NCERT Solutions for Class 11 Geography: Chapter 11 विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन
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Question 1: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(i) कोपेन के A प्रकार की जलवायु के लिए निम्न में से कौन सी दशा अर्हक है?
(क) सभी महीनों में उच्च वर्षा
(ख) सबसे ठंडे महीने का औसत मासिक तापमान हिमांक बिंदु से अधिक
(ग) सभी महीनों का औसत मासिक तापमान 18° सेल्सियस से अधिक
(घ) सभी महीनों का औसत तापमान 10° सेल्सियस से नीचे
Answer:
(ग) सभी महीनों का औसत मासिक तापमान 18° सेल्सियस से अधिक। कोपेन की जलवायु वर्गीकरण पद्धति में 'A' प्रकार की जलवायु उष्णकटिबंधीय (Tropical) जलवायु को दर्शाती है, जहाँ वर्षभर उष्ण दशाएँ बनी रहती हैं और प्रत्येक महीने का औसत तापमान 18° सेल्सियस या उससे अधिक होता है।
मुख्य बिंदु:
• 'A' प्रकार की जलवायु उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से संबंधित है।
• इस जलवायु में ठंड ऋतु का अभाव होता है या तापमान बहुत अधिक रहता है।
• सभी महीनों का औसत मासिक तापमान 18° सेल्सियस से अधिक होना इसकी मुख्य विशेषता है।
आम गलतियाँ:
• इसे केवल उच्च वर्षा से जोड़कर देखना, जबकि तापमान की शर्त भी अनिवार्य है।
• अन्य तापमान सीमाओं के साथ भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) कोपेन के प्रमुख जलवायु समूहों (A, B, C, D, E, H) के मुख्य मानदंडों को याद रखें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में तापमान और वर्षा की सीमाओं को ध्यान से पढ़ें।
c) उष्णकटिबंधीय जलवायु के लिए 18° सेल्सियस का मानक आँकड़ा महत्वपूर्ण है।
Question 2: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(ii) जलवायु के वर्गीकरण से संबंधित कोपेन की पद्धति को व्यक्त किया जा सकता है:
(क) अनुपयुक्त
(ख) व्यवस्थित
(ग) जननिक
(घ) आनुभविक
Answer:
(घ) आनुभविक (Empirical)। कोपेन की जलवायु वर्गीकरण पद्धति तापमान और वर्षा के वास्तविक प्रेक्षित आँकड़ों (आनुभविक मूल्यों) पर आधारित है, इसलिए इसे आनुभविक वर्गीकरण प्रणाली कहा जाता है।
मुख्य बिंदु:
• कोपेन की पद्धति वानस्पतिक वितरण और जलवायु के अनुभूत आँकड़ों पर आधारित है।
• यह प्रत्यक्ष रूप से तापमान और वर्षा के मासिक व वार्षिक औसत पर निर्भर है।
• आनुभविक प्रणालियाँ अवलोकन पर आधारित होती हैं न कि केवल उत्पत्ति के कारणों पर।
आम गलतियाँ:
• जननिक (Genetic) प्रणाली के साथ कोपेन की पद्धति को मिला देना।
• आनुभविक शब्द के अर्थ को स्पष्ट रूप से न समझ पाना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि कोपेन की वर्गीकरण पद्धति एक आनुभविक पद्धति है।
b) जननिक और आनुभविक वर्गीकरण के बीच का अंतर स्पष्ट होना चाहिए।
c) इस प्रकार के सीधे तथ्यात्मक प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Question 3: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(iii) भारतीय प्रायद्वीप के अधिकतर भागों को कोपेन की पद्धति के अनुसार वर्गीकृत किया जायेगा?
