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Question 1: निम्नलिखित में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए —
(क) दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को ________ करते हैं जबकि समान ध्रुव एक-दूसरे को ________ करते हैं।
(ख) वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं उन्हें ________ कहते हैं।
(ग) चुंबकीय दिक्सूचक की सुई ________ दिशा में ही ठहरती है।
(घ) चुंबक में सर्वदा ________ ध्रुव होते हैं।
Answer:
(क) दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं जबकि समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। (ख) वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं उन्हें चुंबकीय पदार्थ (magnetic materials) कहते हैं। (ग) चुंबकीय दिक्सूचक की सुई हमेशा उत्तर-दक्षिण (North-South) दिशा में ही ठहरती है। (घ) प्रत्येक चुंबक में सर्वदा दो (two) ध्रुव (उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव) होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• असमान या विपरीत चुंबकीय ध्रुवों के बीच आकर्षण तथा समान ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण होता है।
• लोहा, निकेल और कोबाल्ट जैसे पदार्थ जो चुंबक की ओर खिंचते हैं, चुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं।
• स्वतंत्रतापूर्वक घूमने वाली चुंबकीय सुई पृथ्वी के चुंबकीय प्रभाव से सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में संरेखित होती है।
आम गलतियाँ:
• आकर्षण और प्रतिकर्षण के स्थानों को परस्पर बदल देना।
• चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों की परिभाषाओं में भ्रमित होना।
• चुंबक में दो ध्रुवों के स्थान पर एक ध्रुव लिख देना।
Exam Tips:
a) रिक्त स्थान भरते समय उत्तर पुस्तिका में पूरे वाक्य को लिखकर भरे गए शब्द को रेखांकित करें।
b) 'समान ध्रुव = प्रतिकर्षण' और 'विपरीत ध्रुव = आकर्षण' का नियम सदैव याद रखें।
c) दिशा लिखते समय 'उत्तर-दक्षिण' युग्म को एक साथ लिखें।
Question 2: निम्नलिखित कथन सत्य (✓) हैं या असत्य (X) —
(क) किसी चुंबक को टुकड़ों में तोड़कर एक ध्रुव प्राप्त किया जा सकता है।
(ख) चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
(ग) जब किसी छड़ चुंबक को लोहरेतन के पास लाया जाता है, तो अधिकांश लोहरेतन उसके बीच में चिपक जाता है।
(घ) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ छड़ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर इंगित करता है।
Answer:
(क) असत्य (X) — किसी चुंबक को तोड़ने पर प्रत्येक टुकड़ा एक पूर्ण चुंबक बन जाता है जिसमें उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुव होते हैं; एकल चुंबकीय ध्रुव (magnetic monopole) का अस्तित्व संभव नहीं है। (ख) सत्य (✓) — चुंबक के सजातीय या समान ध्रुव (N-N अथवा S-S) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं। (ग) असत्य (X) — छड़ चुंबक की चुंबकीय शक्ति उसके दोनों सिरों (ध्रुवों) पर सर्वाधिक होती है, अतः अधिकांश लोहरेतन (iron filings) सिरों पर चिपकता है, बीच में बहुत कम चिपकता है। (घ) सत्य (✓) — स्वतंत्रतापूर्वक लटका हुआ छड़ चुंबक पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ संरेखित होकर सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर ही संकेत करता है।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय ध्रुव हमेशा युग्म (जोड़ों) में ही पाए जाते हैं, उन्हें विलगित नहीं किया जा सकता।
