NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 03 Mindful Eating A Path to a Healthy Body (उचित आहार - स्वस्थ शरीर का आधार) in Hindi

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Question 1: निम्नलिखित में से असंगत को चुनें और कारण बताएँ -
(क) ज्वार, बाजरा, रागी, चना
(ख) राजमा, मूँग, सोयाबीन, चावल

Answer:

(क) इस समूह में असंगत 'चना' है, क्योंकि ज्वार, बाजरा और रागी मोटे अनाज यानी कदन्न (millets) हैं, जबकि चना एक दलहन (pulse) वर्ग का खाद्य पदार्थ है।
(ख) इस समूह में असंगत 'चावल' है, क्योंकि राजमा, मूँग और सोयाबीन प्रोटीन (protein) से भरपूर दालें व फलियाँ हैं, जबकि चावल मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) प्रदान करने वाला प्रमुख अनाज है।

मुख्य बिंदु:

• ज्वार, बाजरा और रागी पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज (कदन्न) की श्रेणी में आते हैं।
• चना, राजमा, मूँग और सोयाबीन मुख्य रूप से प्रोटीन के प्रमुख स्रोत हैं।
• चावल एक धान्य (अनाज) है जो शरीर को ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट का मुख्य स्रोत है।

आम गलतियाँ:

• केवल असंगत शब्द चुन लेना और उसके पीछे का वैज्ञानिक कारण न लिखना।
• पोषक तत्वों (प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट) और खाद्य वर्गों (अनाज व दलहन) के आधार पर वर्गीकरण को स्पष्ट न करना।
• कदन्न (millets) और दलहन (pulses) के बीच भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) असंगत चुनते समय खाद्य पदार्थ के पोषण वर्ग (जैसे अनाज, दलहन, फलियाँ) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) दोनों उप-भागों (क) और (ख) के उत्तर अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें।
c) कारण वाले वाक्य में मुख्य पोषक तत्व (जैसे प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट) को रेखांकित करें।

 

Question 2: भारत में पारंपरिक और आधुनिक पाक पद्धतियों की तुलना करते हुए चर्चा करें।

Answer:

भारत में पारंपरिक पाक पद्धतियों में मिट्टी के चूल्हों, लोहे या पीतल के बर्तनों, धीमी आँच पर पकाने तथा सिलबट्टे से ताजे मसाले पीसने जैसी विधियों का उपयोग किया जाता था। ये पद्धतियाँ समय अधिक लेती थीं, परंतु खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक पोषक तत्व, आहारीय रेशे और स्वाद अधिक सुरक्षित रहते थे तथा प्रसंस्करण कम होता था। इसके विपरीत, आधुनिक पाक पद्धतियों में समय और श्रम बचाने के लिए गैस चूल्हे, माइक्रोवेव ओवन, प्रेशर कुकर तथा इलेक्ट्रिक मिक्सर-ग्राइंडर और अत्यधिक प्रसंस्कृत या पहले से तैयार मसालों का उपयोग किया जाता है। आधुनिक विधियाँ अत्यंत सुविधाजनक और तीव्र हैं, किंतु अत्यधिक ताप, सीटी में तेज दबाव या अधिक तलने-भूनने के कारण कभी-कभी संवेदनशील पोषक तत्वों (जैसे विटामिन) की हानि हो सकती है। अतः दोनों पद्धतियों का संतुलित समन्वय स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।

मुख्य बिंदु:

• पारंपरिक विधियों में धीमी आँच और प्राकृतिक बर्तनों से पोषण सुरक्षित रहता था।
• आधुनिक विधियाँ त्वरित और सुविधाजनक हैं लेकिन कभी-कभी अधिक ताप से पोषक तत्वों की हानि हो सकती है।
• कम प्रसंस्करण (processing) युक्त भोजन स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल साधनों (चूल्हा बनाम गैस) की सूची बना देना और पोषण पर उनके प्रभाव की चर्चा न करना।
• पारंपरिक या आधुनिक किसी एक पद्धति को पूरी तरह सही या गलत बता देना।
• पोषक तत्वों के संरक्षण के वैज्ञानिक पहलू को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) तुलनात्मक उत्तर लिखते समय सुविधा, समय और पोषण संरक्षण—इन तीनों पैमानों पर चर्चा करें।
b) उत्तर को संतुलित रखें और अंत में स्वस्थ जीवनशैली के लिए निष्कर्ष दें।
c) पारंपरिक व आधुनिक उपकरणों के सटीक उदाहरण प्रस्तुत करें।

