लेकर भाग जाऊँगा?", "मुझे स्वयं ख्याल है" जैसी बातें कहकर पैसे माँगने वाले को निरुत्तर कर देते हैं।
In simple words: उधार लेने वाले लोग बेशर्म होते हैं, आसानी से बहाने बनाते हैं, बहुत चालाक और स्वार्थी होते हैं। वे पहले मीठी बातें करते हैं, फिर उधार लेते हैं और बाद में चुकाने से बचने के लिए कई तरह के बहाने और धूर्तता दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण करते समय, पात्रों के गुणों और अवगुणों को बिन्दुओं में स्पष्ट करें और प्रत्येक बिंदु को पाठ के संदर्भ में समझाएं।
प्रश्न 3. आपका शिकार किसी बड़े शिकारी ने किया हो तथा कड़ाई से अगर वसूली की जाए तो इसकी क्या प्रतिक्रिया होगी?
Answer: लेखक के अनुसार, यदि किसी ऊँचे कलाकार (बड़ा शिकारी) ने आपसे उधार लिया है, तो उससे पैसे वसूलना बहुत मुश्किल हो सकता है। ऐसा बड़ा शिकारी बहाने बनाने की कला में तो निपुण होता ही है, साथ ही वह बेशर्मी से धमकाने में भी माहिर होता है। यदि आप उससे सख्ती से पैसे वसूलने का प्रयास करेंगे, तो वह बहुत बेरुखी से कहेगा कि "क्या आपका रुपया लेकर मैं भाग जाऊँगा?" या "आपने अपने आपको क्या समझ रखा है?, हमारी भी इज्जत है।" वह कठोर प्रतिक्रिया देते हुए फिर कहेगा कि "आपको बार-बार याद दिलाने की आवश्यकता नहीं, मुझे स्वयं उधार चुकाने का ख्याल है।" लेखक बताते हैं कि ऐसे बड़े शिकारी की कठोर प्रतिक्रिया को सुनकर छोटा शिकार (यानी उधार देने वाला) चुप हो जाता है, क्योंकि उनके सामने उसकी नहीं चलती।
In simple words: यदि किसी माहिर उधारखोर ने आपसे पैसे लिए हैं और आप सख्ती से वसूलने की कोशिश करते हैं, तो वह आपको ही धमकाएगा और अपनी बेइज्जती का हवाला देगा, जिससे आप खुद चुप हो जाएंगे।
🎯 Exam Tip: किसी विशिष्ट स्थिति पर आधारित प्रश्नों में, परिस्थितियों का स्पष्ट वर्णन करें और विभिन्न पात्रों की प्रतिक्रियाओं को विस्तार से समझाएं।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'उधार माँगना भी एक कला है' – यह किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) निबन्ध
(ग) रेखाचित्र
(घ) हास्य-व्यंग्य।
Answer: (घ) हास्य-व्यंग्य।
In simple words: यह रचना एक हास्य-व्यंग्य है, जो समाज की किसी बात पर हँसी-मजाक के साथ कटाक्ष करती है।
🎯 Exam Tip: किसी रचना की विधा पहचानते समय, उसके लेखन शैली और उद्देश्य (जैसे मनोरंजन के साथ सामाजिक टिप्पणी) पर ध्यान दें।
प्रश्न 3. हास्य-व्यंग्य के नायक के मित्र का क्या नाम बताया गया हैं?
(क) नटवरलाल
(ख) बिहारीलाल
(ग) मक्खनलाल
(घ) बरसाने लाल
Answer: (ग) मक्खनलाल
In simple words: पाठ में हास्य-व्यंग्य के मुख्य पात्र के दोस्त का नाम मक्खनलाल है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के नाम और उनके सम्बन्धों को याद रखना कहानी की बेहतर समझ के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. उधार मांगने की कला में जिसका शिकार किया जाता है, वह होता है
(क) एक पक्षी के समान
(ख) एक मित्र के समान
(ग) एक गुरु के समान
(घ) एक व्यापारी के समान
Answer: (क) एक पक्षी के समान
In simple words: उधार लेने वाला व्यक्ति जिससे पैसे लेता है, वह शिकार होता है, जिसे आसानी से फँसाया जा सकता है, जैसे पक्षी को जाल में फँसाते हैं।
🎯 Exam Tip: उपमाओं और तुलनाओं वाले प्रश्नों में, यह पहचानें कि किस चीज़ की तुलना किससे की जा रही है और क्यों।
प्रश्न 5. उधार माँगने वाले किस बात का तनिक भी खयाल नहीं रखते हैं?
