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Explore structured practice materials through the CBSE Class 9 Hindi Revision Worksheet Set 16. Tailored for Class 9 learners, utilizing these Hindi worksheets ensures thorough preparation and strengthens problem-solving accuracy before final school evaluations.
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Access the complete worksheet PDF for Class 9 Hindi below. Regular practice with these targeted academic tasks builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school examinations.
Question 1. निम्नलिखित शब्दों पर अनुस्वार लगाइए।
अक, शंख, गंगा, चंचल, मंजू, ठंडा, कंठ, मंडल, पत, पथ, धंधा, कपतू, कगाल, छुद, गढ़ा, ककाल, खड़, बंद, संवेदना, संवाद्, रखा
Answer: दिए गए शब्दों में सही स्थानों पर अनुस्वार (\(\cdot\)) का प्रयोग करके शब्द इस प्रकार होंगे:
अंक, शंख, गंगा, चंचल, मंजू, ठंडा, कंठ, मंडल, पंत, पंथ, धंधा, कंपू, कंगाल, छुंद, गंदा, कंकाल, खंड, बंद, संवेदना, संवाद, रंक
In simple words: अनुस्वार (बिंदी) का प्रयोग वर्ण के ऊपर पंचम अक्षर के स्थान पर किया जाता है।
Exam Tip: उच्चारण पर ध्यान दें कि ध्वनि नाक से निकल रही है या मुंह से, उसी अनुसार अनुस्वार या अनुनासिक का प्रयोग करें।
Question 2. उचित स्थान पर अनुनासिक लगाइए।
हस, अग, आगन, कुवारा, धूधट, हसना, ऊचा, काच, चाद, दगा, बासुरी, वहा, अधेरा, गवार, जहा, पाचवा, संवारना।
Answer: दिए गए शब्दों में सही स्थानों पर अनुनासिक (चंद्रबिंदु - ँ) का प्रयोग करके शब्द इस प्रकार होंगे:
हंस, अंग, आँगन, कुँवारा, घूँघट, हँसना, ऊँचा, काँच, चाँद, डँगा, बाँसुरी, वहाँ, अँधेरा, गँवार, जहाँ, पाँचवाँ, संवारना।
In simple words: अनुनासिक (चंद्रबिंदु) स्वर के ऊपर लगाया जाता है, जिसके उच्चारण में वायु नाक और मुख दोनों से बाहर निकलती है।
Exam Tip: शिरोरेखा (ऊपर की लाइन) के ऊपर मात्रा होने पर सामान्यतः अनुस्वार (बिंदी) का प्रयोग किया जाता है, किंतु यहाँ चंद्रबिंदु का अभ्यास करना है।
Question 3. उचित स्थान पर नुक्ते का प्रयोग कीजिए।
दरवाजा, इस्तीफ़ा, तूफ़ान, मज़, फतवा, फरमान, ज़रूर, फ़र्ज़, मजबूर, खड़ा, फ़कीर, फ़र्श, मज़दूर, ताज़ा, यार।
Answer: आगत ध्वनियों (अरबी-फ़ारसी शब्दों) के उचित स्थान पर नुक्ता (.) लगाकर शब्द इस प्रकार होंगे:
दरवाज़ा, इस्तीफ़ा, तूफ़ान, मेज़ (मज़), फ़तवा, फ़रमान, ज़रूर, फ़र्ज़, मज़बूर, खड़ा, फ़कीर, फ़र्श, मज़दूर, ताज़ा, यार।
In simple words: आगत ध्वनियों जैसे ज़, फ़ के नीचे नुक्ता लगाया जाता है ताकि उनके सही उच्चारण का पता चले।
Exam Tip: ज और फ वर्णों के नीचे नुक्ता लगाने से विदेशी मूल के शब्दों का सही उच्चारण होता है।
Question 4. उपसर्ग और मूलशब्द अलग कीजिए।
अनावश्यक, उपमान, प्रवास, संसर्ग, संचालन, संस्कृत, अधिकार, निर्वाह, परलोक, अनुभूति, बहया, अवंगत।
Answer: उपसर्ग और मूलशब्द का पृथक्करण नीचे दिया गया है:
1. अनावश्यक = अन + आवश्यक
2. उपमान = उप + मान
3. प्रवास = प्र + वास
4. संसर्ग = सम् + सर्ग
5. संचालन = सम् + चालन
6. संस्कृत = सम् + कृत
7. अधिकार = अधि + कार
8. निर्वाह = निर् + वाह
9. परलोक = पर + लोक
10. अनुभूति = अनु + भूति
11. बहया = ब + हया (या बे + हया)
12. अवंगत = अव + गत
In simple words: उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के आरंभ में लगकर नया अर्थ बनाते हैं।
Exam Tip: संधि युक्त शब्दों में उपसर्ग अलग करते समय मूल शब्द की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
Question 5. प्रत्यय और मूलशब्द अलग कीजिए।
अमृत्व, नकली, चाँदनी, बचपन, प्रेमी, वास्तविक, प्रचलित, थकावट, आश्रय, नगरीय, भारतीय, रंगीन, हवाई।