• चुंबक के ध्रुवों पर आकर्षण बल अधिकतम और मध्य भाग में न्यूनतम होता है।
• स्वतंत्र रूप से लटके चुंबक का दिशा-निर्धारण गुण दिक्सूचक के निर्माण का आधार है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि चुंबक को आधा काटने पर एक टुकड़ा केवल उत्तरी और दूसरा केवल दक्षिणी ध्रुव बन जाएगा।
• लोहे के बुरादे को पूरे चुंबक पर एकसमान रूप से चिपकता हुआ समझ लेना।
• केवल सत्य/असत्य का चिह्न लगाकर उसके पीछे का वैज्ञानिक कारण न समझना।
Exam Tips:
a) सत्य/असत्य प्रश्नों में कथन संख्या के साथ स्पष्ट रूप से 'सत्य' या 'असत्य' लिखें।
b) यदि कारण पूछा जाए तो ध्रुवों की शक्ति और पृथ्वी के चुंबकत्व का उल्लेख अवश्य करें।
c) लोहरेतन वाले कथन में 'ध्रुवों पर अधिकतम आकर्षण' की संकल्पना का ध्यान रखें।
Question 3: स्तंभ I में विभिन्न स्थितियाँ दर्शाई गई हैं जिनमें एक चुंबक का कोई एक ध्रुव दूसरे चुंबक के किसी ध्रुव के निकट स्थित होता है। स्तंभ II में विभिन्न स्थितियों के लिए उनके बीच होने वाली अंतःक्रिया दर्शाई गई है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
स्तंभ I — स्तंभ II
N - N — ______
N - ______ — आकर्षण
S - N — ______
______ - S — प्रतिकर्षण
Answer:
स्तंभ I और स्तंभ II के रिक्त स्थानों की सही अंतःक्रिया इस प्रकार है: प्रथम पंक्ति: N - N — प्रतिकर्षण (Repulsion), क्योंकि दो समान उत्तरी ध्रुव परस्पर प्रतिकर्षित होते हैं; द्वितीय पंक्ति: N - S — आकर्षण (Attraction), क्योंकि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव विपरीत होने के कारण आकर्षित होते हैं; तृतीय पंक्ति: S - N — आकर्षण (Attraction), क्योंकि दक्षिणी और उत्तरी विपरीत ध्रुवों में परस्पर आकर्षण बल लगता है; तथा चतुर्थ पंक्ति: S - S — प्रतिकर्षण (Repulsion), क्योंकि दो समान दक्षिणी ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• समान ध्रुव (N-N या S-S) सदैव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
• विपरीत ध्रुव (N-S या S-N) सदैव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
• चुंबकीय अंतःक्रिया केवल आकर्षण तक सीमित नहीं है, प्रतिकर्षण भी इसका अनिवार्य अंग है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिकर्षण के लिए S के साथ N लिख देना।
• आकर्षण की स्थिति में रिक्त स्थान में N भर देना।
• स्तंभों के मिलान में पंक्तियों के क्रम को गड़बड़ा देना।
Exam Tips:
a) स्तंभों को आमने-सामने स्पष्ट रूप से लिखकर रिक्त स्थानों को भरें।
b) केवल 'N' या 'S' लिखते समय बड़े अक्षरों (capital letters) का ही प्रयोग करें।
c) प्रतिकर्षण केवल तभी होता है जब दोनों ध्रुव एक जैसे हों, इस नियम को जाँच लें।
Question 4: अथर्व ने एक प्रयोग किया जिसमें उसने एक छड़ चुंबक लिया और उसे स्टील की पिनों के ढेर पर घुमाया (चित्र 4.15)। आपके अनुसार तालिका 4.3 में दिए गए अवलोकनों के समुच्चय में से कौन-सा विकल्प संभवतः उसका वास्तविक अवलोकन है?
