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Detailed Chapter 10 काल-चक्र RBSE Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 10 काल-चक्र RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. 'काल-चक्र' से आशय है -
(क) समय का चक्र यो पहिया
(ख) काल का चक्कर
(ग) मृत्यु को झमेला
(घ) हेरफेर करना।
Answer: (क) समय का चक्र यो पहिया
In simple words: 'काल-चक्र' का अर्थ है समय का पहिया या चक्र। यह दर्शाता है कि समय हमेशा घूमता रहता है।
🎯 Exam Tip: When answering questions about meanings, always choose the option that most accurately reflects the core concept.
Question 2. संवत्सर का अर्थ है -
(क) नववर्ष
Answer: (क) नववर्ष
In simple words: संवत्सर का मतलब है एक नया साल, यानी नववर्ष।
🎯 Exam Tip: Remember key terms and their direct translations for quick recall.
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. निशीथ किसे कहते हैं?
Answer: आधी रात को निशीथ कहते हैं। यह रात का सबसे गहरा समय होता है।
In simple words: निशीथ का मतलब आधी रात है।
🎯 Exam Tip: Define specific time periods clearly and concisely, using simple language.
Question 2. अहोरात्र शब्द का अर्थ बताइए।
Answer: अहोरात्र शब्द का अर्थ 'दिन और रात' है। यह पूरे चौबीस घंटे के समय को दर्शाता है।
In simple words: अहोरात्र का मतलब दिन और रात दोनों हैं।
🎯 Exam Tip: When asked for a meaning, give a direct and complete explanation of the term.
Question 3. जेठ में सूर्य का किस नक्षत्र में संचार होता है?
Answer: जेठ के महीने में सूर्य का संचार रोहिन नक्षत्र में होता है। इस समय गर्मी बहुत बढ़ जाती है।
In simple words: जेठ में सूर्य रोहिन नक्षत्र में होता है।
🎯 Exam Tip: Mention the specific नक्षत्र (constellation) and the corresponding month accurately.
Question 4. गणेश चतुर्थी किस तिथि को मनाते हैं?
Answer: गणेश चतुर्थी भादों (भाद्रपद) मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मनाते हैं। यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है।
In simple words: गणेश चतुर्थी भादों महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी पर मनाई जाती है।
🎯 Exam Tip: Clearly state the month and the specific lunar phase (कृष्णपक्ष) and day (चतुर्थी) for such festival questions.
Question 5. फागुन का जाड़ा कैसा होता है?
Answer: फागुन के महीने का जाड़ा (ठंड) गुलाबी होता है। यह हल्की और सुहावनी ठंड होती है जो वसंत ऋतु की शुरुआत का संकेत देती है।
In simple words: फागुन का जाड़ा गुलाबी और हल्का होता है।
🎯 Exam Tip: Use descriptive words to explain the nature of the weather mentioned.
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. चन्द्रमास से क्या तात्पर्य है?
Answer: चन्द्रमास वह महीना होता है जिसकी गणना चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर घूमने के आधार पर की जाती है। यह कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तक गिना जाता है, जिसमें लगभग 30 दिन होते हैं।
In simple words: चन्द्रमास वह महीना है जो चंद्रमा की चाल से गिना जाता है।
🎯 Exam Tip: Explain the basis of calculation (चंद्रमा) and the typical duration for full marks.
Question 3. 'क्षय तिथि' कब कहलाती है?
Answer: क्षय तिथि तब कहलाती है जब कोई तिथि सूर्योदय से शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है। ऐसी तिथि की गिनती नहीं की जाती।
In simple words: जिस तिथि का सूर्योदय से पहले ही अंत हो जाता है, उसे क्षय तिथि कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Focus on the duration of the tithi relative to two consecutive sunrises to define क्षय तिथि.
Question 4. प्रदोष कब माना जाता है?
Answer: संध्या काल में जो तिथि रहती है उसे प्रदोष कहते हैं। प्रदोष का समय संध्याकाल को ही माना जाता है, जब दिन और रात मिलते हैं।
In simple words: प्रदोष संध्या के समय को कहते हैं जब दिन ढलकर रात होती है।
🎯 Exam Tip: Clearly link 'प्रदोष' with 'संध्याकाल' and the transition from day to night.
Question 5. षड्-ऋतुओं के नाम लिखिए।
Answer: षड् अर्थात् छः ऋतुएँ निम्नलिखित हैं- वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर। ये भारत में साल भर में आने वाली मुख्य ऋतुएँ हैं।
In simple words: छः ऋतुएँ हैं- वसंत, गर्मी, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।
🎯 Exam Tip: List all six seasons correctly, ensuring no omissions or spelling errors.
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. वसंत को यौवन के रूप में और शिशिर को बुढ़ापे के रूप में क्यों माना जाता है?
Answer: वसंत ऋतु को यौवन के रूप में माना जाता है क्योंकि यह शिशिर की कड़कड़ाती ठंड के बाद आती है, जिससे प्रकृति में नई जान आ जाती है। पेड़ों पर नए पत्ते और फूल खिलते हैं, पूरी प्रकृति एक सुंदर और जवान स्त्री की तरह दिखती है। यह मनुष्य के जीवन की उस अवस्था जैसी है जब वह सबसे सुंदर और शक्तिशाली होता है। दूसरी ओर, शिशिर को बुढ़ापा माना जाता है क्योंकि इस ऋतु में प्रकृति की सुंदरता कम हो जाती है। पेड़-पौधे अपने पत्ते और फूल खो देते हैं, ठंडक बहुत बढ़ जाती है, और हवा तीर की तरह शरीर में चुभती है। यह सब मनुष्य के बुढ़ापे जैसा है, जब शारीरिक शक्ति और सुंदरता कम हो जाती है, और व्यक्ति कमजोर दिखने लगता है।
In simple words: वसंत में प्रकृति नई और सुंदर दिखती है, जैसे जवानी। शिशिर में प्रकृति मुरझाई और ठंडी होती है, जैसे बुढ़ापा।
🎯 Exam Tip: Compare and contrast the characteristics of both seasons, linking them clearly to the stages of human life (youth and old age) with specific examples from nature.
