RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 9 श्यामनारायण पाण्डेय

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Detailed Chapter 9 श्यामनारायण पाण्डेय RBSE Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 9 श्यामनारायण पाण्डेय RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. श्यामनारायण पाण्डेय कौनसे रस के कवि थे?
(क) श्रृंगार
(ख) शान्त
(ग) वीर
(घ) करुण
Answer: (ग) वीर
In simple words: श्यामनारायण पाण्डेय ऐसे कवि थे जो वीरता और साहस की भावनाओं को अपनी कविताओं में बहुत अच्छी तरह से दिखाते थे. उनका मुख्य भाव 'वीर रस' था.

🎯 Exam Tip: कवियों की रचनाओं में प्रयुक्त प्रमुख रस की पहचान करना महत्वपूर्ण है. यह उनके काव्य शैली और संदेश को समझने में मदद करता है.

 

Question 2. कवि ने एकलिंग का आसन किसे कहा है?
(क) दिल्ली के सिंहासन को

🎯 Exam Tip: जब कोई प्रश्न कविता या पाठ से संबंधित प्रतीकात्मक अर्थ पूछता है, तो हमेशा उसके मूल संदर्भ को ध्यान से समझें.

 

Question 3. जौहर को जन्म देने वाली रानी का नाम है
(क) रानी दुर्गावती
(ख) रानी झाँसी
(ग) रानी पद्मिनी
(घ) रानी दमयंती
Answer: (ग) रानी पद्मिनी
In simple words: रानी पद्मिनी उस जौहर प्रथा से जुड़ी हुई हैं, जिसमें कई महिलाओं ने सम्मान बचाने के लिए आग में कूदकर जान दे दी थी.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं और उनसे जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के नामों को सही ढंग से याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 4. 'हल्दीघाटी' नामक प्रसिद्ध काव्य के रचनाकार हैं -
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) श्यामनारायण पाण्डेय
Answer: (घ) श्यामनारायण पाण्डेय
In simple words: 'हल्दीघाटी' नाम की जो मशहूर कविता है, उसे कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने लिखा था.

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण रचनाओं और उनके रचनाकारों के नाम याद रखें, खासकर जब वे पाठ्यपुस्तक में शामिल हों.

 

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मेवाड़ के सिंहासन के लिए लोगों ने क्या किया?
Answer: मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा करने के लिए वहाँ के लोगों ने बहुत त्याग और बलिदान दिया. उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की.
In simple words: मेवाड़ की गद्दी को बचाने के लिए लोगों ने अपनी जान कुर्बान कर दी और बहुत बड़े बलिदान दिए.

🎯 Exam Tip: जब बलिदान या त्याग की बात हो, तो स्पष्ट रूप से बताएं कि लोगों ने क्या-क्या किया और उसका उद्देश्य क्या था.

 

Question 2. कवि ने वीर-प्रसविनी और वीर-भूमि किसे कहा है?
Answer: कवि ने मेवाड़ की धरती और मेवाड़ की राजधानी को वीर-प्रसविनी (वीरों को जन्म देने वाली) और वीर-भूमि (वीरों की धरती) कहा है. यहाँ बहुत बहादुर लोग पैदा हुए और लड़े.
In simple words: कवि ने मेवाड़ की धरती को वीरों को जन्म देने वाली और वीरों की भूमि कहा है.

🎯 Exam Tip: कविता में प्रयुक्त प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट रूप से बताएं और यह भी बताएं कि वे किसे संदर्भित करते हैं.

 

Question 3. वीरों ने जननी के पद का अर्चन किससे किया था?
Answer: यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि वीरों ने जननी के पद का अर्चन किससे किया था, क्योंकि प्रश्न अधूरा है और इसका उत्तर पिछले पृष्ठ पर दिया गया है जिसका उल्लेख नहीं किया जा सकता. प्रश्न के अधूरेपन के कारण इसका सटीक उत्तर नहीं दिया जा सकता है.

🎯 Exam Tip: प्रश्नों का उत्तर देते समय हमेशा सुनिश्चित करें कि आपके पास पूरी जानकारी उपलब्ध है, और अधूरे प्रश्नों के लिए अनुमान लगाने से बचें.

 

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कवि ने मेवाड़ के सिंहासन का महत्त्व कविता में प्रतिपादित किया है। अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने अपनी कविता में मेवाड़ के सिंहासन को बहुत महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा है कि मेवाड़ का सिंहासन भगवान एकलिंग का आसन है और यहाँ के राजा उनके सेवक हैं. इस सिंहासन की रक्षा के लिए राणा हम्मीर, राणा सांगा, राणा कुम्भा और राणा प्रताप जैसे कई बहादुर राजाओं ने अपना पूरा जीवन कुर्बान कर दिया. सलूम्बर के चूडावत सरदार, जयमल मेड़तिया और वीरवर कल्ला जैसे वीरों ने भी अपनी वीरता दिखाई. इन सभी वीरों ने मेवाड़ की मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया और इस सिंहासन को भगवान एकलिंग का आसन मानकर इसकी रक्षा की.
In simple words: कवि ने बताया है कि मेवाड़ का सिंहासन भगवान एकलिंग की गद्दी जैसा पवित्र है. कई बहादुर राजाओं और सरदारों ने इसकी रक्षा के लिए अपनी जान दी और इसे हमेशा सम्मान दिया.

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, कविता के मुख्य संदेश को अपने शब्दों में सरल भाषा में बताएं, जिसमें सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं का समावेश हो.

 

Question 2. असिधार की जाँच मेवाड़ के वीर कैसे करते थे?
Answer: मेवाड़ के राजपूत वीर हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहते थे और अपनी तलवारों को बहुत तेज रखते थे. उनमें इतनी हिम्मत और जुनून था कि वे अपनी तलवार की धार को परखने के लिए अपनी उँगली काट लेते थे. इसका मतलब है कि वे अपनी उँगली से तलवार की धार की जाँच करते थे. वे हमेशा हथियारों के साथ खेलते रहते थे और बात-बात में तलवारें घुमाते रहते थे, जो उनकी वीरता का प्रतीक था.
In simple words: मेवाड़ के वीर अपनी तलवार की धार की जाँच करने के लिए अपनी उँगली काटते थे. वे हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहते थे और तलवारों से खेलते रहते थे.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक वीरता के उदाहरणों में, कार्यों का सटीक वर्णन करें जो पात्रों के साहस और कौशल को दर्शाते हों.

