Step-by-Step Textbook Solutions for Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा
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Question 1: चित्र में प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित वस्तुओं को दर्शाया गया है। उन्हें उनके अव्यवस्थित नामों से मिलाइए। एक अन्य तालिका बनाइए और इन संसाधनों के नाम लिखिए। इन संसाधनों को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के रूप में वर्गीकृत कीजिए।
आकृति का विवरण: चित्र में चार प्राकृतिक संसाधन नल से गिरता जल, पवनचक्की (पवन ऊर्जा), हरा-भरा जंगल (वन) और एक बड़ा पत्थर (चट्टान) दर्शाए गए हैं, जिनके सामने अव्यवस्थित शब्द नटाट्टच, नव, नवप और लज दिए गए हैं।
Answer:
चित्र में दर्शाई गई वस्तुओं, उनके सुलझाए गए व्यवस्थित नामों तथा नवीकरणीय (renewable) व अनवीकरणीय (non-renewable) वर्गीकरण का विवरण इस प्रकार है:
1. नल से गिरता पानी — अव्यवस्थित नाम 'लज' का सही व्यवस्थित रूप 'जल' (Water) है। यह एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है क्योंकि जल चक्र के माध्यम से इसकी निरंतर पुनःपूर्ति होती रहती है।
2. पवनचक्की — अव्यवस्थित नाम 'नवप' का सही व्यवस्थित रूप 'पवन' (Wind) है। यह एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है जो प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध है।
3. जंगल — अव्यवस्थित नाम 'नव' का सही व्यवस्थित रूप 'वन' (Forest) है। यह एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है, किंतु इसका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है ताकि इसके प्राकृतिक पुनरुत्पादन की गति बनी रहे।
4. बड़ा पत्थर — अव्यवस्थित नाम 'नटाट्टच' का सही व्यवस्थित रूप 'चट्टान' (Rock) है। यह एक अनवीकरणीय संसाधन है क्योंकि चट्टानों और खनिजों के निर्माण में भूगर्भीय प्रक्रियाओं द्वारा लाखों वर्ष लग जाते हैं तथा इनका सीमित भंडार होता है।
मुख्य बिंदु:
• जल, पवन और वन प्राकृतिक रूप से पुनः चक्रित या पुनरुत्पादित होने वाले नवीकरणीय संसाधन हैं।
• चट्टानें और खनिज सीमित मात्रा में उपलब्ध अनवीकरणीय संसाधन हैं जिनका निर्माण अत्यधिक मंद गति से होता है।
• अव्यवस्थित अक्षरों को सही क्रम में व्यवस्थित करके प्राकृतिक घटकों की पहचान की जाती है।
आम गलतियाँ:
• चट्टान को नवीकरणीय संसाधन की श्रेणी में रख देना।
• अक्षरों को सुलझाते समय वर्तनी में अशुद्धि करना (जैसे 'चट्टान' के स्थान पर गलत वर्ण लिखना)।
• वर्गीकरण का वैज्ञानिक आधार (पुनःपूर्ति की दर) स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) परीक्षा में वस्तु का चित्र/नाम, व्यवस्थित नाम तथा संसाधन का प्रकार तीन स्तंभों की तालिका बनाकर लिखें।
b) वर्गीकरण लिखते समय 'नवीकरणीय' और 'अनवीकरणीय' की सही वर्तनी पर ध्यान दें।
c) प्रत्येक संसाधन के नवीकरणीय या अनवीकरणीय होने का एक पंक्ति में कारण अवश्य लिखें।
Question 2: बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य? यदि असत्य है, तो उन्हें सही कर के पुनः लिखिए —
(क) प्रकृति में मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। [ ]
(ख) मशीन प्रकृति में पाया जाने वाला एक संसाधन है। [ ]
(ग) प्राकृतिक गैस एक अनवीकरणीय संसाधन है। [ ]
(घ) वायु एक नवीकरणीय संसाधन है। [ ]
Answer:
(क) सत्य [✓] — प्रकृति में सभी सजीवों और मानव की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रचुर संसाधन उपलब्ध हैं, बशर्ते इनका उपयोग संयमित, संतुलित और धारणीय तरीके से किया जाए, न कि लालच और अति-दोहन के लिए।
(ख) असत्य [✗] — कारण: मशीन प्रकृति में स्वतः नहीं पाई जाती, बल्कि यह मानव द्वारा निर्मित एक तकनीकी उपकरण है।
सही कथन: मशीन मानव-निर्मित (कृत्रिम) संसाधन है, न कि प्रकृति में पाया जाने वाला प्राकृतिक संसाधन।
(ग) सत्य [✓] — प्राकृतिक गैस (Natural Gas) एक जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) है जो पृथ्वी के भीतर लाखों वर्षों में जैविक पदार्थों के अपघटन से निर्मित हुई है। इसके भंडार सीमित हैं और एक बार समाप्त होने पर इसकी त्वरित पुनःपूर्ति असंभव है, अतः यह अनवीकरणीय संसाधन है।
(घ) सत्य [✓] — वायु एक नवीकरणीय संसाधन है क्योंकि यह प्रकृति में सर्वत्र प्रचुर मात्रा में विद्यमान है और प्राकृतिक जैव-रासायनिक चक्रों (जैसे प्रकाश-संश्लेषण और श्वसन) द्वारा इसके घटकों का संतुलन निरंतर बना रहता है।
मुख्य बिंदु:
• प्राकृतिक संसाधन प्रकृति द्वारा प्रदत्त उपहार हैं, जबकि मशीनें मानव-निर्मित हैं।
• जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस अनवीकरणीय संसाधन हैं।
• वायु और सौर ऊर्जा असीमित एवं निरंतर नवीनीकृत होने वाले संसाधन हैं।
आम गलतियाँ:
• असत्य कथन को केवल 'असत्य' लिखकर छोड़ देना और प्रश्न के निर्देशानुसार उसे सही करके पुनः न लिखना।
• प्राकृतिक गैस को गैस समझकर वायु की तरह नवीकरणीय मान लेना।
• मशीनों को उनके कच्चे माल (लोहा आदि) के आधार पर प्राकृतिक मान बैठना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक उप-भाग (क, ख, ग, घ) के सामने कोष्ठक में स्पष्ट रूप से [सत्य] या [असत्य] अंकित करें।
b) असत्य कथन के ठीक नीचे 'संशोधित सही कथन' शीर्षक डालकर वाक्य को दोबारा लिखें।
c) सत्य कथनों के पीछे भी एक पंक्ति का वैज्ञानिक तर्क जोड़ना उत्तम अंक दिलाता है।
Question 3: सबसे उपयुक्त विकल्प का उपयोग करके रिक्त स्थान भरें।
3.1 ईंधन जो सामान्यतः स्कूटर या बाइक जैसे दोपहिया वाहनों में उपयोग किया जाता है ....
