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ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
Section-A-Language (50 Marks)
प्रश्न 1. Write a composition in approximately 400 words in Hindi on any ONE of the topics given below : [20]
किसी एक विषय पर निबंध लिखिए जो 400 शब्दों से कम न हो :
(i) ‘तकनीकी विकास ने मानव को सुविधाओं का दास बना दिया है’ – इस विषय पर अपने विचार व्यक्त – कीजिए।
(ii) ‘वर्तमान युग में आगे बढ़ने के लिए धन की आवश्यकता है न कि प्रतिभा के’ – इस विषय के पक्ष या विपक्ष – में अपने विचार लिखिए।
(iii) पुस्तक एक सच्ची मित्र, गुरु और मार्गदर्शक का कार्य करके जीवन की धारा को बदल सकती है – ‘मेरी प्रिय पुस्तक’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(iv) ‘निरंतर अभ्यास करने से इच्छित कार्य में सफलता मिलती है।’- इस कथन को अपने जीवन के किसी निजी अनुभव द्वारा विस्तारपूर्वक लिखिए।
(v) ‘सहशिक्षा के माध्यम से बालक-बालिका के मध्य मित्रता और समानता का भाव जागता है।’ – इस विषय पर अपने विचार विस्तारपूर्वक लिखिए।
(vi) निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए –
(a) ‘साँचे को आँच नहीं’।
(b) एक ऐसी मौलिक कहानी लिखिए जिसका अंतिम वाक्य हो :
……… और इस तरह उन्होंने मुझे माफ कर दिया।
Answer:
(i) ‘तकनीकी विकास ने मानव को सुविधाओं का दास बना दिया है’
आज का युग विज्ञान व प्रौद्योगिकी का युग है। नये-नये आविष्कारों ने हमें इतनी सुविधाएँ प्रदान कर दी हैं कि हम उनके दास बन गए हैं। एक क्षण भी इन सुविधाओं के अभाव में रहना कठिनसा प्रतीत होता है। कंप्यूटर और मोबाइल की सुविधा ने हमें एक तरह से अपंग बना डाला है। हम कोई भी कार्य इन दो उपकरणों से जुड़ी सुविधाओं के अभाव में करने के लिए स्वयं को अक्षमसा अनुभव करते हैं।
कंप्यूटर को यांत्रिक मस्तिष्क भी कहा जाता है। यह अत्यंत तीव्र गति से न्यूनतम समय में अधिक-से-अधिक गणनाएँ कर सकता है तथा वह भी बिल्कुल त्रुटि रहित। आज तो कंप्यूटर को लैपटॉप के रूप में एक छोटे से ब्रीफकेस में बंद कर दिया गया है जिसे जहाँ चाहे वहाँ आसानी से ले जाया जा जाया सकता है।
कंप्यूटर आज के युग की अनिवार्यता बन गया है तथा इसका प्रयोग अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है। बैंकों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों आदि अनेक क्षेत्रों में कंप्यूटरों द्वारा कार्य संपन्न किया जा रहा है। आज के युद्ध तथा हवाई हमले कंप्यूटर के सहारे जीते जाते हैं। मुद्रण के क्षेत्र में भी कंप्यूटर ने क्रांति उत्पन्न कर दी है। पुस्तकों की छपाई का काम कंप्यूटर के प्रयोग से अत्यंत तीव्रगामी तथा सुविधाजनक हो गया है। विज्ञापनों को बनाने में भी कंप्यूटर सहायक हुआ है। आजकल यह शिक्षा का माध्यम भी बन गया है। अनेक विषयों की पढ़ाई में कंप्यूटर की सहायता ली जा सकती है।
कंप्यूटर यद्यपि मानव-मस्तिष्क की तरह कार्य करता है परंतु यह मानव की तरह सोच-विचार नहीं कर सकता केवल दिए गए आदेशों का पालन कर सकता है। निर्देश देने में ज़रा-सी चूक हो जाए तो कंप्यूटर पर जो जानकारी प्राप्त होगी वह सही नहीं होगी।
कंप्यूटर का दुरुपयोग संभव है। इंटरनेट पर अनेक प्रकार की अवांछित सामग्री उपलब्ध होने के कारण वह अपराध प्रवृत्ति चारित्रिक पतन और अश्लीलता बढ़ाने में उत्तरदायी हो सकती है। कंप्यूटर के लगातार प्रयोग से आँखों की ज्योति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका अधिक प्रयोग समय की बर्बादी का कारण भी है। एक कंप्यूटर कई आदमियों की नौकरी ले सकता है। भारत जैसे विकासशील एवं गरीब देश में जहाँ बेरोज़गारों की संख्या बहुत अधिक है, वहाँ कंप्यूटर इसे और बढ़ा सकता है। फिर भी हम इस सुविधा के दास बनते जा रहे हैं।
कंप्यूटर की भाँति मोबाइल फोन भी आज जीवन की अनिवार्यता बन गया है। आज से कुछ वर्ष पूर्व इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि हम किसी से बात करने के लिए किसी का संदेश सुनाने के लिए किसी छोटे से यंत्र को अपने हाथ में लेकर घूमेंगे। इस छोटे से यंत्र का नाम है, मोबाइल फोन। मोबाइल फोन से जहाँ चाहें, जिससे चाहें, देश या विदेश में कुछ ही क्षणों में अपना संदेश दूसरों तक पहुँचाया जा सकता है और उनकी बात सुनी जा सकती है। यही नहीं इस उपकरण से (एस. एम. एस.) संदेश भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं। समाचार, चुटकुले, संगीत तथा तरह-तरह के खेलों का आनंद लिया जा सकता है। किसी भी तरह की विपत्ति में मोबाइल फोन रक्षक बनकर हमारी सहायता करता है।