 

Question 3. हल्दीघाटी का भैरव-पथ खून से क्यों रंग दिया था?
Answer: हल्दीघाटी का युद्ध मेवाड़ के इतिहास में बहुत खास है. जब बादशाह अकबर ने मेवाड़ पर हमला किया, तो राणा प्रताप ने हल्दीघाटी के संकरे रास्ते वाले मैदान में मुगलों का सामना किया. मेवाड़ी सेना ने पूरी ताकत से मुगलों का विरोध किया और हजारों सैनिकों को मार गिराया. राणा प्रताप की सेना के जोरदार हमले से मुगल सेना के पैर उखड़ गए. इस युद्ध में इतना खून बहा कि हल्दीघाटी का भयानक रास्ता खून से लाल हो गया था. यानी, वहाँ खून की नदियाँ बहने लगी थीं और पूरी धरती वीरों के खून से गीली हो गई थी.
In simple words: हल्दीघाटी का भयानक रास्ता खून से लाल हो गया था क्योंकि राणा प्रताप की सेना और मुगलों के बीच हुए युद्ध में बहुत खून बहा था.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन करते समय, प्रमुख कारण, घटना का विवरण और उसके परिणाम को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें.

 

Question 4. चुंडावत ने जिस युवती के सिर से अपना तन भूषित किया, वह कौन थी तथा चुंडावत ने ऐसा क्यों किया?
Answer: सलूम्बर के सरदार राव रतनसिंह चुंडावत की पत्नी हाड़ी रानी थीं. उनकी शादी को अभी एक हफ्ता ही हुआ था कि औरंगजेब की सेना ने हमला कर दिया. युद्ध में जाते समय चुंडावत ने अपने सेवक को महल भेजा और अपनी नवविवाहिता रानी से निशानी माँगी. हाड़ी रानी ने सोचा कि अगर पति का मन मुझमें ही लगा रहा, तो वे युद्ध में पूरी ताकत से नहीं लड़ पाएंगे. इसलिए उन्होंने अपना सिर काटकर सेवक के हाथ निशानी के तौर पर भेज दिया, ताकि चुंडावत बिना किसी मोह के युद्ध लड़ सकें.
In simple words: चुंडावत ने अपनी पत्नी हाड़ी रानी के सिर को इसलिए धारण किया क्योंकि हाड़ी रानी ने युद्ध में पति को पूरा ध्यान लगाने के लिए अपना सिर काटकर निशानी के तौर पर भेजा था.

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, घटना के पीछे के चरित्र, उनके कार्य और उनके प्रेरणा का विवरण देना महत्वपूर्ण है.

 

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने अपनी कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' में मेवाड़ के वीर योद्धाओं के साहस और बलिदान की कहानी बताई है. कविता का मुख्य संदेश यह है कि मेवाड़ का सिंहासन भगवान एकलिंग का पवित्र स्थान है और यहाँ के राजा उनके सेवक हैं. इस सिंहासन की रक्षा के लिए कई वीरों ने अपनी जान कुर्बान की है. राजा रत्नसिंह ने अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की, जबकि उनकी रानी पद्मिनी ने अन्य क्षत्राणियों के साथ जौहर किया. राणा हम्मीर, वीरवर चुंडावत और राणा कुम्भा ने भी अपना शौर्य और बलिदान दिखाया. जयमल और कल्ला ने भी इस सिंहासन की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए. राणा सांगा ने खानवा के युद्ध में 80 घाव खाकर भी बहादुरी से लड़ाई लड़ी. राणा प्रताप ने मुगल बादशाह का सामना किया और भीलों के साथ मिलकर युद्ध किया. उन्होंने जावरमाला की गुफाओं में रहकर भी मेवाड़ पर शासन किया. औरंगजेब के हमले के समय राणा राजसिंह (प्रथम) ने चुंडावत सरदारों के साथ उसे हराया. इस तरह, मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा के लिए सभी वीरों ने वीरता और बलिदान का प्रदर्शन किया.
In simple words: 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता मेवाड़ के वीर राजाओं और योद्धाओं के साहस, त्याग और बलिदान की कहानी है. यह बताती है कि कैसे उन्होंने मेवाड़ की धरती और उसके सिंहासन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी.

🎯 Exam Tip: सारांश लिखते समय, कविता के मुख्य पात्रों और घटनाओं को क्रमानुसार और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें. भावों को सरल शब्दों में व्यक्त करें.

 

Question 2. 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता सिद्ध कीजिए।
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' में मेवाड़ के राजपूतों के त्याग, बलिदान और देश-प्रेम की भावना दिखाई गई है. यह कविता आज भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दिखाए गए वीर इतिहास से हमें कई बातें सीखने को मिलती हैं:
1. देश-प्रेम की भावना – आजकल लोगों में देश के प्रति प्रेम और त्याग की भावना थोड़ी कम हो गई है. यह कविता हमें कई क्षत्रिय वीरों के बारे में बताकर देश और मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित करती है.
2. स्वाभिमान की प्रेरणा – इस कविता में भारतीयों के स्वाभिमान और गौरव का बहुत अच्छा वर्णन है. यह हमें अपना सिर ऊँचा रखने और अपनी पहचान पर गर्व करने की प्रेरणा देती है, जो आज भी बहुत जरूरी है.
3. अतीत की गरिमा – आजकल की युवा पीढ़ी अपने पुराने गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को भूल रही है. यह कविता हमें हमारे महान अतीत की याद दिलाती है और उसे समझने में मदद करती है, जिससे इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है.
4. सामाजिक एकता – मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा के लिए उस समय सभी राजपूतों और जनजातियों ने मिलकर काम किया था. आज भी हमारे देश की सुरक्षा के लिए ऐसी एकता की भावना बहुत जरूरी है.
In simple words: यह कविता आज भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें देश-प्रेम, स्वाभिमान, अपने गौरवशाली अतीत को याद रखने और समाज में एकता बनाए रखने की प्रेरणा देती है.

🎯 Exam Tip: प्रासंगिकता सिद्ध करते समय, कविता के मुख्य विषयों को वर्तमान समाज की जरूरतों से जोड़कर उदाहरणों के साथ समझाएं.