(क) मिट्टी का तेल
(ख) पेट्रोल
(ग) डीजल
(घ) सी.एन.जी.
3.2 नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है ....
(क) कोयला
(ख) जल
(ग) प्राकृतिक गैस
(घ) पेट्रोल
Answer:
3.1 सही उत्तर: (ख) पेट्रोल
स्पष्टीकरण: स्कूटर, मोटरसाइकिल और बाइक जैसे हल्के दोपहिया वाहनों में आंतरिक दहन इंजन (internal combustion engine) के संचालन के लिए सामान्यतः हल्के और त्वरित प्रज्वलनशील पेट्रोलियम उत्पाद 'पेट्रोल' (Petrol) का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। डीजल का उपयोग मुख्य रूप से भारी वाहनों जैसे बस और ट्रक में होता है, जबकि मिट्टी के तेल का उपयोग घरेलू रोशनी या स्टोव में होता है।
3.2 सही उत्तर: (ख) जल
स्पष्टीकरण: जल (Water) एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन (renewable resource) है, क्योंकि यह जल चक्र (water cycle) की सतत भौतिक प्रक्रियाओं—वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा—द्वारा निरंतर पुनःप्राप्त और पुनर्चक्रित होता रहता है। इसके विपरीत कोयला, प्राकृतिक गैस और पेट्रोल जीवाश्म ईंधन होने के कारण अनवीकरणीय संसाधन हैं जिनके भंडार सीमित हैं।
मुख्य बिंदु:
• दोपहिया और हल्के वाहनों का प्राथमिक ईंधन पेट्रोल है।
• जल, वायु और सूर्य का प्रकाश प्रमुख नवीकरणीय संसाधन हैं।
• कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस अनवीकरणीय जीवाश्म ईंधनों की श्रेणी में आते हैं।
आम गलतियाँ:
• दोपहिया वाहनों के लिए डीजल या सी.एन.जी. का विकल्प चुन लेना।
• जल को सीमित मानकर अनवीकरणीय श्रेणी में गिन लेना (जल का नवीनीकरण चक्र द्वारा होता है, यद्यपि स्वच्छ जल का संरक्षण आवश्यक है)।
• केवल विकल्प संख्या लिख देना और व्याख्या छोड़ देना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में प्रश्न संख्या के साथ सही विकल्प का अक्षर और उसका नाम दोनों लिखें।
b) उत्तर के समर्थन में एक संक्षिप्त वैज्ञानिक कारण अवश्य दें।
c) जीवाश्म ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के अंतर को ध्यान में रखें।
Question 4: निम्नलिखित को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के रूप में वर्गीकृत करें —
कोयला, प्राकृतिक गैस, वन और खनिज।
Answer:
दिए गए संसाधनों का नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों में वैज्ञानिक वर्गीकरण निम्नलिखित है:
1. नवीकरणीय संसाधन (Renewable resources):
• वन (Forest) — पेड़-पौधों और वनस्पतियों में प्राकृतिक रूप से प्रजनन और पुनरुत्पादन की क्षमता होती है। यदि वनों की कटाई की दर से अधिक दर पर नए पौधे लगाए जाएँ, तो वन निरंतर बने रहते हैं।
2. अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable resources):
• कोयला (Coal) — यह एक ठोस जीवाश्म ईंधन है जिसका निर्माण पृथ्वी के नीचे उच्च ताप और दाब पर लाखों वर्षों में हुआ है; इसके भंडार सीमित हैं।
• प्राकृतिक गैस (Natural Gas) — यह भी एक सीमित गैसीय जीवाश्म ईंधन है जो निरंतर उपयोग से समाप्त हो जाएगा।
• खनिज (Minerals) — लोहा, ताँबा, बॉक्साइट आदि धात्विक व अधात्विक खनिज भूगर्भीय प्रक्रियाओं से निर्मित सीमित अजैविक संपदा हैं, जिनकी त्वरित पुनःपूर्ति संभव नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• वन एक जैविक नवीकरणीय संसाधन है जो उचित प्रबंधन से सदैव उपलब्ध रह सकता है।
• कोयला और प्राकृतिक गैस दोनों जीवाश्म ईंधन हैं जो अनवीकरणीय हैं।
• खनिज पदार्थों के निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं, अतः इनका उपयोग पुनर्चक्रण द्वारा ही धारणीय बनाया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• वनों को अंधाधुंध कटाई के कारण अनवीकरणीय मान लेना (वैज्ञानिक दृष्टि से वन नवीकरणीय जैविक संसाधन हैं)।
• खनिजों को पुनः चक्रित किए जाने के कारण नवीकरणीय समझ लेना (खनिजों के प्राकृतिक भंडार सीमित और अनवीकरणीय होते हैं)।
• वर्गीकरण को बिना किसी शीर्षक के अव्यवस्थित लिखना।
Exam Tips:
a) दो अलग-अलग उपशीर्षक ('नवीकरणीय संसाधन' और 'अनवीकरणीय संसाधन') बनाकर उत्तर लिखें।
b) प्रत्येक संसाधन के सामने उसका संक्षिप्त वर्गीकरण कारण भी स्पष्ट करें।
c) परीक्षा में सभी चार तत्वों (कोयला, प्राकृतिक गैस, वन, खनिज) का समावेश सुनिश्चित करें।
Question 5: हम यह क्यों कहते हैं कि पेट्रोलियम एक अनवीकरणीय संसाधन है?
