NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 09 Methods of Separation in Everyday Life (दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ) in Hindi

NCERT Solutions for Class 6 Science: Chapter 09 दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ

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Practice Class 6 Science Solutions: Chapter 09 दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ

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Question 1: पृथक्करण विधि के रूप में हस्त चयन का क्या प्रयोजन है?
(क) निस्यंदन
(ख) छँटाई
(ग) वाष्पन
(घ) निस्तारण

Answer:

सही उत्तर: (ख) छँटाई
स्पष्टीकरण: हस्त चयन (handpicking) विधि का प्राथमिक प्रयोजन ठोस मिश्रण में से अवांछित या उपयोगी पदार्थों की हाथ से चुनकर छँटाई (sorting) करना है। इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब मिश्रण के घटकों के आकार, रंग या आकृति में स्पष्ट अंतर हो और अवांछनीय पदार्थों की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो, जैसे गेहूँ, चावल या दालों में से कंकड़, पत्थर और भूसे को बीनकर अलग करना।

मुख्य बिंदु:

• हस्त चयन विधि का मुख्य उद्देश्य विभिन्न भौतिक गुणों वाले ठोस घटकों की छँटाई करना है।
• यह विधि केवल तभी व्यावहारिक होती है जब अशुद्धियों की मात्रा बहुत अधिक न हो।
• घटकों के रंग, रूप और आमाप (आकार) में स्पष्ट भिन्नता होना अनिवार्य है।

आम गलतियाँ:

• हस्त चयन को निस्यंदन (छानना) या निस्तारण जैसी द्रव पृथक्करण विधियों के समान समझ लेना।
• केवल विकल्प संख्या लिखकर वैज्ञानिक स्पष्टीकरण न देना।
• यह भूल जाना कि हस्त चयन केवल ठोस-ठोस मिश्रणों के लिए उपयुक्त है।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प का अक्षर और शब्द दोनों स्पष्ट लिखें।
b) हस्त चयन के सिद्धांत (आकार, रंग व आकृति का अंतर) का उल्लेख अवश्य करें।
c) दैनिक जीवन का एक सरल उदाहरण (जैसे दाल से कंकड़ बीनना) याद रखें।

 

Question 2: निम्नलिखित में से किन पदार्थों का पृथक्करण मथना विधि से किया जाता है?
(क) तेल का पानी से
(ख) रेत का पानी से
(ग) मक्खन का दूध से
(घ) ऑक्सीजन का वायु से

Answer:

सही उत्तर: (ग) मक्खन का दूध से
स्पष्टीकरण: मथना अथवा मंथन (churning) विधि का उपयोग दूध या दही में से मक्खन को अलग करने के लिए किया जाता है। जब दूध या दही को तीव्र गति से मथा जाता है, तो घनत्व में अंतर के कारण कम घनत्व वाला हल्का वसा (मक्खन) ऊपर तैरने लगता है, जिसे आसानी से अलग कर लिया जाता है। तेल और पानी को निस्तारण द्वारा तथा रेत और पानी को निस्यंदन या अवसादन द्वारा अलग किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• मंथन विधि का उपयोग दूध या दही से मक्खन पृथक करने की पारंपरिक व वैज्ञानिक तकनीक है।
• यह विधि घटकों के घनत्व में अंतर (मक्खन का हल्का होना) पर कार्य करती है।
• तीव्र घूर्णन से हल्का घटक सतह पर आ जाता है।

आम गलतियाँ:

• तेल और पानी के मिश्रण के लिए मथना विधि चुन लेना (अमिश्रणीय द्रवों के लिए निस्तारण प्रयुक्त होता है)।
• मंथन के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत (घनत्व में अंतर) को न समझना।
• मक्खन और छाछ के पृथक्करण को निस्यंदन समझ लेना।

