CBSE Class 6 Sanskrit Worksheet Set 10

Official Class 6 Languages Worksheets: Sanskrit

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Solved Practice Worksheets for Languages

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Question 1. अज, गज, मेघ, पिक, शशक, कक्षा, ग्रीवा, पाठशाला, भिक्षा, वाटिका, विद्या, पुस्तक, दाडिम, गगन, मित्र, अस्मद्, युष्मद् एवं किम् (तीनों लिंगों में) शब्दों के रूप लिखें।
Answer: दिए गए शब्दों के रूप निम्नलिखित हैं:
1. अज (अकारांत पुल्लिंग - बकरा): प्रथमा- अजः, अजौ, अजाः। द्वितीया- अजम्, अजौ, अजन्। तृतीया- अजेन, अजाभ्याम्, अजैः। चतुर्थी- अजाय, अजाभ्याम्, अजभ्यः। पंचमी- अजात्, अजाभ्याम्, अजभ्यः। षष्ठी- अजस्य, अजयोः, अजानाम्। सप्तमी- अजे, अजयोः, अजेषु। संबो.- हे अज, हे अजौ, हे अजाः।
2. गज (अकारांत पुल्लिंग - हाथी): प्रथमा- गजः, गजौ, गजाः। द्वितीया- गजम्, गजौ, गजान्। तृतीया- गजेन, गजाभ्याम्, गजैः। चतुर्थी- गजाय, गजाभ्याम्, गजभ्यः। पंचमी- गजात्, गजाभ्याम्, गजभ्यः। षष्ठी- गजस्य, तयोः, गजानाम्। सप्तमी- गजे, तयोः, गजेषु। संबो.- हे गज, हे गजौ, हे गजाः।
3. मेघ (अकारांत पुल्लिंग - बादल): प्रथमा- मेघः, मेघौ, मेघाः। द्वितीया- मेघम्, मेघौ, मेघान्। तृतीया- मेघेना, मेघाभ्याम्, मेघैः। चतुर्थी- मेघाय, मेघाभ्याम्, मेघभ्यः। पंचमी- मेघात्, मेघाभ्याम्, मेघभ्यः। षष्ठी- मेघस्य, मेघयोः, मेघानाम्। सप्तमी- मेघे, मेघयोः, मेघे्षु। संबो.- हे मेघ...
4. पिक (अकारांत पुल्लिंग - कोयल): गज के समान ही रूप होंगे (पिकः, पिकौ, पिकाः)।
5. शशक (अकारांत पुल्लिंग - खरगोश): गज के समान ही रूप होंगे (शशकः, शशकौ, शशकाः)।
6. कक्षा (आकारांत स्त्रीलिंग - कक्षा): प्रथमा- कक्षा, कक्षे, कक्षाः। द्वितीया- कक्षाम्, कक्षे, कक्षाः। तृतीया- कक्षया, कक्षाभ्याम्, कक्षाभिः। चतुर्थी- कक्षायै, कक्षाभ्याम्, कक्षाभ्यः। पंचमी- कक्षायाः, कक्षाभ्याम्, कक्षाभ्यः। षष्ठी- कक्षायाः, कक्षयोः, कक्षानाम्। सप्तमी- कक्षायाम्, कक्षयोः, कक्षासु। संबो.- हे कक्षे, हे कक्षे, हे कक्षाः।
7. ग्रीवा (आकारांत स्त्रीलिंग - गर्दन): कक्षा के समान ही रूप होंगे (ग्रीवा, ग्रीवे, ग्रीवाः)।
8. पाठशाला (आकारांत स्त्रीलिंग - विद्यालय): कक्षा के समान ही रूप होंगे (पाठशाला, पाठशाले, पाठशालाः)।
9. भिक्षा (आकारांत स्त्रीलिंग - भीख): कक्षा के समान ही रूप होंगे (भिक्षा, भिक्षे, भिक्षाः)।