Answer:
पेट्रोलियम को अनवीकरणीय संसाधन (non-renewable resource) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके निर्माण की प्राकृतिक प्रक्रिया अत्यधिक जटिल, धीमी और लाखों वर्षों की लंबी भूगर्भीय कालावधि लेती है। प्राचीन काल में समुद्र और दलदलों में दबे मृत समुद्री जीवों व सूक्ष्म वनस्पतियों के अवशेष उच्च ताप, अत्यधिक दाब और ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में रासायनिक परिवर्तनों द्वारा धीरे-धीरे पेट्रोलियम (कच्चे तेल) में परिवर्तित हुए थे। वर्तमान में मानव जिस तीव्र गति से पेट्रोलियम का निष्कर्षण और उपभोग कर रहा है, उसकी तुलना में इसके प्राकृतिक पुनरुत्पादन की गति नगण्य है। पृथ्वी के गर्भ में इसके संचित भंडार अत्यंत सीमित हैं और एक बार पूरी तरह समाप्त हो जाने पर मानव कालखंड में इसकी पुनःपूर्ति असंभव है।
मुख्य बिंदु:
• पेट्रोलियम के निर्माण में लाखों वर्षों का भूगर्भीय समय लगता है।
• यह उच्च ताप और दाब में दबे प्राचीन जैव अवशेषों से निर्मित जीवाश्म ईंधन है।
• इसके उपभोग की दर इसके प्राकृतिक निर्माण की दर से लाखों गुना अधिक है, जिससे इसके भंडार सीमित हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल यह लिखना कि 'यह जमीन से निकलता है इसलिए अनवीकरणीय है'।
• निर्माण प्रक्रिया में लगने वाले लाखों वर्षों के समय का उल्लेख न करना।
• उपभोग की तीव्र गति और सीमित भंडार के वैज्ञानिक संबंध को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) 'जीवाश्म ईंधन', 'सीमित भंडार' और 'लाखों वर्षों की निर्माण अवधि' जैसे मुख्य वाक्यांश अवश्य लिखें।
b) उत्तर को एक सशक्त, तार्किक और धाराप्रवाह गद्यांश के रूप में प्रस्तुत करें।
c) स्पष्ट करें कि हमारे जीवनकाल में इसकी पुनःपूर्ति संभव क्यों नहीं है।
Question 6: वनों को पुनः उगाना कठिन है। इस कथन की पुष्टि कीजिए।
Answer:
वनों को पुनः उगाना अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि एक वास्तविक वन केवल वृक्षों का समूह नहीं होता, बल्कि वह एक अत्यंत जटिल, परिपक्व और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) होता है। एक प्राकृतिक वन को पूर्ण रूप से विकसित होने में कई दशकों से लेकर सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं, जिसमें विशाल वृक्ष, झाड़ियाँ, लताएँ, जड़ी-बूटियाँ, वन्यजीव, पक्षी, कीट और मृदा के सूक्ष्मजीव एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर होते हैं। जब किसी वन को काट दिया जाता है, तो वहाँ की उपजाऊ ऊपरी मृदा का अपरदन (soil erosion) हो जाता है, उसकी नमी और सूक्ष्मजीवी जीवन नष्ट हो जाता है, तथा अनेक प्रजातियों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो जाता है। यद्यपि हम नए पौधे लगा सकते हैं (वनीकरण कर सकते हैं), परंतु उस मूल प्राकृतिक जैव-विविधता, सूक्ष्म जलवायु और जटिल खाद्य जालों को दोबारा उसी रूप में स्थापित करना लगभग असंभव और अत्यंत समय-साध्य होता है।
मुख्य बिंदु:
• वन एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र है जिसे विकसित होने में कई दशक या शताब्दियाँ लगती हैं।
• वनों की कटाई से उपजाऊ मृदा, नमी और सूक्ष्मजीवों का संतुलन हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है।
• केवल वृक्षारोपण करने से प्राकृतिक वन की मूल जैव-विविधता तुरंत वापस नहीं आ सकती।
आम गलतियाँ:
• वनों को केवल 'पेड़' समझ लेना और यह तर्क देना कि नया बीज बोते ही वन बन जाता है।
• जैव-विविधता (flora, fauna, microorganisms) और पारिस्थितिक तंत्र के पहलू की उपेक्षा करना।
• मृदा अपरदन और जल चक्र पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) 'पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem)' और 'जैव-विविधता (biodiversity)' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) समय सीमा (दशकों/शताब्दियों) और मृदा की उर्वरता के नुकसान को तार्किक रूप से समझाएँ।
c) उत्तर को पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से प्रभावशाली बनाएँ।
Question 7: पाँच दैनिक गतिविधियों की सूची बनाइए जहाँ आप प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हैं। उनका उपयोग कम करने की विधियाँ सुझाइए।
Answer:
दैनिक जीवन की पाँच प्रमुख गतिविधियाँ जहाँ प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है तथा उनके संरक्षण की प्रभावी विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. स्नान एवं दैनिक स्वच्छता (जल का उपयोग): फव्वारे (shower) से लंबे समय तक नहाने या खुला नल छोड़कर ब्रश करने के बजाय बाल्टी और मग का उपयोग करें तथा अपव्यय रोकें।
2. घरेलू प्रकाश एवं उपकरण संचालन (विद्युत/कोयला आधारित ऊर्जा): कमरे से बाहर निकलते समय पंखे और बत्तियाँ बंद करें तथा ऊर्जा-दक्ष एलईडी (LED) बल्बों का उपयोग करें।
3. विद्यालय या बाजार आवागमन (पेट्रोल/डीजल): निजी कार या बाइक के स्थान पर पैदल चलने, साइकिल चलाने या सार्वजनिक परिवहन (बस/मेट्रो) का अधिकाधिक उपयोग करें।
4. अध्ययन एवं लेखन कार्य (कागज/वन संसाधन): कागज के दोनों पृष्ठों पर लिखें, अनुपयोगी कागजों का पुनर्चक्रण करें और डिजिटल साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग कर कागजी बर्बादी रोकें।
5. भोजन पकाना (एलपीजी/प्राकृतिक गैस): खाना बनाते समय बर्तनों को ढक्कन से ढककर पकाएँ, दालों को पकाने से पूर्व पानी में भिगोएँ तथा प्रेशर कुकर का उपयोग करके ईंधन की बचत करें।