Exam Tips:

a) दूध/दही से मक्खन निकालने की प्रक्रिया को 'मंथन' शब्द से जोड़कर याद रखें।
b) स्पष्टीकरण में 'कम घनत्व' और 'सतह पर तैरना' जैसे वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग करें।
c) अन्य विकल्पों के पृथक्करण की सही विधियों पर भी विचार करें।

 

Question 3: निस्यंदन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्रायः अनिवार्य होता है?
(क) उपकरण का आकार
(ख) वायु की उपस्थिति
(ग) छिद्रों का आकार
(घ) मिश्रण का तापमान

Answer:

सही उत्तर: (ग) छिद्रों का आकार
स्पष्टीकरण: निस्यंदन (filtration) की प्रक्रिया में निस्यंदक या फिल्टर पत्र के छिद्रों का आकार (pore size) सबसे निर्णायक और अनिवार्य कारक होता है। निस्यंदन तभी प्रभावी हो सकता है जब निस्यंदक माध्यम के छिद्रों का आकार अघुलनशील ठोस कणों के आकार से छोटा हो तथा द्रव के अणुओं से बड़ा हो। यदि छिद्र बहुत बड़े होंगे, तो ठोस कण भी द्रव के साथ छनकर बाहर निकल जाएँगे और पृथक्करण संभव नहीं हो सकेगा।

मुख्य बिंदु:

• निस्यंदन माध्यम के छिद्रों का आकार ठोस कणों के आकार से छोटा होना चाहिए।
• ठोस कण निस्यंदक पर अवशेष (residue) के रूप में बचते हैं और द्रव निस्यंद (filtrate) बनकर निकल जाता है।
• छिद्रों के आकार के आधार पर ही फिल्टर पेपर, महीन कपड़ा या जाली का चयन किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• उपकरण के आकार या मिश्रण के तापमान को निस्यंदन का मुख्य कारक मान लेना।
• यह न समझना कि छानने की क्रिया सीधे तौर पर जाली या कपड़े के बारीक छिद्रों पर निर्भर करती है।
• अघुलनशील कणों और छिद्रों के सापेक्ष आकार के संबंध को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) 'निस्यंदन' (फिल्ट्रेशन) शब्द देखते ही 'फिल्टर के छिद्रों का आमाप' याद रखें।
b) चाय की छन्नी या फिल्टर पेपर का उदाहरण देकर अपने उत्तर को पुष्ट करें।
c) अवशेष और निस्यंद के अंतर को ध्यान में रखें।

 

Question 4: कारण देते हुए बताएँ कि निम्नलिखित कथनों में सही (✓) और गलत (✗) कौन-कौन से हैं? असत्य कथनों को सही करके लिखें।
(क) नमक के विलयन को सूर्य के प्रकाश में या धूप में रखकर नमक को इससे पृथक किया जा सकता है। [ ]
(ख) जब एक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है। [ ]
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग द्वारा पृथक कर सकते हैं। [ ]
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं। [ ]
(ङ) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है। [ ]

Answer:

(क) सही (✓) — कारण: सूर्य की धूप या प्रकाश से प्राप्त ऊष्मा के कारण जल का निरंतर वाष्पन (evaporation) होता रहता है, जिससे जल वाष्प बनकर वायुमंडल में उड़ जाता है और पात्र में केवल ठोस नमक शेष रह जाता है।
(ख) सही (✓) — कारण: हस्त चयन एक श्रमसाध्य प्रक्रिया है। यदि अवांछित अशुद्धियों (जैसे कंकड़ या भूसा) की मात्रा बहुत कम हो, तभी उन्हें हाथ से चुनकर आसानी से अलग किया जा सकता है; अत्यधिक मात्रा होने पर यह विधि व्यावहारिक नहीं रहती।
(ग) गलत (✗) — कारण: थ्रेशिंग (threshing) का उपयोग सूखे पौधों की डंडियों से अन्नों को अलग करने के लिए पीटने हेतु किया जाता है। मुरमुरे (हल्के) और चावल के भारी दानों को पृथक करने के लिए निष्पावन यानी ओसाई (winnowing) विधि का उपयोग किया जाता है।
सही कथन: मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को निष्पावन (ओसाई) द्वारा पृथक कर सकते हैं।
(घ) सही (✓) — कारण: सरसों का तेल और नींबू पानी आपस में नहीं घुलते (अमिश्रणीय द्रव हैं) और तेल हल्का होने के कारण नींबू पानी के ऊपर एक अलग परत बना लेता है। इस ऊपरी परत को सावधानीपूर्वक उड़ेलकर निस्तारण (decantation) अथवा पृथक्कारी कीप द्वारा अलग किया जा सकता है।
(ङ) गलत (✗) — कारण: जब चावल के महीन आटे को पानी में घोला जाता है, तो आटा पानी में निलंबित होकर गंदला घोल बना लेता है जिसे साधारण छानने वाली जाली या छलनी से अलग नहीं किया जा सकता। इसे पूरी तरह अलग करने के लिए महीन निस्यंदन (फिल्टर पत्र द्वारा) अथवा अवसादन एवं निस्तारण के बाद वाष्पन की आवश्यकता होती है।
सही कथन: चावल के आटे और पानी के मिश्रण को महीन निस्यंदन (फिल्टर पेपर द्वारा) अथवा अवसादन एवं निस्तारण द्वारा पृथक किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• धूप में वाष्पन की प्रक्रिया जल में घुले लवणों को अलग करने का प्राकृतिक साधन है।
• निष्पावन (ओसाई) पवन द्वारा भारी और हल्के घटकों को अलग करने की विधि है।
• अमिश्रणीय द्रवों (जैसे तेल और जल) को उनकी अलग-अलग परतों के आधार पर निस्तारण द्वारा पृथक किया जा सकता है।

आम गलतियाँ:

• केवल टिक (✓) या क्रॉस (✗) लगा देना और प्रश्न के निर्देशानुसार असत्य कथनों को सही करके न लिखना।
• थ्रेशिंग और निष्पावन (ओसाई) की कार्यप्रणाली में अंतर न समझ पाना।
• तेल और जल के अमिश्रणीय होने के बावजूद उन्हें निस्तारण द्वारा पृथक न मानना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कथन के आगे पहले (✓) या (✗) चिह्न स्पष्ट बनाएँ।
b) असत्य कथन के नीचे 'सही कथन' का संशोधित रूप अलग पंक्ति में लिखें।
c) प्रत्येक बिंदु के साथ वैज्ञानिक कारण अवश्य जोड़ें ताकि पूरे अंक मिलें।

 

Question 5: स्तंभ I में दिए गए प्रत्येक मिश्रण को स्तंभ II में उपयुक्त पृथक्करण विधि से मिलान करें।
स्तंभ I — स्तंभ II
(क) बेसन और काले चने का मिश्रण — (i) हस्त चयन
(ख) चौक पाउडर और पानी का मिश्रण — (ii) चुंबकीय पृथक्करण
(ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण — (iii) निस्तारण
(घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण — (iv) चालना
(ङ) तेल और पानी का मिश्रण — (v) निस्यंदन

Answer:

स्तंभ I में दिए गए मिश्रणों को उनकी भौतिक अवस्था एवं उपयुक्त पृथक्करण विधियों (स्तंभ II) के साथ निम्नलिखित प्रकार से सुमेलित किया गया है:
• (क) बेसन और काले चने का मिश्रण — (iv) चालना (sieving), क्योंकि छलनी के बारीक छिद्रों से बारीक बेसन नीचे निकल जाता है और बड़े आकार के काले चने छलनी पर ही रह जाते हैं।
• (ख) चौक पाउडर और पानी का मिश्रण — (v) निस्यंदन (filtration), क्योंकि पानी में अघुलनशील चाक के सूक्ष्म कण फिल्टर पेपर पर अवशेष के रूप में रुक जाते हैं और स्वच्छ पानी छनकर अलग हो जाता है।
• (ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण — (i) हस्त चयन (handpicking), क्योंकि भुट्टे और आलू दोनों ही बड़े आकार के ठोस पदार्थ हैं जिन्हें आँखों से देखकर हाथ से बीनकर सरलता से अलग किया जा सकता है।
• (घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण — (ii) चुंबकीय पृथक्करण (magnetic separation), क्योंकि चुंबक लोहे के चूरे को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है जबकि लकड़ी का बुरादा अचुंबकीय होने के कारण वहीं छूट जाता है।
• (ङ) तेल और पानी का मिश्रण — (iii) निस्तारण (decantation), क्योंकि तेल पानी में अघुलनशील है और ऊपर एक हल्की परत बनाता है, जिसे दूसरे बर्तन में उड़ेलकर अलग किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• दो भिन्न आमाप वाले ठोस कणों को अलग करने के लिए चालना विधि सर्वोत्तम है।
• चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों के मिश्रण को चुंबक की सहायता से अलग किया जाता है।
• द्रव में निलंबित अघुलनशील महीन कणों को निस्यंदन द्वारा पृथक किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• बेसन और चने के मिश्रण को चालने के स्थान पर हस्त चयन से मिला देना।
• चाक और पानी के मिश्रण में निस्तारण और निस्यंदन के बीच भ्रमित होना।
• मिलान में केवल संख्याएँ लिख देना और वैज्ञानिक कारण की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) परीक्षा में स्तंभ I और स्तंभ II के सही जोड़ों को आमने-सामने पंक्तिबद्ध लिखें।
b) प्रत्येक मिलान के पीछे छिपे वैज्ञानिक गुण (जैसे कणों का आकार, चुंबकत्व, विलेयता) को ध्यान में रखें।
c) (क) से (ङ) तक सभी 5 भागों का क्रम सुनिश्चित करें।

 

Question 6: किस परिस्थिति में आप ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने में निस्यंदन के स्थान पर निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे?

Answer:

हम ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने के लिए निस्यंदन के स्थान पर निस्तारण (decantation) विधि का उपयोग तब करेंगे जब ठोस घटक द्रव में पूरी तरह अघुलनशील हो और उसके कण इतने भारी हों कि मिश्रण को कुछ समय तक शांत (स्थिर) छोड़ देने पर वे अवसादन (sedimentation) की प्रक्रिया द्वारा पात्र की तली में स्वतः बैठ जाएँ। उदाहरण के लिए, जल में मिले हुए मोटे रेत, कंकड़ या भारी मिट्टी के मिश्रण में जब ठोस कण पेंदे में जमा हो जाते हैं, तो बिना हिलाए ऊपरी स्वच्छ जल को दूसरे बर्तन में उड़ेलकर निस्तारित कर लिया जाता है। इसके विपरीत, यदि ठोस कण अत्यंत सूक्ष्म हों और द्रव में निलंबित रहें (जैसे बारीक चाक या कीचड़), तो निस्तारण काम नहीं करता और निस्यंदन अनिवार्य हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• निस्तारण के लिए ठोस कणों का भारी और अघुलनशील होना अनिवार्य है ताकि वे तली में बैठ सकें।
• निस्तारण की पूर्व-शर्त अवसादन (ठोस का नीचे बैठना) है।
• यह विधि निस्यंदन की तुलना में तीव्र और सरल है यदि ठोस कण पर्याप्त बड़े व भारी हों।

आम गलतियाँ:

• अवसादन (sedimentation) और निस्तारण (decantation) के अंतर्संबंध को न समझाना।
• हल्के या तैरने वाले पदार्थों के लिए निस्तारण को उपयुक्त बता देना।
• रेत-पानी या दाल-चावल धोने के व्यावहारिक उदाहरण को उत्तर में शामिल न करना।

Exam Tips:

a) 'भारी अघुलनशील कण' और 'तली में बैठना'—इन दो प्रमुख शर्तों का उल्लेख अवश्य करें।
b) अवसादन के बाद की क्रिया के रूप में निस्तारण को स्पष्ट करें।
c) तुलना के लिए बताएं कि बारीक निलंबित कणों के लिए निस्यंदन ही क्यों आवश्यक है।

 

Question 7: नासिका में बालों की उपस्थिति को आप किस पृथक्करण प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं?

