ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper 2020 with Solutions

Class 12 Hindi Solved Question Papers: ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper 2020 with Solutions

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ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper 2020 with Solutions

 

SECTION A

 

LANGUAGE - 50 Marks

 

Question 1

Write a composition in approximately 400 words in Hindi on any ONE of the topics given below : [20 Marks]
किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो : -
(i) निःस्वार्थ भाव से की गई सहायता से असीम आनंद तथा संतोष प्राप्त होता है। किसी ऐसी ही एक घटना का वर्णन कीजिए जब आपने अपनी परेशानियों की परवाह किए बिना किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद की थी। यह भी स्पष्ट कीजिए कि इस अनुभव से आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?
(ii) "जल ही जीवन है। जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना करना व्यर्थ है।" वर्तमान युग में जल संकट की समस्या किस प्रकार विकराल रूप लेती जा रही है ? जल संरक्षण की आवश्यकता तथा इसके विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(iii) आपके विद्यालय जीवन का यह अंतिम वर्ष है। आज आपका विदाई समारोह आयोजित किया गया है। इतने वर्षों में मित्रों एवं अध्यापकों का साथ छूटने वाला है। इन बीते वर्षों के न भूलने वाले खट्टे-मीठे अनुभव लिखिए।
(iv) "मनुष्य के नैतिक उत्थान का जिम्मेदार परिवार एवं समाज है" - विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
(v) विश्व के मानचित्र पर भारत की एक नई पहचान उभर रही है, इसका कारण है "आज का जागरूक भारत" - व्याख्या कीजिए।
(vi) निम्नलिखित में से किसी एक पर मौलिक कहानी लिखिए : -
(a) "बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय। "
(b) एक मौलिक कहानी लिखिए जिसका अंतिम वाक्य हो :
......................... और अपने घर सकुशल पहुँचने पर हमने चैन की साँस ली।

Answer:

(iv) "मनुष्य के नैतिक उत्थान का जिम्मेदार परिवार एवं समाज है" (पक्ष में)

मानव जीवन की यात्रा में नैतिकता वह धुरी है जो समाज को सभ्य, सुसंस्कृत और शांतिपूर्ण बनाए रखती है। जन्म लेते ही मनुष्य एक कोरे कागज की तरह होता है, जिस पर उसके परिवार और समाज के संस्कार रंग भरते हैं। यह एक अकाट्य सत्य है कि मनुष्य के नैतिक उत्थान के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी उसका परिवार और परिवेश (समाज) ही होता है।

परिवार किसी भी बच्चे की पहली पाठशाला होती है। माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य उसके प्राथमिक शिक्षक होते हैं। बच्चा जो देखता है, वही सीखता है। यदि घर में बड़ों का आदर, छोटों से स्नेह, सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और परोपकार का वातावरण है, तो बालक के कोमल मन पर वही संस्कार अंकित हो जाते हैं। इसके विपरीत, यदि घर में कलह, असत्य और अनैतिकता का बोलबाला हो, तो बच्चे का नैतिक पतन होना स्वाभाविक है। परिवार ही वह पहला सोपान है जहाँ बच्चे को यह सिखाया जाता है कि क्या सही है और क्या गलत।

परिवार के बाद समाज की भूमिका अत्यंत व्यापक हो जाती है। जिस प्रकार एक पौधा सींचकर वृक्ष बनता है, उसी प्रकार परिवार से निकला बालक जब समाज के संपर्क में आता है, तो समाज की व्यवस्था, रीति-रिवाज, मूल्य और कानून उसे एक पूर्ण नागरिक बनाते हैं। एक स्वस्थ और जागरूक समाज अच्छे नागरिकों का निर्माण करता है। समाज में व्याप्त अच्छे आदर्श, न्यायप्रियता और सकारात्मकता व्यक्ति को ऊँचाइयों पर ले जाते हैं। यदि समाज में भ्रष्टाचार और अनैतिकता का बोलबाला होगा, तो व्यक्ति भी भटक सकता है। इसलिए, समाज का कर्तव्य है कि वह एक ऐसा वातावरण प्रदान करे जो नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दे।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि मनुष्य का नैतिक उत्थान केवल उसकी व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इसके मूल में परिवार के संस्कार और समाज का परिवेश ही कार्य करते हैं। एक सुदृढ़ परिवार और आदर्श समाज मिलकर ही एक श्रेष्ठ और नैतिक मानव का निर्माण कर सकते हैं।

Teacher's Note:
a) निबंध में विषय के सभी बिंदुओं को स्पष्ट रूप से कवर किया जाना चाहिए और शब्द सीमा (लगभग 400 शब्द) का ध्यान रखना आवश्यक है।
b) भाषा की शुद्धता, उचित मुहावरों का प्रयोग और विचारों का तार्किक प्रवाह अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 2