तालिका 4.3 — चुंबक द्वारा उसके विभिन्न स्थानों पर आकर्षित पिनों की संख्या
(i) स्थिति 'क': 10, स्थिति 'ख': 2, स्थिति 'ग': 10
(ii) स्थिति 'क': 10, स्थिति 'ख': 10, स्थिति 'ग': 2
(iii) स्थिति 'क': 2, स्थिति 'ख': 10, स्थिति 'ग': 10
(iv) स्थिति 'क': 10, स्थिति 'ख': 10, स्थिति 'ग': 10
Answer:
आकृति का विवरण: चित्र 4.15 में एक छड़ चुंबक के दो सिरों को स्थिति 'क' व स्थिति 'ग' (ध्रुव) तथा मध्य भाग को स्थिति 'ख' के रूप में दर्शाया गया है जिसे स्टील की पिनों के ढेर पर घुमाया गया है।
सही उत्तर विकल्प (i) है (स्थिति 'क': 10, स्थिति 'ख': 2, स्थिति 'ग': 10)। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि छड़ चुंबक के दोनों सिरों अर्थात स्थिति 'क' और 'ग' पर उसके चुंबकीय ध्रुव स्थित होते हैं जहाँ चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और आकर्षण बल सर्वाधिक होता है, इसलिए वहाँ अधिकतम संख्या में पिनें (10 और 10) चिपकती हैं; इसके विपरीत, चुंबक के मध्य भाग (स्थिति 'ख') पर चुंबकीय आकर्षण बल सबसे कम होता है, अतः वहाँ बहुत कम संख्या में पिनें (केवल 2) चिपकती हैं।
मुख्य बिंदु:
• छड़ चुंबक की आकर्षण शक्ति दोनों सिरों (ध्रुवों) पर अधिकतम होती है।
• चुंबक के मध्य भाग में चुंबकीय शक्ति लगभग नगण्य या न्यूनतम होती है।
• दोनों ध्रुवों की आकर्षण क्षमता एकसमान होती है, अतः दोनों सिरों पर पिनों की संख्या लगभग बराबर होगी।
आम गलतियाँ:
• मध्य भाग में अधिक पिनें चिपकने वाले विकल्प (iii) का चयन कर लेना।
• सभी स्थानों पर समान संख्या (विकल्प iv) चुन लेना।
• दोनों ध्रुवों पर असमान संख्या दर्शाने वाले विकल्प (ii) को सही मान लेना।
Exam Tips:
a) विकल्प संख्या (i) के साथ-साथ उसके आँकड़े और कारण भी संक्षेप में लिखें।
b) 'क' और 'ग' को ध्रुव तथा 'ख' को मध्य भाग के रूप में पहचान कर ही उत्तर दें।
c) प्रयोग-आधारित प्रश्नों में चुंबक के ध्रुवों की प्रबलता का सिद्धांत उद्धृत करें।
Question 5: रेशमा ने बाजार से तीन एकसमान धातु की छड़ें खरीदीं। इनमें से दो छड़ें चुंबक थीं और एक लोहे का टुकड़ा था। बिना किसी अन्य सामग्री का उपयोग किए, वह कैसे पहचानेगी कि तीनों में से कौन-सी दो छड़ें चुंबक हो सकती हैं?
Answer:
रेशमा तीनों छड़ों को छड़ 1, छड़ 2 और छड़ 3 मान लेगी और बिना किसी अन्य वस्तु के केवल उनके सिरों की परस्पर क्रिया से चुंबकों की पहचान करेगी। वह पहले छड़ 1 के किसी एक सिरे को छड़ 2 के दोनों सिरों के पास बारी-बारी से लाएगी; यदि दोनों सिरों के बीच किसी भी स्थिति में प्रतिकर्षण (repulsion) होता है, तो यह निश्चित हो जाएगा कि छड़ 1 और छड़ 2 दोनों ही चुंबक हैं और बची हुई छड़ 3 साधारण लोहे की है। यदि छड़ 1 और 2 के बीच दोनों सिरों से केवल आकर्षण होता है, तो इसका अर्थ है कि इनमें से एक लोहे की छड़ है; तब वह छड़ 1 को हटाकर छड़ 2 और छड़ 3 के सिरों की परस्पर क्रिया जाँचेगी। जिन दो छड़ों के सिरों को आपस में पास लाने पर किसी स्थिति में प्रतिकर्षण दिखाई देगा, वे दोनों छड़ें चुंबक होंगी, क्योंकि प्रतिकर्षण ही चुंबकत्व की एकमात्र निश्चित कसौटी (sure test of magnetism) है, जबकि लोहे की छड़ चुंबक के दोनों ध्रुवों से केवल आकर्षित होती है, कभी प्रतिकर्षित नहीं होती।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिकर्षण ही चुंबकत्व की वास्तविक और निश्चित कसौटी है।
