Official NCERT Solutions for Class 6 Science: Chapter 02 सजीव जगत में विविधता
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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 02 सजीव जगत में विविधता
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Question 1: यहाँ दो प्रकार के बीज दिए गए हैं। आप इनके पौधों की जड़ों और पत्तियों के शिरा-विन्यास में क्या अंतर पाते हैं?
(क) गेहूँ
(ख) राजमा
Answer:
आकृति का विवरण: चित्र में (क) गेहूँ के एकबीजपत्री दाने और (ख) राजमा के दो स्पष्ट दालों वाले द्विबीजपत्री बीज दर्शाए गए हैं।
(क) गेहूँ एक एकबीजपत्री (monocotyledonous) पौधा है, जिसके कारण इसमें रेशेदार या झकड़ा जड़ (fibrous root) तंत्र पाया जाता है और इसकी पत्तियों में समानांतर शिरा-विन्यास (parallel venation) होता है, जहाँ शिराएं एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं। (ख) इसके विपरीत, राजमा एक द्विबीजपत्री (dicotyledonous) पौधा है, अतः इसमें एक मुख्य मूसला जड़ (taproot) तथा उससे निकलने वाली पार्श्व जड़ें होती हैं, और इसकी पत्तियों में जालिकावत शिरा-विन्यास (reticulate venation) पाया जाता है, जिसमें शिराएं एक जटिल जाल जैसी संरचना बनाती हैं।
मुख्य बिंदु:
• एकबीजपत्री पौधों (जैसे गेहूँ) में झकड़ा जड़ और समानांतर शिरा-विन्यास का सीधा संबंध होता है।
• द्विबीजपत्री पौधों (जैसे राजमा) में मूसला जड़ और जालिकावत शिरा-विन्यास पाया जाता है।
• बीज की आंतरिक संरचना देखकर ही पौधे की जड़ और पत्ती के प्रकार का सही अनुमान लगाया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• गेहूँ को द्विबीजपत्री और राजमा को एकबीजपत्री मानकर जड़ों के प्रकार को उलट देना।
• समानांतर और जालिकावत शिरा-विन्यास के लक्षणों को आपस में मिला देना।
• झकड़ा जड़ और मूसला जड़ के सटीक अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
Exam Tips:
a) बीज के दल (cotyledons) गिनकर जड़ और पत्ती के विन्यास का नियम (एकबीजपत्री = झकड़ा + समानांतर) याद रखें।
b) उत्तर लिखते समय जड़ और शिरा-विन्यास दोनों उप-भागों को अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'एकबीजपत्री' और 'द्विबीजपत्री' का प्रयोग करने से पूरे अंक मिलते हैं।
Question 2: नीचे कुछ जंतुओं के नाम दिए गए हैं उनके आवास के आधार पर समूह बनाएँ।
चिह्नांकित खंड 'क' में जलीय जंतुओं और चिह्नांकित खंड 'ख' में थलीय जंतुओं के नाम लिखिए। खंड 'ग' में दोनों आवासों में रहने वाले जंतुओं के नाम लिखिए।
घोड़ा, डॉल्फ़िन, मेंढक, भेड़, मगरमच्छ, गिलहरी, व्हेल, केंचुआ, कबूतर, कछुआ
Answer:
आकृति का विवरण: दिए गए वेन आरेख में दो वृत्त एक-दूसरे को काटते हैं, जहाँ बायाँ वृत्त 'क' (जलीय जंतु), दायाँ वृत्त 'ख' (थलीय जंतु) और बीच का उभयनिष्ठ भाग 'ग' (जल और थल दोनों के जंतु) दर्शाता है।