 

Question 3: शिक्षक का कहना है कि अच्छा आहार औषधि के रूप में कार्य कर सकता है। रवि इस कथन को लेकर उत्सुक है और वह अपने शिक्षक से कुछ प्रश्न पूछना चाहता है। कम से कम ऐसे दो प्रश्न सूचीबद्ध करें, जो वह पूछ सकता है।

Answer:

रवि अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए अपने शिक्षक से निम्नलिखित दो प्रासंगिक प्रश्न पूछ सकता है:
पहला प्रश्न: "संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार हमें किन-किन अभावजन्य और संक्रामक रोगों से बचाने में सक्षम है?"
दूसरा प्रश्न: "क्या प्रतिदिन सही मात्रा में ताजे फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज खाने से हमें भविष्य में दवाओं और विटामिन की गोलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा?"

मुख्य बिंदु:

• संतुलित आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को सुदृढ़ करता है।
• उचित पोषण से विभिन्न अभावजन्य रोगों (deficiency diseases) की रोकथाम संभव है।
• भोजन को प्राकृतिक औषधि मानकर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।

आम गलतियाँ:

• प्रश्न पूछने के बजाय उत्तर या व्याख्या लिखना शुरू कर देना।
• ऐसे सामान्य प्रश्न पूछना जिनका पोषण या औषधि से कोई संबंध न हो।
• दो अलग-अलग प्रश्न स्पष्ट रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) पूछे जाने वाले प्रश्नों को उद्धरण चिह्नों (" ") के अंदर स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रश्न वैज्ञानिक जिज्ञासा और रोग-निवारण पर केंद्रित होने चाहिए।
c) प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाना कभी न भूलें।

 

Question 4: सभी स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ आवश्यक रूप से स्वास्थ्यप्रद नहीं होते, और सभी पौष्टिक खाद्य पदार्थ सदैव आनंददायक नहीं होते। कुछ उदाहरणों के साथ अपने विचार साझा करें।

Answer:

यह कथन पूर्णतः सत्य है कि स्वाद और पोषण सदैव एक साथ नहीं चलते। उदाहरण के लिए, चिप्स, पिज्जा, समोसे, बर्गर और शीतल पेय (cold drinks) स्वाद में अत्यंत रुचिकर और स्वादिष्ट होते हैं, परंतु इनमें वसा (fat), परिष्कृत मैदा, नमक और शर्करा की अत्यधिक मात्रा होती है, जो मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। दूसरी ओर, करेला, उबली हुई हरी पत्तेदार सब्जियाँ, ब्रोकली और दलिया जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन, खनिज और आहारीय रेशों (dietary fibres) से भरपूर होते हैं तथा शरीर के लिए अत्यंत स्वास्थ्यप्रद हैं, किंतु अपने कड़वे या फीके स्वाद के कारण सभी को आनंददायक नहीं लगते। अतः हमें केवल जीभ के स्वाद के आधार पर नहीं, बल्कि भोजन के पोषण मूल्य को देखकर समझदारी से आहार का चयन करना चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• अत्यधिक प्रसंस्कृत और जंक फूड स्वादिष्ट होते हुए भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
• कई कड़वी या कम मसालेदार सब्जियाँ अत्यधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।
• उत्तम स्वास्थ्य के लिए स्वाद और पोषण के बीच सही संतुलन बनाना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• बिना उदाहरण दिए केवल सामान्य तर्क लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।
• जंक फूड में मौजूद हानिकारक घटकों (अतिरिक्त वसा, नमक, चीनी) का वैज्ञानिक उल्लेख न करना।
• केवल एक ही पक्ष (केवल स्वादिष्ट या केवल पौष्टिक) पर चर्चा करना।