(क) "Af"
(ख) "Bsh"
(ग) "Cfb"
(घ) "Am"
Answer:
(घ) "Am"। भारतीय प्रायद्वीप के अधिकांश उष्णकटिबंधीय मानसूनी क्षेत्रों में मानसूनी प्रकार की जलवायु पाई जाती है, जिसे कोपेन के वर्गीकरण में 'Am' (उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु) के रूप में दर्शाया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• भारत का अधिकांश प्रायद्वीपीय भाग मानसूनी हवाओं के प्रभाव में है।
• 'Am' संकेत उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु को प्रदर्शित करता है जिसमें लघु शुष्क ऋतु होती है।
• यह भारतीय कृषि और पर्यावरण के अनुकूल जलवायु प्रकार है।
आम गलतियाँ:
• इसे सीधे तौर पर 'Af' (न्यूनतम शुष्क ऋतु रहित) मान लेना।
• कोड के अक्षरों का गलत अर्थ निकालना।
Exam Tips:
a) भारत के संदर्भ में कोपेन के प्रमुख जलवायु संकेतों को याद रखें।
b) 'Am' का अर्थ उष्णकटिबंधीय मानसून है, जो भारत के लिए उपयुक्त है।
c) मानचित्र आधारित प्रश्नों में भी इन संकेतों का उपयोग किया जा सकता है।
Question 4: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(iv) निम्नलिखित में से कौन सा साल विश्व का सबसे गर्म साल माना गया है?
(क) 1990
(ख) 1998
(ग) 1885
(घ) 1950
Answer:
(ख) 1998। वैश्विक तापमान के आँकड़ों के अनुसार, 1998 का वर्ष वैश्विक स्तर पर सबसे गर्म वर्षों में से एक माना गया है, जिसमें एल नीनो प्रभाव और वैश्विक तापन (Global Warming) की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
मुख्य बिंदु:
• वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में 1998 को अत्यधिक उष्ण वर्ष दर्ज किया गया।
• इस वर्ष शक्तिशाली एल नीनो प्रभाव देखा गया था।
• यह जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
आम गलतियाँ:
• हाल के वर्षों (जैसे हालिया दशक) के साथ भ्रमित होना।
• दिए गए विकल्पों में से तुक्का लगाना।
Exam Tips:
a) जलवायु परिवर्तन और रिकॉर्ड किए गए तापमान से जुड़े मुख्य वर्षों को याद रखें।
b) 1998 का वर्ष जलवायु अध्ययन में एक मील का पत्थर माना जाता है।
c) ऐसे सामान्य ज्ञान आधारित भूगोल के प्रश्नों का अभ्यास करें।
Question 5: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(v) नीचे लिखें चार जलवायु के समूहों में से कौन से आर्द दशाओं को प्रदर्शित करता है?
(क) A-B-C-E
(ख) A-C-D-E
(ग) B-C-D-E
(घ) A-C-D-F
Answer:
(ख) A-C-D-E। कोपेन के जलवायु वर्गीकरण में A (उष्णकटिबंधीय), C (शीतोष्ण - मध्यम अक्षाीय), D (शीत ठंडी हिमयुग जैसी या ठंडी वन जलवायु) और E (ध्रुवीय जलवायु) ऐसे समूह हैं जो पर्याप्त नमी या आर्द दशाओं से संबंधित हैं, जबकि B समूह शुष्क (Dry) जलवायु को प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु:
• समूह B शुष्क जलवायु का प्रतिनिधित्व करता है।
• समूह A, C, D और E आर्द या अर्ध-आर्द जलवायु दशाओं के अंतर्गत आते हैं।
• कोपेन ने वर्षा और वाष्पीकरण के संतुलन के आधार पर B को शुष्क माना है।
आम गलतियाँ:
• सभी अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम को आर्द मान लेना।
• समूह B की शुष्क प्रकृति को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) कोपेन के पाँच मुख्य जलवायु समूहों (A, B, C, D, E) के नाम और उनके अर्थ याद रखें।
b) समूह B हमेशा शुष्क जलवायु के लिए होता है, इसे छोड़कर बाकी सभी आर्द हैं।
c) वर्गीकरण के आधार को समझकर उत्तर दें।
Question 6: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) जलवायु के वर्गीकरण के लिए कोपेन के द्वारा किन दो जलवायु चरों का प्रयोग किया गया है?
