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Question 1: सामान्यतः किसी देश का विकास किस आधार पर निर्धारित किया जा सकता है?
(क) प्रतिव्यक्ति आय
(ख) औसत साक्षरता स्तर
(ग) लोगों की स्वास्थ्य स्थिति
(घ) उपर्युक्तसभी
Answer:
किसी देश का विकास मापने के लिए केवल आर्थिक सूचक ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी सूचक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट (HDR) में देशों की तुलना करने के लिए प्रतिव्यक्ति आय के साथ-साथ लोगों का शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य स्थिति और औसत आयु को भी आधार बनाया जाता है। इसलिए दिए गए विकल्पों में से प्रतिव्यक्ति आय, औसत साक्षरता स्तर और लोगों की स्वास्थ्य स्थिति—तीनों ही किसी देश के विकास को निर्धारित करने के महत्वपूर्ण आधार हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (घ) उपर्युक्त सभी है।
मुख्य बिंदु:
• किसी देश के विकास का आकलन करने के लिए प्रतिव्यक्ति आय एक प्रमुख आर्थिक पैमाना है।
• साक्षरता स्तर लोगों के शैक्षिक विकास और ज्ञान को दर्शाता है।
• स्वास्थ्य स्थिति और जीवन प्रत्याशा मानव कल्याण के आवश्यक सूचक हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल प्रतिव्यक्ति आय को ही विकास का एकमात्र पैमाना मान लेना।
• शिक्षा और स्वास्थ्य की भूमिका की उपेक्षा करना।
• यूएनडीपी (UNDP) के मानकों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें क्योंकि कभी-कभी 'उपर्युक्त सभी' सही उत्तर होता है।
b) याद रखें कि आधुनिक विकास की अवधारणा बहुआयामी होती है।
c) आर्थिक विकास और मानव विकास के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 2: निम्नलिखित पड़ोसी देशों में, मानव विकास के लिहाज से किस देश की स्थिति भारत से बेहतर है?
(क) बांग्लादेश
(ख) श्रीलंका
(ग) नेपाल
(घ) पाकिस्तान
Answer:
मानव विकास रिपोर्ट (HDR) के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण एशिया क्षेत्र में श्रीलंका की स्थिति मानव विकास सूचकांक (HDI) में भारत और अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में काफी अच्छी है। श्रीलंका का मानव विकास क्रम (रैंक) भारत से काफी आगे है, जो यह दर्शाता है कि वहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रतिव्यक्ति आय के क्षेत्र में बेहतर प्रगति हुई है। यद्यपि श्रीलंका का आकार और अर्थव्यवस्था छोटी है, फिर भी सामाजिक क्षेत्रों में उसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है। अतः सही उत्तर विकल्प (ख) श्रीलंका है।
मुख्य बिंदु:
• श्रीलंका का एचडीआई (HDI) रैंक भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से बेहतर है।
• मानव विकास में स्वास्थ्य और शिक्षा का स्तर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
• पड़ोसी देशों के साथ तुलनात्मक अध्ययन से देश की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
आम गलतियाँ:
• भौगोलिक क्षेत्रफल या कुल जीडीपी को मानव विकास का पैमाना मान लेना।
• भारत की तुलना अन्य विकसित पश्चिमी देशों से करने की भूल करना।
• श्रीलंका की सामाजिक प्रगति के आंकड़ों को भूल जाना।
Exam Tips:
a) एनसीईआरटी पुस्तक में दी गई मानव विकास तालिका को ध्यान से देखें।
b) भारत और उसके पड़ोसी देशों के HDI क्रेंक का सामान्य ज्ञान रखें।
c) उत्तर लिखते समय प्रतिव्यक्ति आय और जीवन प्रत्याशा का संदर्भ अवश्य दें।
Question 3: मान लीजिए कि एक देश में चार परिवार हैं। इन परिवारों की प्रतिव्यक्ति आय 5,000 रुपये है। अगर तीन परिवारों की आय क्रमशः 4,000, 7,000 और 3,000 रुपये हैं, तो चौथे परिवार की आय क्या है?