Answer:

नासिका (नाक) में उपस्थित महीन बालों की कार्यप्रणाली को हम निस्यंदन अथवा छानने (filtration) की जैविक प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं। जिस प्रकार किसी फिल्टर पत्र या महीन जाली के बारीक छिद्र द्रव को जाने देते हैं किंतु अवांछित ठोस कणों को रोक लेते हैं, ठीक उसी प्रकार जब हम श्वास लेते हैं, तो नासिका के बाल और श्लेष्मा (mucus) एक प्राकृतिक निस्यंदक (natural filter) की भाँति कार्य करते हैं। वे वायु में उपस्थित धूल-मिट्टी के कणों, परागकणों और अन्य सूक्ष्म अशुद्धियों को रोक लेते हैं और केवल स्वच्छ वायु को ही हमारे फेफड़ों तक पहुँचने देते हैं।

मुख्य बिंदु:

• नासिका के बाल श्वसन तंत्र में एक प्राकृतिक निस्यंदक (filter) के रूप में कार्य करते हैं।
• यह प्रक्रिया भौतिक विज्ञान के निस्यंदन (छानना) सिद्धांत का जैविक उदाहरण है।
• यह फेफड़ों को धूल, धुएँ और हानिकारक सूक्ष्म कणों से सुरक्षित रखती है।

आम गलतियाँ:

• इसे अवसादन या वाष्पन जैसी अन्य पृथक्करण विधियों से जोड़ देना।
• केवल यह लिखना कि 'बाल धूल रोकते हैं' और वैज्ञानिक प्रक्रिया 'निस्यंदन' का नाम न लिखना।
• फिल्टर के कार्य और नासिका के बालों के बीच सादृश्यता को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) उत्तर की पहली ही पंक्ति में 'निस्यंदन (Filtration)' शब्द को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
b) नासिका के बालों की तुलना चाय की छन्नी या फिल्टर पेपर की जाली से करके समझाएँ।
c) श्वसन स्वास्थ्य में इसकी भूमिका को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 8: कोविड-19 (कोरोना वायरस महामारी) के समय, हम सभी ने मास्क पहने थे। सामान्यतया वे किस सामग्री से बने होते हैं? आपके मुँह और नथुनों (नाक) को ढँकने में मास्क की क्या भूमिका है?

Answer:

मास्क सामान्यतया बहु-परतीय सूती कपड़े (cotton cloth), पॉलीप्रोपाइलीन अथवा गैर-बुने हुए संश्लेषित रेशों (non-woven synthetic fibres जैसे N-95 या सर्जिकल मास्क की सामग्री) से बने होते हैं। मुँह और नाक को ढँकने में मास्क की मुख्य भूमिका एक भौतिक निस्यंदक (physical barrier/filter) के रूप में कार्य करने की होती है। यह साँस लेते और छोड़ते समय वायु में उपस्थित संक्रामक सूक्ष्मजीवों (वायरस, बैक्टीरिया), ड्रॉपलेट्स (छींक या खाँसी की सूक्ष्म बूँदों) और धूल-कणों को रोक लेता है। यह दोतरफा सुरक्षा प्रदान करता है—संक्रमित व्यक्ति के रोगाणुओं को बाहर वातावरण में फैलने से रोकता है तथा स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित वायु में साँस लेने से बचाता है।

मुख्य बिंदु:

• मास्क गैर-बुने हुए पॉलीप्रोपाइलीन रेशों या सघन सूती कपड़े की कई परतों से बनते हैं।
• मास्क का कार्य निस्यंदन सिद्धांत पर आधारित एक सुरक्षात्मक अवरोध बनाना है।
• यह श्वसन ड्रॉपलेट्स और रोगाणुओं के संचरण को रोककर दोतरफा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

आम गलतियाँ:

• मास्क की निर्माण सामग्री में केवल 'कपड़ा' लिख देना और आधुनिक फिल्टर सामग्री (गैर-बुने रेशे) का उल्लेख न करना।
• मास्क की दोतरफा सुरक्षा (दूसरों से बचाव और दूसरों की सुरक्षा) के पहलू को छोड़ देना।
• इसे विज्ञान की 'निस्यंदन प्रक्रिया' से न जोड़ना।

Exam Tips:

a) सामग्री के रूप में सूती कपड़ा और गैर-बुने पॉलीप्रोपाइलीन रेशों का नाम लिखें।
b) 'भौतिक अवरोध', 'ड्रॉपलेट्स का निस्यंदन' और 'संक्रमण रोकथाम' जैसे मानक शब्द प्रयोग करें।
c) कोविड-19 के संदर्भ में इसके वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करें।

 

Question 9: आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मिश्रण दिया गया है। इस मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कीजिए।

Answer:

आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे के त्रिक मिश्रण से तीनों घटकों को अलग करने की चरणबद्ध वैज्ञानिक प्रक्रिया निम्नलिखित है:
चरण 1 (हस्त चयन द्वारा आलू का पृथक्करण): सर्वप्रथम मिश्रण में से आलू को हाथ से बीनकर (हस्त चयन विधि द्वारा) अलग कर लेते हैं, क्योंकि आलू का आकार नमक और बुरादे की तुलना में बहुत बड़ा होता है।
चरण 2 (जल मिलाना एवं अवसादन/प्लावन): अब बचे हुए नमक और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण में पर्याप्त मात्रा में जल मिलाते हैं और हिलाते हैं। नमक जल में पूरी तरह घुल जाता है, जबकि लकड़ी का बुरादा अघुलनशील और पानी से हल्का होने के कारण सतह पर तैरने लगता है।
चरण 3 (निस्यंदन द्वारा बुरादा पृथक करना): इस मिश्रण को फिल्टर पेपर या महीन कपड़े से छान (निस्यंदन) लेते हैं। लकड़ी का बुरादा छन्नी पर अवशेष के रूप में अलग हो जाता है, जिसे सुखा लिया जाता है।
चरण 4 (वाष्पन द्वारा नमक प्राप्त करना): छाने गए स्वच्छ नमकीन जल (निस्यंद) को एक बर्तन में लेकर गर्म करते हैं। वाष्पन (evaporation) की प्रक्रिया से सारा जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और बर्तन की तली में शुद्ध ठोस नमक शेष रह जाता है।

मुख्य बिंदु:

• पहले चरण में बड़े आकार के आधार पर आलू को हस्त चयन द्वारा अलग किया जाता है।
• नमक की जल में विलेयता और लकड़ी के बुरादे के हल्केपन व तैरने के गुण का उपयोग किया जाता है।
• निस्यंदन से बुरादा तथा वाष्पन से घुला हुआ नमक अलग प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• चरणों के सही क्रम को गड़बड़ाना (जैसे पहले ही पानी मिला देना जिससे आलू गीला हो जाए)।
• बुरादे को निकालने के लिए सीधे वाष्पन करने का सुझाव दे देना।
• नमक को पानी से अलग करने के लिए निस्यंदन लिख देना (घुले नमक को छाना नहीं जा सकता)।

Exam Tips:

a) प्रत्येक चरण को शीर्षक (जैसे चरण 1: हस्त चयन) देकर क्रमबद्ध रूप से लिखें।
b) प्रत्येक घटक के अलग होने का भौतिक गुण (आकार, विलेयता, घनत्व) स्पष्ट करें।
c) अंत में तीनों अवयवों (आलू, बुरादा, नमक) के पृथक होने की पुष्टि करें।