आजकल बैंकिंग, बिल भुगतान, आरक्षण, आवेदन, मौसम संबंधी ज्ञान व पूर्वानुमान आदि के प्रसंग में भी मोबाइल उपयोगी है। सोशल मीडिया के बिना आज का जीवन बोझीला सा लगता है। कुल मिलाकर इन सुविधाओं ने हमें अपना दास बना डाला है।
Teacher's Note:
a) निबंध में विषय के दोनों पक्षों (सुविधाएँ और उनकी हानियाँ) को संतुलित रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक है।
b) भाषा सरल, स्पष्ट और प्रवाहपूर्ण होनी चाहिए तथा शब्दों की सीमा का ध्यान रखना चाहिए।
प्रश्न 2. Read the passage given below carefully and answer in Hindi the questions that follow, using your own words : [20]
निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर, अंत में दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिए:
[Passage as printed in the question paper describing the royal court scene where a person brings two identical objects, one diamond and one glass piece, and later a blind man correctly identifies the diamond based on touch in the sunlight.]
(i) राजा का दरबार कहाँ और क्यों लगा था? वहाँ कौन-कौन उपस्थित था? तभी वहाँ कौन, क्या लेकर आया? [4]
Answer:
राजा का दरबार खुले स्थान पर धूप में लगा था क्योंकि सर्दियों के दिन थे। राजा के सभी परिजन, पंडित, दीवान आदि उस दरबार में उपस्थित थे। तभी वहाँ एक व्यक्ति दो वस्तुएँ लेकर आया।
Teacher's Note:
a) उत्तर गद्यांश के आरंभिक अंश पर आधारित है जिसमें दरबार के स्थान और उपस्थिति का वर्णन है।
b) सभी बिंदुओं (कहाँ, क्यों, कौन उपस्थित था और कौन आया) का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक है।
(ii) उस व्यक्ति ने उन वस्तुओं की क्या विशेषता बताई तथा राजा के सामने क्या शर्त रखी? [4]
Answer:
व्यक्ति ने बताया कि उन दो वस्तुओं में एक असली और एक नकली है। वह जिस किसी राज्य के राजा के पास जाता है, कोई भी असली-नकली की परख नहीं कर पाता, अतः वह सदैव विजेता बना रहा है। उसने शर्त रखी कि यदि उसके दरबार में सच्ची परख हो जाए तो वह कीमती हीरा राज्य की तिजोरी में जमा करवा देगा और यदि कोई नहीं परख पाया तो उतनी धनराशि उसे अदा करनी होगी।
Teacher's Note:
a) छात्र को व्यक्ति के दावे और उसकी चुनौती (शर्त) को अपने शब्दों में लिखना होता है।
b) हीरा तिजोरी में देने और हारने पर धन वसूलने की शर्त का सटीक उल्लेख करना न भूलें।
(iii) कोई भी उन वस्तुओं को पहचान क्यों नहीं सका? उन्हें किस बात का डर था? [4]
Answer:
कोई भी दरबारी उन वस्तुओं की परख करने के लिए सामने नहीं आया क्योंकि सभी सोचते थे कि हारने पर उन्हें हीरे के मूल्य की धनराशि अदा करनी पड़ेगी। असली भय यह था कि राजा के समक्ष उनकी प्रतिष्ठा धूलमिल हो जाएगी।
Teacher's Note:
a) यहाँ दरबारियों की विफलता के दो मुख्य कारणों (धनहानि का भय और प्रतिष्ठा का संकट) को स्पष्ट करना है।
b) राजा के सामने अपनी इज्जत बचाने की चिंता मुख्य बिंदु है।
(iv) अन्त में उन वस्तुओं की पहचान किसने एवं किस प्रकार की? सब लोगों की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी? [4]
Answer:
एक अंधा दरबार में आया। उसने दोनों वस्तुओं को हाथ में लेते ही बता दिया कि हीरा कौन-सा है और काँच कौन-सा है। अंधे ने बताया कि सभी धूप में बैठे थे। जो धूप में गरम हो गया, वह काँच था और जो शीतल बना रहा, वहीं हीरा था। इस पहचान-परख को देखकर सभी प्रसन्न हो गए।
Teacher's Note:
a) अंधे व्यक्ति की स्पर्श और तापमान के आधार पर की गई पहचान को सही ढंग से लिखना अपेक्षित है।
b) सभा की प्रसन्नता और विजेता के नतमस्तक होने का प्रसंग भी इसमें निहित है।
(v) इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? [4]
Answer:
इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें विपरीत परिस्थितियों में भी सुदृढ़ एवं विवेकशील बने रहना चाहिए। जो शांत होकर परिस्थिति के अनुसार बुद्धि व विवेक से काम लेता है, वही सफलता को प्राप्त करता है।
Teacher's Note:
a) गद्यांश का केंद्रीय भाव या नैतिक संदेश इस प्रश्न का उत्तर है।
b) धैर्य, विवेक और शांति के महत्व को रेखांकित करना उत्तम रहता है।
प्रश्न 3.
