Step-by-Step Textbook Solutions for Class 6 Mathematics Chapter 02 रेखाएँ और कोण
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Question 1: क्या आप रिहान और शीतल को उनके उत्तर ज्ञात करने में मदद कर सकते हैं?
रिहान ने एक कागज़ पर एक बिंदु अंकित किया। वह उस बिंदु से जाने वाली कितनी रेखाएँ बना सकता है?
शीतल ने एक कागज़ पर दो बिंदु अंकित किए। वह उन दोनों बिंदुओं से गुजरती हुई कितनी भिन्न रेखाएँ बना सकती है?
Answer:
हम एक बिंदु से होकर अनन्त (असीमित) संख्या में रेखाएँ खींच सकते हैं, इसलिए रिहान इस बिंदु से होकर अनन्त रेखाएँ बना सकता है।
दो बिंदुओं से होकर केवल एक ही रेखा खींची जा सकती है, इसलिए शीतल इन दोनों बिंदुओं से होकर केवल एक ही रेखा बना सकती है।
मुख्य बिंदु:
• एक दिए गए बिंदु से अनगिनत रेखाएँ गुजर सकती हैं।
• किन्हीं दो दिए गए बिंदुओं से केवल और केवल एक ही सीधी रेखा खींची जा सकती है।
• ज्यामिति में बिंदुओं और रेखाओं के ये मूलभूत गुण हैं।
आम गलतियाँ:
• छात्र एक बिंदु से केवल एक ही रेखा खींचने की गलती करते हैं।
• दो बिंदुओं से एक से अधिक रेखाएँ खींचने का प्रयास करना।
• रेखा और रेखाखंड के अंतर को न समझना।
Exam Tips:
a) परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) चित्र बनाकर समझने का अभ्यास करें।
c) उत्तर लिखते समय 'अनन्त' शब्द का सही प्रयोग करें।
Question 2: आकृति 2.4 में दिए गए रेखाखंडों के नाम लिखिए। पाँच अंकित बिंदुओं में से कौन-से केवल एक रेखाखंड पर स्थित हैं? कौन-से बिंदु किन्हीं दो रेखाखंडों पर स्थित हैं?
Answer:
दिए गए चित्र में रेखाखंड LM, MP, PQ और QR हैं।
केवल एक रेखाखंड पर स्थित बिंदु:
• L: यह रेखाखंड LM का एक अंतिम बिंदु है।
• R: यह रेखाखंड QR का एक अंतिम बिंदु है।
दो रेखाखंडों पर स्थित बिंदु:
• M: यह वह बिंदु है जहाँ रेखाखंड LM और MP मिलते हैं।
• P: यह वह बिंदु है जहाँ रेखाखंड MP और PQ मिलते हैं।
• Q: यह वह बिंदु है जहाँ रेखाखंड PQ और QR मिलते हैं।
मुख्य बिंदु:
• रेखाखंड के दो अंत बिंदु होते हैं।
• उभयनिष्ठ बिंदु वह होता है जो दो आकृतियों को जोड़ता है।
• नामाकन करते وقت वर्णों के क्रम का ध्यान रखें।
आम गलतियाँ:
• अंतिम बिंदुओं और उभयनिष्ठ बिंदुओं को आपस में मिला देना।
• रेखाखंड के नाम में तीरों का निशान लगाना।
• गलत बिंदुओं के नाम लिख देना।
Exam Tips:
a) आकृति को ध्यान से देखकर ही नाम लिखें।
b) प्रत्येक बिंदु की स्थिति की जाँच दो बार करें।
c) उत्तर को बिंदुओं के रूप में अलग-अलग साफ-सुथरा दर्शाएँ।
Question 3: आकृति 2.5 में दी गई किरणों के नाम लिखिए। क्या प्रत्येक किरण का प्रारंभिक बिंदु है?
Answer:
दिए गए चित्र में दो किरणें हैं:
• किरण TA: यह किरण बिंदु T से शुरू होती है और बिंदु A से होकर गुजरती है तथा A के आगे अनंत तक बढ़ती है।
• किरण TB: यह किरण भी बिंदु T से शुरू होती है और बिंदु B से होकर गुजरती है तथा B के आगे अनंत तक बढ़ती है।
अतः, T दोनों किरणों का प्रारंभिक बिंदु है।
मुख्य बिंदु:
• किरण का एक प्रारंभिक बिंदु होता है और दूसरी दिशा में वह अनंत तक बढ़ती है।
• किरण का नाम लिखते समय प्रारंभिक बिंदु को हमेशा पहले लिखा जाता है।
• दी गई आकृति में बिंदु T दोनों किरणों का उद्गम केंद्र है।
आम गलतियाँ:
• किरण TA को किरण AT लिख देना।
• प्रारंभिक बिंदु को अंत बिंदु समझ लेना।
• किरण और रेखाखंड में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) किरण का नाम हमेशा उसके प्रारंभिक बिंदु से शुरू करते हुए लिखें।
b) किरण के ऊपर तीर के निशान का सही रूप बनाएँ।
c) कारण सहित स्पष्ट उत्तर दें।
Question 4: एक कच्ची (rough) आकृति बनाइए और नीचे दिए गए प्रत्येक बिंदु का उपयुक्त नामाकन कीजिए-
a. OP और OQ बिंदु O पर मिलते हैं।
b. XY और PQ बिंदु M पर प्रतिच्छेद करते हैं।
c. रेखा l पर बिंदु E और F स्थित हैं, पर बिंदु D स्थित नहीं है।
d. बिंदु P, AB पर स्थित है।
Answer:
a. OP और OQ रेखाएँ बिंदु O पर मिलती हैं जहाँ O उनका उभयनिष्ठ बिंदु है।
b. रेखा XY और रेखा PQ एक दूसरे को बिंदु M पर काटती (प्रतिच्छेद करती) हैं।
c. एक सीधी रेखा l खींचकर उस पर E और F को दर्शाया जाता है तथा D को रेखा से बाहर अंकित किया जाता है।
d. एक रेखाखंड AB खींचकर उसके ऊपर बिंदु P को अंकित किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं।
• बिंदु का रेखा पर स्थित होने का अर्थ है कि वह रेखा को स्पर्श करता है।
• कच्ची आकृति बनाते समय स्केल का प्रयोग करके स्पष्ट चित्र बनाएँ।
आम गलतियाँ:
• प्रतिच्छेद बिंदु को गलत जगह दर्शाना।
• रेखा के बाहर के बिंदु को रेखा पर ही बना देना।
• नामाकन गलत अक्षरों से करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक उप-प्रश्न (a, b, c, d) के लिए अलग और साफ़ चित्र बनाएँ।
b) प्रश्नों की शर्तों का बारीकी से पालन करें।
c) अंग्रेजी के बड़े अक्षरों से बिंदुओं को दर्शाएँ।
Question 5: आकृति 2.6 में निम्नलिखित के नाम बताइए-
a. पाँच बिंदु
b. एक रेखा
c. चार किरणें
d. पाँच रेखाखंड
Answer:
a. पाँच बिंदु: D, E, O, C और B
b. एक रेखा: BD
c. चार किरणें: OD, OB, OC और ED
d. पाँच रेखाखंड: DE, EO, OC, BO और DO
मुख्य बिंदु:
• आकृति में कुल बिंदुओं की संख्या गिनकर लिखें।
• रेखा दोनों दिशाओं में असीमित होती है अतः BD एक रेखा है।
• किरण और रेखाखंड की परिभाषा के अनुसार उनके नाम छांटें।
आम गलतियाँ:
• किरण को रेखाखंड मान लेना।
• बिंदुओं के नाम छूट जाना।
• गलत नामकरण करना।
Exam Tips:
a) आकृति को ध्यान से देखकर प्रत्येक भाग को अलग-अलग हल करें।
b) कॉमा लगाकर सभी नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
c) गिनती की संख्या की पुनः जाँच अवश्य करें।
Question 6: आकृति 2.7 में OA एक किरण है। यह O से शुरू होती है और बिंदु A से गुजरती है। यह बिंदु B से भी गुजरती है।
a. क्या हम इसे OB भी नाम दे सकते हैं? क्यों?
b. क्या हम OA को AO लिख सकते हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं?
