Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Social Science Chapter 02 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
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Question 1: कोष्ठक में दिए गए सही विकल्प का प्रयोग कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(क) सेवा क्षेत्रक में रोजगार में उत्पादन के समान अनुपात में वृद्धि ............ हुई है / नहीं हुई है
(ख) ............ क्षेत्रक के श्रमिक वस्तुओं का उत्पादन नहीं कराते हैं। (तृतीयक / कृषि)
(ग) ............ क्षेत्रक के अधिकांश श्रमिकों को रोजगार-सुरक्षा प्राप्त होती है। (संगठित / असंगठित)
(घ) भारत में ............ अनुपात में श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में काम कर रहे हैं। (बड़ी / छोटी)
(ङ) कपास एक ............ उत्पाद है और कपड़ा एक ............ उत्पाद है। (प्राकृतिक / विनिर्मित)
(च) प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की गतिविधियाँ ............ हैं। (स्वतंत्र / परस्पर निर्भर)
Answer:
इन रिक्त स्थानों की सही पूर्ति इस प्रकार है: (क) सेवा क्षेत्रक में रोजगार में उत्पादन के समान अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। (ख) तृतीयक क्षेत्रक के श्रमिक वस्तुओं का उत्पादन नहीं कराते हैं बल्कि सेवाओं का सृजन करते हैं। (ग) संगठित क्षेत्रक के अधिकांश श्रमिकों को रोजगार-सुरक्षा प्राप्त होती है और उनके सेवा नियम निश्चित होते हैं। (घ) भारत में बड़े अनुपात में श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में काम कर रहे हैं, जो कुल श्रमिकों का लगभग नब्बे प्रतिशत है। (ङ) कपास एक प्राकृतिक उत्पाद है और कपड़ा एक विनिर्मित उत्पाद है जो कारखानों में तैयार होता है। (च) प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की गतिविधियाँ परस्पर निर्भर हैं क्योंकि एक क्षेत्रक के बिना दूसरे का चलना असंभव है।
मुख्य बिंदु:
• सेवा क्षेत्रक में उत्पादन तो बढ़ा है लेकिन रोजगार के अवसर उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं।
• असंगठित क्षेत्रक में देश के अधिकांश श्रमिक बिना सुरक्षा के कार्य कर रहे हैं।
• तीनों क्षेत्रक अपनी आवश्यकताओं के लिए एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर हैं।
आम गलतियाँ:
• सेवा क्षेत्रक के विकास को सीधे रोजगार वृद्धि मान लेना।
• प्राकृतिक और विनिर्मित उत्पादों की पहचान में भ्रमित होना।
• संगठित और असंगठित क्षेत्रों के रोजगार अनुपात को गलत समझना।
Exam Tips:
a) रिक्त स्थानों के प्रश्नों को हल करते समय वाक्यों के आर्थिक अर्थ को समझें।
b) असंगठित क्षेत्रक की विशालता से जुड़े आँकड़ों को ध्यान में रखें।
c) क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता के उदाहरण याद रखें।
Question 2: सही उत्तर का चयन करें:
(अ) सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक आधार पर विभाजित हैं:
(क) रोजगार की शर्तो
(ख) आर्थिक गतिविधि के स्वभाव
(ग) उद्यमों के स्वामित्व
(घ) उद्यम में नियोजित श्रमिकों की संख्या
(ब) एक वस्तु का अधिकांशतः प्राकृतिक प्रक्रिया से उत्पादन ............ क्षेत्रक की गतिविधि है:
(क) प्राथमिक
(ख) द्वितीयक
(ग) तृतीयक
(घ) सूचना प्रौद्योगिकी
(स) किसी वर्ष में उत्पादित ............ कुल मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) कहते हैं:
(क) सभी वस्तुओं और सेवाओं
(ख) सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं
(ग) सभी मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं
(घ) सभी मध्यवर्ती एवं अंतिम वस्तुओं और सेवाओं
(द) स.घ.उ. के पदों में वर्ष 2013-14 के बीच तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी ............ प्रतिशत है:
(क) 20 से 30
(ख) 30 से 40
(ग) 50 से 60
(घ) 60 से 70
Answer:
इन बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर निम्नलिखित हैं: (अ) का सही विकल्प (ग) उद्यमों के स्वामित्व है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्रक सरकार के अधीन और निजी क्षेत्रक व्यक्तियों के स्वामित्व में होता है। (ब) का सही विकल्प (क) प्राथमिक है, क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके कृषि, डेयरी और खनन जैसे कार्य प्राथमिक क्षेत्रक में आते हैं। (स) का सही विकल्प (ख) सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं है, क्योंकि दोहरी गणना से बचने के लिए केवल अंतिम वस्तुओं के मूल्य को ही जोड़ा जाता है। (द) का सही विकल्प (ग) 50 से 60 है, क्योंकि वर्ष 2013-14 में भारत की कुल अर्थव्यवस्था में तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी पचास प्रतिशत से अधिक हो गई थी।
मुख्य बिंदु:
• सार्वजनिक व निजी क्षेत्रक का मुख्य आधार संपत्ति और उद्यम का स्वामित्व है।
• जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की गणना में केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य शामिल होता है।
• तृतीयक क्षेत्रक आज भारत के सकल घरेलू उत्पाद में सबसे बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र बन गया है।
आम गलतियाँ:
• सकल घरेलू उत्पाद की गणना में मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को भी जोड़ देना।
• स्वामित्व के आधार और रोजगार की शर्तों के आधार को आपस में मिला देना।
• तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी के सही प्रतिशत आँकड़े को भूल जाना।
Exam Tips:
a) जीडीपी की परिभाषा में 'अंतिम वस्तुएँ' शब्द पर विशेष ध्यान दें।
b) स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण को हमेशा सरकार बनाम निजी व्यक्ति के रूप में याद रखें।
c) तृतीयक क्षेत्रक की बढ़ती महत्ता को दर्शाने वाले आँकड़े याद रखें।
Question 3: निम्नलिखित का मेल कीजिए:
कृषि क्षेत्रक की समस्याएँ - कुछ संभावित उपाय
1. असंचित भूमि - (अ) कृषि-आधारित मिलों की स्थापना
2. फसलों का कम मूल्य - (ब) सहकारी विपणन समितियाँ
3. कर्ज भार - (स) सरकार द्वारा खाद्यान्न की वसूली
4. मंदी काल में रोजगार का अभाव - (द) सरकार द्वारा नहरों का निर्माण
5. कटाई के तुरंत बाद स्थानीय व्यापारियों को अपना अनाज बेचने की विवशता - (य) कम ब्याज पर बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध कराना
Answer:
इनका सही मिलान इस प्रकार है: 1. असंचित भूमि का मिलान (द) सरकार द्वारा नहरों का निर्माण से है क्योंकि सिंचाई के साधन उपलब्ध कराने से सूखा पीड़ित भूमि उपजाऊ बन जाती है। 2. फसलों का कम मूल्य का मिलान (स) सरकार द्वारा खाद्यान्न की वसूली से है जिससे किसानों को उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) मिल सके। 3. कर्ज भार का मिलान (य) कम ब्याज पर बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध कराना से है ताकि किसान साहूकारों के चंगुल से बच सकें। 4. मंदी काल में रोजगार का अभाव का मिलान (अ) कृषि-आधारित मिलों की स्थापना से है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार मिल सके। 5. कटाई के तुरंत बाद स्थानीय व्यापारियों को अपना अनाज बेचने की विवशता का मिलान (ब) सहकारी विपणन समितियाँ से है जो किसानों को सही समय पर फसल बेचने और भंडारण की सुविधा देती हैं।
मुख्य बिंदु:
• किसानों की सिंचाई संबंधी समस्या का समाधान नहरों और नलकूपों से होता है।
• साहूकारों के शोषण से बचाने के लिए संस्थागत ऋण बहुत आवश्यक हैं।
• भंडारण और सहकारी समितियाँ किसानों को औने-पौने दामों पर फसल बेचने से बचाती हैं।
आम गलतियाँ:
• कम ब्याज वाले ऋण का मिलान मंदी के रोजगार से कर देना।
• कृषि आधारित मिलों की स्थापना को सिंचाई से जोड़ देना।
• सहकारी समितियों के कार्य को गलत समझ लेना।
Exam Tips:
a) मिलान वाले प्रश्नों को हल करने से पहले दोनों स्तंभों के सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) कृषि समस्याओं और उनके सरकारी समाधानों का तार्किक संबंध समझें।
c) प्रत्येक समस्या के पीछे के आर्थिक कारण को पहचानें।
Question 4: विषम की पहचान करें और बताइए क्यों?