दिए गए जीवों को उनके आवास (habitat) के आधार पर वेन आरेख के तीनों खंडों में इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है: खंड 'क' (केवल जलीय जंतु): व्हेल और डॉल्फ़िन, जो पूर्णतः जल में रहते हैं; खंड 'ख' (केवल थलीय जंतु): घोड़ा, भेड़, गिलहरी, केंचुआ और कबूतर, जो भूमि या पेड़ों पर जीवन यापन करते हैं; तथा खंड 'ग' (जल और थल दोनों में रहने वाले जंतु): मेंढक, मगरमच्छ और कछुआ, जो अपनी जैविक आवश्यकताओं के लिए जल और थल दोनों का उपयोग करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• व्हेल और डॉल्फ़िन जलीय स्तनधारी जीव हैं जो पूर्णतः जल में निवास करते हैं।
• मेंढक, कछुआ और मगरमच्छ उभयचर अथवा जल-थल दोनों आवासों का उपयोग करने वाले जीव हैं।
• केंचुआ और कबूतर आवास की दृष्टि से थलीय जीवों के अंतर्गत आते हैं।
आम गलतियाँ:
• केंचुए को नम मिट्टी में रहने के कारण जलीय या दोनों आवासों (खंड 'ग') में लिख देना।
• कबूतर को वायवीय मानकर थलीय समूह से बाहर छोड़ देना।
• व्हेल और डॉल्फ़िन को मछली मानकर उनके श्वसन या आवास को लेकर भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) वेन आरेख वाले प्रश्नों में प्रत्येक जीव को काटते हुए क्रम से तीनों श्रेणियों में भरें ताकि कोई छूटे नहीं।
b) उभयनिष्ठ खंड 'ग' में केवल उन्हीं जीवों को लिखें जो जल और भूमि दोनों में सक्रिय रहते हैं।
c) कुल 10 जीवों की गिनती अंत में दोबारा जाँच लें कि सभी नाम आरेख में आ गए हैं या नहीं।
Question 3: मनु की माँ की एक शाक वाटिका (किचन गार्डन) है। एक दिन वह मिट्टी से मूली उखाड़ रही थीं। उन्होंने मनु को बताया कि मूली एक प्रकार की जड़ है। एक मूली को सावधानीपूर्वक देखें और लिखें कि वह किस प्रकार की जड़ है। मूली के पौधे की पत्तियों में आपको किस प्रकार का शिरा-विन्यास दिखाई देगा?
Answer:
मूली एक रूपांतरित मूसला जड़ (taproot) है, जिसमें एक मोटी मुख्य प्राथमिक जड़ भूमि में गहराई तक जाती है और भोजन संचित करने के कारण फूल जाती है, तथा इससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें (रेशे) निकलती हैं। चूँकि मूसला जड़ धारण करने वाले पौधे द्विबीजपत्री (dicotyledonous) होते हैं, इसलिए मूली के पौधे की पत्तियों में जालिकावत शिरा-विन्यास (reticulate venation) दिखाई देगा, जिसमें मुख्य शिरा से कई छोटी शिराएं निकलकर एक जाल का निर्माण करती हैं।
मुख्य बिंदु:
• मूली भोजन संचयन के लिए अनुकूलित एक मूसला जड़ का उदाहरण है।
• मूसला जड़ वाले सभी पौधों की पत्तियों में अनिवार्य रूप से जालिकावत शिरा-विन्यास पाया जाता है।
• मूली का मुख्य गूदेदार भाग प्राथमिक जड़ है जिससे द्वितीयक जड़ें निकलती हैं।
आम गलतियाँ:
• मूली को तना समझ लेना, जबकि यह स्पष्ट रूप से एक जड़ है।
• मूली के नीचे दिखने वाले पतले रेशों को देखकर इसे झकड़ा जड़ मान लेना।
• मूसला जड़ के साथ गलती से समानांतर शिरा-विन्यास लिख देना।
Exam Tips:
a) जड़ का प्रकार और पत्ती का शिरा-विन्यास हमेशा एक निश्चित वैज्ञानिक संबंध का पालन करते हैं।
b) जब भी किसी पौधे की जड़ पूछी जाए, तो उसके भोजन संचयन वाले रूपांतरण का भी उल्लेख करें।
c) उत्तर में 'मूसला जड़' और 'जालिकावत शिरा-विन्यास' शब्दों को रेखांकित करें।
Question 4: नीचे दिए गए चित्रों में पर्वतीय बकरी और मैदानों में पाई जाने वाली बकरी को देखें। उनके बीच समानताएँ और अंतर बताएँ। साथ ही यह भी बताएँ कि इन अंतरों के क्या कारण हैं?