Answer:
a. हाँ, इस किरण का नाम OB भी रखा जा सकता है क्योंकि किरण OA बिंदु B से भी गुजरती है। किरणों का नाम उनके प्रारंभिक बिंदु से शुरू होकर किरण पर स्थित किसी अन्य बिंदु के माध्यम से रखा जाता है। चूँकि किरण O से शुरू होती है और B तथा A दोनों से गुजरती है, इसलिए इसे OB भी कहा जा सकता है।
b. नहीं, हम किरण OA को किरण AO नहीं लिख सकते क्योंकि किरणों की एक निश्चित दिशा होती है। किरण बिंदु O से शुरू होकर A की ओर जाती है, इसलिए किरण OA, O से A की दिशा को दर्शाता है। यदि हम इसे किरण AO लिखें, तो इसका अर्थ होगा कि किरण A से शुरू होकर O की ओर जा रही है, जो यहाँ सही नहीं है क्योंकि O प्रारंभिक बिंदु है।
मुख्य बिंदु:
• किरण का प्रारंभिक बिंदु हमेशा नाम में सबसे पहले आता है।
• एक ही किरण पर स्थित अन्य बिंदुओं का उपयोग नाम देने के लिए किया जा सकता है।
• किरण की दिशा बदलने से उसका नाम बदल जाता है।
आम गलतियाँ:
• किरण को रेखा की तरह दोनों तरफ से किसी भी नाम से पुकारना।
• प्रारंभिक बिंदु की उपेक्षा करना।
• कारण स्पष्ट न लिखना।
Exam Tips:
a) किरण के नामकरण के नियमों को अच्छी तरह समझें।
b) 'हाँ/ना' के साथ 'क्यों' का तार्किक कारण अवश्य दें।
c) प्रारंभिक बिंदु की स्थिति को हमेशा ध्यान में रखें।
Question 1: क्या आप दी गई आकृतियों में कोण ढूँढ सकते हैं? किसी भी एक कोण की भुजाएँ बनाइए और शीर्ष का नाम दीजिए।
Answer:
दिए गए चित्रों में विभिन्न कोण निम्नलिखित हैं:
• साइकिल के चित्र में:
\( \angle BDC \) का शीर्ष D है।
\( \angle AOB \) का शीर्ष O है।
• अन्य आकृतियों में:
\( \angle APB \) का शीर्ष P है।
\( \angle ASB \) का शीर्ष S है।
मुख्य बिंदु:
• दो किरणों के उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु से कोण बनता है।
• कोण के बीच के बिंदु को शीर्ष कहते हैं।
• दैनिक जीवन की वस्तुओं में भी कोण छिपे होते हैं।
आम गलतियाँ:
• शीर्ष बिंदु को गलत पहचानना।
• भुजाओं और शीर्ष को ठीक से न दर्शाना।
• कोण के संकेत \( \angle \) का प्रयोग न करना।
Exam Tips:
a) कोण का नाम लिखते समय शीर्ष का अक्षर हमेशा बीच में होना चाहिए।
b) चित्रों को ध्यान से देखकर शीर्ष पहचानें।
c) स्वच्छ चित्र बनाकर नामाकन करें।
Question 2: भुजा ST और SR को चिन्हित करते हुए कोण बनाइए।
Answer:
\( \angle RST \) की भुजाएँ ST और SR हैं तथा इनका उभयनिष्ठ शीर्ष S है।
मुख्य बिंदु:
• कोण बनाने वाली दोनों किरणें या रेखाखंड उसकी भुजाएँ कहलाती हैं।
• दोनों भुजाओं का एक साझा प्रारंभिक बिंदु शीर्ष होता है।
• नामकरण में शीर्ष बिंदु हमेशा बीच में आता है।
आम गलतियाँ:
• भुजाओं के नाम उल्टे लिखना।
• शीर्ष बिंदु को सही जगह न रखना।
• चित्र में तीर के निशानों को गलत बनाना।
Exam Tips:
a) स्केल और पेंसिल का प्रयोग करके स्पष्ट कोण बनाएँ।
b) भुजाओं के नाम तीर के साथ दर्शाएँ।
c) कोण का नामाकन मानक विधि से करें।
Question 3: व्याख्या कीजिए कि \( \angle APC \) को \( \angle P \) क्यों नहीं लिखा जा सकता?
Answer:
बिंदु P पर एक से अधिक कोण हैं, जैसे \( \angle APB \), \( \angle APC \) और \( \angle BPC \) । इसलिए हम \( \angle APC \) को केवल \( \angle P \) नहीं लिख सकते क्योंकि इससे यह स्पष्ट नहीं होगा कि किस कोण की बात हो रही है।
मुख्य बिंदु:
• जब एक ही शीर्ष पर कई कोण बनते हैं, तो केवल शीर्ष के नाम से काम नहीं चलता।
• तीन अक्षरों का प्रयोग करके विशिष्ट कोण को दर्शाया जाता है।
• बीच का अक्षर हमेशा शीर्ष को दर्शाता है।
आम गलतियाँ:
• एक से अधिक कोण होने पर भी केवल एक अक्षर लिखना।
• शीर्ष के अक्षर को किनारे पर लिखना।
• प्रश्न के तर्क को न समझना।
Exam Tips:
a) बहु-कोण शीर्षों पर हमेशा तीन अक्षरों वाली नामपद्धति अपनाएँ।
b) कारण स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में लिखें।
c) अभ्यास के दौरान विभिन्न कोणों के नाम लिखने का अभ्यास करें।
Question 4: नीचे दी गई आकृति में अंकित कोणों के नाम लिखिए।
Answer:
दी गई आकृति में अंकित कोण \( \angle RTQ \) और \( \angle RTP \) हैं।
मुख्य बिंदु:
• आकृति में बने चाप (arcs) कोण को दर्शाते हैं।
• साझा भुजा और शीर्ष के आधार पर कोणों के नाम तय होते हैं।
• T यहाँ सभी कोणों का उभयनिष्ठ शीर्ष है।
आम गलतियाँ:
• कोण के नाम में अक्षरों का क्रम गलत लिखना।
• चाप द्वारा दर्शाए गए कोणों को छोड़ देना।
• गलत शीर्ष चुनना।
Exam Tips:
a) आकृति में दिए गए चापों को ध्यान से देखें।
b) प्रत्येक कोण का नाम अलग से लिखें।
c) वर्तनी और प्रतीकों का विशेष ध्यान रखें।
Question 5: अपने कागज पर तीन बिंदु इस प्रकार अंकित कीजिए कि वे एक रेखा पर स्थित न हों। उन्हें A, B और C से चिन्हित कीजिए। सभी संभव रेखाएँ खींचिए, जो इन बिंदु-युग्मों से गुजरती हों। इस प्रकार आपको कितनी रेखाएँ प्राप्त होती हैं? उनके नाम भी बताइए। A, B और C का प्रयोग करते हुए आप कितने कोण बना सकते हैं? उन सभी के नाम लिखिए और आकृति 2.9 के अनुसार उनमें से प्रत्येक को एक चाप के साथ चिन्हित कीजिए।
Answer:
हमें बिंदुओं के युग्मों को जोड़कर तीन रेखाएँ AB, BC और CA प्राप्त होती हैं। इन बिंदुओं का उपयोग करके तीन कोण \( \angle ABC \), \( \angle ACB \) और \( \angle BAC \) बनते हैं।
मुख्य बिंदु:
• तीन असंरेखीय बिंदु एक त्रिभुज का निर्माण करते हैं।
• तीन बिंदुओं से कुल तीन रेखाखंड या रेखाएँ खींची जा सकती हैं।
• त्रिभुज के अंतः कोणों की संख्या तीन होती है।
आम गलतियाँ:
• बिंदुओं को एक ही सीधी रेखा में ले लेना।
• रेखाओं और कोणों की संख्या गलत गिनना।
• चाप से कोणों को न दर्शाना।
Exam Tips:
a) रेखाओं और कोणों की गणना अलग-अलग करें।
b) चित्र को पेंसिल से साफ़-सुथरा बनाएँ।
c) सभी कोणों के नाम क्रमानुसार लिखें।
Question 6: अपने कागज पर चार बिंदु इस प्रकार अंकित कीजिए कि उनमें से कोई भी तीन बिंदु एक रेखा पर न हों। उन्हें A, B, C और D से चिन्हित कीजिए। सभी संभव रेखाएँ खींचिए, जो इन बिंदु-युग्मों से गुजरती हों। इस प्रकार आपको कितनी रेखाएँ प्राप्त होती हैं? उनके नाम भी बताइए। आप A, B, C और D से कितने कोणों का नामकरण कर सकते हैं? उन्हें लिखिए और उनमें से प्रत्येक को आकृति 2.9 के अनुसार चाप द्वारा अंकित कीजिए।
Answer:
हमें बिंदुओं के युग्मों को जोड़कर चार रेखाएँ AB, BC, CD और DA प्राप्त होती हैं। इन बिंदुओं का उपयोग करके 12 कोण \( \angle ABC \), \( \angle ADC \), \( \angle DCB \), \( \angle BAD \), \( \angle BAC \), \( \angle DAC \), \( \angle ABD \), \( \angle DBC \), \( \angle ACB \), \( \angle ACD \), \( \angle BDC \) और \( \angle BDA \) बनते हैं।
मुख्य बिंदु:
• चार बिंदुओं से एक चतुर्भुज और उसके विकर्ण बनते हैं।
• विभिन्न शीर्षों पर कई आंतरिक कोण बनते हैं।
• व्यवस्थित रूप से नाम लिखने पर कोई कोण छूटता नहीं है।
आम गलतियाँ:
• सभी कोणों को न लिख पाना।
• रेखाओं के नाम में गलती करना।
• चाप से कोणों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) चतुर्भुज और उसके विकर्णों को खींचकर कोणों की गिनती करें।
b) प्रत्येक शीर्ष पर बनने वाले छोटे और बड़े कोणों को ध्यान से देखें।
c) उत्तर को व्यवस्थित सूची के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 1: एक आयताकार कागज को मोड़िए। अब घुमाव के निशान पर एक रेखा खींचिए। घुमाव और कागज की भुजाओं के बीच बने कोणों को नाम दीजिए और उन कोणों की तुलना कीजिए। आयताकार कागज को घुमाकर विभिन्न कोण बनाइए एवं उनकी तुलना कीजिए। यह भी बताइए कि इनमें से कौन-सा कोण सबसे बड़ा है और कौन-सा कोण सबसे छोटा है?
