Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 History Chapter 04 तीन वर्ग
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Question 1: फ्रांस के प्रारंभिक सामंतों के दो लक्षणों का वर्णन कीजिए।
Answer:
फ्रांस में सामंतवाद का विकास मुख्य रूप से कृषि और भूमि पर आधारित था, जिसमें कृषक अपने खेतों के साथ-साथ सामंत के खेतों पर भी कार्य करते थे। प्रारंभिक सामंतवाद के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित थे: प्रथम, कृषक लॉर्ड को श्रम सेवा प्रदान करते थे और बदले में वे उन्हें सैनिक सुरक्षा प्रदान करते थे। फ्रांसीसी समाज मुख्य रूप से तीन वर्गों में विभाजित था - पादरी, अभिजात वर्ग और कृषक वर्ग। द्वितीय, सामंत तथा राजाओं के अच्छे संबंध होते थे और सामंतों की कई श्रेणियाँ थीं जैसे- ड्यूक या अर्ल, बैरन तथा नाइट्स।
मुख्य बिंदु:
• कृषक लॉर्ड को कृषि और श्रम सेवा देते थे और बदले में सुरक्षा प्राप्त करते थे।
• फ्रांसीसी समाज तीन स्पष्ट वर्गों (पादरी, अभिजात और कृषक) में विभाजित था।
• राजा और सामंतों के बीच परस्पर सहयोग और पदानुक्रम की व्यवस्था थी।
आम गलतियाँ:
• सामंती व्यवस्था में केवल राजा को सर्वेसर्वा मान लेना और सामंतों की भूमिका भूल जाना।
• श्रम सेवा और सैनिक सुरक्षा के आपसी आदान-प्रदान को स्पष्ट न करना।
• तीनों वर्गों के सही सामाजिक क्रम को न लिख पाना।
Exam Tips:
a) प्रारंभिक सामंतवाद के मुख्य स्तंभों (श्रम, सुरक्षा और भूमि) को उत्तर में अवश्य दर्शाएँ।
b) तीनों वर्गों का वर्गीकरण स्पष्ट रूप से लिखें ताकि उत्तर प्रभावशाली लगे।
c) मुख्य बिंदुओं को बुलेट पॉइंट्स में लिखने से परीक्षा में अच्छे अंक मिलते हैं।
Question 2: जनसंख्या के स्तर में होने वाले लंबी- अवधि के परिवर्तनों ने किस प्रकार की यूरोप की अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित किया?
Answer:
कृषि में विस्तार के साथ ही उससे संबद्ध तीन क्षेत्रों - जनसंख्या, व्यापार तथा नगरों का विस्तार हुआ। यूरोप की तत्कालीन जनसंख्या जो 1000 ई. में लगभग 420 लाख थी, 1200 ई. में बढ़कर 620 लाख तथा 1300 ई. में बढ़कर 730 लाख हो गई। अच्छी किस्म के आहार की वजह से लोगों की जीवन अवधि बढ़ गई। तेरहवीं सदी तक एक औसत यूरोपीय आठवीं सदी की अपेक्षा दस वर्ष अधिक जीवन जी सकता था। पुरुषों तथा बालिकाओं की जीवन अवधि कम होती थी क्योंकि पुरुषों को बेहतर भोजन मिलता था। 11वीं कृषि का विस्तार हुआ तथा वह अधिक जनसंख्या का भार सहने में सक्षम हुई तो नगरों की संख्या में फिर से वृद्धि होने लगी। नगरों में लोग, सेवा के बजाय लॉर्डो को, जिनकी भूमि पर वे बसे थे, उन्हें कर देने लगे। नगरों के कृषक परिवारों के जवान सदस्यों को वैधानिक कार्य तथा लॉर्ड के नियंत्रण से मुक्ति की अधिक संभावनाएँ प्रदान की गईं। 13वीं शताब्दी के अंत तक पिछले 300 वर्षों में उत्तरी यूरोप में तेज ग्रीष्म ऋतु का स्थान तीव्र शीत ऋतु ने ले लिया। फलस्वरूप पैदावार की अवधि कम हो गई तथा ऊँची भूमि पर फसल उगाना कठिन हो गया। ऑस्ट्रिया तथा सर्बिया की चाँदी की खानों के उत्पादन में कमी के कारण धातु में कमी आई तथा इससे व्यापार प्रभावित हुआ। इसके अतिरिक्त, 1347 तथा 1350 के मध्य लोग प्लेग जैसी महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए। आधुनिक आकलन के आधार पर यूरोप की आबादी का करीब 20 प्रतिशत भाग इस दौरान काल-कवलित हो गया जबकि कुछ स्थानों पर मरने वालों की संख्या वहाँ की जनसंख्या के 40 प्रतिशत तक थी। इस प्रकार जनसंख्या में परिवर्तनों के परिणामस्वरूप यूरोप की अर्थव्यवस्था तथा तत्कालीन समाज प्रभावित हुआ।