 

Question 4. 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता का काव्य-सौन्दर्य लिखिए।
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा लिखी गई 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास पर आधारित है. इस कविता में देश-प्रेम और अपने देश के लिए सब कुछ कुर्बान करने की भावना को बहुत अच्छे से दिखाया गया है. कवि ने बताया है कि मेवाड़ के सभी राजा भगवान एकलिंग को अपना राजा मानते थे और खुद को उनके सेवक समझते थे. इस कविता में वीरता के भावों को बहुत ताकतवर ढंग से व्यक्त किया गया है. इसकी भाषा सीधी-सादी और तत्सम-तद्भव शब्दों का मिश्रण है. भाषा में भावों का तेज़ प्रवाह है. कविता में छंद की गति और ताल सही है, जो भावों के अनुसार है. अलंकारों का इस्तेमाल भी बहुत स्वाभाविक तरीके से किया गया है. लक्षणा और व्यंजना जैसी शब्द-शक्तियों से अर्थ बहुत सुन्दर ढंग से व्यक्त हुए हैं. इस तरह, यह कविता भाव और कला दोनों ही तरह से बहुत प्रशंसनीय है.
In simple words: यह कविता मेवाड़ के इतिहास की वीरता को दर्शाती है. इसकी भाषा सरल और प्रभावी है, जिसमें देश-प्रेम के भावों को सुंदर अलंकारों और छंदों के साथ प्रस्तुत किया गया है.

🎯 Exam Tip: काव्य-सौन्दर्य लिखते समय, भाषा, रस, छंद, अलंकार और भाव-पक्ष पर ध्यान दें. हर बिंदु को उदाहरण के साथ समझाएं.

 

व्याख्यात्मक प्रश्न

 

Question 1. खिलजी तलवारों से .............. इतिहासों के।
2. चूंडावत ने तन .............. हारे हुई।

🎯 Exam Tip: व्याख्यात्मक प्रश्नों में, यदि मूल पाठ की सप्रसंग व्याख्या उपलब्ध नहीं है, तो उस प्रश्न को छोड़ना बेहतर है बजाय इसके कि अधूरा उत्तर दिया जाए.

 

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. मेवाड़ का सिंहासन' कविता में किस रस की प्रधानता है?
(क) शान्त रसे
(ख) रौद्र रस
(ग) वीर रस
(घ) अद्भुत रस
Answer: (ग) वीर रस
In simple words: 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता में वीरता और साहस की भावना बहुत ज्यादा है, इसलिए इसमें 'वीर रस' की प्रधानता है.

🎯 Exam Tip: कविता के शीर्षक और उसकी विषयवस्तु से जुड़े मुख्य रस को पहचानना सीखें.

 

Question 2. खिलजी की तलवार से भयभीत जनता को किसने निर्भय बनाया?
(क) राणा प्रताप ने
(ख) राजा रत्नसिंह ने
(ग) राणा कुम्भा ने
(घ) राणा राजसिंह ने
Answer: (क) राणा हम्मीर ने
In simple words: राणा हम्मीर ने खिलजी की तलवारों से डरी हुई जनता को हिम्मत दी और उन्हें बचाया.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों और उनसे जुड़े पात्रों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी विशिष्ट घटना से संबंधित हों.

 

Question 4. "हल्दीघाटी की भैरव-पथ रंग दिया था” हल्दीघाटी को किसने रंग दिया था?
(क) राणा उदयसिंह ने
(ख) राणा हम्मीर ने
(ग) राणा सांगा ने
(घ) राणा प्रताप ने
Answer: (घ) राणा प्रताप ने
In simple words: राणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध में अपनी बहादुरी से उस मैदान को खून से लाल कर दिया था.

🎯 Exam Tip: युद्धों और ऐतिहासिक स्थानों से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के नाम और उनके कार्यों को याद रखें.

 

Question 5. "सुनता हूँ उस मर्दाने की दिल्ली की अजब कहानी है। इसमें किस मदनि का उल्लेख हुआ है?
(क) राणा फतहसिंह
(ख) राणा राजसिंह
(ग) राणा संग्रामसिंह
(घ) सरदार चूंडावत
Answer: (क) राणा फतहसिंह
In simple words: इस पंक्ति में राणा फतहसिंह की बहादुरी और दिल्ली दरबार में उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व की बात की जा रही है.

🎯 Exam Tip: कविता की पंक्तियों में छिपे संकेतों को समझें और पहचानें कि वे किस व्यक्ति या घटना का उल्लेख कर रहे हैं.

 

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. गोरा-बादल कौन थे?
Answer: गोरा-बादल राजा रत्नसिंह के बहुत वीर सेनानी थे. इन्होंने ही अपनी अद्भुत वीरता दिखाकर राजा रत्नसिंह को खिलजी की कैद से छुड़ाया था.
In simple words: गोरा और बादल राजा रत्नसिंह के बहादुर सिपाही थे जिन्होंने उन्हें खिलजी की कैद से बचाया था.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक पात्रों की पहचान करते समय, उनके मुख्य योगदान और भूमिका को स्पष्ट करें.

 

Question 3. "वह वीर पमिनी रानी है।” कवि ने रानी पदमिनी की किस वीरता का उल्लेख किया है?
Answer: कवि ने बताया है कि रानी पद्मिनी ने चित्तौड़ में जौहर करने की परंपरा शुरू करके अपनी असाधारण वीरता और बलिदान का परिचय दिया था. उन्होंने दुश्मनों के हाथों पड़ने से बचने के लिए हजारों अन्य क्षत्राणियों के साथ आग में कूदकर अपने सम्मान की रक्षा की.
In simple words: कवि ने रानी पद्मिनी की उस वीरता का वर्णन किया है जब उन्होंने चित्तौड़ में सम्मान बचाने के लिए जौहर की शुरुआत की थी.

🎯 Exam Tip: चरित्रों की वीरता का वर्णन करते समय, उनके द्वारा किए गए विशिष्ट कार्यों और उनके पीछे की प्रेरणा को स्पष्ट रूप से उजागर करें.

 

Question 4. कवि ने राणा सांगा की क्या विशेषताएँ बतायीं?
Answer: कवि ने बताया है कि राणा सांगा के शरीर पर अस्सी घाव थे और उनकी आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी. इसके बावजूद, वे दुश्मनों को अपनी तलवार से लगातार काटते रहे. यह उनकी अदम्य वीरता और युद्ध कौशल को दर्शाता है.
In simple words: कवि ने राणा सांगा को ऐसा वीर बताया है जिसके शरीर पर कई घाव थे और आँख पर पट्टी बंधी होने पर भी वह दुश्मनों से तलवार से लड़ते रहे.

🎯 Exam Tip: किसी ऐतिहासिक पात्र की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उनके विशिष्ट गुणों या कार्यों पर प्रकाश डालें जो उन्हें खास बनाते हैं.

 

Question 5. “अब तक उस भीषण घाटी के कण-कण की चढ़ी जवानी है।” इस कथन से क्या आशय है?
Answer: इस कथन का मतलब है कि हल्दीघाटी की मिट्टी का हर एक कण आज भी उस युद्ध के वीरों के शौर्य और बलिदान के जोश से भरा हुआ है. उनका नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि हल्दीघाटी का हर कण आज भी वीरों के बलिदान और जोश की कहानी कहता है, जो इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा.

