NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 08 A Journey through States of Water (जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा) in Hindi

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Question 1: निम्नलिखित में से कौन-सा संघनन का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
(क) जल का वाष्प के रूप में परिवर्तन।
(ख) जल का द्रव से गैसीय अवस्था में बदलने का प्रक्रम।
(ग) छोटी जल की बूंदों से बादलों का बनना।
(घ) जल वाष्प का उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तन।

Answer:

सही उत्तर विकल्प (घ) जल वाष्प का उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तन है। संघनन (condensation) वह ऊष्माक्षेपी भौतिक प्रक्रम है जिसमें कोई पदार्थ अपनी गैसीय अवस्था (जैसे जल वाष्प) से ऊष्मा त्यागकर शीतल होने पर पुनः द्रव अवस्था (जल) में परिवर्तित हो जाता है; जैसे ठंडे जल से भरे गिलास की बाहरी ठंडी सतह के संपर्क में आने पर वायु की अदृश्य जल वाष्प संघनित होकर जल की छोटी-छोटी बूँदों के रूप में प्रकट हो जाती है।

मुख्य बिंदु:

• संघनन वाष्पीकरण (evaporation) की ठीक विपरीत प्रक्रिया है।
• गैस से द्रव में अवस्था परिवर्तन के लिए तापमान में कमी (शीतलन) आवश्यक होती है।
• वायुमंडल में बादलों, ओस और कोहरे का निर्माण संघनन की प्रक्रिया द्वारा ही होता है।

आम गलतियाँ:

• संघनन को वाष्पीकरण समझकर विकल्प (क) या (ख) चुन लेना।
• विकल्प (ग) को परिभाषा मान लेना, जबकि बादलों का बनना संघनन का केवल एक परिणाम/उदाहरण है।
• यह भूल जाना कि संघनन में पदार्थ गैस से द्रव अवस्था में जाता है, न कि द्रव से गैस में।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प अक्षर (घ) के साथ-साथ पूरा कथन भी लिखें।
b) संघनन की परिभाषा लिखते समय 'वाष्प से द्रव में परिवर्तन' को अवश्य रेखांकित करें।
c) दैनिक जीवन का एक सरल उदाहरण (जैसे ठंडे गिलास की सतह पर बूँदें आना) अवश्य याद रखें।

 

Question 2: नीचे की दी गयी प्रक्रियाओं में से किस प्रक्रिया में वाष्पीकरण बहुत महत्वपूर्ण है —
(क) रंग भरना
(i) क्रेयॉन से
(ii) पानी के रंगों से
(iii) ऐक्रेलिक रंगों से
(iv) पेंसिल रंगों से
(ख) कागज पर लिखना
(i) पेंसिल से
(ii) स्याही वाले पेन से
(iii) बॉल पॉइंट पेन से

Answer:

(क) रंग भरने में सही उत्तर विकल्प (ii) पानी के रंगों से (water colours) है, क्योंकि जल-रंगों में रंजक कणों को घोलने व फैलाने के लिए जल का विलायक के रूप में उपयोग किया जाता है, और जब कागज पर लगाया गया जल वाष्पीकृत (evaporate) होकर उड़ जाता है, तभी रंग पूरी तरह सूखकर स्थायी बनता है। (ख) कागज पर लिखने में सही उत्तर विकल्प (ii) स्याही वाले पेन से (fountain/ink pen) है, क्योंकि स्याही वाले पेन में तरल पानी-आधारित स्याही प्रयुक्त होती है, जो कागज पर आने के बाद वाष्पीकरण की प्रक्रिया द्वारा ही सूखती है जिससे लिखावट फैलने से बचती है; जबकि पेंसिल में ठोस ग्रेफाइट और बॉल पेन में गाढ़ी तेल-आधारित स्याही होती है जहाँ वाष्पीकरण की भूमिका नगण्य होती है।

मुख्य बिंदु:

• जल-रंगों और तरल स्याही को सूखने के लिए जल के वाष्पीकरण की आवश्यकता होती है।
• वाष्पीकरण के बिना तरल रंगों और स्याही से की गई कलाकृति या लिखावट धुंधली होकर फैल जाएगी।
• मोम वाले क्रेयॉन और ग्रेफाइट पेंसिल ठोस होने के कारण वाष्पीकरण पर निर्भर नहीं करते।

आम गलतियाँ:

• बॉल पॉइंट पेन को स्याही वाले पेन से भ्रमित कर लेना, जबकि बॉल पेन में तेल-आधारित स्याही होती है।
• ऐक्रेलिक रंगों को पानी के रंगों से अधिक महत्वपूर्ण मान लेना, जबकि जल-रंग पूरी तरह जल के वाष्पीकरण पर आधारित हैं।
• केवल विकल्प चुनना और उसके पीछे वाष्पीकरण की भूमिका का संक्षिप्त कारण न लिखना।

Exam Tips:

a) दोनों उप-भागों (क) और (ख) के लिए चुने गए विकल्प का क्रमांक व नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
b) उत्तर में 'द्रव का वाष्पीकृत होकर उड़ना' शब्द का प्रयोग करें जिससे रंग/स्याही का सूखना सिद्ध हो सके।
c) यह ध्यान रखें कि जिन पदार्थों में जल की मात्रा अधिक होगी, वहीं वाष्पीकरण की भूमिका सर्वाधिक होगी।

 

Question 3: आजकल हमें कई जगह हरे रंग की प्लास्टिक की घास दिखाई देती है। प्राकृतिक घास के आस-पास का स्थान प्लास्टिक की घास के आस-पास के स्थान की तुलना में अधिक ठंडा लगता है। क्या आप पता लगा सकते हैं कि ऐसा क्यों है?

Answer:

प्राकृतिक घास की पत्तियों के सूक्ष्म रंध्रों द्वारा निरंतर वाष्पोत्सर्जन (transpiration) होता रहता है और उसकी नम मिट्टी से जल का निरंतर वाष्पीकरण (evaporation) होता है; जल को द्रव से वाष्प में बदलने के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा (latent heat) वह आसपास के परिवेश से अवशोषित करता है, जिसके फलस्वरूप वातावरण में स्वाभाविक शीतलन (cooling effect) उत्पन्न होता है। इसके विपरीत, प्लास्टिक की घास एक कृत्रिम संश्लेषित (synthetic) पदार्थ है जिसमें न तो कोई जैविक प्रक्रम होता है और न ही जल का वाष्पीकरण; बल्कि प्लास्टिक सूर्य के विकिरण को अवशोषित करके अत्यधिक गर्म हो जाता है और ऊष्मा बाहर विकीर्ण करता है। इसी कारण प्राकृतिक घास के आसपास का क्षेत्र प्लास्टिक की घास की तुलना में कहीं अधिक ठंडा महसूस होता है।

मुख्य बिंदु:

• वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन दोनों ही परिवेश से ऊष्मा सोखकर ठंडक पैदा करते हैं।
• प्राकृतिक पौधे जैविक रूप से जल को वाष्प के रूप में वायुमंडल में छोड़ते हैं।
• प्लास्टिक ऊष्मा का अवशोषण करके गर्म हो जाता है और उसमें वाष्पोत्सर्जन संभव नहीं होता।

आम गलतियाँ:

• केवल यह लिख देना कि प्राकृतिक घास सजीव है, बिना वाष्पोत्सर्जन और गुप्त ऊष्मा का उल्लेख किए।
• प्लास्टिक की घास द्वारा ऊष्मा संचय के गुण को स्पष्ट न कर पाना।
• 'वाष्पीकरण से शीतलन होता है' के मूल वैज्ञानिक नियम को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) 'वाष्पोत्सर्जन' (Transpiration) और 'शीतलन प्रभाव' (Cooling effect) शब्दों को अपने उत्तर में प्रमुखता दें।
b) तुलनात्मक प्रश्न में दोनों पक्षों (प्राकृतिक घास बनाम प्लास्टिक घास) का अलग-अलग वैज्ञानिक विश्लेषण करें।
c) ऊष्मा के अवशोषण की प्रक्रिया को परिवेश के तापमान में गिरावट से जोड़कर निष्कर्ष लिखें।

