NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 Beyond Earth (पृथ्वी से परे) in Hindi

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Question 1: निम्नलिखित का मिलान कीजिए —
स्तंभ I — स्तंभ II
(i) पृथ्वी का उपग्रह — (क) ओरायन
(ii) लाल ग्रह — (ख) शुक्र
(iii) तारा-मंडल — (ग) मंगल
(iv) एक ग्रह जिसे सामान्यतः सांध्य तारा कहा जाता है — (घ) चंद्रमा

Answer:

दिए गए स्तंभ I और स्तंभ II का सही मिलान इस प्रकार है: (i) पृथ्वी का उपग्रह — (घ) चंद्रमा (चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है जो लगभग 27 दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है); (ii) लाल ग्रह — (ग) मंगल (मंगल ग्रह की सतह पर लौह ऑक्साइड की प्रचुरता के कारण यह रक्तिम दिखाई देता है); (iii) तारा-मंडल — (क) ओरायन (ओरायन शीतकाल में रात्रि-आकाश में दिखने वाला एक प्रमुख शिकारी-रूपी नक्षत्र या तारामंडल है); तथा (iv) एक ग्रह जिसे सामान्यतः सांध्य तारा कहा जाता है — (ख) शुक्र (शुक्र ग्रह अत्यंत चमकदार होने के कारण सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में सांध्य तारे तथा सूर्योदय से पूर्व पूर्वी आकाश में प्रभात तारे के रूप में चमकता है)।

मुख्य बिंदु:

• चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बंधा है।
• मंगल को लाल ग्रह और शुक्र को भोर व संध्या का तारा कहा जाता है।
• ओरायन (शिकारी) आकाश के 88 आधिकारिक तारामंडलों में से एक प्रसिद्ध तारामंडल है।

आम गलतियाँ:

• शुक्र को वास्तव में तारा समझ लेना, जबकि वह सूर्य का प्रकाश परावर्तित करने वाला ग्रह है।
• लाल ग्रह के रूप में मंगल के स्थान पर गलती से शुक्र या बुध का मिलान कर देना।
• स्तंभ I और II के मिलान में क्रमांकों के संयोजन को उलट-पुलट लिखना।

Exam Tips:

a) मिलान वाले प्रश्नों में सीधे आमने-सामने सही उत्तर लिखें (जैसे (i) — (घ) चंद्रमा)।
b) शुक्र को 'तारा' कहे जाने के पीछे का कारण (उसकी तीव्र दृश्य चमक) अवश्य स्मरण रखें।
c) ग्रहों के उपनाम (जैसे लाल ग्रह, सांध्य तारा) को तालिका बनाकर याद करें।

 

Question 2: (क) निम्नलिखित पहेलियों को हल कीजिए —
मेरे नाम का पहला अक्षर मंत्रणा में है यंत्रणा में नहीं,
मेरे नाम का दूसरा अक्षर गगन और सागर दोनों में है,
मेरे नाम का तीसरा अक्षर जल में है, जग में नहीं,
मैं सूर्य की परिक्रमा करने वाला एक ग्रह हूँ।
(ख) इस प्रकार की दो पहेलियाँ आप स्वयं बनाइए।

Answer:

(क) दी गई पहेली का सही उत्तर 'मंगल' (Mars) ग्रह है; क्योंकि पहला अक्षर 'म' (मंत्रणा में है परंतु यंत्रणा में नहीं), दूसरा अक्षर 'ग' (गगन और सागर दोनों में उभयनिष्ठ है), तथा तीसरा अक्षर 'ल' (जल में उपस्थित है परंतु जग में नहीं) है, जो मिलकर 'म-ग-ल' अर्थात 'मंगल' बनाते हैं जो सूर्य की परिक्रमा करने वाला चौथा ग्रह है।
(ख) स्वयं बनाई गई दो खगोलीय पहेलियाँ इस प्रकार हैं:
पहेली 1: मेरे नाम का पहला अक्षर 'बुखार' में है 'खुमार' में नहीं, मेरे नाम का दूसरा अक्षर 'धनुष' में है 'मनुष्य' में नहीं; मैं सूर्य के सबसे निकट रहकर सबसे तीव्र गति से परिक्रमा करने वाला सबसे छोटा ग्रह हूँ। बताइए मैं कौन हूँ? — उत्तर: बुध (Mercury)।
पहेली 2: मेरे नाम का पहला अक्षर 'शुभ' में है 'लाभ' में नहीं, मेरे नाम का दूसरा अक्षर 'क्रोध' में है 'बोध' में नहीं; मैं आकाश में सबसे सुंदर और चमकदार ग्रह हूँ जिसे पृथ्वी की जुड़वाँ बहन भी कहते हैं। बताइए मैं कौन हूँ? — उत्तर: शुक्र (Venus)।

मुख्य बिंदु:

• पहेली के वर्णों को जोड़कर सौरमंडल के ग्रहों के मानक नाम बनते हैं।
• मंगल सूर्य से चौथा और बुध सूर्य के सबसे निकटतम ग्रह हैं।
• शुक्र रात्रि और भोर के समय आकाश का सबसे दीप्तिमान ग्रह है।

आम गलतियाँ:

• अक्षरों के चयन में वर्तनी (मात्राओं) की अशुद्धि करना जिससे सही शब्द न बन पाए।
• पहेली के उत्तर में ग्रह के स्थान पर किसी तारे या उपग्रह का नाम लिख देना।
• स्वरचित पहेली में वैज्ञानिक सुराग (जैसे सूर्य से निकटता, चमक) देना भूल जाना।

Exam Tips:

a) पहेली हल करते समय प्रत्येक पंक्ति से निकले अक्षर को अलग-अलग लिखकर जोड़ें।
b) स्वरचित पहेली बनाते समय तुकबंदी के साथ-साथ ग्रह की खगोलीय विशेषता अवश्य जोड़ें।
c) अंत में उत्तर को रेखांकित करते हुए कोष्ठक में अंग्रेजी नाम भी लिखें।

 

Question 3: निम्नलिखित में से कौन सौर परिवार का सदस्य नहीं है?
(क) लुब्धक
(ख) क्षुद्रग्रह
(ग) धूमकेतु
(घ) प्लूटो

Answer:

सही उत्तर विकल्प (क) लुब्धक है। लुब्धक (Sirius / व्याध तारा) हमारे सौर परिवार (Solar System) का सदस्य नहीं है, बल्कि यह हमारे सौरमंडल से अत्यधिक दूर (लगभग 8.6 प्रकाश वर्ष दूर) कैनिस मेजर तारामंडल में स्थित एक स्वतंत्र तारा है; इसके विपरीत क्षुद्रग्रह (asteroids), धूमकेतु (comets) तथा प्लूटो (बौना ग्रह) सभी सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में बंधे हुए हैं और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सूर्य की परिक्रमा करते हुए सौर परिवार का ही हिस्सा हैं।

मुख्य बिंदु:

• सौर परिवार में सूर्य, उसके आठ ग्रह, उनके उपग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और उल्कापिंड सम्मिलित हैं।
• लुब्धक सौरमंडल से परे स्थित एक विशाल और चमकीला तारा है।
• प्लूटो एक बौना ग्रह होने के बावजूद सौर परिवार की कुइपर पट्टी का सदस्य है।

आम गलतियाँ:

• प्लूटो को ग्रह न मानकर उसे सौर परिवार से भी बाहर का सदस्य समझ लेना।
• धूमकेतु को तारा मानकर उसे सौर परिवार से अलग चुन लेना।
• लुब्धक (तारे) और सौरमंडल के सदस्यों के बीच के अंतर को स्पष्ट न समझ पाना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्न में सही विकल्प का अक्षर '(क)' और नाम 'लुब्धक' दोनों स्पष्ट लिखें।
b) सौर परिवार की मानक परिभाषा (सूर्य और उसकी परिक्रमा करने वाले सभी पिंड) को याद रखें।
c) उत्तर के समर्थन में एक पंक्ति का वैज्ञानिक कारण अवश्य जोड़ें।