(क) पर्वतीय बकरी
(ख) मैदानों में पाई जाने वाली बकरी
Answer:
आकृति का विवरण: चित्र (क) में घने व लंबे सफेद बालों वाली मजबूत पर्वतीय बकरी और चित्र (ख) में छोटे व विरल बालों वाली सामान्य मैदानी बकरी दिखाई गई है।
समानताएँ: दोनों ही शाकाहारी (herbivorous), चार पैरों वाले स्तनधारी जीव (mammals) हैं जिनके पैरों में खुर होते हैं और दोनों पोषण के लिए वनस्पतियों तथा पत्तियों को चरते हैं। अंतर: पर्वतीय बकरी के शरीर पर लंबे और अत्यधिक घने बाल (फर) होते हैं तथा इसके खुर चट्टानी ढलानों पर दौड़ने के लिए छोटे और मजबूत होते हैं, जबकि मैदानी बकरी के शरीर पर बहुत छोटे व हल्के बाल होते हैं। अंतर के कारण: ये भिन्नताएं उनके प्राकृतिक आवास (habitat) और जलवायु के प्रति हुए अनुकूलन (adaptation) के कारण हैं; पर्वतीय बकरी को अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और बर्फीली हवाओं से बचने के लिए घने बालों की तथा खड़ी ढलानों पर संतुलन बनाने हेतु मजबूत खुरों की आवश्यकता होती है, जबकि मैदानी बकरी गर्म व समशीतोष्ण वातावरण में आसानी से ऊष्मा बाहर निकालने हेतु छोटे बालों से अनुकूलित होती है।
मुख्य बिंदु:
• दोनों बकरियों में स्तनधारी और शाकाहारी होने की शारीरिक समानता है।
• पर्वतीय बकरी के घने बाल ऊष्मा के कुचालक बनकर उसे कड़ाके की ठंड से बचाते हैं।
• जीवों की शारीरिक बनावट उनके परिवेश और जलवायु के अनुकूलन का सीधा परिणाम होती है।
आम गलतियाँ:
• समानताएं और अंतर लिखने के बाद उनके 'कारण' (अनुकूलन) की व्याख्या करना भूल जाना।
• केवल बालों के अंतर का उल्लेख करना और खुरों या शारीरिक मजबूती के अंतर को छोड़ देना।
• दोनों जीवों को अलग-अलग प्रजाति मानने के कारण उनकी आधारभूत समानताओं की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) इस प्रकार के प्रश्नों में उत्तर को तीन स्पष्ट भागों (समानताएँ, अंतर, और कारण) में बाँटकर लिखें।
b) 'अनुकूलन' (Adaptation) शब्द का प्रयोग कारण वाले भाग में अवश्य करें।
c) पर्वतीय आवास की जलवायु दशाओं (बर्फ, ढलान, ठंड) का स्पष्ट वर्णन करें।
Question 5: पाठ में चर्चा की गई विशेषताओं के अतिरिक्त किसी अन्य विशेषता के आधार पर निम्नलिखित जंतुओं के दो समूह बनाएँ— गाय, तिलचट्टा (कॉकरोच), कबूतर, चमगादड़, व्हेल, कछुआ, मछली, टिड्डा, छिपकली।
Answer:
इन जंतुओं को रीढ़ की हड्डी की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति के आधार पर कशेरुकी और अकशेरुकी (Vertebrates and Invertebrates) के दो वैज्ञानिक समूहों में विभाजित किया जा सकता है: समूह 1 (कशेरुकी जंतु - जिनमें आंतरिक कंकाल और रीढ़ की हड्डी होती है): गाय, कबूतर, चमगादड़, व्हेल, कछुआ, मछली और छिपकली; तथा समूह 2 (अकशेरुकी जंतु - जिनमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती और बाह्य कंकाल पाया जाता है): तिलचट्टा (कॉकरोच) और टिड्डा। (वैकल्पिक रूप से इन्हें प्रजनन विधि के आधार पर अंडप्रजक और जरायुज अथवा गति के आधार पर उड़ने वाले और न उड़ने वाले जंतुओं में भी समूहीकृत किया जा सकता है)।
मुख्य बिंदु:
• कशेरुकी जंतुओं में रीढ़ की हड्डी पाई जाती है, जबकि अकशेरुकी जंतुओं में इसका अभाव होता है।