(a) Correct the following sentences and rewrite : [5]
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए
(i) तेरे को अध्यापिका ने शीघ्र बुलाया है।
(ii) तुम अकारण बेकार में डर रहे हो।
(iii) प्रातः भ्रमण में कैसी आनन्द आती है।
(iv) इमारत के गिर जाने की आशा है।
(v) मुझे पानी का एक गर्म लोटा चाहिए।
Answer:
(i) तुझे अध्यापिका ने शीघ्र बुलाया है।
(ii) तुम अकारण डर रहे हो।
(iii) प्रातः भ्रमण में कैसा आनंद आता है?
(iv) इमारत के गिर जाने की आशंका है।
(v) मुझे गरम पानी का एक लोटा चाहिए।
Teacher's Note:
a) व्याकरणिक अशुद्धियों (जैसे सर्वनाम, लिंग, वचन और अनुपयुक्त शब्दों का प्रयोग) को ठीक करना होता है।
b) 'आशा' के स्थान पर अनिष्ट के लिए 'आंका' या 'आशंका' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
(b) Use the following idioms in sentences of your own to illustrate their meaning : [5]
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करने के लिए इन्हें वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए :-
(i) कलेजे का टुकड़ा।
(ii) मुँह में पानी भरना।
(iii) रोड़ा अटकाना।
(iv) बाग-बाग होना।
(v) हाथ मलना।
Answer:
(i) कलेजे का टुकड़ा - माता-पिता के लिए संतान कलेजे का टुकड़ा होती है।
(ii) मुँह में पानी भरना - इतने लुभावने व्यंजनों की सूची पढ़ते ही मेरे मुँह में पानी भर आ गया।
(iii) रोड़ा अटकाना - दुर्जन लोग सदैव सज्जनों के कामों में रोड़ा अटकाते फिरते हैं।
(iv) बाग-बाग होना - बेटे को पुरस्कार पाते देखकर माँ का दिल बाग-बाग हो गया।
(v) हाथ मलना - जो समय का सदुपयोग नहीं करते, वे हाथ मलते रह जाते हैं।
Teacher's Note:
a) मुहावरों का वाक्य प्रयोग ऐसा होना चाहिए जिससे उनका अर्थ स्पष्ट रूप से झलके।
b) छात्रों को वाक्य में मुहावरे का ही प्रयोग करना चाहिए, न कि केवल उसके अर्थ का।
Section-B – Prescribed Textbooks (50 Marks)
प्रश्न 4. “हाँ, और लोग पीछे आते हैं। कई सौ आदमी साथ आये हैं। यहाँ तक आने में सैकड़ों उठ गये पर सोचता हूँ कि बूढ़े पिता की मुक्ति तो बन गई। धन और है ही किसलिए।”
(i) उपयुक्त कथन किस पाठ से लिया गया है? इस कथन का वक्ता कौन है? यह कथन किस स्थान पर कहा जा रहा है? [1 1/2]
(ii) वक्ता द्वारा यह कथन किस संदर्भ में कहा गया था? [3]
(iii) ‘धन और है ही किसलिए।’ – वक्ता ऐसा क्यों कहता है? [3]
(iv) वक्ता के संबंध में श्रोता को क्या-क्या पता चलता है? उसका प्रभाव श्रोता पर क्या पड़ता है? अन्ततः श्रोता क्या निर्णय लेता है? [4 1/2]
Answer:
(i) प्रस्तुत कथन 'पुत्र-प्रेम' शीर्षक कहानी में से लिया गया है। इस कथन का वक्ता वह युवक है जो चैतन्यदास को मणिकर्णिका घाट पर मिला था। उसी घाट पर प्रस्तुत कथन कहा जा रहा है।
(ii) वक्ता द्वारा यह कथन अपने दिवंगत पिता की अंत्येष्टि के संदर्भ में कहा गया था।
(iii) युवक यह कथन धन के प्रति उपयोगितावादी दृष्टि को स्पष्ट करता है। वह कहना चाहता है कि धन जीवन के लिए होता है न कि जीवन धन के लिए। चैतन्यदास ने धन के प्रति लालची दृष्टि अपनाई थी।
(iv) वक्ता युवक बताता है कि पैसा हाथ का मैल है, "यदि जिंदगी है, तो कमा खाऊँगा, मन में यह लालसा तो नहीं रह गई कि पिता को बचाने में कुछ कसर नहीं छोड़ी।" यह सुनकर बाबू चैतन्यदास अपने पुत्र की अंत्येष्टि पर हजारों रुपये खर्च कर डालता है।
Teacher's Note:
a) यह प्रश्न गद्य संकलन की कहानी 'पुत्र-प्रेम' से संबंधित है जिसमें धन और मानवीय मूल्यों का संघर्ष दिखाया गया है।