(क) लोग हम पर क्यों विश्वास करते हैं।
(ख) लोग क्यों उधार देने से डरते हैं।
(ग) लोग हमारे बारे में क्या कहते हैं
(घ) लोग हमारी बेइज्जती करते हैं।
Answer: (ग) लोग हमारे बारे में क्या कहते हैं
In simple words: उधार लेने वाले लोग इस बात की परवाह नहीं करते कि दूसरे उनके बारे में क्या सोचते या कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पाठ के मुख्य पात्रों की मनोदशा और उनके व्यवहार को समझकर सही विकल्प चुनें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 2. उधार माँगने की कला कैसे उस्ताद से सीखनी चाहिए?
Answer: उधार माँगने की कला ऐसे उस्ताद से सीखनी चाहिए जो इस विषय का एक बहुत ही अनुभवी और माना हुआ विद्वान् हो। यह कला सीखने के लिए सही मार्गदर्शन ज़रूरी है।
In simple words: उधार माँगने की कला एक ऐसे गुरु से सीखनी चाहिए जो इस काम में बहुत माहिर और जानकार हो।
🎯 Exam Tip: किसी भी कला को सीखने के लिए सही गुरु का चयन कैसे करें, इस पर पाठ के विचारों को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. उधार माँगने में सफलता मिलना कितना कठिन बताया गया है?
Answer: उधार माँगने में सफलता मिलना उतना ही कठिन बताया गया है जितना कि प्लेटफार्म छोड़ चुकी गाड़ी को पकड़ना। यदि सही मौका चूक जाए, तो उधार लेने में सफल होना बहुत मुश्किल हो जाता है।
In simple words: उधार माँगने में सफल होना उतना ही मुश्किल है, जैसे एक चलती ट्रेन को पकड़ना, क्योंकि सही मौका फिर नहीं मिलता।
🎯 Exam Tip: प्रश्नों में दी गई उपमाओं या मुहावरों का उपयोग करते हुए उत्तर को और प्रभावी बनाएं।
प्रश्न 4. लेखक ने किस उत्सुकता से मित्र द्वारा भेजा गया पत्र खोला?
Answer: लेखक ने इस उत्सुकता से मित्र द्वारा भेजा गया पत्र खोला कि शायद इस पत्र में मित्र ने उधार का रुपया भी रखा होगा। उसे उम्मीद थी कि मित्र ने उधार चुका दिया होगा, इसलिए वह जल्दी से पत्र खोलना चाहता था।
In simple words: लेखक ने यह सोचकर उत्सुकता से पत्र खोला कि शायद उसके दोस्त ने उधार के पैसे वापस भेज दिए होंगे।
🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं और उनके कार्यों के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 5. "काठ की हांडी तो एक बार ही चढ़ती है।” इस कहावत का आशय पठित पाठ के अनुसार बताइए।
Answer: "काठ की हांडी तो एक बार ही चढ़ती है" इस कहावत का आशय यह है कि किसी से बार-बार उधार नहीं मिलता। किसी को एक बार ही धोखा दिया जा सकता है, दोबारा नहीं। लेखक ने इस कहावत का प्रयोग उधार माँगने वालों की धूर्तता को दर्शाने के लिए किया है, क्योंकि एक बार पकड़े जाने पर उनका काम नहीं बनता।
In simple words: इस कहावत का मतलब है कि किसी को एक बार ही बेवकूफ बनाया जा सकता है, बार-बार नहीं, इसलिए उधार भी एक बार ही मिल पाता है।
🎯 Exam Tip: कहावतों और मुहावरों का अर्थ बताते समय, उन्हें पाठ के मुख्य विषय के साथ जोड़कर समझाएं।
प्रश्न 6. "यह शिकारी की रियाज पर निर्भर करता है। इस कथन का आशय लिखिए।
Answer: "यह शिकारी की रियाज पर निर्भर करता है" कथन का आशय यह है कि जिस व्यक्ति ने उधार माँगने की कला का जितना अधिक अभ्यास किया होगा, वह उतना ही सफल रहेगा। उधार लेने की कला में निरंतर अभ्यास करने से ही निपुणता और सफलता मिलती है। यह ठीक वैसे ही है जैसे एक शिकारी अपने शिकार को पकड़ने के लिए लगातार अभ्यास करता है।
In simple words: इसका मतलब है कि उधार माँगने की कला में सफलता पाने के लिए बहुत अभ्यास (रियाज) करना पड़ता है, जैसे एक शिकारी अपने हुनर को सुधारता है।
🎯 Exam Tip: किसी कथन का आशय स्पष्ट करते समय, उसके निहितार्थ और पाठ के संदर्भ में उसके महत्व को बताएं।
प्रश्न 7. लेखक ने उधार माँगने वाले लोगों का सम्प्रदाय कैसा बताया है?
