ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions

Official ICSE Solutions for Class 10 Hindi: Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri

Explore reliable textbook solutions for Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri tailored for Class 10 learners. Utilizing these Hindi answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final ICSE evaluations.

Chapter-wise Solutions for Hindi: Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri

Access the complete solution PDF for Class 10 Hindi below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

Question क-i: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुना त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली पग-पग छहर रही है।
वह पुण्य भूमि मेरी, वह स्वर्ण भूमि मेरी।
कवि किस भूमि की बात कर रहा है?

Answer: कवि अपनी जन्मभूमि भारतमाता की बात कर रहा है।
In simple words: कवि भारत की उस पवित्र भूमि के बारे में बात कर रहा है जिसे वह अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि मानता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में पद्यांश को ध्यान से पढ़कर सीधे प्रश्न का उत्तर दें, अनावश्यक व्याख्या से बचें।

Question क-ii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुना त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली पग-पग छहर रही है।
वह पुण्य भूमि मेरी, वह स्वर्ण भूमि मेरी।
कवि ने हिमालय के बारे में क्या कहा है?

Answer: कवि कहते है कि हिमालय इतना ऊँचा है मानो आसमान को चूम रहा है। वह हमारे भारत की रक्षा करता है।
In simple words: कवि के अनुसार, हिमालय इतना विशाल है कि वह आकाश को छूता हुआ प्रतीत होता है और भारत देश की सुरक्षा करता है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में वर्णित प्राकृतिक तत्वों के विशेषणों और उनके कार्यों को रेखांकित करें।

Question क-iii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुना त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली पग-पग छहर रही है।
वह पुण्य भूमि मेरी, वह स्वर्ण भूमि मेरी।
त्रिवेणी नदियों के नाम लिखिए।

Answer: गंगा, यमुना और सरस्वती त्रिवेणी नदियाँ है।
In simple words: त्रिवेणी नदियों से तात्पर्य गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम से है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में उल्लिखित विशेष नामों को ध्यान से पहचानें और सूचीबद्ध करें।

Question क-iv: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुना त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली पग-पग छहर रही है।
वह पुण्य भूमि मेरी, वह स्वर्ण भूमि मेरी।

Answer: इस प्रश्न में केवल पद्यांश दिया गया है, कोई विशिष्ट प्रश्न नहीं पूछा गया है।
In simple words: यह पद्यांश भारत की महिमा और प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करता है, जहाँ हिमालय, नदियाँ और पुण्यभूमि का चित्रण है।

🎯 Exam Tip: ऐसे मामलों में, यदि कोई प्रश्न नहीं दिया गया है, तो पद्यांश के मुख्य भाव को समझने पर ध्यान दें।

शब्दार्थ लिखिए :

शब्दअर्थ
मातृभूमिजन्म भूमि
सिंधुसमुद्र
नितप्रतिदिन
पुण्य भूमिपवित्र भूमि

Question ख-i: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़िया चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
कवि ने भारत के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया है?

Answer: कवि ने भारत के लिए जन्मभूमि, मातृभूमि, धर्मभूमि तथा कर्मभूमि विशेषणों का प्रयोग किया है।
In simple words: कवि ने भारत को ऐसी भूमि बताया है जहाँ हमारा जन्म हुआ, जहाँ हम पले-बढ़े, जहाँ धर्म का पालन होता है और जहाँ कर्म किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में प्रयुक्त सभी विशेषणों को ध्यान से पढ़ें और उन्हें सूचीबद्ध करें।

Question ख-ii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़िया चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
झरने कहाँ झरते हैं?

Answer: झरने भारत माता की पवित्र पहाड़ियों पर झरते हैं।
In simple words: पद्यांश के अनुसार, इस भूमि की पहाड़ियों से अनेक झरने बहते हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में पूछे गए स्थान या विशेषता को सीधे पद्यांश से पहचानें और उत्तर दें।

Question ख-iii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
चिड़िया चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
भारत की हवा कैसी है? उसका हम पर क्या प्रभाव होता है?