Answer: प्रत्यय और मूलशब्द का पृथक्करण इस प्रकार है:
1. अमृत्व = अमृत + त्व
2. नकली = नकल + ई
3. चाँदनी = चाँद + नी
4. बचपन = बच्चा + पन
5. प्रेमी = प्रेम + ई
6. वास्तविक = वास्तव + इक
7. प्रचलित = प्रचल + इत
8. थकावट = थक + आवट
9. आश्रय = आ + श्रय (या मूल शब्द आश्रय स्वयं में पूर्ण है)
10. नगरीय = नगर + ईय
11. भारतीय = भारत + ईय
12. रंगीन = रंग + ईन
13. हवाई = हवा + ई
In simple words: प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो शब्द के अंत में जुड़कर नए शब्द बनाते हैं।
Exam Tip: इक प्रत्यय लगने पर शब्द के पहले स्वर में वृद्धि हो जाती है (जैसे वास्तव से वास्तविक)।
Question 6. निम्नलिखित प्रत्ययों से दो-दो शब्द बनाइए।
पूर्वक, ता, आवट, इक, मान, ईला, नी, आई, आर्न, आव, पन, इत, इया, ली, तम, दार, आन, आया।
Answer: दिए गए प्रत्येक प्रत्यय से दो-दो नए शब्द:
1. पूर्वक: आदरपूर्वक, शांतिपूर्वक
2. ता: सुंदरता, महानता
3. आवट: लिखावट, थकावट
4. इक: सामाजिक, धार्मिक
5. मान: बुद्धिमान, श्रीमान
6. ईला: चमकीला, रसीला
7. नी: चटनी, ओढ़नी
8. आई: पढ़ाई, भलाई
9. आर्न: (आर्ण/आरन) फर्राटा, सर्राफा (अथवा प्रासंगिक शब्द)
10. आव: खिंचाव, बहाव
11. पन: अपनापन, बचपन
12. इत: पुष्पित, मोहित
13. इया: बढ़िया, घटिया
14. ली: रंगोली, मतवाली
15. तम: उच्चतम, श्रेष्ठतम
16. दार: समझदार, थानेदार
17. आन: उठान, थकान
18. आया: लगवाया, धुलवाया
In simple words: प्रत्यय को मूल शब्द के अंत में जोड़कर नए सार्थक शब्द बनाए जाते हैं।
Question 7. लगभग 80-100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए।
(i) भ्रष्टाचार (ii) बेकारी की समस्या (iii) प्रदूषण (iv) समय का महत्त्व (v) जीवन में खेलों का महत्त्व (vi) मोबाइल फोन (vii) इंटरनेट (viii) मेट्रो रेल (ix) आत्मविश्वास (x) परोपकार (xi) मित्रता।
Answer:
(iv) समय का महत्त्व:
जीवन में समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है। जो व्यक्ति समय के मूल्य को पहचान लेता है, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। समय नदी के बहते पानी की तरह है जो एक बार निकल जाने पर कभी वापस नहीं आता। विद्यार्थी जीवन में समय का अनुशासन और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। नियमित रूप से पढ़ाई करने और अपने कार्यों को समय पर पूरा करने से मानसिक शांति मिलती है और लक्ष्य प्राप्त करना आसान हो जाता है। अतः हमें हर पल का सदुपयोग करना चाहिए और कभी भी अपना समय व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।
(v) जीवन में खेलों का महत्त्व:
"स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।" यह उक्ति जीवन में खेलों के महत्व को भली-भांति स्पष्ट करती है। खेलकूद केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह हमारे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। खेल खेलने से शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके अतिरिक्त, खेल हमें अनुशासन, टीम भावना, आपसी सहयोग और हार-जीत को खेल की भावना से स्वीकार करना सिखाते हैं। आज के इस दौर में पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी भाग लेना सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है।
In simple words: अनुच्छेद में किसी विषय पर अपने विचार एकबद्ध और स्पष्ट रूप से 80 से 100 शब्दों में लिखे जाते हैं।
Exam Tip: अनुच्छेद लिखते समय प्रस्तावना, विषय-विस्तार और उपसंहार का क्रम बनाए रखें तथा शब्द-सीमा का ध्यान रखें।
Question 8. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
1. माटी, मानुष, चून के संदर्भ में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
2. प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं जुड़ पाता?