b) युवक के विचारों ने चैतन्यदास की कंजूसी और धन-लोलुपता पर गहरा प्रभाव डाला।
प्रश्न 5. नीलम का परिचय देते हुए बताइए कि उसके परिवार में कौन-कौन था? वह किस धोखे में अपना जीवन अभी तक व्यतीत कर रही थी? उसे इसका आभास कैसे हुआ? स्पष्ट कीजिए। [12 1/2]
Answer:
नीलम की कहानी वास्तव में त्याग, बलिदान और संरक्षण जैसे पारिवारिक मूल्यों और भौतिकवादी संस्कृति के टकराव की कहानी है। इस कहानी की नीलम आज की भौतिकवादी दृष्टि के समक्ष स्वयं को अंतर्द्वंद्व में खड़ा पाती है। उसे गहरा आघात लगता है कि जिस परिवार के लिए वह आज तक खटती रही है, वह उसे केवल धनोपार्जन का एक माध्यम समझता रहा।
पिता के असमय स्वर्गवास के बाद घर का सारा दायित्व युवती नीलम के कंधों पर लाद दिया जाता है। माँ ने यह नहीं सोचा कि उसकी सबसे बड़ी बेटी अर्थात् नीलम का विवाह सबसे बड़ी प्राथमिकता है। वह तो केवल यह सोचती है कि घर का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और पारिवारिक दायित्वों का एकमात्र आर्थिक स्रोत नीलम ही है। इसलिए वह उसके बीतते यौवन के साथ-साथ उससे वीतराग होती गई।
नीलम अपने परिजनों के लिए बलि होती गई और जैसे ही उसके समस्त कर्तव्य पूर्ण हुए, घर का वातावरण बदल गया। घर में उसकी स्थिति एक अनचाहे व्यक्ति या सामान की हो गई। उसे घर से भगाने के लिए पहला अचूक प्रयास होने लगा। सुनियोजित योजना के अधीन उसके लिए विवाह प्रस्ताव लाए गए। परिवार के बोझ से थके बूढ़े-प्रौढ़ दूल्हे के रूप में प्रस्तुत किए जाने लगे।
Teacher's Note:
a) यह प्रश्न नीलम के चरित्र और उसके पारिवारिक शोषण को उजागर करता है।
b) उत्तर लिखते समय नीलम के त्याग और परिजनों के स्वार्थी व्यवहार का अंतर स्पष्ट करना आवश्यक है।
प्रश्न 6. ‘भक्तिन का जीवन संघर्ष एवं कर्मठता का जीवंत उदाहरण है’ – उसके जीवन के विभिन्न अध्यायों का वर्णन करते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। [12 1/2]
Answer:
‘भक्तिन’ शीर्षक रेखाचित्र महादेवी वर्मा का एक संस्मरणत्मक रेखाचित्र है जिसमें उन्होंने एक दीन दलित महिला के बालपन से लेकर प्रौढ़ा तक के जीवन के संघर्षपूर्ण दुःखान्त को प्रस्तुत किया है। भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन था परंतु उसे इस नाम से जुड़े अतीत के संदर्भों, संघर्षों तथा अपमानों से इतनी व्यथा झेलनी पड़ी कि उसे इस नाम से ही घृणा हो गई। वह लेखिका द्वारा दिए गए भक्तिन नाम को पाकर संतुष्ट हो जाती है। भले ही इस नाम में कोई कवित्व नहीं था।
भक्तिन का अतीत वेदना का भंडार रहा है। वह एक गोपाल कन्या थी। उसके पिता आँसी के गाँव के प्रसिद्ध सूरमा थे और वह उनकी इकलौती कन्या थी। इस स्त्री-धन पर पहला प्रहार उसके बाल-विवाह के रूप में सामने आता है। केवल पाँच वर्ष की इस अबोध कन्या का विवाह कर दिया जाता है और उसकी विमाता ने केवल नौ वर्ष की आयु में उसका गौना कर दिया अतः विमाता के इस निर्णय के रूप में उस पर कष्टों का एक और बाण छोड़ा गया।
भक्तिन ससुराल गई। पिता को प्राणघातक रोग लगा। उसकी मृत्यु तक का समाचार भक्तिन को नहीं दिया जाता - न विमाता की ओर से और न सास की ओर से। सास ने इतनी दया दिखा दी कि उसे मायके जाकर घूम आने का आदेश दे डाला।
Teacher's Note:
a) महादेवी वर्मा द्वारा रचित 'भक्तिन' रेखाचित्र भारतीय ग्रामीण समाज की कठोर वास्तविकताओं और स्त्री संघर्ष को दर्शाता है।
b) भक्तिन के जीवन के विभिन्न चरणों (बचपन, विवाह, ससुराल, वैधव्य और अंत में लेखिका की सेविका बनना) का क्रमिक वर्णन करना चाहिए।
प्रश्न 7.