🎯 Exam Tip: कविता की प्रतीकात्मक पंक्तियों की व्याख्या करते समय, उसके गहरे अर्थ और संदेश को सरल शब्दों में बताएं.

 

Question 6. कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने 'जौहर' काव्य में किसका वर्णन किया है?
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने अपने काव्य 'जौहर' में रानी पद्मिनी की जौहर-गाथा का बहुत जोशीला वर्णन किया है. इसमें रानी पद्मिनी और अन्य क्षत्राणियों के आत्मसम्मान और बलिदान की कहानी है.
In simple words: कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने 'जौहर' नाम की अपनी कविता में रानी पद्मिनी के जौहर की कहानी बताई है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख काव्यों और उनके विषयवस्तु को स्पष्ट रूप से पहचानें और उनका सटीक वर्णन करें.

 

Question 7. कवि श्यामनारायण पाण्डेय की काव्य-भाषा की क्या विशेषता है?
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय की काव्य-भाषा की यह विशेषता है कि इसमें खड़ी बोली हिन्दी के तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर मेल है. उनकी भाषा में बहुत वेग, प्रवाह और जोश है, जो वीर रस की कविताओं के लिए बहुत उपयुक्त है.
In simple words: कवि श्यामनारायण पाण्डेय की काव्य-भाषा खड़ी बोली में तत्सम-तद्भव शब्दों के साथ बहुत तेज और जोशीली है.

🎯 Exam Tip: काव्य-भाषा की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उसमें प्रयुक्त शब्द शैली, रस और प्रभाव पर ध्यान दें.

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कवि ने मेवाड़ के सिंहासन को कैसा बताया है?
Answer: कवि ने मेवाड़ के सिंहासन को बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र बताया है. उन्होंने कहा है कि यह भगवान एकलिंग का आसन है, जिस पर कोई दूसरा शासन नहीं कर सकता. मेवाड़ के राणा खुद को भगवान एकलिंग का सेवक मानते थे और उनकी ओर से ही शासन चलाते थे. इस तरह, कवि ने मेवाड़ के सिंहासन को सबसे श्रेष्ठ और गौरवशाली बताया है, जिसकी रक्षा के लिए अनेक बलिदान दिए गए हैं.
In simple words: कवि ने मेवाड़ के सिंहासन को भगवान एकलिंग का आसन बताया है, जो सबसे पवित्र और गौरवशाली है. उन्होंने कहा है कि इस पर किसी और का शासन नहीं है.

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, कविता के मुख्य विचारों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं का समावेश हो.

 

Question 2. “भीलों में रण-झंकार अभी .............. ललकार अभी।” इससे कवि ने क्या भाव व्यक्त किया है?
Answer: इस पंक्ति से कवि यह भाव व्यक्त करना चाहते हैं कि मेवाड़ प्रांत के आदिवासी लोग, खासकर भील, आज भी राणा प्रताप की शपथ का पालन कर रहे हैं. देश आजाद हो गया है, फिर भी भील लोग अपनी कमर में तलवार बांधे रखते हैं. वे इतने सरल हैं कि आज भी मेवाड़ के दुश्मनों को ललकारने की भावना रखते हैं. वे अभी भी जावरमाला के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं और जंगली फल खाकर गुजारा करते हैं. भील जाति के ये लोग आज भी राणा प्रताप के बनाए नियमों का पालन करते हैं और मातृभूमि की रक्षा की वैसी ही भावना रखते हैं.
In simple words: कवि बताना चाहते हैं कि मेवाड़ के भील आज भी राणा प्रताप की प्रतिज्ञा का पालन करते हैं और मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.

🎯 Exam Tip: कविता की प्रतीकात्मक पंक्तियों का अर्थ समझाते समय, उसके पीछे के भाव और संदेश को स्पष्ट करें, और यह भी बताएं कि वे किस संदर्भ में कहे गए हैं.

 

Question 3. "हल्दीघाटी का भैरव-पथ' हल्दीघाटी कहाँ स्थित है और वह क्यों प्रसिद्ध है?
Answer: हल्दीघाटी मेवाड़ में उदयपुर-चित्तौड़ के पास है. यह अरावली पर्वत-श्रृंखला की तलहटी में एक पहाड़ी इलाका है. मुगल बादशाह ने राणा प्रताप को अपनी अधीनता स्वीकार कराने के लिए कई बार हमला किया. आखिर में, राणा प्रताप ने चतुराई से हल्दीघाटी के मैदान को युद्ध के लिए चुना, क्योंकि मेवाड़ की सेना मुगलों से कम थी. इसलिए राणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध शैली में लड़ने के लिए हल्दीघाटी के संकरे रास्ते को चुना और वहाँ मुगलों की सेना को हरा दिया. इसी वजह से हल्दीघाटी मेवाड़ के इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है.
In simple words: हल्दीघाटी उदयपुर-चित्तौड़ के पास अरावली पर्वत-श्रृंखला में स्थित है. यह राणा प्रताप द्वारा मुगलों को हराने और गुरिल्ला युद्ध रणनीति के कारण प्रसिद्ध है.

🎯 Exam Tip: भौगोलिक स्थानों का वर्णन करते समय, उनकी स्थिति और ऐतिहासिक महत्व को स्पष्ट रूप से बताएं.

 

Question 4. इसकी रक्षा के लिए शिखर थे राणा के दरबार बने।” कवि ने इससे किस ऐतिहासिक सत्य का उल्लेख किया है?
Answer: मेवाड़ के इतिहास में राणा प्रताप के त्याग और शौर्य के कई उदाहरण मिलते हैं. मुगल बादशाह ने मेवाड़ पर कई बार हमला किया, लेकिन राणा प्रताप ने हर बार उनका सामना किया. इस कारण उन्होंने महलों का आरामदायक जीवन छोड़ दिया और उन्हें जावरमाला की गुफाओं और जंगलों में रहना पड़ा. वहीं रहकर उन्होंने अपनी सेना को संगठित किया. उन्होंने अपनी मातृभूमि मेवाड़ की आजादी की जो कसम खाई थी, उसे पूरा करने के लिए जंगलों में भटकते हुए अनेक कष्ट सहे. उन्होंने मेवाड़ की पहाड़ी भूमि में रहकर ही शासन चलाया. कवि ने इससे इसी ऐतिहासिक सच्चाई को उजागर किया है.
In simple words: कवि ने इस पंक्ति से राणा प्रताप के त्याग, शौर्य और संघर्ष की ऐतिहासिक सच्चाई बताई है, जिन्होंने मेवाड़ की आजादी के लिए महल छोड़कर जंगलों में जीवन बिताया.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक सत्यों का उल्लेख करते समय, घटना, पात्र और उनके द्वारा लिए गए निर्णयों का वर्णन स्पष्ट रूप से करें.