10. वाटिका (आकारांत स्त्रीलिंग - बगीचा): कक्षा के समान ही रूप होंगे (वाटिका, वाटिके, वाटिकाः)।
11. विद्या (आकारांत स्त्रीलिंग - ज्ञान): कक्षा के समान ही रूप होंगे (विद्या, विद्ये, विद्याः)।
12. पुस्तक (अकारांत नपुंसकलिंग - किताब): प्रथमा- पुस्तकम्, पुस्तके, पुस्तकानि। द्वितीया- पुस्तकम्, पुस्तके, पुस्तकानि। तृतीया- पुस्तकेन, पुस्तकाभ्याम्, पुस्तकैः। चतुर्थी- पुस्तकाय, पुस्तकाभ्याम्, पुस्तकभ्यः। पंचमी- पुस्तकात्, पुस्तकाभ्याम्, पुस्तकभ्यः। षष्ठी- पुस्तकस्य, पुस्तकीयोः, पुस्तकानाम्। सप्तमी- पुस्तके, पुस्तकीयोः, पुस्तकेषु। संबो.- हे पुस्तक, हे पुस्तके, हे पुस्तकानि।
13. दाडिम (अकारांत नपुंसकलिंग - अनार): पुस्तक के समान ही रूप होंगे (दाडिमम्, दाडिमे, दाडिमानि)।
14. गगन (अकारांत नपुंसकलिंग - आकाश): पुस्तक के समान ही रूप होंगे (गगनम्, गगने, गगनानि)।
15. मित्र (अकारांत नपुंसकलिंग - दोस्त): पुस्तक के समान ही रूप होंगे (मित्रम्, मित्रे, मित्राणि)।
16. अस्मद् (सर्वनाम - मैं / हम दोनों / हम सब): प्रथमा- अहम्, आवाम्, वयम्। द्वितीया- माम् (आवां), आवाम्, अस्मान्। तृतीया- मया, आवाभ्याम्, अस्माभिः। चतुर्थी- मह्यम् (मे), आवाभ्याम् (नौ), अस्मभ्यम् (नः)। पंचमी- मत्, आवाभ्याम्, अस्मतू। षष्ठी- मम (मे), आवयोः (नौ), अस्माकम् (नः)। सप्तमी- मयि, आवयोः, अस्मासु。
17. युष्मद् (सर्वनाम - तू / तुम दोनों / तुम सब): प्रथमा- त्वम्, युवाम्, यूयम्। द्वितीया- त्वाम् (त्वा), युवाम्, युष्मान्। तृतीया- त्वया, युवाभ्याम्, युष्माभिः। चतुर्थी- तुभ्यम् (ते), युवाभ्याम् (वाम्), युष्मभ्यम् (वः)। पंचमी- त्वत्, युवाभ्याम्, युष्मत्। षष्ठी- तव (ते), युवयोः (वाम्), युष्माकम् (वः)। सप्तमी- त्वयि, युवयोः, युष्मासु。
18. किम् (प्रश्नवाचक - तीनों लिंगों में):
    - पुल्लिंग: कः, कौ, के / कम्, कौ, कान् / केने, काभ्याम्, कैः / कस्मै, काभ्याम्, केभ्यः / कस्मात्, काभ्याम्, केभ्यः / कस्य, कयोः, केषाम् / कस्मिन्, कयोः, केषु।
    - स्त्रीलिंग: का, के, काः / काम्, के, काः / कया, काभ्याम्, काभिः / कस्यै, काभ्याम्, काभ्यः / कस्याः, काभ्याम्, काभ्यः / कस्याः, तयोः, कासाम् / कस्याम्, तयोः, कासु।
    - नपुंसकलिंग: किम्, के, कानि / किम्, के, कानि (शेष रूप पुल्लिंग के समान चलेंगे)।
In simple words: दिए गए संज्ञा, सर्वनाम और प्रश्नवाचक शब्दों के विभक्ति और वचनों के अनुसार रूप लिखे गए हैं।