किन्तु हम बहते नहीं हैं।
क्योंकि बहना रेत होना है।
हम बहेंगे, तो रहेंगे ही नहीं।
पैर उखड़ेंगे, प्लवन होगा, ढहेंगे, सहेंगे बढ़ जाएँगे,
और फिर हम पूर्ण होकर भी कभी क्या धार बन सकते?
(i) कौन बहते नहीं हैं? कविता के प्रसंग में बताइए। [1 1/2]
(ii) ‘बहना रेत होना’ कैसे है? [3]
(iii) ‘बहना’ प्रक्रिया का क्या प्रभाव पड़ता है? कविता के संदर्भ में समझाइए। [3]
(iv) प्रस्तुत कविता का सामाजिक संदर्भ उजागर कीजिए। [5]
Answer:
(i) प्रस्तुत काव्यांश ‘नदी के दीप’ कविता से उद्धृत है। द्वीप स्वयं को नदी का हिस्सा तो मानते हैं परंतु वे बहते नहीं हैं। यदि वे धारा के साथ बह जाएँ तो उनका अस्तित्व ही नहीं रहेगा।
(ii) बहना रेत होना है क्योंकि नदी की धारा के साथ मिलकर द्वीप का अपना अस्तित्व ही मिट जाएगा। यदि धारा द्वीप को अपने साथ बहाकर ले जाएगी, तो द्वीप का रूप-स्वरूप नष्ट हो जाएगा। उसका स्वरूप तथा अस्तित्व बहने में नहीं अपितु नदी द्वारा आकार प्रदान करने में है।
(iii) ‘बहना’ प्रक्रिया का प्रभाव यह होता है कि द्वीप की अपनी कोई सत्ता ही नहीं रहती। यदि वे बहने लगेंगे, तो उनका अस्तित्व रेत बन जाएगा और वे नदी की धारा में विलीन हो जाएँगे।
(iv) प्रस्तुत कविता एक प्रतीकात्मक कविता है। इसमें नदी दीप तथा भूखंड को प्रतीक के रूप में चुना गया है। इसमें व्यक्ति, समाज और परंपरा के आपसी संबंधों को सर्वथा नवीन दृष्टि से देखा गया है।
Teacher's Note:
a) अज्ञेय जी की कविता 'नदी के दीप' व्यक्ति और समाज के अंतःसंबंधों को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।
b) द्वीप व्यक्ति का प्रतीक है और नदी प्रवाहमान परंपरा या समाज का।
प्रश्न 8. “कवि नागार्जुन ने हिमालय के वर्षाकालीन सौंदर्य का मोहक चित्रण किया है।” पठित कविता ‘बादल को घिरते देखा है’ के आधार पर व्याख्या कीजिए। [12]
Answer:
‘बादल को घिरते देखा है’ शीर्षक कविता आधुनिक कवि नागार्जुन द्वारा लिखित है। इस कविता में बादलों के घिरने से वातावरण से जुड़े प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रात्मक वर्णन है। इसमें कवि ने हिमालय के वर्षाकालीन सौंदर्य को आधार बनाया है।
कवि ने निर्मल, चाँदी जैसे सफेद और बर्फ से ढके पर्वतों की चोटियों पर घिरते बादलों की सुंदर व मोहक छटा को देखा। उसने मानसरोवर झील में खिलने वाले सोने जैसे कमल के फूलों पर मोतियों जैसी चमकीली और शीतल जल की बूंदों (ओस) को गिरते हुए देखा। उस पर्वत-माला में हिमालय के ऊँचे शिखर रूपी कंधों पर छोटी-बड़ी कई झीलें दिखाई देती हैं।
कवि ने हिमालय के सौंदर्य को वसंत ऋतु के प्रभात के प्रसंग में भी चित्रित किया है। उस समय मंद वायु बह रही होती है। पर्वत की चोटियों पर उगते बाल रूपी सूर्य की किरणें पड़ती हैं। ऐसे में चकवा-चकवी को मानसरोवर के किनारे हरी-हरी घास पर प्रेमालाप करते देखा जा सकता है।
Teacher's Note:
a) नागार्जुन की प्रकृति-चित्रण संबंधी कविताओं में यथार्थ और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय मिलता है।
b) हिमालय की घाटियाँ, मानसरोवर, और वहाँ के जीव-जंतु इस कविता के मुख्य आकर्षण हैं।
प्रश्न 9. महादेवी वर्मा पथिक को क्या प्रेरणा दे रही हैं और क्यों? ‘जाग तुझको दूर जाना’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [12]
Answer:
‘जाग तुझको दूर जाना है’ शीर्षक कविता हिंदी की सुप्रसिद्ध छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा लिखित है। यह कविता एक प्रेरणा-गीत है। इसमें कवयित्री ने मनुष्य को जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया है। वे कहती हैं कि जीवन-यात्रा कभी भी सहज नहीं होती। हमारे जीवन में अनेक बाधाएँ, संघर्ष व असमर्थताएँ आती रहती हैं। हमें इनका सामना करते हुए आगे बढ़ना है।
कविता के प्रथम चरण में महादेवी वर्मा पथिक के आलस्य की ओर संकेत करती हैं। वे कहती हैं कि पथिक की सदा सचेत रहने वाली आँखों में आज आलस्य क्यों भरा है? आज वेशभूषा भी अस्त-व्यस्त क्यों है? क्या तुझे नहीं पता कि तुझे एक लंबी यात्रा तय करनी है, क्योंकि तेरा लक्ष्य अभी बहुत दूर है।
महादेवी वर्मा मनुष्य को समझाना चाहती हैं कि जब हृदय में आग होगी तभी आँखों से करुणा के आँसू बहेंगे। जीवन में हार से कभी न घबराओ क्योंकि वह जीत की सीढ़ी होती है। अतः जाग्रत होने और आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
Teacher's Note:
a) महादेवी वर्मा के गीतों में साधना, संघर्ष और अडिग विश्वास का स्वर प्रमुख होता है।
b) पथिक को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया है।
प्रश्न 10.