Answer:
मोड़ पर खींची गई रेखा के साथ बने कोण \( \angle AEF \), \( \angle BEF \), \( \angle DFE \) और \( \angle CFE \) हैं, जिन्हें क्रमशः 1, 2, 3 और 4 से दर्शाया गया है। इनमें से \( \angle AEF \) और \( \angle CFE \) बड़े कोण हैं, जबकि \( \angle BEF \) और \( \angle DFE \) छोटे कोण हैं।
मुख्य बिंदु:
• कागज़ मोड़ने से क्रीज़ (मोड़ की रेखा) बनती है जो कोणों को जन्म देती है।
• कोणों के खुलने के फैलाव से उनकी तुलना की जाती है।
• अधिक फैलाव वाला कोण बड़ा होता है।
आम गलतियाँ:
• कोणों की पहचान गलत करना।
• बड़े और छोटे कोणों में अंतर न बता पाना।
• नामकरण ठीक से न करना।
Exam Tips:
a) प्रायोगिक गतिविधि को कागज़ पर स्वयं करके देखें।
b) कोणों के प्रकार को उनके आकार के आधार पर समझें।
c) उत्तर में कोणों के नाम स्पष्ट लिखें।
Question 2: प्रत्येक स्थिति में बताइए कि कौन-सा कोण बड़ा है और क्यों?
a. \( \angle AOB \) या \( \angle XOY \)
b. \( \angle AOB \) या \( \angle XOB \)
c. \( \angle XOB \) या \( \angle XOC \) अपने मित्रों से चर्चा कीजिए कि आपने यह निर्णय कैसे लिया कि कौन-सा कोण बड़ा है।
Answer:
a. \( \angle AOB > \angle XOY \), क्योंकि \( \angle XOY \), \( \angle AOB \) के भीतर स्थित है। अर्थात \( \angle XOY \), \( \angle AOB \) का एक भाग है।
b. \( \angle AOB > \angle XOB \), क्योंकि \( \angle XOB \), \( \angle AOB \) के भीतर स्थित है। अर्थात \( \angle XOB \), \( \angle AOB \) का एक भाग है।
c. \( \angle XOB = \angle XOC \), क्योंकि दोनों कोण समान किरणों से बने हैं।
मुख्य बिंदु:
• यदि एक कोण दूसरे कोण के अंदर समाहित है, तो अंदर वाला कोण छोटा होता है।
• समान किरणों से बनने वाले कोण माप में बराबर होते हैं।
• कोणों की तुलना उनके फैलाव और स्थिति से की जाती है।
आम गलतियाँ:
• भीतर स्थित भाग और बड़े कोण को भ्रमित करना।
• समानता के नियमों को न समझना।
• कारण सही ढंग से न लिखना।
Exam Tips:
a) आकृतियों में कोणों की अंतःस्थिति (interior position) को ध्यान से देखें।
b) तुलना करते समय 'बड़ा है' (\( > \)) या 'बराबर है' (\( = \)) का सही चिह्न प्रयोग करें।
c) कारण में 'भाग होना' या 'समान किरण होना' अवश्य लिखें।
Question 3: कौन-सा कोण बड़ा है – \( \angle XOY \) या \( \angle AOB \)? कारण बताइए।
Answer:
\( \angle XOB > \angle AOB \), क्योंकि \( \angle AOB \), \( \angle XOB \) के भीतर स्थित है। अर्थात \( \angle AOB \), \( \angle XOB \) का एक भाग है।
मुख्य बिंदु:
• आंशिक भाग हमेशा संपूर्ण कोण से छोटा होता है।
• किरणों के फैलाव का क्षेत्रफल कोण की तुलना का आधार है।
• ज्यामितीय निरीक्षण से तुलना करना आसान होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल नाम देखकर बड़ा-छोटा बता देना, चित्र न देखना।
• कारण न लिखना।
• प्रतीकों का गलत प्रयोग करना।
Exam Tips:
a) चित्र का अवलोकन सावधानीपूर्वक करें।
b) उत्तर के साथ उचित तर्क दें।
c) बड़े और छोटे का गणितीय चिह्न स्पष्ट बनाएँ।
Question 1: आपकी कक्षा की खिड़कियों में कितने समकोण हैं? क्या अपनी कक्षा में आप और समकोण देख सकते हैं?
Answer:
मेरी कक्षा में खिड़कियों में सामान्यतः कई समकोण होते हैं, क्योंकि जहाँ फ्रेम मिलते हैं वहाँ कोने आमतौर पर 90 डिग्री के होते हैं। प्रत्येक आयताकार या वर्गाकार खिड़की में चार समकोण होते हैं। खिड़कियों के अलावा, कक्षा में अन्य वस्तुएँ जिनमें समकोण होते हैं, उनमें दरवाजों के कोने, ब्लैकबोर्ड या व्हाइटबोर्ड के किनारे, डेस्क या मेज तथा फर्श या दीवारों की टाइलें शामिल हैं, क्योंकि ये सभी वर्गाकार या आयताकार होती हैं।
मुख्य बिंदु:
• समकोण का माप ठीक 90 डिग्री होता है।
• वर्गाकार और आयताकार वस्तुओं के सभी कोने समकोण बनाते हैं।
• हमारे आस-पास की अधिकांश मानव-निर्मित वस्तुओं में समकोण पाए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• हर कोने को समकोण मान लेना, भले ही वह सीधा न हो।
• समकोण और न्यूनकोण में अंतर न समझ पाना।
• उदाहरण केवल एक ही वस्तु का देना।
Exam Tips:
a) अपने परिवेश से दैनिक जीवन के उदाहरण दें।
b) समकोण का मान (90°) हमेशा याद रखें।
c) उत्तर को विस्तार से और स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
Question 2: बिंदु A को ग्रिड के दूसरे बिंदुओं से एक सरल रेखा में इस प्रकार जोड़ें कि एक सरल कोण प्राप्त हो। इसे करने के विभिन्न तरीके हो सकते हैं, जैसे A से क्षैतिज (सीधी) दिशा में किसी बिंदु B को जोड़ना या A से तिरछी दिशा में किसी अन्य बिंदु को जोड़ना, जिससे सीधी रेखा बने और सरल कोण प्राप्त हो।
Answer:
एक सरल कोण बनाने के विभिन्न तरीके हो सकते हैं जैसे क्षैतिज रेखा के माध्यम से विपरीत दिशा के बिंदुओं को जोड़ना। सरल कोण का माप 180° होता है जो एक सीधी रेखा बनाता है।
मुख्य बिंदु:
• सरल कोण एक सीधी रेखा होता है।
• इसका माप ठीक 180° होता है।
• ग्रिड पर बिंदुओं को मिलाकर सीधी रेखा प्राप्त की जा सकती है।
आम गलतियाँ:
• टेढ़ी-मेढ़ी रेखा को सरल कोण मान लेना।
• 180° की अवधारणा को न समझ पाना।
• ग्रिड के बिंदुओं का गलत चयन करना।
Exam Tips:
a) सरल कोण हमेशा सीधी रेखा बनाता है, यह बात ध्यान रखें।
b) स्केल की मदद से ग्रिड पर रेखा खींचें।
c) उत्तर में सरल कोण की विशेषता बताएँ।
Question 3: अब बिंदु A को ग्रिड के दूसरे बिंदुओं से एक सरल रेखा में इस प्रकार जोड़ें कि एक समकोण प्राप्त हो। इसे करने के विभिन्न तरीके क्या हो सकते हैं?
Answer:
एक समकोण प्राप्त करने के लिए बिंदु A से ऐसी रेखा खींचनी होगी जो दूसरी रेखा पर लंबवत हो। ग्रिड पर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाओं के मिलने से समकोण (90°) बनता है।
मुख्य बिंदु:
• समकोण 90° का होता है।
• ग्रिड की खड़ी और पड़ी रेखाएँ आपस में समकोण बनाती हैं।
• इसे बनाने के कई तरीके हो सकते हैं।
आम गलतियाँ:
• कोण का माप 90° से कम या ज्यादा ले लेना।
• लंबवत रेखाओं की पहचान न करना।
• ग्रिड का सही उपयोग न करना।
Exam Tips:
a) समकोण के लिए हमेशा 'L' आकार की स्थिति देखें।
b) कागज़ को मोड़कर या ग्रिड की लाइन गिनकर समकोण बनाएँ।
c) स्पष्ट चित्र या वर्णन दें।
Question 4: कागज को घुमाकर तिरछा निशान बनाइए। अब एक अन्य निशान बनाइए जो पिछले तिरछे निशान पर लम्ब हो।
a. अब आपके पास कितने समकोण हैं? तर्कसंगत उत्तर दीजिए कि ये कोण पूर्णतया समकोण क्यों हैं?