(क) 7,500 रुपये
(ख) 3,000 रुपये
(ग) 2,000 रुपये
(घ) 6,000 रुपये
Answer:
औसत प्रतिव्यक्ति आय निकालने के लिए कुल आय को परिवारों की कुल संख्या से भाग दिया जाता है। यहाँ परिवारों की संख्या 4 है और औसत प्रतिव्यक्ति आय 5,000 रुपये है। इसलिए, चारों परिवारों की कुल आय = 4 × 5,000 = 20,000 रुपये होगी। पहले तीन परिवारों की कुल आय 4,000 + 7,000 + 3,000 = 14,000 रुपये है। चौथे परिवार की आय ज्ञात करने के लिए कुल आय में से पहले तीन परिवारों की कुल आय घटा दी जाएगी, यानी 20,000 - 14,000 = 6,000 रुपये। अतः सही उत्तर विकल्प (घ) 6,000 रुपये है।
मुख्य बिंदु:
• कुल आय = परिवारों की संख्या × औसत प्रतिव्यक्ति आय (4 × 5000 = 20000)
• प्रथम तीन परिवारों की कुल आय = 4000 + 7000 + 3000 = 14000
• चौथे परिवार की आय = कुल आय - प्रथम तीन परिवारों की आय (20000 - 14000 = 6000)
आम गलतियाँ:
• औसत को ही कुल आय मान लेना और गुणा न करना।
• जोड़ने या घटाने में सामान्य गणितीय त्रुटि करना।
• परिवारों की कुल संख्या से गुणा करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) गणितीय प्रश्नों को हल करते समय हर चरण (Step) को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) औसत के सूत्र का सही उपयोग करना सीखें।
c) परीक्षा में उत्तर निकालने के बाद गणना की दोबारा जाँच अवश्य करें।
Question 4: विश्व बैंक वर्गों का वर्गीकरण करने के लिये किस प्रमुख मापदंड का प्रयोग करता है? इस मापदंड की, अगर कोई है, तो सीमाएँ नीचे लिखिए।
Answer:
विश्व बैंक विभिन्न देशों का वर्गीकरण करने के लिए मुख्य रूप से 'प्रतिव्यक्ति आय' (Per Capita Income) का उपयोग करता है। इस मापदंड के अनुसार जिन देशों की प्रतिव्यक्ति आय अधिक होती है, उन्हें विकसित या उच्च आय वाले देश कहा जाता है, और जिनकी आय कम होती है, उन्हें विकासशील या निम्न आय वाले देश माना जाता है। हालाँकि, इस मापदंड की कई गंभीर सीमाएँ हैं। प्रतिव्यक्ति आय केवल औसत आय बताती है जिससे यह पता नहीं चलता कि उस आय का वितरण देश के नागरिकों के बीच किस प्रकार हुआ है। यह संभव है कि औसत आय अधिक हो लेकिन देश में अत्यधिक आर्थिक असमानता हो, जिससे कुछ लोग बहुत अमीर और बहुसंख्यक लोग बहुत गरीब हों। इसके अतिरिक्त, यह मापदंड स्वास्थ्य, शिक्षा, शिशु मृत्यु दर और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मानव विकास संकेतकों को पूरी तरह नजरअंदाज करता है।
मुख्य बिंदु:
• विश्व बैंक द्वारा वर्गीकरण का प्रमुख आधार केवल प्रतिव्यक्ति आय है।
• यह विधि आय के वितरण में मौजूद असमानता को छिपा देती है।
• इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानवीय पहलू शामिल नहीं होते हैं।
आम गलतियाँ:
• विश्व बैंक और यूएनडीपी (UNDP) के मापदंडों को आपस में मिला देना।
• केवल आय को ही संपूर्ण विकास मान लेना और उसकी सीमाओं को न लिखना।
• प्रतिव्यक्ति आय का अर्थ स्पष्ट न कर पाना।
Exam Tips:
a) विश्व बैंक (आय आधारित) और UNDP (मानव विकास आधारित) के अंतर को हमेशा याद रखें।
b) उत्तर में प्रतिव्यक्ति आय की सीमाओं को बिंदुओं (Bullets) में लिखें ताकि परीक्षक को आसानी हो।
c) यह प्रश्न दीर्घ उत्तरीय या लघु उत्तरीय दोनों रूपों में आ सकता है, इसलिए पूरी व्याख्या तैयार रखें।
Question 5: विकास मापने का यू.एन.डी.पी. का मापदंड किस पहलू में विश्व बैंक के मापदंड से अलग है?