Exam Tips:

a) उत्तर में दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों (स्वादिष्ट परंतु अस्वास्थ्यकर, और पौष्टिक परंतु कम स्वादिष्ट) के कम से कम दो-दो स्पष्ट उदाहरण दें।
b) 'संतुलित आहार' और 'पोषण मूल्य' जैसे मानक शब्दों का प्रयोग करें।
c) अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण को सकारात्मक निष्कर्ष के साथ जोड़ें।

 

Question 5: मेदू सब्जियाँ नहीं खाता लेकिन बिस्कुट, नूडल्स और डबल रोटी (सफेद ब्रेड) का आनंद लेता है। उसे अक्सर पेट में दर्द और कब्ज़ की शिकायत रहती है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए उसे अपने आहार में क्या बदलाव करना चाहिए? अपने उत्तर को विस्तार से समझाइए।

Answer:

मेदू को पेट दर्द और कब्ज़ की समस्या इसलिए हो रही है क्योंकि बिस्कुट, नूडल्स और सफेद ब्रेड अत्यधिक प्रसंस्कृत मैदे से बनते हैं, जिनमें आहारीय रेशे यानी रूक्षांश (roughage/dietary fibre) की मात्रा नगण्य होती है। कब्ज़ से मुक्ति पाने के लिए मेदू को अपने आहार में तत्काल सुधार करना चाहिए। उसे परिष्कृत मैदे वाले जंक फूड को छोड़कर ताजी हरी सब्जियाँ (जैसे पालक, मेथी, लौकी), ताजे फल (जैसे पपीता, सेब, अमरूद), सलाद (खीरा, गाजर) तथा साबुत अनाज व दलिया शामिल करना चाहिए। रूक्षांश भोजन में बिना पचे आयतन जोड़ते हैं, आँतों की गतिशीलता को सुगम बनाते हैं और मल निष्कासन में सहायता करते हैं। इसके साथ ही उसे प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में जल (water) भी पीना चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• कब्ज़ का मुख्य कारण आहार में आहारीय रेशों (रूक्षांश) और जल की कमी है।
• सफेद ब्रेड और नूडल्स जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में फाइबर का अभाव होता है।
• ताजे फल, हरी सब्जियाँ और साबुत अनाज पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए अनिवार्य हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल दवा लेने का सुझाव दे देना, आहार संबंधी बदलावों का विस्तार से वर्णन न करना।
• 'आहारीय रेशे' या 'रूक्षांश' शब्द का उल्लेख किए बिना केवल सब्जियों के नाम लिख देना।
• जल की भूमिका को पूरी तरह भूल जाना।

Exam Tips:

a) कब्ज़ की समस्या का कारण (फाइबर की कमी) और उसका निवारण दोनों को अलग-अलग स्पष्ट करें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'रूक्षांश (roughage)' और 'पाचन क्रिया' का प्रयोग अवश्य करें।
c) सुझावों में ठोस खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पर्याप्त जल सेवन का बिंदु भी जोड़ें।

 

Question 6: रेशमा को कम रोशनी में देखने में कठिनाई हो रही थी। चिकित्सक ने उसकी दृष्टि का परीक्षण किया और एक विशेष विटामिन पूरक (सप्लीमेंट) लेने की सलाह दी। उन्होंने उसे अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करने की भी सलाह दी।
(क) वह किस अभावजन्य रोग से पीड़ित है?
(ख) उसके आहार में किस खाद्य घटक की कमी हो सकती है?
(ग) कुछ खाद्य पदार्थों (किन्हीं चार) का सुझाव दें जिन्हें इस समस्या को दूर करने के लिए उसे अपने आहार में सम्मिलित करना चाहिए।

Answer:

(क) रेशमा रतौंधी (night blindness) अथवा दृष्टिहीनता नामक अभावजन्य रोग (deficiency disease) से पीड़ित है, जिसके कारण कम रोशनी या अंधेरे में देखने की क्षमता क्षीण हो जाती है।
(ख) उसके आहार में प्रमुख खाद्य घटक विटामिन ए (Vitamin A) की कमी हो सकती है।
(ग) विटामिन ए की कमी को पूरा करने के लिए रेशमा को अपने दैनिक आहार में निम्नलिखित चार खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करना चाहिए: गाजर, पपीता, दूध (या मक्खन/घी), और हरी पत्तेदार सब्जियाँ (जैसे पालक)।

मुख्य बिंदु:

• कम रोशनी में दिखाई न देना रतौंधी रोग का प्रमुख लक्षण है।
• यह रोग मुख्य रूप से आहार में विटामिन ए के अभाव के कारण होता है।
• गाजर, पपीता, आम, दूध और हरी सब्जियाँ विटामिन ए के समृद्ध स्रोत हैं।

आम गलतियाँ:

• विटामिन ए की जगह विटामिन सी या डी लिख देना।
• रोग का नाम 'रतौंधी' लिखने के बजाय केवल 'आँखों की कमजोरी' लिख देना।
• खाद्य पदार्थों के उदाहरण में विटामिन ए रहित वस्तुएँ (जैसे नींबू या चावल) लिख देना।

Exam Tips:

a) तीनों उप-भागों (क, ख, ग) को क्रमबद्ध रूप से अलग-अलग पंक्ति में उत्तरित करें।
b) चार खाद्य पदार्थों के नाम स्पष्ट और जाने-पहचाने उदाहरणों (जैसे गाजर, पालक, पपीता, दूध) में से दें।
c) रोग का प्रामाणिक नाम 'रतौंधी (Night Blindness)' ही लिखें।

 

Question 7: आपको निम्नलिखित पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं -
(क) डिब्बा बंद फलों का रस
(ख) ताजे फलों का रस
(ग) ताजे फल
पोषण की दृष्टि से आप किसे लेना पसंद करेंगे और क्यों?

Answer:

पोषण की दृष्टि से मैं विकल्प (ग) 'ताजे फल' लेना सबसे अधिक पसंद करूँगा। ताजे फलों का सेवन करने से शरीर को प्राकृतिक विटामिन्स, खनिज लवण और जल के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में आहारीय रेशे (रूक्षांश) प्राप्त होते हैं, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। रस निकालते समय फलों के अधिकांश रेशे छनकर बाहर निकल जाते हैं। इसके अतिरिक्त, डिब्बाबंद फलों के रस में कृत्रिम परिरक्षक (preservatives) और अत्यधिक अतिरिक्त शर्करा (added sugar) मिलाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। अतः साबुत ताजे फल पोषण की दृष्टि से सर्वोत्तम हैं।

मुख्य बिंदु:

• ताजे फल प्राकृतिक विटामिन, खनिज और आहारीय रेशों (फाइबर) का संपूर्ण स्रोत हैं।
• फलों का रस निकालने पर अधिकांश महत्वपूर्ण रेशा नष्ट हो जाता है।
• डिब्बाबंद रस में पोषण कम और अतिरिक्त शर्करा व परिरक्षक अधिक होते हैं।

आम गलतियाँ:

• ताजे फलों और ताजे फलों के रस में अंतर स्पष्ट न करना तथा फाइबर के महत्व को भूल जाना।
• केवल अपनी पसंद बता देना और वैज्ञानिक कारण (रेशे और परिरक्षक) न समझाना।
• डिब्बाबंद रस के दुष्प्रभावों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) अपने चयन का स्पष्ट नाम (ताजे फल) पहली ही पंक्ति में लिखें।
b) तुलना करते समय 'आहारीय रेशे (रूक्षांश)' और 'अतिरिक्त शर्करा' जैसे तर्कों को अवश्य शामिल करें।
c) तीनों विकल्पों के पोषण स्तर की तुलना संक्षेप में प्रस्तुत करें।