(क) पर्यटन-निर्देशक, धोबी, दर्जी, कुम्हार
(ख) शिक्षक, डाक्टर, सब्जी विक्रेता, वकील
(ग) डाकिया, मोची, सैनिक, पुलिस कांस्टेबल
(घ) एम.टी.एन.एल., भारतीय रेल, एयर इंडिया, जेट एयरवेज, ऑल इंडिया रेडियो।
Answer:
इन समूहों में से विषम और उनके कारण इस प्रकार हैं: (क) में 'पर्यटन-निर्देशक' विषम है क्योंकि उसकी नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है और वह संगठित क्षेत्रक से संबंधित है, जबकि धोबी, दर्जी और कुम्हार असंगठित क्षेत्रक के स्व-नियोजित श्रमिक हैं। (ख) में 'सब्जी विक्रेता' विषम है क्योंकि यह असंगठित और निजी क्षेत्रक का पेशा है जिसके लिए किसी औपचारिक डिग्री या उच्च शिक्षा की आवश्यकता नहीं होती, जबकि शिक्षक, डॉक्टर और वकील पेशेवर हैं। (ग) में 'मोची' विषम है क्योंकि वह असंगठित क्षेत्रक में व्यक्तिगत रूप से काम करता है, जबकि डाकिया, सैनिक और पुलिस कांस्टेबल सरकारी व संगठित सेवा के कर्मचारी हैं। (घ) में 'जेट एयरवेज' विषम है क्योंकि यह एक निजी क्षेत्रक की कंपनी है, जबकि एम.टी.एन.एल., भारतीय रेल, एयर इंडिया और ऑल इंडिया रेडियो सरकार के सार्वजनिक उपक्रम हैं।
मुख्य बिंदु:
• विषम पहचानते समय संगठित-असंगठित या सार्वजनिक-निजी अंतर का आधार देखा जाता है।
• मोची और सब्जी विक्रेता व्यक्तिगत और असंगठित कार्यों के उदाहरण हैं।
• जेट एयरवेज निजी हाथों में है जबकि बाकी सभी परिवहन और संचार संस्थान सरकारी हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल नामों को देखकर बिना सोचे समझे कोई भी विकल्प चुन लेना।
• सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक के अंतर को नजरअंदाज करना।
• कारण स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में पहले सभी विकल्पों की कार्य प्रकृति (संगठित/असंगठित/सरकारी/निजी) लिखें।
b) जो तीन विकल्प एक श्रेणी के हों, चौथे को उससे अलग करें।
c) उत्तर में 'क्यों' का स्पष्ट आर्थिक कारण जरूर दें।
Question 5: एक शोध छात्र ने सुरत शहर में काम करने वाले लोगों का अध्ययन करके निम्न आंकड़े जुटाए:
कार्य स्थान - रोजगार की प्रकृति - श्रमिकों का प्रतिशत
सरकार द्वारा पंजीकरण कार्यालयों और कारखानों में - संगठित - 15
औपचारिक अधिकार-पत्र सहित बाज़ारों में अपनी दुकान, कार्यालय और क्लीनिक - संगठित - 15
सड़कों पर काम करते लोग निर्माण श्रमिक, घरेलू श्रमिक - असंगठित - 20
छोटी कार्यशालाओं में काम करते लोग, जो प्रायः सरकार द्वारा पंजीकृत नहीं हैं - असंगठित - 50
तालिका को पूरा कीजिए। इस शहर में असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों की प्रतिशतता क्या है?
Answer:
दी गई तालिका के अनुसार सुरत शहर में असंगठित क्षेत्रक में काम करने वाले श्रमिकों की कुल प्रतिशतता 70% है। इस आंकड़े को प्राप्त करने के लिए सड़कों पर काम करने वाले असंगठित श्रमिकों (20%) और छोटी अपंजीकृत कार्यशालाओं में काम करने वाले श्रमिकों (50%) के प्रतिशत को जोड़ा गया है। इसका अर्थ यह है कि इस शहर का अधिकांश श्रम बल असंगठित क्षेत्रक में लगा हुआ है जहाँ उन्हें रोजगार की कोई निश्चित सुरक्षा, भविष्य निधि या चिकित्सीय अवकाश जैसी सुविधाएँ प्राप्त नहीं होती हैं। वे उद्यमी भी कानूनों से बचना चाहते हैं और मजदूरों के अधिकारों का पालन करने से कतराते हैं।
मुख्य बिंदु:
• सुरत शहर में कुल असंगठित श्रमिकों का प्रतिशत 20% + 50% = 70% है।
• संगठित क्षेत्रक में केवल 15% + 15% = 30% श्रमिक ही कार्यरत हैं।
• असंगठित क्षेत्रक के उद्यमी सरकारी नियमों और श्रम कानूनों के पालन से बचना चाहते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल एक पंक्ति को जोड़कर कुल प्रतिशत निकाल लेना।
• संगठित और असंगठित के आँकड़ों को आपस में मिला देना।
• प्रतिशत निकालने के बाद उसका सही निष्कर्ष न लिखना।
Exam Tips:
a) तालिका आधारित प्रश्नों में पहले दी गई श्रेणियों (संगठित/असंगठित) को अलग-अलग जोड़ें।
b) कुल योग हमेशा 100% होना चाहिए (15 + 15 + 20 + 50 = 100)।
c) निष्कर्ष में यह जरूर बताएँ कि इतने बड़े असंगठित प्रतिशत का क्या अर्थ है।
Question 6: क्या आप मानते हैं कि आर्थिक गतिविधियों का प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रक में विभाजन की उपयोगिता है? व्याख्या कीजिए कि कैसे?
