Download NCERT Solutions for Class 11 Geography Chapter 10 वायुमंडल में जल
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Question 1: निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(i) मानव के लिए वायुमंडल का सबसे महत्वपूर्ण घटक निम्नलिखित में से कौन सा है?
(क) जल वाष्प
(ख) धूलकण
(ग) नाइट्रोजन
(घ) ऑक्सीजन
Answer:
(क) जल वाष्प। वायुमंडल में जल वाष्प सबसे गतिशील और महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि यह पृथ्वी पर होने वाली सभी मौसमी और जलवायु संबंधी घटनाओं जैसे वर्षा, बादलों के निर्माण और तापमान नियंत्रण के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी होता है।
मुख्य बिंदु:
• जल वाष्प वायुमंडल का सबसे अधिक परिवर्तनशील घटक है।
• यह सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित करके पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करता है।
• सभी प्रकार के वर्षण का मुख्य स्रोत जल वाष्प ही है।
आम गलतियाँ:
• नाइट्रोजन या ऑक्सीजन को सबसे महत्वपूर्ण घटक समझ लेना क्योंकि वे मात्रा में अधिक हैं।
• जल वाष्प की परिवर्तनशीलता को नजरअंदाज करना।
• मौसम और जलवायु में इसकी भूमिका को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में मात्रा और महत्व का अंतर समझकर उत्तर चुनें।
b) जल वाष्प को मौसमी परिवर्तनों का आधार मानें।
c) यह प्रश्न अक्सर बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 2: निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(ii) निम्नलिखित में से वह प्रक्रिया कौन सी है, जिसके द्वारा जल, द्रव से गैस में बदल जाता है?
(क) संघनन
(ख) वाष्पीकरण
(ग) वाष्पोत्सर्जन
(घ) अवक्षेपण
Answer:
(ख) वाष्पीकरण। वाष्पीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें जल अपनी द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था (जल वाष्प) में परिवर्तित होता है। यह तापमान और ऊर्जा के प्रभाव से होता है जो महासागरों, झीलों और अन्य जलाशयों से घटित होता है।
मुख्य बिंदु:
• वाष्पीकरण द्रव को गैस में बदलने की प्रक्रिया है।
• यह ऊष्मा ऊर्जा के अवشोषन पर निर्भर करता है।
• वायुमंडल में नमी का मुख्य स्रोत यही प्रक्रिया है।
आम गलतियाँ:
• संघनन को वाष्पीकरण समझ लेना, जबकि संघनन गैस से द्रव बनने की प्रक्रिया है।
• वाष्पोत्सर्जन और वाष्पीकरण में भेद न कर पाना।
• तापमान की भूमिका को भूल जाना।
Exam Tips:
a) अवस्था परिवर्तन की परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) द्रव से गैस = वाष्पीकरण, गैस से द्रव = संघनन।
c) शब्दावली से संबंधित ऐसे प्रश्नों का अभ्यास करें।
Question 3: निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(iii) निम्नलिखित में से कौन सा वायु की उस दशा को दर्शाता है, जिसमें नमी उसकी पूरी क्षमता के अनुरूप होती है?
(क) सापेक्ष आर्द्रता
(ख) निरपेक्ष आर्द्रता
(ग) विशिष्ट आर्द्रता
(घ) संतृप्त हवा
Answer:
(घ) संतृप्त हवा। जब किसी दिए गए तापमान पर हवा में मौजूद जल वाष्प की मात्रा उसकी नमी धारण करने की अधिकतम क्षमता के बराबर हो जाती है, तो उस हवा को संतृप्त हवा कहा जाता है। इस अवस्था में हवा और अधिक नमी नहीं ले सकती।
मुख्य बिंदु:
• संतृप्त हवा में आर्द्रता अपनी अधिकतम सीमा पर होती है।
• यह स्थिति वर्षा या संघनन से ठीक पहले बनती है।
• इसमें सापेक्ष आर्द्रता 100 प्रतिशत होती है।
आम गलतियाँ:
• सापेक्ष और निरपेक्ष आर्द्रता में भ्रमित होना।
• संतृप्ति का अर्थ पूरी क्षमता न समझना।
• तापमान के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) 'संतृप्त' शब्द का अर्थ अधिकतम सीमा या पूर्णता से जोड़कर समझें।
b) परिभाषाओं को सटीकता से याद करें।
c) यह वैचारिक प्रश्न परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 4: निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(iv) निम्नलिखित प्रकार के बादलों में से आकाश में सबसे ऊँचा बादल कौन सा है?
