ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper 2023 with Solutions

Official ISC Exam Papers for Class 12 Hindi

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Solved Previous Year Papers for Hindi

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ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions

 

SECTION - A

LANGUAGE - 40 MARKS

 

Question 1 [15 Marks]
Write a composition in approximately 400 words in Hindi on any one of the topics given below.
किसी एक विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो :-
(i) आपके पिता ने सपरिवार देशाटन की योजना बनाई और आप सब पूरी तैयारी के साथ यात्रा पर निकल पड़े । देश के अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य ने आपको मंत्रमुग्ध कर दिया । उस यात्रा के दौरान जो आनन्द की अनुभूति आपने की, उसका वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
(ii) सर्वदा सकारात्मक सोच रखने वाले मनुष्य के जीवन से सभी मुश्किलें बड़ी आसानी से दूर हो जाती हैं और यदि सोच नकारात्मक हो, तो जीवन में दुःख के सिवा कुछ प्राप्त नहीं होता। इस विषय के सम्बन्ध में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(iii) बचपन से लेकर किशोरावस्था तक आपकी विचारधारा में बहुत परिवर्तन आया है। आप पहले से अधिक समझदार और परिपक्व हुए हैं। बचपन की कुछ ऐसी घटनाओं का वर्णन कीजिए जिसे याद कर आपको आज भी हँसी आती है और अब लगता है कि आप बड़े हो गए हैं।
(iv) 'गाँवों में रहकर जीवन बिताना, शहरी जीवन की तुलना में, अधिक आनन्ददायक तथा आसान होता है।' - इस विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(v) किसी गलतफहमी के कारण कई वर्षों तक अपनी एक अच्छे मित्र से बातचीत नहीं हुई। अब आप दोनों की बातचीत फिर से शुरू हो गई है। आपकी मित्रता में यह गलतफहमी क्यों उत्पन्न हुई तथा अब सब कुछ सामान्य हो जाने पर आप कैसा महसूस करते हैं ? समझकर लिखिए।
(vi) निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए :-
(a) 'परिश्रम मनुष्य कभी ईश्वर की कृपा से वंचित नहीं रह सकता ।'
(b) निम्नलिखित वाक्य से अन्त करते हुए एक कहानी लिखिए ।
....................... और उनका वह एहसान मैं जीवन भर न भुला सका / सकी।

Answer:
(विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे दिए गए विषयों में से किसी एक पर रूपरेखा तैयार कर लगभग 400 शब्दों में एक सुसंगत एवं मौलिक निबंध या कहानी लिखें। यहाँ विकल्प (i) 'प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण देशाटन की यात्रा' पर एक आदर्श रूपरेखा दी जा रही है।)

प्रकृति की गोद में एक यादगार यात्रा

प्रस्तावना - जीवन की भागदौड़ और यांत्रिक व्यस्तता से ऊबकर जब मेरे पिताजी ने सपरिवार देशाटन (पर्यटन) की योजना बनाई, तो हमारे उत्साह की कोई सीमा नहीं रही। हमने पूरी तैयारी के साथ उत्तराखंड की वादियों के लिए प्रस्थान किया।

यात्रा का प्रारंभ और रोमांच - दिल्ली से हमारी गाड़ी पर्वतीय क्षेत्रों की ओर बढ़ी। जैसे-जैसे मैदान पीछे छूट रहे थे, वैसे-वैसे ठंडी हवा के झोंके हमारा स्वागत कर रहे थे। मार्ग में ऊँचे-ऊँचे चीड़ और देवदार के वृक्षों को देखना अपने आप में एक अनूठा अनुभव था।

प्रकृति का अद्भुत सौन्दर्य - जब हम नैनीताल और अल्मोड़ा पहुँचे, तो वहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य देखकर हम मंत्रमुग्ध रह गए। सुबह की पहली किरण जब पहाड़ों की चोटियों पर पड़ती थी, तो पूरा परिदृश्य सोने की तरह चमक उठता था। कल-कल करती नदियाँ, हरी-भरी घाटियाँ और बादलों का पहाड़ों से आँख-मिचौली खेलना मन को मोह लेता था।

आन्तरिक शांति और आनंद - इस यात्रा के दौरान जो मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति मुझे हुई, वैसी शहर की चकाचौंध में कभी नहीं मिली। प्रकृति के सान्निध्य ने मुझे सिखाया कि जीवन की असली खुशी भौतिक सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि प्राकृतिक सहजता में निहित है।

उपसंहार - यह यात्रा न केवल हमारे परिवार के लिए मनोरंजन का साधन बनी, बल्कि हमारे आपसी रिश्तों को भी प्रगाढ़ कर गई। यह स्मृति आज भी मेरे दिल के बेहद करीब है।

Teacher's Note:
a) निबंध लेखन में भाषा की शुद्धता, मुहावरों का सटीक प्रयोग और विचारों का तार्किक प्रवाह अत्यंत आवश्यक है।
b) विद्यार्थियों को शब्द-सीमा (लगभग 400 शब्द) का ध्यान रखना चाहिए तथा परिचय, मुख्य भाग और निष्कर्ष के रूप में निबंध को विभाजित करना चाहिए।

 