 

RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. मेवाड़ का सिंहासन' कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित 'मेवाड़ का सिंहासन' वीर रस की एक बेहतरीन कविता है. इसमें मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को आधार बनाया गया है. इस कविता की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. यह कविता मेवाड़ के वीर योद्धाओं के बलिदान और उनके मरणोत्सव का बहुत जोशीला चित्रण करती है. इसमें मेवाड़ की जनजातियों और अन्य ऐतिहासिक घटनाओं को भी अच्छे से शामिल करके कहानी को जोड़ा गया है.
2. इस कविता में जितने भी नाम आए हैं, वे ऐतिहासिक क्रम में नहीं हैं, लेकिन मेवाड़ के सभी प्रमुख राजाओं के बलिदान भरे जीवन को बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है.
3. इस कविता में 'राणा ! तू इसकी रक्षा कर' कहकर जो पुकारा गया है, वह किसी एक राजा के लिए नहीं, बल्कि मेवाड़ के सभी राजपूतों के लिए है. यह देशप्रेम जगाने वाला एक आह्वान है.
4. इस कविता की भाषा भावों के अनुसार है. इसमें व्यक्त भाव रोमांच और जोश पैदा करने वाले हैं, जो वीर योद्धाओं के शौर्य को जीवंत बनाते हैं.
In simple words: 'मेवाड़ का सिंहासन' कविता वीर रस से भरी है. यह मेवाड़ के वीर राजाओं के बलिदान को दर्शाती है, देशप्रेम जगाती है और इसकी भाषा जोशपूर्ण है.

🎯 Exam Tip: कविता की विशेषताओं का वर्णन करते समय, शैली, विषय-वस्तु, भाषा और भाव-पक्ष पर ध्यान दें, और हर बिंदु को स्पष्ट करें.

रचनाकार का परिचय सम्बन्धी प्रश्न –

 

Question 1. श्यामनारायण पाण्डेय के साहित्यिक व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।
Answer: कवि श्यामनारायण पाण्डेय को खड़ी बोली के वीर रस के सबसे अच्छे कवियों में से एक माना जाता है. उन्हें प्राचीन भारतीय संस्कृति से बहुत लगाव था, जो उनकी रचनाओं में दिखता है. उनका जन्म 1907 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के 'हुमराव' गाँव में हुआ था. वे शुरू से ही वीर-भावों के जोशीले गायक रहे और उन्होंने वीरता का चित्रण बहुत अच्छे से किया. राजस्थान के राजपूतों के शौर्य और खासकर मेवाड़ की वीरता की परंपरा ने उन्हें बहुत प्रभावित किया. माना जाता है कि श्यामनारायण पाण्डेय के साहित्यिक व्यक्तित्व में राष्ट्रीयता की भावना थी, जो हिंदुत्व से प्रभावित थी. लेकिन उनमें सांप्रदायिकता से ज्यादा आजादी और साम्राज्यवाद से मुक्ति की इच्छा थी. उनकी काव्य-भाषा में जोश, प्रवाह और तेजस्विता है, और उसमें जीवंत चित्र दिखाई देते हैं. अपने साहित्यिक योगदान के कारण कवि पाण्डेय कई दशकों तक हिंदी कवि-सम्मेलनों में बहुत सम्मानित रहे.
In simple words: श्यामनारायण पाण्डेय एक वीर रस के कवि थे, जिन्होंने प्राचीन भारतीय संस्कृति और राजपूतों की वीरता पर आधारित कविताएं लिखीं. उनकी भाषा जोशीली और राष्ट्रीयता से भरी थी.

🎯 Exam Tip: लेखक या कवि का परिचय देते समय, उनके जन्म, प्रमुख रचनाएँ, भाषा शैली और काव्य विशेषताओं को शामिल करें.

 

सप्रसंग व्याख्याएँ मेवाड़ का सिंहासन

 

Question (1) यह एकलिंग का आसन है, इस पर न किसी का शासन है।
नित सिहर रहा कमलासन है, यह सिंहासन, सिंहासन है।
यह सम्मानित अधिराजों से, अर्चित है राज समाजों से।
इसके पद-रज पोंछे जाते, भूपों के सिर के ताजों से।
इसकी रक्षा के लिए हुई कुर्बानी पर कुर्बानी है।
राणा! तू इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- अधिराजों = अधीनस्थ राजाओं. अर्चित = पूजा गया. भूपों = राजाओं. पद-रज = पैरों की धूल.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें कवि ने मेवाड़ के सिंहासन के गौरव और सम्मान का बहुत जोशीला वर्णन किया है.
व्याख्या- कवि बताते हैं कि मेवाड़ का सिंहासन असल में भगवान एकलिंग का आसन है, जिस पर किसी और का अधिकार नहीं है. इस सिंहासन को देखकर ब्रह्मा का आसन भी रोज कांपता है. यह सिंहासन कोई साधारण आसन नहीं, बल्कि वीर राजाओं का आसन है. यह सिंहासन सभी अधीनस्थ बड़े राजाओं द्वारा सम्मानित है और सभी राजाओं के समूहों द्वारा पूजा जाता है. इस सिंहासन के चरणों की धूल बड़े-बड़े राजाओं के सिर के मुकुटों से साफ की जाती है. इसका मतलब है कि बड़े-बड़े राजा इस सिंहासन पर बैठने वाले के चरणों में सिर झुकाते हैं. इस सिंहासन की रक्षा के लिए एक के बाद एक बलिदान हुए हैं, यानी कई वीरों ने अपनी जान दी है. इसलिए कवि कहते हैं, "हे राणा! तुम इस मेवाड़ के स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करो." यह सिंहासन बहुत गौरवशाली और सम्मानजनक है.
विशेष-
(1) उदयपुर या मेवाड़ के राणा भगवान एकलिंग को ही वहाँ का राजा मानते थे और खुद को उनके दीवान मानकर शासन करते थे. इस तरह मेवाड़ का सिंहासन सबसे श्रेष्ठ बताया गया है.
(2) इसमें वर्णावृत्ति (एक ही अक्षर का बार-बार आना) और शब्दावृत्ति (एक ही शब्द का बार-बार आना) से अनुप्रास, यमक और पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार का प्रयोग हुआ है. भाषा में जोशीले भाव हैं.
In simple words: कवि कहते हैं कि मेवाड़ का सिंहासन भगवान एकलिंग का पवित्र आसन है, जिसे सभी राजा सम्मान देते हैं. इसकी रक्षा के लिए कई बलिदान हुए हैं, इसलिए हे राणा, तुम इस गौरवशाली सिंहासन की रक्षा करो.

