Previous Year Question Papers for Class 12 Hindi
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Practice Class 12 Hindi Exam Papers
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ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
SECTION - A (LANGUAGE - 40 Marks)
Q1. 1.1. Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
'प्रकृति माँ के समान हमारा पालन-पोषण ही नहीं करती बल्कि एक कुशल शिक्षिका की भाँति हमें जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षा भी देती है।' प्रकृति से मिलने वाली कुछ सीखों का वर्णन करते हुए लिखिए कि किस प्रकार इन सीखों को अपनाकर हम अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। [15 Marks]
Answer:
प्रकृति हमारे जीवन में एक माँ के समान है, जो हमें केवल भोजन और पानी ही नहीं देती, बल्कि हमारे लिए सुरक्षित और सुंदर वातावरण भी प्रदान करती है। प्रकृति के विभिन्न रूपों और रंगों में हमें जीवन की कई महत्वपूर्ण सीखें मिलती हैं, जिन्हें अपनाकर हम अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।
प्रकृति से सबसे पहली सीख हमें संतुलन की मिलती है। प्रकृति में हर चीज़ का एक निश्चित स्थान और समय होता है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों और पर्वत, सभी अपने-अपने स्थान पर अपनी भूमिका निभाते हैं। इस संतुलन को बनाए रखना ही प्रकृति की सबसे बड़ी शिक्षा है। जब हम अपने जीवन में भी संतुलन बनाए रखते हैं, तो हम कठिनाइयों का सामना आसानी से कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
दूसरी महत्वपूर्ण सीख है धैर्य और सहनशीलता। एक बीज को पेड़ बनने में समय लगता है। हमें इस प्रक्रिया में धैर्य रखना होता है। इस प्रकार, जीवन में भी धैर्य और सहनशीलता के साथ काम करने पर ही सफलता मिलती है। हमें छोटी-छोटी असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि इन्हें सीखने का अवसर मानकर आगे बढ़ना चाहिए।
प्रकृति से हमें मेहनत और परिश्रम की भी शिक्षा मिलती है। एक किसान अपनी मेहनत से खेतों में फसल उगाता है। यह हमें सिखाता है कि बिना मेहनत के कुछ प्राप्त नहीं होता। हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
प्रकृति से हमें सह-अस्तित्व की भी सीख मिलती है। विभिन्न प्राणी और वनस्पतियाँ मिल-जुलकर रहती हैं और एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बनाए रखते हैं। हमें भी अपने समाज में मिल-जुलकर और सामंजस्य के साथ रहना चाहिए। इससे हम एक सुखी और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।
प्रकृति द्वारा मिलने वाली सीखें इस प्रकार हैं:
1. कुसंगति में रहकर भी अपनी पहचान बनाए रखना: कमल का फूल कीचड़ में उगता है, फिर भी वह अपनी सुंदरता और पवित्रता को बनाए रखता है। यह हमें सिखाता है कि हमें नकारात्मक परिस्थितियों में भी अपने गुणों और मूल्यों को बनाए रखना चाहिए। अपने आदर्शों को न छोड़कर सही मार्ग पर चलना चाहिए।
2. पतझड़ आने से अंत नहीं होता: पतझड़ के मौसम में पेड़ अपनी पत्तियों को खो देते हैं, लेकिन वसंत ऋतु के आगमन पर वे पुनः हरे-भरा हो जाते हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयाँ और असफलताएँ आती हैं, लेकिन यह अंत नहीं होता। हर कठिनाई के बाद पुनः उठने और आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
3. ऊँचे पर्वतों के समान अडिग और विशाल: पर्वत अपनी जगह पर अडिग और स्थिर रहते हैं, वे मजबूती और स्थिरता का प्रतीक हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन में स्थिरता और मजबूती बनाए रखनी चाहिए। कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें अपने निर्णयों में अडिग रहना चाहिए।
4. नदी के समान गंभीरता, गहराई और पवित्रता: नदी अपनी धारा के साथ निरंतर बहती रहती है, उसमें गहराई और पवित्रता होती है। यह हमें सिखाती है कि हमें भी जीवन में गंभीरता, गहराई और पवित्रता बनाए रखनी चाहिए। निरंतरता और समर्पण के साथ हमें अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
Teacher's Note:
a) निबंध में विषय के सभी पहलुओं (पालन-पोषण, शिक्षिका के रूप में शिक्षा और भविष्य निर्माण) को स्पष्ट रूप से दर्शाना आवश्यक है।
b) छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विचारों को तार्किक क्रम में रखें और भाषा की शुद्धता का ध्यान रखें।
1.2. Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
कल्पना कीजिए कि आप सीमा पर तैनात एक सिपाही हैं। परिवार तथा देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करते हुए आप कैसा महसूस करते हैं? आप अपने परिवार तथा देशवासियों से किस प्रकार के सहयोग की अपेक्षा करते हैं? समझाइए लिखकर। [15 Marks]
Answer:
सीमा पर तैनात एक सिपाही के रूप में मैं गर्व और सम्मान का अनुभव करता हूँ। देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण कार्य है। जब मैं अपनी वर्दी पहनता हूँ और हथियार उठाता हूँ, तो मेरे मन में अपने देश के प्रति प्रेम और सेवा का भाव जागृत होता है। यह सोचकर ही मेरा हृदय गर्व से भर जाता है कि मैं अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए यहाँ खड़ा हूँ।
हालांकि, अपने परिवार से दूर रहना आसान नहीं होता। मेरे दिल में हमेशा अपने परिवार की चिंता रहती है। अपने बच्चों की मुस्कान, अपने जीवनसाथी का साथ, और माता-पिता का स्नेह मुझे याद आता है। मैं जानता हूँ कि मेरे परिवार को मेरी कमी महसूस होती है, लेकिन मैं अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता। देश की सेवा सर्वोपरि है, और इसी विचार से मैं अपने कर्तव्यों को निभाता हूँ।
परिवार और देशवासियों से मुझे सहयोग की अपेक्षा होती है। मैं अपने परिवार से यह अपेक्षा करता हूँ कि वे मेरी अनुपस्थिति में मजबूत बने रहें। मेरे बच्चे मेरे आदर्शों को अपनाएँ और अपने जीवन में सकारात्मक लाएँ। मेरे माता-पिता और जीवनसाथी मेरा समर्थन करें और हर चुनौती का सामना धैर्यपूर्वक करें। मैं चाहता हूँ कि वे मेरी सेवा और समर्पण को समझें और मुझ पर गर्व करें।
देशवासियों से मेरी यह अपेक्षा है कि वे सेना के प्रयासों की सराहना करें और हमारी सेवा को समझें। हमें मानसिक और भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है, और यह समर्थन हमारे देशवासियों से ही मिल सकता है। जब हम जानते हैं कि हमारे पीछे एक पूरा देश खड़ा है, तो हमारा संकल्प और भी मजबूत हो जाता है। मैं चाहूँगा कि समाज हमें आदर और सम्मान दे, और हमारे बलिदान की कद्र करे।
अपने साथी सैनिकों के साथ हमारा एक विशेष संबंध होता है। हम एक-दूसरे के लिए परिवार की तरह होते हैं। हम एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। इस आपसी समझ और सहयोग से हम अपने कर्तव्यों को और भी बेहतर तरीके से निभा पाते हैं।
अंत में, सीमा पर तैनात सिपाही के रूप में जीवन जीना चुनौतीपूर्ण और गर्वपूर्ण दोनों है। परिवार और देश के प्रति जिम्मेदारियों का पालन करते हुए गर्व और संतोष का अनुभव होता है। परिवार और देशवासियों का समर्थन और सहयोग हमें कर्तव्यों को निभाने में सक्षम बनाता है और हमारे संकल्प को और मजबूत करता है। इस प्रकार, हम अपनी सेवाओं के माध्यम से देश की सुरक्षा और समृद्धि में योगदान दे सकते हैं।
Teacher's Note:
a) प्रथम पुरुष या उत्तम पुरुष में लिखे जाने वाले इस प्रकार के निबंध में सिपाही की भावनाओं और संवेदनाओं का सजीव चित्रण होना चाहिए।
b) छात्रों को देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और पारिवारिक संवेदनाओं के संतुलन को बनाए रखते हुए लेखन करना चाहिए।
1.3. Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
आपकी दादी एक लम्बी बीमारी के बाद अभी-अभी स्वस्थ हुई थीं। आप उन्हें घुमाने के लिए किसी प्रसिद्ध स्थल पर ले गए। वहाँ अचानक एक ऐसी घटना घटी जिससे आप बुरी तरह से घबरा गए लेकिन आपकी दादी की हिम्मत और सूझ-बूझ के कारण आप उस मुसीबत से बाहर निकले और सकुशल घर वापस आ गए। विस्तारपूर्वक अपने अनुभव का वर्णन कीजिए। [15 Marks]
Answer:
मेरी दादी एक लंबी बीमारी के बाद अभी-अभी स्वस्थ हुई थीं। उनकी सेहत में सुधार देखकर मुझे बहुत खुशी हुई और मैंने तय किया कि उन्हें घुमाने के लिए किसी प्रसिद्ध स्थल पर ले जाऊंगा। हमने ताजमहल देखने का निर्णय लिया। वह स्थान न केवल अद्वितीय है, बल्कि वहाँ की शांति और सौंदर्य दादी को भी बहुत पसंद आएगा, ऐसा मेरा मानना था। हमने यात्रा की सारी तैयारियाँ कर लीं और एक सुहाने दिन ताजमहल के लिए निकल पड़े। वहाँ पहुँचने पर दादी की आँखों में खुशी और उत्साह देखने लायक था। उन्होंने पूरे उत्साह के साथ हर कोना देखा और उसकी सुंदरता की प्रशंसा की। हमारी यात्रा बहुत ही सुचल चल रही थी कि अचानक एक अप्रत्याशित घटना घट गई।