Exam Tip: अकारांत पुल्लिंग, आकारांत स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग शब्दों की विभक्तियाँ परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 2. अस्, भू, कृ, पठ, दा (यच्छ) भक्ष, वद्, गम्, दृश्, गस्र, स्था, प्रच्छ, नम्, क्रीड्, पा, एवं नृत् धातुओं के रूप लृट् एवं लङ् लकारों में लिखें।
Answer: सभी धातुओं के रूप लृट् लकार (भविष्यकाल) तथा लङ् लकार (भूतकाल) में इस प्रकार हैं:
1. अस् धातु (होना):
    - लृट् लकार: भविष्यति, भविष्यतः, भविष्यन्ति / भविष्यसि, भविष्यथः, भविष्यथ / भविष्यामि, भविष्यावः, भविष्यामः।
    - लङ् लकार: आसीत्, आस्ताम्, आसन् / आसीः, आस्तम्, आस्त / आसम्, आस्व, आस्म।
2. भू धातु (भव् - होना):
    - लृट् लकार: भविष्यति, भविष्यतः, भविष्यन्ति... (अस् के समान)।
    - लङ् लकार: अभवत्, अभवताम्, अभवन् / अभवः, अभवतम्, अभवत / अभवम्, अभवाव, अभवाम।
3. कृ धातु (करना):
    - लृट् लकार: करिष्यति, करिष्यतः, करिष्यन्ति / करिष्यसि, करिष्यथः, करिष्यथ / करिष्यामि, करिष्यावः, करिष्यामः।
    - लङ् लकार: अकरोत्, अकुरुताम्, अकुर्वन् / अकरोः, अकुरुतम्, अकुरुत / अकरवम्, अकुरुव, अकुरूम।
4. पठ धातु (पढ़ना):
    - लृट् लकार: पठिष्यति, पठिष्यतः, पठिष्यन्ति / पठिष्यसि, पठिष्यथः, पठिष्यथ / पठिष्यामि, पठिष्यावः, पठिष्यामः।
    - लङ् लकार: अपठत्, अपठताम्, अपठन् / अपठः, अपठतम्, अपठत / अपठम्, अपठाव, अपठाम।
5. दा / यच्छ धातु (देना):
    - लृट् लकार: दास्यति, दास्यतः, दास्यन्ति / दास्यसि, दास्यथः, दास्यथ / दास्यामि, दास्यावः, दास्यामः।
    - लङ् लकार: अयच्छत्, अयच्छताम्, अयच्छन् / अयच्छः, अयच्छतम्, अयच्छत / अयच्छम्, अयच्छाव, अयच्छाम।
6. भक्ष धातु (खाना):
    - लृट् लकार: भक्षिष्यति, भक्षिष्यतः, भक्षिष्यन्ति / भक्षिष्यसि, भक्षिष्यथः, भक्षिष्यथ / भक्षिष्यामि, भक्षिष्यावः, भक्षिष्यामः।
    - लङ् लकार: अभक्षयत्, अभक्षयताम्, अभक्षयन् / अभक्षयः, अभक्षयतम्, अभक्षयत / अभक्षयम्, अभक्षयाव, अभक्षयाम।
7. वद् धातु (बोलना):
    - लृट् लकार: वदिष्यति, वदिष्यतः, वदिष्यन्ति... / वदिष्यामि...
    - लङ् लकार: अवदत्, अवदताम्, अवदन् / अवदः, अवदतम्, अवदत / अवदम्, अवदाव, अवदाम।
8. गम् धातु (जाना -गच्छ्):
    - लृट् लकार: गमिष्यति, गमिष्यतः, गमिष्यन्ति / गमिष्यसि... / गमिष्यामि...
    - लङ् लकार: अगच्छत्, अगच्छताम्, अगच्छन् / अगच्छः, अगच्छतम्, अगच्छत / अगच्छम्, अगच्छाव, अगच्छाम।
9. दृश् धातु (देखना -पश्य्):
    - लृट् लकार: द्रक्ष्यति, द्रक्ष्यतः, द्रक्ष्यन्ति / द्रक्ष्यसि... / द्रक्ष्यामि...
    - लङ् लकार: अपश्यत्, अपश्यताम्, अपश्यन् / अपश्यः, अपश्यतम्, अपश्यत / अपश्यम्, अपश्याव, अपश्याम।
10. स्था धातु (रुकना/ठहरना -तिष्ठ्):
    - लृट् लकार: स्थास्यति, स्थास्यतः, स्थास्यन्ति / स्थास्यसि... / स्थास्यामि...
    - लङ् लकार: अतिष्ठत्, अतिष्ठताम्, अतिष्ठन् / अतिष्ठः, अतिष्ठतम्, अतिष्ठत / अतिष्ठम्, अतिष्ठाव, अतिष्ठाम।
11. प्रच्छ धातु (पूछना -पृच्छ्):
    - लृट् लकार: प्रच्छिष्यति या प्रक्ष्यति, प्रक्ष्यतः, प्रक्ष्यन्ति...
    - लङ् लकार: अपृच्छत्, अपृच्छताम्, अपृच्छन् / अपृच्छः, अपृच्छतम्, अपृच्छत / अपृच्छम्, अपृच्छाव, अपृच्छाम।
12. नम् धातु (नमन करना):
    - लृट् लकार: नस्यति / नमिष्यति, नमिष्यतः, नमिष्यन्ति...
    - लङ् लकार: अनमत्, अनमताम्, अनमन् / अनमः, अनमतम्, अनमत / अनमम्, अनमाव, अनमाम।
13. क्रीड् धातु (खेलना):
    - लृट् लकार: क्रीडिष्यति, क्रीडिष्यतः, क्रीडिष्यन्ति...
    - लङ् लकार: अक्रीडत्, अक्रीडताम्, अक्रीडन् / अक्रीडः, अक्रीडतम्, अक्रीडत / अक्रीडम्, अक्रीडाव, अक्रीडाम।
14. पा धातु (पीना -पिब्):
    - लृट् लकार: पास्यति, पास्यतः, पास्यन्ति / पास्यसि... / पास्यामि...
    - लङ् लकार: अपिबत्, अपिबताम्, अपिबन् / अपिबः, अपिबतम्, अपिबत / अपिबम्, अपिबाव, अपिबाम।
15. नृत् धातु (नाचना):
    - लृट् लकार: नर्तिष्यति, नर्तिष्यतः, नर्तिष्यन्ति...
    - लङ् लकार: अनृत्यत्, अनृत्यताम्, अनृत्यन् / अनृत्यः, अनृत्यतम्, अनृत्यत / अनृत्यम्, अनृत्याव, अनृत्यम।
In simple words: लृट् लकार भविष्यकाल और लङ् लकार भूतकाल को दर्शाता है। सभी धातुओं के रूप तीनों पुरुषों और तीनों वचनों में लिखे गए हैं।