Question 2. सौरमास पर एक टिप्पणी लिखिए।
Answer: सौरमास की गणना सूर्य के राशि परिवर्तन के आधार पर होती है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो एक सौरमास पूरा होता है। यह हिन्दू कैलेंडर में समय मापने का एक तरीका है, जो चंद्रमा के बजाय सूर्य की गति पर निर्भर करता है। लगभग 35 चन्द्रमासों के बाद एक अधिमास (या मलमास/लोंद) आता है, जो सौरमास और चन्द्रमास के बीच के अंतर को समायोजित करने के लिए होता है।
In simple words: सौरमास सूर्य की चाल से बनता है, जब वह एक राशि से दूसरी राशि में जाता है। इससे चंद्र-मास के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
🎯 Exam Tip: Explain the primary basis of सौरमास calculation (सूर्य का राशि परिवर्तन) and its purpose, especially mentioning अधिमास/मलमास.
Question 3. आकाश की गतिविधि देखकर समय का विभाजन किस प्रकार किया गया है?
Answer: गाँवों में समय का विभाजन आकाश में होने वाली गतिविधियों को देखकर बहुत बारीकी से किया जाता है। सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुक्रतारा उगता है, जिसे 'सुकवाउगानी' कहते हैं। इसके बाद 'भिनसार' होता है जब हल्का अंधेरा रहता है और चिड़ियाँ बोलने लगती हैं। फिर पूरब में थोड़ी रोशनी दिखती है, जिसे 'भोर' या 'प्रभात' कहते हैं। जब आकाश लालिमा से भर जाता है, उसे 'लाही लगना' और फिर 'सबेरा' कहते हैं। सूर्योदय से पहले का समय 'ब्रह्मवेला' या 'उषाकाल' कहलाता है। सूर्योदय के बाद दिन चढ़ने लगता है, फिर 'दुपहरी', 'खड़ी दुपहरी' और 'तिपहरी' होती है। दिन ढलते समय 'साँझ' या 'सन्ध्या' होती है, जिसमें 'गोधूलि' (गायों के लौटने का समय), 'सूर्यास्त', 'झुटपुटा' (हल्का अंधेरा) और 'ध्वान्त' (गहरा अंधेरा) शामिल हैं। रात में 'रात गहराती', 'भीगनी', 'सूतापड़ानी' (सोने का समय) और 'निशीथ' (आधी रात) जैसी अवस्थाएँ होती हैं।
In simple words: गाँवों में लोग सूर्य और तारों को देखकर समय का अंदाज़ा लगाते हैं। जैसे शुक्रतारे के उगने से लेकर आधी रात तक के समय को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, जैसे सुकवाउगानी, भिनसार, प्रभात, दुपहरी, साँझ और निशीथ।
🎯 Exam Tip: Provide a structured description of each time segment, starting from pre-dawn through night, and mention the specific local names associated with each. Focus on the observable celestial phenomena.
Question 4. खेती के काम किन-किन नक्षत्रों में होते हैं?
Answer: खेती के काम सूर्य के विभिन्न नक्षत्रों में संचार के आधार पर होते हैं। जेठ के महीने में सूर्य के रोहिन नक्षत्र में आने पर खेती का काम शुरू हो जाता है। रोहिन नक्षत्र में हुई वर्षा धान और आम की फसल के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। मृग नक्षत्र में सूर्य के रहने पर 'तवना' मनाया जाता है। आर्द्रा नक्षत्र में होने वाली वर्षा कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसके बाद पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा, उत्तरा, हस्त, चित्रा और स्वाति जैसे नक्षत्र भी आते हैं, जो सभी कृषि कार्यों में खास महत्व रखते हैं। इन नक्षत्रों के नाम लोकभाषा में थोड़े बदलकर प्रचलित हैं, जैसे- आद्र, पुनरवसु, पुख्य, असलेषा, मघा, पुरवा और हथिया।
In simple words: खेती के काम सूर्य के नक्षत्रों के हिसाब से होते हैं। रोहिन, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य जैसे कई नक्षत्र फसल उगाने और बारिश के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
🎯 Exam Tip: List the key नक्षत्रों (constellations) relevant to farming and briefly describe their significance for crops or weather patterns.
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. भारतीय कालगणना शुरू होती है -
(क) ब्रह्मा के परार्द्ध से
Answer: (क) ब्रह्मा के परार्द्ध से
In simple words: भारत में समय की गणना ब्रह्मा के परार्द्ध से शुरू मानी जाती है।
🎯 Exam Tip: Remember the foundational starting point for traditional Indian time calculation.
Question 2. प्रत्येक युग में चरण होते हैं -
(क) तीन
(ख) चार
(ग) दी
(घ) एक।
Answer: (ख) चार
In simple words: हर युग में चार चरण या हिस्से होते हैं।
🎯 Exam Tip: Recall the number of phases (चरण) that make up each 'yuga' in the Indian concept of time.
Question 3. जो तिथि सूर्योदय के समय रहती है, वह कहलाती है -
(क) अस्त तिथि
(ख) क्षय तिथि।
(ग) उदय तिथि
(घ) अक्षय तिथि
Answer: (ग) उदय तिथि
In simple words: जो तिथि सूर्योदय के समय मौजूद होती है, उसे उदय तिथि कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Understand the concept of 'Udaya Tithi' which is determined by the tithi prevailing at sunrise.
Question 4. मृत्यु या निधन की तिथि को कहते हैं -
(क) मृत्यु तिथि
(ख) तिरोभाव तिथि
(ग) निधन तिथि
(घ) पुण्य तिथि
Answer: (घ) पुण्य तिथि
In simple words: किसी की मृत्यु या निधन की तिथि को पुण्य तिथि कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: Use the respectful and traditionally accepted term 'पुण्य तिथि' for the death anniversary.
Question 5. सबेरे आकाश में सूर्योदय से पहले उगता है -
(क) वृहस्पति तारा
(ख) शुक्रतारा
(ग) शनि तारा
(घ) चन्द्रमा
Answer: (ख) शुक्रतारा
In simple words: सूर्योदय से ठीक पहले आकाश में शुक्रतारा दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: Remember that Venus (शुक्रतारा) is often visible as the 'morning star' before sunrise.
Question 1. एक मनवन्तर कितनी चौकड़ी का होता है?