जब हम मुख्य भवन के पास थे, तभी अचानक एक भारी भीड़ उमड़ पड़ी। किसी अफवाह के कारण लोग इधर-उधर भागने लगे। भीड़ में धक्का-मुक्की होने लगी और मैं दादी का हाथ पकड़े हुए बुरी तरह से घबरा गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ और कैसे इस स्थिति से निकलूँ। मेरी दादी की तबीयत को देखते हुए मुझे उनकी सुरक्षा की चिंता सताने लगी। लेकिन इसी बीच, दादी ने अपनी हिम्मत और सूझ-बूझ का परिचय दिया। उन्होंने मेरा हाथ कसकर पकड़ा और एक शांत स्थान की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि भीड़ में घबराने से कुछ हासिल नहीं होगा, हमें धैर्यपूर्वक और सूझ-बूझ के साथ इस स्थिति का सामना करना होगा। उनकी बात सुनकर मैंने अपने मन को शांत किया और उनकी बातों पर ध्यान दिया।
दादी ने मुझे भीड़ से बचते हुए एक सुरक्षित मार्ग दिखाया। हम धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़े और भीड़ से दूर निकल आए। उन्होंने मुझसे कहा कि हमें किसी भी स्थिति में संयम नहीं खोना चाहिए और धैर्यपूर्वक सोचना चाहिए। उनकी हिम्मत और मार्गदर्शन के कारण हम सुरक्षित स्थान पर पहुँच गए और कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हो गई।
इस घटना ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। दादी की हिम्मत और सूझ-बूझ ने न केवल हमें उस मुसीबत से निकाला बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण सबक भी सिखाया। हम सुरक्षित घर वापस आ गए और यह घटना हमारे बीच एक अविस्मरणिय अनुभव के रूप में रह गई। दादी की हिम्मत और सूझ-बूझ ने यह साबित कर दिया कि किसी भी कठिनाई का सामना धैर्य और समझदारी से करना चाहिए। उनकी यह सीख मेरे जीवन के लिए एक मूल्यवान उपहार बन गई है। इस घटना के बाद, मैंने यह महसूस किया कि जीवन की हर परिस्थिति में हमें धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए और कभी भी घबराना नहीं चाहिए।
Teacher's Note:
a) संस्मरणात्मक निबंध में घटना का क्रमिक विवरण और व्यक्तिगत अनुभवों की प्रामाणिकता बहुत महत्वपूर्ण है।
b) संकट के समय मानसिक संयम और बुजुर्गों के मार्गदर्शन के महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाना चाहिए।
1.4. Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
'उपहार देना प्यार जताने और सम्मान करने का परिचायक है वर्तमान में उपहार का स्वरूप प्यार कम, व्यापार अधिक हो गया है।' - इस कथन के पक्ष अथवा विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत कीजिए। [15 Marks]
Answer:
उपहार देना एक ऐसी परंपरा है जो हमारे जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को और भी ख़ास बना देती है। उपहार के माध्यम से हम अपने प्रियजनों के प्रति प्रेम, स्नेह और सम्मान प्रकट करते हैं। लेकिन आज के समय में उपहार देने का स्वरूप काफी बदल गया है। यह कहना उचित होगा कि उपहार देना अब प्यार का प्रतीक कम और व्यापार का साधन अधिक बन गया है। इस कथन के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
पक्ष में तर्क:
आजकल उपहार देना एक व्यवसाय बन गया है। लोग विशेष अवसरों पर महंगे और ब्रांडेड उपहार देकर अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और स्टेटस को दर्शाते हैं। यह उपहार देने के पीछे का असल मकसद कहीं खो सा गया है। व्यापारी इस अवसर का लाभ उठाकर विभिन्न प्रकार के उपहारों का व्यवसाय करते हैं और इसमें भारी मुनाफा कमाते हैं। उपहार देने की इस दौड़ में लोग अपने भावनाओं और स्नेह को भूल जाते हैं और महंगे उपहार देकर दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इससे उपहार का असल महत्व समाप्त हो जाता है और यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाता है।
इसके अलावा, उपहार देने में प्रतिस्पर्धा और दिखावे का प्रचलन बढ़ गया है। लोग महंगे उपहार देकर अपनी आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करते हैं। इस प्रतिस्पर्धा में उपहार का असल मकसद, जो प्यार और स्नेह जताना होता है, कहीं खो जाता है। उपहारों का व्यापारीकरण लोगों को अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित करता है और सच्चे भावनाओं को छिपा देता है。
विपक्ष में तर्क:
उपहार देना अब भी प्यार और सम्मान का प्रतीक है। यह एक माध्यम है जिससे हम अपने प्रियजनों को यह महसूस कराते हैं कि वे हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। उपहार के माध्यम से हम अपने स्नेह और सम्मान को व्यक्त करते हैं और रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। यह परंपरा हमारे समाज और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभिन्न त्योहारों, समारोहों और विशेष अवसरों पर उपहार देना हमारे सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को प्रकट करता है और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है।
एक अच्छा उपहार देने के लिए हमें समय और ध्यान देना होता है। यह प्रक्रिया खुद में ही स्नेह और सम्मान का परिचायक है। उपहार के चयन में दिया गया ध्यान और परिश्रम हमारे सच्चे भावनाओं को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उपहार देना अभी भी प्यार और स्नेह का प्रतीक है और इसका व्यापारिक रूप केवल एक बाहरी परत है, जिसके पीछे सच्चे भावनाएँ छिपी होती हैं।
Teacher's Note:
a) आत्मकथनात्मक या विचारप्रधान निबंध में पक्ष या विपक्ष किसी एक पक्ष को मजबूती से तर्कों के साथ रखना चाहिए।
b) सामाजिक यथार्थ और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच के अंतर को स्पष्ट करना आवश्यक है।
1.5. Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
पहले अपने गली-मोहल्ले की दुकानों से खरीदारी की जाती थी। पर अब 'ऑनलाइन' खरीदारी का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। इस परिवर्तन का समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? समझाइए लिखिए। [15 Marks]
Answer:
पहले के समय में हमारे गली-मोहल्ले की दुकानों से खरीदारी करना न केवल एक सामान्य आदत थी बल्कि एक सामाजिक गतिविधि भी थी। इन दुकानों में खरीदारी करते समय न केवल हमें सामान मिलता था, बल्कि हम अपने पड़ोसियों और दुकानदारों से बातचीत कर सामाजिक संपर्क भी बनाए रखते थे। इस प्रक्रिया में हमें अपने समाज की نبض को समझने और एक-दूसरे की सहायता करने का मौका मिलता था। लेकिन आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है और इस परिवर्तन का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
ऑनलाइन खरीदारी ने लोगों के लिए कई सुविधाएँ प्रस्तुत की हैं। अब घर बैठे ही हम किसी भी समय अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ मंगा सकते हैं। इससे समय और ऊर्जा की बचत होती है और बाजार की भीड़-भाड़ से बचने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से व्यस्त जीवनशैली वाले लोगों के लिए यह एक वरदान साबित हुआ है। ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर विभिन्न विकल्पों को देखकर हम अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं, और अनेक प्रकार के डिस्काउंट और ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इस सुविधा ने स्थानीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। छोटे दुकानदारों और गली-मोहल्ले की दुकानों को भारी नुकसान हुआ है। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण उनकी बिक्री में कमी आई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इन दुकानों के बंद होने से स्थानीय रोजगार भी प्रभावित हुए हैं और कई लोगों को अपनी नौकरियाँ खोनी पड़ी हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ऑनलाइन खरीदारी ने लोगों के बीच के व्यक्तिगत संपर्क को कम कर दिया है। पहले जो सामाजिक संपर्क और संबंध स्थानीय दुकानों के माध्यम से बनते थे, वे अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। गली-मोहल्ले की दुकानों पर होने वाली अनौपचारिक बातचीत और मेलजोल अब कम हो गए हैं, जिससे समाज में एक प्रकार की अलगाव की भावना बढ़ रही है.
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी ऑनलाइन खरीदारी के नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण पैकेजिंग मटीरियल की खपत बढ़ गई है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्लास्टिक और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल मटीरियल का उपयोग बढ़ गया है, जिससे कचरे की मात्रा भी बढ़ गई है। हालांकि, यह भी सच है कि ऑनलाइन खरीदारी ने नए रोजगार अवसर भी पैदा किए हैं। डिलीवरी बॉय, कस्टमर सपोर्ट, वेयरहाउस मैनेजमेंट जैसे नए रोजगार उत्पन्न हुए हैं। इससे एक नए प्रकार की अर्थव्यवस्था का निर्माण हुआ है जो डिजिटल माध्यमों पर आधारित है।
निष्कर्षतः, ऑनलाइन खरीदारी ने हमारे जीवन को सुविधाजनक और सरल बनाया है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। यह आवश्यक है कि हम इस परिवर्तन को संतुलित दृष्टिकोण से देखें और स्थानीय व्यापार और सामाजिक संपर्क को बनाए रखने के प्रयास करें। इससे हम एक समृद्ध और संतुलित समाज का निर्माण कर सकेंगे।
Teacher's Note:
a) समसामयिक विषय पर लिखते समय सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों का संतुलित मूल्यांकन करना चाहिए।
b) समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत स्पष्ट करना उत्तम रहता है।
1.6. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए:
1.6. (a) नीचे दिए गए विषय पर मौलिक कहानी लिखिए:
'कर्जमुक्त मनुष्य ही सबसे सुखी मनुष्य होता है।' [10 Marks]
Answer:
'कर्जमुक्त मनुष्य ही सबसे सुखी मनुष्य होता है।'
रमेश एक छोटे से गाँव में रहता था। वह एक मेहनती किसान था, जिसने अपने खेतों में दिन-रात मेहनत कर फसलें उगाईं। उसकी पत्नी, गीता, और दो बच्चे भी थे। रमेश का जीवन सामान्य और सुखद था, लेकिन उसके जीवन में एक बड़ी समस्या थी। उसने अपनी बेटी की शादी के लिए और खेती के लिए कई बाहर पैसे उधार लिए थे, जिनका ब्याज समय के साथ बढ़ता जा रहा था। रमेश के कर्ज का बोझ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था। वह इस बोझ से मानसिक और शारीरिक रूप से थक गया था। उसकी रातों की नींद उड़ गई थी और वह हमेशा चिंता में रहता था। उसके चेहरे पर हर समय चिंता की लकीरें साफ दिखाई देती थीं। एक दिन, उसकी पत्नी गीता ने उससे कहा, "रमेश, हमें कुछ उपाय सोचना होगा। इस कर्ज से हमें मुक्त होना ही होगा, वरना यह हमारे जीवन को नष्ट कर देगा।"
रमेश ने गीता की बात पर गहराई से विचार किया और तय किया कि वह अपने खेतों में ज्यादा मेहनत करेगा और अपनी फसल की पैदावार को बढ़ाने की कोशिश करेगा। उसने अपने खेतों में नई तकनीकों का इस्तेमाल करना शुरू किया और दिन-रात मेहनत की। उसका प्रयास रंग लाया और उसकी फसलें अच्छी होने लगीं। उसने अपने उत्पादों को अच्छे दामों पर बेचा और धीरे-धीरे कर्ज चुकाने लगा।
एक साल बाद, रमेश ने सारा कर्ज चुका दिया। अब वह पूरी तरह से कर्जमुक्त हो चुका था। कर्जमुक्त होते ही उसके मन का बोझ हट गया और उसके चेहरे पर एक नई चमक आ गई। उसकी रातों की नींद वापस आ गई और वह पहले की तरह खुशी-खुशी जीवन जीने लगा।
रमेश ने अपने बच्चों को भी यही सिखाया कि कर्ज से बचना चाहिए और अपने खर्चों को नियंत्रित करना चाहिए। उसने उन्हें सिखाया कि मेहनत और ईमानदारी से जीवन जीना ही सबसे बड़ा सुख है। रमेश अब अपने जीवन में सुखी और संतुष्ट था, क्योंकि वह जानता था कि कर्जमुक्त मनुष्य ही सबसे सुखी मनुष्य होता है। रमेश की यह कहानी गाँव में हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई। लोगों ने उससे सीखा कि चाहें जितनी भी मुश्किलें आएं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। कर्जमुक्त होकर रमेश ने न केवल अपने परिवार को सुखी बनाया, बल्कि पूरे गाँव को एक नई दिशा दी।
Teacher's Note:
a) मौलिक कहानी में शीर्षक के मूल भाव को कथा के माध्यम से सहज रूप से चरितार्थ किया जाना चाहिए।
b) चरित्र विकास और संघर्ष का अंत सुखद और प्रेरणादायक होना चाहिए।
1.6. (b) निम्नलिखित वाक्य से अंत करते हुए एक कहानी लिखिए:
'.....और मैं चाह कर भी उस कारुणिक दृश्य को भुला नहीं पाया।' [10 Marks]
Answer:
वह एक सर्दियों की शाम थी, जब मैं अपने गाँव के रास्ते से गुजर रहा था। गाँव के किनारे एक छोटा सा तालाब था, जहाँ बच्चे अक्सर खेलते थे और गाँव की महिलाएँ पानी भरने आती थीं। उस दिन तालाब के पास एक भीड़ जमा थी, और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वहाँ क्या हो रहा है। जिज्ञासा से भरा हुआ मैं उस भीड़ की ओर बढ़ा। जब मैं वहाँ पहुँचा, तो देखा कि तालाब के किनारे एक महिला बैठी हुई थी। उसके चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें साफ दिख रही थीं। उसके पास ही एक बच्चा बेसुध पड़ा था। लोग उसे घेर कर खड़े थे और तरह-तरह की बातें कर रहे थे। कोई कह रहा था कि बच्चा तालाब में गिर गया था और किसी ने उसे बाहर निकाला, लेकिन अब वह बेहोश था।
मैंने जल्दी से आगे बढ़कर बच्चे की نب्ज देखी। वह धीरे-धीरे सांस ले रहा था, लेकिन उसकी हालत गंभीर लग रही थी। मैंने तुरंत गाँव के डॉक्टर को बुलाने के लिए किसी को भेजा और तब तक बच्चे को सीपीआर देना शुरू किया। थोड़ी देर बाद डॉक्टर पहुँचा और उसने तुरंत बच्चे का इलाज शुरू किया। कई मिनटों के बाद बच्चा होश में आया और उसकी माँ की राहत की सांस ली। वह महिला लगातार रो रही थी और भगवान का धन्यवाद कर रही थी। बच्चा ठीक था, लेकिन इस घटना ने मेरे दिल में गहरी छाप छोड़ दी। उस मासूम चेहरे को बेहोशी की हालत में देखकर मेरे दिल में एक अनजानी पीड़ा हुई।
मैं उस दिन की घटना को भुला नहीं पाया। उस बच्चे की माँ की आँखों में जो दर्द और डर था, वह आज भी मेरी आँखों के सामने घूमता है। उसकी आँखों से बहते आँसू और उसके चेहरे पर छायी चिंता मेरे दिल में घर कर गई। वह कारुणिक दृश्य मुझे बार-बार याद आता है और मुझे यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें आसपास के लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए। उस दिन ने मुझे सिखाया कि जीवन अनमोल है और हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए कि किसी की मदद कर सकें। उस बच्चे की बेहोशी और उसकी माँ का दर्द भरा चेहरा मेरे दिल में एक गहरी छाप छोड़ गया, और मैं चाह कर भी उस कारुणिक दृश्य को भुला नहीं पाया।
Teacher's Note:
a) दी गई पंक्ति से कहानी का अंत होना अनिवार्य है, अतः कथा-संरचना उसी के अनुसार होनी चाहिए।
b) संवेदनात्मक और मर्मस्पर्शी वर्णन कहानी के प्रभाव को बढ़ाता है।
Q2. Read the passage given below carefully and answer the questions that follow using your own words in Hindi.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और अपने शब्दों का प्रयोग करते हुए दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए।
कैसोवेरी चिड़िया जंगल में एक पेड़ के कोटर में रहती थी। वह बचपन से ही बाकी चिड़ियों से अलग थी इसलिए बाकी चिड़ियों के बच्चे उसे हमेशा चिढ़ाते थे।
कोई कहता, "जब तू उड़ नहीं सकती तो चिड़िया किस काम की?", कोई उसे पेड़ की डाल पर बैठकर चिढ़ाता, "अरे कभी हमारे पास भी आ जाया करो। जब देखो जानवरों की तरह नीचे चरती रहती हो", और ऐसा बोलकर सब-के-सब हसँते।
कैसोवेरी उनकी बातें सुनकर मन मसोसकर रह जाती पर किसी से कुछ कह नहीं पाती थी। शुरू-शुरू में वह इन बातों का बुरा नहीं मानती थी लेकिन किसी भी चीज़ की एक सीमा होती है। बार-बार चिढ़ाए जाने से उसका दिल टूट गया। वह उदास बैठ गयी और आसमान की तरफ देखते हुए बोली, "हे ईश्वर तुमने मुझे चिड़िया क्यों बनाया? बनाया तो मुझे उड़ने की काबिलियत क्यों नहीं दी? देखो सब मुझे कितना चिढ़ाते हैं। अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रह सकती, मैं इस जंगल को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ कर जा रही हूँ!" ऐसा कहते हुए कैसोवेरी चिड़िया थोड़ा आगे बढ़ गई।
अभी वह कुछ ही दूर गई थी कि पीछे से एक भारी-भरकम आवाज़ आई-"रुको कैसोवेरी! तुम कहाँ जा रही हो?"
आजतक किसी भी कैसोवेरी के साथ इतने अच्छे से बात नहीं की थी। उसने आश्चर्य से पीछे मुड़ कर देखा, वहाँ खड़ा जामुन का पेड़ उससे कुछ कह रहा था।
"कृपया तुम यहाँ से मत जाओ, हमें तुम्हारी जरूरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं। वह तुम ही हो जो अपनी मजबूत चोंच से फलों को अन्दर तक खाती हो और हमारे बीजों को पूरे जंगल में बिखेरती हो। हो सकता है बाकी चिड़ियों के लिए तुम मायने न रखती हो लेकिन हम पेड़ों के लिए तुमसे बढ़कर कोई दूसरी चिड़िया नहीं है। मत जाओ, तुम्हारी जगह कोई और नहीं ले सकता।"
पेड़ की बातों ने कैसोवेरी के दिल को छुआ। उसकी बातें सुनकर आज पहली बार उसे जीवन में यह एहसास हुआ कि वह इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है। भगवान ने उसे एक बेहद जरूरी काम के लिए भेजा है और सिर्फ बाकी चिड़ियों की तरह न उड़ पाना कहीं से उसे छोटा नहीं बनाता। आज कैसोवेरी चिड़िया बहुत खुश थी। वह खुशी-खुशी जंगल में लौट गई।
कैसोवेरी चिड़िया की तरह कई बार हम इंसान भी औरों को देखकर खुद में लघुता का अनुभव करते हैं। हम अपने पास की चीजों को महत्व न देकर, ये सोचते हैं कि विधाता ने हमें चीजें क्यों नहीं दीं, जो दूसरों के पास हैं। ऐसी स्थिति में हम खुद को दीन-हीन और दूसरों को सौभाग्यशाली मानकर विधाता को कोसने लगते हैं।
हमें कभी भी बेकार की तुलना में नहीं पड़ना चाहिए। हर इंसान अपने आप में अनोखा है और अलग है। हर किसी के अन्दर कोई-न-कोई बात है जो उसे खास बनाती है। हो सकता है कि वह दूसरों के लिए बस एक इंसान हो लेकिन किसी एक के लिए वह पुरी दुनिया हो सकता है। जीवन की महत्ता को समझकर, उसे सकारात्मक सोच का उपहार देकर हम अपने इस अमूल्य जीवन को और बेहतर बना सकते हैं। [12 Marks]
(i) कैसोवेरी सबसे अलग कैसे थी? बाकी चिड़ियों का व्यवहार उसके साथ कैसा था? [3 Marks]
Answer:
कैसोवेरी चिड़िया बाकी चिड़ियों से अलग इसलिए थी क्योंकि वह उड़ नहीं सकती थी और जानवरों के समान जमीन पर चरती रहती थी। बाकी चिड़ियों का व्यवहार उसके साथ बहुत अपमानजनक था; वे उसे उड़ने की असमक्षता पर ताने मारती थीं, उस पर हंसती थीं और उसे चिढ़ाती थीं।