b. वर्णन कीजिए कि आपने इसे कैसे मोड़ा ताकि जो व्यक्ति इस प्रक्रिया को करना नहीं जानता वह आपकी प्रक्रिया का अनुसरण करके समकोण बना सके।
Answer:
a. जब हम कागज को इस प्रकार मोड़ते हैं कि मूल तिरछे मोड़ पर एक लंबवत क्रीज़ बन जाए, तो हम चार समकोण बना लेते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब दो रेखाएँ (या क्रीज़) एक-दूसरे के लंबवत होती हैं, तो वे 90 डिग्री के कोण पर प्रतिच्छेद करती हैं और समकोण बनाती हैं। इन दो क्रीज़ के प्रतिच्छेदन से चार भाग बनते हैं और प्रत्येक भाग 90 डिग्री का कोण दर्शाता है।
b. पहला तिरछा मोड़ बनाइए:
• एक आयताकार या वर्गाकार कागज का टुकड़ा लीजिए।
• इसे तिरछा मोड़िए (एक कोने से सामने वाले कोने तक) ताकि एक तिरछी क्रीज़ बन जाए।
• कागज को खोलिए ताकि कागज पर तिरछी रेखा दिखाई दे।
लंबवत क्रीज़ बनाइए:
• अब कागज को फिर से मोड़िए, लेकिन इस बार कागज के एक किनारे को इस प्रकार मोड़िए कि वह तिरछी क्रीज़ को बीच में जाकर मिले।
• ध्यान रखें कि किनारा क्रीज़ के साथ बिल्कुल सीध में हो, ताकि नया मोड़ तिरछी क्रीज़ के लंबवत हो।
• कागज को खोलिए और आप दो क्रीज़ देखेंगे—एक तिरछी और एक लंबवत—जो जहाँ एक-दूसरे को काटती हैं वहाँ समकोण बनाती हैं।
मुख्य बिंदु:
• लंबवत रेखाएँ हमेशा 90° का कोण यानी समकोण बनाती हैं।
• कागज़ को सही तरीके से मोड़ने से सटीक क्रीज़ प्राप्त होती है।
• प्रतिच्छेदन बिंदु पर चार समकोण बनते हैं।
आम गलतियाँ:
• मोड़ते समय सीध का ध्यान न रखना।
• समकोण की परिभाषा भूल जाना।
• चरणों का क्रम उलट-पलट करना।
Exam Tips:
a) कागज मोड़ने वाले प्रयोग को परीक्षा से पहले घर पर अभ्यास करें।
b) चरणों को बिंदुवार (step-by-step) लिखें।
c) 'लंबवत' और 'समकोण' शब्दों का सही जगह प्रयोग करें।
Question 1: पिछली आकृतियों में न्यून कोण, समकोण, अधिक कोण और सरल कोण को पहचानिए।
Answer:
विभिन्न आकृतियों में दिए गए कोणों को उनके माप के आधार पर इस प्रकार पहचाना गया है:
• न्यून कोण: 0° से अधिक और 90° से कम माप वाले कोण।
• समकोण: ठीक 90° माप वाला कोण।
• अधिक कोण: 90° से अधिक और 180° से कम माप वाला कोण।
• सरल कोण: ठीक 180° माप वाला कोण।
मुख्य बिंदु:
• कोणों का वर्गीकरण उनके डिग्री माप पर निर्भर करता है।
• न्यून कोण नुकीला होता है, समकोण 'L' आकार का होता है, अधिक कोण फैला हुआ होता है और सरल कोण सीधी रेखा होता है।
• ज्यामिति में कोणों की पहचान करना सबसे बुनियादी कौशल है।
आम गलतियाँ:
• न्यून कोण और अधिक कोण में भ्रमित होना।
• सरल कोण को रेखा मान लेना।
• माप की सीमा का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) सभी कोणों की माप की सीमा (range) याद रखें।
b) देखकर अनुमान लगाने के साथ-साथ चांदे का प्रयोग करना सीखें।
c) उत्तर को सारणीबद्ध या वर्गीकृत रूप में लिखें।
Question 2: कुछ न्यून कोण और अधिक कोण भिन्न दशाओं में बनाइए।
Answer:
न्यून कोण और अधिक कोण को विभिन्न दिशाओं (ऊपर, नीचे, दाएँ, बाएँ) में इस प्रकार बनाया जा सकता है कि उनका शीर्ष किसी भी दिशा में इंगित कर रहा हो, परंतु उनका फैलाव न्यून कोण के लिए 90° से कम और अधिक कोण के लिए 90° से अधिक व 180° से कम रहे।
मुख्य बिंदु:
• कोण की स्थिति बदलने से उसका प्रकार नहीं बदलता, केवल उसका माप महत्वपूर्ण है।
• कोण का मुख किसी भी दिशा में हो सकता है।
• अभ्यास के लिए विभिन्न कोणों को अलग-अलग कोणों पर घुमाकर बनाएँ।
आम गलतियाँ:
• केवल एक ही मानक स्थिति में कोण बनाना।
• तिरछी रेखाओं पर कोण बनाते समय माप गलत लेना।
• भुजाओं को बहुत छोटा खींचना।
Exam Tips:
a) पेंसिल और स्केल से साफ चित्र बनाएँ।
b) विभिन्न दिशाओं में कोण बनाने का अभ्यास करें।
c) चित्र में तीरों और शीर्ष को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 3: क्या आप जानते हैं कि न्यून और अधिक शब्दों का क्या अर्थ है? न्यून का अर्थ नुकीला और अधिक का कुंड होता है। आपको क्या लगता है कि इन शब्दों का चयन क्यों किया गया होगा?
Answer:
हाँ, ज्यामिति में “न्यून कोण” और “अधिक कोण” शब्दों के अर्थ उनके सामान्य उपयोग से जुड़े हुए हैं:
न्यून कोण: सामान्य अंग्रेज़ी में “acute” का अर्थ “तेज” या “नुकीला” होता है। इसी कारण न्यून कोण को ऐसा कहा जाता है। न्यून कोण 90 डिग्री से छोटा होता है और देखने में नुकीला या पतला लगता है, जैसे चाकू की नोक या कोई तेज किनारा।
अधिक कोण: “obtuse” का अर्थ “मंद” या “भद्दा (कम तेज)” होता है। अधिक कोण 90 डिग्री से बड़ा होता है और देखने में चौड़ा या फैला हुआ लगता है, इसलिए यह कम नुकीला या भद्दा प्रतीत होता है, जैसे कोई कुंद वस्तु।
इन शब्दों का उपयोग इसलिए किया गया है क्योंकि इन कोणों का आकार रोजमर्रा की चीजों से मिलता-जुलता है, जिससे इन्हें समझना आसान हो जाता है। न्यून कोण नुकीला होता है क्योंकि यह पतला और छोटा होता है, जबकि अधिक कोण चौड़ा होता है इसलिए यह कम नुकीला या मंद दिखाई देता है।
मुख्य बिंदु:
• गणितीय शब्दों की उत्पत्ति उनके व्यावहारिक अर्थों से जुड़ी होती है।
• 'Acute' का संबंध तीक्ष्णता से और 'Obtuse' का संबंध मंदता से है।
• दैनिक जीवन की वस्तुओं से तुलना करके गणित को समझना सरल होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल रटना, शब्दों के शाब्दिक अर्थ को न समझना।
• न्यून और अधिक की परिभाषा में उलटफेर करना।
• व्यावहारिक उदाहरण न दे पाना।
Exam Tips:
a) शब्दों के मूल अर्थ को समझकर उत्तर अपने शब्दों में लिखें।
b) रोजमर्रा के उदाहरण याद रखें।
c) उत्तर लिखते समय स्पष्टता बनाए रखें।
Question 4: ज्ञात कीजिए कि नीचे दी गई आकृतियों में कितने न्यून कोण हैं-
Answer:
आकृति 1 में न्यून कोणों की संख्या 3 है, आकृति 2 में 12 है और आकृति 3 में 21 है। अगली आकृति में न्यून कोणों की संख्या 30 होगी। प्रत्येक आकृति में न्यून कोणों की संख्या में एक पैटर्न है। अगली आकृति में न्यून कोणों की संख्या पिछली आकृति से 9 अधिक होती है।
मुख्य बिंदु:
• जटिल ज्यामितीय आकृतियों में पैटर्न छिपे होते हैं।
• प्रत्येक चरण में एक निश्चित संख्या (जैसे यहाँ 9) की वृद्धि होती है।
• सभी छोटे कोणों को सावधानी से गिनना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• कोणों की गिनती में भूल करना।
• पैटर्न के नियम को न पहचान पाना।
• केवल बड़े कोणों को गिनना।
Exam Tips:
a) पैटर्न आधारित प्रश्नों में अंतर (difference) निकालकर नियम ढूँढें।
b) गिनती दो बार करें ताकि गलती न हो।
c) उत्तर को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।
Question 1: निम्नलिखित कोणों के माप लिखिए:
a. \( \angle KAL \)
b. \( \angle WAL \)
c. \( \angle TAK \)
Answer:
चांदे (protractor) की सहायता से मापने पर:
a. \( \angle KAL = 30^\circ \)
b. \( \angle WAL = 50^\circ \)
c. \( \angle TAK = 40^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• चांदे के केंद्र को कोण के शीर्ष पर ठीक से रखना चाहिए।
• आधार रेखा को कोण की एक भुजा के संपाती (coincide) करना चाहिए।
• पैमाने पर सही पढ़ा गया अंक ही कोण की माप होती है।
आम गलतियाँ:
• गलत स्केल (अंदर का या बाहर का पैमाना) पढ़ लेना।
• चांदे के केंद्र को शीर्ष पर ठीक न रखना।
• डिग्री का चिह्न (\( ^\circ \)) लगाना भूल जाना।
Exam Tips:
a) हमेशा पारदर्शी चांदे का प्रयोग करें।
b) माप लिखते समय डिग्री का चिह्न अवश्य लगाएँ।
c) शून्य (0) वाले पैमाने से ही माप पढ़ना शुरू करें।
Question 1: चांदे का प्रयोग करते हुए निम्न कोणों के डिग्री माप ज्ञात कीजिए।
Answer:
निम्नलिखित कोणों के माप (डिग्री में) इस प्रकार हैं:
चित्र 1 में कोण = \( 48^\circ \)
चित्र 2 में कोण = \( 24^\circ \)
चित्र 3 में कोण = \( 109^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• न्यून कोण 90° से कम और अधिक कोण 90° से अधिक होता है।
• चांदे के पैमाने को सटीकता से देखना आवश्यक है।
• कोण का माप अंश (\( ^\circ \)) में व्यक्त किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• गलत पैमाने से माप पढ़ लेना।
• चांदे को तिरछा रखना।
• गणना में छोटी त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) माप पढ़ते समय आँखें चांदे के ठीक ऊपर लंबवत होनी चाहिए।
b) अधिक कोण के लिए 90° से अधिक वाला पैमाना देखें।
c) सभी उत्तरों में डिग्री का संकेत दें।
Question 2: चांदे का प्रयोग करते हुए अपनी कक्षा में दिख रहे विभिन्न कोणों के डिग्री माप ज्ञान कीजिए।
Answer:
मेरे कक्षा में विभिन्न कोणों के माप:
• खिड़की के फ्रेम का कोना: \( 90^\circ \)
• डेस्क का किनारा: \( 90^\circ \)
• दीवार पर पोस्टर का झुकाव: \( 45^\circ \)
• आधी खुली पुस्तक: \( 180^\circ \)
• थोड़ा खुला दरवाजा: \( 30^\circ \)
• कुर्सी का बैकरेस्ट: \( 120^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• हमारे आस-पास विभिन्न प्रकार के कोण (न्यून, सम, अधिक, सरल) मौजूद हैं।
• वस्तुओं के आकार से उनके कोणों का अनुमान लगाया जा सकता है।
• व्यावहारिक अवलोकन गणित को रोचक बनाता है।
आम गलतियाँ:
• केवल अंदाज़ा लगाना, माप का सत्यापन न करना।
• समकोण और अन्य कोणों में भ्रमित होना।
• वस्तुओं के नाम गलत लिखना।
Exam Tips:
a) वास्तविक वस्तुओं के उदाहरण दें।
b) प्रत्येक कोण के सामने उसका सटीक अनुमानित या मापा गया मान लिखें।
c) सूची को साफ-सुथरा बनाएँ।
Question 3: नीचे दिए गए कोणों के अंश माप ज्ञात कीजिए जाँच कीजिए की क्या यहाँ कागज़ के चांदे का प्रयोग कर सकते हैं।
Answer:
कागज़ के चांदे का उपयोग करके कोणों के माप (डिग्री में) नीचे दिए गए हैं:
चित्र 1 में कोण = \( 42^\circ \)
चित्र 2 में कोण = \( 115^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• कागज़ का चांदा भी वास्तविक चांदे की तरह ही कार्य करता है।
• केंद्र और आधार रेखा का मिलान इसमें भी अनिवार्य है।
• कोण का फैलाव माप तय करता है।
आम गलतियाँ:
• कागज़ के चांदे को ठीक से न रखना।
• माप पढ़ते समय ध्यान न देना।
• पैमाना गलत चुनना।
Exam Tips:
a) गतिविधि आधारित प्रश्नों को स्वयं कागज़ के चांदे से करके देखें।
b) माप लिखते समय चित्र संख्या का उल्लेख करें।
c) सटीकता का विशेष ध्यान रखें।
Question 4: नीचे दिए गए कोण का अंश माप चांदे का प्रयोग करके किस प्रकार निकाला जा सकता है?