3. अपने मन की बात किसी से न कहने के क्या कारण हो सकते हैं?
4. रइदास के दोहों की क्या विशेषताएँ हैं?
5. हमारे जीवन में पाशाक की क्या भूमिका है?
6. भगवाना अपने घर का गुजारा कैसे चलाता था?
7. इस कहानी (दुख का अधिकार) के शीर्षक के औचित्य पर प्रकाश डालिए।
8. पुत्र-वियोग से व्याकुल संभ्रांत महिला की दशा का वर्णन कीजिए।
9. बुढ़िया को रोता देखकर लेखक को कैसा लगा?
10. पोशाकें हमें क्या दिखाती हैं? (अथवा वेशभूषा के संबंध में प्रश्न)
Answer:
1. माटी, मानुष और चून (आटा) तीनों के संदर्भ में पानी का विशेष महत्व है। बिना पानी के मिट्टी से बर्तन नहीं बनाए जा सकते, आटे की रोटी नहीं बनाई जा सकती और मनुष्य का शरीर भी बिना जल के जीवित नहीं रह सकता। पानी इन सभी के अस्तित्व और सृजन का मूल आधार है।
2. रहीम जी के अनुसार प्रेम का संबंध बहुत नाजुक होता है। एक बार यदि यह किसी कारणवश टूट जाए या इसमें दरार आ जाए, तो पहले जैसा विश्वास और अपनापन दोबारा स्थापित नहीं हो पाता। जिस प्रकार टूटे हुए धागे को जोड़ने पर गांठ पड़ जाती है, वैसे ही संबंधों में भी खटास रह जाती है।
3. अपने मन की बात किसी से न कहने के मुख्य कारण यह हैं कि लोग अक्सर दूसरों के दुखों का मज़ाक उड़ाते हैं, वे सच्चे मन से सहानुकूलता नहीं रखते, या फिर व्यक्ति को अपने राज़ दूसरों के सामने खुलने का भय रहता है।
4. रैदास के दोहों की मुख्य विशेषता यह है कि वे बेहद सरल, सहज और आम जनमानस की भाषा में लिखे गए हैं। इनमें दृष्टांतों (उदाहरणों) के माध्यम से गहरे दार्शनिक और आध्यात्मिक सत्यों को सहज ही समझाया गया है तथा भक्ति की सच्ची भावना पर जोर दिया गया है।
5. समाज में पोशाक या वेशभूषा व्यक्ति की सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान और उसकी औकात को निर्धारित करती है। पोशाक ही समाज में आदमी का दर्जा तय करती है कि वह उच्च वर्ग से है या निम्न वर्ग से।
6. भगवाना खरबूजे बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण और गुजारा चलाता था। वह सुबह-सवेरे टोकरी में खरबूजे सजाकर बेचने के लिए बाजार ले जाता था।
7. 'दुख का अधिकार' कहानी का शीर्षक पूरी तरह से सार्थक औरोचित है। यह कहानी यह बताती है कि समाज में दुख मनाने का अधिकार भी केवल उच्च वर्ग और संभ्रांत लोगों को ही प्राप्त है, गरीबों को अपने प्रियजन की मृत्यु पर भी शोक मनाने या बैठने की अनुमति समाज नहीं देता।
8. पुत्र-वियोग से दुखी संभ्रांत (अभिजात वर्ग की) महिला अपने घर में पलंग पर लेटी हुई थी। वह अहोभाव और मूर्च्छा की स्थिति में थी। उसके चारों ओर डॉक्टरों और चिकित्सकों का तांता लगा हुआ था और उसके रोने-विलाप करने पर पूरा घर उसकी सेवा में जुटा हुआ था।
9. बुढ़िया को सड़क पर बैठकर इस प्रकार फफक-फफक कर रोते देख लेखक के मन में उसके प्रति करुणा और संवेदना जाग्रत हुई। लेखक को यह सोचकर बहुत दुख हुआ कि समाज में दुख और पीड़ा भी वर्ग-भेद के आधार पर बंटी हुई है।
10. पोशाकें मनुष्य को समाज में विभिन्न श्रेणियों और स्तरों में बांटती हैं। वे व्यक्ति का अधिकार क्षेत्र तय करती हैं और कई बार हमें समाज के क्रूर और अमानवीय नियमों का आईना दिखाती हैं।
In simple words: ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक स्पर्श और संचयन के विभिन्न पाठों से लिए गए हैं, जिनके उत्तर कथावस्तु और केंद्रीय भाव पर आधारित हैं।
Exam Tip: गद्य एवं पद्य के प्रश्नों के उत्तर देते समय पाठ का नाम और लेखक/कवि का संदर्भ देना लाभकारी होता है।
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