Answer:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा उपयोग किया जाने वाला मानव विकास सूचकांक (HDI) विश्व बैंक के मापदंड से इस मायने में भिन्न है कि विश्व बैंक केवल आर्थिक पहलू यानी प्रतिव्यक्ति आय को आधार बनाता है, जबकि UNDP आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक और मानवीय पहलुओं को भी शामिल करता है। UNDP के मापदंड में प्रतिव्यक्ति आय के अतिरिक्त लोगों का शैक्षिक स्तर (साक्षरता दर और सकल नामांकन अनुपात), स्वास्थ्य स्थिति (जीवन प्रत्याशा या जन्म के समय जीवन संभाविता) जैसे महत्वपूर्ण कारकों का अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार, विश्व बैंक का दृष्टिकोण संकीर्ण और केवल आर्थिक है, जबकि UNDP का दृष्टिकोण व्यापक और समग्र मानव कल्याण पर आधारित है।
मुख्य बिंदु:
• विश्व बैंक केवल प्रतिव्यक्ति आय (आर्थिक पक्ष) को देखता है।
• UNDP प्रतिव्यक्ति आय के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य (सामाजिक पक्ष) को भी शामिल करता है।
• UNDP का दृष्टिकोण अधिक व्यापक और न्यायसंगت माना जाता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों संगठनों के उद्देश्यों को एक ही समझना।
• UNDP के घटकों (स्वास्थ्य, शिक्षा, आय) के नाम सही से न लिख पाना।
• केवल आय की तुलना करके छोड़ देना।
Exam Tips:
a) दोनों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए तुलनात्मक भाषा का प्रयोग करें।
b) UNDP के तीनों मुख्य संकेतकों को हमेशा याद रखें।
c) यह प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, इसका अभ्यास लिखकर करें।
Question 6: हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं? विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
हम औसत का प्रयोग इसलिए करते हैं क्योंकि विभिन्न श्रेणियों या समूहों की तुलना करने के लिए एक सरल और एकल संख्या की आवश्यकता होती है, विशेषकर तब जब दो देशों या समूहों के लोगों की आय में बहुत अंतर हो। चूँकि अलग-अलग व्यक्तियों की आय अलग होती है, इसलिए कुल आय की तुलना करना कठिन होता है, और औसत हमें एक मानक तस्वीर देता है। परंतु, औसत की अपनी गंभीर सीमाएँ हैं; यह देश के भीतर आय के असमान वितरण को छुपा लेता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी देश में अधिकांश लोगों की आय बहुत कम है, लेकिन कुछ गिने-चुने लोग अत्यधिक अमीर हैं, तो औसत आय बहुत अधिक दिखाई देगी, जिससे देश की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलेगा। इसी प्रकार, विकास के संदर्भ में, यदि किसी देश की औसत आय बढ़ रही है, लेकिन उसका लाभ समाज के केवल एक छोटे वर्ग को मिल रहा है और गरीब लोग और अधिक गरीब हो रहे हैं, तो औसत इस असमानता को उजागर करने में असमर्थ रहता है।
मुख्य बिंदु:
• औसत विभिन्न समूहों या देशों के बीच तुलना को आसान बनाता है।
• इसकी सबसे बड़ी सीमा यह है कि यह आय की असमानता और विषमता को छुपा लेता है।
• औसत वास्तविक धरातल की स्थिति या व्यक्तिगत असमानता को स्पष्ट नहीं करता।
आम गलतियाँ:
• केवल औसत के लाभ बताकर उसकी सीमाओं को छोड़ देना।
• उचित उदाहरण के बिना उत्तर देना।
• औसत और कुल योग में अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) उत्तर में एक काल्पनिक उदाहरण (जैसे अमीर और गरीब व्यक्ति की आय का अंतर) जरूर दें।
b) औसत के उपयोग के कारण और उसकी कमियों को अलग-अलग पैराग्राफ में लिखें।
c) स्पष्ट करें कि कैसे औसत एक भ्रामक तस्वीर पेश कर सकता है।
Question 7: प्रतिव्यक्ति आय कम होने पर भी केरल का मानव विकास क्रमांक हरियाणा से ऊंचा है। इसलिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदंड बिल्कुल नहीं है और राज्यों की तुलना के लिए इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए।
Answer:
हम इस कथन से पूरी तरह असहमत हैं कि प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदंड नहीं है और इसका उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। यद्यपि केरल की प्रतिव्यक्ति आय हरियाणा से कम होने के बावजूद उसका मानव विकास क्रमांक (HDI) हरियाणा से बेहतर है, इससे यह साबित नहीं होता कि प्रतिव्यक्ति आय उपयोगी नहीं है। इसका अर्थ केवल यह है कि प्रतिव्यक्ति आय विकास का एकमात्र या संपूर्ण मापदंड नहीं है। केरल ने शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और साक्षरता जैसे क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है, जिसके कारण उसका मानव विकास सूचकांक ऊंचा है। इसके विपरीत, हरियाणा में प्रतिव्यक्ति आय अधिक होने के बावजूद सामाजिक और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में कुछ कमियाँ हो सकती हैं। अतः प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक विकास मापने के लिए एक आवश्यक प्रारंभिक उपकरण है, लेकिन इसे मानव कल्याण का एकमात्र पैмаना नहीं माना जा सकता; इसके साथ अन्य सामाजिक संकेतकों को भी जोड़ना आवश्यक है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक स्थिति जानने का एक उपयोगी और महत्वपूर्ण पैमाना है।
• केरल का उच्च मानव विकास स्तर बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का परिणाम है।
• केवल आय काफी नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं (स्वास्थ्य और शिक्षा) का भी होना जरूरी है।
आम गलतियाँ:
• कथन से पूरी तरह सहमत होकर प्रतिव्यक्ति आय के महत्व को सिरे से खारिज कर देना।
• केरल की सफलता के पीछे के कारणों (स्वास्थ्य और शिक्षा) को स्पष्ट न करना।
• आर्थिक और सामाजिक विकास के अंतर को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) ऐसे वैचारिक प्रश्नों में अपने उत्तर का पक्ष मजबूत तर्कों के साथ रखें।
b) केरल और हरियाणा का उदाहरण देकर समझाएं कि क्यों दोनों मापदंड (आय और सामाजिक स्थिति) महत्वपूर्ण हैं।
c) संतुलन बनाए रखें—आय महत्वपूर्ण है लेकिन सब कुछ नहीं है।
Question 8: भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के किन स्रोतों का प्रयोग किया जाता है? ज्ञात कीजिए। अब से 50 वर्ष पश्चात् क्या संभावनाएँ हो सकती हैं?