अपने काँपते और बेजान हाथों को निहायत डरते-डरते उसके कंधे पर रखकर भर्राए और खंडित स्वर में कहा, ”प्रभा तुम मुझसे नाराज हो ………………………….?” साथ ही मुझे आश्चर्य हो रहा था कि यह कौन मेरे भीतर से बोल रहा है।
(i) प्रभा कौन थी और वह किससे नाराज थी? [1]
(ii) उपन्यास के नायक का नाम लिखते हुए यह स्पष्ट कीजिए कि उसके आत्मविश्लेषण का क्या परिणाम निकला? [3]
(iii) पति ने अपने बदले स्वभाव का परिचय किस प्रकार दिया? [3]
(iv) पति को अपने बदले हुए व्यवहार पर कैसा अनुभव हुआ और इससे क्या स्पष्ट होता है? [5]
Answer:
(i) प्रभा समर की पत्नी तथा ‘सारा आकाश’ शीर्षक उपन्यास की नायिका है। वह अपने पति तथा ससुराल पक्ष की यंत्रणा से पीड़ित होने के कारण नाराज़ थी। उसका अपने पति से ‘अबोला’ चल रहा था।
(ii) उपन्यास के नायक का नाम समर है। उसका विवाह छात्रावस्था में ही प्रभा से हो गया था परन्तु लम्बे समय तक दोनों के बीच संबंध मधुर नहीं हो पाए थे। इन दिनों समर में कुछ परिवर्तन आने लगा था। वह आत्मविश्लेषण करके अपने द्वारा पत्नी पर किए गए अत्याचारों का लेखा-जोखा करने लगा था। इसका परिणाम यह निकला कि वह प्रभा से प्रेम करने लगा था।
(iii) पति समर ने अपने स्वभाव को प्रभा के प्रति संवेदनशील होते हुए बदलना शुरू कर दिया था। उसे लगा कि वह बिना किसी अपराध के पारिवारिक अत्याचार वह अपमान सहती आ रही थी। इसीलिए उनका दांपत्य जीवन भी विषाक्त होता चला था।
(iv) पति समर को अपनी पत्नी प्रभा के प्रति बदले हुए स्वभाव पर विस्मय हुआ। उसके अहं को थोड़ी चोट भी पहुँचाई। जो पति अपनी पत्नी को अब तक दुत्कारता आ रहा था, वही अब उसकी चिंता व अपेक्षा करने लगा था।
Teacher's Note:
a) राजेंद्र यादव का उपन्यास ‘सारा आकाश’ मध्यवर्गीय संयुक्त परिवार की विसंगतियों और पति-पत्नी के बदलते रिश्तों का सजीव चित्रण करता है।
b) समर का वैचारिक परिवर्तन और प्रभा के प्रति उसका झुकाव उपन्यास का महत्वपूर्ण मोड़ है।
प्रश्न 11. “सारा आकाश” उपन्यास में वर्णित संयुक्त परिवार की समस्याओं के बारे में शिरीष भाई साहब के विचारों को स्पष्ट कीजिए। [12 1/2]
Answer:
‘सारा आकाश’ उपन्यास हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार राजेंद्र यादव द्वारा रचित एक पारिवारिक उपन्यास है। इसमें उन्होंने समर के मित्र शिरीष भाई साहब के माध्यम से भारतीय संयुक्त परिवारों की समस्याओं और कुंठाओं का वर्णन किया है।
प्रस्तुत उपन्यास में जिस संयुक्त परिवार की चर्चा हुई है, उसमें बाबूजी-अम्मा, उनके चार पुत्र, दो बहुएँ और दुखद दांपत्य की शिकार विवाहिता पुत्री भी है। इतने सदस्यों के परिवार में आर्थिक स्रोत केवल दो हैं - एक बाबूजी की 25 रु० की मासिक पेंशन और दूसरा बड़े पुत्र धीरज के वेतन के कुल 99 रु० मासिक। यहीं से सारे दुःख, अभाव और ईर्ष्या-भाव पनपने शुरू हो जाते हैं।
उपन्यासकार ने संकेत दिया है कि जहाँ तक संयुक्त परिवार के टूटने के कारणों का संबंध है, यह सत्य है कि समर अपनी पत्नी प्रभा की उपेक्षा करता था और चाहता था कि वह घर में अधिक-से-अधिक काम करे, किंतु क्या उसकी सास नद या जिठानी का यह फर्ज नहीं था कि वे इस तथ्य की ओर ध्यान देती?