Question 2
Read the passage given below carefully and answer the questions that follow, using your own words in Hindi.
नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और अपने शब्दों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए :-
कुछ समय पहले की बात है। मेट्रो रेल में सफर करते समय एक अलग अनुभव हुआ। एक छोटी-सी बच्ची ने अपनी चुटीली हरकतों से रेल के उस पूरे डिब्बे को खुशनुमा कर रखा था। कभी वह अपने परिवार के लोगों के कहने पर तोतली जुबान में कोई फिल्मी गीत सुनाती, तो कभी किसी गीत के बोल पर ठुमके लगाती। उस डिब्बे में मौजूद लोगों के बीच जहाँ तक उसकी जीवंतता की लहरें पहुँच रही थीं, वहाँ तक हर चेहरे पर मुस्कान सज गई थी। निश्चित रूप से उसकी बाल-সুলভ चपलता और हाजिरजवाबी का आनन्द उठाते सभी चेहरे किसी न किसी गंतव्य तक पहुँचने के लिए ही वहाँ थे या गंतव्य से वापस लौट रहे थे। उनमें नौकरीपेशा वर्ग, विद्यार्थी, गृहणियाँ और उन तमाम वर्गों के लोग शामिल थे, जो अपनी यात्रा के लिए मेट्रो का सफर सुविधाजनक समझते हैं। ज़ाहिर है, सभी के मन-मस्तिष्क में कुछ-न-कुछ चल रहा होगा! यानी समय पर कहीं पहुँचने की फ़िक्र, पहुँचने के बाद किसी से मिलने या काम करने की फ़िक्र, ऑफिस या घर के किसी काम की फ़िक्र आदि। लेकिन उस बच्ची की प्यारी हरकतों ने कुछ समय के लिए उन सब गंभीर विचारों को मस्तिष्फ से निकालकर आसपास खड़े लोगों के बीच अपनी जगह बना ली थी। उसने कुछ क्षणों के लिए हम सबके अन्दर सोए हुए बच्चे को जगा दिया था।
इन सबके बीच केवल एक महोदय का चेहरा था, जो उदास था। ऐसा लग रहा था कि कठोरता की परछाई उन्हें छोड़ जाने को बिल्कुल तैयार नहीं थी। मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ उनकी उदासीनता पर। शायद कोई परेशानी रही हो, जो उन्हें इस मुस्कान से दूर रखे थी या फिर हो सकता है कि उनका स्वभाव ही ऐसा हो।
एक छोटा-बच्चा बहुत कोमल होता है, तन और मन दोनों से वह इतना संवेदनशील होता है कि न्यूनतम प्रेम, भय और दुलकर को भी भली-भाँति समझता और अनुभव करता है। के अपनी प्रति अपनी प्रतिक्रिया देता है। लेकिन ज्यों-ज्यों हमारी उम्र बढ़ती जाती है, यह संवेदनशीलता हम सबमें कम होती जाती है। कारण कई हो सकते हैं - पारिवारिक, सामाजिक, मानसिक या आर्थिक। बहुत हद तक हमारा कामकाज का क्षेत्र या व्यवसाय भी इसके लिए उत्तरदायी होता है। उदाहरण के तौर पर जहाँ मनोरंजन और कला के क्षेत्र से जुड़े लोग अपनी संवेदनशीलता को बचाए रख्ने में सक्षम होते हैं, वहीं आज की कठोर दुनिया की कड़वी सच्चाइयों को बटोरते हुए और दिन-रात उसी में माथा खपाते हुए लोग धीरे-धीरे संवेदनशीलता से दूर होते चले जाते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि हम प्रकृति प्रदत इस मानवीय गुण को किस प्रकार सींचें, जिससे वह वक्त और समाज के बेरहम थपेड़ों से कुम्हलाने की बजाय हमेशा हरा-भरा रहे! इसके लिए हमें जरूरत है संवेदनाओं के सम्पर्क में रहने, भावनात्मक साहित्य पढ़ने, ऐसी फिल्में देखने, ऐसे मित्रों के साथ समय बिताने, जिनके अन्दर बचपन और भावनाएँ अभी तक जीवित हैं। ऐसा संगीत सुनने की जरूरत है, जो हमें याद दिलाए कि हमारे अन्दर भी एक हृदय धड़कता है। वे सब अनुभव, जो कभी हमारे अधरों पर मुस्कान, तो कभी हमारी आँखों में नमी के बादल ला दें, का जिन्दा रहना बहुत जरूरी है।

 

(i) लेखक किसमें सफर कर रहे थे ? सफर के दौरान देखकर उन्हें क्यों खुशी हुई ? समझकर लिखिए। [3 Marks]

Answer:
लेखक मेट्रो रेल में सफर कर रहे थे। सफर के दौरान एक छोटी-सी बच्ची अपनी तोतली जुबान में गीत सुनाने और ठुमके लगाने जैसी चुटीली और बाल-सुलभ हरकतों से पूरे डिब्बे का माहौल खुशनुमा बनाए हुए थी। उसकी इस जीवंतता को देखकर डिब्बे में बैठे सभी यात्रियों के चेहरों पर मुस्कान आ गई थी, जिसे देखकर लेखक को बहुत खुशी हुई।

Teacher's Note:
a) उत्तर गद्यांश के आरंभिक अंश पर आधारित है, जिसमें बाल-सुलभ हरकतों से उत्पन्न आनंद का वर्णन है।
b) विद्यार्थियों को अपने शब्दों में सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

 

(ii) लेखक को किसे देखकर आश्चर्य हुआ और क्यों ? उन्हें देखकर लेखक ने क्या सोचा ? [3 Marks]

Answer:
लेखक को मेट्रो डिब्बे में यात्रा कर रहे एक उदास महोदय को देखकर आश्चर्य हुआ, क्योंकि डिब्बे के बाकी सभी लोग बच्ची की हरकतों से आनंदित और प्रसन्न थे, जबकि उन महोदय के चेहरे पर कठोरता और उदासी छाई हुई थी। उन्हें देखकर लेखक ने सोचा कि शायद उन्हें कोई गंभीर परेशानी होगी जो उन्हें इस खुशी से दूर रखे थी या फिर उनका स्वभाव ही ऐसा कठोर रहा होगा।

Teacher's Note:
a) यह गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में वर्णित उस यात्री से संबंधित है जो सामान्य माहौल से अलग उदास बैठा था।
b) उत्तर में यात्री की उदासीनता और लेखक के मन में उठे विचारों दोनों बिंदुओं को शामिल करना आवश्यक है।

 

(iii) उम्र बढ़ने के साथ संवेदनशीलता कम होने के क्या कारण हैं ? समझकर लिखिए। [3 Marks]

Answer:
उम्र बढ़ने के साथ संवेदनशीलता कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे पारिवारिक, सामाजिक, मानसिक या आर्थिक दबाव। इसके अलावा व्यक्ति का कामकाज का क्षेत्र और व्यवसाय भी इसके लिए उत्तरदायी होता है। आधुनिक जीवन की कठोर सच्चाइयों से जूझते हुए और दिन-रात उसी में माथा खपाते रहने के कारण लोग धीरे-धीरे अपनी संवेदनशीलता खो देते हैं।

Teacher's Note:
a) यह उत्तर गद्यांश के तीसरे अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से दिया गया है।
b) उत्तर लिखते समय आयु वृद्धि के साथ आने वाले उत्तरदायी कारकों (आर्थिक, सामाजिक, कार्यक्षेत्र) का उल्लेख अवश्य करें।

 

(iv) "आज की कठोर दुनिया की कड़वी सच्चाइयों को बटोरते हुए और दिन-रात उसी में माथा खपाते हुए लोग धीरे-धीरे संवेदनशीलता से दूर होते जाते हैं।"
(a) 'संवेदनशीलता' शब्द का सही अर्थ है [1 Mark]
(1) भावुकता
(2) मूर्खता
(3) उदारता
(4) असहजता

Answer: (1) भावुकता

Teacher's Note:
a) 'संवेदनशीलता' का निकटतम व सटीक अर्थ 'भावुकता' या सहृदयता है।
b) विकल्पों में से सही शब्द का चयन गद्यांश के संदर्भ के अनुसार किया गया है।