(क) पक्षाभ
(ख) वर्षा मेघ
(ग) स्तरी
(घ) कपासी
Answer:
(क) पक्षाभ। पक्षाभ बादल आकाश में सबसे अधिक ऊँचाई (लगभग 8,000 से 12,000 मीटर) पर पाए जाते हैं। ये बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टल से बनते हैं और इनका रूप पंख के समान सफेद और रेशमी होता है।
मुख्य बिंदु:
• पक्षाभ बादल अत्यधिक ऊँचाई पर बनते हैं।
• ये मुख्य रूप से बर्फ के कणों से निर्मित होते हैं।
• इनका आकार पतले रेशे या पंख जैसा होता है।
आम गलतियाँ:
• कपासी या स्तरी बादलों को सबसे ऊँचा मान लेना।
• बादलों की ऊँचाई के वर्गीकरण को भूल जाना।
• बादलों के घटकों (जल बूंद बनाम बर्फ) में अंतर न कर पाना।
Exam Tips:
a) बादलों के प्रकार और उनकी ऊँचाई की तालिका याद करें।
b) पक्षाभ बादलों को 'हाई एल्टीट्यूड' बादलों के रूप में याद रखें।
c) मानचित्र और आरेख आधारित प्रश्नों में भी यह उपयोगी है।
Question 5: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) वर्षण के तीन प्रकारों के नाम लिखें।
Answer:
वर्षण के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं: 1. वर्षा - जब जल की बूंदों के रूप में पानी गिरता है। 2. हिमपात - जब तापमान शून्य से कम होने पर नमी बर्फ के क्रिस्टल (हिमकणों) के रूप में गिरती है। 3. सहिम वृष्टि - जब पिघली हुई बर्फ की बूंदें ठंडी हवा से मिलकर ठोस हो जाती हैं और जमीन पर गिरती हैं।
मुख्य बिंदु:
• वर्षण के मुख्य रूप वर्षा, हिमपात और सहिम वृष्टि हैं।
• तापमान की स्थिति वर्षण के प्रकार को निर्धारित करती है।
• सभी प्रकार वायुमंडल में संघनन प्रक्रिया का परिणाम हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल वर्षा को ही एकमात्र वर्षण मान लेना।
• हिमपात और सहिम वृष्टि में अंतर स्पष्ट न कर पाना।
• शब्द सीमा (30 शब्दों) का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) संक्षिप्त और बिंदुवार उत्तर लिखें ताकि शब्द सीमा बनी रहे।
b) तापमान की शर्त को हर वर्षण के साथ जोड़कर बताएं।
c) इस प्रकार के लघु उत्तरीय प्रश्नों में सटीक शब्दावली प्रयोग करें।
Question 6: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(ii) सापेक्ष आर्द्रता की व्याख्या कीजिए।
Answer:
दिए गए तापमान पर किसी हवा की नमी धारण करने की क्षमता और उसमें वास्तव में मौजूद जल वाष्प के प्रतिशत को सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) कहते हैं। हवा का तापमान बदलने से उसकी नमी धारण करने की क्षमता बदल जाती है, जिससे सापेक्ष आर्द्रता भी प्रभावित होती है। यह महासागरों के ऊपर सबसे अधिक और महाद्वीपों के ऊपर सबसे कम होती है।
मुख्य बिंदु:
• यह हवा की वास्तविक नमी और उसकी अधिकतम क्षमता का अनुपात है।
• तापमान परिवर्तन के साथ यह बदलती है।
• इसे प्रतिशत (%) में व्यक्त किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• सापेक्ष आर्द्रता को निरपेक्ष आर्द्रता समझ लेना।
• तापमान के प्रभाव को परिभाषा में शामिल न करना।
• प्रतिशत इकाई का उल्लेख भूल जाना।
Exam Tips:
a) परिभाषा लिखते समय 'दिए गए तापमान पर' शब्द का अवश्य प्रयोग करें।
b) सूत्र या अनुपात के रूप में इसे समझें।
c) भूगोल में ऐसी परिभाषाओं को सटीक लिखना आवश्यक है।
Question 7: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(iii) ऊँचाई के साथ जलवाष्प की मात्रा तेजी से क्यों घटती है?