Answer:
हाँ, आर्थिक गतिविधियों का प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में वर्गीकरण अत्यंत उपयोगी है। यह वर्गीकरण हमें यह समझने में मदद करता है कि देश की कुल अर्थव्यवस्था में किस क्षेत्रक की कितनी हिस्सेदारी है और कितने लोग किस कार्य में लगे हुए हैं। इसके माध्यम से हमें सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) और प्रति व्यक्ति आय की सही जानकारी मिलती है। यदि किसी देश की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान बहुत अधिक है लेकिन रोजगार बहुत कम या इसके विपरीत स्थिति है, तो सरकार को यह पता चल जाता है कि किस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में संशोधन की आवश्यकता है। इस प्रकार यह वर्गीकरण देश के आर्थिक नियोजन और विकास का आधार तैयार करता है।
मुख्य बिंदु:
• यह वर्गीकरण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रत्येक क्षेत्रक के योगदान को स्पष्ट करता है।
• इससे सरकार को यह पता चलता है कि देश में श्रम शक्ति किस क्षेत्र में सबसे अधिक कार्यरत है।
• यह आर्थिक नीतियों के निर्धारण और विकास की दिशा तय करने में बहुत मददगार है।
आम गलतियाँ:
• वर्गीकरण के केवल नाम लिखकर उसकी उपयोगिता न समझाना।
• सरकार की नीतियों और आर्थिक नियोजन के साथ इसका संबंध न जोड़ना।
• संक्षेप में उत्तर देकर मुख्य बिंदुओं को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत इस बात से करें कि वर्गीकरण क्यों आवश्यक है।
b) स.घ.उ. और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दों का प्रयोग करें।
c) सरकार की नीतिगत योजनाओं का हवाला दें।
Question 7: इस अध्याय में आए प्रत्येक क्षेत्रक को रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) पर ही क्यों केन्द्रित करना चाहिए? क्या अन्य वाद-पदों का परीक्षण किया जा सकता है? चर्चा करें।
Answer:
इस अध्याय में रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) पर इसलिए केंद्रित किया गया है क्योंकि ये किसी भी देश के आर्थिक विकास, व्यक्ति की आय और उत्पादकता को मापने के सबसे महत्वपूर्ण पैमाने हैं। इन दोनों संकेतकों से हमें यह पता चलता है कि कौन सा क्षेत्रक देश की अर्थव्यवस्था में कैसा प्रदर्शन कर रहा है और कितने लोगों को जीविका दे रहा है। इसके अलावा अन्य वाद-पदों या संकेतकों जैसे क्षेत्रीय विकास में संतुलन, आय और धन का समान वितरण, तकनीकी आधुनिकीकरण, देश की आत्मनिर्भरता, अतिरिक्त खाद्य उत्पादन और गरीबी उन्मूलन का भी परीक्षण किया जा सकता है। ये सभी पहलू मिलकर यह तय करते हैं कि देश का समग्र विकास सही दिशा में हो रहा है या नहीं।
मुख्य बिंदु:
• रोजगार और स.घ.उ. किसी भी देश की आर्थिक ताकत के प्राथमिक सूचक हैं।
• आर्थिक असमानता और गरीबी उन्मूलन जैसे अन्य वाद-पद भी विकास के अध्ययन के लिए जरूरी हैं।
• तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक सफलता तय करते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल रोजगार और स.घ.उ. की बात करके अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को पूरी तरह छोड़ देना।
• प्रश्न के दूसरे भाग 'अन्य वाद-पद' का उत्तर न देना।
• संक्षेप में लिखकर विषय की गहराई को न समझाना।
Exam Tips:
a) उत्तर में उन छह बिंदुओं (जैसे गरीबी, असमानता, आधुनिकीकरण) का उल्लेख जरूर करें जो पीडीएफ में दिए गए हैं।
b) यह स्पष्ट करें कि क्यों केवल जीडीपी ही सब कुछ नहीं है, सामाजिक संकेतक भी जरूरी हैं।
c) विश्लेषणात्मक भाषा का प्रयोग करें।
Question 8: जीविका के लिए काम करने वाले अपने आसपास के व्यस्कों के सभी कार्यों की लंबी सूची बनाइए। उन्हें आप किस तरीके से वर्गीकृत कर सकते हैं? अपने चयन की व्याख्या कीजिए।
Answer:
हमारे आसपास के व्यस्क विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं जिन्हें हम गतिविधि की प्रकृति (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) और क्षेत्र की प्रकृति (संगठित, असंगठित) के आधार पर वर्गीकृत कर सकते हैं। उदाहरण के लिए: बैंक क्लर्क तृतीयक क्षेत्र और संगठित क्षेत्र में आता है; फ्रीलांस कार्टूनिस्ट तृतीयक क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में आता है; निर्माण मजदूर माध्यमिक क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में आता है; एम्स में डॉक्टर तृतीयक क्षेत्र और संगठित क्षेत्र में आता है; डीटीसी बस चालक तृतीयक क्षेत्र और संगठित क्षेत्र में आता है; किसान प्राथमिक क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में आता है; गेस्ट हाउस रिसेप्शनिस्ट तृतीयक क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में आता है; खान श्रमिक प्राथमिक क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में आता है; खुद दर्जी की दुकान तृतीयक क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में आती है; तथा सार्वजनिक क्षेत्र का कारखाना पर्यवेक्षक माध्यमिक क्षेत्र और संगठित क्षेत्र में आता है। इन श्रेणियों में चयन का आधार यह है कि कौन सा कार्य किस क्षेत्रक से वस्तु या सेवा का उत्पादन करता है और उसकी नौकरी की शर्तें कैसी हैं।
मुख्य बिंदु:
• कार्यों का वर्गीकरण उनके उत्पादन के स्वभाव (प्राथमिक, माध्यमिक, तृतीयक) के आधार पर होता है।
• दूसरा आधार नौकरी की सुरक्षा और पंजीकरण (संगठित और असंगठित) होता है।
• यह सूची हमें समाज की आर्थिक विविधता को समझने में मदद करती है।
आम गलतियाँ:
• केवल कार्यों के नाम लिखकर उनका वर्गीकरण न करना।
• संगठित और असंगठित क्षेत्रों की सही पहचान न कर पाना।
• चयन के कारणों की व्याख्या न लिखना।
Exam Tips:
a) इस प्रकार के प्रश्नों में एक स्पष्ट तालिका (कार्य, गतिविधि की प्रकृति, क्षेत्र) बनाकर उत्तर दें।
b) विभिन्न क्षेत्रों के व्यावहारिक उदाहरण शामिल करें।
c) चयन का आधार संक्षिप्त रूप में जरूर बताएँ।
Question 9: तृतीयक क्षेत्रक अन्य क्षेत्रकों से कैसे भिन्न है? उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।
Answer:
तृतीयक क्षेत्रक प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों से इस रूप में भिन्न है कि यह किसी वस्तु का भौतिक उत्पादन नहीं करता है, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग और सेवाएँ प्रदान करता है। प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक जहाँ कृषि, खनन या विनिर्माण के जरिए मूर्त वस्तुओं का सृजन करते हैं, वहीं तृतीयक क्षेत्रक उन वस्तुओं को बाजारों तक पहुँचाने, उनके भुगतान के निपटान और संचार जैसी सेवाएँ देता है। उदाहरण के लिए, यदि प्राथमिक क्षेत्र में कपास का उत्पादन हुआ और द्वितीयक क्षेत्र में कपड़ा बना, तो उस कपड़े को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए परिवहन, बेचने के लिए व्यापार, और पैसों के लेन-देन के लिए बैंकिंग तथा संचार सेवाओं की आवश्यकता होती है जो तृतीयक क्षेत्रक द्वारा पूरी की जाती हैं।