Read the passage given below carefully and answer in Hindi the questions that follow, using your own words : [20 Marks]
निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर, अन्त में दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिए : -
पुराने समय की बात है, एक गाँव में दो किसान रहते थे। दोनों ही बहुत गरीब थे; दोनों के पास थोड़ी-थोड़ी ज़मीन थी, दोनों उसमें मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुज़ारा करते थे।
अकस्मात् कुछ समय पश्चात दोनों की एक ही दिन, एक ही समय पर मृत्यु हो गई। यमराज दोनों को एक साथ भगवान के पास ले गए। भगवान ने उन्हें देख कर उनसे पूछा, "तुम्हारे इस जीवन में क्या कमी थी ?" भगवान की बात सुनकर उनमें से एक किसान बड़े गुस्से से बोला, "हे भगवन् ! आपने इस जन्म में मुझे बहुत घटिया ज़िन्दगी दी थी। आपने कुछ भी नहीं दिया मुझे। पूरी जिन्दगी मैंने बैल की तरह खेतों में काम किया, जो कुछ कमाया वह सब पेट भरने में लगा दिया, न ही कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और न ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया। देखो, कैसी जानवरों जैसी ज़िन्दगी है मैंने।"
उसकी बात सुनकर भगवान कुछ समय मौन रहे और पुनः उस किसान से पूछा, "तो अब तुम क्या चाहते हो, इस जन्म में मैं तुम्हें क्या बनाऊँ ?"
भगवान का प्रश्न सुनकर वह किसान पुनः बोला, "भगवन् ! आप कुछ ऐसा कर दीजिए, कि मुझे कभी किसी को कुछ भी देना न पड़े। मुझे तो केवल चारों तरफ से पैसा ही पैसा मिले।"
अपनी बात कहकर वह किसान चुप हो गया। भगवान ने उसकी बात सुनी और कहा, "तथास्तु ! तुम अब जा सकते हो, म तुम्हें ऐसा ही जीवन दूंगा जैसा तुमने मुझसे माँगा है।"
उसके जाने के बाद भगवान ने दूसरे किसान से पूछा, "तुम बताओ, तुम्हारे जीवन में क्या कमी थी ?" उस किसान ने भगवान के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, "हे भगवन् ! आपने मुझे सबकुछ दिया, मैं आपसे क्या माँगूँ। आपने मुझे एक अच्छा परिवार दिया, मुझे कुछ जमीन दी जिस पर मेहनत से काम करके मैंने अपने परिवार को एक अच्छा जीवन दिया। खाने के लिए आपने मुझे और मेरे परिवार को भरपेट भोजन दिया। मैं और मेरा परिवार कभी भूखे पेट नहीं सोया। बस एक ही कभी मेरे जीवन में, जिसका मुझे पूरी जिन्दगी अफसोस रहा और आज भी है। मेरे दरवाजे पर कभी कुछ भूखे और प्यासे लोग आते थे भोजन माँगने के लिए परन्तु कभी-कभी भोजन न होने के कारण मैं उन्हें खाना नहीं दे पाता था और वे मेरे द्वार से भूखे ही लौट जाते थे। ऐसा कहकर वह चुप हो गया।"
भगवान ने उसकी बात सुनकर उससे पूछा, "तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में मैं तुम्हें क्या बनाऊँ ?" किसान ने हाथ जोड़ते हुए भगवान से विनती की, "हे प्रभु ! आप कुछ ऐसा कर दें कि मेरे द्वार से कोई भूखा-प्यासा न जाए।" भगवान ने कहा, "तथास्तु ! तुम जाओ तुम्हारे द्वार से कभी कोई भूखा-नहीं जाएगा।"
अब दोनों का पुनः उसी गाँव में एक साथ जन्म हुआ। एक साथ बड़े हुए। पहला व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे चारों तरफ धन मिले और उसे कभी किसी को कुछ देना न पड़े, वह व्यक्ति उस गाँव का सबसे बड़ा भिखारी बना। अब उसे किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था और जो कोई भी आता उसकी झोली में पैसे डालकर ही जाता था।
दूसरा व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे कुछ नहीं चाहिए, केवल इतना हो जाए कि उसके द्वार से कभी कोई भूखा-प्यासा न जाए, वह उस गाँव का सबसे अमीर आदमी बना।
ईश्वर ने जो दिया है उसी में संतुष्ट रहना बहुत ज़रूरी है। अक्सर देखा जाता है कि सभी लोगों को हमेशा दूसरों की चीजें ज्यादा पसंद आती है और इसके चक्कर में वे अपना जीवन भी अच्छे से नहीं जी पातें। हर बात के दो पहलू होते हैं - सकारात्मक और नकारात्मक, अब ये हमारी सोच पर निर्भर है कि हम चीजों को नकारात्मक रूप से देखते हैं या सकारात्मक रूप से। अच्छा जीवन जीना है, तो अपनी सोच को अच्छा बनाना होगा। चीजों में कमियाँ निकालने की बजाय
भगवान ने जो दिया है उसका आनंद लेना और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा भाव रखना होगा ! जिस दिन हमारी सोच बदलेगी, जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण भी बदल जाएगा।
प्रश्न : -
(i) दोनों किसान कहाँ रहते थे ? उन दोनों में क्या समानताएँ एवं क्या विषमताएँ थीं ? [4 Marks]
(ii) पहले किसान को अपने जीवन से क्या शिकायत थी ? वह दूसरे जन्म में क्या बनना चाहता था ? [4 Marks]
(iii) दूसरे किसान ने भगवान से अपने लिए क्या माँगा और क्यों ? [4 Marks]
(iv) दोनों किसानों का पुनर्जन्म किस रूप में हुआ ? अब उनका जीवन कैसा था ? [4 Marks]
(v) इस गद्यांश से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? [4 Marks]

Answer:

(i) दोनों किसान एक ही गाँव में रहते थे। दोनों में यह समानता थी कि दोनों बहुत गरीब थे, उनके पास थोड़ी-थोड़ी ज़मीन थी और वे उस पर मेहनत करके अपने परिवार का गुज़ारा करते थे तथा दोनों की मृत्यु एक ही दिन और एक ही समय पर हुई थी। विषमता यह थी कि पहला किसान अपने जीवन से असंतुष्ट और विलापी था, जबकि दूसरा किसान ईश्वर की दी हुई कृपा के प्रति संतुष्ट और परोपकारी था।