Answer:
वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा वाष्पीकरण और संघनन से नियंत्रित होती है। ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है, जिससे हवा की नमी धारण करने की क्षमता भी कम हो जाती है। परिणामस्वरूप, जैसे-जैसे हम ऊपर जाते हैं, वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा तेजी से घटने लगती है।
मुख्य बिंदु:
• ऊँचाई बढ़ने पर तापमान में गिरावट आती है।
• तापमान घटने से हवा की जल धारण क्षमता कम होती है।
• जलवाष्प मुख्यतः निचले वायुमंडल में केंद्रित होती है।
आम गलतियाँ:
• तापमान और जलवाष्प के संबंध को गलत समझना।
• केवल दाब को कारण बताना जबकि तापमान मुख्य कारक है।
• उत्तर को बहुत लंबा या अस्पष्ट लिखना।
Exam Tips:
a) तापमान और आर्द्रता के सीधे संबंध को स्पष्ट करें।
b) कारण और परिणाम के रूप में उत्तर की संरचना करें।
c) संक्षिप्तता का ध्यान रखते हुए मुख्य वैज्ञानिक कारण लिखें।
Question 8: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(iv) बादल कैसे बनते हैं, बादलों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer:
बादल पानी की छोटी बूंदों या बर्फ के छोटे कणों के संघनन से बनते हैं जो पर्याप्त ऊँचाई पर स्वतंत्र हवा में तैरते रहते हैं। इन्हें ऊँचाई, विस्तार और पारदर्शिता के आधार पर चार मुख्य रूपों में वर्गीकृत किया जाता है: पक्षाभ मेघ, कपासी मेघ, स्तरी मेघ और वर्षा मेघ।
मुख्य बिंदु:
• बादलों का निर्माण जल वाष्प के संघनन से होता है।
• ये वायुमंडल में तैरते हुए जलकणों या हिमकणों का समूह हैं।
• इन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
आम गलतियाँ:
• बादलों के निर्माण में संघनन प्रक्रिया का उल्लेख न करना।
• वर्गीकरण के केवल एक या दो नाम लिखकर छोड़ देना।
• शब्द सीमा का अतिक्रमण करना।
Exam Tips:
a) बादलों के नाम और निर्माण प्रक्रिया दोनों को एक साथ संक्षेप में बताएं।
b) वर्गीकरण के चारों नाम स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
c) यह प्रश्न दीर्घ और लघु दोनों रूपों में आ सकता है।
Question 9: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(i) विश्व के वर्षण वितरण के प्रमुख लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
एक साल में वर्षा की कुल मात्रा के आधार पर विश्व में काफी भिन्नता देखने को मिलती है। सामान्य तौर पर जब हम विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाते हैं, तो वर्षा की मात्रा धीरे-धीरे घटती जाती है। विश्व के तटीय क्षेत्रों में महाद्वीपों के भीतरी भागों की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। विश्व के स्थलीय भागों की अपेक्षा महासागरों के ऊपर अधिक वर्षा होती है। विषुवतरेखीय पट्टी, शीतोष्ण प्रदेशों में पश्चिमी तटीय किनारों के पास पर्वतों से वायु की ढलान पर तथा मानसून वाले क्षेत्रों के तटीय भागों में वर्षा बहुत अधिक होती है, जो प्रतिवर्ष 200 सेंटीमीटर से ऊपर होती है। महाद्वीपों के आंतरिक भागों में प्रतिवर्ष 1 से 200 सेंटीमीटर वर्षा होती है। महाद्वीपों के तटीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा मध्यम होती है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के केन्द्रीय भाग तथा शीतोष्ण क्षेत्रों के पूर्वी एवं भीतरी भागों में वर्षा की मात्रा 50 से 100 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष होती है। महाद्वीप के भीतरी भाग के वृष्टिछाया क्षेत्रों में पढ़ने वाले भाग तथा ऊँचे अक्षालों वाले क्षेत्रों में प्रतिवर्ष 50 सेंटीमीटर से भी कम वर्षा होती है। इस प्रकार विश्व में वर्षण का वितरण अत्यधिक असमान है जो अक्षांश, उच्चावच और हवाओं की दिशा पर निर्भर करता है।