Answer:
कोपेन ने अपनी जलवायु वर्गीकरण पद्धति के लिए मुख्य रूप से दो जलवायु चरों - तापमान और वर्षा के मासिक एवं वार्षिक औसत का प्रयोग किया है। उन्होंने इन दोनों चरों के सांख्यिकी मानों के आधार पर विश्व की जलवायु को विभिन्न समूहों में विभाजित किया है।
मुख्य बिंदु:
• तापमान और वर्षा को जलवायु का सबसे महत्वपूर्ण चर माना गया है।
• मासिक एवं वार्षिक आँकड़ों का उपयोग किया गया है।
• यह वर्गीकरण वानस्पतिक वितरण पर भी आधारित है जो तापमान और वर्षा का परिणाम है।
आम गलतियाँ:
• वायुदाब या पवनों को मुख्य चर मान लेना।
• केवल एक चर (जैसे केवल वर्षा) का उल्लेख करना।
Exam Tips:
a) उत्तर संक्षिप्त और बिंदुवार रखें।
b) तापमान और वर्षा दोनों चरों का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) शब्द सीमा (30 शब्द) का ध्यान रखें।
Question 7: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(ii) वर्गीकरण की जननिक प्रणाली आनुभविक प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है?
Answer:
जननिक प्रणाली जलवायु के निर्माण के कारणों, कारकों और उत्पत्ति प्रक्रियाओं (जैसे सौर विकिरण, वायु राशियाँ) पर बल देती है, जबकि आनुभविक प्रणाली जलवायु के प्रेक्षित आँकड़ों (विशेषकर तापमान और वर्षा) के आधार पर आधारित होती है।
मुख्य बिंदु:
• जननिक प्रणाली 'कारणों' पर आधारित है।
• आनुभविक प्रणाली 'परिणामों या आँकड़ों' पर आधारित है।
• आनुभविक पद्धति व्यावहारिक और प्रत्यक्ष अवलोकन से जुड़ी है।
आम गलतियाँ:
• दोनों प्रणालियों के अर्थ को आपस में मिला देना।
• स्पष्ट अंतर न लिखकर सामान्य परिभाषा देना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करते समय 'कारण' बनाम 'परिणाम' का दृष्टिकोण अपनाएँ।
b) दोनों प्रणालियों के एक-एक उदाहरण या विशेषता दें।
c) संक्षिप्त और सटीक भाषा का प्रयोग करें।
Question 8: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(iii) किस प्रकार की जलवायु में तापांतर बहुत कम होता है?
Answer:
उष्णकटिबंधीय आर्द जलवायु (विशेषकर विषुवत वृत्त के निकट) में वार्षिक और दैनिक तापांतर बहुत कम होता है। यहाँ वर्षभर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, दिन और रात लगभग बराबर होते हैं, और बादलों की उपस्थिति के कारण तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता है।
मुख्य बिंदु:
• विषुवत रेखीय क्षेत्रों में तापांतर न्यूनतम होता है।
• वर्षभर एक जैसी उच्च सौर प्राप्ति होती है।
• आर्दता और बादलों के कारण तापमान स्थिर रहता है।
आम गलतियाँ:
• मरुस्थलीय जलवायु को कम तापांतर वाला मान लेना (जहाँ तापांतर बहुत अधिक होता है)।
• विषुवत रेखीय स्थिति को भूल जाना।
Exam Tips:
a) विषुवत वृत्त के पास की जलवायु की विशेषताएँ याद रखें।
b) दैनिक और वार्षिक तापांतर दोनों कम होने का कारण बताएँ।
c) उत्तर को 30 शब्दों के भीतर सीमित रखें।
Question 9: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(iv) सौर कलंकों में वृद्धि होने पर किस प्रकार की जलवायुिक दशाएँ प्रचलित होंगी?