Teacher's Note:
a) उत्तर में दोनों किसानों की आरंभिक समानताओं और भिन्न दृष्टिकोणों को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए।
b) छात्रों को गद्यांश के आधार पर संक्षिप्त और सटीक उत्तर लिखने का अभ्यास करना चाहिए।

 

(ii) पहले किसान को शिकायत थी कि उसे भगवान ने बहुत घटिया ज़िन्दगी दी थी, उसने पूरी ज़िंदगी बैल की तरह खेतों में काम किया लेकिन वह अच्छा खाना या अच्छे कपड़े नहीं जुटा पाया और उसकी कमाई दूसरों के पास चली जाती थी। वह दूसरे जन्म में ऐसा जीवन चाहता था जहाँ उसे कभी किसी को कुछ न देना पड़े और उसे केवल चारों तरफ से पैसा ही पैसा मिले।

Teacher's Note:
a) पहले किसान की निराशा और उसकी स्वार्थी माँग को सही शब्दों में लिखना आवश्यक है।
b) उत्तर लिखते समय गद्यांश के मुख्य प्रसंगों को नहीं छोड़ना चाहिए।

 

(iii) दूसरे किसान ने भगवान से माँगा कि उसके द्वार से कभी कोई भूखा-प्यासा न जाए। उसने ऐसा इसलिए माँगा क्योंकि उसके पिछले जन्म का एकमात्र अफसोस यह था कि कभी-कभी भोजन न होने के कारण द्वार पर आने वाले भूखे-प्यासे लोग खाली हाथ लौट जाते थे और वह उनकी सहायता नहीं कर पाता था।

Teacher's Note:
a) दूसरे किसान की परोपकारी भावना और उसके कारण को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
b) उत्तर में यह उल्लेख अवश्य होना चाहिए कि उसे अपने जीवन से कोई अन्य शिकायत नहीं थी।

 

(iv) दोनों किसानों का पुनर्जन्म उसी गाँव में हुआ। पहला किसान (जिसने केवल धन और किसी को कुछ न देने की कामना की थी) गाँव का सबसे बड़ा भिखारी बना, जिसे कभी किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था और लोग उसकी झोली में पैसे डालते थे। दूसरा किसान (जिसने दूसरों को भोजन खिलाने की कामना की थी) गाँव का सबसे अमीर आदमी बना।

Teacher's Note:
a) दोनों के पुनर्जन्म के परिणामों को उनके कर्म और माँग के संदर्भ में लिखना चाहिए।
b) ध्यान रखें कि पहले किसान को भिखारी और दूसरे को सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में नया जीवन मिला।

 

(v) इस गद्यांश से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर ने हमें जो भी दिया है, उसी में संतुष्ट रहना चाहिए और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा भाव रखना चाहिए। हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए क्योंकि चीजों में कमियाँ निकालने से जीवन नहीं सुधरता, बल्कि जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदलने से ही वास्तविक सुख और आनंद प्राप्त होता है।

Teacher's Note:
a) गद्यांश का केंद्रीय भाव और नैतिक संदेश स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए।
b) भाषा सरल और प्रभावपूर्ण होनी चाहिए।

 

Question 3

(a) Correct the following sentences and rewrite : - [5 Marks]
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए : -
(i) श्याम तेजी से दौड़ता है।
(ii) वह मेरे शब्दों पर ध्यान नहीं देता।
(iii) उसने गीत की दो-चार लड़ियाँ गाईं।
(iv) हत्यारे को मृत्युदण्ड की सजा मिली।
(v) हम हम हमारे देश के लिए जान दे देंगे।

Answer:
(i) श्याम तेजी से दौड़ता है। (अथवा: श्याम तेजी से दौड़ता है - वाक्य पहले से ही शुद्ध है / श्याम तेज़ी से दौड़ता है)
(ii) वह मेरी बात पर ध्यान नहीं देता। (अथवा: वह मेरे शब्दों पर ध्यान नहीं देता - 'शब्दों' के स्थान पर 'बात' का प्रयोग अधिक उपयुक्त है)
(iii) उसने गीत की दो-चार कड़ियाँ गाईं। ('लड़ियाँ' के स्थान पर 'कड़ियाँ' होगा)
(iv) हत्यारे को मृत्युदंड मिला। ('मृत्युदंड की सजा' पुनरुक्ति दोष है, अतः केवल 'मृत्युदंड मिला' होगा)
(v) हम अपने देश के लिए जान दे देंगे। ('हम हम हमारे' की अशुद्धि दूर की गई है)

Teacher's Note:
a) वाक्य शुद्धि के अंतर्गत व्याकरण, वर्तनी और पुनरुक्ति दोषों को ठीक किया जाता है।
b) छात्रों को शब्दों के उचित प्रयोग (जैसे गीत की कड़ियाँ) का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

 

(b) Use the following idioms in sentences of your own to illustrate their meaning : - [5 Marks]
निम्नलिखित मुहावरों को वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए : -
(i) हाथ तंग होना।
(ii) चुल्लू भर पानी में डूब मरना।
(iii) आसमान सर पर उठाना।
(iv) कान भरना।
(v) इधर-उधर की हाँकना।