Teacher's Note:
a) गद्यांश के आरंभिक अंश से उत्तर को स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए।
b) दोनों भागों (उसकी भिन्नता और अन्य चिड़ियों के व्यवहार) का उल्लेख आवश्यक है।
(ii) कैसोवेरी को किससे क्या शिकायत थी? उसकी यह शिकायत कैसे दूर हुई? [3 Marks]
Answer:
कैसोवेरी को भगवान से शिकायत थी कि उन्होंने उसे चिड़िया तो बनाया लेकिन उड़ने की क्षमता क्यों नहीं दी। उसकी यह शिकायत तब दूर हुई जब जामुन के पेड़ ने उसे समझाया कि वह जंगल के生态 के लिए कितनी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह फलों को खाकर उनके बीजों को पूरे जंगल में फैलाती है।
Teacher's Note:
a) भगवान से उसकी शिकायत और जामुन के पेड़ द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण दोनों का वर्णन करना जरूरी है।
b) उत्तर सरल और गद्यांश के संदर्भ के अनुकूल होना चाहिए।
(iii) हम अपनी जिन्दगी को कैसे बेहतर बना सकते हैं? गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [3 Marks]
Answer:
हम अपनी जिंदगी को दूसरों से अपनी तुलना न करके और अपनी विशेष योग्यताओं को पहचान कर बेहतर बना सकते हैं। हमें अपनी क्षमताओं को सकारात्मक सोच के साथ समझना चाहिए और यह स्वीकार करना चाहिए कि हर व्यक्ति के अंदर कुछ विशेष है जो उसे अनोखा बनाता है।
Teacher's Note:
a) गद्यांश के अंतिम उपदेशात्मक अंश से मुख्य संदेश को अपने शब्दों में लिखना अपेक्षित है।
b) तुलना न करने और सकारात्मक सोच अपनाने के बिंदुओं को प्रमुखता दें।
(iv) निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए:
"कृपया तुम यहाँ से मत जाओ, हमें तुम्हारी ज़रूरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं।"
a. इस कथन के आधार पर जामुन के पेड़ की किन विशेषताओं का पता चलता है? [1 Mark]
1. नम्रता और प्रेम
2. अहंकार और दया
3. करुणा और क्रोध
4. धैर्य और गर्व
Answer: (1) नम्रता और प्रेम
जामुन के पेड़ के शब्दों में दूसरों के प्रति आदर और स्नेह झलकता है।
Teacher's Note:
a) विकल्पों का सटीक विश्लेषण कर सही उत्तर चुनें।
b) पेड़ का कथन उसके सहयोगी और स्नेही स्वभाव को दर्शाता है।
b. कैसोवेरी के किस काम की वजह से जामुन का पेड़ फलता-फूलता था? [1 Mark]
1. उसके जामुन न खाने से
2. उसके कोटर में रहने से
3. उसके जंगल में बीज बिखेरने से
4. उसके न उड़ पाने से
Answer: (3) उसके जंगल में बीज बिखेरने से
पेड़ ने स्पष्ट किया था कि वह बीजों को पूरे जंगल में फैलाती है।
Teacher's Note:
a) गद्यांश में दिए गए तर्क पर आधारित प्रश्न है।
b) बीज प्रकीर्णन (seed dispersal) की प्रक्रिया का उल्लेख गद्यांश में है।
c. कैसोवेरी पर जामुन के पेड़ की बातों का क्या प्रभाव पड़ा? [1 Mark]
1. वह गुस्सा हो गई।
2. उसे अपनी पहचान मिली।
3. उसने जंगल छोड़ दिया।
4. वह उड़ना सीखने लगी।
Answer: (2) उसे अपनी पहचान मिली।
उसे एहसास हुआ कि उसका जीवन बेकार नहीं है।
Teacher's Note:
a) संवाद के परिणामस्वरूप कैसोवेरी की मनोदशा में आए बदलाव को पहचानें।
b) उसे अपने अस्तित्व का महत्व समझ आया।
(v) निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए:
"पेड़ की बातों ने कैसोवेरी के दिल को छुआ। उसकी बातें सुनकर आज पहली बार उसे जीवन में यह एहसास हुआ कि वह इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है।"
a. 'दिल को छुआ' - पंक्ति से क्या आशय है? [1 Mark]
1. भाव-विभोर होना।
2. मन दुखी होना।
3. मन में निराशा उत्पन्न होना।
4. मन उदासीन होना।
Answer: (1) भाव-विभोर होना।
इसका अर्थ गहरे भावनात्मक प्रभाव से है।
Teacher's Note:
a) मुहावरेदार प्रयोग के सही अर्थ की पहचान करें।
b) भाव-विभोर होना यहाँ सबसे सटीक विकल्प है।
b. "...वह इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है।" - पंक्ति से कैसोवेरी के मन के किस भाव का पता चलता है? [1 Mark]
1. उदारता का भाव
2. लघुता का भाव
3. आत्मीयता का भाव
4. आत्मविश्वास का भाव
Answer: (4) आत्मविश्वास का भाव
इससे उसके आत्म-सम्मान और मूल्य का बोध होता है।
Teacher's Note:
a) वाक्य के अंतर्निहित भाव को समझें।
b) यह आत्मविश्वास के पुनर्जागरण को दर्शाता है।
c. 'मौजूद' शब्द गद्यांश में किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है? [1 Mark]
1. अस्तित्व के सन्दर्भ में
2. मायूसी के सन्दर्भ में
3. झुंझलाहट के सन्दर्भ में
4. प्रताड़ना के सन्दर्भ में
Answer: (1) अस्तित्व के सन्दर्भ में
यहाँ होना या उपस्थिति (अस्तित्व) अर्थ अभिप्रेत है।
Teacher's Note:
a) शब्द के प्रासंगिक अर्थ को पहचानना आवश्यक है।
b) 'मौजूद' का अर्थ उपस्थिति या अस्तित्व से है।
Q3. Do as directed: / निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।
3.1. (a) निम्नलिखित वाक्य का शुद्ध रुप लिखिए:
मैं सायंकाल के समय आया था। [1 Mark]
Answer:
मैं सायंकाल आया था। (अथवा: मैं शाम के समय आया था।)
Teacher's Note:
a) 'सायंकाल' शब्द में स्वयं 'समय' का भाव निहित है, अतः 'के समय' का प्रयोग पुनरुक्ति दोष उत्पन्न करता है।
b) वाक्य शुद्धि के ऐसे नियमों का अभ्यास आवश्यक है।
3.1. (b) चुनाव में अपनी करारी हार देखकर नेताजी के पाँव तले __________ खिसक गई। [1 Mark]
Answer:
जमीन
Teacher's Note:
a) यह एक प्रसिद्ध मुहावरा है जिसका अर्थ अत्यधिक घबरा जाना या होश उड़ जाना है।
b) रिक्त स्थान में सटीक शब्द 'जमीन' भरा जाएगा।
3.1. (c) निम्नलिखित वाक्यों में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए:
1. सच ही तो है खरबूज को देखकर खरबूज रंग बदलता है।
2. सच ही तो है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।
3. सच ही तो है तरबूज को देखकर तरबूज रंग बदलता है।
4. सच ही तो है खरबूजे को देखकर तरबूज रंग बदलता है। [1 Mark]
Answer: (2) सच ही तो है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।
कारक चिह्नों और वचन का सही प्रयोग विकल्प (2) में है।
Teacher's Note:
a) लोकोक्ति का सही रूप पहचानना इस प्रश्न का उद्देश्य है।
b) व्याकरणिक नियमों के अनुसार कारक विभक्ति का प्रयोग पर ध्यान दें।
3.1. (d) निम्नलिखित वाक्यों में से अशुद्ध वाक्य का चयन कीजिए:
1. प्राकृतिक सौंदर्यता सबका मन मोहती है।
2. कैदी को मृत्युदण्ड दिया गया।
3. हमें बड़ों की आज्ञा माननी चाहिए।
4. हम देशभक्तों को शत-शत नमन करते हैं। [1 Mark]
Answer: (1) प्राकृतिक सौंदर्यता सबका मन मोहती है।
'सौंदर्यता' शब्द व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है, सही शब्द 'सौंदर्य' या 'सुंदरता' है।
Teacher's Note:
a) प्रत्यय संबंधी अशुद्धियों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
b) 'सुंदर' में 'य' प्रत्यय लगने पर 'सौंदर्य' बनता है, 'सौंदर्यता' लिखना गलत है।
3.1. (e) निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के लिए सही शब्द का चयन कीजिए:
संकट की घड़ी में ऋण प्रदान करने के लिए श्रीलंका, विश्वबैंक का कृतप्रज्ञ है।
1. कृतज्ञ
2. कृतार्थ
3. कृत्य
4. कृत्य - कृत्य [1 Mark]
Answer: (1) कृतज्ञ
उपकार मानने वाले के लिए 'कृतज्ञ' शब्द का प्रयोग होता है।
Teacher's Note:
a) वाक्यांश के लिए एक शब्द के अंतर्गत यह महत्वपूर्ण शब्द है।
b) 'कृतज्ञ' (उपकार मानने वाला) और 'कृतघ्न' (उपकार न मानने वाला) में अंतर स्पष्ट होना चाहिए।
3.2. रिक्त स्थान में सही भरिए / निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।
3.2. (a) निम्नलिखित मुहावरे से वाक्य बनाइए:
ईंट से ईंट बजाना [1 Mark]
Answer:
अर्थ: पूरी तरह से नष्ट कर देना या बर्बाद कर देना।
वाक्य प्रयोग: भारतीय सेना ने दुश्मनों के ठिकानों की ईंट से ईंट बजा दी।
Teacher's Note:
a) मुहावरे का अर्थ लिखकर उसका सार्थक वाक्य में प्रयोग करना आवश्यक है।
b) वाक्य ऐसा हो जिससे मुहावरे का अर्थ स्पष्ट झलके।
3.2. (b) निम्नलिखित मुहावरे को शुद्ध कीजिए:
घाट-घाट का खाना खाना [1 Mark]
Answer:
घाट-घाट का पानी पीना।
Teacher's Note:
a) प्रचलित मुहावरे का सही रूप 'घाट-घाट का पानी पीना' है।
b) इसका अर्थ अनुभवी होना होता है।
3.2. (c) निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए:
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने शत्रु सेना के सामने __________ स्वीकार नहीं किया।
1. खाक छानना
2. घुटने टेकना
3. आग बबुला होना
4. अँगूठा दिखाना [1 Mark]
Answer: (2) घुटने टेकना
'घुटने टेकना' मुहावरे का अर्थ हार मानना होता है।
Teacher's Note:
a) संदर्भ के अनुसार उपयुक्त मुहावरे का चयन किया जाना चाहिए।
b) रानी लक्ष्मीबाई ने कभी हार नहीं मानी थी।
3.2. (d) निम्नलिखित वाक्य के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए:
अपनी दुकान बेचने के सिवाय उसके पास और कोई उपाय नहीं था।
1. कलेजा मुँह को आना
2. गले न उतरना
3. चारा न होना
4. आसमान सिर पर उठाना [1 Mark]
