ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 8.1 Bhikshuk Solutions

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 08.1 Bhikshuk

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Question क-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था।” जामुन का पेड़ कहाँ लगा हुआ था और उसके गिरने का क्या कारण था?
Answer: जामुन का पेड़ सेक्रेटेरियट के लॉन में लगा हुआ था। एक रात बड़े जोर की आँधी आती है जिसके कारण जामुन का पेड़ गिर पड़ता है।
In simple words: जामुन का पेड़ सरकारी दफ्तर के बगीचे में लगा था। एक रात तेज तूफान आया और पेड़ गिर गया।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में पेड़ के स्थान और गिरने के कारण को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है। कहानी के शुरुआती घटनाक्रम पर ध्यान दें।

 

Question क-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था।” उपर्युक्त कथन का वक्ता कौन है? वो दुखी क्यों है?
Answer: उपर्युक्त कथन का वक्ता सेक्रेटेरियेट में काम करने वाला एक क्लर्क है, जो इस समय जामुन के पेड़ के गिर पड़ने से दुखी है क्योंकि ये जामुन का पेड़ अत्यंत फलदार और रसीला था।
In simple words: यह बात एक सरकारी क्लर्क ने कही थी। वह दुखी था क्योंकि जामुन का पेड़ बहुत फल देता था और अब गिर गया था।

🎯 Exam Tip: वक्ता की पहचान और उसके दुख का कारण स्पष्ट करना आवश्यक है। चरित्र की भावनाओं को संक्षेप में व्यक्त करें।

 

Question क-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था।” उपर्युक्त संवाद कहानी के किस प्रसंग में आए हैं?
Answer: उपर्युक्त संवाद सेक्रेटेरियेट के लॉन में लगे जामुन के पेड़ के गिरने के संदर्भ में आए हैं। सेक्रेटेरियेट के लॉन में लगा पेड़ आँधी के कारण रात में गिर पड़ा और उसके नीचे एक आदमी दब गया। सुबह होने पर जब माली ने उसे देखा तो क्लर्क को बताया और इस तरह से वहाँ पर एक भीड़ इकट्ठी हो गई और उस समय जामुन के पेड़ को देखकर उपर्युक्त संवाद कहा गया है।
In simple words: यह संवाद तब आया जब सेक्रेटेरियेट में जामुन का पेड़ तूफान से गिर गया और उसके नीचे एक आदमी दब गया था। सुबह होते ही यह दृश्य देखकर लोग जमा हो गए थे।

🎯 Exam Tip: संवाद के प्रसंग को कहानी के मुख्य घटनाक्रम से जोड़कर समझाना चाहिए। घटनाओं का क्रम स्पष्ट करें।

 

Question क-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था।” इससे लोगों की किस मानसिकता का पता चलता है?
Answer: उपर्युक्त संवाद से हमें लोगों की संवेदनशून्य होती मानसिकता का पता चलता है। जामुन के पेड़ के पास खड़ी भीड़ को उसके नीचे दबे व्यक्ति से कोई सहानुभूति नहीं होती उल्टे वे उस पेड़ के लगे जामुनों को याद कर शोक प्रकट करते हैं जिससे पता चलता है कि किस प्रकार लौग स्वार्थी और संवेदनशून्य होते जा रहे हैं।
In simple words: यह संवाद दिखाता है कि लोग कितने असंवेदनशील और स्वार्थी हो गए हैं। उन्हें पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति की बजाय गिरे हुए पेड़ के फल की चिंता है।

🎯 Exam Tip: लोगों की मानसिकता का विश्लेषण करते समय संवेदनहीनता और स्वार्थ जैसे प्रमुख गुणों को उजागर करें।

 

Question ख-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “अगर पेड़ नहीं काटा जा सकता तो इस आदमी को ही काटकर निकाल लिया जाए।” जामुन के पेड़ का मामला हार्टीकल्चर विभाग तक कैसे पहुँचा?
Answer: सेक्रेटेरियेट के लॉन में लगा पेड़ आँधी के कारण रात में गिर पड़ा और उसके नीचे एक आदमी दब गया। वह पेड़ कृषि विभाग के अंतर्गत था परंतु कृषि विभाग ने उसके फलदार पेड़ होने के कारण जामुन के पेड़ का मामला हार्टीकल्चर विभाग को भेज दिया।
In simple words: तूफान से पेड़ गिरने और आदमी दबने के बाद, कृषि विभाग ने इसे हार्टीकल्चर विभाग को भेज दिया क्योंकि पेड़ फलदार था, और वे उसे काटने का निर्णय नहीं लेना चाहते थे।