• तिलचट्टा और टिड्डा संधिपाद (arthropod) अकशेरुकी जीव हैं।
• व्हेल और चमगादड़ भी कशेरुकी समूह (स्तनधारी) के अंतर्गत ही आते हैं।
आम गलतियाँ:
• पाठ में पहले से प्रयुक्त विशेषता (जैसे जल-थल आवास) को ही दोबारा दोहरा देना।
• व्हेल या चमगादड़ को मछली या पक्षी मानकर गलत समूह में रख देना।
• किसी जीव का नाम दोनों में से किसी भी समूह में शामिल करने से छूट जाना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में 'पाठ की विशेषताओं के अतिरिक्त' शर्त दी गई है, अतः आवास के बजाय शरीर रचना का आधार चुनें।
b) वर्गीकरण का आधार (जैसे कशेरुकी/अकशेरुकी) शीर्षक के रूप में पहले लिखें, फिर नाम सूची दें।
c) दिए गए सभी 9 जीवों को वर्गीकृत करने के बाद उनकी संख्या गिनकर मिलान करें।
Question 6: जनसंख्या के बढ़ने और मनुष्यों द्वारा अधिक सुविधाजनक जीवन की चाह में विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की कटाई की जा रही है। यह हमारे आस-पास के परिवेश को कैसे प्रभावित कर सकता है? आपके विचार से हम इस चुनौती का निदान कैसे कर सकते हैं?
Answer:
वनों की अंधाधुंध कटाई (deforestation) से हमारे परिवेश पर विनाशकारी प्रभाव पड़ते हैं; इससे पेड़ काटने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण घटता है जिससे वैश्विक तापन (global warming) और जलवायु परिवर्तन होता है, वन्यजीवों के आवास छिनने से जैव विविधता नष्ट होती है, पेड़ों की जड़ों के अभाव में मृदा अपरदन (soil erosion) बढ़ता है और बाढ़ का खतरा उत्पन्न होता है, तथा जल चक्र बाधित होने से भूजल स्तर में भारी गिरावट आती है। इस गंभीर चुनौती के निदान के लिए हमें व्यापक पैमाने पर वनरोपण (afforestation) और पौधरोपण करना चाहिए, कागज और लकड़ी के विकल्पों का उपयोग तथा पुनर्चक्रण (recycling) अपनाना चाहिए, अवैध कटाई को रोकने हेतु सख्त कानूनी प्रावधान लागू करने चाहिए, और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से सतत विकास (sustainable development) को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• वनों की कटाई से ग्रीनहाउस गैसों की वृद्धि होती है जो वैश्विक तापन का मुख्य कारण है।
• वृक्षों की कमी से मृदा संरक्षण और भूमिगत जल पुनर्भरण की प्रक्रिया बाधित होती है।
• समस्या के समाधान हेतु वनरोपण, 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle) और कड़े कानून अनिवार्य हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल समस्या (प्रभाव) का वर्णन करना और समाधान (निदान) के उपाय लिखना भूल जाना।
• वैज्ञानिक प्रभावों (जैसे भूजल, कार्बन चक्र, जैव विविधता) के स्थान पर सामान्य वाक्य लिखना।
• समाधान में व्यावहारिक उपायों के बजाय केवल उपदेशात्मक बातें लिखना।
Exam Tips:
a) उत्तर को दो स्पष्ट शीर्षकों में लिखें: 'परिवेश पर प्रभाव' और 'चुनौती का निदान'।
b) वैश्विक तापन, मृदा अपरदन और जैव विविधता जैसे मानक पारिभाषिक शब्दों का उपयोग करें।
c) निदान के उपायों में व्यक्तिगत और प्रशासनिक दोनों स्तरों के सुझाव शामिल करें।
Question 7: फ्लोचार्ट का विश्लेषण करें। इसमें 'क' और 'ख' के कौन-कौन-से उदाहरण हो सकते हैं?