मुख्य बिंदु:
• तृतीयक क्षेत्रक वस्तुओं का उत्पादन नहीं करता बल्कि सेवाएँ प्रदान करता है।
• इसे सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों की रीढ़ है।
• परिवहन, बैंकिंग, व्यापार और संचार इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
आम गलतियाँ:
• तृतीयक क्षेत्रक को भी वस्तु उत्पादक मान लेना।
• प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों के साथ इसके अंतर को स्पष्ट न करना।
• उपयुक्त उदाहरण न देना।
Exam Tips:
a) तृतीयक क्षेत्रक को 'सेवा क्षेत्रक' कहकर परिभाषित करें।
b) प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक के बीच की श्रृंखला का उदाहरण दें।
c) यह स्पष्ट करें कि कैसे इसके बिना अन्य क्षेत्रक अधूरे हैं।
Question 10: प्रच्छन्न बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।
Answer:
प्रच्छन्न बेरोजगारी उस स्थिति को कहते हैं जहाँ लोग ऊपर से देखने में तो काम करते हुए दिखाई देते हैं, किंतु वास्तव में उनकी उत्पादकता कम होती है या शून्य होती है। यदि उस काम से कुछ लोगों को हटा भी लिया जाए, तो भी कुल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या कृषि के क्षेत्र में बहुत अधिक पाई जाती है, जहाँ एक ही परिवार के पाँच सदस्य एक छोटी सी जमीन पर काम करते हैं जबकि वास्तव में वहाँ केवल दो लोगों की ही आवश्यकता होती है। शहरी क्षेत्रों में यह बेरोजगारी सेवा और अनौपचारिक व्यापार में दिखाई देती है, जैसे कि पेंटर, प्लंबर, मरम्मत कार्य करने वाले या छोटे दुकानदार, जिनके पास पूरा दिन काम नहीं होता और वे अपनी क्षमता से बहुत कम आय पर गुजारा करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रच्छन्न बेरोजगारी को छिपी हुई बेरोजगारी भी कहा जाता है।
• इसमें व्यक्ति कार्यरत प्रतीत होता है लेकिन उसकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।
• ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और शहरी क्षेत्रों में असंगठित सेवाएँ इसके मुख्य केंद्र हैं।
आम गलतियाँ:
• प्रच्छन्न बेरोजगारी को खुली बेरोजगारी (जब बिल्कुल काम न हो) समझ लेना।
• ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उचित उदाहरण न देना।
• सीमांत उत्पादकता की अवधारणा को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) 'छिपी हुई बेरोजगारी' शब्द का प्रयोग करें और उसका अर्थ समझाएँ।
b) कृषि परिवार का उदाहरण ग्रामीण क्षेत्र के लिए और असंगठित दुकान का उदाहरण शहरी क्षेत्र के लिए दें।
c) यह बताएँ कि ऐसे श्रमिकों को हटाने पर भी उत्पादन क्यों नहीं घटता।
Question 11: खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच विभेद कीजिए।
Answer:
खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी में मुख्य अंतर यह है कि खुली बेरोजगारी में देश के श्रमिक को अपनी योग्यता और इच्छा के अनुसार काम बिल्कुल नहीं मिलता और वह पूरी तरह बेरोजगार रहता है, जबकि प्रच्छन्न बेरोजगारी में व्यक्ति काम में लगा हुआ प्रतीत होता है परंतु उसकी वास्तविक उत्पादकता बहुत कम या शून्य होती है। खुली बेरोजगारी मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों के शिक्षित युवाओं और औद्योगिक श्रमिकों में या ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन मजदूरों में पाई जाती है जहाँ रोजगार के अवसरों की भारी कमी होती है। इसके विपरीत, प्रच्छन्न बेरोजगारी मुख्य रूप से उन पारिवारिक कृषि जोतों या असंगठित क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग एक ही काम में जुटे रहते हैं क्योंकि उनके पास आजीविका का अन्य कोई विकल्प नहीं होता है।
मुख्य बिंदु:
• खुली बेरोजगारी में व्यक्ति के पास कोई काम नहीं होता, प्रच्छन्न में वह काम पर दिखता है लेकिन उत्पादकता नहीं होती।
• खुली बेरोजगारी शहरी क्षेत्रों और भूमिहीन मजदूरों में अधिक दिखती है।
• प्रच्छन्न बेरोजगारी मुख्य रूप से ग्रामीण कृषि परिवारों में पाई जाती है।
आम गलतियाँ:
• दोनों प्रकार की बेरोजगारी को एक ही मान लेना।
• उनके प्रकट होने के क्षेत्रों (शहरी बनाम ग्रामीण) को स्पष्ट न करना।
• उत्पादकता के अंतर को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) दोनों के बीच तुलनात्मक अंतर तालिका या बिंदुओं के रूप में लिखें।
b) परिभाषा देते समय 'काम का बिल्कुल न होना' बनाम 'आवश्यकता से अधिक लोगों का होना' स्पष्ट करें।
c) दोनों के वास्तविक जीवन के उदाहरण दें।
Question 12: "भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में तृतीयक क्षेत्रक कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा है।" क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।
Answer:
नहीं, हम इस कथन से बिल्कुल सहमत नहीं हैं क्योंकि तृतीयक क्षेत्रक भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले कुछ दशकों में (विशेषकर 1970 से 2010 के बीच) भारतीय अर्थव्यवस्था में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़े उत्पादक क्षेत्र के रूप में उभरा है। इसके विकास के पीछे कई कारण हैं जैसे: अस्पतालों, शिक्षा, रक्षा और वित्तीय संस्थानों जैसी बुनियादी सेवाओं की बढ़ती माँग; सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) जैसी नई सेवाओं का तीव्र प्रसार; प्राथमिक और माध्यमिक क्षेत्रों का विकास जिससे परिवहन और व्यापार की माँग बढ़ी है; और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के कारण पर्यटन, शॉपिंग तथा निजी स्कूलों जैसी सेवाओं की माँग में तेजी। इसके अलावा, वर्ष 1973 में जीडीपी में तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी जो कम थी, वह 2003 के बाद 50% से अधिक हो चुकी है।
मुख्य बिंदु:
• तृतीयक क्षेत्रक आज भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सबसे बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र है।
• बुनियादी सेवाओं (अस्पताल, शिक्षा, बैंक) की माँग लगातार बढ़ रही है।
• सूचना प्रौद्योगिकी और संचार सेवाओं ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि केवल कृषि या उद्योग ही अर्थव्यवस्था चलाते हैं।
• तृतीयक क्षेत्रक के बढ़ते योगदान के ऐतिहासिक आँकड़ों का उल्लेख न करना।
• सेवाओं की बढ़ती माँग के कारणों को न समझाना।
Exam Tips:
a) कथन का खंडन करते हुए शुरुआत में स्पष्ट 'नहीं' लिखें।
b) सेवा क्षेत्रक के विकास के चार-पाँच प्रमुख कारण बिंदुवार लिखें।
c) जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी के बढ़ने का जिक्र जरूर करें।
Question 13: भारत में सेवा क्षेत्रक दो विभिन्न प्रकार के लोग नियोजित करता है। वे लोग कौन हैं?