Answer: एक मनवन्तर 71 चौकड़ी का होता है। एक चौकड़ी में चार युग होते हैं।
In simple words: एक मनवन्तर में 71 चौकड़ी होती हैं।
🎯 Exam Tip: Quantify the units of time (71 चौकड़ी) accurately when describing traditional calendar divisions.
Question 2. युग कितने होते हैं?
Answer: युग चार होते हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर तथा कलियुग। ये चारों मिलकर एक चौकड़ी बनाते हैं।
In simple words: चार युग हैं: सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग।
🎯 Exam Tip: List all four traditional 'yugas' correctly.
Question 3. 'सुदि' और 'बदि' किनको कहते हैं?
Answer: 'सुदि' शुक्ल पक्ष के 15 दिनों को कहते हैं, जो अमावस्या के बाद आते हैं, यानी चाँदनी रातें। 'बदि' कृष्ण पक्ष के 15 दिनों को कहते हैं, जो पूर्णिमा के बाद आते हैं, यानी अँधेरी रातें।
In simple words: 'सुदि' मतलब अमावस्या के बाद के 15 दिन (शुक्ल पक्ष) और 'बदि' मतलब पूर्णिमा के बाद के 15 दिन (कृष्ण पक्ष)।
🎯 Exam Tip: Differentiate 'सुदि' (शुक्ल पक्ष) and 'बदि' (कृष्ण पक्ष) clearly, linking them to the moon's phases and their start/end points.
Question 4. मास गणना का आधार क्या है?
Answer: मास गणना का आधार चन्द्रमास तथा सौरमास हैं। चन्द्रमास चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सौरमास सूर्य के राशि परिवर्तन पर आधारित होता है।
In simple words: मास गणना का आधार चंद्र-मास और सूर्य-मास हैं।
🎯 Exam Tip: Identify both 'चंद्रमास' and 'सौरमास' as the dual bases for calculating months.
Question 5. कौन-सी एकादशियाँ प्रसिद्ध हैं?
Answer: देवोत्थान एकादशी, भीमसेनी एकादशी और हरिशयनी एकादशी प्रसिद्ध एकादशियाँ हैं। ये व्रत और पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
In simple words: देवोत्थान, भीमसेनी और हरिशयनी एकादशियाँ बहुत जानी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: List the prominent Ekadashis accurately, as they are key dates in the Hindu calendar.
Question 6. पोंगल और खिचड़ी पर्व कब मनाये जाते हैं?
Answer: पोंगल और खिचड़ी पर्व सूर्य के उत्तरायण होने पर मकर संक्रांति के दिन मनाये जाते हैं। यह फसल कटाई से जुड़े त्योहार हैं।
In simple words: पोंगल और खिचड़ी मकर संक्रांति पर मनाये जाते हैं, जब सूर्य उत्तरायण होता है।
🎯 Exam Tip: Connect these festivals to Makar Sankranti and the astronomical event of the sun's Uttarayan (northward movement).
Question 7. 'सुकवाउगानी' किसको कहते हैं?
Answer: आकाश में शुक्रतारे के उदय के समय को गाँवों में 'सुकवाउगानी' कहा जाता है। यह सूर्योदय से थोड़ा पहले का समय होता है।
In simple words: गाँवों में सूर्योदय से पहले शुक्रतारे के दिखने को 'सुकवाउगानी' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: Define 'सुकवाउगानी' by linking it to the appearance of the planet Venus (शुक्रतारा) before sunrise.
Question 9. 'रात गिर जाती है कहने का क्या आशय है?
Answer: 'रात गिर जाती है' कहने का आशय यह है कि रात हो जाती है और सभी लोग अपना काम बंद करके सोने चले जाते हैं। यह दिन के अंत और आराम के समय को दर्शाता है।
In simple words: 'रात गिर जाती है' का मतलब है कि रात हो गई है और सब लोग सो गए हैं।
🎯 Exam Tip: Interpret such idiomatic phrases by explaining their common, practical meaning in context.
Question 10. साइत किसको कहते हैं?
Answer: 'साइत' अच्छे और शुभ मुहूर्त को कहते हैं। यह किसी कार्य को शुरू करने के लिए सही और अनुकूल समय होता है।
In simple words: साइत का मतलब किसी काम के लिए शुभ और अच्छा समय है।
🎯 Exam Tip: Define 'साइत' as an auspicious time for starting tasks, highlighting its positive connotation.
Question 11. एक वर्ष में कितने चौमास होते हैं?
Answer: एक वर्ष में तीन चौमासे होते हैं- गर्मी, वर्षा और जाड़ा। प्रत्येक चौमासा लगभग चार महीने का होता है।
In simple words: साल में तीन चौमासे होते हैं: गर्मी, वर्षा और जाड़ा।
🎯 Exam Tip: List the three main seasonal periods (चौमासे) that divide the year in traditional Indian timekeeping.
Question 12. एक नक्षत्र की अवधि कितने दिन होती है?
Answer: एक नक्षत्र की अवधि आमतौर पर 13 या 14 दिन होती है। इन नक्षत्रों के आधार पर कई धार्मिक और कृषि कार्य किए जाते हैं।
In simple words: एक नक्षत्र करीब 13 या 14 दिन तक रहता है।
🎯 Exam Tip: State the approximate duration of a 'nakshatra' (13 or 14 days) precisely.
Question 13. सुहावनी गर्मी कब होती है?
Answer: सुहावनी गर्मी फागुन के महीने में होती है। इस समय सर्दी कम होने लगती है और हल्की गर्मी एक सुखद एहसास देती है।
In simple words: फागुन के महीने में गर्मी सुहावनी लगती है।
🎯 Exam Tip: Identify the specific month (फागुन) associated with pleasant warmth.
Question 14. 'बतास' और 'घाम' शब्दों का क्या अर्थ है?
Answer: 'बतास' शब्द का अर्थ 'हवा' है, और 'घाम' शब्द का अर्थ 'धूप' है। ये दोनों प्राकृतिक तत्वों को दर्शाते हैं।
In simple words: 'बतास' का मतलब हवा और 'घाम' का मतलब धूप है।
🎯 Exam Tip: Clearly define each word with its corresponding simple meaning.