Answer:
कोण का अंश माप = \( 102^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• यह एक अधिक कोण है क्योंकि इसका माप 90° से अधिक है।
• चांदे को रखकर सही दिशा का पैमाना पढ़ा जाता है।
• 90° और 180° के बीच का मान अधिक कोण कहलाता है।
आम गलतियाँ:
• 90° से कम वाला पैमाना पढ़ लेना।
• चांदे की स्थिति गलत रखना।
• डिग्री का चिह्न छोड़ देना।
Exam Tips:
a) कोण के प्रकार को देखकर अनुमान लगाएँ कि माप 90° से कम होगी या अधिक।
b) चांदे का सही पैमाना चुनें।
c) उत्तर स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 5: निम्न कोणों को मापिए और प्रत्येक का डिग्री माप लिखिए।
Answer:
निम्नलिखित कोणों के अंश माप नीचे दिए गए हैं:
a. कोण का अंश माप = \( 77^\circ \)
b. कोण का अंश माप = \( 120^\circ \)
c. कोण का अंश माप = \( 58^\circ \)
d. कोण का अंश माप = \( 130^\circ \)
e. कोण का अंश माप = \( 128^\circ \)
f. कोण का अंश माप = \( 60^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• प्रत्येक कोण की भुजाओं के बीच की चौड़ाई को चांदे से मापा जाता है।
• न्यून और अधिक कोणों की पहचान माप से की जाती है।
• चांदे के केंद्र बिंदु को शीर्ष पर रखना अनिवार्य है।
आम गलतियाँ:
• गलत स्केल पढ़ना।
• चांदे को हिला देना।
• अक्षरों या उप-भागों के क्रम में गड़बड़ी करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक भाग (a, f) के उत्तर को क्रमानुसार लिखें।
b) चांदे का प्रयोग सावधानीपूर्वक करें।
c) उत्तर में डिग्री चिह्न (\( ^\circ \)) लगाना न भूलें।
Question 6: \( \angle BXE \), \( \angle CXE \), \( \angle AXB \) और \( \angle BXC \) के अंश माप ज्ञात कीजिए।
Answer:
\( \angle BXE \), \( \angle CXE \), \( \angle AXB \) और \( \angle BXC \) के अंश माप निम्नानुसार हैं:
\( \angle BXE = 115^\circ \)
\( \angle CXE = 85^\circ \)
\( \angle AXB = 65^\circ \)
\( \angle BXC = 30^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• एक ही उभयनिष्ठ शीर्ष से कई किरणें निकलने पर अलग-अलग कोण बनते हैं।
• कोणों को जोड़कर या घटाकर भी उनके माप समझे जा सकते हैं।
• चांदे से प्रत्येक कोण की दोनों भुजाओं के अंतर्ग्रहित भाग को पढ़ा जाता है।
आम गलतियाँ:
• किरणों की स्थिति को चांदे पर गलत पढ़ना।
• कोणों के नाम में भ्रमित होना।
• डिग्री के मान गलत लिखना।
Exam Tips:
a) चांदे के चित्र को ज़ूम करके या ध्यान से देखकर माप पढ़ें।
b) आसन्न कोणों (adjacent angles) के संबंधों को समझें।
c) सभी मानों की पुनः जाँच करें।
Question 7: \( \angle PQR \), \( \angle PQS \) और \( \angle PQT \) के अंश माप ज्ञात कीजिए।
Answer:
\( \angle PQR \), \( \angle PQS \) और \( \angle PQT \) के अंश माप निम्नानुसार हैं:
\( \angle PQR = 45^\circ \)
\( \angle PQS = 100^\circ \)
\( \angle PQT = 152^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• बड़े कोण में छोटे कोण समाहित हो सकते हैं।
• चांदे के शून्य (0) से माप की शुरुआत की जाती है।
• सभी कोणों का शीर्ष एक ही बिंदु Q है।
आम गलतियाँ:
• गलत पैमाने से मान पढ़ना।
• कोणों के नाम आपस में मिला देना।
• सुदूर किरणों की स्थिति का गलत आकलन करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक कोण की दोनों भुजाओं (किरणों) को चांदे पर स्पष्ट रूप से देखें।
b) माप लिखते समय छोटे से बड़े क्रम का ध्यान रखें।
c) उत्तर साफ-सुथरे ढंग से लिखें।
Question 8: दिए गए निर्देशों के अनुसार पेपर क्राफ्ट बनाइए। अब कागज को पूरा खोलिए। मोड़े जाने पर प्राप्त निशानों पर रेखाएँ खींचिए और इस प्रकार बने कोणों को मापिए।
Answer:
चरण 1: जब हम वर्गाकार कागज को विकर्णतः मोड़ते हैं, तो हम नीचे के कोनों पर दो समकोण (\( 90^\circ \)) और शीर्ष पर एक \( 45^\circ \) का कोण बनाते हैं।
चरण 2: मोड़डने के बाद, त्रिभुज का आधार सीधा होता है, जिससे नीचे के कोनों पर \( 90^\circ \) के कोण बनते हैं, जबकि शीर्ष शीर्ष \( 45^\circ \) ही रहता है।
चरण 3: जब हम आधार को ऊपर की ओर मोड़ते हैं, तो उस कोने पर एक छोटा समकोण (\( 90^\circ \)) बनता है जहाँ आधार त्रिभुज से मिलता है।
चरण 4: कान बनाने के लिए किनारों को अंदर मोड़ड़ने पर शीर्ष के पास न्यून कोण बनते हैं, जो संभवतः \( 30^\circ \) से \( 45^\circ \) के बीच होते हैं।
चरण 5: जैसे-जैसे हम किनारों को और अधिक अंदर की ओर मोड़ते हैं, त्रिकोणीय कानों के कोण और अधिक तीक्ष्ण (sharp) हो सकते हैं, जिससे कानों के सिरों पर \( 30^\circ \) के करीब न्यून कोण बन जाते हैं।
चरण 6: ऊपर की ओर मोड़ से बने चेहरे की नोक पर एक और न्यून कोण बनता है, जो संभवतः \( 45^\circ \) के आसपास होता है।
चरण 7: अंतिम मोड़ नीचे के हिस्से को तीक्ष्ण बनाता है, जिससे आधार पर \( 90^\circ \) और कानों के पास \( 45^\circ \) से \( 60^\circ \) का कोण बना रहता है।
चरण 8: पूर्ण बने चेहरे में, हमारे पास कई कोण होंगे: कान न्यून कोण (लगभग \( 30^\circ \) से \( 45^\circ \)) बनाते हैं। ठुड्डी के पास का चेहरा एक अधिक कोण बनाता है, जो \( 120^\circ \) के करीब होता है। मोड़ की सटीकता के आधार पर चेहरे के किनारे लगभग \( 90^\circ \) से \( 120^\circ \) के होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• कागज़ मोड़ने से विभिन्न प्रकार के कोण (न्यून, सम, अधिक) स्वतः निर्मित होते हैं।
• कला और शिल्प (Arts and Crafts) के माध्यम से ज्यामिति को आसानी से समझा जा सकता है।
• मोड़ की रेखाएँ रेखाखंड और कोणों की भुजाओं का कार्य करती हैं।
आम गलतियाँ:
• निर्देशों का पालन ठीक से न करना।
• कोणों के अनुमान में बड़ी भूल करना।
• कागज़ को गलत तरीके से फाड़ना या काटना।
Exam Tips:
a) इस प्रकार की गतिविधियों का आनंद लें और प्रयोगात्मक रूप से सीखें।
b) चरणों को क्रमानुसार याद रखें।
c) कोणों के प्रकार (न्यून/अधिक) की पहचान सही करें।
Question 9: आकृति 2.21 (a) में बने त्रिभुज के तीनों कोणों को मापिए और संबंधित कोण के नीचे उसका माप लिखिए। तीनों मापों को जोड़िए। क्या प्राप्त होता है? इस प्रक्रिया का आकृति 2.21 (b) और (c) के लिए भी प्रयोग कीजिए। अन्य त्रिभुजों पर भी इस प्रक्रिया का प्रयोग कीजिए। फिर सामान्य तौर पर क्या होता है इसका अनुमान लगाइए। हम आगे की कक्षाओं में जानेंगे कि ऐसा क्यों हुआ।
Answer:
(a) में त्रिभुज के तीनों कोणों का योग: \( 45^\circ + 65^\circ + 70^\circ = 180^\circ \)
(b) में त्रिभुज के तीनों कोणों का योग: \( 56^\circ + 62^\circ + 62^\circ = 180^\circ \)
(c) में त्रिभुज के तीनों कोणों का योग: \( 30^\circ + 55^\circ + 95^\circ = 180^\circ \)
सामान्य अनुमान: किसी भी त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग हमेशा 180 डिग्री के बराबर होता है। यह यूक्लिडियन ज्यामिति में त्रिभुजों का एक मौलिक गुण है। हम विभिन्न प्रकार के त्रिभुजों (जैसे समद्विबाहु, विषमबाहु, समबाहु आदि) के साथ इसका परीक्षण कर सकते हैं और परिणाम हमेशा समान रहेगा: आंतरिक कोणों का योग \( 180^\circ \) होता है। यह गुण ज्यामिति में अत्यंत महत्वपूर्ण है और भविष्य के अध्ययन में अधिक जटिल आकृतियों और संबंधों को समझने का आधार बनता है।
मुख्य बिंदु:
• त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव \( 180^\circ \) (सरल कोण) होता है।
• यह त्रिभुज का एक सार्वभौमिक नियम है।
• चांदे से मापते समय छोटी-मोटी त्रुटियाँ हो सकती हैं, किंतु सैद्धांतिक योग \( 180^\circ \) ही होता है।
आम गलतियाँ:
• जोड़ने में गलती करना।
• चांदे से कोणों को गलत मापना।
• नियम को याद न रखना।
Exam Tips:
a) मान हमेशा \( 180^\circ \) के आसपास ही आएंगे, इस तथ्य को गांठ बांध लें।
b) तीनों कोणों के नाम लिखकर उन्हें जोड़ें।
c) निष्कर्ष को स्पष्ट शब्दों में लिखें।
Question 1: घड़ी में कोण –
a. घड़ी की सूईयाँ अलग-अलग समय पर भिन्न कोण बनाती हैं। 1 बजे सूईयों के बीच \( 30^\circ \) का कोण होता है। क्यों?