मुख्य बिंदु:
• जल, ऊर्जा (जीवाश्म ईंधन), पेट्रोलियम, वन (कागज) और गैस दैनिक उपभोग के मुख्य संसाधन हैं।
• व्यक्तिगत आदतों में सुधार और अपव्यय रोककर संसाधनों का संरक्षण संभव है।
• पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग और आवश्यकता में कटौती (3R सिद्धांत) ऊर्जा संरक्षण के आधार हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल गतिविधियों के नाम लिख देना और उन्हें कम करने या बचाने के उपाय न बताना।
• अवास्तविक उपाय सुझाना जो दैनिक जीवन में व्यावहारिक न हों।
• पाँच से कम गतिविधियाँ सूचीबद्ध करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक गतिविधि के साथ उपयोग होने वाले संसाधन और उसके बचत उपाय को आमने-सामने स्पष्ट लिखें।
b) व्यावहारिक एवं सरल सुझाव दें जिन्हें एक विद्यार्थी अपने जीवन में अपना सके।
c) उत्तर को 1 से 5 तक क्रमबद्ध बिंदुओं में प्रस्तुत करें।
Question 8: चार गतिविधियों की सूची बनाइए जो वायु की उपस्थिति में संभव हैं।
Answer:
वायु (Air) की प्रत्यक्ष उपस्थिति और उसके भौतिक-रासायनिक गुणों के कारण संभव होने वाली चार महत्वपूर्ण गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. सभी सजीवों का श्वसन (Respiration): मनुष्य, जंतु और पौधे जीवित रहने के लिए वायु से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं; वायु के अभाव में सजीवों का अस्तित्व असंभव है।
2. दहन एवं आग का जलना (Combustion): किसी भी ईंधन, मोमबत्ती या लकड़ी को जलने के लिए वायु में उपस्थित ऑक्सीजन गैस अनिवार्य होती है; वायु की अनुपस्थिति में आग तुरंत बुझ जाती है।
3. पौधों में परागण एवं बीजों का प्रकीर्णन (Pollination and Seed Dispersal): पवन (गतिशील वायु) घास, मक्का और कई वृक्षों के हल्के परागकणों तथा रोमयुक्त बीजों को दूर-दूर तक उड़ाकर ले जाती है, जिससे वनस्पतियों का प्रजनन और प्रसार संभव होता है।
4. मौसम चक्र, मेघों की गति एवं पतंग/विमानों का उड़ना: वायुमंडल में पवन के प्रवाह से ही बादल एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति करते हैं जिससे वर्षा होती है; साथ ही वायु के ऊर्ध्वगामी दाब के कारण पक्षी, पतंग, पैराशूट और पवनचक्कियाँ कार्य करती हैं।
मुख्य बिंदु:
• श्वसन क्रिया के लिए वायुमण्डलीय ऑक्सीजन जीवनदायिनी है।
• दहन प्रक्रिया ऑक्सीजन के बिना संभव नहीं हो सकती।
• वायु बीजों के प्रकीर्णन, परागण और मौसम चक्र के संचालन का भौतिक माध्यम है।
आम गलतियाँ:
• केवल सामान्य बातें (जैसे 'हवा में कपड़े सूखना') लिखना और मुख्य जैविक क्रियाओं (श्वसन, दहन) को भूल जाना।
• वायु और ऑक्सीजन के कार्य में भ्रमित होना (दोनों को समन्वित रूप से प्रस्तुत करें)।
• केवल चार नाम लिखकर उनकी व्याख्या न करना।
Exam Tips:
a) चारों गतिविधियों को हेडिंग देकर बिंदुवार लिखें।
b) जैविक (श्वसन, परागण) और भौतिक (दहन, मौसम) दोनों प्रकार के उदाहरणों का संतुलन रखें।
c) संक्षिप्त और सटीक भाषा का प्रयोग करें।
Question 9: आप अपने घर के आस-पास को हरित आवरण से समृद्ध बनाने के लिए किस प्रकार योगदान देंगे? ऐसे कार्यों की सूची बनाएँ।
Answer:
अपने घर और आस-पड़ोस के परिवेश को हरित आवरण (green cover) से समृद्ध, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए हम निम्नलिखित व्यावहारिक कार्यों के माध्यम से सक्रिय योगदान दे सकते हैं:
1. देशी वृक्षारोपण एवं गमलों में पौधे लगाना: घर की बालकनी, छत और घर के सामने खुली भूमि पर तुलसी, एलोवेरा, मनीप्लांट और नीम, गुलमोहर, अशोक जैसे छायादार व प्रदूषण-रोधी देशी वृक्ष लगाना।
2. रसोई वाटिका (किचन गार्डन) तैयार करना: घर के पीछे या क्यारियों में हरी पत्तेदार सब्जियों (पालक, मेथी, धनिया), मिर्च और पुदीने की जैविक वाटिका विकसित करना।
3. रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल: केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें प्रतिदिन नियमित रूप से जल देना, जैविक कम्पोस्ट खाद डालना और पशुओं से उनकी सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड लगाना।
4. सामुदायिक वृक्षारोपण अभियानों में सहभागिता: विद्यालय, कॉलोनी के पार्कों और सड़क किनारे स्थानीय पर्यावरण क्लबों के साथ मिलकर 'वन महोत्सव' और पौधारोपण अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग लेना।
5. जन-जागरूकता प्रसार: अपने मित्रों, पड़ोसियों और परिजनों को जन्मदिन या विशेष अवसरों पर उपहार स्वरूप पौधे भेंट करना तथा पौधों की कटाई रोकने व हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित करना।
मुख्य बिंदु:
• घर और आस-पास के स्तर पर सघन पौधारोपण हरित आवरण को बढ़ाता है।
• पौधों के रोपण के साथ-साथ उनकी दीर्घकालिक देखभाल (जल, खाद, सुरक्षा) आवश्यक है।
• सामुदायिक सहभागिता और जन-जागरूकता से पर्यावरण संरक्षण को गति मिलती है।
Exam Tips:
a) उत्तर में व्यक्तिगत स्तर (घर) और सामाजिक स्तर (पड़ोस/पार्क) दोनों के कार्यों को शामिल करें।
b) 'किचन गार्डन', 'कम्पोस्ट खाद' और 'देशी वृक्ष' जैसे प्रभावी शब्दों का प्रयोग करें।
c) सभी पाँचों सुझावों को स्पष्ट बुलेट बिंदुओं में क्रमबद्ध लिखें।
Question 10: दिए गये चित्र में हम देखते हैं कि भोजन बनाया जा रहा है। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए —
(क) भोजन बनाने के लिए किस प्रकार की ऊर्जा का उपयोग हो रहा है?