Question 15. 'चिल्ला जाड़ा' किसको कहते हैं?
Answer: 'चिल्ला जाड़ा' बहुत अधिक और कड़ाके की ठंड को कहते हैं, जो आमतौर पर पूस और माघ के महीनों में पड़ती है। इसमें शरीर ठंड से काँपने लगता है।
In simple words: 'चिल्ला जाड़ा' बहुत तेज़ और कड़ाके की ठंड को कहते हैं, खासकर पूस और माघ महीनों में।
🎯 Exam Tip: Explain 'चिल्ला जाड़ा' as extreme cold, specifying the months when it typically occurs.
Question 1. हमारे चिंतन में ठहरे हुए काल की इसीलिए बड़ी उपेक्षा है। काल की उपेक्षा का क्या कारण है?
Answer: 'काल' एक ऐसा शब्द है जिसके कई अर्थ हैं। इसका एक अर्थ 'मृत्यु' भी है, और लोगों के मन में यही अर्थ गहराई से बैठ गया है। हालाँकि 'काल' का मतलब 'समय', 'गति' और 'जीवन' भी होता है, लेकिन लोग इसके इन अर्थों पर ध्यान नहीं देते और इसकी उपेक्षा करते हैं। इसी कारण से हमारे चिंतन में रुके हुए काल को कम महत्व दिया जाता है।
In simple words: 'काल' शब्द का एक अर्थ 'मृत्यु' भी है, और लोग इसी अर्थ पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जिससे 'समय' के रूप में इसकी अनदेखी होती है।
🎯 Exam Tip: Explain the multiple meanings of 'काल' and highlight how the dominant association with 'मृत्यु' leads to its neglect in other contexts.
Question 2. भारतीय काल-गणना किस प्रकार होती है?
Answer: भारतीय काल-गणना ब्रह्मा के परार्ध से शुरू होती है, जिसमें सृष्टि का पूरा चक्र ब्रह्मा का अहोरात्र (दिन-रात) माना जाता है। इसके बाद कल्प और मन्वन्तर आते हैं। एक कल्प में 14 मन्वन्तर होते हैं, और हर मन्वन्तर में 71 चौकड़ियाँ होती हैं। एक चौकड़ी में चार युग होते हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग। यह गणना बहुत ही विस्तृत और सूक्ष्म है।
In simple words: भारतीय समय की गणना ब्रह्मा के परार्ध से शुरू होती है, जिसमें कल्प, मन्वन्तर और चार युग (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर, कलियुग) शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: Describe the hierarchical structure of Indian time calculation, starting from ब्रह्मा के परार्ध and explaining Kalpha, Manvantar, and the four Yugas.
Question 3. वर्ष गणना किस प्रकार होती है?
Answer: वर्ष की गणना 60 वर्षों के एक पूरे चक्र के आधार पर होती है, जिसे 'संवत्सर' कहते हैं। हर संवत्सर का अपना एक प्रवेश दिन होता है। भारत में कई तरह के संवत् (कैलेंडर) चलते हैं, जैसे विक्रम संवत्, शक संवत् (साके), ईस्वी सन्, हिजरी और फसली। हिन्दुओं के सभी धार्मिक कार्य विक्रम और शक संवत् के अनुसार ही किए जाते हैं।
In simple words: साल की गणना 60 वर्षों के एक चक्र से होती है। भारत में विक्रम, शक, ईस्वी जैसे कई कैलेंडर हैं, जिनमें हिन्दू धार्मिक काम विक्रम और शक संवत् से करते हैं।
🎯 Exam Tip: Explain that year calculation is based on a 60-year cycle (Sankalp) and mention the different traditional and modern calendar systems used in India, particularly highlighting Vikram and Shak Samvat for Hindu rituals.
Question 4. मास गणना का आधार क्या है?
Answer: मास (महीने) की गणना के दो मुख्य आधार हैं- चन्द्रमास और सौरमास। चन्द्रमास चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जिसमें कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक का समय गिना जाता है। पूर्णिमा 15वीं तिथि और अमावस्या 30वीं तिथि मानी जाती है। सौरमास सूर्य के राशि परिवर्तन के आधार पर होता है।
In simple words: मास गणना के लिए चंद्र-मास (चंद्रमा पर आधारित) और सूर्य-मास (सूर्य की राशियों पर आधारित) का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: Clearly identify Chandra-maas and Saur-maas as the two bases, and briefly describe what each is based on (moon's phases vs. sun's transit). Also mention how tithis (days) are counted within these.
Question 5. तिथि किसको कहते हैं?
Answer: मास के दिनों को तिथि कहते हैं। तिथि की गणना चंद्रमा की चाल के अनुसार होती है। आमतौर पर, एक तिथि सूर्योदय से शुरू होकर अगले सूर्योदय तक रहती है। लेकिन, यदि कोई तिथि अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है, तो उसे गिना नहीं जाता और उसे क्षय तिथि कहते हैं।
In simple words: महीने के दिनों को तिथि कहते हैं, जो चंद्रमा की गति से तय होती हैं और आमतौर पर एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलती हैं।
🎯 Exam Tip: Define 'tithi' as a lunar day and explain its duration based on sunrise, including the concept of 'Kshaya Tithi' (skipped day).
Question 6. व्रत की महत्वपूर्ण तिथियाँ कौनसी हैं?
Answer: हिन्दुओं के व्रत आदि से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियाँ एकादशी, त्रयोदशी (तेरस, प्रदोष), चतुर्थी (चौथ), पञ्चमी (पचइ), तृतीया (तीज), षष्ठी (छट्ट) और पूर्णिमा (पूनों) हैं। कुछ प्रसिद्ध एकादशियाँ देवोत्थान, भीमसेनी और हरिशयनी हैं। गणेश चतुर्थी भाद्रपक्ष की कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। वसंत पंचमी और नागपंचमी (सावन सुदी पंचमी) भी प्रमुख हैं। कार्तिक, पूस तथा वैसाख की पूर्णिमाएँ प्रसिद्ध हैं, और माघ की पूर्णिमा को माघ-स्नान के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
In simple words: हिन्दुओं के लिए एकादशी, त्रयोदशी, चतुर्थी, पंचमी, तीज, षष्ठी और पूर्णिमा जैसी कई तिथियाँ व्रत और त्योहारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: List a comprehensive set of important Hindu fasts and festival dates (tithis) to ensure a complete answer.