Answer: लेखक ने उधार माँगने वाले लोगों का एक अलग ही सम्प्रदाय बताया है। इस सम्प्रदाय के लोग बहानेबाज और बेशर्म होते हैं। वे अपने काम निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उन्हें दूसरों की भावनाओं या प्रतिक्रियाओं की कोई परवाह नहीं होती।
In simple words: लेखक ने उधार माँगने वालों को एक अलग समूह बताया है जो बहाने बनाने में और बेशर्म होने में माहिर होते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी समूह या सम्प्रदाय के विवरण में, उनकी मुख्य विशेषताओं और लेखक के दृष्टिकोण को शामिल करें।
प्रश्न 8. लेखक के अनुसार किनकी पाँचों उँगलियाँ घी में रहती हैं?
Answer: लेखक के अनुसार उन लोगों की पाँचों उँगलियाँ घी में रहती हैं जो उधार माँगने की कला में निपुण होते हैं। ऐसे लोग दूसरों से पैसा लेकर आराम से जीवन जीते हैं और उसे लौटाने की चिंता नहीं करते। वे हर तरफ से फायदे में रहते हैं और मौज-मस्ती का जीवन जीते हैं।
In simple words: लेखक का कहना है कि जो लोग उधार माँगने में माहिर होते हैं और उसे नहीं चुकाते, उनकी पाँचों उँगलियाँ घी में रहती हैं, मतलब वे हमेशा फायदे में और खुश रहते हैं।
🎯 Exam Tip: मुहावरों और लोकोक्तियों वाले प्रश्नों में, यह स्पष्ट करें कि लेखक ने इस मुहावरे का प्रयोग किन लोगों के लिए और किस संदर्भ में किया है।
प्रश्न 1. पक्षी का शिकार करने और उधार माँगने का शिकार करने में क्या समानता एवं असमानता है? पठित पाठ के आधार पर बताइए।
Answer: लेखक बताते हैं कि पक्षी का शिकार करने और उधार माँगने का शिकार करने में कुछ समानताएँ और कुछ असमानताएँ हैं।
**समानताएँ:** दोनों में ही बड़ी कलाकारी और सावधानी की ज़रूरत होती है। दोनों में ही 'शिकार' को फँसाने के लिए योजना बनानी पड़ती है।
**असमानताएँ:**
1. **निशाना:** पक्षी पर बार-बार निशाना साधा जा सकता है। यदि एक बार निशाना चूक जाए या पक्षी उड़ जाए, तो दूसरी बार कोशिश की जा सकती है। परन्तु उधार माँगने में एक बार मौका हाथ से निकल जाए, तो फिर वैसा अवसर जल्दी नहीं मिलता, या शायद कभी नहीं मिलता।
2. **परिणाम:** पक्षी का शिकार न होने पर कोई बड़ी हानि नहीं होती, बस एक मौका चूक जाता है। लेकिन उधार माँगने में चूकने पर व्यक्ति को दोबारा वह अवसर मिलना मुश्किल हो सकता है, जिससे उसकी ज़रूरत पूरी नहीं हो पाती।
In simple words: पक्षी का शिकार करने और उधार माँगने में कलाकारी और सावधानी चाहिए, यह समानता है। असमानता यह है कि पक्षी का शिकार बार-बार किया जा सकता है, पर उधार माँगने का मौका एक बार निकल जाए तो दोबारा मुश्किल से मिलता है।
🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में, पहले समानताएँ और फिर असमानताएँ स्पष्ट बिन्दुओं में प्रस्तुत करें। प्रत्येक बिंदु को पाठ के संदर्भ में समझाएं।
प्रश्न 2. उधार माँगने की कला में पारंगत होने के लिए क्या बनना चाहिए?