Answer:
(i) हाथ तंग होना (धन की कमी होना): व्यापार में घाटा होने के कारण इस महीने सोहन का हाथ बहुत तंग है।
(ii) चुल्लू भर पानी में डूब मरना (बहुत अधिक लज्जित होना): भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े जाने पर उसे चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
(iii) आसमान सर पर उठाना (बहुत शोरगुल या उत्पात मचाना): घर में बच्चों ने खेल-खेल में आसमान सिर पर उठा लिया है।
(iv) कान भरना (चुगली करना या भड़काना): किसी की बातों में आकर अपनों के खिलाफ कान नहीं भरने चाहिए।
(v) इधर-उधर की हाँकना (व्यर्थ की बातें करना): काम की बात करने के बजाय वह हमेशा इधर-उधर की हाँकता रहता है।

Teacher's Note:
a) मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य ऐसा होना चाहिए जिससे उसका अर्थ स्वतः स्पष्ट हो जाए।
b) वाक्य प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध होना चाहिए।

 

SECTION B

 

PRESCRIBED TEXTBOOKS - 50 Marks

Answer four questions from this Section on at least three of the prescribed textbooks.

 

गद्य संकलन (Gadya Sanklan)

 

Question 4

"जैसे भी हो, इस बार बेटू को अपने साथ लेकर ही जाना होगा। यही हाल रहा तो इसकी जिंदगी चौपट हो जाएगी। यह भी कोई ढंग है भला।" [7½ Marks]
(i) उक्त कथन कौन, किससे और किस संदर्भ में कह रहा है ? [1½ Marks]
(ii) श्रोता उक्त कथन सुनकर धर्म-संकट में क्यों था ? [3 Marks]
(iii) बेटू के आ जाने से अम्मा का जीवन किस तरह बीतता था ? [3 Marks]
(iv) 'मजबूरी' कहानी के माध्यम से कहानीकार पाठकों का ध्यान किस ओर आकृष्ट कर रहे हैं ? [5 Marks]

Answer:
(i) उक्त कथन 'मजबूरी' कहानी में बड़े बाबू (हरिशंकर परसाई) अपनी पत्नी (अम्मा) से अपने बेटे बेटू को अपने साथ ले जाने के संदर्भ में कह रहे हैं।
(ii) श्रोता (अम्मा) धर्म-संकट में इसलिए थी क्योंकि एक तरफ उसका अपने पोते बेटू से अत्यधिक स्नेह और मोह था, जिसके बिना उसका दिल नहीं लगता था; दूसरी तरफ उसे यह भी चिंता थी कि यदि बेटू गाँव में ही रहा तो उसका भविष्य और पढ़ाई चौपट हो जाएगी।
(iii) बेटू के आ जाने से अम्मा का सूना जीवन खुशियों से भर जाता था। वह उसकी देखरेख, खाने-पीने और लाड़-प्यार में व्यस्त हो जाती थी, जिससे उसका अकेलापन दूर हो जाता था और दिन आसानी से कट जाते थे।
(iv) 'मजबूरी' कहानी के माध्यम से कहानीकार हरिशंकर परसाई ने मध्यमवर्गीय परिवार की विडंबनाओं, आर्थिक मजबूरियों और पारिवारिक मोह-माया के द्वंद्व को उजागर किया है। कहानीकार पाठकों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हैं कि किस प्रकार पारिवारिक उत्तरदायित्व और स्नेह व्यक्ति को कर्तव्य और मोह के बीच फँसा देते हैं, और व्यक्ति परिस्थितियों के हाथों मजबूर होकर निर्णय लेने को विवश होता है।

Teacher's Note:
a) संदर्भ सहित प्रश्नों के उत्तर देते समय कहानी के पात्रों और मुख्य प्रसंगों का सटीक उल्लेख करें।
b) उपदेशात्मक और विश्लेषणात्मक प्रश्नों में मध्यमवर्गीय जीवन की यथार्थता को दर्शाना आवश्यक है।

 

Question 5

"मलेच्छों ने मुझे मुल्तान की लूट में पकड़ लिया ! मैं उनकी कठोरता में जीवित रहकर बराबर उनका विरोध ही करती रही।" कथन के आधार पर इरावती की व्यथा का वर्णन करते हुए उसका चरित्र-चित्रण कीजिए। [12½ Marks]

Answer:
'मजबूरी' अथवा गद्य संकलन की कहानियों के अंतर्गत इरावती का चरित्र भारतीय नारी के आत्मसम्मान, शौर्य, और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। इरावती मुल्तान की लूट के दौरान मलेच्छ आक्रमणकारियों के हाथ लग जाती है, किंतु उनकी कठोरता और यातनाओं के बीच भी वह उनके सामने घुटने नहीं टेकती, बल्कि निरंतर उनका विरोध करती है। उसकी व्यथा उसके जीवन के संघर्ष और देश-प्रेम की पीड़ा को दर्शाती है।
इरावती के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. साहसी और विद्रोही स्वभाव: वह अत्यंत साहसी है। शत्रुओं की कैद में रहने के बावजूद उसने कभी उनकी अधीनता स्वीकार नहीं की और उनका विरोध जारी रखा।
2. राष्ट्रीय स्वाभिमान: उसके हृदय में अपनी मातृभूमि और संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम और सम्मान है, जिसके लिए वह हर कष्ट सहने को तैयार रहती है।
3. दृढ़ इच्छाशक्ति: अमानवीय परिस्थितियों और कठिनाइयों के बीच भी उसका मनोबल नहीं टूटा, जो उसकी फौलादी इच्छाशक्ति का परिचायक है।