b. 2 बजे कोण कितना होगा? और 4 बजे? 6 बजे?
c. घड़ी की सूईयों द्वारा बने अन्य कोणों को ढूँढ़िए।
Answer:
a. घड़ी पर 12 संख्याएँ होती हैं जो 12 घंटों को दर्शाती हैं। 12 घंटों में तय किया गया कुल कोण \( 360^\circ \) होता है। इसलिए, दो क्रमागत संख्याओं के बीच का कोण = \( 360^\circ / 12 = 30^\circ \) । यही कारण है कि 1 बजे सूईयों के बीच का कोण \( 30^\circ \) होता है।
b. 2 बजे का कोण = \( 60^\circ \)
4 बजे का कोण = \( 120^\circ \)
6 बजे का कोण = \( 180^\circ \)
c. घड़ी की सूईयों द्वारा बनाए गए अन्य कोण: 3 बजे का कोण = \( 90^\circ \), 9 बजे का कोण = \( 270^\circ \), 5 बजे का कोण = \( 150^\circ \), 11 बजे का कोण = \( 330^\circ \)
मुख्य बिंदु:
• घड़ी एक वृत्त की तरह है जिसका कुल माप \( 360^\circ \) होता है।
• प्रत्येक घंटे के अंतराल पर \( 30^\circ \) का कोण बनता है।
• समय और कोण का गहरा संबंध है।
आम गलतियाँ:
• 1 घंटे का कोण \( 30^\circ \) निकालने में भाग गलत देना।
• प्रतिवर्ती कोण (reflex angle) को सामान्य कोण समझ लेना।
• संख्याओं की गिनती में भूल करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक घंटे के लिए \( 30^\circ \) से गुणा करने का नियम याद रखें।
b) घड़ी के चित्र की कल्पना करके कोण निकालें।
c) उत्तर में डिग्री का चिह्न अवश्य लगाएँ।
Question 2: एक दरवाजे का कोण- क्या ऐसा संभव है कि कोण का प्रयोग कर यह बताया जा सके कि दरवाजा कितना खुला है? कोण का शीर्ष और कोण की भुजाएँ क्या होंगी?
Answer:
हाँ, जब दरवाजा खुला हो तो उसके कोण को मापना संभव है। कोण का शीर्ष B है और इसकी भुजाएँ AB और BC हैं।
मुख्य बिंदु:
• दरवाजे का कब्जा (hinge) कोण का शीर्ष बिंदु होता है।
• दरवाजे की चौखट और खुला हुआ दरवाजा कोण की भुजाएँ बनाते हैं।
• दरवाजे के खुलने के फैलाव से कोण का माप तय होता है।
आम गलतियाँ:
• शीर्ष को गलत पहचानना।
• भुजाओं के नाम ठीक से न देना।
• यह सोचना कि खुले दरवाजे का कोण नहीं माप सकते।
Exam Tips:
a) दैनिक जीवन के उदाहरणों को ज्यामिति से जोड़कर समझें।
b) शीर्ष और भुजाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
c) संक्षिप्त और सटीक उत्तर दें।
Question 3: विद्या झूले पर अपना समय आनंद से बिता रही है। उसने ध्यान दिया कि जब उसने झूलना शुरू किया तो जितना बड़ा कोण है, उतनी ही अधिक गति वह झूले पर अर्जित कर रही है। लेकिन यहाँ कोण कहाँ है? क्या आप यहाँ पर किसी कोण को देख सकते हैं?
Answer:
कोण झूले की रस्सी और ऊर्ध्वाधर रेखा के बीच बनता है। इसे चित्र में दिखाया गया है।
मुख्य बिंदु:
• झूले की गति और उसके द्वारा बनाए गए कोण में सीधा संबंध होता है।
• ऊर्ध्वाधर (vertical) रेखा के साथ रस्सी का झुकाव कोण बनाता है।
• भौतिकी और गणित का यह एक सुंदर उदाहरण है।
आम गलतियाँ:
• कोण की स्थिति को गलत जगह मानना।
• ऊर्ध्वाधर रेखा को न समझ पाना।
• प्रश्न के मूल भाव को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) पार्क या झूले के उदाहरण को ध्यान में रखें।
b) कोण की दोनों भुजाओं (रस्सी और ऊर्ध्वाधर रेखा) को समझें।
c) उत्तर सरल शब्दों में लिखें।
Question 4: यहाँ, एक खिलौने के दोनों ओर तिरछे तख्ते (slanting slab) लगे हैं, जितना अधिक कोण या तख्ते का झुकाव होगा उतनी ही तेजी से गेंद लुढ़कती है। क्या कोणों का प्रयोग तख्तों के झुकाव के वर्णन में किया जा सकता है? प्रत्येक कोण की भुजाएँ क्या होंगी? कौन-सी भुजा दिखाई देगी और कौन-सी नहीं?
Answer:
हाँ, इस खिलौने में तख्तों के झुकाव का वर्णन करने के लिए कोणों का प्रयोग किया जा सकता है। प्रत्येक तख्ता एक झुका हुआ तल बनाता है और झुकाव का कोण (तख्ते और क्षैतिज सतह के बीच का कोण) यह निर्धारित करता है कि गेंद कितनी तेजी से नीचे लुढ़कती है। तख्ते के ढलान का कोण जितना बड़ा होगा, झुकाव उतना ही अधिक तीव्र होगा, जिससे गेंद तेजी से लुढ़केगी। कोण जितना छोटा होगा, ढलान उतनी ही धीमी होगी और गेंद उतनी ही धीरे लुढ़केगी। कोण की एक भुजा क्षैतिज सतह (खिलौने का आधार या कोई भी क्षैतिज तल जिससे तख्ता जुड़ा है) है। दूसरी भुजा स्वयं तिरछा तख्ता है। दिखाई देने वाली भुजा वह तिरछा तख्ता है जिसे हम चित्र में देख सकते हैं। अदृश्य भुजा क्षैतिज आधार है, जो चित्र में सीधे तौर पर दिखाई नहीं देती है, लेकिन इसे जमीन के समानांतर सतह के रूप में कल्पना की जा सकती है।
मुख्य बिंदु:
• तख्ते का ढलान कोण के माप पर निर्भर करता है।
• क्षैतिज सतह और तिरछे तल के बीच कोण बनता है।
• अधिक कोण या ढलान होने पर वस्तु तेजी से गति करती है।
आम गलतियाँ:
• अदृश्य भुजा (क्षैतिज आधार) को नजरअंदाज करना।
• झुकाव और कोण के संबंध को न समझना।
• उत्तर को अधूरा छोड़ देना।
Exam Tips:
a) ढलान और कोण के बीच के भौतिक नियम को समझें।
b) दिखाई देने वाली और अदृश्य भुजाओं को स्पष्ट करें।
c) उत्तर बिंदुवार या तार्किक पैराग्राफ में लिखें।
Question 5: नीचे दिए गए चित्रों का अवलोकन कीजिए जिनमें एक कीट एवं उसकी घुमायी गई स्थितियाँ दी गई हैं। क्या घूर्णन (घुमाव) की मात्रा बताने के लिए कोणों का उपयोग किया जा सकता है? यदि हाँ, तो कैसे? कोण का शीर्षबिंदु एवं उसकी भुजाएँ कौन-सी होंगी?