मुख्य बिंदु:
• जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि विस्तार, व्यापार और नए नगरों का तेजी से विकास हुआ।
• जलवायु परिवर्तन और प्लेग जैसी महामारियों के कारण 14वीं शताब्दी में अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा।
• नगरों के विकास से कृषकों को लॉर्ड के नियंत्रण से मुक्ति और स्वतंत्रता के नए अवसर मिले।
आम गलतियाँ:
• केवल जनसंख्या के सकारात्मक पक्षों को लिखना और नकारात्मक पक्षों (महामारी, जलवायु) को छोड़ देना।
• विभिन्न शताब्दियों के जनसंख्या आँकड़ों को आपस में मिला देना।
• नगरों के विकास और कृषकों की स्वतंत्रता के संबंध को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में कृषि, जलवायु और महामारी के प्रभावों को कालक्रम के अनुसार समझाएँ।
b) जनसंख्या के आँकड़ों (जैसे 1000 ई. से 1300 ई. तक की वृद्धि) को सटीक रूप से याद रखें।
c) अर्थव्यवस्था और समाज दोनों पर पड़े प्रभावों को अलग-अलग शीर्षकों या पैराग्राफ में लिखें।
Question 3: नाइट एक अलग वर्ग क्यों बने और उनका पतन कब हुआ?
Answer:
9वीं सदी से, यूरोप में स्थानीय युद्ध सामान्यतः होते रहते थे। शौकिया कृषक-सैनिक पर्याप्त नहीं थे तथा कुशल अश्वसेना की आवश्यकता थी। इसने एक नए वर्ग को बढ़ावा दिया जो नाइट्स कहलाते थे। वे लॉर्ड से उसी प्रकार संबद्ध थे जिस प्रकार लॉर्ड राजा से संबद्ध था। लॉर्ड ने नाइट को भूमि का एक भाग (जिसे फीफ कहा गया) दिया तथा उसकी रक्षा करने का वचन दिया। फ़्रीफ को उत्तराधिकार में पाया जा सकता था। यह 1000-2000 एकड़ या उससे अधिक में फैली हुई हो सकती थी जिसमें नाइट तथा उसके परिवार के लिए एक पनचक्की व मदिरा संपीडक के अतिरिक्त, उसके व उसके परिवार के लिए घर, चर्च तथा उस पर निर्भर व्यक्तियों के रहने की व्यवस्था सम्मिलित थी। सामंती मेनरि की तरह, फ़्रीफ की भूमि को कृषक जोतते थे। बदले में, नाइहर अपने लॉर्ड को एक निश्चित रकम देता था तथा युद्ध में उसकी तरफ़ से लड़ने का वचन देता था। अपनी सैन्य योग्यता को बनाए रखने के लिए, नाइट अपना समय बाड़ बनाने या घेराबंदी करने एवं पुतलों से रणकौशल तथा अपने बचाव का अभ्यास करने में निकालते थे। नाइट अपनी सेनाएँ अन्य लॉर्डों को भी दे सकता था पर उसकी सर्वप्रथम निष्ठा अपने लॉर्ड के लिए ही होती थी। बारहवीं सदी से गायक फ्रांस के मेनरों में वीर राजाओं तथा नाइट्स की वीरता की कहानियाँ, गीतों के रूप में सुनाते हुए घूमते रहते जो जो अंशतः ऐतिहासिक और अंशतः काल्पनिक होती थी। उस काल में जब बहुत ज्यादा संख्या में पढ़े-लिखे लोग नहीं थे तथा पांडुलिपियाँ भी अधिक नहीं थी, घुमक्कड़ चारण बहुत लोकप्रिय थे। अनेक मेनूर भवनों की मुख्य कक्ष के ऊपर एक संकरा छज्जा होता था जहाँ मेनूर के भोजन के लिए एक होते थे। यह एक गायक दीर्घा होती थी जो संगीतज्ञों द्वारा अभिजात वर्ग के लोगों का भोजन करते समय मनोरंजन करने के लिए बनी थी।
मुख्य बिंदु:
• कुशल अश्वसेना और स्थानीय युद्धों की आवश्यकताओं के कारण 'नाइट' नामक विशिष्ट योद्धा वर्ग का उदय हुआ।