 

(b) लोग किसमें दिन-रात माथा खपा रहे हैं ? [1 Mark]
(1) पैसे गँवाने में ।
(2) बदनाम करने में ।
(3) कड़वी सच्चाइयों को बटोरने में ।
(4) खुशियों को लुटाने में ।

Answer: (3) कड़वी सच्चाइयों को बटोरने में ।

Teacher's Note:
a) यह प्रश्न गद्यांश की पंक्ति से सीधा लिया गया है।
b) गद्यांश में उल्लिखित वाक्यांश के आधार पर विकल्प (3) पूर्णतः सही है।

 

(c) 'माथा खपाना' का अभिप्राय क्या है ? [1 Mark]
(1) माथा पीटना ।
(2) सिर धुनना ।
(3) माथापच्ची करना ।
(4) खिंच-खिच करना ।

Answer: (3) माथापच्ची करना ।

Teacher's Note:
a) 'माथा खपाना' एक प्रचलित मुहावरा है जिसका अर्थ अत्यधिक मानसिक श्रम या माथापच्ची करना होता है।
b) मुहावरे के उचित अर्थ का चयन विकल्प (3) के रूप में किया गया है।

 

(v) "वे सब अनुभव, जो कभी हमारे अधरों पर मुस्कान, तो कभी हमारी आँखों में नमी के बादल ला दें, का जिन्दा रहना बहुत जरूरी है।"
(a) हमारे अधरों पर मुस्कान किससे आती है ? [1 Mark]
(1) उदासीनता से ।
(2) असंवेदनशीलता से ।
(3) भावनात्मक साहित्य पढ़ने से ।
(4) वैमनस्यता से ।

Answer: (3) भावनात्मक साहित्य पढ़ने से ।

Teacher's Note:
a) गद्यांश में संवेदनाओं को जीवंत रखने के लिए भावनात्मक साहित्य पढ़ने का उल्लेख किया गया है।
b) यह गद्यांश के अंतिम पैराग्राफ से संबंधित प्रश्न है।

 

(b) 'आँखों में नमी के बादल' से लेखक का क्या अभिप्राय है ? [1 Mark]
(1) दुःख में आँसू आना ।
(2) गुस्से में आँसू आना ।
(3) भावुकता में आँसू आना ।
(4) बिछड़ने पर आँसू आना ।

Answer: (3) भावुकता में आँसू आना ।

Teacher's Note:
a) 'आँखों में नमी के बादल' का तात्पर्य हृदय की कोमलता और भावुकता के कारण आँखों में आँसू आने से है।
b) रूपकात्मक प्रयोग के आधार पर सही विकल्प (3) है।

 

(c) इस गद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है ? [1 Mark]
(1) संवेदनशीलता
(2) सरलता
(3) प्रौढ़ता
(4) सम्पन्नता

Answer: (1) संवेदनशीलता

Teacher's Note:
a) सम्पूर्ण गद्यांश मानवीय संवेदनाओं और उनके कम होने तथा बनाए रखने के उपायों पर केंद्रित है।
b) अतः सबसे उपयुक्त शीर्षक 'संवेदनशीलता' होगा।

 

Question 3
(A) Do as directed:
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :
(i) निम्नलिखित वाक्य का शुद्ध रूप लिखिए। [1 Mark]
आजादी के अमृत महोत्सव में अनेकों राज्यों ने भाग लिया।

Answer:
आजादी के अमृत महोत्सव में अनेक राज्यों ने भाग लिया।

Teacher's Note:
a) 'अनेक' शब्द स्वयं बहुवचन है, इसलिए 'अनेकों' लिखना व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है।
b) वर्तनी और वचन संबंधी अशुद्धियों को पहचानना आवश्यक है।

 

(ii) रिक्त स्थान में सही शब्द भरिए। [1 Mark]
अब तुम जले पर ................... मत छिड़को।

Answer:
नमक

Teacher's Note:
a) यह प्रसिद्ध मुहावरा 'जले पर नमक छिड़कना' है जिसका अर्थ दुःखी को और अधिक परेशान करना है।
b) रिक्त स्थान में 'नमक' शब्द आएगा।

 

(iii) निम्नलिखित वाक्यों में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए। [1 Mark]
(a) यह तो वही बात हुई 'जैसा करोगे वैसा भरोगे'।
(b) यह तो वही बात हुई 'जितना करोगे उतना भरोगे'।
(c) यह तो वही बात हुई 'जैसा भरोगे वैसा करोगे'।
(d) यह तो वही बात हुई 'जो करोगे सो भरोगे'।

Answer: (a) यह तो वही बात हुई 'जैसा करोगे वैसा भरोगे'।

Teacher's Note:
a) लोकक्ति का सही और प्रचलित रूप 'जैसा करोगे वैसा भरोगे' है।
b) विकल्प (a) व्याकरण और परंपरा दोनों दृष्टियों से सही है।

 

(iv) निम्नलिखित वाक्यों में से अशुद्ध वाक्य का चयन कीजिए। [1 Mark]
(a) महाराणा प्रताप युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त हुए।
(b) झाँसी की रानी एक वीरांगना थीं।
(c) अक्सर लोग राजगढ़ी पाने के लिए अपने प्रियजनों की मृत्यु कर देते हैं।
(d) अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे।

Answer: (c) अक्सर लोग राजगढ़ी पाने के लिए अपने प्रियजनों की मृत्यु कर देते हैं।

Teacher's Note:
a) वाक्य (c) में 'मृत्यु कर देते हैं' के स्थान पर 'हत्या कर देते हैं' या 'मृत्यु का कारण बनते हैं' होना चाहिए, क्योंकि मृत्यु स्वतः होती है जबकि हत्या की जाती है।
b) यह वाक्य अशुद्ध है।

 

(v) निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के लिए सही शब्द का चयन कीजिए। [1 Mark]
मैं उपेक्षा करता हूँ कि तुम यह कार्य पूर्ण कर लोगे।
(a) संदेह
(b) विश्वास
(c) अपेक्षा
(d) वादा

Answer: (c) अपेक्षा

Teacher's Note:
a) 'उपेक्षा' का अर्थ तिरस्कार होता है, जबकि वाक्य के संदर्भ में किसी से आशा या उम्मीद रखने के लिए 'अपेक्षा' शब्द का प्रयोग होता है।
b) सही शब्द 'अपेक्षा' है।

 

(B) Do as directed :
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :-
(i) निम्नलिखित मुहावरे से वाक्य बनाइए। [1 Mark]
बाग-बाग होना।