🎯 Exam Tip: विभागों के बीच जिम्मेदारी के हस्तांतरण का कारण स्पष्ट करें। पेड़ के फलदार होने का उल्लेख महत्वपूर्ण है।

 

Question ख-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “अगर पेड़ नहीं काटा जा सकता तो इस आदमी को ही काटकर निकाल लिया जाए।” हार्टीकल्चर विभाग ने जामुन के पेड़ काटने से मना क्यों किया?
Answer: हार्टीकल्चर विभाग के सेक्रेटेरी का कहना था कि उनका विभाग आज जहाँ पेड़ लगाओ की स्कीम ऊँचें स्तर पर चला रही है वहाँ पर जामुन के इस फलदार पेड़ को काटने की अनुमति उसके विभाग द्वारा कभी भी नहीं दी जा सकती।
In simple words: हार्टीकल्चर विभाग ने पेड़ काटने से मना कर दिया क्योंकि उनका विभाग 'पेड़ लगाओ' अभियान चला रहा था और वे एक फलदार पेड़ को काटने की अनुमति नहीं दे सकते थे।

🎯 Exam Tip: हार्टीकल्चर विभाग के इनकार के पीछे की नीति (पेड़ लगाओ स्कीम) को सटीक रूप से बताएं।

 

Question ख-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “अगर पेड़ नहीं काटा जा सकता तो इस आदमी को ही काटकर निकाल लिया जाए।” उपर्युक्त कथन से हमें लोगों की किस मानसिकता का पता चलता है?
Answer: उपर्युक्त कथन से हमें लोगों की संवेदनशून्य होती मानसिकता का पता चलता है। जामुन के पेड़ के पास खड़ी भीड़ को उसके नीचे दबे व्यक्ति से कोई सहानुभूति नहीं होती उल्टे वे उस व्यक्ति का मजाक उड़ाते हैं। वे ये भी नहीं सोचते कि इस तरह के मजाक से व्यक्ति को कितनी तकलीफ हो रही होगी कि जब आप किसी जिंदा व्यक्ति को काटने की बात कर रहे हो।
In simple words: यह कथन समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है, जहाँ लोग दबे हुए व्यक्ति की पीड़ा को समझे बिना, उसे काटने जैसी क्रूर बात कहकर मजाक उड़ा रहे हैं।

🎯 Exam Tip: लोगों की असंवेदनशील और क्रूर मानसिकता को उजागर करें, जहाँ मानवीय जीवन का मूल्य कम आंका जा रहा है।

 

Question ख-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : अब क्या किया जाए? इस पर एक मनचले ने कहा - “अगर पेड़ नहीं काटा जा सकता तो इस आदमी को ही काटकर निकाल लिया जाए।” प्रस्तुत अवतरण का संदर्भ स्पष्ट करें।
Answer: सेक्रेटेरियेट के लॉन में लगा पेड़ आँधी के कारण रात में गिर पड़ा और उसके नीचे एक आदमी दब गया। और उस पेड़ को हार्टीकल्चर विभाग ने काटने से मना कर दिया तब उपर्युक्त संवाद वहाँ पर खड़े एक मनचले और असंवेदनशील आदमी द्वारा कहा गया है।
In simple words: यह संवाद तब आया जब जामुन का पेड़ गिरने से आदमी दब गया और हार्टीकल्चर विभाग ने पेड़ काटने से मना कर दिया था। तब एक असंवेदनशील व्यक्ति ने यह क्रूर सुझाव दिया।

🎯 Exam Tip: अवतरण के संदर्भ को कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ से जोड़कर समझाएं, जिसमें विभागों की असंवेदनशीलता और एक व्यक्ति की क्रूरता शामिल है।

 