Answer: (3) चारा न होना
'चारा न होना' का अर्थ कोई अन्य विकल्प या उपाय न होना है।
Teacher's Note:
a) वाक्य के भाव के अनुकूल मुहावरे की पहचान करें।
b) 'चारा न होना' विवशता को दर्शाता है।
3.2. (e) निम्नलिखित मुहावरे के सही अर्थ का चयन कीजिए:
पाँचों उँगलियाँ घी में होना
1. बहुत लाभ होना
2. बहुत भूख लगना
3. बहुत प्रिय होना
4. बहुत खुश होना [1 Mark]
Answer: (1) बहुत लाभ होना
यह मुहावरा अत्यधिक लाभ या संपन्नता की स्थिति को दर्शाता है।
Teacher's Note:
a) मुहावरों के पारंपरिक अर्थों का ज्ञान होना आवश्यक है।
b) चारों विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त अर्थ विकल्प (1) है।
SECTION - B (LITERATURE - 40 Marks)
Answer four questions from this Section on any three out of the four prescribed textbooks. / पाठ्यक्रम में निर्धारित चार पुस्तकों में से किन्हीं तीन पुस्तकों के चार प्रश्नों के उत्तर इस भाग से दीजिए। (गद्य संकलन (Gadya Sanklan))
Q4. उसने अपने सारे साहस को समेटकर दृढ़ता से कहा - "माँ, मैं कानपुर जाऊँगी।"
i. उक्त कथन से संबंधित पाठ और उसके लेखक का नाम लिखिए। [1 Mark]
Answer:
कहानी का नाम 'गौरी' और लेखिका का नाम "सुभद्रा कुमारी चौहान" है।
Teacher's Note:
a) पाठ और लेखक का नाम सटीक होना चाहिए।
b) वर्तनी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
ii. यह कथन किसने कहा है? वह कानपुर क्यों जाना चाहती है? [2 Marks]
Answer:
प्रस्तुत कथन गौरी ने कहा है। सीताराम जी के कारावास हो जाने पर बच्चों की चिंता करते हुए वह कानपुर जाना चाहती थी ताकि वह बच्चों की देखभाल कर सके और देश के हितार्थ कार्य में अपना सहयोग दे सके।
Teacher's Note:
a) वक्ता का नाम और उसके जाने का उद्देश्य दोनों स्पष्ट करें।
b) राष्ट्रीय आंदोलन और पारिवारिक दायित्व का समन्वय इसमें झलकता है।
iii. इस कथन के पीछे वक्ता का क्या उद्देश्य था? आप किस आधार पर कहेंगे कि वक्ता ने उचित कदम उठाया? [2 Marks]
Answer:
इस कथन के पीछे वक्ता (गौरी) का उद्देश्य ईमानदार, नेक व देशप्रेमी सीताराम की मदद कर देशप्रेम की भावनाओं को दर्शाना है। वह कानपुर जाकर बच्चों की देखभाल करती है। उसने धनी तहसीलदार का रिश्ता ठुकराकर सीताराम के बच्चों की माँ बनकर अपनी त्याग की भावना का परिचय दिया है। गौरी सीताराम की सादगी व देशभक्ति से प्रभावित होकर उसे मन ही मन अपना पति मान लेती है। इस तरह वह एक आदर्श नारी होने का परिचय देती है। अतः उसका यह कदम उचित था।
Teacher's Note:
a) गौरी के त्याग और उच्च आदर्शों का मूल्यांकन करें।
b) उसके निर्णय के औचित्य को तार्किक रूप से समझाएँ।
iv. स्पष्ट कीजिए कि स्वतंत्रता प्राप्ति के आन्दोलन में वक्ता का त्याग भी किसी देशभक्त से कम नहीं था? [5 Marks]
Answer:
'गौरी' एक चरित्र प्रधान भावनात्मक कहानी है जिसकी पृष्ठभूमि में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की गूँज सुनाई पड़ती है। गौरी एक विवेकशील स्त्री थी। उसे अच्छे-बुरे की पहचान थी। जब सीताराम जी का रिश्ता उसके लिए आया तो उसने सीताराम की सादगी, नेकी और देशप्रेम भावना को पहचान लिया इन्हीं भावनाओं को स्वीकार करते हुए उसने सीताराम को अपना पति मान लिया और अमीर तहसीलदार का संबंध स्वीकार नहीं किया। सरकार देशद्रोहियों को सजा सुना रही थी। गाँधीજી के नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन तेजी से बढ़ रहा था जिसमें निवासी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। गौरी पूरे साहस से कानपुर जाकर सीताराम जी के बच्चों की उनकी उपस्थिति में पालन-पोषण करती है। देशभक्त सीताराम जी के सहयोग, का यह कार्य किसी देशभक्ति के कार्य से कम नहीं है। यह किसी मायने में युद्ध भूमि में किए गए त्याग से कम नहीं है। यह निर्णय उसके अन्तरमन में छिपे देशभक्ति के भावों को उजागर करता है। उसका मानना था कि, यदि, सीताराम जी चाहते तो. बी.ए. पास करके वे भी नायब तहसीलदार बन सकते थे और अंग्रेजी सरकार की गुलामी करते रहते लेकिन उन्होंने देश को गुलामी से मुक्त कराने का संघर्षमयी रास्ता अपनाया। गौरी ने एक देशभक्त, स्वतंत्रता सेनानी के बच्चों की माँ बनकर, उन्हें गृहस्थी की जिम्मेदारियों से मुक्त कर अपने कार्य अंतः भावना के तहत गौरी का माथा श्रद्धा से झुक जाता है। क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर देकर अपनी देशभक्ति का परिचय दिया है।
Teacher's Note:
a) उत्तर में राष्ट्रीय आंदोलन और गौरी के योगदान के संबध को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) उसके व्यक्तिगत त्याग को राष्ट्रीय यज्ञ में आहुति के रूप में प्रस्तुत करें।
Q5. किसी के क्षणिक आडम्बर और व्यवहार पर आँख मूँदकर विश्वास कर लेना घातक सिद्ध हो सकता है - 'सती' कहानी के संदर्भ में मटालसा के चरित्र को ध्यान में रखते हुए इस कथन की व्याख्या कीजिए। [5 Marks]
Answer:
सती कहानी में मडालसा का चरित्र हमारे सामने एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसमें किसी के क्षणिक आडम्बर और व्यवहार पर आँख मूँदकर विश्वास करना कितना घातक सिद्ध हो सकता है। मडालसा एक सुंदर और आकर्षक महिला थी, जिसने अपनी मोहकता और चतुराई से लोगों को भ्रमित किया। उसने अपनी बाहरी सुंदरता और मिठास भरे शब्दों से लोगों का विश्वास जीत लिया, लेकिन उसके वास्तविक उद्देश्य और इरादे बहुत ही भिन्न थे।
मडालसा ने अपनी चालाकी और स्वार्थी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दूसरों का उपयोग किया। उसकी बाहरी सुंदरता और मिठास भरे व्यवहार ने लोगों को उसकी वास्तविकता को समझने से रोके रखा। लोग उसके आडंबर और मुखोटे पर विश्वास करके उसकी चालों का शिकार हो गए। मडालसा के चरित्र को देखकर यह स्पष्ट होता है कि किसी के बाहरी आडम्बर और मीठे शब्दों पर आँख मूँदकर विश्वास करना हमें बड़ी मुसीबत में डाल सकता है।
यह कहानी हमें यह सीख देती है कि हमें किसी व्यक्ति के बाहरी दिखावे और क्षणिक व्यवहार पर बिना सोचे-समझे विश्वास नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा व्यक्ति की वास्तविकता और उसके आचरण को गहराई से समझने की कोशिश करनी चाहिए। मडालसा का चरित्र इस बात का उदाहरण है कि कैसे किसी की क्षणिक आडंबर और व्यवहार पर विश्वास करना हमारे लिए घातक सिद्ध हो सकता है। इससे हमें सतर्क और समझदार बनने की प्रेरणा मिलती है, ताकि हम अपने जीवन में सही निर्णय ले सकें और धोखे से बच सकें।
Teacher's Note:
a) मडालसा के चरित्र के माध्यम से छलावरण और बाहरी दिखावे की पोल खोलने का प्रसंग प्रमुखता से लिखें।
b) इस बात पर जोर दें कि सतह से परे जाकर मनुष्य के वास्तविक चरित्र को पहचानना क्यों जरूरी है।
Q6. 'भक्तिन' एक कर्मठ नारी के संघर्षमय जीवन की कहानी है। इस कथन को भक्तिन के जीवन के चार अध्यायों के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [5 Marks]
Answer:
'भक्तिन' शीर्षक रेखाचित्र एक कर्मठ नारी के संघर्षमय जीवन की कहानी है, जिसे चार प्रमुख अध्यायों के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है। पहले अध्याय में भक्तिन का बचपन आता है, जहाँ उसने गरीबी और अभाव में जीवन जीना सीखा। अपने परिवार की मदद के लिए उसने कठिन मेहनत की और जीवन की विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। दूसरा अध्याय उसकी युवावस्था का है, जब उसने शादी की और परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। इस दौरान उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने कभी नहीं मानी और अपने परिवार के लिए हर संभव प्रयास किया।
तीसरा अध्याय तब शुरू होता है जब उसके पति की मृत्यु हो जाती है। इस कठिन समय में, उसने अपने बच्चों को अकेले पालने और उनका भविष्य संवारने का बीड़ा उठाया। अपने साहस और मेहनत के बल पर उसने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए। चौथा अध्याय उसकी वृद्धावस्था का है, जब उसने अपने संघर्षों का फल देखा और अपने बच्चों को सफल होते हुए देखा। इस समय उसने अपने जीवन की मुश्किलों को पीछे छोड़कर संतोष और गर्व का अनुभव किया।
'भक्तिन' की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, एक कर्मठ और साहसी नारी अपने संघर्ष और मेहनत के बल पर हर मुश्किल को पार कर सकती है। उसके जीवन के ये चार अध्याय उसकी अडिगता, साहस और समर्पण के प्रतीक हैं, जो हर नारी को प्रेरणा देते हैं। 'भक्तिन' एक ऐसी महिला का प्रतीक है जिसने अपने परिवार और समाज के लिए अप्रतिम त्याग और संघर्ष किया, और अपने जीवन को एक मिसाल बना दिया।
Teacher's Note:
a) महादेवी वर्मा द्वारा रचित इस संस्मरण में भक्तिन के जीवन के चारों चरणों (बचपन, युवावस्था, वैधव्य/संघर्ष, वृद्धावस्था) का क्रमिक वर्णन होना चाहिए।
b) भक्तिन के जुझारू व्यक्तित्व और कर्मठता को रेखांकित करना न भूलें।
Q7. काव्य मंजरी (Kavya Manjari)
'अतिम बार गोद में बेटी;
तुमको ले न सका मैं हा
एक फूल माँ के प्रसाद का
तुझको दे न सका मैं हा!'