Answer:
सौर कलंकों (Sunspots) में वृद्धि होने पर पृथ्वी पर अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे मौसम अधिक गर्म और आर्द हो जाता है तथा तूफानों की संख्या बढ़ जाती है। इसके विपरीत, सौर कलंकों की संख्या घटने से ठंडी और शुष्क दशाएँ उत्पन्न होती हैं।
मुख्य बिंदु:
• सौर कलंक सूर्य की सतह पर काले धब्बे होते हैं।
• इनकी वृद्धि से पृथ्वी पर तापमान और वर्षा में वृद्धि होती है।
• यह सौर सक्रियता का सूचक है।
आम गलतियाँ:
• सौर कलंक बढ़ने से ठंड बढ़ने की गलत धारणा बनाना।
• मौसम पर इसके प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) सौर कलंक और पृथ्वी की जलवायु के संबंध को समझें।
b) 'वृद्धि = गर्म/आर्द' और 'कमी = ठंडा/शुष्क' का संबंध याद रखें।
c) संक्षिप्त और स्पष्ट उत्तर लिखें।
Question 10: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(i) A व B प्रकार की जलवायु की जलवायुिक दशाओं की तुलना करें?
Answer:
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार 'A' प्रकार की जलवायु उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से संबंधित है, जबकि 'B' प्रकार की जलवायु शुष्क जलवायु को दर्शाती है। A प्रकार की जलवायु 0° अक्षांश के आसपास तथा कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच पाई जाती है, जहाँ तापमान वर्षभर उच्च रहता है (सभी महीनों का औसत तापमान 18° सेल्सियस से अधिक) और वर्षा प्रचुर मात्रा में होती है। इसके विपरीत, B प्रकार की जलवायु 15° से 60° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के बीच विस्तृत है, विशेषकर उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब क्षेत्रों में, जहाँ वाष्पीकरण की दर वर्षा से अधिक होती है और जल की भारी कमी रहती है। A प्रकार की जलवायु में जैव विविधता और सदाबहार वन पाए जाते हैं, जबकि B प्रकार की जलवायु में कैटीले वन, झाड़ियाँ और मरुस्थलीय वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। इस प्रकार, A जलवायु अत्यधिक आर्द और उष्ण है, जबकि B जलवायु शुष्क और जल-अभाव वाली है।
मुख्य बिंदु:
• A प्रकार: उष्णकटिबंधीय, आर्द, उच्च तापमान, प्रचुर वर्षा।
• B प्रकार: शुष्क जलवायु, वाष्पीकरण अधिक, कम वर्षा, मरुस्थलीय विशेषताएँ।
• अक्षाीय विस्तार में स्पष्ट अंतर पाया जाता है।
• वनस्पतियों में सदाबहार वनों और कटीली झाड़ियों का अंतर होता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों जलवायु समूहों के अक्षाीय विस्तार को मिला देना।
• वर्षा और वाष्पीकरण के संतुलन को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) तुलनात्मक प्रश्नों में बिंदुओं या स्पष्ट अनुच्छेदों का प्रयोग करें।
b) तापमान, वर्षा, अक्षांश और वनस्पति के आधार पर तुलना करें।
c) शब्द सीमा (लगभग 150 शब्द) का ध्यान रखें।
Question 11: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(ii) C व A प्रकार की जलवायु में आप किस प्रकार की वनस्पति पाएँगे?