Question ग-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “मगर एक आदमी की जान का सवाल है।” उपर्युक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट करें।
Answer: जब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के आदमी आरी, कुल्हाड़ी लेकर पहुँचे तो उन्हें पेड़ काटने से रोक दिया गया। मालूम हुआ कि विदेश-विभाग से हुक्म आया था कि इस पेड़ को न काटा जाए करण यह था, कि इस पेड़ को दस वर्ष पूर्व पिटोनिया राज्य के प्रधानमंत्री ने लगाया था। अब यदि इस पेड़ को काटा गया तो पिटोनिया सरकार से हमारे देश के संबंध सदा के लिए बिगड़ सकते थे। इसी बात के संदर्भ में एक क्लर्क ने चिल्लाते हुए इस कथन को कहा।
In simple words: यह कथन तब कहा गया जब विदेश-विभाग ने पेड़ काटने से रोक दिया, क्योंकि इसे पिटोनिया के प्रधानमंत्री ने लगाया था और इसे काटने से दोनों देशों के संबंध खराब हो सकते थे।

🎯 Exam Tip: कथन के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और मानवीय जीवन के बीच के संघर्ष को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question ग-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “मगर एक आदमी की जान का सवाल है।" विदेश विभाग ने पेड़ न काटने का हुक्म क्यों दिया?
Answer: पेड़ को दस वर्ष पूर्व पिटोनिया राज्य के प्रधानमंत्री ने सेक्रेटेरियट के लॉन में लगाया था। अब यदि इस पेड़ को काटा गया तो पिटोनिया सरकार से हमारे देश के संबंध सदा के लिए बिगड़ सकते थे। इस कारण विदेश विभाग ने पेड़ न काटने का हुक्म दिया।
In simple words: विदेश विभाग ने पेड़ काटने से मना किया क्योंकि इसे पिटोनिया के प्रधानमंत्री ने लगाया था और इसे काटने से दोनों देशों के संबंध खराब हो सकते थे।

🎯 Exam Tip: विदेश विभाग के निर्णय का मुख्य कारण- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव- को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question ग-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “मगर एक आदमी की जान का सवाल है।" अंत में पेड़ काटने की अनुमति कैसे मिलती है?
Answer: विदेश विभाग अंत में फाइल लेकर प्रधानमंत्री के पास पहुँचते हैं। प्रधानमंत्री सारी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी अपने सिर पर लेते हुए उस पेड़ को काटने की अनुमति दे देते हैं। अत: इस प्रकार फाइलें कई विभागों से गुजरते हुए अंत में जाकर प्रधानमंत्री द्वारा स्वीकृत होती है।
In simple words: अंत में, यह मामला प्रधानमंत्री के पास पहुँचता है, और वे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की जिम्मेदारी लेते हुए पेड़ काटने की अनुमति दे देते हैं।

🎯 Exam Tip: निर्णय लेने की प्रक्रिया के अंतिम चरण (प्रधानमंत्री द्वारा स्वीकृति) और उसके पीछे के कारण को संक्षेप में व्यक्त करें।

 

Question ग-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “मगर एक आदमी की जान का सवाल है।" क्या अंत में उस व्यक्ति को पेड़ के नीचे से निकाल लिया जाता है? यदि नहीं तो क्यों स्पष्ट करें।
Answer: नहीं, अंत में उस व्यक्ति को पेड़ के नीचे से निकाल लिया जाता है क्योंकि सरकारी विभाग के अधिकारी जामुन के पेड़ को हटाने तथा उस व्यक्ति को बचाने की बजाए फाइलें बनाने तथा उन फाइलों को अलग-अलग विभागों में पहुँचाने में लगे हुए थे और अंत में जब तक फैसला आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी।
In simple words: नहीं, व्यक्ति को नहीं निकाला जा सका क्योंकि सरकारी विभागों की लालफीताशाही और देरी के कारण फैसला आने तक बहुत देर हो चुकी थी, और व्यक्ति की मृत्यु हो गई।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर सरकारी कामकाज में देरी और लालफीताशाही के घातक परिणाम पर केंद्रित होना चाहिए।

 

Question घ-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : सुनते हो? आज तुम्हारी फाइल पूर्ण हो गई मगर कवि का हाथ ठंडा था, आँखों की पुतलियाँ निर्जीव और चींटियों की एक लंबी पाँत उसके मुँह में जा रही थी...। यहाँ पर किस फाइल की बात की जा रही है?
Answer: सेक्रेटेरियेट के लॉन में लगे जामुन के पेड़ के नीचे एक व्यक्ति कई दिन से दबा पड़ा-रहता है और उसे वहाँ से निकालने के लिए विभिन्न विभागों से संपर्क किया जाता है और अंत में बात प्रधानमंत्री तक पहुँचती है और उस पेड़ को काटने का निर्णय किया जाता है यहाँ पर इसी फाइल के पूर्ण हो जाने से संबंधित बात की जा रही है।
In simple words: यहाँ उस फाइल की बात हो रही है जिसमें जामुन के पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति को बचाने और पेड़ को काटने की अनुमति के लिए कई विभागों से होते हुए प्रधानमंत्री तक पहुँची थी।

