ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 7.2 Sandeh Solutions

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Question क-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
ऐसो कौ उदार जग माहीं।
बिनु सेवा जो द्रवे दीन पर, राम सरस कोउ नाहीं॥
जो गति जोग बिराग जतन करि नहिं पावत मुनि ज्ञानी।
सो गति देत गीध सबरी कहँ प्रभु न बहुत जिय जानी ॥
जो संपति दस सीस अरप करि रावन सिव पहँ लीन्हीं।
सो संपदा विभीषण कहँ अति सकुच सहित हरि दीन्ही॥
तुलसीदास सब भांति सकल सुख जो चाहसि मन मेरो।
तौ भजु राम, काम सब पूरन करहि कृपानिधि तेरो॥
तुलसीदासजी किसके भजन के लिए कह रहे हैं?

Answer: तुलसीदासजी भगवान श्री राम के भजन के लिए कह रहे हैं।
In simple words: तुलसीदासजी हमें भगवान श्री राम का भजन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, क्योंकि वे ही सभी सुखों और इच्छाओं को पूरा करने वाले कृपानिधि हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर मुख्य संदेश को पहचानना और उसे संक्षेप में उत्तर देना महत्वपूर्ण है।

Question क-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
ऐसो कौ उदार जग माहीं।
बिनु सेवा जो द्रवे दीन पर, राम सरस कोउ नाहीं॥
जो गति जोग बिराग जतन करि नहिं पावत मुनि ज्ञानी।
सो गति देत गीध सबरी कहँ प्रभु न बहुत जिय जानी॥
जो संपति दस सीस अरप करि रावन सिव पहँ लीन्हीं।
सो संपदा विभीषण कहँ अति सकुच सहित हरि दीन्ही॥
तुलसीदास सब भांति सकल सुख जो चाहसि मन मेरो।
तौ भजु राम, काम सब पूरन करहि कृपानिधि तेरो ॥
श्री राम ने परम गति किस-किस को प्रदान की?

Answer: श्री राम ने जटायु जैसे सामान्य गीध पक्षी और शबरी जैसी सामान्य स्त्री को परम गति प्रदान की।
In simple words: भगवान राम ने अपनी कृपा से जटायु और शबरी जैसे साधारण प्राणियों को भी मोक्ष प्रदान किया, जो दर्शाता है कि वे सभी पर समान रूप से कृपालु हैं।

🎯 Exam Tip: उद्धरण में वर्णित विशिष्ट उदाहरणों को पहचानना और उनका सही उल्लेख करना अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।

Question क-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
ऐसो कौ उदार जग माहीं।
बिनु सेवा जो द्रवे दीन पर, राम सरस कोउ नाहीं॥
जो गति जोग बिराग जतन करि नहिं पावत मुनि ज्ञानी।
सो गति देत गीध सबरी कहँ प्रभु न बहुत जिय जानी॥
जो संपति दस सीस अरप करि रावन सिव पहँ लीन्हीं।
सो संपदा विभीषण कहँ अति सकुच सहित हरि दीन्ही॥
तुलसीदास सब भांति सकल सुख जो चाहसि मन मेरो।
तौ भजु राम, काम सब पूरन करहि कृपानिधि तेरो॥
रावण को कैसे वैभव प्राप्त हुआ?

Answer: रावण ने भगवान शंकर को अपने दस सिर अर्पण करके वैभव की प्राप्ति की।
In simple words: रावण को धन और ऐश्वर्य भगवान शिव की आराधना और अपने दस सिरों के बलिदान के माध्यम से मिला था।

🎯 Exam Tip: प्रश्न के मुख्य बिन्दु को पहचानें और गद्यांश में दिए गए विवरण के आधार पर सटीक उत्तर दें।

Question क-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
ऐसो कौ उदार जग माहीं।
बिनु सेवा जो द्रवे दीन पर, राम सरस कोउ नाहीं॥
जो गति जोग बिराग जतन करि नहिं पावत मुनि ज्ञानी।
सो गति देत गीध सबरी कहँ प्रभु न बहुत जिय जानी॥
जो संपति दस सीस अरप करि रावन सिव पहँ लीन्हीं।
सो संपदा विभीषण कहँ अति सकुच सहित हरि दीन्ही॥
तुलसीदास सब भांति सकल सुख जो चाहसि मन मेरो।
तौ भजु राम, काम सब पूरन करहि कृपानिधि तेरो॥
राम ने कौन-सी संपत्ति विभीषण को दे दी?