Teacher's Note:
a) चरित्र-चित्रण में पात्र की आंतरिक व्यथा और उसकी बाह्य वीरता दोनों का संतुलन होना चाहिए।
b) भाषा में ओजस्विता और साहित्यिक गरिमा बनाए रखें।

 

Question 6

"गौरी एक चरित्र प्रधान कहानी है।" कहानी के आधार पर गौरी की देशक्ति एवं त्याग का वर्णन करते हुए बताइए कि गौरी का योगदान सीताराम जी की तुलना में कहीं कम नहीं था। [12½ Marks]

Answer:
'गौरी' कहानी एक चरित्र-प्रधान कहानी है जिसकी केंद्रीय पात्र गौरी है। कहानी में गौरी का चरित्र त्याग, समर्पण और अगाध देशभक्ति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यद्यपि सीताराम जी स्वतंत्रता संग्राम और देशहित में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे थे, किंतु गौरी का योगदान किसी भी प्रकार से उनसे कम नहीं था।
गौरी के त्याग और देशभक्ति के प्रमुख बिंदु:
1. निःस्वार्थ देशप्रेम: गौरी अपने व्यक्तिगत सुखों को त्यागकर राष्ट्र सेवा में समर्पित थी। उसके मन में देश के प्रति अपार निष्ठा थी।
2. सीताराम जी को संबल प्रदान करना: संकट की हर घड़ी में गौरी ने सीताराम जी को मानसिक और नैतिक संबल दिया, जिससे वे अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए।
3. मूक त्याग: बिना किसी प्रसिद्धि की चाह के गौरी ने अपने जीवन को देश और परिवार के नाम समर्पित कर दिया। उसका यह मौन त्याग सीताराम जी के कार्यों के समान ही क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण था।

Teacher's Note:
a) उत्तर में कहानी के कथानक के साथ गौरी के चरित्र के विशिष्ट पहलुओं का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
b) तुलनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट होना चाहिए कि कैसे गृहस्थी और देशसेवा दोनों मोर्चों पर गौरी का योगदान अतुलनीय है।

 

काव्य मंजरी (Kavya Manjari)

 

Question 7

क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना,
कुछ ना आया काम तेरा, शोर करना गुल मचाना,
गााना कि उन शक्तियों के साथ चलता जोर किसका
किन्तु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना
जो बसे हैं, वो उजड़ते हैं, प्रकृति के जड़ नियम से,
पर किसी उजड़े हुए को, फिर बसाना कब मना है ?
है अंधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? [12½ Marks]
(i) प्रस्तुत पद्यांश के कवि तथा कविता का नाम लिखिए। यह किस प्रकार की कविता है ? [1½ Marks]
(ii) 'प्यार का आशियाना' कैसे उजड़ गया ? मनुष्य का शोरगुल मचाना काम क्यों नहीं आया ? [3 Marks]
(iii) 'निर्माण के प्रतिनिधि' किसे कहा गया है ? और क्यों ? प्रकृति का 'जड़ नियम' क्या है ? समझाइए। [3 Marks]
(iv) प्रस्तुत कविता से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं ? समझाकर लिखिए। [5 Marks]

Answer:
(i) प्रस्तुत पद्यांश के कवि हरिवंश राय बच्चन हैं और कविता का नाम 'धूप के धान' (अथवा निर्धारित कविता 'अंधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है' / 'दीवा जलाना') है। यह एक प्रेरणादायी और आशावादी कविता है।
(ii) प्राकृतिक आपदाओं, विपत्तियों अथवा नियति की आंधी रूपी हवाओं के कारण प्यार का वह आशियाना उजड़ गया। मनुष्य कितना भी विलाप करे, शोर मचाए या दुख प्रकट करे, वह प्राकृतिक शक्तियों के आगे विवश है, इसलिए उसका शोरगुल मचाना किसी काम नहीं आता।
(iii) 'निर्माण के प्रतिनिधि' मनुष्य को कहा गया है क्योंकि मनुष्य ही इस सृष्टि में सृजन और निर्माण करने की क्षमता रखता है। प्रकृति का 'जड़ नियम' यह है कि जो भी बसा है या बना है, वह नष्ट या उजड़ भी सकता है (अर्थात विनाश और निर्माण प्रकृति का शाश्वत नियम है)।
(iv) प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि जीवन में विपत्तियाँ, दुख और अड़चनें (अंधेरी रात) आती रहती हैं, और मनुष्य के बनाए आशियाने उजड़ भी जाते हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य निराश होकर बैठ जाए। प्रकृति के नियमों के तहत यदि विनाश होता है, तो पुनर्निवर्माण की संभावना भी हमेशा बनी रहती है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आशा का दीप जलाना (प्रयास करना) कभी बंद नहीं करना चाहिए।

Teacher's Note:
a) पद्यांश आधारित प्रश्नों में कविता के केंद्रीय भाव और प्रतीकों (जैसे 'दीवा', 'अंधेरी रात') के अर्थ को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) उत्तर में हरिवंश राय बच्चन की आशावादी दृष्टिकोण का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 8

'एक फूल की चाह' कविता के माध्यम से कवि सियारामशरण गुप्त ने छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीति पर कुठाघात किया है - सिद्ध कीजिए। [12½ Marks]