i. प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? यहाँ में शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? [1 Mark]
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ 'सियारामशरण गुप्त' द्वारा रचित कविता 'एक फूल की चाह' से अवतरित हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में 'मैं' शब्द का कविता की मुख्य पात्र, सुखिया का पिता अपने लिए प्रयोग करता है।
Teacher's Note:
a) कविता और कवि का नाम तथा 'मैं' के संदर्भ को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) यह करुण प्रसंग कविता के केंद्रीय भाव को व्यक्त करता है।
ii. 'बेटी ने किससे, क्या इच्छा जाहिर की? [2 Marks]
Answer:
प्रस्तुत कविता में बेटी ने अपने पिता से देवी माँ के चरणों का प्रसाद का फूल लाने की इच्छा प्रकट की ताकि उस प्रसाद को पाकर वह जल्दी ठीक हो जाए।
Teacher's Note:
a) बीमार बच्ची की अंतिम और मासूम इच्छा का उल्लेख करें।
b) यह इच्छा ही पूरी कविता के घटनाक्रम को गति देती है।
iii. क्या वक्ता की इच्छा पूरी हो सकी? कारण सहित उत्तर लिखिए। [2 Marks]
Answer:
प्रस्तुत कविता में वह अभागा पिता अपनी बेटी की उस आखिरी इच्छा को पूरा नहीं कर सका क्योंकि जब वह मंदिर में देवी माँ के दर्शन व पूजा करके प्रसाद का फूल लेकर वापस लौट रहा था तभी मंदिर के पुजारी व धर्म के ठेकेदार लोगों ने उसे देख लिया। वह अछूत जाति का था इसलिए उसे मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं था। पिता वापस अपनी बेटी के पास लौटा तो उसकी बेटी मर चुकी थी वहाँ केवल राख की ढेरी ही शेष थी। अतः वह अपनी बेटी की आखिरी इच्छा भी पूरी नहीं कर सका था।
Teacher's Note:
a) विवशता और सामाजिक भेदभाव के कारण अधूरी रही इच्छा का वर्णन करें।
b) यह करुण अंत सामाजिक विषमता को उजागर करता है।
iv. इस कविता में कवि ने किस भेदभाव को उजागर किया है? वह किस प्रकार देश की प्रगति में बाधक है? समझाइए लिखकर। [5 Marks]
Answer:
प्रस्तुत कविता में गुप्तजी ने छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों को उजागर किया है। इस कविता में छुआछूत जैसी भारतीय समाज की संकीर्ण विचारधारा पर प्रकाश डाला है। महामारी की चपेट में आ जाने से उसकी प्रिय बेटी का शरीर ज्वर से तपपने लगता है और वह बहुत कमजोर भी हो जाती है। पिता उसे बचाने का भरसक प्रयास करता है। इसी क्रम में सुखिया अपने पिता से देवी माँ का प्रसाद रूपी फूल लाने का आग्रह करती है। दलित होने के कारण उनका मंदिर में प्रवेश वर्जित था, फिर भी वह पिता यह अपराध करता है और इस अपराध के लिए पिटाई, व अपमान सहना पड़ता है। प्रस्तुत कविता में एक बीमार बच्ची के दलित पिता की पीड़ा को दर्शाया गया है। अछूत कहकर तथा मंदिर को अपवित्र करने के अपराध दलित पिता को अपनी पुत्री की अंतिम इच्छा पूरी करने का सौभाग्य भी नहीं मिला। जाति के आधार पर भेदभाव एक सामाजिक अपराध है छुआछूत के नाम पर दलितों को मंदिर में प्रवेश न करने देना मानवता के विरुद्ध है। ईश्वर ने किसी मनुष्य में कोई भेद नहीं किया है हम मनुष्य धर्म के ठेकेदार बनकर यह निर्णय कैसे कर सकते हैं कि कौन अछूत है और कौन पवित्र। यह देश के लिए हानिकारक है इस वर्ग भेद के रहते देश कभी प्रगति नहीं कर सकता। ईश्वर ने किसी मनुष्य में कोई भेद नहीं किया है देश के हित के लिए हमें भेदभाव नहीं करना चाहिए और सबको सम्मान देना चाहिए।
Teacher's Note:
a) छुआछूत और जातिगत भेदभाव के सामाजिक दुष्प्रभावों की चर्चा करें।
b) राष्ट्रीय एकता और प्रगति में यह किस प्रकार बाधक है, इसे तार्किक रूप से समझाएँ।
Q8. सूरदास जी की भक्ति भावना पर प्रकाश डालते हुए संकलित पदों के आधार पर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा माता यशोदा के वात्सल्य भाव का वर्णन कीजिए। [5 Marks]
Answer:
सूरदास जी भारतीय भक्ति काव्य के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने अपनी कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और माता यशोदा के वात्सल्य भाव का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया है। उनकी भक्ति भावना अत्यंत गहरी और सच्ची थी, जो उनकी रचनाओं में स्पष्ट झलकैती है। सूरदास जी ने अपने पदों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को चित्रित किया है, जिसमें उनका नटखटपन, उनकी भोली मुस्कान और उनकी चंचलता का अद्वितीय वर्णन मिलता है। सूरदास जी के पदों में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन बहुत ही सजीव और मनमोहक है। श्रीकृष्ण के माखन चुराने, गोपियों के साथ रास रचाने और उनकी बाल-सुलभ शरारतों का अत्यंत रोचक तरीके से वर्णन किया है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में उनकी सरलता, ममता और अनन्य भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सूरदास जी के पदों में श्रीकृष्ण के प्रति उनकी असीम भक्ति और प्रेम प्रकट होता है।
माता यशोदा के वात्सल्य भाव का वर्णन करते हुए सूरदास जी ने उनकी ममता, स्नेह और करुणा को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने यशोदा के उस वात्सल्य का वर्णन किया है जब वह श्रीकृष्ण को नहलाती, सुलाती और उनके क्रीड़ाओं को देखकर प्रसन्न होती हैं। सूरदास जी के पदों में जब श्रीकृष्ण गायब हो जाते हैं या जब वह शरारत करते हैं, तो भी बहुत ही भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है। सूरदास जी की भक्ति भावना और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन उनकी रचनाओं को अद्वितीय बनाता है। उनकी कविताओं में बाल कृष्ण का जो चित्रण मिलता है, वह न केवल भक्तों के हृदय को छू लेता है, बल्कि उनमें भक्ति और प्रेम की भावना भी जागृत करता है। सूरदास जी की रचनाएँ भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं, जो आज भी लोगों को भक्ति मार्ग पर प्रेरित करती हैं।
Teacher's Note:
a) सूरदास की वात्सल्य सम्राट के रूप में प्रतिष्ठा और उनके पदों की विशेषताओं का उल्लेख करें।
b) बाल कृष्ण की नटखट लीलाओं और यशोदा के मातृत्व प्रेम के सुंदर समन्वय को स्पष्ट करें।
Q9. 'जाग तुझको दूर जाना है' कविता में कवयित्री स्वयं के मन तथा मानव मन को क्या संदेश देना चाहती है? कविता की पंक्तियाँ कहीं-न-कहीं हम सब में एक नया उत्साह भरती हैं। कविता के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए। [5 Marks]
Answer:
'जाग तुझको दूर जाना है' कविता में कवयित्री स्वयं के मन और समस्त मानव मन को जागरूक करना और प्रेरित करना है। यह कविता हमें हमारे जीवन के उद्देश्य की याद दिलाती है और हमें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। कवयित्री हमें यह संदेश देती है कि जीवन में हमें आलस्य, निराशा और अवसाद को त्यागकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। कविता की पंक्तियाँ हमें यह बताती हैं कि जीवन में कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन हमें उनसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें स्वीकार कर, उनसे सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
कवयित्री की यह पंक्तियाँ हम सभी में एक नया उत्साह भरती हैं और हमें आत्मविश्वास से भर देती हैं। कवयित्री कहती हैं कि समय रुकता नहीं है, वह निरंतर चलता रहता है। हमें भी उसी के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। यह कविता हमें यह सिखाती है कि हमारा मन यदि जागृत और उत्साही रहेगा तो हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
इस प्रकार, 'जाग तुझको दूर जाना है' कविता हमें हमारे जीवन की महत्वपूर्ण सच्चाइयों से अवगत कराती है और हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में ऊँचाइयों को छूने के लिए सदैव जागरूक और तत्पर रहें। इस कविता के माध्यम से कवयित्री हम सभी में आत्मविश्वास, साहस और उत्साह का संचार करती है। महादेवी के मन को सावधान करती है कि संसारके मोह-माया के बंधन से मुक्त होकर निरंतर आगे बढ़ते जाना है और अपनी मंजिल को प्राप्त करना है। कवयित्री प्रेरणा देती हैं कि उसे सदा अंगारों की शैया अथवा कठिनाइयों से भरे मार्ग पर चलने के लिए तत्पर रहना है।
Teacher's Note:
a) महादेवी वर्मा की इस प्रगतिवादी-छायावादी कविता के मूल स्वर (जागृति, संघर्ष और साधना) को स्पष्ट करें।
b) कठिनाइयों से न घबराते हुए निरंतर अपने गंतव्य की ओर बढ़ने के संदेश को रेखांकित करें।
Q10. "सारा आकाश" (Saara Akash)
"बहुत है बहुत है दिवाकर!" कृतज्ञता-गद्गद स्वर में मैंने कहा, यह हो जाए दिवाकर, तो मेरा उद्धार हो जाएगा। तू नहीं जानता मैं कितना परेशान हूँ। घर में एक पल को चैन नहीं मिलता...।"
i. वक्ता कौन है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [1 Mark]
Answer:
वक्ता समर है। समर एक ऐसे व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके सपने तथा महत्त्वाकांक्षाएँ निम्नमध्यवर्गीय परिवार की आर्थिक समस्याओं के कारण टूट जाते हैं। वह परिस्थितियों से जूझता रहता है।
Teacher's Note:
a) वक्ता का नाम (समर) और उपन्यास में उसकी स्थिति का संक्षिप्त परिचय दें।
b) वह उपन्यास का मुख्य पात्र है जो आर्थिक तंगी से जूझ रहा है।