Answer:
हाँ, एक केंद्रीय बिंदु के चारों ओर घुमाव को मापकर, एक कीट और उसके घूर्णित संस्करण के बीच के घूर्णन का वर्णन करने के लिए कोणों का उपयोग किया जा सकता है। कोण का शीर्ष कीट का केंद्र है, जबकि भुजाएँ केंद्र से शरीर पर एक संदर्भ बिंदु तक जाने वाली रेखाएँ हैं, जो घूर्णन से पहले और बाद की स्थिति दर्शाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि घोंघे के सिर की नोक या लेडीबग के एंटीना को संदर्भ बिंदुओं के रूप में उपयोग किया जाता है, तो कीट के घूमने से पहले और बाद में केंद्र से इन रेखाओं के बीच का कोण घूर्णन की मात्रा (डिग्री) को दर्शाता है। यह कोण घूर्णन को परिमाणित करता है, जैसे कि उल्टी स्थिति के लिए 180 डिग्री।
मुख्य बिंदु:
• किसी वस्तु के घूमने (rotation) को कोणों के माध्यम से मापा जाता है।
• घूर्णन का केंद्र कोण का शीर्ष बनता है।
• प्रारंभिक और अंतिम स्थितियाँ कोण की भुजाएँ निर्धारित करती हैं।
आम गलतियाँ:
• घूर्णन और कोण के संबंध को न समझ पाना।
• शीर्ष और भुजाओं की गलत पहचान करना।
• डिग्री के मान का अनुमान न लगा पाना।
Exam Tips:
a) घूर्णन को हमेशा एक वृत्ताकार घुमाव के रूप में समझें।
b) संदर्भ बिंदु (reference point) की अवधारणा को स्पष्ट रखें।
c) पूर्ण घूर्णन 360° और अर्ध घूर्णन 180° होता है, इसे याद रखें।
Question 1: आकृति 2.23 में दर्शाए सभी संभव कोणों की सूची बनाइए। क्या आप उन को ढूँढ पाए। अब सभी कोणों के माप का अनुमान लगाइए। इसके पश्चात चांदे की सहायता से कोणों का माप देखिए। अपनी सभी संख्याओं (डिग्री माप) को एक सारणी में अंकित कीजिए। देखिए आपके अनुमानित उत्तर सही माप के कितने समीप हैं।
Answer:
कोणों की सूची: \( \angle PAC \), \( \angle APD \), \( \angle DPS \), \( \angle LPR \), \( \angle PLS \), \( \angle ARP \), \( \angle PRS \), \( \angle RSL \) और \( \angle ALC \)。
अब, आइए अंश (डिग्री) में मापों का अनुमान लगाएं:
\( \angle PAC: 120^\circ \), \( \angle APD: 90^\circ \), \( \angle DPS: 120^\circ \), \( \angle LPR: 60^\circ \), \( \angle PLS: 90^\circ \), \( \angle ARP: 30^\circ \), \( \angle PRS: 150^\circ \), \( \angle RSL: 90^\circ \), \( \angle ALC: 120^\circ \)。
वास्तविक माप चांदे से मापने पर:
\( \angle PAC = 115^\circ \), \( \angle APD = 50^\circ \), \( \angle DPS = 60^\circ \), \( \angle LPR = 110^\circ \), \( \angle PLS = 80^\circ \), \( \angle ARP = 360^\circ \), \( \angle PRS = 115^\circ \), \( \angle RSL = 75^\circ \), \( \angle ALC = 50^\circ \)。
मुख्य बिंदु:
• जटिल आकृतियों में कई कोण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
• पहले अनुमान लगाना और फिर चांदे से मापना गणितीय कौशल को बढ़ाता है।
• सारणीबद्ध रूप में डेटा प्रस्तुत करने से तुलना आसान हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• कोणों के नाम लिखने में भूल करना।
• अनुमान और वास्तविक माप में बहुत अधिक अंतर न देखना।
• सारणी के कॉलम गलत भरना।
Exam Tips:
a) सभी कोणों को एक-एक करके पहचानें।
b) अनुमान तार्किक रूप से दें (जैसे समकोण के पास है तो 90° के करीब)।
c) माप को सारणी में साफ-सुथरा दर्शाएँ।
Question 2: चांदे की सहायता से निम्न डिग्री माप के कोण बनाइए—
a. \( 110^\circ \) b. \( 40^\circ \) c. \( 75^\circ \) d. \( 112^\circ \) e. \( 134^\circ \)}
Answer:
चांदे की सहायता से दिए गए माप के कोण बनाने के चरण:
1. एक किरण खींचिए।
2. चांदे के केंद्र को किरण के प्रारंभिक बिंदु पर रखिए।
3. सही पैमाने पर वांछित डिग्री (जैसे \( 110^\circ, 40^\circ, 75^\circ, 112^\circ, 134^\circ \)) पर बिंदु लगाइए।
4. प्रारंभिक बिंदु से उस बिंदु को मिलाते हुए दूसरी किरण खींचिए।
मुख्य बिंदु:
• कोण बनाने के लिए स्केल और चांदे का सटीक प्रयोग आवश्यक है।
• 90° से कम न्यून कोण और 90° से अधिक अधिक कोण होते हैं।
• किरण के दोनों अंत बिंदुओं पर तीर का ध्यान रखें।
आम गलतियाँ:
• गलत पैमाना पढ़कर कोण बनाना।
• चांदे को सही स्थिति में न रखना।
• रेखाओं को टेढ़ा खींचना।
Exam Tips:
a) कोण बनाने के बाद एक बार चांदे से उसकी पुनः जाँच अवश्य करें।
b) पेंसिल हमेशा नुकीली रखें।
c) प्रत्येक कोण के नीचे उसका माप स्पष्ट लिखें।
Question 3: एक कोण बनाइए जिसका डिग्री माप नीचे दिए गए कोण के समान हो। इस कोण को बनाने में प्रयुक्त सभी चरणों को भी लिखिए।
Answer:
दिए गए कोण के समान कोण बनाना:
रचना के चरण:
• एक किरण HJ खींचिए जो कोण की एक भुजा के रूप में कार्य करेगी।
• किरण HJ पर एक बिंदु H अंकित कीजिए। यह बिंदु कोण का शीर्ष होगा।
• चांदे के केंद्र बिंदु को H पर रखें और चांदे की आधार रेखा को किरण HJ के साथ संरेखित करें।
• चांदे का उपयोग करते हुए, कोण के लिए आवश्यक डिग्री माप पर एक बिंदु अंकित करें (जैसा कि दी गई आकृति में है)।
• चांदे को हटा दें और शीर्ष H से अंकित बिंदु से होकर दूसरी किरण HI खींचिए। यह किरण कोण की दूसरी भुजा बनाएगी।
• नई किरण के अंतिम बिंदु को I के रूप में अंकित करें, जिससे कोण \( \angle IHJ \) की रचना पूरी हो जाएगी।
मुख्य बिंदु:
• किसी दिए गए कोण के माप को मापकर हूबहू वैसा ही दूसरा कोण बनाया जा सकता है।
• रचना के चरण गणित में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
• चांदा और स्केल इस प्रक्रिया के मुख्य उपकरण हैं।
आम गलतियाँ:
• चरणों को क्रम से न लिखना।
• माप लेते समय चांदे को हिला देना।
• नामाकन गलत करना।
Exam Tips:
a) रचना के चरणों को बिंदुवार (1, 2, 3...) लिखें।
b) नामाकन प्रश्न के अनुसार ही करें।
c) चित्र और रचना के पद दोनों साथ-साथ प्रस्तुत करें।
Question 1: नीचे दिए गए प्रत्येक ग्रिड में, बिंदु A को ग्रिड के दूसरे बिंदुओं से एक सरल रेखा से इस प्रकार मिलान कीजिए कि हमें –
a. एक न्यून कोण प्राप्त हो।
b. एक अधिक कोण प्राप्त हो।
c. एक प्रतिवर्ती कोण प्राप्त हो।
Answer:
ग्रिड पर बिंदु A से अन्य बिंदुओं को इस प्रकार मिलाया जाता है कि:
• न्यून कोण के लिए: रेखाओं के बीच का झुकाव 90° से कम हो (नुकीला आकार)।
• अधिक कोण के लिए: रेखाओं के बीच का झुकाव 90° से अधिक और 180° से कम हो (फैला हुआ आकार)।
• प्रतिवर्ती कोण के लिए: कोण का बाहरी हिस्सा 180° से अधिक और 360° से कम हो।
मुख्य बिंदु:
• ग्रिड की आड़ी-तिरछी रेखाओं से विभिन्न प्रकार के कोण बनाए जा सकते हैं।
• न्यून, अधिक और प्रतिवर्ती कोणों की परिभाषाओं का प्रयोग करें।
• चाप (arc) द्वारा सही कोण को दर्शाया जाता है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिवर्ती कोण को अंदर की तरफ से माप लेना।
• गलत बिंदुओं को जोड़ना।
• कोण के प्रकार में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) ग्रिड लाइनों को ध्यान से गिनकर रेखाएँ खींचें।
b) चाप लगाकर स्पष्ट करें कि कौन-सा कोण दर्शाया गया है।
c) प्रकार की सही पहचान रखें।
Question 2: चांदे की सहायता से प्रत्येक कोण का माप निकालिए। प्रत्येक कोण को न्यून कोण, अधिक कोण, समकोण या प्रतिवर्ती कोण में वर्गीकृत कीजिए—
a. \( \angle PTR \) b. \( \angle PTQ \) c. \( \angle PTW \) d. \( \angle WTP \)}
Answer:
चांदे से मापने और वर्गीकरण करने पर:
a. \( \angle PTR = 30^\circ \) : न्यून कोण
b. \( \angle PTQ = 60^\circ \) : न्यून कोण
c. \( \angle PTW = 112^\circ \) : अधिक कोण
d. \( \angle WTP = 248^\circ \) : प्रतिवर्ती कोण
मुख्य बिंदु:
• 0° से 90° तक न्यून कोण, ठीक 90° समकोण, 90° से 180° अधिक कोण और 180° से 360° प्रतिवर्ती कोण होता है।
• चांदे को सही ढंग से रखकर मान पढ़ा जाता है।
• प्रतिवर्ती कोण के लिए बाहरी माप या \( 360^\circ - \text{आंतरिक कोण} \) का सूत्र प्रयोग होता है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिवर्ती कोण को आंतरिक कोण समझ लेना।
• गलत पैमाना पढ़ना।
• वर्गीकरण गलत लिखना।
Exam Tips:
a) माप के साथ उसका प्रकार (न्यून/अधिक/प्रतिवर्ती) अनिवार्य रूप से लिखें।
b) चांदे का पाठ्यांक (reading) सावधानी से लें।
c) प्रत्येक उप-भाग का उत्तर स्पष्ट दें।