Question 8. दिन की गणना किस तरह की जाती है?
Answer: दिन 24 घंटों का होता है, जिसे 60 घटियों (घड़ियों) में भी मापा जाता है। अंग्रेजी गणना में रात बारह बजे के बाद से नया दिन शुरू होता है और अगली रात बारह बजे तक रहता है। भारतीय पद्धति में, दिन की गणना सूर्योदय से होती है, जिसका मतलब है कि सूर्योदय के बाद ही दिन माना जाता है। तिथि भी सूर्योदय के बाद शुरू होती है और अगले सूर्योदय तक चलती है।
In simple words: दिन 24 घंटे या 60 घटियों का होता है। अंग्रेजी तरीके में दिन रात 12 बजे से बदलता है, जबकि भारतीय तरीके में दिन सूर्योदय से गिना जाता है।
🎯 Exam Tip: Compare and contrast the Western (midnight-based) and Indian (sunrise-based) methods of calculating the start and end of a day.
Question 9. चौमासा किसको कहते हैं?
Answer: चौमासा चार महीनों के समूह को कहते हैं, जिसे 'चातुर्मास' भी कहा जाता है। साल में तीन चौमासे होते हैं: पहला चौमासा गर्मी का (फागुन, चैत्र, वैशाख, जेठ), दूसरा वर्षा का (आषाढ़, श्रावण, भादों, कार/आश्विन) और तीसरा जाड़े का (कार्तिक, अगहन, पूस/पौष, माघ) होता है।
In simple words: चौमासा चार महीनों का एक समूह होता है। साल में तीन चौमासे होते हैं - गर्मी, वर्षा और जाड़े के मौसम के लिए।
🎯 Exam Tip: Define 'चौमासा' as a four-month period and list the three distinct चौमासे corresponding to summer, monsoon, and winter, along with their respective months.
Question 10. जाड़े और तपन के सापेक्ष बोधक शब्द कौन-से हैं?
Answer: जाड़े (ठंड) और तपन (गर्मी) को व्यक्त करने के लिए हिंदी में अनेक सापेक्ष बोधक शब्द प्रचलित हैं। जैसे- फागुन का 'गुलाबी जाड़ा' (हल्की ठंड), 'सुहावनी गर्मी', चैत्र की 'चिनचिनाहट' (तीखी गर्मी), वैशाख की 'लपट' (तेज़ लू), रात की 'हँवक' (गरम हवा), आषाढ़ की 'उमस' (चिपचिपी गर्मी), पूस का 'चिल्ला जाड़ा' (कड़ाके की ठंड) आदि ऐसे ही शब्द हैं।
In simple words: जाड़े और गर्मी को बताने वाले शब्द जैसे 'गुलाबी जाड़ा', 'चिनचिनाहट', 'लपट', 'उमस' और 'चिल्ला जाड़ा' हैं।
🎯 Exam Tip: Provide a variety of descriptive terms for both cold and heat, emphasizing their specific nuances and the months they refer to.
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. विक्रम संवत् के आधार पर वर्ष की गणना पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
Answer: भारत में हिन्दुओं के धार्मिक कार्यकलाप विक्रम संवत् के आधार पर ही किए जाते हैं। इस पद्धति में तिथि सूर्योदय से शुरू होकर अगले सूर्योदय तक मानी जाती है। यदि कोई तिथि अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है, तो उसे 'क्षय तिथि' कहते हैं और उसे गिना नहीं जाता। महीने की गणना चन्द्रमा की गति के आधार पर होती है, जिसे 'चन्द्रमास' कहते हैं। एक चन्द्रमास कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तक होता है। पहले यह गणना शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक होती थी। इसलिए पूर्णिमा को 15वीं तिथि और अमावस्या को 30वीं तिथि माना जाता है। सौरमास की गणना सूर्य के राशि परिवर्तन के आधार पर होती है। चन्द्रमास और सौरमास को एक साथ लाने के लिए, हर 35 चन्द्रमासों के बाद लगभग एक 'अधिमास' (मलमास या लोंद) जोड़ा जाता है, और जिस साल अधिमास होता है उसे 'लोंद का साल' कहते हैं।
In simple words: विक्रम संवत् में साल की गणना चंद्रमा और सूर्य की चाल से होती है। इसमें तिथि सूर्योदय से गिनी जाती है, और हर 35 चंद्र महीनों पर एक अतिरिक्त महीना (अधिमास) जोड़ा जाता है ताकि साल सही रहे।
🎯 Exam Tip: Detail how Vikram Samvat integrates both lunar and solar principles for calendar calculation, covering the concepts of Tithi, Chandramaas, Sauramaas, and Adhimaas/Malmaas.
Question 3. हिन्दुओं के व्रत आदि से सम्बन्धित तथा अन्य महत्त्वपूर्ण तिथियाँ कौन-सी हैं?
Answer: हिन्दुओं के व्रत और त्योहारों से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियाँ एकादशी, त्रयोदशी (तेरस या प्रदोष), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पचइ), तृतीया (तीज), षष्ठी (छट्ट) और पूर्णिमा (पूनों) हैं। कुछ खास एकादशियाँ जैसे देवोत्थान (डिठवन), भीमसेनी, हरिशयनी (देवशयनी) होती हैं। गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। वसंत पंचमी और नागपंचमी (सावन सुदी पंचमी) भी महत्वपूर्ण हैं। कार्तिक, पूस और वैसाख की पूर्णिमाएँ भी खास मानी जाती हैं, और माघ की पूर्णिमा माघ-स्नान के लिए एक महत्वपूर्ण पर्व है।
In simple words: हिन्दुओं के लिए एकादशी, तेरस, चौथ, तीज, षष्ठी और पूर्णिमा जैसी कई तिथियाँ व्रत और त्योहारों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें देवोत्थान और गणेश चतुर्थी खास हैं।
🎯 Exam Tip: List a variety of key Hindu fasts and festival dates (tithis), providing specific examples like Devotthan Ekadashi and Ganesh Chaturthi for a comprehensive answer.