• एक चुंबक और लोहे के टुकड़े के बीच केवल आकर्षण बल लग सकता है।
• दो चुंबकों के सजातीय सिरों को पास लाने पर सदैव प्रतिकर्षण होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल आकर्षण के आधार पर चुंबक की पहचान करने का सुझाव देना।
• यह भूल जाना कि लोहे का टुकड़ा चुंबक के दोनों ध्रुवों की ओर आकर्षित होता है।
• तीनों छड़ों के सिरों को उलटकर जाँचने की वैज्ञानिक प्रक्रिया न लिखना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'प्रतिकर्षण ही चुंबकत्व की निश्चित कसौटी है' वाक्य को अनिवार्य रूप से शामिल करें।
b) छड़ों को चरणबद्ध तरीके से (छड़ 1, 2, 3) जाँचे जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट समझाएँ।
c) यह स्पष्ट करें कि लोहे का टुकड़ा प्रतिकर्षित नहीं हो सकता।
Question 6: आपको एक चुंबक दिया गया है जिस पर ध्रुवों की पहचान अंकित नहीं है। आप एक अन्य चुंबक जिस पर ध्रुव अंकित हैं की सहायता से दिए गए चुंबक के ध्रुवों का पता कैसे लगा सकते हैं?
Answer:
अज्ञात चुंबक के ध्रुवों का निर्धारण करने के लिए हम ज्ञात चुंबक के चिह्नित उत्तरी ध्रुव (N-pole) को अज्ञात चुंबक के किसी एक सिरे के निकट लाएँगे। यदि अज्ञात चुंबक का वह सिरा ज्ञात चुंबक के उत्तरी ध्रुव से प्रतिकर्षित (repelled) होता है, तो वह सिरा निश्चित रूप से उत्तरी ध्रुव (N) होगा, क्योंकि समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। इसके विपरीत, यदि वह सिरा आकर्षित होता है, तो पुष्टि करने के लिए ज्ञात चुंबक के दक्षिणी ध्रुव (S-pole) को उसी सिरे के पास लाएँगे; इस बार प्रतिकर्षण होने पर वह सिरा दक्षिणी ध्रुव (S) सिद्ध हो जाएगा। एक सिरे की ध्रुवता ज्ञात हो जाने पर, अज्ञात चुंबक का दूसरा सिरा स्वतः विपरीत ध्रुव निर्धारित हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• ज्ञात चुंबक के N-ध्रुव से प्रतिकर्षित होने वाला सिरा अज्ञात चुंबक का N-ध्रुव होगा।
• आकर्षण से ध्रुव का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता, प्रतिकर्षण ही ध्रुव की पुष्टि करता है।
• एक छड़ चुंबक का एक ध्रुव ज्ञात होते ही दूसरा ध्रुव विपरीत प्रकृति का तय हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• केवल आकर्षण देखकर ध्रुव का निर्णय ले लेना (क्योंकि विपरीत ध्रुव और लोहा दोनों आकर्षित होते हैं)।
• ज्ञात चुंबक के दोनों ध्रुवों का उपयोग करके दोहराव सत्यापन न समझाना।
• उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के प्रतिकर्षण नियमों को उल्टा लिख देना।
Exam Tips:
a) हमेशा प्रतिकर्षण के आधार पर ध्रुव की पहचान का तर्क प्रस्तुत करें।
b) उत्तर में 'समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं' नियम को स्पष्ट रेखांकित करें।
c) दोनों सिरों के निर्धारण की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में स्पष्ट करें।
Question 7: एक छड़ चुंबक पर उसके ध्रुवों को दर्शाने के लिए कोई चिह्न अंकित नहीं है। आप किसी अन्य चुंबक का उपयोग किए बिना यह कैसे पता लगाएँगे कि उसका उत्तरी ध्रुव किस छोर पर स्थित है?