Answer:
परीक्षा में प्रथम आने का समाचार सुनकर मेरा मन बाग-बाग हो गया।

Teacher's Note:
a) 'बाग-बाग होना' मुहावरे का अर्थ बहुत अधिक प्रसन्न होना है।
b) वाक्य ऐसा होना चाहिए जिससे मुहावरे का अर्थ स्पष्ट झलके।

 

(ii) निम्नलिखित मुहावरे को शुद्ध कीजिए। [1 Mark]
दिन दूनी रात तिगुनी तरक्की करना।

Answer:
दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करना।

Teacher's Note:
a) प्रचलित और सही मुहावरा 'दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करना' है।
b) 'तिगुनी' शब्द यहाँ अशुद्ध है, इसके स्थान पर 'चौगुनी' होगा।

 

(iii) निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए। [1 Mark]
कई बार अपना काम सीधे तरीके से नहीं हो पाता तब ........... पड़ता है।
(a) टूट पड़ना
(b) टेढ़ी उँगली से घी निकालना
(c) टोपी उछालना
(d) जड़ खोदना

Answer: (b) टेढ़ी उँगली से घी निकालना

Teacher's Note:
a) सीधे तरीके से काम न होने पर कठिनाई से काम निकालने के अर्थ में 'टेढ़ी उँगली से घी निकालना' मुहावरा उपयुक्त है।
b) सही विकल्प (b) है।

 

(iv) निम्नलिखित वाक्य के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए। [1 Mark]
'बिना सोचे समझे किसी कार्य को करने वाले अन्त में पछताते हैं।'
(a) हाथ मलना ।
(b) हाथ साफ करना ।
(c) हाथ डालना ।
(d) हाथ खाली होना ।

Answer: (a) हाथ मलना ।

Teacher's Note:
a) पछतावा करने के अर्थ में 'हाथ मलना' मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
b) सही विकल्प (a) है।

 

(v) निम्नलिखित मुहावरे के सही अर्थ का चयन कीजिए। [1 Mark]
राई का पहाड़ बनाना
(a) छोटे व्यक्ति का उन्नति करना ।
(b) छोटी-सी बात को बेवजह बढ़ाना ।
(c) छोटे-छोटे प्रयासों से सफलता पाना ।
(d) छोटा-सा रहस्य प्रकट होना ।

Answer: (b) छोटी-सी बात को बेवजह बढ़ाना ।

Teacher's Note:
a) 'राई का पहाड़ बनाना' का अर्थ किसी मामूली बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करना है।
b) सही विकल्प (b) है।

 

SECTION B

LITERATURE - 40 MARKS

Answer four questions from this Section on any three of the prescribed textbooks.
पाठ्यक्रम में निर्धारित चार पुस्तकों में से किन्हीं तीन पुस्तकों के चार प्रश्नों के उत्तर इस भाग से दीजिए।

 

गद्य संकलन (Gadya Sankalan)

 

Question 4
"सच ! मेरी बड़ी चिंता दूर हुई। इस बार भगवान् ने मेरी सुन ली। ज़रूर परसाद चढ़ाऊँगी रे !'"
(i) उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए। [1 Mark]

Answer:
उक्त पंक्तियाँ 'गद्य संकलन' में संकलित और सियारामशरण गुप्त द्वारा रचित कहानी 'पुत्र-प्रेम' से ली गई हैं।

Teacher's Note:
a) पाठ और लेखक का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया जाना चाहिए।
b) वर्तनी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।

 

(ii) अम्मा इस समय किस से बात कर रही हैं तथा वे परसाद क्यों चढ़ाना चाहती हैं ? [2 Marks]

Answer:
अम्मा इस समय अपने बड़े बेटे सुबोधसिंह से बात कर रही हैं। वे प्रसाद इसलिए चढ़ाना चाहती हैं क्योंकि उनके छोटे बेटे विपिन ने अंग्रेजी की परीक्षा में पास होने की खबर सुनाई थी, जिससे उनकी वर्षों की चिंता दूर हो गई थी और उन्हें लगा कि भगवान ने उनकी सुन ली है।

Teacher's Note:
a) प्रश्न के दोनों भागों (किससे बात कर रही हैं तथा प्रसाद क्यों चढ़ाना चाहती हैं) का सटीक उत्तर देना आवश्यक है।
b) कहानी की कथावस्तु से यह प्रसंग जुड़ा हुआ है।

 

(iii) 'इस बार भगवान् ने मेरी सुन ली' - इस बार ऐसा क्या हुआ था जो पिछली बार नहीं हो पाया था ? [2 Marks]

Answer:
पिछली बार विपिन अंग्रेजी की परीक्षा में अनुत्तीर्ण (फेल) हो गया था, जिसके कारण अम्मा की चिंता बढ़ गई थी। इस बार विपिन परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया था, जिससे अम्मा को लगा कि इस बार भगवान ने उनकी प्रार्थना सुन ली है।

Teacher's Note:
a) पिछले वर्ष के फेल होने और इस वर्ष पास होने के अंतर को स्पष्ट करना है।
b) उत्तर संक्षिप्त और तथ्यात्मक होना चाहिए।

 

(iv) 'आर्थिक तथा सामाजिक मजबूरियों के कारण दो पीढ़ियों को अलगाव का दर्द सहना पड़ता है' इस कथन की पुष्टि इस कहानी के आधार पर कीजिए। [5 Marks]

Answer:
'पुत्र-प्रेम' कहानी में चैतन्यदास और उनके पुत्रों के बीच पीढ़ियों के अंतर, आर्थिक परिस्थितियों और सामाजिक मान्यताओं के कारण उत्पन्न अलगाव का बहुत ही मार्मिक चित्रण हुआ है। चैतन्यदास अपने बड़े पुत्र सुबोधसिंह को पश्चिमी शिक्षा दिलाकर आधुनिक विचारों का बनाना चाहते हैं, लेकिन सामाजिक रूढ़िवादिता और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच दोनों पीढ़ियों की सोच में टकराव उत्पन्न हो जाता है। सुबोधसिंह अंग्रेजी शिक्षा और आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाकर अपने पिता से मानसिक रूप से दूर हो जाते हैं। आर्थिक समृद्धि और आधुनिकता की अंधी दौड़ पारिवारिक रिश्तों में दूरी ले आती है। इस प्रकार, कहानी स्पष्ट करती है कि कैसे आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियाँ पिता और पुत्र जैसी दो पीढ़ियों को भावनात्मक अलगाव का दर्द सहने पर विवश कर देती हैं।

Teacher's Note:
a) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में कहानी के मुख्य संदेश और सामाजिक प्रसंग का विश्लेषण करना आवश्यक है।
b) चैतन्यदास और सुबोधसिंह के अंतर्द्वंद्व का संदर्भ देते हुए उत्तर को परिपक्वता से लिखें।