Exam Tip: धातु-रूपों को याद करते समय परस्मपद और आत्मनेपद के साथ-साथ उनके लकार के प्रत्ययों का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 3. कारक किसे कहते हैं? कारकों के भेद एवं लक्षण सोदाहरण लिखें।
Answer: कारक की परिभाषा: वाक्य में क्रिया के साथ सीधा संबंध रखने वाले शब्द को 'कारक' कहते हैं। अर्थात, जो शब्द क्रिया को संपन्न करने में अपनी भूमिका निभाते हैं, वे कारक कहलाते हैं।
संस्कृत में कारक छह होते हैं (संबोधन और संबंध को मुख्य कारक नहीं माना जाता):
1. कर्ता कारक (प्रथमा विभक्ति): जो काम को करता है। चिह्न - ने। उदाहरण - बालकः पठति। (बालक पढ़ता है।)
2. कर्म कारक (द्वितीया विभक्ति): जिस पर क्रिया का फल पड़ता है। चिह्न - को। उदाहरण - बालकः पुस्तकं पठति। (बालक पुस्तक पढ़ता है।)
3. करण कारक (तृतीया विभक्ति): जिसकी सहायता से कर्ता काम करता है (साधन)। चिह्न - से / के द्वारा। उदाहरण - सः कलमेन लिखति। (वह कलम से लिखता है।)
4. संप्रदान कारक (चतुर्थी विभक्ति): जिसके लिए कुछ दिया जाए या कार्य किया जाए। चिह्न - के लिए। उदाहरण - नृपः ब्राह्मणाय धनं ददाति। (राजा ब्राह्मण के लिए धन देता है।)
5. अपादान कारक (पंचमी विभक्ति): जिससे किसी वस्तु का अलग होना पाया जाए। चिह्न - से (अलग होना)। उदाहरण - वृक्षात् पर्णं पतति। (पेड़ से पत्ता गिरता है।)
6. संबंध कारक (षष्ठी विभक्ति): जिससे दो वस्तुओं या व्यक्तियों का आपसी संबंध प्रकट हो। चिह्न - का, के, की, रा, री, रे। उदाहरण - एषः रामस्य पुत्रः अस्ति। (यह राम का पुत्र है।)
7. अधिकरण कारक (सप्तमी विभक्ति): जो क्रिया का आधार (स्थान या समय) हो। चिह्न - में, पर। उदाहरण - खगाः वृक्षे वसन्ति। (पक्षी पेड़ पर रहते हैं।)
8. संबोधन: जिसे पुकारा या बुलाया जाए। चिह्न - हे! भो! अरे! उदाहरण - हे बालक! अत्र आगच्छ। (हे बालक! यहाँ आओ।)
In simple words: क्रिया को पूरा करने वाले विभिन्न माध्यम या संज्ञा-सर्वनाम के रूप कारक कहलाते हैं। इनके 6 मुख्य भेद होते हैं।