 

Question 4: जल के अतिरिक्त अन्य द्रव पदार्थों के उदाहरण दीजिए जो वाष्पित हो सकते हैं।

Answer:

जल के अतिरिक्त सामान्य ताप पर आसानी से वाष्पित होने वाले अन्य प्रमुख द्रव पदार्थ एसीटोन या नेल पॉलिश रिमूवर (acetone), ऐल्कोहॉल या स्पिरिट (ethanol/sanitizer), पेट्रोल (petrol), परफ्यूम या इत्र (perfume), ईथर (ether) तथा मिट्टी का तेल (kerosene) हैं। इनमें से एसीटोन, पेट्रोल और ऐल्कोहॉल जैसे द्रव अत्यधिक वाष्पशील (volatile liquids) होते हैं, जिनका क्वथनांक जल से काफी कम होता है, अतः हथेली या खुली कटोरी में रखने पर ये जल की तुलना में भी कहीं अधिक तीव्र गति से वाष्प में परिवर्तित हो जाते हैं और त्वचा पर तुरंत ठंडक का अहसास कराते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रत्येक द्रव में अपने विशिष्ट क्वथनांक पर वाष्पित होने का गुण होता है।
• एसीटोन, स्पिरिट और पेट्रोल अत्यंत वाष्पशील कार्बनिक द्रव हैं।
• वाष्पशील द्रव खुली हवा में रखने पर सामान्य कक्ष ताप पर ही तेजी से वाष्प बन जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• संपीडित गैसों (जैसे एलपीजी) को सामान्य द्रव मानकर भ्रमित होना।
• केवल एक ही उदाहरण लिखकर छोड़ देना जबकि प्रश्न में बहुवचन (उदाहरणों) की मांग है।
• यह समझना कि केवल जल ही वाष्पित हो सकता है।

Exam Tips:

a) कम से कम 4 से 5 सुपरिचित दैनिक द्रवों (जैसे सैनिटाइजर, पेट्रोल, एसीटोन, इत्र) के नाम लिखें।
b) 'वाष्पशील द्रव' (Volatile liquids) शब्द का प्रयोग उत्तर को वैज्ञानिक रूप से समृद्ध बनाता है।
c) हथेली पर सैनिटाइजर या एसीटोन के उड़ने से लगने वाली ठंडक का संक्षिप्त संदर्भ दें।

 

Question 5: पंखे हवा को इधर-उधर घुमाते हैं जिससे ठंडक महसूस होती है। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पंखों का उपयोग विचित्र लग सकता है क्योंकि पंखे की हवा वस्तुओं को ठंडा करती है, गरम नहीं। सामान्यतः जब जल वाष्पित होता है तो उसे ऊष्मा की आवश्यकता होती है, ठंडी वायु की नहीं। आपका इस विषय में क्या सोचना है?

Answer:

यह विचार वैज्ञानिक दृष्टि से बिल्कुल सही है कि पंखा वास्तव में हवा को ठंडा या गर्म नहीं करता, बल्कि वह केवल कमरे की स्थिर वायु को गतिशील बनाता है। वाष्पीकरण (evaporation) की दर वायु की गति बढ़ने पर तेजी से बढ़ जाती है; गीले कपड़ों के पास की वायु जल वाष्प से संतृप्त हो जाती है, परंतु पंखे की तेज हवा उस नम वायु को कपड़ों की सतह से हटाकर वहाँ शुष्क वायु लाती रहती है, जिससे वाष्पीकरण का क्रम निरंतर तीव्र बना रहता है। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा (latent heat) कपड़ों और कमरे के सामान्य परिवेशी तापमान से ही स्वतः अवशोषित हो जाती है; ठीक इसी प्रकार जब पंखे की हवा हमारे शरीर के पसीने का वाष्पीकरण तेज करती है, तो पसीना वाष्पित होने के लिए ऊष्मा हमारे शरीर से खींचता है, जिससे हमें ठंडक का अनुभव होता है।

मुख्य बिंदु:

• पंखा हवा का तापमान कम नहीं करता, बल्कि वायु संचलन (वायु की गति) को बढ़ाता है।
• वायु की गति में वृद्धि होने से वाष्पीकरण की दर में सीधे वृद्धि होती है।
• वाष्पीकरण हेतु आवश्यक ऊष्मा आसपास के परिवेश तथा गीली वस्तु से ही प्राप्त होती है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि पंखे की हवा वास्तव में ठंडी होती है।
• यह समझना कि वाष्पीकरण केवल उच्च तापमान या हीटर जैसी गर्मी में ही संभव है।
• वायु की गति और नम वायु के हटने की क्रियाविधि को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक 'वायु की गति' (Wind speed) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) यह स्पष्ट करें कि पंखा हवा ठंडी नहीं करता बल्कि वाष्पीकरण तेज करके ठंडक उत्पन्न करता है।
c) ऊष्मा के स्रोत (कमरे का परिवेश) और गुप्त ऊष्मा के सिद्धांत को जोड़कर उत्तर पूरा करें।

 

Question 6: प्रायः जब नालियों से कीचड़ निकाला जाता है तो नाली के बगल में उसका ढेर बनाकर तीन से चार दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद इसे उद्यान या खेत में ले जाया जाता है जहाँ इसका उपयोग खाद के रूप में कर सकते हैं। यह विधि कीचड़ को दूसरे स्थान पर ले जाने की लागत कम करती है और इसके साथ ही काम करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा बढ़ाती है। इस पर विचार करें और बताएँ कि ऐसा क्यों है?

Answer:

नाली से ताजे निकाले गए कीचड़ में अत्यधिक मात्रा में गंदा जल, भारी नमी और रोगजनक जीवाणु होते हैं। तीन से चार दिनों तक खुले में धूप और हवा में छोड़ देने से वाष्पीकरण (evaporation) के प्रक्रम द्वारा कीचड़ में मौजूद अधिकांश जल सूखकर उड़ जाता है, जिससे कीचड़ का कुल भार और आयतन बहुत कम हो जाता है; भार घटने से परिवहन वाहनों में कम ईंधन लगता है और ढुलाई के फेरे कम होने से परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। इसके अतिरिक्त, धूप की सीधी गर्मी और पराबैंगनी किरणों से कीचड़ में उपस्थित अधिकांश हानिकारक सूक्ष्मजीव व दुर्गंध पैदा करने वाले रोगाणु नष्ट हो जाते हैं, तथा सूखा कीचड़ हाथों या बर्तनों पर चिपकता नहीं है; परिणामस्वरूप सफाईकर्मियों को त्वचा संक्रमण, विषैली गैसों और संक्रामक रोगों का खतरा न्यूनतम हो जाता है, जिससे उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

मुख्य बिंदु:

• वाष्पीकरण द्वारा जल उड़ने से कीचड़ का भार और आयतन काफी घट जाता है, जिससे ढुलाई लागत कम होती है।
• धूप और हवा के संपर्क में सूखने से हानिकारक सूक्ष्मजीव और दुर्गंध समाप्त होती है।
• शुष्क और अर्ध-ठोस कीचड़ को संभालना सुरक्षित, स्वच्छ और सुगम होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल लागत कम होने की बात लिखना और सफाईकर्मियों की सुरक्षा वाले बिंदु को छोड़ देना।
• जल के वाष्पीकरण को भार में कमी के मुख्य वैज्ञानिक कारण के रूप में न जोड़ना।
• धूप द्वारा रोगाणुओं के नष्ट होने (प्राकृतिक विसंक्रमण) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को दो शीर्षकों में विभाजित करें: 'लागत में कमी का कारण' और 'कर्मियों की सुरक्षा का कारण'।
b) 'वाष्पीकरण' और 'भार व आयतन में कमी' के संबंध को रेखांकित करें।
c) खाद के रूप में सुरक्षित उपयोग हेतु जैविक रोगाणु मुक्ति के पहलू को अवश्य शामिल करें।

 

Question 7: एक दिन के लिए घर में होने वाली गतिविधियों का अवलोकन करें। उन गतिविधियों की पहचान करें जिनमें वाष्पीकरण सम्मिलित है? वाष्पीकरण के प्रक्रम को समझने से हमें अपनी दैनिक गतिविधियों में कैसे सहायता मिलती है?