 

Question 5 [10 Marks]
'पुत्र-प्रेम' कहानी में लेखक ने चैतन्यदास के माध्यम से एक ऐसे पिता का चित्रण किया है, जिन्होंने अपने पुत्र-प्रेम की तुलना में अर्थ-प्रेम को अधिक महत्त्व दिया। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? कहानी के आधार पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

Answer:
हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं कि 'पुत्र-प्रेम' कहानी में चैतन्यदास के चरित्र में अर्थ-प्रेम (धन के प्रति मोह) पुत्र-प्रेम पर भारी पड़ता दिखाई देता है। चैतन्यदास यद्यपि अपने बच्चों के पिता हैं और उनके भविष्य को लेकर चिंतित भी रहते हैं, परंतु उनके जीवन का केंद्रीय बिंदु धन और संपत्ति का अर्जन ही रहा है। वे अपने पुत्रों को उच्च शिक्षा इसलिए दिलाना चाहते हैं ताकि वे समाज में प्रतिष्ठा और धन अर्जित कर सकें। कहानी के अंत में जब विपिन अनुत्तीर्ण हो जाता है या जब पारिवारिक खर्चों और धन के लेन-देन की बात आती है, तो चैतन्यदास का कठोर और व्यावहारिक रूप सामने आता है जहाँ मानवीय संवेदनाओं की तुलना में धन का महत्व अधिक दिखाई देता है। वे पुत्र के मानसिक संताप को समझने के बजाय अपनी आर्थिक प्रतिष्ठा और धन को अधिक प्राथमिकता देते हैं। इस प्रकार, शीर्षक और कहानी की मूल भावना के विपरीत उनके चरित्र में अर्थ-प्रेम का पलड़ा भारी नजर आता है।

Teacher's Note:
a) चरित्र विश्लेषण करते समय चैतन्यदास की दोहरी मानसिकता (पुत्र-प्रेम और धन-लोलुपता) को उजागर करना चाहिए।
b) कहानी की घटनाओं का उदाहरण देते हुए अपने उत्तर की पुष्टि करें।

 

Question 6 [10 Marks]
'दासी' कहानी का शीर्षक उपयुक्त तथा सार्थक है - इस कथन के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त कीजिए। क्या इस कहानी का कोई और शीर्षक हो सकता है ? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।

Answer:
जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी 'दासी' का शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त, सार्थक और प्रतीकात्मक है। कहानी की मुख्य पात्र रूपा अपने जीवनभर समर्पण, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का परिचय देती है। वह दूसरों के घरों में रहकर कार्य करती है और अपनी संपूर्ण जिंदगी दूसरों की सेवा में समर्पित कर देती है। समाज द्वारा उसे 'दासी' या सेविका के रूप में देखा जाता है, परंतु उसके भीतर का त्याग, वात्सल्य और महानता उसे साधारण दासी से कहीं ऊपर उठा देती है। शीर्षक कहानी की मूल संवेदना और मुख्य पात्र की स्थिति को सटीक रूप से रेखांकित करता है।
जहाँ तक दूसरे शीर्षक का प्रश्न है, इस कहानी का अन्य शीर्षक 'त्यागमयी रूपा' या 'ममता की मूरत' भी हो सकता था, क्योंकि रूपा का चरित्र केवल एक दासी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें असीम ममता, त्याग और परोपकार की भावना कूट-कूट कर भरी है। फिर भी, 'दासी' शीर्षक सामाजिक विसंगति और उस वर्ग की त्रासदी को सीधे तौर पर उजागर करता है, इसलिए यह सर्वाधिक सशक्त शीर्षक है।

Teacher's Note:
a) शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करते समय मुख्य पात्र के चरित्र और त्याग को आधार बनाना चाहिए।
b) वैकल्पिक शीर्षक का सुझाव देते समय उसका उचित तार्किक आधार अवश्य दें।

 

काव्य मंजरी (Kavya Manjari)

 

Question 7
"जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
काको नाम पतित पावन जग केहि अति दीन पियारे।
कोने देव बराइ बिरद हित, हठि-हठि अधम उधारे।
खग, मृग, व्याध, पषाण, विटप जड़, जवन-कवन सुर तारे।
देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज सब, माया-बिबस बिचारे।
तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे।।"

(i) कवि ने उक्त पंक्तियों में 'पतित पावन' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है ? उन्हें कौन अत्यंत प्रिय है ? [1 Mark]

Answer:
कवि तुलसीदास ने 'पतित पावन' शब्द प्रभु श्री राम के लिए प्रयोग किया है। उन्हें अति दीन और पतित लोग अत्यंत प्रिय हैं।

Teacher's Note:
a) यह पद तुलसीदास जी द्वारा रचित विनय पत्रिका से लिया गया है।
b) भगवान की शरण और दीनबंधु स्वभाव को यहाँ दर्शाया गया है।

 

(ii) 'पषाण' और 'मृग' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है ? समझकर लिखिए। [2 Marks]

Answer:
पदों में 'पषाण' शब्द अहिल्या के पत्थर रूपी शरीर के उद्धार के लिए तथा 'मृग' शब्द भगवान राम द्वारा तारित या उद्धार किए गए वन्य जीवों एवं प्राणियों के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है, जिन्हें भगवान ने अपनी कृपा से मुक्त किया।

Teacher's Note:
a) भक्त कवियों की रचनाओं में पौराणिक संदर्भों का विशेष महत्व होता है।
b) दोनों शब्दों के पौराणिक आख्यानों को स्पष्ट करें।

 

(iii) 'तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। [2 Marks]

Answer:
इस पंक्ति का भाव यह है कि तुलसीदास जी स्वयं को पूर्णतः भगवान के चरणों में समर्पित करते हुए कहते हैं कि हे प्रभु ! जब संसार के सभी जीव माया के वशीभूत हैं, तब मैं आपके हाथों का दास हूँ। मैंने अपने अहंकार और सर्वस्व को आपके चरणों में हार (समर्पित) दिया है, अब मेरी रक्षा करना आपका दायित्व है।

Teacher's Note:
a) समर्पण और शरणागति के भाव को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) तुलसीदास की भक्त-भावना यहाँ पूर्णतः प्रगट होती है।

 

(iv) तुलसीदास जी का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनकी भक्ति-भावना पर प्रकाश डालिए। [5 Marks]