🎯 Exam Tip: फाइल के पूर्ण होने का मतलब है कि लंबी नौकरशाही प्रक्रिया समाप्त हुई, जो व्यक्ति की मौत के बाद हुई। यह बात महत्वपूर्ण है।

 

Question घ-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : सुनते हो? आज तुम्हारी फाइल पूर्ण हो गई मगर कवि का हाथ ठंडा था, आँखों की पुतलियाँ निर्जीव और चींटियों की एक लंबी पाँत उसके मुँह में जा रही थी...। दबे हुए व्यक्ति को इतने दिन पेड़ के नीचे से क्यों नहीं निकाला गया?
Answer: यहाँ पर सरकारी विभाग की अकर्मण्यता की और ध्यान खींचा गया है कि किस तरह हर एक विभाग अपनी जिम्मेदारी से मुकर रहा था। हर एक विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभाग के मत्थे मढ़ने पर लगा हुआ था। इसी कारणवश दबे हुए व्यक्ति को इतने दिन पेड़ के नीचे से नहीं निकाला गया।
In simple words: व्यक्ति को इतने दिन तक इसलिए नहीं निकाला गया क्योंकि सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे थे और एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे थे, जिसके कारण काम में अनावश्यक देरी हुई।

🎯 Exam Tip: सरकारी विभागों की अकर्मण्यता और लालफीताशाही को मुख्य कारण के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question घ-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : सुनते हो? आज तुम्हारी फाइल पूर्ण हो गई मगर कवि का हाथ ठंडा था, आँखों की पुतलियाँ निर्जीव और चींटियों की एक लंबी पाँत उसके मुँह में जा रही थी...। उपर्युक्त कथन का वक्ता कौन है उसका परिचय दें।
Answer: उपर्युक्त कथन का वक्ता सेक्रेटेरियेट में काम करने वाला एक माली है इसी ने सबसे पहले कवि के पेड़ के नीचे दबे होने की बात बताई थी। पूरी कहानी में चपरासी ही अकेला ऐसा व्यक्ति था जिसे कवि के प्रति सहानुभूति और चिंता थी।
In simple words: इस कथन का वक्ता माली है, जिसने सबसे पहले दबे हुए व्यक्ति को देखा था। वह कहानी में एकमात्र व्यक्ति है जिसे उस व्यक्ति के प्रति वास्तविक सहानुभूति थी।

🎯 Exam Tip: वक्ता की पहचान और उसके मानवीय पक्ष को उजागर करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह कहानी का एकमात्र संवेदनशील पात्र है।

 

Question घ-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : सुनते हो? आज तुम्हारी फाइल पूर्ण हो गई मगर कवि का हाथ ठंडा था, आँखों की पुतलियाँ निर्जीव और चींटियों की एक लंबी पाँत उसके मुँह में जा रही थी...। प्रस्तुत कथन का आशय स्पष्ट करें।
Answer: प्रस्तुत कथन का आशय सरकारी विभागों की अकर्मण्यता से है। यहाँ पर लेखक के कहने का तात्पर्य यह है कि लोग कितने असंवेदनशील हो गए है किसी को भी पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति के बारे में चिंता नहीं थी। सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे थे और पेड़ को न हटवाने का दोष एक दूसरे पर मढ़ रहे थे और सरकारी विभागों की इस देरी की वजह से उस आदमी की मौत हो जाती है।
In simple words: इस कथन का अर्थ है कि सरकारी विभागों की लापरवाही और लोगों की असंवेदनशीलता के कारण, दबे हुए व्यक्ति को समय पर सहायता नहीं मिली, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

🎯 Exam Tip: कथन के गहरे अर्थ को उजागर करें, जिसमें सरकारी तंत्र की विफलता और मानवीय संवेदनशीलता के अभाव को मुख्य बिंदु के रूप में दर्शाया गया है।

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