Answer:

घर में होने वाली प्रमुख गतिविधियाँ जिनमें वाष्पीकरण (evaporation) सम्मिलित है: धुले हुए गीले कपड़ों का सूखना, गीले पोंछे के बाद फर्श का सूखना, बर्तन धोने के बाद उनका स्वतः सूखना, भोजन पकाते समय खुली कड़ाही या पतीले से जल का भाप बनकर कम होना, तथा मिट्टी के घड़े में रखे जल का शीतल होना। वाष्पीकरण के वैज्ञानिक प्रक्रम को समझने से हमें दैनिक जीवन में इस प्रकार सहायता मिलती है: (1) हम गीले कपड़ों को अच्छी तरह फैलाकर धूप या पंखे के नीचे डालते हैं क्योंकि पृष्ठीय क्षेत्रफल और वायु की गति बढ़ने से कपड़े तेजी से सूखते हैं; (2) भोजन पकाते समय बर्तन पर ढक्कन लगाकर वाष्पीकरण को रोकते हैं जिससे भोजन जल्दी पकता है और ईंधन की बचत होती है; (3) गर्मियों में मटके के छिद्रों से होने वाले वाष्पीकरण के सिद्धांत को जानकर हम प्राकृतिक रूप से शीतल जल प्राप्त कर सकते हैं; तथा (4) शरीर को ठंडा रखने के लिए गर्मियों में सूती वस्त्र पहनते हैं जो पसीने को सोखकर उसके वाष्पीकरण को सुगम बनाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• कपड़े सूखना, पोछा सूखना और मटके का पानी ठंडा होना वाष्पीकरण के प्रत्यक्ष घरेलू उदाहरण हैं।
• वाष्पीकरण की दर क्षेत्रफल, तापमान और वायु प्रवाह पर निर्भर करती है।
• इस सिद्धांत के ज्ञान से हम समय, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल उदाहरणों की सूची दे देना और यह न बताना कि यह समझ दैनिक जीवन में कैसे मदद करती है।
• खाना पकाने में वाष्पीकरण रोकने (ढक्कन लगाने) के व्यावहारिक अनुप्रयोग को भूल जाना।
• वाष्पीकरण को केवल गर्मी या सूर्य के प्रकाश तक सीमित मान लेना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों (घरेलू गतिविधियों की पहचान तथा व्यावहारिक सहायता) का संतुलित उत्तर दें।
b) वाष्पीकरण को तेज करने वाले कारकों (क्षेत्रफल बढ़ाना, पंखा चलाना) को दैनिक कार्यों से जोड़ें।
c) मटके में जल का शीतलन और सूती कपड़ों की उपयोगिता का वैज्ञानिक संदर्भ अवश्य दें।

 

Question 8: प्रकृति में जल ठोस अवस्था में किस प्रकार विद्यमान है?

Answer:

प्रकृति में जल ठोस अवस्था (solid state of water) में मुख्य रूप से बर्फ और हिम के विभिन्न रूपों में विद्यमान रहता है; जैसे ऊंचे पर्वतीय शिखरों और उत्तरी व दक्षिणी ध्रुवों पर जमी विशाल बर्फ की परतों तथा हिमनदों (glaciers) के रूप में, बादलों से सफेद पंखों की तरह गिरने वाले हिमपात या हिम (snow) के रूप में, भीषण आंधी व वर्षा के समय आकाश से गिरने वाले बर्फ के कठोर गोलों अर्थात ओलों (hailstones) के रूप में, ध्रुवीय महासागरों में तैरते तैरते विशाल हिमखंडों (icebergs) के रूप में, तथा सर्दियों के मौसम में अत्यधिक ठंडे प्रदेशों में नदियों व झीलों की सतह पर जमी बर्फ की चादर और पौधों की पत्तियों पर जमने वाले पाले या तुषार (frost) के रूप में। यह सभी रूप तब बनते हैं जब तापमान गिरकर जल के हिमांक बिंदु (0°C या उससे कम) तक पहुँच जाता है।