Answer:
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के भक्तकाल की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली आदि हैं। उनकी भक्ति दास्य भाव की भक्ति है, जिसमें वे स्वयं को प्रभु राम का सेवक और भगवान को अपना सर्वस्व तथा स्वामी मानते हैं। तुलसीदास की भक्ति में आत्मसमर्पण, शरणागति और दीनता का भाव कूट-कूट कर भरा है। वे संसार की माया-मोह और विसंगतियों से तंग आकर केवल भगवान राम के चरणों को ही एकमात्र आश्रय मानते हैं। उनका मानना है कि भगवान ही 'पतित पावन' हैं जो अराधम और पापी से पापी जीवों का भी उद्धार करने में समर्थ हैं। उनकी भक्ति समाज सुधार, मर्यादा स्थापना और लोकैष्णिता से परिपूर्ण है।

Teacher's Note:
a) कवि परिचय के साथ उनकी रामभक्ति की विशेषताओं का वर्णन करें।
b) दास्य भक्ति और आत्मसमर्पण तुलसी की काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ हैं।

 

Question 8 [10 Marks]
"आः धरती कितना देती है" में कवि ने बचपन में और वर्षों बाद होकर क्या बोया था ? दोनों परिस्थितियों में क्या परिणाम हुआ ? इसके माध्यम से कवि ने क्या संदेश देना चाहा है ? समझकर लिखिए।

Answer:
सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता 'धरती कितना देती है' में कवि ने प्रकृति की उदारता और मनुष्य के लालच का सुंदर चित्रण किया है।
कवि ने बताया कि बचपन में उसने नासमझी में सोने के दो दाने (गेहूँ के दाने) इस लालच में बोए थे कि उनसे सोने के पौधे उगेंगे और बहुत सारा सोना मिलेगा। उसने उस समय बहुत कम मेहनत की थी, फिर भी धरती ने उसे उन दो दानों के बदले ढेरों दाने (अनेक गेहूँ की बालियाँ) उपहारस्वरूप दिए। इसके विपरीत, वर्षों बाद जब वह समझदार और लालची हो गया, तो उसने बहुत बड़ी जमीन पर बहुत सारे गेहूँ के दाने बोए, खाद-पानी डाला और अत्यधिक परिश्रम किया, किंतु इस बार धरती ने उसे उतनी उदारता से फल नहीं दिया, क्योंकि इस बार उसके मन में स्वार्थ और लोभ समाया हुआ था।
संदेश - इस कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहता है कि प्रकृति अत्यंत उदार और परोपकारी है। वह मनुष्य के छोटे से प्रयास पर भी उसे असीम नेमतें देती है, बशर्ते मनुष्य के मन में छल-कपट और अतिलोभ न हो। लालच और स्वार्थ मानव जीवन की सहजता को नष्ट कर देते हैं।

Teacher's Note:
a) बचपन के सहज विश्वास और वयस्क जीवन के लोभ के अंतर को स्पष्ट करना अनिवार्य है।
b) कविता के केंद्रीय भाव (प्रकृति की उदारता बनाम मानव का लोभ) को अपने उत्तर में प्रमुखता दें।

 

Question 9 [10 Marks]
'कवि हरिवंशराय बच्चन जी ने 'अंधेरे का दीपक' कविता में मनुष्य को आशावादी बने रहने की प्रेरणा दी है।' इस कथन को स्पष्ट करते हुए जीवन में आशावादिता के महत्त्व पर अपने विचार लिखिए।

Answer:
हरिवंशराय बच्चन द्वारा रचित कविता 'अंधेरे का दीपक' जीवन की निराशा, कठिनाइयों और अंधकार के बीच भी आशा और उत्साह का संचार करने वाली एक प्रेरणादायी रचना है। कवि का मानना है कि जीवन में कितनी भी बाधाएँ, संकट और निराशा रूपी अंधकार क्यों न आएँ, मनुष्य को अपने भीतर ज्ञान, साहस और आशा का दीपक हमेशा जलाए रखना चाहिए। दीपक अंधकार से डरता नहीं है, बल्कि अंधकार को चीरकर प्रकाश फैलाता है। ठीक उसी प्रकार, मनुष्य को भी विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए, बल्कि संघर्ष करते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
जीवन में आशावादिता का महत्त्व - आशावादिता वह शक्ति है जो मनुष्य को टूटने से बचाती है। निराशा व्यक्ति को अकर्मण्य बना देती है, जबकि आशा नया जीवन और नई ऊर्जा प्रदान करती है। इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने विकट परिस्थितियों में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा, उन्होंने ही इतिहास रचा है। अतः जीवन में आशा का दीप बुझने नहीं देना चाहिए।

Teacher's Note:
a) कविता के मूल स्वर (संघर्ष और आशा) को स्पष्ट करें।
b) जीवन में आशावादिता के महत्व को दार्शनिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाएँ।

 

'सारा आकाश' (Saara Akash)

 

Question 10
"क्या दिन-रात की चख-चख होती रहती है ? दिन निकला और शुरू हो गया। कोई और काम नहीं है क्या ? नौ बज रहे हैं।"
(i) उक्त कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं ? [1 Mark]

Answer:
उक्त कथन के वक्ता समर (या उसकी माँ - प्रसंगानुसार समर) और श्रोता परिवार के अन्य सदस्य हैं। (उपन्यास के संदर्भ में यह प्रसंग समर के घर की कलह से जुड़ा है जहाँ समर खीझ उठता है।)

Teacher's Note:
a) उपन्यास के पात्रों की पहचान सटीक होनी चाहिए।
b) समर के घर के परिवेश से यह संवाद लिया गया है।

 

(ii) वक्ता के उक्त कथन पर परिवार के सदस्यों की क्या प्रतिक्रिया थी ? वक्ता की माँ ने उसके इस कथन पर क्या कहा था ? [2 Marks]

Answer:
समर के इस प्रकार खीझकर बोलने पर परिवार में सन्नाटा छा गया और सभी असहज हो गए। वक्ता की माँ ने उसे समझाया और डाँटा कि संयुक्त परिवार में रहना है तो ऐसी छोटी-कथाएँ और कलह चलती रहती हैं, तुम्हें सहनशीलता रखनी चाहिए।

Teacher's Note:
a) उपन्यास की कथा के आधार पर परिवार की प्रतिक्रिया को स्पष्ट करें।
b) माँ के उत्तर को भी संक्षिप्त रूप में लिखें।

 

(iii) 'दिन-रात की चख-चख' किसके कारण हो रही थी ? उसकी कोई दो विशेषताएँ लिखिए। [2 Marks]

Answer:
'दिन-रात की चख-चख' मुख्य रूप से समर और उसकी नवविवाहिता पत्नी प्रभा के बीच असमंजस, पारिवारिक तानों और घुटन भरे संयुक्त परिवार के माहौल के कारण हो रही थी। प्रभा की दो विशेषताएँ: (1) वह अत्यंत सहनशील और समझदार थी। (2) वह परिवार में सबको खुश रखना चाहती थी, बावजूद इसके उसे ताने सुनने पड़ते थे।