Question 1: निम्न अंश माप वाले कोणों को बनाएँ – a. \( 140^\circ \) b. \( 82^\circ \) c. \( 195^\circ \) d. \( 70^\circ \) e. \( 35^\circ \)}
Answer:
चांदे की सहायता से दिए गए माप के कोण इस प्रकार बनाए जाते हैं:
• \( 140^\circ \): यह एक अधिक कोण है, इसे 90° से आगे के पैमाने से बनाया जाता है।
• \( 82^\circ \): यह एक न्यून कोण है, इसे 90° से कम के पैमाने से बनाया जाता है।
• \( 195^\circ \): यह एक प्रतिवर्ती कोण है, इसे 180° से अधिक होने के कारण पूरे चांदे या \( 180^\circ + 15^\circ \) की विधि से बनाया जाता है।
• \( 70^\circ \) और \( 35^\circ \): ये दोनों न्यून कोण हैं जिन्हें मानक विधि से बनाया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• 180° से बड़े कोण (प्रतिवर्ती कोण) को बनाने के लिए सरल रेखा खींचकर उसमें अतिरिक्त कोण जोड़ा जाता है।
• प्रत्येक कोण के लिए प्रारंभिक किरण खींचना आवश्यक है।
• चांदे के केंद्र का सही प्रयोग करें।
आम गलतियाँ:
• 180° से बड़ा कोण साधारण चांदे पर सीधे न बना पाना।
• गलत पैमाने का चयन करना।
• किरण के तीर के निशान भूल जाना।
Exam Tips:
a) प्रतिवर्ती कोण बनाते समय विशेष सावधानी बरतें।
b) सभी कोणों को नाम दें।
c) पेंसिल से स्पष्ट रेखाएँ खींचें।
Question 2: प्रत्येक कोण के माप का अनुमान लगाइए और फिर चांदे से मापिए—
इन कोणों को न्यून कोण, अधिक कोण, समकोण और प्रतिवर्ती कोणों में वर्गीकृत कीजिए।
Answer:
कोणों का मापन और वर्गीकरण:
a. \( 45^\circ \) : न्यून कोण
b. \( 165^\circ \) : प्रतिवर्ती कोण (या अधिक कोण, चित्रानुसार)
c. \( 120^\circ \) : अधिक कोण
d. \( 32^\circ \) : न्यून कोण
e. \( 90^\circ \) : समकोण
f. \( 169^\circ \) : प्रतिवर्ती कोण
मुख्य बिंदु:
• पहले आँख से देखकर अनुमान लगाना और फिर चांदे से उसकी पुष्टि करना महत्वपूर्ण है।
• माप के आधार पर सही वर्गीकरण करना चाहिए।
• 90° समकोण का मानक पैमाना है।
आम गलतियाँ:
• अनुमान और वास्तविक माप में बहुत बड़ा अंतर रखना।
• कोण के प्रकार को गलत नाम देना।
• चांदा उल्टा रखना।
Exam Tips:
a) पहले अनुमानित मान लिखें और फिर वास्तविक माप लिखें।
b) वर्गीकरण के नियम याद रखें।
c) उत्तर को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करें।
Question 3: एक आकृति बनाइए जिसमें तीन न्यून कोण, एक समकोण और दो अधिक कोण हों।
Answer:
तीन न्यून कोण, एक समकोण और दो अधिक कोण वाली एक बहुभुज (polygon) या संयुक्त आकृति बनाई जा सकती है, जिसमें विभिन्न शीर्षों पर ये सभी कोण स्पष्ट रूप से दिखाई दें। (जैसे एक विशिष्ट रूप से कटी हुई ज्यामितीय आकृति)।
मुख्य बिंदु:
• एक ही आकृति में विभिन्न प्रकार के कोण हो सकते हैं।
• आकृति बनाते समय प्रत्येक कोण के माप का ध्यान रखना चाहिए।
• न्यून कोण < 90°, समकोण = 90°, अधिक कोण > 90°.
आम गलतियाँ:
• आवश्यक कोणों की संख्या पूरी न करना।
• गलत माप के कोण बना देना।
• कोणों को स्पष्ट रूप से चिन्हित न करना।
Exam Tips:
a) आकृति बनाने से पहले सभी कोणों की सूची बना लें।
b) चाप लगाकर प्रत्येक कोण को दर्शाएँ।
c) साफ-सुथरा चित्र बनाएँ।
Question 4: अक्षर M को इस प्रकार बनाइए कि दोनों ओर के कोण \( 40^\circ \) के हों और मध्य में कोण \( 60^\circ \) का हो।
Answer:
अक्षर ‘M’ इस प्रकार बनाइए कि दोनों ओर के कोण \( 40^\circ - 40^\circ \) हों और बीच का कोण \( 60^\circ \) हो।
मुख्य बिंदु:
• ज्यामितीय आकृतियों और अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को कोणों के साथ जोड़ा जा सकता है।
• चांदे की सहायता से सटीक कोण (\( 40^\circ \) और \( 60^\circ \)) बनाए जाते हैं।
• सममित (symmetric) आकृतियाँ बनाना आसान होता है।
आम गलतियाँ:
• कोणों के माप गलत ले लेना।
• M अक्षर के आकार को बिगाड़ देना।
• चांदे का प्रयोग सही ढंग से न करना।
Exam Tips:
a) स्केल और चांदे का सही संयोजन प्रयोग करें।
b) मानों को चित्र में स्पष्ट लिखें।
c) निर्देशानुसार ही कोणों के मान सेट करें।
Question 5: अक्षर Y को इस प्रकार बनाइए कि \( 150^\circ \), \( 60^\circ \) और \( 150^\circ \) के तीन कोण बनें।
Answer:
अक्षर ‘Y’ इस प्रकार बनाइए कि बनने वाले तीन कोण \( 150^\circ \), \( 60^\circ \) और \( 150^\circ \) हों।
मुख्य बिंदु:
• Y अक्षर के शीर्ष पर और नीचे मिलने वाले बिंदुओं पर अलग-अलग कोण बनते हैं।
• अधिक कोण (\( 150^\circ \)) और न्यून कोण (\( 60^\circ \)) का संयोजन इसमें होता है।
• रेखाओं का झुकाव माप के अनुसार होना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• कोणों के मान गलत जगह दर्शाना।
• Y के आकार को सही अनुपात में न बनाना।
• योग संबंधी नियमों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) चांदे से मापकर ही रेखाएँ खींचें।
b) प्रत्येक कोण के पास उसका डिग्री मान लिखें।
c) चित्र को सुंदर और स्पष्ट बनाएँ।
Question 6: अशोक चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं। दो संलग्न तीलियों के बीच कितने अंश माप का कोण होगा? दो तीलियों के बीच सबसे बड़ा न्यून कोण क्या होगा?
Answer:
अशोक चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं, जो समान दूरी पर स्थित होती हैं। दो संलग्न तीलियों के बीच कोण का अंश माप ज्ञात करने के लिए, हम वृत्त के कुल अंश (\( 360^\circ \)) को तीलियों की संख्या से विभाजित कर सकते हैं।
दो तीलियों के बीच का कोण = \( 360^\circ / 24 = 15^\circ \)
सबसे बड़ा न्यून कोण उन दो तीलियों के बीच का कोण है जो सबसे पास-पास होती हैं। चूंकि किसी भी दो संलग्न तीलियों के बीच का कोण \( 15^\circ \) है, इसलिए यही उनके बीच बनने वाला सबसे बड़ा न्यून कोण है।
मुख्य बिंदु:
• वृत्त का कुल माप \( 360^\circ \) होता है।
• बराबर भागों में बांटने के लिए कुल माप को भागों की संख्या से भाग दिया जाता है।
• अशोक चक्र की दो पास की तीलियों के बीच \( 15^\circ \) का कोण होता है।
आम गलतियाँ:
• भाग देने में गलती करना (\( 360 \) को \( 24 \) से भाग देना)।
• न्यून कोण की परिभाषा भूल जाना।
• कुल अंश \( 360^\circ \) याद न रखना।
Exam Tips:
a) सूत्र याद रखें: \( \text{कोण} = 360^\circ \div n \) ।
b) गणना के चरण साफ-साफ लिखें।
c) इकाई (डिग्री) लगाना न भूलें।
Question 7: पहेली— मैं एक न्यून कोण हूँ। यदि आप मेरे माप को दुगुना करते हो तो आपको न्यून कोण ही प्राप्त होता है। यदि आप मेरे माप को तीन गुना करते हो तो पुनः न्यून कोण प्राप्त होगा। यदि आप मेरे माप को चार गुना करते हो तो भी पुनः न्यून कोण ही प्राप्त होगा पर यदि आप मेरे माप को पाँच से गुना करते हो तो एक अधिक कोण प्राप्त होगा। मेरे कोणों के संभावित माप क्या होंगे?
Answer:
चरण-दर-चरण गणनाएँ:
मान लीजिए कोण \( \theta \) है।
कोण को दुगुना करने पर भी न्यून कोण बने— \( 2 \times \theta < 90^\circ \Rightarrow \theta < 45^\circ \)
कोण को तीन गुना करने पर भी न्यून कोण बने— \( 3 \times \theta < 90^\circ \Rightarrow \theta < 30^\circ \)
कोण को चार गुना करने पर भी न्यून कोण बने— \( 4 \times \theta < 90^\circ \Rightarrow \theta < 22.5^\circ \)
कोण को 5 से गुणा करने पर अधिक कोण प्राप्त हो— \( 5 \times \theta > 90^\circ \Rightarrow \theta > 18^\circ \)
अतः कोण \( \theta \) के संभावित मान \( 18^\circ \) और \( 22.5^\circ \) के बीच होंगे। इसलिए, कोण इस सीमा में कोई भी मान हो सकता है, जैसे \( 19^\circ, 20^\circ, 21^\circ \) या \( 22^\circ \) ।
मुख्य बिंदु:
• इस प्रकार की पहेलियाँ असमानताओं (inequalities) पर आधारित होती हैं।
• न्यून कोण हमेशा 90° से कम होता है और अधिक कोण 90° से अधिक होता है।
• तार्किक चरणों से सही सीमा निर्धारित की जाती है।
आम गलतियाँ:
• गुणा करते समय असमिका (inequality) के नियमों का पालन न करना।
• सही सीमा (range) न निकाल पाना।
• केवल एक ही मान लिखकर छोड़ देना।
Exam Tips:
a) पहेली वाले प्रश्नों को समीकरण या असमिका बनाकर हल करें।
b) प्रत्येक शर्त (2 गुना, 3 गुना आदि) को अलग से जांचें।
c) अंतिम उत्तर सीमा (range) के रूप में दें।
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