NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 7 Social Science Chapter 02 मौसम को समझना

Review structured textbook solutions for Class 7 Social Science Chapter 02 मौसम को समझना. Built according to NCERT guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.

Download Chapter 02 मौसम को समझना Textbook Solutions PDF

View or download the dedicated Chapter 02 मौसम को समझना solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 curriculum for Social Science.

Question 1: हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं निरीक्षण किस प्रकार कर सकते हैं?

Answer:

हम मौसम का आकलन और निरीक्षण निम्नलिखित तरीकों से कर सकते हैं:
• अनुभव से: हम अपने शरीर पर गर्मी, ठंड, हवा या नमी को महसूस करके।
• आँखों से: आसमान में बादलों को देखकर, वर्षा या बर्फबारी को देखकर।
• उपकरणों से: तापमान को तापमापी से, वर्षा को वर्षामापी से और हवा को पवन वेगमापी से माpकर।
• प्रकृति के संकेतों से: जैसे, पक्षियों को कम ऊँचाई पर उड़ते देखकर या मेंढकों की टर्राहट सुनकर।

मुख्य बिंदु:

• मौसम का निरीक्षण शारीरिक संवेदनाओं और दृश्य संकेतों दोनों से होता है।
• वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग सटीक माप के लिए किया जाता है।
• प्राकृतिक संकेत पारंपरिक रूप से मौसम का अनुमान लगाने में मदद करते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल एक तरीके (जैसे केवल देखना) को मौसम आकलन का एकमात्र साधन समझना।
• वैज्ञानिक उपकरणों के नाम और उनके उपयोग में भ्रमित होना।
• प्राकृतिक संकेतों की अनदेखी करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को बिंदुओं में लिखें ताकि परीक्षक को जाँचने में आसानी हो।
b) उपकरणों के नाम सही स्पेलिंग के साथ याद रखें।
c) दैनिक जीवन के उदाहरणों को उत्तर में शामिल करें।

 

Question 2: भारी वर्षा, तूफान, सूखा और ताप लहर (हीट वेव) जैसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में मौसम की भविष्यवाणियाँ किस प्रकार हमारी सहायता करती हैं?

Answer:

मौसम की भविष्यवाणियाँ हमें इन घटनाओं के लिए तैयार रहने में बहुत मदद करती हैं:
• जीवन रक्षा: तूफान (चक्रवात) और भारी वर्षा की चेतावनी मिलने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सकता है।
• कृषि: किसान वर्षा या सूखे के पूर्वानुमान के अनुसार बुवाई या कटाई की योजना बना सकते हैं।
• यात्रा: पायलट, नाविक और मछुआरे यात्राएँ टाल सकते हैं या मार्ग बदल सकते हैं।
• ऊर्जा/स्वास्थ्य: ताप लहर की चेतावनी मिलने पर लोग पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचने के लिए तैयार रहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• भविष्यवाणियाँ आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
• कृषि और परिवहन क्षेत्र मौसम की जानकारी पर अत्यधिक निर्भर हैं।
• समय पर चेतावनी मिलने से जान-माल की हानि को रोका जा सकता है।

आम गलतियाँ:

• केवल कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव को लिखना और अन्य क्षेत्रों को छोड़ देना।
• 'हीट वेव' और 'चक्रवात' जैसी विशेष शब्दावली का स्पष्ट उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) क्षेत्रों के आधार पर (जैसे कृषि, यात्रा, स्वास्थ्य) अलग-अलग बिंदु बनाएँ।
b) 'जीवन रक्षा' और 'आपदा प्रबंधन' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 3: मौसम के तत्वों का उनके मापने वाले उपकरणों के साथ मिलान कीजिए।

Answer:

मौसम के विभिन्न तत्वों और उनके मापने वाले उपकरणों का सही मिलान इस प्रकार है:
• (1) आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) — (घ) आर्द्रता
• (2) पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) — (ग) वायु की दिशा और गति
• (3) वायुदबाबपी (बैरोमीटर) — (ख) वायुमंडलीय दाब
• (4) तापमापी (थर्मामीटर) — (ङ) तापमान
• (5) वर्षामापी (रेन गेज) — (क) वर्षण (प्रेसिपिटेशन)

मुख्य बिंदु:

• प्रत्येक मौसम तत्व के लिए एक विशिष्ट वैज्ञानिक उपकरण होता है।
• हाइग्रोमीटर आर्द्रता मापता है और बैरोमीटर वायुदाब मापता है।
• एनीमोमीटर पवन की गति और दिशा दोनों का आकलन करता है।

आम गलतियाँ:

• तापमापी और वर्षामापी के कार्यों को आपस में मिला देना।
• अंग्रेजी नाम (जैसे बैरोमीटर और हाइग्रोमीटर) में वर्तनी की अशुद्धि करना।

Exam Tips:

a) मिलान करते समय रेखाएँ स्पष्ट खींचें या सामने सही विकल्प लिखें।
b) उपकरणों के नाम और उनके द्वारा मापे जाने वाले भौतिक गुणों की सूची बना लें।

 

Question 4: ज्योत्स्ना यह सोच रही है कि जून में मुंबई में अपनी विद्यालय यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह मौसम के पूर्वानुमान को देखती है, जो 29 डिग्री सेल्सियस और 84 प्रतिशत आर्द्रता की भविष्यवाणी करता है। आप उसको क्या सलाह देंगे?