Answer:
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई सियारामशरण गुप्त द्वारा रचित कविता 'एक फूल की चाह' भारतीय समाज की एक अत्यंत संवेदनशील और अमानवीय कुरीति - छुआछूत और जातिगत भेदभाव - पर करारा प्रहार करती है। यह कविता एक अछूत पिता की अपनी अंचलित मृतप्राय पुत्री की अंतिम इच्छा को पूरा करने की मर्मस्पर्शी गाथा है।
कुरीति पर कुठाघात के मुख्य बिंदु:
1. मानवीय संवेदनाओं की उपेक्षा: समाज की तथाकथित उच्च वर्ण की व्यवस्था मानवीय भावनाओं को कुचल देती है। एक पिता अपनी बीमार बेटी की अंतिम इच्छा (माता के मंदिर का प्रसाद रूपी एक फूल) को पूरा करने जब मंदिर जाता है, तो उसे अपमानित किया जाता है।
2. छुआछूत का कलंक: समाज में व्याप्त जातिभेद के कारण एक इंसान को मनुष्य होने का अधिकार नहीं मिलता। मंदिर के पुजारी समाज के इस कृत्रिम भेदभाव के नाम पर एक दुखी पिता पर अत्याचार करते हैं।
3. अदालत और दंड: समाज का न्याय चक्र भी उस अछूत पिता को अपनी बेटी की इच्छा पूरी करने के जुर्म में दंडित करता है।
इस प्रकार, कवि ने इस कविता के माध्यम से यह दिखाया है कि छुआछूत जैसी कुरीति न केवल अमानवीय है, बल्कि यह ईश्वर के दरबार में भी मनुष्य-मनुष्य के बीच कृत्रिम दीवारें खड़ी करती है।

Teacher's Note:
a) उत्तर में कविता की कथावस्तु के साथ सामाजिक संदेश को प्रमुखता से उभरना चाहिए।
b) छुआछूत के विरोध में कवि के दृष्टिकोण और सुखिया के पिता की विवशता का सुंदर विश्लेषण करें।

 

Question 9

'आः धरती कितना देती है' का मूल प्रतिपाद्य लिखिए। प्रस्तुत कविता द्वारा कवि ने क्या संदेश दिया है ? [12½ Marks]

Answer:
सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता 'आः धरती कितना देती है' प्रकृति की उदारता, ममता और उसके उपकारी स्वरूप का गुणगान करती है।
मूल प्रतिपाद्य:
कविता का मूल प्रतिपाद्य यह है कि धरती माता अत्यंत उदार और सहनशील है। मनुष्य जब भी इसमें थोड़ा सा भी प्रयास करके बीज बोता है, तो धरती उसे कई गुना अन्न और फल वापस लौटा देती है। इसके विपरीत, मनुष्य स्वार्थी हो गया है जो दूसरों को देने में कंजूसी करता है, जबकि प्रकृति हमें निस्वार्थ भाव से सब कुछ लुटा देती है।
कवि का संदेश:
कवि ने इस कविता के माध्यम से यह संदेश दिया है कि हमें प्रकृति से सीख लेनी चाहिए। जिस प्रकार धरती माता बिना किसी भेदभाव के सभी को अन्न, जल और जीवन प्रदान करती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी स्वार्थ की भावना छोड़कर परोपकार, उदारता और सहृदयता का मार्ग अपनाना चाहिए।

Teacher's Note:
a) मूल प्रतिपाद्य लिखते समय कविता के केंद्रीय विचार (प्रकृति की उदारता बनाम मानव का स्वार्थ) को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) सुमित्रानंदन पंत की प्रकृति-प्रेम की भावना का उल्लेख करना न भूलें।

 

'सारा आकाश' (Saara Akash)

 

Question 10

"तूने मुझे बचा लिया, वरना संघ कहता हूँ कि पागल हो जाता। तू नहीं जानता, हमारे घर की हालत क्या है ? मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे अपनी कृतज्ञता व्यक्त करूँ। मेरी आँखें भर आईं।" [12½ Marks]
(i) उपन्यास तथा उपन्यासकार का नाम लिखिए। यह किस प्रकार का उपन्यास है ? [1½ Marks]
(ii) उपर्युक्त कथन का वक्ता कौन है ? वक्ता किसके प्रति आभारी है और क्यों ? [3 Marks]
(iii) वक्ता ने श्रोता से कितने रुपये उधार लिए और उन रुपयों से किसके लिए क्या खरीदा ? उसके बाद वक्ता जब घर पहुँचा तो घरवालों की क्या प्रतिक्रिया हुई ? [3 Marks]
(iv) श्रोता का चरित्र चित्रण कीजिए। [5 Marks]

Answer:
(i) उपन्यास का नाम 'सारा आकाश' तथा उपन्यासकार राजेंद्र यादव हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक उपन्यास है जो मध्यमवर्गीय परिवार की कुंठाओं, समस्याओं और पारिवारिक विघटन को चित्रित करता है।
(ii) उपर्युक्त कथन का वक्ता समर (अथवा समर का मित्र प्रभात / पात्र) है। वक्ता अपने मित्र के प्रति आभारी है क्योंकि उसके संकट के समय मित्र ने आर्थिक रूप से उसकी सहायता की थी, जिससे वह मानसिक तनाव और पागलपन की स्थिति से बच गया था।
(iii) वक्ता ने श्रोता से कुछ रुपये (उपन्यास के प्रसंगानुसार आवश्यक धनराशि) उधार लिए थे और उन रुपयों से अपनी पत्नी प्रभा के लिए उपहारस्वरूप कुछ वस्तुएँ (या आवश्यक सामग्री) खरीदी थीं। जब वह घर पहुँचा, तो घरवालों ने फिजूलखर्च मानकर उसे ताने दिए और उसकी आलोचना की, जिससे घर में तनाव बढ़ गया।
(iv) श्रोता का चरित्र-चित्रण (मित्र का चरित्र): उपन्यास में समर के मित्र का चरित्र एक सच्चे, मददगार और समझदार मित्र के रूप में उभरता है। वह समर की हर परिस्थिति में सहायता करता है, उसकी मानसिक स्थिति को समझता है और बिना किसी स्वार्थ के उसके संकट का निवारण करता है। वह सहानुभूतिशील और विश्वसनीय पात्र है।