Answer:
वर्तमान समय में भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के अनेक पारंपरिक और आधुनिक स्रोतों का उपयोग किया जाता है। इनमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली (जलविद्युत और तापविद्युत), गोबर, और सौर ऊर्जा प्रमुख हैं। देश में ऊर्जा की कुल खपत में जीवाश्म ईंधन (कोयला और पेट्रोलियम) का हिस्सा सबसे अधिक है। परंतु, अब से 50 वर्ष पश्चात की संभावनाओं को देखें तो स्थिति काफी बदल सकती है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्तमान दर से उपयोग करने पर पारंपरिक कच्चे तेल और कोयले के भंडार आने वाले कुछ दशकों में समाप्त हो जाएंगे। इसलिए, भविष्य में हमें वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर पूरी तरह निर्भर होना पड़ेगा। आज से 50 वर्ष बाद सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, भू-तापीय ऊर्जा, हाइड्रोजन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और जलविद्युत ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक स्रोत ऊर्जा के मुख्य साधन बन जाएंगे, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी और ऊर्जा संकट का समाधान भी निकलेगा।
मुख्य बिंदु:
• वर्तमान में कोयला, पेट्रोलियम और बिजली ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं।
• पारंपरिक खनिज तेल और कोयले के भंडार सीमित हैं और जल्द समाप्त होने की कगार पर हैं।
• भविष्य में सौर, पवन, परमाणु और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की महत्ता बढ़ जाएगी।
आम गलतियाँ:
• केवल वर्तमान ऊर्जा स्रोतों को लिखकर भविष्य की संभावनाओं को छोड़ देना।
• नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा के अंतर को स्पष्ट न करना।
• जीवाश्म ईंधनों की सीमितता को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) उत्तर को दो भागों में बांटकर लिखें—वर्तमान उपयोग और भविष्य की संभावनाएँ।
b) नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उदाहरण (सौर, पवन आदि) अवश्य शामिल करें।
c) धारणीय विकास (Sustainable Development) के दृष्टिकोण से उत्तर को समाप्त करें।
Question 9: धारणीयता का विषय विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer:
धारणीयता (Sustainability) का अर्थ है कि विकास इस प्रकार होना चाहिए कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों, लेकिन साथ ही भावी पीढ़ियों की अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से कोई समझौता न हो। धारणीयता विकास के लिए इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि हम वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों (जैसे पानी, खनिज, जंगल, और जीवाश्म ईंधन) का अंधाधुंध और अनियंत्रित दोहन करेंगे, तो वे शीघ्र ही समाप्त हो जाएंगे। संसाधन समाप्त होने से एक समय के बाद आर्थिक विकास की गति रुक जाएगी और समाज में गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। इसके अलावा, पर्यावरण का क्षरण, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन मानव जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं। इसलिए, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण का संरक्षण करते हुए विकास करना ही धारणीय विकास कहलाता है, जो मानवता के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु:
• धारणीयता का उद्देश्य वर्तमान विकास के साथ भविष्य की पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना है।
• यह प्राकृतिक संसाधनों के तेजी से हो रहे ह्रास और उनके समाप्त होने के खतरे को रोकता है।
• पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
आम गलतियाँ:
• धारणीयता की परिभाषा को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित मान लेना।
• भावी पीढ़ियों की जरूरतों के महत्व को उत्तर में शामिल न करना।
• केवल आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देना।
Exam Tips:
a) धारणीयता की सटीक परिभाषा से उत्तर की शुरुआत करें।
b) संसाधन संरक्षण और भावी पीढ़ी जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) यह प्रश्न परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है, इसलिए इसके तर्कों को अच्छे से याद रखें।
Question 10: धरती के पास सब लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन है, लेकिन एक भी व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह कथन विकास की चर्चा में कैसे प्रासंगिक है? चर्चा कीजिए।