(ख) भोजन बनाने के लिए इस प्रकार की ऊर्जा के उपयोग का एक लाभ और एक हानि लिखिए।
आकृति का विवरण: चित्र में एक सौर कुकर (solar cooker) दर्शाया गया है जिसके ऊपर काँच का ढक्कन और परावर्तक दर्पण लगा है तथा उसके अंदर काले डिब्बों में सूर्य के प्रकाश से भोजन पक रहा है।
Answer:
(क) चित्र में भोजन पकाने के लिए प्रत्यक्ष रूप से सौर ऊर्जा (Solar energy), अर्थात् सूर्य से प्राप्त होने वाली प्रकाश और ऊष्मीय ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है।
(ख) सौर ऊर्जा आधारित सौर कुकर के उपयोग का एक प्रमुख लाभ और एक प्रमुख सीमा (हानि) निम्नलिखित हैं:
• एक लाभ (प्रदूषण-मुक्त एवं अक्षय): सौर ऊर्जा एक पूर्णतः नवीकरणीय, निःशुल्क और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोत है। इसके उपयोग से किसी भी प्रकार का धुआँ, विषैली गैसें या ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित नहीं होतीं, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता और पारंपरिक ईंधनों की बचत होती है।
• एक हानि (मौसम एवं समय पर निर्भरता): सौर ऊर्जा की उपलब्धता पूर्णतः सूर्य के सीधे प्रकाश पर निर्भर करती है। इसका उपयोग केवल दिन के समय तेज धूप में ही किया जा सकता है; रात्रि के समय, घने बादलों वाले दिनों या वर्षा ऋतु में इसके द्वारा भोजन पकाना संभव नहीं होता।
मुख्य बिंदु:
• सौर कुकर सूर्य की सौर ऊर्जा को अवशोषित करके भोजन पकाता है।
• लाभ: यह प्रदूषण-मुक्त, अक्षय और ईंधन की बचत करने वाला साधन है।
• सीमा: यह रात्रि या बादलों वाले मौसम में अप्रभावी हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• सौर ऊर्जा के स्थान पर केवल 'धूप' या 'गर्मी' लिख देना (वैज्ञानिक नाम 'सौर ऊर्जा' है)।
• लाभ और हानि दोनों को एक साथ मिला देना; इन्हें अलग-अलग शीर्षकों में लिखना चाहिए।
• हानि में यह न समझाना कि यह प्रणाली सूर्य की अनुपस्थिति में कार्य क्यों नहीं कर सकती।
Exam Tips:
a) भाग (क) और भाग (ख) को अलग-अलग पंक्तियों में स्पष्ट उत्तरित करें।
b) भाग (ख) में 'लाभ:' और 'हानि:' के स्पष्ट उपशीर्षक बनाएँ।
c) पर्यावरण अनुकूलता और समय की सीमाओं को प्रमुख तर्कों के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 11: बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटने से मृदा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। आपके अनुसार ऐसा क्यों होता है?