Answer: रावण ने जो संपत्ति अपने दस सिर अर्पण करके प्राप्त की थी उसे श्री राम ने अत्यंत संकोच के साथ विभीषण को दे दी।
In simple words: भगवान राम ने वही संपत्ति विभीषण को प्रदान की, जो रावण ने अपने दस सिरों का बलिदान करके प्राप्त की थी, लेकिन उन्होंने यह अत्यंत सरलता और बिना किसी संकोच के किया।

🎯 Exam Tip: गद्यांश के मुख्य पात्रों और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से जोड़ना उत्तर की सटीकता बढ़ाता है।

Question ख-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जाके प्रिय न राम वैदेही
तजिए ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही।
सो छोड़िये
तज्यो पिता प्रहलाद, विभीषन बंधु, भरत महतारी।
बलिगुरु तज्यो कंत ब्रजबनितन्हि, भये मुद मंगलकारी।
नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसेव्य जहां लौं।
अंजन कहां आंखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहां लौं।
तुलसी सो सब भांति परमहित पूज्य प्रान ते प्यारो।
जासों हाय सनेह राम-पद, एतोमतो हमारो।।
कवि के अनुसार हमें किसका त्याग करना चाहिए?

Answer: कवि के अनुसार जिन लोगों के प्रिय राम-जानकी जी नहीं है उनका त्याग करना चाहिए।
In simple words: तुलसीदासजी कहते हैं कि जिस व्यक्ति को भगवान राम और सीता प्रिय नहीं हैं, उसे तुरंत त्याग देना चाहिए, भले ही वह कितना भी करीबी क्यों न हो।

🎯 Exam Tip: काव्यांश के मूल भाव को समझना और कवि के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना आवश्यक है।

Question ख-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जाके प्रिय न राम वैदेही
तजिए ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही।
सो छोड़िये तज्यो पिता प्रहलाद, विभीषन बंधु, भरत महतारी।
बलिगुरु तज्यो कंत ब्रजबनितन्हि, भये मुद मंगलकारी।
नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसेव्य जहां लौं।
अंजन कहां आंखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहां लौं।
तुलसी सो सब भांति परमहित पूज्य प्रान ते प्यारो।
जासों हाय सनेह राम-पद, एतोमतो हमारो।।
उदाहरण देकर लिखिए किन लोगों ने भगवान के प्यार में अपनों को त्यागा।

Answer: प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकशिपु को, विभीषण ने अपने भाई रावण को, बलि ने अपने गुरु शुक्राचार्य को और ब्रज की गोपियों ने अपने-अपने पतियों को भगवान प्राप्ति को बाधक समझकर त्याग दिया।
In simple words: कई भक्तों ने भगवान के प्रेम के लिए अपने परिजनों और संबंधों का त्याग किया, जैसे प्रह्लाद ने पिता का, विभीषण ने भाई का, बलि ने गुरु का, और गोपियों ने पतियों का।

🎯 Exam Tip: काव्यांश में दिए गए सभी उदाहरणों को सूचीबद्ध करना और उनके त्याग के कारण को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

Question ख-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जाके प्रिय न राम वैदेही
तजिए ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही।
सो छोड़िये तज्यो पिता प्रहलाद, विभीषन बंधु, भरत महतारी।
बलिगुरु तज्यो कंत ब्रजबनितन्हि, भये मुद मंगलकारी।
नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसेव्य जहां लौं।
अंजन कहां आंखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहां लौं।
तुलसी सो सब भांति परमहित पूज्य प्रान ते प्यारो।
जासों हाय सनेह राम-पद, एतोमतो हमारो।।
जिस अंजन को लगाने से आँखें फूट जाएँ क्या वो काम का होता है?

Answer: नहीं जिस अंजन को लगाने से आँखें फूट जाएँ वो किसी काम का नहीं होता है।
In simple words: जिस काजल को लगाने से आँखों की रोशनी चली जाए, वह किसी भी काम का नहीं होता, बल्कि हानिकारक होता है।

🎯 Exam Tip: काव्यांश में प्रयुक्त उपमाओं और प्रतीकों का अर्थ समझना और उन्हें प्रश्न के संदर्भ में स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

Question ख-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जाके प्रिय न राम वैदेही
तजिए ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही।
सो छोड़िये तज्यो पिता प्रहलाद, विभीषन बंधु, भरत महतारी।
बलिगुरु तज्यो कंत ब्रजबनितन्हि, भये मुद मंगलकारी।
नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुseव्य जहां लौं।
अंजन कहां आंखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहां लौं।
तुलसी सो सब भांति परमहित पूज्य प्रान ते प्यारो।
जासों हाय सनेह राम-पद, एतोमतो हमारो।।
उपर्युक्त पद द्वारा तुलसीदास क्या संदेश दे रहे हैं?

Answer: उपर्युक्त पद द्वारा तुलसीदास श्री राम की भक्ति का संदेश दे रहे है। तथा भगवान प्राप्ति के लिए त्याग करने को भी प्रेरित कर रहे हैं।
In simple words: तुलसीदासजी इस पद के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि श्री राम की भक्ति ही सर्वोपरि है, और भगवान की प्राप्ति के लिए किसी भी संबंध या वस्तु का त्याग करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कवि के केंद्रीय विचार और उसके निहितार्थों को स्पष्ट रूप से संक्षिप्त वाक्यों में प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 07.2 Sandeh

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