Answer:
बिना किसी अन्य चुंबक की सहायता के उत्तरी ध्रुव का पता लगाने के लिए हम चुंबक के दिशा-निर्धारक गुण (directive property) का उपयोग करेंगे। इसके लिए छड़ चुंबक के ठीक मध्य में एक धागा बाँधकर उसे किसी अचुंबकीय स्टैंड से इस प्रकार स्वतंत्रतापूर्वक क्षैतिज रूप से लटका देंगे कि वह स्वतंत्र रूप से घूम सके। जब चुंबक स्थिर अवस्था में आएगा, तो वह सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में संरेखित हो जाएगा। इसके बाद हम सूर्य के उदय होने की दिशा (पूर्व) की सहायता से भौगोलिक उत्तर दिशा ज्ञात कर लेंगे। स्वतंत्र रूप से लटके हुए चुंबक का जो छोर पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर (geographic North) की ओर संकेत करता है, वही उस चुंबक का उत्तरी ध्रुव (North-seeking pole) होता है, तथा भौगोलिक दक्षिण की ओर संकेत करने वाला छोर उसका दक्षिणी ध्रुव होता है।
मुख्य बिंदु:
• स्वतंत्रतापूर्वक लटकाया गया चुंबक सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ही विराम अवस्था में आता है।
• भौगोलिक उत्तर की ओर संकेत करने वाला चुंबकीय सिरा चुंबक का उत्तरी ध्रुव कहलाता है।
• दिशा निर्धारण के लिए सूर्य की स्थिति (उदय की दिशा) का संदर्भ लिया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• चुंबक को लटकाने के लिए लोहे के तार या चुंबकीय स्टैंड का प्रयोग करने की बात लिखना।
• चुंबक के मध्य में धागा न बाँधकर असंतुलित लटका देना।
• भौगोलिक उत्तर और दक्षिण दिशा की पहचान का कोई प्राकृतिक स्रोत (जैसे सूर्य) न बताना।
Exam Tips:
a) 'स्वतंत्रतापूर्वक लटका हुआ चुंबक' और 'उत्तर-दक्षिण दिशा' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) भौगोलिक उत्तर की दिशा में ठहरने वाले सिरे को ही 'उत्तरी ध्रुव' कहा जाता है, इसे स्पष्ट लिखें।
c) इस प्रयोग का एक सरल रेखाचित्र बनाने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
Question 8: यदि पृथ्वी स्वयं एक चुंबक है तो क्या आप चुंबकीय दिक्सूचक से दिशा देखकर पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों का अनुमान लगा सकते हैं?