Answer: लेखक के अनुसार, उधार माँगने की कला में माहिर होने के लिए व्यक्ति को मोटी चमड़ी वाला होना चाहिए, यानी निर्लज्ज, बेशर्म और ढीठ होना ज़रूरी है। उसे 'स्थितप्रज्ञ' बनना चाहिए, जिसका मतलब है मान-अपमान की चिंता न करना। उधार लेकर भूल जाना भी एक महत्वपूर्ण गुण है। भले आदमी अक्सर वापस पैसे नहीं माँगते हैं, लेकिन कुछ लोग माँगते हैं। इसलिए, उधार लेने वाले को दोनों स्थितियों को समान भाव से देखना चाहिए। उधार लेने वाले को उसे चुकाने की चिंता नहीं करनी चाहिए और पूरी तरह भुलक्कड़ बन जाना चाहिए ताकि उसे पैसे वापस माँगने वाले की बात याद ही न रहे।
In simple words: उधार माँगने में माहिर होने के लिए बेइज्जती की परवाह न करें, बेशर्म बनें, उधार लेकर भूल जाएँ और पैसे चुकाने की चिंता न करें।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष गुण या कला के लिए आवश्यक योग्यताओं को बताते समय, उन्हें स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें और उनके महत्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न 3. प्रवास से लौटे मित्र का कैसा व्यवहार रहा? पठित पाठ के आधार पर बताइए।
Answer: लेखक को अपने मित्र के प्रवास से लौटने की खबर मिली तो वह स्टेशन पर उसका स्वागत करने गया। लेखक ने सोचा कि उसकी विनयशीलता देखकर मित्र अपना उधार चुका देगा। परन्तु मित्र ने केवल अपनी यात्रा की बातें कीं, कुशल-क्षेम पूछा और बाकी सब बातें कीं, लेकिन उधार का रुपया चुकाने का ज़रा भी नाम नहीं लिया। मित्र का व्यवहार पूरी तरह टालने वाला और बेशर्मी से भरा था। लेखक को ऐसा लगा कि मित्र उधार के रुपये के बारे में पूरी तरह भूल गया है। इस बात पर विचार करके लेखक उससे पैसे माँगने की हिम्मत भी नहीं कर सका। यह दर्शाता है कि उधार लेने वाले कितने धूर्त हो सकते हैं।
In simple words: प्रवास से लौटे मित्र ने लेखक का उधार चुकाने के बजाय केवल अपनी यात्रा की बातें कीं। उसका व्यवहार ऐसा था जैसे वह उधार के बारे में पूरी तरह भूल गया हो, जिससे लेखक पैसे नहीं माँग पाया।
🎯 Exam Tip: किसी घटना या व्यवहार का वर्णन करते समय, उसमें शामिल भावनाओं, अपेक्षाओं और वास्तविक प्रतिक्रियाओं को स्पष्ट करें।
प्रश्न 4. "शिकार स्वयं ही आत्म-समर्पण कर देते हैं।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का मतलब है कि जो व्यक्ति उधार देता है (शिकार), वह अंत में खुद ही हार मान लेता है और पैसे वसूलना छोड़ देता है। उधार चुकाने वाला व्यक्ति (शिकारी) पैसे वापस माँगने पर कई तरह के बहाने बनाने में बहुत चतुर होता है। वह कहता है कि घर में बीमारी के कारण उसका बजट बिगड़ गया है, या उसके अपने पैसे किसी परिचित व्यक्ति के पास फँसे हुए हैं, या वह खुद बीमार और कमजोर है। इस तरह के बहाने बनाकर वह उधार चुकाने की माँग करने वाले को पूरी तरह निरुत्तर कर देता है। ऐसी स्थिति में, उधार देने वाला व्यक्ति स्वयं ही चुप हो जाता है और हार मान लेता है, जैसे वह खुद ही 'आत्म-समर्पण' कर दे।
In simple words: उधार देने वाले लोग (शिकार) खुद ही हार मान लेते हैं, क्योंकि उधार लेने वाले (शिकारी) इतने बहाने बनाते हैं कि उनसे पैसे वसूलना नामुमकिन हो जाता है।
🎯 Exam Tip: किसी प्रतीकात्मक कथन को स्पष्ट करते समय, प्रतीकों के अर्थ (जैसे 'शिकार' और 'आत्म-समर्पण') को समझाएं और उन्हें वास्तविक स्थिति से जोड़ें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. “उधार सम्प्रदाय वाले नकदी पर ही जोर नहीं देते।” इस कथन को सोदाहरण बताते हुए शिकार का अहित भी स्पष्ट कीजिए।