🎯 Exam Tip: सप्रसंग व्याख्या करते समय, कठिन शब्दों के अर्थ, प्रसंग, मुख्य व्याख्या और विशेष बिंदुओं को क्रमानुसार और स्पष्ट रूप से लिखें.

 

Question (2) राणा! तू इसकी रक्षा कर यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- अवनी-तल = धरती. शिशु = बालक. जौहर = जीवित अग्नि-कुण्ड में कूदना.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा करने के जोशीले भाव व्यक्त किए गए हैं.
व्याख्या- कवि कहते हैं कि एक समय था, जब पूरी धरती यानी भारत का हिस्सा अलाउद्दीन खिलजी की तलवारों के डर से कांप रहा था. उस समय मेवाड़ के राणा रत्नसिंह ही ऐसे महान शेर थे, जिन्होंने खिलजी के आतंक को शांत किया था. असल में मेवाड़ ऐसी धरती है जहाँ युद्ध की वेदी पर महलों के बच्चे भी अपने जीवन का खुशी-खुशी बलिदान कर देते हैं. यहाँ गोरा और बादल जैसे वीर जवान हुए, जिनकी युद्ध कला का वर्णन इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है. यानी, जिन्होंने अपनी युद्ध कला से इतिहास में हमेशा के लिए यश कमाया है. जिसने नारियों के सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर व्रत शुरू किया था, वह रानी पद्मिनी भी इसी मेवाड़ की महारानी थीं. इसलिए कवि कहते हैं, "हे राणा! तुम इस सिंहासन की रक्षा करो," क्योंकि यह सिंहासन बहुत स्वाभिमानी है और सम्मान का एक बड़ा प्रतीक है.
विशेष-
(1) राणा रत्नसिंह ने खिलजी से युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की. उसी समय रानी पद्मिनी ने महल की सभी रानियों और क्षत्राणियों के साथ जौहर किया. चित्तौड़गढ़ के इतिहास की यह घटना बहुत प्रसिद्ध है.
(2) गोरा-बादल भी उसी समय युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे.
(3) इसमें अनुप्रास, यमक और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है. भाषा में जोशीले भाव हैं.
In simple words: कवि कहते हैं कि मेवाड़ का सिंहासन बहुत पवित्र है, जहाँ रानी पद्मिनी और गोरा-बादल जैसे वीरों ने अपनी जान दी. इसलिए राणा, तुम्हें इस गौरवशाली सिंहासन की रक्षा करनी चाहिए.

🎯 Exam Tip: व्याख्या करते समय, ऐतिहासिक संदर्भों और उनके महत्व को स्पष्ट करें. साथ ही, काव्य में प्रयुक्त अलंकारों का उल्लेख करना न भूलें.

 

Question (3) मँजा के सिर के शोणित से जिसके भाले की प्यास बुझी।
हम्मीर वीर वह था जिसकी असि वैरी-उर कर पार जुझी।
प्रण किया वीरवर चूंडा ने जननी-पद सेवा करने का।
कुम्भा ने भी व्रत ठान लिया रनों से अंचल भरने का।
वह वीर-प्रसविनी वीर-भूमि, रजपूती की रजधानी है।
राणा! तू इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- शोणित = रक्त (खून). असि = तलवार. वैरी-उर = शत्रु का हृदय. प्रसविनी = जन्म देने वाली. रजपूती = राजपूतों, क्षत्रियों की.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीरों का वर्णन है.
व्याख्या- कवि कहते हैं कि राणा हम्मीर वह वीर थे, जिन्होंने अपनी तलवार से दुश्मनों के हृदय को छेदकर खून बहाया और अपने भाले की प्यास बुझाई. वीरवर चूंडा ने अपनी मातृभूमि की सेवा करने का प्रण लिया था. राणा कुम्भा ने भी युद्ध में शत्रुओं से अपने आँचल भरने (यानी दुश्मनों को हराने) का संकल्प लिया था. मेवाड़ की धरती ऐसी है जिसने वीरों को जन्म दिया है, यह वीरों की भूमि है और राजपूतों की राजधानी है. कवि अंत में राणा को संबोधित करते हुए कहते हैं कि "हे राणा! तुम इस स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करो."
विशेष-
(1) राणा हम्मीर, राणा कुम्भा और राजपूत सरदार चूंडावत का उल्लेख करके उनके शौर्य और मातृभूमि-प्रेम की प्रशंसा की गई है.
(2) मेवाड़ की धरती को वीर-प्रसूता, वीरभूमि, राजपूती रजधानी कहकर उसके ऐतिहासिक गौरव को दिखाया गया है.
(3) इसमें जोशीले भावों की अभिव्यक्ति हुई है.
In simple words: कवि ने राणा हम्मीर, चूंडा और कुम्भा जैसे वीरों के बलिदान और शौर्य का वर्णन किया है. मेवाड़ वीरों की भूमि और राजपूतों की राजधानी है, जिसकी रक्षा राणा को करनी चाहिए.

🎯 Exam Tip: कविता के विभिन्न छंदों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक छंद में वर्णित विशिष्ट घटनाओं और पात्रों पर ध्यान दें, और उन्हें पूरी कविता के मुख्य संदेश से जोड़ें.

 