Answer:
आकृति का विवरण: फ्लोचार्ट में पौधे से शुरुआत होकर पत्तियों की उपस्थिति जाँची गई है, और फिर जालिकारूपी शिरा-विन्यास की 'हाँ' शाखा से 'क' तथा 'नहीं' शाखा से 'ख' को दर्शाया गया है।
दिए गए फ्लोचार्ट के अनुसार, 'क' ऐसे पौधों को निरुपित करता है जिनमें पत्तियाँ उपस्थित हैं और उनमें जालिकावत शिरा-विन्यास (reticulate venation) पाया जाता है, जो कि द्विबीजपत्री (dicotyledonous) पौधों का प्रमुख लक्षण है; अतः 'क' के उदाहरण गुलाब, आम, पीपल, नीम, गुड़हल, सरसों और चना हैं। दूसरी ओर, 'ख' ऐसे पौधों को दर्शाता है जिनमें पत्तियाँ तो उपस्थित हैं परंतु उनमें जालिकावत शिरा-विन्यास नहीं है (अर्थात उनमें समानांतर शिरा-विन्यास / parallel venation है, जो एकबीजपत्री पौधों का लक्षण है) अथवा पत्तियाँ कांटों में रूपांतरित हैं; अतः 'ख' के उदाहरण गेहूँ, मक्का, घास, धान, केला और बाँस हैं।
मुख्य बिंदु:
• फ्लोचार्ट में 'क' द्विबीजपत्री पौधों का प्रतिनिधित्व करता है जिनमें जालिकावत शिरा-विन्यास होता है।
• फ्लोचार्ट में 'ख' एकबीजपत्री पौधों को दर्शाता है जिनमें समानांतर शिरा-विन्यास होता है।
• पत्तियों का शिरा-विन्यास पौधों के वर्गीकरण का एक प्राथमिक और महत्वपूर्ण आधार है।
आम गलतियाँ:
• फ्लोचार्ट की 'हाँ' और 'नहीं' की दिशा को उल्टा पढ़कर 'क' और 'ख' के उदाहरण बदल देना।
• 'ख' को बिना पत्ती वाला पौधा मान लेना, जबकि फ्लोचार्ट में पत्ती होने की शर्त पूरी हो चुकी है।
• केवल एक-एक उदाहरण लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।
Exam Tips:
a) फ्लोचार्ट आधारित प्रश्नों में तीर के निशानों और हाँ/नहीं के प्रवाह को ध्यान से देखकर ही निष्कर्ष निकालें।
b) 'क' और 'ख' दोनों के लिए कम से कम 3 से 4 सुपरिचित पौधों के उदाहरण अवश्य लिखें।
c) यह स्पष्ट करें कि 'नहीं' का अर्थ जालिकावत न होकर समानांतर शिरा-विन्यास होना है।
Question 8: राज अपने मित्र संजय से तर्क करता है "गुड़हल का पौधा एक झाड़ी है।" संजय इसके स्पष्टीकरण के लिए कौन से प्रश्न पूछ सकता है?