 

Question 8: गौरव के पैर की हड्डी टूट गई। उसके चिकित्सक ने हड्डियों को सीधा (संरेखित) किया और प्लास्टर लगा दिया। चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली भी दी। जब वह दूसरी बार दिखाने गया तब चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली के साथ विटामिन D युक्त सिरप भी पीने के लिए दिया। चित्र 3.5 का संदर्भ लें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें –
(क) चिकित्सक ने गौरव को कैल्सियम की गोली क्यों दी?
(ख) दूसरी बार देखने पर चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली के साथ विटामिन D सिरप भी क्यों दिया?
(ग) चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली दवाओं के चयन के बारे में आपके मन में क्या सवाल उठता है?

Answer:

(क) चिकित्सक ने गौरव को कैल्सियम (calcium) की गोली इसलिए दी क्योंकि कैल्सियम हमारी अस्थियों और दाँतों का मुख्य संरचनात्मक खनिज घटक है, जो टूटी हुई हड्डी को पुनः जोड़ने और उसे सुदृढ़ बनाने के लिए अनिवार्य होता है।
(ख) चिकित्सक ने दूसरी बार विटामिन डी (Vitamin D) सिरप इसलिए दिया क्योंकि विटामिन डी हमारे शरीर की छोटी आंत द्वारा भोजन व दवाओं से कैल्सियम को अवशोषित करने में सहायता करता है; विटामिन डी के बिना शरीर कैल्सियम का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाता।
(ग) दवाओं के चयन को लेकर मन में यह स्वाभाविक सवाल उठता है कि: "क्या कैल्सियम की गोली अकेले लेने पर शरीर में पूर्णतः अवशोषित नहीं हो पाती, और क्या विटामिन डी के बिना हमारी हड्डियाँ मजबूत नहीं हो सकतीं?"

मुख्य बिंदु:

• कैल्सियम अस्थियों के निर्माण, वृद्धि और मरम्मत का प्राथमिक खनिज तत्व है।
• विटामिन डी शरीर द्वारा कैल्सियम के अवशोषण (absorption) और उपयोग के लिए अपरिहार्य है।
• पोषक तत्वों के पारस्परिक समन्वय से ही शरीर में हड्डियों का स्वस्थ विकास संभव होता है।

आम गलतियाँ:

• कैल्सियम और विटामिन डी के कार्य को आपस में मिला देना।
• भाग (ख) में यह न लिखना कि विटामिन डी कैल्सियम के अवशोषण में सहायक होता है।
• भाग (ग) में कोई प्रश्न बनाने के बजाय केवल सामान्य टिप्पणी लिख देना।

Exam Tips:

a) भाग (क), (ख) और (ग) को अलग-अलग उप-शीर्षकों के साथ उत्तरित करें।
b) भाग (ख) में 'अवशोषण' (absorption) शब्द का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
c) भाग (ग) के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न (?) का प्रयोग करें क्योंकि यह आपके मन के प्रश्न को दर्शाता है।

 

Question 9: चीनी कार्बोहाइड्रेट का एक उदाहरण है। चीनी का परीक्षण जब आयोडीन विलयन से किया जाता है लेकिन इसका रंग नीला-काला नहीं होता है। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?

Answer:

आयोडीन विलयन (iodine solution) केवल मंड या स्टार्च (starch) की उपस्थिति में ही नीला-काला रंग प्रदर्शित करता है। यद्यपि चीनी और स्टार्च दोनों ही कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) वर्ग के अंतर्गत आते हैं, परंतु चीनी एक साधारण कार्बोहाइड्रेट (simple carbohydrate / शर्करा) है, जबकि स्टार्च एक जटिल कार्बोहाइड्रेट (complex carbohydrate) है। आयोडीन अभिकर्मक केवल जटिल स्टार्च के अणुओं के साथ विशिष्ट रासायनिक अंतःक्रिया करके नीला-काला संकुल (complex) बनाता है, साधारण शर्करा के साथ नहीं। यही कारण है कि चीनी पर आयोडीन डालने पर उसका रंग नीला-काला नहीं होता।