 

Question 4: निम्नलिखित में से कौन सूर्य का ग्रह नहीं है?
(क) बृहस्पति
(ख) वरुण
(ग) प्लूटो
(घ) शनि

Answer:

सही उत्तर विकल्प (ग) प्लूटो है। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा वर्ष 2006 में आयोजित सम्मेलन में ग्रह की नई वैज्ञानिक परिभाषा निर्धारित की गई थी, जिसके अनुसार किसी पिंड को अपनी कक्षा के निकटवर्ती क्षेत्र को अन्य मलबे से साफ रखना अनिवार्य है; प्लूटो इस कसौटी को पूरा नहीं करता, अतः इसे मुख्य ग्रहों की श्रेणी से हटाकर 'बौना ग्रह' (dwarf planet) घोषित कर दिया गया। वर्तमान में सूर्य के केवल आठ मुख्य ग्रह हैं—बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण; इसलिए दिए गए विकल्पों में प्लूटो सूर्य का प्रमुख ग्रह नहीं है।

मुख्य बिंदु:

• सौरमंडल में अब आधिकारिक रूप से केवल आठ मुख्य ग्रह मान्य हैं।
• वर्ष 2006 में IAU ने प्लूटो को मुख्य ग्रह से घटाकर बौने ग्रह का दर्जा दिया।
• बृहस्पति, शनि और वरुण सौरमंडल के विशाल बाह्य ग्रह (gas giants) हैं।

आम गलतियाँ:

• पुरानी पाठ्यपुस्तकों के आधार पर प्लूटो को अभी भी नौवां ग्रह मान लेना।
• वरुण (Neptune) को ग्रह न मानकर भ्रमित होना।
• ग्रह और बौने ग्रह की वैज्ञानिक परिभाषा के भेद को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) उत्तर में वर्ष 2006 और 'अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU)' का संदर्भ देने से पूरे अंक मिलते हैं।
b) आठों ग्रहों के क्रम को सूर्य से दूरी के अनुसार कंठस्थ रखें।
c) 'बौना ग्रह' (Dwarf planet) तकनीकी शब्द का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 5: ध्रुवतारा और लुब्धक में से कौन अधिक चमकदार तारा है?

Answer:

ध्रुवतारा (Polaris) और लुब्धक (Sirius) में से लुब्धक कहीं अधिक चमकदार तारा है। खगोलीय दृष्टि से लुब्धक पृथ्वी से दिखाई देने वाले संपूर्ण रात्रि-आकाश का सबसे चमकीला तारा (brightest star of the night sky) है, जिसकी दृश्य चमक ध्रुवतारे से लगभग बीस गुना अधिक होती है; दूसरी ओर, ध्रुवतारा केवल एक मध्यम चमक का तारा है जो अपनी चमक के लिए नहीं बल्कि उत्तरी आकाश में अपनी स्थिर स्थिति तथा सदियों से दिशा-सूचक के रूप में प्रयुक्त होने के अद्वितीय महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

मुख्य बिंदु:

• लुब्धक (Sirius / व्याध तारा) रात्रि-आकाश का सर्वाधिक दीप्तिमान तारा है।
• ध्रुवतारा एक मध्यम परिमाण (चमक) का तारा है जो पृथ्वी के घूर्णन अक्ष की सीध में है।
• ध्रुवतारे का महत्व उसकी चमक में नहीं बल्कि उसकी स्थिर उत्तर दिशा में है।

आम गलतियाँ:

• ध्रुवतारे के अत्यधिक प्रसिद्ध होने के कारण उसे ही सबसे चमकदार तारा मान लेना।
• लुब्धक को कोई ग्रह समझ लेना जबकि वह एक वास्तविक दीप्तिमान तारा है।
• दोनों के तुलनात्मक अंतर को स्पष्ट किए बिना केवल एक शब्द में उत्तर देना।

Exam Tips:

a) सीधे और स्पष्ट रूप से लिखें कि 'लुब्धक अधिक चमकदार तारा है'।
b) ध्रुवतारे की विशेषता बताते हुए स्पष्ट करें कि वह 'स्थिर' है, सर्वाधिक चमकीला नहीं।
c) लुब्धक के अंग्रेजी नाम (Sirius) का उल्लेख कोष्ठक में करें।

 

Question 6: सौर परिवार का किसी चित्रकार द्वारा बनाया गया चित्र में दर्शाया गया है। क्या इसमें ग्रहों का क्रम ठीक है? यदि ठीक नहीं है तो चित्र के नीचे दिए गए बॉक्स में उनका सही क्रम लिखिए।

Answer:

आकृति का विवरण: चित्र में सौर परिवार के केंद्र में स्थित सूर्य और उसकी कक्षाओं में परिक्रमा करते आठ ग्रहों को दर्शाया गया है जिनके नीचे क्रमांकित खाली बॉक्स दिए गए हैं।

नहीं, चित्रकार द्वारा बनाए गए चित्र में सौर परिवार के ग्रहों का क्रम ठीक नहीं है; चित्रकार ने शुक्र और पृथ्वी के स्थानों को तथा शनि और अरुण (यूरेनस) के क्रम को आपस में बदल दिया है। सूर्य से बढ़ती दूरी के आधार पर सौर परिवार के सभी आठ ग्रहों का मानक और सही क्रम इस प्रकार है: 1. बुध (Mercury), 2. शुक्र (Venus), 3. पृथ्वी (Earth), 4. मंगल (Mars), 5. बृहस्पति (Jupiter), 6. शनि (Saturn), 7. अरुण / यूरेनस (Uranus), तथा 8. वरुण / नेपच्यून (Neptune)। अतः चित्र के नीचे दिए गए बॉक्सों में इसी सही वैज्ञानिक क्रम (1 से 8) के अनुसार ग्रहों के नाम भरे जाने चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• आंतरिक चट्टानी ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल हैं।
• बाह्य गैसीय ग्रह: बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण हैं।
• सूर्य से निकटता के आधार पर बुध पहला तथा वरुण सबसे अंतिम ग्रह है।

आम गलतियाँ:

• शुक्र और पृथ्वी के क्रम को आपस में उलट देना।
• अरुण (Uranus) और वरुण (Neptune) के हिंदी नामों में भ्रमित हो जाना।
• चित्र में दी गई त्रुटि को पहचाने बिना केवल 'हाँ' लिख देना।

Exam Tips:

a) उत्तर की शुरुआत स्पष्ट 'नहीं' से करें और फिर सही क्रम की सूची प्रस्तुत करें।
b) ग्रहों के नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखने से उत्तर अधिक प्रामाणिक बनता है।
c) सूर्य से दूरी का स्मृति-सूत्र (M-V-E-M-J-S-U-N) याद रखें।

 

Question 7: रात्रि-आकाश का एक भाग चित्र में दर्शाया गया है। बिग डिपर एवं लिटिल डिपर के तारों को सरल रेखाओं द्वारा जोड़िए। ध्रुव तारे को पहचानिए और चित्र में इसका नाम लिखिए।

Answer:

आकृति का विवरण: चित्र में उत्तरी गोलार्ध के रात्रि-आकाश के तारों का विन्यास दिखाया गया है जिसमें वृहत सप्तर्षि (बिग डिपर) और लघु सप्तर्षि (लिटिल डिपर) के तारे उपस्थित हैं।