• लॉर्ड नाइट्स को भूमि का टुकड़ा (फीफ) देते थे जिसके बदले वे सैन्य सेवा प्रदान करते थे।
• घुमक्कड़ चारण और गायक इनकी वीरता की कहानियाँ गाकर समाज में इनका यश फैलाते थे।
आम गलतियाँ:
• नाइट्स और सामान्य कृषक-सैनिकों के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• 'फीफ' (Feief) की अवधारणा और लॉर्ड के साथ उनके संबंधों को गलत लिखना।
• सांस्कृतिक पहलुओं (जैसे गायक दीर्घा और चारण) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) नाइट्स के उद्भव के कारणों में युद्ध की बदलती प्रकृति और अश्वसेना की जरूरत को मुख्य रूप से बताएं।
b) 'फीफ' शब्द का अर्थ और उसका सामंती व्यवस्था में महत्व अवश्य स्पष्ट करें।
c) उत्तर को रोचक बनाने के लिए उनके प्रशिक्षण और जीवनशैली का संक्षिप्त उल्लेख करें।
Question 4: मध्यकालीन मठों का क्या कार्य था?
Answer:
मठों का मुख्य कार्य धार्मिक प्रचार-प्रसार करना था। मठ ने कला के विकास में भी योगदान दिया। मध्यकाल में चर्च के अतिरिक्त धार्मिक गतिविधियों का केंद्र मठ भी थे। मठ आबादी से दूर स्थापित थे। मठों में भिक्षु रहा करते थे। वे प्रार्थना करते, अध्ययन करते तथा कृषि का भी कुछ कार्य करते रहते थे। चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों तक मठवाद के महत्त्व, उद्देश्यों के बारे में कुछ शंकाएँ व्यक्त की जाने लगीं। मठों के भिक्षुओं का मुख्य कार्य ईश्वर की आराधना करना और जनसाधारण की चर्चा की सिद्धांतों के विषय में समझाना था। वे जनसामान्य के नैतिक जीवन को ऊँचा उठाने का कार्य करते थे।
मुख्य बिंदु:
• मठ धार्मिक गतिविधियों, प्रार्थना और ईश्वर की आराधना के मुख्य केंद्र थे।
• भिक्षु एकांत में रहकर अध्ययन, प्रार्थना और कृषि कार्य करते थे।
• मठों ने जनसामान्य के नैतिक जीवन को सुधारने और कला के विकास में योगदान दिया।
आम गलतियाँ:
• मठों को केवल रहने का स्थान समझना और उनके धार्मिक व सामाजिक कार्यों को भूल जाना।
• चर्च और मठ के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• भिक्षुओं के दैनिक कार्यों (कृषि, अध्ययन, प्रार्थना) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) मठों की स्थापना के उद्देश्य और समाज पर उनके प्रभाव को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) भिक्षुओं की जीवनशैली और उनके धार्मिक दायित्वों को उत्तर में शामिल करें।
c) मध्यकालीन यूरोप में चर्च और मठों की स्थिति का तुलनात्मक दृष्टिकोण रखें।
Question 5: मध्यकालीन फ्रांस के नगर में एक शिल्पकार के एक दिन की जीवन की कल्पना कीजिए और इसका वर्णन कीजिए।
Answer:
मध्यकालीन फ्रांस के नगर में एक शिल्पकार का एक दिन का जीवन कठिन और व्यस्त होता था। मध्यकालीन फ्रांस में शिल्प का विकास हो गया था तथा मूर्तिकार, कसीदाकारी करने वाले, पत्थर पर डिज़ाइन बनाने वाले कहीं भी देखे जा सकते थे। पत्थर पर काम करने वाले शिल्पकार की ही कल्पना करते हैं। वह पत्थर को अपने सामने लाता है। उसको इधर-उधर देखकर उचित तरीके से रखता है। पुनः वह अपने औजार का बॉक्स खोलता है। वह एक-एक करके उन्हें निकालता है तथा साफ़ करता है। पत्थर को तोड़ने के लिए हाथ में हथौड़ी लेता है। उसे ढोकाता है तथा उसके हथौड़ी को ठीक करता है। इसके बाद छेनी को पत्थर पर घिसकर तेज़ करता है। पत्थर पर डिज़ाइन साँचे की मदद से चाक से बना लेता है। फिर पिचकारी के कार्य में जुट जाता है हथौड़ी से छेनी को कभी-कभी तेज मारता है। बीच-बीच में मनोरंजन के लिए गाना गुनगुनाता रहता है या सिगार पी लेता है। शाम होते-होते भी शिल्पकार के एक छोटे भाग को खूबसूरत डिज़ाइन का रूप दे देता है। इसके पश्चात वह काम बंद करके सामान को सही जगह रखकर प्रसन्न होकर चला जाता है।