Answer:
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार 'A' प्रकार की जलवायु उष्णकटिबंधीय जलवायु है, जिसके अंतर्गत उष्णकटिबंधीय आर्द जलवायु (Af), मानसूनी जलवायु (Am) और सवाना जलवायु (Aw) आती हैं। इस जलवायु क्षेत्र में घने उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन और मानसूनी पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जहाँ पेड़ वर्ष में एक बार अपनी पत्तियाँ गिराते हैं और घासभूमियाँ भी मिलती हैं। दूसरी ओर, 'C' प्रकार की जलवायु शीतोष्ण (मध्यम अक्षाीय) जलवायु है, जिसे Cwa (आर्द उपोष्ण कटिबंधीय), Cs (भूमध्यसागरीय) और Cfb (समुद्री पश्चिम ततीय) जैसे वर्गों में बाँटा गया है। C प्रकार की जलवायु में आर्द उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में चौड़ी पत्ती वाले पतझड़ व सदाबहार मिश्रित वन, भूमध्यसागरीय प्रदेशों में खट्टे फलों के वृक्ष और सदाबहार झाड़ियाँ, तथा समुद्री ततीय क्षेत्रों में घासभूमियाँ और पर्णपाती वन पाए जाते हैं। इस प्रकार, A जलवायु में उष्णकटिबंधीय सघन वनस्पति होती है, जबकि C जलवायु में शीतोष्ण और भूमध्यसागरीय प्रकार की वनस्पति मिलती है।
मुख्य बिंदु:
• A जलवायु: उष्णकटिबंधीय सदाबहार, मानसूनी पर्णपाती और सवाना घासभूमियाँ।
• C जलवायु: शीतोष्ण वन, भूमध्यसागरीय फलदार वृक्ष और चौड़ी पत्ती वाले वन।
• जलवायु दशाओं का सीधा प्रभाव वानस्पतिक प्रकार पर पड़ता है।
• तापमान और वर्षा की भिन्नता के कारण वनस्पतियों में विविधता पाई जाती है।
आम गलतियाँ:
• उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण वनस्पतियों को आपस में मिला देना।
• उप-प्रकारों (Af, Am, Aw, Cwa आदि) की वनस्पतियों का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) दोनों जलवायु प्रकारों के उप-वर्गों के अनुसार वनस्पति का वर्णन करें।
b) वृक्षों के प्रकार (जैसे सदाबहार, पर्णपाती, खट्टे फल) स्पष्ट लिखें।
c) उत्तर को संरचित रूप में लगभग 150 शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 12: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(iii) ग्रीनहाउस गैसों से आप क्या समझते हैं? ग्रीनहाउस गैसों की एक सूची तैयार करें।
Answer:
ग्रीनहाउस गैसें वे गैसें हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में ग्रीनहाउस (हरितगृह) की भाँति व्यवहार करती हैं। ये गैसें पृथ्वी की सतह से परावर्तित होकर अंतरिक्ष में जाने वाली दीर्घ तरंगों (ऊष्मा) को अवशोषित कर लेती हैं और वायुमंडल का तापमान बढ़ा देती हैं। इस प्रक्रिया को 'ग्रीनहाउस प्रभाव' कहा जाता है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता, परंतु मानवीय गतिविधियों के कारण इनकी मात्रा बढ़ने से वैश्विक तापन (Global Warming) जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है। प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों की सूची निम्नलिखित है: कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), मीथेन (CH₄), ओजोन (O₃), और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) आदि। इनमें से कार्बन डाइऑक्साइड सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है जो जीवाश्म ईंधनों के जलने और वनों के कटने से वायुमंडल में लगातार बढ़ रही है।
मुख्य बिंदु:
• ग्रीनहाउस गैसें दीर्घ तरंग विकिरण को अवशोषित करती हैं।
• यह प्राकृतिक रूप से तापमान बनाए रखती हैं, लेकिन आधिक्य हानिकारक है।
• प्रमुख गैसें: कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, CFCs, ओजोन और नाइट्रस ऑक्साइड।
• वैश्विक तापन का मुख्य कारण इन्हीं गैसों की सांद्रता में वृद्धि है।
आम गलतियाँ:
• केवल कार्बन डाइऑक्साइड को ही एकमात्र ग्रीनहाउस गैस मानना।
• ग्रीनहाउस प्रभाव और ओजोन क्षरण को एक ही समझ लेना।
Exam Tips:
a) ग्रीनहाउस गैसों की परिभाषा स्पष्ट रूप से लिखें।
b) मुख्य गैसों के नाम सूची के रूप में दें ताकि उत्तर आकर्षक लगे।
c) पर्यावरण पर इनके प्रभाव का संक्षिप्त उल्लेख अवश्य करें।
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