Answer:
हाँ, चुंबकीय दिक्सूचक (magnetic compass) की सुई की दिशा देखकर पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। दिक्सूचक की सुई स्वयं एक छोटा छड़ चुंबक होती है जो क्षैतिज तल में घूमने के लिए स्वतंत्र होती है। जब इसे स्थिर रखा जाता है, तो सुई का उत्तरी ध्रुव पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर की ओर संकेत करता है। चूँकि चुंबकत्व के मूलभूत नियम के अनुसार विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, इसलिए सुई के उत्तरी ध्रुव को अपनी ओर खींचने वाला पृथ्वी का चुंबकीय ध्रुव वास्तव में एक दक्षिणी ध्रुव (magnetic South pole) होना चाहिए जो भौगोलिक उत्तर के निकट स्थित है। इसी प्रकार, दिक्सूचक की सुई का दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक दक्षिण की ओर संकेत करता है, जिसका अर्थ है कि पृथ्वी के भौगोलिक दक्षिण के निकट पृथ्वी के आंतरिक चुंबक का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव (magnetic North pole) स्थित है।
मुख्य बिंदु:
• पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भाँति व्यवहार करती है जिसका अपना चुंबकीय क्षेत्र है।
• दिक्सूचक की सुई का उत्तरी ध्रुव पृथ्वी के चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव द्वारा आकर्षित होता है।
• पृथ्वी का चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक उत्तर के निकट और चुंबकीय उत्तरी ध्रुव भौगोलिक दक्षिण के निकट स्थित है।
आम गलतियाँ:
• भौगोलिक उत्तर को ही पृथ्वी के चुंबक का 'चुंबकीय उत्तरी ध्रुव' समझ लेना।
• विपरीत ध्रुवों के आकर्षण के नियम को पृथ्वी के संदर्भ में लागू न कर पाना।
• केवल 'हाँ' लिखकर उसके वैज्ञानिक कारण का विस्तार न देना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत स्पष्ट 'हाँ' से करें और फिर विपरीत ध्रुवों के आकर्षण का नियम समझाएँ।
b) 'भौगोलिक उत्तर' और 'पृथ्वी का चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव' के आपसी संबंध को स्पष्ट करें।
c) दिक्सूचक की सुई के व्यवहार का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
Question 9: एक मिस्त्री पेचकस की सहायता से एक यंत्र की मरम्मत कर रहा था लेकिन स्टील के पेंच बार-बार नीचे गिर रहे थे। इस अध्याय में आपने जो सीखा है, उसके आधार पर मिस्त्री की समस्या को हल करने का उपाय सुझाइए।
Answer:
मिस्त्री की इस समस्या का वैज्ञानिक समाधान यह है कि वह अपने पेचकस (screwdriver) की स्टील या लोहे की नोक को अस्थायी रूप से चुंबकित (magnetize) कर ले। इसके लिए मिस्त्री को एक शक्तिशाली छड़ चुंबक लेकर उसके किसी एक ध्रुव को पेचकस की धातु की नोक पर रखना चाहिए और उसे पेचकस के एक सिरे से दूसरे सिरे तक केवल एक ही दिशा में घिसते हुए ले जाना चाहिए। सिरे पर पहुँचकर चुंबक को हवा में उठाकर पुनः पहले सिरे पर लाना चाहिए और इसी प्रक्रिया को 30 से 40 बार दोहराना चाहिए। इस स्पर्श विधि से पेचकस की नोक में चुंबकत्व आ जाएगा और स्टील के पेंच (जो कि चुंबकीय पदार्थ हैं) पेचकस की नोक से चिपक जाएँगे, जिससे मरम्मत करते समय वे बार-बार नीचे नहीं गिरेंगे।
मुख्य बिंदु:
• स्पर्श विधि (stroking method) द्वारा लोहे या स्टील की वस्तु को चुंबक बनाया जा सकता है।