मुख्य बिंदु:

• हिमनद (ग्लेशियर) और ध्रुवीय बर्फ की चादरें प्रकृति में ठोस जल के सबसे बड़े भंडार हैं।
• हिम, ओले, पाला और हिमखंड जल के ठोस रूप के विभिन्न प्राकृतिक प्रकटीकरण हैं।
• जल 0°C या उससे कम तापमान पर अपनी द्रव अवस्था से ठोस अवस्था (बर्फ) में परिवर्तित होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल 'बर्फ' लिखकर उत्तर समाप्त कर देना और हिमनद, ओले, हिमखंड जैसे रूपों को छोड़ देना।
• हिम (snow) और बर्फ (ice) के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• यह न बताना कि ये ठोस रूप किन भौगोलिक क्षेत्रों (पर्वत, ध्रुव आदि) में पाए जाते हैं।

Exam Tips:

a) प्रकृति में ठोस जल के कम से कम 4 स्पष्ट रूपों (हिमनद, हिमपात, ओले, हिमखंड) को रेखांकित करें।
b) जल के हिमांक (0°C) और ध्रुवीय/पर्वतीय जलवायु का उल्लेख अवश्य करें।
c) 'हिमनद' (Glaciers) को मीठे जल के सबसे बड़े ठोस स्रोत के रूप में संदर्भित करें।

 

Question 9: "जल हमारे अधिकार से पहले हमारी जिम्मेदारी है" इस कथन पर विचार करें। अपने विचार साझा करें।

Answer:

यह कथन पूर्णतः सत्य और अत्यंत विचारणीय है, क्योंकि यद्यपि स्वच्छ जल प्राप्त करना प्रत्येक प्राणी का बुनियादी प्राकृतिक अधिकार है, परंतु यह अधिकार केवल तभी सुरक्षित रह सकता है जब प्रत्येक नागरिक जल संरक्षण को अपना पहला नैतिक दायित्व समझे। पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत भाग खारा समुद्री जल है और केवल लगभग 2.5 से 3 प्रतिशत भाग ही मीठा जल है, जिसका भी अधिकांश हिस्सा हिमनदों में बर्फ के रूप में संचित है; इस प्रकार मानव उपयोग के लिए सुलभ सतही और भूजल अत्यंत सीमित मात्रा में है। यदि हम अपने कर्तव्य को भूलकर केवल 'अधिकार' समझकर जल का अत्यधिक दोहन, अपव्यय और प्रदूषण करेंगे, तो भविष्य में भीषण जल संकट खड़ा हो जाएगा। अतः हमारा प्राथमिक उत्तरदायित्व है कि हम नल को खुला न छोड़ें, वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) अपनाएँ, जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएँ तथा जल का पुनर्चक्रण व मितव्ययी उपयोग करें, क्योंकि जब हम जल को सहेजने की जिम्मेदारी निभाएँगे, तभी आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकार की रक्षा हो सकेगी।

मुख्य बिंदु:

• स्वच्छ और सुलभ मीठे जल की मात्रा पृथ्वी पर अत्यंत सीमित है।
• बिना संरक्षण और जिम्मेदारी के जल के अधिकार का अस्तित्व लंबे समय तक संभव नहीं है।
• वर्षा जल संचयन और विवेकपूर्ण उपयोग जल संकट के समाधान हेतु अनिवार्य कर्तव्य हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल भावनात्मक विचार लिखना और मीठे जल की सीमित मात्रा के वैज्ञानिक तथ्य न देना।
• 'अधिकार' और 'जिम्मेदारी' के संतुलन को स्पष्ट करने के बजाय केवल नारे लिखकर छोड़ना।
• जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों (जैसे वर्षा जल संचयन) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) मीठे जल की उपलब्धता (लगभग 2.5-3%) के आँकड़े का उल्लेख करके अपने तर्क को पुष्ट करें।
b) 'कर्तव्य से ही अधिकार सुरक्षित होता है' के मूल संदेश को केंद्र में रखकर निष्कर्ष लिखें।
c) जल संरक्षण के 2-3 व्यावहारिक उपाय (जैसे टपकते नल ठीक करना, वर्षा जल संग्रहण) अवश्य लिखें।

 

Question 10: धूप में खड़े दुपहिया वाहन की सीट गरम हो जाती है। आप उसे ठंडा कैसे करेंगे?