Answer:
भारत में सेवा क्षेत्रक मुख्य रूप से दो अलग-अलग प्रकार के लोगों को नियोजित करता है: प्रथम श्रेणी उन अत्यधिक कुशल और शिक्षित पेशेवरों की है जो उन सेवाओं में शामिल हैं जिनकी देश और दुनिया में बहुत भारी माँग है। इनमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और उच्च प्रबंधन के लोग आते हैं जो अपनी विशेष योग्यता के कारण बहुत अधिक आय अर्जित करते हैं। द्वितीय श्रेणी उन लाखों छोटे और असंगठित सेवा कर्मियों की है जो अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटे-छोटे कार्यों में लगे रहते हैं, जैसे कि धोबी, मोची, रिक्शा चालक, घरेलू नौकर, ठेले वाले और छोटे दुकानदार। ये लोग बड़ी मुश्किल से अपनी रोजी-रोटी कमा पाते हैं और इन्हें कोई औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं होती है।
मुख्य बिंदु:
• पहली श्रेणी उच्च कुशल और शिक्षित पेशेवरों (डॉक्टर, इंजीनियर, वकील) की है।
• दूसरी श्रेणी असंगठित और कम आय वाले सेवा कर्मियों (रिक्शा चालक, धोबी) की है।
• दोनों श्रेणियों की आय और जीवन स्तर में बहुत बड़ा अंतर होता है।
आम गलतियाँ:
• सेवा क्षेत्रक में केवल अमीर या शिक्षित लोगों को ही मान लेना।
• असंगठित सेवा कर्मियों की उपेक्षा करना जो सेवा क्षेत्रक का बड़ा हिस्सा हैं।
• दोनों वर्गों के बीच आर्थिक असमानता को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) सेवा क्षेत्रक की विविधता को दर्शाते हुए अपने उत्तर को दो भागों में विभाजित करें।
b) उच्च कुशल पेशेवर बनाम निम्न आय वाले सेवा श्रमिक का अंतर स्पष्ट करें।
c) दोनों के व्यावहारिक उदाहरण दें।
Question 14: "असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है।" क्या आप इस विचार से सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।
Answer:
हाँ, हम इस विचार से पूरी तरह सहमत हैं कि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का भारी शोषण किया जाता है। इसके समर्थन में निम्नलिखित मुख्य कारण हैं: पहला, यहाँ कोई निश्चित नियम, विनियम या श्रम कानूनों का पालन नहीं किया जाता है। दूसरा, काम के घंटे निश्चित नहीं होते और श्रमिक बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के 10 से 12 घंटे तक काम करने को मजबूर होते हैं। तीसरा, उन्हें नियमित वेतन के अलावा कोई भी चिकित्सा भत्ता, भविष्य निधि या सवेतन अवकाश नहीं मिलता है। चौथा, नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं होती और किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के निकाला जा सकता है। पाँचवाँ, अधिकांश श्रमिक गरीब, अनपढ़ और पिछड़े वर्गों से होने के कारण आसानी से कर्ज के जाल में फँस जाते हैं और सामाजिक भेदभाव का शिकार होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• असंगठित क्षेत्रक में श्रम कानूनों और नियमों का खुला उल्लंघन होता है।
• श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान और सवेतन अवकाश नहीं मिलता है।
• नौकरी की पूर्ण असुरक्षा और मनमाने ढंग से निकालने की प्रथा आम है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक या दो बिंदुओं को लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।
• असंगठित क्षेत्रक की वास्तविक समस्याओं (जैसे कर्ज और शोषण) का जिक्र न करना।
• कानूनी सुरक्षा के अभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत स्पष्ट 'हाँ' से करें।
b) शोषण के बिंदुओं को क्रमबद्ध (जैसे काम के घंटे, वेतन, सुरक्षा, अवकाश) लिखें।
c) सामाजिक और आर्थिक कारणों का समावेश करें।
Question 15: अर्थव्यवस्था में गतिविधियों रोजगार की स्थितियों के आधार पर कैसे वर्गीकरण की जाती हैं?