Answer:
संजय गुड़हल (Hibiscus) के पौधे के झाड़ी (shrub) होने के वैज्ञानिक वर्गीकरण की पुष्टि करने हेतु राज से निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकता है: (1) क्या गुड़हल के तने का आधार जमीन के बिल्कुल पास से ही कई शाखाओं में विभाजित होता है? (2) क्या इसका तना वृक्ष की तरह एक मोटा मुख्य तना न होकर मध्यम मोटाई का और काष्ठीय (woody) तथा कठोर होता है? (3) क्या इस पौधे की कुल ऊँचाई शाक की तरह बहुत छोटी नहीं और न ही वृक्ष की तरह बहुत ऊँची, बल्कि एक मध्यम ऊँचाई की होती है? और (4) क्या इसका तना शाकीय पौधों की तरह हरा और कोमल होने के बजाय भूरा और मजबूत होता है?
मुख्य बिंदु:
• झाड़ी में मुख्य तने के अभाव में शाखाएं आधार के निकट से ही निकलती हैं।
• झाड़ी का तना कठोर और काष्ठीय होता है परंतु वृक्ष जितना मोटा नहीं होता।
• झाड़ी की ऊँचाई शाक और वृक्ष के बीच की मध्यम श्रेणी की होती है।
आम गलतियाँ:
• प्रश्न पूछने के बजाय सीधे गुड़हल के गुणों का विवरण लिख देना।
• तने के आधार से शाखाएं निकलने वाले सबसे महत्वपूर्ण लक्षण का प्रश्न न पूछना।
• शाक और झाड़ी के लक्षणों को मिलाकर प्रश्न बनाना।
Exam Tips:
a) उत्तर को प्रश्नवाचक वाक्यों (जैसे 'क्या...?', 'कैसा...?') के रूप में ही प्रस्तुत करें क्योंकि प्रश्न में यही पूछा गया है।
b) तने की कठोरता, ऊँचाई और शाखन के स्थान—इन तीनों मुख्य वैज्ञानिक आधारों पर एक-एक प्रश्न बनाएं।
c) NCERT के अनुसार झाड़ी की मानक परिभाषा के मुख्य तत्वों को प्रश्नों में शामिल करें।
Question 9: तालिका में कुछ आँकड़े दिए गए हैं। आँकड़ों के समूह के आधार पर इन पौधों के उदाहरण का पता लगाइए।
समूह 'क': बीज का प्रकार - द्विबीजपत्री, जड़ का प्रकार - मूसला जड़
समूह 'ख': बीज का प्रकार - एकबीजपत्री, जड़ का प्रकार - झकड़ा जड़
(I) समूह 'क' के पौधों में और क्या समानताएँ हैं?
(II) समूह 'ख' के पौधों में और क्या समानताएँ हैं?
Answer:
आँकड़ों के आधार पर समूह 'क' के उदाहरण चना, मटर, सरसों, आम और राजमा हैं, जबकि समूह 'ख' के उदाहरण गेहूँ, मक्का, धान, ज्वार और घास हैं। (I) समूह 'क' (द्विबीजपत्री) के पौधों में अन्य समानताएँ: इनकी पत्तियों में जालिकावत शिरा-विन्यास (reticulate venation) पाया जाता है, इनके तने प्रायः काष्ठीय और अत्यधिक शाखित होते हैं, तथा इनके फूलों में पंखुड़ियों और अन्य भागों की संख्या सामान्यतः चार या पाँच के गुणक में होती है। (II) समूह 'ख' (एकबीजपत्री) के पौधों में अन्य समानताएँ: इनकी पत्तियों में समानांतर शिरा-विन्यास (parallel venation) पाया जाता है, इनके तने प्रायः कोमल, खोखले या अशाखित होते हैं, तथा इनके फूलों के भाग सामान्यतः तीन या तीन के गुणक में पाए जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• समूह 'क' द्विबीजपत्री पौधों का समुच्चय है जिसमें मूसला जड़ और जालिकावत शिरा-विन्यास पाया जाता है।
• समूह 'ख' एकबीजपत्री पौधों का समुच्चय है जिसमें झकड़ा जड़ और समानांतर शिरा-विन्यास होता है।
• पुष्प संरचना और तने का शाखन भी बीजपत्रों की संख्या से सीधे संबंधित लक्षण हैं।
आम गलतियाँ:
• पौधों के उदाहरण लिखना भूल जाना और केवल उप-भाग (I) और (II) का उत्तर देना।
• समूह 'क' में समानांतर और समूह 'ख' में जालिकावत शिरा-विन्यास लिखकर लक्षणों को उलट देना।
• पुष्प संरचना और पत्तियों के अतिरिक्त अन्य समानताओं को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) पहले दोनों समूहों के 3-3 स्पष्ट उदाहरण लिखें, फिर उप-भाग (I) और (II) का क्रमवार उत्तर दें।
b) शिरा-विन्यास और पुष्प भागों के गुणकों (3 का गुणक बनाम 4/5 का गुणक) का उल्लेख करने से उत्तर उत्कृष्ट बनता है।
c) एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री के तुलनात्मक नियमों को सारणीबद्ध रूप में स्मरण रखें।
Question 10: नीचे दिए गए चित्र में बत्तख के नामांकित भाग को देखें। बत्तख के पंजों में अन्य पक्षियों की तुलना में आपको क्या भिन्नता दिखाई देती है? बत्तख अपने इस भाग का उपयोग करके कौन-सी गति विधि करने में सक्षम होगी?