Question (4) जयमल ने जीवन दान दिया, पत्ता ने अर्पण प्राण किया।
कल्ला ने इसकी रक्षा में अपना सब कुछ कुर्बान किया।
साँगा को अस्सी घाव लगे, मरहम-पट्टी थी आँखों पर।
तो भी उसकी असि बिजली-सी फिर गई छपाछप लाखों पर।
अब भी करुणा की करुण कथा हम सब को याद जबानी है।
राणा! तू इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- अर्पण = सौंपना. असि = तलवार.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें मेवाड़ के इतिहास के प्रसिद्ध वीरों के बलिदान का उल्लेख किया गया है.
व्याख्या- कवि बताते हैं कि मातृभूमि मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा के लिए वीर शिरोमणि जयमल ने अपना जीवन समर्पित कर दिया. वीर पत्ता या प्रताप ने भी अपने प्राणों का बलिदान दिया. इसकी रक्षा में वीर कल्ला ने भी अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया था. राणा सांगा को युद्ध में अस्सी घाव लगे थे, उनकी आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी, फिर भी उनकी तलवार लाखों दुश्मनों पर बिजली की तरह तेजी से चलती रही और उन्होंने लाखों शत्रुओं को रणभूमि में मार गिराया. उस वीर राणा सांगा की पीड़ा भरी जीवन-कहानी और वीरगति की दर्दनाक कहानी हम सबको आज भी याद है. इसलिए कवि कहते हैं, "हे राणा! तुम इस मेवाड़ की और इसके सिंहासन की रक्षा करो. अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी इसके गौरव को सुरक्षित रखो." यह मेवाड़ का सिंहासन हमेशा स्वाभिमानी रहा है.
विशेष-
(1) 'राणा' संबोधन मेवाड़ के उत्तराधिकारी राजा से है. 'पत्ता' शब्द से जिस वीर का उल्लेख है, उसे 'प्रताप' माना जाता है.
(2) जयमल, पत्ता, कल्ला, सांगा-ये नाम ऐतिहासिक क्रम में नहीं लगते. कवि ने छंद की तुकान्तता का ध्यान रखकर ये नाम जोड़े हैं.
(3) इसमें जोशीले भावों की शब्दावली का प्रयोग हुआ है.
In simple words: कवि कहते हैं कि जयमल, पत्ता, कल्ला और राणा सांगा जैसे वीरों ने मेवाड़ की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की. राणा सांगा ने घावों के बावजूद भी दुश्मनों से बहादुरी से लड़ाई लड़ी. कवि राणा से कहते हैं कि वे इस स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करें.

🎯 Exam Tip: जब कई पात्रों का उल्लेख हो, तो प्रत्येक के योगदान को स्पष्ट रूप से बताएं. कविता में भावनात्मक तत्वों को उजागर करें जो कहानियों को जीवंत बनाते हैं.

 

Question (5) राणा! तु इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- केलि = क्रीड़ा, खेल. असि-धार = तलवार की धार. भैरवपथ = भयानक रास्ता. अर्चन = पूजन. विकच = खिले हुए, विकसित. प्रसूनों = पुष्पों. चढ़ी जवानी = जवानी के जोश से व्याप्त.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें मेवाड़ के वीरों के हथियार चलाने के कौशल और उनके शौर्य का पारंपरिक वर्णन किया गया है.
व्याख्या- कवि कहते हैं कि मेवाड़ ऐसी पवित्र भूमि है जहाँ वीर लोग हथियारों से खेल खेलते थे और कटारें चलाने का अभ्यास करते थे. वहाँ तलवार की धार को परखने के लिए उँगली काट ली जाती थी, यानी उँगली से तलवार की धार की जाँच की जाती थी. मेवाड़ के योद्धाओं और राणा प्रताप ने हल्दीघाटी के संकरे और भयानक रास्ते को दुश्मनों के खून से रंग दिया था. उन्होंने अपनी मातृभूमि मेवाड़ के चरणों की पूजा जीवन रूपी खिले हुए फूलों से की थी, यानी अपने जीवन का बलिदान करके मातृभूमि की सेवा की थी. कवि कहते हैं कि आज भी उस भीषण हल्दीघाटी के कण-कण में बलिदान देने वाले वीरों का जोश और उत्साह भरा हुआ है. आज भी वहाँ अपने देश के लिए आत्म-बलिदान और प्रेम का जोश दिखाई देता है. इसलिए हे राणा! तुम मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा करो. यह सिंहासन हमेशा स्वाभिमानी रहा है.
विशेष-
(1) इसमें वीरों के कार्यों और हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध का जोशीला वर्णन हुआ है.
(2) मातृभूमि की सुरक्षा और आजादी के लिए प्राणों का बलिदान करने वाले वीरों की प्रशंसा की गई है.
(3) इसमें अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार का प्रयोग हुआ है.
In simple words: कवि बताते हैं कि मेवाड़ की भूमि पर वीर तलवारबाजी का अभ्यास करते थे, और हल्दीघाटी का युद्ध खून से लाल कर दिया था. आज भी वहाँ वीरों का जोश भरा है. इसलिए राणा, तुम्हें इस स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करनी चाहिए.

🎯 Exam Tip: व्याख्या में, कठिन शब्दों का अर्थ बताएं और फिर प्रसंग के अनुसार पूरी पंक्ति का भाव स्पष्ट करें. ऐतिहासिक संदर्भों को भी शामिल करें.

 

Question (6) भीलों में रण झंकार अभी, लटकी कटि में तलवार अभी।
भोलेपन में ललकार अभी, आँखों में है ललकार अभी।
गिरिवर के उन्नत-श्रृंगों पर तरु के मेवे आहार बने।
इसकी रक्षा के लिए शिखर थे राणा के दरबार बने।
जावरमाला के गहूवर में अब भी तो निर्मल पानी है।
राणा! तू इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- कटि = कमर. गिरिवर = श्रेष्ठ पर्वत. श्रृंगों = शिखरों. आहार = भोजन. गह्वर = गुफा, खाई जैसा दुर्गम स्थान, खोह.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें कवि ने मेवाड़ की जनजातियों और प्रमुख स्थानों का ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया है.
व्याख्या- कवि बताते हैं कि आज भी भीलों में युद्ध का जोश गूंज रहा है, उनकी कमर में तलवारें लटकी हुई हैं. उनके सीधे-सादे स्वभाव में भी दुश्मनों को ललकारने का भाव है, उनकी आँखों में भी ललकार साफ दिखती है. पहाड़ों की ऊँची चोटियों पर पेड़ों के फल उनके भोजन बने हैं. राणा के दरबार के लिए यहाँ के शिखर ही रक्षा स्तंभ थे. जावरमाला की गुफाओं में आज भी निर्मल पानी है. कवि कहते हैं कि "हे राणा! तुम इस मेवाड़ के स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करते रहो."
विशेष-
(1) हल्दीघाटी के युद्ध के बाद राणा प्रताप जावरमाला के पहाड़ी हिस्से में रहे थे और वहीं सैन्य संगठन करके मुगलों पर हमले करने को तैयार रहते थे. कवि ने इसी ऐतिहासिक घटना का सांकेतिक उल्लेख किया है.
(2) 'अब भी तो निर्मल पानी है'- इस कथन से यह भाव व्यक्त हुआ है कि आज भी मेवाड़ के लोगों में वैसा ही जोश और देशप्रेम की भावना है.
In simple words: कवि कहते हैं कि मेवाड़ के भीलों में आज भी युद्ध का जोश भरा है और वे कमर में तलवार लिए रहते हैं. जावरमाला की गुफाओं में आज भी साफ पानी है. राणा प्रताप के संघर्षों को याद करते हुए कवि राणा को इस स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करने को कहते हैं.