• घर्षण सदैव एक ही दिशा में और एक ही ध्रुव से किया जाना अनिवार्य है।
• स्टील चुंबकीय पदार्थ है जो चुंबकित पेचकस की नोक से आसानी से चिपक जाता है।
आम गलतियाँ:
• चुंबक को आगे-पीछे दोनों दिशाओं में रगड़ने की गलत विधि लिखना।
• स्टील को अचुंबकीय पदार्थ समझ लेना।
• केवल 'पेचकस को चुंबक से छूने' की बात लिखना, जबकि एकदिशीय घर्षण आवश्यक होता है।
Exam Tips:
a) चुंबक बनाने की प्रक्रिया में 'एक ही दिशा में रगड़ना' और '30-40 बार दोहराना' स्पष्ट लिखें।
b) स्टील के पेंच को 'चुंबकीय पदार्थ' के रूप में अवश्य संदर्भित करें।
c) उत्तर को व्यावहारिक और क्रमबद्ध चरणों में प्रस्तुत करें।
Question 10: दो वलय चुंबक, 'क' और 'ख', चित्र में दर्शाए अनुसार व्यवस्थित हैं। यह देखा गया है कि चुंबक 'क' नीचे की ओर नहीं जाता है। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है? किसी भी चुंबक को बिना धकेले चुंबक 'क' को चुंबक 'ख' के संपर्क में लाने का उपाय सुझाइए।
Answer:
आकृति का विवरण: चित्र में एक ऊर्ध्वाधर प्लास्टिक स्टैंड पर दो वलय चुंबक पिरोए गए हैं, जहाँ ऊपर स्थित वलय चुंबक 'क' नीचे स्थित वलय चुंबक 'ख' के ऊपर हवा में तैरता हुआ दिखाई दे रहा है।
संभावित कारण: चुंबक 'क' के नीचे न जाने और ऊपर ही तैरते रहने का कारण यह है कि दोनों वलय चुंबकों के आमने-सामने वाले सिरे समान या सजातीय ध्रुव (जैसे N-N अथवा S-S) हैं, जिनके बीच लगने वाला चुंबकीय प्रतिकर्षण बल चुंबक 'क' के नीचे की ओर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण भार को संतुलित कर देता है। संपर्क में लाने का उपाय: किसी भी चुंबक को बिना बलपूर्वक धकेले संपर्क में लाने के लिए चुंबक 'क' (अथवा चुंबक 'ख') को स्टैंड से बाहर निकालकर उलट (flip) दिया जाए और पुनः स्टैंड में डाल दिया जाए; ऐसा करने से दोनों चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे के सम्मुख आ जाएँगे, जिससे उनके मध्य तीव्र आकर्षण बल कार्य करेगा और चुंबक 'क' स्वतः नीचे खिसककर चुंबक 'ख' के संपर्क में आ जाएगा।
मुख्य बिंदु:
• सजातीय ध्रुवों के मध्य प्रतिकर्षण बल गुरुत्व बल का विरोध करके ऊपरी चुंबक को हवा में साधे रखता है।
• वलय चुंबक के ऊपरी और निचले फलक दो विपरीत ध्रुवों की तरह कार्य करते हैं।
• चुंबक को पलटने (उलटने) से सम्मुख फलकों की ध्रुवता बदल जाती है और प्रतिकर्षण आकर्षण में बदल जाता है।
आम गलतियाँ:
• चुंबक को धकेलने का सुझाव देना, जबकि प्रश्न में 'बिना धकेले' की स्पष्ट शर्त है।
• दोनों के बीच हवा के दबाव को ऊपर तैरने का कारण मान लेना।
• फलक पलटने पर ध्रुवता में होने वाले बदलाव को स्पष्ट न समझाना।
Exam Tips:
a) प्रश्न के दोनों भागों (कारण और उपाय) का अलग-अलग स्पष्ट उत्तर दें।
b) 'समान ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण' और 'विपरीत ध्रुवों के बीच आकर्षण' के सिद्धांतों को रेखांकित करें।
c) 'उलटकर लगाना' (flipping/reversing) शब्द का प्रयोग समाधान में प्रमुखता से करें।
Question 11: तीन छड़ चुंबकों को चित्र में दर्शाए अनुसार एक मेज पर व्यवस्थित किया गया है। एक सिरे (5) की ध्रुवता आपको दी गई है। अब आप बताइए कि चुंबकों के सिरों 1, 2, 3, 4 और 6 पर ध्रुवता N या S में से क्या-क्या है?