बिग डिपर (सप्तर्षि / Big Dipper) के सात प्रमुख तारों को सरल रेखाओं द्वारा जोड़ने पर चार तारे मिलकर एक चौकोर कटोरा (चम्मच का सिरा) बनाते हैं और शेष तीन तारे उसका मुड़ा हुआ हत्था बनाते हैं। बिग डिपर के कटोरे के बाहरी किनारे के दो प्रमुख तारों को 'संकेतक तारे' (pointer stars) कहा जाता है; जब इन दोनों तारों को मिलाने वाली एक काल्पनिक सीधी रेखा खींचकर उसे उत्तर दिशा में लगभग पाँच गुना आगे बढ़ाया जाता है, तो वह रेखा सीधे ध्रुवतारे (Polaris / North Star) तक पहुँचती है। यह ध्रुवतारा लिटिल डिपर (लघु सप्तर्षि / Little Dipper) तारामंडल के चम्मच-रूपी विन्यास के हत्थे का सबसे अंतिम और सबसे चमकीला तारा होता है। इस प्रकार चित्र में दोनों तारामंडलों के सात-सात तारों को रेखाओं से जोड़कर चम्मच की आकृतियाँ बनाई जाती हैं और लिटिल डिपर के हत्थे के अंतिम सिरे पर 'ध्रुवतारा' अंकित किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• बिग डिपर के दो संकेतक तारों की सीध से ही ध्रुवतारे को खोजा जाता है।
• ध्रुवतारा लिटिल डिपर (Ursa Minor) के हत्थे का अंतिम तारा है।
• दोनों तारामंडल सात-सात प्रमुख तारों से मिलकर बने होते हैं और करछुल जैसे दिखते हैं।

आम गलतियाँ:

• बिग डिपर के किसी भी तारे को सीधे ध्रुवतारा मान लेना।
• संकेतक तारों से रेखा खींचने की दिशा को विपरीत (दक्षिण की ओर) कर देना।
• बिग डिपर और लिटिल डिपर के चम्मच के आकार को सही अनुपात में न जोड़ पाना।

Exam Tips:

a) 'संकेतक तारे' (Pointer stars) शब्द का प्रयोग ध्रुवतारे की खोज के लिए अवश्य करें।
b) यह स्पष्ट लिखें कि ध्रुवतारा लिटिल डिपर का भाग है, बिग डिपर का नहीं।
c) परीक्षा में रेखाचित्र बनाते समय तारों को स्पष्ट बिंदुओं और सीधी रेखाओं से जोड़ें।

 

Question 8: रात्रि-आकाश का एक भाग चित्र 12.14 में दर्शाया गया है। इसमें ओरायन तारा-मंडल के तारों को सरल रेखाओं द्वारा जोड़िए। तारे लुब्धक का नाम अंकित कीजिए। इसके लिए आप चित्र 12.13 की सहायता ले सकते हैं।

Answer:

आकृति का विवरण: चित्र 12.14 में शीतकालीन रात्रि-आकाश के तारों का समूह दर्शाया गया है जिसमें ओरायन (मृगशीर्ष / शिकारी) तारामंडल और उसके निकटवर्ती सबसे चमकीले तारे लुब्धक (सिरियस) की अवस्थिति दिखाई गई है।