Answer:
अर्थव्यवस्था में रोजगार की स्थितियों के आधार पर गतिविधियों को मुख्य रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है: (1) संगठित क्षेत्रक: इस क्षेत्रक में वे उद्यम या कार्य आते हैं जो सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और इसके नियमों तथा विनियमों (जैसे कारखाना अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, ग्रेच्युटी अधिनियम) का पालन करते हैं। यहाँ श्रमिकों को रोजगार की सुरक्षा, निश्चित काम के घंटे, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि और चिकित्सा लाभ जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। (2) असंगठित क्षेत्रक: इस क्षेत्रक में छोटी और बिखरी हुई इकाइयाँ आती हैं जो सरकार के नियंत्रण से बाहर होती हैं। यहाँ कोई निश्चित नियम या कानून लागू नहीं होता, श्रमिकों को कम वेतन मिलता है, ओवरटाइम का कोई प्रावधान नहीं होता, और बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• रोजगार की शर्तों के आधार पर वर्गीकरण 'संगठित' और 'असंगठित' क्षेत्रों में होता है।
• संगठित क्षेत्र में सरकारी नियम, सुरक्षा और निश्चित लाभ मिलते हैं।
• असंगठित क्षेत्र में नियमों का अभाव और श्रमिकों का शोषण होता है।
आम गलतियाँ:
• रोजगार की स्थिति के वर्गीकरण को प्राथमिक-द्वितीयक क्षेत्रक से मिला देना।
• संगठित और असंगठित की परिभाषा में अंतर स्पष्ट न करना।
• सरकारी पंजीकरण की भूमिका को भूल जाना।
Exam Tips:
a) दोनों क्षेत्रों की स्पष्ट हेडिंग बनाकर उनकी विशेषताएँ लिखें।
b) 'नियमितता', 'कानून', और 'सुरक्षा' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
c) उदाहरण के लिए कारखाने बनाम दिहाड़ी मजदूर का संदर्भ दें।
Question 16: संगठित और असंगठित क्षेत्रकों में विद्यमान रोजगार-परिस्थितियों की तुलना करें।
Answer:
संगठित और असंगठित क्षेत्रकों की रोजगार-परिस्थितियाँ एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न होती हैं। संगठित क्षेत्रक में काम करने वाले श्रमिकों के पास नौकरी की पूरी सुरक्षा होती है, उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित वेतन मिलता है, सवेतन छुट्टियाँ, भविष्य निधि (PF), चिकित्सा बीमा और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसे लाभ प्राप्त होते हैं। उनके काम के घंटे निश्चित होते हैं और यदि वे अतिरिक्त काम करते हैं तो उन्हें ओवरटाइम का भुगतान किया जाता है। इसके विपरीत, असंगठित क्षेत्रक में नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं होती; सेवानिवृत्ति पर कोई लाभ, सवेतन छुट्टियाँ या बीमारी के दौरान कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाती है। वहाँ काम के घंटे बहुत लंबे होते हैं, कार्य वातावरण असुरक्षित होता है, और मनमाने ढंग से नौकरी से हटाने का डर हमेशा बना रहता है।
मुख्य बिंदु:
• संगठित क्षेत्र में नौकरी की सुरक्षा, पीएफ और पेंशन की सुविधा होती है।
• असंगठित क्षेत्र में किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा या बीमा नहीं मिलता।
• संगठित में काम के घंटे निश्चित होते हैं जबकि असंगठित में मनमाने ढंग से काम कराया जाता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों क्षेत्रों की तुलना केवल वेतन के आधार पर करना, सुरक्षा और लाभों को छोड़ देना।
• अंतर को स्पष्ट रूप से बिंदुवार न लिखना।
• असंगठित क्षेत्र की वास्तविक कठिनाइयों को कम करके आँकना।
Exam Tips:
a) तुलनात्मक प्रश्न में दोनों पक्षों को पैराग्राफ या अंतर तालिका के रूप में प्रस्तुत करें।
b) 'नौकरी की सुरक्षा' और 'सामाजिक लाभ' मुख्य तुलना बिंदु रखें।
c) भाषा औपचारिक और तथ्यात्मक रखें।
Question 17: मनरेगा 2005 के उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 को लागू करने के मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा बढ़ाना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं: (1) ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देना ताकि उनकी आय बढ़ सके। (2) हर राज्य या क्षेत्र में पर्यटन और अन्य ग्रामीण विकास कार्यों को बढ़ावा देकर अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना। (3) केंद्र सरकार द्वारा उन 200 जिलों (बाद में पूरे देश में विस्तारित) में काम करने का अधिकार देने वाला कानून लागू करना। (4) यदि सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रहती है, तो श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता देना, जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।
मुख्य बिंदु:
• मनरेगा 2005 का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देना है।
• यह कानून काम के अधिकार को सुनिश्चित करता है।
• यदि सरकार काम देने में असमर्थ रहती है तो वह बेरोजगारी भत्ता प्रदान करती है।
आम गलतियाँ:
• मनरेगा के दिनों की संख्या (100 दिन) को गलत लिखना।
• बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान को भूल जाना।
• केवल ग्रामीण विकास लिखकर रोजगार की गारंटी का मुख्य उद्देश्य छोड़ देना।
Exam Tips:
a) 'मनरेगा' का पूरा नाम (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और वर्ष 2005 जरूर याद रखें।
b) 100 दिन का रोजगार और बेरोजगारी भत्ता इसके दो सबसे बड़े स्तंभ हैं।
c) इसे ग्रामीण गरीबी दूर करने के एक बड़े सरकारी प्रयास के रूप में समझाएँ।
Question 18: अपने क्षेत्र से उदाहरण लेकर सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक की गतिविधियों एवं कार्यों की तुलना कीजिए।
Answer:
सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक दोनों मिलकर अर्थव्यवस्था का संचालन करते हैं परंतु उनके उद्देश्यों और प्रबंधन में अंतर होता है। सार्वजनिक क्षेत्रक का मुख्य उद्देश्य जन कल्याण और बुनियादी सेवाएँ प्रदान करना होता है, जिसका स्वामित्व सरकार के पास होता है; जैसे कि भारतीय रेल, एम.टी.एन.एल., सरकारी अस्पताल, और सार्वजनिक क्षेत्र के कारखाने। यहाँ रोजगार सुरक्षित होता है और लाभ कमाना मुख्य उद्देश्य नहीं होता। इसके विपरीत, निजी क्षेत्रक का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जिसका स्वामित्व व्यक्तिगत या निजी कंपनियों के हाथ में होता है; जैसे कि जेट एयरवेज, टाटा कंपनियाँ, रिलायंस कम्युनिकेशंस, और निजी क्लीनिक। यहाँ दक्षता और प्रतिस्पर्धा अधिक होती है लेकिन रोजगार की शर्तें बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं।
मुख्य बिंदु:
• सार्वजनिक क्षेत्रक का उद्देश्य जन कल्याण और सरकार का स्वामित्व होता है।
• निजी क्षेत्रक का उद्देश्य लाभ कमाना और व्यक्तिगत स्वामित्व होता है।
• भारतीय रेल सार्वजनिक का तथा टाटा-रिलायंस निजी क्षेत्र के प्रमुख उदाहरण हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों के मुख्य उद्देश्यों (कल्याण बनाम लाभ) को आपस में मिला देना।
• उपयुक्त और स्पष्ट उदाहरण न दे पाना।
• स्वामित्व के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) तुलना करते समय परिभाषा, उद्देश्य और उदाहरण तीनों का समावेश करें।
b) सरकारी उपक्रम बनाम निजी कंपनियाँ लिखकर अंतर स्पष्ट करें।
c) अपने आसपास के उदाहरणों से उत्तर को पुष्ट करें।
Question 19: अपने क्षेत्र से एक-एक उदाहरण देकर निम्न तालिका को पूरा कीजिए और चर्चा कीजिए:
सुव्यवस्थित प्रबंध वाले संगठन - कुव्यवस्थित प्रबंध वाले संगठन
सार्वजनिक क्षेत्रक - ............ - ............
निजी क्षेत्रक - ............ - ............