ii. दिवाकर कौन है? वह वक्ता को क्या काम दिलवा रहा था? [2 Marks]
Answer:
दिवाकर समर का मित्र है। वह समर की परेशानी देखकर एक प्रेस में प्रूफरीडिंग का काम भी दिलवाता है। वह उसके दुख-सुख का साथी भी है। वह समर की परेशानियों को दूर करने में भी मदद करता है। वह युवा वर्ग का प्रतीक है।
Teacher's Note:
a) दिवाकर की मित्र रूप में भूमिका और उसके द्वारा दिलाए जा रहे कार्य (प्रूफरीडिंग) का उल्लेख करें।
b) मित्रता के सच्चे स्वरूप को स्पष्ट करें।
iii. वक्ता की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी? [2 Marks]
Answer:
दिवाकर द्वारा प्रेस में प्रूफ रीडिंग का काम सुनकर वह उतावला हो गया कि जल्दी से उसे यह कार्य मिल जाए। वक्ता (समर) इस प्रस्ताव से खुश हो गया था। उसे किसी भी रोजगार की अत्यंत आवश्यकता थी। वह आर्थिक समस्याओं से परेशान हो गया था। इसीलिए वह दिवाकर का धन्यवाद करता है।
Teacher's Note:
a) समर की तात्कालिक प्रसन्नता और राहत के भाव को स्पष्ट करें।
b) बेरोजगारी के दौर में उस छोटे से काम का उसके लिए क्या महत्व था, इसे बताएं।
iv. "तू नहीं जानता मैं कितना परेशान हूँ। घर में एक पल को चैन नहीं मिलता......।" इस कथन के आलोक में वक्ता के घर की स्थिति का वर्णन कीजिए। [5 Marks]
Answer:
वक्ता (समर) के घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब है। रोजगार न होने से परिवार के सभी सदस्य उसे कुछ न कुछ सुनाते रहते हैं। 'सारा आकाश' वर्तमान युवा-पीढ़ी की त्रासदी है। वह एक महत्वाकांक्षी युवक है पर घर की स्थिति अच्छी न होने के कारण उसे बहुत कुछ सुनना पड़ता है। निम्न मध्यमवर्गीय शिक्षित युवा के संघर्ष का प्रत्यक्ष उदाहरण है। नायक समर एक अव्यवहारिक आदर्शवादी है। वह संयुक्त परिवार की घुटन भरी जिंदगी जीने के लिए विवश है। अम्मा के कटाक्ष, बाबूजी का आतंक, भाभी के व्यंग्य-बाण। वह प्रभा की भावनाओं को समझता तो है परन्तु कुछ कर नहीं पाता। परिवार में कमाने वाले कम हैं और खर्च अधिक हैं। इस कारण तनाव का माहौल बना रहता है। आपसी पारिवारिक प्रेम समाप्त होता जा रहा है।
Teacher's Note:
a) संयुक्त परिवार की विसंगतियों और आर्थिक तنگی के कारण उत्पन्न तनाव का वर्णन करें।
b) समर की मानसिक घुटन और पारिवारिक सदस्यों के व्यवहार को स्पष्ट करें।
Q11. राजेन्द्र यादव ने समकालीन संदर्भों एवं समस्याओं का मंथन करते हुए 'सारा आकाश' उपन्यास की रचना की है। समर एक ऐसा पात्र है जिसका चरित्रंकन यथार्थवाद के धरातल पर किया गया है। उक्त कथन को ध्यान में रखकर समर का चरित्र चित्रण कीजिए। [5 Marks]
Answer:
समर का चरित्र चित्रण: 'सारा आकाश'
राजेन्द्र यादव के उपन्यास 'सारा आकाश' में समर का चरित्र यथार्थवाद के धरातल पर गढ़ा गया है। वह समकालीन संदर्भों और समस्याओं का प्रतीक है। निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समर के चरित्र को स्पष्ट किया जा सकता है:
1. भविष्य के प्रति आशावादी:
- समर भविष्य के प्रति आशावादी है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
- वह भविष्य के प्रति पूर्ण आशावादी है इस कारण वह अपने विवाह के पक्ष में नहीं था। वह आगे पढ़ाई कर सफलता हासिल करना चाहता था।
- समर की यह आशावादिता उसे जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देती है।
2. आत्मनिर्भर और विचारत्मक सोच वाला:
- समर आत्मनिर्भर है और अपने निर्णय स्वयं लेने में विश्वास रखता है।
- वह पढ़ाई के साथ-साथ पार्टटाइम नौकरी भी करता रहता है। अपनी वैचारिक सोच के कारण ही शिरीष भाई साहब के विचारों से प्रभावित होता है।
3. पुराने विचारों और संस्कृति को मानने वाला:
- समर का परिवार पारंपरिक और रूढ़िवादी सोच का पालन करता है, जिससे वह बंधा हुआ है।
- वह स्वयं भी कहीं-कहीं पुराने विचारों और संस्कृति का पालन करता है, लेकिन वह इन्हें बदलने की आवश्यकता को भी समझता है।
- वह संयुक्त परिवार में रहता है। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने पर भी वह सभी के लिए कुछ करना चाहता है। वह घुटन भरी जिंदगी के बावजूद परिवार से अपमान सहता है परन्तु उनसे अलग नहीं होता है।
4. आजाद देश के निराश युवा का प्रतीक:
- समर आजाद भारत के उन युवाओं का प्रतीक है जो अपने सपनों और वास्तविकताओं के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
- उसकी निराशा और संघर्ष उस पीढ़ी की मानसिकता को दर्शाते हैं जो स्वतंत्रता के बाद भी समाज की बंदिशों और आर्थिक समस्याओं से जूझ रही है।
- अन्य भी कई चारित्रिक विशेषताओं के साथ समर का व्यक्तित्व सामने आया है। वह मेधावी निराशावादी, स्वाभिमानी और अपने फैसले पर अडिग रहने वाला है। उसका संपूर्ण जीवन निराशा और कष्टों में बीतता है।
समर का चरित्र 'सारा आकाश' उपन्यास में यथार्थवादी दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। वह एक ऐसा युवक है जो अपने जीवन के उद्देश्यों को पाने के लिए संघर्ष करता है और समाज एवं परिवार की रूढ़ियों को चुनौती देता है। उसकी कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ हमें मजबूत बनाते हैं और हमें अपने उद्देश्य की ओर अग्रसर करते हैं।
Teacher's Note:
a) समर के चरित्र की यथार्थवादी विशेषताओं (आशावाद, संघर्ष, द्वंद्व, और बदलाव की छटपटाहट) को रेखांकित करें।
b) उसे समकालीन शिक्षित युवा वर्ग का प्रतिनिधि पात्र बताएं।
Q12. 'सारा आकाश' केवल समर और प्रभा की ही कथा नहीं है बल्कि इसके माध्यम से लेखक ने पारिवारिक तथा सामाजिक समस्याओं को भी उजागर किया है। उपन्यास के आधार पर इस कथन की व्याख्या कीजिए। साथ ही यह भी लिखिए कि आप इस कथन से कितना सहमत हैं और क्यों? [5 Marks]
Answer:
'सारा आकाश' उपन्यास का सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का चित्रण
राजेन्द्र यादव का उपन्यास 'सारा आकाश' केवल समर और प्रभा की कहानी नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लेखक ने समाज और परिवार की विभिन्न समस्याओं को उजागर किया है। यह उपन्यास सामाजिक और पारिवारिक संरचनाओं में व्याप्त अनेक विसंगतियों और संघर्षों को सामने लाता है:
1. बेरोजगार युवकों के संघर्ष का वर्णन:
- उपन्यास में समर के माध्यम से बेरोजगार युवकों के संघर्ष को दिखाया गया है। समर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद नौकरी पाने में असफल रहता है, जिससे उसके आत्म-सम्मान और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।
- संपूर्ण कलेवर यथार्थवादी और रोचक है। सामान्यतः मध्यमवर्ग के माता-पिता आत्मनिर्भर हुए बिना ही लड़के का विवाह कर देते हैं। इसी से आगे के जीवन में खींचतान और टेंशन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है।
2. संयुक्त परिवारों की समस्या:
- उपन्यास में संयुक्त परिवार की समस्याओं को भी उजागर किया गया है। समर का परिवार एक संयुक्त परिवार है, जहाँ पारिवारिक सदस्यों के बीच तनाव और मतभेद स्पष्ट दिखाई देते हैं।
- इस वर्ग कीमानसिकता को अंधविश्वास, परंपरागत संस्कार से संबंधित कर दिया जाता है जिसे अंत में स्वीकार करना ही पड़ता है।
3. स्त्री जाति पर होने वाले अत्याचारों का उजागर होना:
- घर में प्रभा की जो स्थिति दर्शायी गई है, वह मर्मस्पर्शी है। दोनों पति-पत्नी तो बन गए परन्तु परिवार के अन्य सदस्य उनके संबंध में दीवार बनकर खड़े हो गए।
- प्रभा की हालत नौकरानी जैसी थी, भाभी उस पर घी डालने का कार्य करती थीं।
4. भारतीय और पश्चिमी सभ्यता का अंतर:
- उपन्यास में भारतीय और पश्चिमी सभ्यता के अंतर को भी दिखाया गया है। समर और प्रभा के विचारों में इस अंतर को देखा जा सकता है।
- पश्चिमी सभ्यता की स्वतंत्रता और व्यक्तिवादिता के मुकाबले भारतीय समाज की परंपरागत सोच और सामूहिकिता का टकराव स्पष्ट रूप से चित्रित किया गया है।
5. दहेज प्रथा की समस्या:
- दहेज प्रथा की समस्या को भी उपन्यास में उजागर किया गया है। समर और प्रभा के विवाह में दहेज को लेकर परिवार में तनाव और मतभेद उत्पन्न होते हैं।
- अतः 'सारा आकाश' उपन्यास अनेकानेक समस्याओं से भरा है जिसमें नारी ही नारी की सबसे बड़ी शत्रु बन जाती है अम्मा तथा भाभी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। कहा जा सकता है कि यह उपन्यास यथार्थवादी है जिसमें मध्यमवर्ग की लगभग सभी समस्याओं को उजागर किया गया है। सभी परिस्थितियों के रूपांतरण में यह एक सफल नाटक है।
कथन से सहमति:
मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ कि 'सारा आकाश' केवल समर और प्रभा की ही कथा नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लेखक ने पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं को भी उजागर किया है। उपन्यास में बेरोजगारी, संयुक्त परिवार की समस्याएँ, स्त्री जाति पर अत्याचार, भारतीय और पश्चिमी सभ्यता का अंतर, और दहेज प्रथा जैसे मुद्दों को गम्भीरता से उठाया गया है। ये सभी समस्याएँ आज भी हमारे समाज में प्रासंगिक हैं और इस उपन्यास के माध्यम से लेखक ने समाज को आईना दिखाने का प्रयास किया है। 'सारा आकाश' समाज की जटिलताओं और व्यक्ति के संघर्षों का एक सजीव चित्रण है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है।
Teacher's Note:
a) उपन्यास के फलक की व्यापकता (पारिवारिक विघटन, नारी उत्पीड़न, बेरोजगारी आदि) को स्पष्ट करें।