(क) बत्तख
(ख) कबूतर
Answer:
आकृति का विवरण: चित्र (क) में बत्तख के अँगुलियों के बीच पतली त्वचा से जुड़े झिल्लीयुक्त पंजे (webbed feet) और चित्र (ख) में कबूतर के अलग-अलग उँगलियों वाले थलीय पंजे दिखाए गए हैं।
पंजों की भिन्नता: बत्तख के पंजों की अँगुलियों के बीच त्वचा की एक पतली झिल्ली (web) खिंची होती है, जिसे जालपाद या झिल्लीयुक्त पंजे (webbed feet) कहा जाता है, जबकि कबूतर जैसे सामान्य थलीय पक्षियों की अँगुलियाँ एक-दूसरे से पूर्णतः स्वतंत्र और झिल्लीरहित होती हैं। गतिविधि में सक्षमता: बत्तख अपने इन झिल्लीयुक्त पंजों का उपयोग पानी में तैरने (swimming) के दौरान चप्पू (paddles or oars) की तरह करती है, जिससे वह पानी को प्रभावी ढंग से पीछे की ओर धकेलकर आसानी से आगे तैरने में सक्षम होती है; साथ ही ये चौड़े पंजे दलदली और कीचड़युक्त जमीन पर चलते समय उसके पैरों को धंसने से रोकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• बत्तख के पंजे झिल्लीदार (webbed) होते हैं जो जलीय अनुकूलन का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
• जालपाद जल में तैरते समय चप्पू की तरह काम करके आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
• कबूतर के पंजे टहनियों को पकड़ने और भूमि पर चलने हेतु अनुकूलित होते हैं।
आम गलतियाँ:
• झिल्लीयुक्त पंजे (webbed feet) का तकनीकी शब्द न लिखकर केवल 'जुड़े हुए पंजे' लिखना।
• गतिविधि में केवल 'चलना' लिख देना और मुख्य गतिविधि 'तैरना' लिखना भूल जाना।
• कबूतर के पंजों से तुलना किए बिना केवल बत्तख का ही वर्णन कर देना।
Exam Tips:
a) 'चप्पू' (paddle) की उपमा देकर तैरने की क्रियाविधि को अवश्य समझाएँ।
b) तुलनात्मक प्रश्न में दोनों पक्षियों (बत्तख और कबूतर) के पंजों का उल्लेख करना अनिवार्य है।
c) अनुकूलन (adaptation) और गति (locomotion) के आपसी संबंध को स्पष्ट रेखांकित करें।
NOTES: प्रश्न 5 में आवास के अतिरिक्त कशेरुकी/अकशेरुकी वर्गीकरण का मानक जैविक आधार प्रस्तुत किया गया है; अन्य सभी उत्तर NCERT के मानकों के अनुसार पूर्णतः शुद्ध हैं।
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