Answer:
बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई (वनोन्मूलन / deforestation) से मृदा की गुणवत्ता पर अत्यधिक विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी के कणों को परस्पर मजबूती से बाँधकर एक सघन जाल बनाती हैं, जिससे तेज हवा और मूसलाधार वर्षा में भी मिट्टी बहने से बची रहती है। जब पेड़ काट दिए जाते हैं, तो मृदा की ऊपरी खुली सतह असुरक्षित हो जाती है और तीव्र जल प्रवाह या वायु द्वारा सबसे उपजाऊ, ह्यूमस (humus) युक्त ऊपरी परत बहकर नष्ट हो जाती है, जिसे मृदा अपरदन (soil erosion) कहते हैं। इसके अतिरिक्त, पेड़ों के पत्तों और कार्बनिक पदार्थों का गिरना बंद हो जाने से मिट्टी में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण रुक जाता है तथा मिट्टी की जल-धारण क्षमता (water-holding capacity) घट जाती है, जिससे भूमि धीरे-धीरे बंजर और मरुस्थल में परिवर्तित होने लगती है।
मुख्य बिंदु:
• पेड़ों की जड़ें मृदा कणों को बाँधकर अपरदन को प्रभावी ढंग से रोकती हैं।
• वृक्षों के अभाव में पोषक तत्वों से भरपूर ऊपरी उपजाऊ परत (ह्यूमस) नष्ट हो जाती है।
• पेड़ों की कटाई से मृदा की जल सोखने की क्षमता समाप्त हो जाती है और भूमि बंजर बनती है।
आम गलतियाँ:
• केवल यह लिखना कि 'मिट्टी खराब हो जाती है' और 'मृदा अपरदन' शब्द का उपयोग न करना।
• पेड़ों की जड़ों की यांत्रिक भूमिका (मिट्टी बाँधना) को न समझाना।
• ह्यूमस और पोषक तत्वों के नुकसान के वैज्ञानिक पहलू को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'मृदा अपरदन', 'ह्यूमस' और 'जल-धारण क्षमता' जैसे वैज्ञानिक शब्द अवश्य शामिल करें।
b) कारण और प्रभाव (cause and effect) के क्रम को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
c) उत्तर को एक सुगठित और तार्किक पैराग्राफ में लिखें।
Question 12: दो मानवीय गतिविधियाँ बताइए जिनसे वायु प्रदूषित होती है। एक कार्य सुझाएँ जो वायु प्रदूषण कम करने में सहायक हो।
Answer:
वायु को गंभीर रूप से प्रदूषित करने वाली दो प्रमुख मानवीय गतिविधियाँ तथा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का एक प्रभावी कार्य निम्नलिखित हैं:
1. वायु प्रदूषित करने वाली दो मानवीय गतिविधियाँ:
(i) जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों का अत्यधिक उपयोग: पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों, ट्रकों और बाइकों से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अजले हाइड्रोकार्बन जैसी विषैली गैसें और महीन कण (पार्टिकुलेट मैटर) उत्सर्जित होते हैं।
(ii) उद्योगों, ताप विद्युत गृहों और कारखानों से होने वाला धुआँ विसर्जन: औद्योगिक भट्टियों और चिमनियों से बिना उपचारित किए सल्फर डाइऑक्साइड, कालिख और धूल के कण सीधे वायुमंडल में छोड़े जाते हैं।
2. वायु प्रदूषण कम करने का सहायक कार्य:
• सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और गैर-प्रदूषणकारी वाहनों का उपयोग: निजी वाहनों के स्थान पर अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक बसों, मेट्रो रेल अथवा साइकिल का प्रयोग करना, तथा छोटी दूरियों के लिए पैदल चलना। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव घटेगा और ईंधनों के जलने से होने वाले धुएँ के उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
मुख्य बिंदु:
• वाहनों और कारखानों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण के दो मुख्य मानवीय स्रोत हैं।
• इन गतिविधियों से कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी घातक गैसें निकलती हैं।
• सार्वजनिक परिवहन और हरित ऊर्जा का प्रयोग प्रदूषण नियंत्रण का सर्वोत्तम व्यावहारिक उपाय है।
आम गलतियाँ:
• प्राकृतिक कारणों (जैसे ज्वालामुखी) को मानवीय गतिविधियों के रूप में लिख देना।
• केवल धुआँ लिख देना और विशिष्ट स्रोतों (वाहनों और कारखानों) का नाम न लिखना।
• उपाय के रूप में केवल 'पेड़ लगाना' लिखना और प्रदूषण के मूल स्रोत (उत्सर्जन) को कम करने का सुझाव न देना।
Exam Tips:
a) दोनों मानवीय गतिविधियों को (i) और (ii) के अंतर्गत अलग-अलग स्पष्ट करें।
b) वायु प्रदूषण कम करने के उपाय को अलग शीर्षक देकर रेखांकित करें।
c) गैसों के नाम (कार्बन मोनोऑक्साइड आदि) लिखने से उत्तर अधिक प्रामाणिक बनता है।
Question 13: एक परिवार सौर पैनल बिजली उत्पादन के लिए, गैस स्टोव खाना बनाने के लिए और पवनचक्की कुएँ से पानी खींचने के लिए उपयोग करता है। क्या होगा यदि एक सप्ताह तक सूर्य का प्रकाश न हो।
Answer:
यदि लगातार एक सप्ताह तक सूर्य का प्रकाश न मिले, तो उस परिवार के दैनिक जीवन और विभिन्न ऊर्जा प्रणालियों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ेंगे:
1. सौर पैनल (बिजली उत्पादन): सौर पैनलों का कार्य पूरी तरह ठप हो जाएगा क्योंकि वे केवल सौर विकिरण से ही विद्युत उत्पन्न करते हैं। यदि परिवार के पास पहले से चार्ज किए गए बड़े बैटरी बैंक का बैकअप नहीं होगा, तो उन्हें गंभीर विद्युत संकट का सामना करना पड़ेगा और घर के पंखे, बल्ब और उपकरण बंद हो जाएँगे।