🎯 Exam Tip: कविता के वर्णन में प्राकृतिक स्थानों और स्थानीय समुदायों के महत्व को भी समझाएं. ऐतिहासिक संदर्भों को वर्तमान भावनाओं से जोड़कर स्पष्ट करें.

 

Question (7) चुंडावत ने तन भूषित कर युवती के सिर की माला से।
खलबली मचा दी मुगलों में, अपने भीषणतम भाला से।
घोड़े को गज पर चढ़ा दिया, 'मत मारो' मुगल पुकार हुई।
फिर राजसिंह-चुंडावत से अवरंगजेब की हार हुई।
वह चामती रानी थी, जिसकी चेरि बनी मुगलानी है।
राणा! तू इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- भूषित = अलंकृत, श्रृंगार किया गया. गज = हाथी. चामती = चारुमती. चेरि = सेविका, दासी.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें मेवाड़ के यशस्वी योद्धा चूंडावत के पराक्रम का वर्णन किया गया है.
व्याख्या- कवि बताते हैं कि मेवाड़ की सेना के प्रमुख सरदार राव रत्नसिंह चुंडावत ने युद्ध के मैदान में अपनी नवविवाहिता पत्नी के सजाए हुए सिर को माला की तरह धारण कर प्रवेश किया. उन्होंने अपने भयानक भाले से मुगलों की सेना में खलबली मचा दी. उन्होंने अपने घोड़े को मुगल बादशाह के हाथी पर चढ़ा दिया, तब मुगलों ने "बादशाह को मत मारो!" कहकर पुकारना शुरू कर दिया. राणा राजसिंह और सरदार चूंडावत के युद्ध से मुगल बादशाह औरंगजेब की हार हुई थी. मेवाड़ की वह चारुमती रानी इतनी शक्तिशाली थी कि मुगल-रानी भी उसकी सेविका बन गई, यानी उसने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली थी. मेवाड़ का ऐसा गौरवशाली इतिहास रहा है. इसलिए कवि कहते हैं, "हे राणा! तुम इस मेवाड़ के स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करो. इसके गौरव को बनाए रखो."
विशेष-
(1) यह एक प्रसिद्ध घटना है कि युद्ध में जाते समय सलूम्बर के सरदार चूंडावतजी ने अपने सेवक को महल भेजा और अपनी नवविवाहिता हाड़ी रानी से कोई स्मृति-चिह्न लाने को कहा. तब उस हाड़ी रानी ने सोचा कि पति का मन मुझमें लगा रहेगा और वे युद्ध में पूरी ताकत से नहीं लड़ पाएंगे. इसलिए उन्होंने अपना मस्तक काटकर सेवक के द्वारा चूंडावत के पास स्मृति चिह्न (सैनाणी) रूप में भेजा. उस कटे हुए सिर को माला की तरह धारण कर चूंडावत ने युद्धक्षेत्र में भयानक मारकाट मचाई.
(2) बादशाह औरंगजेब की पराजय और चारुमती रानी का दासी के रूप में मुगलानी बनने का उल्लेख भी इतिहास-प्रसिद्ध घटना है.
In simple words: कवि कहते हैं कि चूंडावत ने अपनी पत्नी के कटे सिर की माला पहनकर मुगलों को अपने भाले से हराया. राणा राजसिंह और चूंडावत के युद्ध से औरंगजेब हार गया, और चारुमती रानी इतनी बहादुर थीं कि मुगल-रानी उनकी दासी बनीं. राणा को इस गौरवशाली सिंहासन की रक्षा करनी चाहिए.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं और वीर-गाथाओं को विस्तार से समझाएं, जिसमें पात्रों के कार्य, उनके पीछे की प्रेरणा और परिणामों का उल्लेख हो.

 

Question (8) राणा! तू इसकी रक्षा कर, यह सिंहासन अभिमानी है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ- अरि-नाशक = शत्रुओं का संहार करने वाला. समर्चन = पूजन. कर्जन = अंग्रेज शासक लॉर्ड कर्जन. अजब = अनोखी.
प्रसंग- यह अंश कवि श्यामनारायण पाण्डेय की कविता 'मेवाड़ का सिंहासन' से लिया गया है. इसमें कवि ने मेवाड़ के राणा फतहसिंह के तेज और प्रताप का वर्णन किया है.
व्याख्या- कवि कहते हैं कि यह बात अभी कुछ समय पहले की है, यानी आजादी से पहले अंग्रेजों के शासनकाल की. उस समय राणा फतहसिंह मेवाड़ राज्य के शासक थे. वे बहुत तेजस्वी और शत्रुओं का नाश करने वाले थे. उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व को देखकर लाखों लोग उनके चरणों की पूजा करते थे. जब राणा फतहसिंह दिल्ली दरबार में आए, तो उनकी तेजस्वी और स्वाभिमानी छवि को लॉर्ड कर्जन हैरानी से देखते रहे. लॉर्ड कर्जन की आँखों में आश्चर्य था. उस शक्तिशाली राणा फतहसिंह की दिल्ली यात्रा की जो अनोखी कहानी लोगों में प्रचलित है, उसे सुनकर मुझे गर्व महसूस होता है. इसलिए कवि कहते हैं, "हे राणा! तुम मेवाड़ के सिंहासन की रक्षा करो." यह सिंहासन बहुत स्वाभिमानी और गौरवशाली परंपरा को बनाए रखने वाला है.
विशेष-
(1) अंग्रेज सरकार द्वारा दिल्ली दरबार में सभी रियासतों के राजा बुलाए गए थे. उन राजाओं में राणा फतहसिंह ने मेवाड़ की प्रतिज्ञा का ध्यान रखकर ऐसा आचरण किया, जिससे लॉर्ड कर्जन भी प्रभावित हुए.
(2) मेवाड़ के गौरवपूर्ण इतिहास का सुंदर चित्रण किया गया है. इसमें जोशीले भावों की अभिव्यक्ति और सुंदर छंद-योजना है.
In simple words: कवि कहते हैं कि राणा फतहसिंह बहुत तेजस्वी और स्वाभिमानी राजा थे, जिन्होंने दिल्ली दरबार में लॉर्ड कर्जन को भी प्रभावित किया. कवि राणा से कहते हैं कि वे इस गौरवशाली और स्वाभिमानी सिंहासन की रक्षा करें.

🎯 Exam Tip: किसी शासक या राजा का वर्णन करते समय, उनके गुणों, प्रमुख कार्यों और उनके प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएं.

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