Teacher's Note:
a) शिरीष भाई साहब के चरित्र के माध्यम से लेखक ने संयुक्त परिवारों की रूढ़िवादिता और आर्थिक तंगी पर तीखा व्यंग्य किया है।
b) संयुक्त परिवार में होने वाला मानसिक शोषण और कुंठाएँ इस प्रश्न का केंद्रीय बिंदु हैं।
प्रश्न 12. ‘सारा आकाश’ उपन्यास में समर की भाभी मध्यमवर्गीय परिवार की भाभियों का प्रतिनिधित्व करती है।’ इस ध्यान में रखते हुए भाभी की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [12]
Answer:
‘सारा आकाश’ उपन्यास राजेंद्र यादव द्वारा लिखा गया एक यथार्थवादी उपन्यास है। इस उपन्यास के कथानायक की भाभी मध्यमवर्गीय परिवार की परंपरागत नारियों का आदर्श प्रस्तुत करती है जिसमें रूढ़िग्रस्तता, ईर्ष्या, और दमन की नीति शामिल रहती है। वह समर के बड़े भाई धीरज की पत्नी है और संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी बहू होने के नाते अपना वर्चस्व बनाए हुए है।
1. घरेलु नारी - भाभी को उपन्यास में एक घरेलू स्त्री के रूप में दिखाया गया है। वह पढ़ी-लिखी नहीं है। परंतु घर के काम-काज में उसे पूरा कौशल प्राप्त है। वह गृह-व्यवस्था को पूरी तरह अपने हाथ में ले लेती है।
2. ईर्ष्यालु - भाभी में नारी सुलभ ईर्ष्या की भरपूर मात्रा पाई जाती है। वह प्रभा की जेठानी होने के नाते तो नहीं परंतु उसकी उच्च शिक्षा और सुंदरता के कारण उससे निरंतर जलती रहती है।
3. आडंबरप्रिय - भाभी का व्यक्तित्व आडंबर से भरपूर है। वह दिखावा करना जानती है। इसीलिए उसके स्वभाव में प्रदर्शन की भूमिका अधिक रहती है।
4. घर पर एकाधिकार - भाभी अम्मा और बाबू जी का मन जीत चुकी है। वे उस पर शत प्रतिशत विश्वास करते हैं। इसी बात का लाभ उठाकर वह घर पर पूर्णाधिकार जमा लेती है।
Teacher's Note:
a) भाभी का चरित्र मध्यमवर्गीय परिवारों में पाई जाने वाली संकीर्ण मानसिकता और ईर्ष्या का प्रतीक है।
b) उसके सभी कार्य परिवार पर अपना नियंत्रण बनाए रखने और दूसरों को नीचा दिखाने के लिए होते हैं।
प्रश्न 13.
” ………………………….. हमारा शरीर कोमल है, तो क्या हुआ? हम पीड़ा सह सकते हैं। एक बाण प्राण ले सकता है, तो उँगलियों का कोमल स्पर्श प्राण दे भी सकता है।”
(i) प्रस्तुत पंक्तियों में वक्ता किससे संवाद कर रहा है, सन्दभत सहित लिखिए। [1 1/2]
(ii) हमारा शरीर कोमल है, तो क्या हुआ? हम पीड़ा सह सकते हैं।’ वक्ता द्वारा ऐसा कहने का प्रयोजन स्पष्ट कीजिए। [3]
(iii) ‘एक बाण प्राण ले सकता है, तो उँगलियों का कोमल स्पर्श प्राण दे भी सकता है।’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [3]
(iv) ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताइए। [5]
Answer:
(i) प्रस्तुत पंक्तियों में वक्ता कालिदास है। वह एक कवि हैं। वह यहाँ एक हरणशावक से संवाद कर रहा है। जिसे गाँव में आए राजकर्मचारी द्वारा बाण से घायल कर दिया गया है।
(ii) कालिदास हरणशावक के घायल हो जाने पर अत्यंत पीड़ित अनुभव करता है। हरण स्वभाव से ही कोमल होते हैं। कालिदास उस बच्चे को पूरी तरह सँभालने का प्रण लेता है ताकि उसे नए प्राण मिल सकें।
(iii) इस पंक्ति का आशय है कि यदि राजकर्मचारी के रूप में कोई क्रूर शिकारी उस पर प्रहार कर सकता है तो उसे बचाने वालों की भी कोई कमी नहीं है। कालिदास जैसे न जाने कितने कोमल हृदय वाले ग्रामीण होंगे, जो अहिंसा के मार्ग पर चलकर सब जीवों पर दया करने का संदेश देते होंगे।
(iv) प्रस्तुत नाटक की भाषा कवि कालिदास के समय को ध्यान में रखकर चुनी गई है। अतः इसमें संस्कृतनिष्ठ भाषा का अधिक प्रयोग हुआ है। वस्तुओं आदि के नाम भी संस्कृत से मेल खाते हैं।