ओरायन (Orion) तारामंडल के तारों को सरल रेखाओं द्वारा जोड़ने पर एक पराक्रमी शिकारी की स्पष्ट रूपरेखा बनती है; इसके मध्य में एक सीधी रेखा में स्थित तीन निकटवर्ती चमकीले तारे शिकारी की 'कमर की पेटी' (Orion's Belt) का निर्माण करते हैं, और इसके चारों कोनों पर चार दीप्तिमान तारे (ऊपर बाईं ओर लाल रंग का बेटेलगेस, ऊपर दाईं ओर बेलाट्रिक्स, नीचे दाईं ओर अत्यधिक चमकीला रिगेल और नीचे बाईं ओर सैफ) मिलकर एक विशाल चतुर्भुज बनाते हैं जो शिकारी के कंधों और पैरों को दर्शाते हैं। तारे लुब्धक (Sirius / व्याध) को खोजने और नामांकित करने के लिए ओरायन की बेल्ट के तीनों तारों से होकर पूर्व-दक्षिण दिशा में एक सीधी काल्पनिक रेखा खींची जाती है; यह रेखा सीधे आकाश के सबसे देदीप्यमान तारे लुब्धक तक ले जाती है, जिसके पास चित्र में 'लुब्धक' (Sirius) नाम अंकित किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• ओरायन को 'शिकारी' (Hunter) तारामंडल भी कहा जाता है जिसकी पहचान उसकी बेल्ट के तीन तारों से होती है।
• ओरायन की बेल्ट की सीध में पूर्व की ओर बढ़ने पर सबसे चमकीला तारा लुब्धक मिलता है।
• बेटेलगेस (लाल महादानव) और रिगेल (नीला महादानव) ओरायन के दो प्रमुख कोने के तारे हैं।

आम गलतियाँ:

• ओरायन की बेल्ट के तारों से रेखा पश्चिम दिशा में खींच देना, जिससे लुब्धक नहीं मिल पाता।
• ओरायन के चतुर्भुज के तारों को गलत क्रम में जोड़ देना।
• लुब्धक को ओरायन तारामंडल के ही भीतर का तारा समझ लेना (जबकि वह कैनिस मेजर में है)।

Exam Tips:

a) ओरायन की 'बेल्ट के तीन तारे' को आधार बनाकर लुब्धक की स्थिति स्पष्ट करें।
b) बेटेलगेस और रिगेल तारों के नाम लिखने से उत्तर का स्तर उत्कृष्ट हो जाता है।
c) तीर का निशान बनाकर रेखा को लुब्धक की ओर बढ़ता हुआ दिखाएं।

 

Question 9: आप उषाकाल में तारों को लुप्त होते तथा संध्या काल में प्रकट होते देख सकते हैं। दिन के समय आप तारों को नहीं देख पाते हैं। ऐसा क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।

Answer:

दिन के समय तारे कहीं गायब नहीं होते बल्कि वे सदैव अपने स्थान पर आकाश में उसी प्रकार चमकते रहते हैं जैसे वे रात में चमकते हैं; परंतु दिन के समय सूर्य का अत्यधिक तीव्र, प्रखर और चकाचौंध करने वाला प्रकाश उन्हें दृष्टिगोचर नहीं होने देता। जब सूर्य की तीव्र किरणें पृथ्वी के वायुमंडल (atmosphere) में प्रवेश करती हैं, तो वायु के अणुओं और धूल-कणों द्वारा सूर्य के प्रकाश का व्यापक प्रकीर्णन (scattering of sunlight) होता है, जिससे संपूर्ण दिन का आकाश अत्यंत उज्ज्वल और दीप्तिमान दिखने लगता है; आकाश की इस तीव्र चमक के कारण दूर स्थित तारों से आने वाला अत्यंत मंद प्रकाश पूरी तरह दब और छिप जाता है। उषाकाल (dawn) में सूर्योदय से पूर्व जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल को प्रदीप्त करने लगता है, तो तारे मंद पड़कर धीरे-धीरे लुप्त होते प्रतीत होते हैं; और संध्याकाल (dusk) में सूर्यास्त के पश्चात जब वायुमंडल में प्रकीर्णित प्रकाश समाप्त हो जाता है और अंधकार छा जाता है, तो तारों का मंद प्रकाश हमारी आँखों को पुनः स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है।

मुख्य बिंदु:

• तारे दिन और रात दोनों समय आकाश में निरंतर उपस्थित रहते हैं।
• दिन में वायुमंडल द्वारा सूर्य के प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश अत्यधिक चमकता है।
• तारों की मंद रोशनी सूर्य के तीव्र प्रकाश की चकाचौंध में ओझल हो जाती है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि दिन में तारे कहीं अन्यत्र चले जाते हैं या बुझ जाते हैं।
• सूर्य के प्रकाश के 'प्रकीर्णन' (scattering) के वैज्ञानिक कारण का उल्लेख न करना।
• उषाकाल और संध्याकाल में होने वाले क्रमिक परिवर्तन की व्याख्या छोड़ देना।