Answer:
इस तालिका को सही प्रकार से पूरा करने पर निम्नलिखित उदाहरण प्राप्त होते हैं: (1) सार्वजनिक क्षेत्रक में सुव्यवस्थित प्रबंध वाले संगठन का उदाहरण 'आई.आर.सी.टी.सी., डी.एम.आर.सी. (दिल्ली मेट्रो)' है, जो अपनी उच्च कार्यक्षमता और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं; जबकि कुव्यवस्थित प्रबंध वाले संगठन का उदाहरण 'दूध सहकारी समिति या कुछ घाटे में चल रहे सरकारी विभाग' हो सकते हैं जहाँ लालफीताशाही होती है। (2) निजी क्षेत्रक में सुव्यवस्थित प्रबंध वाले संगठन का उदाहरण 'भारती एयरटेल या रिलायंस कम्युनिकेशंस' जैसी बड़ी कंपनियाँ हैं जो अपनी बेहतरीन ग्राहक सेवा और तकनीक के लिए प्रसिद्ध हैं; जबकि कुव्यवस्थित प्रबंध वाले संगठन का उदाहरण 'असंगठित छोटी निजी दुकानें या स्थानीय वित्तीय इकाइयाँ' हैं जहाँ प्रबंधन का अभाव होता है। इन पर चर्चा करने से यह स्पष्ट होता है कि प्रबंधन की सुव्यवस्था केवल सरकारी या निजी होने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि संगठन की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर निर्भर करती है।
मुख्य बिंदु:
• सुव्यवस्थित सार्वजनिक संगठन का सबसे अच्छा उदाहरण मेट्रो (DMRC) या IRCTC है।
• सुव्यवस्थित निजी संगठन का उदाहरण बड़ी टेलीकॉम कंपनियाँ (Airtel, Reliance) हैं।
• कुव्यवस्था दोनों क्षेत्रों में हो सकती है, जो खराब प्रबंधन का परिणाम है।
आम गलतियाँ:
• तालिका के सभी खानों में सही उदाहरण न भर पाना।
• सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रबंधन में भ्रमित होना।
• चर्चा के मुख्य बिंदु को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) तालिका वाले प्रश्नों को साफ-सुथरे ढंग से हल करें।
b) दिल्ली मेट्रो (DMRC) और बड़ी निजी कंपनियों के नाम अच्छे उदाहरण के रूप में याद रखें।
c) यह दिखाएँ कि प्रबंधन की गुणवत्ता हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
Question 20: सार्वजनिक क्षेत्र की गतिविधियों के कुछ उदाहरण दीजिए और व्याख्या कीजिए कि सरकार इन गतिविधियों का कार्यान्वयन क्यों किया जाता है?
Answer:
सार्वजनिक क्षेत्र की गतिविधियों के प्रमुख उदाहरणों में भारतीय रेलवे का संचालन, बिजली उत्पादन, जलापूर्ति, और बड़े बाँधों का निर्माण शामिल हैं। सरकार इन गतिविधियों का कार्यान्वयन इसलिए करती है क्योंकि कुछ ऐसी बुनियादी आवश्यकताएँ होती हैं जिनका प्रबंध निजी क्षेत्र अकेले लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं कर सकता या उनकी लागत इतनी अधिक होती है कि सामान्य जनता उसे वहन नहीं कर सकती। उदाहरण के लिए, स्वच्छ पानी, बिजली और परिवहन जैसी सुविधाएँ हर नागरिक के लिए आवश्यक हैं। यदि ये सेवाएँ पूरी तरह निजी हाथों में छोड़ दी जाएँ, तो कंपनियाँ भारी कीमत वसूल सकती हैं जिससे गरीब लोग वंचित रह जाएंगे। इसलिए सरकार कम और सस्ती दरों पर इन बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करती है और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देती है।
मुख्य बिंदु:
• सार्वजनिक क्षेत्र की गतिविधियों में रेलवे, बिजली, पानी और बुनियादी ढाँचा शामिल हैं।
• सरकार का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों को सस्ती दरों पर आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
• निजी कंपनियाँ उच्च लाभ कमाने के लिए इन क्षेत्रों में भारी निवेश करने से बच सकती हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल उदाहरण लिखकर यह न समझाना कि सरकार इनकी जिम्मेदारी क्यों उठाती है।
• सामाजिक कल्याण और निजी लाभ के अंतर को नजरअंदाज करना।
• बुनियादी आवश्यकताओं के महत्व को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'बुनियादी आवश्यकताएँ' और 'सस्ती दर' शब्दों का विशेष रूप से प्रयोग करें।
b) रेलवे और बिजली का उदाहरण देकर अपनी बात स्पष्ट करें।
c) यह बताएँ कि क्यों बाजार अकेले सभी सामाजिक जरूरतें पूरी नहीं कर सकता।
Question 21: व्याख्या कीजिए कि एक देश के आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक कैसे योगदान करता है?
Answer:
सार्वजनिक क्षेत्रक किसी देश के आर्थिक विकास में कई महत्वपूर्ण तरीकों से योगदान देता है: पहला, यह देश के बुनियादी ढाँचे (जैसे परिवहन, ऊर्जा, सिंचाई, और संचार) के विकास पर भारी निवेश करता है जो तीव्र आर्थिक विकास की नींव रखता है। दूसरा, यह बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करता है ताकि अधिक से अधिक लोगों को उपयुक्त रोजगार मिल सके। तीसरा, यह देश के विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाता है और सभी क्षेत्रों में संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देता है। चौथा, यह आय और धन के असमान वितरण को नियंत्रित करने में मदद करता है। पाँचवाँ, यह छोटे, मध्यम और कुटीर उद्योगों के सतत विकास को प्रोत्साहित करता है तथा स्वास्थ्य और शैक्षणिक सेवाओं के माध्यम से मानव विकास सूचकांक (HDI) में सुधार करता है।
मुख्य बिंदु:
• सार्वजनिक क्षेत्रक देश के बुनियादी ढाँचे के निर्माण में सबसे बड़ा योगदान देता है।
• यह रोजगार के अवसर सृجित कर गरीबी और बेरोजगारी को कम करता है।
• शिक्षा, स्वास्थ्य और संतुलित विकास के माध्यम से मानव विकास को बढ़ावा देता है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक या दो बिंदुओं को लिखकर उत्तर को अधूरा छोड़ देना।
• बुनियादी ढाँचे और मानव विकास के योगदान को स्पष्ट न करना।
• आर्थिक विकास में सरकार की भूमिका को कम आँकना।
Exam Tips:
a) बिंदुओं में उत्तर लिखें ताकि परीक्षक को सभी मुख्य बिंदु स्पष्ट दिखाई दें।
b) 'बुनियादी ढाँचा', 'रोजगार सृजन' और 'संतुलित विकास' जैसे प्रमुख आर्थिक शब्द इस्तेमाल करें।
c) स्वास्थ्य और शिक्षा का उल्लेख करना न भूलें।
Question 22: असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को निम्नलिखित मुद्दों पर संरक्षण की आवश्यकता है: मजदूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
Answer:
असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को मजदूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य तीनों ही मोर्चों पर गंभीर संरक्षण की आवश्यकता है। पहला, मजदूरी के मामले में: असंगठित श्रमिकों (जैसे सब्जी विक्रेता, घरेलू नौकर या दिहाड़ी मजदूर) की आय बहुत अनिश्चित और कम होती है, इसलिए उन्हें न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी चाहिए ताकि उनका आर्थिक शोषण न हो सके। दूसरा, सुरक्षा के मामले में: असंगठित श्रमिकों को अक्सर खतरनाक कामकाजी परिस्थितियों (जैसे खनन, रसायन कारखाने या निर्माण कार्य) में काम करना पड़ता है जहाँ पीने के पानी या स्वच्छ वातावरण की कोई सुविधा नहीं होती, इसलिए उन्हें सुरक्षा उपकरण मिलने चाहिए। तीसरा, स्वास्थ्य के मामले में: बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में उनके पास उचित इलाज के लिए पैसे नहीं होते और अवकाश लेने पर वेतन भी काट लिया जाता है, इसलिए उनके लिए चिकित्सा बीमा और चिकित्सालयों का सुलभ ढाँचा होना अति आवश्यक है।
मुख्य बिंदु:
• असंगठित श्रमिकों की मजदूरी बहुत कम और अनिश्चित होती है जिसे निश्चित करने की जरूरत है।
• खनन और निर्माण जैसे खतरनाक कार्यों में उन्हें सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ता है।
• बीमारी के समय वेतन कटने और इलाज न मिलने की समस्या का समाधान आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• प्रश्न में दिए गए तीनों बिंदुओं (मजदूरी, सुरक्षा, स्वास्थ्य) में से किसी एक को छोड़ देना।
• उचित और वास्तविक उदाहरण (जैसे खनन या घरेलू काम) न देना।
• संरक्षण की आवश्यकता के कारणों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर को तीनों शीर्षकों (मजदूरी, सुरक्षा, स्वास्थ्य) के अंतर्गत विभाजित करके लिखें।
b) प्रत्येक बिंदु के साथ एक उपयुक्त उदाहरण (जैसे निर्माण श्रमिक या रसायन कारखाने का मजदूर) दें।
c) श्रमिक कल्याण के दृष्टिकोण से उत्तर का समापन करें।
Question 23: अहमदाबाद में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नगर के 15,00,000 श्रमिकों में से 11,00,000 श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में काम कराते थे। वर्ष 1997-98 में नगर की कुल आय 600 करोड़ रुपए थी इसमें से 320 करोड़ रुपए संगठित क्षेत्रक से प्राप्त होती थी। इस आंकड़े को तालिका में प्रदर्शित कीजिए। नगरों में और अधिक रोजगार-सृजन के लिए किन तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए?