Teacher's Note:
a) मोहन राकेश रचित 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक संस्कृत की पृष्ठभूमि पर आधारित होते हुए भी आधुनिक संवेदनाओं को छूता है।
b) भाषा में कालिदासकालीन आभिजात्य और लोकजीवन की सहजता का सुंदर मिश्रण है।
प्रश्न 14. ‘विलोम का चरित्र मोहन राकेश एक अनुपम नाटकीय चरित्र-सृष्टि है’ कथन के आधार पर विलोम की चारित्रिक-विशेषताएँ लिखिए। [12]
Answer:
मोहन राकेश ने अपने ऐतिहासिक नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ में विलोम के रूप में एक अनुपम नाटकीय चरित्र-सृष्टि की है। उसके चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं -
1. एकांगी प्रेम - विलोम भी कालिदास की तरह एक कवि है और मल्लिका के प्रति आसक्त है। वह उससे एकांगी प्रेम करता है। वह इस एकतरफा प्रेम को अंत तक खींचता चला जाता है। परंतु मल्लिका की ओर से उसे उपेक्षा, उदासीनता और तिरस्कार ही मिलता है।
2. तर्कशक्ति - विलोम के विषय में कुछ आलोचक भले ही उसे खलनायक की कोटि में रखकर उसके महत्व को कम कर देते हैं परंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। वह नाटक में एक तर्कशक्ति के रूप में उभरता है।
3. विचार पक्ष - विलोम में विचार शक्ति की कोई कमी नहीं है। वह अपनी भावनाओं से ऊपर विचार को महत्व देता है। इसीलिए उसमें परामर्श और निर्णय की सामर्थ्य है।
4. यथार्थवादी - मोहन राकेश ने विलोम का चरित्र यथार्थ के कठिन धरातल पर खड़ा किया है। उसे स्थितियों की पूरी-पूरी समझ है। यही कारण है कि वह कालिदास के उज्जynyini जाने से पहले मल्लिका के विषय में कोई ठोस निर्णय लेने का प्रस्ताव रखता है।
Teacher's Note:
a) विलोम को केवल खलनायक मानना उसकी संकीर्ण व्याख्या होगी; वह नाटक का एक यथार्थवादी और तर्कशील पात्र है।
b) उसकी टिप्पणियाँ और कटाक्ष नाटक की कथावस्तु को गति प्रदान करते हैं।
प्रश्न 15. ‘ये पन्ने अपने हाथों में बनाकर सिये थे’ – उक्त कथन किसका है और किससे कहा गया है? इन पन्नों के बारे में वक्ता तथा श्रोता के बीच क्या बात-चीत हुई? उनकी बात-चीत में छिपे भाव को स्पष्ट कीजिए। [12]
Answer:
प्रस्तुत कथन प्रसिद्ध नाटककार मोहन राकेश द्वारा रचित ऐतिहासिक नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ में से उद्धृत है। यह कथन नाटक की नायिका और संस्कृत के प्रसिद्ध कवि कालिदास की प्रेमिका मल्लिका द्वारा कहे गए एक संवाद का अनुभाग है।
इस संवाद की पृष्ठभूमि में निराश मल्लिका के जीवन की करुण कथा है। वह वहाँ का संदर्भ है जब निराश मल्लिका अपने-आप से बातें करने लगती है। तभी राजकीय वस्त्रों में किंतु क्षत-विक्षत अवस्था में कालिदास वहाँ प्रवेश करता है। दोनों एक-दूसरे को देखते हैं और स्वीकार करते हैं कि दोनों की अपनी और एक-दूसरे की पहचान खो गई है।
कालिदास मल्लिका से अपने प्रेम और आकर्षण की यादों की चर्चा करता है और चाहता है कि जीवन को शुरू से आरंभ किया जाए। तभी द्वार खटखटाने की आवाज़ आती है। मल्लिका उन्हें पन्नों के बारे में बताती है कि ये पत्र उसने अपने हाथों से बनाए थे जिन पर महाकाव्य की रचना होनी थी। अंत में बच्ची के रोने की आवाज़ आती है और मल्लिका उसे संभालने अंदर जाती है।
Teacher's Note:
a) यह नाटक का अंतिम और अत्यंत भावुक दृश्य है जहाँ मल्लिका का त्याग और कालिदास की विफलता सामने आती है।
b) मल्लिका के जीवन का यथार्थ और उसकी ममता इस प्रसंग का केंद्रीय बिंदु है।
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