Teacher's Note:
a) कलह के मूल कारण और प्रभा के चरित्र की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
b) उत्तर सटीक और बिंदुवार होना चाहिए।

 

(iv) 'संयुक्त परिवार में रहकर कोई अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर पाता है' क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? उपन्यास के आधार पर लिखिए। [5 Marks]

Answer:
राजेन्द्र यादव द्वारा रचित उपन्यास 'सारा आकाश' के आधार पर हम इस कथन से आंशिक रूप से सहमत हो सकते हैं कि संयुक्त परिवार का घुटन भरा और संकीर्ण माहौल अक्सर व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में बाधक बनता है। उपन्यास में समर और प्रभा का जीवन संयुक्त परिवार की विसंगतियों, संकीर्ण रूढ़ियों, लगातार होने वाली कलह और ताने-बाने के कारण कुंठित होता हुआ दिखाया गया है। समर अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर असमंजस में रहता है क्योंकि घर का वातावरण उसे मानसिक शांति नहीं देता। प्रभा को भी हर कदम पर ताने सुनने पड़ते हैं, जिससे उसकी स्वतंत्र पहचान दब जाती है। परंतु उपन्यास के अंतिम चरण में यह भी स्पष्ट होता है कि यदि परिवार के सदस्यों में समझ, आपसी संवाद और आत्मीयता हो, तो संयुक्त परिवार भी संबल बन सकता है। फिर भी, तात्कालिक सामाजिक परिवेश में रूढ़िवादी संयुक्त परिवार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विकास में बाधा अवश्य बनते हैं।

Teacher's Note:
a) उपन्यास की मुख्य थीम (संयुक्त परिवार की समस्याएँ और व्यक्ति की स्वतंत्रता) का विश्लेषण करें।
b) समर और प्रभा के जीवन के उदाहरणों से उत्तर को पुष्ट करें।

 

Question 11 [10 Marks]
"प्रभा के प्रति मेरे मन में प्यार, उसकी मजबूरियों और तकलीफों के प्रति दया, या सिर्फ अपने किए पर पछतावा है ?" इस कथन के पीछे समर की क्या मानसिकता है ? अपनी पत्नी प्रभा के साथ उसके रिश्तों में आए बदलाव का वर्णन कीजिए।

Answer:
'सारा आकाश' उपन्यास में समर का उपर्युक्त कथन उसके आत्मपरीक्षण और मानसिक द्वंद्व को दर्शाता है। उपन्यास के आरंभ में समर और प्रभा के बीच अविश्वास, दूरी और असहयोग का रिश्ता रहता है। समर अपनी ही उलझनों और परिवार के दबाव में प्रभा को समझ नहीं पाता और उसके प्रति उदासीन रहता है। परंतु जैसे-जैसे समय बीतता है, समर को अपनी गलतियों का अहसास होने लगता है। वह समझता है कि प्रभा पूरी तरह निर्दोष है और परिवार की कुंठाओं की शिकार बन रही है।
रिश्तों में बदलाव - प्रारंभ में उपेक्षा और उदासीनता से शुरू हुआ उनका रिश्ता धीरे-धीरे विश्वास, प्रेम और आपसी सम्मान में बदल जाता है। समर अपनी संकीर्णता से ऊपर उठकर प्रभा को अपनी जीवनसंगिनी के रूप में स्वीकार करता है और दोनों मिलकर संयुक्त परिवार के बंधनों से परे एक नई शुरुआत करने का निर्णय लेते हैं।

Teacher's Note:
a) समर के चरित्र में आए सकारात्मक बदलाव (परिपक्वता) को रेखांकित करें।
b) प्रभा के प्रति उसके दृष्टिकोण में हुए परिवर्तन को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 12 [10 Marks]
'सारा आकाश' उपन्यास ने समाज उन नारियों का प्रतिनिधित्व किया है जो पारिवारिक कलह को सहन कर परिवार में सुख-सम्पन्नता लाना चाहती हैं ? इस कथन के आलोक में प्रभा का चरित्र चित्रण कीजिए।

Answer:
राजेन्द्र यादव के उपन्यास 'सारा आकाश' की नायिका प्रभा भारतीय नारी के सहनशील, त्यागमयी और धैर्यवान स्वरूप का जीवंत प्रतीक है। प्रभा जब विवाह के पश्चात समर के घर आती है, तो उसे वहाँ प्रेम और अपनापन मिलने के बजाय ताने, शक और घुटन भरा माहौल मिलता है। परिवार के अन्य सदस्य उसे हर बात पर नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं, और समर भी शुरुआत में उसे समझ नहीं पाता। इसके बावजूद प्रभा कभी धैर्य नहीं खोती। वह चुपचाप सारे कष्ट सहती है और पूरे परिवार को जोड़कर रखने का प्रयास करती है।
प्रभा के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. अत्यंत सहनशील और धैर्यवान - वह हर अपमान और ताने को शांति से सह लेती है।
2. कर्तव्यपरायण - वह एक आदर्श पत्नी और बहू के रूप में अपने सभी दायित्वों का निर्वाह करती है।
3. स्वाभिमानी एवं समझदार - वह अपनी मर्यादा जानती है और अंत में समर का विश्वास जीतकर उसके जीवन का संबल बनती है।
संक्षेप में, प्रभा भारतीय समाज की उन नारियों का प्रतिनिधित्व करती है जो अपनी सहनशीलता से रिश्तों को बचाती हैं।

Teacher's Note:
a) प्रभा के चरित्र की विशेषताओं को बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट करें।
b) उपन्यास में उसके त्याग और संघर्ष के योगदान को महत्व दें।

 

'आषाढ़ का एक दिन' (Aashad Ka Ek Din)

 

Question 13
"................... तुम चाहते हो इस समय मैं यहाँ से चला जाऊँ। मैं चला जाता हूँ। इसलिए नहीं कि तुम आदेश देते हो। परنتु इसलिए कि तुम आज अतिथि हो, और अतिथि की इच्छा का मान होना चाहिए।"
(i) उक्त कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं ? [1 Mark]

Answer:
उक्त कथन के वक्ता विलोम और श्रोता कालिदास हैं।

Teacher's Note:
a) नाटक के पात्रों की सही पहचान होनी चाहिए।
b) विलोम और कालिदास के बीच के संवाद से यह प्रसंग लिया गया है।

 

(ii) उक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2 Marks]