2. गैस स्टोव (खाना पकाना): गैस स्टोव पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा और भोजन पकाने का कार्य सामान्य रूप से चलता रहेगा, क्योंकि गैस स्टोव सिलिंडर में भरी एलपीजी या पाइपलाइन प्राकृतिक गैस से संचालित होता है जिसका सूर्य के तात्कालिक प्रकाश से कोई संबंध नहीं है।
3. पवनचक्की (पानी खींचना): पवनचक्की कुएँ से पानी खींचने का कार्य तभी तक कर सकेगी जब तक वायु का प्रवाह (हवा की गति) बनी रहेगी; यद्यपि सूर्य की अनुपस्थिति में तापमान अंतर कम होने से हवा की गति धीमी हो सकती है, फिर भी यदि पर्याप्त हवा चली तो पानी निकलता रहेगा।
निष्कर्ष: लगातार धूप न होने से मुख्य रूप से सौर विद्युत प्रणाली बाधित होगी, जबकि भोजन और जल की उपलब्धता वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से आंशिक रूप से बनी रहेगी।
मुख्य बिंदु:
• सौर पैनल प्रत्यक्ष सूर्य प्रकाश पर निर्भर होने के कारण विद्युत उत्पादन बंद कर देंगे।
• गैस स्टोव रासायनिक ऊर्जा (एलपीजी/पीएनजी) से चलता है, अतः खाना पकाना अप्रभावित रहेगा।
• पवनचक्की हवा की गति पर निर्भर करती है, अतः उसका कार्य स्थानीय पवन प्रवाह पर निर्भर करेगा।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि सूर्य न होने से गैस स्टोव और पवनचक्की भी तुरंत बंद हो जाएँगे।
• तीनों प्रणालियों का अलग-अलग विश्लेषण किए बिना एक ही सामान्य वाक्य में उत्तर लिख देना।
• ऊर्जा स्रोतों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली (सौर, रासायनिक, गतिज) को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) तीनों प्रणालियों (सौर पैनल, गैस स्टोव, पवनचक्की) पर पड़ने वाले प्रभाव को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
b) कारण स्पष्ट करें कि गैस स्टोव क्यों काम करता रहेगा।
c) अंत में एक संक्षिप्त निष्कर्ष लिखें जो समग्र स्थिति को सारांशित करे।
Question 14: निम्नलिखित शब्दों का उपयोग करके रिक्त स्थानों की पूर्ति करें —
(जीवाश्म ईंधन, वन, वायु, पेट्रोलियम, कोयला, जल और अनवीकरणीय संसाधन)
आकृति का विवरण: एक पदानुक्रमित संकल्पना मानचित्र (concept map) दर्शाया गया है जिसमें शीर्ष पर 'प्राकृतिक संसाधन' है, जो दो शाखाओं 'अनवीकरणीय संसाधन' और 'नवीकरणीय संसाधन' में बँटा है; अनवीकरणीय के नीचे 'जीवाश्म ईंधन' और उसके नीचे 'पेट्रोलियम', 'प्राकृतिक गैस', 'कोयला' हैं, जबकि नवीकरणीय के नीचे 'जल', 'वन' और 'वायु' जुड़े हैं।
Answer:
दिए गए शब्दों का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधनों के संकल्पना मानचित्र (फ्लोचार्ट) के सभी रिक्त स्थानों की तार्किक एवं वैज्ञानिक पूर्ति निम्नलिखित क्रम में की गई है:
1. शीर्ष विभाजन स्तर: 'प्राकृतिक संसाधन' के दो मुख्य वर्गीकरण होते हैं — दाएँ बॉक्स में 'नवीकरणीय संसाधन' पहले से अंकित है, अतः बाएँ रिक्त बॉक्स में अनवीकरणीय संसाधन आएगा।
2. अनवीकरणीय शाखा का उप-विभाजन: अनवीकरणीय संसाधन के ठीक नीचे स्थित मुख्य उप-श्रेणी में जीवाश्म ईंधन आएगा।
3. जीवाश्म ईंधन के घटक: 'प्राकृतिक गैस' पहले से मध्य में अंकित है; इसके बाएँ बॉक्स में पेट्रोलियम तथा दाएँ बॉक्स में कोयला आएगा।
4. नवीकरणीय शाखा के घटक: नवीकरणीय संसाधन के अंतर्गत दिए गए तीन समानांतर रिक्त बॉक्सों में क्रमशः जल, वन और वायु भरे जाएँगे।
मुख्य बिंदु:
• प्राकृतिक संसाधन दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित हैं: नवीकरणीय और अनवीकरणीय।
• अनवीकरणीय संसाधनों के अंतर्गत जीवाश्म ईंधन आते हैं, जिनमें कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस शामिल हैं।
• नवीकरणीय संसाधनों के प्रमुख प्राकृतिक उदाहरण जल, वन और वायु हैं।
आम गलतियाँ:
• नवीकरणीय और अनवीकरणीय के बॉक्सों में शब्दों का परस्पर स्थान बदल देना।
• जीवाश्म ईंधन को नवीकरणीय के अंतर्गत लिख देना।
• दिए गए शब्दों में से किसी शब्द को छोड़ देना या अतिरिक्त शब्द जोड़ देना।
Exam Tips:
a) परीक्षा में संकल्पना मानचित्र (फ्लोचार्ट) का स्वच्छ रेखाचित्र बनाकर बॉक्सों में शब्द भरें।
b) भरे गए शब्दों को गहरे अक्षरों या रेखांकन द्वारा स्पष्ट रूप से हाइलाइट करें।
c) सुनिश्चित करें कि दिए गए सभी 7 शब्दों का सही स्थान पर सटीक उपयोग हुआ है।
Question 15: उद्योगों और आवास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेड़ों की माँग बढ़ रही है। इसलिए लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। क्या यह उचित है? चर्चा कीजिए और एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।
Answer:
उद्योगों के विस्तार, इमारती लकड़ी और आवासीय बस्तियों के निर्माण के लिए पेड़ों की अंधाधुंध और निरंतर कटाई करना पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और भावी पीढ़ियों के अस्तित्व की दृष्टि से बिल्कुल भी उचित नहीं है।
संक्षिप्त रिपोर्ट: अनियंत्रित वनोन्मूलन के गंभीर दुष्परिणाम और समाधान:
1. पर्यावरणीय असंतुलन एवं जलवायु संकट: वृक्ष हमारे ग्रह के फेफड़े हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। पेड़ों की निरंतर कटाई से वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है, जिससे वैश्विक तापन (global warming), अनियमित वर्षा, बाढ़ और चरम सूखा जैसी आपदाएँ विकराल रूप ले रही हैं।