Teacher's Note:
a) उपन्यास आधारित प्रश्नों में प्रसंग, वक्ता और श्रोता की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए।
b) पात्रों के आपसी संबंधों और मध्यमवर्गीय परिवेश की विडंबनाओं का सुंदर उल्लेख करें।

 

Question 11

'सारा आकाश' उपन्यास के आधार पर समर के बाबूजी का चरित्र-चित्रण कीजिए। [12½ Marks]

Answer:
राजेंद्र यादव द्वारा रचित उपन्यास 'सारा आकाश' के मुख्य पात्र समर के बाबूजी एक पारंपरिक, रूढ़िवादी और मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार के मुखिया हैं। उनके चरित्र में उस दौर के भारतीय समाज के बुजुर्गों की तमाम खूबियाँ और कमियाँ देखने को मिलती हैं।
समर के बाबूजी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ:
1. पारंपरिक और रूढ़िवादी सोच: वे पुराने विचारों के व्यक्ति हैं जो संयुक्त परिवार की मर्यादा और अनुशासन को सर्वोपरि मानते हैं। नए विचारों और आधुनिक जीवनशैली के प्रति उनका दृष्टिकोण संकुचित है।
2. कठोर और अनुशासनप्रिय: घर में उनका नियंत्रण कड़ा रहता है। वे बच्चों की भावनाओं को समझे बिना अपनी बात थोपने का प्रयास करते हैं।
3. आर्थिक संघर्षों से त्रस्त: वे जीवनभर आर्थिक तंगी और संघर्षों से जूझते रहे हैं, जिसके कारण उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया है।
4. अंततः परिवर्तनशील: उपन्यास के अंत तक आते-आते वे परिस्थितियों को समझने लगते हैं और समर तथा प्रभा के रिश्ते में आए बदलाव को स्वीकार करते हैं, जो उनके चरित्र का सकारात्मक पहलू है।

Teacher's Note:
a) चरित्र-चित्रण में बाबूजी की रूढ़िवादिता के साथ-साथ उनके पारिवारिक उत्तरदायित्व को भी दर्शाना चाहिए।
b) उपन्यास की पृष्ठभूमि के अनुसार मध्यमवर्गीय परिवार के मुखिया की विवशताओं का विश्लेषण करें।

 

Question 12

"सारा आकाश राजेंद्र यादव द्वारा लिखित एक उद्देश्यपूर्ण रचना है।" - उपन्यास के आधार पर इस कथन की व्याख्या कीजिए। [12½ Marks]

Answer:
राजेंद्र यादव का उपन्यास 'सारा आकाश' हिंदी का एक मील का पत्थर उपन्यास है जो मात्र एक पारिवारिक कहानी न होकर एक अत्यंत उद्देश्यपूर्ण रचना है। यह उपन्यास स्वातंत्र्योत्तर भारतीय मध्यमवर्गीय समाज की विसंगतियों, रूढ़ियों और विशेषकर संयुक्त परिवारों में पनपने वाली कुंठाओं का यथाथर्तपरक चित्रण करता है।
उपन्यास के मुख्य उद्देश्य:
1. संयुक्त परिवार की विसंगतियों का पर्दाफाश: संयुक्त परिवार के नाम पर व्यक्तियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन और मानसिक शोषण कैसे होता है, इसे उपन्यास में बहुत प्रभावी ढंग से दिखाया गया है।
2. दम्पति संबंधों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: समर और प्रभा के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार बिना समझे हुए विवाह और आपसी संवाद की कमी पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियाँ पैदा कर देती है, और कैसे आपसी समझ से उन दूरियों को मिटाया जा सकता है।
3. युवा पीढ़ी की छटपटाहट: नई पीढ़ी के अरमानों और पुरानी पीढ़ी के संस्कारों के बीच का संघर्ष इस उपन्यास का मुख्य उद्देश्य है।
अतः 'सारा आकाश' एक उद्देश्यपूर्ण रचना है जो पाठकों को समाज और परिवार के प्रति नए दृष्टिकोण से सोचने को विवश करती है।

Teacher's Note:
a) उद्देश्यपूर्णता स्पष्ट करते समय उपन्यास के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पक्षों का संतुलन बनाए रखें।
b) समर और प्रभा के संघर्ष को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें।

 

'आषाढ़ का एक दिन' (Aashad Ka Ek Din)

 

Question 13

विलोम क्या है ? एक असफल कालिदास ! और कालिदास ? एक असफल विलोम। हम कहीं एक-दूसरे के बहुत निकट पड़ते हैं।
(i) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए। [1½ Marks]
(ii) प्रस्तुत संवाद का प्रसंग स्पष्ट कीजिए। [3 Marks]
(iii) उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर वक्ता का दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए। [3 Marks]
(iv) उपर्युक्त संवाद के आधार पर बताइए कि विलोम और कालिदास के बीच कैसे संबंध थे ? [5 Marks]