Answer:

धूप में अत्यधिक गर्म हो चुकी दुपहिया वाहन की सीट को तुरंत ठंडा करने के लिए सबसे प्रभावी वैज्ञानिक उपाय उस पर जल छिड़कना अथवा एक साफ कपड़े को पानी में भिगोकर सीट पर पोंछा लगाना (या कुछ देर के लिए गीला कपड़ा सीट पर बिछा देना) है। जैसे ही सीट की सतह पर मौजूद जल सीट की अवशोषित ऊष्मा को सोखेगा, वह तेजी से वाष्पीकृत (evaporate) होने लगेगा; वाष्पीकरण की इस गुप्त ऊष्मा (latent heat of vaporization) के अवशोषण के कारण सीट की गर्मी तुरंत निकल जाएगी और सीट अत्यंत शीघ्र शीतल हो जाएगी। इसके साथ ही वाहन को तुरंत धूप से हटाकर किसी पेड़, शेड या छायादार स्थान पर खड़ा कर देना चाहिए ताकि सूर्य का सीधा तापीय विकिरण बंद हो जाए, और यदि उपलब्ध हो तो पंखे या प्राकृतिक हवा के बहाव में रखने से वाष्पीकरण की दर और तेज हो जाएगी। भविष्य में इस समस्या से बचने के लिए धूप में गाड़ी पार्क करते समय सीट पर हल्के रंग का सूती तौलिया या कवर डाल देना चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• जल के वाष्पीकरण के दौरान अवशोषित गुप्त ऊष्मा से सतह तुरंत ठंडी हो जाती है।
• गीला कपड़ा फेरने से सीट की तापीय ऊर्जा पानी के वाष्प बनने में खर्च हो जाती है।
• छायादार स्थान में वाहन ले जाने से अतिरिक्त ऊष्मा का अवशोषण रुक जाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल 'छाया में खड़ा कर देंगे' लिखना और वाष्पीकरण के त्वरित शीतलन उपाय (पानी छिड़कना) को छोड़ देना।
• यह वैज्ञानिक कारण न समझाना कि पानी डालने से सीट क्यों ठंडी होती है (गुप्त ऊष्मा का वाष्पीकरण)।
• अत्यधिक गर्म सीट पर सीधे बर्फ रगड़ने जैसे अव्यावहारिक उपाय सुझाना।

Exam Tips:

a) 'वाष्पीकरण द्वारा गुप्त ऊष्मा का अवशोषण' को सीट के ठंडे होने के मुख्य वैज्ञानिक कारण के रूप में लिखें।
b) त्वरित उपाय (पानी/गीला कपड़ा) और सुरक्षात्मक उपाय (छाया में पार्क करना, कवर लगाना) दोनों बताएँ।
c) उत्तर को व्यावहारिक, चरणबद्ध और वैज्ञानिक शब्दावली से युक्त रखें।

 

NOTES: प्रश्न 4 में मूल पीडीएफ उत्तर में 'तरल गैस (एलपीजी)' को वाष्पित होने वाले द्रव के रूप में अनुचित रूप से शामिल किया गया था (क्योंकि एलपीजी सामान्य दाब पर गैस होती है); शुद्ध उत्तर में वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त वाष्पशील द्रवों (जैसे एसीटोन, ऐल्कोहॉल, पेट्रोल, ईथर) को शामिल किया गया है। साथ ही प्रश्न 5 में पीडीएफ के इस वैज्ञानिक रूप से अशुद्ध कथन को सुधारा गया है कि 'ठंडी हवा अधिक नमी ग्रहण कर सकती है' (वास्तव में गर्म हवा अधिक नमी ग्रहण करती है, और पंखा केवल वायु प्रवाह बढ़ाकर वाष्पीकरण को तीव्र करता है)।

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