2. जैव-विविधता का विनाश: वन लाखों वन्यजीवों, पक्षियों और औषधीय वनस्पतियों का प्राकृतिक आवास हैं। वनों के कटने से खाद्य शृंखलाएँ टूट रही हैं और अनेक दुर्लभ प्रजातियाँ हमेशा के लिए विलुप्त हो रही हैं।
3. मृदा क्षरण एवं जल संकट: वनों के नष्ट होने से उपजाऊ मृदा का अपरदन तीव्र हो जाता है और भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट आ रही है।
समाधान एवं सतत विकास की राह: विकास और प्रकृति के बीच संतुलन आवश्यक है। केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही सीमित कटाई की जानी चाहिए और यह अनिवार्य नियम होना चाहिए कि यदि एक पेड़ काटा जाए तो उसके बदले कम से कम पाँच नए पौधे लगाए जाएँ और उनके बड़े होने तक देखभाल की जाए (क्षतिपूरक वनीकरण)। इसके साथ ही लकड़ी के वैकल्पिक पुनर्चक्रित पदार्थों का उपयोग और भवनों के निर्माण में हरित पट्टी (green belt) का अनिवार्य प्रावधान किया जाना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• अनियंत्रित वृक्ष कटाई ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं को सीधे जन्म देती है।
• वनों के विनाश से वन्यजीवों के आवास और जैव-विविधता का अपूरणीय नुकसान होता है।
• विकास को पर्यावरण-विरोधी न बनाकर सतत विकास (sustainable development) और क्षतिपूरक वृक्षारोपण पर आधारित होना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• केवल 'यह अनुचित है' लिखकर छोड़ देना और संक्षिप्त रिपोर्ट का प्रारूप न बनाना।
• केवल पेड़ों के नुकसान गिनाना और विकास की आवश्यकताओं के समाधान (सतत विकास) पर चर्चा न करना।
• रिपोर्ट को बिना शीर्षकों के एक ही अस्पष्ट परिच्छेद में लिख देना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत में अपना स्पष्ट मत ("यह बिल्कुल उचित नहीं है") दर्ज करें।
b) रिपोर्ट को स्पष्ट उपशीर्षकों (दुष्परिणाम और समाधान) में विभाजित करके लिखें।
c) 'सतत विकास', 'क्षतिपूरक वनीकरण' और 'ग्रीनहाउस प्रभाव' जैसे मानक शब्द प्रयोग करें।
Question 16: अपने विद्यालय में पानी के उपयोग को कम करने के लिए एक योजना बनाइए। इस योजना को साकार करने के लिए आप क्या कदम उठाएँगे और इससे पर्यावरण को कैसे सहायता मिलेगी?
Answer:
विद्यालय में जल के संरक्षण और अपव्यय को न्यूनतम करने के लिए 'जल चेतना एवं संरक्षण कार्ययोजना' की रूपरेखा निम्नलिखित है:
1. योजना को साकार करने के लिए व्यावहारिक कदम:
(i) रिसाव का त्वरित समाधान: विद्यालय के सभी शौचालयों, नलों और वाटर कूलर पाइपों का नियमित साप्ताहिक निरीक्षण किया जाएगा और टपकते हुए नलों व वॉशर को तुरंत बदला जाएगा। इसके अतिरिक्त, स्वचालित पुश-टैप (push taps) लगाए जा सकते हैं।
(ii) वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): विद्यालय की छतों पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों द्वारा एक भूमिगत संचयन टैंक या पुनर्भरण (recharge) गड्ढे में भेजा जाएगा जिससे भूमिगत जल स्तर में सुधार हो।
(iii) अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण एवं ड्रिप सिंचाई: वाटर कूलर और हैंडवॉश क्षेत्र से बहने वाले अतिरिक्त पानी को नालियों में बहाने के स्थान पर पाइपों द्वारा विद्यालय के बगीचों और खेल के मैदान के पौधों में डाला जाएगा, तथा पौधों के लिए बूंद-बूंद सिंचाई (drip irrigation) अपनाई जाएगी।
(iv) विद्यार्थी जल निगरानी दल (वाटर ब्रिगेड): विद्यार्थियों की एक समिति गठित की जाएगी जो मध्याह्न भोजन और अवकाश के समय यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी नल खुला न छूटे।
2. पर्यावरण को मिलने वाली सहायता:
इस योजना से हजारों लीटर बहुमूल्य स्वच्छ पेयजल की बर्बादी रुकेगी, भूजल का अति-दोहन थमेगा, भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होगी तथा विद्यालय की हरियाली सुरक्षित रहेगी। इससे विद्यार्थियों में जल संरक्षण की स्थायी आदत विकसित होगी जो व्यापक समाज में पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ बनाएगी।
मुख्य बिंदु:
• विद्यालय में जल अपव्यय रोकने के लिए टपकते नलों की मरम्मत और पुश-टैप लगाना प्राथमिक कदम है।
• वर्षा जल संचयन और आरओ/कूलर के बचे पानी का बागवानी में उपयोग जल की बचत करता है।
• जल संरक्षण से भूमिगत जल स्तर बढ़ता है और पर्यावरण का पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।
आम गलतियाँ:
• केवल सामान्य बातें लिखना जैसे 'पानी बंद कर देंगे' और ठोस योजना (वर्षा जल संचयन, ग्रे-वाटर उपयोग) न बनाना।
• प्रश्न के दूसरे भाग (पर्यावरण को कैसे सहायता मिलेगी) की व्याख्या न करना।
• व्यावहारिक विद्यालयी स्तर के कदमों के बजाय अवास्तविक सुझाव देना।
Exam Tips:
a) उत्तर को दो स्पष्ट भागों में बाँटें: 'कार्ययोजना के कदम' और 'पर्यावरण को लाभ'।
b) 'वर्षा जल संचयन', 'ड्रिप सिंचाई' और 'भूजल पुनर्भरण' जैसी आधुनिक तकनीकों का उल्लेख करें।
c) विद्यार्थी स्तर पर उठाए जा सकने वाले व्यावहारिक कार्यों को प्राथमिकता दें।
NOTES: सभी प्रश्नों के उत्तर एनसीईआरटी कक्षा 6 विज्ञान (जिज्ञासा) के अध्याय 11 'प्रकृति की अमूल्य संपदा' के नवीनतम पाठ्यक्रम, मानक वैज्ञानिक शब्दावली और भाषा-शैली के अनुरूप पूर्णतः तैयार किए गए हैं।
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