b) छात्र अपनी सहमति के पक्ष में तार्किक एवं प्रामाणिक तर्क प्रस्तुत करें।
Q13. "आषाढ़ का एक दिन" (Aashad Ek Din)
"उनके प्रसंग में मेरी बात कहीं नहीं आती। मैं अनेकानेक साधारण व्यक्तियों में से हूँ। वे असाधारण हैं। उन्हें जीवन में असाधारण का ही साथ चाहिए था। सुना है राज-दुहिता बहुत विदुषी हैं।"
i. प्रस्तुत कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? [1 Mark]
Answer:
वक्ता - मल्लिका
श्रोता - निक्षेप
Teacher's Note:
a) नाटक के संवाद के आधार पर वक्ता और श्रोता की सही पहचान दें।
b) मल्लिका की हीनभावना और कालिदास की महानता के प्रसंग का यह संवाद है।
ii. उक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2 Marks]
Answer:
सन्दर्भ - प्रस्तुत कथन मल्लिका द्वारा कहे गए हैं निक्षेप द्वारा कालिदास का आग्रह याद दिलाने पर मल्लिका अपने विचार और स्थिति प्रकट करती है कि वह उनके समान विशेष नहीं है बल्कि बहुत साधारण है। जब कालिदास के विवाह की सूचना अम्बिका और मल्लिका को मिलती है।
Teacher's Note:
a) संदर्भ में कालिदास के उज्जैनी जाने और विवाह के प्रसंग को स्पष्ट करें।
b) मल्लिका की अपनी स्थिति के प्रति यथार्थवादी और विनीत सोच को दर्शाएं।
iii. "वक्ता ने असाधारण किसे कहा है और क्यों? [2 Marks]
Answer:
वक्ता ने कालिदास को असाधारण कहा है क्योंकि वे उच्च कोटि के विद्वान हैं। उन्होंने ऋतु संहार, मेघदूत, कुमार संभव जैसे महाग्रंथों की रचना की थी।
Teacher's Note:
a) असाधारण शब्द का प्रयोग कालिदास के लिए हुआ है, इसका कारण उनकी साहित्यिक प्रतिभा है।
b) उनकी कृतियों (ऋतुसंहार, मेघदूत आदि) का उल्लेख आवश्यक है।
iv. उक्त संवाद के आलोक में वक्ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए। [5 Marks]
Answer:
वक्ता के चरित्र की विशेषताएँ मोहन राकेश द्वारा लिखित 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक पात्र-योजना की दृष्टि से एक सफल नाटक है। मल्लिका भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व करती है। वह नाटक का सबसे शक्तिशाली और मार्मिक चरित्र है। मल्लिका, अम्बिका की पुत्री है। वह कालिदास की प्रेयसी के रूप में सामने आती है। वह कालिदास को भावनात्मक स्तर पर पवित्र और निःस्वार्थ प्रेम करती है। नाटक के प्रमुख पात्रों में कालिदास, विलोम, मातुुल, निक्षेप, मल्लिका, अम्बिका तथा प्रियंगुमंजरी हैं। मल्लिका चरित्र से उदार, अहिंसा और करुणा की मूर्ति, निःस्वार्थ भाव से प्रेम करने वाली, स्वाभिमानी युवती है। मल्लिका आदर्श तथा साधारण नारी है तथा कालिदास को असाधारण बताती है। वह कालिदास का प्रियंगुमंजरी से विवाह होने पर भी चिंतित नहीं होती है तथा अंत तक अपना आत्मसम्मान बनाये रखने का भरसक प्रयास करती है।
Teacher's Note:
a) मल्लिका के चरित्र की कोमलता, त्याग, प्रेम और स्वाभिमान जैसी विशेषताओं को उभारें।
b) वह नाटक की केंद्रीय और सशक्त पात्र है, इसे दर्शाएं।
Q14. 'राज्यश्रय में रहकर साहित्यकार का लेखन कुंठात हो जाता है -' आषाढ़ का एक दिन' नाटक के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए। [5 Marks]
Answer:
'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में नाटककार ने भौतिक दर्शन, प्रवृत्ति मार्ग व निवृत्ति मार्ग के घनीभूत द्वंद्व को सफलतापूर्वक चित्रित किया गया है।
नाटक की शुरुआत में ही लेखक अपने मन की बात बताते हैं कि उन्हें आषाढ़ का एक दिन बेहद पसंद है लेकिन स्पष्ट नहीं कर पाते कि यह दिन क्यों पसंद है। दिन के व्याख्यायित करते हुए लेखक कहते हैं कि इस दिन बादलों की गोद में बैठकर आराम से ग्रामीण दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है लेकिन दूसरी तरफ इस दिन की गर्मी, उमस तथा भूख उलझन में डाल देती है। यह नाटक इस बात को स्पष्ट करता है कि राज्यश्रय में रहकर साहित्यकार का लेखन कुंठित हो जाता है। कालिदास का प्रारंभिक जीवन उनके गाँव में स्वतंत्रता और सरलता से भरा होता है, जहाँ वे अपनी रचनाओं को बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकते हैं। उनकी रचनाओं में सजीवता और मौलिकता होती है, जो उनकी व्यक्तिगत संवेदनाओं और विचारों का प्रतिबिंब होती है। ऊपरी तौर पर नाटक में कालिदास की कथा को प्रस्तुत किया गया है जिसमें मल्लिका से प्रेम, राज्यश्रम का सुख प्रियंगुमंजरी से विवाह, राजसी सुख, सुख सम्पन्नता, ख्याति आदि सब दर्शाया गया है परन्तु इसके पीछे लेखक ने तनाव, परिस्थितियों से समझौता, घुटन, मानसिक प्रताड़ना आदि को भी दर्शाया है। सभी पात्र पूर्ण होकर भी अपूर्ण ही दिखते हैं। कालिदास की रचनाएँ अब दरबारी जीवन और राजनैतिक आवश्यकताओं के अधीन हो जाती हैं, जिससे उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। उनकी व्यक्तिगत संवेदनाएँ और स्वतंत्र विचार दब जाते हैं, और उनका लेखन कुंठित हो जाता है।
मल्लिका कालिदास की सफलता के लिए उसे उज्जयिनी भेज देती है। स्वयं विलोम को आत्मसमर्पण करती है परन्तु अपनी सदैव उसकी प्रेमिका बनी रहती है। कालिदास मल्लिका से प्रेम तो करता है परन्तु अपनी सफलता के लिए अपने प्रेम भूल आगे बढ़ जाता है। नाटक का प्रारम्भ भी वर्षा से होता है और अंत भी उसी वर्षा की सघन बौछारों में दिखाया गया है। नाटक के आरम्भ में कालिदास व मल्लिका के जीवन में सामाजिक अवमाननाओं, उपेक्षाओं और अपवादों के कारण घुटन है और अंत भी कालिदास के साथ उसी घुटन भरी स्थिति में होता है।
Teacher's Note:
a) राज्याश्रय और स्वतंत्रता के द्वंद्व को कालिदास के जीवन के संदर्भ में समझाएं।
b) सत्ता के प्रभाव से रचनात्मक स्वतंत्रता के हनन के बिंदु को स्पष्ट करें।
Q15. 'कालिदास जहाँ एक तरफ अप्रतिम प्रतिभा के स्वामी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके स्वभाव में दुर्बलातों को भी देखा गया है।' - इस कथन को ध्यान में रखते हुए कालिदास का चरित्रत्रण कीजिए। [5 Marks]
Answer:
1. असाधारण व्यक्तित्व का स्वामी:
- कालिदास निर्धन होकर विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। यही कारण था कि अभावग्रस्त कालिदास से मल्लिका जैसी सुंदरी अपगाध प्रेम कर बैठती है।
- वे अपने समय के सर्वोच्च साहित्यिक प्रतिभाओं में से एक हैं, जिनकी रचनाओं में गहराई और उच्च स्तर की काव्यत्मकता पाई जाती है।
2. प्रकृति प्रेमी:
- कालिदास की रचनाओं में प्रकृति का सजीव और सजीव वर्णन मिलता है वे प्रकृति के अद्भुत चित्रकार हैं।
- 'मेघदूत' और 'कुमारसंभवम्' जैसी रचनाओं में प्रकृति के प्रति उनका प्रेम और उनकी संवेदनशीलता स्पष्ट होती है।
- उनके लेखन में प्रकृति के विभिन्न रूपों का विस्तृत और मनमोहक वर्णन मिलता है, जो उनके प्रकृति प्रेम को दर्शाता है।
3. स्वार्थी प्रवृत्ति:
- कालिदास में स्वार्थी प्रवृत्ति भी देखी जा सकती है, जो उनके चरित्र की एक दुर्बलता है।
- केवल मल्लिका ही उसे जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थी।
- उनकी इस प्रवृत्ति के कारण वे अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों को नजर अंदाज करते हैं, जिससे उनके जीवन में तनाव और संघर्ष उत्पन्न होते हैं।
4. निर्णय लेने में असमर्थ:
- कालिदास के चरित्र में निर्णय लेने की असमर्थता भी प्रकट होती है।
- वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में दुविधा और अनिश्चितता का सामना करते हैं।
- उनकी यह असमर्थता उनके जीवन में कई समस्याओं का कारण बनती है और उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
5. परिस्थितियों के गुलाम:
- कालिदास अक्सर परिस्थितियों के गुलाम बन जाते हैं और उनकी प्रवृत्तियाँ उनके निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
- वे राज्याश्रय की चमक-धमक में फंसकर अपनी स्वतंत्रता और सृजनात्मकता को खो देते हैं।
- उनकी यह गुलामी उन्हें अपने वास्तविक उद्देश्य से भटका देती है और उनकी रचनात्मकता पर भी असर डालती है।
6. दुर्बल-प्रेमी:
- कालिदास के चरित्र में प्रेम के प्रति दुर्बलता भी देखी जा सकती है।
- कालिदास के प्रेम में दुर्बलता है। वे उज्जयिनी में मल्लिका को भूल प्रियंगुमंजरी से विवाह कर लेते हैं। प्रेम के क्षेत्र में नाटककार कालिदास के चरित्र की गरिमा की रक्षणहीं कर पाए हैं।
- उनके प्रेम और भावनाओं की यह दुर्बलता उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर कमजोर बनाती है और उनके जीवन में कठिनाइयाँ उत्पन्न करती है।
निष्कर्ष: कालिदास एक महान साहित्यकार होने के साथ-साथ एक जटिल और मानवीय गुणों से युक्त व्यक्ति हैं। उनके असाधारण प्रतिभा के साथ-साथ उनके स्वभाव की दुर्बलताएँ भी उन्हें एक सजीव और वास्तविक चरित्र बनाती हैं। आषाढ़ का एक दिन में उनका चरित्र चित्रण हमें यह सिखाता है कि महानता के साथ-साथ मानवीय कमज़ोरियाँ भी हो सकती हैं, जो जीवन के संघर्षों और दृढ़ों को और भी गहरा बनाती हैं।
Teacher's Note:
a) कालिदास के चरित्र के दोनों पक्षों (प्रतिभा संपन्न रचनाकार और कमजोर एवं अवसरवादी मनुष्य) का संतुलित विश्लेषण करें।
b) उनकी महानता और उनकी मानवीय कमजोरियों के बीच के अंतरद्वंद्व को स्पष्ट करें।
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