Answer: "उधार सम्प्रदाय वाले नकदी पर ही जोर नहीं देते" का अर्थ है कि उधार लेने वाले लोग केवल पैसे उधार नहीं लेते, बल्कि खाने-पीने और घर-गृहस्थी का सामान भी उधार पर लेते हैं। लेखक इसका उदाहरण देते हुए बताते हैं कि जब कोई बड़ा अफसर किसी क्षेत्र में आता है, तो उसका सारा सामान अर्दली और चपरासी जैसे लोग उधार पर लाते हैं। वे दुकानदार से कहते हैं कि साहब एक साथ ही पूरा हिसाब चुका देंगे, चिंता न करें। काफी समय बीतने के बाद भी साहब दुकान पर नहीं आते। दुकानदार शिष्टाचारवश उन्हें याद भी नहीं दिला पाता है और खुद ही 'शिकार' बन जाता है।
ऐसी स्थिति में यदि दुकानदार बड़े साहब के साथ सख्ती से पेश आए या उनके घर पर वसूली के लिए जाए, तो उसका नुकसान हो सकता है। साहब गुस्से में आकर दुकानदार का चालान करवा सकते हैं, मिलावटी सामान रखने का दोषी बताकर जुर्माना लगवा सकते हैं या उसे जेल भी भेज सकते हैं। इस प्रकार, साहब के कठोर व्यवहार के कारण दुकानदार उनका शिकार बन जाता है। साहब ने उससे नकद पैसे उधार नहीं लिए होते, बल्कि सामान लिया होता है और उसे चुकाने में लापरवाही और उपेक्षा दिखाते हैं, जिससे दुकानदार का अहित होता है।
In simple words: उधार लेने वाले अफसर नकदी के बजाय सामान उधार लेते हैं और बाद में नहीं चुकाते। यदि दुकानदार सख्ती करे तो अफसर उसे परेशान कर सकते हैं, जिससे दुकानदार को बहुत नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: किसी कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट करते समय, उदाहरण को विस्तार से समझाएं और उसके प्रभावों (यहाँ 'शिकार का अहित') को स्पष्ट करें।
प्रश्न 2. 'उधार माँगना भी एक कला है' रचना में निहित व्यंग्य पर प्रकाश डालिए।
Answer: 'उधार माँगना भी एक कला है' व्यंग्य-रचना में लेखक ने उन लोगों पर व्यंग्य किया है जो उधार माँगकर या कर्ज लेकर उसे डकार जाने में जरा भी संकोच नहीं करते। उन लोगों का उल्लेख नहीं किया गया है जो ईमानदारी से उधार चुकाने का प्रयास करते हैं। इसमें बताया गया है कि उधार-सम्प्रदाय के लोग बेशर्मी, बेहयाई, मक्कारी और फरेब से भरे होते हैं। वे उधार माँगने के कई तरीके अपनाते हैं। शिकार को फँसाने के लिए चिकनी-चुपड़ी बातें करते हैं, बहाने बनाते हैं और खुशामद या कपटी मित्रता का ढोंग करते हैं।
एक बार उधार मिल जाने पर वे मोटी चमड़ी वाले बनकर चुकाने के नाम पर कई बहाने बनाते हैं, पूरी तरह भूल जाते हैं, और याद दिलाने पर कहते हैं कि "क्या आपका रुपया लेकर मैं भाग जाऊँगा?" इस तरह के जवाब से वे सामने वाले को चुप करा देते हैं। उधार माँगने वाले हर जगह मिल जाते हैं और हर किसी से उधार माँग लेते हैं, परन्तु बेशर्मी से अपनी इज्जत का ढोंग करते हैं। लोग उनके बारे में अच्छी राय नहीं रखते। इस व्यंग्य-लेख में ऐसे ही लोगों का चित्रण कर उन पर तीखा व्यंग्य किया गया है। सामाजिक सहानुभूति और सहयोग की भावना की घोर उपेक्षा करने वालों पर भी करारा व्यंग्य-प्रहार हुआ है।
In simple words: इस व्यंग्य में लेखक उन बेशर्म लोगों का मजाक उड़ाते हैं जो उधार लेकर चुकाते नहीं। वे चालाक होते हैं, बहाने बनाते हैं और अपनी बेइज्जती का नाटक करते हैं, दूसरों की परवाह नहीं करते।
🎯 Exam Tip: किसी व्यंग्य-रचना का विश्लेषण करते समय, व्यंग्य के लक्ष्य, लेखक के उद्देश्य और सामाजिक टिप्पणी को स्पष्ट करें।