Answer:
यह संदर्भ उस समय का है जब मल्लिका के घर पर विलोम कालिदास से मिलने आता है। कालिदास अब राजकवि बन चुके हैं और अपनी पुरानी कुटी में मल्लिका से मिलने आए हैं। विलोम कालिदास पर कटाक्ष करते हुए तंज कसता है कि कालिदास चाहते हैं कि वह वहाँ से चला जाए, इसलिए वह अतिथि (कालिदास) का मान रखते हुए वहाँ से जाने की बात कहता है।

Teacher's Note:
a) संदर्भ स्पष्ट करते समय नाटक की स्थिति और पात्रों की मनोदशा का उल्लेख करें।
b) उत्तर तथ्यात्मक होना चाहिए।

 

(iii) '"अतिथि की इच्छा का मान होना चाहिए" यह कथन वक्ता ने श्रोता से क्यों कहा ? [2 Marks]

Answer:
वक्ता (विलोम) ने यह बात व्यंग्य और कटाक्ष के रूप में कही थी, क्योंकि कालिदास अब सत्ता और राजसम्मान प्राप्त कर चुके थे, जबकि विलोम मल्लिका के घर का पुराना परिचित था। विलोम कालिदास को यह अहसास कराना चाहता था कि अब उस घर में कालिदास अतिथि हैं और अतिथि की इच्छा का सम्मान करना उसका (विलोम का) कर्तव्य है, जिससे कालिदास की स्थिति को परोक्ष रूप से असहज किया जा सके।

Teacher's Note:
a) विलोम के व्यंग्यपूर्ण लहजे को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) नाटक के अंतर्विरोध को समझें।

 

(iv) 'वक्ता दूरदर्शी और वाचाल है' नाटक के आधार पर उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए। [5 Marks]

Answer:
मोहन राकेश द्वारा रचित नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' का पात्र विलोम अत्यंत कुटिल, दूरदर्शी और वाचाल (बहुत बोलने वाला तथा व्यंग्य करने में माहिर) है। विलोम समाज की कड़वी सच्चाइयों को बहुत गहराई से समझता है और भविष्य के परिणामों को भांप लेता है (दूरदर्शिता)। वह जानता है कि कालिदास का राजकवि बनना और उज्जैन जाना मल्लिका के जीवन में अकेलापन और विध्वंस लेकर आएगा। उसकी वाचालता उसके तीखे व्यंग्यों और संवादों में दिखाई देती है, जिनसे वह दूसरों के अंतर्मन को झकझोर देता है। वह मल्लिका और कालिदास के प्रेम की कमजोरियों को भली-भांति जानता है और समय-समय पर अपने तीखे शब्दों से उन पर प्रहार करता है। नाटक में उसका चरित्र नकारात्मक होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली और नाटक की धुरी को मोड़ने वाला है।

Teacher's Note:
a) विलोम के चरित्र की विशेषताओं (दूरदर्शिता और वाचालता) का नाटक के उदाहरणों से विश्लेषण करें।
b) नाटक में उसकी भूमिका के महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 14 [10 Marks]
"अन्य लोगों को उससे क्या प्रयोजन है ! परन्तु मुझे है। उसके प्रभाव से मेरा घर नष्ट हो रहा है।" अम्बिका की इस नाटक में भूमिका समझाते हुए उक्त कथन के आधार पर उसका चरित्र-चित्रण कीजिए।

Answer:
मोहन राकेश के नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' में अम्बिका मल्लिका की माँ है। अम्बिका एक यथार्थवादी, व्यावहारिक और रूढ़िवादी महिला है जो जीवन की कठोर सच्चाइयों से भली-भांति परिचित है। वह मल्लिका और कालिदास के प्रेम संबंधों के प्रति शुरू से आशंकित और विरोधी रहती है। उसका मानना है कि कालिदास महत्वाकांक्षी है और वह मल्लिका के जीवन को बर्बाद कर देगा।
उपर्युक्त कथन अम्बिका की उसी व्यावहारिक चिंता को दर्शाता है जहाँ वह देखती है कि कालिदास के मोह और उज्जैन जाने के कारण उसकी बेटी मल्लिका का जीवन नष्ट हो रहा है। अम्बिका का चरित्र ममता से परिपूर्ण होने के साथ-साथ समाज के कड़े अनुभवों से उपजी कड़वाहट से भरा है। वह नहीं चाहती कि उसकी बेटी कालिदास के प्रेम में अपनी सुध-बुध खोकर जीवन बर्बाद करे। वह भविष्य की अनिश्चितता को भांप लेती है, जिससे उसकी दूरदर्शिता और पुत्री के प्रति वास्तविक चिंता स्पष्ट होती है।

Teacher's Note:
a) अम्बिका के चरित्र में यथार्थवाद और मां की ममता के द्वंद्व को स्पष्ट करें।
b) नाटक में उसकी भूमिका एक संरक्षक और यथार्थवादी पात्र के रूप में है।

 

Question 15 [10 Marks]
'आषाढ़ का एक दिन' नाटक के माध्यम से नाटककार ने आधुनिक युग की समस्याओं को उजागर करने का सफल प्रयास किया है। इस कथन की विवेचना कीजिए।

NAnswer:
मोहन राकेश द्वारा रचित नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' यद्यपि कालिदास के ऐतिहासिक और पौराणिक जीवन पर आधारित है, परंतु इसके अंतर्निहित मूल्य और समस्याएँ पूर्णतः आधुनिक युग की हैं। नाटककार ने इस कृति के माध्यम से महत्त्वाकांक्षा, प्रेम और कर्तव्य के बीच का संघर्ष, व्यक्ति की स्वतंत्रता, और आधुनिकता की अंधी दौड़ में पारिवारिक तथा मानवीय रिश्तों के टूटने की पीड़ा को बहुत गहराई से उभारा है।
आधुनिक युग की समस्याएँ जैसे - प्रेम और कैरियर (महत्वाकांक्षा) के बीच चुनाव, सत्ता और सृजनशीलता का टकराव, व्यक्ति का अकेलापन, और बौद्धिक वर्ग का समझौतावादी रवैया - इस नाटक में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। कालिदास का राजकवि बनना और मल्लिका का अपनी कुटी में अकेले तड़पना, आज के आधुनिक मानव के उस द्वंद्व का प्रतीक है जहाँ व्यक्ति भौतिक सुख और यश पाने के लिए अपने सबसे करीबियों को छोड़ देता है। इस प्रकार, नाटक प्राचीन आवरण में आधुनिक जीवन की समस्याओं का सफल दस्तावेज बन जाता है।

Teacher's Note:
a) नाटक की आधुनिक प्रासंगिकता और अंतर्द्वंद्व का विश्लेषण करें।
b) कालिदास और मल्लिका के माध्यम से उभारी गई समस्याओं (महत्वाकांक्षा बनाम प्रेम) को प्रमुखता से लिखें।

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