Exam Tips:

a) 'प्रकाश का प्रकीर्णन' (Scattering of light) वैज्ञानिक शब्दावली को उत्तर में अवश्य लिखें।
b) दिन में जलते बल्ब के सामने मोमबत्ती की रोशनी के फीके पड़ने का सरल उदाहरण सोचकर उत्तर लिखें।
c) यह स्पष्ट रेखांकित करें कि तारों का लुप्त होना केवल एक दृष्टि-भ्रम है, वास्तविक अनुपस्थिति नहीं।

 

Question 10: रात में जब आकाश साफ हो तो बिग डिपर (सप्तर्षि) के अवलोकन का प्रयास 2 - 3 घंटे के समय अंतराल पर 3 - 4 बार कीजिए। प्रत्येक बार ध्रुव तारे की स्थिति देखने का प्रयास भी कीजिए। क्या सप्तर्षि गति करते हुए प्रतीत होता है? प्रत्येक प्रेक्षण का समय बताते हुए एक कच्चा रेखाचित्र बनाइए।

Answer:

आकृति का विवरण: कच्चे रेखाचित्र में केंद्र में ध्रुवतारे (Polaris) को स्थिर दर्शाया गया है और उसके चारों ओर घड़ी की सुई की विपरीत दिशा (वामावर्त) में घूमती हुई सप्तर्षि (Big Dipper) की तीन अलग-अलग समयों (रात्रि 8:00 बजे, 10:30 बजे, और मध्यरात्रि 1:00 बजे) की स्थितियाँ दिखाई गई हैं।

हाँ, स्वच्छ आकाश में 2 से 3 घंटे के अंतराल पर अवलोकन करने पर सप्तर्षि तारामंडल ध्रुवतारे के चारों ओर पूर्व से पश्चिम की ओर गति करता हुआ (घूमता हुआ) स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है, जबकि ध्रुवतारा पूरे समय अपने उसी स्थान पर पूरी तरह स्थिर दिखाई देता है। इस आभासी गति का वैज्ञानिक कारण यह है कि हमारी पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर निरंतर घूर्णन (rotation) करती है, जिससे सभी खगोलीय पिंड हमें उल्टी दिशा (पूर्व से पश्चिम) में घूमते प्रतीत होते हैं; और चूँकि ध्रुवतारा पृथ्वी के घूर्णन अक्ष की सीध में ठीक उत्तर दिशा के ऊपर स्थित है, इसलिए वह स्थिर दिखता है और सप्तर्षि उसके चारों ओर वामावर्त (anticlockwise) चक्कर लगाता प्रतीत होता है। प्रेक्षण विवरण: प्रथम प्रेक्षण (रात्रि 8:00 बजे) — सप्तर्षि उत्तर-पूर्वी आकाश में क्षैतिज स्थिति में दिखाई देता है; द्वितीय प्रेक्षण (रात्रि 10:30 बजे) — सप्तर्षि ऊपर उठकर ध्रुवतारे के शीर्ष की ओर बढ़ा हुआ दिखता है; तृतीय प्रेक्षण (मध्यरात्रि 1:00 बजे) — सप्तर्षि उत्तर-पश्चिमी आकाश में पहुँचकर उल्टा मुड़ता हुआ प्रतीत होता है।

मुख्य बिंदु:

• सप्तर्षि ध्रुवतारे के चारों ओर घड़ी की विपरीत दिशा में घूमता हुआ प्रतीत होता है।
• ध्रुवतारा पृथ्वी के घूर्णन अक्ष की सीध में होने के कारण स्थिर दिखाई देता है।
• तारों की यह आभासी गति पृथ्वी के अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व घूर्णन का परिणाम है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि तारे वास्तव में तेजी से गति कर रहे हैं (पृथ्वी के घूर्णन को भूल जाना)।
• ध्रुवतारे को भी घूमता हुआ लिख देना, जबकि वह सदैव स्थिर रहता है।
• प्रेक्षणों के समय का उल्लेख किए बिना केवल सामान्य वाक्य लिख देना।

Exam Tips:

a) उत्तर के साथ एक साधारण वृत्त बनाकर केंद्र में ध्रुवतारा और परिधि पर सप्तर्षि की स्थितियाँ दर्शाएँ।
b) समय (जैसे 8:00 PM, 10:30 PM, 1:00 AM) और वामावर्त दिशा का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) 'पृथ्वी का घूर्णन' (Earth's rotation) को इस आभासी गति का मुख्य वैज्ञानिक कारण बताएँ।

 

Question 11: रात्रि-आकाश के बारे में चिंतन कीजिए और इसके संबंध में कोई कविता अथवा कहानी लिखिए।

Answer:

रात्रि-आकाश के असीम सौंदर्य, शांति और वैज्ञानिक रहस्यों पर चिंतन करते हुए एक मौलिक कविता इस प्रकार है:
नीले-काले नभ के पट पर, दीप जले हैं लाखों प्यारे,
अंधियारे की गोद में हँसते, टिम-टिम करते नन्हे तारे।
सप्तर्षि की करछुल घूमे, ध्रुवतारे का मान बढ़ाए,
उत्तर दिशा अटल जो रहकर, भटके राही राह दिखाए।
ओरायन का बाण तना है, लुब्धक अपनी चमक बिखेरे,
सौर जगत के ग्रह-उपग्रह, बाँध रहे गुरुत्व के घेरे।
यह नीरव आकाश सिखाता, प्रकृति का विज्ञान महान,
मानव मन में नित भरता है, अनंत खोजों का संज्ञान।

मुख्य बिंदु:

• रात्रि-आकाश अनंत ब्रह्मांड की खगोलीय विविधता और प्राकृतिक व्यवस्था का दर्पण है।
• कविता में सप्तर्षि, ध्रुवतारा, ओरायन और लुब्धक जैसे प्रमुख खगोलीय पिंडों का समावेश है।
• आकाश का अवलोकन मनुष्य में वैज्ञानिक जिज्ञासा, सौंदर्यबोध और दार्शनिक चिंतन जगाता है।

आम गलतियाँ:

• वैज्ञानिक तथ्यों से पूरी तरह भटककर केवल कोरी कल्पना लिख देना।
• कविता में खगोलीय पिंडों (ध्रुवतारा, ग्रह, तारामंडल) के सटीक संदर्भ न देना।
• केवल दो पंक्तियाँ लिखकर सृजनात्मक अभिव्यक्ति को अधूरा छोड़ देना।

Exam Tips:

a) कविता या कहानी लिखते समय अध्याय में सीखे गए खगोलीय शब्दों (जैसे ध्रुवतारा, ओरायन, सप्तर्षि) का प्रयोग करें।
b) भाषा को प्रवाहमयी, काव्यात्मक और प्रेरणादायी बनाए रखें।
c) प्रत्येक पंक्ति को अलग लाइन में लिखने के लिए स्पष्ट विराम चिह्नों का प्रयोग करें।

 

NOTES: सभी 11 प्रश्नों के उत्तर NCERT कक्षा 6 विज्ञान 'जिज्ञासा' (अध्याय 12: पृथ्वी से परे) के नवीनतम पाठ्यचर्या व वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार पूर्णतः शुद्ध, मौलिक तथा मानक रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

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Yes, we provide bilingual support for Class 6 Science. You can access NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 Beyond Earth (पृथ्वी से परे) in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science NCERT solutions for Class 6 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 Beyond Earth (पृथ्वी से परे) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.