मुख्य बिंदु:
• मध्यकालीन शिल्पकार अपने दिन की शुरुआत औजारों की देखभाल और सामग्री व्यवस्थित करने से करते थे।
• पत्थर तराशने, कसीदाकारी और मूर्तिकला जैसे शिल्प नगरों में अत्यंत विकसित थे।
• शिल्पकार कड़े परिश्रम के साथ-साथ अपने काम के बीच छोटे मनोरंजन का आनंद भी लेते थे।
आम गलतियाँ:
• शिल्पकार के दैनिक श्रम और उसकी तकनीकी प्रक्रिया (जैसे औजार तैयार करना) का वर्णन न करना।
• केवल सैद्धांतिक बातें लिखना और व्यावहारिक जीवन की कल्पना न कर पाना।
• नगरों के परिवेश और शिल्प गतिविधियों के आपसी संबंध को न दर्शाना।
Exam Tips:
a) इस प्रकार के काल्पनिक प्रश्नों में एक यथार्थवादी और सजीव दिनचर्या का वर्णन करें।
b) शिल्पकार के औजारों और उसके कार्य करने के तरीकों का विस्तार से उल्लेख करें।
c) उत्तर को पैराग्राफ या क्रमबद्ध चरणों में लिखकर आकर्षक बनाएँ।
Question 6: फ्रांस के सर्फ और रोम के दास के जीवन की दशा की तुलना कीजिए।
Answer:
फ्रांस के सर्फ और रोम के दास की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति में स्पष्ट अंतर था। सर्फ सामान्यतः अपने परिवार के लॉर्ड के यहाँ कार्य करते थे। रोम के दासों के साथ ऐसा नहीं था। उन्हें अन्य स्थानों पर भी काम करना पड़ता था। फ्रांस के सर्फ या कृषि दास को अपने लॉर्ड की जागीर का काम होता था। काम करने के दिन निश्चित होते थे। रोम का दास ज्यादा त्रस्त था। उससे कभी भी कोई-सा भी काम कराया जाता था। सर्फ के पास गुज़ारे के लिए लॉर्ड का एक भूखंड होता था। रोम के दास के पास इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं थी। रोम का दास खरीदा या बेचा जा सकता था परंतु सर्फ़ के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता था। सर्फ़ लॉर्ड की अनुमति से विवाह कर सकता था परंतु रोम के दास को विवाह की अनुमति नहीं थी।
मुख्य बिंदु:
• सर्फ के पास अपनी भूमि का भूखंड होता था जबकि रोम के दासों के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
• रोम के दास खरीदे या बेचे जा सकते थे, किंतु सर्फ को संपत्ति की तरह बेचा नहीं जा सकता था।
• सर्फ लॉर्ड की अनुमति से विवाह कर सकते थे, जबकि रोम के दासों को विवाह का अधिकार नहीं था।
आम गलतियाँ:
• सर्फ और दास दोनों को एक ही श्रेणी का मान लेना और उनके कानूनी अधिकारों का अंतर न समझना।
• स्वामित्व और क्रय-विक्रय की स्वतंत्रता के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• विवाह और पारिवारिक जीवन से जुड़े अधिकारों की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) तुलनात्मक प्रश्न में बिंदुओं या अंतर के आधार पर उत्तर लिखना सबसे प्रभावी होता है।
b) क्रय-विक्रय, विवाह और भूखंड के स्वामित्व जैसे मुख्य आधारों पर तुलना करें।
c) सामंती व्यवस्था (सर्फ) और प्राचीन दासता (रोम) के मूल अंतर को हमेशा ध्यान में रखें।
NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 04 तीन वर्ग
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