Exam Tip: कारक चिन्हों और उनसे संबंधित विभक्तियों (जैसे तृतीया, चतुर्थी आदि) को अच्छी तरह याद रखें।

 

Question 4. एक से चार तक संख्याओं को तीनों लिंगों में लिखकर वाक्य में प्रयोग करें।
Answer: एक से चार तक की संख्याएँ तीनों लिंगों में इस प्रकार हैं:
1. एक (1):
    - पुल्लिंग: एकः (उदाहरण: एकः बालः गच्छति। - एक बालक जाता है।)
    - स्त्रीलिंग: एका (उदाहरण: एका बालिका पठति। - एक बालिका पढ़ती है।)
    - नपुंसकलिंग: एकम् (उदाहरण: एकम् पुस्तकम् अस्ति। - एक पुस्तक है।)
2. द्वि (2):
    - पुल्लिंग: द्वौ (उदाहरण: द्वौ बालकौ क्रीडतः। - दो बालक खेलते हैं।)
    - स्त्रीलिंग: द्वे (उदाहरण: द्वे बालिके गच्छतः। - दो लड़कियाँ जाती हैं।)
    - नपुंसकलिंग: द्वे (उदाहरण: द्वे पुस्तके स्तः। - दो पुस्तकें हैं।)
3. त्रि (3):
    - पुल्लिंग: त्रयः (उदाहरण: त्रयः बालकाः पठन्ति। - तीन बालक पढ़ते हैं।)
    - स्त्रीलिंग: तिस्रः (उदाहरण: तिस्रः बालिकाः हसन्ति। - तीन लड़कियाँ हँसती हैं।)
    - नपुंसकलिंग: त्रीणि (उदाहरण: त्रीणि पुस्तकानि सन्ति। - तीन पुस्तकें हैं।)
4. चतुर (4):
    - पुल्लिंग: चत्वारः (उदाहरण: चत्वारः अश्वाः धावन्ति। - चार घोड़े दौड़ते हैं।)
    - स्त्रीलिंग: चतस्रः (उदाहरण: चतस्रः धेनवः चरन्ति। - चार गायें चरती हैं।)
    - नपुंसकलिंग: चत्वारि (उदाहरण: चत्वारि पत्राणि पतन्ति। - चार पत्ते गिरते हैं।)
In simple words: 1 से 4 तक की संख्याएँ पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग में अलग-अलग रूप धारण करती हैं।

Exam Tip: संख्यावाची शब्दों के तीनों लिंगों के रूपों को ध्यान से याद रखें क्योंकि ये प्रायः अशुद्ध किए जाते हैं।

 

Question 5. सप्त श्लोकाः पाठ का अर्थ एवं शिक्षा अपने शब्दों में लिखें।
Answer: 'सप्त श्लोकाः' पाठ में जीवनोपयोगी और नैतिक शिक्षा देने वाले सात श्लोक संकलित हैं। इनका सारांश और शिक्षा निम्नलिखित है:
अर्थ: इन श्लोकों में हमें सत्य बोलने, बड़ों का आदर करने, विद्या ग्रहण करने, समय का सदुपयोग करने, परोपकार करने तथा सज्जनों की संगति करने की प्रेरणा दी गई है। श्लोक हमें सिखाते हैं कि मनुष्य का आचरण ही उसकी असली पहचान होता है।
शिक्षा: हमें सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए, आलस्य का त्याग करना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करना चाहिए। सज्जन व्यक्तियों की संगति से बुद्धि का विकास होता है और जीवन सफल बनता है।
In simple words: 'सप्त श्लोकाः' पाठ हमें जीवन में अच्छे संस्कार, नैतिकता और परोपकार की शिक्षा देता है।

Exam Tip: श्लोकों के हिंदी अर्थ लिखते समय मुख्य संदेश और नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 6. चित्र को देखकर मंजूषा की सहायता से संस्कृत में पाँच वाक्य लिखें। (व्याकरण-पृष्ठ 94, 2रा चित्र)
Answer: मानक रूप से इस प्रकार के चित्र आधारित पाँच वाक्य लिखे जा सकते हैं:
1. इदं चित्रं एकस्य उद्यानस्य अस्ति। (यह चित्र एक बगीचे का है।)
2. उद्याने अनेके बालकाः क्रीडन्ति। (बगीचे में अनेक बालक खेलते हैं।)
3. वृक्षे खगाः कूर्दन्ति कुजन्ति च। (पेड़ पर पक्षी कूदते और कूकते हैं।)
4. अत्र एका सुन्दरा वाटिका अपि अस्ति। (यहाँ एक सुंदर वाटिका भी है।)
5. बालिकाः अपि प्रसन्नाः भवन्ति। (बालिकाएँ भी प्रसन्न होती हैं।)
In simple words: चित्र को देखकर लट लकार (वर्तमान काल) में सरल संस्कृत वाक्यों की रचना की गई है।