मुख्य बिंदु:
• विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर वर्षा घटती है।
• महासागरों पर महाद्वीपों की तुलना में अधिक वर्षा होती है।
• तटीय क्षेत्रों में भीतरी भागों की अपेक्षा अधिक वर्षा दर्ज की जाती है।
• वृष्टिछाया प्रदेशों और ध्रुवीय क्षेत्रों में सबसे कम वर्षा होती है।
आम गलतियाँ:
• विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा के आँकड़ों (सेमी में) को गलत लिखना।
• महाद्वीपीय और महासागरीय वितरण के अंतर को स्पष्ट न करना।
• अक्षाीय प्रभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) बड़े उत्तरों को भौगोलिक क्षेत्रों (जैसे विषुवतरेखीय, तटीय, भीतरी भाग) के आधार पर बांटकर लिखें।
b) वर्षा की मात्रा (सेंटीमीटर में) का सटीक उल्लेख करें।
c) मानचित्र का मानसिक अभ्यास करके उत्तर की रूपरेखा तैयार करें।
Question 10: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(ii) संघनन के कौन-कौन से प्रकार हैं? ओस एवं तुषार के बनने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
Answer:
वायुमंडल में विद्यमान जलवाष्प का जल के रूप में बदलना संघनन कहलाता है। इसके उत्पन्न होने के कई कारण हैं जैसे जल वायु का ऊपर उठकर ठंडा होना, नमी से भरी वायु का पर्वत के सहारे ऊपर उठकर ठंडा होना, या ठंडी व गर्म वायु का आपस में मिलना। संघनन के फलस्वरूप ओस, तुषार, कोहरा, कुहासा और बादल बनते हैं। ओस तब बनती है जब अतिरिक्त नमी धरातल के ऊपर हवा में संघनन केंद्र पर संघनित न होकर ठोस वस्तु जैसे पत्थर, घास तथा पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंदों के रूप में जमा हो जाती है, जिसे ओस के नाम से जाना जाता है। इसके लिए ओसांक जमा बिंदु से ऊपर होना चाहिए। दूसरी ओर, तुषार तब बनता है जब संघनन तापमान 0° सेंटीग्रेड या उससे नीचे चला जाता है। इसमें अतिरिक्त नमी, पानी की बूंदों की बजाय बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टलों या रवों के रूप में सीधे पौधे या धरातल पर जम जाती है। इसके बनने की अवस्थाएँ ओस के समान ही होती हैं, केवल हवा का तापमान जमा बिंदु पर या उससे नीचे होना आवश्यक होता है। इस प्रकार संघनन तापमान और धरातलीय दशाओं के आधार पर विभिन्न रूपों में प्रकट होता है।
मुख्य बिंदु:
• संघनन जलवाष्प के द्रव या ठोस रूप में बदलने की प्रक्रिया है।
• ओस के लिए ओसांक जमा बिंदु से ऊपर होता है।
• तुषार के लिए तापमान जमा बिंदु या उससे नीचे होना चाहिए।
• ओस पत्तियों पर पानी की बूंदों रूप में और तुषार बर्फ के रवों के रूप में जमती है।
आम गलतियाँ:
• ओस और तुषार के तापमान की शर्त (जमा बिंदु से ऊपर या नीचे) को मिला देना।
• संघनन के अन्य रूपों (कोहरा, बादल) को ओस-तुषार समझ लेना।
• प्रक्रिया को वैज्ञानिक शब्दावली के बिना साधारण भाषा में लिखना।
Exam Tips:
a) दोनों प्रक्रियाओं में तापमान की तुलना करते हुए अंतर स्पष्ट करें।
b) मुख्य बिंदुओं को अलग-अलग पैराग्राफ या बुलेट्स में दर्शाएं ताकि परीक्षक को पढ़ने में आसानी हो।
c) विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में परिभाषा, कारण और उदाहरण तीनों शामिल करें।
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