Answer: भारत में बहने वाली हवा सुगंधित है। यह हमारे तन-मन को सँवारती है।
In simple words: भारत में मलय पवन बहती है जो अत्यंत सुगंधित होती है और शरीर तथा मन दोनों को ताजगी देती है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में वर्णित प्राकृतिक तत्वों के गुणों और उनके प्रभावों पर ध्यान दें।

Question ख-iv: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़िया चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
शब्दार्थ लिखिए :
अमराइयाँ, मलय, पवन

Answer:

शब्दअर्थ
अमराइयाँआम के पेड़ों के बाग
मलयपर्वत का नाम
पवनहवा

In simple words: यह भाग पद्यांश में आए कुछ कठिन शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करता है, जैसे अमराइयाँ आम के बाग होते हैं, मलय एक पर्वत का नाम है, और पवन का अर्थ हवा है।

🎯 Exam Tip: शब्दार्थ के प्रश्नों में, दिए गए शब्दों के सटीक अर्थों को याद करना महत्वपूर्ण है।

Question ग-i: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
कवि भारत की भूमि को पावन क्यों मानते हैं?

Answer: कवि भारत की भूमि को पावन मानते हैं क्योंकि यहाँ राम, सीता, श्रीकृष्ण तथा गौतम जैसे महान अवतार अवतरित हुए थे।
In simple words: भारत की भूमि को पवित्र इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाँ भगवान राम, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध जैसे महान व्यक्तियों ने जन्म लिया और अपने आदर्शों से संसार को प्रकाशित किया।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में उल्लिखित धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले व्यक्तियों को पहचानें, जो भूमि की पवित्रता को दर्शाते हैं।

Question ग-ii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
गौतम कौन थे? उन्होंने क्या उपदेश दिया था?

Answer: गौतम बौद्ध धर्म चलाने वाले महापुरुष थे। उन्होंने जीवों पर दया रखने का उपदेश दिया।
In simple words: गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे जिन्होंने सभी प्राणियों के प्रति दया और अहिंसा का संदेश दिया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तियों से संबंधित प्रश्नों के लिए उनके मुख्य योगदान या शिक्षाओं को याद रखें।

Question ग-iii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
'श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता' - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

Answer: उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि यह वहीं पवन भारत भूमि है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। गोकुल और मथुरा की गोपियों को अपनी मुरली की धुन से मोहित कर दिया था तथा कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि श्रीकृष्ण ने अपनी मधुर बांसुरी से गोकुल और मथुरा की गोपियों को आनंदित किया और महाभारत के युद्ध में अर्जुन को पवित्र गीता का ज्ञान दिया।

🎯 Exam Tip: पंक्तियों के आशय स्पष्ट करते समय, उसके ऐतिहासिक या पौराणिक संदर्भ को भी शामिल करें।

Question ग-iv: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
शब्दार्थ लिखिए :
रघुपति, वंशी, पुनीत, जंग

Answer:

शब्दअर्थ
रघुपतिभगवान श्री राम
वंशीबांसुरी
पुनीतपवित्र
जंगसंसार

In simple words: यह शब्दार्थ खंड पद्यांश में प्रयुक्त कुछ प्रमुख शब्दों जैसे रघुपति (भगवान राम), वंशी (बांसुरी), पुनीत (पवित्र) और जंग (संसार) के अर्थों को स्पष्ट करता है।

🎯 Exam Tip: शब्दार्थ लिखते समय, शब्दों के सटीक और प्रासंगिक अर्थों का उपयोग करें जो पद्यांश के संदर्भ में सही हों।

Hindi Class 10 Curriculum Solutions: Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri

Official ICSE Solutions for Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri

Explore reliable textbook solutions for Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri tailored for Class 10 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official ICSE standards for Hindi.

Step-by-Step Explanations for Sahitya Sagar Chapter 04.2 Vah Janmabhumi Meri

Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 10 Hindi module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for ICSE exams.

Next Steps in Your Hindi Revision

Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 10 Hindi.

FAQs

Where can I find the latest ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions for the 2026-27 session?

The complete and updated ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Hindi are as per latest ICSE curriculum.

Are the Hindi ICSE solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 ICSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using ICSE language because ICSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Hindi. You can access ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi ICSE solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.2 Vah Janmabhumi Meri Solutions in printable PDF format for offline study on any device.