 

Question 10: अग्रलिखित 'बुद्धिमान लीला' शीर्षक कहानी पढ़ें। इसमें यत्र-तत्र आए दो वैकल्पिक शब्दों में से सबसे उचित विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ। अपनी पसंद से अनुच्छेद का कोई अन्य उपयुक्त शीर्षक दें।
लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी। जब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही छोड़ आए हैं। इससे पहले कि उसके पिता को प्यास/भूख लगे, वह पास के तालाब से पानी/अनाज लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए योग्य/अयोग्य है। पानी को शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को कागज/मलमल के कपड़े से निस्यंदित किया/मथा। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में ठंडा किया/उबाला। ठंडे/उबले पानी को उसने दोबारा से निस्यंदित किया/मथा और उसने पानी पीने योग्य/अयोग्य बनाया। यह पानी उसने अपने पिताजी को दिया। उन्होंने लीला को आशीर्वाद दिया और उसके इस प्रयास की सराहना की।

Answer:

दिए गए गद्यांश में उचित विकल्पों का चयन करके सही किया गया अनुच्छेद निम्नलिखित है:
लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी। जब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही छोड़ आए हैं। इससे पहले कि उसके पिता को प्यास (✓) लगे, वह पास के तालाब से पानी (✓) लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए अयोग्य (✓) है। पानी को शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया (अवसादन) और उसके बाद मटमैले पानी को मलमल के कपड़े (✓) से निस्यंदित किया (✓)। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में उबाला (✓)। उबले (✓) पानी को उसने दोबारा से निस्यंदित किया (✓) और उसने पानी पीने योग्य (✓) बनाया। यह पानी उसने अपने पिताजी को दिया। उन्होंने लीला को आशीर्वाद दिया और उसके इस प्रयास की सराहना की।
कहानी का अन्य उपयुक्त शीर्षक: "जल शोधन और नन्हीं वैज्ञानिक" अथवा "लीला की सूझबूझ और स्वच्छ जल"।

मुख्य बिंदु:

• मटमैले जल को शांत छोड़ना अवसादन कहलाता है।
• मलमल के कपड़े से छानना निस्यंदन की एक व्यावहारिक विधि है।
• पानी को 10 मिनट तक उबालने से उसमें उपस्थित हानिकारक रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• वैकल्पिक शब्दों में से गलत विकल्प चुन लेना (जैसे 'उबाला' के स्थान पर 'ठंडा किया')।
• कपड़े से छानने की क्रिया को 'मथना' चुन लेना।
• कहानी के लिए कोई नया शीर्षक सुझाना भूल जाना।

Exam Tips:

a) पूरे परिच्छेद को सही चुने गए शब्दों के साथ पुनः साफ-सुथरा लिखें।
b) चुने गए सही शब्दों को कोष्ठक में (✓) लगाकर या गहरे अक्षरों में रेखांकित करें।
c) अंत में एक रचनात्मक और विज्ञान-सम्मत शीर्षक अवश्य लिखें।

 

NOTES: प्रश्न 4 (ख) में मूल पीडीएफ उत्तर में हस्त चयन को गलत (✗) दर्शाया गया था, जबकि एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के अनुसार हस्त चयन का उपयोग तभी व्यावहारिक होता है जब अशुद्धियों की मात्रा कम हो, अतः इसे सही (✓) किया गया है; प्रश्न 5 (क) में मूल उत्तर में बेसन और चने को हस्त चयन से मिलाया गया था, जिसे मानक एनसीईआरटी विधि 'चालना' (sieving) से संशोधित किया गया है क्योंकि भिन्न आमाप के चूर्ण और दानों को चालने द्वारा ही सुगमता से पृथक किया जाता है।

Science Class 6 Curriculum Solutions: Chapter 09 दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ

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