Question 4. 'गाँवों में समय का विभाजन बड़ा बारीक है'- लेखक के इस कथन को स्पष्ट करते हुए उन शब्दों का उल्लेख कीजिए जो समय-विशेष के लिए प्रयुक्त होते हैं?
Answer: लेखक के कथन का अर्थ यह है कि गाँवों में समय को बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, और हर हिस्से का अपना अलग नाम होता है। सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले शुक्र तारा उगता है, जिसे 'सुकवाउगानी' कहते हैं। इसके बाद 'भिनसार' आता है जब हल्की रोशनी और चिड़ियों की आवाज होती है। पूरब में उजाला दिखने पर 'भोर' या 'प्रभात' कहते हैं। जब आकाश लाल होता है, तो उसे 'लाही लगना' और फिर 'सवेरा' कहते हैं। सूर्योदय से पहले का समय 'ब्रह्मवेला' या 'उषाकाल' कहलाता है। इसके बाद 'दिनचढ़ानी', 'दुपहरी', 'खड़ी दुपहरी' आती है। दोपहर ढलने पर 'तिपहरी' या 'सिपहरी' आती है। चौथे पहर को 'दिन ढलानी बेला' कहते हैं, जिसमें 'गोधूलि' (गायों के लौटने का समय), 'साँझ', 'सूर्यास्त', 'झुटपुटा' (हल्का अंधेरा) और 'ध्वान्त' (घना अंधेरा) होता है। इसके बाद 'रात गहराती', 'भीगनी', 'सूतापड़ानी' (सोने का समय) और 'आधी रात' (निशीथ) आती है।
In simple words: गाँवों में समय को बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया है, हर हिस्से का एक खास नाम है। जैसे, सूर्योदय से पहले 'सुकवाउगानी', दिन में 'दुपहरी', शाम को 'गोधूलि', और रात में 'निशीथ' जैसे शब्द समय के अलग-अलग भागों को बताते हैं।
🎯 Exam Tip: Emphasize the fine division of time in villages and provide a range of specific local terms for different periods of the day and night, from dawn to midnight.
Question 5. भारत में कौन-कौन सी ऋतुएँ होती हैं?
Answer: भारत में मुख्य रूप से गर्मी, वर्षा और जाड़े (ठंड) का मौसम होता है, और प्रत्येक के लिए लगभग चार महीने का समय निश्चित होता है। इन्हें 'चौमास' या 'चातुर्मास' भी कहते हैं। फाल्गुन, चैत्र, वैशाख और ज्येष्ठ गर्मी के महीने होते हैं। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन वर्षा के महीने होते हैं। कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष और माघ जाड़े के महीने होते हैं। इसके अलावा, पूरे साल में छह ऋतुएँ भी होती हैं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर। फागुन का जाड़ा गुलाबी और हल्का होता है।
In simple words: भारत में मुख्य रूप से गर्मी, वर्षा और जाड़ा होता है, जिन्हें 'चौमास' भी कहते हैं। कुल मिलाकर छह ऋतुएँ हैं- वसंत, गर्मी, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।
🎯 Exam Tip: Differentiate between the three main "चौमास" and the six "ऋतुएँ", listing the months associated with each of the primary seasons.
जीवन-परिचय-
डा. विद्यानिवास मिश्र
डा. विद्यानिवास मिश्र का जन्म 1926 में गोरखपुर जिले के पकड़डीहा गाँव में हुआ था। उन्होंने गोरखपुर में इण्टरमीडिएट तक पढ़ाई की, फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया और गोरखपुर विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में काम किया। बाद में वे कैलीफोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में भी प्रोफेसर रहे। भारत लौटने पर, उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय के के. एम. मुंशी हिन्दी विद्यापीठ के निदेशक का पद संभाला। वे आकाशवाणी और उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग में भी कार्यरत रहे।
उन्हें भारत सरकार से 'पद्मश्री' और 'पद्म भूषण' जैसे सम्मान मिले हैं। वे राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं।
साहित्यिक परिचय-
मिश्र जी हिन्दी के एक बेहतरीन निबंधकार हैं। उनकी भाषा में संस्कृत के शुद्ध शब्द और परिमार्जित खड़ी बोली का उपयोग होता है, लेकिन उसमें कभी-कभी उर्दू और भोजपुरी भाषाओं के शब्द भी मिल जाते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में भावात्मक और विचारात्मक शैलियों का प्रयोग किया है। उनकी शैली में विचार-विवेचन, समीक्षा और उदाहरण भी होते हैं, साथ ही कभी-कभी व्यंग्य विनोद भी देखने को मिलता है।
कृतियाँ-
उनकी प्रमुख निबंध संग्रह हैं- 'कमल की फूली डाल', 'तुम चंदन बन पानी', 'चित्रवन की छाँट', 'आँगन का पंछी और बनजारा मन', 'बसन्त आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं', 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' आदि। 'हिन्दी की शब्द-सम्पदा', 'साहित्य की चेतना', 'पाणिनीय व्याकरण की विश्लेषण पद्धति' जैसी रचनाएँ भी उनकी हैं।
मिश्र जी ने डा. हजारी प्रसाद द्विवेदी की ललित निबंध लेखन परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके निबंधों के विषय भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति, समाज और परंपराएँ रहे हैं।
पाठ-सार