Answer:
महात्मा गांधी का यह कथन विकास की चर्चा में अत्यधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है। यह कथन इस बात को रेखांकित करता है कि प्रकृति के पास पृथ्वी पर रहने वाले सभी इंसानों की बुनियादी जरूरतों (जैसे भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य) को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। समस्या संसाधनों की कमी की नहीं, बल्कि मानव समाज में अनियंत्रित लालच, उपभोगवादी संस्कृति और संसाधनों के असमान वितरण की है। आधुनिक विकास के नाम पर लोग और उद्योग प्रकृति का अत्यधिक दोहन कर रहे हैं जो लालच का प्रतीक है। यदि विकास का उद्देश्य केवल कुछ लोगों की विलासिता और लालच को संतुष्ट करना होगा, तो संसाधन बहुत जल्दी नष्ट हो जाएंगे और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी। इसलिए, विकास ऐसा होना चाहिए जो मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति करे न कि लालच को बढ़ावा दे, और यही धारणीय विकास की मूल भावना है।
मुख्य बिंदु:
• प्रकृति के संसाधन सभी की बुनियादी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए पर्याप्त हैं।
• संसाधनों की कमी का कारण प्रकृति की गरीबी नहीं, बल्कि मनुष्य का लालच और अति-उपभोग है।
• यह कथन धारणीय विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल देता है।
आम गलतियाँ:
• गांधी जी के इस कथन के गहरे आर्थिक और पर्यावरणीय अर्थ को न समझ पाना।
• आवश्यकता और लालच के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• केवल सामान्य बातें लिखकर निष्कर्ष न देना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत महात्मा गांधी के इस प्रसिद्ध कथन के उल्लेख से करें।
b) 'आवश्यकता' बनाम 'लालच' के द्वंद्व को अपने शब्दों में स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) इसे धारणीय विकास के सिद्धांतों से जोड़कर अपना उत्तर समाप्त करें।
Question 11: पर्यावरण में गिरावट के कुछ उदाहरणों की सूची बनाइए जो आपने आसपास देखे हों।
Answer:
हमारे आसपास और दैनिक जीवन में पर्यावरण में गिरावट के कई स्पष्ट उदाहरण देखने को मिलते हैं। इनमें प्रमुख हैं—(1) अत्यधिक वनों की कटाई जिसके कारण हरियाली कम हो रही है और वन्यजीवों का आवास उजड़ रहा है, (2) रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग तथा औद्योगिक कचरे के कारण भूमि का बंजर होना और मृदा अपरदन, (3) भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट जिसके कारण कई क्षेत्रों में पेयजल का संकट उत्पन्न हो रहा है, (4) वाहनों के धुएं, कारखानों की चिमनियों और पराली जलाने से होने वाला गंभीर वायु प्रदूषण, और (5) नदियों एवं जलाशयों में घरेलू कचरा और सीवेज का पानी मिलने से होने वाला जल प्रदूषण।
मुख्य बिंदु:
• वनों की कटाई से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
• अत्यधिक दोहन के कारण जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
• वायु, जल और मृदा प्रदूषण हमारे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचा रहे हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल किताबी भाषा लिखना और अपने आसपास के परिवेश के वास्तविक उदाहरण न देना।
• पर्यावरण गिरावट के विभिन्न रूपों (मृदा, जल, वायु) को शामिल न करना।
• बिंदुओं को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध न करना।
Exam Tips:
a) अपने आसपास दिखने वाली समस्याओं को सूची के रूप में (Points में) लिखें।
b) वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और मृदा अपरदन जैसे मानक शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 12: तालिका 1.6 में दी गई प्रत्येक मद के लिए ज्ञात कीजिए कि कौन-सा देश सबसे ऊपर और कौन-सा देश सबसे नीचे है।
Answer:
पाठ्यपुस्तक में दी गई तालिका 1.6 (विभिन्न देशों के विकास के आंकड़े) के आधार पर विभिन्न मदों के आंकड़े इस प्रकार हैं—(1) प्रति व्यक्ति आय के मामले में शीर्ष देश श्रीलंका है और सबसे नीचे म्यांमार है। (2) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा के मामले में शीर्ष देश श्रीलंका है और सबसे नीचे म्यांमार है। (3) 25 वर्ष से अधिक उम्र की जनसंख्या के साक्षरता दर के मामले में शीर्ष देश श्रीलंका है और सबसे नीचे बांग्लादेश है। (4) विश्व में मानव विकास सूचकांक (HDI) क्रमांक के मामले में शीर्ष देश श्रीलंका है और सबसे नीचे नेपाल है। यह तालिका स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि दक्षिण एशियाई देशों में श्रीलंका का मानव विकास और सामाजिक सूचकांकों में प्रदर्शन अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में सबसे अच्छा है।