Answer:
आकृति का विवरण: चित्र में मेज पर तीन छड़ चुंबक एक बंद विन्यास में एक-दूसरे से जुड़े हुए दर्शाए गए हैं, जहाँ सबसे नीचे क्षैतिज चुंबक के सिरे 5 और 6 हैं, मध्यवर्ती ऊर्ध्वाधर चुंबक के सिरे 3 और 4 हैं, तथा ऊपर क्षैतिज चुंबक के सिरे 1 और 2 हैं।
दिए गए विन्यास में चुंबकों के सिरों की ध्रुवता चुंबकत्व के दो मूलभूत नियमों (प्रत्येक छड़ चुंबक के दोनों सिरे विपरीत ध्रुव होते हैं तथा परस्पर जुड़ने वाले सिरे विपरीत ध्रुव होने के कारण आकर्षित होते हैं) के आधार पर इस प्रकार निर्धारित की जाएगी: सिरा 5 उत्तरी ध्रुव (N) दिया गया है, इसलिए उसी छड़ चुंबक का दूसरा सिरा 6 निश्चित रूप से दक्षिणी ध्रुव (S) होगा। मध्यवर्ती चुंबक का सिरा 4 सिरा 5 (N) से जुड़ा हुआ है, अतः आकर्षण के कारण सिरा 4 दक्षिणी ध्रुव (S) होगा। जब मध्य चुंबक का सिरा 4 'S' है, तो उसी चुंबक का ऊपरी सिरा 3 अनिवार्य रूप से उत्तरी ध्रुव (N) होगा। इसके पश्चात, ऊपरी चुंबक का सिरा 2 सिरा 3 (N) से जुड़ा हुआ है, अतः विपरीत ध्रुव होने के कारण सिरा 2 दक्षिणी ध्रुव (S) होगा। अंत में, उसी ऊपरी चुंबक का दूसरा सिरा 1 अनिवार्य रूप से उत्तरी ध्रुव (N) होगा। इस प्रकार, अभीष्ट ध्रुवता है: सिरा 1 = N (उत्तरी ध्रुव), सिरा 2 = S (दक्षिणी ध्रुव), सिरा 3 = N (उत्तरी ध्रुव), सिरा 4 = S (दक्षिणी ध्रुव), और सिरा 6 = S (दक्षिणी ध्रुव)।
मुख्य बिंदु:
• किसी भी एकल छड़ चुंबक के दो विपरीत छोर सदैव N और S ध्रुव होते हैं।
• आपस में संपर्क में चिपके हुए दो अलग-अलग चुंबकों के सिरे सदैव विपरीत ध्रुव (N और S) होते हैं।
• ज्ञात सिरे 5 (N) से आरंभ करके क्रमबद्ध रूप से प्रत्येक सिरे की ध्रुवता तार्किक रूप से निकाली जा सकती है।
आम गलतियाँ:
• एक ही चुंबक के दोनों सिरों को समान ध्रुव (जैसे 5 को N और 6 को भी N) मान लेना।
• आपस में जुड़े सिरों को समान ध्रुव मान लेना (जबकि समान ध्रुव प्रतिकर्षित होकर अलग हो जाते)।
• सिरों के क्रम (1, 2, 3, 4, 6) को उत्तर में आगे-पीछे लिख देना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक सिरे की ध्रुवता के साथ उसका संक्षिप्त तार्किक कारण (जैसे 'एक ही चुंबक का दूसरा सिरा' या 'आकर्षित सिरा') अवश्य लिखें।
b) अंत में सभी सिरों (1: N, 2: S, 3: N, 4: S, 6: S) की एक स्पष्ट सूची प्रस्तुत करें।
c) प्रश्न में दिए गए ज्ञात ध्रुव (सिरा 5 = N) से शुरुआत करके चरणबद्ध आगे बढ़ें।
NOTES: प्रश्न 11 में स्रोत सामग्री में सिरों 1, 2, 3 और 6 की ध्रुवता में तार्किक त्रुटि थी (जहाँ एक ही चुंबक के दोनों सिरों को तथा प्रतिकर्षित होने वाले विन्यासों को असंगत लिखा गया था); NCERT के मानक सिद्धांतों (एक छड़ चुंबक के दो विपरीत ध्रुव N व S होना तथा जुड़े हुए सिरों का विपरीत होना) के अनुसार सही व शुद्ध ध्रुवता (सिरा 1 = N, सिरा 2 = S, सिरा 3 = N, सिरा 4 = S, सिरा 6 = S) प्रस्तुत की गई है।
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NCERT Solutions for Class 6 Science Chapter 04 चुंबकों को जानें
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