Answer:

ज्योत्स्ना को हमारी सलाह निम्नलिखित होगी:
1. हल्के सूती कपड़े: उसे हल्के रंग के और ढीले-ढाले सूती कपड़े साथ ले जाने चाहिए। कारण: \( 29^\circ\text{C} \) तापमान के साथ 84% आर्द्रता का अर्थ है कि हवा में बहुत नमी होगी। ऐसे मौसम में पसीना बहुत आता है और हवा में नमी होने के कारण वह जल्दी नहीं सूखता। सूती कपड़े पसीना सोख लेते हैं और शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं।
2. छाता या बरसाती: उसे अपने साथ एक छाता या रेनकोट जरूर रखना चाहिए। कारण: जून का महीना मुंबई में मानसून के आगमन का समय होता है। 84% आर्द्रता भी इस बात का संकेत है कि बारिश होने की प्रबल संभावना है।
3. सिंथेटिक कपड़ों से बचें: उसे नायलॉन या सिंथेटिक कपड़े नहीं ले जाने चाहिए क्योंकि वे पसीना नहीं सोखते और ऐसे उमस भरे मौसम में त्वचा के लिए आरामदायक नहीं होते।

मुख्य बिंदु:

• उच्च आर्द्रता और तापमान पसीने के वाष्पीकरण को रोकते हैं।
• मुंबई में जून के समय मानसून सक्रिय होता है।
• सूती कपड़े पसीने को सोखकर ठंडक प्रदान करते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल तापमान को ध्यान में रखकर कपड़े चुनना और आर्द्रता की उपेक्षा करना।
• मुंबई की जलवायु और मानसून की स्थिति पर विचार न करना।

Exam Tips:

a) कारण सहित उत्तर दें ताकि तार्किकता स्पष्ट हो।
b) वैज्ञानिक कारकों (जैसे आर्द्रता और वाष्पीकरण) का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 5: कल्पना कीजिए कि आपका एक छोटा समूह वर्षामापी यंत्र स्थापित कर रहा है। यहाँ उसे स्थापित करने के स्थान के कुछ विकल्प दिए गए हैं – 1. विद्यालय का सब्जी उद्यान। 2. विद्यालय भवन की छत। 3. ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान। 4. विद्यालय परिसर की दीवार। 5. विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा। अपने समूह के साथ चर्चा कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त स्थान का निर्धारण कीजिए। अपने निर्णय के कारणों को लिखिए।

Answer:

सर्वाधिक उपयुक्त स्थान: विकल्प 3 – ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।
कारण: हमें वर्षामापी स्थापित करने के लिए इस स्थान को चुनने के निम्नलिखित कारण हैं:
1. कोई रुकावट नहीं: वर्षामापी को हमेशा खुले स्थान में रखना चाहिए जहाँ आसमान साफ हो। खुले मैदान में कोई पेड़, दीवार या छत नहीं होती, जिससे बारिश का पानी सीधा कीप में गिर सके।
2. छींटों से बचाव: इसे ऊँचे चबूतरे पर रखना सबसे अच्छा है ताकि जमीन से टकराकर उछलने वाले पानी की बूंदें इसके अंदर न जा सकें।
3. स्थिरता: चबूतरा समतल और ठोस सतह प्रदान करता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
• प्रयोगशाला का बरामदा: ऊपर छत होने के कारण इसमें बारिश का पानी नहीं गिरेगा।
• विद्यालय भवन की छत: यहाँ हवा की गति बहुत तेज हो सकती है, जो बारिश की बूंदों को कीप से दूर उड़ा सकती है।
• सब्जी उद्यान: पौधों की पत्तियाँ बारिश के पानी को रोक सकती हैं।

मुख्य बिंदु:

• वर्षामापी को खुले और बाधा-मुक्त स्थान पर रखा जाना चाहिए।
• जमीन के छींटों से बचने के लिए इसे थोड़ी ऊँचाई पर रखना आवश्यक है।
• छतों पर हवा का तेज प्रवाह माप को प्रभावित कर सकता है।

आम गलतियाँ:

• छत या बरामदे को सही स्थान मान लेना जहाँ पानी सीधे एकत्र नहीं हो सकता।
• चबूतरे की आवश्यकता (छींटों से बचाव) के कारण को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) सही विकल्प के साथ-साथ अन्य विकल्पों के गलत होने के कारण भी लिखें।
b) वैज्ञानिक माप की शुद्धता बनाए रखने वाले कारकों पर जोर दें।

 

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Chapter 02 मौसम को समझना

Official NCERT Solutions for Chapter 02 मौसम को समझना

Review comprehensive exercise answers for Class 7 Social Science Chapter 02 मौसम को समझना. Fully updated to match current NCERT syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.

Step-by-Step Explanations for Chapter 02 मौसम को समझना

Each solution includes detailed reasoning to foster genuine comprehension of Chapter 02 मौसम को समझना concepts. Reviewing these step-by-step breakdowns allows learners to master both analytical and descriptive questions expected in school evaluations.

Next Steps in Your Social Science Revision

Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 7 Social Science.

FAQs

Where can I find the latest NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi for the 2026-27 session?

The complete and updated NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 7 Social Science are as per latest NCERT curriculum.

Are the Social Science NCERT solutions for Class 7 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Social Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 7 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 7 Social Science. You can access NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Social Science NCERT solutions for Class 7 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 02 Understanding the Weather (मौसम को समझना) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.