यह निबंध 'काल-चक्र' डा. विद्यानिवास मिश्र की प्रसिद्ध पुस्तक 'हिन्दी की शब्द सम्पदा' से लिया गया है। इस निबंध में भारतीय समय गणना और उससे जुड़े शब्दों का विस्तार से वर्णन है। भारतीय काल-गणना ब्रह्मा के परार्द्ध से शुरू होती है। सृष्टि का चक्र ब्रह्मा का दिन-रात (अहोरात्र) माना जाता है। इस गणना में कल्प, मन्वन्तर, युग आदि शामिल हैं।
वर्ष की गणना 'संवत्' में होती है। हिन्दुओं में विक्रम और शक संवत् प्रचलित हैं। महीनों की गणना 'चन्द्रमास' और 'सौरमास' इन दो आधारों पर होती है। चन्द्रमास कृष्णपक्ष की पड़वा से पूर्णिमा तक गिना जाता है। पहले यह गणना शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक होती थी। इसलिए अमावस्या को 30वीं तिथि और पूर्णिमा को 15वीं तिथि माना जाता है। सौरमास सूर्य के राशि परिवर्तन के आधार पर होता है। 35 चन्द्रमासों के बाद लगभग एक 'अधिमास' (मलमास या लोंद) आता है। जिस वर्ष अधिमास होता है, उसे 'लोंद का साल' कहा जाता है।
समय को मिनटों-सैकण्डों में और घड़ी, पल-विपल में बांटा गया है। 'चुटकी बजाते', 'पलकें भाँजते' और 'लमहे भर' जैसे शब्द पल या निमिष के पर्यायवाची हैं। विवाह जैसे शुभ कार्यों के लिए 'सुदिन' या 'शुभदिन' और मृत्यु के लिए 'पुण्य तिथि' कही जाती है। अच्छे समय को 'साइत' और बुरे समय को 'कुसाइत' कहते हैं। चार घड़ी के मुहूर्त को 'चौघड़िया' कहते हैं। ऋतुचक्र भी महत्वपूर्ण है। वर्ष के पहले चार महीने गर्मी के, अगले चार महीने वर्षा के और अंतिम चार महीने जाड़े के होते हैं। वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर - ये छः ऋतुएँ भी होती हैं। खेती के काम में सूर्य
नक्षत्रों के नाम प्रचलित हैं। रोहिन, मृगशिरा और आर्द्रा जैसे नक्षत्र कृषि कार्य से संबंधित हैं। एक नक्षत्र की अवधि 13 या 14 दिन होती है। पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा, उत्तरा, हस्त, चित्रा और स्वाति जैसे अन्य नक्षत्र भी हैं। चेत, जेठ, असाढ़ी, भदवारा, कुआरी और कतिका प्रमुख महीने हैं। फागुन का जाड़ा गुलाबी और गर्मी सुहावनी होती है। चैत्र और वैशाख में गर्मी बढ़ती है, और जेठ में ताप अपनी चरम सीमा पर होता है। आषाढ़ में वर्षा के साथ उमस बढ़ती है, और हवा का चलना बंद हो जाता है। कुआर में धूप बहुत तेज होती है। कार्तिक की रात ठंडी होने लगती है। पूस-माघ में कड़ाके की ठंड पड़ती है, जिसे 'चिल्ला जाड़ा' कहते हैं, और शरीर ठिठुरने लगता है। पानी और हवा के साथ रातें बेहद ठंडी हो जाती हैं और बर्फ गिरती है। वसंत और शरद ऋतु में दिन-रात बराबर होते हैं। सूर्य के दक्षिणायन होने तक रात बड़ी होती है और उत्तरायण होने तक दिन बढ़ता है। मनुष्य इस कालचक्र के साथ रात के बाद फिर से सुबह होने की आशा के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है।
शब्दार्थ (पृष्ठ सं. 45)
काल = मृत्यु, समय। चिंतन = विचार। उपेक्षा = तिरस्कार। संवत्सर = नया साल, नववर्ष। सपाट = सतही। प्रागैतिहासिक = इतिहास से पहले का। कुंठित = कम पैने। धारदार = पैना। अहोरात्र = दिन-रात। कला, मन्वन्तर = समय के प्राचीन माप। गणना = गिनती। चौकड़ी = चार चीजों का समूह। चरण = पैर। पक्ष = पन्द्रह दिन का समय। कृष्ण पक्ष = पूर्णिमा के बाद के पन्द्रह दिन। शुक्ल पक्ष = अमावस्या के बाद के पन्द्रह दिन। प्रतिपदा = पड़वा। क्षय = नष्ट होना।
(पृष्ठ सं. 46)
निशीथ = मध्य रात। तिथि = तारीख। हरिशयनी = देव-शयिनी। पर्व = उत्सव। संक्रमण = संचार। वर्षारम्भ = नववर्ष की शुरुआत। उत्तरायण = सूर्य की उत्तर दिशा में स्थिति। सौरमास = सूर्य का महीना। गजर = घंटा। गजर = प्रहर। तिथिविधि = क्रियाकलाप। भिनसार = मुँह अँधेरा। उजास = हल्का उजाला। लाही = आकाश लाल होना। पौ फटना = सबेरा होना। मध्याह्न = दिन का मध्य। पूर्वाह्न = दोपहर से पहले का समय, अँग्रेजी का A.M. अपराह्न = दोपहर बाद का समय, P.M.। तिपहरी = तीसरा पहर। गोधूलि = शाम को गायों का चरागाह से लौटने का समय। गेरुई = गेरू के रंग की। झुटपुटा = हल्का अंधेरा। ध्वान्त = घना अँधेरा। दीपावली = दिया जलाना। जून = समय। गहराना = घनी होना। अमूमन = प्रायः, अक्सर। सूतापड़ानी = सोने का समय। गुल होना = बुझना। साँय साँय करना = सन्नाटा होना। अलाव = आग। भुकभुकाना = हवा के कारण लौ को हिलना।
महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ।
1. काल मृत्यू है, पर काल-चक्र जीवन है। हमारे चिंतन में ठहरे हुए काल की इसीलिए बड़ी उपेक्षा है, पर गतिशील काल-चक्र की बड़ी महिमा है। संवत्सर को यज्ञरूप कहा गया है, जीवन को संवत्सर के रूप में देखा गया है, वसंत को यौवन के रूप में और शिशिर को बुढ़ापे के रूप में देखा गया है। हमारा ऐतिहासिक बोध जितना ही सपाट है, प्रागैतिहासिक और ऐतिहासिक ये विभाजन जितने ही कुंठित हैं, उतने ही काल-चक्र के सूक्ष्म विभाजन धारदार॥
(पृष्ठ सं. 45)
सन्दर्भ एवं प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा के 'काल-चक्र' शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता डा. विद्यानिवास मिश्र हैं।
लेखक ने बताया है कि भारत में समय की गणना बहुत प्राचीन काल से होती रही है। समय को विभिन्न सूक्ष्म खण्डों में विभाजित किया गया है।