Answer:
दी गई जानकारी के अनुसार अहमदाबाद शहर के श्रमिकों और आय की तालिका इस प्रकार बनेगी: संगठित क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या 4,00,000 और आय 32,00 मिलियन (या 320 करोड़ रुपये) है; असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या 11,00,000 और आय 28,00 मिलियन (या 280 करोड़ रुपये) है; जिससे कुल श्रमिकों की संख्या 15,00,000 और कुल आय 60,00 मिलियन (या 600 करोड़ रुपये) हो जाती है। इस आंकड़े से स्पष्ट है कि असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों का एक बहुत बड़ा हिस्सा (11 लाख) काम कर रहा है, इसलिए प्रति व्यक्ति आय कम है। नगरों में और अधिक रोजगार सृजन के लिए सरकार को असंगठित क्षेत्र के उद्यमों को संगठित क्षेत्र में बदलने के लिए प्रोत्साहन नीतियाँ बनानी चाहिए, आसान ऋण उपलब्ध कराने चाहिए, और नए संगठित उद्योगों व कारखानों को बढ़ावा देना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• संगठित क्षेत्र में कम श्रमिकों पर अधिक आय है, जबकि असंगठित में अधिक श्रमिकों पर कम आय है।
• असंगठित क्षेत्र श्रमिकों की संख्या के मामले में 70% से अधिक हिस्सा रखता है।
• रोजगार सृजन के लिए नए उद्योगों की स्थापना और आसान ऋण सुविधा जरूरी है।
आम गलतियाँ:
• तालिका बनाते समय श्रमिकों और आय के आंकड़ों को गलत व्यवस्थित करना।
• प्रश्न के दूसरे भाग (रोजगार सृजन के तरीके) का उत्तर न देना।
• प्रति व्यक्ति आय के अंतर के निष्कर्ष को न समझाना।
Exam Tips:
a) पहले दी गई संख्याओं से स्पष्ट तालिका बनाएँ जैसा कि पीडीएफ में दिखाया गया है।
b) आँकड़ों का विश्लेषण करके यह बताएँ कि किस क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय अधिक है।
c) रोजगार सृजन के व्यावहारिक उपाय बिंदुवार लिखें।
Question 24: निम्नलिखित तालिका में तीनों क्षेत्रकों का सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) रुपए (करोड़) में दिया गया है:
वर्ष - प्राथमिक - द्वितीयक - तृतीयक
2000 - 52,000 - 48,500 - 1,33,500
2013 - 8,00,500 - 10,74,000 - 38,68,000
(क) वर्ष 2000 एवं 2013 के लिए स.घ.उ. में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी की गणना कीजिए।
(ख) इन आंकड़ों को अध्याय में दिए आलेख-2 के समान एक दंड-आरेख के रूप में प्रदर्शित कीजिए।
(ग) दंड-आलेख से हम क्या निष्कर्ष प्राप्त करते हैं?
Answer:
इस प्रश्न के विभिन्न भागों के हल इस प्रकार हैं: (क) वर्ष 2000 में कुल स.घ.उ. 2,34,000 करोड़ रुपये था, जिसके अनुसार प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 22.22%, माध्यमिक (द्वितीयक) क्षेत्र की 20.72%, और तृतीयक क्षेत्र की 57.06% थी। इसी प्रकार वर्ष 2013 में कुल स.घ.उ. 57,42,500 करोड़ रुपये था, जिसके अनुसार प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी घटकर 13.94%, माध्यमिक क्षेत्र की 18.70%, और तृतीयक क्षेत्र की बढ़कर 67.36% हो गई। (ख) इन आंकड़ों को प्रतिशत दंड-आलेख (बार ग्राफ) के रूप में प्रदर्शित किया जाता है जिसमें दोनों वर्षों (2000 और 2013) के लिए 100% का एक स्तंभ बनाकर तीनों क्षेत्रकों के हिस्से को अलग-अलग रंगों से दर्शाया जाता है। (ग) इस दंड-आलेख से हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि पिछले तेरह वर्षों में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है, माध्यमिक क्षेत्र लगभग समान बना रहा है, और तृतीयक (सेवा) क्षेत्र की हिस्सेदारी में बहुत बड़ी वृद्धि हुई है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु:
• वर्ष 2000 से 2013 के बीच तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी 57% से बढ़कर 67% हो गई है।
• इसी अवधि में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 22% से घटकर लगभग 14% रह गई है।
• यह परिवर्तन अर्थव्यवस्था के विकास और सेवा क्षेत्र के विस्तार का सूचक है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिशत निकालते समय कुल योग (Total GDP) की गणना में गलती करना।
• दंड-आलेख के तीनों हिस्सों के रंगों और प्रतिशत को सही ढंग से न दर्शाना।
• निष्कर्ष में केवल आँकड़े लिखना और उनका आर्थिक अर्थ न समझाना।
Exam Tips:
a) प्रतिशत गणना के चरणों को साफ-सुथरे ढंग से स्टेप-बाय-स्टेप लिखें।
b) दंड-आलेख (Bar Diagram) बनाते समय उचित स्केल और रंगों का प्रयोग करें।
c) निष्कर्ष में प्राथमिक क्षेत्र के घटने और तृतीयक क्षेत्र के बढ़ने के मुख्य रुझान को स्पष्ट करें।
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