मुख्य बिंदु:

• आयोडीन परीक्षण केवल मंड (स्टार्च) की पहचान के लिए विशिष्ट होता है।
• कार्बोहाइड्रेट दो मुख्य रूपों में पाए जाते हैं: शर्करा (सरल) और मंड (जटिल)।
• चीनी एक साधारण शर्करा होने के कारण आयोडीन के साथ नीला-काला रंग नहीं देती।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि चीनी कार्बोहाइड्रेट नहीं है, इसलिए रंग नहीं बदला।
• साधारण शर्करा और स्टार्च (मंड) के बीच के रासायनिक अंतर को न समझाना।
• यह लिखना भूल जाना कि आयोडीन परीक्षण केवल स्टार्च के लिए विशिष्ट है।

Exam Tips:

a) स्पष्ट करें कि सभी स्टार्च कार्बोहाइड्रेट हैं, परंतु सभी कार्बोहाइड्रेट स्टार्च नहीं होते।
b) 'सरल शर्करा' और 'जटिल कार्बोहाइड्रेट (मंड)' शब्दों का प्रयोग करके अंतर समझाएँ।
c) आयोडीन परीक्षण की विशिष्टता (specificity) का उल्लेख करें।

 

Question 10: आप रमन के इस कथन के बारे में क्या सोचते हैं, "सभी मंड (स्टार्च) कार्बोहाइड्रेट हैं लेकिन सभी कार्बोहाइड्रेट मंड नहीं हैं।" अपने उत्तर की जाँच करने के लिए किसी क्रियाकलाप की योजना का वर्णन करें।

Answer:

रमन का यह कथन वैज्ञानिक रूप से पूर्णतः सत्य है। कार्बोहाइड्रेट एक विस्तृत पोषक समूह है जिसके अंतर्गत साधारण शर्करा (जैसे ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, सुक्रोज) और जटिल कार्बोहाइड्रेट (जैसे मंड/स्टार्च और सेल्यूलोज) दोनों आते हैं। अतः सभी मंड कार्बोहाइड्रेट होते हैं, किंतु सभी कार्बोहाइड्रेट मंड नहीं होते।
जाँच के लिए क्रियाकलाप योजना:
1. दो अलग-अलग परखनलियाँ लें। परखनली 'क' में उबले आलू का पेस्ट या चावल का मांड (मंड का स्रोत) लें और परखनली 'ख' में चीनी का जलीय घोल (साधारण कार्बोहाइड्रेट) लें।
2. ड्रॉपर की सहायता से दोनों परखनलियों में तनु आयोडीन विलयन (dilute iodine solution) की 2-3 बूँदें डालें।
3. अवलोकन: परखनली 'क' (आलू/चावल) का रंग तुरंत गहरा नीला-काला हो जाता है, जो मंड की उपस्थिति सिद्ध करता है। परखनली 'ख' (चीनी घोल) के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता और वह भूरा/पीला ही रहता है।
निष्कर्ष: यह प्रयोग सिद्ध करता है कि यद्यपि दोनों कार्बोहाइड्रेट हैं, केवल स्टार्च ही आयोडीन परीक्षण देता है, सभी कार्बोहाइड्रेट नहीं।

मुख्य बिंदु:

• मंड (स्टार्च) कार्बोहाइड्रेट का केवल एक प्रकार (जटिल कार्बोहाइड्रेट) है।
• आयोडीन परीक्षण का उपयोग विशेष रूप से मंड की पहचान के लिए किया जाता है।
• शर्करा (जैसे चीनी) कार्बोहाइड्रेट होते हुए भी आयोडीन के साथ नीला-काला रंग नहीं देती।

आम गलतियाँ:

• क्रियाकलाप के चरणों (सामग्री, विधि, अवलोकन और निष्कर्ष) को व्यवस्थित रूप से न लिखना।
• रमन के कथन पर अपनी सहमति/असहमति व्यक्त करना भूल जाना।
• परखनली में लिए जाने वाले खाद्य पदार्थों के नाम स्पष्ट न लिखना।