उधार माँगना भी एक कला है। लेखक परिचय-
आधुनिक युग में हास्य-व्यंग्य लेखन में विषयगत व्यापकता आ गई है। डॉ. बरसानेलाल चतुर्वेदी ऐसे प्रतिष्ठित हास्य-व्यंग्य लेखक हैं, जिन्होंने हास्य-व्यंग्य के सभी रूपों एवं सभी भेदों का प्रयोग किया है। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में 'हास्य रस' विषय पर पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त की है। 'चाटुकारिता एक कला है', 'बरात की बात' एवं 'श्री मुफ्तानन्दजी से मिलिए' इनकी हास्य-रसपूर्ण सुन्दर रचनाएँ हैं। इन्होंने विचारात्मक शैली में स्मित हास्य की सुन्दर रचना की है।
पाठ-सार
डॉ. बरसानेलाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित 'उधार माँगना भी एक कला है' शीर्षक हास्य-व्यंग्य में जो चित्रण किया गया है, उसका सार इस प्रकार है उधार माँगने की कला का अभ्यास-लेखक बताता है कि बिना पूँजी के कोई व्यापार प्रारम्भ करना हो, तो उधार माँगने की कला का अभ्यास करना चाहिए। परन्तु उधार माँगने का काम इतना आसान नहीं है।
इसके लिए किसी गुरु से ट्रेनिंग लेनी चाहिए और सतत अभ्यास करना चाहिए। शिकार फँसाने में सावधानी-जिस प्रकार देवी पर बलि चढ़ाने से पहले बकरे को पौष्टिक भोजन कराया जाता है, उसी प्रकार उधार माँगने से पूर्व शिकार को चाय-पानी पिलाकर अपने अनुकूल किया जाता है और जैसे ही वह तैयार हो जाये, उसे तुरन्त फाँस लिया जाता है।
कला में प्रवीण होने के उपाय-लेखक बताता है कि उधार माँगने की कला में प्रवीण होने के लिए मान-अपमान की चिन्ता मत करें, उधार लेकर देना भूल जाइये और बहाने बनाने के तरीके अपनाते रहिये। जैसे उधार चुकाना भूल जाइये, कभी उस रास्ते से मत जाइये और यदि मुलाकात हो भी तो उधार चुकाने की बात मत छेड़िए।
उधार माँगने का सम्प्रदाय-उधार माँगने वालों का एक अलग सम्प्रदाय या वर्ग होता है। ऐसे लोग दफ्तरों, विद्यालयों, मिल-कारखानों और जीवन के अन्य क्षेत्रों में मिल जाते हैं। कुछ लोग तो उधार माँगने का शौक रखते हैं, ऋण लेकर मौज में रहना चाहते हैं। इसलिए वे बहाने अनेक-उधार चुकाने पर अनेक बहाने चलते हैं, जैसे घर में बीमारी की वजह से बजट गड़बड़ा गया, मेरा रुपया दूसरों पर फैंस गया, मालिक कुछ दिनों के लिए बाहर गये हैं। इससे भी आगे यह वाक्य कहा जाता है कि क्या मैं आपकी उधार लेकर भाग जाऊँगा? क्या मेरी इतनी भी इज्जत नहीं है? स्वार्थ-सिद्धि की प्रबलता-उधार माँगकर उसे हजम करने वाले यह भी नहीं सोचते हैं कि लोग उनके बारे में क्या कहते हैं। सारे संसार का धन यदि मिल जावे, तो भी वे पूरा कर्ज एक साथ नहीं चुकाना चाहेंगे, क्योंकि उनमें स्वार्थ-सिद्धि की प्रबलता रहती है। वे सदा पाँचों उँगलियाँ घी में रखने का प्रयास करते हैं।
कठिन शब्दार्थ-
उस्ताद = गुरु। शागिर्दी = शिष्यत्व। पौष्टिक = पुष्ट करने वाला। करमकल्ला = पत्तागोभी। स्थितप्रज्ञ = समभाव वाली स्थिति, सबको समान मानने वाली बुद्धि से युक्त व्यक्ति। प्रवास = घर से बाहर, परदेश। सम्प्रदाय = एक वर्ग, समूह। ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत् = ऋण लेकर घी पी ले। आत्मीय = स्नेही व्यक्ति। अर्पित = अर्पण करना, देना। शिष्टाचारवश = सभ्य आचरण के कारण। रियाज = अभ्यास। अनन्त = जिसका अन्त न हो, असीम-असंख्य। पूर्वराग = आरम्भिक प्रेम, मिलन से पूर्व होने वाला प्रेम।
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