Exam Tip: चित्र वर्णन में 'अत्र', 'तत्र', 'अस्ति', 'सन्ति' और 'क्रीडन्ति' जैसे सामान्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 7. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखें- कोकिलः, माता, वनम्, कच्छपः, पिता, उद्यानम्, हस्तः, वृक्षः, नृपः, अध्यापकः।
Answer: दिए गए शब्दों के पर्यायवाची शब्द इस प्रकार हैं:
1. कोकिलः - पिकः, परसबृत्
2. माता - जननी, अंबा, माता
3. वनम् - अरण्यम्, काननम्, विपिनम्
4. कच्छपः - कूर्मः
5. पिता - जनकः, तातः
6. उद्यानम् - वाटिका, उपवनम्
7. हस्तः - करः, पाणिः
8. वृक्षः - पादपः, द्रुमः, तरुः
9. नृपः - भूपालः, राजा, महीपः
10. अध्यापकः - शिक्षकः, आचार्यः
In simple words: समान अर्थ वाले शब्दों को पर्यायवाची शब्द कहते हैं।

Exam Tip: परीक्षाओं में पर्यायवाची शब्दों के सही वर्तनी (स्पेलिंग) का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 8. निम्नलिखित शब्दों के विपर्यय लिखें- एकः, उष्णः, सरसः, मूर्खः, आलोकः।
Answer: दिए गए शब्दों के विलोम (विपर्यय) शब्द इस प्रकार हैं:
1. एकः - अनेकः
2. उष्णः - शीतः (ठंडा)
3. सरसः - नीरसः
4. मूर्खः - विद्वान्, बुद्धिमान्
5. आलोकः - अंधकारः (अंधेरा)
In simple words: उल्टे अर्थ देने वाले शब्दों को विलोम या विपर्यय शब्द कहते हैं।

Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय मूल शब्द के लिंग और वचन का भी ध्यान रखना चाहिए।

 

Question 9. नीचे लिखे वार्तालाप को मंजूषा की सहायता से पूरा करें-
बालकः - तरो मातमही 1........................ करोति?
बाला - 2........................मातमही तु उद्याने भ्रमति।
बालकः - किम् तव मातामही उद्याने न 3........................?
बाला - मम मातामहः 4........................................ उद्याने भ्रमति।
बालकः - मम पितामहः पितामेधा चापि उद्याने एव 5........................।
बाला - तव अम्बा 6........................अस्ति?
बालकः - मम 7...................................... अपि अत्र एव भ्रमति।
बाला - किम् तव 8........................अपि सायंकाले भ्रमति?
बालकः - मम जनकः तु 9........................................ अत्र आगच्छति। सर्वे प्रातः व्यायामं 10........................कुर्वन्ति。
[मम, भ्रमति, अपि, कुत्र, किम्, स्तः, जनकः, अम्बा, कुर्वन्ति, प्रातः काले]
Answer: रिक्त स्थानों की पूर्ति के साथ पूरा वार्तालाप:
बालकः - तव मातामही 1. किम् करोति?
बाला - 2. मम मातामही तु उद्याने भ्रमति।
बालकः - किम् तव मातामही उद्याने न 3. भ्रमति?
बाला - मम मातामहः 4. अपि उद्याने भ्रमति।
बालकः - मम पितामहः पितामेधा चापि उद्याने एव 5. स्तः।
बाला - तव अम्बा 6. कुत्र अस्ति?
बालकः - मम 7. अम्बा अपि अत्र एव भ्रमति।
बाला - किम् तव 8. जनकः अपि सायंकाले भ्रमति?
बालकः - मम जनकः तु 9. प्रातः काले अत्र आगच्छति। सर्वे प्रातः व्यायामं 10. कुर्वन्ति कुर्वन्ति।
In simple words: मंजूषा (सहायक शब्दों के बक्से) में से उचित शब्दों को चुनकर संवाद को पूरा किया गया है।

Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय वाक्य के अर्थ और व्याकरणिक मेल (जैसे वचन और लिंग) की जाँच अवश्य करें।

 

निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दें-

रामपुरः एकः ग्रामः अस्ति। ग्रामे अनेके जनाः निवसन्ति। ग्रामे कृषकाः, चिकित्सकाः, तक्षकाः कुम्भकाराः च वसन्ति। अत्र एकः विद्यालयः अस्ति। विद्यालये छात्राः पठन्ति। अत्र एका वाटिका अपि अस्ति। वाटिकायाम् वानरः भ्रमन्ति खगाः च कूजन्ति।

 

Question 10(क). एक पद में उत्तर दें -
i) वानराः कुत्र भ्रमन्ति?

Answer: वाटिकायाम्
In simple words: वानर वाटिका में घूमते हैं।

Exam Tip: एक पद वाले प्रश्नों में केवल उत्तर का मुख्य शब्द ही लिखना पर्याप्त होता है।

 

Question 10(क-ii). छात्राः कुत्र पठन्ति?
Answer: विद्यालये
In simple words: छात्र विद्यालय में पढ़ते हैं।

Exam Tip: गद्यांश से सटीक शब्द चुनकर लिखें।

 

Question 10(ख). एक वाक्य में उत्तर दें-
i) ग्रामे के के वसन्ति?

Answer: ग्रामे कृषकाः, चिकित्सकाः, तक्षकाः कुम्भकाराः च वसन्ति।
In simple words: गाँव में किसान, चिकित्सक, बढ़ई और कुम्हार रहते हैं।

Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय प्रश्नवाचक शब्द (के) के स्थान पर सही नाम लिखें।

 

Question 10(ख-ii). खगाः किम् कुर्वन्ति?
Answer: खगाः कूजन्ति।
In simple words: पक्षी कूकते (चहचहाते) हैं।

Exam Tip: वाक्य रचना करते समय गद्यांश की पंक्तियों का सटीक प्रयोग करें।

 

Question 10(ग). निर्देशानुसार उत्तर दें-
i) भ्रमन्ति तथा कूजन्ति पदों की धातु लिखें।

Answer:
- भ्रमन्ति पद की धातु = भ्रम् (भ्रम् धातु)
- कूजन्ति पद की धातु = कूज् (कूज् धातु)
In simple words: 'भ्रमन्ति' और 'कूजन्ति' शब्दों के मूल रूप (धातु) लिखे गए हैं।

Exam Tip: धातु लिखते समय उसके नीचे हलंत (्) का ध्यान रखें यदि वह व्यंजनंत हो।

 

Question 10(ग-ii). तक्षकाः तथा वाटिकायाम् पदों की विभक्ति लिखें।
Answer:
- तक्षकाः पद में = प्रथमा विभक्ति (बहुवचन)
- वाटिकायाम् पद में = सप्तमी विभक्ति (एकवचन)
In simple words: पदों की विभक्तियाँ और वचन उनके रूप के अनुसार निर्धारित किए गए हैं।

Exam Tip: विभक्ति और वचन पहचानते समय शब्द के अंत को ध्यान से देखें।

 

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Follow up your worksheet practice by attempting the interactive online MCQ tests for Sanskrit to evaluate your execution speed. All printable assignments and revision sheets on our platform are updated for the 2026 session and available free of charge.

FAQs

Where can I download the 2026-27 CBSE printable worksheets for Class 6 Languages Sanskrit?

You can download the latest chapter-wise printable worksheets for Class 6 Languages Sanskrit for free from StudiesToday.com. These have been made as per the latest CBSE curriculum for this academic year.

Are these Sanskrit Languages worksheets based on the new competency-based education (CBE) model?

Yes, Class 6 Languages worksheets for Sanskrit focus on activity-based learning and also competency-style questions. This helps students to apply theoretical knowledge to practical scenarios.

Do the Class 6 Languages Sanskrit worksheets have answers?

Yes, we have provided solved worksheets for Class 6 Languages Sanskrit to help students verify their answers instantly.

Can I print these Sanskrit Languages test sheets?

Yes, our Class 6 Languages test sheets are mobile-friendly PDFs and can be printed by teachers for classroom.

What is the benefit of solving chapter-wise worksheets for Languages Class 6 Sanskrit?

For Sanskrit, regular practice with our worksheets will improve question-handling speed and help students understand all technical terms and diagrams.