Exam Tips:

a) पहले वाक्य में स्पष्ट सहमति ("रमन का कथन सत्य है") दर्ज करें।
b) क्रियाकलाप को चरणबद्ध तरीके से सामग्री, परीक्षण विधि और अवलोकन के रूप में लिखें।
c) रासायनिक परिवर्तन (नीला-काला रंग) का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

Question 11: प्रयोगशाला में आयोडीन का प्रयोग करते समय आयोडीन की कुछ बूँदें मिष्टी के मोज़े पर तथा उसकी शिक्षिका की साड़ी पर गिरीं। साड़ी पर आयोडीन की बूँदें नीली-काली हो गईं जबकि मोज़े पर आयोडीन का रंग नहीं बदला। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?

Answer:

शिक्षिका की साड़ी पर आयोडीन की बूँदों का रंग नीला-काला इसलिए हो गया क्योंकि सूती साड़ियों को कड़क और चमकदार बनाने के लिए प्रायः 'कलफ' या 'मांड' (स्टार्च/मंड) लगाया जाता है। आयोडीन स्टार्च के संपर्क में आते ही रासायनिक क्रिया कर नीला-काला रंग उत्पन्न करता है। इसके विपरीत, मिष्टी का मोज़ा या तो नायलॉन/पॉलिएस्टर जैसे संश्लेषित रेशों (synthetic fibres) से बना था या बिना कलफ लगे सूती धागों से, जिसमें स्टार्च बिल्कुल उपस्थित नहीं था। अतः स्टार्च की अनुपस्थिति के कारण मोज़े पर आयोडीन का रंग नहीं बदला।

मुख्य बिंदु:

• कपड़ों पर कलफ (मांड) के रूप में स्टार्च का प्रयोग किया जाता है।
• आयोडीन विलयन स्टार्च के संपर्क में आने पर ही नीला-काला रंग देता है।
• स्टार्च रहित वस्त्रों या संश्लेषित रेशों पर आयोडीन का कोई रंग परिवर्तन नहीं होता।

आम गलतियाँ:

• साड़ी में 'कलफ' (मांड/स्टार्च) होने का वैज्ञानिक तर्क न लिखना।
• मोज़े के कपड़े के प्रकार या उसमें स्टार्च की अनुपस्थिति का उल्लेख न करना।
• केवल यह लिख देना कि दोनों कपड़ों का रंग अलग था, रासायनिक कारण न बताना।

Exam Tips:

a) सूती कपड़ों में मांड (कलफ) लगाने की दैनिक प्रक्रिया को विज्ञान से जोड़कर समझाएँ।
b) दोनों वस्तुओं (साड़ी और मोज़े) के रंग परिवर्तन का कारण अलग-अलग स्पष्ट करें।
c) स्टार्च और आयोडीन के विशिष्ट परीक्षण का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 12: कदन्न को एक स्वास्थ्यप्रद आहार क्यों माना जाता है? क्या केवल कदन्न खाने से शरीर की पोषण संबंधी सभी आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं? चर्चा करें।

Answer:

कदन्न यानी मोटे अनाजों (millets जैसे ज्वार, बाजरा, रागी) को अत्यंत स्वास्थ्यप्रद आहार माना जाता है क्योंकि ये प्रचुर मात्रा में आहारीय रेशे (रूक्षांश), खनिज लवण (जैसे कैल्सियम, आयरन) और जटिल कार्बोहाइड्रेट से युक्त होते हैं। ये पाचन क्रिया को सुदृढ़ करते हैं, मधुमेह और हृदय रोगों के खतरे को घटाते हैं तथा दीर्घकाल तक ऊर्जा प्रदान करते हैं। परंतु, केवल कदन्न खाने से हमारे शरीर की पोषण संबंधी सभी आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो सकतीं। कदन्न में विटामिन सी (Vitamin C), विटामिन बी₁₂ और कुछ आवश्यक प्रोटीनों की कमी होती है। शरीर की वृद्धि, मरम्मत और प्रतिरक्षा के लिए संतुलित आहार (balanced diet) आवश्यक है, जिसमें कदन्न के साथ-साथ दालें, दूध, ताजे फल और हरी सब्जियाँ भी सम्मिलित होनी चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• कदन्न में खनिज (कैल्सियम, आयरन), फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं।
• कोई भी अकेला खाद्य पदार्थ शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व प्रदान नहीं कर सकता।
• समग्र स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार में विभिन्न खाद्य समूहों का समावेशन अनिवार्य है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि किसी एक सुपरफूड (जैसे कदन्न) से सभी पोषक तत्व मिल सकते हैं।
• कदन्न में पाए जाने वाले विशिष्ट पोषक तत्वों (फाइबर, खनिज) का नाम न लिखना।
• संतुलित आहार की संकल्पना को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों (कदन्न का महत्व और पोषण की अपूर्णता) का पृथक उत्तर दें।
b) कदन्न के प्रमुख उदाहरण जैसे रागी (कैल्सियम प्रचुर) और बाजरा (आयरन प्रचुर) का उल्लेख करें।
c) अंत में 'संतुलित आहार की अनिवार्यता' पर बल दें।

 

Question 13: आपको विलयन का एक नमूना दिया गया है। आप इसके आयोडीन विलयन होने की संभावना की जाँच किस प्रकार करेंगे?

Answer:

दिए गए अज्ञात विलयन के आयोडीन विलयन होने की जाँच करने के लिए हम ज्ञात मंड (स्टार्च) युक्त पदार्थ पर इसका परीक्षण करेंगे। सबसे पहले एक परखनली या प्लेट में थोड़ा-सा उबले चावल का मांड या कटे हुए कच्चे आलू का टुकड़ा लेंगे, जिसमें स्टार्च की उपस्थिति निश्चित होती है। इसके पश्चात ड्रॉपर की सहायता से अज्ञात विलयन की 2-3 बूँदें उस स्टार्च युक्त नमूने पर डालेंगे। यदि आलू या चावल के मांड का रंग तुरंत गहरा नीला-काला (blue-black) हो जाता है, तो यह पुष्ट होता है कि दिया गया अज्ञात नमूना वास्तव में आयोडीन विलयन ही है। यदि रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता, तो वह आयोडीन विलयन नहीं है।

मुख्य बिंदु:

• आयोडीन विलयन की पुष्टि के लिए ज्ञात स्टार्च (जैसे आलू या चावल) का उपयोग किया जाता है।
• स्टार्च और आयोडीन की पारस्परिक क्रिया से नीला-काला रंग उत्पन्न होता है।
• यह परीक्षण विपरीत विधि (reverse testing) द्वारा अभिकर्मक की प्रामाणिकता सिद्ध करता है।

आम गलतियाँ:

• परीक्षण के लिए स्टार्च के स्थान पर कोई अन्य अवांछित रासायनिक पदार्थ सुझाना।
• रंग परिवर्तन (नीला-काला) का सटीक उल्लेख न करना।
• परीक्षण के चरणों को क्रमबद्ध रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) ज्ञात स्टार्च स्रोत के रूप में कच्चे आलू या उबले चावल का स्पष्ट उदाहरण दें।
b) रासायनिक संकेतक के रूप में 'नीला-काला रंग' स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
c) प्रयोग की विधि और परिणाम को तार्किक रूप से जोड़ें।

 

NOTES: प्रश्न 13 में दिए गए उत्तर को वैज्ञानिक रूप से सही किया गया है; मूल पीडीएफ उत्तर में त्रुटिवश 'पदार्थ पर आयोडीन डालकर' लिखा था, जबकि प्रश्न में अज्ञात विलयन के स्वयं आयोडीन होने की जाँच पूछी गई थी, जिसे ज्ञात स्टार्च (आलू/चावल) का उपयोग कर प्रमाणित करने हेतु संशोधित किया गया है।

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