व्याख्या-लेखक ने 'काल' शब्द को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसका एक अर्थ मृत्यु है तथा दूसरा अर्थ जीवन भी है। समय का चक्र निरंतर घूमता रहता है। इस घूमने और चलते रहने को ही जीवन कहते हैं। हमारे विचारों में काल का मृत्यु अर्थ ही स्थायित्व पा गया है अतः हम उसकी उपेक्षा करते हैं। निरंतर चलने वाले समय के चक्र का बड़ा महत्त्व है। संवत्सर को यज्ञ रूप कहते हैं और जीवन को संवत्सर के रूप में देखते हैं। वसंत को युवावस्था और शिशिर को वृद्धावस्था का प्रतीक माना जाता है। भारत में समय को ऐतिहासिक और ऐतिहासिक से पूर्व नामक काल-खण्डों में बांटा है। यह विभाजन उतना साफ और स्पष्ट नहीं है जितना हमारा ऐतिहासिक बोध स्पष्ट है। इसके विपरीत काल-चक्र का सूक्ष्म विभाजन अत्यंत स्पष्ट और पैना है। भारत में समय के भिन्न-भिन्न के लिए। अलग-अलग नाम हैं तथा उनसे ही उनको व्यक्त किया गया है।
विशेष-
- (i) 'काल' अनेकार्थक शब्द है। लेखक ने बताया है 'मृत्यु' अर्थ के अतिरिक्त वह जीवन की गति का सूचक भी है।
- (ii) भाषा प्रवाहपूर्ण, साहित्यिक तत्सम प्रधान खड़ी बोली है।
- (iii) शैली-विचार-विवेचनात्मक है।
2. मास-गणना भी चंद्रमास और सौरमास दो आधारों पर होती है, चंद्रमास कृष्णपक्ष (बदी) की प्रतिपदा (पडिवा) से शुरू होती है और शुक्लपक्ष (सुदि - शुक्ल दिन, बदि - बहुल दिन) की पूर्णिमा (पूनों) तक गिना जाता है, पहले यह मास शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर कृष्णपक्ष की अमावस्या (अमावस, मावस) तक गिना जाता था। इसीलिए पूर्णिमा को 15 तिथि और अमावस्या को 30वीं तिथि कहा जाता है। चंद्रमा के ही संचार के अनुसार तिथि गणना होती है, वैसे दिन एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक ही होता है, जो तिथि
लेखक ने बताया है कि भारत में समय की गणना की पद्धति अलग है। हिन्दुओं में विक्रम संवत् का व्यवहार होता है। इसमें महीने की गणना दो प्रकार से होती है।
व्याख्या-लेखक कहता है कि विक्रम संवत में महीने की गिनती दो आधारों पर होती है। एक है चन्द्रमास तथा दूसरा सौरमास। चन्द्रमास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। पूर्णिमा के पश्चात् के पन्द्रह दिन कृष्णपक्ष कहलाते हैं। प्रतिपदा अथवा पड़वा इसका पहला दिन होता है। कृष्ण पक्ष को 'वदि' भी कहते हैं। इसके बाद शुक्लपक्ष आता है। यह अमावस्या के बाद पन्द्रह दिनों का होता है। इस तरह पूर्णिमा तक चन्द्रमास होता है। पहले इस महीने को अमावस्या के बाद की पड़वा शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से आरम्भ होकर अमावस्या तक गिना जाता था। अतः पूर्णिमा की तिथि 15 तथा अमावस्या की 30 होती है। चन्द्रमा के संचार के अनुसार तिथि गिनी जाती हैं। एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय के पहले तक एक दिन माना जाता है। सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसे उदय तिथि कहते हैं। सूर्योदय के बाद आरम्भ होकर दूसरे सूर्योदय से पहले जो तिथि समाप्त हो जाती है, उसको क्षय तिथि कहते हैं।
विशेष-
- (i) डा. मिश्र ने विक्रम संवत की मास-गणना की विस्तृत विवेचन किया है।
- (ii) भाषा विषयानुकूल तथा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
- (ii) शैली विवेचनात्मक है।
3. गाँवों में समय का विभाजन बड़ा बारीक है। सूर्योदय के लगभग एक-डेढ़ घण्टे पहले से आकाश की गतिविधि देखकर समय का विभाजन किया गया है, सबसे पहले सुकवा (शुक्रतारा) उगता है, वह समये सुकवाउगानी कहा जाता है, उसके बाद भिनसार हो जाता है, अभी मुँह-अँधेरा बना रहता है, चिड़ियाँ बोलने लगती हैं, फिर पूरब की ओर कुछ उजास दिखने लगती है और तब भोर हो जाती है, प्रभात या उजेला हो जाता है, इसके बाद लाही लगती है (लाली की आभा दीखती है, सवेरा हुआ, प्रत्यूषवेला आ गयी, तब पौ फटती है, सुबह हो जाती है, सूर्योदय हो जाता है, सवेरे से पहले तड़के सुबह कहा जाता है और सूर्योदय से पूर्व की वेला को ब्रह्मवेला या उष:काल कहा जाता है।
(पृष्ठ सं. 46)
सन्दर्भ एवं प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'काल-चक्र' शीर्षक निबन्ध से उधृत है। इसके रचयिता डा. विद्यानिवास मिश्र हैं।
डा. मिश्र ने समयसूचक विभिन्न शब्दों का परिचय दिया है। दिन अंग्रेजी गणना के अनुसार रात 12 बजे के बाद शुरू होता है और उसकी गिनती घंटों में होती है। भारतीय पद्धति के अनुसार दिन में 60 घडियाँ (घटी) होती हैं। उसकी गणना सूर्योदय से होती है॥
व्याख्या-लेखक कहते हैं कि भारत के गाँवों में समय को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा गया है। सूरज निकलने से भी एक-डेढ़ घंटा पहले आकाश में होने वाले परिवर्तनों को देखकर उसके अनुसार समय विभाजन किया गया है। सबसे पहले सुकवाउगावनी का समय होता है। आकाश में पहले शुक्रतारा उगता है। वह समय सुकवाउगानी कहलाता है। इसके बाद का समय भिनसार कहलाता है। उस समय हल्का अंधेरा रहता है और चिड़ियाँ बोलने लगती हैं। उसके पश्चात् पूर्व दिशा में कुछ उजाला दिखाई देने लगता है। इसको भोर या
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