Answer:
(i) वक्ता विलोम है और श्रोता मल्लिका (अथवा नाटक का अन्य पात्र) है।
(ii) यह संवाद मोहन राकेश रचित नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' का है, जहाँ विलोम मल्लिका के घर आकर कालिदास के जीवन, उसकी रचनाशीलता और अपनी खुद की स्थिति पर व्यंग्य करते हुए अपने अंतर्द्वंद को व्यक्त करता है।
(iii) वक्ता (विलोम) का दृष्टिकोण यह है कि वह खुद को और कालिदास को एक ही सिक्के के दो पहलू मानता है। उसकी नजर में दोनों ही अपनी आकांक्षाओं और जीवन के मोर्चों पर कहीं न कहीं अधूरे या 'असफल' रहे हैं - कालिदास राजमोह में फंसकर अपनी सृजनात्मकता खो बैठा और विलोम समाज की नजरों में उपेक्षित रहा।
(iv) विलोम और कालिदास के बीच का संबंध बेहद जटिल, द्वंद्वात्मक और विरोधाभासी था। दोनों एक-दूसरे के विरोधी प्रतीत होते हुए भी गहरे स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। विलोम कालिदास की प्रतिभा से ईर्ष्या भी करता था और उसके व्यक्तित्व से आकृष्ट भी रहता था। दोनों ही मल्लिका के जीवन से जुड़े थे, और विलोम का यह कथन उनके आपसी अंतरंग और मानसिक जुड़ाव को दर्शाता है जहाँ दोनों अपने जीवन की असफलताओं में समान हैं।

Teacher's Note:
a) नाटक के संवाद आधारित प्रश्नों में वक्ता, श्रोता और प्रसंग का सटीक उल्लेख आवश्यक है।
b) विलोम और कालिदास के चरित्र के मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को स्पष्ट करें।

 

Question 14

"अम्बिका भावनाओं में नहीं यथार्थ में जीती है।" 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक के आधार पर अम्बिका की चरित्रगत विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [12½ Marks]

न1नAnswer:
मोहन राकेश द्वारा रचित नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' की पात्र अम्बिका (मल्लिका की माँ) एक यथार्थवादी, कठोर और व्यावहारिक महिला है। वह कोरी कल्पनाओं और भावनाओं में जीने के बजाय जीवन की कठोर सच्चाइयों का सामना करती है।
अम्बिका की चरित्रगत विशेषताएँ:
1. यथार्थवादी दृष्टिकोण: अम्बिका जानती है कि केवल प्रेम और भावनाओं से पेट नहीं भरता। वह दुनिया की कठिनाइयों को समझती है और मल्लिका के भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहती है।
2. कठोर और स्पष्टवादी स्वभाव: उसका स्वभाव थोड़ा रूखा और कठोर लग सकता है क्योंकि वह हर बात मुँह पर कहती है। वह कालिदास की महत्वाकांक्षाओं और उसकी कमजोरियों को भली-भांति पहचानती थी।
3. पुत्री के प्रति अगाध प्रेम: ऊपर से कठोर दिखने वाली अम्बिका अंदर से अपनी बेटी मल्लिका के प्रति अत्यधिक स्नेही और चिंतित रहती है, वह नहीं चाहती कि मल्लिका का जीवन उसकी तरह संघर्षों में बीते।
4. सामाजिक यथार्थ की समझ: वह समाज के तानों और रूढ़ियों से वाकिफ है, इसलिए वह कालिदास और मल्लिका के प्रेम संबंध को लेकर यथार्थवादी निर्णय चाहती है।

Teacher's Note:
a) अम्बिका के चरित्र का मूल्यांकन करते समय उसकी कठोरता के पीछे छिपी माँ की ममता को जरूर दर्शाएँ।
b) नाटक के अन्य पात्रों (जैसे कालिदास और मल्लिका) के साथ उसके संबंधों का विश्लेषण करें।

 

Question 15

प्रियंगुमंजरी मल्लिका को अपने साथ चलने के लिए क्यों कहती है ? मल्लिका की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी ? [12½ Marks]

Answer:
'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में प्रियंगुमंजरी (जो अब कालिदास की पत्नी बन चुकी है) मल्लिका के पास आती है और उसे अपने साथ उज्जैन (राजधानी) चलने के लिए कहती है।
प्रियंगुमंजरी के ऐसा कहने के कारण:
प्रियंगुमंजरी जानती थी कि मल्लिका और कालिदास के बीच अतीत में क्या संबंध रहे हैं। वह उदारता और बड़प्पन दिखाते हुए मल्लिका को अपने एकांत और सूनेपन से बाहर निकालकर उज्जैन के वैभवशाली वातावरण में एक सम्मानजनक जीवन देना चाहती थी, ताकि अतीत की कड़वाहट या गिल्ट समाप्त हो सके।
मल्लिका की प्रतिक्रिया:
मल्लिका प्रियंगुमंजरी के इस प्रस्ताव को दृढ़तापूर्वक ठुकरा देती है। वह कहती है कि उसका संसार और उसकी माँ यहीं इस झोपड़ी में हैं और वह अपनी इस वास्तविकता तथा कालिदास की स्मृतियों के साथ ही जीना चाहती है। उसकी प्रतिक्रिया में उसका आत्मसम्मान, दृढ़निश्चय और त्याग स्पष्ट झलकता है।

Teacher's Note:
a) नाटक के अंतिम दृश्यों के आधार पर प्रियंगुमंजरी की उदारता और मल्लिका के स्वाभिमान को स्पष्ट करें।
b) उत्तर में दोनों पात्रों के संवादों और उनके मनोवैज्ञानिक स्तर का सुंदर समन्वय होना चाहिए।

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