मुख्य बिंदु:
• श्रीलंका दक्षिण एशिया में प्रतिव्यक्ति आय, जीवन प्रत्याशा और साक्षरता में सबसे आगे है।
• म्यांमार और नेपाल जैसे देश कई संकेतकों में सबसे नीचे हैं।
• विभिन्न देश अलग-अलग संकेतकों में अलग-अलग स्थिति रखते हैं।
आम गलतियाँ:
• तालिका के आंकड़ों को ध्यान से पढ़े बिना उत्तर लिखना।
• विभिन्न मदों (आय, साक्षरता, जीवन प्रत्याशा) के शीर्ष और निचले देशों को आपस में मिला देना।
• प्रश्नों के सभी भागों का उत्तर न देना।
Exam Tips:
a) एनसीईआरटी पुस्तक की तालिकाओं को परीक्षा से पहले एक बार अवश्य देख लें।
b) उत्तर लिखते समय मद (Indicator) का नाम लिखकर उसके सामने शीर्ष और निम्न देश का नाम स्पष्ट लिखें।
c) यह प्रश्न डेटा आधारित विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 13: नीचे दी गई तालिका में भारत में वयस्कों (15-49 वर्ष आयु वाले) जिनका बी.एम.आई. सामान्य से कम है (बी.एम.आई. меньше 18.5 kg/m²) का अनुपात दिखाया गया है। यह वर्ष 2015-16 में देश के विभिन्न राज्यों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है। तालिका का अध्ययन करके निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए—
(क) केरल मध्य प्रदेश के लोगों के पोषण स्तर की तुलना कीजिए।
(ख) क्या आप अंदाज लगा सकते हैं कि देश में लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति अल्पपोषित क्यों है, हालांकि यह तर्क दिया जाता है कि देश में पर्याप्त खाद्य है? अपने शब्दों में विवरण दीजिए।
Answer:
(क) तालिका के आंकड़ों के अनुसार, केरल और मध्य प्रदेश के पोषण स्तर में बहुत बड़ा अंतर है। मध्य प्रदेश में कम बी.एम.आई. (सामान्य से कम वजन) वाले पुरुषों का प्रतिशत 28% और महिलाओं का प्रतिशत 28% है, जबकि केरल में यह प्रतिशत पुरुषों के लिए केवल 8.5% और महिलाओं के लिए 10% है। इससे स्पष्ट होता है कि केरल में लोगों का पोषण स्तर मध्य प्रदेश की तुलना में बहुत बेहतर है और वहाँ अल्पपोषण की समस्या काफी कम है, जबकि मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग कुपोषण और अल्पपोषण के शिकार हैं।
(ख) देश में पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध होने के बावजूद हर पाँच में से एक व्यक्ति के अल्पपोषित होने का मुख्य कारण देश में आय का असमान वितरण और लोगों की गरीबी है। देश के एक बहुत बड़े हिस्से के पास इतनी क्रय शक्ति (Income) नहीं है कि वे पौष्टिक भोजन खरीद सकें। इसके अलावा, देश के अधिकांश राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का संचालन ठीक से नहीं हो पाता है, जिससे गरीबों को सस्ते दरों पर पर्याप्त और पौष्टिक अनाज नहीं मिल पाता। साथ ही, देश के कई हिस्सों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की कमी तथा खाद्य पदार्थों के उचित वितरण प्रबंधन के अभाव के कारण लोग भरपेट या पौष्टिक भोजन से वंचित रह जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• मध्य प्रदेश में कम बी.एम.आई. (कुपोषण) का प्रतिशत केरल की तुलना में बहुत अधिक है।
• खाद्यान्न की उपलब्धता और लोगों की क्रय शक्ति में अंतर होने के कारण कुपोषण की समस्या बनी रहती है。
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और गरीबी की स्थिति कुपोषण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
आम गलतियाँ:
• तालिका के आंकड़ों का सही विश्लेषण न करना और दोनों राज्यों की तुलना गलत तरीके से करना।
• खाद्यान्न की उपलब्धता और लोगों की खरीदने की क्षमता (क्रय शक्ति) के अंतर को न समझना।
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली की भूमिका को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) (क) और (ख) दोनों भागों के उत्तर अलग-अलग पैराग्राफ में स्पष्ट रूप से लिखें।
b) डेटा (आंकड़ों) का हवाला देते समय सटीक प्रतिशत का उल्लेख करें।
c) तार्किक रूप से समझाएं कि खाद्यान्न होने पर भी गरीबी और वितरण व्यवस्था के कारण लोग भूखे या कुपोषित क्यों रह जाते हैं।
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